Rajasthan Economics Lecturer Recruitment | RPSC Posts Empty

सरकारी स्कूलों में प्राध्यापक (इकोनॉमिक्स) के 35 पदों में से 6 पद खाली रहेंगे। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) ने भर्ती प्रक्रिया पूरी कर अंतिम परिणाम जारी कर दिया। इसमें केवल 29 अभ्यर्थी ही मुख्य मेरिट में शामिल हो सके। . इसका कारण कैंडिडेट्स की ओर से न्यूनतम मार्क्स भी हासिल नहीं कर पाना रहा। इकोनॉमिक्स की परीक्षा 30 जून 2025 को हुई थी। इसके लिए 7,274 कैंडिडेट्स रजिस्टर्ड थे। इनमें से 2,655 उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए थे। खास बात ये रही कि परीक्षा में एसटी वर्ग किसी का भी सलेक्शन नहीं हुआ है। इसमें सभी पद खाली रहे है। आयोग ने 12 कैंडिडेट्स की आरक्षित सूची भी जारी की है। जिनको इन 29 कैंडिडेट्स में से अनुपस्थित रहने पर मौका मिलेगा। माध्यमिक शिक्षा विभाग के लिए आयोजित प्राध्यापक एवं कोच (स्कूल शिक्षा) प्रतियोगी परीक्षा-2025/2026 के इकोनॉमिक्स विषय के अभ्यर्थियों की पात्रता जांच के लिए आयोग 20 जनवरी 2026 को विचारित सूची जारी की थी। इसके बाद पात्रता जांच और डॉक्युूेंटस वेरिफिकेशन किया गया। अब आयोग ने सफल कैंडिडेट्स की मुख्य सूची जारी की है। RPSC ने 2202 पदों के लिए 25 अक्टूबर 2024 को वैकेंसी निकाली थी। 40 प्रतिशत मिनिमम मार्क्स लाने थे पात्रता जांच और दस्तावेज सत्यापन के बाद विज्ञापित पदों के विरुद्ध केवल 29 अभ्यर्थी को मेरिट क्रमांक के अनुसार मुख्य सूची में सफल घोषित किया। कटऑफ अंक नहीं मिलने के कारण कईं सीटें भी खाली रहीं। परीक्षा में पेपर-1 कुल 150 और पेपर-2 कुल 300 अंकों का था, दोनों पेपर के लिए न्यूनतम मार्क्स 40 प्रतिशत निर्धारित थे। राजस्थान में 2,202 पदों की भर्ती प्रक्रिया के लिए 6 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने आवेदन किया। परीक्षा के लिए पंद्रह जिलों में 909 परीक्षा केंद्र स्थापित किए गए थे। RPSC ने भर्ती प्रक्रिया पूरी कर अंतिम परिणाम जारी कर दिया। ये 2 खबरें भी पढ़िए…
गलतियों पर खुद को न कोसें, तनाव हंसी में उड़ाएं:मनोवैज्ञानिक का दावा- खुद की गलतियों पर हंसना लोगों को आपसे मानवीय रूप से जोड़ता है; इससे आत्मविश्वास मजबूत होगा

अक्सर सार्वजनिक जगहों पर छोटी गलतियों पर भी हम शर्मिंदा हो जाते हैं। चाहे कांच के दरवाजे से टकराना हो या योग क्लास में अचानक फिसलना, हमारा पहला रिएक्शन खुद को छिपाना होता है। कॉर्नेल यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर ओवुल सेजर की रिसर्च ये सोच बदल रही हैै। शोध के मुताबिक ऐसे पलों में शर्मिंदा होने के बजाय खुद पर हंसें। यह आपको दूसरों की नजर में अधिक मिलनसार, सक्षम और सच्चा बनाता है। अपनी गलती पर मुस्कुराना माहौल को ‘जजमेंट’ से हटाकर ‘सहजता’ की ओर मोड़ देता है। यह आत्म-स्वीकृति का संकेत है और दुनिया अपनी कमियों को मुस्कुराकर अपनाने वालों को पसंद करती है। गलतियों को सहजता से स्वीकार करना ही असली आत्मविश्वास है रिसर्च के मुताबिक जो लोग अपनी गलतियों पर मुस्कुराते हैं, वे दुनिया की नजर में अधिक खुशमिजाज और काबिल दिखते हैं। वहीं, दूसरी ओर जरूरत से ज्यादा शर्मिंदगी आपकी असुरक्षा और ‘लोग क्या सोचेंगे’ वाले डर को उजागर करती है। रिसर्च ये भी कहती है कि खुद का मजाक उड़ाना दरअसल दूसरों के लिए आपसे जुड़ने का निमंत्रण है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, यह हंसी न