Thursday, 09 Apr 2026 | 02:48 AM

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भोंगर्या हाट में दी जानकारी

भोंगर्या हाट में दी जानकारी

बड़वानी | डिजिटल युग में बढ़ते ऑनलाइन अपराधों के मद्देनजर जिले में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार, साइबर सतर्कता व सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति संवेदनशील बनाना है। आदिवासी बहुल क्षेत्र के पारंपरिक भोंगर्या हाट में पुलिस विशेष जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित कर रही है। दूरदराज से आए युवाओं, छात्राओं, महिलाओं और ग्रामीणों से सीधे संवाद स्थापित कर उन्हें साइबर अपराधों के नए तरीकों, उनके दुष्परिणाम और बचाव के उपायों की जानकारी दी। बैनर, पोस्टर और पैम्फ्लैट के माध्यम से डिजिटल सुरक्षा, ऑनलाइन धोखाधड़ी और त्वरित शिकायत प्रणाली के बारे में विस्तार से बताया गया। कार्यक्रम में नागरिकों को ऑनलाइन बैंकिंग व यूपीआई फ्रॉड, फर्जी लोन एप, निवेश प्रलोभन, सोशल मीडिया हैकिंग, वीडियो कॉल ब्लैकमेलिंग और नकली जॉब ऑफर जैसी बढ़ती ऑनलाइन ठगी के प्रति विशेष रूप से सचेत किया गया। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि थोड़ी-सी लापरवाही बड़ी आर्थिक व मानसिक हानि का कारण बन सकती है।

‘ना जाने कौन आ गया’ सादगी भरी प्रेम कहानी:जतीन सरना, मधुरिमा रॉय और प्रणय पचौरी ने प्यार, आत्ममंथन और सादगी पर खुलकर की बात

‘ना जाने कौन आ गया’ सादगी भरी प्रेम कहानी:जतीन सरना, मधुरिमा रॉय और प्रणय पचौरी ने प्यार, आत्ममंथन और सादगी पर खुलकर की बात

6 मार्च को रिलीज हो रही फिल्म ‘ना जाने कौन आ गया’ एक सादगी भरी लव स्टोरी है, जो रिश्तों की जटिलताओं, आत्ममंथन और प्यार की मासूमियत को बड़े पर्दे पर पेश करती है। पहाड़ों की खूबसूरत वादियों में फिल्माई गई यह कहानी आज के दौर के टॉक्सिक माहौल में प्यार और संवेदनशीलता की बात करती है। फिल्म में जतीन सरना, मधुरिमा रॉय और प्रणय पचौरी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म की रिलीज से पहले दैनिक भास्कर ने स्टारकास्ट से खास बातचीत की। कलाकारों ने अपने किरदार, शूटिंग के अनुभव और फिल्म के संदेश को लेकर खुलकर बातें की हैं। स्क्रिप्ट पढ़ते ही ऐसा कौन-सा पहलू था जिसने आपको महसूस कराया कि यह फिल्म आपको जरूर करनी चाहिए? जतीन सरना- मेरे किरदार की सादगी ने मुझे सबसे ज्यादा आकर्षित किया। वो एक आम इंसान है, जो जिंदगी को जीने के बजाय सिर्फ सर्वाइव करने में फंसा रहता है। ऐसे लोगों का दर्द, उनकी मासूमियत और जिंदगी को बस जी लेने की चाह यही मुझे छू गया। एक अभिनेता के तौर पर मुझे लगा कि यह एक नया और अनछुआ किरदार है। निर्देशक विकास ने जिस तरह कहानी सुनाई, उसी वक्त तय कर लिया कि यह फिल्म करनी है। ट्रेलर में हेट, लव और बिट्रेयल की झलक दिखती है। क्या आप इससे रियल लाइफ में रिलेट करते हैं? जतीन सरना- जहां प्यार होगा, वहां नफरत भी होगी, धोखा भी और अफसोस भी। लेकिन जिंदगी की खूबसूरती इन्हीं भावनाओं को समझकर आगे बढ़ने में है। यही जीवन का चक्र है। इस फिल्म में आपका किरदार पहले निभाए गए रोल्स से किस तरह अलग है, और उसे पर्दे पर उतारना आपके लिए कितना चुनौतीपूर्ण रहा? मधुरिमा रॉय- मेरे पिछले किरदारों में डार्क शेड्स ज्यादा थे, लेकिन इस फिल्म में मेरा किरदार बहुत मासूम और पॉजिटिव है। वह कमरे में आती है तो माहौल बदल देती है। उसकी सरलता और बचपना निभाना आसान नहीं था। सादगी को निभाना, नेगेटिव किरदारों से कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण होता है। आज के युवाओं के लिए फिल्म क्या संदेश देती है? मधुरिमा रॉय- आज सोशल मीडिया और डेटिंग ऐप्स के दौर में रिश्ते बहुत कॉम्प्लिकेटेड हो गए हैं। हम हर चीज को ‘लव बॉम्बिंग’, ‘घोस्टिंग’ जैसे टर्म्स में बांट देते हैं। हमारी फिल्म कहती है थोड़ा रुकिए, खुद को समझिए। हर गलती सामने वाले की नहीं होती, कभी-कभी हमें भी खुद में झांकने की जरूरत होती है। प्यार में पवित्रता और सादगी को फिर से महसूस कीजिए। स्क्रिप्ट सुनते ही आपके मन में पहली प्रतिक्रिया क्या थी, और किस बात ने आपको इस फिल्म का हिस्सा बनने के लिए सबसे ज्यादा उत्साहित किया? प्रणय पचौरी- मुझे बताया गया कि सोचिए अगर ओशो पहाड़ों में एक आम इंसान की तरह रहते तो कैसे होते। यह सुनकर मैं उत्साहित हो गया। एक पहाड़ी लड़का, जो जीप चलाता है, बच्चों को पढ़ाता है और एक लव ट्रायंगल का हिस्सा है यह कॉम्बिनेशन दिलचस्प लगा। साथ ही पहाड़ों में शूटिंग का अनुभव बेहद खास रहा। ठंड, मौसम और लोकेशन की चुनौतियों के बावजूद सेट पर परिवार जैसा माहौल था। रिलीज से पहले दर्शकों के लिए आपका एक संदेश आखिर 6 मार्च को वे आपकी फिल्म देखने सिनेमाघर क्यों जाएं? जतीन सरना- हमने दिल से फिल्म बनाई है। अब इसे पार लगाने की जिम्मेदारी दर्शकों की है। बस एक मौका दीजिए 6 मार्च को सिनेमाघरों में जाकर फिल्म देखिए। मधुरिमा रॉय- आज के टॉक्सिक माहौल में प्यार ही एक ऐसी चीज है जो दुनिया को सॉफ्ट बना सकती है। यह फिल्म उसी सादगी और मासूमियत की बात करती है। प्रणय पचौरी- बहुत समय बाद एक सिंपल लव स्टोरी आई है। यह फिल्म प्यार को समझने और सेलिब्रेट करने की कोशिश है। उम्मीद है दर्शक इसे अपनाएंगे।

‘ना जाने कौन आ गया’ सादगी भरी प्रेम कहानी:जतीन सरना, मधुरिमा रॉय और प्रणय पचौरी ने प्यार, आत्ममंथन और सादगी पर खुलकर की बात

‘ना जाने कौन आ गया’ सादगी भरी प्रेम कहानी:जतीन सरना, मधुरिमा रॉय और प्रणय पचौरी ने प्यार, आत्ममंथन और सादगी पर खुलकर की बात

