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लद्दाख में स्‍नोलेपर्ड, हिमालयन वुल्‍फ का संरक्षण करेगी इंडियन आर्मी:ATM से कैश निकालने की डेली लिमिट PNB ने आधी की; 6 मार्च करेंट अफेयर्स

लद्दाख में स्‍नोलेपर्ड, हिमालयन वुल्‍फ का संरक्षण करेगी इंडियन आर्मी:ATM से कैश निकालने की डेली लिमिट PNB ने आधी की; 6 मार्च करेंट अफेयर्स

जानते हैं आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं… नेशनल (NATIONAL) 1. पीएम मोदी ने रायसीना डायलॉग का उद्घाटन किया 5 मार्च को पीएम नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में रायसीना डायलॉग के 11वें संस्करण का उद्घाटन किया। 2. इंडियन आर्मी ने लद्दाख फॉरेस्ट के साथ MoU साइन किया 3 मार्च को इंडियन आर्मी और लद्दाख फॉरेस्ट, इकोलॉजी एंड एनवायरमेंट डिपार्टमेंट ने लद्दाख के ऊंचाई वाले हिस्सों में वन्यजीव संरक्षण को मजबूत करने के लिए एक MoU साइन किया। इंटरनेशनल (INTERNATIONAL) 3. भारत और फिनलैंड ने एग्रीमेंट साइन किया 5 मार्च को नई दिल्ली में पीएम नरेंद्र मोदी ने फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब के साथ कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा की। निधन (DEATH) 4. पूर्व राज्यसभा सांसद एचके दुआ का निधन 4 मार्च को पूर्व राज्यसभा सांसद हरि कृष्ण (एच के) दुआ का निधन हो गया। वे 88 साल के थे। मिसलीनियस (MISCELLANEOUS) 5. PNB ने डेबिट कार्ड्स से कैश निकालने की लिमिट घटाई 5 मार्च को पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने अपने डेबिट कार्ड्स (ATM कार्ड) पर रोजाना कैश निकालने की लिमिट आधी करने का फैसला किया। 6. सचिन तेंदुलकर के बेटे अर्जुन तेंदुलकर की शादी हुई 5 मार्च को सचिन तेंदुलकर के बेटे अर्जुन तेंदुलकर ने सानिया चंडोक के साथ मुंबई में शादी की। आज का इतिहास 6 मार्च ———————– ये खबर भी पढ़ें… भारत से चोरी करोड़ों की मूर्ति इंग्‍लैंड म्‍यूजियम ने लौटाई: ईरान के डूबते जहाज से श्रीलंका ने 32 सेलर्स को बचाया; 5 मार्च करेंट अफेयर्स जानते हैं आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं… पूरी खबर पढ़ें…

