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Gold Price Today; Sona Chandi Ka Bhav Aaj Ka (27 February 2026)

Gold Price Today; Sona Chandi Ka Bhav Aaj Ka (27 February 2026)

Hindi News Business Gold Price Today; Sona Chandi Ka Bhav Aaj Ka (27 February 2026) | Gold Silver Rate Today नई दिल्ली1 घंटे पहले कॉपी लिंक सोना-चांदी के दाम में आज 27 फरवरी को तेजी रही। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 1,075 रुपए बढ़कर ₹1.59 लाख पहुंच गया। वहीं, एक किलो चांदी 6,033 रुपए बढ़कर ₹2.66 लाख पर पहुंच गई है। इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सोना 2026 में अब तक 25,892 रुपए और चांदी 37,480 रुपए महंगी हो चुकी है। इस दौरान 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपए और चांदी ने 3.86 लाख रुपए का ऑलटाइम हाई भी बनाया था। अलग-अलग शहरों में सोने के दाम अलग होने की 4 वजहें ट्रांसपोर्टेशन और सिक्योरिटी: सोना एक शहर से दूसरे शहर ले जाने में ईंधन और भारी सुरक्षा का खर्च आता है। आयात केंद्रों से दूरी बढ़ने पर ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ जाती है, जिससे स्थानीय दाम बढ़ जाते हैं। खरीदारी की मात्रा : दक्षिण भारत जैसे इलाकों में खपत ज्यादा (करीब 40%) होने के कारण ज्वेलर्स भारी मात्रा में सोना खरीदते हैं। बल्क खरीदारी पर मिलने वाली छूट का फायदा ग्राहकों को कम दाम के रूप में मिलता है। लोकल ज्वेलरी एसोसिएशन: हर राज्य और शहर के अपने ज्वेलरी एसोसिएशन (जैसे तमिलनाडु में मद्रास ज्वेलर्स एसोसिएशन) होते हैं। ये संगठन स्थानीय मांग और सप्लाई के आधार पर अपने इलाके के लिए सोने का रेट तय करते हैं। पुराना स्टॉक और खरीद मूल्य: ज्वेलर्स ने अपना स्टॉक किस रेट पर खरीदा है, यह भी मायने रखता है। जिन ज्वेलर्स के पास पुराने और सस्ते रेट पर खरीदा हुआ स्टॉक होता है, वे ग्राहकों से कम कीमत वसूल सकते हैं। सोने-चांदी के दाम बढ़ने के 4 मुख्य कारण MCX-NSE की राहत: आज से गोल्ड-सिल्वर फ्यूचर्स पर एक्स्ट्रा मार्जिन हटा दिया गया है। ट्रेडिंग सस्ती होने से निवेशकों की खरीदारी बढ़ गई है। दुनिया में टेंशन: मिडिल ईस्ट में अमेरिका-ईरान झगड़ा और रूस-यूक्रेन वार्ता फेल होने से असुरक्षा का माहौल है। लोग गोल्ड में पैसा लगा रहे हैं। फेड रेट कट की उम्मीद: अमेरिकी फेड से इस साल ब्याज दरें घटाने के संकेत दिए हैं। दरें कम होने पर गोल्ड जैसी चीजों की डिमांड बढ़ जाती है। सस्ते में खरीदारी: पिछले दिनों दोनों मेटल्स में बड़ी गिरावट के बाद दाम आकर्षक हो गए। निवेशक और ज्वेलर्स ने सस्ते में खरीदना शुरू कर दिया। 1.80 लाख तक जा सकता है सोना इन्वेस्टमेंट बैंकिंग कंपनी UBS के अनुसार सोने की मांग में तेजी बनी हुई है। 2025 में दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों ने 863 टन सोना खरीदा था। अब अनुमान है कि 2026 में यह खरीदारी बढ़कर 950 टन तक पहुंच सकती है। इसके साथ ही, गोल्ड ईटीएफ (ETF) में निवेश भी बढ़कर 825 टन होने की उम्मीद है। UBS को पूरा भरोसा है कि 2026 में सोने की कीमतें और ऊपर जाएंगी। रिपोर्ट के अनुसार, साल के बीच तक सोना 6,200 डॉलर प्रति औंस के ऊंचे स्तर को छू सकता है। अगर रुपए के हिसाब से बात करें तो सोने का भाव 1.80 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम तक जा सकता है। सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान 1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है। 2. कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें। सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है। असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके मैग्नेट टेस्ट: असली सिल्वर चुंबक से नहीं चिपकती। अगर चिपक जाए तो फेक है। आइस टेस्ट: सिल्वर पर बर्फ रखें। असली सिल्वर पर बर्फ बहुत तेजी से पिघलेगी। स्मेल टेस्ट: असली सिल्वर में गंध नहीं होती। फेक में कॉपर जैसी गंध आ सकती है। क्लॉथ टेस्ट: चांदी को सफेद कपड़े से रगड़ें। अगर काला निशान आए तो असली है। ये खबर भी पढ़ें… भारतीय घरों में देश की GDP से ज्यादा का सोना: 34,600 टन गोल्ड की कीमत ₹450 लाख करोड़, देश की GDP ₹370 लाख करोड़ भारतीय परिवारों के पास मौजूद कुल सोने की वैल्यू 5 ट्रिलियन डॉलर (₹450 लाख करोड़) के पार निकल गई है। यह आंकड़ा देश की कुल 4.1 ट्रिलियन डॉलर यानी, 370 लाख करोड़ रुपए की GDP से भी ज्यादा है। सोने की कीमतें रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने के कारण ऐसा हुआ है। मॉर्गन स्टेनली की एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय घरों में लगभग 34,600 टन सोना जमा है। अभी सोने की वैल्यू 1.38 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के करीब चल रही है। वहीं इंटरनेशनल मार्केट में सोना 4,500 डॉलर प्रति औंस (करीब 28 ग्राम) के पार ट्रेड कर रहा है। रुपए में इसे बदलें तो इसकी वैल्यू 1.30 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के करीब होती है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

‘स्टारड्यू वैली’ के 10 साल में 5 करोड़ ग्राहक:कॉर्पोरेट बर्नआउट का मरहम बना यह गेम, हॉलीवुड सेलिब्रिटी भी इसके दीवाने; पोकेमॉन-कॉल ऑफ ड्यूटी जैसे फ्रेंचाइजी गेम पीछे छूटे

