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'धुरंधर 2' में आतिफ अहमद जैसे किरदार पर बढ़ा विवाद:राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज, ISI कनेक्शन दिखाने पर फिल्म के डायरेक्टर आदित्य धर घिरे

'धुरंधर 2' में आतिफ अहमद जैसे किरदार पर बढ़ा विवाद:राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज, ISI कनेक्शन दिखाने पर फिल्म के डायरेक्टर आदित्य धर घिरे

फिल्म धुरंधर 2 के सिनेमाघरों में आने के बाद एक नया विवाद तेजी से उभर रहा है। विवाद का केंद्र वह कथित अतीक अहमद से प्रेरित किरदार है, जिसे फिल्म में आतिफ अहमद के नाम से दिखाया गया है। इस पर राजनीतिक दलों, समाजिक समूहों और दर्शकों के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। इस दौरान आलोचना, समर्थन और सोशल मीडिया प्रतिक्रियाओं ने फिल्म को मनोरंजन से आगे एक राजनीतिक बहस में बदल दिया है। फिल्म के रिलीज के बाद कई समाचार चैनलों और रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि आतिफ अहमद का किरदार उत्तर प्रदेश के कुख्यात गैंगस्टर‑राजनेता अतीक अहमद से प्रेरित लगता है और कथित तौर पर खुफिया एजेंसी संबंधित कनेक्शनों को भी संदर्भित करता है, जिससे विवाद ने राजनीतिक रंग ले लिया है। कई नेताओं ने फिल्म में दिखाए गए ISI‑कनेक्शन वाले तत्वों को गलत और संवेदनशील मसलों को भड़काने वाला बताया है। समाजवादी पार्टी के नेता एस.टी. हसन ने फिल्म पर समाज में तनाव फैलाने और नफरत पैदा करने का आरोप लगाया है, साथ ही कहा है कि इस तरह की फिल्मों से दर्शकों में गलत संदेश जा सकता है। दूसरी तरफ, सपा विधायक अबू आजमी ने फिल्म को पाकिस्तानी फिल्म तक कह दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि भारत में ये विषय क्यों उठाया गया। उनके इस बयान ने विवाद को और भड़का दिया। विरोधी दलों ने इस फिल्म को राजनीतिक प्रोपेगैंडा तक कह दिया है। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार कांग्रेस और AIMIM के नेताओं ने आरोप लगाया कि फिल्म का कथानक मौजूदा राजनीतिक गुटों को लाभ पहुंचाने वाला प्रतीत होता है, और यह राजनैतिक माहौल को प्रभावित करना चाहता है। जिससे जनता और सरकार के बीच भ्रम फैल सकता है। वहीं कुछ समर्थक नेताओं का मानना है कि फिल्म में दिखाया गया हिस्सा वास्तविकता का एक परिप्रेक्ष्य है और इसे मनोरंजन और सिनेमा की रचना के रूप में समझा जाना चाहिए। उदाहरण के लिए, बिहार के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा कि सच दिखाना गलत नहीं होना चाहिए। उनका यह बयान फिल्मकारों को रचनात्मक स्वतंत्रता देने की वकालत करता है। डायरेक्टर आदित्य धर का रुख जहां विवाद राजनीतिक गलियारों तक पहुंचा है, वहीं फिल्म के निर्देशक आदित्य धर ने सार्वजनिक रूप से इस मुद्दे पर कोई लंबा बयान नहीं दिया है। इसके बजाय, उन्होंने फिल्म की सफलता और दर्शकों की प्रतिक्रिया के लिए आभार जताते हुए ट्विटर/सोशल मीडिया पर कहा कि फिल्म के प्रति प्रेम देखकर वह आभार महसूस कर रहे हैं और उन्होंने अपनी टीम एवं कलाकारों को धन्यवाद भी दिया है। विश्लेषण के स्तर पर यह समझा जा रहा है कि आदित्य धर और टीम ने अपनी फिल्म को एक थ्रिलर‑स्पाय जॉनर में रखा है, जिसमें कुछ वास्तविक घटनाओं से प्रेरित तत्व शामिल हैं, लेकिन फिल्म का मतलब किसी सटीक ऐतिहासिक दस्तावेज के रूप में देखने के बजाय इसे एक मनोरंजक कथा के रूप में लेना चाहिए। सोशल मीडिया और दर्शकों की प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखी जा रही हैं। कुछ दर्शकों का कहना है कि फिल्म दर्शकों को मनोरंजन और थ्रिल देती है और इसमें जो राजनीतिक बिंदु हैं वे सिनेमा का हिस्सा हैं। वहीं कुछ उपयोगकर्ताओं ने सीधे कहा है कि कुछ डायलॉग या कथानक प्रोपेगैंडा जैसा प्रतीत होता है, खासकर जब यह विचार किया जाता है कि राजनीतिक गुटों को आतंरिक मुद्दों से जोड़कर दिखाया गया है, जिसे वे गलत या अतिरंजित मानते हैं। Reddit चर्चा में एक उपयोगकर्ता ने लिखा कि फिल्म का राजनीतिक लहजा कुछ ज्यादा ही स्पष्ट है और कुछ घटनाओं को अतिरिक्त रूप से जोड़कर दिखाया गया लगता है, जिससे लोग इसे राजनीतिक एजेंडा के रूप में भी पढ़ रहे हैं। दूसरी ओर, कुछ सोशल मीडिया टिप्पणियां कहती हैं कि यह सब सिर्फ एक फिल्म है और लोगों को इसे मनोरंजन के नजरिए से लेना चाहिए, इसे राजनीतिक धरने या प्रोपेगैंडा के रूप में नहीं देखना चाहिए। विश्लेषण: क्या सच है और क्या फिल्मी दृष्टि? बीते कुछ दिनों से बढ़ते विवाद और आलोचनाओं के बीच यह स्पष्ट है कि ‘धुरंधर 2’ ने मनोरंजन से ऊपर राजनीतिक सवाल उठाए हैं। चाहे वह नाम‑जुड़ाव के आधार पर हो, कथानक के राजनीतिक संकेत के कारण, या फिर वास्तविक जीवन से प्रेरित तत्व को कहानी में शामिल करने के संदर्भ में। विश्लेषकों का कहना है कि फिल्मकारों ने पुरानी घटनाओं, खुफिया तत्वों और राजनीतिक मोड़ों का इस्तेमाल एक थ्रिलर के रूप में किया है, जैसा कि दुनिया भर की कई जासूसी फिल्मों में होता आया है। यह जरूरी नहीं कि हर बार फिल्म में दिखाई गई हर बात वास्तविकता की सीधी परछाई हो, बल्कि यह संयोजन और सिनेमाई ड्रामा का हिस्सा हो सकता है। हालांकि विवाद बहुत तेजी से चल रहा है और कुछ नेताओं के तीखे बयानों के कारण यह राजनीतिक बहस में बदल गया है, लेकिन फिल्म के प्रति दर्शकों की प्रतिक्रिया मिश्रित है। कुछ इसे मनोरंजन और राष्ट्रीयता का प्रतिनिधित्व मानते हैं, जबकि कुछ इसे राजनीतिक संदेश देने वाला समझते हैं। दोनों ही धाराएं सोशल मीडिया और समाचार प्लेटफॉर्म पर सामने आ रही हैं, जिससे यह विवाद और गहरा होता जा रहा है।

