विशाल ददलानी ने धुरंधर 2 पर कसा तंज:नोटबंदी वाले सीन पर सवाल उठाए; बोले- फिल्म सिर्फ मनोरंजन के लिए, फैक्ट्स अलग हैं

रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ की बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड ब्रेकिंग परफॉर्मेंस के बीच सिंगर विशाल ददलानी ने फिल्म की आलोचना की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर बिना नाम लिए आदित्य धर के निर्देशन पर निशाना साधा है। विशाल ददलानी ने फिल्म में दिखाए गए नोटबंदी के मुद्दे पर लिखा फैक्ट्स तो फैक्ट्स ही होते हैं। फिल्म मनोरंजन के लिए देखिए, लेकिन जानकारी सही सोर्स से लीजिए। यह याद रखना जरूरी है कि फिल्म सिर्फ मनोरंजन है, फैक्ट्स तो फैक्ट्स ही होते हैं, चाहे कुछ भी हो जाए।” फिल्म में नोटबंदी को बताया गया ‘सीक्रेट मिशन’ फिल्म में साल 2016 की नोटबंदीको एक मास्टरस्ट्रोक के रूप में दिखाया गया है। फिल्म के मुताबिक, यह पीएम का ‘ऑपरेशन ग्रीन लीफ’ नाम का एक सीक्रेट मिशन था, जिसका मकसद दाऊद इब्राहिम और जावेद खनानी के 60,000 करोड़ रुपये के नकली नोटों के नेटवर्क को तबाह करना था। फिल्म में दिखाया गया है कि इस फैसले से आतंकी फंडिंग पूरी तरह बर्बाद हो गई। विशाल ने आरबीआई के आंकड़े बताए विशाल ददलानी ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के आंकड़ों और न्यूज आर्टिकल्स के हवाले से दावा किया कि नोटबंदी के बाद 99.3% पुराने नोट वापस बैंकिंग सिस्टम में लौट आए थे। नोटबंदी के बावजूद टेरर फंडिंग और आतंकी हमले (जैसे 2019 का पुलवामा हमला) बंद नहीं हुए। फिल्म ने 4 दिन में 750 करोड़ कमाए आलोचनाओं के बावजूद धुरंधर 2 बीते 4 दिनों में वर्ल्ड वाइड 750 करोड़ की कमाई कर चुकी है। कल यानी रविवार को फिल्म ने भारत में 114.85 करोड़ रुपए की कमाई की। यह फिल्म पुष्पा 2′ (₹762 करोड़) के बाद भारतीय सिनेमा की दूसरी सबसे बड़ी ओपनिंग वीकेंड वाली फिल्म बन गई है।
क्या फ्रिज में रखा हुआ खाना बार-बार गर्म करना सही है? जानिए सेहत पर इसका क्या असर पड़ता है और स्टोरेज का सही तरीका

Last Updated:March 23, 2026, 13:03 IST Food Storage Tips: फ्रिज में रखा खाना बार-बार गर्म करना आसान जरूर लगता है, लेकिन यह सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है. इससे खाने के पोषक तत्व कम हो जाते हैं और बैक्टीरिया बढ़ सकते हैं. कुछ फूड जैसे चावल, चिकन और हरी सब्जियां बार-बार गर्म करने से ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं. सही तरीका यही है कि खाना एक बार ही गर्म करें और सही तरीके से स्टोर करें. छोटी सावधानियां अपनाकर आप खुद को फूड पॉयजनिंग और पेट की समस्याओं से बचा सकते हैं. Food Storage Tips: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर एक बार में ज्यादा खाना बना लेते हैं और फिर उसे फ्रिज में रखकर कई बार गर्म करके खाते हैं. यह आदत देखने में बहुत आसान और टाइम सेविंग लगती है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यही आदत आपकी सेहत के लिए धीरे-धीरे नुकसानदायक बन सकती है. बार-बार गर्म किया हुआ खाना न केवल अपने पोषक तत्व खो देता है, बल्कि उसमें बैक्टीरिया बढ़ने का खतरा भी बढ़ जाता है. खासकर जब खाना सही तरीके से स्टोर न किया गया हो या बार-बार बाहर निकालकर फिर फ्रिज में रखा गया हो, तो उसमें हानिकारक तत्व पैदा हो सकते हैं. कई लोग यह मानते हैं कि गर्म करने से खाना सुरक्षित हो जाता है, लेकिन सच यह है कि हर बार गर्म करने से उसकी क्वालिटी और सेफ्टी दोनों कम होती जाती हैं. इसलिए जरूरी है कि हम इस आदत को समझें और सही तरीका अपनाएं ताकि सेहत पर इसका गलत असर न पड़े. बार-बार गर्म करने से खाने में क्या बदलाव आते हैं: जब आप किसी खाने को बार-बार गर्म करते हैं, तो उसमें मौजूद जरूरी पोषक तत्व धीरे-धीरे खत्म होने लगते हैं. खासकर प्रोटीन और विटामिन जैसे तत्व गर्मी से जल्दी टूट जाते हैं. इसके अलावा, कुछ खाने जैसे चावल, आलू और दाल को बार-बार गर्म करने पर उनमें बैक्टीरिया पनप सकते हैं. यह बैक्टीरिया खाने को खराब बना देते हैं और पेट से जुड़ी समस्याएं पैदा कर सकते हैं. बार-बार गर्म करने से खाने का स्वाद भी बदल जाता है और उसका टेक्सचर भी खराब हो जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google किन खाने को बार-बार गर्म करना ज्यादा नुकसानदायक होता है: कुछ ऐसे फूड आइटम होते हैं जिन्हें बार-बार गर्म करना ज्यादा नुकसानदायक साबित हो सकता है. जैसे चावल में बैक्टीरिया जल्दी पनपते हैं अगर उसे सही तरीके से स्टोर न किया जाए. चिकन और अंडे जैसे प्रोटीन वाले फूड को बार-बार गर्म करने से उनमें हानिकारक कंपाउंड बन सकते हैं. हरी सब्जियां भी बार-बार गर्म करने पर अपने पोषक तत्व खो देती हैं और उनका स्वाद भी खराब हो जाता है. इसलिए ऐसे खाने को खास सावधानी के साथ इस्तेमाल करना चाहिए. बार-बार गर्म करने से सेहत पर क्या असर पड़ता है: बार-बार गर्म किया हुआ खाना खाने से पेट दर्द, गैस, उल्टी और फूड पॉयजनिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं. लंबे समय तक ऐसा खाना खाने से पाचन तंत्र कमजोर हो सकता है और शरीर को सही पोषण नहीं मिल पाता. इससे इम्यूनिटी पर भी असर पड़ सकता है. कई बार लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह छोटी-छोटी समस्याएं आगे चलकर बड़ी परेशानी बन सकती हैं. फ्रिज में खाना रखने और गर्म करने का सही तरीका: अगर आप बचा हुआ खाना इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो उसे सही तरीके से स्टोर करना बहुत जरूरी है. खाना ठंडा होने के बाद तुरंत फ्रिज में रख दें और एयर टाइट कंटेनर का इस्तेमाल करें. खाने को जितना खाना हो उतना ही बाहर निकालें और एक बार ही गर्म करें. कोशिश करें कि खाना बार-बार फ्रिज से बाहर निकालकर वापस न रखें. माइक्रोवेव या गैस पर खाना अच्छी तरह से गर्म करें ताकि उसमें मौजूद बैक्टीरिया खत्म हो सकें. साथ ही 24 घंटे के अंदर खाना खा लेना बेहतर रहता है. किन बातों का ध्यान रखना चाहिए: खाना हमेशा साफ बर्तनों में रखें और फ्रिज का तापमान सही बनाए रखें. ज्यादा दिनों तक रखा हुआ खाना खाने से बचें. अगर खाने में बदबू या स्वाद में बदलाव लगे तो उसे तुरंत फेंक दें. यह छोटी-छोटी सावधानियां आपको बड़ी बीमारियों से बचा सकती हैं. First Published : March 23, 2026, 13:03 IST
इंपैक्ट फीचर:छोटे शहर से बड़े रिकॉर्ड तक, सीकर के राष्ट्रीय स्तर पर IIT डेस्टिनेशन बनने की कहानी

कभी-कभी आंकड़े अपनी कहानी खुद बयां कर देते हैं। लगातार बढ़ती चयन संख्या, ऑल इंडिया रैंक ऐसे संकेत अक्सर बड़े शिक्षा केंद्रों जैसे कोटा या दिल्ली की ओर इशारा करते थे, लेकिन असल में यह कहानी है सीकर की, जहां छोटे शहर से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाने का सिलसिला शुरू हुआ। करीब 4 लाख की आबादी वाला राजस्थान का छोटा-सा शहर सीकर अब IIT चयन में राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन चुका है। तुलना करें तो दिल्ली (लगभग 2 करोड़), मुंबई (करीब 2 करोड़) और बेंगलुरु (1.3 करोड़ से अधिक) जैसे महानगर वर्षों से JEE तैयारी के बड़े केंद्र रहे हैं। जनसंख्या और इंफ्रास्ट्रक्चर में छोटा शहर होने के बावजूद, सीकर पिछले एक दशक में कई मामलों में बड़े शहरों से भी बेहतर सिलेक्शन देता नजर आया है। इसके पीछे है Matrix Academy, Sikar का JEE Division, जिसने सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि मिडिल क्लास के छात्रों के सपनों और संभावनाओं को एक नई दिशा दी। छोटे शहर से बड़ी उपलब्धियों तक का यह सफर बताता है कि सही मार्गदर्शन और स्ट्रैटेजी के साथ कोई भी मंज़िल मुश्किल नहीं। सीकर, जो कभी इंजीनियरिंग प्रिपरेशन के मानचित्र पर एक मामूली शहर के रूप में जाना जाता था, आज JEE की प्रतिस्पर्धा में अपनी बहुत बड़ी पहचान बना चुका है। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि परसेंटाइल के हिसाब से सीकर के रिजल्ट न केवल कम्पेरेबल पॉपुलेशन वाले शहरों बल्कि इंडिया के किसी भी बड़े शहर से भी काफी आगे हैं। सीकर कैसे IIT प्रिपरेशन के लिए इंडिया के मेन पेज पर आया? ज्यादातर जगहों पर IIT कोचिंग या तो पुराने तरीके से चलती है या फिर किसी नेशनल इंस्टिट्यूट की ब्रांच होती है, जो हेड ऑफिस से मैनेज होती है। लेकिन सीकर में कुछ खास हुआ, और उसी खास ने पूरे IIT कोचिंग लैंडस्केप को बदल दिया। 2014 में सीकर में टॉप IIT और IIM ग्रेजुएट्स, जो सामान्यतः केवल मेट्रो सिटीज में मिलते हैं, उन्होंने मिलकर एक नई शुरुआत की। इस टीम में ऐसे लोग थे जिन्होंने खुद IIT एंट्रेंस में ऑल इंडिया लेवल पर जनरल कैटेगरी में टॉप-20 रैंक हासिल की थी। उन्होंने IIT कानपुर, IIT खड़गपुर, IIM अहमदाबाद, IIM कलकत्ता जैसी जगहों पर पढ़ाई करके कॉम्पिटिशन एग्जाम प्रिपरेशन और मैनेजमेंट को डीपली स्टडी किया हुआ था, उन्होंने न केवल योजना बनाई बल्कि दृढ़ संकल्प के साथ हर पहलू को सिस्टमैटिकली लागू किया। Maitrix Classroom का मुख्य उद्देश्य केवल छात्रों को एग्जाम के लिए तैयार करना नहीं था, बल्कि उन्हें एक स्ट्रक्चर्ड, डिसिप्लिन्ड और डेटा-ड्रिवन शैक्षणिक वातावरण देना था। फाउंडर्स के टॉप IIT/IIM बैकग्राउंड के चलते उन्होंने वो सारे सिस्टम्स इम्प्लीमेंट किए, जो आमतौर पर बड़े मल्टीनेशनल सेटअप्स और वर्ल्ड के टॉप इंस्टिट्यूट्स में ही देखने को मिलते हैं। संस्थान ने अपने प्रारंभिक वर्षों में छोटे बैच साइज, नियमित टेस्ट सिस्टम और प्रत्येक छात्र की व्यक्तिगत प्रोग्रेस पर फोकस करना शुरू किया। इस अप्रोच ने छात्रों को न केवल एकेडमिकली बल्कि मेंटली भी स्ट्रॉन्ग बनाया। सफलता का प्रमाण हैं आँकड़े, विश्लेषण से स्पष्ट होती है गुणवत्ता सीकर स्थित Matrix Classroom ने JEE Main और JEE Advanced में लगातार मजबूत परिणाम दर्ज किए हैं और जब इन आँकड़ों का विश्लेषण किया जाता है, तो तैयारी की वास्तविक गुणवत्ता स्पष्ट दिखाई देती है। JEE Main April 2023 में ● 7 छात्रों ने 99.90%ile से ऊपर स्कोर किया ● 13 छात्रों ने 99.80%ile से ऊपर अंक प्राप्त किए ● 47 छात्रों ने 99.50%ile से ऊपर प्रदर्शन किया ● 94 छात्रों ने 99.00%ile से अधिक स्कोर किया ● 1732 छात्र JEE Advanced 2023 के लिए क्वालिफाई हुए ● साथ ही मयंक सोनी ने 100.00%ile प्राप्त कर All India Joint Topper स्थान हासिल किया JEE Main April 2024 में परिणाम और सशक्त हुए ● 7 छात्रों ने 99.90%ile से ऊपर स्कोर किया ● 27 छात्रों ने 99.80%ile से अधिक अंक प्राप्त किए ● 86 छात्रों ने 99.50%ile से ऊपर प्रदर्शन किया ● 219 छात्रों ने 99.00%ile से अधिक स्कोर किया ● 2056+ छात्र JEE Advanced के लिए क्वालिफाई हुए ● 23 छात्रों ने Physics, Chemistry और Maths में 100%ile हासिल की JEE Main 2025 (Session-1) ● 15+ छात्रों ने 99.9+ परसेंटाइल प्राप्त किया। ● 231+ छात्रों ने 99+ परसेंटाइल हासिल किया। ● 11 छात्रों ने AIR Top 1000 के अंदर स्थान प्राप्त किया। ● लगभग 75% छात्रों ने परीक्षा क्वालीफाई की। विश्लेषण क्या दर्शाता है? इन आँकड़ों का विश्लेषण यह बताता है कि सफलता केवल टॉपर्स तक सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न श्रेणियों में बड़ी संख्या में छात्रों का निरंतर प्रदर्शन संस्थान की व्यापक और संतुलित तैयारी को दर्शाता है। 