Ex-Army Chief Naravane Now Focused on Fiction Writing

पुणे1 घंटे पहले कॉपी लिंक पुणे में नरवणे ने उपन्यास ‘द कैंटोनमेंट कॉन्स्पिरेसी’ के साइन किए। पूर्व आर्मी चीफ मनोज मुकुंद नरवणे ने कहा कि वह अब सिर्फ फिक्शन लिखने पर फोकस कर रहे हैं। उन्होंने कहा- मैं पहले भी आर्मी रिपोर्ट्स और अकादमिक जर्नल्स के लिए लिखता रहा हूं, अब मैं सिर्फ फिक्शन लिख रहा हूं। पुणे में अपने उपन्यास ‘द कंटेनमेंट कॉन्सपिरेसी:ए मिलिट्री थ्रिलर’ के बुक-साइनिंग इवेंट के दौरान शुक्रवार को नरवणे ने ANI से बात की थी। उन्होंने कहा कि मेरी एक शॉर्ट स्टोरी मैगजीन फेमिना में भी छप चुकी है। उन्होंने कहा कि मेरा पहला उपन्यास पेंग्विन हाउस इंडिया ने पब्लिश किया है। इसकी कहानी एनडीए से निकले दो युवा अफसरों के इर्द-गिर्द घूमती है। नरवणे ने अपने अनपब्लिशड मेमोयर ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ पर किसी तरह की टिप्पणी नहीं की। दरअसल, बजट सत्र पर राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने मेमोयर के आर्टिकल को कोट किया था। जिसके बाद जमकर हंगामा हुआ था। पुणे में बुक स्टॉल पर रखीं उपन्यास ‘द कंटेनमेंट कॉन्सपिरेसी:ए मिलिट्री थ्रिलर’ की कॉपियां। नवरणे बोले- मेमोयर लिखने का कोई इरादा नहीं था नरवणे ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनका मेमोयर लिखने का कोई इरादा नहीं था। उन्होंने बताया कि बिपिन रावत पर एक किताब के लॉन्च में पब्लिशर से मजाक में बात हुई, जिसके बाद उन्हें किताब लिखने का ऑफर मिला और यहीं से यह सफर शुरू हुआ। नरवणे के मेमोयर ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ पर सियासी घमासान लोकसभा में 2-3 फरवरी को राहुल गांधी ने एक मैगजीन में छपे आर्टिकल को पढ़ने की कोशिश की थी। उन्होंने दावा किया था कि इसमें नरवणे की बुक के अंश हैं। स्पीकर ओम बिरला ने इसकी इजाजत नहीं दी। इसके बाद लोकसभा में हंगामा हो गया था, जिससे कार्यवाही स्थगित कर दी गई थी। हंगामा करने वाले आठ सांसदों को सस्पेंड कर दिया गया था। राहुल का दावा था कि आर्टिकल नरवणे के मेमोयर फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी (Four Stars of Destiny) का है। इसमें 2020 के भारत-चीन सीमा विवाद में सरकार की नीति पर सवाल उठाए गए हैं। राहुल ने आरोप लगाया था कि सरकार की प्रतिक्रिया में देरी हुई और बाद में प्रधानमंत्री मोदी ने फैसले का जिम्मा नरवणे पर छोड़ दिया था। हालांकि ये मेमोयर अभी तक प्रकाशित नहीं हुआ है और 2023 से सरकारी मंजूरी का इंतजार कर रही है। रक्षा मंत्री ने कहा था अनपब्लिश्ड किताब कोट नहीं हो सकती रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राहुल के बयान पर आपत्ति जताई थी। कहा था कि जो किताब अभी प्रकाशित ही नहीं हुई है, उसे सदन में कोट नहीं किया जा सकता क्योंकि वह ‘ऑथेंटिकेटेड’ नहीं है। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान यह मुद्दा गरमाया था। स्पीकर द्वारा राहुल गांधी को बोलने से रोके जाने के विरोध में विपक्ष स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी लाया था, लेकिन यह ध्वनिमत से गिर गया था। कांग्रेस ने किताब के पन्ने शेयर किए, चीनी टैंक घुसपैठ के वक्त का घटनाक्रम कांग्रेस ने एक मैगजीन में पब्लिश आर्टिकल के पेज सोशल मीडिया एक्स पर शेयर किए थे। इसमें पूर्व आर्मी चीफ की अनपब्लिश बुक Four Stars of Destiny के अंश हैं। इसमें 31 अगस्त 2020 को लद्दाख सीमा पर भारत-चीन के बीच बने हालात का जिक्र है। बताया जब चीनी टैंक पूर्वी लद्दाख में बढ़ रहे थे तब क्या हुआ? तारीख: 31 अगस्त, 2020 रात 8.15 बजे: भारतीय सेना की नॉर्दर्न कमांड के चीफ लेफ्टिनेंट जनरल योगेश जोशी को फोन पर जानकारी मिली कि चीन की पैदल सेना के समर्थन के साथ चार चीनी टैंक पूर्वी लद्दाख में रेचिन ला की ओर जाती एक खड़ी पहाड़ी पगडंडी पर आगे बढ़ रहे हैं। रात 8.15–8.30 बजे के बीच: लेफ्टिनेंट जनरल योगेश जोशी ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे को जानकारी दी। चीनी टैंक कैलाश रेंज पर भारतीय ठिकानों से कुछ सौ मीटर की दूरी पर थे। इसके बाद भारतीय सैनिकों ने चेतावनी के तौर पर एक रोशनी वाला गोला दागा, लेकिन इसका चीनी टैंकों पर कोई असर नहीं हुआ और वे आगे बढ़ते रहे। रात 8.30 बजे के बाद: सेना प्रमुख नरवणे ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से संपर्क