Mumbai Office Colleague Love Relationship Advice

4 घंटे पहले कॉपी लिंक सवाल: मैं एक 31 साल की वर्किंग प्रोफेशनल हूं और मुंबई में रहती हूं। मुझे अपने एक कुलीग से प्यार हो गया है। रिश्ते की शुरुआत से ही हमने तय किया कि ऑफिस में रिश्ते को रिवील नहीं करेंगे, लेकिन लोगों को पता चल गया। अब ऑफिस में कुछ लोग हमें अलग नजर से देखते हैं, जिससे हम दोनों ही कॉन्शियस रहने लगे हैं। हमें ऑफिस में मामूली सी बात के लिए भी सोचना पड़ता है। इसका असर हमारे रिश्ते पर भी पड़ रहा है। कभी ऑफिस की बात घर तक आ जाए तो तनाव भी हो जाता है। हमें इस सिचुएशन को कैसे हैंडल करना चाहिए? एक्सपर्ट: डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा जवाब: आपको बहुत मुबारक कि आप प्यार में हैं। प्यार एक बेहद खूबसूरत एहसास है और जैसाकि गालिब फरमा गए हैं– इश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश ‘ग़ालिब’कि लगाए न लगे और बुझाए न बने।। प्यार तो ऐसा ही होता है। कभी भी और कहीं भी हो सकता है। जैसाकि आपने बताया कि आप दोनों ने शुरू से ही काम और निजी जीवन को अलग रखने की कोशिश की, लेकिन फिर भी लोग गॉसिप कर रहे हैं। यूं तो गॉसिप सिर्फ गप्प ही होती है, लेकिन जब होने लगे तो अच्छे-भले समझदार लोग भी दबाव में आ जाते हैं। आप जो महसूस कर रही हैं, वह बहुत स्वाभाविक है। चलिए आपकी सिचुएशन को समझने और उसके लिए कुछ प्रैक्टिकल सॉल्यूशन निकालने पर बात करते हैं। ऑफिस के लोग गॉसिप क्यों करते हैं? दरअसल, हमारा समाज प्रेम और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर अमूमन असहज ही रहता है। जब भी दो लोग अपनी मर्जी और पसंद से करीब आते हैं, तो आसपास के लोग उसे ‘मसालेदार खबर’ की तरह देखने लगते हैं। गॉसिप सिर्फ ऑफिस में नहीं होती। वो हर जगह होती है। मोहल्ले की आंटियां भी गॉसिप करती हैं, चौराहे पर बैठे अंकल भी करते हैं, रिश्तेदार भी करते हैं और सच मानिए, कई बार घरवाले भी गॉसिप करते हैं। जब भी कुछ ऐसा होता है, जो समाज के नियम–कायदों को तोड़ता है तो लोग गॉसिप करते ही हैं। इसलिए इसे ज्यादा दिल पर नहीं लेना चाहिए। आपकी भावनाएं सही हैं आप अपनी जगह पर सही हैं। ये समस्या समाज की है। समाज की असहजता के कारण ही आपका मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। आपको यह समझना होगा कि ये रिश्ता असामान्य नहीं है। हम अक्सर वहीं अपना जीवनसाथी तलाशते हैं, जहां हम सबसे ज्यादा समय बिताते हैं, फिर चाहे वह कॉलेज हो या ऑफिस। समस्या आपके रिश्ते में नहीं, बल्कि उन लोगों के परसेप्शन और ‘थिंकिंग पैटर्न’ में है, जो अपना काम छोड़कर दूसरों की निजी जिंदगी पर कमेंट करते हैं। लेकिन न चाहते हुए भी ये स्थितियां हमारी मेंटल हेल्थ को प्रभावित करती हैं। इसके कारण मन पर इस तरह के मनोवैज्ञानिक असर पड़ सकते हैं- ऑफिस के डूज और डोंट्स जब आप इन मनोवैज्ञानिक दबावों को पहचान