जेन-जी ने बदला खरीदारी का ट्रेंड:कंपनियों को प्रोडक्ट के साथ कोई कहानी, लाइफस्टाइल पेश करना पड़ रहा

देश का कंज्यूमर मार्केट बदल रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह जेन-जी (1997-2012 के बीच जन्मे) ग्राहकों का बदलती शॉपिंग हैबिट है। यह पीढ़ी खरीदारी को सिर्फ जरूरत नहीं, बल्कि अपनी पहचान और पर्सनैलिटी से जोड़कर देख रही है। आरपी-संजीव गोयनका समूह के वाइस चेयरमैन शाश्वत गोयनका का कहना है कि कंपनियां पहले के कंज्यूमर के हिसाब से रणनीति बना रही हैं, जबकि असल बाजार पूरी तरह बदल चुका है। गोयनका के मुताबिक, पहले जहां लोग घर, कार या सोना जैसी चीजें जुटाकर अपना स्टेटस और सफलता दिखाते थे, वहीं जेन-जी खुद को बेहतर बनाने में निवेश कर रही है। उनका फोकस बाहरी संपत्ति की जगह ‘इंटरनल पोर्टफोलियो’ पर है। इसमें फिटनेस, पर्सनल केयर और ट्रैवल शामिल हैं। यही वजह है कि फिटनेस, ब्यूटी, डाइनिंग और एंटरटेनमेंट जैसे सेक्टर्स तेजी से बढ़ रहे हैं। खास बात ये है कि जेन जी खर्च करने से पीछे नहीं हट रही और अब तक की सबसे आक्रामक उपभोक्ता पीढ़ी बनकर उभर रही है। डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया ने इस बदलाव को और तेज किया है। इससे युवा ज्यादा जागरूक, प्रयोगशील और ब्रांड के प्रति सजग हो गए हैं। इस बदलती सोच का सीधा असर कंपनियों की रणनीति पर पड़ रहा है। अब केवल प्रोडक्ट की उपयोगिता या कीमत ही नहीं, बल्कि उससे मिलने वाला अनुभव और उससे जुड़ी पहचान ज्यादा अहम हो गई है। गोयनका मानते हैं कि अब कंपनियों को प्रोडक्ट के साथ कोई कहानी, मोटिव और लाइफस्टाइल पेश करनी पड़ रही है। जो ब्रांड इस बदलाव को समझ पा रहे हैं, वही तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, जबकि पारंपरिक सोच पर टिके ब्रांड पीछे छूट रहे हैं। भारत में करीब 65% लोग 35 साल से कम उम्र के हैं। इसलिए यह बदलाव लंबे समय तक चलने वाला है। इससे खर्च बढ़ेगा और बाजार के पास मौका होगा, लेकिन अब ग्रोथ जेन-जी के ट्रेंड्स और उनके बिहेवियर के हिसाब से होगी। 2035 तक भारतीय उपभोक्ता बाजार में हर दूसरी शॉपिंग जेन-जी करेगी समय के साथ इस ट्रेंड का असर और गहरा होने वाला है। गोयंका कहते हैं कि 2035 तक जेन-जी देश के कंजम्प्शन में करीब 185 लाख करोड़ का योगदान दे सकती है। यानी हर दूसरी खरीद यही पीढ़ी करेगी। कंपनियों के सामने यह चुनौती कम होगी कि वे क्या बेच रही हैं, बल्कि यह होगी वे कंज्यूमर को क्या बनने में मदद कर रही हैं।
'आदित्य धर ने कई बातें छुपाकर रखीं':धुरंधर 2 एक्टर दानिश इकबाल बोले- दो महीने पहले तक नहीं पता था कि मैं ही ‘बड़े साहब’ हूं

फिल्म ‘धुरंधर’ में बार-बार ‘बड़े साहब’ का जिक्र हुआ था, लेकिन किरदार का खुलासा नहीं किया गया था। अब ‘धुरंधर 2’ के रिलीज होने के बाद सामने आया है कि इस रोल को एक्टर दानिश इकबाल ने निभाया है। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में दानिश इकबाल ने बताया कि उन्हें शूटिंग के दौरान यह जानकारी नहीं थी कि वह ‘बड़े साहब’ का किरदार निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि दो महीने पहले तक उन्हें इस बात का पता नहीं था। टाइम्स नाऊ को दिए इंटरव्यू में दानिश इकबाल ने बताया, ‘मैं आपको बता दूं कि ‘बड़े साहब’ वाली बात तो कभी हुई ही नहीं। मतलब, दो महीने पहले तक मुझे भी पता नहीं था कि मैं ‘बड़े साहब’ का रोल कर रहा हूं। मुझे शक था। वह (आदित्य) बहुत सीक्रेटिव थे और उन्होंने कई बातें अपने तक ही रखीं।’ एक्टर ने आगे कहा, ‘लेकिन हां, मैं दाऊद का रोल कर रहा था, यह मुझे अच्छी तरह पता था, लेकिन दाऊद ही बड़े साहब हैं, इस पर मैं भी पूरी तरह कन्फिडेंट नहीं था। सब मुझे दाऊद भाई या साहब कहकर बुलाते थे। मेरे किरदार के बारे में किसी ने मुझसे कुछ नहीं कहा। इसलिए मेरे सीन्स में हर समय मैं ही बोलता रहता हूं।’ दानिश इकबाल ने यह भी बताया कि ‘बड़े साहब’ के किरदार में खुद को ढालने के लिए उन्हें रोज 8 से 9 घंटे तक मेकअप करना पड़ता था और पूरे दिन प्रोस्थेटिक के साथ रहना होता था। इसे हटाने में भी 3 से 4 घंटे लगते थे और कई नियमों का पालन करना पड़ता था, जिसमें खाना नहीं खा सकते थे। दानिश इकबाल ए माइटी हार्ट, महारानी, अरण्यक, फराज, भक्षक और द हंट: द राजीव असैसिनेशन केस जैसी फिल्मों में नजर आ चुके हैं। वह हाल ही में नाना पाटेकर के साथ वेब सीरीज ‘संकल्प’ में दिखे थे।
'आदित्य धर ने कई बातें छुपाकर रखीं':धुरंधर 2 एक्टर दानिश इकबाल बोले- दो महीने पहले तक नहीं पता था कि मैं ही ‘बड़े साहब’ हूं

फिल्म ‘धुरंधर’ में कई बार ‘बड़े साहब’ का जिक्र हुआ था, लेकिन किरदार का खुलासा नहीं किया गया था। अब ‘धुरंधर 2’ के रिलीज होने के बाद सामने आया है कि इस रोल को एक्टर दानिश इकबाल ने निभाया है। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में दानिश इकबाल ने कहा कि उन्हें कई दिनों तक शूटिंग के दौरान यह जानकारी नहीं थी कि वह बड़े साहब का किरदार निभा रहे हैं। टाइम्स नाऊ को दिए इंटरव्यू में दानिश इकबाल ने कहा, ‘मैं आपको बता दूं कि बड़े साहब वाली बात तो कभी हुई ही नहीं। मतलब, दो महीने पहले तक मुझे भी पता नहीं था कि मैं बड़े साहब का रोल कर रहा हूं। मुझे शक था। वह (आदित्य) बहुत सीक्रेटिव थे और उन्होंने कई बातें अपने तक ही रखीं।’ एक्टर ने आगे कहा, ‘लेकिन हां, मैं दाऊद का रोल कर रहा था, यह मुझे अच्छी तरह पता था, लेकिन दाऊद ही बड़े साहब हैं, इस पर मैं भी पूरी तरह कन्फिडेंट नहीं था। सब मुझे दाऊद भाई या साहब कहकर बुलाते थे। मेरे किरदार के बारे में किसी ने मुझसे कुछ नहीं कहा। इसलिए मेरे सीन्स में हर समय मैं ही बोलता रहता हूं।’ 8 से 9 घंटे तक मेकअप करना पड़ता था: दानिश दानिश इकबाल ने यह भी बताया कि बड़े साहब के किरदार में खुद को ढालने के लिए उन्हें रोज मेकअप के लिए 8 से 9 घंटे बैठना पड़ता था और पूरे दिन प्रोस्थेटिक के साथ रहना होता था। इसे हटाने में भी 3 से 4 घंटे लगते थे और कई नियमों का पालन करना पड़ता था, जिसमें खाना नहीं खा सकते थे। दानिश इकबाल ए माइटी हार्ट, महारानी, फराज, भक्षक और द हंट: द राजीव असैसिनेशन केस जैसी फिल्मों में नजर आ चुके हैं। वह हाल ही में नाना पाटेकर के साथ वेब सीरीज संकल्प में दिखे थे।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव: सीताफल की पिच भी ‘हीरो’ विक्ट्री, एआईएडीएमके ने लगाए आरोप, पार्टी नेताओं से क्या बोले स्टालिन?

