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दुबई का डॉक्टर बोला-लड़का ही होगा, गारंटी हमारी:इंटरनेशनल रैकेट 35 लाख में बेच रहा बेटे की चाहत, एमपी तक जुड़े तार

दुबई का डॉक्टर बोला-लड़का ही होगा, गारंटी हमारी:इंटरनेशनल रैकेट 35 लाख में बेच रहा बेटे की चाहत, एमपी तक जुड़े तार

प्रेग्नेंसी पॉजिटिव हो जाएगी तो हंड्रेड परसेंट बॉय आएगा… गर्ल विल बी डिस्कार्ट (लड़की वाले भ्रूण को नष्ट कर दिया जाएगा)… ये कहते हुए डॉ. गौतम इलाहबादिया के चेहरे पर 100 फीसदी कॉन्फिडेंस नजर आता है। डॉ. इलाहबादिया दुबई में खुद के नाम से आईवीएफ सेंटर चलाते हैं। भास्कर रिपोर्टर ने उन्हें एक ग्राहक बनकर वीडियो कॉल किया था। डॉ. इलाहबादिया ने रिपोर्टर को लिंग चयन ( सेक्स डिटरमिनेशन) की पूरी प्रक्रिया समझाई। ये भरोसा भी दिया कि आईवीएफ की जिस एडवांस टेक्निक का वो इस्तेमाल करेंगे उससे लड़का होने की ही गारंटी है। इस प्रक्रिया के लिए उन्होंने 30-35 लाख रुपए का खर्च बताया। डॉ. इलाहबादिया को उस अंतरराष्ट्रीय रैकेट का हिस्सा कहा जा सकता है, जो भारत में बेटे की चाहत रखने वाले दंपतियों की मजबूरी का फायदा उठाकर करोड़ों का कारोबार कर रहा है। दैनिक भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने इस रैकेट का पर्दाफाश किया है, जिसके तार दुबई, थाईलैंड और तुर्की से लेकर भारत की राजधानी दिल्ली तक फैले हुए हैं। यह रैकेट न केवल उन लोगों को टारगेट कर रहा है जो विदेश जा सकते हैं बल्कि उन लोगों के लिए भी दिल्ली में अवैध व्यवस्था चला रहा है। जिनके पास पासपोर्ट नहीं है या जो विदेश जाने का जोखिम नहीं उठाना चाहते। कैसे चल रहा है ये पूरा नेटवर्क और कैसे गर्भ में लड़का इंप्लांट करने की गारंटी दी जा रही है? पढ़िए रिपोर्ट… कमीशन के लालच से शुरू हुई पड़ताल
इस पूरे मामले की जांच तब शुरू हुई जब मध्य प्रदेश सहित देश के कई प्रतिष्ठित गायनेकोलॉजिस्ट के पास दुबई के IVF सेंटरों से ईमेल आने लगे। इन ईमेल में एक चौंकाने वाला ऑफर था – ‘आप हमें ऐसे मरीज भेजें जिन्हें केवल लड़का चाहिए, हम आपको इलाज के कुल खर्च का 10 प्रतिशत कमीशन देंगे।’ जहां कई डॉक्टरों ने इस अनैतिक और गैर-कानूनी पेशकश को तुरंत ठुकरा दिया, वहीं कुछ के इस लालच में फंसने की भी सूचना मिली। यह स्पष्ट था कि भारत के सख्त ‘गर्भधारण पूर्व और प्रसवपूर्व निदान तकनीक (PCPNDT) एक्ट, 1994’ की वजह से जो अवैध काम यहां नहीं हो सकता, उसे विदेशी धरती पर अंजाम दिया जा रहा है। भास्कर इन्वेस्टिगेशन के 6 पॉइंट्स डॉक्टर बोला- दुबई नहीं तो टर्की भेज देंगे
पड़ताल को आगे बढ़ाते हुए भास्कर रिपोर्टर ने एक ऐसे ही दंपती के तौर पर दुबई के प्रसिद्ध इलाहाबादिया IVF सेंटर से संपर्क साधा, जिसे बेटे की चाह थी। कुछ शुरुआती बातचीत और रिपोर्ट्स भेजने के बाद, सेंटर के प्रमुख डॉ. गौतम इलाहाबादिया के साथ एक जूम मीटिंग तय हुई। मीटिंग में डॉ. इलाहाबादिया ने रिपोर्टर की पत्नी की मेडिकल रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा, ‘आपकी वाइफ का एएमएच (एंटी-मुलरियन हार्मोन) बहुत लो है। अगर हमें टेस्टिंग के लिए नौ भ्रूण (एंब्रियो) चाहिए, तो कम से कम छह बार IVF करना पड़ेगा, जिसके लिए आपको चार से पांच बार दुबई आना होगा।’ जब रिपोर्टर ने पूछा कि नौ भ्रूण क्यों चाहिए, तो जवाब और भी चौंकाने वाला था। ‘हां, नौ करेंगे तो उसमें एक या दो लड़के निकलते हैं।’ उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया का खर्च 30 से 35 लाख रुपए बताया। जब रिपोर्टर ने इतनी बार दुबई आने में असमर्थता जताई, तो डॉ. इलाहाबादिया ने तुरंत एक और रास्ता सुझाया। साइप्रस में हम लोग एक काम करते हैं, यहां के पेशेंट सब साइप्रस जाते हैं, टर्की का पार्ट है। वहां जाकर डोनर एग से लड़का हो सकता है। पासपोर्ट नहीं तो दिल्ली में है ‘अवैध’ जुगाड़
बातचीत का रुख तब पूरी तरह बदल गया जब रिपोर्टर ने पासपोर्ट बनवाने में आ रही समस्या का जिक्र किया। यह सुनते ही डॉ. इलाहाबादिया ने जो कहा, वह इस रैकेट के दिल्ली कनेक्शन को उजागर करने के लिए काफी था। डॉ इलाहबादिया बोले- यहां दिल्ली में लोग इल्लीगल भी यही करते हैं, मगर कुछ भी राइटिंग में नहीं देते हैं। मैं आपको उन लोगों से कनेक्ट करवा देता हूं, पर उसके बाद आपको आपके ही रिस्क पर डील करना है। उन्होंने तुरंत अपना वॉट्सएप नंबर (0097156xxxx000) दिया और कहा कि इस पर मैसेज करें तो मैं दिल्ली के मिस्टर गौरव वानखेड़े का नंबर देता हूं, इन्हें बोलना कि आपको लड़का चाहिए डोनर एग से। उन्होंने साफ किया कि यह सब ‘ग्रे जोन’ में होता है और वह इसमें सीधे तौर पर शामिल नहीं होंगे। आपका जब भी पासपोर्ट रेडी हो जाए आप कॉन्टैक्ट करिए। आपको हम सारा प्लान समझा देंगे। दलाल बोला- इस काम में मेरे अलावा गिने-चुने लोग
डॉ. इलाहाबादिया से मिले नंबर पर जब दिल्ली में बैठे दलाल गौरव वानखेड़े से बात हुई, तो उसने इस अवैध कारोबार की पूरी रूपरेखा सामने रख दी। उसने खुद को इस इंडस्ट्री में 20 साल पुराना खिलाड़ी बताया और कहा कि उसका काम IVF, डोनर एग और सरोगेसी ऑर्गनाइज करना है। जब रिपोर्टर ने बेटे की चाहत और दुबई न जा पाने की मजबूरी बताई, तो वानखेड़े ने आश्वासन दिया कि आपका काम हो जाएगा। उसने बताया कि यह सब दिल्ली में ही होगा और अगर अच्छा रिजल्ट चाहिए तो दिल्ली ही एकमात्र जगह है। उसने दावा किया कि ये इंडिया में गिन चुन के दो या तीन लोग ही करते हैं। उनमें से मैं एक हूं। वानखेड़े ने बताया कि हमारा एक हॉस्पिटल है। आप मुझे रिपोर्ट्स भेजिए। मैं पूरी स्टडी करने के बाद एक पूरा प्लान बनाकर भेजूंगा। स्टेप बाय स्टेप बताऊंगा कैसे इलाज होगा । डोंट वरी हो जाएगा आपका काम जेंडर की पूरी गारंटी