कर स्पष्ट निर्देश मांगे। रात 9.10 बजे: लेफ्टिनेंट जनरल योगेश जोशी ने फिर फोन किया। बताया गया कि चीनी टैंक अब दर्रे से एक किलोमीटर से भी कम दूरी पर रह गए हैं। रात 9.25 बजे: सेना प्रमुख नरवणे ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को दोबारा फोन कर “स्पष्ट निर्देश” मांगे, लेकिन कोई फैसला नहीं मिला। इसी दौरान PLA कमांडर मेजर जनरल ल्यू लिन का संदेश आया, जिसमें तनाव कम करने का प्रस्ताव दिया गया—दोनों पक्ष आगे की गतिविधियां रोकें और अगले दिन सुबह 9.30 बजे स्थानीय कमांडरों की बैठक हो। रात 10.00 बजे: नरवणे ने चीनी कमांडर का प्रस्ताव रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और एनएसए अजित डोभाल तक पहुंचाया। रात 10.10 बजे: नॉर्दर्न कमांड से फिर सूचना मिली कि चीनी टैंक नहीं रुके हैं और अब चोटी से सिर्फ 500 मीटर दूर हैं। जोशी ने बताया कि उन्हें रोकने का एकमात्र तरीका मीडियम आर्टिलरी से फायर खोलना है। रात 10.10 बजे –10.30 बजे के बीच: सेना मुख्यालय में विकल्पों पर चर्चा होती रही। पूरा नॉर्दर्न फ्रंट हाई अलर्ट पर रखा गया। रात 10.30 बजे: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वापस फोन किया और बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की है। प्रधानमंत्री का निर्देश सिर्फ एक वाक्य में था- जो उचित समझो, वो करो।नरवणे ने कहा, ‘यह पूरी तरह से एक सैन्य फैसला होने वाला था। मोदी से सलाह ली गई थी। उन्हें ब्रीफ किया गया था, लेकिन उन्होंने फैसला लेने से मना कर दिया था। अब पूरी जिम्मेदारी मुझ पर थी।’ नरवणे 2019 से 2022 तक सेना प्रमुख रहे नरवणे 2019 से 2022 तक सेना प्रमुख रहे हैं। उन्होंने पिछले साल कसौली में आयोजित खुशवंत सिंह लिस्टरेचर फेस्टिवल में बताया था कि उन्होंने अपनी किताब पेंगुइन पब्लिशर ग्रुप को छपने के लिए दे दी है। अब यह पब्लिशर्स
275 Ex-Judges & Officers Criticize USCIRF Report, Demand US Govt Probe

नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक अमेरिका की अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता की संस्था USCIRF की मार्च में जारी हुई रिपोर्ट में RSS पर बैन लगाने की बात कही गई है। भारत के 275 पूर्व जजों, अधिकारियों और सैन्य लोगों ने इसका विरोध किया और कहा कि रिपोर्ट गलत और पक्षपाती है। शनिवार को जारी बयान में इन पूर्व अधिकारियों ने कहा कि यह रिपोर्ट किसी मकसद से बनाई गई है और इसमें ठीक से सोच-समझकर बात नहीं की गई। उनका कहना है कि बिना पक्के सबूतों के भारतीय संस्थाओं को गलत तरीके से दिखाया गया है। बयान में कहा गया कि RSS जैसे संगठन पर बैन लगाना, उसकी संपत्ति जब्त करना और लोगों के आने-जाने पर रोक लगाना बिल्कुल गलत और बेकार सुझाव हैं। पूर्व अधिकारियों ने अमेरिकी सरकार से कहा कि जो लोग यह रिपोर्ट बना रहे हैं, उनकी जांच होनी चाहिए। उनका आरोप है कि कुछ भारत-विरोधी लोग ऐसी रिपोर्ट के जरिए दोनों देशों के बीच भरोसा खराब करना चाहते हैं। USCIRF पर संस्थाओं को गलत तरीके से दिखाने का आरोप पूर्व जजों और अधिकारियों ने बयान में यह भी कहा कि USCIRF बार-बार भारतीय संस्थाओं को बिना पूरी जानकारी के गलत तरीके से दिखाता है, जिससे उसकी निष्पक्षता पर शक होता है। पूर्व अधिकारियों ने कहा कि भारत एक मजबूत लोकतंत्र है, जहां अदालतें और दूसरी संस्थाएं सही तरीके से काम करती हैं। इसलिए धार्मिक आजादी के मामलों को अनदेखा होने की संभावना बहुत कम है। बयान देने वालों में 25 रिटायर्ड जज शामिल इस संयुक्त बयान पर कुल 275 लोगों ने साइन किए हैं। इनमें 25 रिटायर्ड जज, 119 पूर्व सरकारी अधिकारी (जिनमें 10 राजदूत भी हैं) और 131 पूर्व सैन्य अधिकारी शामिल हैं। इस बयान पर साइन करने वाले प्रमुख लोगों में आदर्श कुमार गोयल, हेमंत गुप्ता, ओपी रावत, सुनील अरोड़ा और कंवल सिब्बल जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इस पूरे बयान को तैयार करने और जोड़ने का काम भास्वती मुखर्जी और एम. मदन गोपाल ने किया। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
275 Ex-Judges & Officers Criticize USCIRF Report, Demand US Govt Probe