केवल माहौल का तनाव कम करती है, बल्कि आसपास के लोगों को भी आपको सहज महसूस कराने की औपचारिकता से मुक्त कर देती है। खुद को कसूरवार समझना छोड़ें, दुनिया को आपकी कोई परवाह नहीं अक्सर हम ‘स्पॉटलाइट इफेक्ट’ के भ्रम में जीते हैं, जहां हमें लगता है कि दुनिया की नजरें सिर्फ हमारी गलतियों पर टिकी हैं। इसकी हकीकत कुछ और है। दरअसल, लोग अपनी उलझनों में इतने व्यस्त हैं कि उन्हें आपकी छोटी भूलों की उतनी परवाह नहीं होती, जितनी आप मान बैठते हैं। प्रोफेसर सेजर की सलाह है कि अगली बार किसी सामाजिक चूक पर खुद को कोसने के बजाय बस यह पूछें ‘क्या इससे किसी का नुकसान हुआ?’ यदि जवाब ‘नहीं’ है, तो ग्लानि छोड़िए और बस मुस्कुरा दीजिए। यह सहज बदलाव न केवल आपके आत्मविश्वास को मजबूत करेगा, बल्कि आपको दूसरों की नजर में और भी अधिक सरल और खास बना देगा। हंसी तभी अच्छी लगती है जब तक उससे किसी को ठेस न पहुंचे खुद पर हंसने की कला में अहम है ‘इमोशनल कैलिब्रेशन’ यानी सही भावना का चुनाव। शोधकर्ता आगाह करते हैं कि हंसी तभी तक गरिमापूर्ण है, जब तक वह किसी को ‘ठेस’ न पहुंचाए। यदि आपकी गलती से किसी को शारीरिक चोट पहुंची है या कोई नुकसान हुआ है, तो वहां हंसना आपको संवेदनहीन और अनैतिक साबित कर सकता है। ऐसे वक्त में हंसी नहीं, बल्कि खेद और शर्मिंदगी ही सही मानवीय आचरण है। याद रहे, आत्मविश्वास मुस्कुराने में है, लेकिन बड़प्पन यह पहचानने में है कि कब माफी मांगनी है।
Cylinder Lines for All; Hotels Face Shortage, Induction-Diesel Bhatti 30% Costlier

Hindi News Local Mp Bhopal MP Gas Crisis: Cylinder Lines For All; Hotels Face Shortage, Induction Diesel Bhatti 30% Costlier भोपाल9 मिनट पहले कॉपी लिंक मध्य प्रदेश में पिछले 6 दिनों से गैस की किल्लत बनी हुई है। होटल और रेस्टोरेंट में कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं, वहीं अब इसका असर घरों के किचन तक पहुंच गया है। भोपाल, इंदौर और उज्जैन जैसे शहरों में सिलेंडर लेने के लिए बच्चे और बुजुर्ग सुबह से ही लाइन में लग रहे हैं। कई बार गैस की बुकिंग नहीं हो पा रही, तो कभी 6 से 8 घंटे इंतजार के बाद सिलेंडर मिल रहा है। प्रदेश के करीब 50 हजार होटल और रेस्टोरेंट भी गैस संकट से जूझ रहे हैं। ऐसे में इंडक्शन और डीजल भट्ठी सहारा बन रहे हैं, लेकिन इनका खर्च 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ गया है। भोपाल में कुछ रेहड़ियां अस्थायी रूप से बंद भी हो गई हैं। एमपी में गैस संकट की देखिए तस्वीरें… ग्वालियर ग्वालियर में लोग अब कोयला-लकड़ी खरीद रहे है। शहरभर में अब इंडक्शन की मांग भी तेजी से बढ़ी है। यह दुकान ग्वालियर है। पहले यहां खूब भीड़ लगती थी लेकिन अब यह बंद पड़ गई है। रायसेन रायसेन में लोगों ने हंगामा किया। सड़क पर वाहनों को रोक लिया। यह तस्वीर भी रायसेन की है। खाली सिलेंडर की लंबी कतारें लगा दी गई। भोपाल भोपाल में बच्चे- बुजुर्ग हर उम्र के लोग सिलेंडर लेने पहुंच रहे है। सिलेंडर लेने के दौरान अब लोगों में विवाद हो रहे है। लोग सीधे ट्रकों से ही सिलेंडर ले रहे है। इन जिलों के हाल भी देखें दमोह में होटल-रेस्टोरेंट के बंद करना पड़ गया है। जबलपुर में गैस एजेंसी के बाहर लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई है। छिंदवाड़ा में तो चूल्हे पर खाना बनाया जा रहा है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
CBSE 10th, 12th New Rules: No Pass on Additional Subject

Hindi News Career CBSE 10th, 12th New Rules: No Pass On Additional Subject | Compartment Exam 7 घंटे पहले कॉपी लिंक CBSE यानी सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन बोर्ड अब छात्रों को छठे या 7वें एडिशनल सब्जेक्ट के आधार पर पास नहीं करेगा। बोर्ड ने 10वीं और 12वीं क्लास की बोर्ड परीक्षाओं को लेकर नए नियम लागू किए हैं। ये नियम खास तौर से उन स्टूडेंट्स के लिए है, जो परीक्षा के दौरान नकल या किसी अनुचित व्यवहार की वजह से बाहर कर दिए गए हों। ऐसे स्टूडेंट्स को कंपार्ट्मेंट एग्जाम देना होगी। CBSE के नए नियमों के अनुसार अब स्टूडेंट्स को पास होने के लिए अपने मेन सब्जेक्ट में ही निर्धारित मार्क्स हासिल करने होंगे। अगर किसी छात्र का किसी विषय का रिजल्ट अनुचित साधनों या अन्य कारणों से रोका जाता है, तो उसे एडिशनल सब्जेक्ट के मार्क्स के आधार पर पास नहीं माना जाएगा। CBSE के नए नियमों के अनुसार, अगर कोई छात्र नकल करते पकड़ा गया तो उसे कंपार्टमेंट परीक्षा देकर पास करना होगा। (तस्वीर- CBSE हेडक्वार्टर, नई दिल्ली) एडिशनल सब्जेक्ट के सहारे पास हो जाते थे छात्र बोर्ड के पुराने नियमों के अनुसार, अगर कोई स्टूडेंट किसी मेन सब्जेक्ट में मिनिमम मार्क्स हासिल नहीं कर पाता था, लेकिन उसने एडिशनल सब्जेक्ट में अच्छे मार्क्स पाए होते थे, तो उस सब्जेक्ट के आधार पर उसे पास किया जा सकता था। अब बोर्ड ने इस व्यवस्था को खत्म करने का फैसला लिया है। बोर्ड के अनुसार, कुछ मामलों में छात्र एडिशनल सब्जेक्ट के सहारे पास हो रहे थे, जिससे एग्जाम सिस्टम की निष्पक्षता प्रभावित हो रही थी। इसलिए बोर्ड ने मूल्यांकन प्रक्रिया को ज्यादा ट्रांसपेरेंट और सख्त बनाने के लिए यह निर्णय लिया है। एडिशनल सब्जेक्ट केवल स्किल और नॉलेज के लिए इस बदलाव के बाद छात्रों को अपने मुख्य विषयों पर ज्यादा ध्यान देना होगा। इस नियम के बाद एडिशनल सब्जेक्ट अब केवल आपके स्किल और नॉलेज के लिए होंगे। नंबर्स बढ़ाने में इनकी भूमिका नहीं होगी। 10वीं में 388 और 12वीं में 132 छात्र पास हुए थे बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार साल 2025 की परीक्षाओं में 10वीं के 608 छात्रों को अनुचित साधनों के तहत पकड़ा गया था, जिनमें से 388 छात्रों को छठे या 7वें सब्जेक्ट के मार्क्स के आधार पर पास कर दिया गया। वहीं, 12वीं कक्षा में 577 छात्रों में से 132 छात्र इसी व्यवस्था के चलते पास हो गए। नई व्यवस्था के तहत 2026 से यह छूट खत्म कर दी गई है। बोर्ड का मानना है कि इस कदम से परीक्षाओं की ट्रांसपरेंसी बढ़ेगी और नकल पर अंकुश लगेगा। —————– ये खबर भी पढ़ें… CBSE 12वीं के पेपर में डांस वीडियो का QR कोड:बोर्ड ने कहा- पेपर पूरी तरह सुरक्षित; फर्जी क्वेश्चन पेपर्स बांटे जाने की अफवाह फैली सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंड्री एजुकेशन यानी CBSE ने आज स्पष्ट कर दिया है कि 12वीं मैथ्स का पेपर असली है। क्वेश्चन पेपर पूरी तरह से सुरक्षित है और इसकी सुरक्षा में कोई कॉम्प्रोमाइज नहीं हुआ है। इससे पहले सोमवार, 9 मार्च को हुई 12वीं CBSE बोर्ड की मैथ्स की परीक्षा में बोर्ड की बड़ी चूक सामने आई थी। पेपर के पहले पेज पर लगे QR को स्कैन करने के बाद डांस का वीडियो प्ले हो रहा था। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
अंडे और चिकन जितना प्रोटीन देगा यह पराठा, सोया चंक्स और चना दाल से बनाएं हाई प्रोटीन पराठा, जानिए बनाने का तरीका