Companies to Get ₹14.5 Lakh Crore Refund, Supreme Court Slams Trump

Companies to Get ₹14.5 Lakh Crore Refund, Supreme Court Slams Trump

Hindi News Business US Trade Tariffs: Companies To Get ₹14.5 Lakh Crore Refund, Supreme Court Slams Trump वॉशिंगटन4 दिन पहले कॉपी लिंक अमेरिका की इंटरनेशनल ट्रेड कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन को आदेश दिया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए टैरिफ का पैसा कंपनियों को लौटाया जाए। टैरिफ से दिसंबर तक 10.79 लाख करोड़ रुपए वसूले गए थे और कुल रिफंड 14.5 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। जज रिचर्ड ईटन ने लंबित मामलों में टैरिफ हटाकर दोबारा कैलकुलेशन करने को कहा। ट्रम्प ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट-1977 के तहत कई देशों पर टैरिफ लगाए थे। अमेरिकी कंपनियों ने कोर्ट में चुनौती दी। 20 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ रद्द करते हुए कहा कि टैरिफ तय करने का अधिकार कांग्रेस के पास है राष्ट्रपति के पास नहीं। तब रिफंड पर स्पष्टता नहीं थी। टेनेसी की एटमस फिल्ट्रेशन की याचिका पर जज ने रिफंड का आदेश दिया है। क्लिंटन ने की थी ईटन की नियुक्ति, टैरिफ रिफंड के केस भी वही सुनेंगे पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने 1999 में जज ईटन की नियुक्ति की थी। ईटन ने कहा कि टैरिफ रिफंड की सुनवाई वे खुद करेंगे, ताकि रिफंड प्रक्रिया उलझे नहीं। ट्रम्प सरकार के पास अब ये 3 विकल्प 1. अपील: सरकार ऊपरी कोर्ट में चुनौती दे। 2. स्टे: सरकार अस्थायी रोक मांग सकती है। 3. देरी: कस्टम्स में लिक्विडेशन (अंतिम हिसाब) के बाद आयातक को दावा/चुनौती के लिए 180 दिन मिलते हैं। इससे सरकार भी रिफंड 6 माह तक टाल सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प को लगाई थी फटकार, कहा- हर देश से युद्ध की स्थिति में नहीं ट्रम्प ने पिछले साल अप्रैल में ग्लोबल टैरिफ का ऐलान किया था। इससे पहले 20 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन को फटकारते हुए कहा था कि अमेरिका दुनिया के हर देश के साथ युद्ध की स्थिति में नहीं है। हालांकि फैसले को लेकर 3 जजों- जस्टिस सैमुअल एलिटो, क्लेरेंस थॉमस और ब्रेट कैवनॉ ने इस फैसले से असहमति जताई। कैवनॉ ने अपने नोट में लिखा कि टैरिफ नीति समझदारी भरी है या नहीं, यह अलग सवाल है, लेकिन उनके मुताबिक यह कानूनीतौर पर वैध थी। कैवनॉ ने अपने नोट में भारत पर रूसी तेल खरीद को लेकर लगाए गए टैरिफ का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि ये टैरिफ विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों के तहत लगाए गए थे। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में कुल 9 जज हैं। इनमें से 6 जजों को रिपब्लिकन राष्ट्रपतियों ने नियुक्त किया है, जबकि 3 जज डेमोक्रेटिक राष्ट्रपतियों ने नियुक्त किए। फैसले के खिलाफ वोट करने वाले तीनों जज रिपब्लिकन राष्ट्रपतियों ने नियुक्त किए थे। ट्रम्प भी रिपब्लिकन पार्टी से हैं। ट्रम्प ने 24 घंटे में ग्लोबल टैरिफ बढ़ाकर 15% कर दिया था सुप्रीम कोर्ट के फैसले से नाराज होकर ट्रम्प ने अगले ही दिन ग्लोबल टैरिफ 10% से बढ़ाकर 15% करने का ऐलान कर दिया था। ट्रम्प ने एक आदेश पर हस्ताक्षर कर दुनियाभर के देशों पर नया टैरिफ लगा दिया था। यह 15% टैरिफ 24 फरवरी से लागू हो गया है। इससे पहले उन्होंने टैरिफ को अवैध बताने वाले जजों की भी आलोचना की। ट्रम्प ने कहा था- मुझे कोर्ट के कुछ जजों पर शर्म आ रही है। वे देश के लिए कलंक हैं, उनमें हमारे देश के लिए सही काम करने की हिम्मत नहीं है। ट्रम्प ने 49 साल पुराने कानून का इस्तेमाल कर टैरिफ लगाया था ट्रम्प के टैरिफ विवाद के केंद्र में एक कानून है, जिसका नाम इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) है। यह कानून 1977 में बनाया गया था। इसका मकसद यह था कि अगर देश पर कोई गंभीर खतरा जैसे युद्ध जैसी स्थिति, विदेशी दुश्मन से बड़ा आर्थिक खतरा या असाधारण अंतरराष्ट्रीय संकट आए तो राष्ट्रपति को कुछ खास शक्तियां दी जा सकें। इन शक्तियों के तहत राष्ट्रपति विदेशी लेन-देन पर रोक लगा सकता है, उन्हें नियंत्रित कर सकता है या कुछ आर्थिक फैसले तुरंत लागू कर सकता है। ट्रम्प ने टैरिफ लगाने के लिए IEEPA का ही सहारा लिया था। निचली अदालतों ने टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया था इससे पहले निचली अदालतों (कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड और फेडरल सर्किट कोर्ट) ने टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया था। उनका मानना था कि IEEPA टैरिफ लगाने की इतनी व्यापक शक्ति नहीं देता। सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में मौखिक बहस सुनी थी, जहां जजों ने ट्रम्प की ओर से पेश की गईं दलीलों पर संदेह जताया था। कोर्ट के 6-3 बहुमत के बावजूद, जस्टिस ने पूछा था कि क्या राष्ट्रपति कांग्रेस की मंजूरी के बिना इतने बड़े पैमाने पर टैरिफ लगा सकता है, क्योंकि टैरिफ टैक्स का रूप हैं और यह संसद की जिम्मेदारी हैं। ——————- ट्रम्प के टैरिफ से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प के इमरजेंसी टैरिफ की वसूली बंद:समझौते से पीछे हटने वाले देशों को ट्रम्प की धमकी, कहा- गेम मत खेलो, ऊंचे टैरिफ लगाऊंगा अमेरिकी सरकार आज से राष्ट्रपति ट्रम्प की तरफ से लगाए गए इमरजेंसी टैरिफ की वसूली बंद कर देगी। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को टैरिफ समझौते से पीछे हटने वाले देशों को चेतावनी दी है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Companies to Get ₹14.5 Lakh Crore Refund, Supreme Court Slams Trump

