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4 मिनट की सांस फूलने वाली मेहनत बड़े काम की:ब्रिटेन में ​96 हजार लोगों पर स्टडी में खुलासा, बस के लिए दौड़ना भी कारगर

4 मिनट की सांस फूलने वाली मेहनत बड़े काम की:ब्रिटेन में ​96 हजार लोगों पर स्टडी में खुलासा, बस के लिए दौड़ना भी कारगर

क्या आप रोजाना 5 मिनट भी कड़ी मेहनत करने का समय नहीं निकाल पाते हैं? अगर ऐसा है, तो ये आदत बदलें, क्योंकि रोजाना सिर्फ 4 मिनट की सांस फूलने वाली कठोर मेहनत आपको 8 बड़ी बीमारियों से बचा सकती है। सांस फूल जाने वाली मेहनत में जिम जाना जरूरी नहीं है। इसमें बस पकड़ने के लिए दौड़ना, तेज सीढ़ियां चढ़ना या बच्चों के साथ पूरे जोश के साथ खेलना भी आपके लिए उतना ही कारगर है। चीन की सेंट्रल साउथ यूनिवर्सिटी की ताजा स्टडी में खुलासा हुआ है कि ऐसे छोटे लेकिन तेज व्यायाम से डिमेंशिया का खतरा 63%, टाइप-2 डायबिटीज 60% और समय से पहले मौत का जोखिम 46% तक कम हो जाता है। यूरोपियन हार्ट जर्नल में प्रकाशित शोध में 96,400 ब्रिटिश वयस्कों के डेटा का विश्लेषण किया गया। प्रतिभागियों ने एक सप्ताह तक कलाई पर एक्सेलेरोमीटर (गति मापने वाला डिवाइस) पहना, जिससे उनके हर छोटे-बड़े हिलने-डुलने का रिकॉर्ड रखा गया। सात साल तक की फॉलो-अप में पाया गया कि जिन लोगों ने कुल शारीरिक गतिविधि का 4% भी तेज व्यायाम में लगाया, उनमें दिल के दौरे, स्ट्रोक, गठिया, लिवर-किडनी रोग और डिमेंशिया का खतरा 29-61% कम था। असरदार है ‘सांस फूलने’ वाली एक्टिविटी स्टडी के मुख्य लेखक डॉ. मिंक्सुए शेन कहते हैं, ‘तेज व्यायाम शरीर में ऐसे खास बदलाव लाता है, जो धीमी एक्टिविटी से नहीं होते। इससे दिल ज्यादा कुशलता से पंप करता है, ब्लड वेसल्स लचीले बनते हैं और शरीर ऑक्सीजन का बेहतर इस्तेमाल सीखता है।’ उनका कहना है कि तेज एक्टिविटी दिमाग में ऐसे केमिकल्स भी छोड़ती है, जो ब्रेन सेल्स को स्वस्थ रखते हैं। इसी से डिमेंशिया का खतरा घटता है। विशेषकर सूजन वाली बीमारियों (इंफ्लेमेटरी डिजीज) जैसे गठिया, सोरायसिस और हृदय रोगों पर इसका असर सबसे ज्यादा देखा गया। जो लोग पहले से व्यायाम नहीं करते, उन्हें ज्यादा फायदा अध्ययन में डायबिटीज और लिवर रोगों में दोनों- समय और तीव्रता, महत्वपूर्ण पाए गए। यह भी पाया गया कि जो लोग पहले से कोई व्यायाम नहीं करते, उन्हें सबसे ज्यादा फायदा हुआ। यानी शुरुआत करने के लिए कभी देर नहीं होती। नई दिल्ली के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अशोक सेठ कहते हैं, ‘भारत में 30% वयस्क शारीरिक रूप से निष्क्रिय हैं। यह स्टडी साबित करती है कि लंबी वर्कआउट का इंतजार किए बिना रोजमर्रा की छोटी-छोटी तेज एक्टिविटी से भी बड़ा स्वास्थ्य लाभ मिल सकता है।’ डॉक्टरों की सलाह है कि ऑफिस में लिफ्ट की जगह सीढ़ियां तेजी से चढ़ें। बस स्टॉप तक तेज चलें या शाम को 5 मिनट तेज दौड़ें। ये काफी है।’ डॉ. शेन कहते हैं, हफ्ते में सिर्फ 15-20 मिनट की ऐसी एक्टिविटी (रोज 2-3 मिनट) भी मायने रखती है।

