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अमेरिका में बढ़ रहे मास शूटर:ऑनलाइन कम्युनिटी इन्हें ‘संत’ मान रही; हिंसक कंटेंट दिखाने वाला एल्गोरिदम अपराध की राह पर ले जाता है

अमेरिका में बढ़ रहे मास शूटर:ऑनलाइन कम्युनिटी इन्हें ‘संत’ मान रही; हिंसक कंटेंट दिखाने वाला एल्गोरिदम अपराध की राह पर ले जाता है

अमेरिका में मास शूटर्स की संख्या बढ़ रही है और इसके पीछे एक नया, खतरनाक ट्रेंड उभर रहा है। इंटरनेट पर ‘ट्रू क्राइम’ जैसी कम्युनिटीज तेजी से फैल रही हैं, जो इन हत्यारों को संत और भगवान की तरह पूज रही हैं। यह सिर्फ अपराध की कहानी नहीं है, बल्कि ऐसी डिजिटल संस्कृति है, जो हिंसा को महिमामंडित कर रही है। एक दशक तक मास शूटिंग पर स्टडी करने वाले क्रिमिनोलॉजिस्ट जेम्स डेंसली व जिलियन पीटरसन कहते हैं, अब हमलावर कम उम्र के हैं, इंटरनेट से गहराई से जुड़े हैं और हिंसा को ही जीवन का अर्थ मानने लगे हैं।
इसकी वजह एल्गोरिदम है, जो कम उम्र से ही यूजर्स को गहरे अंधेरे कंटेंट की ओर धकेल देता है। एक मजाकिया पोस्ट से शुरू होकर यह रास्ता हिंसा तक पहुंच सकता है… और किशोरों को इस बात का एहसास भी नहीं होता। एक्सपर्ट कहते हैं, ‘पहले मास शूटर्स को आमतौर पर मध्यम आयु के, अकेलेपन और संकट से जूझते पुरुषों के रूप में देखा जाता था। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। नए अपराधी अधिकतर युवा हैं, जो ऑनलाइन नेटवर्क से गहराई से जुड़े हैं। वे मानते हैं कि हिंसा ही उनके जीवन का सबसे ‘महत्वपूर्ण’ काम है। ट्रू क्राइम जैसी कम्युनिटी सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद है। यहां कुख्यात हमलावरों को ‘संत’ कहा जाता है, उनके वीडियो और फैन आर्ट बनाए जाते हैं। प्लेटफॉर्म्स भले ही ऐसे कंटेंट को हटाते हों, पर यह जल्दी ही नए रूप में वापस आ जाता है। 2024 से अब तक अमेरिका में कम से कम 7 स्कूल शूटिंग्स इस कम्युनिटी से जुड़ी रही हैं। यह कम्युनिटी निजी दर्द को सार्वजनिक प्रदर्शन में बदल देती है… ‘देखो, दूसरों ने भी यही किया और वे याद किए जाते हैं।’ इस तरह अपराधियों को एक स्क्रिप्ट मिल जाती है, जिसमें उनका हमला कहानी का चरम बन जाता है। शोधकर्ता कहते हैं,‘इसके लिए स्कूलों में बेहतर काउंसलिंग व हथियारों पर नियंत्रण जरूरी है। बड़ी जिम्मेदारी टेक कंपनियों की है। सोशल प्लेटफॉर्म कुछ पलों में ट्रेंडिंग साउंड या इमेज पहचान लेते हैं। उसी तरह वे हिंसा का महिमामंडन करने वाला कंटेंट फ्लैग कर सकते हैं, फुटेज की री-शेयरिंग धीमी कर सकते हैं और हिंसक कंटेंट दोबारा उभरने से रोक सकते हैं। अपराध को महिमामंडित करती हैं ऑनलाइन कम्युनिटी ‘ट्रू क्राइम’ जैसी कई कम्युनिटीज अपराध को आकर्षक रूप में पेश करती हैं। ‘ब्लड लाइकली’ में लोग खुद को जासूस मानकर अनसुलझे मामलों पर चर्चा करते हैं। ‘अनएक्सप्लेंड मिस्ट्रीज फोरम’ अपराध के साथ पैरानॉर्मल घटनाओं को भी जोड़ता है व रहस्यमयी केसों पर बहस करता है। ‘रेडिट ट्रू क्राइम सबरेडिट’ सबसे सक्रिय जगह है, जहां सीरियल किलर्स व स्कूल शूटिंग्स पर चर्चा होती है व फैन कल्चर भी बनता है। वहीं अनकवर्ड खासतौर पर कोल्ड केस और गुमशुदा पर केंद्रित है, जहां लोग मिलकर पुराने मामले सुलझाते हैं।