विधानसभा चुनाव को लेकर तमिल की दिलचस्प बातें जारी है। आरोप प्रत्यारोप के दौर के बीच साउथ के सुपर स्टार विजय की नई नवेली पार्टी तमिलगा वेट्री कज़गम (टीवीके) भी राष्ट्रवादी बनी हुई है। एआईएडीएमके के वरिष्ठ नेता के. टी.आर.जी. बालाजी ने आगामी चुनाव में टीवीके के साथ गठबंधन की कंपनियों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि अभिनेता की राजनीति में स्थिर राजनीतिक परिदृश्य में कोई बदलाव नहीं आएगा और एआईएडीएमके डीएमके का एकमात्र मजबूत विकल्प बनी हुई है। एआईएडीएमके के नेताओं से बातचीत नहीं की गई है. बालाजी ने कहा, “अगर कोई हाथ नहीं मिला तो हम अकेले खड़े रहेंगे और हम इसके लिए तैयार हैं।” पीटीआई का कहना है कि एनडीए के नाम पर बिना विजय के रविवार को गठबंधन के लिए बातचीत को बताया गया। उन्होंने जोर देकर कहा कि टीवीके ‘जनता की टीम’ है और इस आरोप को खारिज कर दिया गया कि उनकी पार्टी किसी प्रभावशाली पार्टी की सहायक टीम के रूप में काम करती है। हालाँकि, विजय ने यह नहीं बताया कि यह आरोप लगाया गया है। गठबंधन को लेकर क्या बोले विजय मामल्लपुरम में एक इफ्तार कार्यक्रम को अलायंस करते हुए विजय ने कहा कि जब अन्य प्रयास सफल नहीं हुए तो उनके सहयोगी ने इफ्तार अभियान चलाया कि टीवीके पद पर का रास्ता चुना जाएगा। इसकी खबरें वर्कवर्क्स में ब्रह्मा की स्थिति पैदा हो सकती है, क्योंकि ऐसी आ रही है कि टीवीके अलायंस में जा सकता है। इसलिए उन्होंने घोषणा की कि हम इस पर विचार कर रहे हैं कि चुनाव में बड़ी जीत के बाद सरकार का नेतृत्व हम ही करेंगे। असंबद्ध और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों पर कोई सहमति नहीं होगी। इस महीने दिल्ली की अपनी दूसरी यात्रा के बाद एआईएडीएमके के महासचिव अद्दादी के पलानीस्वामी ने दावा किया था कि तमिलनाडु में उनकी पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए में शामिल होने के लिए धर्म के बीच सीट पर कट्टरता के रूप में चर्चा चल रही है। 23 अप्रैल को एक चरण के लिए चुनाव होने वाले एआईएडीएमके नेताओं ने कहा कि गठबंधन के बीच सीट बंटवारे की आधिकारिक घोषणा आने वाले दिनों में की जाएगी। एनडीए से गठबंधन पर चर्चा-AIADMK तमिलनाडु में सत्तारूढ़ दल के नेता (एलओपी) पलानीस्वामी ने कहा, “तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन में गठबंधन के बीच सीट पर हंगामा जारी है। प्रत्येक पार्टी को शामिल करने वाले विधायकों का विवरण आधिकारिक तौर पर 4 दिनों के भीतर घोषित किया जाएगा।” पलानीस्वामी ने अभिनेता से नेता बने विक्ट्री पार्टी टीवीके के साथ गठबंधन की संभावना को भी खारिज कर दिया. पलानीस्वामी ने कहा, ”तमिलगा वेट्री कज़गम के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है।” क्या बोले एमके स्टालिन इन सबके बीच तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने स्टालिन के नेता एडप्पादी के पलानीस्वामी (ईपीएस) की कड़ी आलोचना की है। पलानीस्वामी 19 मार्च 2026 को सीट शेयरिंग पर बातचीत के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से दिल्ली में मुलाकात करने आए थे। डीएमके कैडर ने अपने पत्र में लिखा है, “विपक्ष के सुझाव से पता चलता है कि दिल्ली में जज दिल्ली के लिए जा रहे हैं। क्या वे तमिलनाडु के लिए फंड सुनिश्चित करने के लिए हैं? राज्य के अधिकार के लिए आरक्षित परियोजना पूरी करने के लिए? नहीं। उनका ध्यान केंद्रित है और है। लोग यह बात साफ-साफ कहते हैं। कंपनी के लोग कभी-कभी दिल्ली या उनके प्रतिनिधि के रूप में काम करने वालों को मशीन बनाने की इजाजत नहीं देते हैं। वे जानते हैं कि राज्य के स्वामित्व और विकास के लिए कौन सा स्थान है।” ये भी पढ़ें केरल विधानसभा चुनाव 2026: केरल चुनाव को लेकर कांग्रेस ने जारी की दूसरी सूची, 37 का विमोचन