6 मार्च को रिलीज हो रही फिल्म ‘ना जाने कौन आ गया’ एक सादगी भरी लव स्टोरी है, जो रिश्तों की जटिलताओं, आत्ममंथन और प्यार की मासूमियत को बड़े पर्दे पर पेश करती है। पहाड़ों की खूबसूरत वादियों में फिल्माई गई यह कहानी आज के दौर के टॉक्सिक माहौल में प्यार और संवेदनशीलता की बात करती है। फिल्म में जतीन सरना, मधुरिमा रॉय और प्रणय पचौरी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म की रिलीज से पहले दैनिक भास्कर ने स्टारकास्ट से खास बातचीत की। कलाकारों ने अपने किरदार, शूटिंग के अनुभव और फिल्म के संदेश को लेकर खुलकर बातें की हैं। स्क्रिप्ट पढ़ते ही ऐसा कौन-सा पहलू था जिसने आपको महसूस कराया कि यह फिल्म आपको जरूर करनी चाहिए? जतीन सरना- मेरे किरदार की सादगी ने मुझे सबसे ज्यादा आकर्षित किया। वो एक आम इंसान है, जो जिंदगी को जीने के बजाय सिर्फ सर्वाइव करने में फंसा रहता है। ऐसे लोगों का दर्द, उनकी मासूमियत और जिंदगी को बस जी लेने की चाह यही मुझे छू गया। एक अभिनेता के तौर पर मुझे लगा कि यह एक नया और अनछुआ किरदार है। निर्देशक विकास ने जिस तरह कहानी सुनाई, उसी वक्त तय कर लिया कि यह फिल्म करनी है। ट्रेलर में हेट, लव और बिट्रेयल की झलक दिखती है। क्या आप इससे रियल लाइफ में रिलेट करते हैं? जतीन सरना- जहां प्यार होगा, वहां नफरत भी होगी, धोखा भी और अफसोस भी। लेकिन जिंदगी की खूबसूरती इन्हीं भावनाओं को समझकर आगे बढ़ने में है। यही जीवन का चक्र है। इस फिल्म में आपका किरदार पहले निभाए गए रोल्स से किस तरह अलग है, और उसे पर्दे पर उतारना आपके लिए कितना चुनौतीपूर्ण रहा? मधुरिमा रॉय- मेरे पिछले किरदारों में डार्क शेड्स ज्यादा थे, लेकिन इस फिल्म में मेरा किरदार बहुत मासूम और पॉजिटिव है। वह कमरे में आती है तो माहौल बदल देती है। उसकी सरलता और बचपना निभाना आसान नहीं था। सादगी को निभाना, नेगेटिव किरदारों से कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण होता है। आज के युवाओं के लिए फिल्म क्या संदेश देती है? मधुरिमा रॉय- आज सोशल मीडिया और डेटिंग ऐप्स के दौर में रिश्ते बहुत कॉम्प्लिकेटेड हो गए हैं। हम हर चीज को ‘लव बॉम्बिंग’, ‘घोस्टिंग’ जैसे टर्म्स में बांट देते हैं। हमारी फिल्म कहती है थोड़ा रुकिए, खुद को समझिए। हर गलती सामने वाले की नहीं होती, कभी-कभी हमें भी खुद में झांकने की जरूरत होती है। प्यार में पवित्रता और सादगी को फिर से महसूस कीजिए। स्क्रिप्ट सुनते ही आपके मन में पहली प्रतिक्रिया क्या थी, और किस बात ने आपको इस फिल्म का हिस्सा बनने के लिए सबसे ज्यादा उत्साहित किया? प्रणय पचौरी- मुझे बताया गया कि सोचिए अगर ओशो पहाड़ों में एक आम इंसान की तरह रहते तो कैसे होते। यह सुनकर मैं उत्साहित हो गया। एक पहाड़ी लड़का, जो जीप चलाता है, बच्चों को पढ़ाता है और एक लव ट्रायंगल का हिस्सा है यह कॉम्बिनेशन दिलचस्प लगा। साथ ही पहाड़ों में शूटिंग का अनुभव बेहद खास रहा। ठंड, मौसम और लोकेशन की चुनौतियों के बावजूद सेट पर परिवार जैसा माहौल था। रिलीज से पहले दर्शकों के लिए आपका एक संदेश आखिर 6 मार्च को वे आपकी फिल्म देखने सिनेमाघर क्यों जाएं? जतीन सरना- हमने दिल से फिल्म बनाई है। अब इसे पार लगाने की जिम्मेदारी दर्शकों की है। बस एक मौका दीजिए 6 मार्च को सिनेमाघरों में जाकर फिल्म देखिए। मधुरिमा रॉय- आज के टॉक्सिक माहौल में प्यार ही एक ऐसी चीज है जो दुनिया को सॉफ्ट बना सकती है। यह फिल्म उसी सादगी और मासूमियत की बात करती है। प्रणय पचौरी- बहुत समय बाद एक सिंपल लव स्टोरी आई है। यह फिल्म प्यार को समझने और सेलिब्रेट करने की कोशिश है। उम्मीद है दर्शक इसे अपनाएंगे।

दुबई का डॉक्टर बोला-लड़का ही होगा, गारंटी हमारी:इंटरनेशनल रैकेट 35 लाख में बेच रहा बेटे की चाहत, एमपी तक जुड़े तार

दुबई का डॉक्टर बोला-लड़का ही होगा, गारंटी हमारी:इंटरनेशनल रैकेट 35 लाख में बेच रहा बेटे की चाहत, एमपी तक जुड़े तार