‘स्टारड्यू वैली’ के 10 साल में 5 करोड़ ग्राहक:कॉर्पोरेट बर्नआउट का मरहम बना यह गेम, हॉलीवुड सेलिब्रिटी भी इसके दीवाने; पोकेमॉन-कॉल ऑफ ड्यूटी जैसे फ्रेंचाइजी गेम पीछे छूटे

कल्पना कीजिए आप अपनी थका देने वाली कॉर्पोरेट नौकरी और फाइलों के अंबार को हमेशा के लिए पीछे छोड़ देते हैं। आपके हाथ में दादाजी की विरासत में मिला छोटा सा घर है। चारों ओर हरी-भरी जमीन, मुट्ठी भर बीज और एक शांत सा कस्बा। यहां आप सिर्फ फसलें नहीं उगाते, बल्कि उन रिश्तों और सुकून को दोबारा सींचते हैं जो आधुनिक भागदौड़ में कहीं खो गए थे। यह ‘स्टारड्यू वैली’ की जादुई दुनिया है। इस गेम ने बीते 10 साल में सफलता की नई इबारत लिखी है। अब तक लगभग 5 करोड़ गेम बिक चुके हैं, जहां पोकेमॉन और कॉल ऑफ ड्यूटी जैसी अरबों डॉलर की फ्रेंचाइजी वाले गेम फीके नजर आते हैं। इसकी सफलता की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी है। इसे किसी विशाल स्टूडियो या सैकड़ों डेवलपर्स की टीम ने नहीं बनाया। इसे बनाने वाले एरिक बैरोन हैं, जिन्हें गेमिंग जगत ‘कंसर्न्डएप’ के नाम से जानता है। कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई के बाद बिना किसी पेशेवर अनुभव के बैरोन ने 2016 में इसे रिलीज किया। पहला वर्जन जारी करने में 5 साल लगे क्योंकि वे अकेले ही कोडिंग, आर्ट और म्यूजिक पर काम कर रहे थे। शुरुआत में यह प्रोजेक्ट उनके पोर्टफोलियो के लिए था, ताकि उन्हें गेम इंडस्ट्री में नौकरी मिल सके, लेकिन यह गेम इतना सफल हुआ कि उन्हें नौकरी की जरूरत ही नहीं पड़ी। सिएटल के एक छोटे से कार्यालय से काम करने वाले बैरोन कहते हैं, “यह सफलता मेरी कल्पना से परे थी। मैंने सोचा था कि यह एक बहुत ही छोटे बाजार तक ही सीमित रहेगा।” लेकिन पिक्सल के उन छोटे खानों में छिपे सुकून ने दुनिया भर के करोड़ों लोगों का दिल जीत लिया। कैट डेनिंग्स और बॉबी ली जैसे सितारों ने इस गेम के प्रति अपना जुनून साझा किया है। कैट डेनिंग्स का मानना है कि गेम की वजह से उनकी असल जिंदगी में बागवानी की आदत पड़ी। यह गेम केवल एक ‘फार्मिंग सिमुलेटर’ नहीं है। ‘पेलिकन टाउन’ नामक इसके काल्पनिक कस्बे में हर किरदार की अपनी गहराई है। यहां खिलाड़ी को टूटे हुए रिश्तों, अवसाद, युद्ध की मानसिक पीड़ा और शराब की लत जैसे गंभीर मानवीय पहलुओं का सामना करना पड़ता है। खिलाड़ी चाहे तो केवल खेती करे, या कस्बे को ‘कॉर्पोरेट पूंजीवाद’ की पकड़ से बचाने के मिशन पर निकल पड़े। लाखों खिलाड़ियों के लिए यह गेम ‘डिजिटल थेरेपी’ बन गया है। डिजिटल खेतों से 7000 करोड़ का कारोबार, ऑर्केस्ट्रा टूर भी स्टारड्यू वैली की अब तक 5 करोड़ कॉपी बिक चुकी है। इसका अनुमानित राजस्व करीब 7276.24 करोड़ हो सकता है। यह किसी एक व्यक्ति द्वारा बनाया गया शायद अब तक का सबसे लाभदायक बौद्धिक संपदा (आईपी) है। इसकी सफलता केवल गेम तक सीमित नहीं रही; इसने एक कुकबुक, बोर्ड गेम और दो वैश्विक ‘ऑर्केस्ट्रा टूर’ को भी जन्म दिया है, जहां 35 सदस्यीय बैंड इसके संगीत पर हजारों दर्शकों के सामने प्रस्तुति देता है।

वुमन ऑफ द ईयर प्रोजेक्ट-2026 में 3 भारतीय महिलाएं:सफीना ने 20लाख बेटियों को स्कूल लौटाया, 14 देशों को मुफ्त दवा दिलवा रहीं रेशमा; 7.5 लाख छात्राओं को सशक्त कर रहीं सौजानी

वुमन ऑफ द ईयर प्रोजेक्ट-2026 में 3 भारतीय महिलाएं:सफीना ने 20लाख बेटियों को स्कूल लौटाया, 14 देशों को मुफ्त दवा दिलवा रहीं रेशमा; 7.5 लाख छात्राओं को सशक्त कर रहीं सौजानी

टाइम मैगजीन ने 2026 के वुमन ऑफ द ईयर प्रोजेक्ट के लिए 16 महिलाओं को चुना है। लिस्ट में भारतीय और भारतीय मूल की तीन महिलाएं भी हैं। ये सभी लीडर्स ज्यादा बराबरी वाली दुनिया बनाने के लिए काम कर रही हैं। साथ ही महिलाओं और लड़कियों की सबसे बड़ी चुनौतियां हल करने में जुटी हैं। यह प्रोजेक्ट टाइम के सालाना वुमन ऑफ द ईयर लिस्ट से अलग है। इसे 2020 में शुरू किया गया था। कवर पर हॉलीवुड अभिनेत्री टेयाना टेलर हैं। फिल्म ​‘वन बैटल आफ्टर अनादर’ में उनका प्रदर्शन उम्दा रहा है। कुछ अनदेखे चेहरे जैसे- सिएरा लियोन के पहले मातृत्व केंद्र की अगुआई करने वाली इसाता डुम्बुया, अमेरिका-मैक्सिको बॉर्डर पर ह्यूमैनिटेरियन अभियान चला रही सिस्टर नॉरमा पिमेंटेल भी हैं। पढ़िए चुनिंदा लीडर्स का प्रेरक सफर… सफीना हुसैन- पढ़ाई अधूरी रही, इसी टीस को ताकत बनाया, जीता ‘एशिया का नोबेल’ बचपन गरीबी, हिंसा व अधूरी पढ़ाई के दर्द से गुजरा। इसी टीस को ताकत बनाया और मुंबई में ‘एजुकेट गर्ल्स’ की नींव रखी। वे कहती हैं,‘मैं जानती हूं पीछे छूट जाना कैसा लगता है। बीते साल संस्था ने भारत के गांवों की 20 लाख लड़कियों को स्कूल लौटाने में सफलता हासिल की। लक्ष्य 15 लाख ही था। इसके लिए संस्था को रैमन मैग्सेसे पुरस्कार मिला। उनका एनजीओ यह सम्मान पाने वाला पहला संगठन बना। हाल में आई उनकी किताब ‘एवरी लास्ट गर्ल’ में अंतिमबाला का किरदार हर उस लड़की का प्रतीक है, जिसकी आवाज अनसुनी कर दी गई। ‘कोई भी लड़की बकरी चराना या बाल वधू बनना नहीं चाहती, हर लड़की… बस स्कूल जाना चाहती है’- सफीना रेशमा केवलरमानी – सिकल सेल का इलाज खोजा, अब डायबिटीज को हराने में जुटीं ठान चुकी हैं, लाइलाज बीमारियों को जड़ से मिटाना है। किडनी डॉक्टर से शुरू हुआ सफर आज दुनिया की दिग्गज बायोटेक कंपनी (वर्टेक्स) की पहली महिला सीईओ बनने तक जा पहुंचा है। उनके नेतृत्व में वर्टेक्स भारत समेत दुनिया के 14 देशों में ‘सिस्टिक फाइब्रोसिस’ (फेफड़ों की बीमारी) की महंगी दवाएं मुफ्त उपलब्ध करा रही है। रेशमा के नेतृत्व में कंपनी ने सिकल सेल बीमारी के लिए क्रिस्पर आधारित पहली जीन-एडिटिंग थेरेपी लॉन्च की। अब डायबिटीज और किडनी रोगों को पूरी तरह खत्म करने वाली थेरेपी पर काम कर रही हैं। ‘दवाओं का असली मकसद सिर्फ मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि इंसान को मौत के मुंह से खींच लाना है’- रेशमा रेशमा सौजानी – अमेरिकी माताओं की आवाज, चाइल्डकेयर अभियान का चेहरा शरणार्थी की बेटी और पहली भारतीय-अमेरिकी कांग्रेस प्रत्याशी ने साहस से सत्ता को झकझोरा। इससे अमेरिका में माताओं के लिए सस्ते चाइल्डकेयर और न्यूयॉर्क में ‘यूनिवर्सल केयर’ का रास्ता खुला। अपनी संस्थाओं ‘मॉम्स फर्स्ट’ व ‘गर्ल्स हू कोड’ के जरिए 7.6 लाख छात्राओं को सशक्त कर रही हैं। हम बेटियों को ‘परफेक्ट’ बनाना चाहते हैं, जबकि बेटों को ‘बहादुर’। समाज में असली समानता तब आएगी जब हम महिलाओं को अपनी गलतियों पर शर्मिंदा होना नहीं, बल्कि अपनी बहादुरी पर गर्व करना सिखाएंगे।’ ‘असली ताकत ‘जीतने’ में नहीं, बल्कि ‘हारने के बाद भी दोबारा खड़े होने के साहस’ में है’- रेशमा सौजानी

खरगोन से बड़वानी जा रही बस खेत में उतरी, CCTV:हादसे में 16 यात्री घायल, स्टेयरिंग सिस्टम अचानक फेल होने से हादसा

खरगोन से बड़वानी जा रही बस खेत में उतरी, CCTV:हादसे में 16 यात्री घायल, स्टेयरिंग सिस्टम अचानक फेल होने से हादसा

बड़वानी-खंडवा बड़ोदा स्टेट हाईवे पर राजपुर में नायरा पेट्रोल पंप के पास एक यात्री बस हादसे का शिकार हो गई। खरगोन से बड़वानी की ओर आ रही अमन ट्रैवेल्स की बस अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे खेत में उतर गई। इस हादसे में 15 से 16 यात्री घायल हुए हैं। स्टेयरिंग सिस्टम अचानक फेल हो जाने से हादसा जानकारी के मुताबिक, बस का स्टेयरिंग सिस्टम अचानक फेल हो जाने से चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख पाया। बस सीधे सड़क किनारे खेत में जा घुसी। पूरी घटना पास लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है, जिसमें बस को सड़क से नीचे उतरते देखा जा सकता है। हादसे के तुरंत बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से घायलों को बस से बाहर निकाला गया। गंभीर रूप से घायल 9 यात्री जिला अस्पताल सभी घायल यात्रियों को तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राजपुर पहुंचाया गया। प्राथमिक इलाज के बाद, गंभीर रूप से घायल 9 यात्रियों को जिला अस्पताल बड़वानी रेफर किया गया। बीएमओ डॉ. देवेंद्र रोमड़े ने बताया कि अन्य यात्रियों को हल्की चोटें आई हैं। बस में करीब 30 से 35 यात्री सवार थे यात्री जितेंद्र अहिरवार ने बताया कि खंडवा से बड़वानी जा रही अमन बस (MP 12 P 0379) जुलवानिया रोड पर अनियंत्रित हुई। बस में करीब 30 से 35 यात्री सवार थे। उन्होंने यह भी बताया कि बस की गति कम होने के कारण सभी लोग सुरक्षित रहे। सूचना मिलते ही पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और राहत कार्य में सहयोग किया। अधिकारी गजेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है। पुलिस ने मामला दर्ज कर तकनीकी कारणों की भी पड़ताल शुरू कर दी है।

मायावती की बसपा ने 2027 यूपी चुनाव के लिए चार उम्मीदवारों की घोषणा की, जातिगत अंकगणित पर ध्यान केंद्रित किया | राजनीति समाचार

Former Delhi Chief Minister Arvind Kejriwal and former Deputy CM Manish Sisodia (Image credit: PTI)

