असम विधानसभा चुनाव 2026: विरासत बनाम बदलाव की लड़ाई बनी मरियानी, असम की इस सीट पर देखने को मिलेगा हाई-वोल्टेज मुकाबला

असम की मरियानी विधानसभा सीट एक बार फिर राज्य की सबसे बड़ी और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बैठक में शामिल की गई है। इस बार के विधानसभा चुनाव में विरासत बनाम विविधता की विशेष रोचकता देखने को मिल रही है। यहां दशकों से स्थापित राजनीतिक पकड़ को एक नई चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। यहां तीन दशक से कुर्मी परिवार का प्रभाव बना हुआ है। इसकी शुरुआत साल 1991 में हुई थी, जब रूपराम कुर्मी ने पहली बार जीत हासिल की और 2004 तक राजनीतिक रूप से इस क्षेत्र में प्रतिनिधित्व किया। वह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं. इसके अलावा वह पूर्व मुख्यमंत्री युवा गोगोई की सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे थे। 4 फरवरी 2004 को उनका निधन हो गया। इसके बाद उनके पुत्रों ने अपनी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया। 2006 से रूपज्योति कुर्मी ने इस सीट पर जीत हासिल की। वह 2006, 2011 और 2016 और 2021 में प्राइमरी कांग्रेस प्रतियोगी मैदान में उतरे। जून 2021 में उन्होंने कांग्रेस का दामन छोड़ दिया और बीजेपी में शामिल हो गए. इसके बाद अक्टूबर 2021 में विधानसभा में जीत हासिल कर अपना जनाधार सिद्ध किया गया। 2004 से 2006 के छोटे अंतर को छोड़ दिया गया तो 1991 से अब तक मरियानी सीट लगभग पूरी तरह से कुर्मी परिवार पर नियंत्रण रखती है, जिससे यह असम की सबसे मजबूत राजनीतिक संरचना में गिनी बन जाती है। नए चेहरे के प्रवेश द्वार से लेकर दूसरे स्थान तकइस बार चुनाव में एक नया बदलाव आया है. कांग्रेस और राइजोर दल के गठबंधन ने डॉ. ज्ञानश्री बोरा को संयुक्त उम्मीदवार बनाया गया है, जो पहली बार इलिनोइस मैदान में उतर रहे हैं। पूर्व शिक्षक डाॅ. बोरा खुद को ज़मीन पर काम करने वाली उम्मीदवार के रूप में पेश कर रही हैं। उन्होंने साफ कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य मरियानी जनता की समस्याओं को विधानसभाओं से उठाना और उनके समाधान की गारंटी करना है। चुनाव का मुख्य मुद्दा?डॉ. बोरा का चुनाव अभियान कई महत्वपूर्ण स्थानीय धार्मिक स्थलों पर केंद्रित है। इनमें से असम-नागालैंड सीमा विवाद (जिससे प्रभावित इलाकों के लोग हैं), क्लीन प्रिंसेस की कमी, खराब सड़क और ढांचागत ढांचा, बच्चों के बीच बेरोजगारी जैसे मुद्दे शामिल हैं। स्थायी शिक्षण वैज्ञानिक अंतिम राजनीति में अपना निर्णय भी जनता के बीच में और बदलाव के प्रतीक के रूप में पेश किया जा रहा है। रूपज्योति कुर्मी की शक्तिवहीं दूसरी ओर रूपज्योति कुर्मी इस चुनाव में कई मजबूत ताकतों के साथ उतर रहे हैं। इनमें व्यापक राजनीतिक अनुभव, मजबूत ग्राउंड नेटवर्क, भाजपा का संचलन, विकास कार्य और राष्ट्रपति का रिकॉर्ड शामिल है। 2021 में पार्टी में शामिल होने के बावजूद उनकी चुनावी जीत से पता चलता है कि उनका व्यक्तिगत जनाधार काफी मजबूत है। मरियानी की राजनीति में उतार-चढ़ावराजनीतिक सिद्धांतों का मानना है कि 2026 का यह चुनाव केवल एक सामान्य मुकाबला नहीं है, बल्कि मरियानी की राजनीति के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव है। यह विरासत, अनुभव और तटस्थता (रूपज्योति कुर्मी) बनाम परिवर्तन, नई सोच और समृद्धि-आधारित राजनीति (डॉ. ज्ञानश्री बोरा) के बीच प्रतिस्पर्धा है। यह चुनाव तय है कि दिग्गजों ने पुराने और स्थापित नेतृत्व पर भरोसा बनाए रखा है या नई दिशा की ओर कदम बढ़ाए हैं। बेटियाँ की पूरी चुनाव पर क्या राय है?