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वेदविद्या प्रतिष्ठान के सचिव की नियुक्ति पर हाईकोर्ट का नोटिस:छड़ी से छात्र को पीटने के बाद फिर सुर्खियों में प्रतिष्ठान, जवाब के लिए 6 सप्ताह का समय

वेदविद्या प्रतिष्ठान के सचिव की नियुक्ति पर हाईकोर्ट का नोटिस:छड़ी से छात्र को पीटने के बाद फिर सुर्खियों में प्रतिष्ठान, जवाब के लिए 6 सप्ताह का समय

महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान में छड़ी से छात्र की पिटाई का वीडियो वायरल होने के बाद अब प्रतिष्ठान के सचिव विरूपाक्ष जड्डीपाल की नियुक्ति को लेकर इंदौर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर बेंच ने अहम आदेश जारी करते हुए महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान के चेयरमैन, वाइस चेयरमैन, सचिव विरूपाक्ष जड्डीपाल सहित अन्य के खिलाफ नोटिस जारी कर छह सप्ताह में जवाब मांगा है। उच्च न्यायालय ने वेद शिक्षक स्वप्निल पाठक द्वारा दायर रिट याचिका में सचिव जड्डीपाल की नियुक्ति को अवैध बताया है। इसके बाद कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए नोटिस जारी कर छह सप्ताह में जवाब तलब किया है। एडवोकेट गार्गी पाठक ने बताया कि 9 जनवरी 2026 को इंदौर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका में विरूपाक्ष जड्डीपाल की नियुक्ति को चुनौती दी गई है। उनके अनुसार वर्ष 2017 में जड्डीपाल की नियुक्ति उज्जैन के सांदीपनि वेद विद्या प्रतिष्ठान में सचिव पद पर हुई थी। हमने आरटीआई के माध्यम से मिनिस्ट्री ऑफ एजुकेशन और सांदीपनि वेद विद्या प्रतिष्ठान से नियम और आरआर की प्रतियां मांगीं, लेकिन दोनों जगह से कॉपी नहीं मिली। इसके बाद किए गए शोध में पता चला कि सचिव पद पर जड्डीपाल की नियुक्ति पूरी तरह अवैध है और उन्हें नियम विरुद्ध पद पर रखा गया है। गार्गी पाठक ने बताया कि सचिव पद की नियुक्ति के लिए सेंट्रल यूनिवर्सिटी का प्रोफेसर होना जरूरी है, जबकि उनकी नियुक्ति उस समय हुई जब वे 2017 में तिरुपति स्थित राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठम नामक डीम्ड विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थे। उनका डेप्युटेशन पीरियड 2022 में समाप्त हो गया था, इसके बाद भी मंत्रालय से डेप्युटेशन एक्सटेंशन नहीं हुआ, फिर भी वे 2026 तक सचिव पद पर बने हुए हैं। यह सेक्रेटरी पोस्ट ए ग्रेड की पब्लिक ऑफिसर की पोस्ट है, जिस पर नॉन पब्लिक ऑफिसर को बैठा दिया गया है। बिना पूर्व स्वीकृति के पद पर जमे रहे
याचिकाकर्ता स्वप्निल पाठक ने बताया कि वर्ष 2022 में प्रारंभिक प्रतिनियुक्ति समाप्त होने के बाद भी डॉ. जड्डीपाल को उनके मूल संगठन वापस नहीं भेजा गया और वे बिना पूर्व स्वीकृति के पद पर अवैध रूप से बने रहे। बाद में 15 जून 2023 को मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने प्रतिष्ठान के ज्ञापन के नियम 19 के शब्दों में कथित हेरफेर कर 10 जुलाई 2024 को उनकी प्रतिनियुक्ति को अगले 5 वर्षों के लिए बढ़ा दिया। भारत सरकार के नियमों में प्रतिनियुक्ति को 7 वर्ष से अधिक बढ़ाने का कोई प्रावधान नहीं है, जिससे यह विस्तार अवैध हो जाता है। प्रतिष्ठान के ज्ञापन के नियम 19 में 10 वर्षों की प्रतिनियुक्ति का कोई उल्लेख नहीं है। भर्ती और प्रशासनिक अनियमितताओं के गंभीर आरोप
याचिका में आरोप लगाया गया है कि डॉ. जड्डीपाल प्रतिष्ठान के सचिव के रूप में अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं और संस्थान के उद्देश्यों के विरुद्ध कार्य कर रहे हैं। उनके कार्यकाल में भारी भर्ती अनियमितताएं, प्रशासनिक धोखाधड़ी और वैदिक विद्वानों तथा वेद पाठशालाओं का उत्पीड़न हुआ है, जो जन नीति के विरुद्ध बताया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि पूर्णतः अपात्र होने के कारण वे इस पद पर बने रहने के अयोग्य हैं और उन्हें तत्काल पद से हटाया जाना चाहिए। इसी को लेकर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया गया है। ये खबर भी पढ़ें.. गुरुकुल में छात्र को डंडे से पीटा…दर्द से चीखता रहा,VIDEO उज्जैन में महर्षि सांदीपनी राष्ट्रीय वेदविद्या संस्थान (गुरुकुल) में एक टीचर ने छात्र को डंडे से बेरहमी से पीटा। इस दौरान छात्र दर्द से चीखता रहा, लेकिन टीचर लगातार उसे मारता रहा। घटना का वीडियो शनिवार को सामने आया है। बताया जा रहा है कि वह छात्र को दूसरे के बिस्तर पर सोने की बात पर पीट रहा था।पूरी खबर पढ़ें

