Sarke chunar teri sarke song land in new trouble for vulger and double meaning lyrics, National human rights comminion issued notic, lyrisist clarify

Hindi News Entertainment Bollywood Sarke Chunar Teri Sarke Song Land In New Trouble For Vulger And Double Meaning Lyrics, National Human Rights Comminion Issued Notic, Lyrisist Clarify 1 घंटे पहले कॉपी लिंक फिल्म केडीः द डेविल के गाने सरके चुनर पर विवाद जारी है। नोरा फतेही और संजय दत्त पर फिल्माए गए अश्लील लिरिक्स वाले इस गाने को आपत्ति के बाद यूट्यूब से हटा दिया गया है। शिकायत मिलने के बाद अब नेशनल ह्यूमन राइट्स कमिशन ने सेंसर बोर्ड, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और गूगल इंडिया को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। वहीं दूसरी तरफ लिरिसिस्ट ने दावा किया है कि ये विवादित गाना उन्होंने नहीं बल्कि फिल्म के डायरेक्टर ने लिखा है। नेशनल ह्यूमन राइट्स कमिशन ने मंगलवार को इन संस्थाओं को नोटिस जारी करते हुए इस गाने से जुड़े विवाद की जांच करने और 2 हफ्ते में एक्शन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। मामले की अध्यक्षता नेशनल ह्यूमन राइट कमिशन की बेंच मेंबर प्रिंयांक कानूनगो कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टता से इस गाने पर लगाए गए आरोप मानवाधिकारों के संभावित उल्लंघन है। इस मामले को ह्यूमन राइट एक्ट 1993 के तहत संज्ञान में लिया गया है। नेशनल ह्यूमन राइट कमिशन को मिली शिकायत में शिकायतकर्ता ने कहा है कि अपकमिंग फिल्म केडीः द डेविल के हाल ही में जारी हुए गाने में अश्लील और यौन संकेत देने वाले डबल मीनिंग बोल हैं, जो सार्वजनिक रूप से प्रसारण और खासकर बच्चों के लिए ठीक नहीं है। ये कंटेंट सोशल मीडिया, टीवी और कई प्लेटफॉर्म्स में उपलब्ध है, जिससे नाबालिगों के मानसिक स्वास्थ और नैतिक वातावरण पर नेगेटिव असर पड़ सकता है। शिकायतकर्ता ने इस मामले में ह्यूमन राइट कमिशन को हस्तक्षेप करने, मामले का संज्ञान लेने और इस तरह के कंटेंट पर रोक लगाने का अनुरोध किया था। विवादित गाने के खिलाफ दर्ज हुईं कई शिकायतें ह्यूमन राइट्स कमिशन के अलावा कर्नाटक और हरियाणा के स्टेट कमिशन फॉर वीमन ने भी सेंसर बोर्ड को शिकायत भेजकर चिंता व्यक्त की है। इसके अलावा फिल्म के मेकर्स के खिलाफ भी शिकायत दर्ज की गई है, जिसके बाद गाने को यूट्यूब से हटा दिया गया है। फिल्म के लिरिसिस्ट ने दी सफाई, कहा- गाना मैंने नहीं लिखा विवाद के बीच फिल्म के लिरिसिस्ट रकीब आलम ने एक स्टेटमेंट जारी कर विवाद पर सफाई दी है। उन्होंने कहा है कि ये गाना उन्होंने नहीं बल्कि फिल्म के डायरेक्टर प्रेम ने लिखा है। उन्होंने इस गाने को सिर्फ हिंदी में ट्रांसलेट किया है। लिरिसिस्ट रकीब आलम ने स्टेटमेंट में कहा, “कुछ ही घंटों में बहुत कुछ हो गया है और मैंने खुद को ऐसी स्थिति में पाया, जिसके लिए मैं तैयार नहीं था। हालांकि मेरे अनुरोध के बाद निर्देशक प्रेम ने गाना हटा लिया है, फिर भी मैं आधिकारिक रूप से यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि ‘सरके चुनर तेरी सरके’ के मूल बोल मैंने नहीं लिखे हैं। आगे उन्होंने कहा, यह गाना फिल्म के निर्देशक प्रेम ने कन्नड़ में लिखा था और मेरी भूमिका केवल उसका हिंदी में अनुवाद करने तक सीमित थी। एक गीतकार के रूप में मुझे अपने लिखे शब्दों पर गर्व है, और मूल लेखन और अनुवाद के बीच अंतर करना महत्वपूर्ण है। मुझे उम्मीद है कि इससे मेरे योगदान को लेकर कोई भी गलतफहमी दूर हो जाएगी।” उन्होंने आगे कहा, “यह समझना जरूरी है कि जब आप किसी फिल्म के लिए कॉन्ट्रैक्ट साइन करते हैं, तो आप उसकी शर्तों को पूरा करने के लिए बाध्य होते हैं। कन्नड़ के मूल बोल पढ़ने के बाद मैंने इस गाने का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया था, लेकिन मुझसे इसे हिंदी में अनुवाद करने के लिए कहा गया और कॉन्ट्रैक्ट के अनुसार मुझे अपनी भूमिका निभानी पड़ी। प्रेम मेरे अच्छे दोस्त हैं, लेकिन मैंने उन्हें चेतावनी दी थी और आगे न बढ़ने का अनुरोध भी किया था। हालांकि, उन्हें पता था कि वे क्या कर रहे हैं और इस गाने से क्या चाहते हैं।” बता दें कि रकीब आलम इससे पहले पुष्पा और पुष्पा 2 फिल्मों के लिए भी गाने लिख चुके हैं। क्या है गाने सरके चुनर तेरी सरके का पूरा विवाद पैन इंडिया फिल्म केडीः द डेविल, 30 अप्रैल 2026 को रिलीज होने वाली है। 