इस पर विद्वानों का कहना है कि कुर्मी परिवार का मजबूत इतिहास और भाजपा की सहयोगी ताकत रूपज्योति कुर्मी को बढ़त हासिल है, लेकिन सत्ता विरोधी लहर और नए चेहरे के आकर्षण में दरार आ सकती है। डॉ. बोरा को चुनौती देने के लिए यह कहना होगा कि वह वोट में बदलाव, विशेषकर युवाओं और पहली बार वोट देने वालों के बीच असंतोष पैदा करेंगे। वहीं कुर्मी के सामने चुनौती है कि वह अपना समर्थन बनाए रखने के लिए बदलाव की मांग का सामना करें. जैसे-जैसे चुनावी प्रचार तेज हो रहा है, मरियानी एक अहम राजनीतिक मोड़ पर खड़ा है। यह मुकाबला सिर्फ हाई-वोल्टेज और करीबी होने वाला नहीं है, बल्कि इसके नतीजे व्यापक राजनीतिक परिदृश्य पर भी असर डाल सकते हैं। अब सभी की नज़र मरियानी के लॉक पर है—क्या वे अनुभव और तटस्थता को चुनेंगे या बदलाव और नई आवाज़ को मौका देंगे? यही निर्णय इस ऐतिहासिक स्थल के अगले अध्याय को तय करेगा। यह भी पढ़ें: मिशन 2027 का हुंकार: आज मोदी, सीएम योगी ने चलाए शब्द प्रतिबंध, कल क्रांति भी संभालेंगे कमान (टैग्सटूट्रांसलेट)असम विधानसभा चुनाव 2026(टी)मारियानी विधानसभा सीट(टी)विरासत बनाम परिवर्तन का युद्धक्षेत्र(टी)उच्च वोल्टेज प्रतियोगिता(टी)असम चुनाव समाचार(टी)असम नवीनतम समाचार(टी)असम राजनीति(टी)बीजेपी(टी)कांग्रेस(टी)रूपम कुर्मी(टी)डॉ. ज्ञानश्री बोरा(टी)कांग्रेस बनाम बीजेपी(टी)असम विधानसभा चुनाव 2026(टी)चुनाव 2026(टी)असम विधानसभा चुनाव 2026(टी)मैरियानी विधानसभा सीट(टी)विरासत बनाम बदलाव का रणक्षेत्र(टी)हाई-वोल्टेज मुकाबला(टी)असम चुनाव समाचार(टी)असम की ताजा खबरें(टी)असम की राजनीति(टी)बीजेपी(टी)कांग्रेस(टी)रूपम कुर्मी(टी)डॉ. ज्ञानश्री बोरा(टी)कांग्रेस बनाम बीजेपी(टी)असम विधानसभा चुनाव 2026(टी)चुनाव 2026
Varun Dhawan Recalls Underworld Threat Calls

30 मिनट पहले कॉपी लिंक बॉलीवुड एक्टर वरुण धवन ने बॉलीवुड के 1990 के दशक के डरावने दौर का वो सच बयान किया जब उनके परिवार को अंडरवर्ल्ड के धमकी भरे फोन कॉल का सामना करना पड़ा। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक वरुण ने हाल ही में एक बातचीत में बताया कि उस समय कई बड़े सितारों को अंडरवर्ल्ड से धमकियां और ब्लैकमेल कॉल आते थे। उनके पिता डेविड धवन और परिवार को भी ऐसी ही डराने वाली कॉल का सामना करना पड़ा था। वरुण ने कहा कि तब उनकी फैमिली को लगातार अंडरवर्ल्ड से कॉल आते थे, लेकिन उन्हें शुरू‑शुरू में पता नहीं चला कि कॉल किस उद्देश्य से हैं। दरअसल, घर के कुछ कर्मचारियों ने कॉल करने वाले व्यक्ति से बहस कर दी थी और उन्होंने गलती से फोन पर पूरा पता भी बोल दिया, जिसमें उनका घर और ऑफिस जगह का जिक्र था। उन्होंने आगे बताया कि कॉल करने वाले ने कहा था कि वह गार्डन में मिलकर मारने आएगा और पता भी जानता है। जैसे ही बात बढ़ी, किसी ने तुरंत फोन डेविड धवन को कर के बताया कि मामला हाथ से निकल रहा है और संदिग्ध व्यक्ति ने असल जिंदगी में हिंसा की धमकी भी दी है। इस अनहोनी के बाद परिवार को उस दिन अपने घर से कहीं और चले जाना पड़ा, क्योंकि स्थिति गंभीर और डरावनी थी। वरुण ने इस घटना को मजेदार लेकिन डरावना बताया, क्योंकि उस दौर में बॉलीवुड के कई दिग्गज कलाकारों पर अंडरवर्ल्ड दबाव और धमकियां आम समस्या बनी हुई थी। वरुण के बयान से उस समय के फिल्म उद्योग की एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है, जब कलाकार, निर्देशक और निर्माता रोजाना ऐसे खतरे का सामना करते थे। वर्कफ्रंट की बात करें तो वरुण हाल ही में बॉक्स ऑफिस हिट फिल्म ‘बॉर्डर 2’ में नजर आए हैं। उनकी अगली फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ जल्द ही रिलीज होने वाली है। यह एक रोमांटिक कॉमेडी फिल्म है, जिसमें वरुण धवन, पूजा हेगड़े और मृणाल ठाकुर के साथ दिखेंगे। इस फिल्म को डेविड धवन डायरेक्ट कर रहे हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Varun Dhawan Recalls Underworld Threat Calls