प्रेग्नेंसी पॉजिटिव हो जाएगी तो हंड्रेड परसेंट बॉय आएगा… गर्ल विल बी डिस्कार्ट (लड़की वाले भ्रूण को नष्ट कर दिया जाएगा)… ये कहते हुए डॉ. गौतम इलाहबादिया के चेहरे पर 100 फीसदी कॉन्फिडेंस नजर आता है। डॉ. इलाहबादिया दुबई में खुद के नाम से आईवीएफ सेंटर चलाते हैं। भास्कर रिपोर्टर ने उन्हें एक ग्राहक बनकर वीडियो कॉल किया था। डॉ. इलाहबादिया ने रिपोर्टर को लिंग चयन ( सेक्स डिटरमिनेशन) की पूरी प्रक्रिया समझाई। ये भरोसा भी दिया कि आईवीएफ की जिस एडवांस टेक्निक का वो इस्तेमाल करेंगे उससे लड़का होने की ही गारंटी है। इस प्रक्रिया के लिए उन्होंने 30-35 लाख रुपए का खर्च बताया। डॉ. इलाहबादिया को उस अंतरराष्ट्रीय रैकेट का हिस्सा कहा जा सकता है, जो भारत में बेटे की चाहत रखने वाले दंपतियों की मजबूरी का फायदा उठाकर करोड़ों का कारोबार कर रहा है। दैनिक भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने इस रैकेट का पर्दाफाश किया है, जिसके तार दुबई, थाईलैंड और तुर्की से लेकर भारत की राजधानी दिल्ली तक फैले हुए हैं। यह रैकेट न केवल उन लोगों को टारगेट कर रहा है जो विदेश जा सकते हैं बल्कि उन लोगों के लिए भी दिल्ली में अवैध व्यवस्था चला रहा है। जिनके पास पासपोर्ट नहीं है या जो विदेश जाने का जोखिम नहीं उठाना चाहते। कैसे चल रहा है ये पूरा नेटवर्क और कैसे गर्भ में लड़का इंप्लांट करने की गारंटी दी जा रही है? पढ़िए रिपोर्ट… कमीशन के लालच से शुरू हुई पड़ताल इस पूरे मामले की जांच तब शुरू हुई जब मध्य प्रदेश सहित देश के कई प्रतिष्ठित गायनेकोलॉजिस्ट के पास दुबई के IVF सेंटरों से ईमेल आने लगे। इन ईमेल में एक चौंकाने वाला ऑफर था – ‘आप हमें ऐसे मरीज भेजें जिन्हें केवल लड़का चाहिए, हम आपको इलाज के कुल खर्च का 10 प्रतिशत कमीशन देंगे।’ जहां कई डॉक्टरों ने इस अनैतिक और गैर-कानूनी पेशकश को तुरंत ठुकरा दिया, वहीं कुछ के इस लालच में फंसने की भी सूचना मिली। यह स्पष्ट था कि भारत के सख्त ‘गर्भधारण पूर्व और प्रसवपूर्व निदान तकनीक (PCPNDT) एक्ट, 1994’ की वजह से जो अवैध काम यहां नहीं हो सकता, उसे विदेशी धरती पर अंजाम दिया जा रहा है। भास्कर इन्वेस्टिगेशन के 6 पॉइंट्स डॉक्टर बोला- दुबई नहीं तो टर्की भेज देंगे पड़ताल को आगे बढ़ाते हुए भास्कर रिपोर्टर ने एक ऐसे ही दंपती के तौर पर दुबई के प्रसिद्ध इलाहाबादिया IVF सेंटर से संपर्क साधा, जिसे बेटे की चाह थी। कुछ शुरुआती बातचीत और रिपोर्ट्स भेजने के बाद, सेंटर के प्रमुख डॉ. गौतम इलाहाबादिया के साथ एक जूम मीटिंग तय हुई। मीटिंग में डॉ. इलाहाबादिया ने रिपोर्टर की पत्नी की मेडिकल रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा, ‘आपकी वाइफ का एएमएच (एंटी-मुलरियन हार्मोन) बहुत लो है। अगर हमें टेस्टिंग के लिए नौ भ्रूण (एंब्रियो) चाहिए, तो कम से कम छह बार IVF करना पड़ेगा, जिसके लिए आपको चार से पांच बार दुबई आना होगा।’ जब रिपोर्टर ने पूछा कि नौ भ्रूण क्यों चाहिए, तो जवाब और भी चौंकाने वाला था। ‘हां, नौ करेंगे तो उसमें एक या दो लड़के निकलते हैं।’ उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया का खर्च 30 से 35 लाख रुपए बताया। जब रिपोर्टर ने इतनी बार दुबई आने में असमर्थता जताई, तो डॉ. इलाहाबादिया ने तुरंत एक और रास्ता सुझाया। साइप्रस में हम लोग एक काम करते हैं, यहां के पेशेंट सब साइप्रस जाते हैं, टर्की का पार्ट है। वहां जाकर डोनर एग से लड़का हो सकता है। पासपोर्ट नहीं तो दिल्ली में है ‘अवैध’ जुगाड़ बातचीत का रुख तब पूरी तरह बदल गया जब रिपोर्टर ने पासपोर्ट बनवाने में आ रही समस्या का जिक्र किया। यह सुनते ही डॉ. इलाहाबादिया ने जो कहा, वह इस रैकेट के दिल्ली कनेक्शन को उजागर करने के लिए काफी था। डॉ इलाहबादिया बोले- यहां दिल्ली में लोग इल्लीगल भी यही करते हैं, मगर कुछ भी राइटिंग में नहीं देते हैं। मैं आपको उन लोगों से कनेक्ट करवा देता हूं, पर उसके बाद आपको आपके ही रिस्क पर डील करना है। उन्होंने तुरंत अपना वॉट्सएप नंबर (0097156xxxx000) दिया और कहा कि इस पर मैसेज करें तो मैं दिल्ली के मिस्टर गौरव वानखेड़े का नंबर देता हूं, इन्हें बोलना कि आपको लड़का चाहिए डोनर एग से। उन्होंने साफ किया कि यह सब ‘ग्रे जोन’ में होता है और वह इसमें सीधे तौर पर शामिल नहीं होंगे। आपका जब भी पासपोर्ट रेडी हो जाए आप कॉन्टैक्ट करिए। आपको हम सारा प्लान समझा देंगे। दलाल बोला- इस काम में मेरे अलावा गिने-चुने लोग डॉ. इलाहाबादिया से मिले नंबर पर जब दिल्ली में बैठे दलाल गौरव वानखेड़े से बात हुई, तो उसने इस अवैध कारोबार की पूरी रूपरेखा सामने रख दी। उसने खुद को इस इंडस्ट्री में 20 साल पुराना खिलाड़ी बताया और कहा कि उसका काम IVF, डोनर एग और सरोगेसी ऑर्गनाइज करना है। जब रिपोर्टर ने बेटे की चाहत और दुबई न जा पाने की मजबूरी बताई, तो वानखेड़े ने आश्वासन दिया कि आपका काम हो जाएगा। उसने बताया कि यह सब दिल्ली में ही होगा और अगर अच्छा रिजल्ट चाहिए तो दिल्ली ही एकमात्र जगह है। उसने दावा किया कि ये इंडिया में गिन चुन के दो या तीन लोग ही करते हैं। उनमें से मैं एक हूं। वानखेड़े ने बताया कि हमारा एक हॉस्पिटल है। आप मुझे रिपोर्ट्स भेजिए। मैं पूरी स्टडी करने के बाद एक पूरा प्लान बनाकर भेजूंगा। स्टेप बाय स्टेप बताऊंगा कैसे इलाज होगा । डोंट वरी हो जाएगा आपका काम जेंडर की पूरी गारंटी इस रैकेट की गहराई को और समझने के लिए हमारी टीम ने दुबई के एक और बड़े सेंटर, न्यू होप IVF सेंटर, से संपर्क किया। यहां हमारी बात डॉ. गोमथी और फिर डॉ. धनशंकर के आर से हुई। डॉ. धनशंकर ने जो खुलासे किए, वे रोंगटे खड़े कर देने वाले थे। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, ‘आईवीएफ का हंड्रेड परसेंट गारंटी पॉसिबल नहीं है, बट जेंडर का गारंटी दे रहा हूं। प्रेग्नेंसी पॉजिटिव हो जाएगा तो हंड्रेड परसेंट बॉय आएगा। जब रिपोर्टर ने पूछा कि यह कैसे संभव है, तो उन्होंने पूरी वैज्ञानिक प्रक्रिया समझाई। हम स्पर्म और एग को मिलाकर भ्रूण बनाते हैं। भ्रूण को गर्भ में डालने से पहले हम जेनेटिक टेस्टिंग करते हैं। वापस जाकर कहना

NCERT किताब में ‘ज्यूडीशियल करप्शन’ चैप्टर पर आज सुनवाई:सुप्रीम कोर्ट ने खुद संज्ञान लिया; CJI बोले- न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं देंगे

NCERT किताब में ‘ज्यूडीशियल करप्शन’ चैप्टर पर आज सुनवाई:सुप्रीम कोर्ट ने खुद संज्ञान लिया; CJI बोले- न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं देंगे

सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को NCERT के क्लास 8 की सोशल साइंस की किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़े चैप्टर को लेकर विवाद पर सुनवाई करेगा। कोर्ट ने बुधवार को मामले पर खुद संज्ञान लिया था। CJI सूर्यकांत के साथ जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच सुनवाई करेगी। बुधवार को CJI ने इस मामले पर कड़ी आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को बदनाम करने या उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाने की इजाजत किसी को नहीं दी जाएगी। इससे पहले सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने अभिषेक सिंघवी के साथ मामले का जिक्र करते हुए तत्काल सुनवाई की मांग की थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर स्वत: संज्ञान लिया। सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद बुधवार शाम NCERT ने अपनी वेबसाइट से किताब को हटा लिया। सूत्रों के अनुसार, किताब से विवादित चैप्टर हटाया जा सकता है। सरकार ने भी किताब में ज्यूडीशियल करप्शन शामिल करने पर आपत्ति जताई है। सरकार ने कहा- शासन के तीनों अंगों को जोड़ना चाहिए था NCERT चेयरमैन दिनेश प्रसाद सकलानी का इस मुद्दे पर कोई जवाब नहीं आया है। काउंसिल के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि मामला अब कोर्ट में विचाराधीन है। इसलिए वे इस मुद्दे पर कुछ भी नहीं बोंलेंगे। इस बीच सरकारी सूत्रों ने कहा कि भले ही NCERT एक ऑटोनॉमस संस्था है, लेकिन चैप्टर जोड़ने से पहले अधिकारियों को ध्यान देना चाहिए था। सरकारी सूत्रों ने कहा कि अगर भ्रष्टाचार का मुद्दा शामिल करना था, तो उसमें शासन के तीनों अंगों- कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका को भी जोड़ा जाना चाहिए था। सरकारी सूत्रों ने कहा कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से संबंधित आंकड़े संसदीय अभिलेखों और नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड में मौजूद हैं, लेकिन फैक्ट्स के क्रॉस वेरिफिकेशन के लिए केंद्र से परामर्श नहीं लिया गया। विवादित चैप्टर NCERT की नई सोशल साइंस टेक्स्टबुक में था NCERT ने 23 फरवरी को क्लास 8 के स्टूडेंट्स के लिए सोशल साइंस की नई टेक्‍स्‍टबुक जारी की थी। किताब का नाम ‘एक्सप्लोरिंग सोसायटी: इंडिया एंड बियॉन्ड पार्ट 2’ है। इसमें ‘द रोल ऑफ द ज्यूडीशियरी इन अवर सोसायटी’ चैप्टर के अंदर ‘करप्‍शन इन द ज्‍यूडिशियरी’ का टॉपिक जोड़ा गया है। इसमें कहा गया है कि भ्रष्टाचार, बड़ी संख्या में पेंडिंग मामले और जजों की भारी कमी ज्‍यूडिशियल सिस्टम के सामने प्रमुख चुनौतियों में शामिल हैं। जज आचार संहिता से बंधे होते हैं, जो न केवल कोर्ट में उनके व्यवहार को कंट्रोल करता है, बल्कि कोर्च के बाहर उनके आचरण को भी तय करती है। एक टॉपिक का टाइटल- इंसाफ में देरी इंसाफ न मिलने जैसा किताब के एक सेक्शन का टाइटल ‘Justice delayed is justice denied’ है। इसका मतलब है- इंसाफ में देरी इंसाफ न मिलने जैसा है। यहां सुप्रीम कोर्ट में 81 हजार, हाईकोर्ट्स में 62 लाख 40 हजार, डिस्ट्रिक्ट और सबऑर्डिनेट कोर्ट के 4 करोड़ 70 लाख पेंडिंग केस की संख्या भी बताई गई है। ये किताब एकेडमिक सेशन 2026-27 से स्‍कूलों में पढ़ाई जानी थी। इसका पहला पार्ट जुलाई 2025 में रिलीज किया गया था। NCERT ने नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क यानी NCF और NEP-2020 के तहत सभी क्‍लासेज की नई किताबें तैयार की हैं। कोरोना महामारी के बाद पुरानी किताबों के टॉपिक्‍स को बदलकर नए टॉपिक्‍स किताबों में जोड़े जा रहे हैं। पहली से 8वीं क्लास तक की नई किताबें 2025 में ही पब्लिश की जा चुकी हैं। किताब का वो हिस्सा जिसमें करप्शन और पेंडिंग केस का जिक्र… नई किताब में ज्यूडीशियरी से जुड़े अहम पॉइंट्स… किताब में पूर्व CJI बीआर गवई का भी जिक्र किताब में भारत के पूर्व चीफ जस्टिस बीआर गवई का भी जिक्र है, जिन्होंने जुलाई 2025 में कहा था कि ज्यूडिशियरी के अंदर करप्शन और गलत कामों के मामलों का पब्लिक ट्रस्ट पर बुरा असर पड़ता है। उन्होंने कहा था, “हालांकि, इस ट्रस्ट को फिर से बनाने का रास्ता इन मुद्दों को सुलझाने के लिए उठाए गए तेज, निर्णायक और ट्रांसपेरेंट एक्शन में है… ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी डेमोक्रेटिक गुण हैं।” —————————— ये खबर भी पढ़ें… NCERT ने 8वीं क्लास की सोशल साइंस की किताब में जोड़ा न्यायपालिक से जुड़ा सेक्शन नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने पहली बार 8वीं के बच्चों के लिए ज्यूडीशियरी में करप्शन के बारे में पढ़ाने का फैसला लिया गया। यह पिछले एडिशन के मुकाबले बड़ा बदलाव था। पिछले चैप्टर में ज्यादातर कोर्ट के स्ट्रक्चर और रोल पर फोकस किया गया था। बदले हुए चैप्टर का नाम ‘हमारे समाज में ज्यूडिशियरी की भूमिका’ रखा गया। पढ़ें पूरी खबर…

