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सावधान! गर्मियों में आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकती हैं आपकी ये आम आदतें, एक्सपर्ट से जानें बचाव

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Last Updated:March 23, 2026, 22:04 IST Summer Health Tips: चिलचिलाती धूप और बढ़ता तापमान आपके शरीर की ऊर्जा को सोख सकता है. जिला अस्पताल में डाइटिशियन डॉ. सपना सिंह बताती हैं कि गर्मी शुरू होते ही लोग डिहाइड्रेशन, कमजोरी और पेट के विकारों का शिकार होने लगे हैं. खासकर फील्ड में काम करने वाले लोगों के लिए यह मौसम काफी चुनौतीपूर्ण होता है. अगर समय रहते खान-पान और पानी की मात्रा पर ध्यान न दिया जाए, तो शरीर की रोग इम्यूनिटी कमजोर पड़ जाती है और बीमारियां आसानी से घेर लेती हैं. मुरादाबाद: सूरज की तपिश बढ़ने के साथ ही गर्मियां अपने पूरे शबाब पर है. लेकिन यह मौसम अपने साथ सेहत से जुड़ी कई चुनौतियां भी लेकर आता है. जिला अस्पताल की डाइटिशियन डॉ. सपना सिंह के मुताबिक, गर्मी शुरू होते ही अस्पताल में मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा होने लगा है. हर दिन करीब 20 से ज्यादा मरीज सिर्फ पानी की कमी, डिहाइड्रेशन और पेट की समस्याओं के कारण इलाज के लिए पहुंच रहे हैं. डॉ. सपना का कहना है कि इस मौसम में सबसे ज्यादा जरूरी है शरीर में पानी की मात्रा को बनाए रखना. खासकर वे लोग जो फील्ड में काम करते हैं या धूप में ज्यादा रहते हैं, उन्हें अपनी सेहत के प्रति दोगुना सावधान रहने की जरूरत है. डिहाइड्रेशन का खतरा और शरीर पर इसके प्रभावगर्मी के मौसम में शरीर पसीने के जरिए अपनी नमी तेजी से खो देता है. डॉ. सपना सिंह ने बताया कि एक स्वस्थ व्यक्ति को दिन भर में कम से कम दो से ढाई लीटर यानी करीब 8 से 10 गिलास पानी पीना जरूरी है. यदि आप कम पानी पीते हैं, तो शरीर में डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है, जिससे आपकी इम्युनिटी भी कमजोर हो जाती है और बीमारियां जल्दी जकड़ लेती हैं. शरीर में पानी घटते ही थकान, तेज सिरदर्द और भारी कमजोरी महसूस होने लगती है. इसके अलावा पानी की कमी से शरीर का तापमान अचानक बढ़ जाता है, जो गर्मी के झटके या हीट स्ट्रोक का कारण बन सकता है. इन गंभीर समस्याओं के शिकार हो सकते हैं आपपानी की कमी सिर्फ प्यास तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह शरीर के कई अंगों पर बुरा असर डालती है. कम पानी पीने से पेशाब की मात्रा कम हो जाती है, जिससे मूत्र संबंधी बीमारियां और जलन की समस्या घेर लेती है. डिहाइड्रेशन की वजह से माइग्रेन और असहनीय सिरदर्द की परेशानी भी काफी बढ़ जाती है. इसके साथ ही त्वचा पर भी इसका बुरा असर पड़ता है, जिससे स्किन रूखी हो जाती है और खुजली व रैशेज की समस्या होने लगती है. डॉ. के अनुसार, अस्पताल में आ रहे ज्यादातर मरीजों में पेट से जुड़ी दिक्कतें और शरीर में पानी की भारी कमी देखी जा रही है, जिसका समय पर इलाज न होने पर स्थिति गंभीर हो सकती है. क्या खाएं और क्या पिएं एक्सपर्ट की विशेष सलाहशरीर को अंदर से ठंडा रखने के लिए सिर्फ सादा पानी ही काफी नहीं है, बल्कि आपको अपनी लिक्विड डाइट में वैरायटी लानी होगी. डाइटिशियन के अनुसार तरबूज, खीरा और खरबूजा जैसे फलों का सेवन ज्यादा करना चाहिए जिनमें पानी की प्राकृतिक मात्रा अधिक होती है. बाजार के कोल्ड ड्रिंक के बजाय नींबू पानी, छाछ, नारियल पानी और ताजे फलों का जूस पीना शरीर के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद रहता है. धूप में निकलने से पहले ग्लूकोज का पानी पीना भी एक बेहतर विकल्प है. इसके अलावा अपने भोजन में सलाद और हरी सब्जियों को ज्यादा जगह दें और ऐसा संतुलित आहार लें जिसमें भरपूर प्रोटीन, फाइबर और विटामिन्स मौजूद हों. फील्ड में काम करने वालों के लिए जरूरी हिदायतजो लोग फील्ड वर्क करते हैं या जिन्हें धूप में ज्यादा समय बिताना पड़ता है, उनके लिए सावधानी बरतना और भी जरूरी है. ऐसे लोगों को प्यास लगने का इंतजार नहीं करना चाहिए, बल्कि थोड़ी-थोड़ी देर में पानी या अन्य तरल पदार्थ लेते रहना चाहिए. समय-समय पर शरबत और फलों के सेवन से शरीर की ऊर्जा बनी रहती है और डिहाइड्रेशन का खतरा कम हो जाता है. About the Author Seema Nath सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें Location : Moradabad,Uttar Pradesh First Published : March 23, 2026, 22:04 IST