10 घंटे पहले कॉपी लिंक बॉलीवुड एक्टर वरुण धवन ने बॉलीवुड के 1990 के दशक के डरावने दौर का वो सच बयान किया जब उनके परिवार को अंडरवर्ल्ड के धमकी भरे फोन कॉल का सामना करना पड़ा। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक वरुण ने हाल ही में एक बातचीत में बताया कि उस समय कई बड़े सितारों को अंडरवर्ल्ड से धमकियां और ब्लैकमेल कॉल आते थे। उनके पिता डेविड धवन और परिवार को भी ऐसी ही डराने वाली कॉल का सामना करना पड़ा था। वरुण ने कहा कि तब उनकी फैमिली को लगातार अंडरवर्ल्ड से कॉल आते थे, लेकिन उन्हें शुरू‑शुरू में पता नहीं चला कि कॉल किस उद्देश्य से हैं। दरअसल, घर के कुछ कर्मचारियों ने कॉल करने वाले व्यक्ति से बहस कर दी थी और उन्होंने गलती से फोन पर पूरा पता भी बोल दिया, जिसमें उनका घर और ऑफिस जगह का जिक्र था। उन्होंने आगे बताया कि कॉल करने वाले ने कहा था कि वह गार्डन में मिलकर मारने आएगा और पता भी जानता है। जैसे ही बात बढ़ी, किसी ने तुरंत फोन डेविड धवन को कर के बताया कि मामला हाथ से निकल रहा है और संदिग्ध व्यक्ति ने असल जिंदगी में हिंसा की धमकी भी दी है। इस अनहोनी के बाद परिवार को उस दिन अपने घर से कहीं और चले जाना पड़ा, क्योंकि स्थिति गंभीर और डरावनी थी। वरुण ने इस घटना को मजेदार लेकिन डरावना बताया, क्योंकि उस दौर में बॉलीवुड के कई दिग्गज कलाकारों पर अंडरवर्ल्ड दबाव और धमकियां आम समस्या बनी हुई थी। वरुण के बयान से उस समय के फिल्म उद्योग की एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है, जब कलाकार, निर्देशक और निर्माता रोजाना ऐसे खतरे का सामना करते थे। वर्कफ्रंट की बात करें तो वरुण हाल ही में बॉक्स ऑफिस हिट फिल्म ‘बॉर्डर 2’ में नजर आए हैं। उनकी अगली फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ जल्द ही रिलीज होने वाली है। यह एक रोमांटिक कॉमेडी फिल्म है, जिसमें वरुण धवन, पूजा हेगड़े और मृणाल ठाकुर के साथ दिखेंगे। इस फिल्म को डेविड धवन डायरेक्ट कर रहे हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: ‘कभी पैर टूटते हैं, कभी पट्टी बांधते हैं’, बंगाल में अमित शाह ने ममता बनर्जी पर कसा तंज

त्वरित पढ़ें दिखाएँ एआई द्वारा उत्पन्न मुख्य बिंदु, न्यूज़ रूम द्वारा सत्यापित पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राज्य में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार (28 मार्च, 2026) को बंगाल की सीएम ममता बनर्जी पर तंज कसते हुए आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी ने हमेशा पीड़ित कार्ड का पॉलिटिक्स खेला है। कभी उनके पैर टूट जाते हैं, कभी वो आपके सिर पर पट्टियां बांध देते हैं, कभी बीमार हो जाते हैं और कभी चुनाव आयोग के आगे चलकर चुनाव आयोग को गालियां देते हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता ममता बनर्जी के पीड़ित कार्ड की राजनीति को बहुत अच्छी तरह से समझा गया है। चुनाव आयोग गठित संवैधानिक संस्था को यह बंगाल की संस्कृति को बढ़ावा नहीं देता है। कोलकाता में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोले अमित शाह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कोलकाता का दौरा किया. इस दौरान उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन कर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली लोकतांत्रिक कांग्रेस (टीएमसी) सरकार के 15 पूर्वी राज्यों के शासनकाल का एक अनोखा संस्करण जारी किया, जिसमें उन्होंने सरकार पर कानून-व्यवस्था, अतिक्रमण और राष्ट्रीय सुरक्षा की दोस्ती की कड़ी आलोचना की। कोलकाता में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पी. बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने कटाक्ष किया, उन्होंने कहा- ”ममता बनर्जी हमेशा विक्टिम कार्ड की पॉलिटिक्स फिल्में रखती हैं। कभी उनके पैर टूट जाते हैं, कभी उनके सिर पर पट्टी बंध जाती है, कभी वह बीमार पड़ जाती