मूड को बनाना है बेहतर, रोज सुबह उठकर करें यह काम, गर्मी के मौसम में भी रहेंगे कूल-कूल !

The Science of Happy Mood: गर्मियों की शुरुआत हो चुकी है और अब धूप में ज्यादा देर रुकना मुश्किल हो गया है. अक्सर लोग गर्मियों की शुरुआत होते ही धूप से पूरी तरह दूरी बना लेते हैं, लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि सूरज की रोशनी शरीर के लिए उतनी ही जरूरी है जितनी कि हवा और पानी. सूरज की किरणें न केवल हमें गर्माहट देती हैं, बल्कि यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने का सबसे आसान जरिया हैं. नेशनल हेल्थ मिशन के अनुसार धूप का सही तालमेल हमारी इम्यूनिटी को बढ़ाने से लेकर हड्डियों को मजबूत रखने तक में अहम भूमिका निभाता है. हालांकि गर्मियों में धूप लेने का तरीका सर्दियों से बिल्कुल अलग होना चाहिए, ताकि हम इसके फायदों का आनंद ले सकें और नुकसान से बच सकें. सूरज की रोशनी शरीर में विटामिन डी D उत्पादन को सक्रिय करने का एकमात्र प्राकृतिक स्रोत है. जब सुबह की हल्की किरणें हमारी त्वचा पर पड़ती हैं, तो शरीर में मेटाबॉलिक फंक्शन बेहतर होते हैं, जिससे न केवल हड्डियां मजबूत होती हैं, बल्कि जोड़ों के दर्द में भी राहत मिलती है. विटामिन डी कैल्शियम के अवशोषण के लिए जरूरी है, जिसके बिना शरीर की संरचना कमजोर हो सकती है. इसके अलावा नियमित रूप से सही समय पर धूप लेने से दिल की सेहत में सुधार होता है और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है. यह वजन प्रबंधन और शरीर की आंतरिक हीलिंग प्रक्रिया को भी तेज करता है, जो बिना किसी दवा के शरीर को भीतर से मजबूत बनाता है. धूप का असर सिर्फ शरीर पर ही नहीं, बल्कि हमारे ब्रेन पर भी गहरा पड़ता है. सुबह की सुनहरी धूप में समय बिताने से शरीर में सेरोटोनिन नामक हार्मोन का स्तर बढ़ता है, जिसे फील-गुड हार्मोन भी कहा जाता है. यह हार्मोन सीधे तौर पर हमारे मूड को बेहतर बनाने, डिप्रेशन के लक्षणों को कम करने और एंजायटी से राहत दिलाने में सहायक होता है. जो लोग सुबह की धूप का आनंद लेते हैं, उनमें एनर्जी लेवल दिन भर बना रहता है और उनकी एकाग्रता की क्षमता भी बढ़ती है. मानसिक शांति और खुशहाली के लिए सूरज की रोशनी एक प्राकृतिक एंटी-डिप्रेसेंट की तरह काम करती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. गर्मियों में धूप के फायदे उठाने के लिए सही समय जरूरी है. विशेषज्ञों के अनुसार सूर्योदय के बाद से लेकर सुबह 9 बजे तक की धूप विटामिन डी के लिए सबसे प्रभावी और सुरक्षित मानी जाती है. इस दौरान अल्ट्रावॉयलेट बी किरणें कम हानिकारक होती हैं. गर्मियों में केवल 10 से 20 मिनट की धूप ही पर्याप्त होती है, इससे अधिक समय तक धूप में रहने से सनबर्न, त्वचा में जलन या एलर्जी का खतरा बढ़ सकता है. धूप लेते समय अपने हाथ, पैर और चेहरे को खुला रखें, ताकि त्वचा किरणों को अवशोषित कर सके, लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि ओवर एक्सपोजर से बचने के लिए कम समय ही काफी है. गर्मियों की दोपहर यानी 12 बजे से शाम 4 बजे तक की तेज धूप से बचना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि इस समय किरणें सबसे ज्यादा हानिकारक होती हैं. धूप का लाभ लेने के लिए सुबह की सैर करें या बालकनी में बैठें. बाहर निकलते समय हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें, चेहरे पर सनस्क्रीन लगाएं और आंखों की सुरक्षा के लिए चश्मा या टोपी का इस्तेमाल करें. चूंकि धूप शरीर में गर्मी बढ़ाती है, इसलिए भरपूर मात्रा में पानी पीते रहें ताकि डिहाइड्रेशन न हो. इन छोटी-छोटी सावधानियों को अपनाकर आप गर्मियों में भी सूरज की रोशनी का वरदान पा सकते हैं और अपनी सेहत व मूड दोनों को शानदार बना सकते हैं. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
नवजातों के लिए ‘पहला टीका’ बनेगा मां का दूध:सेंट्रल इंडिया में भोपाल अकेला शहर जहां 3 सरकारी ह्यूमन मिल्क बैंक; हमीदिया अस्पताल में इसी महीने शुरू

नवजात शिशु के लिए मां का दूध किसी अमृत से कम नहीं माना जाता। इसमें मौजूद पोषक तत्व और एंटीबॉडी बच्चे को शुरुआती संक्रमणों से बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं। लेकिन कई बार बीमारी या अन्य कारणों से मां अपने नवजात को स्तनपान नहीं करा पाती। ऐसे में बच्चों को वैकल्पिक दूध देना पड़ता है। इसी समस्या को देखते हुए राजधानी भोपाल में ह्यूमन मिल्क बैंक की सुविधा को विस्तार दिया जा रहा है। एम्स और जेपी अस्पताल के बाद अब हमीदिया अस्पताल में भी ह्यूमन मिल्क बैंक शुरू होने जा रहा है। हमीदिया अस्पताल में यह नई सुविधा शुरू करने की टेंटेटिव डेट 17 मार्च तय की गई है। इसके अनुसार ही तैयारियां चल रहीं हैं। इसके शुरू होते ही भोपाल देश के उन चुनिंदा शहरों में शामिल होगा जहां तीन सरकारी ह्यूमन मिल्क बैंक उपलब्ध होंगे। इसके साथ ही सेंट्रल इंडिया का अकेला शहर होगा, जहां तीन सरकारी ह्यूमन मिल्क बैंक होंगे। हमीदिया अस्पताल में जल्द शुरू होगी नई सुविधा राजधानी भोपाल के हमीदिया अस्पताल में ह्यूमन मिल्क बैंक शुरू करने की तैयारी अंतिम चरण में है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार यहां सिविल वर्क तेजी से चल रहा है और अगले लगभग 10 दिनों में इसके पूरा होने की संभावना है। इसके बाद आवश्यक मशीनें और उपकरण स्थापित कर मिल्क बैंक को शुरू कर दिया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक मार्च माह के भीतर इस सुविधा को शुरू करने की योजना है, जिससे नवजात शिशुओं को समय पर मां के दूध का लाभ मिल सकेगा। कब नवजात को दिया जाता है मिल्क बैंक का दूध भोपाल में होंगे तीन सरकारी ह्यूमन मिल्क बैंक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत 2018 में भोपाल और इंदौर में ह्यूमन मिल्क बैंक शुरू करने की योजना बनाई गई थी। हालांकि शुरुआत केवल भोपाल के जेपी अस्पताल में ही हो सकी। इसके बाद एम्स भोपाल में भी यह सुविधा शुरू की गई। अब हमीदिया अस्पताल में मिल्क बैंक शुरू होने के साथ राजधानी भोपाल देश का ऐसा शहर बन जाएगा जहां तीन सरकारी अस्पतालों में ह्यूमन मिल्क बैंक की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे नवजातों की देखभाल और पोषण व्यवस्था और मजबूत होगी। सुलतानियां अस्पताल के शिफ्ट होने के बाद बनी योजना दरअसल, सुलतानियां अस्पताल को हमीदिया परिसर में स्थानांतरित किए जाने के बाद यहां नवजात और मातृत्व सेवाओं का विस्तार किया गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए हमीदिया अस्पताल में ह्यूमन मिल्क बैंक शुरू करने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। यह प्रस्ताव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग को भेजा गया था, जिसे स्वीकृति मिलने के बाद अब इसे जमीन पर उतारा जा रहा है। इसके साथ ही हमीदिया अस्पताल में आईवीएफ यानी टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर शुरू करने की भी योजना है। ऐसे काम करता है ह्यूमन मिल्क बैंक ह्यूमन मिल्क बैंक में माताओं द्वारा दान किए गए दूध को सुरक्षित तरीके से संग्रहित किया जाता है। इसके लिए विशेष डीप फ्रीजर का उपयोग किया जाता है, जिसमें दूध को लगभग -30 डिग्री सेल्सियस तापमान पर सुरक्षित रखा जाता है। एक मिल्क बैंक में करीब 50 से 60 लीटर तक दूध संरक्षित किया जा सकता है। यहां मेकेनाइज्ड ब्रेस्ट पम्प, मिल्क स्टोरेज यूनिट और आधुनिक स्टरलाइजेशन सिस्टम जैसी सुविधाएं उपलब्ध होती हैं। इस बैंक में महिलाएं स्वेच्छा से अपना दूध दान कर सकती हैं, जिससे जरूरतमंद नवजात शिशुओं को पोषण मिल सके। किन बच्चों को दिया जाता है यह दूध ह्यूमन मिल्क बैंक में संग्रहित दूध उन नवजात शिशुओं को दिया जाता है, जिन्हें किसी कारण से अपनी मां का दूध नहीं मिल पाता। यह दूध विशेष रूप से उन बच्चों के लिए उपयोगी होता है जो समय से पहले यानी प्री-मेच्योर पैदा होते हैं। इसके अलावा एसएनसीयू (स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट) में भर्ती बच्चों को भी यह दूध दिया जाता है। यदि किसी मां को गंभीर बीमारी के कारण आईसीयू में रखना पड़े और वह अपने बच्चे को स्तनपान नहीं करा सके, तब भी मिल्क बैंक का दूध नवजात के लिए जीवनदायी साबित होता है। मां का दूध नवजात के लिए सबसे जरूरी विशेषज्ञों के अनुसार मां के दूध में प्राकृतिक एंटीबॉडी और पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं। यही कारण है कि इसे नवजात शिशु का पहला टीका भी कहा जाता है। मां का दूध बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है और उसे कई संक्रमणों से बचाता है। इसके अलावा यह बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए भी बेहद जरूरी माना जाता है। हर अस्पताल में नहीं खुल सकता मिल्क बैंक हमीदिया अस्पताल के अधीक्षक डॉ. सुनीत टंडन के अनुसार किसी भी अस्पताल में ह्यूमन मिल्क बैंक तभी खोला जा सकता है, जब उस अस्पताल में हर साल कम से कम 10 हजार से अधिक डिलीवरी होती हों। इसके लिए केंद्र स्तर से अनुमति मिलती है और अस्पताल के डॉक्टरों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाता है। उन्होंने बताया कि हमीदिया अस्पताल में इन सभी प्रक्रियाओं को पूरा कर लिया गया है, इसलिए जल्द ही यहां मिल्क बैंक की सुविधा शुरू कर दी जाएगी। नवजातों के लिए बनेगा जीवनदायी सहारा ह्यूमन मिल्क बैंक की सुविधा शुरू होने से उन नवजात शिशुओं को बड़ा लाभ मिलेगा, जिन्हें किसी कारण से अपनी मां का दूध नहीं मिल पाता। विशेषज्ञों का मानना है कि इस सुविधा से नवजात मृत्यु दर को कम करने में भी मदद मिल सकती है। राजधानी में तीन सरकारी मिल्क बैंक शुरू होने से भोपाल नवजात स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर उभर सकता है। नवजात के जरूरी मां का दूध
Bhopal Child Rape-Murder Convict Atul Nihales Execution Stayed by SC

भोपाल के शाहजहांनाबाद इलाके में 5 साल की मासूम से रेप और हत्या के मामले में दोषी अतुल निहाले की फांसी की सजा पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। . शीर्ष अदालत ने अतुल की याचिका पर सुनवाई करते हुए डेथ सेंटेंस को अमल करने पर स्टे दे दिया है। कोर्ट अब मामले में सजा और दोष सिद्धि से जुड़े पहलुओं पर विस्तार से सुनवाई करेगा। यह आदेश सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच ने दिया, जिसमें न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया शामिल हैं। बेंच ने फिलहाल फांसी की सजा के अमल पर रोक लगाते हुए मामले की आगे सुनवाई तय की है। अदालत अब रिकॉर्ड और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर यह तय करेगी कि निचली अदालतों के फैसले में किसी तरह के हस्तक्षेप की आवश्यकता है या नहीं। स्पेशल कोर्ट ने सुनाई थी तिहरी फांसी इस जघन्य मामले में भोपाल के विशेष पॉक्सो कोर्ट ने 18 मार्च 2025 को ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। अदालत ने आरोपी अतुल निहाले को तीन अलग-अलग धाराओं में फांसी की सजा सुनाई थी। बीएनएस लागू होने के बाद मध्यप्रदेश में यह पहला मामला था, जिसमें किसी दोषी को अलग-अलग धाराओं में तीन बार मृत्युदंड दिया गया था। इसके अलावा अदालत ने आरोपी को दो धाराओं में उम्रकैद और दो अन्य धाराओं में सात-सात साल की सजा भी सुनाई थी। हाईकोर्ट ने कहा था- इसकी कल्पना ही रूह कंपा देने वाली स्पेशल कोर्ट के फैसले को आरोपी ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इस पर सुनवाई करते हुए जबलपुर स्थित हाईकोर्ट की डबल बेंच ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए फांसी की सजा बरकरार रखी थी। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि आरोपी ने अत्यंत अमानवीय और नृशंस अपराध किया है। हाईकोर्ट ने यह भी टिप्पणी की थी कि पांच साल की बच्ची ने जिस पीड़ा को झेला, उसे शब्दों में समझ पाना मुश्किल है और इसकी कल्पना ही रूह कंपा देने वाली है। दुर्लभतम श्रेणी का अपराध माना गया भोपाल की विशेष अदालत ने अपने फैसले में इस अपराध को दुर्लभतम श्रेणी का मामला बताया था। कोर्ट ने कहा था कि यदि मृत्युदंड से भी बड़ी कोई सजा होती तो आरोपी उसका भी पात्र होता। अदालत ने अपने आदेश में लिखा था कि यदि समाज बच्चों को सुरक्षित माहौल नहीं दे सकता, जहां वे अपने घर और आसपास सुरक्षित खेल सकें, तो सभ्य समाज की कल्पना भी कठिन हो जाती है। 24 सितंबर 2024 को हुई थी वारदात यह घटना 24 सितंबर 2024 को शाहजहांनाबाद इलाके में हुई थी। दोपहर के समय पांच साल की बच्ची अपनी दादी के साथ मल्टी में स्थित बड़े पापा के फ्लैट पर थी। दादी ने उसे स्कूल की किताबें लाने के लिए नीचे भेजा था, लेकिन वह काफी देर तक वापस नहीं लौटी। इसके बाद परिवार और मल्टी में रहने वाले लोगों ने उसकी तलाश शुरू की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। बाद में बच्ची के पिता ने शाहजहांनाबाद थाने में उसके अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई। घर की टंकी में छिपाया गया था शव पुलिस जांच के दौरान आरोपी के घर से बदबू आने की शिकायत मिली। तलाशी लेने पर बाथरूम के ऊपर रखी प्लास्टिक की पानी की टंकी से दुर्गंध आ रही थी। जब टंकी को नीचे उतारा गया तो उसमें बच्ची का शव मिला। शव को कपड़ों और अन्य सामान से ढंक कर छिपाया गया था। जांच में सामने आया कि आरोपी ने वारदात के बाद शव को तीन दिन तक टंकी में छिपाकर रखा था। डीएनए और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट बने अहम सबूत सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में कुल 22 गवाह पेश किए थे। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और डीएनए जांच इस केस के सबसे अहम सबूत साबित हुए। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के बाद चाकू से कई वार किए थे, जिससे उसकी मौत हो गई। आरोपी के घर से खून से सने कपड़े और वारदात में इस्तेमाल किया गया चाकू भी बरामद किया गया था। मां और बहन को भी मिली सजा इस मामले में आरोपी की मां बसंती निहाले और बहन चंचल भालसे को भी अदालत ने दोषी माना था। जांच में सामने आया था कि दोनों ने आरोपी की मदद करते हुए वारदात को छिपाने की कोशिश की थी। अदालत ने इस आधार पर दोनों को दो-दो साल की सजा सुनाई थी। अब मामले में अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद ही होगा। फिलहाल शीर्ष अदालत ने फांसी की सजा के क्रियान्वयन पर रोक लगाकर आगे की सुनवाई तय की है। इस केस पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह हाल के वर्षों में सामने आए सबसे जघन्य अपराधों में से एक माना गया है। मामले से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… 1. मासूम के अपहरण ,दुष्कर्म और हत्या के आरोपी दोषी करार भोपाल के शाहजहानाबाद इलाके में 5 वर्षीय एक अबोध बालिका के अपहरण, दुष्कर्म और जघन्य हत्या के सनसनीखेज मामले में सोमवार को विशेष न्यायालय ने तीनों आरोपियों को दोषी करार दिया। आरोपियों में मुख्य आरोपी अतुल निहाले, उसकी मां बसंती बाई और बहन चंचल भालसे शामिल हैं। विशेष न्यायाधीश कुमुदिनी पटेल ने इस मामले में तीनों को दोषी ठहराया है। पढ़ें पूरी खबर… 2. आरोपी ने रेप के बाद गला घोंटा; फिर शव को पानी की टंकी में छिपाया था भोपाल के ईदगाह हिल्स इलाके के मल्टी में 5 साल की मासूम बच्ची से रेप के बाद हत्या करने के मामले में शाहजहांनाबाद थाना पुलिस ने अतुल भालसे, उसकी बहन चंचल भालसे और मां बसंती भालसे के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया है। चालान के साथ पुलिस ने डीएनए टेस्ट रिपोर्ट, मेडिकल रिपोर्ट, दस्तावेज और पीड़ित के परिजन, चिकित्सक और पुलिसकर्मियों सहित गवाहों की लिस्ट भी कोर्ट में पेश की है। पुलिस ने आरोपी की मां और बहन को पुलिस के काम में बाधा डालने और सबूत छिपाने का आरोपी बनाया है। पढ़ें पूरी खबर…
भारत बनेगा स्पेस मेडिसिन का विश्वगुरु, एम्स और ISRO ने मिलाया हाथ, इन 6 चीजों पर होगी रिसर्च aiims delhi and isro mou on space medicine news

होमताजा खबरदेश भारत बनेगा स्पेस मेडिसिन का विश्वगुरु, एम्स और ISRO ने मिलाया हाथ, इन 6….. Last Updated:March 10, 2026, 11:36 IST AIIMS नई दिल्ली और इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन के एचएसएफ सेंटर ने स्पेस मेडिसिन पर ऐतिहासिक एमओयू साइन किया है. अब एम्स के डॉक्टर और इसरो के वैज्ञानिक मिलकर मानव शरीर, हृदय, नर्वस सिस्टम, माइक्रोग्रैविटी, माइक्रोबायोम, जीन और मानसिक स्वास्थ्य पर रिसर्च करेंगे . एम्स और इसरो मिलकर स्पेस मेडिसिन पर रिसर्च करेंगे. भारत अब स्पेस मेडिसिन के क्षेत्र में बहुत कुछ बड़ा करने जा रहा है. इसके लिए देश के दो लीडिंग संस्थानों ने आपस में हाथ मिलाया है. मेडिकल के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज नई दिल्ली और अंतरिक्ष मामलों के टॉप संगठन इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन के एचएसएफसी ने पहली बार ऐतिहासिक एमओयू साइन किया है. इसके तहत अब स्पेस और मेडिकल संबंधी 6 प्रमुख विषयों पर गहन रिसर्च किया जाएगा. एम्स और इसरो का ह्यूमन स्पेस फ्लाइट सेंटर अब भारत में स्पेस मेडिसिन रिसर्च को आगे बढ़ाने जा रहे हैं. इस दौरान इसरो के वैज्ञानिक और एम्स के डॉक्टर मिलकर यह अध्ययन करेंगे कि अंतरिक्ष यात्रा का मानव शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है. इससे न केवल आने वाले समय में अंतरिक्ष में मानव स्वास्थ्य को लेकर बड़ी सफलताएं मिल सकेंगी बल्कि ह्यूमन स्पेश मिशन को भी बड़ा लाभ मिलेगा. इन 6 चीजों पर होगा रिसर्च का फोकस . मानव शरीर की कार्यप्रणाली (Human Physiology) . हृदय और नर्वस सिस्टम का नियंत्रण . माइक्रोग्रैविटी में हड्डियों और मांसपेशियों का स्वास्थ्य . माइक्रोबायोम और इम्यून सिस्टम . जीन और बायोमार्कर . मानसिक और व्यवहारिक स्वास्थ्य समझौता साइन करते हुए एम्स नई दिल्ली के डायरेक्टर डॉ. एम श्रीनिवास ने कहा कि यह सहयोग दोनों संस्थानों के लिए एक नया और रोमांचक अध्याय है. ‘यह समझौता हमें स्पेस मेडिसिन के क्षेत्र में साथ मिलकर आगे बढ़ने की गति देगा. AIIMS और ISRO के बीच सहयोग से मरीजों, देश और पूरी मानवता को लाभ मिलेगा. जैसे-जैसे भारत 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, हमें उम्मीद है कि हम स्पेस मेडिसिन में भी विश्वगुरु बनेंगे.’ वहीं इस मौके पर इसरो के चेयरमैन वी नारायणन ने याद करते हुए कहा कि शुरुआत में रॉकेट और उपकरण साइकिल और बैलगाड़ियों से ले जाए जाते थे, लेकिन आज भारत अंतरिक्ष तकनीक में दुनिया की एक प्रमुख शक्ति बन चुका है. AIIMS जैसे प्रमुख मेडिकल और रिसर्च संस्थानों के साथ साझेदारी भविष्य में भारत की मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता को और मजबूत करेगी. वहीं ह्यूमन स्पेस फ्लाइट सेंटर के निदेशक दिनेश कुमार सिंह ने कहा कि यह साझेदारी भारत की चिकित्सा और अंतरिक्ष तकनीक की ताकत को एक साथ जोड़ने में मदद करेगी. इससे मानव अंतरिक्ष उड़ान से जुड़ी बायोमेडिकल रिसर्च में नई प्रगति का रास्ता खुलेगा. इस दौरान रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन, एम्स स्टूडेंट एसोसिएशन और सोसायटी ऑफ यंग साइंटिस्ट शामिल हुए. About the Author प्रिया गौतमSenior Correspondent प्रिया गौतम Hindi.News18.com में बतौर सीनियर हेल्थ रिपोर्टर काम कर रही हैं. इन्हें पिछले 14 साल से फील्ड में रिर्पोर्टिंग का अनुभव प्राप्त है. इससे पहले ये हिंदुस्तान दिल्ली, अमर उजाला की कई लोकेशन…और पढ़ें First Published : March 10, 2026, 11:36 IST
फर्नीचर का राजा और दवा का खजाना है शीशम! पत्ते-बीज भी आते हैं कई रोगों में काम, जानें फायदे

Last Updated:March 10, 2026, 11:36 IST Sheesham ke Fayde: शीशम का पेड़ सिर्फ मजबूत लकड़ी के लिए ही नहीं बल्कि अपने औषधीय गुणों के लिए भी जाना जाता है. आयुर्वेद के अनुसार इसके पत्ते, बीज और लकड़ी से निकलने वाला तेल कई बीमारियों में उपयोगी माना जाता है. पेट की समस्याओं, त्वचा रोग और अनीमिया जैसी परेशानियों में इसके उपयोग से राहत मिल सकती है. इसके साथ ही शीशम की खेती किसानों के लिए भी कमाई का अच्छा जरिया बन सकती है क्योंकि इसकी लकड़ी की बाजार में काफी मांग रहती है. जानिए शीशम के फायदे, औषधीय उपयोग और इसकी खेती से जुड़ी पूरी जानकारी. Sheesham Tree Benefits: मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में शीशम का पेड़ आसानी से देखने को मिल जाता है. आमतौर पर लोग इसे सिर्फ मजबूत लकड़ी के लिए जानते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह पेड़ औषधीय गुणों से भी भरपूर होता है. दरअसल शीशम का इस्तेमाल सिर्फ फर्नीचर या घर बनाने में ही नहीं, बल्कि आयुर्वेद में भी कई समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है. इसके पत्ते, बीज, जड़ और लकड़ी तक कई तरह से उपयोगी माने जाते हैं. मजबूत लकड़ी की वजह से रहती है भारी मांगआयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ. विपिन सिंह बताते हैं कि शीशम का पेड़ देश के लगभग हर हिस्से में पाया जाता है. इसकी लकड़ी काफी मजबूत और टिकाऊ होती है. इसी वजह से इसका इस्तेमाल दरवाजे, खिड़कियां, फर्नीचर और सजावटी लकड़ी के सामान बनाने में बड़े पैमाने पर किया जाता है. शीशम की लकड़ी की खास बात यह है कि इस पर पानी और दीमक का असर बहुत कम होता है, इसलिए बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है. कई बीमारियों में फायदेमंद माना जाता हैडॉ. विपिन सिंह के मुताबिक शीशम में कई तरह के औषधीय गुण भी पाए जाते हैं. इसके बीज और लकड़ी से निकलने वाले तेल का उपयोग पेट से जुड़ी कई समस्याओं में किया जाता है. आयुर्वेद के अनुसार यह दस्त, हैजा और बवासीर जैसी परेशानियों में राहत देने में मदद कर सकता है. इसके अलावा बीजों का चूर्ण पेट में होने वाले अल्सर में भी लाभकारी माना जाता है. पत्ते भी शरीर के लिए फायदेमंदशीशम के पत्ते भी स्वास्थ्य के लिए काफी उपयोगी माने जाते हैं. डॉ. विपिन सिंह बताते हैं कि इसके पत्तों का सेवन करने से शरीर को पोषण मिलता है और अनीमिया जैसी समस्या में भी फायदा हो सकता है. इसके अलावा शीशम का तेल घाव भरने में मदद करता है. अगर त्वचा पर खुजली, जलन या ड्राइनेस की समस्या हो तो इसका तेल लगाने से आराम मिल सकता है. इस्तेमाल करना भी है बेहद आसानशीशम का इस्तेमाल करना ज्यादा मुश्किल नहीं है. इसके ताजे पत्तों को चबाकर निगलने से भी फायदा मिल सकता है. इसके अलावा बीजों का चूर्ण बनाकर सेवन किया जा सकता है. वहीं लकड़ी से निकाला गया तेल भी कई समस्याओं में उपयोग किया जाता है. किसानों के लिए भी कमाई का अच्छा जरियाऔषधीय गुणों के साथ-साथ शीशम किसानों के लिए कमाई का अच्छा विकल्प भी बन सकता है. इसकी लकड़ी की मांग फर्नीचर इंडस्ट्री और निर्माण कार्यों में हमेशा बनी रहती है. एक बार शीशम का पौधा लगाने के बाद यह करीब 10 से 12 साल में पूरी तरह तैयार हो जाता है. किसान चाहें तो इसकी शाखाओं को काटकर हर 4 से 5 साल में भी लकड़ी बेच सकते हैं, जिससे समय-समय पर अच्छी आमदनी होती रहती है. एक हेक्टेयर में लग सकते हैं 500 पौधेकृषि विशेषज्ञों के अनुसार एक हेक्टेयर जमीन में लगभग 400 से 500 शीशम के पौधे लगाए जा सकते हैं. जब पेड़ पूरी तरह विकसित हो जाता है तो एक पेड़ से करीब 3 से 5 क्यूबिक फीट लकड़ी मिल सकती है. इसी वजह से शीशम की खेती किसानों के लिए लंबे समय में अच्छा मुनाफा देने वाला विकल्प बन सकती है. About the Author Shweta Singh Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें Location : Sidhi,Madhya Pradesh First Published : March 10, 2026, 11:36 IST
Lebanon Families Shelter Schools | Israel-Iran War Photos

तेल अवीव/तेहरान6 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी जंग का आज 11वां दिन है। युद्ध का असर अब मैदानों से लेकर आम लोगों की जिंदगी तक दिखने लगा है। इसी बीच एशियन कप से बाहर होने के बाद ईरान की महिला फुटबॉल टीम की पांच खिलाड़ियों को ऑस्ट्रेलिया ने मानवीय आधार पर वीजा देकर अपने देश में रहने की अनुमति दे दी है। पिछले हफ्ते दक्षिण कोरिया के खिलाफ मैच से पहले ईरानी टीम ने राष्ट्रगान नहीं गाया था। इसे सरकार के खिलाफ विरोध के तौर पर देखा गया, जिसके बाद खिलाड़ियों को गद्दार बताया जाने लगा और सख्त सजा देने की मांग उठने लगी। हालात बिगड़ते देख ऑस्ट्रेलिया ने पांच खिलाड़ियों को मानवीय वीजा देकर सुरक्षा देने का फैसला किया। रविवार को गोल्ड कोस्ट स्टेडियम के बाहर सैकड़ों लोग खिलाड़ियों के समर्थन में जुटे। प्रदर्शनकारियों ने ‘हमारी बेटियों को बचाओ’ के नारे लगाए और खिलाड़ियों को सुरक्षित रखने की मांग की। उधर, युद्ध का असर पूरे मिडिल ईस्ट और उससे जुड़े देशों में दिखाई दे रहा है। बीते 10 दिनों में इस संघर्ष ने 10 से ज्यादा देशों के लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी बदल दी है, कहीं बमबारी, कहीं विरोध प्रदर्शन और कहीं भय का माहौल। ईरान जंग के 10 दिन 35 तस्वीरों में देखें… ऑस्ट्रेलिया में ईरानी महिला फुटबॉल टीम एशियन कप के पहले मैच के दौरान 2 मार्च को ईरान की खिलाड़ी राष्ट्रीय गान के दौरान लाइन में खड़ी रहीं, लेकिन उन्होंने गाना नहीं गाया। इसके बाद इन्हें गद्दार करार दिया गया। ऑस्ट्रेलिया के गृह मंत्री टोनी बर्क उन 5 महिला खिलाड़ियों के साथ, जिन्हें मानवीय आधार पर ऑस्ट्रेलिया का वीजा दिया गया है। ऑस्ट्रेलिया में रविवार को गोल्ड कोस्ट स्टेडियम के बाहर लोगों ने टीम के समर्थन में “सेव अवर गर्ल्स” के नारे लगाए। जंग की शुरुआत- इजराइल का ईरान पर हमला तेहरान में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के आवास के तबाह होने की सैटेलाइट तस्वीर। ईरान के तेहरान में 28 फरवरी को ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद एक महिला उनकी तस्वीर पकड़कर रोती हुई। इजराइल के हमले से ईरान में कई लोग इमारतों के मलबे के नीचे आ गए। जिसके बाद मलबे में दबे लोगों को रेस्क्यू किया गया। इजराइल के ईरान की राजधानी तेहरान में तेल भंडार पर हमले के बाद भीषण आग लगी, जिसके बाद धुएं का गुबार कई फीट ऊंचाई तक फैल गया। ईरान में मातम ईरान के मिनाब में एक प्राइमरी स्कूल पर हमले के बाद पीड़ितों के अंतिम संस्कार में लोग शामिल हुए। इजराइल के हमलों में मरने वालो के जनाजे में उनके परिवार वाले रोते हुए। जैनब साहेबी नाम की दो साल की बच्ची को कंधा देती ईरानी महिलाएं। जैनब की मौत अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के दौरान तेहरान में हुए हमले में हुई थी। जैनब साहेबी को कंधा देते वक्त कई महिलाएं फूट फूटकर रो रहीं थीं। जैनब साहेबी की कब्र को फूलों से सजाया गया और उस पर ईरान का झंडा रखा गया। तेहरान में गांधी अस्पताल में हेल्थ केयर वर्कर्स ने ईरान का झंडा लगाकर प्रदर्शन किया। इस अस्पताल पर भी एयर स्ट्राइक हुई थी। ईरान की राजधानी तेहरान में लोग रक्त दान कर रहे हैं। ईरान के जवाबी हमले इजराइल के तेल अवीव में28 फरवरी को ईरान की तरफ से दागीं गईं मिसाइलों के बाद हुआ धमाका। ईरान ने इजराइल के शहर रिशोन लेजियम में क्लस्टर बम गिराए। क्लस्टर बम छोटे-छोटे बमो का समूह होता है ईरान ने इजराइल पर क्लस्टर बम गिराया। जिससे बच्चों के खेल के मैदान समेत कई इलाकों को नुकसान पहुंचा। तस्वीरों में प्लेग्राउंट पूरी तरह टूटा और बिखरा नजर आ रहा है। ईरान के हमलों के बाद इजराइल की राजधानी तेल अवीव में लोगों को बंकर में शिफ्ट किया गया। ईरान से वापस लौटे ईरान से वापस लौटे थाई नागरिक सोमवार को बैंकॉक पहुंचे। इनमें 5 साल का मोहम्मद रजावी भी था, जो ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की तस्वीर पकड़े हुए दिखाई दिया। ईरान ने अमेरिकी बेसों को बनाया टारगेट ईरान ने अबू धाबी में अमेरिकी बेस पर हमला किया, जिसके बाद अफरा-तफरी मच गईं। सीरिया के कामिशली में ईरान के साथ अमेरिका-इजरायल संघर्ष के बीच, कामिशली इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास गिरी मिसाइल को एक बच्चा देखता हुआ। इजराइली हमलों से उजड़े लेबनानी परिवार दक्षिणी लेबनान में इजराइल के हवाई हमलों के बाद कई परिवारों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं। ये विस्थापित लोग अब बेरूत के एक स्कूल में बनाए गए अस्थायी शेल्टर में रह रहे हैं। इजराइल के हमले के बाद लेबनान की राजधानी बेरूत में लोगों के घर तबाह हो गए हैं, इमारतें टूटी हुई नजर आ रही हैं, हर तरफ मलबा ही मलबा दिख रहा है। लेबनान में इजराइल के हमले के बाद लोग सड़को पर रहने को मजबूर हैं। लेबनान की राजधानी बेरूत में वॉलंटियर्स ने कम्युनिटी किचन में बेघर लोगों और रिफ्यूजी को खाना बांटा। मारे गए अमेरिकी सैनिकों को श्रद्धांजलि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने शनिवार को डोवर एयरफोर्स बेस पर 6 शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। ईरान के तेहरान में काली बारिश तेहरान में काली बारिश हुई। यहां पानी काला दिखाई दे रहा था और उसमें तेल मिला हुआ था। ईरान में नए सुप्रीम लीडर चुने गए ईरान में अयातुल्ला अली खामेनेई को बेटे मुजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर चुना गया, जिसके बाद कई ईरानी लोगों ने समर्थन किया। अमेरिका में प्रदर्शन न्यूयॉर्क सिटी में रविवार को बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर ईरान पर हो रहे अमेरिकी और इजराइली हमलों को रोकने और तत्काल युद्धविराम की मांग की। अमेरिका और इजराइल के संघर्ष के बीच, शनिवार को लॉस एंजिल्स, कैलिफोर्निया में ईरानी नेतृत्व के खिलाफ एक रैली निकाली गई। अमेरिका में ईरानी नेतृत्व के खिलाफ एक रैली के दौरान अपनी दोस्त को पकड़े हुए महिला। ब्रिटेन में महिलाओं का मार्च ईरान समर्थक महिलाओं ने शनिवार को ब्रिटेन में मार्च निकाला और बमबारी रोकने की मांग की। ये महिलाएं ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई की तस्वीर पकड़े हुई थीं। ईरान समर्थकों ने पेरिस में भी आइफिल टावर के सामने प्रदर्शन किया और
Health Tips: मौसम बदलते ही बढ़ा जुकाम-बुखार का खतरा, एक्सपर्ट से जानें कैसे रखें खुद का ख्याल

Last Updated:March 10, 2026, 11:34 IST Health Tips: मेडिकल कॉलेज सुल्तानपुर के आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉक्टर संतोष कुमार श्रीवास्तव बताते है कि अगर आपको वसंत के इस मौसम में जुकाम और बुखार हो रहा है तो काली मिर्च, सोंठ और पिपल को मिक्सर में अच्छी तरह पीसकर पाउडर तैयार कर लें. इस पाउडर को चाय या काढ़े के माध्यम से सुबह और शाम कम से कम 5 से 6 दिन तक पिएं. इससे आपका इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत होगा और जुकाम और बुखार से राहत मिलेगी. सर्दी का मौसम विदा ले रहा है और गर्मी का मौसम दस्तक देने लगा है. दिन में तेज धूप और रात में ठंड का अनुभव हो रहा है. ऐसे में रात में बाइक से यात्रा करने वालों को ठंडी हवा से परेशानी हो रही है. सुबह और शाम की ठंड और दिन की गर्मी की वजह से लोगों का स्वास्थ्य बिगड़ रहा है, जिससे उन्हें जुकाम और बुखार तेजी से हो रहा है. यदि आप भी इस बदलते मौसम का शिकार हो गए है और आपको जुकाम और बुखार हो गया है तो हम आयुर्वेदिक चिकित्सक से जानेंगे कि इसे ठीक करने के क्या घरेलू उपाय है और इस तरह के मौसम में खुद को कैसे बचाएं. मेडिकल कॉलेज सुल्तानपुर के आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉक्टर संतोष कुमार श्रीवास्तव बताते है कि अगर आपको वसंत के इस मौसम में जुकाम और बुखार हो रहा है तो काली मिर्च, सोंठ और पिपल को मिक्सर में अच्छी तरह पीसकर पाउडर तैयार कर लें. इस पाउडर को चाय या काढ़े के माध्यम से सुबह और शाम कम से कम 5 से 6 दिन तक पिएं. इससे आपका इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत होगा और जुकाम और बुखार से राहत मिलेगी. अगर आप इसे शहद के साथ लेते है तो यह और जल्दी फायदा करेगा. इस वजह से हो रहा जुकाम बुखार इस समय सर्दी का मौसम समाप्त हो रहा है. लेकिन दिन में तेज धूप से तापमान बढ़ गया है. जिससे लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है. दिन में गर्मी और सुबह-शाम की ठंड की वजह से जुकाम और बुखार की समस्या बढ़ रही है. सुबह शाम पहनें गर्म कपड़ा अगर आप सुबह और शाम बाहर टहल रहे है या बाइक चला रहे है तो अपने कपड़ों का ध्यान रखें. थोड़ी सी धूप के बाद लोग गर्म कपड़े कम कर देते है और गर्मियों के कपड़े पहन लेते है. जब तक लगातार कुछ दिनों तक धूप न निकलने लगे, तब तक सर्दी के कपड़े पहनते रहें. यह भी है महत्वपूर्ण इन उपायों के अलावा, अगर आप गिलोय का रस हल्के गुनगुने पानी के साथ सेवन करते है तो इससे भी जुकाम और बुखार से राहत मिलेगी. अदरक का रस भी सर्दी और जुकाम से राहत देता है. ये उपाय शरीर को किसी साइड इफेक्ट से बचाते है और सर्दी में फायदा देते है. About the Author Manish Rai काशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. अभी लोकल18 यूपी के कॉर्डिनेटर की…और पढ़ें Location : Sultanpur,Uttar Pradesh First Published : March 10, 2026, 11:34 IST
वेट लॉस सर्जरी क्या है? किस तरीके से घटाया जा सकता है वजह, इसमें कितना रिस्क और कितना है खर्च