2023 से 2025 के बीच 99%ile से ऊपर स्कोर करने वाले छात्रों और Advanced क्वालिफायर की संख्या में स्पष्ट वृद्धि यह संकेत देती है कि Matrix Classroom की शिक्षण प्रणाली स्थिर, प्रभावी और परिणाम- उन्मुख है। साफ है, यह केवल परिणाम नहीं, बल्कि निरंतर सुधार और सुव्यवस्थित मॉडल का प्रमाण है। Matrix के नेतृत्व की दृष्टि से JEE सफलता अनिल गोरा, B.Tech, IIT Kharagpur, कहते हैं, “JEE में सफलता किसी एक टॉपर से नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम से मापी जाती है। पिछले एक दशक में हमारा फोकस डेटा-ड्रिवन टेस्ट एनालिसिस और परफॉर्मेंस ट्रैकिंग पर रहा है। हर छात्र की प्रगति को माइक्रो लेवल पर मॉनिटर करने से परिणाम स्थिर और प्रतिस्पर्धी बने हैं।” इंफ्रास्ट्रक्चर और शैक्षणिक वातावरण की बात करें तो नरेंद्र कोक, B.Tech, IIT Kharagpur, बताते हैं, “राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयारी का वातावरण भी वैसा ही होना चाहिए। हमने केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं रहते हुए उसे अकादमिक दक्षता से जोड़ा। स्मार्ट क्लासरूम, नियंत्रित बैच साइज और नियमित मूल्यांकन प्रणाली ने छात्रों को अनुशासित तैयारी का मंच दिया। यही गुणवत्ता-आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर लगातार परिणामों की नींव है।” राजेंद्र बुरड़क, B.Tech, SIST University ने शैक्षणिक अनुशासन की अहमियत पर बल दिया। उनका कहना है, “प्रतिभा हर शहर में है, लेकिन उसे परिणाम में बदलने के लिए अनुशासन आवश्यक है। हमारी नियमित उपस्थिति नीति, समयबद्ध असाइनमेंट और साप्ताहिक मूल्यांकन प्रणाली ने छात्रों को निरंतरता सिखाई है। JEE की तैयारी में यही निरंतरता निर्णायक होती है।” अनुपम अग्रवाल, B.Tech, IIT Kanpur ने बताया, “हर चयन के पीछे व्यक्तिगत मेंटरिंग की भूमिका होती है। हम छात्रों की केवल शैक्षणिक नहीं, बल्कि मानसिक
टीवीके एग्जिट, लेफ्ट पुशबैक, मनाप्पराई टसल: तमिलनाडु चुनाव में डीएमके गठबंधन की बातचीत अशांत हो गई | चुनाव समाचार

आखरी अपडेट:मार्च 23, 2026, 12:38 IST सबसे प्रमुख टूट तब हुई जब टी वेलमुरुगन की तमिलागा वाझ्वुरिमई काची (टीवीके) उपेक्षा और असंतोष का हवाला देते हुए गठबंधन से बाहर हो गई। तमिलनाडु चुनाव: कांग्रेस नेता राहुल गांधी एमके स्टालिन के साथ तमिलनाडु में 2026 के विधानसभा चुनावों की ओर अग्रसर होने के साथ, सीट-बंटवारे की बातचीत द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर स्पष्ट तनाव को उजागर कर रही है। निर्वाचन क्षेत्र के आवंटन पर बातचीत से साझेदारों के बीच मनमुटाव पैदा हो गया है, जो सत्ताधारी दल द्वारा सीटों का बड़ा हिस्सा बरकरार रखने की कोशिश के कारण खुद को निचोड़ा हुआ महसूस कर रहे हैं। तनाव ज़मीनी स्तर पर भी दिख रहा है, कई सहयोगी दल एक ही निर्वाचन क्षेत्र के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं, जबकि द्रमुक गढ़ छोड़ने के लिए अनिच्छुक है। यह स्थिति पिछले चुनाव चक्र में गठबंधन के अपेक्षाकृत सहज समन्वय से बदलाव का संकेत देती है और नामांकन के करीब आने पर सौदेबाजी के कठिन चरण का संकेत देती है। सीट आवंटन पर उपेक्षा और असंतोष का हवाला देते हुए टी वेलमुरुगन की तमिलागा वाझ्वुरिमई काची (टीवीके) के गठबंधन से बाहर होने के बाद सबसे प्रमुख टूटन हुई। इस बीच, वामपंथी दल – विशेष रूप से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) – प्रस्तावित सीट कटौती का विरोध कर रहे हैं, और विदुथलाई चिरुथिगल काची अपने बढ़ते चुनावी आधार का तर्क देते हुए एक बड़े हिस्से पर जोर दे रही है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ बातचीत भी नाजुक है, जो गुट के भीतर व्यापक सत्ता-साझाकरण तनाव को दर्शाती है। 2021 के चुनावों में DMK के नेतृत्व वाले गठबंधन की स्थिति कैसी रही? 2021 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में, DMK के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 234 में से 159 सीटें जीतीं, पिछली AIADMK सरकार को हटा दिया। द्रमुक ने स्वयं 133 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया, जबकि प्रमुख सहयोगियों ने भी गठबंधन की संख्या में योगदान दिया। कांग्रेस ने 25 सीटों पर चुनाव लड़ा और 18 सीटें जीतीं, विदुथलाई चिरुथिगल काची ने 4 सीटें जीतीं, और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने 2 सीटें हासिल कीं। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग और मनिथानेया मक्कल काची जैसे अन्य छोटे सहयोगियों को गठबंधन रणनीति के हिस्से के रूप में कुछ सीटें आवंटित की गईं। कुल मिलाकर, इस सीट आवंटन ने एसपीए को अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम और उसके सहयोगियों के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) पर एक आरामदायक अंतर हासिल करने में मदद की। सीपीआई और सीपीआई (एम) जैसी छोटी पार्टियों ने शुरू में अधिक सीटें मांगी थीं, हालांकि, 2026 के विपरीत, ये असहमति ज्यादातर बंद दरवाजों के पीछे रही और चुनाव से पहले सार्वजनिक निकास या खुले विवादों का कारण नहीं बनी। इस चुनाव में DMK को सहयोगियों के साथ किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है? टीवीके ने डीएमके गठबंधन छोड़ दिया टी वेलमुरुगन की तमिलागा वाझ्वुरिमई काची (टीवीके) ने गठबंधन के आवंटन वार्ता में एक से अधिक सीट पाने में विफल रहने के बाद डीएमके के नेतृत्व वाले धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन से अपना नाम वापस ले लिया है – शुरू में अधिक मांगने के बावजूद। वेलमुरुगन की पार्टी ने भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए में शामिल नहीं होने का फैसला किया और स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ेगी या कहीं और गठबंधन करेगी। वेलमुरुगन ने कहा कि उनकी पार्टी की अधिकांश मांगों को सत्तारूढ़ द्रमुक सरकार द्वारा संबोधित नहीं किए जाने के बाद यह निर्णय लिया गया। इस चुनाव में डीएमके गठबंधन के भीतर यह पहला और सबसे अधिक दिखाई देने वाला विभाजन है। मनाप्पराई झगड़ा तिरुचिरापल्ली जिले में मनाप्पराई को अपने मिश्रित ग्रामीण-अर्ध-शहरी मतदाता आधार और प्रतिस्पर्धी प्रतियोगिताओं के इतिहास के कारण राजनीतिक रूप से रणनीतिक सीट माना जाता है। द्रमुक के नेतृत्व वाले मोर्चे में एक से अधिक सहयोगियों ने यहां दावा पेश किया है। कथित तौर पर कांग्रेस इस सीट को अपने स्थानीय कैडर की ताकत और पिछले वोट शेयर के आधार पर जीतने योग्य मानती है, जबकि मरुमलारची द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एमडीएमके) भी निर्वाचन क्षेत्र के कुछ हिस्सों में ऐतिहासिक उपस्थिति और जमीनी स्तर के नेटवर्क का तर्क देते हुए इस पर जोर दे रही है। हालाँकि, द्रमुक स्वयं मनाप्पराई को छोड़ने के लिए अनिच्छुक है, इसे एक महत्वपूर्ण गढ़ के रूप में देखते हुए वह इसे अपने प्रतीक के तहत बनाए रखना पसंद करेगी। वाम दलों ने की अधिक सीटों की मांग कम्युनिस्ट पार्टियाँ कम सीटों की पेशकश या सीमित प्रभाव के रूप में जो कुछ भी देखती हैं, उसका विरोध कर रही हैं। रिपोर्टों में कहा गया है कि सीपीआई (एम) कटौती का विरोध कर रही है और द्रमुक की मौजूदा पेशकश से अधिक सीटों की मांग कर रही है – दो अंकों की हिस्सेदारी पर जोर दे रही है। सीपीआई ने इस बार पांच सीटों पर समझौता किया है – 2021 की तुलना में एक कम – और अपनी पसंद के निर्वाचन क्षेत्रों की एक इच्छा सूची प्रस्तुत की है। वीसीके, एक अन्य प्रमुख सहयोगी, काफी बड़ी हिस्सेदारी की मांग कर रही है – दावा कर रही है कि उसकी ताकत बढ़ी है और वह पुडुचेरी सहित दो अंकों की सीटों के लिए दबाव डाल रही है – लेकिन बातचीत अभी तक हल नहीं हुई है। इन साझेदारों की देरी और धक्का-मुक्की गठबंधन के भीतर तनाव दिखाती है, और अंतिम समाधान के बिना बातचीत अभी भी जारी है। पुडुचेरी में डीएमके-कांग्रेस के बीच बातचीत पुडुचेरी के चुनाव में अलग-अलग, डीएमके और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस इस बात को लेकर गतिरोध में हैं कि प्रत्येक को 30 में से कितनी सीटों पर चुनाव लड़ना चाहिए – कांग्रेस बड़ी हिस्सेदारी के लिए जोर दे रही है और डीएमके ताकत के आधार पर संतुलित आवंटन पर जोर दे रही है। विपक्ष ने डीएमके पर साधा निशाना अन्नाद्रमुक नेताओं ने द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन, विशेषकर द्रमुक और कांग्रेस के बीच दिखाई देने वाली दरार का मज़ाक उड़ाया है, यह सुझाव देते हुए कि सीट बंटवारे पर असहमति से पता चलता है कि गठबंधन संकट में है। तमिलनाडु में विपक्ष के नेता एडप्पादी के पलानीस्वामी ने कहा कि अन्नाद्रमुक-भाजपा गठबंधन सुसंगत है और सुचारू रूप से आगे बढ़ रहा है, जबकि
Gold Price Crash Update; Sona Chandi Ka Bhav Aaj Ka (23 March 2026)

Hindi News Business Gold Price Crash Update; Sona Chandi Ka Bhav Aaj Ka (23 March 2026) | US Iran Israel War नई दिल्ली24 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका-इजराइल की ईरान से चल रही जंग के बीच सोने चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट जारी है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 12,077 रुपए घटकर 1.35 लाख रुपए पर आ गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 40 साल में सोने के कीमत में इतनी बड़ी गिरावट हुई है। इससे पहले इसकी कीमत 1.47 लाख थी। वहीं, एक किलो चांदी की कीमत 30,864 रुपए घटकर 2.01 लाख रुपए पर आ गई है। इससे पहले शुक्रवार को इसकी कीमत 2.32 लाख रुपए किलो थी। अमेरिका-ईरान जंग के कारण सोना 24 दिन में 23,956 और चांदी 65,200 सस्ती हुई है। अलग-अलग शहरों में सोने के दाम अलग होने की 4 वजहें ट्रांसपोर्टेशन और सिक्योरिटी: सोना एक शहर से दूसरे शहर ले जाने में ईंधन और भारी सुरक्षा का खर्च आता है। आयात केंद्रों से दूरी बढ़ने पर ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ जाती है, जिससे स्थानीय दाम बढ़ जाते हैं। खरीदारी की मात्रा : दक्षिण भारत जैसे इलाकों में खपत ज्यादा (करीब 40%) होने के कारण ज्वेलर्स भारी मात्रा में सोना खरीदते हैं। इससे मिलने वाली छूट का फायदा ग्राहकों को कम दाम के रूप में मिलता है। लोकल ज्वेलरी एसोसिएशन: हर राज्य और शहर के अपने ज्वेलरी एसोसिएशन (जैसे तमिलनाडु में मद्रास ज्वेलर्स एसोसिएशन) होते हैं। ये संगठन स्थानीय मांग और सप्लाई के आधार पर अपने इलाके के लिए सोने का रेट तय करते हैं। पुराना स्टॉक और खरीद मूल्य: ज्वेलर्स ने अपना स्टॉक किस रेट पर खरीदा है, यह भी मायने रखता है। जिन ज्वेलर्स के पास पुराने और सस्ते रेट पर खरीदा हुआ स्टॉक होता है, वे ग्राहकों से कम कीमत वसूल सकते हैं। सोने की कीमतों का सफर: ₹1.76 लाख से ₹1.35 लाख तक सोने में इस साल की शुरुआत में तेजी दिखी थी, लेकिन पिछले कुछ हफ्तों में मुनाफावसूली और वैश्विक कारणों से इसमें गिरावट आई है। शुरुआती स्तर (31 दिसंबर 2025): ₹1.33 लाख ऑल टाइम हाई (29 जनवरी 2026): ₹1.76 लाख (सिर्फ एक महीने में भारी उछाल) मौजूदा स्थिति: अपने उच्चतम स्तर से सोना अब तक ₹41 हजार सस्ता हो चुका है। चांदी की कीमतों में भारी क्रैश: ₹3.86 लाख से ₹2.01 लाख तक चांदी में सोने के मुकाबले कहीं ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। यह अपने ऑल टाइम हाई से बहुत तेजी से नीचे आई है। शुरुआती स्तर (31 दिसंबर 2025): ₹2.30 लाख ऑल टाइम हाई (29 जनवरी 2026): ₹3.86 लाख (ऐतिहासिक बढ़त) गिरावट का आंकड़ा: पिछले 53 दिन में चांदी ₹1.84 लाख सस्ती हो गई है। गिरावट के मुख्य कारण: मेटल छोड़कर ‘कैश’ पर भरोसा आमतौर पर जंग के माहौल में सोने-चांदी के दाम बढ़ते हैं, लेकिन इस बार स्थिति थोड़ी अलग है: कैश की बचत: मिडिल ईस्ट जंग के कारण निवेशक जोखिम नहीं लेना चाह रहे हैं। वे अपने गोल्ड और सिल्वर को बेचकर ‘कैश’ इकट्ठा कर रहे हैं ताकि अनिश्चितता के समय उनके पास लिक्विड मनी रहे। प्रॉफिट बुकिंग: जनवरी में कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थीं, इसलिए बड़े निवेशकों ने ऊंचे दामों पर अपनी होल्डिंग बेचना शुरू कर दिया, जिससे बाजार में सप्लाई बढ़ गई और कीमतें गिर गईं। ब्याज दरों का असर: अमेरिका में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपनाने से भी कीमती धातुओं की चमक थोड़ी फीकी हुई है। कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक सोना-चांदी के दाम में आगे भी ये गिरावट जारी रह सकती है। ऐसे में निवेशकों को अभी सोने-चांदी में निवेश से बचना चाहिए। ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान 1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है। 2. कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें। सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है। असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके मैग्नेट टेस्ट: असली सिल्वर चुंबक से नहीं चिपकती। अगर चिपक जाए तो फेक है। आइस टेस्ट: सिल्वर पर बर्फ रखें। असली सिल्वर पर बर्फ बहुत तेजी से पिघलेगी। स्मेल टेस्ट: असली सिल्वर में गंध नहीं होती। फेक में कॉपर जैसी गंध आ सकती है। क्लॉथ टेस्ट: चांदी को सफेद कपड़े से रगड़ें। अगर काला निशान आए तो असली है। ————————————– ये खबर भी पढ़ें… भारतीय घरों में देश की GDP से ज्यादा का सोना: 34,600 टन गोल्ड की कीमत ₹450 लाख करोड़, देश की GDP ₹370 लाख करोड़ भारतीय परिवारों के पास मौजूद कुल सोने की वैल्यू 5 ट्रिलियन डॉलर (₹450 लाख करोड़) के पार निकल गई है। यह आंकड़ा देश की कुल 4.1 ट्रिलियन डॉलर यानी, 370 लाख करोड़ रुपए की GDP से भी ज्यादा है। सोने की कीमतें रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने के कारण ऐसा हुआ है। मॉर्गन स्टेनली की एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय घरों में लगभग 34,600 टन सोना जमा है। अभी सोने की वैल्यू 1.38 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के करीब चल रही है। वहीं इंटरनेशनल मार्केट में सोना 4,500 डॉलर प्रति औंस (करीब 28 ग्राम) के पार ट्रेड कर रहा है। रुपए में इसे बदलें तो इसकी वैल्यू 1.30 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के करीब होती है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Uttar Pradesh Varanasi Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand Saraswati ‘Chaturangini’ army Live photo Video update