Mungaoli MLA Ball Sixes | MPCA President Mah Aryaman Inaugurates Arjun Cup

Mungaoli MLA Ball Sixes | MPCA President Mah Aryaman Inaugurates Arjun Cup

एमपी क्रिकेट एसोसिएशन (MPCA) के अध्यक्ष महा आर्यमन सिंधिया और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के पुत्र सोमवार रात अशोकनगर के मुंगावली पहुंचे। जिले में प्रवेश करते ही विभिन्न स्थानों पर उनका स्वागत किया गया। मुंगावली में उन्होंने अर्जुन कप टूर्न . इस दौरान, MPCA अध्यक्ष महा आर्यमन सिंधिया ने पूर्व मंत्री व मुंगावली विधायक बृजेंद्र सिंह यादव की गेंद पर छक्के-चौके लगाए। क्रिकेट आयोजन समिति के अर्जुन सिंह सहित अन्य खिलाड़ियों ने भी उन्हें गेंद फेंकी, जिस पर उन्होंने कई शानदार शॉट खेले। जिले में जगह जगह सिंधिया का स्वागत हुआ। बोले- आईपीएल सहित देश के लिए खेलें इसके बाद, महा आर्यमन सिंधिया ने खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि क्रिकेट खेलते समय पूरी रुचि और जोश के साथ खेलें, ताकि उन्हें डिवीजन और जिला स्तर पर खेलने का मौका मिल सके। उन्होंने युवाओं के लिए बनाई गई लीग का जिक्र करते हुए कहा कि वे चाहते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों के खिलाड़ी भी इसमें शामिल हों और आईपीएल सहित देश के लिए खेलें। महा आर्यमन सिंधिया ने खिलाड़ियों के लिए खेल मैदान सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं करने का भी आश्वासन दिया। महा आर्यमन ने कहा कि यहां आने की वजह प्रेम का रिश्ता है। ‘यहां आना राजनीतिक चिलचस्पी नहीं’ राजनीति को लेकर महा आर्यमन सिंधिया ने कहा कि उनका यहां आने का उद्देश्य कोई राजनीतिक दिलचस्पी नहीं है, बल्कि यह एक पारिवारिक और प्रेम का रिश्ता है। उन्होंने अपनी दिलचस्पी प्रगति, विकास और लोगों के लिए एक मंच बनाने में बताई। जिले में प्रवेश करते ही अशोकनगर के बाईपास रोड सहित विभिन्न स्थानों पर कार्यकर्ताओं ने फूल-मालाएं पहनाकर उनका स्वागत किया।

लिप बाम बनाम लिप मास्क बनाम लिप स्क्रब: केवल 10 रुपये में घर पर जितना हो सके उतना मोटा, फटे दाम से हमेशा के लिए जरूरी

लिप बाम बनाम लिप मास्क बनाम लिप स्क्रब: केवल 10 रुपये में घर पर जितना हो सके उतना मोटा, फटे दाम से हमेशा के लिए जरूरी

लिप बाम बनाम लिप मास्क बनाम लिप स्क्रब: पुनः प्राप्त किया 2019-05-05 इसे ठीक करने के लिए आप घर की रसोई में मौजूद 10 रुपये की जगह अपने मसालों को गुलाबी और प्राकृतिक बना सकते हैं। इसके लिए आपको बस तीन आसान स्टेप्स फॉलो करने होंगे। आइए आपको बताते हैं कि आखिर कौन-कौन से स्टेप होते हैं और सभी स्टेप के क्या फायदे होते हैं। शॉपकीपर के डेड स्किन रिमूवल के लिए सबसे जरूरी विचार है। इसी तरह का मसाला का कालापन कम होता है। इस स्टेप को करने से रक्तचाप का रक्त स्तर भी ऊंचा है। इसे बनाने के लिए आवश्यक सामग्रियां शामिल हैं जिनमें आधा दर्जन पिसी हुई चीनी, कुछ ड्रमें शुद्ध शहद, दो ड्रम नींबू का रस शामिल है। इसे बनाने के लिए एलीया को पेस्टेस्ट तैयार करना होता है। फिर दो मिनट तक इसे मेटल पर बनाया जाता है। परिसंपत्तियों के बाद स्टॉकिंग्स की आवश्यकता होती है। गहनता से पोषण मूल्य के लिए मास्क का उपयोग किया जाता है। यह फटे कार्टून को रिपेयर करने में मदद करता है। इसे बनाने के लिए अलग-अलग तरीकों से आवश्यक सामग्रियां जो मौजूद हैं, उनमें एक-मोरीन ताजी मलाई, एक-एक चुटकी हल्दी पाउडर, गुलाब जल की कुछ चीजें शामिल हैं। इसे मिक्स करके 10 मिनट तक छोड़ दें, फिर किसी तरह के प्यारे कपड़ों से साफ कर लें। आखिरी बार सुपरमार्केट की दुकान में लिप बाम का इस्तेमाल किया जाता है। यह कार्टून को प्रतिबिंबित करने वाला है। घर पर ही इसे बनाने के लिए जरूरी चीजें जो होती हैं, उनमें आधा नारियल तेल या शुद्ध देसी घी, विटामिन ई का एक कैप्सूल होता है। इन दोनों को कुल मिलाकर एक छोटी डिब्बी में रख लें और दिन में दो से तीन बार इस्तेमाल कर सकते हैं। (टैग्सटूट्रांसलेट)सूखे होठों के लिए घरेलू उपचार(टी)डीआईवाई लिप स्क्रब रेसिपी(टी)प्राकृतिक लिप मास्क(टी)मुलायम होंठ युक्तियाँ(टी)सस्ते होंठ देखभाल(टी)प्राकृतिक रूप से गुलाबी होंठ(टी)घर पर बने सौंदर्य हैक्स(टी)घर पर त्वचा की देखभाल(टी)हर्बल लिप बाम(टी)लिप एक्सफोलिएशन सामग्री

पेट्रोल की कमी की अफवाह गुजरात में फैली:कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर लगी लाइनें, सरकार ने कहा- अफवाहों से दूर रहें

पेट्रोल की कमी की अफवाह गुजरात में फैली:कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर लगी लाइनें, सरकार ने कहा- अफवाहों से दूर रहें

अहमदाबाद समेत कई शहरों में सोमवार सुबह कुछ पेट्रोल पंप बंद होने की अफवाह फैल गई। इसके चलते वाहन चालक पेट्रोल पंपों पर पहुंचने लगे। शाम तक अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा और राजकोट समेत कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग गईं। उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि सरकार राज्य के सभी पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए इंतजाम कर रही है। संघवी ने कहा कि अफवाहों के आधार पर लोगों को पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लगाने की जरूरत नहीं है। अहमदाबाद पेट्रोल पंप एसोसिएशन के अध्यक्ष अरविंद ठक्कर ने भी वाहन चालकों से अपील करते हुए कहा है कि अफवाहों पर ध्यान न दें। सभी पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल उपलब्ध है। गुजरात में पेट्रोल और डीजल की कमी नहीं: मुख्य सचिव गुजरात में पेट्रोल और डीजल की कमी की अफवाहों के बीच, नागरिक आपूर्ति निगम, मोनाखंड के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य के सभी पेट्रोल पंपों पर पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और नागरिकों को गलतफहमी के कारण कतारें लगाने की जरूरत नहीं है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के नोडल अधिकारी संजय मेहरा ने भी कहा कि राज्य में आपूर्ति नियमित है और कोई कमी नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कोई डीलर स्टॉक होने के बावजूद पेट्रोल-डीजल देने से इनकार करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पेट्रोल-डीजल एसोसिएशन के अध्यक्ष ने भी एक संयुक्त बयान में कहा कि अहमदाबाद सहित कुछ स्थानों पर गलतफहमी के कारण कतारें लगी हैं, लेकिन सरकार पर्याप्त मात्रा में आपूर्ति कर रही है और सभी डीलरों को उनकी आवश्यकता के अनुसार आपूर्ति मिल रही है। राज्य में पेट्रोल-डीजल की कमी नहीं है – धीमंत गेलानी गुजरात पेट्रोल-डीजल डीलर्स एसोसिएशन के सचिव धीमंत गेलानी ने बताया कि राज्य में सिर्फ इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के 7 पंप फिलहाल बंद हैं। दो दिन की छुट्टी के कारण आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई थी। पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है। एसोसिएशन ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के अधिकारियों को इस संबंध में ज्ञापन दिया है। उन्होंने बताया कि पहले कुछ जगहों पर रुकावटें थीं, जिन्हें दूर कर दिया गया है। अब कोई समस्या नहीं है। डीलर अपनी जरूरत के हिसाब से सामान मंगवा सकेंगे। जो भी समस्या आई है, वह छुट्टी के कारण है और अगले तीन-चार दिनों में ठीक हो जाएगी। ————————————— गुजरात से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… गुजरात में गैस की किल्लत, प्रवासी मजदूर गांव लौट रहे:लोग बोले- सिलेंडर ₹5 हजार में मिल रहा, फ्लैट में चूल्हा नहीं जला सकते देश में एलपीजी गैस कि कमी से चलते गुजरात से अब प्रवासी मजदूरों का पलायन शुरू हो गया है। सूरत के रेलवे स्टेशनों पर बिहार और यूपी लौटने वाले लोगों की लाइनें लगी हैं। दरअसल, रसोई गैस की कमी के चलते राज्य में रेस्टोरेंट-ढाबा और दूसरे खाने-पीने के स्टॉल चलाने वालों का रोजगार ठप होने लगा है। पूरी खबर पढ़ें…

बालाघाट में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा ने निकाली रैली:जाति आधारित जनगणना और EVM बैन करने की मांग; 'भारत बंद' की चेतावनी दी

बालाघाट में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा ने निकाली रैली:जाति आधारित जनगणना और EVM बैन करने की मांग; 'भारत बंद' की चेतावनी दी

बालाघाट में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा और भारत मुक्ति मोर्चा ने सड़कों पर विरोध प्रदर्शन किया। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अंबेडकर चौक गार्डन से शुरू हुई यह रैली कलेक्ट्रेट पहुंची, जहां संगठनों ने राष्ट्रपति और केंद्र सरकार के नाम ज्ञापन दिया। यह प्रदर्शन मोर्चा द्वारा चलाए जा रहे राष्ट्रव्यापी आंदोलन के तीसरे चरण का हिस्सा था। ओबीसी जनगणना को बताया ‘हक की लड़ाई’ मोर्चा के प्रदेश महासचिव रामदास ठवकर ने रैली को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार पर ओबीसी वर्ग के साथ ‘धोखा’ करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जनगणना के कॉलम में ओबीसी की जाति आधारित गणना का विकल्प न होना इस वर्ग की वास्तविक संख्या और स्थिति को छुपाने की साजिश है। संगठन की प्रमुख मांग है कि आगामी जनगणना में जाति आधारित आंकड़ों को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। EVM हटाओ और ‘टीईटी’ से मुक्ति की मांग प्रदर्शनकारियों ने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आगामी सभी चुनाव बैलेट पेपर से कराने और ईवीएम (EVM) को पूरी तरह प्रतिबंधित करने की मांग दोहराई। इसके अलावा, संगठनों ने एससी, एसटी और ओबीसी के हितों के संरक्षण के लिए सख्त यूजीसी कानून लागू करने और 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की बाध्यता से मुक्त करने की पुरजोर वकालत की। 23 अप्रैल को ‘भारत बंद’ का आह्वान मोर्चा के पदाधिकारियों ने बताया कि यदि उनकी संवैधानिक मांगों पर शीघ्र विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन के चौथे चरण में 23 अप्रैल को राष्ट्रव्यापी ‘भारत बंद’ का आयोजन किया जाएगा।

कम यूरिक एसिड की समस्या: सिर्फ सलाह ही नहीं, यूरिक एसिड का होना भी है खतरनाक; इन 5 प्रॉमिस को न करें इग्नोर

कम यूरिक एसिड की समस्या

कम यूरिक एसिड की समस्या | छवि: फ्रीपिक कम यूरिक एसिड की समस्या: आमतौर पर जब भी हम ‘यूरिक एसिड’ का नाम सुनते हैं तो हमारे दिमाग में जोड़ों का दर्द, गठिया और किडनी स्टोन जैसी समस्याएं आती हैं। हम हमेशा यही कोशिश करते हैं कि शरीर में यूरिक एसिड का स्तर न बढ़े। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यूरिक एसिड की आवश्यकता स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक हो सकती है? विज्ञान में यह स्थिति कोहोइनरिसीमियाखा होती है। यूरिक एसिड शरीर में एक महत्वपूर्ण एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करता है। आइए जानते हैं कि यह कम क्यों चिंता का विषय है और किसको मंजूरी नहीं देनी चाहिए। यूरिक एसिड कम होने का मतलब क्या है? एक स्वस्थ वयस्क के शरीर में यूरिक एसिड का सामान्य स्तर 3.5 से 7.2 mg/dL के बीच होना चाहिए। यदि इसका स्तर 2.0 mg/dL से कम है, तो इसे ‘लो यूरिक एसिड’ माना जाता है। शरीर में इसकी कमी लिवर या किडनी की किसी भी गंभीर बीमारी, कुपोषण या गुर्दे की बीमारी से हो सकती है। अत्यधिक थकान और कमजोरी यूरिक एसिड बॉडी के सेल्स कोलाइडेटिव स्ट्रेस से सीख है। इसकी कमी से आप बिना किसी भारी काम के भी हर समय थकान और ऊर्जा की कमी महसूस कर सकते हैं। बार-बार पेशाब आना लो यूरिक एसिड बारंबार गुर्दे की बीमारी में बदलाव का संकेत होता है। अगर आपको अचानक सामान्य से ज्यादा बार पेशाब आने की जरूरत महसूस हो रही है, तो यह हाइपोरिसीमिया का लक्षण हो सकता है। मसाले में दर्द और ऐंठन शरीर में यूरिक एसिड कम होने से इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बना रहता है, जिससे जिंक में कैल्शियम और असाध्य दर्द महसूस होता है। सिरदर्द और दवा आयोडीन युक्त स्ट्रेस बढ़ने के कारण नर्वस सिस्टम प्रभावित होता है, जिससे बार-बार सिरदर्द या अचानक होने वाली बीमारी महसूस होती है। पत्थरों में अजीब सी झंझनाहट जोड़ों में दर्द केवल यूरिक एसिड बढ़ने से नहीं, बल्कि कम होने से भी हो सकता है। यह हड्डियों की गहनता और उनके सिद्धांतों को प्रभावित कर सकता है। ये भी पढ़ें – लड़कियां भरी हुई हैं या खाली? 2 करोड़ लोगों ने देखी जांच का ये अनोखा तरीका, अब हो रहा है वायरल अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए तरीके, तरीके और दावे अलग-अलग विद्वानों पर आधारित हैं। रिपब्लिक भारत लेख में दी गई जानकारी के सही होने का दावा नहीं किया गया है। किसी भी उपचार और सुझाव को पहले डॉक्टर या डॉक्टर की सलाह से अवश्य लें।

चुनाव आयोग के पत्र पर बीजेपी की मुहर, कांग्रेस-सीपीएम-टीएमसी ने सवाल उठाया तो आई ईसी की सफाई

चुनाव आयोग के पत्र पर बीजेपी की मुहर, कांग्रेस-सीपीएम-टीएमसी ने सवाल उठाया तो आई ईसी की सफाई

पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल में अगले कुछ दिनों में वोट खराब है। इस बीच इलेक्शन कमीशन का एक पुराना लेटर वायरल हो रहा है, जिस पर केरल बीजेपी की धूम मची है, जिसके बाद सारथी में मोटरसाइकल गरमा गया है। इस पत्र को सबसे पहले सीपीआईएम केरल ने शेयर कर आयोग के सचिवालय पर साझा किया था, उसके बाद पूरे नामांकन ने ही चुनाव आयोग के सहयोगियों पर प्रश्नचिह्न लगाया। विवाद बढ़ा देख अब चुनाव आयोग की ओर से राइटर लेकर सफाई दी गई है। क्या भाजपा ने सारे दिखावे छोड़ दिये हैं? यह कोई रहस्य नहीं है कि एक ही सत्ता केंद्र भारत के चुनाव आयोग और भाजपा दोनों को नियंत्रित करता है। फिर भी कम से कम दो अलग-अलग डेस्कों का शिष्टाचार तो बनाए रखें। अब तो वह भी अनावश्यक लगता है. मुहरें लापरवाही से लगाई जा रही हैं… pic.twitter.com/MfMXNaXTgk – सीपीआई (एम) केरल (@CPIMKerala) 23 मार्च 2026 सीपीआईएम ने सोशल मीडिया पर एक डॉक्युमेंट शेयर किया था। इसमें 19 मार्च 2019 को चुनाव आयोग के पत्र के साथ हाफनामे पर केरल बीजेपी की छाप दिखाई दी। सीपीआईएम ने सवाल किया कि अब चुनाव आयोग और बीजेपी एक ही पावर सेंटर से क्या चल रहे हैं? वहीं कांग्रेस ने पूछा कि चुनाव आयोग के पास बीजेपी की ओर से कैसे मतदान किया जाए। चुनाव आयोग ने यह काम किया चुनाव आयोग ने कहा, ‘हमें यह जानकारी मिली है कि बीजेपी की छाप लगी है चुनाव आयोग के एक चैनल पर कई मलयालम न्यूज चैनल प्रसारित हो रहे हैं। मुख्य इलेक्ट्रॉनिक्स अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक क्लेरिकल एरर था, जिसे तुरंत पहचान कर सुधार किया गया।’ आधिकारिक स्पष्टीकरण: चुनाव आयोग दस्तावेज़ के ग़लत प्रसार के संबंध में यह हमारे संज्ञान में आया है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की मुहर वाला चुनाव आयोग का एक पत्र विभिन्न मलयालम समाचार चैनलों पर प्रसारित किया जा रहा है।… – मुख्य निर्वाचन अधिकारी केरल (@Ceokerala) 23 मार्च 2026 टीएमसी ने चुनाव आयोग को बीजेपी की ‘बी’ टीम बताया कांग्रेस नेता पवन चौधरी ने कहा, ‘क्या अबकी बार, मोदी सरकार भी इसी तरह की थी?’ कैथोलिक कांग्रेस (टीएमसी) ने कहा, ‘आधिकारिक तौर पर यह एक तरह से मिल गया है कि चुनाव आयोग की बी-टीम बन गई है।’ अविश्वासी न्यूनाइन मोइत्रा ने कहा, ‘चुनाव आयोग ने पहली बार बीजेपी की मुहर लगाई थी, आधिकारिक पत्र जारी करने का साहसिक कार्य दिखाया गया था। ज्ञानेश कुमार से निवेदन है कि वह बात स्पष्ट करें जो हम सभी पहले से जानते हैं और आगे भी इसी तरह का पत्र जारी करते हैं। लोकतंत्र जिंदाबाद.’ चुनाव आयोग के पदाधिकारियों पर कांग्रेस ने प्रतिबंध प्रश्न एक्स पर पोस्ट कर कहा गया, ‘चुनाव आयोग की ओर से राजनीतिक आश्रमों को चुनाव आयोग की ओर से भेजे गए पत्र में केरल कांग्रेस बीजेपी की मुहर लगी थी।’ यह कोई ग़लत नहीं, बल्कि एक गंभीर संदेह का विषय है। इससे संबंधित संवैधानिक संस्था की समितियाँ और सामान्यतः गंभीर प्रश्न पूछे जाते हैं। कांग्रेस ने पूछा, चुनाव आयोग का किसी राजनीतिक दल पर आधिकारिक संदेश कैसा लगा? चुनाव आयोग बीजेपी के कठपुतली की तरह व्यवहार क्यों कर रहा है? क्या चुनाव आयोग भारत की जनता को पहचान दिला सकता है?’ 𝐀 𝐁𝐉𝐏 𝐬𝐞𝐚𝐥 𝐨𝐧 𝐚𝐧 𝐄𝐥𝐞𝐜𝐭𝐢𝐨𝐧 𝐂𝐨𝐦𝐦𝐢𝐬𝐬𝐢𝐨𝐧 𝐥𝐞𝐭𝐭𝐞𝐫! चुनाव आयोग की ओर से राजनीतिक दलों को भेजे गए पत्र में चुनाव आयोग की मुहर की जगह बीजेपी की केरल इकाई की मुहर लगी हुई है. उसे अंदर डूबने दो। कोई ग़लती नहीं, लेकिन एक गंभीर ख़तरा… pic.twitter.com/eXSqartMLH – कांग्रेस (@INCIndia) 23 मार्च 2026 एक अधिकारी को ऑफिस भेज दिया गया इस मामले में विज्ञप्ति जारी करने के बाद, मुख्य अधिकारी के कार्यालय में, इस मामले से जुड़े विभागीय अधिकारी की जांच के लिए अपार्टमेंट में बिस्तर तक रखा गया है। केरल के मुख्य इलेक्ट्रॉनिक्स अधिकारी कार्यालय ने कहा, ‘यह पूरी तरह से एक क्लेरिकल एरर था। केरल बीजेपी ने हाल ही में एक पुरानी कॉमर्स की कॉपी जमा की थी, जिस पर उनकी मुहर लगी थी। इसी कॉपी को अन्य सॉफ्टवेयर से भेज दिया गया।’ (टैग्सटूट्रांसलेट)ब्रेकिंग न्यूज(टी)एबीपी न्यूज(टी)बीजेपी(टी)ईसीआई(टी)कांग्रेस(टी)केरल(टी)इलेक्शन कमीशन बीजेपी सिंबल लेटर(टी)ईसी केरलम(टी)ईसीआई केरल(टी)केरल विधानसभा चुनाव(टी)सीपीआईएम केरल(टी)सीपीएम न्यूज(टी)केरल न्यूज(टी)केरल न्यूज(टी)कांग्रेस प्रतिक्रिया ईसीआई लेटर(टी)ईसी लेटर बीजेपी सील(टी)चुनाव आयोग(टी)बीजेपी(टी)कांग्रेस(टी)केरल चुनाव बीजेपी लेखक(टी)केरल बीजेपी नेता(टी)चुनाव आयोग पत्र(टी)चुनाव आयोग पत्र बीजेपी सील(टी)महुआ मोइत्रा(टी)पवन साहूकार(टी)कांग्रेस

सुप्रीम कोर्ट ने इलैयाराजा का केस बॉम्बे हाईकोर्ट ट्रांसफर किया:सोनी के साथ कॉपीराइट मुकदमा चलेगा, विरोधाभास से बचने को अदालत का कदम

सुप्रीम कोर्ट ने इलैयाराजा का केस बॉम्बे हाईकोर्ट ट्रांसफर किया:सोनी के साथ कॉपीराइट मुकदमा चलेगा, विरोधाभास से बचने को अदालत का कदम

संगीत जगत के दिग्गज डॉ. इलैयाराजा के कॉपीराइट विवाद से जुड़ा एक अहम मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है, जहां आज एक निर्णायक आदेश सुनाया गया। सर्वोच्च न्यायालय ने सोनी एंटरटेनमेंट इंडिया द्वारा दायर ट्रांसफर याचिका को मानते हुए इलैयाराजा के साथ चल रहे कॉपीराइट मुकदमे को मद्रास उच्च न्यायालय से बॉम्बे उच्च न्यायालय में ट्रांसफर करने का आदेश दिया है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक यह मामला दो अलग‑अलग मुकदमों के बीच टकराव के रूप में उभरा है। जनवरी 2022 में सोनी म्यूजिक ने बॉम्बे हाईकोर्ट में एक सिविल मुकदमा दायर किया था, जिसमें उन्होंने इलैयाराजा को 536 संगीत रचनाओं का अवैध इस्तेमाल बंद करने के लिए स्थायी रोक की मांग की थी। सोनी का दावा है कि उसने ओरिएंटल रिकॉर्ड्स और इको रिकॉर्डिंग से अधिकार खरीद लिए हैं और इसलिए उसके पास इन गीतों के कॉपीराइट हैं। इसके विपरीत, सितम्बर 2025 में इलैयाराजा ने मद्रास उच्च न्यायालय में एक समान मुकदमा दायर किया, जिसमें सोनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई और उनके अधिकारों को चुनौती दी गई। इस अधिकार विवाद का उद्देश्य यह तय करना है कि वास्तव में कौन इन रचनाओं का कानूनी मालिक है, संगीतकार खुद या कोई तीसरी कंपनी। सोनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंहवी ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि मद्रास में दायर इलैयाराजा का मामला बॉम्बे में पहले दायर मुक़दमे से अलग नहीं है और इससे दोनों न्यायालय अलग‑अलग फैसले दे सकते हैं, जिससे जटिलता और कानूनी विरोधाभास पैदा हो सकता है। इलैयाराजा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने बॉम्बे हाईकोर्ट की न्यायालयिक अधिकारिता पर सवाल उठाते हुए तर्क किया कि मद्रास में मामला होना चाहिए क्योंकि इससे दोनों पक्षों के दावे न्यायसंगत तरीके से सुने जा सकते हैं। बेंच के न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति विनोद के चंद्रन ने अंततः सोनी की याचिका को मंजूर करते हुए कहा कि इस तरह के दोनों मामलों को एक ही न्यायालय में सुनवाई के लिए ट्रांसफर करना जरूरी है ताकि किसी भी तरह के विरोधी निर्णय से बचा जा सके। इस आदेश के तहत अब विवाद बॉम्बे हाईकोर्ट में जारी रहेगा। यह फैसला संगीतकार और म्यूजिक इंडस्ट्री के बीच कॉपीराइट के अधिकारों से जुड़ी बढ़ती कानूनी लड़ाइयों में एक महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है। इलैयाराजा ने एक दशक से अधिक समय से अपने संगीत के अधिकारों की रक्षा के लिए कई मुकदमे लड़े हैं, और सुप्रीम कोर्ट का यह कदम अब आगे की कानूनी प्रक्रिया को एक ही दिशा में सामान्य करने का प्रयास है।

‘शीशमहल’ विवाद- केजरीवाल के सरकारी बंगले पर 342% ज्यादा खर्च:CAG रिपोर्ट में कई गड़बड़ियां उजागर, काम पहले कराया मंजूरी बाद में मिली

‘शीशमहल’ विवाद- केजरीवाल के सरकारी बंगले पर 342% ज्यादा खर्च:CAG रिपोर्ट में कई गड़बड़ियां उजागर, काम पहले कराया मंजूरी बाद में मिली

दिल्ली के पूर्व CM अरविंद केजरीवाल के सरकारी आवास 6, फ्लैगस्टाफ रोड के रिनोवेशन पर तय अनुमान से करीब 342% ज्यादा खर्च किया गया। यह खुलासा नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआत में इस काम की अनुमानित लागत करीब 7.91 करोड़ रुपए थी, लेकिन अंतिम खर्च बढ़कर 33.66 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। इसमें से लगभग 18.88 करोड़ रुपए महंगे इंटीरियर, सजावटी और एंटीक सामान पर खर्च किए गए। यह रिपोर्ट सोमवार को दिल्ली विधानसभा में पेश की गई। CAG रिपोर्ट के मुताबिक, पूरे प्रोजेक्ट में नियमों की अनदेखी, फंड के गलत उपयोग और लागत में भारी बढ़ोतरी जैसी गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। स्टाफ ब्लॉक बना ही नहीं CAG ने पाया कि रिनोवेशन का काम पूरा होने के दो महीने बाद 9.34 करोड़ रुपए की प्रशासनिक मंजूरी दी गई, जो नियमों का उल्लंघन है। इससे बिना अनुमति के खर्च की स्थिति बनी। रिपोर्ट में कहा गया है कि स्टाफ ब्लॉक और कैंप ऑफिस के लिए मंजूर 19.87 करोड़ रुपए का सही उपयोग नहीं हुआ। स्टाफ ब्लॉक बना ही नहीं, इसके बजाय कहीं और 7 सर्वेंट क्वार्टर बना दिए गए। वहीं, कैंप ऑफिस को स्थायी के बजाय अस्थायी (सेमी-परमानेंट) बना दिया गया और वह भी अधूरा रह गया। बढ़ाया गया एरिया और बदले गए डिजाइन काम के दौरान बंगले का क्षेत्रफल 1397 वर्गमीटर से बढ़ाकर 1905 वर्गमीटर कर दिया गया। साथ ही, कई महंगे और विशेष डिजाइन वाले सामान लगाए गए, जिससे लागत और बढ़ गई। पीडब्ल्यूडी ने कार्य को अत्यावश्यक घोषित किया गया था। एक ही ठेकेदार को काम, चार बार बदला अनुमान रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि अतिरिक्त काम के लिए नया टेंडर नहीं निकाला गया और एक ही ठेकेदार को करीब 25.80 करोड़ रुपए का काम दे दिया गया। PWD ने खर्च को समायोजित करने के लिए अनुमान (एस्टिमेट) को चार बार संशोधित किया। फ्लैगस्टाफ बंगला, जहां केजरीवाल 2015 से 2024 तक दिल्ली के मुख्यमंत्री के रूप में रहे, को भाजपा ने “शीश महल” नाम दिया था। भाजपा ने एक दशक बाद दिल्ली में आम आदमी पार्टी को सत्ता से बेदखल कर दिया। रिपोर्ट में कहा गया है, रिनोवेशन का काम अनुमानित लागत से 13.21 प्रतिशत अधिक यानी 8.62 करोड़ रुपए में आवंटित किया गया था, लेकिन अंततः यह अनुमानित लागत से 342.31 प्रतिशत अधिक यानी 33.66 करोड़ रुपए में पूरा हुआ। केजरीवाल जिस बंगले में रहते थे, उसकी 8 तस्वीरें…

‘सभ्यता की विफलता’: आतंकवाद पीड़ितों के परिजनों की उपेक्षा पर जम्मू-कश्मीर एलजी, 37 से अधिक नौकरियों की नियुक्तियां सौंपी | राजनीति समाचार

Several people are feared to have been injured after an incoming Air Canada Express CRJ-900 flight and a fire engine collided on runway 4 of the airport.

आखरी अपडेट:मार्च 23, 2026, 19:37 IST जम्मू-कश्मीर के एलजी मनोज सिन्हा ने पुनर्वास सहायता योजना के तहत आतंक पीड़ितों के परिजनों, सरकारी कर्मचारियों और लाभार्थियों को 37 नियुक्ति पत्र सौंपे 23 मार्च, 2026 को जम्मू में एसआरओ 43 (आतंकवाद के शिकार) और पुनर्वास सहायता योजना (आरएएस) के तहत नियुक्ति आदेश सौंपने के समारोह के दौरान जम्मू और कश्मीर के एलजी मनोज सिन्हा। (छवि: पीटीआई) जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोमवार को आतंकवाद पीड़ित परिवारों की दशकों से चली आ रही उपेक्षा को “सभ्यतागत विफलता” बताया, साथ ही आतंकवादी पारिस्थितिकी तंत्र पर निरंतर समर्थन और कड़ी कार्रवाई की घोषणा की। सिन्हा ने पुनर्वास सहायता योजना के तहत लाभार्थियों के साथ-साथ आतंकवाद पीड़ितों के 37 परिजनों और सेवा के दौरान मारे गए सरकारी कर्मचारियों के 29 परिवार के सदस्यों को नियुक्ति पत्र सौंपे। जम्मू के कन्वेंशन सेंटर में आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए सिन्हा ने कहा, “ऐसे क्षण आते हैं जब शब्द छोटे और लगभग असहाय महसूस होते हैं… मानवीय पीड़ा की सीमा भाषा की सीमाओं से परे हो जाती है।” उन्होंने कहा कि ये परिवार जिस दौर से गुजरे हैं उसे ”शब्दों से बयान नहीं किया जा सकता, न ही शब्द इसे सुधार सकते हैं।” आतंकी हमलों में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें “उनके जीवन के सबसे उज्ज्वल चरण में” ले जाया गया और इस बात पर जोर दिया कि उनका बलिदान देश की सामूहिक चेतना में अंकित रहना चाहिए। ‘पीड़ितों को मिटा दिया गया’ सिन्हा ने कहा कि आतंक पीड़ित परिवार न केवल हिंसा से तबाह हो गए, बल्कि उनकी रक्षा के लिए बनी व्यवस्था ने भी उन्हें त्याग दिया। उन्होंने कहा, “मैं इसे महज एक प्रशासनिक चूक के रूप में नहीं देखता… यह उस समय की सभ्यतागत विफलता थी।” उन्होंने बताया कि दशकों तक, इन परिवारों को “समाज की स्मृति से मिटा दिया गया”, बिना नौकरी, मान्यता या समर्थन के छोड़ दिया गया। साथ ही, उन्होंने कहा, एक बेहद परेशान करने वाली स्थिति सामने आई है जहां आतंकी नेटवर्क से जुड़े लोगों को सिस्टम के भीतर जगह और लाभ मिला है। “हम किस तरह का समाज बन गए… जहां पीड़ित बोझ बन गया और आतंक से जुड़े लोग लाभार्थी बन गए?” उसने पूछा. ‘नई नैतिक घोषणा’ हाल के वर्षों में बदलावों पर प्रकाश डालते हुए, सिन्हा ने कहा कि प्रशासन ने पीड़ितों के परिवारों को प्राथमिकता देकर और आतंकवाद से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई करके इस असंतुलन को ठीक करना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा, “आतंकवाद से सीधे तौर पर जुड़े लोगों को सेवा से बर्खास्त किया जा रहा है, जबकि दशकों से उपेक्षित आतंक पीड़ित परिवारों को उनकी गरिमा सुरक्षित रखने के लिए सरकारी नौकरियां दी जा रही हैं।” इसे एक नीतिगत बदलाव से कहीं अधिक बताते हुए उन्होंने कहा, “मैं इसे केवल एक नीतिगत सुधार के रूप में नहीं, बल्कि नए जम्मू-कश्मीर के लिए एक नई नैतिक घोषणा के रूप में देखता हूं।” उन्होंने कहा कि यह एक ऐसी प्रणाली के उद्भव का प्रतीक है जहां न्याय केवल शब्दों तक सीमित नहीं है बल्कि कार्रवाई में परिलक्षित होता है। “यह एक स्पष्ट संदेश है कि एक नया आदेश आ गया है… जो आतंकवाद से जुड़े लोगों को बेरहमी से दंडित करेगा और पीड़ितों की गरिमा को बहाल करेगा।” ‘आतंकवादी नेटवर्क के लिए कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं’ आतंकी पारिस्थितिकी तंत्र के शेष तत्वों और जिन्हें उन्होंने “संघर्ष उद्यमियों” कहा था, को चेतावनी जारी करते हुए सिन्हा ने कहा कि उनका समय समाप्त हो गया है। उन्होंने कहा, “जम्मू-कश्मीर के लोग जानते हैं कि ऐसे तत्वों को किसने बचाया, लेकिन वह ढाल अब टूट रही है।” “मैं उन्हें चेतावनी देता हूं कि जम्मू-कश्मीर में अब आतंकवादियों या उन्हें समर्थन देने वाले नेटवर्क के लिए कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं है।” उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने अतीत में सरकारी मशीनरी में घुसपैठ की, उन्हें जवाबदेह ठहराया जाएगा। उन्होंने कहा, “उन्हें एक-एक करके पहचाना जाएगा, सरकारी नौकरियों से हटाया जाएगा और कानून के मुताबिक दंडित किया जाएगा।” उपराज्यपाल ने न्याय के विचार का भी विस्तार किया और कहा कि यह अदालतों और सजा से परे है। उन्होंने कहा, “न्याय भी इसमें निहित है कि समाज किन कहानियों को याद रखना चाहता है… इसका मतलब है दुखी परिवारों के आंसू पोंछना, उनके दर्द को स्वीकार करना और उनकी आत्माओं पर लगे घावों को ठीक करना।” उन्होंने कहा कि आतंक पीड़ितों के परिवारों की कहानियाँ, जिन्हें एक बार भुला दिया गया था, अब “नई स्मृति और सम्मान के साथ” फिर से लिखी जा रही हैं। अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासन तब तक अपने प्रयास जारी रखेगा जब तक कि प्रत्येक प्रभावित परिवार को न्याय, सम्मान और समर्थन नहीं मिल जाता। उन्होंने कहा, ”जब तक हर परिवार तक न्याय नहीं पहुंच जाता, हम आराम से नहीं बैठेंगे।” वर्तमान क्षण को एक निर्णायक मोड़ बताते हुए उन्होंने कहा, “हम आज जम्मू-कश्मीर में एक निर्णायक मोड़ पर खड़े हैं… युवा और ये परिवार उज्ज्वल भविष्य की आकांक्षा रखते हैं, और उस भविष्य को वास्तविकता बनाना हमारी साझा जिम्मेदारी है।” जगह : जम्मू, भारत, भारत पहले प्रकाशित: मार्च 23, 2026, 19:37 IST समाचार राजनीति ‘सभ्यता की विफलता’: आतंकवाद पीड़ितों के परिजनों की उपेक्षा पर जम्मू-कश्मीर एलजी ने 37 से अधिक नौकरियों की नियुक्तियां सौंपी अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)जम्मू और कश्मीर के आतंकवादी पीड़ितों का समर्थन(टी)मनोज सिन्हा पुनर्वास योजना(टी)जम्मू और कश्मीर के आतंक पीड़ित 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