पपीता सभी के लिए नहीं…. किन्हें इसे खाने से बचना चाहिए, जानिए डॉक्टर की बड़ी सलाह

Last Updated:February 25, 2026, 17:27 IST पपीता एक स्वास्थ्यवर्धक फल है, जो पाचन सुधारने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और कई बीमारियों में फायदेमंद माना जाता है. लेकिन कुछ मामलों में इसका अत्यधिक सेवन या गलत समय पर खाना सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है. गर्भवती महिलाएं, ब्लड थिनर लेने वाले, थायराइड रोगी और किडनी स्टोन के मरीज इसे सीमित मात्रा में या चिकित्सक की सलाह के बाद ही खाएं. इस आर्टिकल में जानिए पपीते के फायदे, नुकसान और सेवन की सावधानियां. पपीता एक स्वास्थ्यवर्धक फल है, लेकिन कुछ लोगों के लिए यह हानिकारक भी हो सकता है. गर्भवती महिलाएं (कच्चा या अधपका पपीता), लेटेक्स एलर्जी वाले, थायराइड रोगी, ब्लड थिनर लेने वाले और किडनी स्टोन के मरीज इसे सावधानी से ही खाएं. अधिक मात्रा में सेवन करने पर यह गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल परेशानी और पेट में मरोड़ का कारण बन सकता है. डॉक्टर रवि आर्य के अनुसार, गर्भावस्था में पूरी तरह पका हुआ पपीता सीमित मात्रा में सुरक्षित और फायदेमंद माना जाता है. वहीं, कच्चा या आधा-पका पपीता बिल्कुल नहीं खाना चाहिए, क्योंकि इसमें मौजूद लेटेक्स और पपेन गर्भपात या समय से पहले प्रसव का कारण बन सकते हैं. कच्चे पपीते और इसके लेटेक्स (सफेद दूध) में पैपेन एंजाइम अधिक मात्रा में पाया जाता है. यह उन लोगों में क्रॉस-रिएक्शन (ओरल एलर्जी सिंड्रोम) पैदा कर सकता है जिन्हें रबर/लेटेक्स से एलर्जी है. इसके सेवन से होंठ या मुंह में सूजन, खुजली, त्वचा पर चकत्ते, सांस लेने में तकलीफ (अस्थमा) जैसी समस्याएं हो सकती हैं, और गंभीर मामलों में एनाफिलेक्टिक शॉक भी हो सकता है. Add News18 as Preferred Source on Google पपीता स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, लेकिन अत्यधिक सेवन से ब्लड शुगर बढ़ने का खतरा हो सकता है. इसलिए प्रति दिन लगभग आधा कप (100-150 ग्राम) या एक छोटी कटोरी ही सीमित मात्रा में खाना चाहिए. इसके अलावा, किसी भी बीमारी से ग्रसित व्यक्ति को चिकित्सक की सलाह के बिना पपीते का सेवन नहीं करना चाहिए. पपीता पाचन के लिए बहुत फायदेमंद है, लेकिन अत्यधिक मात्रा में या कुछ विशिष्ट खाद्यों जैसे दूध, दही, खट्टे फल और हाई-प्रोटीन फूड्स के साथ खाने पर यह पाचन समस्याएं पैदा कर सकता है. इससे दस्त, पेट में ऐंठन, ब्लोटिंग, गैस और एसिडिटी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. अत्यधिक पपीता सेवन से गंभीर रक्त विकार हो सकते हैं. यह खून को बहुत पतला कर सकता है, जिससे रक्तस्राव का खतरा बढ़ जाता है. विशेषकर उन लोगों के लिए जो वारफेरिन जैसी रक्त पतला करने वाली दवाएं ले रहे हैं. इसके अलावा, पपीता रक्त वाहिकाओं की परत को भी प्रभावित कर सकता है. पपीता अधिकांश बीमारियों में फायदेमंद होता है, लेकिन कुछ स्थितियों में इसका सेवन नहीं करना चाहिए. साथ ही, अत्यधिक पपीता खाने से स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ सकता है. इसलिए हमेशा चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही पपीते का सेवन करना चाहिए. First Published : February 25, 2026, 17:15 IST
क्या आप जानते हैं, कौन से फल एक साथ खाने से पहुंचा सकते हैं आपकी सेहत का नुकसान?