वाराणसी5 घंटे पहलेलेखक: अनुज तिवारी कॉपी लिंक वाराणसी में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सोमवार को चतुरंगिणी सेना बनाने का ऐलान किया। उन्होंने कहा- चतुरंगिणी सेना में 2 लाख 18 हजार 700 सैनिक होंगे। इसमें देशभर से लोग भर्ती होंगे। उन्होंने बताया- यह सेना गोरक्षा, धर्म रक्षा, शास्त्र रक्षा और मंदिर रक्षा का कार्य करेगी। उनकी ड्रेस पीली होगी। हाथ में परशु (फरसा) होगा। अविमुक्तेश्वरानंद ने चतुरंगिणी सेना बनाने के लिए श्रीशंकराचार्य चतुरंगिणी सभा का गठन किया है। इसमें 27 सदस्य होंगे। इसका अध्यक्ष वे खुद होंगे। शंकराचार्य ने अपनी सेना के काम करने के तरीके बताए। उन्होंने कहा- पहले टोको, यानी टोकेंगे। कहो कि यह गलत हो रहा है। नहीं माने तो रोको। भाई, आपको रुकना पड़ेगा। नहीं तो फिर ठोको। ठोको का मतलब सीधे प्रहार करना नहीं है। मुकदमा करना, शिकायत करना और पंचायत करना भी ठोको में आएगा। ये सभी संवैधानिक तरीके अपनाते हुए काम करेंगी। चतुरंगिणी सेना यानी हाथी-घोड़े, रथ और पैदल सेना शंकराचार्य बोले- एक टीम में 10 लोग होंगे शंकराचार्य ने कहा- 1 पत्ती (टीम) में 10 लोग होंगे। 21 हजार 870 टीमें बनेंगी तो सेना तैयार हो जाएगी। भारत में अभी करीब 800 जिले हैं। अगर हर जिले में 27 टीमें, यानी 270 लोग तैयार हो गए, तो 2 लाख 16 हजार लोग तैयार हो जाएंगे। ‘धार्मिक परिसर में वही लोग जाएं, जो उस धर्म को मानते हैं’ उत्तराखंड के बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक के मामले में शंकराचार्य ने कहा- मक्का-मदीना में 40 किलोमीटर पहले ही दूसरे धर्म के लोगों को रोक दिया जाता है। वह गलत नहीं है। ठीक है। वैसे ही हमारे भी धर्म स्थल हैं। हमें भी अपनी पवित्रता चाहिए। हमें भी अपने ढंग से पूजा-पाठ करना है। वहां दूसरा क्यों जाएगा। हमारे यहां परंपरा है कि धार्मिक परिसरों में वही लोग जा सकते हैं, जो उस धर्म को मानते हैं। शंकराचार्य ने बताया- चतुरंगिणी सेना की एक टीम में 10 लोग होंगे। शंकराचार्य को चतुरंगिणी सेना बनाने की जरूरत क्यों पड़ी आदि शंकराचार्य ने आठवीं सदी में 13 अखाड़े बनाए थे। इन अखाड़ों का गठन हिंदू धर्म और वैदिक संस्कृति की रक्षा के लिए किया गया था। धर्म की रक्षा के लिए नागा साधुओं की एक सेना की तर्ज पर ही अखाड़ों को तैयार किया गया था। जिसमें उन्हें योग, अध्यात्म के साथ शस्त्रों की भी शिक्षा दी जाती है। इन अखाड़ों को शंकराचार्य की सेना भी कहा जाता था। आजादी के बाद 1954 में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (ABAP) का गठन हुआ था। 1954 के प्रयाग (इलाहाबाद) कुंभ में मची भगदड़ के बाद, व्यवस्था सुधारने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की पहल पर, 13 अखाड़ों के प्रतिनिधियों ने मिलकर इस संस्था की स्थापना की। ऐसा माना जाता है कि अखाड़ा परिषद बनने के बाद इनकी कमान परिषद के अध्यक्ष के हाथ में आ गई और धीरे-धीरे शंकराचार्यों का कमांड इन पर से कम हो गया। 18 जनवरी (मौनी अमावस्या) को शंकराचार्य प्रयागराज माघ मेले में अपने शिविर से पालकी में सवार होकर संगम स्नान के लिए रवाना हुए। पालकी को संगम नोज तक ले जाने को लेकर विवाद हो गया। इसके बाद शंकराचार्य धरने पर बैठ गए, लेकिन किसी भी अखाड़े ने उनका समर्थन नहीं किया। उस वक्त अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवींद्र पुरी ने कहा था- मुख्यमंत्री को लेकर शंकराचार्य की कड़े शब्दों में की गई टिप्पणियां गलत हैं। 10 दिन बाद 28 जनवरी को शंकराचार्य बिना स्नान किए काशी लौट गए। इसके बाद वे यूपी सरकार पर लगातार हमलावर रहे। उन्होंने ‘गो-प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध’ यात्रा का ऐलान किया और साधु-संतों से साथ आने की अपील की। 7 मार्च को काशी से शुरू हुई यात्रा 11 मार्च को लखनऊ पहुंची। यहां शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने गोरक्षा अभियान का शंखनाद किया, लेकिन साधु-संतों की भागीदारी सीमित दिखी। 11 मार्च को शंकराचार्य ने कहा था कि साधु समाज में विकृति आ गई है। एक लकीर खिंच गई है। उन्होंने सभी अखाड़ों को पत्र लिखकर यह पूछने की बात कही कि वे किसके साथ हैं। —————- शंकराचार्य से जुड़ी हुई ये खबर भी पढ़ें- लखनऊ में शंकराचार्य से मिले अखिलेश, बोले- नकली संत अब बेनकाब होंगे सपा मुखिया अखिलेश यादव ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से गुरुवार को मुलाकात की। एक घंटे तक बातचीत हुई। इस दौरान अखिलेश जमीन पर बैठे नजर आए। बाहर निकलने पर अखिलेश ने मीडियाकर्मियों से कहा- शंकराचार्य से मिलकर आ रहा हूं। उनके आशीर्वाद से अब नकली संतों का अंत होगा। अब वे लोग भी बेनकाब होंगे, जो धर्म के नाम पर लोगों को गुमराह करते हैं। सबका सच सामने आएगा। पढ़ें पूरी खबर दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
जारा ने चीन में आधी दुकानें बंद की:फास्ट फैशन की जंग में चीनी ब्रांड शीन-टेमू को दी मात, प्रीमियम कस्टमर पर फोकस, रिकॉर्ड 4.3 लाख करोड़ की बिक्री

फैशन जगत में जब शीन और टेमू जैसे चीनी ब्रांड्स ने ‘अल्ट्रा-चीप’ मॉडल से तहलका मचाया, तो माना गया कि जारा को टिके रहने के लिए कीमतें घटानी होंगी। लेकिन स्पेनिश दिग्गज इंडिटेक्स ने इसके उलट ‘प्रीमियम रणनीति’ अपनाई। ये स्पेनिश क्लॉदिंग ग्रुप है, जिसकी कुल बिक्री का दो-तिहाई हिस्सा जारा से आता है। नतीजा? साल 2025 में कंपनी की सालाना बिक्री 4.3 लाख करोड़ और शुद्ध कमाई रिकॉर्ड 67 हजार करोड़ रुपए पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 6% अधिक है। जारा का ऑपरेटिंग प्रॉफिट प्रतिद्वंद्वी एचएंडएम से पांच गुना ज्यादा है। रोथ्सचाइल्ड बैंक के जेफ लोअरी के अनुसार, फास्ट-फैशन को ‘लग्जरी लुक’ के साथ बेचना अब रंग ला रहा है। इंडिटेक्स ने कीमत के बजाय स्टाइल पर फोकस किया। कंपनी ने 50वीं वर्षगांठ पर नामी फोटोग्राफर स्टीवन मेसेल और टॉप मॉडल्स के साथ ‘लग्जरी कैंपेन’ चलाया, जिसने ब्रांड की छवि बदल दी। मेसेल लग्जरी ब्रांड्स के साथ काम करने के लिए जाने जाते हैं। इस शूट के हेयर स्टाइलिस्ट और मेकअप आर्टिस्ट भी उसी आला दर्जे के थे। इन विज्ञापनों में बीते 30 वर्षों की हर टॉप-पेड मॉडल को डोना समर के गाने ‘आई फील लव’ पर थिरकते हुए दिखाया गया। यह ग्लैमर इंडिटेक्स के लिए एक सफल रणनीति का प्रतीक है। आज इंस्टाग्राम पर जारा के विज्ञापन किसी महंगे लग्जरी हाउस जैसे दिखते हैं। ग्रुप के फाउंडर अमानसियो ओर्टेगा ने जारा को एक फुर्तीले लॉजिस्टिक्स नेटवर्क पर खड़ा किया है, जो हर हफ्ते नया स्टॉक पेश करता है। इससे डेड-स्टॉक का जोखिम कम होता है और ब्रांड को ऊंची कीमतें रखने की ताकत मिलती है। बर्नस्टीन के विलियम वुड्स कहते हैं कि जारा उन 30-40 साल के खरीदारों को टार्गेट करता है जो एचएंडएम के ग्राहकों से अधिक समृद्ध हैं। शीन और टेमू जैसे चीनी ‘इवन-फास्टर-फैशन’ रिटेलर्स की प्रतिस्पर्धा ने एचएंडएम समेत कई प्रतिद्वंद्वियों को कीमतें घटाने पर मजबूर किया। फुर्तीला बिजनेस मॉडल, हर हफ्ते नए आइटम उतार रहे इंडिटेक्स के प्रमुख ऑस्कर गार्सिया मसेइरास इस सफलता का श्रेय कंपनी के आधे दशक पुराने बिजनेस मॉडल को देते हैं। संस्थापक अमानसियो ओर्टेगा ने इस व्यवसाय को एक फुर्तीले लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के इर्द-गिर्द भुना है, जो ग्राहकों की पसंद के आधार पर माल को तुरंत बदलने की अनुमति देता है। जारा और उसके सहयोगी ब्रांड हर हफ्ते, और कभी-कभी हफ्ते में दो बार नए आइटम पेश करने का लक्ष्य रखते हैं। इससे यह जोखिम कम हो जाता है कि ब्रांड ऐसे कपड़े बनाए जिन्हें कोई नहीं चाहता और फिर उन्हें भारी छूट पर बेचना पड़े। यह जारा को ऊंची कीमतें निर्धारित करने की छूट भी देता है, क्योंकि इसके कपड़े लोकप्रिय शैलियों को तुरंत अपना लेते हैं। 2021 में मार्टा ओर्टेगा के प्रेसिडेंट बनने के बाद जारा और अधिक ‘प्रीमियम’ हुआ है। ब्रांड ने हाल ही में जॉन गैलियानो और स्टेफानो पिलाती जैसे दिग्गज डिजाइनरों के साथ साझेदारी की है। सुपर बाउल में गायक ‘बैड बनी’ की स्टाइलिंग भी इसी रणनीति का हिस्सा है। पर्सनल शॉपर्स, लग्जरी बुटीक के आइडिया से बड़ा बदलाव लाई इंडिटेक्स प्रमुख ऑस्कर गार्सिया मसेइरास कहते हैं, ‘ग्राहक अब कपड़ों की खरीद से परे कुछ और (अनुभव) तलाश रहे हैं।’ जारा ने चीन में अपनी लोकेशन आधी कर दी है, लेकिन बाकी बची दुकानों को बड़ा और आलीशान बनाया। इसका असर यह हुआ कि डॉयचे बैंक के अनुसार, 2022-25 के बीच प्रति वर्ग मीटर बिक्री 46% बढ़ी है। ब्रांड अब ‘फास्ट फैशन’ की छवि छोड़ ‘किफायती लक्जरी’ की ओर बढ़ रहा है, जहां ग्राहकों को हाई-एंड बुटीक जैसा अहसास मिलता है। अब स्टोर में हैंडबैग-जूतों के लिए अलग बुटीक एरिया और ग्राहकों की मदद के लिए ‘पर्सनल शॉपर्स’ मौजूद हैं। जारा का यह ‘लग्जरी टच’ अब मुनाफे की नई इबारत लिख रहा है।
वॉशरूम जाती महिलाओं का वीडियो किया था अपलोड, गिरफ्तार:राजगढ़ पुलिस ने स्वतः संज्ञान ले युवक को पकड़ा, कान पकड़कर मांगी माफी

राजगढ़ जिले के एक मेले में महिलाओं के वॉशरूम जाने का आपत्तिजनक वीडियो इंस्टाग्राम पर अपलोड करने वाले युवक को पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए रविवार (22 मार्च) को पकड़ लिया है। कालीपीठ थाना पुलिस ने पाटरी गांव के रहने वाले आरोपी बबलू तंवर को हिरासत में लिया, जिसने पूछताछ के दौरान कान पकड़कर अपनी गलती मानते हुए माफी मांगी है। आरोपी ने डरकर वीडियो और आईडी डिलीट कर दी थी, फिर भी पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उसके खिलाफ धारा 170 बीएनएसएस (BNSS) के तहत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की है। इंस्टाग्राम पर अपलोड किया था आपत्तिजनक वीडियो 22 मार्च को इंस्टाग्राम आईडी “बबलू तंवर” से सोशल मीडिया पर एक वीडियो अपलोड किया गया था। इस वीडियो में मेले के दौरान कुछ महिलाएं वॉशरूम जाते हुए दिखाई दे रही थीं। यह वीडियो सामने आते ही क्षेत्र में महिलाओं की गरिमा और निजता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे। बिना शिकायत पुलिस ने लिया स्वतः संज्ञान महिलाओं की निजता से जुड़े इस संवेदनशील मामले में पुलिस को कोई औपचारिक शिकायत नहीं मिली थी। इसके बावजूद पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए तुरंत मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान आरोपी की पहचान थाना कालीपीठ क्षेत्र के ग्राम पाटरी निवासी बबलू तंवर के रूप में हुई, जिसके बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे अभिरक्षा में ले लिया। कान पकड़कर मांगी माफी, वीडियो-आईडी की डिलीट पूछताछ के दौरान युवक ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए पुलिस के सामने दोनों कान पकड़कर और हाथ जोड़कर माफी मांगी। उसने पुलिस से कहा कि भविष्य में वह ऐसी गलती दोबारा नहीं करेगा। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि पकड़े जाने के डर से आरोपी ने संबंधित आपत्तिजनक वीडियो और अपनी इंस्टाग्राम आईडी डिलीट कर दी थी। धारा 170 BNSS के तहत कार्रवाई, पुलिस की अपील वीडियो डिलीट करने और माफी मांगने के बावजूद मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना कालीपीठ पुलिस ने आरोपी युवक के खिलाफ धारा 170 बीएनएसएस के तहत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की है। पुलिस ने आमजन से अपील की है कि महिलाओं की निजता और गरिमा का सम्मान करें। इस प्रकार के वीडियो न बनाएं और न ही सोशल मीडिया पर साझा करें, नियमों का उल्लंघन करने पर पुलिस सख्त कार्रवाई करेगी।
