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कंपनी डिफॉल्ट हुई तो सबसे पहले मजदूरों को मिलेगा बकाया:बैंक करप्सी संशोधन बिल पास, 14 दिन में मंजूर होगी दिवालिया अर्जी

कंपनी डिफॉल्ट हुई तो सबसे पहले मजदूरों को मिलेगा बकाया:बैंक करप्सी संशोधन बिल पास, 14 दिन में मंजूर होगी दिवालिया अर्जी

लोकसभा ने 30 मार्च को दिवालियापन कानून में बदलाव वाला बिल पास कर दिया। अब कोई कंपनी दिवालिया होने पर उसकी संपत्ति बेचकर जो पैसा मिलेगा, उसमें सबसे पहले मजदूरों और कर्मचारियों की रुकी हुई सैलरी और बकाया चुकाया जाएगा। इसके बाद ही बाकी लोगों को भुगतान होगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि यह नया सिस्टम पुराने फास्ट-ट्रैक प्रोसेस की जगह लेगा, क्योंकि पुरानी व्यवस्था ठीक से काम नहीं कर रही थी। इसके अलावा, अब एक ही ग्रुप की कई कंपनियों और विदेशों में फंसी उनकी संपत्तियों से जुड़े विवादों को सुलझाना भी आसान होगा। सीतारमण ने कहा- मजदूरों के हक से कोई समझौता नहीं संसद के बजट सत्र के दौरान चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भरोसा दिलाया कि दिवालिया प्रक्रिया के दौरान मजदूरों के हितों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कानून में ऐसे प्रावधान किए गए हैं, जिससे कामगारों के बकाए को भुगतान की लिस्ट में ऊपर रखा जाए। डिफॉल्ट हुआ तो 14 दिन में मंजूर करनी होगी अर्जी संशोधन बिल का एक और बड़ा फायदा यह है कि अब दिवालिया मामलों को लटकाया नहीं जा सकेगा। जैसे ही किसी कंपनी का डिफॉल्ट (कर्ज न चुका पाना) साबित हो जाएगा, उसके खिलाफ इनसॉल्वेंसी की अर्जी को 14 दिन के भीतर स्वीकार करना अनिवार्य होगा। इससे पूरी प्रक्रिया तेज होगी और कर्मचारियों को अपना हक मिलने में सालों का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। बैंकों ने अब तक 4.11 लाख करोड़ रुपए वसूले वित्त मंत्री ने सदन को बताया कि IBC कानून के लागू होने से देश के बैंकिंग सेक्टर की सेहत सुधरी है। दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के मुताबिक: गलत फायदा उठाने वालों पर लगेगा ₹5 करोड़ तक का जुर्माना वित्त मंत्री ने साफ कर दिया है कि दिवालिया कानून (IBC) अब वसूली का नहीं, बल्कि समाधान का जरिया है। अगर कोई भी व्यक्ति या कंपनी इस पूरी प्रक्रिया का गलत फायदा उठाती है या इसमें अड़ंगा डालती है, तो उस पर भारी पेनाल्टी लगेगी: छोटी कंपनियां कोर्ट के बाहर सेटलमेंट कर सकेंगी पुराने सिस्टम में कुछ कमियां थीं, जिन्हें दूर करने के लिए अब ‘क्रेडिटर-इन-कंट्रोल’ मॉडल लाया जा रहा है। इसमें लेनदार (जैसे बैंक या अन्य पैसे देने वाले) खुद समाधान प्रक्रिया शुरू कर सकेंगे। साथ ही, छोटी कंपनियों के लिए कोर्ट के बाहर सेटलमेंट जैसे आसान तरीके अपनाए जाएंगे, ताकि लंबी कानूनी लड़ाई से बचा जा सके। 7 बार बदला जा चुका है यह कानून बता दें कि सरकार ने 12 अगस्त 2025 को इस संशोधन बिल को लोकसभा में पेश किया था। इसके बाद इसे सिलेक्ट कमेटी को भेज दिया गया था। कमेटी ने दिसंबर 2025 में अपनी रिपोर्ट दी, जिसके आधार पर अब इसे पारित किया गया है। 2016 में पहली बार लागू होने के बाद से IBC में अब तक कुल 7 बार संशोधन किए जा चुके हैं।