नई दिल्ली2 घंटे पहले कॉपी लिंक अमेरिका के अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) की मार्च में जारी हुई रिपोर्ट में RSS पर बैन लगाने की बात कही गई है। भारत के 275 पूर्व जजों, अधिकारियों और सैन्य लोगों ने इसका विरोध किया और कहा कि रिपोर्ट गलत और पक्षपाती है। शनिवार को जारी बयान में इन पूर्व अधिकारियों ने कहा कि यह रिपोर्ट किसी मकसद से बनाई गई है और इसमें ठीक से सोच-समझकर बात नहीं की गई। उनका कहना है कि बिना पक्के सबूतों के भारतीय संस्थाओं को गलत तरीके से दिखाया गया है। बयान में कहा गया कि RSS जैसे संगठन पर बैन लगाना, उसकी संपत्ति जब्त करना और लोगों के आने-जाने पर रोक लगाना बिल्कुल गलत और बेकार सुझाव हैं। पूर्व अधिकारियों ने अमेरिकी सरकार से कहा कि जो लोग यह रिपोर्ट बना रहे हैं, उनकी जांच होनी चाहिए। उनका आरोप है कि कुछ भारत-विरोधी लोग ऐसी रिपोर्ट के जरिए दोनों देशों के बीच भरोसा खराब करना चाहते हैं। USCIRF पर संस्थाओं को गलत तरीके से दिखाने का आरोप पूर्व जजों और अधिकारियों ने बयान में यह भी कहा कि USCIRF बार-बार भारतीय संस्थाओं को बिना पूरी जानकारी के गलत तरीके से दिखाता है, जिससे उसकी निष्पक्षता पर शक होता है। पूर्व अधिकारियों ने कहा कि भारत एक मजबूत लोकतंत्र है, जहां अदालतें और दूसरी संस्थाएं सही तरीके से काम करती हैं। इसलिए धार्मिक आजादी के मामलों को अनदेखा होने की संभावना बहुत कम है। बयान देने वालों में 25 रिटायर्ड जज शामिल इस संयुक्त बयान पर कुल 275 लोगों ने साइन किए हैं। इनमें 25 रिटायर्ड जज, 119 पूर्व सरकारी अधिकारी (जिनमें 10 राजदूत भी हैं) और 131 पूर्व सैन्य अधिकारी शामिल हैं। इस बयान पर साइन करने वाले प्रमुख लोगों में आदर्श कुमार गोयल, हेमंत गुप्ता, ओपी रावत, सुनील अरोड़ा और कंवल सिब्बल जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इस पूरे बयान को तैयार करने और जोड़ने का काम भास्वती मुखर्जी और एम. मदन गोपाल ने किया। 2025 में खुफिया एजेंसी RAW पर बैन की मांग की USCIRF ने अपनी 2025 की रिपोर्ट में कहा था कि भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति बिगड़ती जा रहा है और सिख अलगाववादियों की हत्या की साजिश में कथित रूप से शामिल होने की वजह से सीक्रेट एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) पर बैन लगा दिया जाना चाहिए। भारत सरकार ने USCIRF की रिपोर्ट खारिज करते हुए इसे पक्षपाती और राजनीति से प्रेरित बताया था। विदेश मंत्रालय ने कहा था कि रिपोर्ट तथ्यों को गलत ढंग से पेश करती है। इस आयोग को खुद को “चिंता का विषय संस्था” घोषित कर देना चाहिए। ——————————– ये खबर भी पढ़ें… अमेरिकी रिपोर्ट- ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान ने भारत को हराया, पहलगाम अटैक को भी आतंकी हमला नहीं माना एक अमेरिकी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच 4 दिन की लड़ाई (ऑपरेशन सिंदूर) में पाकिस्तान को बड़ी सैन्य कामयाबी मिली थी। इस रिपोर्ट में पहलगाम अटैक को भी आतंकी हमला न मानकर ‘विद्रोही हमला’ माना गया है। 800 पन्नों की इस रिपोर्ट को यूएस-चाइना इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमीशन (USCC) ने जारी किया है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
'धुरंधर 2' में आतिफ अहमद जैसे किरदार पर बढ़ा विवाद:राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज, ISI कनेक्शन दिखाने पर फिल्म के डायरेक्टर आदित्य धर घिरे

फिल्म धुरंधर 2 के सिनेमाघरों में आने के बाद एक नया विवाद तेजी से उभर रहा है। विवाद का केंद्र वह कथित अतीक अहमद से प्रेरित किरदार है, जिसे फिल्म में आतिफ अहमद के नाम से दिखाया गया है। इस पर राजनीतिक दलों, समाजिक समूहों और दर्शकों के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। इस दौरान आलोचना, समर्थन और सोशल मीडिया प्रतिक्रियाओं ने फिल्म को मनोरंजन से आगे एक राजनीतिक बहस में बदल दिया है। फिल्म के रिलीज के बाद कई समाचार चैनलों और रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि आतिफ अहमद का किरदार उत्तर प्रदेश के कुख्यात गैंगस्टर‑राजनेता अतीक अहमद से प्रेरित लगता है और कथित तौर पर खुफिया एजेंसी संबंधित कनेक्शनों को भी संदर्भित करता है, जिससे विवाद ने राजनीतिक रंग ले लिया है। कई नेताओं ने फिल्म में दिखाए गए ISI‑कनेक्शन वाले तत्वों को गलत और संवेदनशील मसलों को भड़काने वाला बताया है। समाजवादी पार्टी के नेता एस.