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पैरों पर नजर आ रही सूजी उभरी नसें? वैरिकोज वेन्स से छुटकारा पाने का आसान तरीका

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Last Updated:February 26, 2026, 23:56 IST Varicose Veins Natural Treatment: वैरिकोज वेन्स की परेशानी उम्र के साथ बढ़ सकती है. तकलीफ ज्यादा होने पर डॉक्टर से चेकअप जरूरी है. लेकिन शुरुआती स्टेज पर आप यहां बताए गए आयुर्वेदिक उपायों से ठीक कर सकते हैं. ख़बरें फटाफट Varicose Veins Natural Treatment In Hindi: पैरों की नसों का फूलना या सूजना एक आम लेकिन गंभीर समस्या हो सकती है. उम्रदराज लोगों में ये प्रॉब्लम ज्यादा कॉमन है. कई लोग इसे साधारण थकान या बढ़ती उम्र का असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन जब नसों में खून का बहाव सही ढंग से नहीं हो पाता, तो वे उभरकर दिखने लगती हैं और दर्द, जलन या भारीपन महसूस होता है. इस समस्या को डॉक्टर की भाषा में वैरिकोज वेन्स कहा जाता है. अच्छी बात यह है कि सही देखभाल और जीवनशैली अपनाकर इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है. आयुर्वेद के अनुसार, यह दिक्कत शरीर में वात दोष बढ़ने और रक्त संचार कमजोर होने से जुड़ी होती है. वहीं, आधुनिक विज्ञान कहता है कि नसों के अंदर मौजूद छोटे वाल्व कमजोर हो जाते हैं, जिससे खून नीचे जमा होने लगता है और सूजन बढ़ जाती है. वैरिकोज वेन्स के लिए घरेलू उपाय कंप्रेशन स्टॉकिंग्स फायदेमंदइस परेशानी में कंप्रेशन स्टॉकिंग्स काफी फायदेमंद हो सकती हैं. ये खास तरह की जुराबें पैरों पर हल्का दबाव बनाती हैं, जिससे खून ऊपर की ओर बहने में मदद मिलती है. इससे सूजन और दर्द धीरे-धीरे कम होने लगता है. पैरों को कुछ देर ऊपर उठाकर रखेंपैरों को कुछ समय के लिए ऊपर उठाकर रखना भी आसान और असरदार उपाय है. लेटते समय पैरों के नीचे तकिया रख लें. इससे नसों पर दबाव कम होता है और खून का बहाव बेहतर होता है. खानपान का ध्यान रखेंखान-पान का ध्यान रखना भी जरूरी है. हल्का और पौष्टिक भोजन करें. हरी सब्जियां, फल, दालें और फाइबर से भरपूर चीजें शरीर को फायदा पहुंचाती हैं. विटामिन सी और पोटेशियम से भरपूर आहार सूजन कम करने में मदद करता है। साथ ही दिनभर पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है. रोजाना हल्का व्यायाम जरूर करेंटहलना, पैरों की स्ट्रेचिंग या आसान एक्सरसाइज से मांसपेशियां सक्रिय रहती हैं. जब पैर चलते हैं, तो खून ऊपर की ओर जाने में मदद मिलती है और नसों पर दबाव कम होता है. अगर समस्या ज्यादा बढ़ जाए या दर्द लगातार बना रहे, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें First Published : February 26, 2026, 23:56 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

18 लाख साल से मच्छर पी रहे हैं इंसानों का खून, रिसर्च में हुआ बड़ा खुलासा | Mosquitoes Sucking Human Blood Since 1.8 Million Years