नहाने के बाद बालों से कर रहे हैं ये 10 गलतियां? संभल जाइए, वरना गंजेपन का बढ़ सकता है खतरा

Last Updated:March 20, 2026, 13:14 IST अगर आपके बाल लगातार कमजोर और बेजान हो रहे हैं, तो इसकी वजह आपकी रोजमर्रा की कुछ आदतें हो सकती हैं. गीले बालों के साथ सोना, रोजाना शैम्पू करना या हीट स्टाइलिंग जैसी गलतियां बालों को नुकसान पहुंचाती हैं. आइए जानते हैं कुछ आसान टिप्स, जिससे आप अपने बालों को हेल्दी और मजबूत बना सकते हैं. नहाने के बाद अक्सर लोग थकान में गीले बालों के साथ ही सो जाते हैं, लेकिन यह आदत बालों की जड़ों को कमजोर कर सकती है. गीले बाल ज्यादा नाजुक होते हैं और तकिए से रगड़ खाने पर आसानी से टूटने लगते हैं. इससे धीरे-धीरे बाल पतले और कमजोर हो जाते हैं. इसलिए कोशिश करें कि बालों को अच्छी तरह सुखाकर ही सोएं, ताकि हेयर फॉल की समस्या से बचा जा सके. बाल धोने के बाद तौलिए से कसकर बांधना आम आदत है, लेकिन यह बालों के लिए नुकसानदायक हो सकता है. गीले बाल ज्यादा कमजोर होते हैं और उन्हें टाइट बांधने से खिंचाव पड़ता है, जिससे बाल टूटने लगते हैं और जड़ों पर भी असर पड़ता है. इसलिए बालों को हल्के हाथ से सुखाएं और तौलिए को ज्यादा कसकर न बांधें. आजकल ड्राई शैम्पू का ट्रेंड बढ़ गया है, लेकिन इसका बार-बार इस्तेमाल स्कैल्प को नुकसान पहुंचा सकता है. इससे बालों की जड़ों में गंदगी और केमिकल जमा होने लगते हैं, जिससे बाल कमजोर हो जाते हैं. इसे केवल इमरजेंसी में ही इस्तेमाल करें, रोजाना नहीं. साफ और हेल्दी स्कैल्प के लिए नियमित रूप से बाल धोना जरूरी है. Add News18 as Preferred Source on Google हर दिन शैम्पू करना बालों के लिए अच्छा नहीं होता. इससे स्कैल्प का नैचुरल ऑयल खत्म हो जाता है, जो बालों को पोषण देता है. नतीजतन बाल ड्राई और बेजान दिखने लगते हैं. हफ्ते में 2-3 बार शैम्पू करना बेहतर रहता है, जिससे बालों की नमी और हेल्थ बनी रहती है. हेयर ड्रायर, स्ट्रेटनर या कर्लिंग मशीन को ज्यादा हीट पर इस्तेमाल करना बालों को बुरी तरह नुकसान पहुंचा सकता है. इससे बाल रूखे, दोमुंहे और कमजोर हो जाते हैं. इसलिए लो या मीडियम हीट का इस्तेमाल करें और स्टाइलिंग टूल्स का उपयोग जरूरत पड़ने पर ही करें, ताकि बाल लंबे समय तक मजबूत और स्वस्थ बने रहें. हर किसी के बाल अलग होते हैं, लेकिन हम बिना सोचे-समझे कोई भी शैम्पू या कंडीशनर इस्तेमाल करने लगते हैं. इससे बालों को फायदा नहीं बल्कि नुकसान हो सकता है. पहले अपने बालों का टाइप समझें ड्राई, ऑयली या नॉर्मल, फिर उसी हिसाब से प्रोडक्ट चुनें, ताकि बालों को सही पोषण मिल सके. अगर आप बालों पर हीट स्टाइलिंग करते हैं और हीट प्रोटेक्शन का इस्तेमाल नहीं करते, तो यह बड़ी गलती है. हीट सीधे बालों को नुकसान पहुंचाती है और उन्हें कमजोर बना देती है. इसलिए हीट प्रोटेक्टेंट जरूर लगाएं. हालांकि, इसे लगाने से बाल पूरी तरह सुरक्षित नहीं होते, लेकिन डैमेज काफी हद तक कम हो जाता है. तेज धूप सिर्फ त्वचा ही नहीं, बालों को भी नुकसान पहुंचाती है. सूरज की किरणों से बाल ड्राई और बेजान हो जाते हैं. इसलिए बाहर निकलते समय स्कार्फ, कैप या हैट का इस्तेमाल करें. इससे बालों की नमी बनी रहती है और वे लंबे समय तक हेल्दी और शाइनी बने रहते हैं. First Published : March 20, 2026, 13:14 IST
नवरात्रि पर पंजाब में शराब का लंगर:दरबार के बाहर बेंच पर रखी बोतलें, प्रसाद के तौर पर बांटी, नवविवाहित जोड़े करते अरदास

