Sunday, 23 Aug 2026 | 03:07 PM

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SC Halts NCERT Book Sale Over Judiciary Corruption Chapter Row

SC Halts NCERT Book Sale Over Judiciary Corruption Chapter Row

नई दिल्ली16 मिनट पहले कॉपी लिंक राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने किताब के ‘ज्यूडीशियरी करप्शन’ चैप्टर को लेकर बिना शर्त माफी मांगी है। इस चैप्टर को लेकर विवाद हुआ था। इसके बाद किताब की बिक्री पर रोक लगा दी गई थी। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। CJI सूर्यकांत ने कहा था कि न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं दे सकते। NCERT ने प्रेस रिलीज में कहा- NCERT की सोशल साइंस की आठवीं (पार्ट-2) की टेक्स्ट बुक ‘एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ का चैप्टर 4 ‘द रोल ऑफ ज्यूडीशियरी इन अवर सोसाइटी’ था। NCERT के डायरेक्टर और सदस्य इसके लिए बिना किसी शर्त के माफी मांगते हैं। पूरी किताब को ही वापस बुला लिया गया है। अब यह उपलब्ध नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने जताई थी नाराजगी 25 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद ‘ज्यूडीशियल करप्शन’ चैप्टर वाली NCERT किताब की बिक्री पर रोक लगा दी गई थी। NCERT के सूत्रों ने इसकी पुष्टि की थी। सूत्रों के अनुसार, NCERT ने चैप्टर का सुझाव देने वाले एक्सपर्ट्स और इसे मंजूरी देने वाले अधिकारियों की इंटरनल मीटिंग बुलाई। किताब को वेबसाइट से भी हटा लिया गया है। सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल और अभिषेक सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट में मामला उठाया था। सुनवाई के दौरान सिब्बल ने CJI सूर्यकांत, जस्टिस विपुल एम पंचोली और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच को बताया कि क्लास 8 के बच्चों को न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ाया जा रहा है। यह निंदनीय है। सिंघवी ने कहा कि NCERT ने मान लिया है कि राजनीति, ब्यूरोक्रेसी और अन्य संस्थानों में भ्रष्टाचार है ही नहीं। इसपर CJI सूर्यकांत ने कहा- दुनिया में किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। यह एक सोची-समझी और गहरी साजिश लगती है। मुझे पता है इससे कैसे निपटना है। मैं यह केस खुद हैंडल करूंगा। हम इस बारे में और कुछ नहीं कहना चाहते। सरकारी सूत्रों ने कहा- शासन के तीनों अंगों को जोड़ना चाहिए था NCERT चेयरमैन दिनेश प्रसाद सकलानी का इस मुद्दे पर कोई जवाब नहीं दिया था। काउंसिल के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि मामला अब कोर्ट में विचाराधीन है। इसलिए वे इस मुद्दे पर कुछ भी नहीं बोंलेंगे। इस बीच सरकारी सूत्रों ने कहा कि भले ही NCERT एक ऑटोनॉमस संस्था है, लेकिन चैप्टर जोड़ने से पहले अधिकारियों को ध्यान देना चाहिए था। सरकारी सूत्रों ने कहा कि अगर भ्रष्टाचार का मुद्दा शामिल करना था, तो उसमें शासन के तीनों अंगों- कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका को भी जोड़ा जाना चाहिए था। सरकारी सूत्रों ने कहा कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से संबंधित आंकड़े संसदीय अभिलेखों और नेशनल ज्यूडीशियल डेटा ग्रिड में मौजूद हैं, लेकिन फैक्ट्स के क्रॉस वेरिफिकेशन के लिए केंद्र से परामर्श नहीं लिया गया। NCERT की नई सोशल साइंस टेक्स्टबुक में चैप्टर था NCERT ने 23 फरवरी को क्लास 8 के स्टूडेंट्स के लिए सोशल साइंस की नई टेक्‍स्‍ट बुक जारी की थी। ये किताब एकेडमिक सेशन 2026-27 से स्‍कूलों में पढ़ाई जानी थी। इसका पहला पार्ट जुलाई 2025 में रिलीज किया गया था। किताब का नाम ‘एक्सप्लोरिंग सोसायटी: इंडिया एंड बियॉन्ड पार्ट 2’ है। इसमें ‘द रोल ऑफ द ज्यूडीशियरी इन अवर सोसायटी’ चैप्टर के अंदर ‘करप्‍शन इन द ज्‍यूडिशियरी’ का टॉपिक जोड़ा गया है। इसमें कहा गया है कि भ्रष्टाचार, बड़ी संख्या में पेंडिंग मामले और जजों की भारी कमी ज्‍यूडिशियल सिस्टम के सामने प्रमुख चुनौतियों में शामिल हैं। जज आचार संहिता से बंधे होते हैं, जो न केवल कोर्ट में उनके व्यवहार को कंट्रोल करता है, बल्कि कोर्च के बाहर उनके आचरण को भी तय करती है। किताब के एक सेक्शन का टाइटल ‘Justice delayed is justice denied’ है। इसका मतलब है- इंसाफ में देरी इंसाफ न मिलने जैसा है। यहां सुप्रीम कोर्ट में 81 हजार, हाईकोर्ट्स में 62 लाख 40 हजार, डिस्ट्रिक्ट और सबऑर्डिनेट कोर्ट के 4 करोड़ 70 लाख पेंडिंग केस की संख्या भी बताई गई है। किताब का वो हिस्सा जिसमें करप्शन और पेंडिंग केस का जिक्र… नई किताब में ज्यूडीशियरी से जुड़े अहम पॉइंट्स… इसमें कोर्ट की हायरार्की और न्याय तक पहुंच को समझाने से ज्यादा ज्यूडीशियल सिस्टम के सामने आने वाली चुनौतियों जैसे करप्शन और केस बैकलॉग को बताया गया है। करप्शन वाले सेक्शन में बताया गया है कि जज एक कोड ऑफ कंडक्ट से बंधे होते हैं जो न केवल कोर्ट में बल्कि कोर्ट के बाहर भी उनके व्यवहार को कंट्रोल करता है। ज्यूडिशियरी के अंदरूनी अकाउंटेबिलिटी सिस्टम को भी समझाया गया है। सेंट्रलाइज्ड पब्लिक ग्रीवांस रिड्रेस एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (CPGRAMS) के जरिए शिकायतें लेने के तय तरीके भी बताए गए हैं। किताब के मुताबिक CPGRAMS सिस्टम के जरिए 2017 और 2021 के बीच 1,600 ज्यादा शिकायतें मिली थीं। किताब में गंभीर मामलों में जजों को हटाने के संवैधानिक नियम के बारे में भी बताया गया है कि पार्लियामेंट इंपीचमेंट मोशन पास करके जज को हटा सकती है। बच्चे पढ़ेंगे कि ऐसे मोशन पर सही जांच के बाद ही विचार किया जाता है। इस दौरान जज को मामले में अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया जाता है। चैप्टर में लिखा है- लोग ज्यूडिशियरी के अलग-अलग लेवल पर करप्शन का सामना करते हैं। गरीबों और जरूरतमंदों की न्याय तक पहुंच की समस्या और बिगड़ सकती है। यह भी बताया है कि राज्य और केंद्र ट्रांसपेरेंसी और पब्लिक ट्रस्ट को मजबूत करने की कोशिशें कर रहे हैं। इसमें टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल और करप्शन के मामलों के खिलाफ फास्ट एक्शन लेना शामिल है। किताब में पूर्व CJI बीआर गवई का भी जिक्र किताब में भारत के पूर्व चीफ जस्टिस बीआर गवई का भी जिक्र है, जिन्होंने जुलाई 2025 में कहा था कि ज्यूडिशियरी के अंदर करप्शन और गलत कामों के मामलों का पब्लिक ट्रस्ट पर बुरा असर पड़ता है। उन्होंने कहा था, ‘हालांकि, इस ट्रस्ट को फिर से बनाने का रास्ता इन मुद्दों को सुलझाने के लिए उठाए गए तेज, निर्णायक और ट्रांसपेरेंट एक्शन में है… ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी डेमोक्रेटिक गुण हैं।’ NCERT की किताब वेबसाइट पर मौजूद नहीं NCERT की 8वीं क्लास की सोशल साइंस का पार्ट 2 इसी हफ्ते जारी हुआ था। CJI की टिप्‍पणी के बाद ये किताब NCERT की वेबसाइट पर उपलब्‍ध नहीं है।

Commercial Gas Cylinder Crisis | Restaurants Hotels Struggle Amidst Shortage

Commercial Gas Cylinder Crisis | Restaurants Hotels Struggle Amidst Shortage

Hindi News Business Commercial Gas Cylinder Crisis | Restaurants Hotels Struggle Amidst Shortage नई दिल्ली2 मिनट पहले कॉपी लिंक केंद्र सरकार ने देश में नेचुरल गैस की सप्लाई को कंट्रोल करने के लिए ‘एसेंशियल कमोडिटी एक्ट, 1955’ लागू कर दिया है। केंद्र सरकार ने देशभर में ‘एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955’ लागू कर दिया है। हॉर्मुज जलमार्ग के रास्ते होने वाली गैस सप्लाई ठप होने के बाद सरकार ने ये कदम उठाया है। गैस किल्लत को देखते हुए दिल्ली मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों ने कॉमर्शियल गैस की सप्लाई पर फिलहाल रोक लगा दी है। इस रोक की वजह से रेस्टोरेंट्स और होटलों के बंद होने की नौबत आ गई है। छोटे होटल और भोजनालय चलाने वालों ने सरकार से कहा है कि सप्लाई बहाल की जाए। कमोडिटी एक्ट लागू के बाद अब चार कैटेगरी में गैस बंटेगी पहली कैटेगरी (पूरी सप्लाई): इसमें आपके घर की रसोई गैस (PNG) और गाड़ियों में डलने वाली CNG आती है। इन्हें पहले की तरह पूरी गैस मिलती रहेगी। दूसरी कैटेगरी (खाद कारखाने): खाद बनाने वाली फैक्ट्रियों को करीब 70% गैस दी जाएगी। बस उन्हें यह साबित करना होगा कि गैस का इस्तेमाल खाद बनाने में ही हुआ है। तीसरी कैटेगरी (बड़े उद्योग): नेशनल ग्रिड से जुड़ी चाय की फैक्ट्रियों और दूसरे बड़े उद्योगों को उनकी जरूरत की लगभग 80% गैस मिलेगी। चौथी कैटेगरी (छोटे बिजनेस और होटल): शहरों के गैस नेटवर्क से जुड़े छोटे कारखानों, होटल और रेस्टोरेंट को भी उनकी पुरानी खपत के हिसाब से लगभग 80% गैस दी जाएगी। तस्वीर गोरखपुर की है, यहां घरेलू रसोई गैस लेने के लिए गैस एजेंसियों के बाहर एक किलोमीटर लंबी लाइन दिखाई दे रही है। छत्तीसगढ़: डीलर्स का कहा है कि एजुकेशनल इंस्टीट्यूट और हॉस्पिटल के अलावा अन्य किसी को कॉमर्शियल सिलेंडर न दें। होटल-रेस्टोरेंट संचालकों के लिए गैस संकट खड़ा हो गया है। महाराष्ट्र: मुंबई, पुणे और नागपुर में कॉमर्शियल गैस की भारी कटौती की गई है। पुणे में तो हालात इतने खराब हैं कि नगर निगम ने गैस शवदाह गृह अस्थायी रूप से बंद कर दिए हैं। राज्य के करीब 9,000 रेस्टोरेंट्स और बार पर बंद का खतरा मंडरा रहा है। पंजाब: यहां 8 मार्च से ही 19 किलो वाले कॉमर्शियल और बड़े इंडस्ट्रियल सिलेंडरों की डिस्पैच रोक दी गई है। वहीं डिस्टिब्यूटर्स को कहा गया है कि 25 दिन से पहले किसी भी घरेलू सिलेंडर की बुकिंग न लें। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना: हैदराबाद सहित कई शहरों में कॉमर्शियल सिलेंडर बुकिंग फ्रीज कर दी गई है। छोटे होटल और भोजनालय चलाने वालों ने सरकार से गुहार लगाई है कि सप्लाई बहाल की जाए, क्योंकि इससे लाखों लोगों की आजीविका जुड़ी है। सरकार ने हाई-लेवल कमेटी बनाई संकट को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने तीन तेल कंपनियों (OMCs) के कार्यकारी निदेशकों की एक हाई-लेवल कमेटी बनाई है, जो सप्लाई की समीक्षा करेगी। घरेलू गैस सिलेंडर बुकिंग डिलीवरी के 25 दिन बाद इससे पहले कल यानी 9 मार्च को केंद्र सरकार ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर की रीफिल बुकिंग के नियमों में बदलाव किया था। अब उपभोक्ता एक सिलेंडर डिलीवर होने के बाद दूसरा सिलेंडर 21 दिन के बजाय 25 दिन बाद ही बुक कर सकेंगे। होल्डिंग रोकने के लिए OTP और बायोमेट्रिक अनिवार्य गैस की जमाखोरी रोकने के लिए डिलीवरी एजेंट अब OTP या बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रोपेन और ब्यूटेन का इस्तेमाल कॉमर्शियल के बजाय घरेलू सिलेंडरों के लिए ज्यादा करें। आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत आपातकालीन प्रावधान लागू कर दिए गए हैं। कब तक सुधरेंगे हालात? इंडियन ऑयल के मुख्य महाप्रबंधक (LPG) के.एम. ठाकुर का कहना है कि ग्राहकों को घबराने की जरूरत नहीं है और पैनिक बुकिंग न करें। सरकार अब अमेरिका जैसे देशों से वैकल्पिक कार्गो मंगाने पर विचार कर रही है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर G7 देश अपने इमरजेंसी तेल भंडार से सप्लाई जारी करने पर चर्चा कर रहे हैं, ताकि ग्लोबल मार्केट में ऊर्जा संकट को कम किया जा सके। रूस और अल्जीरिया से भी अतिरिक्त कच्चा तेल आने की उम्मीद है। सिलेंडर की किल्लत रोकने के लिए LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश सरकार ने सभी ऑयल रिफाइनरी कंपनियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया था। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव से गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है। इसी खतरे को देखते हुए सरकार ने यह आदेश जारी किया। इसमें कहा गया है कि अब रिफाइनरियां प्रोपेन और ब्यूटेन का इस्तेमाल सिर्फ रसोई गैस बनाने के लिए करेंगी। सभी कंपनियों को प्रोपेन और ब्यूटेन की सप्लाई सरकारी तेल कंपनियों को करनी होगी। सरकारी तेल कंपनियों में इंडियन ऑयल (IOC), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) शामिल है। इसका मकसद कंज्यूमर्स को बिना रुकावट गैस सिलेंडर की सप्लाई है। सप्लाई संकट की 2 वजह 1. ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का लगभग बंद होना भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का बंद होना है। ये करीब 167 किमी लंबा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। ईरान जंग के कारण यह रूट अब सुरक्षित नहीं रहा है। खतरे को देखते हुए कोई भी तेल टैंकर वहां से नहीं गुजर रहा। दुनिया के कुल पेट्रोलियम का 20% हिस्सा यहीं से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी अपने निर्यात के लिए इसी पर निर्भर हैं। भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है। ईरान खुद इसी रूट से एक्सपोर्ट करता है। 2. प्लांट पर ड्रोन हमले से LNG का प्रोडक्शन रुका पिछले हफ्ते अमेरिका-इजराइल ने ईरान पर स्ट्राइक की थी। इसके जवाब में ईरान ने UAE, कतर, कुवैत और सऊदी जैसे देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और पोर्ट्स को निशाना बनाया है। ईरान के ड्रोन हमले के बाद भारत को गैस सप्लाई करने वाले सबसे बड़े देश कतर ने अपने LNG प्लांट का प्रोडक्शन रोक दिया है। इससे भारत में गैस की सप्लाई घट गई है। भारत अपनी जरूरत की 40% LNG (करीब 2.7 करोड़ टन सालाना) कतर से ही आयात करता है। 3 दिन पहले सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर के दाम ₹60 बढ़ाए 3 दिन पहले सरकार ने घरेलू गैस

क्या है टाइप 3 और टाइप 4 डायबिटीज, ये कितनी खतरनाक, अधिकतर लोग इस बारे में जानते ही नहीं !