Companies to Get ₹14.5 Lakh Crore Refund, Supreme Court Slams Trump

Hindi News Business US Trade Tariffs: Companies To Get ₹14.5 Lakh Crore Refund, Supreme Court Slams Trump वॉशिंगटन32 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका की इंटरनेशनल ट्रेड कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन को आदेश दिया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए टैरिफ का पैसा कंपनियों को लौटाया जाए। टैरिफ से दिसंबर तक 10.79 लाख करोड़ रुपए वसूले गए थे और कुल रिफंड 14.5 लाख करोड़ रु. तक पहुंच सकता है। जज रिचर्ड ईटन ने ने लंबित मामलों में टैरिफ हटाकर दोबारा गणना करने को कहा। ट्रम्प ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट-1977 के तहत कई देशों पर टैरिफ लगाए थे। अमेरिकी कंपनियों ने कोर्ट में चुनौती दी। 20 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ रद्द करते हुए कहा कि टैरिफ तय करने का अधिकार कांग्रेस के पास है राष्ट्रपति के पास नहीं। तब रिफंड पर स्पष्टता नहीं थी। टेनेसी की एटमस फिल्ट्रेशन की याचिका पर जज ने रिफंड का आदेश दिया है। क्लिंटन ने की थी ईटन की नियुक्ति, टैरिफ रिफंड के केस भी वही सुनेंगे पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने 1999 में जज ईटन की नियुक्ति की थी। ईटन ने कहा कि टैरिफ रिफंड की सुनवाई वही करेंगे, ताकि रिफंड प्रक्रिया उलझे नहीं। ट्रम्प सरकार के पास अब ये 3 विकल्प 1. अपील: सरकार ऊपरी कोर्ट में चुनौती दे। 2. स्टे: सरकार अस्थायी रोक मांग सकती है। 3. देरी: कस्टम्स में लिक्विडेशन (अंतिम हिसाब) के बाद आयातक को दावा/चुनौती के लिए 180 दिन मिलते हैं। इससे सरकार भी रिफंड 6 माह तक टाल सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प को लगाई थी फटकार, कहा- हर देश से युद्ध की स्थिति में नहीं ट्रम्प ने पिछले साल अप्रैल में ग्लोबल टैरिफ का ऐलान किया था। (फाइल फोटो) इससे पहले 20 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन को फटकारते हुए कहा था कि अमेरिका दुनिया के हर देश के साथ युद्ध की स्थिति में नहीं है। हालांकि फैसले को लेकर 3 जजों जस्टिस सैमुअल एलिटो, क्लेरेंस थॉमस और ब्रेट कैवनॉ ने इस फैसले से असहमति जताई। कैवनॉ ने अपने नोट में लिखा कि टैरिफ नीति समझदारी भरी है या नहीं, यह अलग सवाल है, लेकिन उनके मुताबिक यह कानूनी तौर पर वैध थी। कैवनॉ ने अपने नोट में भारत पर रूसी तेल खरीद को लेकर लगाए गए टैरिफ का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि ये टैरिफ विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों के तहत लगाए गए थे। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में कुल 9 जज हैं। इनमें से 6 जजों को रिपब्लिकन राष्ट्रपतियों ने नियुक्त किया है, जबकि 3 जज डेमोक्रेटिक राष्ट्रपतियों ने नियुक्त किए। फैसले के खिलाफ वोट करने वाले तीनों जज रिपब्लिकन राष्ट्रपतियों ने नियुक्त किए थे। ट्रम्प ने 24 घंटे में ग्लोबल टैरिफ बढ़ाकर 15% कर दिया था सुप्रीम कोर्ट के फैसले से नाराज होकर ट्रंप ने अगले ही दिन ग्लोबल टैरिफ 10% से बढ़ाकर 15% करने का ऐलान कर दिया था। ट्रम्प ने एक आदेश पर हस्ताक्षर कर दुनियाभर के देशों पर नया टैरिफ लगा दिया था। यह 15% टैरिफ 24 फरवरी से लागू हो गया है। इससे पहले उन्होंने कल टैरिफ को अवैध बताने वाले जजों की भी आलोचना की। ट्रम्प ने कहा था- मुझे कोर्ट के कुछ जजों पर शर्म आ रही है। वे देश के लिए कलंक हैं, उनमें हमारे देश के लिए सही काम करने की हिम्मत नहीं है। ट्रम्प ने 49 साल पुराने कानून के इस्तेमाल कर टैरिफ लगाया था ट्रम्प के टैरिफ विवाद के केंद्र में एक कानून है, जिसका नाम इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) है। यह कानून 1977 में बनाया गया था। इसका मकसद यह था कि अगर देश पर कोई गंभीर खतरा जैसे युद्ध जैसी स्थिति, विदेशी दुश्मन से बड़ा आर्थिक खतरा या असाधारण अंतरराष्ट्रीय संकट आए तो राष्ट्रपति को कुछ खास शक्तियां दी जा सकें। इन शक्तियों के तहत राष्ट्रपति विदेशी लेन-देन पर रोक लगा सकता है, उन्हें नियंत्रित कर सकता है या कुछ आर्थिक फैसले तुरंत लागू कर सकता है। ट्रम्प ने टैरिफ लगाने के लिए IEEPA का ही सहारा लिया था। निचली अदालतों ने टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया था इससे पहले निचली अदालतों (कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड और फेडरल सर्किट कोर्ट) ने टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया था। उनका मानना था कि IEEPA टैरिफ लगाने की इतनी व्यापक शक्ति नहीं देता। सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में मौखिक बहस सुनी थी, जहां जजों ने ट्रम्प की ओर से पेश की गईं दलीलों पर संदेह जताया था। कोर्ट के 6-3 बहुमत के बावजूद, जस्टिस ने पूछा था कि क्या राष्ट्रपति कांग्रेस की मंजूरी के बिना इतने बड़े पैमाने पर टैरिफ लगा सकता है, क्योंकि टैरिफ टैक्स का रूप हैं और यह संसद की जिम्मेदारी हैं। ——————- ट्रम्प के टैरिफ से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प के इमरजेंसी टैरिफ की वसूली बंद:समझौते से पीछे हटने वाले देशों को ट्रम्प की धमकी, कहा- गेम मत खेलो, ऊंचे टैरिफ लगाऊंगा अमेरिकी सरकार आज से राष्ट्रपति ट्रम्प की तरफ से लगाए गए इमरजेंसी टैरिफ की वसूली बंद कर देगी। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को टैरिफ समझौते से पीछे हटने वाले देशों को चेतावनी दी है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

भोपाल के बड़ा तालाब का सीमांकन शुरू, बेहटा में विरोध:लाउखेड़ी-बोरवन भी पहुंची टीमें; एफटीएल को लेकर नोंकझोंक

भोपाल के बड़ा तालाब का सीमांकन शुरू, बेहटा में विरोध:लाउखेड़ी-बोरवन भी पहुंची टीमें; एफटीएल को लेकर नोंकझोंक

पांच दिन के ब्रेक के बाद गुरुवार को भोपाल के बड़ा तालाब किनारे फिर से सीमांकन शुरू हुआ। बैरागढ़ तहसील की टीम लाउखेड़ी, बोरवन और बेहटा पहुंची। बेहटा में एफटीएल के पाइंट और सीमांकन को लेकर लोगों ने टीम से नोंकझोंक की। वहीं, अशब्द भी कहे। चार घंटे चली कार्रवाई में 50 मीटर के दायरे में 100 से ज्यादा अतिक्रमण मिले। शुक्रवार को भी टीम मैदान में उतरेगी। आखिरी कार्रवाई 28 फरवरी को की थी। हलालपुरा के आसपास तालाब किनारे एक गार्डन की बाउंड्रीवॉल के साथ गोदाम भी तोड़ दिया था। इसके बाद होली के चलते कार्रवाई धीमी पड़ी, जिसने गुरुवार को फिर रफ्तार पकड़ी। जिला प्रशासन, नगर निगम की संयुक्त टीम ने ग्राम लाउखेड़ी, बोरवन बैरागढ़ और बेहटा क्षेत्र में सीमांकन किया। यहां तालाब के 50 मीटर के दायरे का चिंहित किया गया। बूढ़ागांव और बेहटा में मिली झुग्गियां सीमांकन के दौरान बोरवन गांव की बूढ़ागांव झुग्गी बस्ती और बेहटा की झुग्गी बस्ती में सर्वे में अतिक्रमण मिला। यहां तालाब के 50 मीटर के दायरे में करीब 100 झुग्गियां आ रही हैं। इन झुग्गियों को चिन्हित करने के लिए टीम ने मौके पर लाल निशान लगाए। जिला प्रशासन और नगर निगम की टीम आगे भी अन्य क्षेत्रों में सीमांकन की कार्रवाई जारी रखेगी। इससे तालाब के आसपास के अतिक्रमण और निर्माण की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। विरोध का सामना भी करना पड़ा सीमांकन के दौरान बेहटा में लोगों के विरोध का सामना भी टीम में शामिल अफसरों को करना पड़ा। इस दौरान एक व्यक्ति ने टीम के सदस्यों से कहा कि यहां पर क्यों लाल निशान लगा रहे हैं? ये अनुमति किसने दी है? उसने टीम के सदस्यों को अपशब्द भी कहे। हालांकि, टीम ने सर्वे का काम जारी रखा। अगले सप्ताह टीटी नगर सर्कल में सीमांकन होगा अब तक बैरागढ़ तहसील क्षेत्र में ही बड़ा तालाब किनारों पर अतिक्रमण ढूंढा जा रहा है। टीटी नगर सर्कल में अब तक कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि, एसडीएम अर्चना शर्मा ने सोमवार से कार्रवाई करने की बात कही है। बता दें कि यही इलाका सबसे प्राइम लोकेशन है। तालाब किनारे में बेशकीमती जमीनें हैं। होटल-रेस्तरां भी बने हुए हैं। कई सरकारी एजेंसियों के दफ्तर भी बने हुए हैं। कई आईएएस और नेताओं की जमीनें इसी किनारे हैं। एक बड़ी कॉलोनी भी इसी क्षेत्र में बनी हुई है।

होली के त्योहार में 948 सड़क हादसे:सागर 67 के साथ टॉप पर; नशा, तेज रफ्तार और नियमों की अनदेखी बनी बड़ी वजह

होली के त्योहार में 948 सड़क हादसे:सागर 67 के साथ टॉप पर; नशा, तेज रफ्तार और नियमों की अनदेखी बनी बड़ी वजह

होली के उत्सव के बीच प्रदेश में सड़क हादसों का ग्राफ चिंताजनक रूप से बढ़ गया। 4 मार्च को 108 एंबुलेंस सेवा के डेटा के अनुसार एक ही दिन में 948 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। सबसे अधिक 67 हादसे सागर जिले में हुए, जबकि राजधानी भोपाल 39 मामलों के साथ आठवें स्थान पर रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि तेज रफ्तार, शराब पीकर वाहन चलाना और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी हादसों के प्रमुख कारण हैं। सरकारी अस्पतालों में सामान्य दिनों की तुलना में दोगुने से अधिक घायल इलाज के लिए पहुंचे। सागर टॉप पर, कई जिलों में बढ़े मामले प्रदेश में दर्ज 948 सड़क हादसों में सागर जिला 67 मामलों के साथ पहले स्थान पर रहा। इसके बाद विदिशा में 55, इंदौर में 46 और जबलपुर में 45 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। महाकौशल और विंध्य क्षेत्र के जिलों में भी स्थिति गंभीर रही। रीवा और सतना में 42-42 तथा रायसेन में 41 हादसे दर्ज हुए। राजधानी भोपाल में 39 दुर्घटनाएं सामने आईं, जिससे वह सूची में आठवें स्थान पर रहा। वहीं, छिंदवाड़ा (30), धार (28), सिंगरौली (27), खरगोन और बालाघाट (25-25) में भी उल्लेखनीय संख्या में सड़क हादसे हुए। वहीं शाजापुर में 2 और दतिया में 1 हादसा दर्ज किया गया। नशा और तेज रफ्तार बनी बड़ी वजह 108 एंबुलेंस सेवा के सीनियर मैनेजर तरुण सिंह परिहार ने बताया कि तेज रफ्तार, शराब पीकर वाहन चलाना और यातायात नियमों की अनदेखी सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण हैं। उन्होंने कहा कि होली के दौरान नशे की हालत में वाहन चलाने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। इस बार बीते साल की तुलना में नशे में हुए एक्सीडेंट की संख्या अधिक रही है। भोपाल में सामान्य से दोगुने मामले राजधानी भोपाल के सरकारी अस्पतालों में होली के दौरान सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े 62 घायल इलाज के लिए पहुंचे। जबकि सामान्य दिनों में यह संख्या 20 से 25 के बीच रहती है। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, अधिकतर घायलों में बाइक सवार शामिल थे। कई मामलों में हेलमेट का उपयोग नहीं किया गया था, जिससे सिर में गंभीर चोटें आईं। ट्रॉमा मामलों में 30 प्रतिशत तक मृत्यु दर कम्युनिटी मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. कुलदीप गुप्ता के अनुसार, एक रिसर्च में पाया गया है कि सड़क दुर्घटना के बाद ट्रॉमा में लाए गए 10 गंभीर घायलों में से 3 की जान नहीं बच पाती। उन्होंने कहा कि ज्यादातर मामलों में ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं किया गया था। बाइक चालकों के लिए हेलमेट पहनना बेहद जरूरी है, क्योंकि सिर की चोटें जानलेवा साबित हो सकती हैं। कई उदाहरण ऐसे भी हैं जहां हेलमेट पहनने के कारण गंभीर हादसे के बावजूद व्यक्ति की जान बच गई। हेलमेट और सीट बेल्ट की अनदेखी तरुण सिंह परिहार ने बताया कि अधिकांश मामलों में लोग हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग नहीं करते। छोटी दुर्घटना भी इसी कारण गंभीर रूप ले लेती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वाहन चलाते समय सभी नियमों का पालन करें। किसी भी आपात स्थिति में निजी वाहन से ले जाने के बजाय एंबुलेंस सेवा का उपयोग करें, क्योंकि उसमें जीवन रक्षक उपकरण और प्रशिक्षित स्टाफ मौजूद रहता है। जागरूकता ही बचाव का रास्ता विशेषज्ञों का मानना है कि त्योहारों के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। उत्सव का माहौल सड़क सुरक्षा के नियमों को नजरअंदाज करने का कारण नहीं बनना चाहिए। तेज रफ्तार और लापरवाही के कारण बढ़ते हादसे यह संकेत दे रहे हैं कि सड़क सुरक्षा को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान और सख्त प्रवर्तन की आवश्यकता है, ताकि आने वाले समय में ऐसे आंकड़ों में कमी लाई जा सके।

जस्टिस धर्माधिकारी मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस होंगे:एमपी हाईकोर्ट में 24 साल की प्रैक्टिस की, केरल स्टोरी-टू मामले में भी की सुनवाई