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होमफोटोनॉलेज मच्छरों को कब लगा इंसानों के खून का चस्का? आज भी हर साल लेते हैं 6 लाख की जान Last Updated:February 26, 2026, 23:17 IST दुनिया का सबसे खतरनाक जानवर कौन है? शेर, शार्क या सांप? जवाब है मच्छर. ये नन्हा सा जीव हर साल करीब 6 लाख से ज्यादा लोगों की जान ले लेता है. मलेरिया, डेंगू और वेस्ट नाइल वायरस जैसी बीमारियों के जरिए इसने सदियों से इंसानों को खौफ में रखा है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि मच्छरों ने इंसानों का खून पीना कब शुरू किया? एक नई इंटरनेशनल रिसर्च ने चौंकाने वाला दावा किया है. रिसर्च के मुताबिक, मच्छरों और इंसानों का ये खूनी रिश्ता आज का नहीं, बल्कि करीब 18 लाख साल पुराना है. साइंटिस्ट्स ने डीएनए एनालिसिस के जरिए उस दौर का पता लगाया है जब मच्छरों ने जानवरों को छोड़कर आदिमानवों को अपना शिकार बनाना शुरू किया था. यह कहानी दक्षिण-पूर्व एशिया के जंगलों से शुरू होती है, जहां हमारे पूर्वज पहली बार इन नन्हे शिकारियों के संपर्क में आए थे. साइंटिस्ट्स ने एनोफिलीज ल्यूकोस्फायरस ग्रुप के मच्छरों पर की है. ये वही ग्रुप है जिसके मच्छर मलेरिया फैलाते हैं. रिसर्च के लिए 1992 से 2020 के बीच दक्षिण-पूर्व एशिया से इकट्ठा किए गए 11 अलग-अलग प्रजातियों के मच्छरों का डीएनए टेस्ट किया गया. कंप्यूटर मॉडल्स की मदद से उनके म्यूटेशन और इवोल्यूशन की हिस्ट्री चेक की गई. एनालिसिस से पता चला कि मच्छरों में इंसानों का खून पीने की आदत आज से 29 लाख से 16 लाख साल पहले के बीच डेवलप हुई. यह वह दौर था जब आदिमानव यानी होमो इरेक्टस पहली बार दक्षिण-पूर्व एशिया के सुंडालैंड इलाके में पहुंचे थे. सुंडालैंड आज के बोर्नियो, जावा और सुमात्रा जैसे द्वीपों का हिस्सा है. Add News18 as Preferred Source on Google इस बदलाव से पहले मच्छर इस इलाके में रहने वाले दूसरे जानवरों और बंदरों का खून पीकर खुश थे. लेकिन जैसे ही होमो इरेक्टस की आबादी बढ़ी, मच्छरों के भीतर एक जेनेटिक बदलाव यानी म्यूटेशन हुआ. उन्होंने इंसानों की बॉडी ऑडर यानी शरीर की गंध को पहचानने वाले रिसेप्टर्स डेवलप कर लिए. यह समझना जरूरी है कि मच्छरों का यह विकास अचानक नहीं हुआ. इंसानों की त्वचा पतली होती है और वे झुंड में रहते थे, जिससे मच्छरों के लिए खून पीना आसान हो गया. धीरे-धीरे मच्छरों ने इंसानी पसीने और कार्बन डाइऑक्साइड को पहचानने की क्षमता हासिल कर ली, जो उन्हें एक परफेक्ट शिकारी बनाती है. यह रिसर्च इंसानों के इतिहास की खाली जगहों को भी भरती है. दक्षिण-पूर्व एशिया में आदिमानवों के बहुत कम जीवाश्म मिले हैं. ऐसे में मच्छरों के इवोल्यूशन की टाइमलाइन यह साबित करती है कि 18 लाख साल पहले इस इलाके में इंसानों की अच्छी-खासी आबादी मौजूद थी. अगर वहां इंसान नहीं होते, तो मच्छर कभी भी इंसानी खून के प्रति आकर्षित होने वाले जीन डेवलप नहीं करते. पुरानी थ्योरीज मानती थीं कि मच्छरों ने इंसानों को काटना 61 हजार से 5 लाख साल पहले शुरू किया था, लेकिन इस नई खोज ने इतिहास को लाखों साल पीछे धकेल दिया है. आज दुनिया भर में मच्छरों की करीब 3,500 प्रजातियां हैं, लेकिन उनमें से कुछ ही इंसान की जान की दुश्मन हैं. मलेरिया के अलावा डेंगू, पीला बुखार और जीका वायरस भी इन्हीं की देन हैं. मच्छरों की लार में मौजूद केमिकल्स इंसानी इम्यून सिस्टम को चकमा देने में माहिर होते हैं. साइंटिस्ट्स का मानना है कि मच्छरों के इस पुराने इतिहास को समझकर हम भविष्य में बीमारियों को रोकने के नए तरीके खोज सकते हैं. फिलहाल तो ये साफ है कि जब तक इंसान धरती पर रहेंगे, ये 18 लाख साल पुराना ‘खून का खेल’ जारी रहेगा. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। First Published : February 26, 2026, 23:17 IST

सिवनी में स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के दिव्य स्तंभ का लोकार्पण:वर्चुअली शामिल हुए सीएम डॉ. मोहन यादव; देर रात तक हुए धार्मिक आयोजन

सिवनी में स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के दिव्य स्तंभ का लोकार्पण:वर्चुअली शामिल हुए सीएम डॉ. मोहन यादव; देर रात तक हुए धार्मिक आयोजन

सिवनी के शंकराचार्य चौक पर ब्रह्मलीन स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज के दिव्य स्तंभ का लोकार्पण कार्यक्रम हुआ। इस गरिमामय समारोह में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए और जनसमूह को संबोधित किया। सीएम ने स्वामी के योगदान को किया याद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संबोधन में कहा कि स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का जीवन भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा के संरक्षण को समर्पित था। उन्होंने सिवनी में इस दिव्य स्तंभ की स्थापना को गौरव का विषय बताते हुए कहा कि यह स्तंभ भविष्य में लोगों को धर्म और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देगा। साथ ही मुख्यमंत्री ने सरकार द्वारा सनातन मूल्यों के आधार पर किए जा रहे कार्यों और कृष्ण लीला स्थलों को तीर्थ के रूप में विकसित करने की योजना का भी उल्लेख किया। संतों और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति कार्यक्रम में स्वामी सदानंद सरस्वती विशेष रूप से उपस्थित रहे, जिन्होंने आदि शंकराचार्य और स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के आध्यात्मिक योगदान बताया। इस दौरान आचार्य महामंडलेश्वर रामकृष्णानंद और ब्रह्मचारी सुबुद्धानंद सहित अन्य संत भी मौजूद थे। लोकार्पण अवसर पर विधायक दिनेश राय, डीआईजी राकेश सिंह, कलेक्टर शीतला पटले और पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार मेहता सहित अन्य अधिकारी व बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। देर रात तक हुए धार्मिक आयोजन दिव्य स्तंभ के लोकार्पण के बाद कार्यक्रम स्थल पर भजन, प्रवचन और आरती जैसे विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने देर रात तक इन कार्यक्रमों में शामिल होकर अपनी श्रद्धा प्रकट की। देखें तस्वीरें…

Quinton de Kock Becomes SA’s Top Six-Hitter, Markram’s 82* Powers Win Over West Indies

Quinton de Kock Becomes SA’s Top Six-Hitter, Markram’s 82* Powers Win Over West Indies

