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‘फर्जी मतदाता’ और राष्ट्रीय सुरक्षा: बंगाल भाजपा के दिग्गज दिलीप घोष ने नबन्ना तक पार्टी का रास्ता बताया | विशेष | राजनीति समाचार

Brent crude jumped 8% to $116 per barrel and is up nearly 60% since the war began in late February. (Image: Reuters)

आखरी अपडेट:मार्च 18, 2026, 08:00 IST दिलीप घोष को भाजपा ने मेदिनीपुर जिले में स्थित खड़गपुर सदर से मैदान में उतारा है। घोष के अभियान का सबसे विवादास्पद बिंदु मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) है। फ़ाइल चित्र/पीटीआई जैसे-जैसे 2026 का पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहा है, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) दक्षिण में अपना मोर्चा संभालने के लिए एक परिचित चेहरे की ओर मुड़ गई है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और अपनी बेबाक बयानबाजी और जमीनी स्तर से जुड़ाव के लिए जाने जाने वाले दिलीप घोष को उच्च जोखिम वाले मेदिनीपुर जिले में स्थित खड़गपुर सदर से मैदान में उतारा गया है। News18 के साथ एक विशेष बातचीत में, घोष ने एक अभियान रणनीति बनाई जो स्थानीय शासन से आगे बढ़ती है, आगामी चुनावों को राष्ट्रीय सुरक्षा और चुनावी अखंडता के लिए एक महत्वपूर्ण मिशन के रूप में पेश करती है। ‘मैं सबसे पहले एक पार्टी कार्यकर्ता हूं’ अपने वरिष्ठ पद और पिछली भूमिकाओं के बावजूद, घोष एक अनुशासित सैनिक की छवि पेश करने के इच्छुक हैं। प्रमुख प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बिना एक अवधि के बाद अग्रिम मोर्चे पर अपनी वापसी को संबोधित करते हुए, उन्होंने पार्टी के जनादेश के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर जोर दिया। घोष ने कहा, “मैं पार्टी का एक साधारण कार्यकर्ता हूं। जब भी पार्टी ने मुझे जिम्मेदारी दी, मैंने इसे स्वीकार किया और कड़ी मेहनत की।” उन्होंने कहा कि हालांकि पिछले दो वर्षों में उनके पास कोई बड़ा पोर्टफोलियो नहीं था, लेकिन पार्टी नेतृत्व को अब लगता है कि मेदिनीपुर बेल्ट को सुरक्षित करने के लिए मतपत्र पर उनकी उपस्थिति आवश्यक है। ‘डर की संस्कृति’ को चुनौती पश्चिम बंगाल में भाजपा के विकास पर विचार करते हुए घोष ने उस समय को याद किया जब पार्टी चुनावी दौर से बाहर थी। उन्होंने दावा किया कि भाजपा की सबसे बड़ी उपलब्धि कथित तौर पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) द्वारा पैदा की गई “डर की संस्कृति” को तोड़ना है। उन्होंने कहा, “एक समय में, भाजपा की यहां जीतने की संस्कृति नहीं थी। यहां तक ​​कि बौद्धिक समुदाय का एक वर्ग भी डरा हुआ था।” घोष के अनुसार, पार्टी की पहली बड़ी आम चुनाव सफलता ने साबित कर दिया है कि जनता ने एक व्यवहार्य विकल्प के रूप में भगवा खेमे पर भरोसा करना शुरू कर दिया है, जिससे अन्य दलों के नेताओं के लिए भाजपा के बैनर तले खुद को स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। एसआईआर फैक्टर: रोल्स की सफाई घोष के अभियान का सबसे विवादास्पद बिंदु मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) है। घोष ने इस प्रशासनिक प्रक्रिया को वर्षों की चुनावी हेराफेरी के खिलाफ भाजपा के प्राथमिक “हथियार” के रूप में स्थापित किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में “घुसपैठियों और फर्जी मतदाताओं” ने दक्षिण बंगाल में चुनाव परिणामों को ऐतिहासिक रूप से खराब कर दिया है। घोष ने दावा किया, ”हम वर्षों से कह रहे हैं कि एसआईआर जरूरी है।” उन्होंने आरोप लगाया कि दक्षिण बंगाल में लगभग 20-25 प्रतिशत मतदाता वास्तविक नहीं हैं। उन्होंने विशेष रूप से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्वाचन क्षेत्र भबनीपुर की ओर इशारा करते हुए दावा किया कि वहां लगभग 60,000 गैर-वास्तविक वोटों की पहचान की गई थी। घोष के लिए, “स्वच्छ और वास्तविक मतदाता सूची” निष्पक्ष परिणाम की दिशा में पहला कदम है। ममता बनाम सुवेंदु गतिशीलता मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी के बीच प्रतिद्वंद्विता राज्य के राजनीतिक रंगमंच का केंद्र बिंदु बनी हुई है। घोष ने 2021 के नंदीग्राम परिणाम से आत्मविश्वास प्राप्त किया, यह सुझाव देते हुए कि मुख्यमंत्री अब अजेय नहीं हैं। “अगर हम नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हरा सकते हैं, तो हम उन्हें भवानीपुर में क्यों नहीं हरा सकते?” उन्होंने संभावित निर्णायक मोड़ के रूप में भवानीपुर रोल से हटाई गई प्रविष्टियों की रिपोर्ट का हवाला देते हुए सवाल उठाया। उन्होंने हालिया प्रशासनिक तबादलों पर मुख्यमंत्री की आपत्तियों को भी खारिज कर दिया और उन्हें सुरक्षित चुनाव माहौल सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक नियमित उपायों के रूप में वर्गीकृत किया। राज्य की प्राथमिकता के रूप में राष्ट्रीय सुरक्षा घोष ने पश्चिम बंगाल चुनाव को राष्ट्रीय अस्तित्व का मुद्दा भी बना दिया। उन्होंने तर्क दिया कि बंगाल में “परिवर्तन” केवल सरकार में बदलाव के बारे में नहीं है बल्कि भारत की सीमाओं की सुरक्षा के बारे में है। उन्होंने सीमा सुरक्षा को सर्वोपरि चिंता बताते हुए कहा, “हमें बंगाल को बचाने की जरूरत है – न केवल राज्य के लिए, बल्कि देश के लिए।” स्थानीय शासन को राष्ट्रीय महत्व से जोड़कर, घोष राष्ट्रवादी वोट को मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं, और पूर्ण विश्वास व्यक्त कर रहे हैं कि भाजपा “किसी भी कीमत पर” सरकार बनाएगी। पहले प्रकाशित: मार्च 18, 2026, 08:00 IST समाचार राजनीति ‘फर्जी मतदाता’ और राष्ट्रीय सुरक्षा: बंगाल भाजपा के दिग्गज दिलीप घोष ने नबन्ना तक पार्टी का रास्ता बताया | अनन्य अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें

Morocco Declared AFCON 2025 Champions After Senegal Win Overturned

Morocco Declared AFCON 2025 Champions After Senegal Win Overturned

Hindi News Sports Morocco Declared AFCON 2025 Champions After Senegal Win Overturned 59 मिनट पहले कॉपी लिंक मोरक्को को AFCON 2025 का चैंपियन घोषित किया गया है। कॉन्फेडरेशन ऑफ अफ्रीकन फुटबॉल (CAF) ने सेनेगल की 1-0 की जीत को रद्द कर दिया है। यह फैसला 18 जनवरी को खेले गए फाइनल मैच के दौरान हुए विवाद के बाद लिया गया है। दरअसल, मैच के आखिरी समय में सेनेगल के खिलाड़ियों ने रेफरी के एक फैसले के विरोध में मैदान छोड़ दिया था,जिसे नियमों का उल्लंघन माना गया है। क्या था विवाद 18 जनवरी को खेले गए फाइनल मैच में निर्धारित समय तक स्कोर 0-0 की बराबरी पर था। स्टॉपेज टाइम (इंजुरी टाइम) में रेफरी ने मेजबान मोरक्को के पक्ष में एक पेनल्टी दी। इस फैसले से सेनेगल के खिलाड़ी नाराज हो गए और विरोध स्वरूप मैदान से बाहर चले गए। करीब 17 मिनट तक खेल रुका रहा। बाद में खिलाड़ी वापस लौटे, मोरक्को के ब्राहिम डियाज पेनल्टी पर गोल करने से चूक गए और एक्स्ट्रा टाइम में सेनेगल के पापे गुये ने गोल कर अपनी टीम को 1-0 से जीत दिला दी थी। फाइनल में विवाद के कारण 14 मिनट तक खेल रुका रहा। नियमों के आधार पर पलटा गया फैसला मोरक्को फुटबॉल फेडरेशन (FRMF) ने मैच के नतीजों को लेकर CAF की अपील कमेटी में चुनौती दी थी। CAF ने अपनी जांच में पाया कि सेनेगल ने AFCON रेगुलेशन के आर्टिकल 82 का उल्लंघन किया है। इस नियम के मुताबिक, अगर कोई टीम रेफरी की अनुमति के बिना मैच खत्म होने से पहले मैदान छोड़ती है, तो उसे हारा हुआ माना जाता है। आर्टिकल 84 के तहत ऐसी स्थिति में विरोधी टीम को 3-0 से विजेता घोषित कर दिया जाता है। इसी आधार पर सेनेगल को अयोग्य ठहराते हुए मोरक्को को 3-0 से विजेता मान लिया गया। मोरक्को फेडरेशन ने कहा- यह सिर्फ नियमों की जीत फैसला आने के बाद मोरक्को फुटबॉल फेडरेशन ने बयान जारी कर कहा कि उनकी अपील किसी टीम के प्रदर्शन को चुनौती देने के लिए नहीं थी, बल्कि टूर्नामेंट के नियमों को लागू कराने के लिए थी। फेडरेशन ने कहा,’हम नियमों के सम्मान और अफ्रीकी प्रतियोगिताओं में स्पष्टता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम इस टूर्नामेंट में हिस्सा लेने वाले सभी देशों की सराहना करते हैं।’ सेनेगल फेडरेशन की तरफ से अभी कोई कमेंट नहीं सेनेगल फुटबॉल फेडरेशन ने अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। लेकिन उनकी नेशनल टीम के X अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट हुआ। इसमें प्लेयर्स बस परेड में ट्रॉफी के साथ सेलिब्रेट करते दिखे। साथ में ‘OK’ इमोजी था। फाइनल में पापगुए (26 नंबर हरी जर्सी में) ने सेनेगल की ओर से 94वें मिनट में गोल कर टीम को जीत दिलाई थी। अफ्रीका कप में पहले भी हो चुके हैं ऐसे विवाद अफ्रीका कप ऑफ नेशंस के इतिहास में यह पहली बार नहीं है जब बड़े मुकाबले विवादों में घिरे हों। 2010 अफ्रीका कप में टोगो टीम पर बस अटैक के बाद टूर्नामेंट की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे थे। 2015 अफ्रीका कप में मेजबान इक्वेटोरियल गिनी पर रेफरी फैसलों को प्रभावित करने के आरोप लगे थे, जिससे घाना के खिलाड़ी और अधिकारी खुले तौर पर नाराज दिखे। 2022 अफ्रीका कप में ट्यूनीशिया और माली के बीच खेले गए मैच में रेफरी ने समय से पहले मैच खत्म कर दिया था, जिस पर भारी विवाद हुआ था। उस मुकाबले के बाद CAF (अफ्रीकन फुटबॉल कॉन्फेडरेशन) को आधिकारिक सफाई तक देनी पड़ी थी। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

भीषण गर्मी में बच्चों की सेहत पर खतरा, डॉक्टर ने दी ‘ट्रिपल H’ फॉर्मूला अपनाने की सलाह