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वेदविद्या प्रतिष्ठान के सचिव की नियुक्ति पर हाईकोर्ट का नोटिस:छड़ी से छात्र को पीटने के बाद फिर सुर्खियों में प्रतिष्ठान, जवाब के लिए 6 सप्ताह का समय

वेदविद्या प्रतिष्ठान के सचिव की नियुक्ति पर हाईकोर्ट का नोटिस:छड़ी से छात्र को पीटने के बाद फिर सुर्खियों में प्रतिष्ठान, जवाब के लिए 6 सप्ताह का समय

महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान में छड़ी से छात्र की पिटाई का वीडियो वायरल होने के बाद अब प्रतिष्ठान के सचिव विरूपाक्ष जड्डीपाल की नियुक्ति को लेकर इंदौर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर बेंच ने अहम आदेश जारी करते हुए महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान के चेयरमैन, वाइस चेयरमैन, सचिव विरूपाक्ष जड्डीपाल सहित अन्य के खिलाफ नोटिस जारी कर छह सप्ताह में जवाब मांगा है। उच्च न्यायालय ने वेद शिक्षक स्वप्निल पाठक द्वारा दायर रिट याचिका में सचिव जड्डीपाल की नियुक्ति को अवैध बताया है। इसके बाद कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए नोटिस जारी कर छह सप्ताह में जवाब तलब किया है। एडवोकेट गार्गी पाठक ने बताया कि 9 जनवरी 2026 को इंदौर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका में विरूपाक्ष जड्डीपाल की नियुक्ति को चुनौती दी गई है। उनके अनुसार वर्ष 2017 में जड्डीपाल की नियुक्ति उज्जैन के सांदीपनि वेद विद्या प्रतिष्ठान में सचिव पद पर हुई थी। हमने आरटीआई के माध्यम से मिनिस्ट्री ऑफ एजुकेशन और सांदीपनि वेद विद्या प्रतिष्ठान से नियम और आरआर की प्रतियां मांगीं, लेकिन दोनों जगह से कॉपी नहीं मिली। इसके बाद किए गए शोध में पता चला कि सचिव पद पर जड्डीपाल की नियुक्ति पूरी तरह अवैध है और उन्हें नियम विरुद्ध पद पर रखा गया है। गार्गी पाठक ने बताया कि सचिव पद की नियुक्ति के लिए सेंट्रल यूनिवर्सिटी का प्रोफेसर होना जरूरी है, जबकि उनकी नियुक्ति उस समय हुई जब वे 2017 में तिरुपति स्थित राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठम नामक डीम्ड विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थे। उनका डेप्युटेशन पीरियड 2022 में समाप्त हो गया था, इसके बाद भी मंत्रालय से डेप्युटेशन एक्सटेंशन नहीं हुआ, फिर भी वे 2026 तक सचिव पद पर बने हुए हैं। यह सेक्रेटरी पोस्ट ए ग्रेड की पब्लिक ऑफिसर की पोस्ट है, जिस पर नॉन पब्लिक ऑफिसर को बैठा दिया गया है। बिना पूर्व स्वीकृति के पद पर जमे रहे
याचिकाकर्ता स्वप्निल पाठक ने बताया कि वर्ष 2022 में प्रारंभिक प्रतिनियुक्ति समाप्त होने के बाद भी डॉ. जड्डीपाल को उनके मूल संगठन वापस नहीं भेजा गया और वे बिना पूर्व स्वीकृति के पद पर अवैध रूप से बने रहे। बाद में 15 जून 2023 को मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने प्रतिष्ठान के ज्ञापन के नियम 19 के शब्दों में कथित हेरफेर कर 10 जुलाई 2024 को उनकी प्रतिनियुक्ति को अगले 5 वर्षों के लिए बढ़ा दिया। भारत सरकार के नियमों में प्रतिनियुक्ति को 7 वर्ष से अधिक बढ़ाने का कोई प्रावधान नहीं है, जिससे यह विस्तार अवैध हो जाता है। प्रतिष्ठान के ज्ञापन के नियम 19 में 10 वर्षों की प्रतिनियुक्ति का कोई उल्लेख नहीं है। भर्ती और प्रशासनिक अनियमितताओं के गंभीर आरोप
याचिका में आरोप लगाया गया है कि डॉ. जड्डीपाल प्रतिष्ठान के सचिव के रूप में अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं और संस्थान के उद्देश्यों के विरुद्ध कार्य कर रहे हैं। उनके कार्यकाल में भारी भर्ती अनियमितताएं, प्रशासनिक धोखाधड़ी और वैदिक विद्वानों तथा वेद पाठशालाओं का उत्पीड़न हुआ है, जो जन नीति के विरुद्ध बताया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि पूर्णतः अपात्र होने के कारण वे इस पद पर बने रहने के अयोग्य हैं और उन्हें तत्काल पद से हटाया जाना चाहिए। इसी को लेकर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया गया है। ये खबर भी पढ़ें.. गुरुकुल में छात्र को डंडे से पीटा…दर्द से चीखता रहा,VIDEO उज्जैन में महर्षि सांदीपनी राष्ट्रीय वेदविद्या संस्थान (गुरुकुल) में एक टीचर ने छात्र को डंडे से बेरहमी से पीटा। इस दौरान छात्र दर्द से चीखता रहा, लेकिन टीचर लगातार उसे मारता रहा। घटना का वीडियो शनिवार को सामने आया है। बताया जा रहा है कि वह छात्र को दूसरे के बिस्तर पर सोने की बात पर पीट रहा था।पूरी खबर पढ़ें

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