न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर विमान और फायर ट्रक की टक्कर:एयर ट्रैफिक कंट्रोलर चिल्लाता रहा- स्टॉप, स्टॉप; प्लेन का आगे का हिस्सा तबाह, 4 घायल

अमेरिका के न्यूयॉर्क में ला गार्डिया एयरपोर्ट पर रविवार रात (स्थानीय समयानुसार) एयर कनाडा एक्सप्रेस का एक विमान लैंडिंग के समय रनवे पर एक फायर ट्रक से टकरा गया। इससे विमान का आगे का हिस्सा पूरी तरह नष्ट हो गया। यह फ्लाइट मॉन्ट्रियल से आ रही थी। टक्कर के तुरंत बाद रनवे 4 को बंद कर दिया गया। एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लागू करते हुए सभी फ्लाइट ऑपरेशन रोक दिए गए और आने वाली उड़ानों को डायवर्ट किया गया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, कुछ फायरफाइटर्स और विमान में 4 सवार यात्री घायल हुए, जिनमें कुछ की हालत गंभीर है। हालांकि अभी पूरी जानकारी साफ नहीं है। हादसे से पहले एयर ट्रैफिक कंट्रोलर ने विमान और ग्राउंड वाहन दोनों को रुकने के लिए कहा था, लेकिन फिर भी टक्कर हो गई। इस घटना के बाद फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन ने एयरपोर्ट पर सभी फ्लाइट्स रोक दीं और जांच शुरू कर दी गई है। एयर ट्रैफिक कंट्रोलर ने विमान को रोकने की कोशिश की थी लैंडिंग से पहले एयर ट्रैफिक कंट्रोलर ने विमान को रोकने की कोशिश की थी। वायरल ऑडियो में एयर ट्रैफिक कंट्रोलर ने पहले ट्रक को रनवे पार करने की अनुमति दी थी, लेकिन थोड़ी ही देर बाद कंट्रोलर लगातार “स्टॉप, स्टॉप, ट्रक 1” चिल्लाता रहा। हालांकि, कुछ ही सेकंड में टक्कर हो गई। कंट्रोलर की आवाज रिकॉर्डिंग में सुनाई देती है- “JAZZ 646, आप वाहन से टकरा गए हैं, वहीं रुके रहें, मदद पहुंच रही है।” फ्लाइट लैंडिंग के बाद रनवे पर करीब 130 मील प्रति घंटे की रफ्तार से आगे बढ़ रही थी। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में विमान के आगे के हिस्से में नुकसान और कॉकपिट उठा हुआ दिखाई दे रहा है। एयरपोर्ट पर आने वाले विमानों को डायवर्ट किया गया फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने एयरक्राफ्ट इमरजेंसी घोषित करते हुए तुरंत ग्राउंड स्टॉप लगा दिया। एयरपोर्ट को सोमवार दोपहर 2 बजे तक बंद रखने की बात कही गई है। एयरपोर्ट पर आने वाले विमानों को दूसरे हवाई अड्डों की ओर मोड़ दिया गया था या उन्हें वापस भेज दिया गया। हादसे में शामिल विमान CRJ-900 था, जिसे जैज एविएशन ऑपरेट करता है। इसमें करीब 76 यात्रियों की क्षमता होती है। फ्लाइट रात करीब 10:30 बजे मॉन्ट्रियल से रवाना हुई थी और लगभग एक घंटे बाद ला गार्डिया पहुंची। हादसे से पहले एयरपोर्ट ने बारिश और कोहरे की चेतावनी दी थी घटना के बाद रनवे पर बड़ी संख्या में इमरजेंसी वाहन पहुंच गए। रात 2 बजे तक रनवे पर रेस्क्यू ऑपरेशन जारी था। हादसे से पहले एयरपोर्ट ने हल्की बारिश और कोहरे के कारण फ्लाइट डिसरप्शन की चेतावनी दी थी। फिलहाल जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि रनवे पर वाहन कैसे पहुंचा और टक्कर कैसे हुई। ———————- ये खबर भी पढ़ें… महिला की लाश के साथ 13 घंटे उड़ता रहा विमान: हॉन्गकॉन्ग से लंदन उड़ान में टेकऑफ के बाद मौत हुई; रास्ते भर बदबू से परेशान रहे पैसेंजर ब्रिटिश एयरवेज की फ्लाइट में रविवार को एक महिला यात्री की टेकऑफ के करीब 1 घंटे बाद मौत हो गई। इसके बाद उनका शव पूरे 13 घंटे तक विमान में ही रखा रहा। शव को विमान के पीछे वाले हिस्से में रखा गया था, जहां फर्श गर्म था। पूरी खबर पढ़ें…
कांग्रेस का BRICS+ समिट को लेकर पीएम से सवाल:पूछा- पश्चिम एशिया संकट पर समिट आगे क्यों नहीं बढ़ा रहे 'विश्वगुरु'

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया है कि वेस्ट एशिया संकट से निपटने के लिए BRICS+ समिट को आगे क्यों नहीं बढ़ाया जा रहा। पार्टी का आरोप है कि मोदी अमेरिका और इजराइल को नाराज नहीं करना चाहते। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने X पोस्ट में कहा- भारत इस साल नई दिल्ली में 18वीं BRICS+ समिट की मेजबानी करने वाला है। ऐसे में सरकार को वेस्ट एशिया संकट पर कूटनीतिक पहल के लिए इस मंच का इस्तेमाल करना चाहिए। खुद को ‘विश्वगुरु’ बताने वाले प्रधानमंत्री इस दिशा में पहल क्यों नहीं कर रहे हैं। रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को नाराज नहीं करना चाहते। केवल फोन कॉल के जरिए बातचीत की सीमाएं होती हैं, जबकि समिट के जरिए ठोस फैसले और आमने-सामने बातचीत ज्यादा प्रभावी हो सकती है। G20 पर भी उठाए सवाल कांग्रेस नेता ने कहा कि इस साल G20 की अध्यक्षता अमेरिका के पास है और इससे कोई ठोस नतीजा निकलने की उम्मीद नहीं है। उन्होंने दावा किया कि यह मंच सिर्फ बयानबाजी तक सीमित रह सकता है। पहले भी सरकार पर साधा था निशाना कांग्रेस ने पिछले हफ्ते भी केंद्र सरकार की आलोचना की थी। पार्टी का कहना था कि BRICS+ चेयर होने के बावजूद भारत ने वेस्ट एशिया संघर्ष पर कोई सामूहिक बयान जारी नहीं किया। शनिवार को भी कांग्रेस ने अमेरिका-इजराइल के हमले की निंदा न करने को लेकर सरकार पर सवाल उठाए थे।