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4 मिनट की सांस फूलने वाली मेहनत बड़े काम की:ब्रिटेन में ​96 हजार लोगों पर स्टडी में खुलासा, बस के लिए दौड़ना भी कारगर

क्या आप रोजाना 5 मिनट भी कड़ी मेहनत करने का समय नहीं निकाल पाते हैं? अगर ऐसा है, तो ये आदत बदलें, क्योंकि रोजाना सिर्फ 4 मिनट की सांस फूलने वाली कठोर मेहनत आपको 8 बड़ी बीमारियों से बचा सकती है। सांस फूल जाने वाली मेहनत में जिम जाना जरूरी नहीं है। इसमें बस पकड़ने के लिए दौड़ना, तेज सीढ़ियां चढ़ना या बच्चों के साथ पूरे जोश के साथ खेलना भी आपके लिए उतना ही कारगर है। चीन की सेंट्रल साउथ यूनिवर्सिटी की ताजा स्टडी में खुलासा हुआ है कि ऐसे छोटे लेकिन तेज व्यायाम से डिमेंशिया का खतरा 63%, टाइप-2 डायबिटीज 60% और समय से पहले मौत का जोखिम 46% तक कम हो जाता है। यूरोपियन हार्ट जर्नल में प्रकाशित शोध में 96,400 ब्रिटिश वयस्कों के डेटा का विश्लेषण किया गया। प्रतिभागियों ने एक सप्ताह तक कलाई पर एक्सेलेरोमीटर (गति मापने वाला डिवाइस) पहना, जिससे उनके हर छोटे-बड़े हिलने-डुलने का रिकॉर्ड रखा गया। सात साल तक की फॉलो-अप में पाया गया कि जिन लोगों ने कुल शारीरिक गतिविधि का 4% भी तेज व्यायाम में लगाया, उनमें दिल के दौरे, स्ट्रोक, गठिया, लिवर-किडनी रोग और डिमेंशिया का खतरा 29-61% कम था। असरदार है ‘सांस फूलने’ वाली एक्टिविटी स्टडी के मुख्य लेखक डॉ. मिंक्सुए शेन कहते हैं, ‘तेज व्यायाम शरीर में ऐसे खास बदलाव लाता है, जो धीमी एक्टिविटी से नहीं होते। इससे दिल ज्यादा कुशलता से पंप करता है, ब्लड वेसल्स लचीले बनते हैं और शरीर ऑक्सीजन का बेहतर इस्तेमाल सीखता है।’ उनका कहना है कि तेज एक्टिविटी दिमाग में ऐसे केमिकल्स भी छोड़ती है, जो ब्रेन सेल्स को स्वस्थ रखते हैं। इसी से डिमेंशिया का खतरा घटता है। विशेषकर सूजन वाली बीमारियों (इंफ्लेमेटरी डिजीज) जैसे गठिया, सोरायसिस और हृदय रोगों पर इसका असर सबसे ज्यादा देखा गया। जो लोग पहले से व्यायाम नहीं करते, उन्हें ज्यादा फायदा अध्ययन में डायबिटीज और लिवर रोगों में दोनों- समय और तीव्रता, महत्वपूर्ण पाए गए। यह भी पाया गया कि जो लोग पहले से कोई व्यायाम नहीं करते, उन्हें सबसे ज्यादा फायदा हुआ। यानी शुरुआत करने के लिए कभी देर नहीं होती। नई दिल्ली के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अशोक सेठ कहते हैं, ‘भारत में 30% वयस्क शारीरिक रूप से निष्क्रिय हैं। यह स्टडी साबित करती है कि लंबी वर्कआउट का इंतजार किए बिना रोजमर्रा की छोटी-छोटी तेज एक्टिविटी से भी बड़ा स्वास्थ्य लाभ मिल सकता है।’ डॉक्टरों की सलाह है कि ऑफिस में लिफ्ट की जगह सीढ़ियां तेजी से चढ़ें। बस स्टॉप तक तेज चलें या शाम को 5 मिनट तेज दौड़ें। ये काफी है।’ डॉ. शेन कहते हैं, हफ्ते में सिर्फ 15-20 मिनट की ऐसी एक्टिविटी (रोज 2-3 मिनट) भी मायने रखती है।

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