लेते हैं, तो अगला कदम ‘एक्शन’ का है। गॉसिप को रोकना आपके हाथ में नहीं है, लेकिन आप अपने व्यवहार से उसे ईंधन (फ्यूल) देना बंद कर सकते हैं। इसके लिए जरूरी है कि आप पार्टनर के साथ बैठकर ऑफिस ऑवर्स के लिए कुछ बुनियादी नियम यानी ‘डूज और डोंट्स’ तय करें। प्रोफेशनल एथिक्स को बनाएं अपनी ढाल आपस में नियम तय करके उन्हें ऑफिस में सख्ती से लागू करें। वर्कप्लेस पर प्रोफेशनल इमेज बनाए रखना ही आपके करियर को सुरक्षित रखने का एकमात्र तरीका है। कोशिश करें कि वर्किंग ऑवर्स में आप दोनों के बीच सिर्फ प्रोफेशनल बातचीत ही हो। जब लोग यह देखेंगे कि आपके रिश्ते से काम के आउटपुट पर कोई असर नहीं पड़ रहा है, तो धीरे-धीरे उनकी दिलचस्पी खत्म होने लगेगी। याद रखें, अनावश्यक आई-कॉन्टैक्ट या साथ में लंबे ब्रेक गॉसिप को बढ़ावा देते हैं। बाकी आपको ऑफिस में क्या–क्या नहीं करना चाहिए, उसकी डिटेल गाइड के लिए नीचे ग्राफिक देखें। ऑफिस में घर नहीं, घर में ऑफिस नहीं ऑफिस स्पेस में प्रोफेशनल बाउंड्रीज तय करने के बाद दूसरा सबसे जरूरी कदम है, घर के पर्सनल स्पेस में ऑफिस को न घुसने देना। अक्सर ऑफिस का तनाव घर तक आ जाता है, जिससे पार्टनर्स के बीच झगड़े शुरू हो जाते हैं। आपको यह समझना होगा कि ऑफिस में ‘को-वर्कर’ की तरह व्यवहार करना आपकी मजबूरी हो सकती है, लेकिन ऑफिस के बाहर आप दो इंडिपेंडेंट एडल्ट्स हैं। घर लौटते ही काम और गॉसिप की चर्चा बंद करें और एक-दूसरे को वह क्वालिटी समय और प्यार दें, जो किसी भी अच्छे और हेल्दी रिश्ते के लिए जरूरी है। मैच्योर रिश्तों पर गॉसिप का असर नहीं होता मैच्योर और समझदार रिश्तों की बुनियाद इतनी मजबूत होती है कि वे गॉसिप से नहीं डिगते। अगर लोगों की बातें आपको तनाव दे रही हैं, तो कुछ बातें ध्यान रखें– ये एक चुनौती है। रिश्ते में आगे ऐसी चुनौतियां और भी आएंगी। अगर रिश्ता इससे प्रभावित हो रहा है तो इसका मतलब कि वो फ्रेजाइल है। उसे मजबूत बनाने पर काम करें। इस चुनौती को एक-दूसरे के करीब आने के अवसर के रूप में देखें। जो भी बात परेशान करे, उसे दिल में न रखें। उसे लॉजिकली एड्रेस करें, उस पर बात करें। एक-दूसरे का पक्ष ध्यान से सुनें, दूसरे के नजरिए को इग्नोर न करें। आपकी कोशिश दुनिया को जवाब देने की नहीं, बल्कि अपने रिश्ते को मजबूत बनाने की होनी चाहिए। जरूरी लगे तो काउंसिलर की मदद भी ले सकते हैं। आखिरी बात आप दोनों को शायद पता नहीं कि आप अभी अपने जीवन के सबसे खूबसूरत दौर से गुजर रहे हैं। इसके हरेक क्षण को एंजॉय करें और खूब खुश रहें। ऑफिस में जमकर काम करें और ऑफिस के बाहर जमकर जिंदगी जिएं। आपको पता है कि ऑफिस में प्यार होना कोई अपराध नहीं है। आपने कुछ भी ऐसा नहीं किया, जिसके लिए आपको शर्मिंदा होना पड़े। बस प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ के बीच एक मजबूत ‘बाउंड्री’ बनाए रखिए। ये सिर्फ एक फेज है। ये गुजर जाएगा। कुछ दिन बाद ऑफिस के लोगों को नया गॉसिप मिल जाएगा और वो उसमें बिजी हो जाएंगे। आप सिर्फ अपने रिलेशनशिप पर काम करिए। ……………… ये खबर भी
232 अस्पतालों की संबद्धता 1 अप्रैल से समाप्त:आयुष्मान योजना में NABH सर्टिफिकेट वाले ही रहेंगे इंपैनल्ड, मरीज के फीडबैक से होगी निगरानी

आयुष्मान योजना के तहत प्रदेश के चार बड़े शहरों भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में अस्पतालों को लेकर बड़ा बदलाव लागू किया जा रहा है। 398 इंपैनल्ड अस्पतालों में से अब तक सिर्फ 166 अस्पतालों ने ही एनएबीएच (एंट्री लेवल या फुल) की जानकारी दी है, जबकि शेष 232 अस्पतालों की संबद्धता 1 अप्रैल से समाप्त मानी जाएगी। स्वास्थ्य विभाग ने इन अस्पतालों को नोटिस जारी कर दोबारा आवेदन का मौका दिया है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिन अस्पतालों ने अब तक एनएबीएच सर्टिफिकेट की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई है, उनकी जानकारी एकत्र की जा रही है। ऐसे अस्पतालों को एक-दो दिन का समय देकर दोबारा इंपैनलमेंट के लिए आवेदन करने का मौका दिया गया है। इस दौरान यदि जबाव नहीं आता है तो इनकी संबद्धता समाप्त कर दी जाएगी। फुल एनएबीएच से मिलेगा लाभ जिन अस्पतालों के पास पहले से फुल एनएबीएच सर्टिफिकेट है, उन्हें आवेदन करते ही “डीम्ड इंपैनलमेंट” मिल जाएगा। ऐसे अस्पतालों को अलग से निरीक्षण की जरूरत नहीं होगी। वहीं अन्य अस्पतालों को पहले एंट्री लेवल एनएबीएच लेना होगा और तीन साल के भीतर फुल एनएबीएच स्तर हासिल करना होगा। एंट्री लेवल एनएबीएच अस्पतालों के लिए शुरुआती गुणवत्ता मानकों का प्रमाणन है, जिसमें 50 मानक और 150 ऑब्जेक्टिव एलिमेंट्स शामिल होते हैं। वहीं, फुल एनएबीएच उच्च गुणवत्ता का प्रमाण है, जिसमें 100 से अधिक मानक और 600 ऑब्जेक्टिव एलिमेंट्स का पालन करना होता है। यही नहीं, फुल एनएबीएच अस्पतालों को क्लेम राशि पर 115% भुगतान मिलेगा, जबकि एंट्री लेवल अस्पतालों को 10% अतिरिक्त भुगतान दिया जाएगा। मरीज के फीडबैक से होगी निगरानी अब मरीज मोबाइल ऐप के जरिए अस्पतालों को फीडबैक दे सकेंगे। इससे अस्पतालों की गुणवत्ता का मूल्यांकन किया जाएगा और सेवाओं में सुधार लाने में मदद मिलेगी।
Rail Ticket Refund, Toll Rules, Salary & Cylinder Prices

Hindi News Business April 1 Changes: Rail Ticket Refund, Toll Rules, Salary & Cylinder Prices नई दिल्ली2 घंटे पहले कॉपी लिंक आज 1 अप्रैल है। नए वित्त वर्ष की शुरुआत कॉमर्शियल गैस सिलेंडर के महंगे होने से हुई है। सरकारी तेल कंपनियों ने इसके दाम 218 रुपए तक बढ़ा दिए है। इसके अलावा अब रेल टिकट 8 घंटे पहले तक ही कैंसिल कर पाएंगे। आज से फास्टैग, टोल टैक्स के साथ इनकम टैक्स से जुड़े नियम मिलाकर कुल 15 बदलाव हो रहे हैं। कैटेगरी 1: रसोई और सफर 1. कॉमर्शियल सिलेंडर ₹218 महंगा बदलाव: तेल कंपनियों ने