आखरी अपडेट:27 फरवरी, 2026, 12:41 IST बहुजन समाज पार्टी ने 2027 के उत्तर प्रदेश चुनावों के लिए चार उम्मीदवारों की घोषणा की है, जिसका लक्ष्य ब्राह्मण-मुस्लिम-दलित गठबंधन को फिर से हासिल करना है। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती. (फोटो क्रेडिट: एक्स) 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अभी एक साल से अधिक समय बाकी है, ऐसे में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने प्रारंभिक तैयारी शुरू कर दी है, जो पार्टी प्रमुख मायावती के तहत सोशल इंजीनियरिंग पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करने का संकेत है। मायावती के नेतृत्व वाली पार्टी ने अब तक उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों – पूर्वाचल, बुंदेलखंड और पश्चिमी यूपी से चार उम्मीदवारों की घोषणा की है। इनमें दो मुस्लिम और दो ब्राह्मण नेता हैं, जो 2027 के चुनावों के लिए पार्टी के ब्राह्मण-मुस्लिम-दलित राजनीतिक संयोजन बनाने के प्रयास का संकेत देते हैं। यह कदम 2022 के विधानसभा चुनावों में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद आया है, जब बसपा सिर्फ एक सीट जीतने में सफल रही, हालांकि वह 18 निर्वाचन क्षेत्रों में दूसरे स्थान पर रही। खोई जमीन वापस पाने के लिए दृढ़ संकल्पित पार्टी की योजना मार्च 2026 तक 100 से अधिक सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा करने की है। ये उम्मीदवार कौन हैं? अबुल क़ैस आज़मी (दीदारगंज) आज़मगढ़ की दीदारगंज सीट पर, बसपा ने लंबे समय से पार्टी के नेता अबुल क़ैस आज़मी को मैदान में उतारा है, जिन्होंने पहले 2012 और 2017 में फूलपुर पवई से चुनाव लड़ा था। उन्होंने उन चुनावों में क्रमशः 46,000 और 61,000 वोट हासिल किए और दोनों बार मामूली अंतर से दूसरे स्थान पर रहे। उन्होंने 2022 के चुनावों में भाग नहीं लिया लेकिन अब एक नई सीट पर अपनी संभावनाओं का परीक्षण करेंगे। इस निर्वाचन क्षेत्र में बड़ी संख्या में मुस्लिम और दलित आबादी है। यहां करीब 95,000 मुस्लिम और 80,000 दलित मतदाता हैं. ओबीसी में राजभर (38,000), चौहान (14,000) और निषाद (7,000) एक बड़ा समूह बनाते हैं। 2022 में समाजवादी पार्टी ने 37% वोट शेयर के साथ सीट जीती, जबकि बीजेपी को 30% और बीएसपी को 23% वोट मिले। बसपा को उम्मीद है कि वह इन वोटों को एकजुट कर लेगी। फिरोज आफताब (सहारनपुर ग्रामीण) पश्चिमी यूपी के सहारनपुर ग्रामीण से बसपा ने फिरोज आफताब को उम्मीदवार बनाया है, जो हाल ही में समाजवादी पार्टी छोड़कर पार्टी में शामिल हुए हैं। उनके दादा चौधरी जफर अहमद कांग्रेस से यूपी की पहली विधानसभा के लिए चुने गए थे। आफताब ने स्वयं कई चुनाव लड़े हैं, जिसमें 1996 में निर्दलीय चुनाव भी शामिल है, जब वह लगभग 40,000 वोट पाने के बावजूद भाजपा से मात्र 90 वोटों से हार गए थे। इस सीट पर प्रभावशाली ओबीसी और उच्च जाति के मतदाताओं के साथ-साथ मुस्लिम और दलित मतदाताओं का एक बड़ा आधार है। सहारनपुर ग्रामीण में लगभग 1.25 लाख मुस्लिम और 90,000 दलित मतदाता हैं, साथ ही सैनी (32,000), गुर्जर (18,000) और लगभग 24,000 ब्राह्मण-ठाकुर मतदाता हैं। 2022 में सपा के आशु मलिक 1.07 लाख वोटों से जीते, बीजेपी के जगपाल सिंह को 76,000 और बसपा उम्मीदवार को 62,000 वोट मिले. विनोद मिश्र (मुंगरा बादशाहपुर) जौनपुर के मुंगरा बादशाहपुर में ब्राह्मण नेता विनोद मिश्रा को चुना गया है. मिश्रा ने सपा में जाने से पहले भाजपा के साथ अपना करियर शुरू किया, जहां वह 2022 तक रहे। वह छह महीने पहले बसपा में शामिल हुए और अपना पहला चुनाव लड़ेंगे। इस निर्वाचन क्षेत्र में दलित और ओबीसी मतदाताओं के साथ-साथ ब्राह्मणों की भी मजबूत उपस्थिति है। ओबीसी में 30,000 मुसलमानों के साथ पटेल (60,000) और यादव (40,000) प्रभावशाली हैं। 2022 में सपा के पंकज पटेल 92,000 वोटों से जीते, बीजेपी के अजय शंकर दुबे को 86,000 वोट मिले और बसपा उम्मीदवार 32,000 से पीछे रहे. आशीष पांडे (माधौगढ़) बुंदेलखंड की माधौगढ़ सीट पर पार्टी ने क्षेत्र में दलित-ब्राह्मण समीकरण पर भरोसा करते हुए आशीष पांडे को मैदान में उतारा है। 2017 और 2022 में टिकट से वंचित होने के बाद, उन्होंने अपने तीसरे प्रयास में नामांकन हासिल किया है। माधौगढ़ में लगभग 90,000 दलित मतदाता हैं – जो सबसे बड़ा समूह है – इसके बाद 44,000 ब्राह्मण, 40,000 राजपूत और 20,000 मुस्लिम हैं। कुशवाह और कुर्मी समेत ओबीसी मतदाताओं की संख्या करीब 1.5 लाख है. 2022 में बीजेपी ने 41% वोट शेयर के साथ सीट जीती, जबकि बीएसपी को 27% और एसपी को 24% वोट मिले। बड़ी रणनीति हाल की बैठकों में मायावती ने बार-बार सामाजिक अंकगणित के महत्व पर जोर दिया है। उत्तर प्रदेश की आबादी में दलित लगभग 20%, मुस्लिम लगभग 19% और ब्राह्मण 9-11% के बीच हैं। बसपा नेतृत्व का मानना ​​है कि इन समूहों को एकजुट करने से कई निर्वाचन क्षेत्रों में उसके वोट शेयर में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। पार्टी ने वरिष्ठ नेताओं को जाति आउटरीच प्रयासों का प्रबंधन करने का काम भी सौंपा है, जिसका लक्ष्य समुदायों में अपना समर्थन आधार फिर से बनाना है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि बसपा की शुरुआती घोषणाओं का उद्देश्य बूथ-स्तरीय संगठन को मजबूत करना और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) दोनों का मुकाबला करना है, जो वर्तमान में राज्य के राजनीतिक परिदृश्य पर हावी हैं। पूर्वी, पश्चिमी और बुंदेलखंड क्षेत्रों में उम्मीदवारों की शुरुआती घोषणाओं के साथ, बसपा अपनी खोई जमीन वापस पाने और उत्तर प्रदेश की जटिल जाति-संचालित राजनीति में एक निर्णायक खिलाड़ी के रूप में खुद को फिर से स्थापित करने का प्रयास कर रही है। पहले प्रकाशित: 27 फरवरी, 2026, 12:41 IST समाचार राजनीति मायावती की बसपा ने 2027 यूपी चुनाव के लिए चार उम्मीदवारों की घोषणा की, जातिगत अंकगणित पर ध्यान केंद्रित किया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027(टी)बीएसपी उम्मीदवार सूची 2027(टी)मायावती सोशल 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Imli Ke fayde: खट्टी-मीठी इमली इम्यूनिटी बढ़ाए, पाचन का रखे ख्याल, जानें सेवन के फायदे और नुकसान