इस रैकेट की गहराई को और समझने के लिए हमारी टीम ने दुबई के एक और बड़े सेंटर, न्यू होप IVF सेंटर, से संपर्क किया। यहां हमारी बात डॉ. गोमथी और फिर डॉ. धनशंकर के आर से हुई। डॉ. धनशंकर ने जो खुलासे किए, वे रोंगटे खड़े कर देने वाले थे। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, ‘आईवीएफ का हंड्रेड परसेंट गारंटी पॉसिबल नहीं है, बट जेंडर का गारंटी दे रहा हूं। प्रेग्नेंसी पॉजिटिव हो जाएगा तो हंड्रेड परसेंट बॉय आएगा। जब रिपोर्टर ने पूछा कि यह कैसे संभव है, तो उन्होंने पूरी वैज्ञानिक प्रक्रिया समझाई। हम स्पर्म और एग को मिलाकर भ्रूण बनाते हैं। भ्रूण को गर्भ में डालने से पहले हम जेनेटिक टेस्टिंग करते हैं। वापस जाकर कहना IVF दिल्ली में कराया
डॉ. धनशंकर ने भारतीय कानून से बचने के तरीके भी बताए। उन्होंने कहा कि आप लोग टूरिस्ट बनकर आना। एयरपोर्ट पर किसी को मेडिकल हिस्ट्री नहीं बतानी है। यहां यह 100% लीगल है। उन्होंने यह भी सलाह दी कि भारत वापस जाकर किसी भी स्थानीय गायनेकोलॉजिस्ट को यह बताने की जरूरत नहीं है कि यह प्रक्रिया दुबई में हुई है। उन्होंने रास्ता सुझाते हुए कहा कि आप कह सकते हैं कि IVF दिल्ली या चेन्नई में करवाया है। उन्हें आपके पुराने प्रिस्क्रिप्शन की जरूरत नहीं पड़ेगी। कैसे होता है लिंग चयन का यह खेल
यह पूरा अवैध कारोबार इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) के साथ जुड़ी एक एडवांस तकनीक प्रीइम्प्लांटेशन जेनेटिक डायग्नोसिस (PGD) पर आधारित है। जहां इस तकनीक का मूल उद्देश्य आनुवंशिक बीमारियों को अगली पीढ़ी में जाने से रोकना है, वहीं दुबई और थाईलैंड जैसे देशों में इसका दुरुपयोग लिंग चयन के लिए किया जा रहा है। इस पूरी प्रोसेस के 6 स्टेज होती है…. यह प्रक्रिया 99% तक सटीकता का दावा करती है, और इसी गारंटी के नाम पर लाखों रुपए वसूले जा रहे हैं। भारत में PCPNDT एक्ट की सख्ती
भारत में PCPNDT एक्ट, 1994 के तहत जन्म से पहले लिंग की जांच करना या किसी भी तरह से लिंग चयन को बढ़ावा देना एक गंभीर अपराध है। इस कानून के तहत भ्रूण का लिंग बताना या चुनना पूरी तरह प्रतिबंधित है। ऐसा करने वाले डॉक्टर या क्लिनिक का लाइसेंस रद्द हो सकता है, भारी जुर्माना लग सकता है और जेल की सजा भी हो सकती है। लेकिन यह अंतरराष्ट्रीय रैकेट इसी कानून की कमजोरी का फायदा उठा रहा है। चूंकि यह प्रक्रिया दुबई या थाईलैंड जैसे देशों में हो रही है, जहां ‘फैमिली बैलेंसिंग’ के नाम पर इसकी कानूनी इजाजत है, इसलिए वे भारतीय कानून की पकड़ से बाहर हैं। लेकिन दिल्ली में दलालों के माध्यम से इस काम को अंजाम देना सीधे-सीधे भारतीय कानून का उल्लंघन है। मेडिकल टूरिज्म की आड़ में हो रहा कारोबार
एनएचएम की वरिष्ठ संयुक्त संचालक डॉ. प्रज्ञा तिवारी ने कहा कि गर्भस्थ शिशु का लिंग चयन PCPNDT Act (पीसीपीएनडीटी अधिनियम) के तहत पूरी तरह प्रतिबंधित है। इस अधिनियम की एक धारा स्पष्ट करती है कि लिंग चयन से संबंधित किसी भी प्रकार का विज्ञापन करना भी दंडनीय अपराध है। मध्यप्रदेश शासन इस विषय को लेकर लगातार सतर्क और संवेदनशील रहा है। उन्होंने बताया कि विभिन्न स्रोतों से यह जानकारी और शिकायतें प्राप्त हुई है कि उन्नत तकनीकों का उपयोग कर ‘फैमिली बैलेंसिंग’ के नाम पर यह तय किया जा रहा है कि बच्चा लड़का होगा या लड़की। दुबई, थाईलैंड, ऑस्ट्रेलिया सहित कुछ अन्य देश मेडिकल टूरिज्म के रूप में ऐसी सेवाओं को बढ़ावा दे रहे हैं। प्रदेश से भी दंपती पर्यटक के रूप में इन देशों में जाकर यह प्रक्रिया कराते हैं और बाद में भारत लौट आते हैं, जहां बच्चे का जन्म कराया जाता है।