अधिकतर लोग सोचते हैं कि फल हमेशा सेहत के लिए अच्छे होते हैं, लेकिन कुछ फलों के संयोजन पाचन को बिगाड़ सकते हैं. कारण यह है कि हर फल की शर्करा, अम्लता और पाचन गति अलग होती है. जब दो असंगत फल साथ खाते हैं, तो शरीर को उन्हें पचाने में कठिनाई होती है और कई बार गैस, अपच, एसिडिटी या स्किन एलर्जी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं. यहां कुछ ऐसे फल संयोजन दिए गए हैं जिन्हें साथ खाने से बचना चाहिए. 1. खरबूजा + कोई भी दूसरा फलखरबूजे (जैसे तरबूज, खरबूजा, किवी-मेलन आदि) को सोलो फ्रूट माना गया है.क्यों? इसकी पानी की मात्रा बहुत अधिक होती है.यह बहुत जल्दी पचता है.दूसरे फलों के साथ खाने पर खरबूजा पेट में ही फर्मेंट हो सकता है, जिससे गैस और पेट दर्द हो सकता है. 2. संतरा + केलासंतरा अम्लीय (acidic) होता है, जबकि केला भारी और मीठा फल है.दोनों एक साथ खाने से, पाचन धीमा हो सकता हैगैस, एसिडिटी और उलझन (nausea) हो सकती है 3. अमरूद + केलायह कॉम्बिनेशन कई लोगों में सिरदर्दपेट भारी होनाकब्जजैसी समस्याएं पैदा कर सकता है.इनकी पाचन गति अलग होती है, जिस कारण पेट में असंतुलन बन जाता है. 4. नींबू या खट्टे फल + पपीतापपीता एंज़ाइम से भरपूर होता है और खट्टे फल अम्लीय होते हैं.दोनों को एक साथ खाने से, पेट में जलनएंज़ाइम की कार्यक्षमता कमएसिड रिफ्लक्स की संभावनाबढ़ सकती है। 5. अंगूर + आमदोनों मीठे फल हैं लेकिन दोनों की शुगर प्रोफाइल और पाचन क्रिया अलग है.साथ खाने से पेट में भारीपन और फर्मेंटेशन की समस्या हो सकती है. 6. सेब + खट्टे फल (संतरा, मौसमी)सेब धीमे पचने वाला फल है, जबकि संतरा और मौसमी तुरंत पचते हैं.इनके संयोजन से पेट में digestive conflict होता है, और गैस बनना आम है. क्यों होता है नुकसान?फलों की पाचन गति अलग होती हैकुछ अम्लीय और कुछ क्षारीय होते हैंमिलकर पेट में फर्मेंटेशन कर सकते हैंशरीर को एक साथ अलग-अलग एंज़ाइम रिलीज़ करने में कठिनाई होती है कौन से फल साथ खा सकते हैं?सभी मिठास वाले फल (सेब, नाशपाती, अंगूर)सभी खट्टे फल (संतरा, मौसमी, अनार)बेरीज़ आपस में सब फल अच्छे हैं, लेकिन हर फल हर फल के साथ नहीं जाता.अगर आप फलों को हेल्दी और बेफ़िक्र होकर खाना चाहते हैं तो एक बार में सिर्फ एक श्रेणी का फल खाएं और खरबूजा/तरबूज हमेशा अलग खाएं.
Pine Fruit Benefits | Pine seed ke fayde | Bageshwar news

Last Updated:February 25, 2026, 17:00 IST चीड़ के फल को ‘स्यूत ठिट’ और बीज को ‘स्यूत’ भी कहते हैं. यह बीज खाने में इतना स्वादिष्ट होता है कि इसकी तुलना सीधा काजू-बादाम से की जाती है. लोकल 18 से बात करते हुए बागेश्वर के किसान रमेश पांडे बताते हैं कि ये हमें बचपन की याद दिलाता है. चीड़ का फल पहले हरा होता है फिर धीरे-धीरे समय के साथ भूरा हो जाता है. इसमें ही बीज बनते हैं, जिसे स्यूत कहा जाता है. खाने में इनका स्वाद हल्का मीठा होता है. मूंगफली की तरह छीलकर खाया जाता है. आयुष चिकित्सक डॉ. एजेल पटेल बताते हैं कि शरीर की कमजोरी को दूर करते हैं. सूजन कम करने में मददगार हैं. बागेश्वर. अगर आप कभी उत्तराखंड आए हैं, तो रास्ते में बहुत सारे चीड़ के पेड़ जरूर देखे होंगे. लेकिन क्या आपको पता है कि चीड़ का बीज कितना स्वादिष्ट होता है. उत्तराखंड की लोकल लैंग्वेज में चीड़ के फल को ‘स्यूत ठिट’ और बीज को ‘स्यूत’ बोला जाता है. यह बीज खाने में इतना स्वादिष्ट होता है कि इसकी तुलना काजू-बादाम से की जाती है. बागेश्वर के किसान रमेश पांडे लोकल 18 से बताते हैं कि बताया कि बचपन में जब वे गांव में रहा करते थे, तो वे इन बीजों को खूब खाते थे. चीड़ का फल पहले हरा होता है, धीरे-धीरे समय के साथ यह भूरा हो जाता है, और इसके