Hindi News Sports Cricket T20 World Cup: Quinton De Kock Becomes SA’s Top Six Hitter, Markram’s 82* Powers Win Over West Indies स्पोर्ट्स डेस्क34 मिनट पहले कॉपी लिंक मार्करम ने वेस्टइंडीज के खिलाफ 46 गेंद पर नाबाद 82 रन बनाए। उन्हें मैन ऑफ द मैच चुना गया। टी-20 वर्ल्ड कप में गुरुवार को पहले मुकाबले में साउथ अफ्रीका ने वेस्टइंडीज को 9 विकेट से हरा दिया। सुपर-8 का यह मुकाबला अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में दोपहर 3 बजे से खेला गया। वेस्टइंडीज ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 177 रन का टारगेट दिया, जिसे साउथ अफ्रीका ने 16.1 ओवर में एक विकेट खोकर हासिल कर लिया। कप्तान ऐडन मार्करम ने नाबाद 82 और रायन रिकेल्टन ने नाबाद 45 रन बनाए। SA vs WI मैच के रिकॉर्ड्स और मोमेंट्स… टॉप मोमेंट्स… 1. कॉर्बिन बॉश की बॉल शेफर्ड को लगी बॉश की गेंद लगने के बाद शेफर्ड का कन्कशन चेक हुआ। 11वें ओवर की चौथी गेंद कॉर्बिन बॉश ने रोमारियो शेफर्ड को बाउंसर डाली। शेफर्ड ने झुककर गेंद को छोड़ने की कोशिश की, लेकिन उनकी नजर गेंद से हट गई। क्रॉस-सीम डिलीवरी कम उछाल के साथ पहले उनके कंधे से टकराई और फिर उछलकर गर्दन के पास जा लगी। इसके बाद मेडिकल टीम को मैदान पर आना पड़ा। कन्कशन चेक होने के बाद गेम फिर शुरू हुआ और शेफर्ड ने बैटिंग जारी रखी। 2. रिकेल्टन के शॉट पर दो बार गेंद स्टम्प पर लगी रिकेल्टन ने शॉट मारा और गेंद नॉन-स्ट्राइक एंड के स्टंप्स से जा लगी। 16वें ओवर में रिकेल्टन के शॉट पर गेंद नॉन स्ट्राइकर एंड के स्टंप्स पर जा लगी। रोमारियो शेफर्ड ने तीसरी गेंद ऑफ स्टंप के पास फुल लेंथ डाली। रिकेल्टन ने स्ट्रैट ड्राइव खेला, लेकिन गेंद नॉन-स्ट्राइकर एंड के स्टंप्स से टकराकर दूर चली गई और 1 रन बन गया। इसी ओवर में 5वीं गेंद शेफर्ड ने फुल टॉस डाली, जिसपर रिकेल्टन ने फिर सीधा शॉट मारा और गेंद स्टंप्स से टकरा गई। इस बार 1 रन ही मिला। 3. रबाडा ने एक ओवर में 2 विकेट लिए रबाडा ने एक ही ओवर में होप और हेटमायर को आउट किया। तीसरे ओवर में कगिसो रबाडा ने वेस्टइंडीज की पारी पर ब्रेक लगाते हुए 2 विकेट लिए। रबाडा ने दूसरी गेंद शाई होप को बैक ऑफ लेंथ डाली। होप ने कट करने की कोशिश की, लेकिन गेंद बल्ले का किनारा लेकर क्विंटन डीकॉक के हाथों में चली गई। वहीं ओवर की 5वीं गेंद रबाडा ने शॉर्ट पिच फेंकी, जिसपर शिमरोन हेटमायर ने पुल शॉट खेला, लेकिन गेंद हवा में उठ गई। मिड-विकेट पर केशव महाराज ने दाईं ओर दौड़ते हुए आसान कैच पकड़ लिया। 4. एनगिडी ने रदरफोर्ड का कैच छोड़ा एनगिडी ने रदरफोर्ड को 3 रन पर जीवनदान दिया पावरप्ले के आखिरी ओवर में मार्को यानसन ने ओवर की तीसरी गेंद रदरफोर्ड को ऑफ स्टंप के बाहर शॉर्ट पिच फेंकी। रदरफोर्ड ने शॉट मारा, लेकिन गेंद बैट का बाहरी किनारा लेकर शॉर्ट थर्ड मैन पर गई। वहां खड़े एनगिडी ने उसे कैच करने की कोशिश की, लेकिन गेंद सिर्फ उंगलियों को छूकर निकल गई। उस समय रदरफोर्ड 3 रन बनाकर खेल रहे थे। टॉप रिकॉर्ड्स… 1. रबाडा साउथ अफ्रीका के सेकेंड हाईएस्ट विकेट टेकर कगिसो रबाडा ने वेस्टइंडीज के खिलाफ 2 विकेट चटकाए। इसी के साथ वे टी-20 वर्ल्ड कप में साउथ अफ्रीका के लिए सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले दूसरे गेंदबाज बन गए। उनसे ज्यादा विकेट एनरिक नॉर्त्या ने लिए हैं। नॉर्त्या के नाम 37 और रबाडा के नाम 32 विकेट हो गए। 2. मार्करम ने साउथ अफ्रीका के लिए सबसे ज्यादा 50+ स्कोर किए वेस्टइंडीज के खिलाफ ऐडन मार्करम ने 46 गेंद पर नाबाद 82 रन बनाए। वे टी-20 वर्ल्ड कप में साउथ अफ्रीका के लिए सबसे ज्यादा फिफ्टी लगाने वाले बल्लेबाज बन गए। मार्करम के नाम अब 6 फिफ्टी हो गईं। उन्होंने एबी डिविलियर्स और डीकॉक को पीछे छोड़ा, जिनके नाम टूर्नामेंट में 5-5 फिफ्टी हैं। 3. टूर्नामेंट में SA के सिक्सर किंग बने डीकॉक क्विंटन डीकॉक टी-20 वर्ल्ड कप में साउथ अफ्रीका के लिए सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाले बल्लेबाज बन गए। उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ 47 रन की पारी में 4 छक्के लगाए। टूर्नामेंट में अब उनके नाम 33 छक्के हो गए। उन्होंने डिविलियर्स को पीछे छोड़ा, जिनके नाम 30 छक्के हैं। 4. 8वें विकेट के लिए सबसे बड़ी साझेदारी वेस्टइंडीज के जेसन होल्डर और रोमारियो शेफर्ड ने साउथ अफ्रीका के खिलाफ 8वें विकेट के लिए 89 रन की साझेदारी की। यह टी-20 इंटरनेशल में 8वें विकेट के लिए सबसे बड़ी साझेदारी का रिकॉर्ड रहा। इससे पहले स्कॉटलैंड के प्रेस्टन मोम्सेन और शफयान शरीफ ने 2015 में नीदरलैंड्स के खिलाफ 8वें विकेट के लिए 80 रनों की साझेदारी की थी। ————————————- स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… साउथ अफ्रीका की सुपर-8 में लगातार दूसरी जीत:वेस्टइंडीज को 9 विकेट से हराया; मार्करम की फिफ्टी, लुंगी एनगिडी ने 3 विकेट झटके साउथ अफ्रीका ने टी-20 वर्ल्ड कप के सुपर-8 में लगातार दूसरा मैच जीत लिया है। टीम ने गुरुवार के पहले मैच में वेस्टइंडीज को 9 विकेट से हराया। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में साउथ अफ्रीका ने टॉस जीतकर पहले बॉलिंग की। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Pakistan-Afghanistan Border Clash: 8 Posts Captured

