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Trump Signals Possible US Move on Cuba After Iran and Venezuela Operations

Trump Signals Possible US Move on Cuba After Iran and Venezuela Operations

हवाना45 मिनट पहले

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अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोमवार को ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि वह ‘क्यूबा को अपने कब्जे में लेने’ का इरादा रखते हैं। उन्होंने कहा, “किसी न किसी रूप में क्यूबा को लूंगा… चाहे मैं उसे आजाद करूं या अपने नियंत्रण में ले लूं। मैं उसके साथ कुछ भी कर सकता हूं।”

न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक ट्रम्प के इस बयान को काफी चौंकाने वाला माना जा रहा है। अमेरिका के इतिहास में कई राष्ट्रपति क्यूबा के साथ तनावपूर्ण रिश्तों में रहे हैं, लेकिन किसी ने भी इस तरह खुले तौर पर क्यूबा पर कब्जा करने की बात नहीं कही थी।

इस साल ट्रम्प पहले ही वेनेजुएला और ईरान में सैन्य कार्रवाई कर चुके हैं। ऐसे में उनके बयान को सिर्फ मजाक या अचानक कही गई बात नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे एक संभावित अगला कदम समझा जा रहा है। अमेरिका और क्यूबा के संबंध 65 साल से खराब चल रहे हैं।

राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोमवार को ओवल ऑफिस में पत्रकारों से क्यूबा मामले को लेकर बातचीत करते हुए।

राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोमवार को ओवल ऑफिस में पत्रकारों से क्यूबा मामले को लेकर बातचीत करते हुए।

अमेरिका ने क्यूबा को होने वाली तेल सप्लाई रोकी

ट्रम्प ने इससे पहले रविवार को एयर फोर्स वन में भी कहा था, “मैं क्यूबा को संभाल रहा हूं… जल्द ही हम कोई डील करेंगे या जो करना होगा करेंगे।” उन्होंने यह भी साफ किया कि उनकी प्राथमिकता पहले ईरान है, उसके बाद क्यूबा।

असल में, अमेरिका पहले से ही क्यूबा पर दबाव बना रहा है। जनवरी से अमेरिका ने क्यूबा को हो रही तेल सप्लाई को लगभग रोक दिया है। दूसरे देशों को भी चेतावनी दी जा रही है कि वे क्यूबा को तेल न दें। हाल ही में अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने कोलंबिया से क्यूबा जा रहे एक तेल टैंकर को भी रोक लिया।

इसका असर क्यूबा में साफ दिख रहा है। 9 जनवरी के बाद से वहां कोई बड़ी तेल सप्लाई नहीं पहुंची है। वहां हालात तेजी से खराब हो रहे हैं। क्यूबा के काले बाजार में पेट्रोल करीब 35 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गया है

रोजाना बिजली कट रही है, सोमवार को पूरे देश में ब्लैकआउट हुआ। अस्पतालों में सर्जरी टल रही हैं। दवाइयों की कमी हो रही है और खाने की समस्या बढ़ रही है। इन हालातों में क्यूबा की सरकार पर दबाव बढ़ गया है।

क्यूबा की राजधानी हवाना में सोमवार रात ब्लैकआउट के दौरान लोग सड़क पर इकट्ठा नजर आए।

क्यूबा की राजधानी हवाना में सोमवार रात ब्लैकआउट के दौरान लोग सड़क पर इकट्ठा नजर आए।

ट्रम्प से डील की कोशिश कर रहा क्यूबा

क्यूबा के राष्ट्रपति मिगेल डियाज-कैनेल ने हाल ही में देश को संबोधित करते हुए माना कि अमेरिका से बातचीत चल रही है और जल्द ही अर्थव्यवस्था खोलने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

साथ ही खबर यह भी है कि अमेरिका चाहता है कि क्यूबा के राष्ट्रपति पद से डियाज-कैनेल हटें। हालांकि, अमेरिका फिलहाल कास्त्रो परिवार के खिलाफ सीधी कार्रवाई की बात नहीं कर रहा है। यह रणनीति वैसी ही है जैसी वेनेजुएला में अपनाई गई थी।

यानी ट्रम्प क्यूबा में सरकार बदलने के बजाय उसे अपने हिसाब से चलने के लिए मजबूर करना चाहते हैं।

रूस बोला- जरूरत पड़ी तो क्यूबा की मदद करेंगे

इस बीच रूस ने संकेत दिया है कि वह जरूरत पड़ने पर क्यूबा का समर्थन कर सकता है। दोनों देशों के अधिकारी लगातार संपर्क में हैं।