अंदर चीड़ के बीज बनते हैं, जिसे स्यूत कहा जाता है. जब पतझड़ का मौसम आता है, तो इसका फल खुद जमीन पर गिरता है. इससे चीड़ का बीज निकलता है. उत्तराखंड में गांव के बच्चे आज भी इन बीजों को इकट्ठा करते हैं और इसे खाते हैं. इन बीजों से आज भी बचपन की यादें जुड़ी हैं. खाने में इनका स्वाद हल्का मीठा होता है. इन्हें मूंगफली की तरह छीलकर खाना पड़ता है. चीड़ के बीजों को इकट्ठा करना बड़ी मेहनत का काम है. इसलिए यह स्वादिष्ट और पौष्टिक के साथ-साथ आयुर्वेदिक गुणों से भरपूर होने के बावजूद भी बाजार में अपनी अच्छी पकड़ नहीं बन पाया है, क्योंकि इसे इकट्ठा करना बेहद ही मुश्किल का काम है. इसका बनना और बिगड़ना पूरी तरीके से नेचर पर डिपेंड रहता है. जिस कारण इसे जरूरत के हिसाब से इकट्ठा नहीं किया जा सकता है. चीड़ के फल में बीज लंबे समय तक भी कम टिक पाता है. कितने फायदे आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. एजेल पटेल बताते हैं कि चीड़ के बीजों में विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर की कमजोरी को दूर करते हैं, सूजन कम करने में मददगार होते हैं. कफ कोल्ड से राहत देते हैं. इम्युनिटी को बढ़ाते हैं, इनमें एंटीसेप्टिक गुण होते हैं. इनका इस्तेमाल पारंपरिक रूप से घाव, त्वचा संक्रमण और दर्द में किया जाता है. About the Author Priyanshu Gupta Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें Location : Bageshwar,Bageshwar,Uttarakhand First Published : February 25, 2026, 17:00 IST
'बड़े नेता-अफसर समुदाय विशेष को टारगेट नहीं कर सकते':सुप्रीम कोर्ट ने कहा- धर्म या जाति के आधार पर बदनाम करने का अधिकार नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि ऊंचे संवैधानिक पदों पर बैठे नेता-अफसर किसी समुदाय को धर्म-जाति, भाषा और क्षेत्र के आधार पर निशाना नहीं बना सकते। कोर्ट ने कहा कि ऐसा करना संविधान के खिलाफ है। किसी भी माध्यम से समुदाय को बदनाम करना अस्वीकार्य है। कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुसार राज्य या गैर-राज्य अभिनेता सहित कोई भी व्यक्ति भाषण, मीम, कार्टून या दृश्य कला जैसे किसी भी माध्यम से किसी समुदाय को बदनाम या अपमानित नहीं कर सकता। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जवल भुयान की बेंच ने नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने वाली फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ पर रोक की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए अलग से यह टिप्पणी की। बेंच ने 19 फरवरी को फिल्म निर्माता नीरज पांडे के हलफनामे को रिकॉर्ड में लेकर याचिका खत्म कर दी। अदालत ने उम्मीद जताई कि विवाद अब खत्म हो जाएगा। जस्टिस भुयान ने अपने 39 पन्नों के अलग फैसले में कहा कि संविधान की प्रस्तावना में सभी नागरिकों के बीच भाईचारा बढ़ाने और देश की एकता व अखंडता बनाए रखने का वादा किया गया है। मामले से जुड़ी पिछली सुनवाई- 19 फरवरी : SC के आदेश पर ‘घूसखोर पंडत’ नाम हटाया गया, नीरज पांडेय बोले- नया टाइटल अभी तय नहीं मनोज बाजपेयी की फिल्म घूसखोर पंडत का नाम बदल दिया गया है। फिल्ममेकर नीरज पांडेय ने सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट दाखिल करके इसकी जानकारी दी। जिसमें बताया गया कि फिल्म का विवादित टाइटल हटा दिया गया है। अब इसका कहीं इस्तेमाल नहीं होगा। नया नाम अभी तय नहीं हुआ है, लेकिन जो भी रखा जाएगा, वह पुराने नाम जैसा या उससे मिलता-जुलता नहीं होगा। पूरी खबर पढ़ें… 3 फरवरी को टीजर के साथ फिल्म के नाम का ऐलान हुआ था नेटफ्लिक्स ने 3 फरवरी 2026 को मनोज बाजपेयी की ‘घूसखोर पंडत’ का ऐलान भी टीजर रिलीज