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होली में कई तरह के पकवान बनाए जाते हैं, जिसमें एक है खट्टी-मीठी इमली की चटनी. काफी लोग होली पर गुड़ डालकर इमली की चटनी बनाते हैं. इमली न सिर्फ स्वाद में खट्टी-मिठी होती है, भोजन का स्वाद बढ़ाती है, बल्कि सेहत के लिए भी फायदेमंद होती है. पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने के साथ ही इमली कई तरह के स्वास्थ्य लाभ पहुंचाती है. इमली में मौजूद न्यूट्रिएंट्स और इसके सेवन से होने वाले फायदों के बारे में जानें यहां… इमली में मौजूद पोषक तत्वइमली में कई तरह के पोषक तत्व होते हैं, जैसे मैग्नीशियम, फाइबर, विटामिन सी, कैल्शियम, एंटीऑक्सीडेंट्स, विटामिन बी1, पोटैशियम, आयरन, विटामिन सी आदि. इमली स्वाद और सेहत का खजाना है.यह प्रकृति की अनमोल देन है. इमली के वृक्ष की शाखाएं झुकी हुई और छाल खुरदरी भूरी होती है, जिससे इसे पहचानने में आसानी होती है. इमली का खट्टा-मीठा गूदा भोजन में स्वाद बढ़ाता है. आमतौर पर इमली चटनी, सांभर जैसे पारंपरिक व्यंजनों का मुख्य हिस्सा है. इमली खाने के फायदे -इमली का पारंपरिक चिकित्सा में सदियों से इस्तेमाल किया जा रहा है. यह एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती है. इसके सेवन से शरीर में सूजन कम होती है. विटामिन सी इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाती है. -इमली में मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को सुधारती है. इसके सेवन से कब्ज की समस्या ठीक होती है. लैक्सेटिव प्रभाव से पेट साफ रखती है. -इमली खाने से कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में रहता है. बैड कोलेस्ट्रॉल कम होने से हार्ट डिजीज होने का जोखिम कम हो जाता है. गुड कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने के लिए आप इमली खा सकते हैं, लेकिन सीमित मात्रा में इसका सेवन है फायदेमंद. इससे हार्ट हेल्दी रहता है. -इमली में पॉलीफेनॉल्स और फ्लेवोनॉएड्स होते हैं, जो इंफ्लेमेशन कम करने में कारगर हो सकते हैं. लिवर के लिए भी हेल्दी मानी गई है इमली.यह ब्लड शुगर लेवल संतुलित रखने में मददगार हो सकती है. साथ ही उनके लिए भी फायदेमंद है, जो वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं. -इमली की पत्तियां, छाल और बीज ये सभी औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं. एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुणों वाली इमली बैक्टीरिया और फंगस से लड़ने में मदद करती है. इमली अधिक खाने के नुकसानइमली का सेवन अगर एक बार में ही अधिक कर लिया तो आपको दस्त और पेट दर्द हो सकता है. डायबिटीज के मरीज इमली खाने से पहले डॉक्टर की सलाह लें. एसिडिक होने से दांतों की इनेमल को नुकसान पहुंचा सकती है, इसलिए पानी से कुल्ला करें. प्रेग्नेंट लेडीज और अपने शिशु को स्तनपान कराने वाली महिलाएं, किडनी मरीज, किसी तरह की दवा ले रहे लोग डॉक्टर से जरूर बात कर लें. जिन लोगों को एलर्जी की समस्या है, उन्हें खुजली, रैशेज भी हो सकती है. ऐसे में एक बारे में ही अधिक सेवन से बचना चाहिए.

मेसी का खुलासा- स्पेन से खेलने का ऑफर ठुकराया:अंग्रेजी न सीख पाने का आज भी मलाल, बोले- भाषा की कमी से कई बड़े लोगों से खुलकर बात नहीं कर सका

मेसी का खुलासा- स्पेन से खेलने का ऑफर ठुकराया:अंग्रेजी न सीख पाने का आज भी मलाल, बोले- भाषा की कमी से कई बड़े लोगों से खुलकर बात नहीं कर सका

अर्जेंटीना के वर्ल्ड कप विजेता कप्तान लियोनेल मेसी ने अपने करियर और निजी जीवन से जुड़े कई अहम पहलुओं पर खुलकर बात की है। एक मैक्सिकन पॉडकास्ट के दौरान मेसी ने स्वीकार किया कि बचपन में अंग्रेजी न सीख पाना उन्हें अब भी खलता है। 38 वर्षीय मेसी ने कहा, ‘मुझे कई बातों का अफसोस है, लेकिन बचपन में अंग्रेजी न सीखना सबसे बड़ा पछतावा है। मेरे पास समय था, मैं पढ़ सकता था। करियर के दौरान मुझे दुनिया की कई बड़ी और प्रभावी हस्तियों से मिलने का मौका मिला, लेकिन भाषा की कमी के कारण मैं उनसे खुलकर संवाद नहीं कर सका। मैं ऐसे पलों में खुद को आधा अनजान महसूस करता था। अमेरिका के मेजर लीग सॉकर क्लब इंटर मियामी के लिए खेल रहे मेसी अब अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा और तैयारी के महत्व के बारे में लगातार समझाते हैं। मेसी 13 साल की उम्र में अपने शहर रोसारियो से स्पेन पहुंचे और बार्सिलोना की प्रसिद्ध एकेडमी ला मासिया से जुड़े। उन्होंने भावुक होकर याद किया, ‘पूरा मोहल्ला हमें एयरपोर्ट छोड़ने आया था। वे लियो मेसी को नहीं, बल्कि मेसी परिवार को विदा कर रहे थे।’ स्पेन में उनका पहला साल बहुत कठिन था। ट्रांसफर नियमों के कारण वे छह महीने तक नहीं खेल पाए और जब खेलने का मौका मिला, तो चोटिल होकर 3 महीने के लिए बाहर हो गए थे। स्पेन में पले-बढ़े और पूरा क्लब करियर वहीं बनाने के कारण मेसी के पास स्पेन की नेशनल टीम से खेलने का विकल्प भी था। उस समय स्पेनिश फुटबॉल फेडरेशन ने उन्हें मनाने की कोशिश की। लेकिन मेसी ने साफ किया कि उनके मन में कभी भ्रम नहीं था। उनका दिल हमेशा अर्जेंटीना के साथ था। करियर के कठिन दौर में जब अर्जेंटीना बड़े टूर्नामेंटों के फाइनल हार रहा था, तब कुछ आलोचकों ने सवाल उठाए थे कि शायद स्पेन के साथ खेलते तो मेसी ज्यादा ट्रॉफी जीतते। लेकिन मेसी ने फैसले पर कभी पछतावा नहीं किया। आठ बार बैलेन डि’ओर जीत चुके मेसी ने स्वीकारा कि भले ही उन्होंने फुटबॉल में इतना कुछ हासिल किया, लेकिन सीखने व बेहतर बनने की प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होती। रास्ते में कई अनुभव और सबक मिलते हैं, जो इंसान को बनाते हैं। मैंने एंटोनेला को बार्सिलोना में डिनर के दौरान प्रपोज किया था। हम कई साल से साथ थे और हमारे दो बच्चे भी थे। यह अचानक लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि स्वाभाविक कदम था। यह थोड़ा फिल्मी और रोमांटिक अंदाज में था।

Badshah Visits Sonipat for Teteri Song Promotion, Jokes on Sarpanch Controversy

Badshah Visits Sonipat for Teteri Song Promotion, Jokes on Sarpanch Controversy

राम सिंहमार, सोनीपत5 घंटे पहले कॉपी लिंक बॉलीवुड मशहूर रैपर एवं सिंगर बादशाह सोनीपत के गांव असदपुर नांदनोर पहुंचे और अपने नए सॉन्ग टटीरी पर परफोर्मेंस दी। कैथल के पट्‌टी अफगान गांव में भी सिंगर ने हरियाणवी सॉन्ग पर जमकर ठुमके लगाए। बॉलीवुड रैपर-सिंगर बादशाह ने हरियाणवी फॉक सॉन्ग टटीरी का रैप वर्जन रिकॉर्ड किया है। इसी सिलसिले में सिंगर अपनी टीम के साथ सोनीपत के गांव असदनपुर-नांदनोर पहुंचे, यहां उन्हें बैल-बुग्गी पर बैठाकर गांव की गलियों में घुमाया गया। सरपंच मुकेश उर्फ बल्लू के घर पर देसी खाना खाया। गांव के स्कूल में रखे गए कार्यक्रम के दौरान मंच से घोषणा की गई कि सिंगर बादशाह असदपुर और नांदनोर गांवों के सरपंचों का सम्मानित करेंगे। इस पर सिंगर ने माइक थामकर कहा- वैसे तो इन लोगों को मुझे सम्मानित करना चाहिए था। फिर मजाकिया अंदाज में बोले-मासूम शर्मा वाली वीडियो तो देखी ही होगी आपने…। दरअसल, जींद में 18 फरवरी को हुए कार्यक्रम के दौरान हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा ने चिल्लाकर पूर्व सरपंच को मंच से उतार दिया था। कहा था- मेरे गाने के प्रोग्राम के बीच में कोई सरपंच हो, कोई एमएलए हो, कोई मंत्री हो, मैं किसी ने कुछ नहीं मानता। आप चाहे सरपंच हो मेरा परफॉर्मेंस नीचे बैठकर देखो। फिलहाल, यह बड़ा मुद्दा बना हुआ है। सरपंच एसोसिएशन ने सिंगर को माफी मांगने के लिए 3 दिन की मोहलत दे रखी है। यह भी कह रखा है कि जब तक मासूम शर्मा सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगेंगे, हरियाणा प्रदेश की किसी भी पंचायत में उनके शो आयोजित नहीं होने दिए जाएंगे। कैथल में हरियाणवी सॉन्ग पर डांस करते रैपर बादशाह। अपने नए गीत ‘टटीरी’ के प्रमोशन के सिलसिले में बादशाह बुग्गी में बैठकर गांव पहुंचे। उन्होंने बच्चों के बीच रैप किया। बच्चे झूमते नजर आए और खुशी जाहिर की। एक छोटी बच्ची को गोद में उठाकर भी उन्होंने डांस किया। सिंगर बदमाश को देखने के लिए खूब भीड़ जुटी। यहां जानिए बॉलीवुड रैपर-सिंगर बादशाह का कैसा हुआ वेलकम… ढोल के साथ बुग्गी पर बैठाकर लाए ग्रामीण : सिंगर बादशाह के गांव में पहुंचने की सूचना से ग्रामीण जुट गए। गांव की सीमा पर ढोल बजाकर उनका स्वागत किया गया और फूलमालाएं पहनाई गईं। अनुराज आंतिल, सरपंच राजवीर आंतिल सहित अन्य व्यक्तियों ने उनका अभिनंदन किया। गांव की एंट्री पर उनके लिए विशेष रूप से बैल-बुग्गी मंगवाई गई। बुग्गी पर गद्दे बिछाए गए और करीब 500 मीटर तक उन्हें बुग्गी में बैठाकर राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल के मैदान स्थित कार्यक्रम स्थल तक ले जाया गया। बच्चों में दिखा जबरदस्त उत्साह, म्यूजिक सिस्टम भेंट किया : बादशाह को देखने के लिए बच्चे दौड़ते हुए पहुंचे। कई बच्चे हाथों में उनके पोस्टर लिए खड़े नजर आए। विद्यार्थियों के लिए बादशाह ने 40 हजार रुपए का सोनी कंपनी का म्यूजिक सिस्टम गिफ्ट किया। हरियाणवी संस्कृति और संगीत को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विद्यालय को यह स्पीकर सेट भेंट किया गया। मंच से बच्चों संग मस्ती, ‘पार्टी’ का एलान: मंच से संबोधित करते हुए बादशाह ने बच्चों से पूछा कि आज स्कूल लगा था या छुट्टी थी। बच्चों ने जवाब दिया कि छुट्टी हो गई है। इस पर बादशाह ने कहा, “अब पार्टी करनी है… पार्टी करनी है तो शोर मचाओ…”। हरियाणवी अंदाज में बच्चों ने जोरदार किलकी लगाई। उन्होंने मंच से एक बुजुर्ग ताऊ को आवाज देते हुए कहा, “राम-राम ताऊ… तन्ये पार्टी नहीं करनी के…”। ग्राम प्रतिनिधियों ने किया सम्मान : इस दौरान सरपंच रणवीर उर्फ नाना, सरपंच मुकेश उर्फ बल्लू, जिला प्रसाद संत कुमार अंतिल और राजबीर अंतिल एडवोकेट सहित अन्य गणमान्य लोगों ने बादशाह का स्वागत किया। ग्राम प्रतिनिधियों और आयोजन समिति की ओर से भी उन्हें सम्मानित किया गया। बादशाह ने सरपंच मुकेश उर्फ बल्लू के घर पर देसी भोजन का आनंद लिया। सरपंच के घर देसी पकवानों का आनंद गांव पहुंचने के बाद बादशाह ने सरपंच मुकेश उर्फ बल्लू के घर पर देसी भोजन का आनंद लिया। घर में सरपंच की पत्नी और उनकी मां मक्की की रोटी बनाती नजर आई। वीडियो में बादशाह पीछे खड़े होकर पूछते दिखाई दिए कि “सरसों का है या किसी और का…”, जिस पर जवाब मिला कि सरसों का साग है। बादशाह की टीम के हिमाचल से आए एक सदस्य ने पूछा कि आप क्या कहना चाहोगे, तो बादशाह ने हंसते हुए कहा, “आज तक तूने मुझे कुछ नहीं खिलाया है…” इसके बाद उन्होंने सरसों का साग, मक्की की रोटी, मक्खन और लस्सी के साथ भोजन किया। मंच से “मासूम शर्मा वाली वीडियो देखी है ना…” कहकर चल रहे सरपंच विवाद पर भी हल्के-फुल्के अंदाज में मजे लिए, जिससे माहौल में जोश और बढ़ गया। सम्मान समारोह में बादशाह ने सिंगर मासूम शर्मा का जिक्र किया कार्यक्रम के दौरान सरपंच रणवीर सिंह मंच संभाले हुए थे। उन्होंने कहा कि बादशाह ने गांव को जो प्रेरणा दी है, उसके लिए पूरा गांव आभारी रहेगा। उन्होंने कहा कि वह हरियाणा ही नहीं, बल्कि पूरे संसार की शान हैं। सरपंच रणवीर सिंह उर्फ नाना ने कहा कि असदपुर और नांदनोर एक ही गांव हैं और दोनों का एक ही सरकारी स्कूल है। दोनों सरपंचों को बादशाह सम्मानित करेंगे। बादशाह ने मजाकिया अंदाज में कहा कि “वैसे तो इन्हें मुझे सम्मानित करना चाहिए…” रणवीर सिंह ने जवाब दिया कि बादशाह को पहले ही सम्मानित किया जा चुका है और “हम उल्हाणा नहीं ओटेंगे…” बादशाह ने रणवीर सिंह और बल्लू प्रधान को पटका पहनाकर सम्मानित किया। इसी बीच बादशाह ने माइक लेकर कहा, “मासूम शर्मा वाली वीडियो देखी है ना…” इतना सुनते ही भीड़ में किलकियां गूंज उठी। बता दें कि इन दिनों मासूम शर्मा और सरपंचों के बीच विवाद चर्चा में है। वहीं मंच पर सरपंचों को सम्मानित करवाए जाने के दौरान बादशाह ने इसी संदर्भ में मंच से मासूम शर्मा के वीडियो को लेकर हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी की गई, जिसकी गांव में खूब चर्चा रही। —————- ये खबर भी पढ़ें… हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा ने सरपंच को धमकाया, VIDEO:मंच से उतारकर बोले- MLA-मंत्री तक को कुछ नहीं समझता, भीड़ से भी धक्का-मुक्की की हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा एक बार फिर सुर्खियों में हैं। एक लाइव शो के दौरान उन्होंने स्टेज पर खड़े पूर्व सरपंच व समर्थकों पर चिल्लाते