कनाडा में ग्रूमिंग गैंग के टारगेट पर पंजाबी लड़कियां:लालच-डर दिखाकर साथ सोने को करते मजबूर; युवकों के साथ रेस्टोरेंट मैनेजर-लैंडलॉर्ड भी शामिल

कनाडा में ग्रूमिंग गैंग के टारगेट पर पंजाबी लड़कियां:लालच-डर दिखाकर साथ सोने को करते मजबूर; युवकों के साथ रेस्टोरेंट मैनेजर-लैंडलॉर्ड भी शामिल

कनाडा में पंजाबी लड़कियां ग्रूमिंग गैंग के टारगेट पर हैं। यह गैंग स्टडी वीजा पर आईं युवतियों के साथ कई तरह के लालच देकर उन्हें फंसाता है। फिर उन्हें साथ सोने के लिए मजबूर करता है। इसके लिए युवकों ने बाकायदा वॉट्सऐप ग्रुप तक बनाए हुए हैं। ऐसा ही एक युवक इस ग्रुप से बाहर निकला तो उसने इसकी पूरी कहानी बता दी। कनाडा में द कौर मूवमेंट की फाउंडर गुरप्रीत कौर ने कनाडा के एक रेडियो चैनल पर इसका खुलासा किया। गुरप्रीत ने कहा कि इसमें सिर्फ युवक ही नहीं बल्कि घर के मालिक यानी लैंडलॉर्ड, रेस्टोरेंट ऑनर या मैनेजर के अलावा कंपनी के लोग तक शामिल हैं। वह कभी फीस चुकाने-किराया माफ करने का लालच देते हैं तो कभी जॉब देने का, जिसके चक्कर में युवतियां फंस जाती हैं। यहां तक कि उनका बिल भरने का लालच भी दिया जाता है। कोई नहीं मानती तो उसे घर या देश से निकालने का भी डर दिखाया जाता है। लड़कियों को कैसे टारगेट करते ग्रूमिंग गैंग 150 लड़कों का ग्रूमिंग ग्रुप का कॉलेजों में जाल द कौर मूवमेंट की संस्थापक गुरप्रीत कौर बताती हैं कि सरे और टोरंटो जैसे शहरों में व्हाट्सएप पर ऐसे व्हाट्सएप ग्रुप चल रहे हैं जिनमें लगभग 150 लड़के शामिल हैं। इन ग्रुप्स का एजेंडा उन पंजाबी लड़कियों को निशाना बनाना है जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं या विदेश में अकेली रह रही हैं। ये लड़के अक्सर कॉलेजों में दोस्त बनकर लड़कियों के करीब आते हैं और उनकी पर्सनल जानकारी जुटाते हैं। इसके बाद वे उस जानकारी को अपने ग्रुप में शेयर करते हैं। उनके लिए लड़कियों का शोषण गेम बन गया है। गुरप्रीत कौर ने बताया कि लड़कों का मकसद उन लड़कियों को टारगेट करना है जो अकेली आई हैं। उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता, वे बस आपके साथ सोना चाहते हैं। उनका मेन मकसद यही होता है कि वे आपके साथ सोएं या फिर यह एक गेम बनाया हुआ है कि लेट्स सी (चलो देखो) कि हम क्या कर सकते हैं। रूम रेंट भरने या कैश का दिया जा रहा लालच गुरप्रीत कौर कहती हैं कि पंजाबी के साथ दूसरे देशों की लड़कियों का फिजिकल शोषण ट्रैप लगाकर किया जाता है। लड़कियों की मजबूरी का फायदा उठाते हुए उन्हें यह लालच दिया जाता है कि यदि वे शारीरिक संबंध बनाएंगी तो उनका रूम रेंट भर दिया जाएगा या कैश पैसा दे देंगे। रेस्टोरेंट पर भी यह बहुत आम है। मैनेजर्स लड़कियों को घंटे देने या डबल पैसे देने का वादा करते हैं, बशर्ते लड़कियां उनके साथ सोएं। यहां तक कि शादीशुदा मकान मालिक भी कॉलेज स्टूडेंट्स का फायदा उठाते हैं। बदनामी के डर से आवाज नहीं उठा रहीं लड़कियां गुरप्रीत कौर बताती हैं कि इस पूरी समस्या की जड़ इंडियन लोगों की सोच और लोग क्या कहेंगे का डर है। गुरप्रीत बताती हैं कि 12 फीसदी यौन शोषण के मामले परिवार के अंदर से आ रहे हैं। कनाडा की फैमिली में भी बुरा हाल है। कनाडा की लड़कियां तो सामने आ जाती हैं लेकिन इंडियन लड़कियां बदनामी के डर से चुप रह जाती हैं। कई बार पंजाब में बैठे माता-पिता का कर्ज उताने का दबाव भी गलत रास्तों पर धकेल देता है। गुरप्रीत ने कहा कि कनाडा में रह रही लड़कियों के पास माता-पिता को आना चाहिए ताकि जहां पर वे रेंट पर रह रही हैं, वहां डर रहे। कॉलेजों में लड़कियों के साथ बनाते दोस्ती ग्रुप में शामिल लड़के या तो खुद कॉलेज में लड़की से मिले होते हैं या फिर दोस्तों जरिए कनेक्ट कर लेते हैं। लड़की को लेकर आने वाले को भी कुछ न कुछ लालच दिा जाता है। इसलिए सब कनेक्टेड रहते हैं। गुरप्रीत कौर ने बताया कि सरे वाले ग्रुप में एक लड़का था और जब वह उस ग्रुप में गया तो उसे पता नहीं था कि यहां ये सब चल रहा है। उसने किसी तरीके से ग्रुप छोड़ दिया और सारी इन्फॉर्मेशन दी। गुरप्रीत कौर ने बताया कि इस तरह से लड़कियों के फिजिकल शोषण के लिए कनाडा में सख्त कानून हैं, लेकिन दुख इस बात का है कि अकसर ऐसे मामले तभी सामने आते हैं जब रेप हो चुका होता है। पंजाब में भी ग्रूमिंग गैंग का चलन बढ़ रहा पंजाब में भी ग्रूमिंग गैंग के निशाने पर पंजाबी लड़कियां हैं। इसे लेकर निहंग अकाली गज्ज सिंह नामक अकाउंस से वीडियो शेयर कर चिंता जताई गई है। वीडियो में दावा किया गया है कि ये पंजाब का वीडियो है। इसमें एड्रेस को छिपाते हुए मुस्लिम लड़के के साथ रोजा खोलती सिख लड़की दिखाई गई है। निहंग सिंह ने दावा किया कि देख लो पंजाब में ग्रूमिंम कैसे होती है। हमारे पंजाब की बेटी रोजा खोल रही है जैसे इसकी बुआ की शादी हो। इसी तरह की हरकतों से पूरे सिख पंथ पर बात आ जाती है। दूसरे लोग तो जान-बूझकर ऐसी वीडियो डालते हैं ताकि लोग देखें कि कैसे हम तुम्हारी बेटियों को बदल रहे हैं। इसे तो गुरबाणी में से मूल मंत्र भी ढंग से नहीं आता होगा। इसे पूछना चाहिए कि तुम्हारी ये क्या करतूत है। निहंग सिंह ने कहा कि हम इसलिए बोल रहे हैं कि ये पंजाबी लड़की है, वरना ये कहीं भी चली जाए हमें फर्क नहीं पड़ता।