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अमेरिका में मास शूटर्स की संख्या बढ़ रही है और इसके पीछे एक नया, खतरनाक ट्रेंड उभर रहा है। इंटरनेट पर ‘ट्रू क्राइम’ जैसी कम्युनिटीज तेजी से फैल रही हैं, जो इन हत्यारों को संत और भगवान की तरह पूज रही हैं। यह सिर्फ अपराध की कहानी नहीं है, बल्कि ऐसी डिजिटल संस्कृति है, जो हिंसा को महिमामंडित कर रही है। एक दशक तक मास शूटिंग पर स्टडी करने वाले क्रिमिनोलॉजिस्ट जेम्स डेंसली व जिलियन पीटरसन कहते हैं, अब हमलावर कम उम्र के हैं, इंटरनेट से गहराई से जुड़े हैं और हिंसा को ही जीवन का अर्थ मानने लगे हैं।
इसकी वजह एल्गोरिदम है, जो कम उम्र से ही यूजर्स को गहरे अंधेरे कंटेंट की ओर धकेल देता है। एक मजाकिया पोस्ट से शुरू होकर यह रास्ता हिंसा तक पहुंच सकता है… और किशोरों को इस बात का एहसास भी नहीं होता। एक्सपर्ट कहते हैं, ‘पहले मास शूटर्स को आमतौर पर मध्यम आयु के, अकेलेपन और संकट से जूझते पुरुषों के रूप में देखा जाता था। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। नए अपराधी अधिकतर युवा हैं, जो ऑनलाइन नेटवर्क से गहराई से जुड़े हैं। वे मानते हैं कि हिंसा ही उनके जीवन का सबसे ‘महत्वपूर्ण’ काम है। ट्रू क्राइम जैसी कम्युनिटी सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद है। यहां कुख्यात हमलावरों को ‘संत’ कहा जाता है, उनके वीडियो और फैन आर्ट बनाए जाते हैं। प्लेटफॉर्म्स भले ही ऐसे कंटेंट को हटाते हों, पर यह जल्दी ही नए रूप में वापस आ जाता है। 2024 से अब तक अमेरिका में कम से कम 7 स्कूल शूटिंग्स इस कम्युनिटी से जुड़ी रही हैं। यह कम्युनिटी निजी दर्द को सार्वजनिक प्रदर्शन में बदल देती है… ‘देखो, दूसरों ने भी यही किया और वे याद किए जाते हैं।’ इस तरह अपराधियों को एक स्क्रिप्ट मिल जाती है, जिसमें उनका हमला कहानी का चरम बन जाता है। शोधकर्ता कहते हैं,‘इसके लिए स्कूलों में बेहतर काउंसलिंग व हथियारों पर नियंत्रण जरूरी है। बड़ी जिम्मेदारी टेक कंपनियों की है। सोशल प्लेटफॉर्म कुछ पलों में ट्रेंडिंग साउंड या इमेज पहचान लेते हैं। उसी तरह वे हिंसा का महिमामंडन करने वाला कंटेंट फ्लैग कर सकते हैं, फुटेज की री-शेयरिंग धीमी कर सकते हैं और हिंसक कंटेंट दोबारा उभरने से रोक सकते हैं। अपराध को महिमामंडित करती हैं ऑनलाइन कम्युनिटी ‘ट्रू क्राइम’ जैसी कई कम्युनिटीज अपराध को आकर्षक रूप में पेश करती हैं। ‘ब्लड लाइकली’ में लोग खुद को जासूस मानकर अनसुलझे मामलों पर चर्चा करते हैं। ‘अनएक्सप्लेंड मिस्ट्रीज फोरम’ अपराध के साथ पैरानॉर्मल घटनाओं को भी जोड़ता है व रहस्यमयी केसों पर बहस करता है। ‘रेडिट ट्रू क्राइम सबरेडिट’ सबसे सक्रिय जगह है, जहां सीरियल किलर्स व स्कूल शूटिंग्स पर चर्चा होती है व फैन कल्चर भी बनता है। वहीं अनकवर्ड खासतौर पर कोल्ड केस और गुमशुदा पर केंद्रित है, जहां लोग मिलकर पुराने मामले सुलझाते हैं।

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