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राजनीति

दुबई का डॉक्टर बोला-लड़का ही होगा, गारंटी हमारी:इंटरनेशनल रैकेट 35 लाख में बेच रहा बेटे की चाहत, एमपी तक जुड़े तार

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इस रैकेट की गहराई को और समझने के लिए हमारी टीम ने दुबई के एक और बड़े सेंटर, न्यू होप IVF सेंटर, से संपर्क किया। यहां हमारी बात डॉ. गोमथी और फिर डॉ. धनशंकर के आर से हुई। डॉ. धनशंकर ने जो खुलासे किए, वे रोंगटे खड़े कर देने वाले थे। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, ‘आईवीएफ का हंड्रेड परसेंट गारंटी पॉसिबल नहीं है, बट जेंडर का गारंटी दे रहा हूं। प्रेग्नेंसी पॉजिटिव हो जाएगा तो हंड्रेड परसेंट बॉय आएगा। जब रिपोर्टर ने पूछा कि यह कैसे संभव है, तो उन्होंने पूरी वैज्ञानिक प्रक्रिया समझाई। हम स्पर्म और एग को मिलाकर भ्रूण बनाते हैं। भ्रूण को गर्भ में डालने से पहले हम जेनेटिक टेस्टिंग करते हैं। वापस जाकर कहना IVF दिल्ली में कराया
डॉ. धनशंकर ने भारतीय कानून से बचने के तरीके भी बताए। उन्होंने कहा कि आप लोग टूरिस्ट बनकर आना। एयरपोर्ट पर किसी को मेडिकल हिस्ट्री नहीं बतानी है। यहां यह 100% लीगल है। उन्होंने यह भी सलाह दी कि भारत वापस जाकर किसी भी स्थानीय गायनेकोलॉजिस्ट को यह बताने की जरूरत नहीं है कि यह प्रक्रिया दुबई में हुई है। उन्होंने रास्ता सुझाते हुए कहा कि आप कह सकते हैं कि IVF दिल्ली या चेन्नई में करवाया है। उन्हें आपके पुराने प्रिस्क्रिप्शन की जरूरत नहीं पड़ेगी। कैसे होता है लिंग चयन का यह खेल
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भारत में PCPNDT एक्ट, 1994 के तहत जन्म से पहले लिंग की जांच करना या किसी भी तरह से लिंग चयन को बढ़ावा देना एक गंभीर अपराध है। इस कानून के तहत भ्रूण का लिंग बताना या चुनना पूरी तरह प्रतिबंधित है। ऐसा करने वाले डॉक्टर या क्लिनिक का लाइसेंस रद्द हो सकता है, भारी जुर्माना लग सकता है और जेल की सजा भी हो सकती है। लेकिन यह अंतरराष्ट्रीय रैकेट इसी कानून की कमजोरी का फायदा उठा रहा है। चूंकि यह प्रक्रिया दुबई या थाईलैंड जैसे देशों में हो रही है, जहां ‘फैमिली बैलेंसिंग’ के नाम पर इसकी कानूनी इजाजत है, इसलिए वे भारतीय कानून की पकड़ से बाहर हैं। लेकिन दिल्ली में दलालों के माध्यम से इस काम को अंजाम देना सीधे-सीधे भारतीय कानून का उल्लंघन है। मेडिकल टूरिज्म की आड़ में हो रहा कारोबार
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