Last Updated:March 10, 2026, 11:16 IST Weight Loss Surgery: जब डाइट और एक्सरसाइज से वजन कम नहीं होता, तब बेरिएट्रिक सर्जरी एक प्रभावी विकल्प बनती है. यह सर्जरी पाचन तंत्र में बदलाव कर शरीर की कैलोरी अवशोषित करने की क्षमता को कम करती है, जिससे न केवल वजन घटता है, बल्कि डायबिटीज और बीपी जैसी बीमारियों में भी सुधार होता है. हालांकि इस सर्जरी के कुछ रिस्क भी होते हैं. वेट लॉस सर्जरी के जरिए वजन 30 से 40% तक कम हो सकता है. All About Weight Loss Surgery: मोटापा एक गंभीर समस्या है और कई बीमारियों की जड़ है. आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और अनहेल्दी खान-पान के कारण मोटापा लगातार बढ़ता जा रहा है. जब डाइट, एक्सरसाइज और दवाइयां वजन कम करने में फेल हो जाती हैं, तब वेट लॉस सर्जरी आखिरी विकल्प होता है. मेडिकल की भाषा में इसे बेरिएट्रिक सर्जरी (Bariatric Surgery) कहा जाता है. यह एक सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य शरीर के मेटाबॉलिज्म में सुधार करना और मोटापे से जुड़ी गंभीर बीमारियों जैसे टाइप 2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और स्लीप एपनिया के जोखिम को कम करना है. यह सर्जरी उन लोगों के लिए सुझाई जाती है, जिनका बीएमआई 35 या 40 से अधिक होता है. नई दिल्ली के सर गंगाराम सिटी हॉस्पिटल के प्लास्टिक एंड कॉस्मेटिक सर्जन डॉ. रमन शर्मा ने News18 को बताया कि बेरिएट्रिक सर्जरी एक सर्जिकल प्रक्रिया है, जो आपके पाचन तंत्र में बदलाव करके वजन घटाने में मदद करती है. इसके मुख्य रूप से दो तरीके होते हैं. पहला पेट के आकार को छोटा करना, जिससे आप एक बार में कम खाना खा सकें. दूसरा छोटी आंत के एक हिस्से को बायपास करना. इससे शरीर कम कैलोरी और पोषक तत्वों को अवशोषित करे. सबसे सामान्य प्रक्रियाओं में गैस्ट्रिक स्लीव और गैस्ट्रिक बायपास शामिल हैं. यह सर्जरी शरीर में भूख बढ़ाने वाले हार्मोन घ्रेलिन के स्तर को भी कम करती है, जिससे व्यक्ति को बार-बार भूख नहीं लगती है. इससे लोगों का वजन तेजी से कम होने लगता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. डॉक्टर ने बताया कि इस सर्जरी का सबसे बड़ा फायदा वजन कम होना है. सर्जरी के बाद पहले 12 से 18 महीनों में मरीज अपने अतिरिक्त शरीर के वजन को 30% से 40% तक कम कर सकता है. वजन कम होने के साथ ही मेटाबॉलिक स्वास्थ्य में जबरदस्त सुधार होता है. कई मामलों में देखा गया है कि सर्जरी के कुछ ही दिनों बाद मरीजों के डायबिटीज कंट्रोल में पॉजिटिव असर देखा गया और उनका ब्लड प्रेशर सामान्य होने लगा. इसके अलावा यह सर्जरी जोड़ों के दर्द को कम करने, हार्ट डिजीज के जोखिम को घटाने और व्यक्ति के आत्मविश्वास व लाइफ क्वालिटी को बढ़ाने में बेहद मददगार साबित होती है. प्लास्टिक सर्जन के मुताबिक किसी भी सर्जरी की तरह वेट लॉस सर्जरी में भी कुछ रिस्क होते हैं. सर्जरी के बाद इंफेक्शन का रिस्क बढ़ जाता है. ऐसे में लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है और कुछ दवाएं भी दी जाती हैं. लॉन्ग टर्म में शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो सकती है, क्योंकि शरीर खाने को पहले की तरह अवशोषित नहीं कर पाता है. कुछ मरीजों में डंपिंग सिंड्रोम, गॉलब्लैडर स्टोन या हर्निया की समस्या हो सकती है. हालांकि आधुनिक लैप्रोस्कोपिक और रोबोटिक तकनीक के आने से ये रिस्क अब 1% से भी कम रह गए हैं. यह सर्जरी अब काफी सुरक्षित मानी जाती है. एक्सपर्ट की मानें तो भारत में वेट लॉस सर्जरी का खर्च अस्पताल, शहर, सर्जन के अनुभव और टेक्नोलॉजी पर निर्भर करता है. आमतौर पर इस सर्जरी का खर्च 2 लाख से 6 लाख रुपये के आसपास होता है. अच्छी बात यह है कि अब कई स्वास्थ्य बीमा कंपनियां बेरिएट्रिक सर्जरी को कवर करती हैं, लेकिन ऐसा तभी होता है, जब कोई व्यक्ति यह सर्जरी मेडिकल कंडीशंस के कारण करवाता है. आजकल सरकारी अस्पतालों में भी यह सुविधा कम खर्च पर उपलब्ध है. यह समझना भी जरूरी है कि इस सर्जरी के बाद आपको अपना वजन कंट्रोल रखने के लिए लाइफस्टाइल, खानपान और एक्सरसाइज का ध्यान रखना होगा. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : March 10, 2026, 11:16 IST
क्या बैंगन, शिमला मिर्च और पत्तागोभी में नुकसानदायक लेड पाया जाता है? ये सेफ्टी टिप्स जो आपको करने चाहिए फॉलो

Last Updated:March 10, 2026, 10:56 IST Health Tips: सब्जियों को अक्सर हेल्दी डाइट का एक ज़रूरी हिस्सा माना जाता है. लेकिन क्या वे हमेशा सेफ़ होती हैं? हाल ही में हुई एक स्टडी ने गंभीर चिंताएं जताई हैं. बेंगलुरु और उसके आस-पास के बाज़ारों से इकट्ठा किए गए 72 सब्जियों के सैंपल में से 19 में लेड पाया गया, जो एक ज़हरीला हेवी मेटल है और इंसानी सेहत के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है. Health Tips : सब्जियों के सैंपल का एनालिसिस फ़ूड सेफ़्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (FSSAI) की देखरेख वाली लैब में किया गया. क्वेश्चनेयर में 11 हेवी मेटल, 3 ज़रूरी मिनरल और लगभग 230 तरह के पेस्टिसाइड का टेस्ट किया गया. जिन सब्जियों में सेफ़ लेवल से ज़्यादा लेड पाया गया, उनमें बैंगन में सबसे ज़्यादा कंसंट्रेशन था. दूसरी सब्जियों में लौकी, मूली, चुकंदर, पत्तागोभी, शिमला मिर्च, मिर्च, खीरा, जूट के पत्ते, नोल खोल और कद्दू शामिल थे. लेड टेस्टिंग के अलावा, 70 सब्जियों के सैंपल का पेस्टिसाइड के लिए भी टेस्ट किया गया। चिंता की बात यह है कि इनमें से 10 सैंपल में पेस्टिसाइड का लेवल तय लिमिट से ज़्यादा था, जिससे फ़ूड सेफ़्टी को लेकर और चिंताएं बढ़ गईं. अनुभवी लोगों ने बताया कि जब लेड मिट्टी या पानी को गंदा करता है, तो पौधे इसे अपनी सब्ज़ियों के ज़रिए सोख लेते हैं. एक बार निगल जाने पर, यह मेटल सब्ज़ियों के बीजों का हिस्सा बन जाता है, जिसका मतलब है कि सिर्फ़ धोने या छीलने से इसे हटाया नहीं जा सकता. Add News18 as Preferred Source on Google लेड इंसानों के लिए बहुत ज़हरीला होता है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन (WHO) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 में दुनिया भर में लेड के संपर्क में आने से 1.5 मिलियन से ज़्यादा लोग प्रभावित हुए, जिनमें से कई दिल की बीमारियों से जुड़े थे। बच्चों को खास तौर पर खतरा होता है, क्योंकि लेड का ज़्यादा लेवल नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुँचा सकता है, दिमाग के विकास में रुकावट डाल सकता है और सोचने-समझने की क्षमता को कम कर सकता है. लेड के संपर्क को कम करने के कुछ सेफ़्टी उपाय. सब्ज़ियों से अंदर की गंदगी को पूरी तरह से हटाना हमेशा मुमकिन नहीं होता, लेकिन उन्हें अच्छी तरह धोने से ऊपर की धूल और कुछ नुकसानदायक बचे हुए हिस्से हटाने में मदद मिल सकती है. माता-पिता को यह भी पक्का करना चाहिए कि उनके बच्चों को आयरन, कैल्शियम और विटामिन C से भरपूर बैलेंस्ड डाइट मिले, क्योंकि ये न्यूट्रिएंट्स शरीर पर लेड के नुकसानदायक असर को कम करने में मदद करते हैं. रेगुलर हेल्थ चेकअप और समय पर टेस्टिंग बहुत ज़रूरी है, खासकर अगर खराब खाना या पानी पीने की संभावना हो. First Published : March 10, 2026, 10:56 IST
किसान की बेटी की शादी में पहुंचे राहुल गांधी:सोनीपत में बालूशाही देखकर बोले- ये क्या है, चूरमा खाया, ब्याह के गीत सुने

कांग्रेस नेता राहुल गांधी मंगलवार सुबह सोनीपत के मदीना गांव में एक किसान की बेटी की शादी में शामिल होने पहुंचे। ये वही किसान संजय मलिक हैं, जिनके खेत में राहुल ने तीन साल पहले ट्रैक्टर चलाया था। साथ ही धान रोपाई की थी। सुबह करीब सवा 10 बजे जैसे ही राहुल गांव में अपनी कार से उतरे उनके हाथ से मोबाइल गिर गया। सिक्योरिटी टीम के साथ राहुल ने झुककर उसे उठाया। यहां, रोहतक सांसद दीपेंद्र हुड्डा समेत कई नेता और मेजबान घराती बुके लेकर स्वागत के लिए खड़े थे। राहुल का हरियाणवी पगड़ी पहना कर स्वागत किया गया। जब राहुल शादी वाले घर में जाने लगे तो दरवाजे पर खड़े युवकों ने जोर से कहा- राहुल भाई राम-राम। राहुल हाथ जोड़कर मुस्कराए और आगे बढ़ गए। राहुल करीब एक घंटे तक रुके। इस दौरान दूध के साथ चूरमा खाया। किसान की बेटी के हाथों मिस्सी रोटी भी खाई। महिलाओं के ब्याह के गीत सुने। अब देखिए राहुल के दौरे से जुड़े PHOTOS… मदीना में सुबह 10ः10 बजे पहुंचे, एक घंटा रुके किसान संजय की बेटी तनु की शादी में राहुल सुबह 10 बजकर 10 मिनट पर पहुंचे। यहां करीब एक घंटा रुके। बीकॉम पास तनु की बारात मंगलवार शाम को रोहतक के सुंदरनगर से आएगी। तनु की शादी सुनील के साथ तय है। एमए (इंग्लिश) पास सुनील क्रिकेटर भी हैं। तुन की छोटी बहन सारिता और भाई दीपक हैं। 3 पॉइंट में पढ़िए राहुल के दौरे की खास बातें… उम्मीद नहीं थी राहुल आएंगे किसान संजय 25 फरवरी को बड़े भाई और गांव के सरपंच के साथ दिल्ली में राहुल गांधी को शादी का न्योता देकर आए थे। भांजी कीर्ति जाखड़ बोलीं- हमें उम्मीद नहीं थी कि राहुल गांधी आएंगे। अचानक उनके आने का कार्यक्रम पता चला। उस वक्त हम शगुन के गीत गा रहीं थी। सारे मेहमान राहुल को देखकर खुश हो गए। राहुल का पूरा मान-सम्मान किया और हरियाणवी सम्मान का प्रतीक पगड़ी पहनाई। राहुल ने काफी देर सिर पर पगड़ी रखी। गिफ्ट में 55 इंच की LED टीवी और शगुन दिया राहुल गांधी की ओर से एक दिन पहले ही शादी के गिफ्ट के तौर पर 55 इंच की LED टीवी पहुंचाया गया था। मंगलवार को उन्होंने लिफाफे में तनु को शगुन भी दिया। तनु की मम्मी सुनीता ने कहा कि उनके लिए यही बहुत बड़ी बात है कि राहुल हमारे यहां आए। तनु से पूछा- कहां शादी कर रहे हो, क्या पढ़ाई कर रहे तुन ने बताया कि राहुल ने मुझे पूछा- कहां शादी हो रही है। क्या पढ़ाई कर रहे हो। पहले दूध के साथ चूरमा खाया। फिर टैंट में गए, जहां प्रीति-भोज का इंतजाम था। इस दौरान राहुल ने तनु के हाथों से मिस्सी रोटी का कोर भी खाया। राहुल ने बालूशाही व लाडू (लड्डू) खाया। राहुल ने कहा-खुश रहना। दामण-कुर्ता के बारे में भी जानकारी ली। इस दौरान उन्हें शादी समारोह में बन रही जलेबी भी देखी। अपने हाथ से दीपेंद्र हुड्डा और तनु के पिता संजय को जलेबी खिलाई। दीपेंद्र बोले- राहुल गांधी ने अपना वचन निभाया रोहतक सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि राहुल गांधी ने साधारण किसान की बेटी की शादी में पहुंचकर अपना वचन निभाया है। धनाढ्य लोगों की शादी में तो सभी नेता पहुंच जाते हैं, लेकिन एक साधारण किसान के घर पहुंचकर राहुल ने अपनी सोच दिखाई है। दीपेंद्र ने बताया कि संजय भाई सिर्फ आधा एकड़ जमीन के मालिक हैं। राहुल ने उनसे खेती-बाड़ी पर भी चर्चा की। कहने लगे कि आजकल खेतों में पेस्टिसाइड्स ज्यादा डालने लगे हैं, जिससे खान-पान अच्छा नहीं रहा है। राहुल की पोस्ट- परिवार वाली मोहब्बत और बहुत ही स्वादिष्ट खाना शादी समारोह से लौटने के बाद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया एकाउंट पर फोटो शेयर करते हुए लिखा- ”हरियाणा में किसान भाई संजय मलिक जी की बेटी, तनु की शादी में उनके निमंत्रण पर पहुंचा। बहुत आत्मीय स्वागत, परिवार वाली मोहब्बत और बहुत ही स्वादिष्ट खाना – वो तो होना ही था, अन्नदाता के घर का भोज जो था। नवविवाहित दंपत्ति को ढेर सारा प्यार और शुभकामनाएं। उनके खुशहाल वैवाहिक जीवन की कामना करता हूं। संजय जी और पूरे परिवार को बहुत बहुत बधाई।’ अब देखिए राहुल के 3 साल पुराने दौरे के PHOTOS… अब पढ़िए…गांव से कैसे हुआ राहुल का संपर्क