current affairs 26 february Ott platforms with soft porn content banned

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Hindi News Career Current Affairs 26 February Ott Platforms With Soft Porn Content Banned 1 घंटे पहले कॉपी लिंक जानते हैं आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं… इंटरनेशनल (INTERNATIONAL) 1. रॉब जेटन नीदरलैंड के पीएम बने 24 फरवरी को रॉब जेटन ने नीदरलैंड के पीएम के तौर पर पदभार ग्रहण किया। 38 वर्षीय जेटन नीदरलैंड के इतिहास में सबसे कम उम्र के पीएम बने हैं। वे देश के पहले गे पीएम भी हैं। जेटन ने पूर्व पीएम मार्क रुटे के कार्यकाल के दौरान डिप्टी प्राइम मिनिस्टर के तौर पर भी कार्य किया है और वे जलवायु और ऊर्जा नीति मंत्री भी रह चुके हैं। जेटन ने क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक अलायंस यानी CDA और पीपुल्स पार्टी ऑफ फ्रीडम एंड डेमोक्रेसी यानी VVD के साथ मिलकर अलायंस बनाया था। 117 दिनों की बातचीत के बाद, जेटन ने अपने D66, CDA और VVD के साथ गठबंधन की सरकार बनाई है। जेटन की गठबंधन की 150 सीटों में से सिर्फ 66 सीटें हैं। जेटन को कानून पारित करने के लिए विपक्षी दलों के साथ बातचीत की जरूरत होगी। रॉब जेटन ने अक्टूबर 2025 में हुए आकस्मिक चुनावों में डेमोक्रेट्स 66 यानी D66 पार्टी को जीत दिलाई थी। 2. कनाडा के पीएम मार्क कार्नी भारत यात्रा पर आएंगे 26 फरवरी को कनाडा के पीएम मार्क कार्नी भारत के दौरे पर आएंगे। वे 7 मार्च तक भारत में रहेंगे। पीएम मार्क कार्नी की ये पहली आधिकारिक भारत यात्रा है। कार्नी 2 मार्च को पीएम मोदी के साथ उच्च स्तरीय वार्ता के लिए नई दिल्ली में मुलाकात करेंगे। भारत यात्रा के दौरान दोनों नेता क्लीन एनर्जी, डिफेंस एंड टेक्नोलॉजी में नई साझेदारी पर बात करेंगे। इससे पहले पीएम मोदी ने नवंबर 2025 में जोहान्सबर्ग में G20 शिखर सम्मेलन के मौके पर कार्नी से मुलाकात की थी। 2024 में भारत, कनाडा का 7वां सबसे बड़ा माल और सर्विस बिजनेस पार्टनर था। दोनों देशों का व्यापार 30.8 बिलियन डॉलर था। पीएम मोदी ने नवंबर 2025 में जोहान्सबर्ग में G20 शिखर सम्मेलन के मौके पर कनाडा के पीएम मार्क कार्नी से मुलाकात की थी। 3. स्प्लिट्सविला फेम मयंक पवार का निधन 24 फरवरी को फिटनेस ट्रेनर मयंक पवार का निधन हो गया। मयंक रियलिटी शो स्प्लिट्सविला सीजन 7 में से मशहूर हुए थे। शो के दौरान उनके व्यवहार के लिए उन्हें काफी तारीफ मिली थी। 1 जनवरी को ही पवार ने अपना 37वां जन्मदिन मनाया था। मयंक मिस्टर इंडिया का खिताब जीत चुके थे। मयंक एक सेलिब्रिटी फिटनेस ट्रेनर भी थे। 4. एक्टर रॉबर्ट कैराडाइन का निधन 24 फरवरी को हॉलीवुड एक्टर रॉबर्ट कैराडाइन का निधन हो गया। वे 71 साल के थे। रॉबर्ट कैराडाइन द लॉन्ग राइडर्स, रिवेंज ऑफ द नर्ड्स (1984) और टेलीविजन सीरीज लिजी मैक्‍ग्‍वायर में अपनी एक्टिंग के लिए जाने जाते थे। कैराडाइन ने 1972 में फिल्म ‘द काउबॉयज’ से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी। 1984 की फिल्म रिवेंज ऑफ द नर्ड्स में सोशल मिसफिट के आदर्शवादी नेता लुईस स्कोलनिक के किरदार से उन्हें लोकप्रियता मिली थी। अपने करियर में लंबे ब्रेक के बाद कैराडाइन ने 2001 से 2004 के बीच मशहूर डिज्नी टेलीविजन सीरीज लिजी मैक्‍ग्‍वायर में काम किया था। कैराडाइन पहली बार 1971 में वेस्टर्न सीरीज बोनान्जा में टेलीविजन पर दिखाई दिए थे। 5. पोखरण में ‘अग्नि वर्षा’ अभ्यास हुआ 24 फरवरी को इंडियन आर्मी की दक्षिणी कमान ने राजस्थान की पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में ‘अग्नि वर्षा’ अभ्यास किया। अग्नि वर्षा सेना का एक कंबाइंड आर्म्स यानी अलग-अलग युद्ध इकाइयों का एक साथ तेज और सटीक कार्रवाई का अभ्यास है। अग्नि वर्षा अभ्यास के दौरान सेना ने रेगिस्तानी क्षेत्र में आधुनिक तकनीक और संयुक्त युद्ध क्षमता का दमदार प्रदर्शन किया। इस हाई-इंटेंसिटी एक्सरसाइज का उद्देश्य सेना की ऑपरेशनल रेडीनेस और इंटीग्रेटेड कॉम्बैट कैपेबिलिटी को प्रदर्शित करना था। इस अभ्यास में राफेल, मिराज और जगुआर जैसे विमानों ने सटीक बमबारी की, जबकि आकाश मिसाइलों ने हवा में लक्ष्यों को ध्वस्त किया। इस युद्धाभ्यास में T-90 मुख्य युद्धक टैंक, पैदल सेना के लड़ाकू वाहन, K-9 वज्र स्व-चालित हॉवित्जर, शारंग और बोफोर्स तोपखाने, रॉकेट प्लेटफॉर्म, स्वदेशी HAL ध्रुव हथियार, एएच-64 अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर, निगरानी और हमलावर ड्रोन शामिल हुए। इस युद्धाभ्यास को देखने के लिए दुनिया के 25 देशों के डिफेंस जर्नलिस्ट और एक्सपर्ट मौजूद रहे। 6. भारत-अमेरिका का संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘वज्र प्रहार’ शुरू हुआ 24 फरवरी को भारत-अमेरिका की 16वीं जॉइंट स्पेशल फोर्स एक्सरसाइज ‘वज्र प्रहार’ शुरू हुई। ये जॉइंट एक्सरसाइज 16 मार्च तक चलेगी। ‘वज्र प्रहार’ अभ्यास हिमाचल प्रदेश के बकलोह में स्पेशल फोर्स एक्सरसाइज स्कूल में शुरू हुआ है। ‘वज्र प्रहार’ में भारतीय सेना के विशेष बलों के 45 जवान और अमेरिकी सेना के ग्रीन बेरेट्स के 12 जवान एक साथ शामिल होते हैं। यह एक्सरसाइज दोनों देशों के बीच पार्टनरशिप बढ़ाने और सिक्योरिटी चैलेंजेस से लड़ने के लिए है। जॉइंट एक्सरसाइज का उद्देश्य ऑपरेशनल कैपिबलिटी को बढ़ाना और युद्ध की तैयारी करना है। इस द्विपक्षीय अभ्यास का उद्देश्य पहाड़ी इलाकों में ऑपरेशन करना और इंटर ऑपरेबिलिटी, स्पेशल ऑपरेशन्स पॉलिसी को एक्सचेंज करना है। ये एक्सरसाइज आम तौर पर भारत और अमेरिका के बीच बारी-बारी से होती है, जिससे दोनों देशों को अलग-अलग इलाकों और ऑपरेशनल चैलेंजेस का अनुभव मिलता है। साल 2024 में ये जॉइंट एक्सरसाइज अमेरिका के इडाहो में ऑर्चर्ड कॉम्बैट ट्रेनिंग सेंटर में आयोजित की गई थी। इसका पहला सेशन 2010 में आयोजित किया गया था। इसके साथ ही 7वां भारत-जापान संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘धर्म गार्जियन’ उत्तराखंड में शुरू हुआ है। जॉइंट एक्सरसाइज से दोनों देशों को जॉइंट मिशन प्लानिंग, टेक्टिकल ड्रिल और स्पेशल ट्रेनिंग में मदद मिलेगी। 7. केंद्र सरकार ने 5 OTT प्लेटफॉर्म बैन किए 24 फरवरी को केंद्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 5 ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म (OTT) को बैन कर दिया है। जिन प्लेटफॉर्म पर कार्रवाई हुई, उनमें मूडएक्सवीआईपी, कोयल प्लेप्रो, डिजी मूवीप्लेक्स, फील और जुगनू शामिल हैं। सरकार का कहना है कि इन प्लेटफॉर्म पर अश्लील और आपत्तिजनक कंटेंट दिखाया जा रहा था। इन 5 OTT प्‍लेटफॉर्म्स का कंटेंट IT एक्ट 2000, IT एक्ट 2021, और BNP की धारा 294 का उल्‍लंघन पाया गया। जुलाई 2025 में Ullu-ALTT समेत 25 OTT प्लेटफॉर्म बैन किए गए थे। ALTT ऐप अप्रैल

Abhishek Sharma; IND vs ZIM T20 World Cup LIVE Score Update

Abhishek Sharma; IND vs ZIM T20 World Cup LIVE Score Update

स्पोर्ट्स डेस्क35 मिनट पहले कॉपी लिंक टी-20 वर्ल्ड कप में सुपर-8 का 8वां मैच आज भारत और जिम्बाब्वे के बीच खेला जाएगा। मुकाबला शाम 7 बजे से चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में शुरू होगा। टॉस शाम 6.30 बजे होना है। दोनों ही टीमों के लिए करो या मरो का मुकाबला है। हारने वाली टीम सेमीफाइनल की रेस से बाहर हो जाएगी। जीतने वाली टीम के पास चांस बना रहेगा। जीतने वाली टीम को वेस्टइंडीज की हार का इंतजार भी है, अगर विंडीज आज का पहला मैच जीत गई तो रात का मैच जीतकर भी टीम की राह मुश्किल ही रहेगी। सुपर-8 स्टेज में दोनों ही टीमों की शुरुआत खराब रही। भारत को साउथ अफ्रीका ने 76 रन से हराया। वहीं जिम्बाब्वे को वेस्टइंडीज ने 107 रन से हरा दिया। भारत ने 77% मुकाबले जीते भारत और जिम्बाब्वे के बीच टी-20 फॉर्मेट में अब तक 13 मैच खेले गए, जिसमें टीम इंडिया ने 10 मुकाबले जीते। सिर्फ 3 मैच जिम्बाब्वे ने अपने नाम किए। दोनों टीमें टी-20 वर्ल्ड कप में इससे पहले एक ही बार 2022 में भिड़ी थीं, तब सूर्यकुमार यादव की नाबाद फिफ्टी के दम पर भारत ने मुकाबला जीत लिया था। सूर्या भारत के टॉप स्कोरर भारत के लिए टूर्नामेंट में कप्तान सूर्यकुमार यादव ने सबसे ज्यादा 180 रन बनाए हैं। उनके बाद ईशान किशन भी टॉप स्कोरर रहे। गेंदबाजी में वरुण चक्रवर्ती टॉप विकेट टेकर रहे। जसप्रीत बुमराह और अर्शदीप सिंह ने उनका बखूबी साथ निभाया। पिता की तबियत बिगड़ने के बाद नोएडा लौटे थे रिंकू भारतीय बल्लेबाज रिंकू सिंह के पिता खानचंद लिवर कैंसर की बीमारी से जूझ रहे हैं। वे पिछले कुछ दिनों से नोएडा के अस्पताल में भर्ती हैं। मंगलवार को रिंकू भी पिता की तबियत खराब होने के बाद चेन्नई से नोएडा गए थे। इसके बाद से उनकी जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच में उपलब्धता को लेकर अटकलें लग रही थीं। वहीं, आज के मैच से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान टीम के बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक ने बताया कि रिंकू मैच से पहले टीम से जुड़ सकते हैं। बेनेट न्यूजीलैंड के टॉप स्कोरर जिम्बाब्वे के लिए टूर्नामेंट में ब्रायन बेनेट ने सबसे ज्यादा 182 रन बनाए हैं। उन्होंने ही ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका के खिलाफ जीत में अहम योगदान निभाया था। ब्लेसिंग मुजरबानी 11 विकेट लेकर टीम के टॉप विकेट टेकर बने हुए हैं। सिकंदर रजा टी-20 इंटरनेशनल में 3000 रन बनाने वाले जिम्बाब्वे के पहले बैटर बनने से 15 रन दूर हैं। जबकि रायन बर्ल 2000 रन बनाने से 57 रन दूर हैं। जिम्बाब्वे ने भारत के खिलाफ भारत में कभी टी-20 इंटरनेशन नहीं खेला है। भारत में टीम ने 24 इंटरनेशनल जरूर खेले, जिनमें 19 वनडे और 5 टेस्ट शामिल हैं। पिच रिपोर्ट और रिकॉर्ड चेपॉक की पिच धीमी और स्पिनर्स को मदद करने वाली होती है, लेकिन इस बार फ्रेश पिच तैयार की गई है। इस बार अच्छा बाउंस देखने को मिल रहा है। ऐसे में यहां रन भी बन रहे हैं। इस वर्ल्ड कप में यहां अब तक 6 मैच खेले गए और सभी में 170+ स्कोर बना है। यहां अब तक 9 टी-20 खेले गए। पहले बैटिंग करने वाली टीम ने 4 और चेज करने वाली टीम ने 5 मैच जीते हैं। यहां का हाईएस्ट टीम स्कोर 200/4 है, जो अफगानिस्तान ने इसी वर्ल्ड कप में कनाडा के खिलाफ बनाया था। यहां पहली पारी का एवरेज स्कोर 182 है। भारतीय टीम ने इस मैदान पर अब तक 3 टी-20 इंटरनेशनल मैच खेले हैं, जिनमें से 2 में जीत दर्ज की है, जबकि 1 मैच में उसे न्यूजीलैंड के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। वहीं, जिम्बाब्वे पहली बार यहां खेलेगी। चेन्नई में मौसम अच्छा रहेगा गुरुवार को चेन्नई में मौसम अच्छा रहेगा। आसमान पूरी तरह से साफ रहेगा। 32 डिग्री सेल्शियस अधिकतम और 24 डिग्री सेल्शियस न्यूनतम तापमान रहने की संभावना है। बारिश नहीं होगी। दोनों टीमों की पॉसिबल प्लेइंग-11 भारत: ईशान किशन (विकेटकीपर), अभिषेक शर्मा, तिलक वर्मा, सूर्यकुमार यादव (कप्तान), रिंकू सिंह, हार्दिक पंड्या, शिवम दुबे, वॉशिंगटन सुंदर, वरुण चक्रवर्ती, अर्शदीप सिंह, जसप्रीत बुमराह। जिम्बाब्वे: ब्रायन बेनेट, तदिवानाशे मारुमनी, सिकंदर रजा (कप्तान), रायन बर्ल, डायन मायर्स, ताशिंगा मुसेकिवा, रिचर्ड नगारवा, ब्रैड इवांस, टोनी मुनयोंगा, ग्रीम क्रेमर, ब्लेसिंग मुजरबानी। कहां देख सकते हैं मैच? इस मैच की LIVE स्ट्रीमिंग स्टार स्पोर्ट्स पर होगी। इसे जियोहॉटस्टार एप पर भी देखा जा सकता है। आप दैनिक भास्कर एप पर मैच का LIVE कवरेज फॉलो कर सकते हैं। ————————————— क्रिकेट का कीड़ा है तो सॉल्व कीजिए ये सुपर क्विज क्या आप खुद को क्रिकेट के सुपर फैन मानते हैं? पूरे T20 वर्ल्ड कप टूर्नामेंट के दौरान दैनिक भास्कर के खास गेम ‘SUPER ओवर’ में रोज क्रिकेट से जुड़े 6 सवाल आपका क्रिकेट ज्ञान परखेंगे। जितनी जल्दी सही जवाब देंगे उतने ज्यादा रन बनेंगे। जितने ज्यादा रन बनेंगे, लीडरबोर्ड में उतना ही ऊपर आएंगे। तो रोज खेलिए और टूर्नामेंट का टॉप स्कोरर बनिए। अभी खेलें SUPER ओवर…क्लिक करें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

पेरेंटिंग- क्या बच्चे को ट्यूशन पढ़ाना जरूरी है:उसके साथ के सारे बच्चे ट्यूशन जाते हैं, कहीं वो लेफ्ट-आउट तो नहीं फील करेगा

पेरेंटिंग- क्या बच्चे को ट्यूशन पढ़ाना जरूरी है:उसके साथ के सारे बच्चे ट्यूशन जाते हैं, कहीं वो लेफ्ट-आउट तो नहीं फील करेगा

सवाल- मैं बनारस से हूं। मेरा 12 साल का बेटा छठवीं क्लास में पढ़ता है। वह पढ़ाई में काफी अच्छा है। टीचर्स भी तारीफ करते हैं। कुल मिलाकर अभी तक उसकी पढ़ाई को लेकर कोई चिंता नहीं है। लेकिन उसके सभी दोस्त ट्यूशन लेते हैं। क्लास के बाकी सारे बच्चे भी ट्यूशन जाते हैं। कहीं वो लेफ्ट–आउट तो नहीं फील करेगा? रिश्तेदारों, पड़ोसियों से भी अक्सर सुनने को मिलता है, “बच्चे को ट्यूशन भेजना बहुत जरूरी है।” क्या मुझे भी बेटे को ट्यूशन भेजना चाहिए? डर है कि कहीं वह पीछे न रह जाए। कृपया गाइड करें। एक्सपर्ट: डॉ. अमिता श्रृंगी, साइकोलॉजिस्ट, फैमिली एंड चाइल्ड काउंसलर, जयपुर जवाब- आपने जो सवाल पूछा है, वह आजकल लगभग सभी पेरेंट्स के मन में होता है। ऐसे में आपका डर भी स्वाभाविक है, लेकिन फैसला डर के आधार पर नहीं, बल्कि बच्चे की जरूरत के आधार पर होना चाहिए। जैसा कि आपने बताया कि आपका बच्चा पढ़ने में अच्छा है। होमवर्क समय पर कर लेता है और टीचर्स भी उसे एप्रिशिएट करते हैं। इसलिए फिलहाल उसे ट्यूशन दिलाने का विचार शायद ठीक नहीं होगा। यह तर्क कि ‘’सभी बच्चे ट्यूशन जा रहे हैं तो मुझे भी अपने बेटे को भेजना चाहिए,’’ सही नहीं है, क्योंकि हर बच्चा अलग होता है। कुछ बच्चों को जरूरत होती है, लेकिन कुछ एक्स्ट्रा सपोर्ट की जरूरत हो सकती है तो कुछ बच्चों के लिए क्लास में पढ़ाया जा रहा पाठ ही काफी होता है। ट्यूशन की जरूरत बच्चे की क्षमता से तय होनी चाहिए, न कि किसी को देखकर। सेल्फ कॉन्फिडेंस है ‘सफलता की कुंजी’ आपके सवाल से ऐसा लग रहा है कि आपका बेटा पढ़ने में काफी अच्छा है। यह अपने-आप में बहुत अच्छी बात है। ट्यूशन के बिना बच्चा अच्छा परफॉर्म कर रहा है, टीचर भी उसकी तारीफ कर रहे हैं, इसका मतलब है कि- ऐसे में अगर बच्चे पर जबरदस्ती ट्यूशन थोपा जाता है तो वह इससे परेशान हो सकता है। कई बार ट्यूशन बच्चों पर अनजाने में प्रेशर बनाता है। इससे फायदे की बजाय नुकसान हो सकता है। इसे ग्राफिक में देखिए- सेल्फ लर्निंग के फायदे जब बच्चा खुद से पढ़ने-समझने की कोशिश करता है तो उसमें सोचने और निर्णय लेने की क्षमता भी विकसित होती है। सेल्फ लर्निंग का सबसे बड़ा फायदा है कि बच्चे दूसरों पर निर्भर नहीं रहते हैं। इससे पढ़ाई उनके लिए बोझ नहीं, बल्कि एक स्वाभाविक प्रक्रिया बन जाती है। सेल्फ लर्निंग से बच्चों को कई फायदे मिलते हैं। ग्राफिक में देखिए- बच्चे को कब दिलाएं ट्यूशन? बच्चों को ट्यूशन की जरूरत तब होती है, जब बच्चा पढ़ाई में स्ट्रगल कर रहा हो या उसे सही दिशा और अतिरिक्त मार्गदर्शन की जरूरत हो। कभी भी जबरदस्ती या देखा-देखी में ट्यूशन नहीं लगाना चाहिए। कुछ ऐसे संकेत हैं, जिनसे ये समझा जा सकता है कि बच्चे को ट्यूशन की जरूरत है। ग्राफिक में देखिए- पेरेंट्स के लिए सुझाव पेरेंटिंग में माता-पिता को कुछ बातों का खास ख्याल रखना चाहिए। जैसेकि- अंत में यही कहूंगी कि आपका बेटा होनहार है। ऐसे में उसे दूसरों की देखादेखी ‘ट्यूशन की बैसाखी’ देने की जरूरत नहीं है। उसे अपनी उड़ान खुद भरने दें। रिश्तेदारों या पड़ोसियों की बातों से ज्यादा जरूरी है कि आप बच्चे की मानसिक स्थिति, आत्मविश्वास और वास्तविक जरूरत को समझें। याद रखें, ट्यूशन कोई स्टेटस सिंबल नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर लिया जाने वाला सहारा है। सही समय और सही वजह से लिया गया फैसला ही बच्चे के भविष्य को मजबूत बनाता है। ………………… पेरेंटिंग की ये खबर भी पढ़िए पेरेंटिंग- बेटी इंस्टा पर अकाउंट बनाना चाहती है: कहती है, ‘सब दोस्तों का है, मेरा क्यों नहीं?’ उसे ऑनलाइन दुनिया के खतरे कैसे समझाऊं आपका डर जायज है, लेकिन सोशल मीडिया पर पूरी तरह पाबंदी लगाना ठीक नहीं है। इससे बच्चों की जिज्ञासा बढ़ जाती है और वे इसे चोरी-छिपे इस्तेमाल करने लगते हैं। इसलिए ‘पाबंदी’ लगाने की बजाय आपको उसे सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल के बारे में बताना चाहिए। साथ ही इसके खतरों के बारे में भी। पूरी खबर पढ़िए…