करके किया गया था। लेकिन जैसे ही इसका टीजर जारी किया गया तो इसके टाइटल को लेकर विवाद शुरू हो गया है। लोग सड़कों पर उतर गए। इसके बाद यह मामला कोर्ट तक पहुंच गया। ब्राह्मण समाज ने फिल्म का विरोध किया अलग-अलगह जगहों पर ब्राह्मण समाज ने नेटफ्लिक्स की ‘घूसखोर पंडत’ के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। इसके अलावा मुंबई के वकील आशुतोष दुबे का आरोप है कि ‘पंडत’ जैसे सम्मानजनक शब्द को भ्रष्टाचार के साथ जोड़ना न केवल गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि इससे पूरे समुदाय की गरिमा को ठेस पहुंचती है। नोटिस में कहा गया है कि यह फिल्म जानबूझकर एक समुदाय की छवि को खराब करने की कोशिश कर रही है।
कर्मचारी के वेतन के लिए PWD कार्यालय का सामान कुर्क:38 लाख के वेतन, एरियर का भुगतान होना था; SDO की कार भी शामिल

गुना में एक रिटायर्ड कर्मचारी को उसका हक और एरियर न देना लोक निर्माण विभाग (PWD) को भारी पड़ गया। बुधवार दोपहर कोर्ट के सख्त आदेश पर PWD कार्यालय में कुर्की की बड़ी कार्रवाई की गई। न्यायालय की टीम ने SDO की कार से लेकर ऑफिस के कंप्यूटर, कुर्सियां और पंखे तक कुर्क कर लिए। रिटायर्ड क्लर्क कौशल किशोर राठौर ने 1995 से सुप्रीम कोर्ट तक केस लड़कर यह जीत हासिल की है, जिसके तहत विभाग से करीब 36.68 लाख रुपए की वसूली की जानी है। PWD से 30 दिसंबर 2025 को रिटायर हुए LDC कौशल किशोर राठौर ने बताया कि विभाग ने उन्हें उनके पद के अनुरूप वेतन नहीं दिया था। अपने हक और वेतन के लिए उन्होंने साल 1995 में कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। लोअर कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक उन्होंने यह लंबी कानूनी लड़ाई जीती। विभाग ने 2013 तक के एरियर का भुगतान तो कर दिया था, लेकिन 2014 से रिटायरमेंट तक का लगभग 40 लाख का भुगतान लटकाए रखा। हाईकोर्ट में लगाई अवमानना याचिका, 36.68 लाख की वसूली राठौर ने बताया कि वेतन वसूली के लिए उन्होंने 2018 में कोर्ट में इजरा (निष्पादन याचिका) लगाया था। इसके बावजूद PWD ने भुगतान नहीं किया, तो उन्होंने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल कर दी। इस पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने 6 महीने में वसूली के आदेश लोअर कोर्ट को दिए। जिला न्यायालय के जिला नाजिर राकेश शर्मा ने बताया कि प्रथम व्यवहार न्यायाधीश (वरिष्ठ खंड) मधुलिका मुले के न्यायालय से 36.68 लाख रुपए की वसूली के आदेश हुए थे, जिसके पालन में यह कार्रवाई की गई है। SDO की गाड़ी और ऑफिस का सारा सामान कुर्क बुधवार दोपहर न्यायालय की टीम अचानक PWD कार्यालय पहुंची, जिससे वहां हड़कंप मच गया। टीम ने कार्यालय में रखा जो भी सामान मिला— कंप्यूटर, कुर्सी, टेबल, पंखे— सब कुछ अपने कब्जे में ले लिया। इसके अलावा PWD के SDO की गाड़ी को भी कुर्क किया गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि चल संपत्ति कुर्क की जा रही है, और अगर इन सब से पैसा पूरा नहीं होता है, तो आगे कार्यालय की बिल्डिंग और जमीन को भी कुर्क किया जाएगा।
प्राइवेट जेट अब बिना ब्रोकर 30 सेकंड में बुकिंग करें:‘रिवर्स ऑक्शन’ मॉडल से विमान मालिक खुद घटा रहे हैं दाम, छिपे खर्चों से छुटकारा

प्राइवेट एविएशन यानी निजी विमानन का क्षेत्र अब डिजिटल क्रांति की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। जो काम पहले घंटों और दिनों की बातचीत के बाद होता था, वह अब स्मार्टफोन के एक क्लिक पर सिमट गया है। फ्लाईहाउस, जेटली और लेवो डॉट एयरो जैसे नए स्टार्टअप के साथ व्हील्स अप और एक्सओ जैसे पुराने खिलाड़ी ऐसे एप लेकर आए हैं, जो महज 30 सेकंड में प्राइवेट जेट बुक करने का वादा करते हैं। एविएशन एक्सपर्ट के मुताबिक पारंपरिक रूप से प्राइवेट जेट बुक करना एक सिरदर्द भरा काम रहा है। इसमें किसी ब्रोकर को कॉल करना, बजट पर चर्चा करना और फिर ब्रोकर द्वारा एयरक्राफ्ट मालिकों से संपर्क करने की लंबी प्रक्रिया होती थी। इसमें कई बार सही विमान ढूंढने में कई दिन तक लग जाते थे और कीमतें भी पारदर्शी नहीं होती थीं। नए एप्स इस पूरी प्रक्रिया से ‘मिडलमैन’ यानी ब्रोकर को हटा रहे हैं। फ्लाईहाउस के फाउंडर सैनफोर्ड मिचेलमैन कहते हैं, ‘अब कोई दूसरा मेरे लिए विमान नहीं चुन रहा है। मेरे पास रियल-टाइम में ढेरों विकल्प हैं और चूंकि ब्रोकर की फीस नहीं है, इसलिए कीमतें भी कम हैं।’ कंपनी ने एक ‘रिवर्स ऑक्शन’ मॉडल पेश किया है, जहां विमान मालिक बिजनेस पाने के लिए अपनी कीमतें कम करते हैं, जिसे यूजर लाइव देख सकते हैं। डिजिटल क्रांति के बावजूद, कुछ विशेषज्ञ अब भी पुराने तरीके को बेहतर मानते हैं।’ प्राइवेट जेट कार्ड कंपैरिजन के संपादक डग गोलन का कहना है कि एक अनुभवी ब्रोकर विमान की बारीकियों के बारे में एप से बेहतर जानकारी दे सकता है। बड़ी सुविधा, पूरी फ्लाइट नहीं, सिर्फ एक सीट भी बुक करने की आजादी फ्रेंडशेयर- फ्लाई हाउस का नया फीचर यूजर्स को समान रुचि वाले लोगों के साथ मिलकर पूरी फ्लाइट के बजाय सिर्फ पसंद की सीटें बुक करने की सुविधा देता है। एक्सओ का नेटवर्क – विस्टा ग्लोबल की यूनिट 2,000 से अधिक विमानों के डेटा और एल्गोरिदम का उपयोग करती है, जिससे वे 96% सटीक और गारंटीड कीमतें दे पाते हैं। हाइब्रिड मॉडल- व्हील्स अप ने अपने एप में निजी जेट के साथ कमर्शियल उड़ानों को भी जोड़ दिया है, ताकि सदस्य अपनी जरूरत के हिसाब से यात्रा चुन सकें। बुकिंग से पहले एआई अब फ्यूल कैपेसिटी, एयरपोर्ट नियम जांच रहा एलीवेट जेट जैसी कंपनियां बुकिंग प्रक्रिया में एआई का इस्तेमाल कर रही हैं। यह सिस्टम न केवल विमान बुक करता है, बल्कि यह भी जांचता है कि वह विमान उस खास रूट पर उड़ान भर सकता है या नहीं। इसमें ईंधन की क्षमता, क्रू की सीमा और एयरपोर्ट की पाबंदियों का रियल-टाइम डेटा विश्लेषण किया जाता है। कंपनी के सीईओ ग्रेग रैफ के मुताबिक, ‘हम उन पेचीदगियों को पहले ही पकड़ लेते हैं जो अक्सर ब्रोकर छिपा जाते हैं।’
प्राइवेट जेट अब बिना ब्रोकर 30 सेकेंड में बुक करें:‘रिवर्स ऑक्शन’ मॉडल से विमान मालिक खुद घटा रहे हैं दाम, छिपे खर्चों से छुटकारा

प्राइवेट एविएशन यानी निजी विमानन का क्षेत्र अब डिजिटल क्रांति की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। जो काम पहले घंटों और दिनों की बातचीत के बाद होता था, वह अब स्मार्टफोन के एक क्लिक पर सिमट गया है। फ्लाईहाउस, जेटली और लेवो डॉट एयरो जैसे नए स्टार्टअप के साथ व्हील्स अप और एक्सओ जैसे पुराने खिलाड़ी ऐसे एप लेकर आए हैं, जो महज 30 सेकेंड में प्राइवेट जेट बुक करने का वादा करते हैं। एविएशन एक्सपर्ट के मुताबिक पारंपरिक रूप से प्राइवेट जेट बुक करना एक सिरदर्द भरा काम रहा है। इसमें किसी ब्रोकर को कॉल करना, बजट पर चर्चा करना और फिर ब्रोकर द्वारा एयरक्राफ्ट मालिकों से संपर्क करने की लंबी प्रक्रिया होती थी। इसमें कई बार सही विमान ढूंढने में कई दिन तक लग जाते थे और कीमतें भी पारदर्शी नहीं होती थीं। नए एप्स इस पूरी प्रक्रिया से ‘मिडलमैन’ यानी ब्रोकर को हटा रहे हैं। फ्लाईहाउस के फाउंडर सैनफोर्ड मिचेलमैन कहते हैं, ‘अब कोई दूसरा मेरे लिए विमान नहीं चुन रहा है। मेरे पास रियल-टाइम में ढेरों विकल्प हैं और चूंकि ब्रोकर की फीस नहीं है, इसलिए कीमतें भी कम हैं।’ कंपनी ने एक ‘रिवर्स ऑक्शन’ मॉडल पेश किया है, जहां विमान मालिक बिजनेस पाने के लिए अपनी कीमतें कम करते हैं, जिसे यूजर लाइव देख सकते हैं। डिजिटल क्रांति के बावजूद, कुछ विशेषज्ञ अब भी पुराने तरीके को बेहतर मानते हैं।’ प्राइवेट जेट कार्ड कंपैरिजन के संपादक डग गोलन का कहना है कि एक अनुभवी ब्रोकर विमान की बारीकियों के बारे में एप से बेहतर जानकारी दे सकता है। बड़ी सुविधा, पूरी फ्लाइट नहीं, सिर्फ एक सीट भी बुक करने की आजादी फ्रेंडशेयर- फ्लाई हाउस का नया फीचर यूजर्स को समान रुचि वाले लोगों के साथ मिलकर पूरी फ्लाइट के बजाय सिर्फ पसंद की सीटें बुक करने की सुविधा देता है। एक्सओ का नेटवर्क – विस्टा ग्लोबल की यूनिट 2,000 से अधिक विमानों के डेटा और एल्गोरिदम का उपयोग करती है, जिससे वे 96% सटीक और गारंटीड कीमतें दे पाते हैं। हाइब्रिड मॉडल- व्हील्स अप ने अपने एप में निजी जेट के साथ कमर्शियल उड़ानों को भी जोड़ दिया है, ताकि सदस्य अपनी जरूरत के हिसाब से यात्रा चुन सकें। बुकिंग से पहले एआई अब फ्यूल कैपेसिटी, एयरपोर्ट नियम जांच रहा एलीवेट जेट जैसी कंपनियां बुकिंग प्रक्रिया में एआई का इस्तेमाल कर रही हैं। यह सिस्टम न केवल विमान बुक करता है, बल्कि यह भी जांचता है कि वह विमान उस खास रूट पर उड़ान भर सकता है या नहीं। इसमें ईंधन की क्षमता, क्रू की सीमा और एयरपोर्ट की पाबंदियों का रियल-टाइम डेटा विश्लेषण किया जाता है। कंपनी के सीईओ ग्रेग रैफ के मुताबिक, ‘हम उन पेचीदगियों को पहले ही पकड़ लेते हैं जो अक्सर ब्रोकर छिपा जाते हैं।’
बसपा के एकमात्र मौजूदा विधायक उमाशंकर सिंह के आवास पर आयकर विभाग का छापा | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:25 फरवरी, 2026, 16:24 IST सूत्रों ने कहा कि यह कार्रवाई वित्तीय लेनदेन और चल-अचल संपत्तियों से संबंधित दस्तावेजों की जांच से जुड़ी है विधायक उमाशंकर सिंह (न्यूज18 हिंदी) उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ, बसपा के एकमात्र मौजूदा विधायक उमाशंकर सिंह के लखनऊ आवास पर आयकर विभाग की सुबह-सुबह छापेमारी ने राज्य के पहले से ही तनावपूर्ण माहौल में नई राजनीतिक गर्मी पैदा कर दी है। तलाशी अभियान बुधवार सुबह करीब 7 बजे शुरू हुआ जब 50 से अधिक आयकर अधिकारी, लखनऊ पुलिस कर्मियों के साथ, कई वाहनों में गोमती नगर में सिंह के आवास पर पहुंचे। टीम ने परिसर की घेराबंदी कर दी और घर के अंदर और बाहर आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया। तलाशी के दौरान अधिकारियों को फाइलों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अन्य दस्तावेजों की जांच करते देखा गया। सूत्रों ने कहा कि यह कार्रवाई वित्तीय लेनदेन और चल-अचल संपत्तियों से संबंधित दस्तावेजों की जांच से जुड़ी है। हालाँकि, आयकर विभाग ने अभी तक छापे के दायरे या निष्कर्षों के बारे में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब सिंह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। बलिया जिले के रसड़ा से तीन बार विधायक रहे, उनका कैंसर का इलाज चल रहा है। उनकी पहले ही दो बड़ी सर्जरी हो चुकी हैं और हाल ही में वह रक्त संबंधी चिकित्सा प्रक्रिया से गुजरकर संयुक्त राज्य अमेरिका से लौटे हैं। वर्तमान में, वह अपने चल रहे उपचार के हिस्से के रूप में अपने लखनऊ आवास पर अलगाव में हैं। हालाँकि, यह पहली बार नहीं है जब सिंह को अपनी संपत्ति को लेकर जांच का सामना करना पड़ा है। करीब 11 महीने पहले सतर्कता विभाग ने आय से अधिक संपत्ति के आरोपों की जांच शुरू की थी. जांच कथित तौर पर उनकी पत्नी पुष्पा सिंह, बेटे युकेश और बेटी यामिनी के नाम पर खरीदी गई संपत्तियों तक फैली हुई है। जांच में भूमि, आवासीय घर, फ्लैट, वाणिज्यिक प्रतिष्ठान और कृषि संपत्तियां शामिल थीं। विजिलेंस अधिकारियों ने पंजीकृत संपत्तियों के संबंध में जानकारी के लिए आईजी प्रयागराज को पत्र लिखने सहित कई विभागों से विवरण मांगा था। जांच के हिस्से के रूप में वाराणसी जैसे जिलों में उप-पंजीयक कार्यालयों से भी रिकॉर्ड एकत्र किए गए थे। 