14 मार्च को इस फिल्म का गाना सरके चुनर तेरी कई भाषाओं में रिलीज हुआ। ये गाने नोरा फतेही और संजय दत्त पर फिल्माया गया था। यूट्यूब पर गाना जारी होते ही सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा, जिसका कारण था, गाने के अश्लील और डबल मीनिंग बोल। इसके अलावा गाने में दिखाए गए डांस स्टेप्स और पिक्चराइजेशन भी काफी आपत्तिजनक थे। सोशल मीडिया पर गाने की जमकर आलोचना हुई, जिसके बाद इसके खिलाफ कई शिकायतें दर्ज हो रही हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
gujarat assembly mundra port and 3 school gest bomb threat

अहमदाबाद33 मिनट पहले कॉपी लिंक गुजरात में कई अहम स्थानों को बम ब्लास्ट से उड़ाने की धमकी मिली है। बुधवार सुबह आए ईमेल के बाद गांधीनगर में विधानसभा को खाली करवाकर चेक किया। इसके साथ मुंद्रा पोर्ट पर सुरक्षा को अलर्ट किया गया। ईमेल में अहमदाबाद के स्कूलों में भी ब्लास्ट की धमकी दी गई है। ईमेल में कच्छ जिले के मुंद्रा पोर्ट पर खड़े एलपीजी टैंकर को मिसाइल से उड़ाने की भी धमकी दी गई है। इसके साथ ही पीएम नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ राज्य के सीएम भूपेंद्र पटेल को गुजराती हिंदू चरमपंथी बताया गया है। अहमदाबाद में स्कूलों को भी दी धमकी ईमेल में अहमदाबाद के तीन स्कूलों में ब्लास्ट की धमकी दी गई है। इन स्कूलों में मेमनगर स्थित महाराजा अग्रेशन स्कूल, घाटलोडिया स्थित कैलोरेक्स स्कूल और शांति एशियन स्कूल के नाम शामिल हैं। जांच टीमों ने तीनों स्कूलों की भी जांच की, लेकिन कुछ संदिग्ध नहीं मिला। सदन की कार्यवाही एक घंटे की देरी से शुरू हुई ईमेल मिलते ही पुलिस, बम स्क्वॉड और अन्य टीमें मौके पर पहुंचीं। विधानसभा से सभी विधायकों और मंत्रियों को सदन से बाहर निकाला गया और तलाशी अभियान चलाया गया। जांच में कोई संदिग्ध वस्तु न मिलने पर सदन की कार्यवाही एक घंटे की देरी से 10 बजे शुरू हुई। गौरतलब है कि 16 फरवरी, 2026 को शुरू हुआ बजट सत्र 23 दिनों तक यानी 25 मार्च तक चलेगा। इस सत्र की 26 बैठकें होंगी। कल, व्यापार सलाहकार समिति की बैठक में यूसीसी विधेयक को सदन में लाने के मुद्दे पर चर्चा हुई और इसे सदन में किस दिन प्रस्तुत किया जाए, इस पर विचार-विमर्श किया गया। अंत में, 25 मार्च की तारीख तय की गई। विधानसभा में तलाभी अभियान की तीन तस्वीरें… साइबर टीम ईमेल के स्रोत का पता लगा रही: एसपी एसपी रवि तेजा वासमशेट्टी ने बताया कि विधानसभा की आधिकारिक ईमेल आईडी पर जीमेल के जरिए अंग्रेजी में भेजे गए एक ईमेल में विस्फोट की धमकी मिली है। घटना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने जांच की। इस मामले में केस दर्ज कर लिया गया है। जांच की जा रही है कि क्या इसका पहले भेजे गए किसी ऐसे ईमेल से कोई संबंध है या नहीं। साइबर टीमें ईमेल के स्रोत का पता लगाने की कोशिशों में जुटी हैं। गांधीनगर के एसपी रवि तेजा वासमशेट्टी। कई दिनों से जारी है धमकी का सिलसिला पिछले कुछ महीनों से गुजरात में अदालतों, नगर निगम की इमारतों, स्कूलों और कई अन्य सरकारी इमारतों को बम से उड़ाने की धमकी भरे ईमेल मिल रहे हैं। पिछले दिनों अहमदाबाद पुलिस ने पश्चिम बंगाल से एक शख्स को पकड़ा था। जिसने इसी प्रकार 50 से अधिक ईमेल देश के विभिन्न हिस्सों में भेजे थे। बाद में इस शख्स को मुंबई पुलिस ने रिमांड पर लिया था। मीडिया में खबर आते ही पैरेंट्स स्कूल पहुंचे। ——————– गुजरात से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… उत्तराखंड के बाद गुजरात में UCC की तैयारी:समिति ने CM भूपेंद्र पटेल को रिपोर्ट सौंपी उत्तराखंड के बाद अब गुजरात में भी जल्द यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता (UCC) लागू हो सकता है। यूसीसी के लिए गठित समिति ने मंगलवार को मुख्यमंत्री को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप दी है। समिति ने विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत अध्ययन के बाद इसने अंतिम सिफारिशों सहित अपनी रिपोर्ट पेश की है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Trump Signals Possible US Move on Cuba After Iran and Venezuela Operations