मृणाल ठाकुर ने अल्लू अर्जुन को भेजा फूलों का बुके:‘पुष्पा 2’ के लिए अवॉर्ड मिलने पर दी बधाई; एक्टर बोले- कभी साथ काम करेंगे

मृणाल ठाकुर ने अल्लू अर्जुन को भेजा फूलों का बुके:‘पुष्पा 2’ के लिए अवॉर्ड मिलने पर दी बधाई; एक्टर बोले- कभी साथ काम करेंगे

70वें फिल्मफेयर साउथ अवॉर्ड्स में एक्टर अल्लू अर्जुन को फिल्म ‘पुष्पा 2’ के लिए बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड मिला। एक्ट्रेस मृणाल ठाकुर ने अल्लू अर्जुन को फूलों का बुके भेजा और एक नोट भी लिखा। उन्होंने लिखा, “सर, फिल्मफेयर में बेस्ट एक्टर अवॉर्ड जीतने पर दिल से बधाई। यह सम्मान आपके लिए पूरी तरह सही है। आपकी मेहनत, गहराई और हर परफॉर्मेंस में दिखने वाली एनर्जी प्रेरित करती है।” अल्लू अर्जुन ने इस बुके की तस्वीर इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर की। उन्होंने जवाब में लिखा, “बहुत-बहुत धन्यवाद मृणाल। आपका मैसेज बहुत प्यारा है। उम्मीद है किसी दिन आपके साथ काम करने का मौका मिलेगा।” इससे पहले उन्होंने अवॉर्ड सेरेमनी की भी झलक सोशल मीडिया पर शेयर की थी। उन्होंने लिखा, “फिल्मफेयर का धन्यवाद इस सम्मान के लिए। यह मेरे लिए खास है। मैं यह अवॉर्ड अपने फैंस को समर्पित करता हूं, जिनका प्यार हमेशा मेरे साथ है।” फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में ‘पुष्पा 2’ ने कई अवॉर्ड जीते बता दें कि फिल्मफेयर अवॉर्ड्स साउथ 2026 में ‘पुष्पा 2’ ने 5 अवॉर्ड जीते। सुकुमार को बेस्ट डायरेक्टर का अवॉर्ड मिला। नवीन यरनेनी और वाई रवि शंकर को बेस्ट फिल्म का सम्मान मिला। देवी श्री प्रसाद को बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर और रामकृष्ण और मोनिका को बेस्ट प्रोडक्शन डिजाइन का अवॉर्ड मिला। बता दें कि यह फिल्म 2024 में रिलीज हुई थी और बॉक्स ऑफिस पर सफल रही। यह 2021 की फिल्म ‘पुष्पा: द राइज’ का सीक्वल है। फिल्म में अल्लू अर्जुन के साथ रश्मिका मंदाना, फहाद फासिल, जगपति बाबू, सुनील और राव रमेश नजर आए थे। टीम अब ‘पुष्पा’ के तीसरे पार्ट की तैयारी में है।