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सतना. गर्मी का मौसम शुरू होते ही बच्चों की सेहत पर खतरा मंडराने लगता है. तेज धूप, बढ़ता तापमान और बदलता खानपान बच्चों को जल्दी बीमार कर सकता है. ऐसे में डॉक्टरों का कहना है कि अगर समय रहते सावधानी नहीं बरती गई, तो डिहाइड्रेशन, लू और पेट से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ सकती हैं. खासकर छोटे बच्चों में यह खतरा और ज्यादा होता है क्योंकि उनकी इम्युनिटी बाकियों के अपेक्षाकृत कमजोर होती है, इसलिए माता-पिता के लिए जरूरी है कि वे बच्चों के खानपान, रहन-सहन और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दें. लोकल 18 से बातचीत में सतना जिला चिकित्सालय के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ अखिलेश खरे ने बताया कि जैसे ही गर्मी बढ़ती है, वैसे ही अस्पतालों में बच्चों की संख्या भी बढ़ने लगती है. इस मौसम में बच्चों में वायरल इन्फेक्शन, उल्टी-दस्त और कमजोरी के मामले अधिक सामने आते हैं. कई बार माता-पिता इन लक्षणों को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जो आगे चलकर गंभीर स्थिति पैदा कर सकते हैं. डॉक्टर के अनुसार, बच्चों को गर्मी से बचाने के लिए उनके आसपास का वातावरण संतुलित रखना बेहद जरूरी है. न ज्यादा गर्म और न ही ज्यादा ठंडा माहौल होना चाहिए क्योंकि दोनों ही स्थितियां बच्चों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकती हैं. ट्रिपल H फॉर्मूला सबसे जरूरीविशेषज्ञों ने गर्मियों में बच्चों की देखभाल के लिए ट्रिपल H फॉर्मूला को सबसे प्रभावी बताया है, जिसमें हाइड्रेशन, हेल्थी डाइट और हाइजीन शामिल हैं. उन्होंने कहा कि हाइड्रेशन जरूरी है, जिसमें बच्चों को दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाना अनिवार्य है. इसके साथ ही नींबू पानी, नारियल पानी, छाछ और फलों का सेवन भी शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है. दूसरा आता है हेल्थी डाइट, जिसमें बच्चों को हल्का और पौष्टिक भोजन देना चाहिए. हरी सब्जियां, मौसमी फल जैसे- संतरा, मौसंबी, खरबूजा और खीरा शरीर को जरूरी विटामिन और मिनरल देते हैं. तला-भुना और ज्यादा मसालेदार खाना इस मौसम में नुकसानदायक हो सकता है. फिर आता है हाइजीन, जिसमें नाम के ही मुताबिक साफ-सफाई का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. बच्चों को खाने से पहले और बाहर से आने के बाद हाथ धोने की आदत डालें. साफ सुथरा खाना और स्वच्छ वातावरण बीमारियों से बचाव में अहम भूमिका निभाता है. जंक फूड और बाहर का खाना बन सकता है खतराडॉक्टर का कहना है कि आजकल बच्चे बाहर का खाना, चौपाटी आइटम्स और पैकेज्ड ड्रिंक्स ज्यादा पसंद करते हैं, जो गर्मियों में सेहत के लिए खतरनाक हो सकते हैं. ऐसे फूड्स में बैक्टीरिया और अनहाइजीनिक एलिमेंट्स होने का खतरा रहता है, जिससे पेट संबंधी बीमारियां हो सकती हैं, इसलिए माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों को घर का बना ताजा और साफ खाना ही दें. साथ ही बच्चों की पसंद का हेल्दी खाना तैयार करके उन्हें बाहर के खाने से दूर रखा जा सकता है. धूप से बचाव भी उतना ही जरूरीगर्मी के दिनों में बच्चों को तेज धूप में खेलने से बचाना चाहिए. अगर बाहर जाना जरूरी हो, तो उन्हें हल्के कपड़े पहनाएं, टोपी लगाएं और पर्याप्त पानी साथ रखें. दोपहर के समय बाहर निकलने से बचना सबसे बेहतर उपाय है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर माता-पिता बच्चों के खानपान, साफ-सफाई और दिनचर्या पर ध्यान दें, तो गर्मियों में होने वाली अधिकांश बीमारियों से बचा जा सकता है. छोटी-छोटी सावधानियां बच्चों को स्वस्थ रखने में बड़ी भूमिका निभाती हैं. ऐसे में जागरूकता और सतर्कता ही इस मौसम में बच्चों की सुरक्षा की सबसे मजबूत ढाल है.

इंदौर में कार चार्जिंग के दौरान आग, 7 की मौत:3 झुलसे; शॉर्ट सर्किट से हादसा, घर में रखे 4 सिलेंडर फटे

इंदौर में कार चार्जिंग के दौरान आग, 7 की मौत:3 झुलसे; शॉर्ट सर्किट से हादसा, घर में रखे 4 सिलेंडर फटे