हैं…” pic.twitter.com/BbKuHNDDiQ – एबीपी न्यूज़ (@ABPNews) 28 मार्च 2026 अमित शाह ने राज्य के चुनाव में राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर आरोप लगाया कि बंगाल के रास्ते पूरे देश में घुसपैठ होने का खतरा है। उन्होंने दावा किया कि असम में पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार थी, जहां काफी हद तक अतिक्रमण पर रोक लगा दी गई थी, लेकिन अब पश्चिम बंगाल भी एक संदेश बन गया है। उन्होंने कहा, ‘असम में घुसपैठिए बंद हो गए हैं और अब घुसपैठियों के लिए सिर्फ बंगाल ही अल्ट्रासाउंड बंद है।’ सीमा सुरक्षा के लिए जमीन उपलब्ध कराने पर बोले अमित शाह शाह ने चेतावनी दी कि अवैध प्रवासी न केवल देश के भोजन पर अतिरिक्त लोड डालते हैं, बल्कि वह स्थानीय लोगों को खाना भी खिलाते हैं। उन्होंने ममता सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि भारत-बांग्लादेश सीमा के 600 किलोमीटर के हिस्से में जमीन के लिए जमीन उपलब्ध नहीं करायी गयी. उन्होंने वादा किया कि अगर बंगाल में भाजपा सत्ता में है तो सिर्फ 45 दिन के अंदर इस समस्या का समाधान हो जाएगा। यह भी पढ़ें: तेल पर राहत के संकेत, तेल कंपनी से कीमत न बढ़ाने की अपील, जानें पूरा मामला
कभी बारिश से बढ़ती ठंड, कभी तपती गर्मी, हर दिन बदलता मौसम बच्चों को कर रहा बीमार, डॉक्टर से जानें, कैसे करें बचाव

होमताजा खबरDelhi कभी बारिश से बढ़ी ठंड, कभी तपती गर्मी, हर दिन बदलता मौसम…बच्चे हो रहे बीमार! Last Updated:March 28, 2026, 15:28 IST Viral Infection In Changing Season: दिल्ली एनसीआर में आजकल आए दिन मौसम बदल रहा है, कभी ठंड हो रही है तो कभी गर्मी. ऐसे में बच्चों को वायरल इंफेक्शन होने के चांस बहुत बढ़ जाते हैं. उनके पास बड़ी संख्या में ऐसे बच्चे आ रहे हैं जो वायरल इंफेक्शन से पीड़ित हैं. ख़बरें फटाफट दिल्ली: इस वक्त दिल्ली-एनसीआर का मौसम तेजी से अपना रुख बदल रहा है. कभी मौसम अचानक से गर्म हो जाता है और कभी बारिश होने के बाद ठंडा हो जाता है. ऐसे में यह भी देखने को मिल रहा है कि इस मौसम के लगातार बदलने से दिल्ली-एनसीआर में नवजात शिशु और छोटे बच्चे लगातार बीमार हो रहे हैं. जिसकी पुष्टि दिल्ली-एनसीआर के चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. तरुण सिंह ने हमसे बातचीत करते हुए की. उन्होंने क्या बताया और क्या सावधानियां बरतने को कहा, आइए आगे आपको विस्तार से जानते हैं. वायरल होने के बाद लग रहे हैं दस्तडॉ. तरुण ने हमसे सबसे पहले बात करते हुए बताया कि इस वक्त जिस तरह से तेजी से दिल्ली-एनसीआर में मौसम बदल रहा है, उसके चलते नवजात शिशु और छोटे बच्चे लगातार बीमार हो रहे हैं और ओपीडी में आ रहे हैं. उनका कहना था कि ज्यादातर बच्चों में यह देखा जा रहा है कि मौसम बदलने की वजह से उन्हें वायरल इंफेक्शन हो रहा है, जिसके बाद उन्हें दस्त भी लग रहे हैं. बच्चे खाने लगते हैं ठंडी चीजेंउनका कहना था कि वायरल इंफेक्शन इसलिए हो रहा है क्योंकि दिन-प्रतिदिन दिल्ली-एनसीआर का मौसम कभी ठंडा तो कभी गर्म हो रहा है और इससे छोटे-मोटे वायरल इंफेक्शन बच्चों को हो रहे हैं. इस वक्त दस्त भी खासकर बच्चों को लग रहे हैं और ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि जैसे ही मौसम अचानक ठंडे से गर्म होता है, तो बच्चे ठंडा पानी पीना शुरू कर देते हैं या कुछ ऐसी चीजें खाना शुरू कर देते हैं जिससे उन्हें लगता है कि उन्हें ठंडक मिलेगी. लेकिन फिर अचानक मौसम वापस से ठंडा होने के बाद वही चीज उनके ऊपर ऐसा प्रभाव डाल रही है कि उनका पेट खराब हो रहा है और उन्हें दस्त लग रहे हैं. डॉ. तरुण का यह भी कहना था कि कई बच्चों को दस्त के साथ खून भी आ रहा है. क्या सावधानी बरतना है जरूरी?एक्सपर्ट ने बताया कि इस समय माता-पिता को अपने बच्चों को कुछ भी ठंडा नहीं खाने देना चाहिए, क्योंकि मौसम तेजी से बदल रहा है. इसलिए कोई भी ठंडी चीज उनके बच्चों के शरीर पर किस तरह का प्रभाव डालेगी, इसका पता नहीं चलता है. इसलिए ठंडी चीजों से अपने बच्चों को दूर रखें. वहीं उन्होंने यह भी कहा कि नवजात शिशु इस समय ठंड से ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं. उनका कहना था कि अचानक गर्म मौसम होने की वजह से माता-पिता नवजात शिशुओं के कपड़े उतार देते हैं, ताकि उन्हें ज्यादा गर्मी न लगे. लेकिन नवजात शिशु अपने शरीर का तापमान अच्छी तरह से नियंत्रित नहीं कर पाते. केमिस्ट से दवा लेकर न खिलाएंइसलिए जैसे ही माता-पिता उनके कपड़े उतारते हैं, तो उन्हें थोड़े से ठंडे मौसम से भी ठंड लग जाती है और वे बीमार पड़ रहे हैं. आगे उन्होंने यह भी कहा कि इस वक्त बच्चों को जितना हो सके उतना गुनगुना पानी पिलाएं, ताकि बच्चे किसी भी तरह के वायरल इंफेक्शन और पेट के इंफेक्शन से दूर रहें. अगर कोई बच्चा ज्यादा बीमार होता है, तो उसके माता-पिता उसे केमिस्ट से दवा लेकर न खिलाएं, बल्कि उसे स्पेशलिस्ट डॉक्टर के पास लेकर जाएं, ताकि उसका अच्छे से इलाज हो सके. About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें First Published : March 28, 2026, 15:28 IST
अनुराग डोभाल और रितिका चौहान बने पेरेंट्स:राम नवमी के शुभ अवसर पर कपल ने अपने पहले बच्चे की पहली झलक सोशल मीडिया पर साझा की

यूट्यूबर अनुराग डोभाल उर्फ UK07 राइडर और उनकी पत्नी रितिका चौहान के घर खुशियों ने दस्तक दी है। राम नवमी के पावन मौके पर कपल ने अपने पहले बच्चे का स्वागत किया। रितिका ने सोशल मीडिया पर बच्चे की पहली झलक शेयर कर यह खुशखबरी दी। यूट्यूबर और ‘बिग बॉस’ फेम अनुराग डोभाल पिता बन गए हैं। उनकी पत्नी रितिका चौहान ने 27 मार्च 2026 को राम नवमी के शुभ अवसर पर अपने पहले बच्चे को जन्म दिया। इस खास मौके की जानकारी रितिका ने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए दी, जहां उन्होंने बच्चे के नन्हे पैरों की तस्वीर शेयर की। रितिका ने पोस्ट में लिखा कि “राम नवमी के पावन दिन भगवान ने हमें हमारे सबसे अनमोल तोहफे से नवाजा है।” इस पोस्ट के सामने आते ही फैंस और सोशल मीडिया यूजर्स कपल को लगातार बधाइयां दे रहे हैं। हालांकि, अभी तक यह खुलासा नहीं किया गया है कि उनके घर बेटा हुआ है या बेटी। बता दें कि अनुराग डोभाल ने अभी तक पिता बनने को लेकर कोई आधिकारिक पोस्ट शेयर नहीं किया है, लेकिन रितिका की इस पोस्ट ने फैंस के बीच उत्साह बढ़ा दिया है। शादी के करीब एक साल के भीतर ही दोनों पेरेंट्स बन गए हैं। अनुराग और रितिका ने अप्रैल 2025 में शादी की थी। हाल के दिनों में अनुराग डोभाल अपनी निजी जिंदगी को लेकर भी चर्चा में रहे हैं। उन्होंने परिवार पर मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए थे और एक लाइव वीडियो के दौरान गंभीर कदम उठाने की कोशिश भी की थी, जिसके बाद उनका एक्सीडेंट हो गया था। फिलहाल वे ठीक हैं। इसी बीच इस खुशखबरी ने उनके जीवन में एक नया मोड़ ला दिया है। रितिका पहले भी सोशल मीडिया पर अपने रिश्ते और हालात को लेकर खुलकर बात कर चुकी हैं। अब बच्चे के जन्म के साथ कपल की जिंदगी में एक नई शुरुआत मानी जा रही है। फिलहाल, फैंस को बच्चे के नाम और जेंडर का इंतजार है, लेकिन कपल ने इस खास पल को निजी रखते हुए सिर्फ एक झलक ही साझा की है।
Older iPhones Like iPhone 15 & 16 to Get Costlier by Up to ₹5,000 in India

Hindi News Business Apple Removes DG Support: Older IPhones Like IPhone 15 & 16 To Get Costlier By Up To ₹5,000 In India नई दिल्ली3 घंटे पहले कॉपी लिंक भारत में अब पुराने आईफोन खरीदने पर ग्राहकों को ज्यादा पैसे चुकाने पड़ सकते हैं। एपल ने आईफोन 15 और 16 जैसे पुराने मॉडल्स पर रिटेलर्स को डिमांड जनरेशन (DG) सपोर्ट यानी इंसेंटिव देना बंद करने का फैसला किया, जिससे कीमतें करीब 5,000 रुपए तक बढ़ सकती हैं। मनीकंट्रोल के मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह फैसला इसी हफ्ते लागू हो सकता है। हाल ही में कैशबैक ऑफर्स 6,000 से घटाकर 1,000 रुपए किए गए थे, जिससे आईफोन 17 सीरीज महंगी हुई और अब पुराने मॉडल्स की कीमतें भी बढ़ जाएंगी। क्या होता है डिमांड जनरेशन सपोर्ट? मार्केट सोर्सेज के मुताबिक, डिमांड जनरेशन यानी DG सपोर्ट एक इंसेंटिव है जो ब्रांड्स रिटेलर्स और चैनल पार्टनर्स को देते हैं, जिससे वे ग्राहकों को डिस्काउंट देकर डिमांड बढ़ाते हैं। MRP बदले बिना भी इस सपोर्ट से फोन सस्ते मिलते थे। अब सपोर्ट बंद होने से रिटेलर्स पहले जैसा डिस्काउंट नहीं दे पाएंगे और ग्राहकों का फाइनल बिल बढ़ेगा। आज सस्ते में खरीदारी का आखिरी मौका रिटेलर्स के अनुसार, पुराने रेट पर आईफोन खरीदने का आज आखिरी दिन हो सकता है। सपोर्ट हटने के बाद ग्राहकों को उसी फोन के लिए करीब 5,000 रुपए ज्यादा देने होंगे। यह उन लोगों के लिए मुश्किल होगा जो नए लॉन्च के बाद कीमत गिरने का इंतजार कर रहे थे। आईफोन 17 सीरीज के दाम पर असर नहीं सूत्रों के मुताबिक, DG सपोर्ट हटाना केवल पुराने मॉडल्स के लिए है और आईफोन 17 लाइनअप की कीमतों में कोई बदलाव नहीं होगा। जानकारों के अनुसार, एपल ने अपनी फ्लैगशिप सीरीज की MRP नहीं बढ़ाई, जबकि अन्य कंपनियों ने कीमतें बढ़ाई हैं। सैमसंग-वीवो समेत अन्य एंड्रॉइड फोन भी महंगे एपल ही नहीं सैमसंग, ओप्पो, वीवो, रियलमी, शाओमी, मोटोरोला और नथिंग जैसे ब्रांड्स ने नवंबर से कीमतें बढ़ाई हैं। मार्च में भी कई मॉडल्स महंगे हुए हैं। कंपनियों के अनुसार, मेमोरी और स्टोरेज महंगे होने से इनपुट कॉस्ट बढ़ी है। मुनाफा बनाए रखने के लिए कई कंपनियों ने सेल्स टारगेट में 20% तक कटौती की है। फोन की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं? कंपोनेंट कॉस्ट: चिपसेट और स्टोरेज की कीमतों में बढ़ोतरी। इंसेंटिव कटौती: एपल ने रिटेल डिस्काउंट फंड्स वापस लिए। करेंसी वैल्यू: डॉलर के मुकाबले रुपए की कमजोरी से लागत बढ़ी। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, भले ही कीमतें बढ़ रही हैं, लेकिन भारत में ज्यादातर आईफोन EMI पर खरीदे जाते हैं। ₹5,000 की बढ़ोतरी से मंथली EMI पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा, इसलिए मांग में भारी गिरावट की आशंका कम है। 2026 में स्मार्टफोन मार्केट की चुनौतियां इंटरनेशनल डेटा कॉरपोरेशन (IDC) के अनुसार, 2026 भारतीय स्मार्टफोन सेक्टर के लिए उतार-चढ़ाव भरा रहेगा। सप्लाई चेन दिक्कतें, रुपए की अस्थिरता और बढ़ती कंपोनेंट कीमतें दबाव बढ़ाएंगी। अनुमान है कि इस साल स्मार्टफोन का टोटल शिपमेंट 12-15% घट सकता है, जबकि एपल पोर्टफोलियो में 5-6% ग्रोथ की उम्मीद है। ये खबर भी पढ़ें… रेडमी नोट 15 प्रो रिव्यू: ₹27,000 में 200MP कैमरा और IP69K रेटिंग वाली सॉलिड बॉडी, 6500mAh बैटरी के साथ रिवर्स चार्जिंग रेडमी नोट 15 प्रो सीरीज मार्केट में आ चुकी है। आज हम बात करेंगे रेडमी नोट 15 प्रो के बारे में और देखेंगे कि क्या यह अपनी कीमत को सही साबित करता है। ये फोन मिड-रेंज बजट में आता है। फोन 8GB रैम के साथ दो वैरिएंट में आया है। इसे 128GB स्टोरेज के साथ ₹29,999 और 256GB स्टोरेज के साथ ₹31,999 में खरीदा जा सकता है। कंपनी फोन पर 3000 रुपए का कैशबैक भी दे रही है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
मेहमान चाटते रह जाएंगे उंगलियां… घर पर ऐसे रेस्तरां जैसे क्रीमी मशरूम, सीक्रेट रेसिपी से आएं होटल वाला स्वाद

मशरूम रेसिपी: शाकाहारी भोजन के शौकीनों के बीच सबसे पसंदीदा शख्सियत उभरकर सामने आ रही है। अक्सर लोग शिकायत करते हैं कि घर पर चंदन की सब्जी में वो होटल वाला रेस्तरां है और स्वाद नहीं मिलता। लेकिन अब आपको चिंता होने की जरूरत नहीं है। काजू के पेस्ट वाली इस खास ‘क्रीमी मशरूम’ रेसिपी के जरिए आप मिनटों में रेस्टोरेंट में जैसी डिश तैयार कर सकते हैं। बेहतरीन स्वाद के लिए होटल बटन बटन का चुनाव करें। सबसे पहले मशरूम को गुनगुने पानी से अच्छी तरह धो लें ताकि उसकी सारी गंदगी निकल जाए। इसके बाद उन्हें दो विचारधाराओं में कैट लें। एक पोटली में थोड़ा सा तेल गरम कर लीजिये और एक पोटली में थोड़ा सा तेल गरम कर लीजिये. इस बादाम का पानी सुख जाता है और इसकी सब्जी का स्वाद कई गुना बढ़ जाता है। फ्राई करने के बाद एक अलग प्लेट में हटा दिया गया। मशरूम की इस डिश की जान है इसकी ग्रेवी। इसके लिए आप प्याज और टमाटरों को प्रभाव भूनकर ठंडा कर लें और मिक्सी में मोनो पीस लें। साथ ही अदरक, लहसुन और जीरे का एक अलग पेस्ट तैयार करने की जगह। तड़का: आटे में तेल गरम कर तेज पत्ता और जीरा डाल दीजिये. मसाला भूनना: प्याज़-टमाटर का पेस्ट स्टॉक तब तक जब तक वह तेल न छोड़ दे। इसके बाद अदरक-लहसुन का पेस्ट और चिप्स के टुकड़े (हल्दी, धनिया, लाल मिर्च और नमक) भी शामिल हैं। गुप्त सामग्री: जब मसाला भून जाए, तो इसमें काजू का पेस्ट डालें। यही वह चीज है जो आपकी ग्रेवी को क्रीमी और रिच टेक्स्टचर देवी जैसा रेस्टोरेंट बनाती है। अब कच्चे माल में तले हुए सीमेंट और सीमेंट के बर्तन तैयार किए जा रहे हैं। स्वाद में क्रंच लाने के लिए अंत में फ़्लोरिडा प्याज़ और काली मिर्च स्टॉक्स। यह सिर्फ सब्जियों को देखने में सुंदर रचनाएं नहीं है बल्कि स्वाद को भी बढ़ावा देती है। आखिरी में ऊपर से थोड़ा गर्म मसाला और इलेक्ट्रिक कटा हरा धनिया सजावट। आपका हॉट-गर्म होटल स्टाइल मशरूम बनकर तैयार है। इसे आप नान, लच्छा परांठा या जीरा राइस के साथ सर्व कर सकते हैं। (टैग्सटूट्रांसलेट)रेस्तरां स्टाइल मशरूम रेसिपी(टी)क्रीमी मशरूम ग्रेवी(टी)मशरूम कैसे पकाएं(टी)इंडियन वेज मेन कोर्स(टी)आसान मशरूम सब्ज़
हाईकोर्ट ने पूछा- मस्जिद सील करने का कानूनी अधिकार है:यूपी सरकार से मांगा जवाब, सुनवाई का अवसर दिए बिना कैसे सील किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूजा स्थल, मस्जिद के मामले पर एक बार फिर यूपी सरकार से जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने ने उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा है कि क्या वह बिना किसी पूर्व सूचना या संपत्ति मालिकों को सुनवाई का अवसर दिए बिना किसी पूजा स्थल और मस्जिद को सील कर सकती है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 18 मार्च सुनवाई के बाद आदेश जारी किया। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने राज्य सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि वह किस कानूनी अधिकार के तहत किसी पूजा स्थल को सील कर सकती है। कोर्ट ने कहा सील करने का कोई कानूनी अधिकार है?” न्यायालय ने राज्य से पूछा, “क्या बिना पूर्व सूचना जारी किए या याचिकाकर्ता को सुनवाई का अवसर दिए बिना निर्माणाधीन पूजा स्थल को सील करने का कोई कानूनी अधिकार है?” साथ ही हाईकोर्ट ने यह भी पूछा है कि क्या पूजा स्थल परिसर के भीतर निर्माण आदि करने के मामले में मालिकों से किसी पूर्व अनुमति की आवश्यकता होती है। अहसान अली की याचिका पर आदेश मामला मुजफ्फरनगर से जुड़ा है। जिले में एक मस्जिद को सील किए जाने के खिलाफ अहसान अली ने इलाहबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। इसी मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने आदेश जारी किया। याचिकाकर्ता ने कोर्ट में कहा कि वह मुजफ्फरनगर के एक गांव में स्थित एक भूखंड के वैध स्वामी हैं। उन्होंने यह भूमि प्रवीण कुमार जैन से 2019 में विधिवत पंजीकृत विक्रय विलेख के माध्यम से खरीदी थी। हाल ही में अधिकारियों ने भूमि पर निर्मित मस्जिद को सील कर दिया, क्योंकि मालिकों ने उसके चारों ओर सीमा बनाना शुरू कर दिया था। यह कार्रवाई इस आधार पर की गई कि निर्माण अवैध है और सक्षम प्राधिकारी से कोई पूर्व अनुमति प्राप्त नहीं की गई थी। वकील बोले सुनवाई का अवसर नहीं दिया याचिकाकर्ता के वकील अधिवक्ता जगदीश प्रसाद मिश्रा ने कहा कि परिसर को सील करने से पहले उन्हें कोई नोटिस या सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया था। न्यायालय ने राज्य से इस याचिका पर जवाब देने और उस कानून के बारे में बताने को कहा जिसके तहत कार्रवाई की गई थी। न्यायालय ने आदेश दिया, “राज्य द्वारा हलफनामे सहित विशिष्ट निर्देश प्राप्त किए जाएं और अगली सुनवाई की तारीख पर इस न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए जाएं।” हाल ही में उच्च न्यायालय में हुए रोस्टर परिवर्तन के बाद, यह मामला 24 मार्च को न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया था। हालांकि, उस दिन मामले की सुनवाई नहीं हो सकी।
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Hindi News Sports Mental Strength Helped Her Win The Players Championship, American Golfer Cameron Young, Cameron Young द न्यू यॉर्क टाइम्स. न्यूयॉर्क4 घंटे पहले कॉपी लिंक ‘द प्लेयर्स चैम्पियनशिप’ जीतकर कैमरन यंग वर्ल्ड गोल्फ रैंकिंग में चौथे स्थान पर पहुंच गए हैं। गोल्फ की दुनिया में अक्सर प्रतिभा से ज्यादा मानसिक मजबूती मायने रखती है। इस बात को गोल्फर कैमरन यंग ने हाल ही में ‘द प्लेयर्स चैम्पियनशिप’ जीतकर सच साबित किया है। इस जीत से यंग वर्ल्ड गोल्फ रैंकिंग में चौथे स्थान पर पहुंच गए हैं। हालांकि यह सफलता उन्हें रातों-रात नहीं मिली। पीजीए टूर में अक्सर खिताब के करीब पहुंचकर पिछड़ने वाले यंग के लिए यह एक बड़े मानसिक बदलाव का नतीजा है। टूर्नामेंट शुरू होने से पहले यंग के मन में विचार आया कि क्या होगा अगर मैं यह खिताब जीत लूं, लेकिन उन्होंने अगले ही पल यह विचार दिमाग से निकाल दिया। उन्हें एहसास हुआ कि यदि पूरा ध्यान सिर्फ ट्रॉफी जीतने पर रहेगा, तो वे मंजिल तक नहीं पहुंच पाएंगे। पिछले एक साल से यंग स्पोर्ट्स साइकोलॉजिस्ट डॉ. ब्रेट मैककेबे के साथ मानसिक मजबूती पर काम कर रहे हैं। यंग बताते हैं कि पहले बड़े टूर्नामेंट के दौरान वे नकारात्मक सोचने लगते थे। उनका ध्यान नतीजों पर टिका होता था और वे हमेशा घबराए रहते थे कि उन्हें टॉप-5 में जगह बनानी है। करियर के शुरुआती दौर में वे लीडरबोर्ड के टॉप पर जगह बना लेते थे, लेकिन ऐन मौके पर चूक जाते थे। इसकी वजह प्रतिभा की कमी नहीं, बल्कि भटकता हुआ दिमाग था। जब परिस्थितियां योजना के मुताबिक नहीं होती थीं, तो वे खुद पर नियंत्रण खो बैठते थे। डॉ. मैककेबे के साथ काम करके यंग ने नतीजों के बजाय प्रक्रिया और छोटे कदमों पर ध्यान लगाना सीख लिया है। इसका सबसे बड़ा असर पिछले साल क्वेल हॉलो क्लब की पीजीए चैम्पियनशिप में दिखा। उस समय यंग बीमार थे और 30वें नंबर पर संघर्ष कर रहे थे। थकान से गलतियां हो रही थीं। उन्हें वापसी करना नामुमकिन लग रहा था। तभी उन्हें मनोवैज्ञानिक की बात याद आई कि परिस्थितियां कैसी भी हों, अपना शॉट खेलना ही है। उन्होंने खुद को समझाया कि खराब स्कोर या मूड उनके शॉट को प्रभावित नहीं कर सकते। हर शॉट एक मौका है। इसी सकारात्मक सोच ने उन्हें राइडर कप में भी शानदार प्रदर्शन करने में मदद की। द प्लेयर्स चैम्पियनशिप आते-आते यंग का मूल मंत्र बन गया था- ‘वर्तमान में जियो’। अगर दिमाग में कोई पुरानी गलती आती, तो वे खुद को याद दिलाते कि वह गलती तीन होल पीछे छूट चुकी है। यंग का मानना है कि सफलता का असली रहस्य परिणामों के पीछे भागना नहीं है, बल्कि अपनी प्रक्रिया को सही रखना है। उनका यह मानसिक हथियार आगे भी उन्हें कई और बड़ी जीत दिलाने के लिए पूरी तरह तैयार है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔