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान दायर सिंह के हलफनामे के अनुसार, उनकी कुल घोषित संपत्ति लगभग 54.05 करोड़ रुपये है। इसमें से 18.05 करोड़ रुपये चल संपत्ति है, जबकि 35.99 करोड़ रुपये अचल संपत्ति के अंतर्गत आते हैं। उन्होंने करीब 13 करोड़ रुपये की देनदारी भी घोषित की है. उनकी पत्नी पुष्पा सिंह सीएस इंफ्रा कंस्ट्रक्शन लिमिटेड की प्रबंध निदेशक हैं। सिंह का बहुजन समाज पार्टी में विशेष महत्व है क्योंकि वह वर्तमान उत्तर प्रदेश विधानसभा में इसके एकमात्र विधायक हैं। 2022 के चुनाव में रसड़ा से उनकी जीत के जरिए ही बसपा अपना खाता खोलने में कामयाब रही. उनकी लगातार चुनावी सफलता ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में पार्टी के प्रमुख चेहरे के रूप में उनकी स्थिति मजबूत कर दी है। बसपा प्रमुख मायावती से उनकी नजदीकियां राजनीतिक तौर पर भी चर्चित रही हैं। अतीत में, मायावती ने सार्वजनिक रूप से उन्हें राखी बांधी थी, जो एक करीबी रिश्ते का प्रतीक था। 5 मार्च को, जब सिंह की तबीयत बिगड़ गई, तो वह व्यक्तिगत रूप से उनका हाल जानने के लिए उनके आवास पर गईं और उनके परिवार के सदस्यों से मिलीं। 12वीं पास नेता सिंह ने अपना राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू किया। 1990 में, वह बलिया के एएसी कॉलेज में छात्र संघ के महासचिव चुने गए। बाद में वह अपनी जमीनी उपस्थिति को मजबूत करते हुए 2000 में बलिया के जिला पंचायत अध्यक्ष बने। वह 2011 में बसपा में शामिल हुए और 2012 में पहली बार रसड़ा से विधायक चुने गए। उस वर्ष बसपा की सीटों में उल्लेखनीय गिरावट के बावजूद, सिंह ने 84,000 से अधिक वोट हासिल किए और अपने समाजवादी पार्टी के प्रतिद्वंद्वी को बड़े अंतर से हराया। उन्होंने लगातार तीन जीत दर्ज करते हुए 2017 और 2022 में सीट बरकरार रखी। सिंह का राजनीतिक करियर विवादों से रहित नहीं रहा है। 14 जनवरी 2017 को तत्कालीन राज्यपाल राम नाईक ने उन्हें लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों के तहत अयोग्य घोषित कर दिया था. इस मामले में अपने नाम पर सरकारी ठेके हासिल करने का आरोप शामिल था। लोकायुक्त जांच में आरोपों में सच्चाई पाई गई और अदालत के निर्देशों और चुनाव आयोग की सिफारिश के बाद, उनकी विधानसभा सदस्यता पूर्वव्यापी रूप से समाप्त कर दी गई – कथित तौर पर उत्तर प्रदेश में ऐसा पहला मामला था। पहले प्रकाशित: 25 फरवरी, 2026, 16:24 IST समाचार राजनीति बसपा के एकमात्र मौजूदा विधायक उमाशंकर सिंह के आवास पर आयकर विभाग ने छापा मारा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)उत्तर प्रदेश में आयकर छापा(टी)उमाशंकर सिंह की संपत्ति(टी)बसपा विधायक लखनऊ पर छापा(टी)उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव(टी)वित्तीय जांच राजनेता भारत(टी)उमाशंकर सिंह स्वास्थ्य(टी)बीएसपी राजनीतिक विवाद(टी)मायावती उमाशंकर सिंह
संजय लीला भंसाली को हार्ट अटैक की खबर गलत:टीम ने बताया- वह पूरी तरह स्वस्थ, केवल रूटीन चेकअप के लिए अस्पताल गए थे

फिल्ममेकर संजय लीला भंसाली को लेकर हाल ही में खबरें आईं कि उन्हें हार्ट अटैक के बाद मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में भर्ती कराया गया। इन खबरों को गलत बताते हुए बुधवार को उनके परिवार ने बयान जारी कर कहा कि वह बिल्कुल ठीक हैं और सिर्फ रूटीन मेडिकल चेकअप के लिए अस्पताल गए थे। दरअसल, कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि मंगलवार को उनके 63वें जन्मदिन के दिन भंसाली को हार्ट अटैक आया। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। हालांकि परिवार ने अब हार्ट अटैक की बात की पुष्टि नहीं की। परिवार की तरफ से कहा गया, “संजय लीला भंसाली बिल्कुल ठीक हैं। वह रूटीन चेकअप के लिए अस्पताल गए हैं। चिंता की कोई बात नहीं है। सभी के प्यार और दुआओं के लिए धन्यवाद।” फिल्म ‘लव एंड वॉर’ पर काम कर रहे हैं संजय लीला भंसाली इन दिनों वह अपनी अगली फिल्म ‘लव एंड वॉर’ पर काम कर रहे हैं। इसमें आलिया भट्ट, रणबीर कपूर और विक्की कौशल नजर आएंगे। संजय लीला भंसाली ने अपने करियर की शुरुआत विदु विनोद चोपड़ा के साथ असिस्टेंट के रूप में की। डायरेक्शन में उनकी पहली फिल्म ‘खामोशी: द म्यूज़िकल’ रही, जिसे समीक्षकों ने खूब सराहा। उन्हें असली पहचान ‘हम दिल दे चुके सनम’ से मिली। इसके बाद ‘देवदास’ आई, जो बड़ी हिट साबित हुई। भंसाली ने ‘ब्लैक’ जैसी संवेदनशील और प्रभावशाली फिल्म बनाई, जिसने कई पुरस्कार जीते। हालांकि ‘सांवरिया’ बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी। उन्होंने ‘गोलियों की रासलीला राम-लीला’, ‘बाजीराव मस्तानी’ और ‘पद्मावत’ जैसी ऐतिहासिक फिल्में भी बनाईं। इसके अलावा, 2024 में उन्होंने वेब सीरीज ‘हीरामंडी’ के साथ ओटीटी प्लेटफॉर्म पर डेब्यू किया।
सेहत और रिश्तों के लिए वरदान हैं खुशी के आंसू:13 साल पहले औपचारिक तौर पर पहचाना था, एक्सपर्ट के अनुसार यह दूसरों के प्रति अधिक निस्वार्थ और दयालु भी बनाते हैं

कई बार दोस्तों की शादी, किसी की बहादुरी की कहानी या किसी अजनबी की मदद करना जैसे खुशी के मौके पर भी आंखें भर आती हैं। वैज्ञानिकों ने इसे नाम ‘काम मुत’ दिया है। यह शब्द संस्कृत से लिया गया है, जिसका मतलब है प्यार से अभिभूत होना। इसे हफ्ते में औसतन दो बार महसूस कर सकते हैं। मनोवैज्ञानिकों ने इसे करीब 13 साल पहले औपचारिक तौर पर पहचाना था। एक्सपर्ट के अनुसार, यह भावना न केवल हमें सुकून देती है, बल्कि हमें दूसरों के प्रति अधिक निस्वार्थ और दयालु भी बनाती है। रिसर्च के अनुसार, ‘काम मुत’ जीवन को अधिक अर्थपूर्ण बनाता है और हमें छोटी परेशानियों से ऊपर उठकर सोचने में मदद करता है। जर्मन वैज्ञानिकों ने पाया कि इस दौरान शरीर की हलचल कम हो जाती है, जिससे हम खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से अधिक स्थिर और शांत महसूस करते हैं। राजनीतिक दूरियां मिटाती है खुशी के आंसुओं वाली भावना 2023 की एक अमेरिकी स्टडी में पाया गया कि जब लोगों ने तूफान पीड़ितों की मदद करने वाले स्वयंसेवकों का भावुक वीडियो देखा, तो उनमें अपने राजनीतिक विरोधियों के प्रति नफरत कम हुई। काम मुत महसूस करने वाले नागरिकों में विरोधियों के लिए अधिक गर्मजोशी और भरोसा देखा गया। साफ है कि जितनी गहराई से हम इस भावना को महसूस करते हैं, उतनी ही सामाजिक और राजनीतिक दूरियां कम होती हैं। काम मुत के साथ महसूस होने वाले शारीरिक संकेत रिसर्च के अनुसार, ‘कामा मुत’ महसूस होने पर गले में भारीपन, गर्दन और पीठ के पीछे हल्की झनझनाहट, शरीर पर रोंगटे खड़े होना और छाती के भीतर एक सुखद गर्माहट का अहसास शामिल है। रिश्तों का अचानक गहरा होना सबसे बड़ा ट्रिगर अध्ययनों के अनुसार, ‘रिश्तों में अचानक आई गहराई ‘काम मुत’ का मुख्य कारण है। जैसे सैनिक की घर वापसी देख परिवारवाले भावुक होते हैं, क्योंकि खोने के डर के मुकाबले सुरक्षित लौटने की खुशी और राहत अधिक प्रभावी होती है। काम मुत कैसे बढ़ाएं? एक अध्ययन के अनुसार, जब दो लोग सक्रिय बातचीत करते हैं, यानी एक-दूसरे को पूरी एकाग्रता के साथ सुनते हैं, तो दोनों में काम मुत की भावना जागृत हो सकती है।