कॉमर्शियल गैस सिलेंडर ₹218 तक महंगा कर दिया है। चेन्नई में ये सबसे महंगा 2246.50 रुपए में मिलेगा। दिल्ली में इसकी कीमत ₹2078.50 हो गई है। असर: कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ने से रेस्टोरेंट मालिकों का खर्च बढ़ेगा। ऐसे में वें चाय, नाश्ते और थाली महंगी कर सकते हैं। शादियों की कैटरिंग भी महंगी हो सकती है। घरेलू सिलेंडर के दामों में बदलाव नहीं 2. रेल टिकट 8 घंटे पहले तक ही कैंसिल होगी बदलाव: ट्रेन छूटने से 8 घंटे पहले तक टिकट रद्द करने पर ही रिफंड मिलेगा। पहले यह समय 4 घंटे था। यात्री ट्रेन छूटने से 30 मिनट पहले तक बोर्डिंग स्टेशन भी बदल पाएंगे। असर: समय पर टिकिट कैंसिल नहीं कर पाने पर पैसों का नुकसान होगा। रिफंड के नियमों को सख्त करने से आम यात्रियों को कंफर्म टिकट मिलने की संभावना बढ़ेगी। 3. फास्टैग एनुअल पास बदलाव: आज से फास्टैग का एनुअल पास रिन्यू कराने पर आपके वॉलेट से ज्यादा पैसे कटेंगे। NHAI ने एनुअल पास की कीमतों में 2.5% की बढ़ोतरी कर दी है। असर: सालाना पास के लिए 3 हजार रुपए की जगह 3,075 रुपए चुकाने होंगे। यह पास कार यूजर्स को देशभर के 200 टोल प्लाजा पर बिना रुके सफर करने की सुविधा देता है। 4. टोल पर नो-कैश बदलाव: आज से सभी टोल प्लाजा पर कैश ट्रांजेक्शन पूरी तरह बंद कर दिया गया है। टोल टैक्स का पेमेंट केवल फास्टैग या UPI जैसे डिजिटल माध्यमों से ही हो सकेगा। असर: अगर आपके पास फास्टैग नहीं है या उसमें बैलेंस कम है, तो यूपीआई से ही टोल का ऑप्शन बचेगा। कैश का विकल्प नहीं होने से परेशानी में पड़ सकते हैं। 5. गाड़ियों की नई कीमतें बदलाव: 31 मार्च तक पुरानी स्टॉक और पुरानी कीमतों पर गाड़ियां मिल रही थीं। आज 1 अप्रैल से कॉमर्शियल और पैसेंजर गाड़ियों के दाम 2% से 3% तक बढ़ गए हैं। असर: यदि आपने कार बुक की है लेकिन बिल 31 मार्च तक नहीं कटा, तो अब बढ़ी हुई कीमत देनी होगी। शोरूम प्राइस के साथ-साथ रजिस्ट्रेशन चार्जेस भी बढ़े हुए दामों पर लगेंगे। कैटेगरी 2: टैक्स, बैंकिंग और बाजार 6. ‘असेसमेंट ईयर’ खत्म, अब सिर्फ ‘टैक्स ईयर’ बदलाव: आज से नया ‘इनकम टैक्स एक्ट 2025’ लागू हो गया है। अब फाइनेंशियल और असेसमेंट ईयर के बजाय सिर्फ ‘टैक्स ईयर’ शब्द का इस्तेमाल होगा। असर: इससे टैक्सपेयर्स के बीच की उलझन खत्म होगी। आपने 2024-25 में पैसा कमाया तो जुलाई 2025 में उसका टैक्स भरते थे। इसे AY 2025-26 कहा जाता था। एक ही कमाई के लिए दो अलग-अलग सालों के नाम सुनकर कंफ्यूजन होता था। 7. रिवाइज्ड रिजीम के तहत फाइलिंग बदलाव: साल 2025 में सरकार ने नई रिजीम के टैक्स स्लैब में बदलाव किया था। ये 1 अप्रैल 2025 से लाग हो गया। इस साल इस बदलाव के साथ रिटर्न फाइल कर पाएंगे। असर: सैलरीड पर्सन की सेक्शन 87A के तहत 12.75 लाख रुपए तक की इनकम टैक्स फ्री है। अन्य लोग 12 लाख तक की इनकम पर टैक्स छूट पा सकते हैं। 8. फॉर्म 16 की जगह अब नया फॉर्म 130 और 131 बदलाव: TDS कटौती के सबूत के लिए फॉर्म 16 और अन्य आय के लिए 16A दिया जाता था। अब इन फॉर्म्स का फॉर्मेट बदलकर फॉर्म 130 और फॉर्म 131 कर दिया गया है। असर: जब जून-जुलाई में रिटर्न भरेंगे तो इन फॉर्म्स में टैक्स कैलकुलेशन और छूट का ब्यौरा पहले से ज्यादा डिटेल में होगा। इससे ITR भरने में गलती की गुंजाइश कम होगी। 9. HRA टैक्स छूट लेने के नियम बदले बदलाव: HRA पर टैक्स छूट लेने वाले कर्मचारियों को अब रेंट रसीद जमा करनी होगी। अगर सालाना किराया 1 लाख रुपए से ज्यादा है, तो मकान मालिक का पैन देना अनिवार्य होगा। अब दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई के अलावा बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद को भी 50% टैक्स छूट वाली कैटेगरी में शामिल कर लिया गया है। असर: इन 8 शहरों में रहने वाले कर्मचारी अब अपनी बेसिक सैलरी के 50% हिस्से पर टैक्स छूट ले सकेंगे, जिससे उनकी इन-हैंड सैलरी बढ़ेगी। वहीं अब टैक्स विभाग रसीद और मकान मालिक के टैक्स रिकॉर्ड का मिलान करेगा। पकड़े जाने पर जुर्माना लग सकता है। 10. PNB ATM कैश लिमिट बदलाव: पंजाब नेशनल बैंक के क्लासिक डेबिट कार्ड से एक दिन में अधिकतम ₹25 हजार निकाल सकेंगे। प्लैटिनम कार्ड के लिए यह लिमिट ₹50 हजार होगी। असर: यदि आपकी जरूरत इससे ज्यादा है, तो आपको बैंक जाना होगा। चेकबुक या विड्रॉल फॉर्म का सहारा लेना होगा। यह फैसला फ्रॉड को रोकने के लिए लिया है। 11. F&O ट्रेडिंग पर STT बढ़ा बदलाव: सरकार ने बजट में F&O मार्केट में सट्टेबाजी कम करने के लिए टैक्स की दरें बढ़ाने का ऐलान किया था। फ्यूचर्स की बिक्री पर अब 0.02% की जगह 0.05% टैक्स लगेगा। वहीं, ऑप्शंस के प्रीमियम पर यह टैक्स 0.1% से बढ़ाकर 0.15% हो गया है। असर: इंट्राडे और फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स के लिए अब हर ट्रेड की लागत बढ़ जाएगी। ज्यादा टैक्स देने से उनकी नेट कमाई कम हो जाएगी। ट्रेड में ब्रेक ईवन पर आने में भी समय लगेगा। 12. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) पर नया टैक्स नियम बदलाव: अब गोल्ड बॉन्ड की मैच्योरिटी पर टैक्स छूट केवल उन्हें मिलेगी, जिन्होंने इसे सीधे RBI से खरीदा है। अगर आपने शेयर बाजार से किसी दूसरे निवेशक से ये बॉन्ड खरीदे हैं, तो अब आपको मैच्योरिटी पर मिलने वाले मुनाफे पर टैक्स देना होगा। असर: इससे उन लोगों का नेट मुनाफा घट जाएगा जो बाजार से बॉन्ड खरीदकर टैक्स बचाते थे। अब मैच्योरिटी पर मिलने वाले प्रॉफिट को ‘कैपिटल गेन’ माना
Rail Ticket Refund, Toll Rules, Salary & Cylinder Prices

Hindi News Business April 1 Changes: Rail Ticket Refund, Toll Rules, Salary & Cylinder Prices नई दिल्ली7 घंटे पहले कॉपी लिंक आज 1 अप्रैल है। नए वित्त वर्ष की शुरुआत कॉमर्शियल गैस सिलेंडर के महंगे होने से हुई है। सरकारी तेल कंपनियों ने इसके दाम 218 रुपए तक बढ़ा दिए हैं। इसके अलावा अब रेल टिकट 8 घंटे पहले तक ही कैंसिल कर पाएंगे। आज से फास्टैग, टोल टैक्स के साथ इनकम टैक्स से जुड़े नियम मिलाकर कुल 15 बदलाव हो रहे हैं। कैटेगरी 1: रसोई और सफर 1. कॉमर्शियल सिलेंडर ₹218 महंगा बदलाव: तेल कंपनियों ने कॉमर्शियल गैस सिलेंडर ₹218 तक महंगा कर दिया है। चेन्नई में ये सबसे महंगा 2246.50 रुपए में मिलेगा। दिल्ली में इसकी कीमत ₹2078.50 हो गई है। असर: कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ने से रेस्टोरेंट मालिकों का खर्च बढ़ेगा। ऐसे में वें चाय, नाश्ते और थाली महंगी कर सकते हैं। शादियों की कैटरिंग भी महंगी हो सकती है। घरेलू सिलेंडर के दामों में बदलाव नहीं 2. रेल टिकट 8 घंटे पहले तक ही कैंसिल होगी बदलाव: ट्रेन छूटने से 8 घंटे पहले तक टिकट रद्द करने पर ही रिफंड मिलेगा। पहले यह समय 4 घंटे था। यात्री ट्रेन छूटने से 30 मिनट पहले तक बोर्डिंग स्टेशन भी बदल पाएंगे। असर: समय पर टिकिट कैंसिल नहीं कर पाने पर पैसों का नुकसान होगा। रिफंड के नियमों को सख्त करने से आम यात्रियों को कंफर्म टिकट मिलने की संभावना बढ़ेगी। 3. फास्टैग एनुअल पास बदलाव: आज से फास्टैग का एनुअल पास रिन्यू कराने पर आपके वॉलेट से ज्यादा पैसे कटेंगे। NHAI ने एनुअल पास की कीमतों में 2.5% की बढ़ोतरी कर दी है। असर: सालाना पास के लिए 3 हजार रुपए की जगह 3,075 रुपए चुकाने होंगे। यह पास कार यूजर्स को देशभर के 200 टोल प्लाजा पर बिना रुके सफर करने की सुविधा देता है। 4. टोल पर नो-कैश बदलाव: आज से सभी टोल प्लाजा पर कैश ट्रांजेक्शन पूरी तरह बंद कर दिया गया है। टोल टैक्स का पेमेंट केवल फास्टैग या UPI जैसे डिजिटल माध्यमों से ही हो सकेगा। असर: अगर आपके पास फास्टैग नहीं है या उसमें बैलेंस कम है, तो यूपीआई से ही टोल का ऑप्शन बचेगा। कैश का विकल्प नहीं होने से परेशानी में पड़ सकते हैं। 5. गाड़ियों की नई कीमतें बदलाव: 31 मार्च तक पुरानी स्टॉक और पुरानी कीमतों पर गाड़ियां मिल रही थीं। आज 1 अप्रैल से कॉमर्शियल और पैसेंजर गाड़ियों के दाम 2% से 3% तक बढ़ गए हैं। असर: यदि आपने कार बुक की है लेकिन बिल 31 मार्च तक नहीं कटा, तो अब बढ़ी हुई कीमत देनी होगी। शोरूम प्राइस के साथ-साथ रजिस्ट्रेशन चार्जेस भी बढ़े हुए दामों पर लगेंगे। कैटेगरी 2: टैक्स, बैंकिंग और बाजार 6. ‘असेसमेंट ईयर’ खत्म, अब सिर्फ ‘टैक्स ईयर’ बदलाव: आज से नया ‘इनकम टैक्स एक्ट 2025’ लागू हो गया है। अब फाइनेंशियल और असेसमेंट ईयर के बजाय सिर्फ ‘टैक्स ईयर’ शब्द का इस्तेमाल होगा। असर: इससे टैक्सपेयर्स के बीच की उलझन खत्म होगी। आपने 2024-25 में पैसा कमाया तो जुलाई 2025 में उसका टैक्स भरते थे। इसे AY 2025-26 कहा जाता था। एक ही कमाई के लिए दो अलग-अलग सालों के नाम सुनकर कंफ्यूजन होता था। 7. रिवाइज्ड रिजीम के तहत फाइलिंग बदलाव: साल 2025 में सरकार ने नई रिजीम के टैक्स स्लैब में बदलाव किया था। ये 1 अप्रैल 2025 से लागू हो गया। इस साल इस बदलाव के साथ रिटर्न फाइल कर पाएंगे। असर: सैलरीड पर्सन की सेक्शन 87A के तहत 12.75 लाख रुपए तक की इनकम टैक्स फ्री है। अन्य लोग 12 लाख तक की इनकम पर टैक्स छूट पा सकते हैं। 8. फॉर्म 16 की जगह अब नया फॉर्म 130 और 131 बदलाव: TDS कटौती के सबूत के लिए फॉर्म 16 और अन्य आय के लिए 16A दिया जाता था। अब इन फॉर्म्स का फॉर्मेट बदलकर फॉर्म 130 और फॉर्म 131 कर दिया गया है। असर: जब जून-जुलाई में रिटर्न भरेंगे तो इन फॉर्म्स में टैक्स कैलकुलेशन और छूट का ब्यौरा पहले से ज्यादा डिटेल में होगा। इससे ITR भरने में गलती की गुंजाइश कम होगी। 9. HRA टैक्स छूट लेने के नियम बदले बदलाव: HRA पर टैक्स छूट लेने वाले कर्मचारियों को अब रेंट रसीद जमा करनी होगी। अगर सालाना किराया 1 लाख रुपए से ज्यादा है, तो मकान मालिक का पैन देना अनिवार्य होगा। अब दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई के अलावा बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद को भी 50% टैक्स छूट वाली कैटेगरी में शामिल कर लिया गया है। असर: इन 8 शहरों में रहने वाले कर्मचारी अब अपनी बेसिक सैलरी के 50% हिस्से पर टैक्स छूट ले सकेंगे। वहीं अब टैक्स विभाग रसीद और मकान मालिक के टैक्स रिकॉर्ड का मिलान करेगा। पकड़े जाने पर जुर्माना लग सकता है। 10. PNB ATM कैश लिमिट बदलाव: पंजाब नेशनल बैंक के क्लासिक डेबिट कार्ड से एक दिन में अधिकतम ₹25 हजार निकाल सकेंगे। प्लैटिनम कार्ड के लिए यह लिमिट ₹50 हजार होगी। असर: यदि आपकी जरूरत इससे ज्यादा है, तो आपको बैंक जाना होगा। चेकबुक या विड्रॉल फॉर्म का सहारा लेना होगा। यह फैसला फ्रॉड को रोकने के लिए लिया है। 11. F&O ट्रेडिंग पर STT बढ़ा बदलाव: सरकार ने बजट में F&O मार्केट में सट्टेबाजी कम करने के लिए टैक्स की दरें बढ़ाने का ऐलान किया था। फ्यूचर्स की बिक्री पर अब 0.02% की जगह 0.05% टैक्स लगेगा। वहीं, ऑप्शंस के प्रीमियम पर यह टैक्स 0.1% से बढ़ाकर 0.15% हो गया है। असर: इंट्राडे और फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स के लिए अब हर ट्रेड की लागत बढ़ जाएगी। ज्यादा टैक्स देने से उनकी नेट कमाई कम हो जाएगी। ट्रेड में ब्रेक ईवन पर आने में भी समय लगेगा। 12. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) पर नया टैक्स नियम बदलाव: अब गोल्ड बॉन्ड की मैच्योरिटी पर टैक्स छूट केवल उन्हें मिलेगी, जिन्होंने इसे सीधे RBI से खरीदा है। अगर आपने शेयर बाजार से किसी दूसरे निवेशक से ये बॉन्ड खरीदे हैं, तो अब आपको मैच्योरिटी पर मिलने वाले मुनाफे पर टैक्स देना होगा। असर: इससे उन लोगों का नेट मुनाफा घट जाएगा जो बाजार से बॉन्ड खरीदकर टैक्स बचाते थे। अब मैच्योरिटी पर मिलने वाले प्रॉफिट को ‘कैपिटल गेन’ माना जाएगा, जिस पर टैक्स कटने








