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कुछ इंच की दूरी से गुजरी मौत:मंदसौर में लोडिंग पिकअप के टायरों के नीचे आने से बाल-बाल बचा मासूम, स्कूटी से गिरा

कुछ इंच की दूरी से गुजरी मौत:मंदसौर में लोडिंग पिकअप के टायरों के नीचे आने से बाल-बाल बचा मासूम, स्कूटी से गिरा

मंदसौर जिले के पिपलिया मंडी से एक दिल दहला देने वाला वीडियो सामने आया है, जिसमें एक छोटे बच्चे की जान बाल-बाल बचती नजर आ रही है। घटना में जरा सी चूक बड़े हादसे में बदल सकती थी, लेकिन गनीमत रही कि समय रहते वाहन चालक ने ब्रेक लगा दिए और मासूम सुरक्षित बच गई। स्कूटी के आगे बैठा था बच्चा एक युवक अपनी स्कूटी से जा रहा था और उसके आगे एक बच्चा बैठा हुआ था। इसी दौरान सामने से एक लोडिंग पिकअप वाहन आ रहा था। तभी अचानक संतुलन बिगड़ने से मासूम स्कूटी से सड़क पर गिर गया। टायर से कुछ ही इंच की दूरी पर गिरा बच्चा हैरानी की बात यह रही कि बच्चा ठीक उसी समय सड़क पर गिरा जब सामने से लोडिंग वाहन गुजर रहा था। वाहन के अगले दोनों टायर मासूम को पार कर चुके थे, लेकिन बच्चा उनसे कुछ ही इंच की दूरी पर गिरा। यदि जरा सा भी फासला कम होता तो यह घटना गंभीर हादसे में बदल सकती थी। लोडिंग वाहन चालक ने तत्काल ब्रेक लगा दिए, जिससे वाहन वहीं रुक गया। चालक की सतर्कता के कारण संभावित बड़ा हादसा टल गया। सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर रहे लोग घटना का वीडियो भी सामने आया है, जो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि बच्चा किस तरह वाहन के टायर से कुछ ही इंच की दूरी पर गिरती है। यह दृश्य किसी भी व्यक्ति को झकझोर देने के लिए काफी है। गनीमत रही कि इस बार कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन यह घटना सभी के लिए एक चेतावनी है कि सड़क पर जरा सी असावधानी भी जानलेवा साबित हो सकती है।

सेहत और सुंदरता का सुपरस्टार! इस पौधे में छिपा है कई रोगों का इलाज, जानें अनेको फायदे – Uttar Pradesh News

नेचुरल हाइड्रेशन

Last Updated:February 25, 2026, 13:23 IST हर जगह दिखाई देने वाला एक ऐसा पौधा, जिसके कई गुणों की बखान आयुर्वेद में किया गया है. जी हां एलोवेरा, जिसे घृतकुमारी के नाम से भी जाना जाता है. यह न केवल त्वचा, बल्कि बाल, इम्युनिटी पॉवर और पाचन से जुड़ी समस्याओं में बहुत उपयोगी है. इसके अलावा भी यह कई रोगों से छुटकारा दिला सकता है. आगे जानिए… एलोवेरा का पौधा कई गुणों से भरपूर होता है. इसमें 90% से अधिक पानी पाए जाते है, जो त्वचा को गहराई तक नमी प्रदान करते हैं. यह सुखी त्वचा, रुखापन और खिंचाव जैसी परेशानियों में बहुत उपयोगी है. इसके सही उपयोग से त्वचा मुलायम और ताजा दिख सकती है. अब केमिकल क्रीम की जगह कई लोग इसे प्राकृतिक मॉइस्चराइजर के रूप में प्रयोग कर रहे हैं. इसमें एंटी-बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो मुहांसे, कील और दाग-धब्बों को कम करने में मदद करते हैं. चेहरे पर हल्के हाथ से जेल लगाने से सूजन से भी राहत मिल सकती है. यह तैलीय त्वचा वालों के लिए भी हल्का और उपयोगी है. उसे घरेलू उपचार के रूप में साफ-सुथरी और संतुलित त्वचा के लिए भी इस्तेमाल किया जाता आ रहा है. एलोवेरा धूप से झुलसी त्वचा को भी ठंडक पहुंचाती हैं. यह मामूली जलन, कट या खरोंच में लाभकारी और गुणकारी है. इसके अलावा, इसमें ऐसे भी तत्व होते हैं, जो त्वचा की लोच बनाए रखने में सहायक हैं, इसी के कारण ही झुर्रियां और महीन रेखाएं कम नजर आ सकती हैं. इसे एंटी-एजिंग देखभाल में भी शामिल किया जा सकता है. Add News18 as Preferred Source on Google राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की पांच साल अनुभवी चिकित्साधिकारी डॉ वंदना तिवारी के अनुसार, एलोवेरा सीधे स्कैल्प को पोषण देकर बालों कि जड़ों को मजबूत बनाने में सहायक हो सकता है. डैंड्रफ की समस्या में भी यह उपयोगी माना जाता है. एक सप्ताह में एक-दो बार इसे लगाने से बालों में चमक और कोमलता आ सकती है. यह एक प्राकृतिक कंडीशनर से कम नहीं हैं. इसके जूस को सीमित मात्रा में सेवन करने से पाचन तंत्र मजबूत होता है. यह कब्ज और एसिडिटी जैसी समस्याओं में राहत दे सकता है. इसमें एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी पॉवर मजबूत करने में बेहद लाभकारी हैं. इसके सूजनरोधी गुण जोड़ों के दर्द में लाभ देते हैं. उन्होंने आगे कहा कि, एलोवेरा ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में भी कुछ हद तक मदद कर सकता है. हालांकि, शुगर के मरीजों को बिना डॉक्टर की सलाह के इसका सेवन नहीं करना चाहिए. यह प्राकृतिक जरूर है, लेकिन सही मात्रा और सावधानी बहुत जरूरी है. ध्यान दे कि, एलोवेरा का ताजा जेल ही त्वचा या बालों पर लगाएं. इसके जूस सुबह खाली पेट लगभग 20 मिली बराबर पानी में मिलाकर लिया जाता है. सही उपयोग से पहले पैच टेस्ट करना चाहिए. हां गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली माताएं या नियमित दवा लेने वाले लोग बगैर आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श लिए इसका सेवन न करें. First Published : February 25, 2026, 13:23 IST

जापान की संसद में AI इंजीनियरों की एंट्री:टी-शर्ट व पोनीटेल वाले नेता चर्चा में, कहते हैं राजनीति से सुस्ती दूर कर देंगे; ‘टीम मिराई’ ने 11 सीटें जीतीं, 30 लाख वोट भी

जापान की संसद में AI इंजीनियरों की एंट्री:टी-शर्ट व पोनीटेल वाले नेता चर्चा में, कहते हैं राजनीति से सुस्ती दूर कर देंगे; ‘टीम मिराई’ ने 11 सीटें जीतीं, 30 लाख वोट भी

जापान की संसद में इन दिनों एक शख्स चर्चा में है… ताकाहिरो एनो। 35 साल के एनो सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और राजनीतिक पार्टी ‘टीम मिराई’ के प्रमुख नेता हैं। टीम मिराई यानी भविष्य की टीम। पार्टी को टेक इंजीनियर्स ने बनाया है। हाल के चुनावों में सबको चौंकाते हुए जापान की संसद (निचले सदन) में पार्टी ने 11 सीटें जीतीं। पार्टी ने राजनीतिक दिग्गजों को पछाड़कर 30 लाख वोट भी अपने खाते में बटोरे हैं, जबकि सिर्फ 14 ही प्रत्याशी उतारे थे। एनो कहते हैं,‘एआई आग की तरह है, जो सभ्यता को पूरी तरह बदल देगा। जहां पश्चिमी देश इस एआई को ‘टर्मिनेटर’ जैसा खतरनाक मानकर डरते हैं, वहीं जापान के लोग इसे ‘डोरेमोन’ जैसा मददगार और प्यारा दोस्त समझते हैं। विश्लेषकों का कहना है कि टीम मिराई की जीत की वजह उनका ‘प्रैक्टिकल’ होना है। उनका तरीका ‘न वामपंथी है, न दक्षिणपंथी’। जापान फोरसाइट के संस्थापक टोबियस हैरिस के अनुसार, वे सिर्फ समस्याओं को हल करने पर ध्यान देते हैं। उन्होंने लोकलुभावन वादों के बजाय जटिल मुद्दों को सुलझाने की बात की। 40 से 50 की उम्र के शहरी मतदाताओं ने उन्हें हाथों-हाथ लिया। जीते उम्मीदवारों में टोक्यो और बर्कले जैसे बड़े संस्थानों के पढ़े एक्सपर्ट और आईबीएम-सोनी के पूर्व कर्मचारी शामिल हैं। सिलिकॉन वैली में इंजीनियर रहे नवनिर्वाचित सांसद आओई फुरुकावा, कहते हैं,‘कोडिंग और कानून बनाना एक जैसा है, क्योंकि दोनों के लिए तर्क और सटीक संरचना की जरूरत होती है।’ प्रस्ताव समझाने के लिए चैटबॉट, 39 हजार सवालों के जवाब दिए टीम मिराई की कार्यशैली की झलक वादों में भी दिखी। इन्होंने चुनाव जीतने के हाई-टेक समाधानों पर जोर दिया। ड्राइवरलेस बसें लाना, राजनीतिक चंदे में पारदर्शिता के लिए डिजिटल डेटाबेस बनाना, ताकि भ्रष्टाचार रुके। AI के जरिए सरकारी खर्चों में कमी करके मध्यम वर्ग को पेंशन व स्वास्थ्य बीमा में राहत जैसे वादे किए। पार्टी ने प्रस्ताव समझाने के लिए चैटबॉट भी शुरू किया। इसने 39 हजार सवालों के जवाब दिए और 6,200 से ज्यादा सुझाव जुटाए। बड़ी चुनौती संसद तक तो इंजीनियर्स पहुंच गए, लेकिन असली जंग अब शुरू हुई है। जापान की नौकरशाही आज भी ‘फैक्स मशीन’, ‘फ्लॉपी डिस्क’ और कागज के ढेरों पर टिकी है। संसद के कई कमरों में लैपटॉप और टैबलेट ले जाने पर पाबंदी है। बोर्ड पर ‘इंटरनेट ऑफ थिंग्स’ व ‘मशीन लर्निंग’ जैसे शब्द लिखने वाले इन युवा सांसदों को अब उन बुजुर्ग नेताओं के साथ काम करना होगा जो अब भी डिजिटल युग से दूर हैं। टीम मिराई का नारा है… सुस्त राजनीति को तेज बनाओ… इसने राजनीति के गलियारों में हलचल मचा दी है। आमतौर पर सफेद शर्ट और फॉर्मल सूट में दिखने वाले जापानी राजनेताओं के बीच अब ‘लाइन्स ऑफ कोड’ लिखी टी-शर्ट, पोनीटेल और इंडिगो सूट वाले चेहरे दिखने लगे हैं। संकेत साफ हैं कि भविष्य की राजनीति कोड, चैटबॉट व डेटा के सहारे भी लिखी जा सकती है।