Bacchon Ki Doctor Book Review; Parenting Tips

Bacchon Ki Doctor Book Review; Parenting Tips

1 मिनट पहलेलेखक: अदिति ओझा कॉपी लिंक किताब का नाम: बच्चों की डॉक्टर लेखक: डॉ. माधवी भारद्वाज अनुवाद: यामिनी रामपल्लीवार प्रकाशक: पेंगुइन मूल्य: 399 रुपए पेरेंटिंग एक बेहद खूबसूरत जर्नी है। हर शादीशुदा कपल इस पल का बेसब्री से इंतजार करता है। यह सिर्फ बच्चे की परवरिश नहीं, बल्कि खुद के सीखने, धैर्य रखने और भावनात्मक रूप से मैच्योर होने की प्रक्रिया भी है। इस सफर में खुशियां हैं, जिम्मेदारियां हैं और अनगिनत यादें हैं, जो परिवार को मजबूत बनाती हैं। हालांकि इसमें तमाम चुनौतियां भी हैं, जो न्यूली पेरेंट्स को इस जर्नी से डराती हैं, लेकिन घबराएं नहीं। डॉ. माधवी भारद्वाज की किताब ‘बच्चों की डॉक्टर’ नए पेरेंट्स के लिए एक गाइड की तरह है। ये किताब नए पेरेंट्स को डराती नहीं, समझाती है और जज करने की बजाय भरोसा देती है। डॉ. माधवी भारद्वाज जानी-मानी पीडियाट्रिशियन हैं। वह खुद दो बच्चों की मां हैं। वह इस बात को अच्छे से समझती हैं कि पहली बार पेरेंट्स बनने वाले लोग किन भावनाओं और चुनौतियों से गुजरते हैं। किताब का उद्देश्य और महत्व इस किताब का उद्देश्य न्यू पेरेंट्स को सही गाइड करना है। साथ ही उनको यह एहसास दिलाना है कि कन्फ्यूज होना बिल्कुल नॉर्मल है। खासकर ऐसे समय में जब तमाम तरह की पुरानी मान्यताएं, रिश्तेदारों की सलाह हावी होने लगती हैं। डॉ. माधवी इस उलझन को जॉइंट फैमिली की वास्तविकताओं, सांस्कृतिक मिथकों और रोजमर्रा की स्थितियों को सामने रखकर दूर करती हैं। यह किताब डर और गिल्ट पैदा करने के बजाय आत्मविश्वास बढ़ाती है। साथ ही किताब इंडियन पेरेंट्स की जरूरतों को ध्यान में रखकर लिखी गई है। इसी वजह से वे इससे जुड़ाव महसूस करते हैं और अनावश्यक चिंता कम होती है। बच्चे की देखभाल धीरे-धीरे बोझ नहीं बल्कि आसान प्रक्रिया लगने लगती है। किताब की खास बात ये है कि इसमें मिथकों को सम्मानजनक तरीके से चुनौती दी गई है। उनकी जगह वैज्ञानिक तथ्यों को सहज भाषा में लिखा गया है। किताब की खासियत किताब में डॉ. माधवी ने बच्चे के पहले साल के 10 अहम माइलस्टोन्स को बेहद व्यवस्थित तरीके से बताया है। यही इस किताब की सबसे बड़ी खासियत है। इससे नए माता-पिता को हर पड़ाव पर सही दिशा मिलती है। हर अध्याय में दिए गए रिलेटेबल इलस्ट्रेशन (जैसे ब्रेस्टफीडिंग की अलग-अलग पोजिशन) बातों को समझने में आसान बना देते हैं। किताब में रियल लाइफ केस स्टडीज शामिल की गई हैं। इसका मकसद पाठक को यह एहसास दिलाना है कि ये समस्याएं काल्पनिक नहीं, बल्कि रोजमर्रा की सच्चाई हैं। इसके साथ ही कॉमन मिथकों को तोड़ने वाला हिस्सा और FAQs सेक्शन परेंट्स की उन शंकाओं का समाधान करता है, जिनके जवाब वे अक्सर इधर-उधर ढूंढते रहते हैं। इससे अनावश्यक डर और भ्रम अपने-आप कम हो जाता है। किताब की थीम किताब का मूल विचार बहुत साफ है कि पेरेंटिंग ‘परफेक्ट होने का’ खेल नहीं है। डॉ. माधवी मानती हैं कि हर बच्चा अलग है और हर परिवार की परिस्थितियां अलग होती हैं। इसलिए किताब में न तो आदर्श पेरेंट्स बनने का दबाव दिया गया है और न ही हर बात पर डराया गया है। ब्रेस्टफीडिंग की दिक्कतें हों, नींद की कमी हो या फिर बच्चे के रोने को समझना हो किताब हर विषय पर सहानुभूति और बिना जजमेंट के बात करती है। साथ ही मां के खान-पान की गलत धारणाओं को भी दूर करती है। यह आपको यह भरोसा देती है कि आप अकेले नहीं हैं। डॉ. माधवी बिना जजमेंट के माता-पिता की भावनाओं को समझती हैं, उनकी दुविधा को स्वीकार करती हैं और कहती हैं, हम सब इस दौर में कन्फ्यूज होते हैं। पेरेंट्स के मेंटल हेल्थ पर भी बात करती है ये बुक किताब में सिर्फ बच्चे की सेहत की नहीं बल्कि माता-पिता की मेंटल हेल्थ पर भी बात की गई है। लगातार तुलना, डर और सलाहों के बोझ को यह किताब कम करती है। जब पेरेंट्स को यह समझ में आने लगता है कि बच्चे का हर बार रोना खतरे की घंटी नहीं है और हर समस्या का समाधान मौजूद है, तो पेरेंटिंग का डर धीरे-धीरे भरोसे में बदल जाता है। इसका असर यह होता है कि माता-पिता ज्यादा शांत रहते हैं, बेहतर फैसले लेते हैं और बच्चे के साथ ज्यादा जुड़ाव महसूस करते हैं। आधुनिक साइकोलॉजी से जुड़े हैं विचार किताब भले ही भारी-भरकम मेडिकल शब्दों से भरी न हो, लेकिन इसका आधार पूरी तरह साइंटिफिक है। हर सलाह के पीछे वैज्ञानिक तर्क दिए गए हैं। पारंपरिक घरेलू नुस्खों जैसे- नवजात की आंखों में काजल लगाना शहद या घुट्टी देना जोर से मालिश करके शरीर का आकार बदलना किताब में डॉ. माधवी भारद्वाज इन सबको तथ्यात्मक तरीके से गलत साबित करती है। इस किताब में यह भी स्पष्ट किया गया है कि किन स्थितियों में डॉक्टर के पास जाना जरूरी है और किनमें घबराने की जरूरत नहीं। केस स्टडीज और Q&A (सवाल-जवाब) में साइंस को रोजमर्रा की भाषा में पिरोया है, ताकि माता-पिता को लगे कि यह एक्शनेबल है, न कि सिर्फ थ्योरी है। किताब का सार यह किताब शिशु के विकास के 10 अहम पड़ावों को कवर करती है। इसमें जन्म के बाद के पहले सात दिनों की घबराहट से लेकर सॉलिड फूड शुरू करने जैसे बड़े और थोड़े अस्त-व्यस्त लेकिन जरूरी पड़ाव तक की बात की गई है। इसकी विषय-सूची किसी नए माता-पिता की गूगल सर्च हिस्ट्री जैसी लगती है। ब्रेस्टफीडिंग की चुनौतियां पहले 7 दिन सर्दी और गर्मी में देखभाल नींद की दिनचर्या बच्चे का ठोस आहार डेवलपमेंटल लीप्स आखिर में सबसे राहत देने वाला सेक्शन ‘अक्सर पूछे जाने वाले सवाल’। हर अध्याय वही सवाल उठाता है, जो माता-पिता के मन में सबसे पहले आता है, और उन्हें सरल, व्यावहारिक जवाब देता है। यह किताब क्यों पढ़नी चाहिए अगर आप नए माता-पिता हैं और बच्चे की देखभाल से जुड़े सवाल आपको परेशान करते हैं, तो यह किताब आपको अकेलापन महसूस नहीं होने देगी। यह आपको ज्यादा आत्मविश्वासी, ज्यादा जागरूक बनाएगी। जो पेरेंट्स की घबराबट को कम करेगी। भारतीय घरों के लिए खासतौर पर उपयोगी, क्योंकि देसी रियलिटी को समझती है। किताब के बारे में मेरी राय ‘बच्चों की डॉक्टर’ एक टेक्स्ट बुक से ज्यादा एक साथी की तरह है। डॉ. माधवी की भाषा इम्पेथेटिक, ईमानदार