जस्टिस धर्माधिकारी मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस होंगे:एमपी हाईकोर्ट में 24 साल की प्रैक्टिस की, केरल स्टोरी-टू मामले में भी की सुनवाई

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में रहे जस्टिस धर्माधिकारी मद्रास हाईकोर्ट के अगले चीफ जस्टिस होंगे। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की अनुशंसा के बाद गुरुवार को केंद्र के विधि एवं न्याय मंत्रालय ने उनकी नियुक्ति का नोटिफिकेशन जारी किया। इसके साथ ही वे मप्र हाईकोर्ट से अन्य राज्यों में चीफ जस्टिस बनने वाले 17वें न्यायाधीश बन गए हैं। 8 जुलाई 1966 को रायपुर में जन्मे जस्टिस धर्माधिकारी का अपॉइंटमेंट मद्रास हाईकोर्ट के मौजूदा चीफ जस्टिस मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव के रिटायरमेंट के दिन 5 मार्च को हुआ है। 8 जुलाई, 1966 को रायपुर में जन्मे जस्टिस धर्माधिकारी ने 1992 में अपना लीगल करियर शुरू किया। उन्होंने दो दशकों से ज्यादा समय तक मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में प्रैक्टिस की, जिसमें सिविल, क्रिमिनल और कॉन्स्टिट्यूशनल मामले में सटीक पैरवी की। उन्होंने 2000 से 2015 तक यूनियन ऑफ इंडिया के लिए स्टैंडिंग काउंसिल के तौर पर काम किया। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और सेंट्रल एक्साइज डिपार्टमेंट सहित कई सरकारी संस्थाओं और पब्लिक सेक्टर इंस्टीट्यूशन को सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल के तौर पर रिप्रेजेंट किया। जस्टिस धर्माधिकारी को 7 अप्रैल, 2016 को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का एडिशनल जज अपॉइंट किया गया था और 17 मार्च, 2018 को परमानेंट जज के तौर पर कन्फर्म किया गया था। मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के तौर पर प्रमोट होने से पहले, उन्हें 23 अप्रैल, 2025 को केरल हाईकोर्ट में ट्रांसफर किया गया था। जज बनने से पहले जस्टिस सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में करीब 24 साल तक वकील के रूप में काम किया। अप्रैल 2025 में केंद्रीय कानून और न्याय मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी कर बताया था कि भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 222 के तहत उनके तबादले को मंजूरी दे दी है। सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर जारी बयान में कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 20 मार्च, 24 मार्च और 3 अप्रैल 2025 को हुई बैठकों में जस्टिस सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से केरल हाई कोर्ट में स्थानांतरित करने की सिफारिश की थी। मध्यप्रदेश से केरल ट्रांसफर होकर गए जस्टिस धर्माधिकारी ने गुरुवार को ही केरल स्टोरी टू मामले की भी सुनवाई की थी। जस्टिस अरविंद धर्माधिकारी उस बेंच (खंडपीठ) में शामिल थे, जिसने एकल जज के अस्थायी आदेश के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई की। उस आदेश में फिल्म ‘द केरल स्टोरी 2 – गोज बियॉन्ड’ की रिलीज 15 दिनों के लिए रोक दी गई थी। जस्टिस सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और जस्टिस पीवी बालकृष्णन की पीठ ने गुरुवार को देर शाम लगभग दो घंटे की सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। फिल्म के प्रोड्यूसर विपुल अमृतलाल शाह की ओर से एकल न्यायाधीश के अंतरिम आदेश के खिलाफ अपील दायर करने के बाद दलीलें सुनने के बाद पीठ ने टिप्पणी की कि फिल्म के सर्टिफिकेशन का विरोध करने वाली याचिकाएं जनहित याचिका (PIL) की प्रकृति की थीं।

Dainik Bhaskar Honors MP, Rajasthan, Chhattisgarh Stalwarts

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Hindi News National Dainik Bhaskar Honors MP, Rajasthan, Chhattisgarh Stalwarts | India Pride Awards नई दिल्ली50 मिनट पहले कॉपी लिंक 5 मार्च को दिल्ली में इंडिया प्राइड अवॉर्ड के पांचवें सीजन का आयोजन हुआ। इस दौरान दैनिक भास्कर समूह ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के उन दिग्गजों को सम्मानित किया, जिन्होंने अपने मेहनत और उत्कृष्ट कार्यों से देश के विकास को एक नई दिशा दी है। इंडिया प्राइड अवॉर्ड के तहत दैनिक भास्कर समूह देश के हर कोने से ऐसे लोगों को ढूंढता है, जो अपने-अपने क्षेत्र में असाधारण और अतुलनीय काम कर रहे हैं। इस अवार्ड समारोह के मुख्य अतिथि केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया थे। दैनिक भास्कर समूह के डिप्टी एमडी पवन अग्रवाल ने कार्यक्रम में मनसुख मांडविया का गर्मजोशी से स्वागत किया। इसके बाद मांडविया ने शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, सामाजिक सेवा, नवाचार या उद्यम से जुड़े लोगों को अवॉर्ड देकर सम्मानित किया। इस दौरान मंच पर दैनिक भास्कर के नेशनल पॉलिटिकल एडिटर धर्मेंद्र सिंह भदौरिया भी मौजूद थे। दैनिक भास्कर समूह के डिप्टी एमडी पवन अग्रवाल ने इस मौके पर कहा कि यह कार्यक्रम केवल एक सम्मान समारोह नहीं, बल्कि उन वास्तविक नायकों को पहचान देने का राष्ट्रीय मंच है, जिन्होंने अपने संकल्प, परिश्रम और समर्पण से भारत की प्रगति को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा- इस अवॉर्ड की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह देश के हर कोने से ऐसे व्यक्तित्वों को सामने लाता है, जो बिना किसी प्रचार-प्रसार के, चुपचाप अपने-अपने क्षेत्र में असाधारण योगदान दे रहे हैं। चाहे वह शिक्षा का क्षेत्र हो, स्वास्थ्य सेवा, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक उत्थान, नवाचार या उद्यमिता, यह मंच उन सभी को सम्मानित करता है, जो प्रेरणा की सच्ची मिसाल हैं। पवन अग्रवाल ने आगे कहा कि दैनिक भास्कर का सदैव यह प्रयास रहा है कि ऐसे मंचों के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाले व्यक्तियों को प्रकाश में लाया जाए और उनके कार्यों को राष्ट्रीय पहचान मिले। उन्होंने चीफ गेस्ट मनसुख मांडविया का आभार जताते हुए कहा कि उनका इस मंच पर आना न केवल इस आयोजन की प्रतिष्ठा को बढ़ाता है, बल्कि देशभर में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए कार्यरत व्यक्तियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा भी है। वहीं, कार्यक्रम में केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने इस अवॉर्ड समारोह के लिए दैनिक भास्कर समूह का धन्यवाद किया। आपका चयन तब हुआ होगा, जब आपने अपने क्षेत्र में कुछ अलग किया होगा। मुझे भी बचपन में सम्मान मिला था, उसी से मेरा भरोसा हुआ कि मंच पर बोल सकता हूं। उन्होंने कहा- सम्मान का महत्व होता है, जब आपमें कुछ करने का जज्बा है, तब आप सफल होंगे। आपकी सफलता समाज का कल्याण करेगी ही, लेकिन ये सफलता, आपकी विशेषता, आपका अनुभव राष्ट्र निर्माण में भी भूमिका निभाएगी। मांडविया ने अवार्डियों से आगे कहा कि विकसित भारत के लिए उन्हें सारथी बनना होगा। उन्होंने कहा- हमारे निर्णय लेने में राष्ट्र सबसे पहले होना चाहिए। प्रधानमंत्री का सपना है कि 2047 तक हमें विकसित राष्ट्र बनना है। ये 25 साल का समय अहम है। जब देश विकसित राष्ट्र बनेगा, तब उसे आज का युवा ही जिएगा। इस दिशा में आज आपको यहां इकट्ठा करके दैनिक भास्कर ने महत्वपूर्ण काम किया है। टैलेंट का सम्मान करने से किसी व्यक्ति का हौसला बढ़ता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