Why Brushing at Night Is Important for Heart Health | रात में ब्रश करना हार्ट हेल्थ के लिए भी क्यों जरूरी है

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Last Updated:February 25, 2026, 13:13 IST Oral Hygiene and Heart Disease: डॉक्टर्स लोगों को रोज सुबह और रात को ब्रश करने की सलाह देते हैं. अधिकतर लोग सुबह ब्रश कर लेते हैं, लेकिन रात के वक्त लापरवाही करते हैं. कई रिसर्च में पता चला है कि रात में ब्रश न करना केवल दांतों के लिए ही नहीं, बल्कि दिल की सेहत के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है. मसूड़ों की सूजन और बैक्टीरिया खून के जरिए शरीर में फैलकर हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ा सकते हैं. नाइट ब्रशिंग को इग्नोर करना मौत को दावत देने जैसा है. ख़बरें फटाफट रात में ब्रश करने से हार्ट हेल्थ बेहतर बनी रहती है. Why Brushing Before Bed Crucial: ओरल हेल्थ को ठीक रखने के लिए सभी लोगों को रोज सुबह और रात को ब्रश करना चाहिए. हेल्थ एक्सपर्ट्स भी दिन में दो बार ब्रश करने की सलाह लेते हैं, लेकिन अधिकतर लोग सुबह के वक्त ही ब्रश करते हैं. लोगों को लगता है कि रात में ब्रश करना जरूरी नहीं है. अगर आप भी ऐसा सोचते हैं, तो सावधान होने की जरूरत है. कई रिसर्च में पता चला है कि रात में ब्रश न करने की आदत सिर्फ दांतों को ही नुकसान नहीं पहुंचाती, बल्कि धीरे-धीरे पूरी सेहत को प्रभावित कर सकती है. खासतौर पर दिल की सेहत पर इसका असर गंभीर हो सकता है. मुंह की सफाई रहे, तो दिल भी सेफ रहेगा. यूएस के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) की रिपोर्ट के मुताबिक दिनभर खाने-पीने के बाद दांतों और मसूड़ों के बीच खाने के सूक्ष्म कण फंस जाते हैं. अगर रात में ब्रश न किया जाए, तो मुंह में मौजूद बैक्टीरिया इन कणों पर तेजी से बढ़ने लगते हैं और प्लाक बनता है. यह प्लाक धीरे-धीरे टार्टर में बदल सकता है, जो दांतों और मसूड़ों के लिए हानिकारक होता है. इससे मसूड़ों में सूजन, खून आना और संक्रमण जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं. रिसर्च में पता चला है कि मसूड़ों की बीमारी केवल मुंह तक सीमित नहीं रहती. जब मसूड़ों में सूजन होती है, तो बैक्टीरिया और सूजन पैदा करने वाले तत्व खून के जरिए शरीर के अन्य हिस्सों तक पहुंच सकते हैं. यह प्रक्रिया शरीर में सूजन बढ़ा सकती है, जो कई गंभीर बीमारियों से जुड़ी मानी जाती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. कई रिसर्च में बता चला है कि मसूड़ों की बीमारी का दिल की सेहत पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है. लंबे समय तक बनी रहने वाली सूजन ब्लड वेसल्स की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचा सकती है. इससे धमनियों में फैट जमा होने की प्रक्रिया तेज हो सकती है, जिसे एथेरोस्क्लेरोसिस कहा जाता है. यही स्थिति आगे चलकर हार्ट अटैक या अन्य हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ा सकती है. अगर आप अपनी ओरल हाइजीन का खयाल नहीं रखेंगे, तो हार्ट के मरीज बनने का खतरा भी रहता है. यही वजह है कि हेल्थ एक्सपर्ट्स रोज दो बार नियम से ब्रश करने की सलाह देते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो जो लोग नियमित रूप से रात में ब्रश करते हैं और समय-समय पर डेंटिस्ट से मिलकर अपने दांतों की सफाई यानी स्केलिंग करवाते हैं, उनमें मसूड़ों की बीमारी का खतरा कम होता है. जब मसूड़े स्वस्थ रहते हैं, तो शरीर में सूजन का स्तर भी कंट्रोल रहता है, जिससे दिल को इनडायरेक्ट तरीके से फायदा मिलता है. इसलिए रात में ब्रश करना केवल एक छोटी आदत नहीं, बल्कि दिल और पूरे शरीर की सुरक्षा का सरल और प्रभावी उपाय है. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : February 25, 2026, 13:13 IST

