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बच्ची से रेप-हत्या करने वाले को फांसी की सजा:प्रयागराज में जज बोले- ये झकझोरने वाला अपराध, दोषी सजा-ए-मौत के काबिल

बच्ची से रेप-हत्या करने वाले को फांसी की सजा:प्रयागराज में जज बोले- ये झकझोरने वाला अपराध, दोषी सजा-ए-मौत के काबिल

प्रयागराज में 8 साल की बच्ची से रेप के बाद हत्या करने वाले को सोमवार को फांसी की सजा सुनाई गई। कोर्ट ने उस पर 25 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। यह फैसला पॉक्सो कोर्ट के जज विनोद कुमार चौरसिया ने सुनाया। जज ने कहा- मासूम के साथ हुई बर्बरता समाज के लिए खतरा है। मामला अत्यंत क्रूर, अमानवीय और समाज को झकझोरने वाला है। आरोपी के सुधार की संभावना शून्य है। लिहाजा दोषी सजा-ए-मौत के काबिल है। कोर्ट ने वारदात के 18 महीने के भीतर फैसला सुनाया है। पांच दिन पहले आरोपी को दोषी करार दिया गया था। मामला सोरांव थाना क्षेत्र का है। 3 अक्टूबर 2024 को 26 साल के आरोपी मुकेश पटेल ने दुर्गा पूजा देखकर लौट रही बच्ची का अपहरण किया था। बाद में उसकी हत्या कर दी थी। घटना के 12 दिन बाद पुलिस ने आरोपी को मुठभेड़ में गिरफ्तार किया था। जानिए पूरा मामला लोक अभियोजक (सरकारी वकील) विनय कुमार त्रिपाठी ने बताया कि 3 अक्टूबर 2024 को बच्ची शिवगढ़ चौराहे के पास दुर्गा पूजा पंडाल में गई थी। शाम 6:30 बजे वह घर लौट रही थी, तभी लापता हो गई। अगले दिन 4 अक्टूबर को उसका शव गांव के किनारे धान के खेत में मिला। शव पर गंभीर चोटों के निशान थे। हाथ-पैर और दांत टूटे हुए थे। मुंह से खून और झाग निकल रहा था और निजी अंग बुरी तरह जख्मी थे। बच्ची की मां की शिकायत पर अज्ञात आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। पोस्टमार्टम में रेप के बाद हत्या की पुष्टि हुई। पुलिस जांच में सामने आया कि घटना वाली शाम आरोपी मुकेश बच्ची को साइकिल पर बैठाकर ले जाता दिखाई दिया था। 12 दिन बाद एनकाउंटर में लगी थी गोली सरकारी वकील ने बताया कि उस वक्त पुलिस का दावा था कि आरोपी ने पहले मासूम से दुष्कर्म किया और फिर पहचान छिपाने के लिए उसके चेहरे पर ताबड़तोड़ वार किए। उसके दांत तोड़ दिए, चेहरे पर चोट पहुंचाई और दोनों हाथ भी तोड़ दिए। 16 अक्टूबर को पुलिस ने मुठभेड़ में आरोपी को गिरफ्तार किया था। गंगानगर क्षेत्र में पुलिस ने उसे घेरा तो वह फायरिंग कर भागने लगा। जवाबी फायरिंग में उसके पैर में गोली लगी थी। दिसंबर 2024 में दाखिल हुई चार्जशीट सरकारी वकील ने बताया कि जांच के बाद पुलिस ने 10 दिसंबर 2024 को चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल की थी। 21 दिसंबर 2024 को कोर्ट ने आरोप तय किए। 26 मार्च 2026 को आरोपी को दोषी करार दिया गया था। प्रयागराज के जिला एवं सत्र न्यायालय में 49 वर्षों में यह फांसी की 10वीं सजा है। —————————– अब भास्कर के सबसे बड़े सर्वे में हिस्सा लीजिए… यूपी में विधायकों के 4 साल पूरे हो चुके हैं। क्या आपके मौजूदा विधायक को 2027 के विधानसभा चुनाव में टिकट मिलना चाहिए? भास्कर सर्वे में हिस्सा लेकर बताइए…

Health Tips : ऐसा पेड़ जिसके कांटों में सुकून, त्वचा से लेकर अस्थमा तक हर रोग का इलाज