Pakistan-Afghanistan Border Clash: 8 Posts Captured

इस्लामाबाद20 मिनट पहले कॉपी लिंक तालिबान का पाकिस्तान पर हमले का यह फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल है। अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर गुरुवार देर रात हमला कर दिया है। तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि यह पाकिस्तान के हवाई हमलों का जवाब है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अफगानिस्तान ने पाकिस्तानी सेना की 15 चौकियों पर कब्जा कर लिया है। सूत्रों ने TOLOnews को बताया कि नंगरहार, नूरिस्तान, कुनार, खोस्त, पक्तिया और पक्तिका जैसे बॉर्डर इलाकों में दोनों पक्षों में संघर्ष जारी है। ये चौकियां नंगरहार के गोश्ता जिले और कुनार प्रांत में डूरंड लाइन के पास स्थित है। हालांकि अभी तक इससे जुड़े फोटो और वीडियो सामने नहीं आए हैं पाकिस्तान ने 22 फरवरी को अफगानिस्तान के भीतरी इलाकों में हवाई हमले किए थे। उसका कहना था कि ये हमले पाकिस्तानी तालिबान (TTP) और इस्लामिक स्टेट से जुड़े ठिकानों पर किए गए हैं।पाकिस्तान के सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने बताया था कि यह कार्रवाई खुफिया जानकारी के आधार पर की गई थी और जरूरत पड़ने पर आगे भी ऐसे ऑपरेशन किए जाएंगे। पाकिस्तान ने TTP और ISIS के ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की थी इससे पहले रविवार को पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में एयरस्ट्राइक की थी। पाकिस्तान के उप गृह मंत्री तलाल चौधरी ने दावा किया था कि सीमावर्ती इलाकों में TTP के ठिकानों पर कार्रवाई में कम से कम 70 लड़ाके मारे गए। बाद में पाकिस्तानी अखबार डॉन ने यह संख्या 80 तक पहुंचने का दावा किया था। अफगानिस्तान का नंगरहार का बड़ा इलाका पाकिस्तानी हमले के बाद आग की लपटों में घिर गया था। (सोर्स- X) तालिबान ने कहा था वक्त आने पर कड़ा जवाब देंगे अफगानिस्तान ने इन हमलों की कड़ी निंदा की थी। तालिबान का कहना था कि हमलों में आम नागरिकों को निशाना बनाया गया। टोलो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, नंगरहार में एक घर पर हमले के बाद एक ही परिवार के 23 लोग मलबे में दब गए थे। वहीं, अफगान रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि पाकिस्तान को ‘सही समय पर कड़ा जवाब’ दिया जाएगा। मंत्रालय ने इन हमलों को देश की संप्रभुता का उल्लंघन बताया था। पाकिस्तान लंबे समय से तालिबान सरकार पर दबाव बनाता रहा है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी भी आतंकी संगठन को न करने दे। इस्लामाबाद का आरोप है कि TTP अफगानिस्तान से ऑपरेट हो रहे हैं, जबकि तालिबान सरकार इन आरोपों से लगातार इनकार करती रही है। पाकिस्तानी शिया मस्जिद में जुमे की नमाज के दौरान ब्लास्ट हुआ था पाकिस्तान ने सोमवार को जब अफगानिस्तान में एयरस्ट्राइक की थी, इससे कुछ घंटे पहले खैबर पख्तूनख्वा के बन्नू जिले में सुरक्षा काफिले पर आत्मघाती हमला हुआ, जिसमें दो सैनिक, जिनमें एक लेफ्टिनेंट कर्नल भी मारे गए। 16 फरवरी को पाकिस्तान के बाजौर में विस्फोटकों से भरी गाड़ी सुरक्षा चौकी से टकरा दी गई थी। इस हमले में 11 सैनिक और एक बच्चे की मौत हुई। अधिकारियों ने हमलावर को अफगान नागरिक बताया था। इससे पहले 6 फरवरी को इस्लामाबाद में जुमे की नमाज के दौरान शिया मस्जिद (इमामबाड़ा) में आत्मघाती हमला हुआ था। पाकिस्तानी अखबार द डॉन के मुताबिक, हमले में 31 लोगों की मौत हो गई है और 169 घायल हुए हैं। इस हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ने ली थी। अक्टूबर में हिंसक झड़पों के बाद तनाव बढ़ा अक्टूबर में सीमा पर हुई झड़पों में दोनों तरफ के सैनिकों और नागरिकों की मौत के बाद से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्ते तनावपूर्ण बने हुए हैं। कतर की मध्यस्थता से 19 अक्टूबर को युद्धविराम हुआ था, लेकिन तुर्किये के इस्तांबुल में वार्ता औपचारिक समझौते तक नहीं पहुंच सकी। दरअसल, 9 अक्टूबर को अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के ठिकानों पर हवाई हमले हुए थे। तालिबान का कहना था कि ये हमले पाकिस्तान ने किए थे। हालांकि पाकिस्तान ने साफ तौर पर ये नहीं कहा कि ये हमले उसने किए, लेकिन उसने तालिबान को चेतावनी दी कि वह अपनी जमीन पर TTP को पनाह न दे। पाकिस्तान ने पिछले साल 9 अक्टूबर को काबुल में रिहायशी इलाके में एयरस्ट्राइक की थी। दोनों देशों के बीच पहले भी हुआ है तनाव अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच डूरंड लाइन को लेकर लंबे समय से विवाद है। दोनों देश एक-दूसरे पर हमले और आतंकियों को छिपाने का आरोप लगाते रहते हैं। 2021 में अफगानिस्तान हुकूमत पर तालिबान के कंट्रोल के बाद से तनाव और बढ़ गया है। ——————- यह खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान का दावा- अफगानिस्तान पर एयरस्ट्राइक कर 80 लड़ाके मारे:TTP-IS को टारगेट किया, आत्मघाती हमलों का बदला लिया; अफगान बोला- 16 नागरिक मारे गए पाकिस्तान के उप गृह मंत्री तलाल चौधरी ने सोमवार को बताया कि अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के ठिकानों पर कार्रवाई की गई। उनके मुताबिक कम से कम 70 लड़ाके मारे गए। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

इंदौर में जहरीली गैस फैली, 5 की तबीयत बिगड़ी:लोगों को सांस लेने में परेशानी, उल्टियां हुई; घरों से बाहर निकले लोग

इंदौर में जहरीली गैस फैली, 5 की तबीयत बिगड़ी:लोगों को सांस लेने में परेशानी, उल्टियां हुई; घरों से बाहर निकले लोग

इंदौर के रावजी बाजार थाना क्षेत्र में गुरुवार रात अमोनिया गैस के रिसाव से इलाके में हड़कंप मच गया। गैस के असर से कुछ लोगों को सांस लेने में दिक्कत हुई, जिसके बाद दो महिलाओं समेत पांच लोगों को एहतियातन अस्पताल भेजा गया। प्रशासन के मुताबिक सभी की हालत स्थिर है और कोई भी गंभीर नहीं है। सीएमएचओ डॉक्टर माधव हसनी ने बताया कि पांचों की हालत ठीक है। डीसीपी आनंद कालादगी ने बताया कि ककतपुरा पुल के नीचे शहजाद नाम के एक कबाड़ी द्वारा सिलेंडर काटा जा रहा था। इसी दौरान उसमें से अमोनिया गैस का रिसाव शुरू हो गया। गैस फैलते ही आसपास मौजूद लोगों को घबराहट और सांस लेने में परेशानी महसूस होने लगी। डीसीपी ने स्पष्ट किया कि इस घटना में कोई भी व्यक्ति गंभीर रूप से प्रभावित नहीं हुआ है। सभी लोग सुरक्षित हैं। पुलिस ने कबाड़ी शहजाद को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है और मामले की जांच जारी है। देखिए तस्वीरें कबाड़ी दुकान में गैस सिलेंडर काटा जा रहा था एक कबाड़ी की दुकान पर गैस से भरा सिलेंडर लाया गया था। बताया जा रहा है कि कबाड़ी सिलेंडर को काट रहा था, उसी दौरान उसमें भरी गैस रिसने लगी। गैस फैलते ही आसपास के लोगों को घबराहट और सांस लेने में परेशानी होने लगी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और कबाड़ी को हिरासत में ले लिया। दमकल विभाग की टीम ने सिलेंडर को अपने कब्जे में लेकर मौके से हटाया। क्षेत्र में पानी का छिड़काव भी किया गया, जिसके बाद हालात कुछ हद तक काबू में आए।

दिल्ली में डीबी एमिनेंस अवॉर्ड के 7वें सीजन का आयोजन:केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने मध्य प्रदेश के 45 दिग्गजों को सम्मानित किया

दिल्ली में डीबी एमिनेंस अवॉर्ड के 7वें सीजन का आयोजन:केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने मध्य प्रदेश के 45 दिग्गजों को सम्मानित किया

नई दिल्ली में गुरुवार को डीबी एमिनेंस अवॉर्ड के सातवें सीजन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान और दैनिक भास्कर समूह के डिप्टी एमडी पवन अग्रवाल मौजूद रहे। कार्यक्रम में दैनिक भास्कर समूह ने मध्य प्रदेश के उन 45 दिग्गजों को सम्मानित किया, जो अपने कामों से देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। चिराग ने शिक्षा, ऑटोमोबाइल, रियल एस्टेट, सामाजिक सेवा, अन्य उद्योगों से जुड़े लोगों को डीबी एमिनेंस अवॉर्ड दिया। चिराग ने कहा- मैं भास्कर ग्रुप का समूह का दिल से हृदय से आभार प्रकट करूंगा। ये भी अपनी रूट से जुड़े रहे। भास्कर ग्रुप का उदय उसमें आप सबके शहर इंदौर की एक अहम भूमिका रही। कार्यक्रम से जुड़ी तस्वीरें… दैनिक भास्कर समूह हर साल लीडर्स को सम्मानित करता है दैनिक भास्कर समूह हर साल यह अवॉर्ड ऐसे लीडर्स को प्रदान करता है, जो अपने-अपने क्षेत्र में अतुलनीय काम कर रहे हैं। दैनिक भास्कर समूह के डिप्टी एमडी पवन अग्रवाल ने इस मौके पर सम्मानित हुए लोगों से कहा कि उन सभी ने अपने कामों से एक मिसाल कायम किया है। उन्होंने कहा कि दैनिक भास्कर का भी प्रयास होता है कि जैसा आप समाज में बदलाव कर रहे हैं, वैसा हम भी करें। समाज में कुछ ना कुछ नया करते रहें। आपके साथ यही जुगलबंदी है। इंदौर दैनिक भास्कर के लिए काफी खास जगह है। क्योंकि वहां 10 साल पहचान बनाने के बाद ही हिम्मत मिली कि पूरे देश में जाएं। डिप्टी एमडी ने कहा कि इस एंटरप्राइजिंग शहर (इंदौर) से ही हमें हिम्मत मिली। यहीं से हमें समझ आया था कि जब आप कुछ काम करते हैं तो उसकी कोई सीमा नहीं है। अगर आपके पास कल्पना है तो पूरा खुला आसमान है। चिराग पासवान ने अवॉर्ड पाने वाले लोगों को बधाई दी कार्यक्रम में केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने अवॉर्ड पाने वाले सभी 45 लोगों को बधाई दी और दैनिक भास्कर का धन्यवाद किया। उन्होंने वहां मौजूद उद्यमियों से फूड प्रोसेसिंग में इनोवेशन और निवेश करने की अपील की। चिराग ने आगे कहा- आज हर कोई विकसित भारत की चर्चा करता है, लेकिन बहुत कम लोग अपने योगदान के बारे में सोचते हैं। हम अक्सर सरकारों और प्रशासन से सवाल करते हैं कि विकसित भारत कैसे बनेगा, लेकिन आप वे लोग हैं जिन्होंने खुद से सवाल किया कि ‘मेरा योगदान क्या होगा?’ यदि देश की 140 करोड़ आबादी ईमानदारी से खुद से यह पूछने लग जाए, तो हम लक्ष्य के बहुत करीब होंगे। इसके अलावा इस कार्यक्रम में दैनिक भास्कर समूह के इंदौर के एग्जिक्यूटिव एडिटर अमित मंडलोई, इंदौर के यूनिट हेड दीपक किशोर और नेशनल पॉलिटिकल एडिटर धर्मेंद्र सिंह भदौरिया भी मौजूद थे। कार्यक्रम से जुड़े 5 वीडियो…

भाजपा नेता के भाई ने दलित बस्ती पर हमला किया:जान बचाने पहली मंजिल से कूदी महिला; पत्थरबाजी में एक घायल

भाजपा नेता के भाई ने दलित बस्ती पर हमला किया:जान बचाने पहली मंजिल से कूदी महिला; पत्थरबाजी में एक घायल

नीमच जिले के काली कोटड़ी गांव में गुरुवार दोपहर भाजपा नेता उमराव सिंह गुर्जर के भाई गोपाल गुर्जर और उनके करीब 60 साथियों ने दलित बस्ती पर हमला कर दिया। इस दौरान हमलावरों ने घरों में तोड़फोड़ की और महिलाओं से मारपीट की। हमले में एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई, जबकि एक अन्य महिला ने अपनी जान बचाने के लिए घर की पहली मंजिल से छलांग लगा दी। गुरुवार दोपहर करीब 2:30 बजे लोडिंग टेंपो और पांच कारों में सवार होकर आए हमलावरों ने मनीष नायक, पुष्कर और अर्जुन नायक के घरों को निशाना बनाया। उन्होंने घरों में घुसकर जमकर तोड़फोड़ की। मनीष नायक की पत्नी पूजा मेघवाल पर पत्थर से हमला किया गया, जिससे उनके सिर में गंभीर चोट आई। यहां से शुरू हुआ विवाद यह विवाद 24 फरवरी की रात को शुरू हुआ था, जब दीपेश गुर्जर ने अपनी बिना नंबर की थार गाड़ी से मनीष नायक की बाइक को टक्कर मार दी थी। इस हादसे में मनीष घायल हो गए थे। पीड़ितों का आरोप है कि मेडिकल जांच के बावजूद पुलिस ने प्रभावशाली लोगों के दबाव में आकर उन्हें ही झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दी थी। हमसे टकराने का अंजाम बुरा होगा पीड़ितों के अनुसार, गोपाल गुर्जर, सरदार सिंह, दीपेश और उनके साथियों ने जातिगत गालियां देते हुए धमकी दी कि “इस इलाके में हमारा आतंक है और हमसे टकराने का अंजाम बुरा होगा।” घटना के बाद डरे-सहमे पीड़ित परिवार शाम को नीमच पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे और न्याय की गुहार लगाई। दहशत में परिवार ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि आरोपी मछली पालन के बड़े ठेकेदार हैं और उनके राजनीतिक रसूख के कारण पुलिस कार्रवाई करने से बच रही है। पीड़ितों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई और उन्हें सुरक्षा नहीं मिली, तो उनके परिवार की जान को खतरा बना रहेगा।

JNU में प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर पत्थर-जूते फेंके:UGC रेगुलेशन लागू करने की मांग कर रहा था छात्रसंघ; यूनिवर्सिटी ने कोर्ट ऑर्डर का उल्लंघन बताया

JNU में प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर पत्थर-जूते फेंके:UGC रेगुलेशन लागू करने की मांग कर रहा था छात्रसंघ; यूनिवर्सिटी ने कोर्ट ऑर्डर का उल्लंघन बताया

दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी(JNU) में स्टूडेंट यूनियन के प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली पुलिस पर पत्थर फेंके, पुलिसवालों को काटा और जूते फेंके। पुलिस ने कहा कि इसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं। जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन(JNUSU) UGC रेगुलेशन लागू करने की मांग को लेकर मार्च निकाल रहा था। ये मार्च शिक्षा मंत्रालय तक निकाला जाना था लेकिन पुलिस ने इसे बीच में ही रोक दिया। पुलिस का आरोप है कि मार्च रोकने के बाद कुछ प्रोटेस्टर्स ने उनपर हमला कर दिया। इसके बीच यूनिवर्सिटी का भी बयान आया। JNU ने कहा कि यह मांग माननीय सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का उल्लंघन है जिसने रेगुलेशन पर स्टे जारी किया था। JNU के वाइस चांसलर या रजिस्ट्रार के पास रेगुलेशन पर कोई अधिकार नहीं है। पुलिस पर हमले की 3 तस्वीरेंं… JNU ने कहा- हमारी सरकार को जवाबदेही JNU ने सोशल मीडिया X पर एक पोस्ट में कहा कि JNU एक पब्लिक यूनिवर्सिटी है इसलिए सरकार, पार्लियामेंट और भारतीय टैक्सपेयर्स के प्रति जवाबदेह है। यह बहुत बुरा है कि एक महिला OBC वाइस चांसलर पर झूठे आरोप लगाकर हमला किया जा रहा है, सिर्फ पब्लिक प्रॉपर्टी की हिंसा और तोड़-फोड़ के मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए। पहले इस पूरे मामले को समझें UGC के नए कानून का नाम है- ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन्स, 2026।’ इसके तहत कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में SC, ST और OBC छात्रों के खिलाफ जातीय भेदभाव रोकने के लिए कई निर्देश दिए गए थे। नए नियमों के तहत, कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में विशेष समितियां, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग टीमें बनाने का निर्देश दिया गया। ये टीमें SC, ST और OBC छात्रों की शिकायतों को देखेंगी। सरकार का कहना है कि ये बदलाव उच्च शिक्षा संस्थानों में निष्पक्षता और जवाबदेही लाने के लिए किए गए हैं। हालांकि, सवर्ण जाति के स्टूडेंट्स का आरोप है कि UGC ने जाति आधारित भेदभाव की गैर-समावेशी परिभाषा अपनाई है और इससे कॉलेजों में अराजकता पैदा होगी। सवर्ण जाति के स्टूडेंट्स का आरोप है कि नए नियमों में सवर्ण छात्र ‘स्वाभाविक अपराधी’ बना दिए गए हैं। इनसे उनके खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा मिलेगा। 30 जनवरी: सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नए नियमों पर रोक लगाई सुप्रीम कोर्ट ने 30 जनवरी को यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थी। CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या की बेंच ने कहा कि इसके प्रावधान स्पष्ट नहीं हैं और इनका गलत इस्तेमाल हो सकता है। कोर्ट ने यह टिप्पणी मृत्युंजय तिवारी, एडवोकेट विनीत जिंदल और राहुल दीवान की याचिकाओं पर की, जिनमें आरोप लगाया गया है कि नए नियम जनरल कैटेगरी के छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं। UGC ने 13 जनवरी को अपने नए नियमों को नोटिफाई किया था। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और UGC को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही नियमों का ड्राफ्ट फिर से तैयार करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में अगली सुनवाई अब 19 मार्च को होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फिलहाल 2012 के UGC नियम देशभर में लागू रहेंगे। ———— ये खबर भी पढ़ें… ‘करप्शन इन ज्यूडीशियरी’ वाली NCERT किताब पर SC का बैन:कहा- हार्ड कॉपी वापस लें, डिजिटल कॉपी हटाएं सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ चैप्टर वाली NCERT के 8वीं क्लास की सोशल साइंस की किताब बैन कर दी है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि जो किताबें छप चुकी हैं, उसे जब्त कीजिए और डिजिटल कॉपियों को भी हटाइए। पूरी खबर पढ़ें…

‘पाखंड’: सिद्धारमैया ने उर्दू स्वास्थ्य विज्ञापन विवाद पर बीजेपी की आलोचना की, कहा कि यह ‘मानक सरकारी प्रक्रिया’ है | राजनीति समाचार