Google Nano Banana 2: AI Image Generator Launch

Google Nano Banana 2: AI Image Generator Launch

नई दिल्ली17 घंटे पहले कॉपी लिंक गूगल ने अपना अब तक का सबसे तेज और एडवांस AI इमेज जनरेशन मॉडल नैनो बनाना 2 लॉन्च कर दिया है। CEO सुंदर पिचाई ने इसे गूगल का ‘बेस्ट इमेज मॉडल’ बताया है। यह नया टूल कल्पना को हाई-क्वालिटी तस्वीर में बदल सकता है। गूगल सर्च की मदद से रियल-टाइम जानकारी का इस्तेमाल कर सटीक और असली दिखने वाली इमेज भी तैयार करता है। यह साधारण AI टूल्स की तुलना में ज्यादा तेजी से और ज्यादा बारीकी के साथ रिजल्ट देता है। आइए जानते हैं कि यह टूल कैसे आपके काम आ सकता है… 1. पुरानी फोटो को नया लुक देना: चेहरा वही, स्टाइल नया अक्सर हम अपनी किसी पुरानी फोटो का बैकग्राउंड बदलना चाहते हैं, लेकिन चेहरे में बदलाव आने का डर रहता है। नैनो बनाना 2 की ‘फेस कंसिस्टेंसी’ खूबी की वजह से अब आप अपनी फोटो में चेहरा वही रखकर सिर्फ कपड़े, हेयरस्टाइल या बैकग्राउंड सटीकता से बदल सकते हैं। कैसे करें: बस फोटो अपलोड करें और कहें- “मेरा चेहरा यही रहने दें, लेकिन मुझे पहाड़ों के बैकग्राउंड में फॉर्मल सूट पहने हुए दिखाएं।” यह तुरंत नई इमेज जनरेट कर देगा। 2. बच्चों की पढ़ाई और प्रोजेक्ट्स में मदद: अब खुद बनाएं इन्फोग्राफिक्स इस टूल की समझ इतनी गहरी है कि यह जटिल ग्राफिक्स भी बना सकता है। जैसे कई बार स्कूल प्रोजेक्ट्स के लिए अक्सर हमें इंटरनेट पर सटीक डायग्राम नहीं मिलते। कई बार ये अपनी भाषा में भी नहीं मिलते। इस टूल की मदद से आप अपनी पसंद के भाषा में 4K इन्फोग्राफिक बनवा सकते हैं। ये इंग्लिश ग्राफिक को हिंदी में भी बदल सकते हैं। कैसे करें: जेमिनी एप में जाकर बोलें- “सौर मंडल का एक 4K चार्ट बनाएं जिसमें हर ग्रह का नाम हिंदी में लिखा हो।” यह तुरंत आपको एक फ्रेश और ओरिजिनल इमेज बना कर दे देगा। इसे निर्देश दें कि वॉटर साइकिल का एक 4K इन्फोग्राफिक बनाओ जिसमें हिंदी में साफ लेबल लिखे हों। यह पढ़ने लायक टेक्स्ट और रियलिस्टिक लाइटिंग के साथ इमेज तैयार कर देगा। 3. दुकानदारों और बिजनेस के लिए फ्री ग्राफिक डिजाइनर अगर आप अपना छोटा बिजनेस चलाते हैं और सोशल मीडिया पर प्रोडक्ट की फोटो डालनी है, तो अब महंगे डिजाइनर की जरूरत नहीं है। नैनो बनाने आपके लिए ये काम तेजी से कर देगा। कैसे करें: अपने प्रोडक्ट की फोटो खींचें और AI को निर्देश दें- “इस जूते की फोटो को एक स्टाइलिश शोरूम के बैकग्राउंड में रखें और ऊपर ‘50% डिस्काउंट’ लिख दें।” 4. वॉट्सएप और सोशल मीडिया के लिए यूनिक स्टिकर और डीपी आप ऐसे मीम्स या स्टिकर्स बना सकते हैं जो इंटरनेट पर कहीं और नहीं मिलेंगे। कैसे करें: जेमिनी एप में जाकर बोलें- “एक चश्मा पहने हुए कुत्ते की फनी फोटो बनाओ जो समोसा खा रहा हो।” यह सेकंड्स में आपको इमेज दे देगा। इस ग्राफिक को नैनो बनाना 2 की मदद से बनाया गया है। ये टूल इस तरह के ग्राफिक भी जनरेट कर सकता है। गूगल के इन एप्स में मिलेगा नैनो बनाना 2 का सपोर्ट गूगल नैनो बनाने को अपने पूरे इकोसिस्टम में जोड़ रहा है। यूजर्स इसका इस्तेमाल जेमिनी एप , गूगल सर्च के AI मोड, गूगल लेंस और गूगल के ‘फ्लो’ वीडियो टूल में कर सकेंगे। इससे ग्राफिक डिजाइनिंग और फोटो एडिटिंग का काम हर किसी के लिए आसान हो जाएगा। अगस्त 2025 में शुरू हुआ था नैनो बनाना का सफर गूगल ने पिछले साल अगस्त में पहली बार अपना इमेज जनरेशन मॉडल ‘नैनो बनाना’ लॉन्च किया था, जो अपनी हाई-रेजोल्यूशन फोटो के लिए काफी पॉपुलर हुआ। इसके बाद नवंबर में एडवांस इमेज जनरेशन के लिए ‘नैने बनाना प्रो’ मॉडल लाया गया। इसे प्रोफेशनल स्टूडियो क्वालिटी इमेज के लिए डिजाइन किया गया था। अब नैनो बनाना 2 के साथ कंपनी ने रफ्तार और इंटेलिजेंस को मिलाकर एक ऐसा टूल तैयार कर लिया है जो आम यूजर्स और प्रोफेशनल्स दोनों के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…