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Last Updated:March 30, 2026, 23:57 IST Semal tree benefits : अक्सर लोग इस पेड़ को बेकार समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन इसके अंदर सेहत के कई खजाने छिपे हैं. आम बोलचाल में इसे सेमल कहते हैं. ये दिखने में कांटेदार, लेकिन गुणों में दमदार है. इसके फूल, छाल, जड़ और गोंद तक का इस्तेमाल कई रोगों के इलाज में होता है. लोकल 18 से बलिया की आयुर्वेदाचार्य मेघा गोयल बताती हैं कि त्वचा की समस्याओं से परेशान लोगों के लिए शाल्मली वरदान की तरह काम करता है. इसकी छाल और पत्तों का लेप घावों को जल्दी भरता है. बलिया. ये पेड़ दिखने में साधारण और अनुपयोगी लगता है. अक्सर लोग इसे बेकार समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन इसके अंदर सेहत के अनगिनत खजाने छिपे हैं. इस पेड़ को शाल्मली के नाम से जाना जाता है, जिसे आम बोलचाल में सेमल कहते हैं. दिखने में कांटेदार, लेकिन गुणों में दमदार है. यह पेड़ आयुर्वेद के हिसाब से किसी नेचुरल टॉनिक से कम नहीं है. इसके फूल, छाल, जड़ और गोंद तक का इस्तेमाल कई बीमारियों के इलाज में किया जाता है. दूध के साथ रामबाण आयुर्वेदाचार्य असिस्टेंट प्रोफेसर वैद्य मेघा गोयल कहती हैं कि वह बलिया के बांसडीह मझौली स्थित शांति आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में सालों से कार्यरत हैं. मेघा कहती हैं कि त्वचा की समस्याओं से परेशान लोगों के लिए शाल्मली वरदान की तरह काम करता है. इसके कांटों को दूध के साथ पीसकर लगाने से पिंपल्स, झाइयां और दाग-धब्बे कम होते हैं, जिससे त्वचा में निखार आता है. शाल्मली के छाल और पत्तों का लेप घावों को जल्दी भरने और सूजन को कम करने में भी मददगार है. पुरुषों की ताकत का सीक्रेट पुरुषों के स्वास्थ्य के लिहाज से भी यह बेहद लाभकारी है. इसकी जड़ और छाल का चूर्ण गुणों से भरपूर है, जो शरीर की ताकत बढ़ाने और शुक्राणुओं की गुणवत्ता सुधारने में सहायता करता है. शाल्मली का गोंद, जिसे मोचरस भी कहा जाता है, यह दस्त, पेचिश और रक्तस्राव जैसी समस्याओं में काफी असरदार है. महिलाओं में अत्यधिक रक्तस्राव की स्थिति में भी इसका उपयोग काफी लाभकारी और गुणकारी होता है. न करें ये गलती इसमें कुछ खास गुण होते हैं, जो ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद करते हैं और खांसी-अस्थमा जैसी श्वसन समस्याओं में भी राहत देते हैं. सेमल के फूल लिवर और पीलिया के उपचार में भी मददगार हैं. हालांकि, इसके अनेक फायदे जरूर हैं, बावजूद इसका उपयोग सावधानी से करना चाहिए. किसी भी तरह के औषधीय प्रयोग से पहले आयुर्वेदिक विशेषज्ञ की सलाह लेना ही बेहतर होता है, ताकि इसके लाभ सुरक्षित और सही तरीके से मिल सकें. बगैर आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह लिए इसका सेवन हानिकारक हो सकता है. About the Author Priyanshu Gupta Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें Location : Ballia,Uttar Pradesh First Published : March 30, 2026, 23:57 IST

केला खाकर तुरंत पानी पीते हैं आप? जान लें ये चौंकाने वाला सच, वरना…

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Last Updated:March 30, 2026, 23:44 IST केला एक बेहद पौष्टिक और एनर्जी देने वाला फल माना जाता है, जो शरीर को तुरंत ताकत प्रदान करता है. यह फाइबर, विटामिन और प्राकृतिक शुगर का अच्छा स्रोत है. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इसे सही तरीके और सही आदतों के साथ खाया जाए, तो इसके फायदे और भी बढ़ सकते हैं और पाचन से जुड़ी समस्याओं से भी बचा जा सकता है. कई घरों में यह सलाह दी जाती है कि केले खाने के तुरंत बाद पानी नहीं पीना चाहिए. इसे अक्सर लोग अंधविश्वास मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन आयुर्वेद और कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे कुछ कारण हो सकते हैं. माना जाता है कि केला खाने के बाद तुरंत पानी पीने से पाचन प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है और पेट में भारीपन या असहजता महसूस हो सकती है. इसलिए बेहतर पाचन के लिए इस आदत से बचने की सलाह दी जाती है. गर्म मौसम में या जब अचानक भूख लगती है, तो लोग अक्सर जल्दी से केला खा लेते हैं और उसके तुरंत बाद पानी पी लेते हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह देखने में भले ही सामान्य आदत लगे, लेकिन यह पाचन प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है. इससे पेट में भारीपन, गैस या असहजता जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं, इसलिए इसे लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है. केले को आमतौर पर “ठंडक देने वाला” फल माना जाता है. जब हम केला खाते हैं, तो पेट में मौजूद पाचक रस उसे पचाने का काम शुरू कर देते हैं. लेकिन अगर इसके तुरंत बाद पानी पी लिया जाए, तो ये पाचक रस थोड़े पतले हो सकते हैं, जिससे पाचन प्रक्रिया धीमी हो सकती है. कुछ मामलों में इससे पेट में भारीपन, गैस या अपच जैसी परेशानी भी महसूस हो सकती है, खासकर जब खाना ठीक से पच न पाए. Add News18 as Preferred Source on Google आयुर्वेद के अनुसार केला शरीर में कफ दोष को बढ़ा सकता है. अगर केला खाने के तुरंत बाद ठंडा पानी पी लिया जाए, तो शरीर का संतुलन बिगड़ सकता है. माना जाता है कि इससे कुछ लोगों में गले में खराश, खांसी या सर्दी-जुकाम जैसे लक्षण बढ़ सकते हैं, खासकर उन लोगों में जिनमें पहले से कफ की समस्या ज्यादा होती है. केले में फाइबर और प्राकृतिक शुगर भरपूर मात्रा में होती है. कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि केला खाने के तुरंत बाद पानी पीने से शरीर में शुगर जल्दी अवशोषित हो सकती है. इससे कुछ समय के लिए ब्लड शुगर लेवल में हल्की बढ़ोतरी हो सकती है, इसलिए इसे लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है. इसके अलावा केला खाने के तुरंत बाद पानी पीने से पेट के एसिड का संतुलन प्रभावित हो सकता है. इससे कुछ लोगों में पेट में भारीपन, गैस या असहजता जैसी समस्या हो सकती है. कई बार कुछ लोगों को मिचली या उल्टी जैसा महसूस भी हो सकता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञ आमतौर पर सलाह देते हैं कि फल खाने के बाद कम से कम 20 से 30 मिनट तक पानी नहीं पीना चाहिए. अगर किसी को बहुत ज्यादा प्यास लगे, तो बेहतर है कि केला खाने के तुरंत बाद पानी पीने की बजाय 10 से 15 मिनट पहले पानी पी लिया जाए. इससे पाचन बेहतर रहता है और पेट से जुड़ी परेशानियों का खतरा कम हो जाता है. (Disclaimer: यह खबर सामान्य जानकारी पर आधारित है.) First Published : March 30, 2026, 23:44 IST

घर पर पेडीक्योर: पेडीक्योर के रूप में अब घर पर, फटी एड़ियों और वाॅलॅजी वाॅर्क्स से बाहर, बस कुछ आसान स्टेप्स में

घर पर पेडीक्योर: पेडीक्योर के रूप में अब घर पर, फटी एड़ियों और वाॅलॅजी वाॅर्क्स से बाहर, बस कुछ आसान स्टेप्स में

घर पर पेडीक्योर: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अपने चेहरे का तो पूरा मकसद रखते हैं, लेकिन आदिवासियों की अनदेखी कर देते हैं। धूल-मिट्टी और धूल-मिट्टी के कारण धूल-मिट्टी और धूल-मिट्टी के छिलके दिखाई देते हैं। अक्सर लोग रिटेल रिटेलर महँगाई पेडीक्योर पर हजारों रुपये खर्च करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही निखार आप घर पर भी पा सकते हैं? आइए हम आपको बताते हैं डार्कनेस के बारे में कुछ आसान टिप्स। आप घर बैठे अपने विरोधियों को भव्य और चमकदार बना सकते हैं। पुराने नेल पेंट के वास्तुशिल्प और स्मारकों के वास्तुशिल्प सबसे पहले अपने स्मारक पर लगे पुराने नेल पेंट को रूमर की मदद से साफ़ करें। इसके बाद नेल अख्तर से नक्षत्र को अपनी पसंद के अनुसार और फाइलर से उन्हें सही आकार दें। याद रखें, रसायन शास्त्र को काटने से वे टूट सकते हैं, इसलिए यह काम पानी में पैर खरीदने से पहले ही करें। फ़ुट बाथ कोलेबम के रस से साफ़ करें एक टैब में प्रभाव गुनगुना पानी लें। इसमें लिटिल सा माइल्ड कील, एक ओरिएंटल सेंधा नमक और आधे का रस मिला हुआ होता है। यदि आपके पास कोई एसेंशियल तेल है, तो उसकी 2-3 बूंदें भी डाली जा सकती हैं। अब अपने यात्रियों को 15-20 मिनट के लिए इस पानी में डबकर रखें। यह थका हुआ त्वचा को दूर रखेगा और मृत त्वचा को पोषण देगा। इन्वेस्टमेंट करके सिक्न को डिज़ाइन सॉफ्ट जब त्वचा नैयर हो जाए, तो एक फुट के ब्रश या पुराने टूथब्रश की मदद से ट्रस्ट के आसपास की गंदगी साफ करें। अब पुमिस स्टोन का उपयोग करके अभिनेताओं की सख्ती और फटी त्वचा को धीरे-धीरे-धीरे-धीरे खींचते हैं। दांतों की ऊपरी त्वचा के लिए आप घर पर लिपस्टिक का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह डेड स्कीनल सेल्स को आपके स्टिलिट्स को कोमल बनाता है। फ़ुट मास्क से टैनिंग हटाएँ सांख्यिकी के बाद आतंकवादियों को समुद्री पानी से धो लें। अब आप मुल्तानी मिट्टी या बेसन और हल्दी का पैक पा सकते हैं। इसे 10 मिनट तक अनइंस्टॉल करें और फिर धो लें। यह स्टैप एज़ट की टैनिंग हटाने में बहुत इज़ाजत है। नौकरी और नौकरी जरूरी है पेडीक्योर का सबसे अहम हिस्सा है भूखन। आदिवासियों को तौलिए से सुखाकर अच्छी क्वालिटी की फुट क्रीम या नारियल तेल से 5-10 मिनट तक मालिश करें। मसाज से रक्त संचार बढ़ जाता है और एक दृष्टि प्रतिबिंब की समस्या जड़ से ख़त्म हो जाती है। नेल पेंट और फिनिशिंग से पूरी तरह से पेडिक्योर अंतिम रूप से आप अपने पसंदीदा रंग का नेल पेंट विवरण देखें। सबसे पहले बेस कोट आउटफिट, फिर नेल कलर और फाइनल में टॉप कोट। इससे पहले बर्बादी में चमक बनी रही और लंबे समय तक टिकेगा तक पेंट किया गया। ये भी पढ़ें –हनुमान जयंती 2026 चालीसा: हनुमान जयंती के दिन जरूर करें इस चालीसा का पाठ, जीवन में आ रही बाधाएं दूर (टैग्सटूट्रांसलेट)सौंदर्य उपचार(टी)घरेलू उपचार(टी)जीवनशैली(टी)त्वचा की देखभाल(टी)घर पर पेडीक्योर(टी)घरेलू उपचार(टी)पेडीक्योर घर पर चरण दर चरण पेडीक्योर(टी)फटी एड़ियां पेडीक्योर(टी)गंदे नाखून हटाने के टिप्स

गंजबासौदा में तेज हवा के साथ बूंदाबांदी:गेहूं कटाई के बीच बदला मौमस, किसान बोले- 70 प्रतिशत फसल अभी खेतों में खड़ी

गंजबासौदा में तेज हवा के साथ बूंदाबांदी:गेहूं कटाई के बीच बदला मौमस, किसान बोले- 70 प्रतिशत फसल अभी खेतों में खड़ी

गंजबासौदा में सोमवार रात करीब 8 बजे मौसम बदला। तेज हवा के साथ शुरू हुई हल्की बूंदाबांदी और आसमान में कड़कती बिजली ने किसानों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। हालांकि बारिश कुछ देर बाद रुक गई, लेकिन छाए हुए काले बादलों ने फसल बर्बादी का डर पैदा कर दिया है। किसान अमन शर्मा ने बताया कि इस समय गेहूं की कटाई का काम जोर-शोर से चल रहा है, लेकिन अब तक केवल 30 प्रतिशत काम ही पूरा हो पाया है। करीब 70 प्रतिशत फसल अभी भी खेतों में खड़ी है या कटने के इंतजार में है। ऐसे में तेज हवा से फसल गिरने और बारिश से दाने गीले होने का खतरा मंडरा रहा है। किसानों की दोहरी मुसीबत किसान हेमराज कुशवाहा के मुताबिक, सुबह तक मौसम बिल्कुल साफ था और किसी को अंदेशा नहीं था कि शाम को पानी गिरेगा। अब अचानक बदले मिजाज से किसान जल्द से जल्द कटाई निपटाने की जुगत में लग गए हैं। किसानों को डर है कि अगर गेहूं गीला हुआ तो उसका रंग खराब हो जाएगा और मंडी में सही दाम नहीं मिलेंगे। खेत गीले होने पर मशीन (हार्वेस्टर) चलाना मुश्किल हो जाएगा, जिससे काम हफ्तों पिछड़ सकता है। फिलहाल, तेज हवा और बादलों की लुकाछिपी से गंजबासौदा के किसान चिंतित है। सभी की नजरें अब आसमान पर टिकी हैं कि कहीं झमाझम बारिश उनकी साल भर की मेहनत पर पानी न फेर दे।

गर्मी में पेट की हर समस्या का जड़ से इलाज! दही में भूनकर मिला दें ये चीज, चेहरे पर आ जाएगा ग्लो