क्यूबा में आर्थिक सुधार की भी शुरुआत दिख रही है। वहां के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ऐलान किया है कि विदेश में रहने वाले क्यूबाई लोग अब देश में निवेश कर सकेंगे, बैंकिंग कर सकेंगे और कारोबार कर सकेंगे। यह बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

हालांकि, हालात इतने खराब हैं कि इस घोषणा को टीवी पर नहीं बल्कि रेडियो पर करना पड़ा, क्योंकि बिजली नहीं थी। मंगलवार सुबह तक राजधानी हवाना के करीब 70 प्रतिशत हिस्से में बिजली नहीं थी।

क्यूबा में निवेश का मौका बनाना चाहते हैं ट्रम्प

ट्रम्प के बयान से यह भी साफ होता है कि वह क्यूबा को सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि कारोबारी नजरिए से भी देख रहे हैं। वह पहले से ही इस द्वीप में निवेश की संभावना देखते रहे हैं। 1998 में उनकी कंपनी ने चुपचाप क्यूबा का दौरा कराया था। 2011-12 में भी उनके संगठन के लोग वहां गोल्फ कोर्स बनाने की संभावनाएं देख चुके हैं।

2016 के चुनाव प्रचार के दौरान भी ट्रम्प ने कहा था कि क्यूबा निवेश के लिए अच्छा मौका हो सकता है। अब उन्होंने फिर कहा, “वे हमसे बात कर रहे हैं। यह एक असफल देश है। उनके पास न पैसा है, न तेल, कुछ भी नहीं है।”

इसके साथ ही उन्होंने क्यूबा की जमीन और मौसम की तारीफ भी की और इसे एक सुंदर द्वीप बताया। लेकिन उनके बयान से यह भी दिखा कि उन्हें भौगोलिक जानकारी पूरी नहीं है। उन्होंने कहा कि क्यूबा तूफानों (हरिकेन) के क्षेत्र में नहीं आता, जबकि हकीकत में क्यूबा अक्सर हरिकेन से प्रभावित होता है।

अंत में ट्रम्प ने ऐसे संकेत दिए जैसे क्यूबा पहले से ही अमेरिका की संपत्ति हो। उन्होंने कहा, “उन्हें हर हफ्ते तूफान के लिए हमसे पैसे नहीं मांगने पड़ेंगे।”

आजाद होने के बाद क्यूबा को कंट्रोल करता था अमेरिका

1898 में स्पेन-अमेरिका युद्ध के बाद क्यूबा स्पेन से आजाद हुआ, लेकिन असली कंट्रोल अमेरिका के हाथ में चला गया। अमेरिका ने क्यूबा की राजनीति, सेना और अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर रखा। वहां की जमीन, चीनी उद्योग और कारोबार में अमेरिकी कंपनियों का दबदबा था।

साल 1959 में क्रांतिकारी फिदेल कास्त्रो ने अपने गोरिल्ला सैनिकों के साथ मिलकर तानाशाह बतिस्ता को सत्ता से बेदखल कर दिया। बतिस्ता एक तानाशाह था। उसके खिलाफ लड़ाई के दौरान अमेरिका ने ही फिदेल क्रास्त्रो का समर्थन किया था।

अमेरिकी अखबारों में कास्त्रो के इंटरव्यू छपते थे। सत्ता हासिल करने के बाद कास्त्रो ने बड़े बदलाव किए। उन्होंने देश में कम्युनिस्ट नीति अपनाई। अमेरिकी कंपनियों की संपत्ति जब्त कर ली और जमीन और उद्योग को सरकार के नियंत्रण में लिया।

फिदेल कास्त्रो ने 1959 से 2008 तक करीब पांच दशक तक क्यूबा की कमान संभाले रखी।

फिदेल कास्त्रो ने 1959 से 2008 तक करीब पांच दशक तक क्यूबा की कमान संभाले रखी।

US ने प्रतिबंध लगाया तो सोवियत संघ का करीबी बना क्यूबा

अमेरिका ने जवाब में क्यूबा पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए। व्यापार बंद कर दिया और तेल और जरूरी सामान की सप्लाई रोक दी। इससे क्यूबा की इकोनॉमी खराब होने लगी। इसके बाद क्यूबा ने सोवियत संघ (रूस) की तरफ रुख कर लिया। इस वजह से अमेरिका और क्यूबा के संबंध और खराब होते चले गए।

इन दोनों के संबंध इतने खराब थे कि 55 साल तक कोई अमेरिकी राष्ट्रपति क्यूबा गया ही नहीं। ये सिलसिला 2015 में तब खत्म हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में बराक ओबामा क्यूबा गए, लेकिन तब तक फिदेल की जगह क्यूबा में उनके भाई राउल सत्ता संभाल चुके थे।

अमेरिका ने कास्त्रो को मारने की 600 बार कोशिश की थी

फिदेल कास्त्रो को अमेरिका अपने सबसे बड़े दुश्मनों में से एक मानता था। कई रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ने फिदेल कास्त्रो को मारने के लिए 60 साल में 600 से ज्यादा बार असफल कोशिश की। अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने फिदेल को मारने के लिए जहरीले सिगार से लेकर जहरीले पेन तक कई उपाय आजमाए थे, हालांकि ये सभी प्रयास नाकाम रहे थे।

एक बार फिदेल कास्त्रो को मारने की साजिश में शामिल होने के लिए उनकी एक पूर्व गर्लफ्रेंड भी तैयार हो गई थी। इस साजिश के तहत कास्त्रो को मारने के लिए जहरीली कोल्ड क्रीम का जार उन तक पहुंचाना था, लेकिन कास्त्रो को पहले ही इसकी भनक लग गई और ये योजना भी नाकाम हो गई। 25 नवंबर 2016 को 90 साल की उम्र में क्यूबा के हवाना में फिदेल कास्त्रो का निधन हो गया था।

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ईरान के साथ जंग में अकेले पड़े ट्रम्प: NATO देश बोले- ये हमारी लड़ाई नहीं, होर्मुज का रास्ता खुलवाने से इनकार

ईरान में खामेनेई समेत 40 से भी ज्यादा अधिकारियों के मारे जाने के बाद अमेरिका को यह जंग बड़ी कामयाबी नजर आ रही थी। लेकिन 17 दिन बाद हालात बदल चुके हैं। युद्ध का कोई साफ अंत नजर नहीं आ रहा है।

ईरान ने जवाब में होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते तेल आपूर्ति रोक दी, जिससे दुनिया की अर्थव्यवस्था पर बड़ी चोट पहुंची है। ट्रम्प अब अपने सहयोगी नाटो देशों से होर्मुज में रास्ता खुलवाने की अपील कर रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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Trump Signals Possible US Move on Cuba After Iran and Venezuela Operations

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हवाना45 मिनट पहले

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अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोमवार को ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि वह ‘क्यूबा को अपने कब्जे में लेने’ का इरादा रखते हैं। उन्होंने कहा, “किसी न किसी रूप में क्यूबा को लूंगा… चाहे मैं उसे आजाद करूं या अपने नियंत्रण में ले लूं। मैं उसके साथ कुछ भी कर सकता हूं।”

न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक ट्रम्प के इस बयान को काफी चौंकाने वाला माना जा रहा है। अमेरिका के इतिहास में कई राष्ट्रपति क्यूबा के साथ तनावपूर्ण रिश्तों में रहे हैं, लेकिन किसी ने भी इस तरह खुले तौर पर क्यूबा पर कब्जा करने की बात नहीं कही थी।

इस साल ट्रम्प पहले ही वेनेजुएला और ईरान में सैन्य कार्रवाई कर चुके हैं। ऐसे में उनके बयान को सिर्फ मजाक या अचानक कही गई बात नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे एक संभावित अगला कदम समझा जा रहा है। अमेरिका और क्यूबा के संबंध 65 साल से खराब चल रहे हैं।

राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोमवार को ओवल ऑफिस में पत्रकारों से क्यूबा मामले को लेकर बातचीत करते हुए।

राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोमवार को ओवल ऑफिस में पत्रकारों से क्यूबा मामले को लेकर बातचीत करते हुए।

अमेरिका ने क्यूबा को होने वाली तेल सप्लाई रोकी

ट्रम्प ने इससे पहले रविवार को एयर फोर्स वन में भी कहा था, “मैं क्यूबा को संभाल रहा हूं… जल्द ही हम कोई डील करेंगे या जो करना होगा करेंगे।” उन्होंने यह भी साफ किया कि उनकी प्राथमिकता पहले ईरान है, उसके बाद क्यूबा।

असल में, अमेरिका पहले से ही क्यूबा पर दबाव बना रहा है। जनवरी से अमेरिका ने क्यूबा को हो रही तेल सप्लाई को लगभग रोक दिया है। दूसरे देशों को भी चेतावनी दी जा रही है कि वे क्यूबा को तेल न दें। हाल ही में अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने कोलंबिया से क्यूबा जा रहे एक तेल टैंकर को भी रोक लिया।

इसका असर क्यूबा में साफ दिख रहा है। 9 जनवरी के बाद से वहां कोई बड़ी तेल सप्लाई नहीं पहुंची है। वहां हालात तेजी से खराब हो रहे हैं। क्यूबा के काले बाजार में पेट्रोल करीब 35 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गया है

रोजाना बिजली कट रही है, सोमवार को पूरे देश में ब्लैकआउट हुआ। अस्पतालों में सर्जरी टल रही हैं। दवाइयों की कमी हो रही है और खाने की समस्या बढ़ रही है। इन हालातों में क्यूबा की सरकार पर दबाव बढ़ गया है।

क्यूबा की राजधानी हवाना में सोमवार रात ब्लैकआउट के दौरान लोग सड़क पर इकट्ठा नजर आए।

क्यूबा की राजधानी हवाना में सोमवार रात ब्लैकआउट के दौरान लोग सड़क पर इकट्ठा नजर आए।

ट्रम्प से डील की कोशिश कर रहा क्यूबा

क्यूबा के राष्ट्रपति मिगेल डियाज-कैनेल ने हाल ही में देश को संबोधित करते हुए माना कि अमेरिका से बातचीत चल रही है और जल्द ही अर्थव्यवस्था खोलने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

साथ ही खबर यह भी है कि अमेरिका चाहता है कि क्यूबा के राष्ट्रपति पद से डियाज-कैनेल हटें। हालांकि, अमेरिका फिलहाल कास्त्रो परिवार के खिलाफ सीधी कार्रवाई की बात नहीं कर रहा है। यह रणनीति वैसी ही है जैसी वेनेजुएला में अपनाई गई थी।

यानी ट्रम्प क्यूबा में सरकार बदलने के बजाय उसे अपने हिसाब से चलने के लिए मजबूर करना चाहते हैं।

रूस बोला- जरूरत पड़ी तो क्यूबा की मदद करेंगे

इस बीच रूस ने संकेत दिया है कि वह जरूरत पड़ने पर क्यूबा का समर्थन कर सकता है। दोनों देशों के अधिकारी लगातार संपर्क में हैं।

क्यूबा में आर्थिक सुधार की भी शुरुआत दिख रही है। वहां के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ऐलान किया है कि विदेश में रहने वाले क्यूबाई लोग अब देश में निवेश कर सकेंगे, बैंकिंग कर सकेंगे और कारोबार कर सकेंगे। यह बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

हालांकि, हालात इतने खराब हैं कि इस घोषणा को टीवी पर नहीं बल्कि रेडियो पर करना पड़ा, क्योंकि बिजली नहीं थी। मंगलवार सुबह तक राजधानी हवाना के करीब 70 प्रतिशत हिस्से में बिजली नहीं थी।

क्यूबा में निवेश का मौका बनाना चाहते हैं ट्रम्प

ट्रम्प के बयान से यह भी साफ होता है कि वह क्यूबा को सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि कारोबारी नजरिए से भी देख रहे हैं। वह पहले से ही इस द्वीप में निवेश की संभावना देखते रहे हैं। 1998 में उनकी कंपनी ने चुपचाप क्यूबा का दौरा कराया था। 2011-12 में भी उनके संगठन के लोग वहां गोल्फ कोर्स बनाने की संभावनाएं देख चुके हैं।

2016 के चुनाव प्रचार के दौरान भी ट्रम्प ने कहा था कि क्यूबा निवेश के लिए अच्छा मौका हो सकता है। अब उन्होंने फिर कहा, “वे हमसे बात कर रहे हैं। यह एक असफल देश है। उनके पास न पैसा है, न तेल, कुछ भी नहीं है।”

इसके साथ ही उन्होंने क्यूबा की जमीन और मौसम की तारीफ भी की और इसे एक सुंदर द्वीप बताया। लेकिन उनके बयान से यह भी दिखा कि उन्हें भौगोलिक जानकारी पूरी नहीं है। उन्होंने कहा कि क्यूबा तूफानों (हरिकेन) के क्षेत्र में नहीं आता, जबकि हकीकत में क्यूबा अक्सर हरिकेन से प्रभावित होता है।

अंत में ट्रम्प ने ऐसे संकेत दिए जैसे क्यूबा पहले से ही अमेरिका की संपत्ति हो। उन्होंने कहा, “उन्हें हर हफ्ते तूफान के लिए हमसे पैसे नहीं मांगने पड़ेंगे।”

आजाद होने के बाद क्यूबा को कंट्रोल करता था अमेरिका

1898 में स्पेन-अमेरिका युद्ध के बाद क्यूबा स्पेन से आजाद हुआ, लेकिन असली कंट्रोल अमेरिका के हाथ में चला गया। अमेरिका ने क्यूबा की राजनीति, सेना और अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर रखा। वहां की जमीन, चीनी उद्योग और कारोबार में अमेरिकी कंपनियों का दबदबा था।

साल 1959 में क्रांतिकारी फिदेल कास्त्रो ने अपने गोरिल्ला सैनिकों के साथ मिलकर तानाशाह बतिस्ता को सत्ता से बेदखल कर दिया। बतिस्ता एक तानाशाह था। उसके खिलाफ लड़ाई के दौरान अमेरिका ने ही फिदेल क्रास्त्रो का समर्थन किया था।

अमेरिकी अखबारों में कास्त्रो के इंटरव्यू छपते थे। सत्ता हासिल करने के बाद कास्त्रो ने बड़े बदलाव किए। उन्होंने देश में कम्युनिस्ट नीति अपनाई। अमेरिकी कंपनियों की संपत्ति जब्त कर ली और जमीन और उद्योग को सरकार के नियंत्रण में लिया।

फिदेल कास्त्रो ने 1959 से 2008 तक करीब पांच दशक तक क्यूबा की कमान संभाले रखी।

फिदेल कास्त्रो ने 1959 से 2008 तक करीब पांच दशक तक क्यूबा की कमान संभाले रखी।

US ने प्रतिबंध लगाया तो सोवियत संघ का करीबी बना क्यूबा

अमेरिका ने जवाब में क्यूबा पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए। व्यापार बंद कर दिया और तेल और जरूरी सामान की सप्लाई रोक दी। इससे क्यूबा की इकोनॉमी खराब होने लगी। इसके बाद क्यूबा ने सोवियत संघ (रूस) की तरफ रुख कर लिया। इस वजह से अमेरिका और क्यूबा के संबंध और खराब होते चले गए।

इन दोनों के संबंध इतने खराब थे कि 55 साल तक कोई अमेरिकी राष्ट्रपति क्यूबा गया ही नहीं। ये सिलसिला 2015 में तब खत्म हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में बराक ओबामा क्यूबा गए, लेकिन तब तक फिदेल की जगह क्यूबा में उनके भाई राउल सत्ता संभाल चुके थे।

अमेरिका ने कास्त्रो को मारने की 600 बार कोशिश की थी

फिदेल कास्त्रो को अमेरिका अपने सबसे बड़े दुश्मनों में से एक मानता था। कई रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ने फिदेल कास्त्रो को मारने के लिए 60 साल में 600 से ज्यादा बार असफल कोशिश की। अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने फिदेल को मारने के लिए जहरीले सिगार से लेकर जहरीले पेन तक कई उपाय आजमाए थे, हालांकि ये सभी प्रयास नाकाम रहे थे।

एक बार फिदेल कास्त्रो को मारने की साजिश में शामिल होने के लिए उनकी एक पूर्व गर्लफ्रेंड भी तैयार हो गई थी। इस साजिश के तहत कास्त्रो को मारने के लिए जहरीली कोल्ड क्रीम का जार उन तक पहुंचाना था, लेकिन कास्त्रो को पहले ही इसकी भनक लग गई और ये योजना भी नाकाम हो गई। 25 नवंबर 2016 को 90 साल की उम्र में क्यूबा के हवाना में फिदेल कास्त्रो का निधन हो गया था।

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ईरान के साथ जंग में अकेले पड़े ट्रम्प: NATO देश बोले- ये हमारी लड़ाई नहीं, होर्मुज का रास्ता खुलवाने से इनकार

ईरान में खामेनेई समेत 40 से भी ज्यादा अधिकारियों के मारे जाने के बाद अमेरिका को यह जंग बड़ी कामयाबी नजर आ रही थी। लेकिन 17 दिन बाद हालात बदल चुके हैं। युद्ध का कोई साफ अंत नजर नहीं आ रहा है।

ईरान ने जवाब में होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते तेल आपूर्ति रोक दी, जिससे दुनिया की अर्थव्यवस्था पर बड़ी चोट पहुंची है। ट्रम्प अब अपने सहयोगी नाटो देशों से होर्मुज में रास्ता खुलवाने की अपील कर रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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