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आखरी अपडेट:26 फरवरी, 2026, 20:56 IST विवाद ने व्यक्तिगत मोड़ ले लिया क्योंकि कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री के घर पर बोली जाने वाली उर्दू पर भाजपा की टिप्पणियों को व्यापक रूप से उनकी पत्नी तब्बू राव के संदर्भ के रूप में देखा गया। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस विचार को खारिज कर दिया कि उन्हें भाषाई गौरव में सबक की जरूरत है। (छवि: न्यूज18) कर्नाटक में स्वास्थ्य विभाग के अखबारों में विज्ञापनों को लेकर ताजा भाषा विवाद छिड़ गया है लेकिन इस बार यह कन्नड़ के बारे में नहीं है। कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भाजपा के बीच एक उर्दू अखबार में स्वास्थ्य संबंधी विज्ञापन को लेकर वाकयुद्ध छिड़ गया है। भाजपा द्वारा यह आरोप लगाए जाने के बाद कि राज्य सरकार “तुष्टिकरण की राजनीति” में लगी हुई है, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने गुरुवार को भगवा पार्टी पर कड़ा प्रहार किया और उनके “पाखंड” को उजागर करते हुए कहा कि यह “मानक सरकारी प्रक्रिया” है। विवाद ने व्यक्तिगत मोड़ ले लिया क्योंकि राज्य के स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव के घर पर बोली जाने वाली भाषा पर भाजपा की टिप्पणियों को व्यापक रूप से उनकी पत्नी तब्बू राव के संदर्भ के रूप में देखा गया। उन्होंने हमले की निंदा करते हुए इसे “आत्म-धोखे की पराकाष्ठा” बताया और कहा कि उनका परिवार घर पर उर्दू भी नहीं बोलता। तब्बू राव ने कहा कि उनके पति के राजनीति में आने के बाद से उनकी व्यक्तिगत पृष्ठभूमि के कारण उन्हें गलत तरीके से निशाना बनाया गया है। “क्या उर्दू में येदियुरप्पा और प्रधान मंत्री मोदी वाले विज्ञापन नहीं हैं? क्या वे तुष्टीकरण में लिप्त हैं?” उन्होंने भाजपा के अचानक “कन्नड़ प्रेम” को शर्मनाक दोहरा मापदंड करार देते हुए पूछा। विवाद क्या है? यह विवाद ‘कुसुमा संजीवनी’ कार्यक्रम के लॉन्च से शुरू हुआ था, जो एक सरकारी पहल है जो हीमोफीलिया रोगियों के लिए मुफ्त एम्बुलेंस सेवाओं के साथ रोगनिरोधी उपचार प्रदान करती है। इस आयोजन को बढ़ावा देने के लिए, राज्य स्वास्थ्य विभाग ने विभिन्न प्रकाशनों में विज्ञापन जारी किए। उर्दू दैनिक समाचार पत्रों में छपने वाले संस्करण पूरी तरह से उर्दू भाषा में छपे थे, जिसे भाजपा ने तुरंत “विवाद की जड़” के रूप में लिया। सिद्धारमैया ने क्या कहा? सिद्धारमैया ने मंगलुरु में पत्रकारों से बात करते हुए विपक्ष के विरोध के तर्क पर सवाल उठाया. “विज्ञापन देते समय क्या हमें उर्दू अखबारों को भी नहीं देना चाहिए?” उन्होंने पूछा, भाजपा ने अपने पिछले कार्यों की अनदेखी करते हुए मौजूदा सरकार की हर बात का विरोध करने की आदत बना ली है। पहले कन्नड़ कवलु समिति के अध्यक्ष के रूप में कार्य करने के बाद, उन्होंने इस विचार को खारिज कर दिया कि उन्हें भाषाई गौरव में सबक की आवश्यकता है, उनके लिए “कन्नड़ सिर्फ एक भाषा नहीं है, यह जीवन है”। बीजेपी ने क्या कहा? सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक तीखे हमले में, कर्नाटक भाजपा ने “कन्नड़ विरोधी, राज्य विरोधी कांग्रेस सरकार” पर राजनीतिक लाभ के लिए स्थानीय भाषा के हितों का बलिदान देने का आरोप लगाया। इसने सवाल किया कि क्या राज्य की प्रशासनिक भाषा बदल गई है, सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से पूछा गया: “क्या कर्नाटक की प्रशासनिक भाषा कन्नड़ या उर्दू है?” भाजपा ने आरोप लगाया कि सरकार ने केवल विज्ञापन के बजाय उर्दू में एक आधिकारिक निमंत्रण जारी किया था और दिनेश गुंडू राव पर व्यक्तिगत कटाक्ष करते हुए कहा कि वह अपने कार्यालय का उपयोग अपने घर में बोली जाने वाली भाषा को बढ़ावा देने के लिए कर रहे थे। स्वास्थ्य मंत्री ने क्या कहा? इस बीच, राव ने तीखा खंडन करते हुए भाजपा पर “बौद्धिक दिवालियापन” और आधिकारिक सरकारी निमंत्रण और एक मानक समाचार पत्र विज्ञापन के बीच अंतर करने में विफल रहने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह कदम एक “नियमित प्रशासनिक अभ्यास” था, यह समझाते हुए कि विशिष्ट समाचार पत्र की भाषा में विज्ञापन प्रकाशित करना मानक प्रक्रिया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जानकारी उसके इच्छित पाठकों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि सरकारी विज्ञापन का लक्ष्य सभी नागरिकों तक सार्वजनिक योजनाओं की जानकारी प्रभावी ढंग से पहुंचाना है। उन्होंने पिछले भाजपा प्रशासन द्वारा उर्दू में प्रकाशित पिछले विज्ञापनों की एक श्रृंखला साझा की और विशेष रूप से बीएस येदियुरप्पा और बसवराज बोम्मई जैसे भाजपा मुख्यमंत्रियों का नाम लेते हुए पूछा कि क्या उनके कार्यकाल के दौरान उर्दू विज्ञापनों के उपयोग का मतलब यह है कि वे “राष्ट्र-विरोधी” या “तुष्टिकरण” में लगे हुए थे। (रोहिणी स्वामी के इनपुट्स के साथ) पहले प्रकाशित: 26 फरवरी, 2026, 20:56 IST समाचार राजनीति ‘पाखंड’: सिद्धारमैया ने उर्दू स्वास्थ्य विज्ञापन विवाद पर बीजेपी की आलोचना की, कहा कि यह ‘मानक सरकारी प्रक्रिया’ है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कर्नाटक भाषा विवाद(टी)कर्नाटक स्वास्थ्य विभाग विज्ञापन(टी)उर्दू अखबार विवाद कर्नाटक(टी)सिद्धारमैया बीजेपी भाषा बहस(टी)कुसुमा संजीविनी कार्यक्रम(टी)दिनेश गुंडू राव उर्दू(टी)बीजेपी कांग्रेस भाषा राजनीति(टी)कन्नड़ भाषा मुद्दा