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लोकसभा ने 30 मार्च को दिवालियापन कानून में बदलाव वाला बिल पास कर दिया। अब कोई कंपनी दिवालिया होने पर उसकी संपत्ति बेचकर जो पैसा मिलेगा, उसमें सबसे पहले मजदूरों और कर्मचारियों की रुकी हुई सैलरी और बकाया चुकाया जाएगा। इसके बाद ही बाकी लोगों को भुगतान होगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि यह नया सिस्टम पुराने फास्ट-ट्रैक प्रोसेस की जगह लेगा, क्योंकि पुरानी व्यवस्था ठीक से काम नहीं कर रही थी। इसके अलावा, अब एक ही ग्रुप की कई कंपनियों और विदेशों में फंसी उनकी संपत्तियों से जुड़े विवादों को सुलझाना भी आसान होगा। सीतारमण ने कहा- मजदूरों के हक से कोई समझौता नहीं संसद के बजट सत्र के दौरान चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भरोसा दिलाया कि दिवालिया प्रक्रिया के दौरान मजदूरों के हितों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कानून में ऐसे प्रावधान किए गए हैं, जिससे कामगारों के बकाए को भुगतान की लिस्ट में ऊपर रखा जाए। डिफॉल्ट हुआ तो 14 दिन में मंजूर करनी होगी अर्जी संशोधन बिल का एक और बड़ा फायदा यह है कि अब दिवालिया मामलों को लटकाया नहीं जा सकेगा। जैसे ही किसी कंपनी का डिफॉल्ट (कर्ज न चुका पाना) साबित हो जाएगा, उसके खिलाफ इनसॉल्वेंसी की अर्जी को 14 दिन के भीतर स्वीकार करना अनिवार्य होगा। इससे पूरी प्रक्रिया तेज होगी और कर्मचारियों को अपना हक मिलने में सालों का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। बैंकों ने अब तक 4.11 लाख करोड़ रुपए वसूले वित्त मंत्री ने सदन को बताया कि IBC कानून के लागू होने से देश के बैंकिंग सेक्टर की सेहत सुधरी है। दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के मुताबिक: गलत फायदा उठाने वालों पर लगेगा ₹5 करोड़ तक का जुर्माना वित्त मंत्री ने साफ कर दिया है कि दिवालिया कानून (IBC) अब वसूली का नहीं, बल्कि समाधान का जरिया है। अगर कोई भी व्यक्ति या कंपनी इस पूरी प्रक्रिया का गलत फायदा उठाती है या इसमें अड़ंगा डालती है, तो उस पर भारी पेनाल्टी लगेगी: छोटी कंपनियां कोर्ट के बाहर सेटलमेंट कर सकेंगी पुराने सिस्टम में कुछ कमियां थीं, जिन्हें दूर करने के लिए अब ‘क्रेडिटर-इन-कंट्रोल’ मॉडल लाया जा रहा है। इसमें लेनदार (जैसे बैंक या अन्य पैसे देने वाले) खुद समाधान प्रक्रिया शुरू कर सकेंगे। साथ ही, छोटी कंपनियों के लिए कोर्ट के बाहर सेटलमेंट जैसे आसान तरीके अपनाए जाएंगे, ताकि लंबी कानूनी लड़ाई से बचा जा सके। 7 बार बदला जा चुका है यह कानून बता दें कि सरकार ने 12 अगस्त 2025 को इस संशोधन बिल को लोकसभा में पेश किया था। इसके बाद इसे सिलेक्ट कमेटी को भेज दिया गया था। कमेटी ने दिसंबर 2025 में अपनी रिपोर्ट दी, जिसके आधार पर अब इसे पारित किया गया है। 2016 में पहली बार लागू होने के बाद से IBC में अब तक कुल 7 बार संशोधन किए जा चुके हैं।

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