झारखंड के पूर्व CM के पोते की हिमाचल में मौत:शव लेने मनाली पहुंचे परिजन, पोस्टमॉर्टम से मुकरे, दोस्तों संग घूमने आया वीर सोरेन

झारखंड के पूर्व CM के पोते की हिमाचल में मौत:शव लेने मनाली पहुंचे परिजन, पोस्टमॉर्टम से मुकरे, दोस्तों संग घूमने आया वीर सोरेन

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के पोते वीर सोरेन (22) की मंगलवार को मनाली में मौत हो गई। वह अपने दोस्तों के साथ मनाली घूमने आया था। वीर सोरेन के परिजन आज सुबह उसका शव लेने मनाली पहुंचे। इस दौरान परिजन पोस्टमार्टम करने से मुकर गए। इसकी पुष्टि डीएसपी मनाली केडी वर्मा ने की। उन्होंने बताया कि अब शव को झारखंड ले जाया जाएगा। बताया जा रहा है कि सेथन गांव में अधिक ऊंचाई (हाई अल्टीट्यूड) के कारण उनकी तबीयत बिगड़ गई। बाद में उन्हें मनाली के सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मनाली पुलिस के अनुसार, 24 फरवरी की शाम सिविल अस्पताल से सूचना मिली कि वीर सोरेन को मृत अवस्था में लाया गया। सूचना मिलते ही पुलिस टीम अस्पताल पहुंची और शव का निरीक्षण कर फोटोग्राफी की। प्रारंभिक जांच में शव पर किसी भी प्रकार के बाहरी चोट के निशान नहीं पाए गए। जानकारी के मुताबिक, वीर सोरेन बाबूलाल के बेटे थे। वह 22 फरवरी को अपने दोस्तों के साथ मनाली पहुंचे और सिमसा स्थित एक निजी होटल में ठहरे हुए थे। 23 फरवरी को वीर अपने दोस्तों के साथ सोलंग वैली और हाम्टा पास के समीप सेथन गांव घूमने गए थे। शाम को सभी वापस होटल लौट आए। मंगलवार दोपहर करीब 12:30 बजे वे होम-स्टे के आसपास घूमकर लौटे। सिर में तेज दर्द उठा इस दौरान वीर सोरेन ने सिर में तेज दर्द उठा। दोस्तों ने उन्हें दवा दी, जिसके बाद वीर सोरेन सो गए। करीब 2:30 बजे कमरे से गिरने की आवाज सुनाई दी। दोस्तों ने देखा कि वीर बिस्तर से नीचे गिरे पड़ा था। उन्हें तुरंत निजी वाहन से सिविल अस्पताल मनाली ले जाया गया। अस्पताल पहुंचने के दौरान उनके मुंह से झाग निकलने की बात भी सामने आई। डॉक्टरों ने सीपीआर दिया, जान नहीं बच पाई अस्पताल में चिकित्सकों ने उन्हें बचाने के लिए काफी देर तक सीपीआर दिया, लेकिन सफलता नहीं मिली। मनाली पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सुरक्षित रखवा दिया है और परिजनों को सूचना दे दी गई है। इधर, चंपाई सोरेन रांची से मनाली के लिए रवाना हो गए हैं। इस घटना पर हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शोक व्यक्त किया है।