टी. हसन ने फिल्म पर समाज में तनाव फैलाने और नफरत पैदा करने का आरोप लगाया है, साथ ही कहा है कि इस तरह की फिल्मों से दर्शकों में गलत संदेश जा सकता है। दूसरी तरफ, सपा विधायक अबू आजमी ने फिल्म को पाकिस्तानी फिल्म तक कह दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि भारत में ये विषय क्यों उठाया गया। उनके इस बयान ने विवाद को और भड़का दिया। विरोधी दलों ने इस फिल्म को राजनीतिक प्रोपेगैंडा तक कह दिया है। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार कांग्रेस और AIMIM के नेताओं ने आरोप लगाया कि फिल्म का कथानक मौजूदा राजनीतिक गुटों को लाभ पहुंचाने वाला प्रतीत होता है, और यह राजनैतिक माहौल को प्रभावित करना चाहता है। जिससे जनता और सरकार के बीच भ्रम फैल सकता है। वहीं कुछ समर्थक नेताओं का मानना है कि फिल्म में दिखाया गया हिस्सा वास्तविकता का एक परिप्रेक्ष्य है और इसे मनोरंजन और सिनेमा की रचना के रूप में समझा जाना चाहिए। उदाहरण के लिए, बिहार के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा कि सच दिखाना गलत नहीं होना चाहिए। उनका यह बयान फिल्मकारों को रचनात्मक स्वतंत्रता देने की वकालत करता है। डायरेक्टर आदित्य धर का रुख जहां विवाद राजनीतिक गलियारों तक पहुंचा है, वहीं फिल्म के निर्देशक आदित्य धर ने सार्वजनिक रूप से इस मुद्दे पर कोई लंबा बयान नहीं दिया है। इसके बजाय, उन्होंने फिल्म की सफलता और दर्शकों की प्रतिक्रिया के लिए आभार जताते हुए ट्विटर/सोशल मीडिया पर कहा कि फिल्म के प्रति प्रेम देखकर वह आभार महसूस कर रहे हैं और उन्होंने अपनी टीम एवं कलाकारों को धन्यवाद भी दिया है। विश्लेषण के स्तर पर यह समझा जा रहा है कि आदित्य धर और टीम ने अपनी फिल्म को एक थ्रिलर‑स्पाय जॉनर में रखा है, जिसमें कुछ वास्तविक घटनाओं से प्रेरित तत्व शामिल हैं, लेकिन फिल्म का मतलब किसी सटीक ऐतिहासिक दस्तावेज के रूप में देखने के बजाय इसे एक मनोरंजक कथा के रूप में लेना चाहिए। सोशल मीडिया और दर्शकों की प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखी जा रही हैं। कुछ दर्शकों का कहना है कि फिल्म दर्शकों को मनोरंजन और थ्रिल देती है और इसमें जो राजनीतिक बिंदु हैं वे सिनेमा का हिस्सा हैं। वहीं कुछ उपयोगकर्ताओं ने सीधे कहा है कि कुछ डायलॉग या कथानक प्रोपेगैंडा जैसा प्रतीत होता है, खासकर जब यह विचार किया जाता है कि राजनीतिक गुटों को आतंरिक मुद्दों से जोड़कर दिखाया गया है, जिसे वे गलत या अतिरंजित मानते हैं। Reddit चर्चा में एक उपयोगकर्ता ने लिखा कि फिल्म का राजनीतिक लहजा कुछ ज्यादा ही स्पष्ट है और कुछ घटनाओं को अतिरिक्त रूप से जोड़कर दिखाया गया लगता है, जिससे लोग इसे राजनीतिक एजेंडा के रूप में भी पढ़ रहे हैं। दूसरी ओर, कुछ सोशल मीडिया टिप्पणियां कहती हैं कि यह सब सिर्फ एक फिल्म है और लोगों को इसे मनोरंजन के नजरिए से लेना चाहिए, इसे राजनीतिक धरने या प्रोपेगैंडा के रूप में नहीं देखना चाहिए। विश्लेषण: क्या सच है और क्या फिल्मी दृष्टि? बीते कुछ दिनों से बढ़ते विवाद और आलोचनाओं के बीच यह स्पष्ट है कि ‘धुरंधर 2’ ने मनोरंजन से ऊपर राजनीतिक सवाल उठाए हैं। चाहे वह नाम‑जुड़ाव के आधार पर हो, कथानक के राजनीतिक संकेत के कारण, या फिर वास्तविक जीवन से प्रेरित तत्व को कहानी में शामिल करने के संदर्भ में। विश्लेषकों का कहना है कि फिल्मकारों ने पुरानी घटनाओं, खुफिया तत्वों और राजनीतिक मोड़ों का इस्तेमाल एक थ्रिलर के रूप में किया है, जैसा कि दुनिया भर की कई जासूसी फिल्मों में होता आया है। यह जरूरी नहीं कि हर बार फिल्म में दिखाई गई हर बात वास्तविकता की सीधी परछाई हो, बल्कि यह संयोजन और सिनेमाई ड्रामा का हिस्सा हो सकता है। हालांकि विवाद बहुत तेजी से चल रहा है और कुछ नेताओं के तीखे बयानों के कारण यह राजनीतिक बहस में बदल गया है, लेकिन फिल्म के प्रति दर्शकों की प्रतिक्रिया मिश्रित है। कुछ इसे मनोरंजन और राष्ट्रीयता का प्रतिनिधित्व मानते हैं, जबकि कुछ इसे राजनीतिक संदेश देने वाला समझते हैं। दोनों ही धाराएं सोशल मीडिया और समाचार प्लेटफॉर्म पर सामने आ रही हैं, जिससे यह विवाद और गहरा होता जा रहा है।
UP TET Notification Out; BEd, DElEd Apply Now

Hindi News Career UP TET Notification Out; BEd, DElEd Apply Now | Last Date April 26 54 मिनट पहले कॉपी लिंक उत्तर प्रदेश एजुकेशन सर्विस सिलेक्शन कमीशन (UPESSC) ने UPTET यानी शिक्षक पात्रता परीक्षा के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है। ये लेवल 1 (कक्षा 1 से 5वीं तक) और लेवल 2 (कक्षा 6ठी से 8वीं तक) के असिस्टेंट टीचर के लिए एलिजिबिलिटी परीक्षा होगी। उम्मीदवार 27 मार्च से 26 अप्रैल तक आयोग के ऑफिशियल वेबसाइट upessc.gov.in पर अप्लाई कर सकेंगे। वैकेंसी डिटेल्स : पद का नाम पदों की संख्या असिस्टेंट टीचर जारी नहीं एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : लेवल 1 के लिए- मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से किसी भी विषय में बैचलर्स किए और डी.एल.एड पास या फाइनल ईयर के स्टूडेंट। या इटरमीडिएट में 50 प्रतिशत मार्क्स के साथ 4 साल का इंटीग्रेटेड बी.एल.एड। लेवल 2 के लिए- मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से किसी भी विषय में बैचलर्स या मास्टर्स में 50 प्रतिशत मार्क्स के साथ बी.एड या स्पेशल एजुकेशन में बी.एड या र 2 ईयर BTC। इटरमीडिएट में 50 प्रतिशत मार्क्स के साथ 4 साल का इंटीग्रेटेड बी.एल.एड या बी.एसी.एड। एज लिमिट : जारी नहीं। फीस : कैटेगरी पेपर 1 पेपर 2 सामान्य/EWS/OBCS 1000 1000 SC/STs 500 500 दिव्यांग 300 300 एग्जाम पैटर्न : 150 मिनट यानी डेढ़ घंटे की परिक्षा में 4 सब्जेक्ट्स से 150 MCQs पूछे जाएंगे। नेगेटिव मार्किंग नहीं है। सिलेबस : पेपर 1 के लिए (1 से 5वीं क्लास तक) बाल विकास एवं शिक्षण विधि (चाइल्ड ड्वेलप्मेंट एंड टीचिंग मेथड) कम्पल्सरी हिंदी और इंग्लिश/उर्दू/संस्कृत गणित (मैथ्स) और पर्यावरणीय अध्ययन (एनवायरमेंटल स्टडीज) 1 अंक के 150 MCQs पेपर 2 के लिए (6ठी से 8वीं क्लास तक) बाल विकास एवं शिक्षण विधि (चाइल्ड ड्वेलप्मेंट एंड टीचिंग मेथड) कम्पल्सरी हिंदी और इंग्लिश/उर्दू/संस्कृत विशेषज्ञता वाले विषय से 60 प्रश्न (गणित/विज्ञान/सामाजिक विज्ञान/सामाजिक अध्ययन) 1 अंक के 150 MCQs ऐसे करें आवेदन : आयोग की ऑफिशियल वेबसाइट upessc.gov.in पर जाएं। वैलिड जानकारी के साथ ऑनलाइन वन टाइम रजिस्ट्रेशन करें। पेपर 1, 2 या दोनों सेलेक्ट कर अप्लाई करें। ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक —————- ये खबरें भी पढ़ें… SSB में 1060 वैकेंसी; UPSSSC ने 402 पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन किया जारी, यूपी में स्पेशल टीचर की 58 ओपनिंग्स आज की सरकारी नौकरी में जानकारी SSB में 1060 भर्ती का नोटिफिकेशन जारी होने की, UPSSSC ने बोरिंग तकनीशियन भर्ती 2026 का नोटिफिकेशन जारी किया। इस भर्ती के लिए आवेदन की शुरुआत 15 अप्रैल से की जाएगी। साथ ही यूपी में स्पेशल टीचर के 58 पदों पर भर्ती की। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
शाजापुर में पत्नी ने की पति की हत्या:पेवर ब्लॉक से हमला, पेट में चाकू मारा; आरोपी महिला गिरफ्तार

शाजापुर जिले के मक्सी थाना इलाके में पत्नी को ही कत्ल के इल्जाम में गिरफ्तार किया गया है। 19 मार्च को खबर मिली थी कि मक्सी के झोंकर रोड पर रहने वाले राकेश कुंभकार की इंदौर के एमवाय अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। शुरुआती जांच में पता चला कि राकेश के शरीर पर गंभीर चोटें थीं, जिसके बाद मक्सी थाने में कातिल के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू की गई। शराब और झगड़ा बनी वजह थाना प्रभारी संजय वर्मा की टीम ने जब मामले की पड़ताल की, तो पता चला कि राकेश और उसकी पत्नी आरती के बीच अक्सर झगड़े होते थे। दोनों महावीर ब्रिक्स कंपनी के एक कमरे में रहते थे, जहां राकेश शराब पीकर आरती के साथ मारपीट और विवाद करता था। सोते हुए पति पर हमला वारदात 18 मार्च की रात की है। गुस्से में आकर आरती ने सोते हुए राकेश के सिर पर सीमेंट के पेवर ब्लॉक से हमला कर दिया और उसके पेट में चाकू मार दिया। पुलिस की पूछताछ में आरती ने अपना जुर्म मान लिया है। पुलिस ने कत्ल में इस्तेमाल हथियार भी बरामद कर लिए हैं।
बड़वानी के मंडवाड़ा में तखत कार्यक्रम:युवाओं ने महिलाओं के वेश में किया डांस; गणगौर पर्व पर 50 गांवों के ग्रामीण पहुंचे

निमाड़ अंचल के प्रसिद्ध गणगौर पर्व के अवसर पर शनिवार को बड़वानी जिले के मंडवाड़ा में पारंपरिक ‘तखत’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस परंपरा को देखने के लिए आसपास के लगभग 50 गांवों से हजारों की संख्या में ग्रामीण एकत्रित हुए। सुबह से दोपहर तक चले इस कार्यक्रम में लोक संस्कृति और आधुनिकता का अनूठा संगम देखने को मिला। ट्रैक्टर-ट्रॉली बने चलते-फिरते स्टेज, युवाओं का अनूठा नृत्य तखत कार्यक्रम की मुख्य विशेषता युवाओं द्वारा महिलाओं के वेश में दी जाने वाली नृत्य प्रस्तुतियां रहीं। तकियापुर, मोहीपुरा, पानिया और मुंडियापुरा सहित विभिन्न गांवों से आई टीमों ने चलते हुए ट्रैक्टर-ट्रॉली पर बनाए गए ‘तखत’ (स्टेज) पर आकर्षक प्रस्तुतियां दीं। क्षेत्रीय निमाड़ी गीतों और फिल्मी गानों पर युवाओं ने महिलाओं का स्वांग रचकर मनमोहक नृत्य किया, जिसे देखने के लिए दर्शकों में भारी उत्साह रहा। निमाड़ की प्राचीन परंपरा और गणगौर का उल्लास मंडवाड़ा में हर साल गणगौर पर्व के दौरान यह आयोजन किया जाता है, जिसमें क्षेत्र के जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता भी उत्साहपूर्वक हिस्सा लेते हैं। इस दौरान पूरा क्षेत्र भक्ति और उत्सव के माहौल में डूबा रहा। श्रद्धालुओं ने माता रणुबाई की अगवानी की और मन्नतें पूरी होने पर विशेष पूजन-अर्चन किया। गणगौर घाटों पर हाेगा प्रतिमाओं का विसर्जन गणगौर पर्व के तहत श्रद्धालु माता रणुबाई की प्रतिमाओं को अपने घर ले जाते हैं, जहां रात भर भजन-कीर्तन और पारंपरिक अनुष्ठान किए जाते हैं। मन्नत पूरी होने पर भक्त माता को घर पर रोकते हैं और उत्सव मनाते हैं। तीन दिनों तक चलने वाले इस आस्था के महापर्व का समापन आगामी दिनों में गणगौर घाटों पर प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ होगा।
‘धाकड़ के साथ धुरंधर भी हैं धामी, 4 साल में किया धुआंधार काम’, राजनाथ सिंह ने उत्तराखंड के सीएम की शोभा बढ़ाई

उत्तराखंड में मुख्यमंत्री के रूप में चार साल तक चलने वाले भव्य कार्यक्रम का आयोजन केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया। आसपास के जंगलों में आयोजित इस विशाल रैली में राजनीतिक दृष्टि से नया रिकॉर्ड बनाया गया, जिसमें करीब एक लाख लोगों की भीड़ शामिल थी। यह अब तक की सबसे बड़ी रैली में से एक माना जा रहा है। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बस्तर के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का सीएम धामी ने कॉम से स्वागत किया। हेलीपैड पर दोनों नेताओं के बीच खास आत्मीयता देखने को मिली। सीएम धामी ने राजनाथ सिंह को पारंपरिक उत्तराखंडी परिधान और वास्तुशास्त्री के रूप में नियुक्त किया। इसके बाद दोनों नेता साथ-साथ कार्यक्रम स्थल तक पहुंचे, जहां मंच पर भी उनकी शानदार केमिस्ट्री नजर आई। धाकड़ के साथ धुरंधर भी हैं धामी: राजनाथ रैली में भारी जनसैलाब बाढ़, जो धामी सरकार के चार साल पूरे होने का जश्न जनता के उत्साह पर आधारित है। लोग दूर-दूर से अपने नेताओं को सुन रहे थे। इस दौरान जनता से सीधा संवाद करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि उत्तराखंड विकास के नए आयाम स्थापित किए जा रहे हैं और इसमें सीएम धामी की बड़ी भूमिका है। अपने शोधपत्र में राजनाथ सिंह ने कहा, ‘मैं 2022 में कहा था कि हमारे ये धामी ‘धाकड़ धामी’ हैं, लेकिन आज मैं भी यही कहना चाहता हूं कि ये ‘धुरंधर धामी’ भी हों।’ उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुतिन सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य में चार वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है और आने वाले समय में यह विकास और तेजी से होगा। रक्षा मंत्री ने आगे कहा कि धामी सरकार ने क्षेत्र में छात्रावासों के विकास, पर्यटन को बढ़ावा और युवाओं को रोजगार देने का काम किया है। उन्होंने कहा कि चार साल तक “छक्का” पर भी विश्वास जरूर करेंगे। प्रदेश में विकास की गति लगातार तेज हो रही है: राजनाथ सिंह राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि प्रदेश में विकास की गति लगातार तेज हो रही है और सरकार का फायदा सीधे जनता तक पहुंच रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री धामी को एक ऊर्जावान, दूरदर्शी और कालजयी नेता बताते हुए कहा कि उनका नेतृत्व उत्तराखंड में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सीएम धामी ने भी जनता का समर्थन करते हुए कहा कि यह जनसमर्थन उनकी सरकार के सहयोग और सहयोग पर जनता के विश्वास का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि राज्य को नई ऊंचाई तक विकास के लिए सरकार लगातार प्रयासरत है। समीक्षा की यह ऐतिहासिक रैली न सिर्फ जनसमर्थन का प्रदर्शन बनी, बल्कि यह भी संकेत दे दिया कि आने वाले समय में उत्तराखंड की राजनीति में सीएम धामी का कद और मजबूत होने वाला है।
‘इनकार किया लेकिन हारा नहीं’: क्या केरल में कांग्रेस की ‘महिला समस्या’ की कीमत चुकानी पड़ेगी? | चुनाव समाचार

आखरी अपडेट:मार्च 21, 2026, 18:09 IST कांग्रेस द्वारा राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. शमा मोहम्मद और केरल में अन्य संभावित महिला उम्मीदवारों को ‘टिकट देने से इनकार’ करने पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। शमा का सार्वजनिक आरोप भाजपा को कांग्रेस की महिला समर्थक छवि को चुनौती देने के लिए सही हथियार प्रदान करता है। फ़ाइल चित्र/पीटीआई केरल कांग्रेस के पास चबाने के लिए बहुत कुछ है, और “विचार के लिए भोजन” पूर्व दंत चिकित्सक और राष्ट्रीय प्रवक्ता, डॉ शमा मोहम्मद द्वारा परोसा गया है। कन्नूर विधानसभा सीट से टिकट नहीं मिलने के बाद शमा ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर खुद को घोषित किया कि उन्हें टिकट नहीं मिला, लेकिन वे हारी नहीं हैं। हालाँकि, उनकी अवज्ञा एक तीखी चुभन के साथ आई: एक सार्वजनिक सवाल कि पार्टी में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बेहद कम क्यों है। मातृवंशीय विरोधाभास केरल एक अनोखा राजनीतिक विरोधाभास प्रस्तुत करता है। यह गहरी मातृसत्तात्मक जड़ों वाला समाज है, जहां 2011 की जनगणना के अनुसार, महिलाएं आबादी का 52% हिस्सा हैं। इसके बावजूद, पार्टी लाइनों से परे राजनीतिक प्रतिनिधित्व हठपूर्वक 10% से नीचे बना हुआ है। इस बार दांव अलग होने की उम्मीद थी। महिला अधिकारों की स्वघोषित चैंपियन प्रियंका गांधी वाड्रा अब राज्य से सांसद हैं, ऐसे में कई लोगों को उम्मीद थी कि इस शक्तिशाली वोट बैंक में महिला उम्मीदवारों की संख्या में बढ़ोतरी होगी। हालांकि विरोधी भले ही शमा को “हाई-प्रोफ़ाइल” राज्य नेता का लेबल न दें, लेकिन उनकी मुखर असहमति का न केवल केरल में, बल्कि अन्य चुनावी राज्यों में भी महत्वपूर्ण असर हो सकता है। ग्राउंडवर्क बनाम पार्टी पदानुक्रम शमा की निराशा कन्नूर में एक साल से अधिक समय से चल रहे निरंतर जमीनी काम से उपजी है। एक सरकारी स्कूल का उनका हालिया नवीनीकरण एक स्पष्ट संकेत था कि वह निर्वाचन क्षेत्र का पोषण कर रही थीं। उनका तिरस्कार कांग्रेस के भीतर बार-बार एक सवाल उठाता है: क्या जमीन पर उतरना वास्तव में मायने रखता है? लंबे समय से यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि केपीसीसी अध्यक्ष के सुधाकरन यह सीट लेंगे. हालाँकि, पार्टी कथित तौर पर मुख्य रूप से मुस्लिम आबादी वाले क्षेत्र में एक अवसर को “बर्बाद” करने से झिझक रही थी। यहीं पर शमा की उम्मीदें टिकी थीं। उन्हें दरकिनार करके, पार्टी नेतृत्व उन लोगों के प्रति उदासीन दिखने का जोखिम उठा रहा है जो स्थानीय जैविक समर्थन का निर्माण करते हैं, इसके बजाय स्थापित आंतरिक शिविरों का पक्ष लेते हैं जिन्हें राहुल गांधी वर्तमान में एकजुट करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ‘आक्रामक’ महिलाओं के बाहर निकलने का एक पैटर्न? शमा का आरोप उन महिलाओं की शिकायतों की बढ़ती सूची की प्रतिध्वनि है, जिन्होंने महसूस किया है कि सबसे पुरानी पार्टी ने उन्हें दरकिनार कर दिया है। कुछ महीने पहले ही मुमताज पटेल ने टिप्पणी की थी कि कांग्रेस आक्रामक महिला आवाजों से “असहज” बनी हुई है। यह भावना समर्थन की कमी का हवाला देकर शिवसेना में शामिल होने वाली प्रियंका चतुर्वेदी और छत्तीसगढ़ में खुद को निशाना बनाए जाने के दौरान चुप रहने का आरोप लगाने के बाद भाजपा में शामिल होने वाली राधिका खेड़ा के प्रस्थान को दर्शाती है। ये हाई-प्रोफाइल प्रस्थान मुखर, महत्वाकांक्षी महिला नेताओं को प्रबंधित करने के लिए कांग्रेस के भीतर एक प्रणालीगत संघर्ष का सुझाव देते हैं। बीजेपी की रणनीतिक शुरुआत इस अंदरूनी खींचतान का समय कांग्रेस के लिए इससे बुरा नहीं हो सकता. केंद्र कथित तौर पर इसके कार्यान्वयन में तेजी लाने के लिए मौजूदा संसद सत्र में महिला आरक्षण विधेयक का एक संशोधित संस्करण पेश करने की योजना बना रहा है। भाजपा उन राज्यों में इसका लाभ उठाने की इच्छुक है जहां महिला वोट निर्णायक हैं, जैसे असम, पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु। शमा का सार्वजनिक आरोप भाजपा को कांग्रेस की महिला समर्थक छवि को चुनौती देने के लिए सही हथियार प्रदान करता है। इसके अलावा, भाजपा पहले से ही असम में प्रियंका गांधी वाड्रा की उपस्थिति को एक सामरिक “भटकाव” के रूप में पेश कर रही