High Protein Paratha Recipe: आजकल फिटनेस और हेल्दी लाइफस्टाइल को लेकर लोगों में जागरूकता तेजी से बढ़ रही है. बहुत से लोग अपनी डाइट में ज्यादा से ज्यादा प्रोटीन शामिल करना चाहते हैं ताकि शरीर मजबूत रहे और एनर्जी भी बनी रहे. लेकिन जो लोग वेजिटेरियन होते हैं उनके लिए प्रोटीन के विकल्प थोड़े सीमित होते हैं. ऐसे में कई बार लोग सोचते हैं कि बिना अंडा या चिकन खाए शरीर को पर्याप्त प्रोटीन कैसे मिले. अच्छी बात यह है कि कुछ शाकाहारी चीजें ऐसी होती हैं जिनमें प्रोटीन की मात्रा काफी ज्यादा होती है. सोया चंक्स और चना दाल उनमें से सबसे बेहतरीन विकल्प माने जाते हैं. इन दोनों को मिलाकर बनाया गया पराठा स्वाद और पोषण दोनों का शानदार मेल होता है. यह पराठा खाने में भी बहुत स्वादिष्ट लगता है और शरीर को भरपूर ऊर्जा देता है. अगर आप सुबह के नाश्ते में कुछ हेल्दी और भरपेट खाना चाहते हैं तो यह हाई प्रोटीन पराठा आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है. सोया चंक्स और चना दाल में क्यों होता है ज्यादा प्रोटीनसोया चंक्स को प्रोटीन का बहुत अच्छा स्रोत माना जाता है. पोषण विशेषज्ञों के अनुसार सोया चंक्स में भरपूर मात्रा में प्रोटीन और जरूरी पोषक तत्व होते हैं. USDA के अनुसार लगभग 50 ग्राम सूखे सोया चंक्स में करीब 26 से 28 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है. वहीं चना दाल भी प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होती है. करीब 100 ग्राम चना दाल में लगभग 19 से 22 ग्राम प्रोटीन मौजूद होता है. जब इन दोनों चीजों को मिलाकर पराठा बनाया जाता है तो यह एक पौष्टिक और संतुलित भोजन बन जाता है. यही वजह है कि यह पराठा जिम करने वालों और हेल्दी डाइट फॉलो करने वाले लोगों के बीच भी काफी लोकप्रिय हो रहा है. पराठा बनाने के लिए जरूरी सामग्रीइस हाई प्रोटीन पराठे को बनाने के लिए ज्यादा जटिल सामग्री की जरूरत नहीं होती. इसके लिए लगभग तीन चौथाई कप गेहूं का आटा, एक कप सोया चंक्स, तीन चौथाई कप चना दाल, आधा शकरकंद, एक प्याज, थोड़ा अदरक, तीन से चार लहसुन की कलियां, दो लौंग, एक बड़ी इलायची, एक छोटा टुकड़ा दालचीनी, एक छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, एक छोटा चम्मच गरम मसाला, आधा छोटा चम्मच जीरा पाउडर, एक हरी मिर्च, थोड़ा हरा धनिया और स्वाद के अनुसार नमक की जरूरत होती है. पराठा सेंकने के लिए घी या तेल का इस्तेमाल किया जा सकता है. यह सारी सामग्री आसानी से रसोई में मिल जाती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. सोया चंक्स और चना दाल की स्टफिंग तैयार करने का तरीकासबसे पहले सोया चंक्स और चना दाल को करीब दस मिनट के लिए गुनगुने पानी में भिगो दें. इससे यह नरम हो जाते हैं और जल्दी पक जाते हैं. इसके बाद प्रेशर कुकर में सोया चंक्स, भीगी हुई चना दाल, मैश किया हुआ शकरकंद, कटा हुआ प्याज, अदरक, लहसुन, साबुत मसाले और नमक डालें. इसमें थोड़ा सा पानी डालकर इसे करीब चार से पांच सीटी आने तक पकने दें. जब मिश्रण अच्छी तरह पक जाए तो इसमें से साबुत मसाले निकाल दें. इसके बाद बाकी मिश्रण को मिक्सर या हैंड ब्लेंडर की मदद से स्मूद पेस्ट बना लें. यही पेस्ट पराठे के लिए प्रोटीन से भरपूर बेस तैयार करता है. पराठे का आटा गूंधने और बेलने का तरीकाअब इस तैयार पेस्ट को गेहूं के आटे में मिला दें. इसके साथ हरी मिर्च, हरा धनिया, लाल मिर्च पाउडर, गरम मसाला और भुना हुआ जीरा पाउडर भी डाल दें. इन सबको अच्छे से मिलाकर नरम आटा गूंध लें. आटा ज्यादा सख्त न हो इसका ध्यान रखें. जब आटा तैयार हो जाए तो उसकी छोटी छोटी लोइयां बना लें. अब इन लोइयों को बेलकर पराठे का आकार दे दें. तवा गर्म करें और उस पर थोड़ा घी या तेल लगाएं. फिर पराठे को दोनों तरफ से सुनहरा होने तक सेंक लें. कैसे परोसें यह हाई प्रोटीन पराठाजब पराठा अच्छी तरह सिक जाए तो उसे गरम गरम प्लेट में निकाल लें. यह पराठा दही, अचार या हरी चटनी के साथ बहुत स्वादिष्ट लगता है. अगर आप इसे नाश्ते में खाते हैं तो यह लंबे समय तक पेट भरा रखता है और शरीर को भरपूर ऊर्जा देता है. यही वजह है कि यह पराठा हेल्दी ब्रेकफास्ट के लिए एक शानदार विकल्प माना जाता है.
भिंड में सालों से अलग रह रहे पति-पत्नी हुए एक:लोक अदालत में समझौते के बाद पहनाई माला, जज पौधा देकर बोले- रिश्ते भी ऐसे ही सींचना

भिंड के कुटुंब न्यायालय में शनिवार को आयोजित लोक अदालत में वर्षों से अलग रह रहे कई पति-पत्नी आपसी समझौते के बाद फिर से एक हो गए हैं। न्यायालय की पहल और काउंसलिंग के बाद विवाद सुलझने पर दंपतियों ने एक-दूसरे को माला पहनाकर साथ जीवन बिताने का संकल्प लिया है। समझौते के बाद न्यायालय परिसर में कई दंपतियों की आंखों में खुशी के आंसू दिखाई दिए। कुछ दंपतियों ने खुले तौर पर अपनी भावनाएं भी जाहिर कीं। एक पत्नी ने कहा, “अगर अब ठीक से व्यवहार करेंगे तो हम साथ रहने को तैयार हैं।” वहीं पति ने भी अपनी गलतियों को सुधारने और परिवार को फिर से जोड़ने का भरोसा दिलाया। दोनों ने पुराने विवादों को पीछे छोड़ने का संकल्प लिया। जज ने पौधा भेंट कर दी रिश्ते निभाने की सीख समझौते के बाद प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय भिंड दिलीप गुप्ता ने दंपतियों को एक-एक पौधा भेंट किया। उन्होंने कहा कि यह पौधा उनके नए जीवन की शुरुआत का प्रतीक है। न्यायाधीश ने समझाइश देते हुए कहा कि जैसे पौधे को नियमित पानी और देखभाल की जरूरत होती है, वैसे ही दांपत्य जीवन को भी प्यार, धैर्य और समझ की जरूरत होती है। आपसी बातचीत से विवाद सुलझाने की दी सलाह न्यायाधीश दिलीप गुप्ता ने कहा कि यदि किसी बात पर मतभेद हो तो उसे अदालत तक लाने के बजाय आपस में बैठकर सुलझाने का प्रयास करना चाहिए। लोक अदालत में ऐसे कई मामले आए जो लंबे समय से न्यायालय में लंबित थे। इन मामलों के कारण दोनों पक्ष मानसिक तनाव और आर्थिक परेशानी झेल रहे थे। बिना हार-जीत के आपसी सहमति से सुलझे मामले लोक अदालत के माध्यम से बिना किसी हार-जीत के आपसी सहमति से विवादों का समाधान कराया गया। कार्यवाही पूरी होने के बाद दंपति मुस्कुराते हुए घर के लिए रवाना हुए। इस दौरान परिवार के अन्य सदस्य भी उनके साथ मौजूद थे। इस आयोजन में न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं और पैरालीगल वॉलंटियर्स ने काउंसलिंग कर समझौते की राह तैयार की।
हर दिन मखाना खाते हैं? ज्यादा सेवन से पेट और किडनी को हो सकता है नुकसान, जानिए जरूरी बातें

Last Updated:March 14, 2026, 13:47 IST मखाना या फॉक्स नट्स एक पौष्टिक और हेल्दी स्नैक है, जो प्रोटीन, फाइबर और कैल्शियम से भरपूर होता है. यह सामान्यत: गर्भावस्था में भी सुरक्षित माना जाता है. हालांकि, अधिक मात्रा में सेवन करने से पाचन समस्याएं, एलर्जी और किडनी स्टोन जैसी दिक्कतें हो सकती हैं, इसलिए सेवन करते समय सावधानी बरतना जरूरी है. मखाने हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होने के साथ-साथ कुछ हद तक नुकसानदायक भी हो सकते हैं. इनके अधिक सेवन से पेट में कब्ज, ब्लोटिंग और दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं. कैल्शियम और फाइबर की अधिकता के कारण यह किडनी स्टोन वाले लोगों के लिए हानिकारक हो सकते हैं. इसके अलावा, अत्यधिक पोटैशियम किडनी रोगियों के लिए जोखिम बढ़ा सकता है, और बहुत ज्यादा मात्रा में सेवन से कुछ लोगों को एलर्जी या पाचन संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं. मखाने वैसे तो एक बहुत हेल्दी स्नैक हैं, लेकिन ज्यादा मात्रा में (30–60 ग्राम से अधिक) खाने से पेट फूलना, गैस, कब्ज और बदहजमी जैसी पाचन समस्याएं हो सकती हैं. मखानों में उच्च फाइबर होता है और पानी की मात्रा कम होती है, जो अधिक सेवन करने पर पाचन तंत्र पर दबाव डालता है. डॉक्टर गीतिका शर्मा के अनुसार, मखाने में उच्च फाइबर और प्रोटीन पाए जाते हैं. इनका अत्यधिक सेवन करने से पेट फूलना, गैस, कब्ज और अपच जैसी पाचन समस्याएं हो सकती हैं. मखाने पचने में समय लेते हैं और अधिक मात्रा में खाने से दस्त भी बढ़ सकते हैं. साथ ही, खाली पेट मखाने खाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे पेट दर्द हो सकता है. Add News18 as Preferred Source on Google मखानों में ज्यादा नमक, मसाले या घी का इस्तेमाल हाई बीपी और हार्ट संबंधी समस्याओं को बढ़ा सकता है. इसलिए मखानों का सेवन सीमित मात्रा में करें और कम नमक वाले विकल्प चुनें. अपने आहार में संतुलन बनाए रखें और हार्ट हेल्थ का ध्यान रखें. साथ ही, डॉक्टर की सलाह लेना भी उचित रहेगा. मखाना कुछ लोगों के लिए नुकसानदायक हो सकता है, विशेषकर उन लोगों के लिए जिन्हें नट्स या बीजों से एलर्जी होती है. इसमें मौजूद उच्च स्टार्च और प्रोटीन की वजह से उन्हें खुजली, सूजन, सांस लेने में तकलीफ या पाचन संबंधी समस्याएं जैसे पेट दर्द और दस्त हो सकते हैं. मखानों में पोटैशियम और फास्फोरस पाया जाता है, जो किडनी की बीमारी वाले मरीजों के लिए हानिकारक हो सकता है. इसलिए किडनी की समस्या वाले लोगों को मखानों का सेवन सीमित करना चाहिए या डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें और सही आहार चुनें. मखाने आमतौर पर गर्भावस्था में सुरक्षित और पौष्टिक माने जाते हैं. यह कैल्शियम, प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत हैं. लेकिन बहुत अधिक मात्रा में सेवन करने पर ये नुकसानदायक हो सकते हैं, जिससे कब्ज, ब्लोटिंग (पेट फूलना), किडनी स्टोन में वृद्धि और एलर्जी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. First Published : March 14, 2026, 13:47 IST
Not only strategy but correct body language is also important in sports

Hindi News Sports Not Only Strategy But Correct Body Language Is Also Important In Sports द न्यूयॉर्क टाइम्स18 मिनट पहले कॉपी लिंक विशेषज्ञों का मानना है कि जब एक दिग्गज खिलाड़ी मैदान पर ऐसी निराशा दिखाता है, तो इसका सीधा असर टीम के युवा खिलाड़ियों पर पड़ता है। खेल मैदान पर अक्सर खिलाड़ियों के प्रदर्शन, उनके आंकड़ों और रणनीति की चर्चा होती है, लेकिन एक पहलू ऐसा है जो बिना कुछ कहे मैच का रुख बदल सकता है और वह है खिलाड़ी की ‘बॉडी लैंग्वेज’। यह कोई किताबी या मनोवैज्ञानिक रहस्य नहीं है, बल्कि दबाव के पलों में हार और जीत के