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Not only strategy but correct body language is also important in sports

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द न्यूयॉर्क टाइम्स18 मिनट पहले

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विशेषज्ञों का मानना है कि जब एक दिग्गज खिलाड़ी मैदान पर ऐसी निराशा दिखाता है, तो इसका सीधा असर टीम के युवा खिलाड़ियों पर पड़ता है।

खेल मैदान पर अक्सर खिलाड़ियों के प्रदर्शन, उनके आंकड़ों और रणनीति की चर्चा होती है, लेकिन एक पहलू ऐसा है जो बिना कुछ कहे मैच का रुख बदल सकता है और वह है खिलाड़ी की ‘बॉडी लैंग्वेज’। यह कोई किताबी या मनोवैज्ञानिक रहस्य नहीं है, बल्कि दबाव के पलों में हार और जीत के बीच का एक बड़ा अंतर साबित हो सकता है।

हाल ही में अमेरिकी बास्केटबॉल लीग एनबीए के दिग्गज खिलाड़ी केविन डुरंट की बॉडी लैंग्वेज चर्चा का विषय रही। एक मैच के दौरान जब उनके युवा साथियों ने कुछ खराब पास दिए, तो डुरंट ने झुंझलाते हुए हाथ हवा में उठा दिए और उनके कंधे झुक गए। विशेषज्ञों का मानना है कि जब एक दिग्गज खिलाड़ी मैदान पर ऐसी निराशा दिखाता है, तो इसका सीधा असर टीम के युवा खिलाड़ियों पर पड़ता है। वे स्वाभाविक खेल खेलने के बजाय सहम जाते हैं। मैदान पर किसी गलती के बाद जब कोई खिलाड़ी शारीरिक रूप से सिकुड़ता है या सिर झुकाता है, तो वह सिर्फ अपनी निराशा जाहिर नहीं कर रहा होता, बल्कि उस निराशा को खुद पर और अधिक हावी होने दे रहा होता है।

इसके विपरीत, जो खिलाड़ी भावनाओं पर काबू रखना जानते हैं, वे दबाव में भी टीम को बिखरने नहीं देते। डामियन लिलार्ड जैसे दिग्गज युवाओं को यही सलाह देते हैं कि अगर कोई पास छूट जाए या शॉट मिस हो जाए, तो अपनी प्रतिक्रिया को न्यूनतम रखें और तुरंत अगले मूव पर फोकस करें। इसी तरह, डब्ल्यूएनबीए की महान खिलाड़ी सू बर्ड को उनके शांत स्वभाव के लिए जाना जाता था। चाहे टीम बड़े अंतर से आगे हो या पीछे, उनकी बॉडी लैंग्वेज हमेशा एक जैसी रहती थी, जो पूरी टीम को बांध कर रखती थी।

सबसे अच्छी बात यह है कि बॉडी लैंग्वेज कोई ऐसी जन्मजात आदत नहीं है जिसे बदला न जा सके। यह एक अभ्यास है। गलती होने पर गहरी सांस लेना, अपने कंधों को सीधा रखना और तुरंत अपने साथियों की तरफ बढ़ना- ये छोटे बदलाव किसी भी खिलाड़ी को दबाव के क्षणों में मजबूत बनाते हैं।

तीन स्तरों पर नुकसान पहुंचाती है खराब बॉडी लैंग्वेज

कमजोर बॉडी लैंग्वेज का नुकसान तीन स्तरों पर होता है। पहला- यह खुद खिलाड़ी के आत्मविश्वास को गिराता है, जिससे गलती की गुंजाइश बढ़ जाती है। दूसरा- यह टीम के साथियों को हताश करता है, खासकर तब जब वह टीम लीडर हो। तीसरा- यह विरोधी टीम को साफ संकेत देता है कि आप मानसिक रूप से टूट रहे हैं, जिससे विरोधियों का आत्मविश्वास दोगुना हो जाता है।

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विशेषज्ञों का मानना है कि जब एक दिग्गज खिलाड़ी मैदान पर ऐसी निराशा दिखाता है, तो इसका सीधा असर टीम के युवा खिलाड़ियों पर पड़ता है।

खेल मैदान पर अक्सर खिलाड़ियों के प्रदर्शन, उनके आंकड़ों और रणनीति की चर्चा होती है, लेकिन एक पहलू ऐसा है जो बिना कुछ कहे मैच का रुख बदल सकता है और वह है खिलाड़ी की ‘बॉडी लैंग्वेज’। यह कोई किताबी या मनोवैज्ञानिक रहस्य नहीं है, बल्कि दबाव के पलों में हार और जीत के बीच का एक बड़ा अंतर साबित हो सकता है।

हाल ही में अमेरिकी बास्केटबॉल लीग एनबीए के दिग्गज खिलाड़ी केविन डुरंट की बॉडी लैंग्वेज चर्चा का विषय रही। एक मैच के दौरान जब उनके युवा साथियों ने कुछ खराब पास दिए, तो डुरंट ने झुंझलाते हुए हाथ हवा में उठा दिए और उनके कंधे झुक गए। विशेषज्ञों का मानना है कि जब एक दिग्गज खिलाड़ी मैदान पर ऐसी निराशा दिखाता है, तो इसका सीधा असर टीम के युवा खिलाड़ियों पर पड़ता है। वे स्वाभाविक खेल खेलने के बजाय सहम जाते हैं। मैदान पर किसी गलती के बाद जब कोई खिलाड़ी शारीरिक रूप से सिकुड़ता है या सिर झुकाता है, तो वह सिर्फ अपनी निराशा जाहिर नहीं कर रहा होता, बल्कि उस निराशा को खुद पर और अधिक हावी होने दे रहा होता है।

इसके विपरीत, जो खिलाड़ी भावनाओं पर काबू रखना जानते हैं, वे दबाव में भी टीम को बिखरने नहीं देते। डामियन लिलार्ड जैसे दिग्गज युवाओं को यही सलाह देते हैं कि अगर कोई पास छूट जाए या शॉट मिस हो जाए, तो अपनी प्रतिक्रिया को न्यूनतम रखें और तुरंत अगले मूव पर फोकस करें। इसी तरह, डब्ल्यूएनबीए की महान खिलाड़ी सू बर्ड को उनके शांत स्वभाव के लिए जाना जाता था। चाहे टीम बड़े अंतर से आगे हो या पीछे, उनकी बॉडी लैंग्वेज हमेशा एक जैसी रहती थी, जो पूरी टीम को बांध कर रखती थी।

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तीन स्तरों पर नुकसान पहुंचाती है खराब बॉडी लैंग्वेज

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