मां बनने के बाद कटरीना की पहली पब्लिक अपीयरेंस:मास्क से चेहरा छिपाया, पैपराजी को किया वेव, 7 नवंबर को दिया बेटे विहान को जन्म

मां बनने के बाद कटरीना की पहली पब्लिक अपीयरेंस:मास्क से चेहरा छिपाया, पैपराजी को किया वेव, 7 नवंबर को दिया बेटे विहान को जन्म

कटरीना कैफ मां बनने के बाद पहली बार पब्लिकली नजर आई हैं। एक्ट्रेस ने 7 नवंबर 2025 को बेटे को जन्म दिया था, इसके बाद से ही वो कहीं भी स्पॉट नहीं हुई हैं। लंबे समय बाद एक्ट्रेस पब्लिकली आईं, हालांकि इस दौरान उन्होंने मास्क से अपना चेहरा छिपा रखा था। मंगलवार को कटरीना कैफ को सेलिब्रिटी पिलाटे ट्रेनर यासमिन कराचीवाला के साथ स्पॉट किया गया है। इस दौरान उन्होंने व्हाइट टी-शर्ट के साथ ब्लैक जैकेट पहन रखी थी। बंधें बालों में एक्ट्रेस ने ब्लैक मास्क से चेहरा छिपाया हुआ था। सामने आए वीडियो में एक्ट्रेस का वजन काफी बढ़ा हुआ लग रहा है। स्पॉटिंग के दौरान एक्ट्रेस ने मेकअप नहीं किया था। अचानक हुई स्पॉटिंग के बाद एक्ट्रेस कैमरों से बचती नजर आईं, हालांकि बाद में उन्होंने पैपराजी को वेव किया। विक्की कौशल ने कटरीना को कहा सुपरहीरो हाल ही में विक्की कौशल ने ई-टाइम्स को दिए इंटरव्यू में कटरीना कैफ के मदरहुड फेज पर बात की है। उन्होंने कहा-“मां ही असली सुपरहीरो है। उन्होंने अपनी प्रेग्नेंसी के दौरान एक योद्धा की तरह मजबूती दिखाई है, और मां बनने के बाद भी वह उतनी ही मजबूत रही हैं। मुझे उन पर बेहद गर्व है, और मैं उनसे बहुत प्यार करता हूं।” 7 नवंबर को दिया बेटे को जन्म, नाम रखा विहान कटरीना कैफ ने 7 नवंबर को बेटे को जन्म दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इसकी आधिकारिक घोषणा करते हुए लिखा था, हमारी खुशियों का पिटारा आ गया है। बहुत सारे प्यार आभार के साथ हम अपने बेटे का स्वागत करते हैं। 7 नवंबर 2025। कटरीना और विक्की। बेटे के जन्म के करीब डेढ़ महीने बाद विक्की कटरीना ने बेटे के नाम की घोषणा की। उन्होंने बेटे का नाम विहान कौशल रखा है। इसकी घोषणा करते हुए कपल ने लिखा, हमारी रोशनी की किरण विहान कौशल। दुआओं का जवाब मिला। जिंदगी खूबसूरत है। हमारी दुनिया अचानक बदल गई। आभार के लिए शब्द नहीं हैं। दो सालों से फिल्मों से दूर हैं कटरीना कैफ कटरीना कैफ को आखिरी बार साल 2024 की फिल्म मैरी क्रिसमस में देखा गया है। फिल्म में उनके साथ विजय सेतुपति लीड रोल में थे। इसके बाद से ही एक्ट्रेस किसी फिल्म में नजर नहीं आई हैं। इस साल भी उनकी कोई फिल्म रिलीज नहीं होगी। शादी के 4 साल बाद बनीं मां कटरीना कैफ ने 9 दिसंबर 2021 में एक्टर विक्की कौशल से शादी की थी। दोनों की पहली मुलाकात एक अवॉर्ड शो में हुई थी, जिसके बाद दोनों चंद मुलाकातों के बाद रिलेशनशिप में आ गए थे। कपल ने हिंदू रीति-रिवाजों से राजस्थान के सवई माधौपुर के सिक्स सेंस रिसोर्ट में शादी की है।

हरदा में कार स्क्रैच विवाद, आरोपी गिरफ्तार:समझौते के बाद महिलाओं को धमकाया, ऑटो तोड़ा; पुलिस ने जुलूस निकाला