बीच का एक बड़ा अंतर साबित हो सकता है। हाल ही में अमेरिकी बास्केटबॉल लीग एनबीए के दिग्गज खिलाड़ी केविन डुरंट की बॉडी लैंग्वेज चर्चा का विषय रही। एक मैच के दौरान जब उनके युवा साथियों ने कुछ खराब पास दिए, तो डुरंट ने झुंझलाते हुए हाथ हवा में उठा दिए और उनके कंधे झुक गए। विशेषज्ञों का मानना है कि जब एक दिग्गज खिलाड़ी मैदान पर ऐसी निराशा दिखाता है, तो इसका सीधा असर टीम के युवा खिलाड़ियों पर पड़ता है। वे स्वाभाविक खेल खेलने के बजाय सहम जाते हैं। मैदान पर किसी गलती के बाद जब कोई खिलाड़ी शारीरिक रूप से सिकुड़ता है या सिर झुकाता है, तो वह सिर्फ अपनी निराशा जाहिर नहीं कर रहा होता, बल्कि उस निराशा को खुद पर और अधिक हावी होने दे रहा होता है। इसके विपरीत, जो खिलाड़ी भावनाओं पर काबू रखना जानते हैं, वे दबाव में भी टीम को बिखरने नहीं देते। डामियन लिलार्ड जैसे दिग्गज युवाओं को यही सलाह देते हैं कि अगर कोई पास छूट जाए या शॉट मिस हो जाए, तो अपनी प्रतिक्रिया को न्यूनतम रखें और तुरंत अगले मूव पर फोकस करें। इसी तरह, डब्ल्यूएनबीए की महान खिलाड़ी सू बर्ड को उनके शांत स्वभाव के लिए जाना जाता था। चाहे टीम बड़े अंतर से आगे हो या पीछे, उनकी बॉडी लैंग्वेज हमेशा एक जैसी रहती थी, जो पूरी टीम को बांध कर रखती थी। सबसे अच्छी बात यह है कि बॉडी लैंग्वेज कोई ऐसी जन्मजात आदत नहीं है जिसे बदला न जा सके। यह एक अभ्यास है। गलती होने पर गहरी सांस लेना, अपने कंधों को सीधा रखना और तुरंत अपने साथियों की तरफ बढ़ना- ये छोटे बदलाव किसी भी खिलाड़ी को दबाव के क्षणों में मजबूत बनाते हैं। तीन स्तरों पर नुकसान पहुंचाती है खराब बॉडी लैंग्वेज कमजोर बॉडी लैंग्वेज का नुकसान तीन स्तरों पर होता है। पहला- यह खुद खिलाड़ी के आत्मविश्वास को गिराता है, जिससे गलती की गुंजाइश बढ़ जाती है। दूसरा- यह टीम के साथियों को हताश करता है, खासकर तब जब वह टीम लीडर हो। तीसरा- यह विरोधी टीम को साफ संकेत देता है कि आप मानसिक रूप से टूट रहे हैं, जिससे विरोधियों का आत्मविश्वास दोगुना हो जाता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
अभिषेक शर्मा टी-20 वर्ल्डकप जीत के बाद वैष्णों देवी पहुंचे:फोटोज शेयर कीं, फाइनल में खेली थी 52 रन का पारी

भारतीय क्रिकेट टीम के युवा ओपनर अभिषेक शर्मा टी-20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद माता के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचे। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में स्थित वैष्णो देवी मंदिर में जाकर माता रानी के दर्शन किए। अभिषेक शर्मा हाल ही में भारतीय टीम के साथ टी-20 वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम का हिस्सा रहे। टी-20 इंटरनेशनल रैंकिंग में नंबर-1 बल्लेबाज अभिषेक ने अपनी यात्रा की तस्वीरें इंस्टाग्राम पर साझा कीं और कैप्शन लिखा जय माता दी। फोटोज में वे सफेद कुर्ता-पायजामा पहने, माथे पर तिलक लगाए और हाथ जोड़कर दर्शन करते नजर आए। फाइनल में 52 रन की पारी खेली अभिषेक ने टी-20 वर्ल्ड कप फाइनल में अहम भूमिका निभाई थी। फाइनल से पहले के मैचों में उनका प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा था और लगातार 3 बार शून्यू पर आउट हुए। हालांकि खिताबी मुकाबले में उन्होंने शानदार वापसी की। अहमदाबाद में खेले गए फाइनल में उन्होंने महज 21 गेंदों में 52 रन की पारी खेली। कोच-कप्तान ने मुझ पर भरोसा किया भारत की जीत के बाद अभिषेक ने कहा, कोच और कप्तान ने मुझ पर भरोसा किया। मैं खुद भी खुद पर शक कर रहा था क्योंकि यह टूर्नामेंट मेरे लिए आसान नहीं था। मैंने इससे पहले कभी ऐसा अनुभव नहीं किया था। अपना पहला वर्ल्ड कप खेल रहा था। अभिषेक नंबर-1 टी-20 बैटर टॉप-10 टी-20 बैटर्स की लिस्ट में 4 भारतीय शामिल हैं। इनमें अभिषेक नंबर-1, ईशान नंबर-2, तिलक वर्मा नंबर-7 और सूर्यकुमार यादव नंबर-9 पर हैं। तिलक वर्मा को एक और सूर्या को दो स्थान का नुकसान हुआ। भारत तीसरी बार चैंपियन बना 8 मार्च को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में टी-20 वर्ल्ड कप का फाइनल मैच खेला गया था। इसमें भारत ने न्यूजीलैंड को 96 रन के अंतर से हराया और अपना टाइटल डिफेंड किया था। टीम इंडिया ने तीसरी बार यह टूर्नामेंट जीता था। ——————————- स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… दूसरा वनडे- पाकिस्तान ने बांग्लादेश को 128 रन से हराया पाकिस्तान ने वनडे सीरीज के दूसरे मैच में बांग्लादेश को 128 रन से हराया दिया है। इस जीत से टीम ने 3 मैचों की सीरीज में 1-1 की बराबरी हासिल कर ली है। तीसरा और निर्णायक मुकाबला 15 मार्च को मीरपुर में खेला जाएगा। पढ़ें पूरी खबर…
उज्जैन में सिंहस्थ के निर्माण काम में मजदूर की मौत:सड़क चौड़ीकरण के दौरान लगा करंट; परिजनों ने किया चक्काजाम, ठेकेदार पर FIR की मांग

उज्जैन में सिंहस्थ से जुड़े निर्माण काम के दौरान करंट लगने से एक श्रमिक की मौत के बाद शनिवार सुबह चरक अस्पताल के सामने हंगामा हो गया। मृतक के परिजनों और समाज के लोगों ने आगर रोड पर चक्काजाम कर ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई और आर्थिक सहायता की मांग की। मृतक की पहचान राकेश सूर्यवंशी (42) पिता रामचंद्र सूर्यवंशी, निवासी ग्राम खड़ोतिया के रूप में हुई है। शुक्रवार शाम कोयला फाटक से निजातपुरा मार्ग पर चल रहे सड़क चौड़ीकरण कार्य के दौरान वह इलेक्ट्रिक का काम कर रहे थे। पाइप रिपेयरिंग के दौरान ग्राइंडर मशीन चलाते समय वे करंट की चपेट में आ गए। साथी मजदूर उन्हें तुरंत चरक अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल के पीएम रूम में रखवाया गया। परिजनों और संगठनों ने किया सड़क जाम शनिवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद परिजन, शिवसेना और भीम आर्मी के पदाधिकारी और सूर्यवंशी समाज के लोग चरक अस्पताल के सामने इकट्ठा हुए। उन्होंने आगर रोड पर चक्काजाम कर पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। करीब एक घंटे तक पीएम रूम परिसर के बाहर हंगामा चलता रहा। प्रदर्शनकारियों ने ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, परिवार को आर्थिक सहायता देने और मृतक के बेटे को नगर निगम में आउटसोर्स के माध्यम से नौकरी देने की मांग की। परिवार ने घटना की सूचना देर से मिलने का लगाया आरोप बेटे अभिषेक सूर्यवंशी ने बताया कि वह पेट्रोल पंप पर काम करता है। उसे एक मित्र के फोन से घटना की जानकारी मिली। जब वह अस्पताल पहुंचा तो पिता का शव पोस्टमार्टम रूम में रखा मिला। परिजनों का आरोप है कि उन्हें घटना की जानकारी समय पर नहीं दी गई। एसडीएम ने जांच और राहत का दिया आश्वासन मामले में एसडीएम ने कहा कि परिजनों की मांगों को सुना गया है और थाना प्रभारी को जांच के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि नियमानुसार मिलने वाली राहत राशि पीड़ित परिवार को दिलाई जाएगी।