इंदौर के बंगाली चौराहे के पास बृजेश्वरी कॉलोनी में बुधवार तड़के करीब 4 बजे हादसा हो गया। इलेक्ट्रिक कार चार्जिंग के दौरान हुए शॉर्ट सर्किट से लगी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया, जिसमें 7 लोगों की जलकर मौत हो गई, जबकि 3 लोग गंभीर रूप से घायल हैं। पुलिस के अनुसार, पुगलिया परिवार के घर के बाहर देर रात एक इलेक्ट्रिक कार चार्जिंग पर लगी थी। सुबह करीब 4 बजे चार्जिंग पॉइंट में शॉर्ट सर्किट हुआ, जिससे कार में आग लग गई। आग तेजी से घर तक पहुंची और अंदर रखे गैस सिलेंडरों को अपनी चपेट में ले लिया। आग लगते ही सिलेंडरों में जोरदार धमाके शुरू हो गए। एक के बाद एक कई सिलेंडर फटे, जिससे पूरा इलाका दहल गया। धमाका इतना तेज था कि मकान का एक हिस्सा ढह गया और अंदर सो रहे लोगों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। हादसे में इनकी मौत हुई विजय सेठिया (65 वर्ष) छोटू सेठिया (22 वर्ष) सुमन (60 वर्ष) मनोज (65 वर्ष) सिमरन (30 वर्ष) राशि सेठिया (12 वर्ष) टीनू (35) ये 3 लोग घायल हुए सौरभ पुगलिया (30 वर्ष) आशीष (30 वर्ष) हर्षित पुगलिया (25 वर्ष) हादसे से जुड़े फोटो… घर में कुछ ऐसे केमिकल भी थे जो ज्वलनशील थे इंदौर के पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह के मुताबिक, यह घर मनोज पुगलिया का था, जो पॉलीमर का कारोबार करते थे। घर में कुछ ऐसे केमिकल भी रखे थे जो ज्वलनशील हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इलेक्ट्रिक वाहन के चार्जिंग पॉइंट में विस्फोट से आग लगी, जो कार से होते हुए घर तक फैल गई। घर में 10 से ज्यादा गैस सिलेंडर और ज्वलनशील केमिकल भी रखे थे, जिससे आग और भयावह हो गई। जांच में यह भी सामने आया है कि घर में इलेक्ट्रॉनिक लॉक लगे थे। आग के दौरान बिजली सप्लाई बंद होने से ये लॉक खुल नहीं पाए, जिससे अंदर फंसे लोगों को बाहर निकालना मुश्किल हो गया। बचाव दल को दरवाजे तोड़कर अंदर प्रवेश करना पड़ा। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। बताया जा रहा है कि हादसे के वक्त घर में कई रिश्तेदार भी मौजूद थे।

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: पश्चिम बंगाल के भवानीपुर में दोस्त बनाम दादा की जंग, चुनावी मुकाबला होगा दिलचस्प, पूरा खेल

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: पश्चिम बंगाल के भवानीपुर में दोस्त बनाम दादा की जंग, चुनावी मुकाबला होगा दिलचस्प, पूरा खेल

देश के 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव की घोषणा हो गई है. असम, तमिलनाडु, केरल पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल पोलिटिकल स्टॉक अपने चरम पर हैं। इन सभी राज्यों में सबसे दिलचस्प चुनाव पश्चिम बंगाल का है। इसका सबसे बड़ा कारण राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, एसोसिएटेड लीडर, राजनीतिक व्यक्तित्व को सांस लेने का मौका नहीं देना है। जैसा कि विरोधी भाजपा हो तब प्रोटोटाइप तकरार नहले-पर-दहला सुरक्षित हो जाता है। ऐसी ही एक लड़ाई का केंद्र बनने जा रही हैं ममता बनर्जी की संसदीय सीट। पश्चिम बंगाल की भवानीपुर विधानसभा सीट इस चुनाव की सबसे हॉट सीट बन गई है। ऐसा इसलिए है क्योंकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इसी सीट से चुनाव लड़ेंगी और इस बात का मतलब बीजेपी को बताया गया है, ऐसा लगता है कि उन्होंने 24 घंटे पहले ही इस सीट पर शुभेंदु अधिकारी का नाम घोषित कर दिया था। ये तो रही बात हाईवोल्टेज टक्कर की। चुनाव के लिए यहां जानें कि भवानीपुर सीट का इतिहास कितना रोचक है और 2011 के बाद इस सीट का ममता बनर्जी से क्या संबंध है। दक्षिण विपक्ष क्षेत्र का हिस्सा है भवानीपुर विधान सभा सीट भवानीपुर विधानसभा सीट सभा कोलकाता दक्षिणपूर्व क्षेत्र में आती है। 2011 के परिसीमन में इसका नाम भवानीपुर हुआ। इसके पहले यह काली सीट घाट विद्युत क्षेत्र का नाम से जाना जाता था। 2011 में इस सीट का एकमात्र नाम बदला नहीं था। नाम के साथ-साथ इसकी राजनीतिक रोचकता भी बढ़ गई। हुआ यूं कि 2011 के विधानसभा चुनाव में एकल कांग्रेस को प्रचंड 184 मिले। तब ममता बनर्जी केंद्र में रेल मंत्री वली और कोलकाता दक्षिण लोकसभा से न्यूनतम। अब बंगाल में आंध्र प्रदेश की सरकार बन रही थी तो मुख्यमंत्री ममता को ही शामिल किया गया था। प्रभाव भवानीपुर सीट से सुब्रत बक्शी ने पद छोड़ दिया और विधानसभा में ममता बनर्जी इस सीट से विधायक बन गईं। ममता बनर्जी ने 2016 में चुनाव लड़ा 2016 में ममता बनर्जी फिर से भवानीपुर विधानसभा सीट से चुनावी लड़की और 65 हजार से ज्यादा वोटों से चुनी गईं। 2021 विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी सीट बदल ली। हालाँकि यह बदलाव उनके आदर्श इतिहास की सबसे बड़ी गलती बन गया। मुख्यमंत्री रहते हुए वो नंदीग्राम विधानसभा चुनाव हार गए। हालांकि हार का अंतर लगभग 2 हजार वोट का ही है लेकिन हार तो हार होती है। नंदीग्राम में ममता बनर्जी को लगा झटका नंदीग्राम में ममता बनर्जी को झटका लगा तो वो फिर अपनी भवानीपुर सीट पर विधानसभा के लिए पहुंचे। इस सीट से 2021 में जीते शोभनदेब चटर्जी ने छोड़ी सीट खाली की. इस विधानसभा में ममता बनर्जी 85 हजार से अधिक लोगों से चुनाव जीतीं। अब एक बार फिर से यह आर्टिकल जंग रोचक हो गया है। इसका कारण यह है कि नंदीग्राम में ममता को हराने वाले शुभेंदु अधिकारी भवानीपुर में भी ताल ठोक रहे हैं। हालाँकि नंदीग्राम में जीत की जो खुशी थी वही भवानीपुर सीट पर भी शुभेंदु अधिकारी के मंदिर का जन्म हो जाएगा यह देखने वाली बात है। भवानीपुर ममता बनर्जी की पारंपरिक सीट रही है और उसी दक्षिण कोलकाता में यह सीट है जहां से वो न्यूनतम भी रह रही हैं। ऐसे में ममता बनर्जी से मुकाबला आसान तो नहीं हो सकता. अब देखिए कि इस बार क्या सर्च करने पर ममता के लिए इस सीट पर नजर रहेगी।

अमरनाथ की कुरकुरी टिक्की, स्वाद ऐसा कि बार-बार खाएं! नोट करें रेसिपी

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18 मार्च 2026 को 07:32 IST पर अपडेट किया गया नवरात्रि स्पेशल रेसिपी: इस चैत्र नवरात्रि के दौरान सामान्य व्रत के दौरान खाने से हटकर कुछ नया और स्वादिष्ट बनाया जा सकता है।

‘मैं इससे खुश नहीं हूं’: कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद प्रद्युत बोरदोलोई ने कहा, ‘कई मुद्दों पर मेरा अपमान किया गया’ | राजनीति समाचार

New Zealand vs South Africa Live Cricket Score, 2nd T20I: Stay updated with NZ vs SA Ball by Ball Match Updates and Live Scorecard from Hamilton. (Picture Credit: X@ICC)

आखरी अपडेट:मार्च 18, 2026, 06:49 IST असम में अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस नेता प्रद्युत बोरदोलोई ने मंगलवार को अपना इस्तीफा दे दिया। असम कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई (छवि: एक्स) विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को एक बड़ा झटका देते हुए, असम के लोकसभा सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने मंगलवार को मल्लिकार्जुन खड़गे को अपना इस्तीफा सौंप दिया, जिससे आंतरिक दुर्व्यवहार के आरोपों के बीच पार्टी के साथ उनका आजीवन जुड़ाव समाप्त हो गया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को संबोधित एक पत्र में, बोरदोलोई ने कहा, “आज अत्यधिक दुख के साथ, मैं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सभी पदों, विशेषाधिकारों और प्राथमिक सदस्यता से अपना इस्तीफा देता हूं।” पत्रकारों से बात करते हुए, बोरदोलोई ने कहा, “आज, मैंने अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांतों में से एक को त्याग दिया है, और मैं इससे खुश नहीं हूं। हालांकि, मैंने यह निर्णय इसलिए लिया क्योंकि कांग्रेस पार्टी के भीतर, खासकर असम कांग्रेस में, जो भी मुझसे संपर्क करता था, वह कई मुद्दों पर मेरा अपमान कर रहा था।” उन्होंने कहा, “यहां तक ​​कि कांग्रेस नेतृत्व भी मेरे प्रति सहानुभूति नहीं दिखा रहा था। मैं बहुत अकेला हो गया हूं क्योंकि मैं जीवन भर कांग्रेस से जुड़ा रहा हूं। लेकिन हाल ही में, मुझे जीवित रहने में काफी कठिनाई हो रही है, इसलिए मुझे यह निर्णय लेना पड़ा। हां, मैंने यह त्याग पत्र एआईसीसी अध्यक्ष को सौंप दिया है।” और पढ़ें: असम कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी से इस्तीफा दे दिया असम के मुख्यमंत्री ने दिया जवाब बोरदोलोई के इस्तीफे की खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “मैं प्रद्युत बोरदोलोई के संपर्क में नहीं हूं. अगर उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री से बात की होती तो मुझे पता होता, लेकिन मुझे नहीं लगता कि उन्होंने अभी तक किसी बीजेपी नेता से बात की है. ऐसी संभावना है कि हम प्रद्युत बोरदोलोई से संपर्क कर सकते हैं.” इससे पहले फरवरी में, कांग्रेस नेता भूपेन कुमार बोरा ने भी पार्टी से इस्तीफा दे दिया था और अपने 32 साल के राजनीतिक करियर पर प्रकाश डाला था, जिसमें विधायक से असम कांग्रेस प्रमुख बनने और राज्य में पार्टी के गठबंधन को आकार देने में उनकी भूमिका पर प्रकाश डाला गया था। उनके इस्तीफे के बाद, सरमा ने उनसे मुलाकात की, जिससे राज्य विधानसभा चुनाव से पहले एक हाई-प्रोफाइल राजनीतिक बदलाव की अटकलें तेज हो गईं। यह बैठक बोरा द्वारा कांग्रेस से अपना इस्तीफा सौंपने के एक दिन बाद हुई, जिससे चुनाव से कुछ हफ्ते पहले पार्टी के भीतर चिंताएं बढ़ गईं। असम विधानसभा चुनाव 2026 असम में 9 अप्रैल, 2026 को चुनाव होने हैं, जबकि वोटों की गिनती 4 मई, 2026 को होगी। 126 सदस्यीय असम विधान सभा के लिए मुकाबला भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन और कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गुट के इर्द-गिर्द घूमने की उम्मीद है जो अभी भी समर्थन मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। असम विधान सभा चुनाव 2021 में, भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन ने आराम से सत्ता बरकरार रखी। पार्टी ने 60 सीटें जीतीं, जबकि असम गण परिषद ने नौ सीटें हासिल कीं। इस बीच, यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल ने छह सीटें जीतीं। गठबंधन ने मिलकर बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया. कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्ष लगभग 50 सीटें जीतने में कामयाब रहा, जबकि छोटे क्षेत्रीय दलों ने मुट्ठी भर सीटें हासिल कीं। (एएनआई इनपुट के साथ) जगह : असम, भारत, भारत पहले प्रकाशित: मार्च 18, 2026, 06:49 IST समाचार राजनीति ‘मैं इससे खुश नहीं हूं’: कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद प्रद्युत बोरदोलोई ने कहा, ‘कई मुद्दों पर मेरा अपमान किया गया’ अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें

ईरान के सबसे ताकतवर अफसर लारिजानी की मौत:इजराइली हमले में बेटा भी मारा गया; तेल अवीव में 100 से ज्यादा ठिकानों पर हमला

ईरान के सबसे ताकतवर अफसर लारिजानी की मौत:इजराइली हमले में बेटा भी मारा गया; तेल अवीव में 100 से ज्यादा ठिकानों पर हमला

अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जंग का आज 19वां दिन है। इजराइल के हमले में कल ईरान के सिक्योरिटी चीफ लीडर अली लारिजानी और उनके बेटे की मौत हो गई है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इसकी पुष्टी की है। IRGC ने इसके बाद इजराइल की राजधानी तेल अवीव में 100 से ज्यादा जगहों पर मिसाइल से हमला किया। ईरान का कहना है कि यह हमला लारिजानी, उनके बेटे और उनके साथी की हत्या का बदला लेने के लिए किया गया है। ईरान ने यह भी दावा किया कि इजराइल का मजबूत डिफेंस सिस्टम इस हमले को रोक नहीं पाया। वहीं इजराइल का कहना है कि मिसाइल का मलबा गरने से एक महिला की मौत हो गई है। ट्रम्प बोले-NATO देश ईरान जंग में साथ नहीं देना चाहते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि NATO के ज्यादातर सहयोगी देश ईरान के खिलाफ चल रहे अमेरिकी सैन्य अभियान में शामिल नहीं होना चाहते। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अमेरिका वर्षों से इन देशों की सुरक्षा पर अरबों डॉलर खर्च करता रहा है, लेकिन जरूरत के समय वे साथ नहीं आते। उन्होंने NATO को ‘वन-वे स्ट्रीट’ बताया। ट्रम्प ने कहा कि उन्हें इस रवैये पर हैरानी नहीं है और अमेरिका को अब सहयोगी देशों की मदद की जरूरत भी नहीं है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान की सैन्य ताकत को काफी हद तक खत्म कर दिया है और अब वह किसी के समर्थन के बिना भी स्थिति संभाल सकता है। ट्रम्प ने यह भी कहा कि जापान, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया जैसे देशों की मदद की भी अमेरिका को जरूरत नहीं है। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच ट्रम्प का यह बयान सहयोगी देशों के साथ अमेरिका के रिश्तों में बढ़ती दूरी की ओर इशारा करता है। इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच जंग से जुड़ी 3 तस्वीरें… भारत का नंदी देवी जहाज गुजरात पहुंचा भारत का नंदा देवी जहाज होर्मुज स्ट्रेट को पार करके आज रात 2:30 बजे गुजरात के वडिनार पोर्ट पहुंचा। इस जहाज में करीब 46,500 मीट्रिक टन लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) लाई गई है। इससे पहले भारतीय जहाज शिवालिक सोमवार को LPG लेकर ‘मुंद्रा पोर्ट’ पहुंच चुका है। इस जहाज पर करीब 46 हजार मीट्रिक टन LPG है, जो लगभग 32.4 लाख घरेलू गैस सिलेंडरों के बराबर है।