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Last Updated:March 30, 2026, 22:55 IST गर्मियों का मौसम आते ही पेट से जुड़ी परेशानियां तेजी से बढ़ जाती हैं. भूख कम लगना, गैस, अपच, पेट फूलना और लगातार थकान जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं. ऐसे में लोग दवाइयों या ठंडे पेय पर निर्भर हो जाते हैं, लेकिन एक आसान और देसी नुस्खा इन सभी परेशानियों में राहत दे सकता है. दही और भुने जीरे का यह साधारण सा कॉम्बिनेशन पाचन तंत्र को मजबूत करने के साथ शरीर को ठंडक और एनर्जी देने में मदद करता है. आयुर्वेद में भी इसे पेट के लिए बेहद फायदेमंद माना गया है. ख़बरें फटाफट वजन और इम्युनिटी के लिए भी फायदेमंद. गर्मी के मौसम में शरीर पर कई तरह के असर देखने को मिलते हैं. इस दौरान अक्सर लोगों को भूख कम लगने लगती है, पेट में भारीपन महसूस होता है, गैस और अपच जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं और शरीर में कमजोरी भी आने लगती है. ऐसे में पाचन को दुरुस्त रखने और शरीर को ठंडक देने वाले घरेलू उपाय काफी मददगार साबित होते हैं. इन्हीं में से एक आसान और असरदार उपाय है दही के साथ भुना हुआ जीरा खाना. यह साधारण सा मिश्रण आयुर्वेद में पाचन सुधारने और पेट की समस्याओं से राहत देने के लिए बहुत उपयोगी माना गया है. दही एक प्राकृतिक प्रोबायोटिक है जो आंतों के लिए बहुत फायदेमंद होता है. यह शरीर को ठंडक देता है और अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाने में मदद करता है. वहीं भुना हुआ जीरा पाचन शक्ति को मजबूत करता है और गैस, एसिडिटी तथा पेट फूलने जैसी समस्याओं को कम करने में सहायता करता है. जब इन दोनों को साथ में लिया जाता है, तो यह कॉम्बिनेशन पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है और गर्मी से होने वाली पेट की परेशानियों को काफी हद तक कम कर देता है. गर्मी में क्यों फायदेमंद है यह उपायगर्मी में बाहर के प्रोसेस्ड और शुगर वाले पेय पदार्थों की बजाय दही और जीरे का यह घरेलू नुस्खा ज्यादा सुरक्षित और फायदेमंद माना जाता है. यह पेट को स्वस्थ रखने के साथ-साथ शरीर को दिनभर एनर्जी और ताजगी भी देता है. आयुष मंत्रालय के अनुसार भी दही और भुना जीरा पाचन और इम्युनिटी के लिए बेहद लाभकारी होते हैं. अपच और गैस में असरदारइस मिश्रण का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह अपच और गैस की समस्या को काफी हद तक कम करता है. भुना जीरा पेट में बनने वाली गैस को नियंत्रित करता है और दही के साथ मिलकर भोजन को आसानी से पचाने में मदद करता है. जिन लोगों को खाना खाने के बाद भारीपन या ब्लोटिंग की समस्या होती है, उनके लिए यह घरेलू उपाय बहुत उपयोगी हो सकता है. भूख बढ़ाने और मेटाबॉलिज्म सुधारने में मददगारगर्मियों में कई लोगों को भूख नहीं लगती. ऐसे में जीरा मेटाबॉलिज्म को तेज करता है जिससे पाचन प्रक्रिया बेहतर होती है और भूख बढ़ती है. दही के साथ इसका सेवन शरीर को हल्का महसूस कराता है और खाने की इच्छा को संतुलित करता है. वजन और इम्युनिटी के लिए भी फायदेमंददही और जीरा का यह मिश्रण वजन नियंत्रण में भी मदद करता है. जीरा मेटाबॉलिज्म बढ़ाकर कैलोरी बर्न करने की प्रक्रिया को तेज करता है. साथ ही इसमें मौजूद पोषक तत्व इम्युनिटी को मजबूत बनाते हैं. यह कॉम्बिनेशन शरीर को संक्रमण से बचाता है और गर्मियों में होने वाली कमजोरी व थकान को कम करता है. दही शरीर को ठंडक देता है जबकि जीरा पसीने के जरिए निकलने वाले जरूरी मिनरल्स की भरपाई करता है. इससे डिहाइड्रेशन की समस्या कम होती है और शरीर लंबे समय तक एनर्जेटिक बना रहता है. कैसे करें सेवनइसे बनाने के लिए एक चम्मच भुना हुआ जीरा लेकर उसे अच्छे से पीस लें. फिर एक कटोरी ताजे दही में इसे मिलाएं और स्वाद के लिए थोड़ा काला नमक डाल सकते हैं. इसे सुबह नाश्ते के साथ या दोपहर के भोजन के बाद लिया जा सकता है. नियमित सेवन से पाचन तंत्र मजबूत होता है और शरीर हल्का और फिट महसूस करता है. About the Author Vividha Singh विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें Location : Delhi,Delhi,Delhi First Published : March 30, 2026, 22:55 IST

तमिलनाडु चुनाव 2026 गठबंधन की व्याख्या: द्रमुक बनाम अन्नाद्रमुक, एनडीए भागीदार, पूर्ण पार्टी सूची और राजनीतिक रणनीति | चुनाव समाचार

Rajasthan Royals Yashasvi Jaiswal plays a shot during the Indian Premier League cricket match between Chennai Super Kings and Rajasthan Royals in Guwahati, India, Monday, March 30, 2026. (AP Photo/Anupam Nath)

आखरी अपडेट:मार्च 30, 2026, 22:53 IST तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026: 23 अप्रैल को त्रिकोणीय लड़ाई देखने को मिलेगी क्योंकि डीएमके और एआईएडीएमके गठबंधन का सामना पहली बार विजय की टीवीके से होगा, जिसमें प्रमुख सीट-बंटवारे सौदे और नए गुट होंगे। तमिलनाडु “द्रविड़ मॉडल” का भविष्य तय करने के लिए तैयार है, और उसके पास न केवल दो द्रविड़ दिग्गजों – डीएमके और एआईएडीएमके – बल्कि राजनेता से अभिनेता बने विजय की टीवीके को भी वोट देने का विकल्प होगा। (छवि: पीटीआई/फ़ाइल) तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026: युद्ध की रेखाएँ खींची जा चुकी हैं और तमिलनाडु 23 अप्रैल को एक उच्च जोखिम वाले विधानसभा चुनाव के लिए तैयार है, जो इस बार पारंपरिक रूप से द्विध्रुवीय से दूर त्रिकोणीय मुकाबले में बदल जाएगा। तमिलनाडु के 56.7 मिलियन-मजबूत मतदाता “द्रविड़ मॉडल” का भविष्य तय करने के लिए तैयार हैं, और उनके पास न केवल दो द्रविड़ दिग्गजों – डीएमके और एआईएडीएमके – बल्कि अभिनेता से नेता बने विजय की टीवीके को भी वोट देने का विकल्प होगा। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आते हैं, सीट-बंटवारे समझौते, घोषणापत्र लॉन्च, वैचारिक आगे-पीछे और व्यापक प्रचार-प्रसार के साथ राजनीतिक दलों के लिए उन्माद सामान्य हो जाता है। डीएमके का स्वरूप कैसा हो गया है? मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ द्रमुक अपने धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन (एसपीए) को मजबूत करने के लिए नैदानिक ​​​​सटीकता के साथ आगे बढ़ी है। ‘द्रविड़ियन मॉडल 2.0’ को पेश करके सत्ता बरकरार रखने की कोशिश करते हुए, डीएमके ने स्थिरता और आंतरिक सामंजस्य पर ध्यान देने के साथ अपनी सीट-बंटवारे की व्यवस्था को अंतिम रूप दे दिया है। यह गठबंधन में प्रमुख ताकत के रूप में अपनी भूमिका पर जोर देते हुए तमिलनाडु की 234 विधानसभा सीटों में से 164 पर चुनाव लड़ेगी। लेकिन, इसका उगता सूरज प्रतीक 175 निर्वाचन क्षेत्रों में दिखाई देगा क्योंकि छोटे सहयोगी दलों के सात उम्मीदवार इसके बैनर तले चुनाव लड़ने के लिए सहमत हो गए हैं। शेष सीटों का आवंटन दीर्घकालिक साझेदारों के बीच रणनीतिक वितरण को दर्शाता है। कांग्रेस को 28 सीटें आवंटित की गई हैं, जो द्रविड़ पार्टी के साथ उसकी “दीर्घकालिक” साझेदारी की गहराई को दर्शाता है। अन्य महत्वपूर्ण आवंटनों में विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके) शामिल है जिसमें आठ सीटें हैं – छह आरक्षित और दो सामान्य – जो दलित समुदायों के बीच इसके प्रभाव को दर्शाती हैं। देसिया मुरपोक्कू द्रविड़ कड़गम (डीएमडीके) 10 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जबकि वामपंथी दलों – जिसमें सीपीआई और सीपीआई (एम) शामिल हैं – को प्रत्येक को पांच सीटें आवंटित की गई हैं। एमडीएमके (चार सीटें), आईयूएमएल (दो सीटें), और केएमडीके (दो सीटें) जैसे छोटे सहयोगियों ने एक ऐसा मोर्चा तैयार किया है जिसके बारे में स्टालिन का दावा है कि यह पेशेवर और प्रतिनिधि है, जिसमें उम्मीदवारों की सूची का दावा किया गया है जिसमें 15 डॉक्टर और 29 वकील शामिल हैं। स्टालिन ने अपने सहयोगियों के साथ सीट-साझाकरण समझौते की घोषणा में द्रमुक की देरी की आलोचना करने वालों को जवाब देते हुए कहा, “हम भले ही आखिरी स्थान पर आए हों, लेकिन हम नवीनतम हैं।” अन्नाद्रमुक के नेतृत्व वाले राजग के बारे में क्या? एक मंथन के बाद, एआईएडीएमके ने एनडीए को एक बार फिर से एकजुट किया है, जिसका एकमात्र फोकस है: कथित प्रशासनिक विफलताओं को उजागर करके डीएमके सरकार को हटाना। एआईएडीएमके महासचिव एडप्पादी के पलानीस्वामी या ईपीएस, डीएमके को “वंशवादी राजनीति से प्रेरित पारिवारिक पार्टी” करार देते हुए अपनी आलोचना में मुखर रहे हैं। इसने अन्नाद्रमुक के 169 सीटों पर चुनाव लड़ने के साथ अपनी व्यवस्था को अंतिम रूप दे दिया है, जबकि सहयोगियों को शेष 65 सीटें आवंटित की गई हैं। इस गठबंधन में एक प्रमुख भागीदार, भाजपा 27 निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव लड़ेगी, जिसमें मायलापुर और कोयंबटूर उत्तर जैसे हाई-प्रोफाइल क्षेत्र शामिल हैं। राज्य के मामलों की देखरेख करने वाले केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने अत्यधिक विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि “एनडीए चुनावों में जीत हासिल करने जा रहा है” और किसानों और मछुआरों के लिए विकास पर केंद्रित सरकार प्रदान करेगा। गठबंधन में अंबुमणि रामदास के नेतृत्व वाली पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) भी शामिल है, जिसने 18 सीटें ली हैं, और टीटीवी दिनाकरन के नेतृत्व वाली एएमएमके ने 11 सीटें जीती हैं। एनडीए की अभियान रणनीति कानून और व्यवस्था और आपदा प्रबंधन पर द्रमुक के रिकॉर्ड पर हमला करने पर केंद्रित है। पलानीस्वामी ने दक्षिणी जिलों में हाल की बाढ़ पर राज्य सरकार की प्रतिक्रिया पर विशेष रूप से निशाना साधा है, चेतावनियों के बावजूद कार्रवाई करने में विफलता का आरोप लगाया है और इसकी तुलना अन्नाद्रमुक शासन के “स्वर्ण काल” से की है। मतदाताओं को लुभाने के लिए, इसके घोषणापत्र में परिवार की महिला मुखियाओं के लिए 2,000 रुपये की मासिक वित्तीय सहायता और मुफ्त रसोई गैस सहित महत्वपूर्ण कल्याणकारी उपायों का वादा किया गया है। क्या कोई तीसरा मोर्चा है? यह विधानसभा चुनाव अभिनेता से नेता बने विजय और उनकी पार्टी, तमिलगा वेट्री कज़गम (टीवीके) की चुनावी शुरुआत के साथ परंपरा से एक महत्वपूर्ण प्रस्थान का प्रतीक है। विजय के प्रवेश से व्यापक रूप से स्थापित व्यवस्था को बाधित करने की उम्मीद है, जिससे संभवतः प्रतियोगिता वास्तविक तीन-तरफ़ा लड़ाई में बदल जाएगी। जबकि पलानीस्वामी जैसे स्थापित नेताओं ने उनकी उपस्थिति पर सावधानी से प्रतिक्रिया दी है, उन्होंने कहा है कि असली प्रभाव परिणामों के बाद ही पता चलेगा, टीवीके सक्रिय रूप से खुद को दो द्रविड़ दिग्गजों के लिए एक विश्वसनीय विकल्प के रूप में पेश कर रहा है। टीवीके ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वह मौजूदा प्रमुख गुटों में शामिल नहीं होगा, इसका लक्ष्य “मूल्य-आधारित राजनीति” चाहने वाले मतदाताओं के एक वर्ग की कल्पना पर कब्जा करना है। अन्य दलों के बारे में क्या? राजनीतिक परिदृश्य छोटे-छोटे गुटों और पार्टियों के आंदोलन से भरा पड़ा है जो प्राथमिक गठबंधनों से अलग हो गए हैं। एक उल्लेखनीय घटनाक्रम में, एस रामदास के नेतृत्व वाले पीएमके का एक गुट वीके शशिकला की नई लॉन्च की गई ऑल इंडिया पुराची थलाइवर मक्कल मुनेत्र कड़गम (एआईपीटीएमएमके) के साथ गठबंधन बनाने के लिए मुख्य पार्टी से अलग हो गया है। रामदास ने कहा कि इस साझेदारी ने राजनीतिक परिदृश्य में “भूकंप पैदा कर दिया है” और सभी 234 सीटों पर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने के

मल्हारगंज में होटल के गोदाम में लगी आग:, फायर ब्रिगेड मौके पर रहवासी इलाके की, बिजली सप्लाई बंद

मल्हारगंज में होटल के गोदाम में लगी आग:, फायर ब्रिगेड मौके पर रहवासी इलाके की, बिजली सप्लाई बंद

शहर के मल्हारगंज थाना क्षेत्र की गली नंबर 3 में स्थित होटल वर्ल्ड किचन के गोदाम में सोमवार रात अचानक आग लगने से हड़कंप मच गया। घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और आग बुझाने का प्रयास शुरू किया गया। आग की खबर मिलते ही बिजली विभाग ने तत्काल इलाके की बिजली सप्लाई बंद कर दी, ताकि किसी तरह का बड़ा हादसा न हो। वहीं सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुंच गई और आसपास के लोगों को सुरक्षित स्थान पर हटाया गया। होटल वर्ल्ड पर होटल से संबधित सामान बेचा जाता है। मल्हारगंज इलाके में उनका तीन मंजिला गोदाम बना हुआ है। रहवासी क्षेत्र होने से बढ़ी चिंता जिस स्थान पर आग लगी है, उसके आसपास घनी आबादी है। ऐसे में आग फैलने की आशंका को देखते हुए प्रशासन अलर्ट मोड पर हैफायर ब्रिगेड की टीम लगातार आग पर काबू पाने की कोशिश कर रही है। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है। स्थिति पर काबू पाने के बाद ही नुकसान का आंकलन किया जा सकेगा।

भाई के बेटे में दिखा ‘राजा’,घर में जश्न का माहौल:‘राजा इज बैक’ लिखकर नवजात का भव्य स्वागत; हाथों में राजा की तस्वीर थामे आई भाभी

भाई के बेटे में दिखा ‘राजा’,घर में जश्न का माहौल:‘राजा इज बैक’ लिखकर नवजात का भव्य स्वागत; हाथों में राजा की तस्वीर थामे आई भाभी

इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की हत्या के बाद गम में डूबे परिवार में अब खुशी का माहौल है। उनके बड़े भाई सचिन के घर बेटे का जन्म हुआ है, जिसे परिवार ‘राजा’ मान रहा है। रविवार रात को परिवार ने ढोल बजाकर जश्न मनाया। राजा रघुवंशी की हत्या के बाद परिवार लंबे समय से दुख में था। अब सचिन के घर बेटे के जन्म से घर में खुशी लौट आई है। परिजन बच्चे को राजा कहकर पुकार रहे हैं। ग्यारस के दिन हुआ जन्म परिवार के मुताबिक, जिस दिन राजा की हत्या हुई थी, उस दिन भी ग्यारस थी। अब बेटे का जन्म भी ग्यारस के दिन और लगभग उसी समय हुआ है। इसे परिवार एक संयोग मानते हुए भावनात्मक रूप से जोड़ रहा है। रविवार रात परिवार ने घर पर ढोल बजाकर खुशी मनाई। परिजन जमकर नाचे और नए मेहमान का स्वागत किया। अस्पताल के बाहर भी ढोल बजाए गए। ‘राजा इज बैक’ लिखकर किया भव्य स्वागत सोमवार शाम को बेटे को घर लाया गया। इस मौके पर परिवार ने इस पल को पूरे उत्साह के साथ मनाया। परिवार ने पूरे घर को सजाया। मेन गेट पर लिखा “राजा इज बैक”। शाम को सजी हुई कार में बच्चे और मां को लेकर परिवार के लोग लेकर आए। इस दौरान जमकर आतिशबाजी की गई। परिवार के लोग ढोलक की थाप पर जमकर थिरकते नजर आए। राजा के भाई विपिन और सचिन के साथ ही परिवार के अन्य लोग ढोलक की थाप पर जमकर नाचे। पूरे उत्साह के साथ नए मेहमान का वेलकम किया गया। राजा की शादी जैसा ही जश्न जब सचिन की पत्नी किरण अपने बेटे के साथ घर लौटी तो उनके हाथ में राजा की तस्वीर था। दोनों हाथों से वह राजा की तस्वीर लेकर चल रही थी। वह उमा रघुवंशी के हाथों में नन्हा मेहमान घर में आया। विपिन ने बताया कि जिस तरह राजा की शादी में खर्चा किया गया था, उसी तरह नए मेहमान के आने की खुशी में खर्चा किया गया है। बड़े दिन बाद परिवार में खुशी का माहौल लौटा है। हत्या के बाद नहीं मनाया कोई त्योहार राजा की हत्या के बाद परिवार ने कोई त्योहार नहीं मनाया था। बेटे के जन्म के बाद पहली बार घर में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला है।

कंपनी डिफॉल्ट हुई तो सबसे पहले मजदूरों को मिलेगा बकाया:बैंक करप्सी संशोधन बिल पास, 14 दिन में मंजूर होगी दिवालिया अर्जी

कंपनी डिफॉल्ट हुई तो सबसे पहले मजदूरों को मिलेगा बकाया:बैंक करप्सी संशोधन बिल पास, 14 दिन में मंजूर होगी दिवालिया अर्जी

लोकसभा ने 30 मार्च को दिवालियापन कानून में बदलाव वाला बिल पास कर दिया। अब कोई कंपनी दिवालिया होने पर उसकी संपत्ति बेचकर जो पैसा मिलेगा, उसमें सबसे पहले मजदूरों और कर्मचारियों की रुकी हुई सैलरी और बकाया चुकाया जाएगा। इसके बाद ही बाकी लोगों को भुगतान होगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि यह नया सिस्टम पुराने फास्ट-ट्रैक प्रोसेस की जगह लेगा, क्योंकि पुरानी व्यवस्था ठीक से काम नहीं कर रही थी। इसके अलावा, अब एक ही ग्रुप की कई कंपनियों और विदेशों में फंसी उनकी संपत्तियों से जुड़े विवादों को सुलझाना भी आसान होगा। सीतारमण ने कहा- मजदूरों के हक से कोई समझौता नहीं संसद के बजट सत्र के दौरान चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भरोसा दिलाया कि दिवालिया प्रक्रिया के दौरान मजदूरों के हितों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कानून में ऐसे प्रावधान किए गए हैं, जिससे कामगारों के बकाए को भुगतान की लिस्ट में ऊपर रखा जाए। डिफॉल्ट हुआ तो 14 दिन में मंजूर करनी होगी अर्जी संशोधन बिल का एक और बड़ा फायदा यह है कि अब दिवालिया मामलों को लटकाया नहीं जा सकेगा। जैसे ही किसी कंपनी का डिफॉल्ट (कर्ज न चुका पाना) साबित हो जाएगा, उसके खिलाफ इनसॉल्वेंसी की अर्जी को 14 दिन के भीतर स्वीकार करना अनिवार्य होगा। इससे पूरी प्रक्रिया तेज होगी और कर्मचारियों को अपना हक मिलने में सालों का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। बैंकों ने अब तक 4.11 लाख करोड़ रुपए वसूले वित्त मंत्री ने सदन को बताया कि IBC कानून के लागू होने से देश के बैंकिंग सेक्टर की सेहत सुधरी है। दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के मुताबिक: गलत फायदा उठाने वालों पर लगेगा ₹5 करोड़ तक का जुर्माना वित्त मंत्री ने साफ कर दिया है कि दिवालिया कानून (IBC) अब वसूली का नहीं, बल्कि समाधान का जरिया है। अगर कोई भी व्यक्ति या कंपनी इस पूरी प्रक्रिया का गलत फायदा उठाती है या इसमें अड़ंगा डालती है, तो उस पर भारी पेनाल्टी लगेगी: छोटी कंपनियां कोर्ट के बाहर सेटलमेंट कर सकेंगी पुराने सिस्टम में कुछ कमियां थीं, जिन्हें दूर करने के लिए अब ‘क्रेडिटर-इन-कंट्रोल’ मॉडल लाया जा रहा है। इसमें लेनदार (जैसे बैंक या अन्य पैसे देने वाले) खुद समाधान प्रक्रिया शुरू कर सकेंगे। साथ ही, छोटी कंपनियों के लिए कोर्ट के बाहर सेटलमेंट जैसे आसान तरीके अपनाए जाएंगे, ताकि लंबी कानूनी लड़ाई से बचा जा सके। 7 बार बदला जा चुका है यह कानून बता दें कि सरकार ने 12 अगस्त 2025 को इस संशोधन बिल को लोकसभा में पेश किया था। इसके बाद इसे सिलेक्ट कमेटी को भेज दिया गया था। कमेटी ने दिसंबर 2025 में अपनी रिपोर्ट दी, जिसके आधार पर अब इसे पारित किया गया है। 2016 में पहली बार लागू होने के बाद से IBC में अब तक कुल 7 बार संशोधन किए जा चुके हैं।