हरदा में कार स्क्रैच विवाद, आरोपी गिरफ्तार:समझौते के बाद महिलाओं को धमकाया, ऑटो तोड़ा; पुलिस ने जुलूस निकाला

हरदा जिले में कार स्क्रैच विवाद के बाद एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी कमल दमाड़े पर समझौते के बावजूद फरियादी के घर पहुंचकर महिलाओं को चाकू से धमकाने और ऑटो में तोड़फोड़ करने का आरोप है। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। सिविल लाइन थाना टीआई आरएस तिवारी ने बताया कि यह घटना 22 फरवरी को दर्ज शिकायत से जुड़ी है। फरियादी रामकुमार पिता रमेश ने गौर कॉलोनी निवासी कमल दमाड़े से किराए पर कार ली थी। कार में स्क्रैच आने के बाद रामकुमार ने कमल को 30 हजार रुपये देकर समझौता कर लिया था। पुलिस ने दोनों पक्षों को भविष्य में विवाद न करने की हिदायत भी दी थी। समझौते और पुलिस की समझाइश के बावजूद, आरोपी कमल दमाड़े फरियादी रामकुमार के घर पहुंचा। उसने घर की महिलाओं को छुरा दिखाकर धमकाया और धारदार हथियार से घर के सामने खड़े ऑटो में तोड़फोड़ की।घटना के बाद पुलिस ने मंगलवार शाम आरोपी कमल दमाड़े को फरियादी के घर के पास से गिरफ्तार किया। पुलिस ने आरोपी का जुलूस भी निकाला और उसे महिलाओं से माफी मंगवाई। यह कदम नागरिकों में भय का वातावरण न फैलने देने के उद्देश्य से उठाया गया। आरोपी के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है।

उपेक्षित महसूस कर रहे कर्नाटक कांग्रेस के 24 एमएलसी ने मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखकर कैबिनेट में जगह मांगी | राजनीति समाचार

Rashmika Mandanna, Vijay Deverakonda's wedding is taking place in Udaipur.

आखरी अपडेट:25 फरवरी, 2026, 12:36 IST यह कदम तब उठाया गया है जब कैबिनेट पुनर्गठन और सरकार के भीतर आंतरिक संतुलन पर चर्चा जारी है। फेरबदल की आशंका के बीच कर्नाटक कांग्रेस एमएलसी ने कैबिनेट में प्रतिनिधित्व की मांग की। फ़ाइल चित्र/पीटीआई सत्ता-साझाकरण तनाव और कैबिनेट फेरबदल की अटकलों के बीच, कर्नाटक कांग्रेस के 24 विधान परिषद सदस्यों (एमएलसी) ने राज्य मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व मांगा है। एमएलसी ने एआईसीसी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें आग्रह किया गया कि परिषद के सदस्यों को मंत्रालय में पर्याप्त जगह दी जाए। कथित तौर पर हस्ताक्षरकर्ताओं ने पार्टी आलाकमान के समक्ष अपना मामला रखने के लिए दिसंबर में दिल्ली की यात्रा की थी। बहिष्कार पर चिंता यह कदम तब उठाया गया है जब कैबिनेट पुनर्गठन और सरकार के भीतर आंतरिक संतुलन पर चर्चा जारी है। अपने ज्ञापन में एमएलसी ने कहा कि कैबिनेट में परिषद के सदस्यों की अनुपस्थिति ने असमानता और मनोबल गिराने की भावना पैदा की है। उन्होंने तर्क दिया कि निरंतर बहिष्कार से यह धारणा बन सकती है कि एमएलसी के पास सीमित राजनीतिक संभावनाएं हैं, जो समय के साथ पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को कमजोर कर सकती हैं। उन्होंने तीव्र प्रभाव की भी चेतावनी दी। सक्षम नेता परिषद चुनाव लड़ने के बजाय विधानसभा टिकट मांगना पसंद कर सकते हैं, जिससे गुटबाजी को बढ़ावा मिल सकता है और जमीनी स्तर की ताकत कम हो सकती है। एमएलसी द्वारा उठाए गए मुद्दे हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा कि 1907 में स्थापित कर्नाटक विधान परिषद देश की सबसे पुरानी विधान परिषदों में से एक है। उन्होंने बताया कि एमएलसी बड़े क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो अक्सर 10 से 15 विधानसभा क्षेत्रों को कवर करते हैं, और स्थानीय निकायों से चुने गए सदस्य जमीनी स्तर के संस्थानों के साथ सीधा जुड़ाव बनाए रखते हैं। उन्होंने कहा कि विधायकों की तुलना में, एमएलसी अक्सर मतदाताओं के व्यापक वर्ग को प्रभावित करते हैं और पार्टी के संगठनात्मक नेटवर्क को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने यह भी नोट किया कि स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी 15 से 20 विधानसभा क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं और नियमित रूप से शिक्षकों और स्नातकों जैसे राय नेताओं के साथ जुड़ते हैं। ज्ञापन के अनुसार, ये सदस्य कांग्रेस के लिए युवाओं और बौद्धिक समर्थन को जुटाने में मदद करते हैं, जबकि शिक्षक, सम्मानित समुदाय के प्रभावशाली व्यक्ति के रूप में, पार्टी के पक्ष में सार्वजनिक धारणा को आकार देते हैं। पांच मंत्रिपरिषद की मांग एमएलसी ने आलाकमान से अगले कैबिनेट फेरबदल में कम से कम पांच परिषद सदस्यों को शामिल करने का आग्रह किया है। उन्होंने संतुलित प्रतिनिधित्व का सुझाव दिया, जिसमें स्थानीय निकायों से एक सदस्य, स्नातक या शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से एक और नामांकित या अन्य श्रेणियों से एक सदस्य शामिल हो। उन्होंने कहा कि सरकार के भीतर संगठनात्मक सामंजस्य और संतुलित राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए सार्थक कैबिनेट प्रतिनिधित्व आवश्यक है। जगह : कर्नाटक, भारत, भारत पहले प्रकाशित: 25 फरवरी, 2026, 12:36 IST समाचार राजनीति खुद को दरकिनार किए जाने पर कर्नाटक कांग्रेस के 24 एमएलसी ने मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखकर कैबिनेट में जगह मांगी अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कर्नाटक कांग्रेस(टी)मल्लिकार्जुन खड़गे(टी)कर्नाटक कैबिनेट फेरबदल(टी)कर्नाटक राजनीति(टी)कर्नाटक समाचार

How Far Can We See Through Our Eyes | Human Eye Vision Capacity | हमारी आंखें कितनी दूर तक देख सकती हैं | दूर की चीजें आंखों से छोटी क्यों नजर आती हैं

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Last Updated:February 25, 2026, 12:34 IST Human Eye Maximum Vision: हमारी आंखें करीब 5 किलोमीटर दूर तक की चीजें देख सकती हैं. दूर की चीजें छोटी नजर आती हैं, क्योंकि रेटिना पर उनकी इमेज छोटी बनती है. हालांकि अगर किसी चीज का आकार बड़ा है, तो आंखें बहुत ज्यादा दूरी से भी उस चीज को देख सकती हैं. पृथ्वी से चांद की दूरी 3.84 लाख किलोमीटर है, लेकिन आकार बहुत बड़ा है. इसकी वजह से हम अपनी आंखों से चांद को देख सकते हैं. लाखों किमी की दूरी से चांद बहुत छोटा नजर आता है. ख़बरें फटाफट हमारी आंखें सामान्य तौर पर करीब 5 किलोमीटर दूर तक की चीजें देख सकती हैं. Interesting Facts About Human Eye: हमारी आंखें प्रकृति का अनोखा वरदान हैं, जिनसे हम रंग-बिरंगी दुनिया को देख पाते हैं. आंखें हमारे ब्रेन और शरीर के बीच जानकारी का एक सेंसिटिव ब्रिज भी हैं. आंखें हमें रंग, आकार, दूरी, गति और प्रकाश की तीव्रता का एहसास कराती हैं. अक्सर आपने महसूस किया होगा कि जब आप कई किलोमीटर दूर की चीजें देखते हैं, तो वे अपने आकार से बहुत छोटी नजर आती हैं. अगर आपसे पूछा जाए कि हमारी आंखें वास्तव में कितनी दूर तक देख सकती हैं, तो आप कहेंगे कि 1-2 किलोमीटर या शायद इससे कुछ ज्यादा. हालांकि आपको आंख से जुड़े कई रोचक तथ्य हैरान कर सकते हैं. सेहत से जुड़ी प्रमाणिक जानकारी देने वाली वेबसाइट हेल्थलाइन की रिपोर्ट के अनुसार आंखों की देखने की क्षमता उनकी संरचना और विजन क्वालिटी पर निर्भर करती है. मानव आंख की रेटिना में करोड़ों प्रकाश-संवेदी कोशिकाएं होती हैं, जो जो प्रकाश की तीव्रता को पहचानती हैं और कोन्स रंगों को पहचानते हैं. एक परफेक्ट विजन पर आप छोटे बिंदुओं को भी स्पष्ट रूप से पहचान सकते हैं. सपाट और क्लीयर सतह पर इंसान लगभग 3 मील यानी करीब 5 किलोमीटर दूर किसी बड़ी वस्तु जैसे ऊंची इमारत या पहाड़ी को आसानी से देख सकता है. अगर किसी चीज का साइज बहुत बड़ा है, तब यह ज्यादा दूरी से भी दिख सकती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. अगर हम आकाश की ओर देखें, तो हमारी आंखें लाखों किलोमीटर दूर स्थित वस्तुओं जैसे चांद और सूरज को भी देख सकती हैं. इसका कारण यह है कि ये खगोलीय वस्तुएं इतनी बड़ी हैं कि उनकी छवि हमारी रेटिना पर दिखाई देती है. NASA के अनुसार चांद पृथ्वी से करीब 3.84 लाख किलोमीटर दूर है और सूरज लगभग 1.5 करोड़ किलोमीटर दूर है. फिर भी हम उन्हें स्पष्ट रूप से देख पाते हैं. हालांकि लाखों किलोमीटर दूर से ये ग्रह बहुत छोटे नजर आते हैं, जबकि इनका आकार बहुत बड़ा है. आंखों की सीमा केवल दूरी पर निर्भर नहीं करती, बल्कि वस्तु के आकार, प्रकाश उत्सर्जन और उसकी चमक पर भी निर्भर करती है. अब आपके मन में सवाल होगा कि दूर की वस्तुएं छोटी क्यों दिखाई देती हैं? इसका उत्तर ऑप्टिक्स में छिपा है. आंखें प्रकाश के फैलाव (divergence) और परावर्तन (refraction) के नियमों के अनुसार काम करती हैं. जैसे-जैसे कोई वस्तु हमारी आंख से दूर होती है, उसकी रेटिना पर बन रही इमेज का आकार छोटा हो जाता है. इसी वजह से किसी इमारत या पहाड़ी की दूरी बढ़ने पर वह छोटी दिखाई देती है. साथ ही वायुमंडल में मौजूद धूल, जलवाष्प और प्रकाश का परावर्तन इमेज को थोड़ा धुंधला और अस्पष्ट भी बना सकता है. आंख का लेंस और कॉर्निया दूर की वस्तु पर फोकस करने के लिए अपनी मोटाई बदलते हैं. इस प्रक्रिया को एकॉमोडेशन कहा जाता है. अगर आंख सही से काम न करे, तो दूर की वस्तुएं धुंधली दिखाई देने लगती हैं. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : February 25, 2026, 12:34 IST

सोना 3 दिन में ₹5 हजार महंगा हुआ:10 ग्राम ₹1.60 लाख पर पहुंचा, चांदी आज ₹6,455 बढ़कर ₹2.69 लाख किलो हुई

सोना 3 दिन में ₹5 हजार महंगा हुआ:10 ग्राम ₹1.60 लाख पर पहुंचा, चांदी आज ₹6,455 बढ़कर ₹2.69 लाख किलो हुई

सोने-चांदी के दाम में आज यानी 25 फरवरी को तेजी है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव 582 रुपए बढ़कर 1,59,823 रुपए पहुंच गया है। इससे पहले यह 1,59,241 रुपए पर था। सोने में ये लगातार तीसरे कारोबारी दिन बढ़त है। तीन दिनों में ये 5,000 बढ़ चुका है। वहीं, एक किलो चांदी की कीमत आज 6,455 रुपए बढ़कर 2,69,367 रुपए पर पहुंच गई है। कल इसकी कीमत 2,62,912 रुपए किलो थी। इस साल सोना 27,000 रुपए और चांदी 39,000 रुपए महंगी हुई इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सोना 2026 में अब तक 27,000 रुपए और चांदी 39,000 रुपए महंगी हो चुकी है। इस दौरान 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपए और चांदी ने 3.86 लाख रुपए का ऑल टाइम हाई भी बनाया था। सोने-चांदी के दाम में तेजी के 3 प्रमुख कारण 2025 में सोना ₹57 हजार महंगा हुआ 1.80 लाख तक जा सकता है सोना इन्वेस्टमेंट बैंकिंग कंपनी UBS के अनुसार सोने की मांग में तेजी बनी हुई है। 2025 में दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों ने 863 टन सोना खरीदा था। अब अनुमान है कि 2026 में यह खरीदारी बढ़कर 950 टन तक पहुंच सकती है। इसके साथ ही, गोल्ड ईटीएफ (ETF) में निवेश भी बढ़कर 825 टन होने की उम्मीद है। UBS को पूरा भरोसा है कि 2026 में सोने की कीमतें और ऊपर जाएंगी। रिपोर्ट के अनुसार, साल के बीच तक सोना 6,200 डॉलर प्रति औंस के ऊंचे स्तर को छू सकता है। अगर रुपए के हिसाब से बात करें तो सोने का भाव 1.80 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम तक जा सकता है।