है, यह तर्क देते हुए कि उन्हें उस राज्य में होना चाहिए जहां वह एक सांसद के रूप में कार्य करती हैं। वे इसे पार्टी के पुरुष नेतृत्व-खासकर राहुल गांधी-के बाद महिलाओं की भूमिका निभाने का एक और उदाहरण मान रहे हैं। कमरे में बुझाने वाला यंत्र? पिछले विधानसभा चुनावों में एलडीएफ महिला मतदाताओं के समर्थन के दम पर सत्ता बरकरार रखने में कामयाब रही थी। हालांकि कांग्रेस को इस बार वापसी की उम्मीद है, लेकिन “शमा फैक्टर” से गति धीमी होने का खतरा है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि अगर पार्टी अपने आंतरिक मतभेदों को दूर नहीं कर सकती है और अपनी महिला आवाजों को दरकिनार करने की संभावनाओं को संबोधित नहीं कर सकती है, तो डॉ. शमा मोहम्मद की असहमति ही वह चिंगारी हो सकती है जो दक्षिण में कांग्रेस की संभावनाओं को खत्म कर देगी। पहले प्रकाशित: मार्च 21, 2026, 18:09 IST समाचार चुनाव ‘इनकार किया लेकिन हारा नहीं’: क्या केरल में कांग्रेस की ‘महिला समस्या’ की कीमत चुकानी पड़ेगी? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
Rishabh Shetty Film Chhatrapati Shivaji Maharaj

15 मिनट पहले कॉपी लिंक बॉलीवुड एक्टर अर्जुन रामपाल इन दिनों चर्चा में हैं। उनकी हालिया फिल्म ‘धुरंधर 2’ बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा रही है और अर्जुन के खलनायक किरदार को दर्शकों ने खूब पसंद किया। अब इस सफलता के बाद अर्जुन रामपाल जल्द ही ऋषभ शेट्टी की बहुप्रतीक्षित ऐतिहासिक फिल्म ‘द प्राइड ऑफ भारत: छत्रपति शिवाजी महाराज’ में मुख्य विलेन के रूप में नजर आएंगे। वैरायटी इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक फिल्म में अर्जुन रामपाल एक ताकतवर विरोधी का किरदार निभाएंगे, जो मुख्य नायक यानी ऋषभ शेट्टी के किरदार से टक्कर लेगा। उनके इस रोल को लेकर फिल्म इंडस्ट्री में पहले से ही उत्साह है। फैंस अर्जुन के नए अवतार के लिए बेहद उत्साहित हैं और उनकी एक्टिंग रेंज को इस रोल में और मजबूत होने की उम्मीद है। धुरंधर: द रिवेंज में अर्जुन रामपाल ने मेजर इकबाल का किरदार निभाया है। फिल्म की कहानी और प्रोडक्शन छत्रपति शिवाजी महाराज भारतीय इतिहास के महान योद्धा की जीवन गाथा पर आधारित एक महाकाव्य फिल्म है। इसमें छत्रपति शिवाजी महाराज के साहस, रणनीति, नेतृत्व और राष्ट्रप्रेम को दर्शाया जाएगा। फिल्म में शेफाली शाह राजमाता जीजाबाई के किरदार में दिखाई देंगी। प्रोडक्शन इस साल के मध्य में शुरू होने की उम्मीद है। फिल्म तकनीकी दृष्टि से भव्य होगी और इसके सेट, विज़ुअल इफेक्ट्स और कॉस्ट्यूम डिजाइन को लेकर खास तैयारी की जा रही है। अर्जुन रामपाल का किरदार अर्जुन रामपाल ने ‘धुरंधर 2’ में अपने खलनायक किरदार के लिए खूब सराहना पाई। अब वह एक और बड़े प्रोजेक्ट में विलेन की भूमिका निभाकर दर्शकों को रोमांचित करने वाले हैं। उनकी भूमिका केवल एक विलेन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि फिल्म की थ्रिल और इमोशनल इंटेंसिटी में चार‑चांद लगाएगी। सोशल मीडिया पर फैंस ने अर्जुन के इस नए अवतार को लेकर उत्साह व्यक्त किया है। कई लोग मान रहे हैं कि यह किरदार उनकी एक्टिंग कैरियर के लिए महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा। अर्जुन रामपाल को धुरंधर: द रिवेंज में मेजर इकबाल के किरदार के लिए खूब तारीफ मिल रही है। शुरुआती दिनों में ही फिल्म ने करोड़ों रुपए की कमाई की और दर्शकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया हासिल की। इस सफलता ने अर्जुन के करियर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है और उन्हें इतिहास आधारित बड़े प्रोजेक्ट्स में ले जाने के लिए तैयार किया है। ‘द प्राइड ऑफ भारत: छत्रपति शिवाजी महाराज’ में ऋषभ शेट्टी की लीड भूमिका है। फिल्म जगत के जानकार इसे 2026‑27 की सबसे प्रतीक्षित फिल्मों में से एक मान रहे हैं। अर्जुन रामपाल की विलेन भूमिका फिल्म को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकती है। फिल्म के सेट‑पीस, कलाकारों का अभिनय और तकनीकी टीम की मेहनत इसे बड़े सिनेमाई इवेंट में बदलने वाली है। संदीप सिंह के डायरेक्शन में बनने जा रही इस फिल्म की शूटिंग जल्द ही शुरू होने वाली है और फैंस बेसब्री से अर्जुन रामपाल और ऋषभ शेट्टी के ऑन‑स्क्रीन टकराव का इंतजार कर रहे हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔