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'धुरंधर 2' में आतिफ अहमद जैसे किरदार पर बढ़ा विवाद:राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज, ISI कनेक्शन दिखाने पर फिल्म के डायरेक्टर आदित्य धर घिरे

फिल्म धुरंधर 2 के सिनेमाघरों में आने के बाद एक नया विवाद तेजी से उभर रहा है। विवाद का केंद्र वह कथित अतीक अहमद से प्रेरित किरदार है, जिसे फिल्म में आतिफ अहमद के नाम से दिखाया गया है। इस पर राजनीतिक दलों, समाजिक समूहों और दर्शकों के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। इस दौरान आलोचना, समर्थन और सोशल मीडिया प्रतिक्रियाओं ने फिल्म को मनोरंजन से आगे एक राजनीतिक बहस में बदल दिया है। फिल्म के रिलीज के बाद कई समाचार चैनलों और रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि आतिफ अहमद का किरदार उत्तर प्रदेश के कुख्यात गैंगस्टर‑राजनेता अतीक अहमद से प्रेरित लगता है और कथित तौर पर खुफिया एजेंसी संबंधित कनेक्शनों को भी संदर्भित करता है, जिससे विवाद ने राजनीतिक रंग ले लिया है। कई नेताओं ने फिल्म में दिखाए गए ISI‑कनेक्शन वाले तत्वों को गलत और संवेदनशील मसलों को भड़काने वाला बताया है। समाजवादी पार्टी के नेता एस.टी. हसन ने फिल्म पर समाज में तनाव फैलाने और नफरत पैदा करने का आरोप लगाया है, साथ ही कहा है कि इस तरह की फिल्मों से दर्शकों में गलत संदेश जा सकता है। दूसरी तरफ, सपा विधायक अबू आजमी ने फिल्म को पाकिस्तानी फिल्म तक कह दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि भारत में ये विषय क्यों उठाया गया। उनके इस बयान ने विवाद को और भड़का दिया। विरोधी दलों ने इस फिल्म को राजनीतिक प्रोपेगैंडा तक कह दिया है। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार कांग्रेस और AIMIM के नेताओं ने आरोप लगाया कि फिल्म का कथानक मौजूदा राजनीतिक गुटों को लाभ पहुंचाने वाला प्रतीत होता है, और यह राजनैतिक माहौल को प्रभावित करना चाहता है। जिससे जनता और सरकार के बीच भ्रम फैल सकता है। वहीं कुछ समर्थक नेताओं का मानना है कि फिल्म में दिखाया गया हिस्सा वास्तविकता का एक परिप्रेक्ष्य है और इसे मनोरंजन और सिनेमा की रचना के रूप में समझा जाना चाहिए। उदाहरण के लिए, बिहार के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा कि सच दिखाना गलत नहीं होना चाहिए। उनका यह बयान फिल्मकारों को रचनात्मक स्वतंत्रता देने की वकालत करता है। डायरेक्टर आदित्य धर का रुख जहां विवाद राजनीतिक गलियारों तक पहुंचा है, वहीं फिल्म के निर्देशक आदित्य धर ने सार्वजनिक रूप से इस मुद्दे पर कोई लंबा बयान नहीं दिया है। इसके बजाय, उन्होंने फिल्म की सफलता और दर्शकों की प्रतिक्रिया के लिए आभार जताते हुए ट्विटर/सोशल मीडिया पर कहा कि फिल्म के प्रति प्रेम देखकर वह आभार महसूस कर रहे हैं और उन्होंने अपनी टीम एवं कलाकारों को धन्यवाद भी दिया है। विश्लेषण के स्तर पर यह समझा जा रहा है कि आदित्य धर और टीम ने अपनी फिल्म को एक थ्रिलर‑स्पाय जॉनर में रखा है, जिसमें कुछ वास्तविक घटनाओं से प्रेरित तत्व शामिल हैं, लेकिन फिल्म का मतलब किसी सटीक ऐतिहासिक दस्तावेज के रूप में देखने के बजाय इसे एक मनोरंजक कथा के रूप में लेना चाहिए। सोशल मीडिया और दर्शकों की प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखी जा रही हैं। कुछ दर्शकों का कहना है कि फिल्म दर्शकों को मनोरंजन और थ्रिल देती है और इसमें जो राजनीतिक बिंदु हैं वे सिनेमा का हिस्सा हैं। वहीं कुछ उपयोगकर्ताओं ने सीधे कहा है कि कुछ डायलॉग या कथानक प्रोपेगैंडा जैसा प्रतीत होता है, खासकर जब यह विचार किया जाता है कि राजनीतिक गुटों को आतंरिक मुद्दों से जोड़कर दिखाया गया है, जिसे वे गलत या अतिरंजित मानते हैं। Reddit चर्चा में एक उपयोगकर्ता ने लिखा कि फिल्म का राजनीतिक लहजा कुछ ज्यादा ही स्पष्ट है और कुछ घटनाओं को अतिरिक्त रूप से जोड़कर दिखाया गया लगता है, जिससे लोग इसे राजनीतिक एजेंडा के रूप में भी पढ़ रहे हैं। दूसरी ओर, कुछ सोशल मीडिया टिप्पणियां कहती हैं कि यह सब सिर्फ एक फिल्म है और लोगों को इसे मनोरंजन के नजरिए से लेना चाहिए, इसे राजनीतिक धरने या प्रोपेगैंडा के रूप में नहीं देखना चाहिए। विश्लेषण: क्या सच है और क्या फिल्मी दृष्टि? बीते कुछ दिनों से बढ़ते विवाद और आलोचनाओं के बीच यह स्पष्ट है कि ‘धुरंधर 2’ ने मनोरंजन से ऊपर राजनीतिक सवाल उठाए हैं। चाहे वह नाम‑जुड़ाव के आधार पर हो, कथानक के राजनीतिक संकेत के कारण, या फिर वास्तविक जीवन से प्रेरित तत्व को कहानी में शामिल करने के संदर्भ में। विश्लेषकों का कहना है कि फिल्मकारों ने पुरानी घटनाओं, खुफिया तत्वों और राजनीतिक मोड़ों का इस्तेमाल एक थ्रिलर के रूप में किया है, जैसा कि दुनिया भर की कई जासूसी फिल्मों में होता आया है। यह जरूरी नहीं कि हर बार फिल्म में दिखाई गई हर बात वास्तविकता की सीधी परछाई हो, बल्कि यह संयोजन और सिनेमाई ड्रामा का हिस्सा हो सकता है। हालांकि विवाद बहुत तेजी से चल रहा है और कुछ नेताओं के तीखे बयानों के कारण यह राजनीतिक बहस में बदल गया है, लेकिन फिल्म के प्रति दर्शकों की प्रतिक्रिया मिश्रित है। कुछ इसे मनोरंजन और राष्ट्रीयता का प्रतिनिधित्व मानते हैं, जबकि कुछ इसे राजनीतिक संदेश देने वाला समझते हैं। दोनों ही धाराएं सोशल मीडिया और समाचार प्लेटफॉर्म पर सामने आ रही हैं, जिससे यह विवाद और गहरा होता जा रहा है।

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