हवाना45 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोमवार को ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि वह ‘क्यूबा को अपने कब्जे में लेने’ का इरादा रखते हैं। उन्होंने कहा, “किसी न किसी रूप में क्यूबा को लूंगा… चाहे मैं उसे आजाद करूं या अपने नियंत्रण में ले लूं। मैं उसके साथ कुछ भी कर सकता हूं।” न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक ट्रम्प के इस बयान को काफी चौंकाने वाला माना जा रहा है। अमेरिका के इतिहास में कई राष्ट्रपति क्यूबा के साथ तनावपूर्ण रिश्तों में रहे हैं, लेकिन किसी ने भी इस तरह खुले तौर पर क्यूबा पर कब्जा करने की बात नहीं कही थी। इस साल ट्रम्प पहले ही वेनेजुएला और ईरान में सैन्य कार्रवाई कर चुके हैं। ऐसे में उनके बयान को सिर्फ मजाक या अचानक कही गई बात नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे एक संभावित अगला कदम समझा जा रहा है। अमेरिका और क्यूबा के संबंध 65 साल से खराब चल रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोमवार को ओवल ऑफिस में पत्रकारों से क्यूबा मामले को लेकर बातचीत करते हुए। अमेरिका ने क्यूबा को होने वाली तेल सप्लाई रोकी ट्रम्प ने इससे पहले रविवार को एयर फोर्स वन में भी कहा था, “मैं क्यूबा को संभाल रहा हूं… जल्द ही हम कोई डील करेंगे या जो करना होगा करेंगे।” उन्होंने यह भी साफ किया कि उनकी प्राथमिकता पहले ईरान है, उसके बाद क्यूबा। असल में, अमेरिका पहले से ही क्यूबा पर दबाव बना रहा है। जनवरी से अमेरिका ने क्यूबा को हो रही तेल सप्लाई को लगभग रोक दिया है। दूसरे देशों को भी चेतावनी दी जा रही है कि वे क्यूबा को तेल न दें। हाल ही में अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने कोलंबिया से क्यूबा जा रहे एक तेल टैंकर को भी रोक लिया। इसका असर क्यूबा में साफ दिख रहा है। 9 जनवरी के बाद से वहां कोई बड़ी तेल सप्लाई नहीं पहुंची है। वहां हालात तेजी से खराब हो रहे हैं। क्यूबा के काले बाजार में पेट्रोल करीब 35 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गया है रोजाना बिजली कट रही है, सोमवार को पूरे देश में ब्लैकआउट हुआ। अस्पतालों में सर्जरी टल रही हैं। दवाइयों की कमी हो रही है और खाने की समस्या बढ़ रही है। इन हालातों में क्यूबा की सरकार पर दबाव बढ़ गया है। क्यूबा की राजधानी हवाना में सोमवार रात ब्लैकआउट के दौरान लोग सड़क पर इकट्ठा नजर आए। ट्रम्प से डील की कोशिश कर रहा क्यूबा क्यूबा के राष्ट्रपति मिगेल डियाज-कैनेल ने हाल ही में देश को संबोधित करते हुए माना कि अमेरिका से बातचीत चल रही है और जल्द ही अर्थव्यवस्था खोलने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। साथ ही खबर यह भी है कि अमेरिका चाहता है कि क्यूबा के राष्ट्रपति पद से डियाज-कैनेल हटें। हालांकि, अमेरिका फिलहाल कास्त्रो परिवार के खिलाफ सीधी कार्रवाई की बात नहीं कर रहा है। यह रणनीति वैसी ही है जैसी वेनेजुएला में अपनाई गई थी। यानी ट्रम्प क्यूबा में सरकार बदलने के बजाय उसे अपने हिसाब से चलने के लिए मजबूर करना चाहते हैं। रूस बोला- जरूरत पड़ी तो क्यूबा की मदद करेंगे इस बीच रूस ने संकेत दिया है कि वह जरूरत पड़ने पर क्यूबा का समर्थन कर सकता है। दोनों देशों के अधिकारी लगातार संपर्क में हैं। क्यूबा में आर्थिक सुधार की भी शुरुआत दिख रही है। वहां के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ऐलान किया है कि विदेश में रहने वाले क्यूबाई लोग अब देश में निवेश कर सकेंगे, बैंकिंग कर सकेंगे और कारोबार कर सकेंगे। यह बड़ा बदलाव माना जा रहा है। हालांकि, हालात इतने खराब हैं कि इस घोषणा को टीवी पर नहीं बल्कि रेडियो पर करना पड़ा, क्योंकि बिजली नहीं थी। मंगलवार सुबह तक राजधानी हवाना के करीब 70 प्रतिशत हिस्से में बिजली नहीं थी। क्यूबा में निवेश का मौका बनाना चाहते हैं ट्रम्प ट्रम्प के बयान से यह भी साफ होता है कि वह क्यूबा को सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि कारोबारी नजरिए से भी देख रहे हैं। वह पहले से ही इस द्वीप में निवेश की संभावना देखते रहे हैं। 1998 में उनकी कंपनी ने चुपचाप क्यूबा का दौरा कराया था। 2011-12 में भी उनके संगठन के लोग वहां गोल्फ कोर्स बनाने की संभावनाएं देख चुके हैं। 2016 के चुनाव प्रचार के दौरान भी ट्रम्प ने कहा था कि क्यूबा निवेश के लिए अच्छा मौका हो सकता है। अब उन्होंने फिर कहा, “वे हमसे बात कर रहे हैं। यह एक असफल देश है। उनके पास न पैसा है, न तेल, कुछ भी नहीं है।” इसके साथ ही उन्होंने क्यूबा की जमीन और मौसम की तारीफ भी की और इसे एक सुंदर द्वीप बताया। लेकिन उनके बयान से यह भी दिखा कि उन्हें भौगोलिक जानकारी पूरी नहीं है। उन्होंने कहा कि क्यूबा तूफानों (हरिकेन) के क्षेत्र में नहीं आता, जबकि हकीकत में क्यूबा अक्सर हरिकेन से प्रभावित होता है। अंत में ट्रम्प ने ऐसे संकेत दिए जैसे क्यूबा पहले से ही अमेरिका की संपत्ति हो। उन्होंने कहा, “उन्हें हर हफ्ते तूफान के लिए हमसे पैसे नहीं मांगने पड़ेंगे।” आजाद होने के बाद क्यूबा को कंट्रोल करता था अमेरिका 1898 में स्पेन-अमेरिका युद्ध के बाद क्यूबा स्पेन से आजाद हुआ, लेकिन असली कंट्रोल अमेरिका के हाथ में चला गया। अमेरिका ने क्यूबा की राजनीति, सेना और अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर रखा। वहां की जमीन, चीनी उद्योग और कारोबार में अमेरिकी कंपनियों का दबदबा था। साल 1959 में क्रांतिकारी फिदेल कास्त्रो ने अपने गोरिल्ला सैनिकों के साथ मिलकर तानाशाह बतिस्ता को सत्ता से बेदखल कर दिया। बतिस्ता एक तानाशाह था। उसके खिलाफ लड़ाई के दौरान अमेरिका ने ही फिदेल क्रास्त्रो का समर्थन किया था। अमेरिकी अखबारों में कास्त्रो के इंटरव्यू छपते थे। सत्ता हासिल करने के बाद कास्त्रो ने बड़े बदलाव किए। उन्होंने देश में कम्युनिस्ट नीति अपनाई। अमेरिकी कंपनियों की संपत्ति जब्त कर ली और जमीन और उद्योग को सरकार के नियंत्रण में लिया। फिदेल कास्त्रो ने 1959 से 2008 तक करीब पांच दशक तक क्यूबा की कमान संभाले रखी। US ने प्रतिबंध लगाया तो सोवियत संघ का करीबी बना क्यूबा अमेरिका ने जवाब में क्यूबा पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए। व्यापार बंद कर दिया और तेल और जरूरी
जब राहुल नेतृत्व करते हैं, तो प्रियंका इंतजार करती हैं? असम, केरल में कांग्रेस की चुनावी रणनीति पर नई बहस छिड़ गई | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:मार्च 18, 2026, 12:11 IST असम में प्रियंका वाड्रा को तैनात करने के कांग्रेस के फैसले ने रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं क्योंकि केरल में उनकी सीमित उपस्थिति कैडर की बेचैनी को बढ़ाती है और आंतरिक शक्ति की गतिशीलता को उजागर करती है। यह विचित्र स्थिति एक बार फिर राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा मंडली के बीच वर्चस्व की लड़ाई को उजागर करती है। (पीटीआई) विधानसभा चुनावों से पहले, कांग्रेस ने असम में अपने दो सबसे मजबूत नेताओं- डीके शिवकुमार और प्रियंका गांधी वाड्रा- को तैनात किया है, जिससे पार्टी के भीतर कई लोग रणनीति को लेकर हैरान हैं। केरल और असम में मतदान 9 अप्रैल को होना है। प्रियंका वाड्रा को असम में पर्यवेक्षक और मुख्य अभियान प्रबंधक के रूप में नियुक्त किया जाएगा, जहां बढ़त भाजपा के पास है। चुनाव से पहले बरुण बोरा और प्रद्युत बोरदोलोई सहित कुछ बड़े नेता बाहर हुए हैं। और गौरव गोगोई को उनकी पत्नी के कथित पाकिस्तान संबंधों को लेकर भाजपा द्वारा निशाना बनाया जा रहा है, ऐसे में स्टार प्रचारक के रूप में प्रियंका वाड्रा और एक मास्टर रणनीतिकार के रूप में डीके शिवकुमार दोनों को पार्टी को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी संभालनी होगी। लेकिन उसी दिन केरल में चुनाव होने से, कोई भी आश्चर्यचकित रह जाता है कि प्रियंका वाड्रा दक्षिणी राज्य में क्या करेंगी जहां से वह सांसद हैं। वास्तव में, पिछले कुछ दिनों में, उन्हें अपने राज्य में बहुत कम देखा गया है, जहां राहुल गांधी और केसी वेणुगोपाल सहित अन्य पार्टी नेताओं के अभियान और दौरे देखे गए हैं। वायनाड में भी उनकी अनुपस्थिति ने पार्टी कैडर का ध्यान खींचा है, जिन्हें लगता है कि अपने वक्तृत्व कौशल और लोगों के साथ आसान जुड़ाव के साथ, अगर वह अपनी उपस्थिति महसूस कराती हैं तो एलडीएफ को कड़ी टक्कर दे सकती हैं। असम में डीके शिवकुमार और प्रियंका की पसंद को कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा गौरव गोगोई के हाथ को मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, जिन्हें राज्य में मौका दिया गया है। लेकिन वहां के सबसे आशावादी कांग्रेस नेताओं को भी जीत की ज्यादा उम्मीद नहीं है. इसलिए, अगर कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ता है, तो प्रियंका वाड्रा की चुनावी प्रदर्शन करने की क्षमता पर सवाल उठ सकते हैं। लेकिन अगर कांग्रेस केरल में जीतती है, तो इसका श्रेय राहुल गांधी और उनके करीबी नेताओं के समूह को जाने की संभावना है जो वहां अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं। यह विचित्र स्थिति एक बार फिर राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा मंडली के बीच वर्चस्व की लड़ाई को उजागर करती है। कई लोगों के लिए, यह स्पष्ट है कि राहुल गांधी को हमेशा अपनी बहन पर बढ़त रहेगी, जो आमतौर पर उनकी अनुपस्थिति में चमकती रही हैं, लेकिन जब वह सक्रिय होते हैं तो अक्सर उन्हें दरकिनार कर दिया जाता है। जैसा कि पार्टी हलकों में कहा जाता है: जब राहुल गांधी आसपास होते हैं, तो प्रियंका हाशिये पर धकेल दी जाती हैं। असम के नेताओं के बाहर निकलने को प्रियंका वाड्रा की झुंड को एक साथ रखने की क्षमता के लिए एक झटके के रूप में देखा जा रहा है। हार के बाद और अधिक बाहर जाना उनके रिकॉर्ड पर एक और दाग होगा, जबकि राहुल गांधी काफी हद तक बेदाग उभर सकते हैं। फिलहाल, कांग्रेस शीर्ष पर इन अजीब सत्ता समीकरणों में फंसी हुई है। पहले प्रकाशित: मार्च 18, 2026, 12:11 IST समाचार राजनीति जब राहुल नेतृत्व करते हैं, तो प्रियंका इंतजार करती हैं? असम, केरल में कांग्रेस की चुनावी रणनीति पर नई बहस छिड़ गई है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कांग्रेस विधानसभा चुनाव(टी)कांग्रेस नेता असम(टी)प्रियंका गांधी वाद्रा(टी)डीके शिवकुमार(टी)केरल चुनाव(टी)राहुल गांधी(टी)गौरव गोगोई(टी)बीजेपी असम
coconut water vs sugarcane juice| नारियल पानी और गन्ने के रस में कौन बेहतर

Last Updated:March 18, 2026, 11:48 IST coconut water vs sugarcane juice : मार्च लगभग बीतने को है. अप्रैल में चिलचिलाती गर्मी का कहर होना तय है. गर्मी आते ही पेय पदार्थों की मांग बढ़ जाती है. सड़क किनारे नारियल का पहाड़ खड़ा होने लगता है. लोग नारियल पानी खूब पीने लगते हैं. दूसरी ओर गर्मी के मौसम में गन्ने का जूस भी बेहद लोकप्रिय हो जाता है. ठंडा-मीठा गन्ने का रस हो या ठेले पर सजे हरे नारियल, दोनों ही हमें अपनी ओर खींचते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सेहत के नजरिए से इन दोनों में से कौन सा ड्रिंक ‘नंबर वन’ है? जहा एक तरफ नारियल पानी इलेक्ट्रोलाइट्स का खजाना है, वहीं गन्ने का रस इंस्टेंट एनर्जी देता है. लेकिन दोनों में बेस्ट कौन है. आइए जानते हैं. गर्मी दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है, ऐसे में लोग थकान दूर करने, शरीर को ठंडा रखने और गर्मी से राहत पाने के लिए अलग-अलग चीजों की तरफ ध्यान दे रहे हैं. ज्यादातर लोग गर्मियों में नारियल पानी और गन्ने का जूस पीते हैं. सिर्फ गर्मियों में ही नहीं, साल के कई महीनों में इन्हें पीने से भी कई फायदे मिलते हैं, ये बात जानकार लोग जानते हैं. इस लेख में हम देखेंगे कि गर्मियों में इन दोनों में से कौन सा ज्यादा अच्छा है. गर्मियों में गन्ने का जूस पीने के फायदे: गर्मियों में गन्ने का जूस पीने के कई फायदे होते हैं. यह पूरी तरह से प्राकृतिक पेय है, जिसे पीते ही शरीर को तुरंत ऊर्जा मिलती है और थकान दूर हो जाती है. इसमें मौजूद प्राकृतिक शुगर शरीर को ठंडक देती है और डिहाइड्रेशन से बचाती है. गन्ने का जूस शरीर में मौजूद हानिकारक टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद करता है, जिससे खून साफ होता है और त्वचा भी बेहतर बनती है. यह लिवर को स्वस्थ रखने में सहायक है और पाचन को भी सुधारता है. नियमित मात्रा में इसका सेवन शरीर को ताजगी और स्फूर्ति देता है. खासकर गर्मियों में गन्ने का जूस पीना शरीर को ठंडक देने में मदद करता है और इससे हीट स्ट्रोक का खतरा कम होता है. गन्ने के जूस में मौजूद प्राकृतिक तत्व हमारी त्वचा को चमकदार और शरीर को हाइड्रेटेड रखने में मदद करते हैं. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स इम्यूनिटी बढ़ाने और गर्मियों में होने वाले संक्रमण से बचाने में भी मदद करते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google गर्मी के मौसम में नारियल पानी पीने के फायदे: जब तेज धूप होती है, तब नारियल पानी पीने से हमारे शरीर में पानी की कमी नहीं होती. यह हमारे पाचन को भी बेहतर बनाता है और एसिडिटी की समस्या को कम करता है. खासकर सुबह खाली पेट नारियल पानी पीने से वजन कंट्रोल करने में मदद मिलती है, क्योंकि इसमें कैलोरी कम होती है. इसके अलावा, नारियल पानी ब्लड प्रेशर को भी कंट्रोल में रखने में मदद करता है. गर्मियों में नारियल पानी या गन्ने का जूस, इनमें से कौन सा बेहतर है.? दोनों ही गर्मी के मौसम में हमें कई फायदे देते हैं. इसलिए अपनी जरूरत के हिसाब से इनमें से किसी एक को चुनकर आप पी सकते हैं. या फिर दोनों को बदल-बदल कर भी पी सकते हैं. हर व्यक्ति का शरीर अलग-अलग तरह का होता है. अगर शरीर में मैग्नीशियम, सोडियम और पोटैशियम का बैलेंस गड़बड़ है तो नारियल पानी बेस्ट है. अगर आपको तुरंत एनर्जी चाहिए तो आप गन्ने का जूस पी सकते हैं. अगर आप अपने शरीर को हाइड्रेटेड रखना चाहते हैं तो नारियल पानी पी सकते हैं. डायबिटीज के मरीज अगर नारियल पानी पिएंगे तो उनकी शुगर कंट्रोल में रहेगी. वहीं गन्ने के जूस में ज्यादा शुगर होती है, इसलिए इसे कम मात्रा में पिएंगे तो गर्मी से राहत मिलेगी. (डिस्क्लेमर: यह लेख लोगों की मान्यताओं और इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर दिया गया है. News18 ने इसकी पुष्टि नहीं की है. इसे पूरी तरह सच मानने के लिए कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है.) First Published : March 18, 2026, 11:48 IST
असम चुनाव के लिए आप ने जारी की दूसरी सूची, 6 सीटों के नाम, जानिए मैदान में कहां से उतरें

आम आदमी पार्टी (आप) ने असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए अपनी दूसरी सूची जारी कर दी है। पार्टी ने कुल 6 नए आदिवासियों के नाम घोषित किए हैं, जिनमें त्रिपुरा की हाई-प्रोफाइल दिसपुर सीट भी शामिल है। किन जोड़ों को कौन सी सीट से मिला मौका? इस सूची में जिन बेंजामिन के नाम शामिल हैं, उनमें बरहमपुर से रानू टेरॉन्ग, दीफू से बिरेश दिफोसा, जोरहाट से प्रणब प्रियंगशु डॉक्टर्स, नॉर्थ करीमगंज से सय्यदुल हक, पलाश बाबा से एल्विन बरुआ और दिसपुर से बल्लव पात्रा शामिल हैं। दिसपुर सीट खास मानी जा रही है क्योंकि यहां मुख्यमंत्री का कार्यालय है और यह कॉलेज की सबसे महत्वपूर्ण बैठक में से एक है। बल्लाव पात्रा की पार्टी ने इसी सीट से चुनाव लड़ने का फैसला किया है। AAP ने असम में 20 वोट डाले कुछ दिन पहले AAP ने अपनी पहली लिस्ट जारी की थी, जिसमें 14 गरीबों के नाम थे. अब इस दूसरी सूची के साथ पार्टी के कुल हिस्सेदारी की संख्या 20 हो गई है. असम में विधानसभा चुनाव अप्रैल 2026 में होने वाले हैं और AAP अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर रही है. पार्टी का कहना है कि वह असम की जनता के बीच साफा-सुथरी राजनीति, अच्छे शासन और विकास के समर्थकों के बीच वोट मांगेगी। इस सूची के बाद असम की राजनीति में चर्चा तेज हो गई है कि आप इस बार टिकट पर मजबूत चुनौती पेश कर सकती है। यह लिस्ट जारी होने के बाद असम की राजनीति में हलचल मच गई है। बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही आप को अब गंभीर चुनौती के रूप में देख रहे हैं। खासकर दिसपुर जैसी हाई-प्रोफाइल सीट पर आप का उम्मीदवार बीजेपी के लिए चिंता का विषय बन सकता है. पार्टी ने कहा है कि जल्द ही और लिस्ट जारी होगी। असम में कुल 126 सीटें हैं और आप अपनी जांच की कोशिश में लगी है।
World News Updates; Trump Pakistan China

1 मिनट पहले कॉपी लिंक नॉर्थ कोरिया के संसदीय चुनाव में किम जोंग उन की पार्टी ने जीत दर्ज की है। 15 मार्च को हुए चुनाव में वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया और उसके सहयोगी दलों को 99.93% वोट मिले और सभी सीटों पर कब्जा किया गया। राज्य मीडिया के मुताबिक 99.99% प्रतिशत मतदान हुआ। सुप्रीम पीपुल्स असेंबली के 687 डिप्टी चुने गए, जिसमें सिर्फ 0.07% वोट विरोध में बताए गए। नई संसद का पहला सत्र जल्द प्योंगयांग में होगा, जिसमें देश के शीर्ष नेतृत्व का चुनाव और संविधान में संशोधन पर चर्चा होगी। रिपोर्ट्स के अनुसार संविधान में दक्षिण कोरिया को दुश्मन देश घोषित करने का प्रावधान जोड़ा जा सकता है। इस सत्र में किम जोंग उन का फिर से सर्वोच्च नेता चुना जाना तय माना जा रहा है। चुनाव में 70% से ज्यादा सांसद बदले गए हैं, जिसे सत्ता को और मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। नई सूची में किम यो-जोंग, विदेश मंत्री चोए सोन-हुई और किम के करीबी सहयोगी जो योंग-वोन शामिल हैं, जबकि पूर्व अध्यक्ष चोए र्योंग-हे को हटाया गया है। हालांकि उत्तर कोरिया की संसद को अक्सर औपचारिक माना जाता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
LPG सिलेंडर की कमी पर अक्षय कुमार ने दिया रिएक्शन:पत्नी ट्विंकल ने 2 इंडक्शन ऑर्डर किए, कहा- अभी तक तो कोई प्रॉब्लम नहीं है

ईरान-इजरायल जंग के बीच भारत में LPG सिलेंडर की किल्लत हो गई है। देश में कमर्शियल सिलेंडर पर रोक लगा दी गई, जिससे आम जनता के बीच भी सिलेंडर के लिए मारामारी हो रही है। इसी बीच एक्टर अक्षय कुमार ने इस किल्लत पर रिएक्शन दिया है। उनका कहना है कि उनकी पत्नी ट्विंकल खन्ना ने खबर मिलते ही इंडक्शन खरीद लिया है। अक्षय कुमार मंगलवार को बीएमसी कमिश्नर भूषण गगरानी की प्रेस कॉन्फ्रेंस का हिस्सा बने थे। इस दौरान उनसे गैस सिलेंडर की किल्लत होने पर सवाल किया गया, तो एक्टर ने कहा, “तो मेरी पत्नी ने परसों, देखिए, अभी तक तो कोई समस्या नहीं है। लेकिन जो नया ओवन आया है, जो इंडक्शन जैसा है, तो हमने दो खरीद लिए हैं। तो आप भी खरीद लीजिए।” जब एक्टर से पूछा गया कि क्या वो इंडक्शन उनके घर पहुंच गया है, तो एक्टर ने कहा, “फिलहाल तो मुझे यह नहीं पता, लेकिन मुझे इतना मालूम है कि मेरी पत्नी ने उसे ऑर्डर कर दिया है। वह घर पर पहुंचा है या नहीं, यह मुझे अभी तक पता नहीं है।” गोलमाल 5 में नजर आएंगे अक्षय कुमार बता दें कि अक्षय कुमार के पास इन दिनों कई बड़ी फिल्में हैं। वो जल्द ही फिल्म भूत बंगला में नजर आएंगे, जो एक हॉरर कॉमेडी फिल्म है। 2 अप्रैल को रिलीज होने वाली इस फिल्म में अक्षय कुमार के साथ वामिका गब्बी, तब्बू, परेश रावल और राजपाल यादव अहम किरदारों में हैं। इसके अलावा अक्षय वेलकम टू द जंगल, हेरा फेरी 3 और हैवान में भी नजर आने वाले हैं। इसके अलावा अक्षय ने हाल ही में रोहित शेट्टी की गोलमाल फ्रैंचाइली की 5वीं फिल्म गोलमाल भी शुरू कर दी है।
बीजेपी के हो जाएंगे प्रद्योत बोरदोलोई, बेटे की भी पार्टी में एंट्री, जानें कहां से बचे टिकट?

असम कांग्रेस को चुनाव से ठीक पहले बड़ा झटका लगा है. नागाओं के अल्पसंख्यक और वरिष्ठ नेता प्रद्योत बोरदोलोई ने कल कांग्रेस से अपने सभी पूर्व और प्राथमिक सदस्यों को छोड़ दिया। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, आज यानी बुधवार को करीब 11 बजे असम बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पार्टी अध्यक्ष दिलीप साकिया की पुष्टि बीजेपी में हो सकती है। अपमान और असहिष्णुता का आरोप लगाते हुए कांग्रेस छोड़ दें प्रद्योत बोरदोलोई ने अपना इस्तीफा पत्र कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजा। इस पत्र की एक पंक्ति में उन्होंने लिखा, ‘अत्याधिक दुख के साथ आज मैं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सभी पदों, पुरोहितों और प्राथमिक मठों से मुक्त हो रहा हूं।’ उन्होंने पार्टी में ‘अपमान’ और असंतोष का इज़हार किया है। सूत्र बताते हैं कि आज उनके बेटे सिंबल बोर्डोलाई भी कांग्रेस से छूट सकते हैं। प्रतीक बोर्डोलाई असम विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की सूची में मार्गेरिटा सीट का नाम रखा गया था। अगर पिता-पुत्र दोनों बीजेपी में शामिल हैं तो पार्टी में उन्हें दो बड़ी सीटें मिल सकती हैं. गोदाम के अनुसार, प्रद्योत बोरदोलोई को दिसपुर सीट से टिकट मिलने की संभावना है। उनके बेटे को मार्गेरिटा सीट से उम्मीदवार बनाया जा सकता है। बीजेपी ने बोर्डोलाई को पहले ही न्योता दिया असम बीजेपी अध्यक्ष दिलीप साकिया और मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सबसे पहले प्रद्योत बोरदोलोई को खुला न्योता दिया है। हिमंता सरमा ने कहा कि भूपेन बोरा की तरह बोरदोलाई का भी स्वागत किया जाएगा और उन्हें चुनाव लड़ने का मौका दिया जाएगा. प्रद्योत बोरदोलोई कांग्रेस में लंबे समय से सक्रिय थे। वे पूर्व मंत्री रह चुके हैं और दो बार नामांकित चुने गए हैं। उनके असम जाने से कांग्रेस को बड़ा नुकसान माना जा रहा है, खासकर जब विधानसभा चुनाव अप्रैल 2026 में होने वाले हैं। यह घटना असम की राजनीति में हलचल मचा रही है। बीजेपी इसे कांग्रेस की ताकत का संकेत बता रही है.
‘हमें उन्हें धन्यवाद देना चाहिए’: आरएसएस का कहना है कि प्रियांक खड़गे विवाद से चित्तपुर कैडर में मतदान बढ़ा | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:मार्च 18, 2026, 10:45 IST क्षेत्रीय कार्यवाह एन थिप्पेस्वामी ने कहा कि कांग्रेस द्वारा किए गए प्रचार ने एक साधारण मार्च, जो नियमित कार्यक्रम का हिस्सा होता, को एक बड़ी लामबंदी अभ्यास में बदल दिया। यह टिप्पणी नवंबर 2025 में चित्तपुर में पथ संचलन के बाद राजनीतिक और कानूनी विवाद शुरू होने के कुछ महीनों बाद आई है, जिसमें कालाबुरागी जिला प्रशासन ने शुरू में कानून और व्यवस्था की चिंताओं का हवाला देते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया था। (पीटीआई) पहली बार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने चित्तपुर में अपने पथ संचलन (झंडा मार्च) को लेकर हुए विवाद पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि संगठन “खुश” है कि कांग्रेस ने आपत्ति जताई, क्योंकि इस विवाद से उसे जमीन पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को जुटाने में मदद मिली। क्षेत्रीय कार्यवाह एन थिप्पेस्वामी ने कहा कि कांग्रेस द्वारा किए गए प्रचार ने एक साधारण मार्च को, जो उनके नियमित कार्यक्रम का हिस्सा था, एक बड़ी लामबंदी अभ्यास में बदल दिया। उन्होंने मंत्री प्रियांक खड़गे का नाम लिए बिना कहा, “उन्हें (कांग्रेस) अब अनुभव हो गया है कि अगर वे हमारे रास्ते में आते हैं तो क्या होगा। चित्तपुर में, हमें लगभग 400-500 लोगों को इकट्ठा करना होगा।” खड़गे ने आरएसएस के बारे में खुलकर बात की थी और राज्य में उनकी गतिविधियों और पथ संचलन (रूट मार्च) को लेकर आरएसएस के खिलाफ एक मजबूत, लड़ाकू रुख अपनाया था। उन्होंने कहा, “उन्होंने जो प्रचार किया, उसके कारण हमारे लगभग 8,000 कार्यकर्ता बिना किसी प्रयास के एकत्र हो गए। हमें उन्हें धन्यवाद देना चाहिए। उनके कारण हमें घंटों प्रचार मिला। उन्होंने हमें रोकने की कोशिश की, और लोग अपने आप आ गए। हमें घरों में जाकर अपील करने की जरूरत नहीं पड़ी। लोग अपने आप संघ के पास आए।” यह टिप्पणी नवंबर 2025 में चित्तपुर में पथ संचलन के बाद राजनीतिक और कानूनी विवाद शुरू होने के कुछ महीनों बाद आई है, जिसमें कालाबुरागी जिला प्रशासन ने शुरू में कानून और व्यवस्था की चिंताओं का हवाला देते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया था। चित्तपुर, जो कालाबुरागी जिला प्रशासन के अंतर्गत आता है, का प्रतिनिधित्व खड़गे करते हैं, जो तीन बार इस सीट से चुने गए हैं। जिला प्रशासन ने यह कहते हुए मार्च की अनुमति खारिज कर दी थी कि इससे तनाव पैदा हो सकता है और सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ सकती है। खड़गे ने आरएसएस पर “प्रतिष्ठा का मुद्दा” बनाने का प्रयास करने और चित्तपुर में पथ संचलन की योजना बनाकर उन्हें निशाना बनाने का आरोप लगाया, खासकर एक कथित आरएसएस अनुयायी की गिरफ्तारी के बाद जिसने उन्हें फोन पर धमकी दी थी। हालाँकि, कई याचिकाओं पर सुनवाई के बाद, कर्नाटक उच्च न्यायालय ने पिछले साल 16 नवंबर को कड़ी शर्तों के साथ जुलूस की अनुमति दी, यह देखते हुए कि शांतिपूर्ण जुलूस पर रोक लगाना असंवैधानिक होगा। अदालत ने आरएसएस को एक विशेष समय के बीच 325 प्रतिभागियों की सख्त सीमा के साथ पथ संचलन निकालने की अनुमति दी थी, जिसमें केवल 300 कार्यकर्ता और 25 बैंड सदस्य शामिल थे। मार्च की मंजूरी के लिए कर्नाटक उच्च न्यायालय में कई याचिकाएं दायर होने के बाद अनुमति दी गई थी। अदालत के निर्देशों के बाद, जिला प्रशासन ने प्रतिभागियों की संख्या और अवधि को दोहराते हुए औपचारिक अनुमति दी। आरएसएस ने कहा कि कुल मिलाकर, 2.21 लाख लोगों की भागीदारी के साथ 562 पथ संचलन आयोजित किए गए, 48.68 लाख घरों तक पहुंच बनाई गई और 7,262 विजयदशमी कार्यक्रमों में 2.77 लाख लोगों की भागीदारी देखी गई। कानूनी प्रक्रिया के अलावा, दो शांति बैठकें आयोजित की गईं, लेकिन दोनों विफल रहीं और मामला अंततः एचसी में तय हुआ। आरएसएस का कहना है कि संगठन लगातार कर्नाटक में अपना विस्तार कर रहा है। 2025 और 2026 के बीच, राज्य में 4,127 दैनिक शाखाएं दर्ज की गईं। थिप्पेस्वामी की टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब आरएसएस दक्षिणी क्षेत्र में एक बड़े संगठनात्मक पुनर्गठन की योजना बना रहा है। वर्तमान में, कर्नाटक उत्तर कर्नाटक, दक्षिण कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के साथ एक बड़े “क्षेत्र” का हिस्सा है। आरएसएस ने कर्नाटक को एक अलग “प्रांत” या राज्य इकाई के रूप में बनाने का फैसला किया है, यह कदम 2028 के विधानसभा चुनावों से पहले 2027 तक लागू होने की उम्मीद है। नई संरचना के तहत, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना स्वतंत्र संगठनात्मक इकाइयों के रूप में कार्य करेंगे। पहले प्रकाशित: मार्च 18, 2026, 10:45 IST समाचार राजनीति ‘हमें उन्हें धन्यवाद देना चाहिए’: आरएसएस का कहना है कि प्रियांक खड़गे विवाद से चित्तपुर कैडर में मतदान बढ़ा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें








