ब्रजेश्वरी एनेक्स हादसे के बाद नगर निगम ने शहर की बहुमंजिला इमारतों की जांच शुरू कर दी है। निगम की टीम 10 दिनों में 330 इमारतों में निरीक्षण के लिए पहुंची, जिसमें 60 इमारतों में फायर सेफ्टी की कोई व्यवस्था नहीं मिली, वहीं 28 इमारतों में उपकरण खराब पाए गए। निगम ने सभी 22 जोन के भवन अधिकारियों को एनओसी और फायर सेफ्टी की जांच के निर्देश दिए हैं। निगम अधिकारियों के मुताबिक, शहर में करीब 12 हजार ऐसी इमारतें हैं, जिनकी जांच की जानी है। अभियान पूरे गर्मी सीजन में करीब चार महीने तक चलेगा। जिन इमारतों में फायर सेफ्टी व्यवस्था अधूरी या खराब मिली है, उन्हें 15 दिन में सुधार के निर्देश दिए गए हैं, अन्यथा इमारत को सील किया जाएगा। फायर सेफ्टी: तीन तरह की अनुमति जरूरी शहर में फायर एनओसी अब नगर निगम द्वारा स्थानीय स्तर पर जारी की जाती है। वर्ष 2022 से पहले यह एनओसी भोपाल से जारी होती थी। फायर सेफ्टी के लिए तीन तरह की अनुमति लेना जरूरी है। सबसे पहले फायर प्लान का अप्रूवल लिया जाता है। सिस्टम लगने के बाद फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। हर तीन साल में एनओसी का रिन्यूअल अनिवार्य है। रिन्यूअल के समय निगम अधिकारी जांच करते हैं। अब यह भी जांच हो रही है कि किन बिल्डिंग मालिकों ने रिन्यू नहीं कराया है। 12000 इमारतों की जांच होगी पूरे गर्मी के सीजन में। जांच में ये देखा
फायर एनओसी व एक्सटिंग्विशर और उपकरणों स्थिति।
एग्जिट व्यवस्था।
हर फ्लोर पर स्मोक डिटेक्टर या फायर अलार्म सिस्टम। मॉक ड्रिल में संस्थानों को दी सीख
गर्मी में बढ़ते अग्नि जोखिम को देखते हुए नगर निगम की फायर टीम ने शहर में मॉक ड्रिल अभियान शुरू किया है। कलेक्टर शिवम वर्मा व निगमायुक्त क्षितिज सिंघल के अनुसार, इस दौरान व्यावसायिक, शैक्षणिक व सार्वजनिक संस्थानों में आग से बचाव और सुरक्षित निकासी का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। लोगों को बताया गया कि आग लगने पर तुरंत 101 पर सूचना दें। लोगों को सुरक्षित बाहर निकालें। धुएं से बचने के लिए झुककर निकलें। लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का उपयोग करें। बिजली-गैस कनेक्शन तत्काल बंद करें। संकरी गलियों के लिए खरीदे फायर रोबोट शहर के मध्य क्षेत्र के 60 फीसदी इलाकों में गलियां संकरी होने से फायर ब्रिगेड नहीं पहुंच पाती है। इसके समाधान के लिए निगम ने फायर रोबोट खरीदा है। निगम के पास फायर बुलेट भी है, लेकिन भीषण आग में कारगर नहीं है। 50 बेड से अधिक अस्पतालों के लिए फायर एनओसी अनिवार्य है। एनओसी नहीं होने पर कुछ अस्पतालों के पंजीयन रुके हुए हैं।














