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Hindi News National State Assembly Election West Bengal Assam Tamilnadu Kerala Puducherry Live गुवाहाटी/कोलकाता/चेन्नई/तिरुवनंतपुरम27 मिनट पहले कॉपी लिंक तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मौजूदा विधायक को टिकट ना दिए जाने पर विरोध प्रदर्शन किया। असम के कांग्रेस से लोकसभा सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने मंगलवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया। यह इस्तीफा राज्य में विधानसभा चुनावों से ठीक 20 दिन पहले आया है। राज्य मीडिया विभाग के अध्यक्ष बेदाब्रत बोरा ने PTI को बताया कि बोरदोलोई ने अपना इस्तीफा पत्र कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेज दिया है। राज्य के पूर्व कैबिनेट मंत्री और नगांव निर्वाचन क्षेत्र से दो बार सांसद रहे बोरदोलोई के बेटे, 9 अप्रैल को होने वाले राज्य चुनावों के लिए मार्घेरिटा सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार हैं। सांसद ने खड़गे को भेजे पत्र में कहा, आज अत्यंत दुख के साथ, मैं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सभी पदों, विशेषाधिकारों और प्राथमिक सदस्यता से अपना इस्तीफा देता हूं। उधर, पश्चिम बंगाल के साउथ 24 परगना में मौजूदा विधायक शौकत मोल्ला को कैनिंग पूर्व विधानसभा क्षेत्र से टिकट न दिए जाने के बाद उनके समर्थकों ने प्रदर्शन किया। TMC कार्यकर्ताओं ने सड़क पर टायर जलाए और नारेबाजी की। असम CM बोले- अभी बोरदोलोई के संपर्क में नहीं, आगे हो सकता है असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को कहा कि वह कांग्रेस नेता प्रद्युत बोरदोलोई के संपर्क में नहीं हैं। बोरदोलोई ने मंगलवार को नगांव से मौजूदा सांसद के पद से इस्तीफ़ा दे दिया था। CM ने आगे कहा कि भविष्य में उनसे संपर्क होने की संभावना है। TMC कार्यतकर्ताओं ने टायर जलाए, नारेबाजी की… पश्चिम बंगाल के साउथ 24 परगना में TMC कार्यकर्ताओं ने सड़क पर टायर जलाएं। TMC कार्यकर्ताओं मौजूदा विधायक शौकत मोल्ला को टिकट ना दिए जाने पर नारेबाजी की। ममता ने 74 विधायकों के टिकट काटे तृणमूल कांग्रेस पार्टी (TMC) ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की कुल 294 सीटों में से 291 सीटों पर अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया। बाकी 3 सीटें सहयोगी बीजीपीएम को दी हैं। ममता ने 74 विधायकों (करीब एक तिहाई) के टिकट काट दिए हैं। 15 विधायकों की सीटें बदली गई हैं। TMC ने सेलिब्रिटी चेहरों से दूरी बनाई, 52 महिलाएं उम्मीदवार ममता ने सेलिब्रिटी चेहरों से दूरी बनाई। जमीनी नेता और कार्यकर्ताओं पर ज्यादा भरोसा जताया। 2021 में 15 सेलिब्रिटी को टिकट दिया था। इस बार 2 सेलिब्रिटीज को टिकट मिला है। लिस्ट में 52 महिलाएं हैं। 47 उम्मीदवार अल्पसंख्यक समुदाय से हैं। 40 साल से कम उम्र के 42 उम्मीदवारों को टिकट मिला। लिस्ट में 95 कैंडिटेट्स SC/ST कैंडिडेंट्स हैं। खाड़ी की जंग पर केरल-तमिलनाडु में दंगल शुरू, प्रवासी नए ‘वोट फैक्टर’ खाड़ी देशों में करीब 90 लाख भारतीय हैं। इनमें से 35 लाख से ज्यादा केवल केरल और तमिलनाडु से हैं। युद्ध क्षेत्र में उनकी सुरक्षा और रोजगार जाने का खतरा इन राज्यों के लाखों परिवारों को सीधे प्रभावित कर रहा है। इसे देखते हुए सभी पार्टियां अपनी रणनीति बदल रही हैं। एक ओर, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने तमाम अमले को सक्रिय कर दिया है। दूसरी ओर तमिलनाडु में सत्तारूढ़ द्रमुक और केरल में वामपंथी दलों की सरकारों ने भी केंद्र पर हमले तेज कर दिए हैं। कांग्रेस प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा और आर्थिक संकट को बड़ा मुद्दा बना रही है। इस सबके बीच, भाजपा दक्षिण के दुर्ग में सेंध लगाने के लिए विकास और नए नारों के सहारे आगे बढ़ने की कोशिश में है। केरल में 40 तो तमिलनाडु में 50 सीट पर निशाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते बुधवार को केरल और तमिलनाडु में 16 हजार करोड़ की रेलवे सहित अनेक विकास योजनाओं का उदघाटन और शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं से केरल में 35-40 तो तमिलनाडु में 45-50 विधानसभा क्षेत्र के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। भाजपा ने ईसाई बहुल सीटों पर पिता-पुत्र की जोड़ी उतारी केरल में भाजपा ने कोट्टायम जिले की दो महत्वपूर्ण ईसाई बहुल सीटों पर पिता-पुत्र की जोड़ी को मैदान में उतारा है। अनुभवी नेता पीसी जॉर्ज अपनी पारंपरिक सीट पूंजार से चुनाव लड़ेंगे, जबकि उनके बेटे शोन जॉर्ज को पास की पाला सीट से टिकट दिया गया है। पीसी सात बार विधायक रह चुके हैं। तमिलनाडु में पहले दो दिन में ही 23 करोड़ रुपए जब्त तमिलनाडु में 15 मार्च से आचार संहिता लागू हो गई है। यहां दो दिनों में ही 23.28 करोड़ की नकदी और सामान जब्त किया गया है। 2021 में पिछले विधानसभा चुनाव में 428 करोड़ रुपए की जब्ती की गई थी। 4 मई को आएंगे 5 राज्यों को चुनाव के नतीजे चुनाव आयोग ने 15 मार्च को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव का ऐलान कर दिया। बंगाल में दो फेज 23 और 29 अप्रैल को वोटिंग होगी। तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में सिंगल फेज में चुनाव होंगे। तमिलनाडु में 23 अप्रैल, केरल, असम और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को मतदान होगा। पांचों राज्यों का रिजल्ट 4 मई को आएगा। राज्यवार विधानसभा चुनाव शेड्यूल… 4 राज्यों में SIR, तमिलनाडु में सबसे ज्यादा नाम कटे जिन पांच राज्यों में चुनाव होने जा रहे हैं, उनमें SIR के बाद तमिलनाडु से सबसे ज्यादा वोटर्स के नाम कटे हैं। चुनाव आयोग ने बताया कि 27 अक्टूबर 2025 को SIR प्रक्रिया शुरू होने के दौरान राज्य में कुल 6,41,14,587 वोटर थे। करीब चार महीने चली SIR में 74,07,207 लोगों के नाम हटाए गए हैं। राज्य में अब 5,67,07,380 मतदाता पंजीकृत हैं। वहीं पश्चिम बंगाल दूसरे नंबर पर है जहां करीब 58 लाख लोगों के नाम कटे हैं। फिर केरल में 8 लाख, असम में 2 लाख और पुडुचेरी में सबसे कम 77 हजार लोगों के नाम SIR प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची से हटाए गए। असम में स्पेशल रिवीजन (SR) कराया गया था। अब 5 राज्यों में चुनौती और मौजूदा स्थिति पश्चिम बंगाल- 3 बार से ममता बनर्जी ही मुख्यमंत्री: 14 साल से CM ममता के सामने BJP मुख्य चुनौती है। 2026 के चुनाव में टीएमसी जीती तो ममता बनर्जी लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनेंगी। वे ऐसा करने वाली देश पहली महिला होंगी। जयललिता के नाम 5 बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड है। हालांकि, वह 1991 से 2016 तक अलग-अलग कार्यकाल (लगातार नहीं) में मुख्यमंत्री पद

odisha cuttack scb medical college hospital fire 10 patients dead

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कटक4 घंटे पहलेलेखक: लीजा दास कॉपी लिंक ओडिशा में कटक के श्रीराम चंद्र भंज मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 14-15 मार्च की दरम्यानी रात करीब 3 बजे आग लग गई। हादसे में 10 मरीजों की मौत हो गई है। इनमें से 7 ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, 3 की मौत इलाज के दौरान हुई। आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट बताया गया है। आग पहली मंजिल पर ट्रॉमा केयर के ICU में लगी थी। यहां करीब 23 मरीज भर्ती थे। उन्हें बचाने में अस्पताल के कम से कम 11 कर्मचारी झुलस गए। एक मरीज के रिश्तेदार ने बताया- आग बहुत तेजी से फैल गई थी। उन्होंने वहां मौजूद कुछ और मरीजों के रिश्तेदारों ने मिलकर 8 से 10 मरीजों को बाहर निकालने में मदद की। उनका कहना था कि मरीजों की मदद के लिए स्टाफ में बहुत कम लोग थे। इसलिए समय रहते मरीजों को बाहर नहीं निकाला जा सका। पहले देखें, हादसे की तीन तस्वीरें… हादसे के बाद अस्पताल के बाहर मची अफरातफरी। हादसे की खबर लगते ही मरीजों के परिजन हॉस्पिटल के बाहर जमा हो गए। परिजन को ही ऑक्सीजन सिलेंडर समेत बाकी जरूरी सामान लाना पड़ा। अस्पताल में फायर सेफ्टी के इंतजाम नहीं थे घटना के बाद परिजन में काफी गुस्सा देखने को मिला। लोग सवाल उठा रहे थे कि ICU में फायर सेफ्टी का सही इंतजाम नहीं था। एक मृतक के भाई का कहना था कि अगर समय पर सही व्यवस्था होती, तो शायद कुछ लोगों की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने बताया कि आग पहली मंजिल पर ही लगी थी। लेकिन घना धुआं बाकी मंजिलों तक फैल गया था। इससे कर्मचारियों को अलग-अलग वार्डों से मरीजों को बाहर निकालना पड़ा। कर्मचारियों ने बताया कि फायर टेंडर को घटनास्थल तक पहुंचने में लगभग 30 मिनट लगे, जबकि फायर स्टेशन एससीबी परिसर के अंदर ही मौजूद था। अस्पताल के डॉक्टर और नर्सों ने तुरंत मरीजों को वहां से बाहर निकालने की कोशिश शुरू की। इसी बीच फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाया गया। अलार्म या पब्लिक अनाउंसमेंट सुनाई नहीं दिया एक मरीज के रिलेटिव ने बताया कि आईसीयू में कोई फायर प्रोटेक्शन नहीं था। आग लगने के वक्त उन्हें किसी तरह का अलार्म या पब्लिक अनाउंसमेंट भी सुनाई नहीं दिया। अगर समय रहते अलर्ट मिलता, तो शायद हालात इतने खराब नहीं होते। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि आग लगने के बाद शुरुआती कुछ मिनटों तक लोगों को यह समझ ही नहीं आया कि आखिर हुआ क्या है। धुआं बढ़ने के बाद ही लोगों में घबराहट फैली और तब जाकर मरीजों को बाहर निकालने की कोशिश शुरू हुई। डॉक्टर ने मीडिया के सवालों का जवाब देने से इनकार किया डॉक्टर और स्टाफ की भूमिका जानने के बाद हम पोस्टमॉर्टम काउंटर के सामने मौजूद एक डॉक्टर से भी बात करने की कोशिश की। हम उनसे पूछना चाहते थे कि आखिर कुल कितने लोगों की मौत हुई है। क्योंकि वहां मौजूद कुछ लोग कह रहे थे कि जितनी संख्या मीडिया में सामने आ रही है, संख्या कहीं उससे ज्यादा है। लेकिन जब हमने डॉक्टर से सवाल पूछने की कोशिश की, तो उन्होंने मीडिया के सवालों का जवाब देने से इनकार कर दिया और कुछ ही देर बाद मोटरसाइकिल के पीछे बैठकर वहां से चले गए। चश्मदीदों ने बताया कि धुआं तेजी से फैलने के कारण ICU में भर्ती कई मरीजों की हालत बिगड़ने लगी थी। जो मरीज पहले से गंभीर थे और ऑक्सीजन या वेंटिलेटर पर थे, उन्हें सांस लेने में और ज्यादा परेशानी हो रही थी। शुरुआती जानकारी के अनुसार इस हादसे में करीब 10 मरीजों की मौत हो गई। सुबह जब आग बुझी तब ICU के अंदर बेड और मशीनें जले हुए नजर आए। 10 साल पहले भी हुई 22 मौतें, दोबारा हुआ ऐसा हादसा 2016 में ओडिशा में भुवनेश्वर के एक निजी SUM हॉस्पिटल में आग लगी थी। इसमें 22 मरीजों की मौत हो गई थी। तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री अस्पताल के मालिक के करीबी थे। इसलिए उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था। अस्पताल के मालिक को भी हत्या के केस में जेल जाना पड़ा था। 2016 में SUM हॉस्पिटल की घटना के बाद उसके मालिक मनोज को गिरफ्तार किया गया था। आज SCB मेडिकल की इस घटना के बाद लोगों के मन में यही सवाल है- इस बार जिम्मेदार कौन होगा और सरकार किस पर कार्रवाई करेगी? ————————– हॉस्पिटल में आग से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… जयपुर के SMS हॉस्पिटल में आग से 8 मरीजों की मौत हुई थी, ट्रॉमा सेंटर के ICU में शॉर्ट सर्किट से हादसा अक्टूबर 2025 में जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) हॉस्पिटल के ट्रॉमा सेंटर के आईसीयू में भी आग लगी थी। इस हादसे में 8 मरीजों की मौत हुई थी। हादसे के समय आईसीयू में 11 मरीज थे। हादसे का शिकार मरीज वेंटिलेटर पर थे। यह भी पता चला था कि स्टोर रूम में लगे स्मोक डिटेक्टर ने सही से काम नहीं किया। इसके कारण अलार्म सिस्टम समय पर एक्टिवेट नहीं हुआ। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…