फरीदकोट में कोटकपूरा के गांव मरहाना में चैत्र नवरात्रि के दौरान एक अनोखी परंपरा देखने को मिली, जहां बाबा काला महर के यादगार मेले में शराब का लंगर लगाया गया। दरबार के बाहर बेंचों पर देसी और अंग्रेजी शराब की बोतलें सजाकर श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में शराब परोसी गई। मान्यता के अनुसार, मन्नत पूरी होने पर यहां भक्त बाबा को शराब चढ़ाते हैं और उसी को लंगर के रूप में बांटते हैं। बाबा काला महर के पूर्वज गजनी से आए थे और उनकी आस्था से जुड़ी यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। यह भी मान्यता है कि बाबा ने शराब को परमात्मा के रंग में रंगने वाला अमृत बताया, जिसके बाद से यहां यह परंपरा शुरू हुई। संतान प्राप्ति की कामना लेकर यहां सबसे अधिक नवविवाहित जोड़े आते हैं। प्रबंधक कमेटी के प्रधान परमजीत सिंह ने बताया कि हर साल ही मेले में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती जा रही है। इस स्थान के प्रति संधू गोत्र के लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है और यहां पर अपनी मुरादें पूरी करने के लिए लोग अरदास करने पहुंचते हैं और मुराद पूरी होने पर शुकराना करने भी आते हैं। मान्यता के अनुसार चढ़ती है शराब स्थानीय मान्यता के मुताबिक, श्रद्धालु बाबा काला महर को शराब चढ़ाते हैं और उसी को लंगर के रूप में बांटते हैं। दूर-दराज से लोग अपनी मनोकामनाएं लेकर यहां पहुंचते हैं, जिनमें नवविवाहित जोड़े भी शामिल होते हैं। बाबा काला महर के प्रति श्रद्धालुओं में गहरी आस्था है। ज्यादातर लोग दरगाह पर शराब चढ़ाने ही आते हैं। कोई देसी तो कोई ब्रांडेड शराब चढ़ाता है। मान्यता यह भी है कि श्रद्धालु चढ़ाई गई शराब में से थोड़ी घर ले जा सकता है या वहीं बैठकर प्रसाद के रूप में सेवन कर सकता है। नवविवाहित जोड़े करते हैं अरदास बाबा के प्रति महिलाओं की श्रद्धा अधिक बताई जाती है। नवविवाहित जोड़े संतान प्राप्ति की कामना लेकर यहां आते हैं और शराब चढ़ाकर मुराद मांगते हैं। मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु दोबारा बच्चे के साथ यहां आकर शराब चढ़ाते हैं। लोगों के अनुसार, बाबा काला महर संधू वंश से संबंधित थे। गजनी से जुड़ा है इतिहास मान्यता है कि बाबा काला महर के पूर्वज गजनी से आए थे, जो लाहौर होते हुए कोटकपूरा के पास जंगल में बस गए। यहीं बाबा का जन्म हुआ। बताया जाता है कि पशु चराते समय उनकी मुलाकात गुरु गोरखनाथ से हुई, जिसके बाद उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ। आसपास के संधू गोत्र के लोगों में उनकी पूजा होने लगी। यह भी मान्यता है कि बाबा ने शराब को परमात्मा के रंग में रंगने वाला अमृत बताया, जिसके बाद से यहां शराब चढ़ाने की परंपरा शुरू हो गई।
अमेरिका में बढ़ रहे मास शूटर:ऑनलाइन कम्युनिटी इन्हें ‘संत’ मान रही; हिंसक कंटेंट दिखाने वाला एल्गोरिदम अपराध की राह पर ले जाता है

अमेरिका में मास शूटर्स की संख्या बढ़ रही है और इसके पीछे एक नया, खतरनाक ट्रेंड उभर रहा है। इंटरनेट पर ‘ट्रू क्राइम’ जैसी कम्युनिटीज तेजी से फैल रही हैं, जो इन हत्यारों को संत और भगवान की तरह पूज रही हैं। यह सिर्फ अपराध की कहानी नहीं है, बल्कि ऐसी डिजिटल संस्कृति है, जो हिंसा को महिमामंडित कर रही है। एक दशक तक मास शूटिंग पर स्टडी करने वाले क्रिमिनोलॉजिस्ट जेम्स डेंसली व जिलियन पीटरसन कहते हैं, अब हमलावर कम उम्र के हैं, इंटरनेट से गहराई से जुड़े हैं और हिंसा को ही जीवन का अर्थ मानने लगे हैं। इसकी वजह एल्गोरिदम है, जो कम उम्र से ही यूजर्स को गहरे अंधेरे कंटेंट की ओर धकेल देता है। एक मजाकिया पोस्ट से शुरू होकर यह रास्ता हिंसा तक पहुंच सकता है… और किशोरों को इस बात का एहसास भी नहीं होता। एक्सपर्ट कहते हैं, ‘पहले मास शूटर्स को आमतौर पर मध्यम आयु के, अकेलेपन और संकट से जूझते पुरुषों के रूप में देखा जाता था। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। नए अपराधी अधिकतर युवा हैं, जो ऑनलाइन नेटवर्क से गहराई से जुड़े हैं। वे मानते हैं कि हिंसा ही उनके जीवन का सबसे ‘महत्वपूर्ण’ काम है। ट्रू क्राइम जैसी कम्युनिटी सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद है। यहां कुख्यात हमलावरों को ‘संत’ कहा जाता है, उनके वीडियो और फैन आर्ट बनाए जाते हैं। प्लेटफॉर्म्स भले ही ऐसे कंटेंट को हटाते हों, पर यह जल्दी ही नए रूप में वापस आ जाता है। 2024 से अब तक अमेरिका में कम से कम 7 स्कूल शूटिंग्स इस कम्युनिटी से जुड़ी रही हैं। यह कम्युनिटी निजी दर्द को सार्वजनिक प्रदर्शन में बदल देती है… ‘देखो, दूसरों ने भी यही किया और वे याद किए जाते हैं।’ इस तरह अपराधियों को एक स्क्रिप्ट मिल जाती है, जिसमें उनका हमला कहानी का चरम बन जाता है। शोधकर्ता कहते हैं,‘इसके लिए स्कूलों में बेहतर काउंसलिंग व हथियारों पर नियंत्रण जरूरी है। बड़ी जिम्मेदारी टेक कंपनियों की है। सोशल प्लेटफॉर्म कुछ पलों में ट्रेंडिंग साउंड या इमेज पहचान लेते हैं। उसी तरह वे हिंसा का महिमामंडन करने वाला कंटेंट फ्लैग कर सकते हैं, फुटेज की री-शेयरिंग धीमी कर सकते हैं और हिंसक कंटेंट दोबारा उभरने से रोक सकते हैं। अपराध को महिमामंडित करती हैं ऑनलाइन कम्युनिटी ‘ट्रू क्राइम’ जैसी कई कम्युनिटीज अपराध को आकर्षक रूप में पेश करती हैं। ‘ब्लड लाइकली’ में लोग खुद को जासूस मानकर अनसुलझे मामलों पर चर्चा करते हैं। ‘अनएक्सप्लेंड मिस्ट्रीज फोरम’ अपराध के साथ पैरानॉर्मल घटनाओं को भी जोड़ता है व रहस्यमयी केसों पर बहस करता है। ‘रेडिट ट्रू क्राइम सबरेडिट’ सबसे सक्रिय जगह है, जहां सीरियल किलर्स व स्कूल शूटिंग्स पर चर्चा होती है व फैन कल्चर भी बनता है। वहीं अनकवर्ड खासतौर पर कोल्ड केस और गुमशुदा पर केंद्रित है, जहां लोग मिलकर पुराने मामले सुलझाते हैं।
अमेरिका में बढ़ रहे मास शूटर:ऑनलाइन कम्युनिटी इन्हें ‘संत’ मान रही; हिंसक कंटेंट दिखाने वाला एल्गोरिदम अपराध की राह पर ले जाता है

अमेरिका में मास शूटर्स की संख्या बढ़ रही है और इसके पीछे एक नया, खतरनाक ट्रेंड उभर रहा है। इंटरनेट पर ‘ट्रू क्राइम’ जैसी कम्युनिटीज तेजी से फैल रही हैं, जो इन हत्यारों को संत और भगवान की तरह पूज रही हैं। यह सिर्फ अपराध की कहानी नहीं है, बल्कि ऐसी डिजिटल संस्कृति है, जो हिंसा को महिमामंडित कर रही है। एक दशक तक मास शूटिंग पर स्टडी करने वाले क्रिमिनोलॉजिस्ट जेम्स डेंसली व जिलियन पीटरसन कहते हैं, अब हमलावर कम उम्र के हैं, इंटरनेट से गहराई से जुड़े हैं और हिंसा को ही जीवन का अर्थ मानने लगे हैं। इसकी वजह एल्गोरिदम है, जो कम उम्र से ही यूजर्स को गहरे अंधेरे कंटेंट की ओर धकेल देता है। एक मजाकिया पोस्ट से शुरू होकर यह रास्ता हिंसा तक पहुंच सकता है… और किशोरों को इस बात का एहसास भी नहीं होता। एक्सपर्ट कहते हैं, ‘पहले मास शूटर्स को आमतौर पर मध्यम आयु के, अकेलेपन और संकट से जूझते पुरुषों के रूप में देखा जाता था। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। नए अपराधी अधिकतर युवा हैं, जो ऑनलाइन नेटवर्क से गहराई से जुड़े हैं। वे मानते हैं कि हिंसा ही उनके जीवन का सबसे ‘महत्वपूर्ण’ काम है। ट्रू क्राइम जैसी कम्युनिटी सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद है। यहां कुख्यात हमलावरों को ‘संत’ कहा जाता है, उनके वीडियो और फैन आर्ट बनाए जाते हैं। प्लेटफॉर्म्स भले ही ऐसे कंटेंट को हटाते हों, पर यह जल्दी ही नए रूप में वापस आ जाता है। 2024 से अब तक अमेरिका में कम से कम 7 स्कूल शूटिंग्स इस कम्युनिटी से जुड़ी रही हैं। यह कम्युनिटी निजी दर्द को सार्वजनिक प्रदर्शन में बदल देती है… ‘देखो, दूसरों ने भी यही किया और वे याद किए जाते हैं।’ इस तरह अपराधियों को एक स्क्रिप्ट मिल जाती है, जिसमें उनका हमला कहानी का चरम बन जाता है। शोधकर्ता कहते हैं,‘इसके लिए स्कूलों में बेहतर काउंसलिंग व हथियारों पर नियंत्रण जरूरी है। बड़ी जिम्मेदारी टेक कंपनियों की है। सोशल प्लेटफॉर्म कुछ पलों में ट्रेंडिंग साउंड या इमेज पहचान लेते हैं। उसी तरह वे हिंसा का महिमामंडन करने वाला कंटेंट फ्लैग कर सकते हैं, फुटेज की री-शेयरिंग धीमी कर सकते हैं और हिंसक कंटेंट दोबारा उभरने से रोक सकते हैं। अपराध को महिमामंडित करती हैं ऑनलाइन कम्युनिटी ‘ट्रू क्राइम’ जैसी कई कम्युनिटीज अपराध को आकर्षक रूप में पेश करती हैं। ‘ब्लड लाइकली’ में लोग खुद को जासूस मानकर अनसुलझे मामलों पर चर्चा करते हैं। ‘अनएक्सप्लेंड मिस्ट्रीज फोरम’ अपराध के साथ पैरानॉर्मल घटनाओं को भी जोड़ता है व रहस्यमयी केसों पर बहस करता है। ‘रेडिट ट्रू क्राइम सबरेडिट’ सबसे सक्रिय जगह है, जहां सीरियल किलर्स व स्कूल शूटिंग्स पर चर्चा होती है व फैन कल्चर भी बनता है। वहीं अनकवर्ड खासतौर पर कोल्ड केस और गुमशुदा पर केंद्रित है, जहां लोग मिलकर पुराने मामले सुलझाते हैं।
IPL में पहली बार सभी 10 टीमों के कप्तान भारतीय:कमिंस बाहर तो ईशान ने कमान संभाली; 6 कैप्टन पहली ट्रॉफी जीतने की दौड़ में

IPL के 19 साल के इतिहास में पहली बार ऐसा होगा जब सभी 10 टीमों के कप्तान भारतीय होंगे। सनराइजर्स हैदराबाद के नियमित कप्तान पैट कमिंस के शुरुआती मैचों से बाहर होने के बाद फ्रेंचाइजी ने उनकी जगह ईशान किशन को कप्तानी सौंपी है। इसके साथ ही टूर्नामेंट के शुरुआती मुकाबलों में सभी टीमों की कमान भारतीय खिलाड़ियों के हाथ में होगी। पिछले सीजन में भी हैदराबाद के पैट कमिंस को छोड़कर बाकी सभी टीमों के कप्तान भारतीय ही थे। ईशान किशन पहले बार किसी IPL की कप्तानी करेंगे ईशान किशन पहली बार IPL में कप्तानी करते नजर आएंगे। मौजूदा 10 कप्तानों में 6 ऐसे हैं, जो अपनी पहली ट्रॉफी की तलाश में हैं। इनमें ऋतुराज गायकवाड़, रियान पराग, शुभमन गिल, अजिंक्य रहाणे, ईशान किशन और ऋषभ पंत शामिल हैं। वहीं, बाकी 4 कप्तान पहले ही खिताब जीत चुके हैं। श्रेयस अय्यर ने 2024 में कोलकाता नाइट राइडर्स को चैंपियन बनाया था, रजत पाटीदार ने 2025 में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर को खिताब दिलाया, जबकि हार्दिक पांड्या ने 2022 में गुजरात टाइटंस को ट्रॉफी जिताई थी। श्रेयस अय्यर इकौलते कप्तान जो तीन फ्रेंचाइजियों को फाइनल तक पहुंचाया श्रेयस अय्यर IPL इतिहास के इकलौते कप्तान हैं, जिन्होंने तीन अलग-अलग फ्रेंचाइजियों को फाइनल तक पहुंचाया है। उन्होंने 2020 में दिल्ली कैपिटल्स को फाइनल तक पहुंचाया, जहां टीम को मुंबई इंडियंस से हार मिली थी। इसके बाद 2024 में उन्होंने KKR को चैंपियन बनाया और 2025 में पंजाब किंग्स को फाइनल तक पहुंचाया, जहां टीम RCB से हार गई। धोनी और रोहित सबसे सफल कप्तान IPL इतिहास में सबसे सफल कप्तानों की बात करें तो महेंद्र सिंह धोनी (CSK) और रोहित शर्मा (MI) शीर्ष पर हैं। दोनों ने अपनी-अपनी टीमों को 5-5 बार चैंपियन बनाया है। धोनी के नाम सबसे ज्यादा मैच (229) और जीत (134) दर्ज हैं, जबकि रोहित ने मुंबई इंडियंस को पांच खिताब दिलाए हैं। —————————————– स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… नाथन एलिस हैमस्ट्रिंग इंजरी के कारण IPL 2026 से बाहर: CSK ने रिप्लेसमेंट जारी नहीं किया, फ्रेंचाइजी ने 2 करोड़ रुपए में खरीदा था 5 बार की चैंपियन चेन्नई सुपर किंग्स के तेज गेंदबाज नाथन एलिस हैमस्ट्रिंग इंजरी के कारण IPL 2026 से बाहर हो गए हैं। फ्रेंचाइजी के एक अधिकारी ने बताया कि 31 साल के एलिस IPL से बाहर हो चुके हैं, हालांकि उनके रिप्लेसमेंट को लेकर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है। पूरी खबर
अगर यह पार्टी 2026 विधानसभा चुनाव जीतती है तो तमिलनाडु को 5 राजधानी शहर मिलेंगे | चेन्नई-समाचार समाचार

आखरी अपडेट:20 मार्च, 2026, 12:55 IST घोषणापत्र के अनुसार, चेन्नई तकनीकी राजधानी, कोयंबटूर उद्योग राजधानी, मदुरै संस्कृति राजधानी और कन्याकुमारी दर्शन की राजधानी होगी। एनटीके घोषणापत्र में कहा गया है कि राज्य सचिवालय को पांच राजधानियों की योजना के तहत तिरुचिरापल्ली (त्रिची) में स्थानांतरित किया जाएगा। (शटरस्टॉक/फ़ाइल) सीमान के नाम तमिलर काची (एनटीके) ने 23 अप्रैल को एक ही चरण में होने वाले तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के लिए अपना घोषणापत्र जारी किया है, जिसमें अन्य बातों के अलावा राज्य में पांच राजधानी शहरों के निर्माण का वादा किया गया है। चेन्नई में घोषणापत्र जारी करते हुए, सीमन ने मुफ्तखोरी से इनकार करते हुए कहा कि इससे राज्य में केवल गरीबी और अन्य संबंधित मुद्दे पैदा होते हैं। घोषणापत्र कई वादों के साथ 400 से अधिक पृष्ठों का है। घोषणापत्र के अनुसार, तमिलनाडु में पांच राजधानियां बनाई जाएंगी, जिसमें चेन्नई को तकनीकी राजधानी, कोयंबटूर को उद्योग केंद्र, मदुरै को संस्कृति राजधानी, कन्याकुमारी को दर्शन की राजधानी और राज्य सचिवालय को तिरुचिरापल्ली (त्रिची) में स्थानांतरित किया जाएगा। सीमन ने कहा कि पांच राजधानियों के पीछे का विचार पूरे राज्य में संतुलित विकास सुनिश्चित करना है। उन्होंने कृषि, बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य देखभाल और शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों के लिए कल्याणकारी उपायों को भी सूचीबद्ध किया। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “हमने आज जो जारी किया है वह हमारा सपना है। हम इसे हासिल करने के इच्छुक हैं। अब वे (घोषणापत्र के रूप में) आपके हाथों में हैं।” उन्होंने कहा, “हम धीरे-धीरे आगे बढ़ेंगे। हम केवल अपनी पहल में प्रगति करेंगे। हम चुनावी वादों से पीछे नहीं हटेंगे। हम गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा देना चाहते हैं…।” सीमन ने यह भी वादा किया कि अगर उनकी पार्टी विधानसभा चुनाव जीतती है तो लोगों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और पीने का पानी मुफ्त होगा। मुफ्त सुविधाओं पर, एनटीके प्रमुख ने कहा, “स्टालिन (डीएमके प्रमुख) महिलाओं के लिए मुफ्त बसें कहते हैं, जबकि एआईएडीएमके प्रमुख एडप्पादी के पलानीस्वामी पुरुषों के लिए मुफ्त बसें प्रदान करते हैं। (टीवीके प्रमुख) विजय कहते हैं कि वह महिलाओं के लिए 2,500 रुपये देंगे। अगर यह प्रवृत्ति जारी रही, तो बाद में राज्य की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी क्योंकि राजस्व का कोई स्रोत नहीं है।” उन्होंने राजनीतिक दलों द्वारा घोषित शादी के समय महिलाओं को सोना बांटने की प्रथा पर सवाल उठाते हुए कहा, “मैं दूल्हे को सोना देने के बजाय एक नौकरी दूंगा, जिससे वह खुद सोना खरीदने में सक्षम हो जाएगा। मैं उसे दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय अपने दम पर खड़ा करूंगा।” मूवलुर रामामिर्थम अम्मैय्यर मेमोरियल विवाह सहायता योजना जिसे लोकप्रिय रूप से ‘थलिक्कु थंगम थिट्टम’ (विवाह के लिए स्वर्ण योजना) के नाम से जाना जाता है, अन्नाद्रमुक शासन के दौरान शुरू की गई थी। जगह : तमिलनाडु, भारत, भारत पहले प्रकाशित: मार्च 19, 2026, 18:30 IST अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें