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All About Type 3 and 4 Diabetes: डायबिटीज एक क्रोनिक डिजीज है, जिससे दुनियाभर में करोड़ों लोग जूझ रहे हैं. अक्सर टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज की चर्चा होती है. टाइप 1 डायबिटीज में शरीर इंसुलिन नहीं बना पाता है और टाइप 2 डायबिटीज में शरीर इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पाता है. इन दोनों ही कंडीशन में ब्लड शुगर लेवल अनकंट्रोल होने लगता है. टाइप 2 डायबिटीज को लाइफस्टाइल डिजीज भी माना जाता है. अधिकतर लोग इन दोनों डायबिटीज के बारे में जानते हैं, लेकिन क्या आपने कभी टाइप 3 और टाइप 4 डायबिटीज के बारे में सुना है? अगर आपने इन दोनों बीमारियों के बारे में नहीं सुना है, तो आज आपको इस बारे में विस्तार से बता रहे हैं. इन दोनों परेशानियों के बारे में जानना भी बेहद जरूरी है. क्या है टाइप 3 डायबिटीज? सेहत से जुड़ी प्रमाणिक जानकारी देने वाली वेबसाइट हेल्थलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक टाइप 3 डायबिटीज एक ऐसा शब्द है, जिसका इस्तेमाल अल्जाइमर डिजीज और इंसुलिन रेजिस्टेंस के बीच संबंध बताने के लिए किया जाता है. जब हमारे ब्रेन की सेल्स इंसुलिन के प्रति प्रतिक्रिया देना बंद कर देती हैं, तो ब्रेन को पर्याप्त एनर्जी नहीं मिल पाती है. इंसुलिन न केवल ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है, बल्कि यह ब्रेन की कोशिकाओं के बीच कम्युनिकेशन और याददाश्त के लिए भी जरूरी है. जब ब्रेन में इंसुलिन रेजिस्टेंस पैदा होता है, तो वहां हानिकारक प्रोटीन जमा होने लगते हैं, जो याददाश्त खोने और भ्रम की स्थिति पैदा करते हैं. इस कंडीशन को आधिकारिक तौर पर टाइप 3 डायबिटीज नहीं कहा जाता है, लेकिन यह एक प्रचलित शब्द बन चुका है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. क्या है टाइप 4 डायबिटीज? जब बुजुर्ग लोगों में इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण डायबिटीज की कंडीशन पैदा हो जाती है, तब उसे टाइप 4 डायबिटीज कहा जाता है. कई बुजुर्गों का वजन भी कम होता है और उनकी लाइफस्टाइल भी ठीक होती है, लेकिन फिर भी वे इंसुलिन रेजिस्टेंस के शिकार हो जाते हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार यह स्थिति उम्र बढ़ने के कारण पैदा होती है. जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, शरीर में टी-रेगुलेटरी सेल्स की संख्या बढ़ने लगती है, जो शरीर के फैट टिश्यू में इंसुलिन के काम को बाधित करती हैं. यह टाइप 2 डायबिटीज से इसलिए अलग है, क्योंकि इसमें मोटापा कारण नहीं होता, बल्कि शरीर की आंतरिक रोग प्रतिरोधक क्षमता में उम्र के साथ होने वाले बदलाव जिम्मेदार होते हैं. ये डायबिटीज कितनी खतरनाक हैं? हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो ये दोनों ही बीमारियां इसलिए खतरनाक हैं, क्योंकि इनके लक्षण सामान्य टाइप 1 और 2 डायबिटीज जैसे नहीं होते हैं. टाइप 3 डायबिटीज सीधे तौर पर डिमेंशिया और अल्जाइमर की ओर ले जाती है, जिसका वर्तमान में कोई सटीक इलाज नहीं है. वहीं टाइप 4 डायबिटीज को अक्सर लोग बुढ़ापे की सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे धीरे-धीरे शरीर के महत्वपूर्ण अंग जैसे किडनी और हार्ट प्रभावित होने लगते हैं. इनके बारे में आम लोगों में जागरुकता कम है, इसलिए इनका डायग्नोसिस अक्सर बहुत देरी से होता है, जब स्थिति गंभीर हो चुकी होती है. किस टेस्ट से लगाया जाता है पता? टाइप 3 और टाइप 4 डायबिटीज की पहचान करना सामान्य ब्लड शुगर टेस्ट या HbA1c से थोड़ा जटिल हो सकता है. टाइप 3 के मामले में व्यक्ति का शरीरिक शुगर लेवल सामान्य हो सकता है, लेकिन उसके ब्रेन में इंसुलिन का स्तर गड़बड़ हो सकता है, जिसके लिए कॉग्निटिव टेस्ट और स्पेशल इमेजिंग की जरूरत होती है. टाइप 4 के मरीजों में अक्सर लीन डायबिटीज देखी जाती है, जहां व्यक्ति दुबला-पतला होने के बावजूद हाई शुगर का शिकार होता है. एक्सपर्ट्स की मानें तो अगर उम्र के साथ याददाश्त कमजोर हो रही है या बिना किसी कारण के शुगर लेवल बढ़ रहा है, तो इस बारे में डॉक्टर से कंसल्ट करना चाहिए.

लाइव कॉन्सर्ट में रो पड़ीं सुनिधि चौहान:गले में खराश की वजह से आवाज खराब हुई, फैंस से मांगी माफी; कहा- 100% देना चाहती थी

लाइव कॉन्सर्ट में रो पड़ीं सुनिधि चौहान:गले में खराश की वजह से आवाज खराब हुई, फैंस से मांगी माफी; कहा- 100% देना चाहती थी

भारत की मशहूर सिंगर सुनिधि चौहान इन दिनों अपने इंडिया म्यूजिकल टूर पर हैं। इसी दौरान लखनऊ में हुए एक कॉन्सर्ट में वे स्टेज पर रो पड़ीं। तबीयत खराब होने और गले में गंभीर समस्या के बावजूद सुनिधि परफॉर्मेंस देने पहुंची थीं, लेकिन आवाज साथ नहीं देने पर उनकी आंखों से आंसू निकल आए। सुनिधि ने हजारों की भीड़ के सामने अपनी खराब परफॉर्मेंस के लिए माफी भी मांगी। 7 मार्च को लखनऊ के कूलब्रीज रिसॉर्ट्स में सुनिधि का ‘आई एम होम इंडिया टूर 2025-26 का इवेंट था। सुनिधि ब्लैक कलर के बॉडीसूट में स्टेज पर आईं, लेकिन गले में खराश के कारण उन्हें गाने में काफी दिक्कत हो रही थी। अब उनके रोने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में दिख रहा है कि सुनिधि गाते-गाते रुक जाती हैं और रोने लगती हैं। हालांकि, फैंस ने उनका हौसला बढ़ाने के लिए लगातार चीयर किया। सुनिधि बोलीं- आज मेरी आवाज बहुत खराब सुनिधि ने स्टेज से फैंस को संबोधित करते हुए कहा, ‘मेरा गला बहुत खराब है। आज मेरी आवाज बहुत ज्यादा खराब है, लेकिन मुझे पता है कि आप मेरे साथ हैं। मेरे साथ ऐसा पहले कभी नहीं हुआ, यह बहुत शर्मनाक है। मुझे बहुत खेद है, मैं हमेशा अपना 100% देना चाहती हूं।’ सुनिधि ने आगे कहा कि वे कोशिश कर रही हैं, लेकिन शायद परफॉर्मेंस वैसी न हो पाए जैसा उन्होंने सोचा था। मुंबई से शुरू हुआ था ‘आई एम होम’ टूर सुनिधि का यह ‘आई एम होम’ इंडिया टूर 24 दिसंबर 2025 को मुंबई से शुरू हुआ था। इसके तहत वे अब तक दिल्ली, बेंगलुरु, अहमदाबाद और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में लाइव शो कर चुकी हैं। लखनऊ के इस कॉन्सर्ट को लेकर फैंस काफी एक्साइटेड थे, लेकिन सुनिधि की खराब सेहत ने इस शाम को मुश्किल बना दिया। दो दशक से इंडस्ट्री की टॉप सिंगर हैं सुनिधि सुनिधि चौहान पिछले 20 सालों से बॉलीवुड की टॉप सिंगर्स में शामिल हैं। उन्होंने ‘शीला की जवानी’, ‘कमली’ और ‘बीड़ी जलइले’ जैसे कई सुपरहिट गाने दिए हैं। सुनिधि की पर्सनल लाइफ की बात करें तो उन्होंने साल 2012 में हितेश सोनिक से शादी की थी और 2018 में उनके घर बेटे का जन्म हुआ।

पेट से लेकर दिल तक के लिए फायदेमंद है धनिया के बीज, यहां जानिए इसके अद्भुत फायदे

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Last Updated:March 10, 2026, 10:01 IST बलिया: हर रसोई में मौजूद सूखा धनिया न केवल स्वाद बढ़ाने का काम करती है, बल्कि सेहत के लिए भी संजीवनी समान है. जी हां धनिया के छोटे-छोटे बीज पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं. यह पाचन, शरीर को ठंडक और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ कई रोगों में कारगर है. आगे विस्तार से जानिए… धनिया के बीज पाचन तंत्र को मजबूत कर गैस, एसिडिटी, पेट में जलन या सूजन की समस्या में आराम दे सकती है. ऐसे में धनिया का पानी पेट को आराम देने में मदद कर सकता है. इसके प्राकृतिक गुण पेट की गड़बड़ी को शांत करते हैं और भोजन के पाचन की प्रक्रिया को बेहतर बनाते हैं. इसके सही और नियमित सेवन करने से पेट हल्का महसूस होता है और पाचन धीरे-धीरे सही होने लगता हैं. धनिया का बीज दिल की सेहत के लिए भी बहुत लाभकारी है. यह खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद कर सकता है, जबकि अच्छे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कंट्रोल करता हैं. जब शरीर में कोलेस्ट्रॉल का संतुलन सही रहता है तो हृदय से जुड़ी कई समस्याओं का जोखिम भी कम हो सकता है. विशेषज्ञ भी संतुलित आहार के साथ धनिया के सीमित प्रयोग करने की सलाह देते हैं. धनिया के बीज को पारंपरिक घरेलू उपायों में भी इसे शुगर रोगियों के लिए उपयोगी माना गया है. धनिया के बीज का पानी शरीर में शुगर के स्तर को संतुलित करता हैं. धनिया के बीज का पानी थायराइड में भी फायदेमंद है. हालांकि, औषधीय रूप से सेवन एक्सपर्ट की सलाह लेकर ही करे. Add News18 as Preferred Source on Google राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की पांच साल अनुभवी चिकित्साधिकारी डॉ. वंदना तिवारी के अनुसार, धनिया के बीज शरीर के मेटाबॉलिज्म को सक्रिय बनाने में सहायता प्रदान करते हैं. जब मेटाबॉलिज्म बेहतर होने से शरीर कैलोरी को अधिक प्रभावी तरीके से उपयोग करता है. धनिया के बीज शरीर से विषैले तत्वों को भी बाहर निकालती हैं. धनिया के बीज त्वचा और बालों की देखभाल करते हैं. इसमें एंटीबैक्टीरियल और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो त्वचा को साफ और स्वस्थ रखने में मदद करते हैं. नियमित सेवन से मुंहासों की समस्या कम होने में मदद मिल सकती है और त्वचा अधिक मुलायम व चमकदार दिख सकती है. इसमें कई ऐसे पोषक तत्व होते हैं, जो शरीर के संपूर्ण पोषण में अहम भूमिका निभाते हैं. धनिया के बीज हड्डियों की मजबूती के लिए भी अच्छा माना गया है. इसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम और विटामिन K जैसे पोषक तत्व होते हैं, जो हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए रामबाण होते हैं. नियमित और संतुलित सेवन से जोड़ों के दर्द में भी राहत मिल सकती है. उम्र बढ़ने के साथ जब हड्डियां कमजोर होने लगती हैं, तब ऐसे प्राकृतिक स्रोत शरीर को जरूरी पोषण देते हैं. अगर धनिया के बीज के सेवन करने की बात करें, एक चम्मच धनिया के बीज को एक कप पानी में रात भर भिगोकर दे और सुबह खाली पेट इसका पानी छानकर पी लें. चाहें तो इन्हें हल्का उबालकर चाय की तरह भी लिया जा सकता है. ध्यान रखें कि, किसी भी चीज की अधिकता नुकसानदेह हो सकती है. किसी-किसी के लिए हानिकारक भी हो सकती हैं, इसलिए सेवन से पहले आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श जरूर लेना चाहिए. क्योंकि एक्सपर्ट उम्र और रोग के हिसाब डोज तय करते हैं. First Published : March 10, 2026, 10:01 IST

कोठीबाजार में 40 दुकानदारों पर कार्रवाई:बैतूल में सड़क घेरकर दुकान चलाने पर केस दर्ज

कोठीबाजार में 40 दुकानदारों पर कार्रवाई:बैतूल में सड़क घेरकर दुकान चलाने पर केस दर्ज

बैतूल शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए कोतवाली पुलिस ने सोमवार देर रात कोठी बाजार क्षेत्र में कार्रवाई की। इस दौरान सड़क पर दुकान का सामान फैलाकर रास्ता बाधित करने वाले करीब 40 दुकानदारों के खिलाफ मध्यप्रदेश पुलिस अधिनियम की धारा 34 के तहत प्रकरण दर्ज किए गए। थाना चौक से बस स्टैंड तक हुआ निरीक्षण पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमला जोशी और एसडीओपी सुनील लाटा के मार्गदर्शन में कोतवाली थाना प्रभारी देवकरण डेहरिया ने पुलिस बल के साथ कोठी बाजार में थाना चौक से बस स्टैंड तक निरीक्षण किया। जांच के दौरान कई दुकानदार अपनी दुकानों का सामान सड़क तक फैलाकर रखते पाए गए, जिससे यातायात प्रभावित हो रहा था। पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन ने शहर के व्यापारियों और नागरिकों से यातायात व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि दुकानदार अपना सामान दुकान की सीमा के भीतर ही रखें और सड़क पर सामान या बोर्ड रखकर रास्ता बाधित न करें। अतिक्रमण पर होगी कार्रवाई एसपी ने कहा कि सड़क पर अतिक्रमण से लोगों को आने-जाने में परेशानी होती है और दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कोई भी व्यक्ति सड़क पर अतिक्रमण कर यातायात में बाधा उत्पन्न करता पाया गया तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

मच्छर काटने के बाद खुजली क्यों होती है? क्या है इसके पीछे का साइंस, जानकर हैरान रह जाएंगे

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Last Updated:March 10, 2026, 09:03 IST Mosquito Bites and Itching: मच्छर के काटने के बाद स्किन पर खुजली और सूजन आ जाती है. असल में यह मच्छर की लार के प्रति हमारे शरीर की एक रक्षात्मक प्रतिक्रिया है. जब मादा मच्छर खून चूसने के लिए लार छोड़ती है, तो हमारा इम्यून सिस्टम हिस्टामाइन नामक रसायन रिलीज करता है, जो उस जगह पर सूजन और खुजली पैदा करता है. मच्छर काटने के बाद शरीर एक केमिकल छोड़ता है, जिसकी वजह से खुजली होने लगती है. Mosquito Bites Effect on Skin: गर्मियों की शुरुआत होते ही मच्छरों का आतंक बढ़ गया है. मच्छरों के काटने से डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी गंभीर बीमारियां भी फैलती हैं. जब आपको मच्छर काटता है, तब उस जगह खुजली, जलन और छोटा सा लाल उभार हो जाता है. कई लोगों को लगता है कि यह मच्छर के डंक की वजह से होता है, लेकिन इसके पीछे हमारे शरीर का रिस्पॉन्स होता है. इसकी वजह से मच्छर काटने के बाद लोगों को खुजली महसूस होने लगती है. मच्छर केवल हमारा खून ही नहीं पीते, बल्कि वे हमारी स्किन के अंदर अपनी लार भी छोड़ देते हैं, जिससे बीमारियां फैल जाती हैं. मच्छर के काटने के बाद खुजली क्यों होती है? अमेरिका के क्लीवलैंड क्लीनिक की रिपोर्ट के मुताबिक जब मच्छर काटता है, तो वह हमारी स्किन के अंदर अपना लार छोड़ देता है. मच्छर द्वारा छोड़ी गई लार को हमारा शरीर एक एलर्जेन के रूप में देखता है. जैसे ही यह लार स्किन में प्रवेश करती है, वैसे ही हमारा इम्यून सिस्टम तुरंत एक्टिव हो जाता है. इस एलर्जेन को शरीर के बाहर निकालने के लिए इम्यून सिस्टम मच्छर काटने वाली जगह पर हिस्टामाइन नामक एक केमिकल भेजता है. हिस्टामाइन का काम व्हाइट ब्लड सेल्स को संक्रमण वाली जगह तक पहुंचाने के लिए ब्लड वेसल्स को चौड़ा करना है. इसी हिस्टामाइन के कारण उस जगह पर थोड़ी सी सूजन आ जाती है और खुजली महसूस होने लगती है. अधिकतर लोगों को मच्छर के काटने से एलर्जी होती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. स्किन में लार क्यों छोड़ देता है मच्छर? मेडिकल न्यूज टुडे की रिपोर्ट बताती है कि जब एक मच्छर आपकी त्वचा पर बैठता है, तो वह अपने डंक को ब्लड वेसल्स की तलाश में त्वचा के अंदर चुभाता है. खून चूसने से पहले वह अपनी लार को आपकी नसों में इंजेक्ट करता है. इस लार में विशेष प्रकार के एंजाइम और प्रोटीन होते हैं, जो एंटी-कोगुलेंट के रूप में काम करते हैं. इनका मुख्य काम खून को जमने से रोकना होता है, ताकि मच्छर बिना किसी बाधा के पतला खून आसानी से चूस सके. अगर मच्छर ऐसा न करे, तो हमारा खून हवा के संपर्क में आते ही थक्का बन जाएगा और मच्छर के डंक में फंस जाएगा. मच्छर काट ले, तो खुजली से कैसे पाएं राहत हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो मच्छर के काटने के बाद सबसे पहले उस जगह को साबुन और पानी से धोना चाहिए. खुजली कम करने के लिए बर्फ की सिकाई सबसे असरदार है, क्योंकि यह ब्लड वेसल्स को सिकोड़ती है और हिस्टामाइन के असर को कम करती है. इसके अलावा कैलामाइन लोशन या एलोवेरा जेल लगाने से भी त्वचा को ठंडक मिलती है. हालांकि इन सभी उपायों से आपको खुजली से राहत मिल जाएगी, लेकिन अगर संक्रमित मच्छर काटेगा, तो आपके शरीर में वायरस पहुंच जाएगा. इससे आपको डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियां हो सकती हैं. इसलिए मच्छरों से बचाव करना बेहद जरूरी है. मच्छरों से बचने के लिए रात में मच्छरदानी या मॉस्किटो रिपेलेंट्स का उपयोग करें. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : March 10, 2026, 09:03 IST

पति को तलाशते हुए रोहतक पहुंची आंध्र प्रदेश की महिला:बोली- समुद्र किनारे की शादी, 40 लाख हड़पकर हरियाणा आया, होटलों में यौन शोषण किया

पति को तलाशते हुए रोहतक पहुंची आंध्र प्रदेश की महिला:बोली- समुद्र किनारे की शादी, 40 लाख हड़पकर हरियाणा आया, होटलों में यौन शोषण किया

हरियाणा के रोहतक में आंध्र प्रदेश की एक महिला ने तिलक नगर के एक युवक पर शादी का झांसा देकर यौन शोषण और लाखों रुपए की ठगी का आरोप लगाया है। महिला का दावा है कि युवक ने मेट्रिमोनियल साइट के जरिए उससे दोस्ती की। फिर खुद को ‘आर्य समाजी’ बताकर फर्जी तरीके से शादी रचाई। आरोपी युवक ने न केवल उसका शारीरिक शोषण किया, बल्कि घर बनाने के नाम पर करीब 40 लाख रुपए भी ऐंठ लिए। आरोपी युवक का भाई गुरुग्राम पुलिस में ASI के पद पर तैनात है। महिला का आरोप है कि पुलिस थाने में दोनों के बीच हुए समझौते का पत्र भी गायब करा दिया गया है। अब महिला को न्याय दिलाने के लिए सामाजिक संगठनों ने पहल की है। अब सिलसिलेवार पढ़िए क्या है पूरा मामला… सामाजिक संगठनों ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र पांचाल और ‘भारत मुक्ति मोर्चा’ की मनीषा बिरला बोहत ने कहा कि ढाई महीने से महिला दर-दर भटका रही है। बार बार SP से मिलने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। एससी-एसटी एक्ट में तुरंत गिरफ्तारी का प्रावधान है, लेकिन डेढ़ महीना बीतने के बाद भी आरोपी बाहर घूम रहा है। अगर जल्द न्याय नहीं मिला, तो बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा। पुलिस ने जीरो FIR दर्ज कर विशाखापट्‌टनम भेजी रोहतक सिविल लाइन थाने की SHO अंकिता ने बताया कि महिला की शिकायत पर रोहतक में जो कार्रवाई बनती थी, वह की गई है। पुलिस ने जीरो एफआईआर दर्ज करके विशाखापट्टनम भेज दी है। आगे की कार्रवाई वहां की पुलिस करेगी।

Youtuber Anurag Dohal ICU | Father Disowns; Mental Torture Allegations

Youtuber Anurag Dohal ICU | Father Disowns; Mental Torture Allegations

17 मिनट पहले कॉपी लिंक पॉपुलर यूट्यूबर और ‘UK07 राइडर’ नाम से सोशल मीडिया पर पहचान रखने वाले अनुराग डोभाल इस वक्त अस्पताल के ICU में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। आत्महत्या करने की कोशिश में उनकी कूल्हे की दोनों हड्डियां टूट गई हैं। इस गंभीर स्थिति के बीच उनके पिता ने अनुराग और उनकी पत्नी रितिका चौहान को अपनी चल-अचल संपत्ति से बेदखल कर दिया है। पिता ने अखबार में विज्ञापन देकर सार्वजनिक रूप से बेटे-बहू से संबंध खत्म करने की घोषणा की है। हादसे के बाद से ही अनुराग की हालत नाजुक बनी हुई है। पिता ने निकाला विज्ञापन- अब हमारा कोई वास्ता नहीं अनुराग के पिता जगदम्बा प्रसाद डोभाल ने देहरादून के एक अखबार में सार्वजनिक सूचना निकलवाई है। इसमें लिखा है, ‘मैं अपने पुत्र अनुराग डोभाल और पुत्रवधु रितिका चौहान डोभाल को अपनी समस्त चल-अचल संपत्ति से बेदखल करता हूं। भविष्य में इनके द्वारा किए गए किसी भी कृत्य व लेन-देन के वे स्वयं जिम्मेदार होंगे। मेरी और मेरे परिवार की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी। यह विज्ञापन अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। 150 की स्पीड पर टकराई थी कार बिग बॉस के कंटेस्टेंट रह चुके राइडर अनुराग डोभाल ने शनिवार रात इंस्टाग्राम पर लाइव आकर आत्महत्या करने की कोशिश की। उन्होंने लाइव में तेज रफ्तार में कार चलाते हुए डिवाइडर पर चला दी, जिसके बाद से ही उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। वह दिल्ली-देहरादून हाईवे पर करीब 150 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से कार चला रहे थे। हादसे के बाद उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। उनके मैनेजर और दोस्तों ने बताया कि अनुराग की हालत फिलहाल नाजुक बनी हुई है। हादसे के बाद अनुराग को लोगों ने तुरंत अस्पताल पहुंचाया। परिवार पर लगाया था टॉर्चर का आरोप इस विवाद की शुरुआत कुछ दिन पहले हुई थी जब अनुराग ने इंस्टाग्राम पर कई इमोशनल पोस्ट किए थे। 3 मार्च को उन्होंने लिखा था कि उन्हें मेंटली टॉर्चर किया जा रहा है। अनुराग ने वीडियो में दावा किया था, मुझसे मेरा परिवार, पैसा और रिश्ते सब छीन लिए गए हैं। अगर मुझे कुछ होता है, तो इसके जिम्मेदार मेरे मम्मी, पापा और भाई होंगे। इंटर-कास्ट मैरिज बनी विवाद का कारण अनुराग ने अपने आखिरी व्लॉग में बताया था कि रितिका के साथ उनकी इंटर-कास्ट मैरिज को लेकर परिवार खुश नहीं था। उन्होंने काफी कोशिश की, लेकिन घरवाले शादी में शामिल नहीं हुए। अनुराग का कहना था कि उन्हें न तो माता-पिता का प्यार मिला और न ही भाई का। यहां तक कि उन्होंने अपनी पत्नी रितिका पर भी कुछ गंभीर आरोप लगाए थे। हालांकि, एक्सीडेंट के बाद रितिका अपने परिवार के साथ अस्पताल पहुंची हैं और उन्होंने लोगों से अफवाह न फैलाने की अपील की है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

गुलाम नबी आजाद ने जेपीसी के समक्ष ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ का समर्थन किया, इसे शासन के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया | राजनीति समाचार

Sensex Today

आखरी अपडेट:मार्च 10, 2026, 08:50 IST जेपीसी पैनल को संबोधित करते हुए, आज़ाद ने एक साथ चुनावों को देश के लिए “जीत-जीत परिदृश्य” बताया। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आज़ाद (छवि: पीटीआई) जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद ने सोमवार को इस मुद्दे की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के साथ बातचीत के दौरान प्रस्तावित एक राष्ट्र, एक चुनाव (ओएनओई) पहल के लिए समर्थन व्यक्त किया। पैनल को संबोधित करते हुए, आज़ाद ने एक साथ चुनावों को देश के लिए “जीत-जीत परिदृश्य” के रूप में वर्णित किया, तर्क दिया कि सुधार राष्ट्रीय विकास में तेजी लाने और शासन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने समिति को बताया कि राज्यों में लगातार चुनावों के मौजूदा चक्र के परिणामस्वरूप प्रशासनिक समय और राजनीतिक ध्यान का महत्वपूर्ण विचलन होता है। उन्होंने कहा कि एक साथ चुनाव कराने से सरकारों और राजनीतिक नेतृत्व को लगातार प्रचार के बजाय शासन और विकास पर अधिक ध्यान केंद्रित करने का मौका मिलेगा। आजाद ने यह भी बताया कि आजादी के बाद के शुरुआती दशकों में भारत में एक साथ चुनाव होते थे, जब लोकसभा और अधिकांश राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ होते थे। बाद में कई विधानसभाओं और संसद के समय से पहले भंग होने के कारण यह चक्र बाधित हो गया, जिसके कारण देश भर में अलग-अलग चुनाव हुए। आजाद के मुताबिक, एक साथ चुनाव बहाल करने से देश का लोकतांत्रिक चरित्र या संघीय ढांचा कमजोर नहीं होगा। इसके बजाय, उन्होंने तर्क दिया, चुनाव प्रचार के लिए राष्ट्रीय नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों पर भारी निर्भरता के बजाय मजबूत क्षेत्रीय नेतृत्व पर अधिक निर्भरता को प्रोत्साहित करके यह प्रणाली विपक्षी दलों को भी लाभ पहुंचा सकती है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि समकालिक चुनाव निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा दलबदल के खिलाफ एक निवारक के रूप में कार्य कर सकते हैं, जिससे अधिक राजनीतिक स्थिरता आएगी। आज़ाद ने आगे कहा कि सुधार से चुनाव खर्च में काफी कमी आएगी, मतदाताओं की थकान दूर होगी और चुनाव प्रबंधन कर्मियों पर बोझ कम होगा, जो वर्तमान में विभिन्न अंतरालों पर देश भर में कई चुनाव आयोजित करते हैं। प्रस्ताव को “मास्टरस्ट्रोक” कहते हुए, आज़ाद ने समिति को बताया कि एक साथ चुनाव के फायदे कार्यान्वयन की चुनौतियों से कहीं अधिक हैं, उन्होंने कहा कि सुधार भारत के शासन ढांचे के लिए काफी हद तक सकारात्मक प्रक्षेपवक्र प्रदान करता है। एक राष्ट्र, एक चुनाव के प्रस्ताव की प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने पुरजोर वकालत की है, जिन्होंने तर्क दिया है कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनावों को एक साथ कराने से शासन की दक्षता में सुधार होगा और बार-बार होने वाले चुनावों का वित्तीय और प्रशासनिक बोझ कम होगा। केंद्र सरकार ने राजनीतिक दलों, संवैधानिक विशेषज्ञों और हितधारकों के साथ परामर्श शुरू कर दिया है और एक संयुक्त संसदीय समिति वर्तमान में प्रस्ताव की विस्तार से जांच कर रही है। इस समिति के अध्यक्ष पीपी चौधरी हैं. सुप्रिया सुले (एनसीपी) और कांग्रेस नेता मुकुल वासनिक, रणदीप सुरजेवाला और प्रियंका गांधी वाद्रा से लेकर अनिल देसाई (शिवसेना यूबीटी) और कल्याण बनर्जी (टीएमसी) तक, विपक्षी बेंचों का अच्छा प्रतिनिधित्व है। एनडीए की ओर से बीजेपी नेता अनुराग ठाकुर, संबित पात्रा, बैजयंत पांडा, अनिल बलूनी और शिवसेना के श्रीकांत शिंदे के साथ टीडीपी के हरीश बालयोगी भी हैं। एक साथ चुनाव लागू करने के किसी भी कदम के लिए महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधनों के साथ-साथ राज्यों और राजनीतिक दलों के बीच आम सहमति की आवश्यकता होने की उम्मीद है। प्रस्ताव ने एक व्यापक राजनीतिक बहस शुरू कर दी है, समर्थकों का तर्क है कि यह शासन को सुव्यवस्थित करेगा, जबकि आलोचक संघवाद और क्षेत्रीय राजनीतिक गतिशीलता पर संभावित प्रभाव के बारे में आगाह करते हैं। पहले प्रकाशित: मार्च 10, 2026, 08:50 IST समाचार राजनीति गुलाम नबी आज़ाद ने जेपीसी के समक्ष ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ का समर्थन किया, इसे शासन के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)गुलाम नबी आज़ाद(टी)वन नेशन वन इलेक्शन(टी)जेपीसी