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Mumbai Office Colleague Love Relationship Advice

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4 घंटे पहले

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सवाल: मैं एक 31 साल की वर्किंग प्रोफेशनल हूं और मुंबई में रहती हूं। मुझे अपने एक कुलीग से प्यार हो गया है। रिश्ते की शुरुआत से ही हमने तय किया कि ऑफिस में रिश्ते को रिवील नहीं करेंगे, लेकिन लोगों को पता चल गया।

अब ऑफिस में कुछ लोग हमें अलग नजर से देखते हैं, जिससे हम दोनों ही कॉन्शियस रहने लगे हैं। हमें ऑफिस में मामूली सी बात के लिए भी सोचना पड़ता है। इसका असर हमारे रिश्ते पर भी पड़ रहा है। कभी ऑफिस की बात घर तक आ जाए तो तनाव भी हो जाता है। हमें इस सिचुएशन को कैसे हैंडल करना चाहिए?

एक्सपर्ट: डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा

जवाब: आपको बहुत मुबारक कि आप प्यार में हैं। प्यार एक बेहद खूबसूरत एहसास है और जैसाकि गालिब फरमा गए हैं–

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इश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश ‘ग़ालिब’कि लगाए न लगे और बुझाए न बने।।

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प्यार तो ऐसा ही होता है। कभी भी और कहीं भी हो सकता है। जैसाकि आपने बताया कि आप दोनों ने शुरू से ही काम और निजी जीवन को अलग रखने की कोशिश की, लेकिन फिर भी लोग गॉसिप कर रहे हैं। यूं तो गॉसिप सिर्फ गप्प ही होती है, लेकिन जब होने लगे तो अच्छे-भले समझदार लोग भी दबाव में आ जाते हैं। आप जो महसूस कर रही हैं, वह बहुत स्वाभाविक है। चलिए आपकी सिचुएशन को समझने और उसके लिए कुछ प्रैक्टिकल सॉल्यूशन निकालने पर बात करते हैं।

ऑफिस के लोग गॉसिप क्यों करते हैं?

दरअसल, हमारा समाज प्रेम और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर अमूमन असहज ही रहता है। जब भी दो लोग अपनी मर्जी और पसंद से करीब आते हैं, तो आसपास के लोग उसे ‘मसालेदार खबर’ की तरह देखने लगते हैं। गॉसिप सिर्फ ऑफिस में नहीं होती। वो हर जगह होती है। मोहल्ले की आंटियां भी गॉसिप करती हैं, चौराहे पर बैठे अंकल भी करते हैं, रिश्तेदार भी करते हैं और सच मानिए, कई बार घरवाले भी गॉसिप करते हैं।

जब भी कुछ ऐसा होता है, जो समाज के नियम–कायदों को तोड़ता है तो लोग गॉसिप करते ही हैं। इसलिए इसे ज्यादा दिल पर नहीं लेना चाहिए।

आपकी भावनाएं सही हैं

आप अपनी जगह पर सही हैं। ये समस्या समाज की है। समाज की असहजता के कारण ही आपका मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। आपको यह समझना होगा कि ये रिश्ता असामान्य नहीं है। हम अक्सर वहीं अपना जीवनसाथी तलाशते हैं, जहां हम सबसे ज्यादा समय बिताते हैं, फिर चाहे वह कॉलेज हो या ऑफिस। समस्या आपके रिश्ते में नहीं, बल्कि उन लोगों के परसेप्शन और ‘थिंकिंग पैटर्न’ में है, जो अपना काम छोड़कर दूसरों की निजी जिंदगी पर कमेंट करते हैं। लेकिन न चाहते हुए भी ये स्थितियां हमारी मेंटल हेल्थ को प्रभावित करती हैं। इसके कारण मन पर इस तरह के मनोवैज्ञानिक असर पड़ सकते हैं-

ऑफिस के डूज और डोंट्स

जब आप इन मनोवैज्ञानिक दबावों को पहचान लेते हैं, तो अगला कदम ‘एक्शन’ का है। गॉसिप को रोकना आपके हाथ में नहीं है, लेकिन आप अपने व्यवहार से उसे ईंधन (फ्यूल) देना बंद कर सकते हैं। इसके लिए जरूरी है कि आप पार्टनर के साथ बैठकर ऑफिस ऑवर्स के लिए कुछ बुनियादी नियम यानी ‘डूज और डोंट्स’ तय करें।

प्रोफेशनल एथिक्स को बनाएं अपनी ढाल

आपस में नियम तय करके उन्हें ऑफिस में सख्ती से लागू करें। वर्कप्लेस पर प्रोफेशनल इमेज बनाए रखना ही आपके करियर को सुरक्षित रखने का एकमात्र तरीका है। कोशिश करें कि वर्किंग ऑवर्स में आप दोनों के बीच सिर्फ प्रोफेशनल बातचीत ही हो। जब लोग यह देखेंगे कि आपके रिश्ते से काम के आउटपुट पर कोई असर नहीं पड़ रहा है, तो धीरे-धीरे उनकी दिलचस्पी खत्म होने लगेगी। याद रखें, अनावश्यक आई-कॉन्टैक्ट या साथ में लंबे ब्रेक गॉसिप को बढ़ावा देते हैं।

बाकी आपको ऑफिस में क्या–क्या नहीं करना चाहिए, उसकी डिटेल गाइड के लिए नीचे ग्राफिक देखें।

ऑफिस में घर नहीं, घर में ऑफिस नहीं

ऑफिस स्पेस में प्रोफेशनल बाउंड्रीज तय करने के बाद दूसरा सबसे जरूरी कदम है, घर के पर्सनल स्पेस में ऑफिस को न घुसने देना। अक्सर ऑफिस का तनाव घर तक आ जाता है, जिससे पार्टनर्स के बीच झगड़े शुरू हो जाते हैं।

आपको यह समझना होगा कि ऑफिस में ‘को-वर्कर’ की तरह व्यवहार करना आपकी मजबूरी हो सकती है, लेकिन ऑफिस के बाहर आप दो इंडिपेंडेंट एडल्ट्स हैं। घर लौटते ही काम और गॉसिप की चर्चा बंद करें और एक-दूसरे को वह क्वालिटी समय और प्यार दें, जो किसी भी अच्छे और हेल्दी रिश्ते के लिए जरूरी है।

मैच्योर रिश्तों पर गॉसिप का असर नहीं होता

मैच्योर और समझदार रिश्तों की बुनियाद इतनी मजबूत होती है कि वे गॉसिप से नहीं डिगते। अगर लोगों की बातें आपको तनाव दे रही हैं, तो कुछ बातें ध्यान रखें–

  • ये एक चुनौती है। रिश्ते में आगे ऐसी चुनौतियां और भी आएंगी। अगर रिश्ता इससे प्रभावित हो रहा है तो इसका मतलब कि वो फ्रेजाइल है। उसे मजबूत बनाने पर काम करें।
  • इस चुनौती को एक-दूसरे के करीब आने के अवसर के रूप में देखें।
  • जो भी बात परेशान करे, उसे दिल में न रखें। उसे लॉजिकली एड्रेस करें, उस पर बात करें।
  • एक-दूसरे का पक्ष ध्यान से सुनें, दूसरे के नजरिए को इग्नोर न करें।
  • आपकी कोशिश दुनिया को जवाब देने की नहीं, बल्कि अपने रिश्ते को मजबूत बनाने की होनी चाहिए।
  • जरूरी लगे तो काउंसिलर की मदद भी ले सकते हैं।

आखिरी बात

आप दोनों को शायद पता नहीं कि आप अभी अपने जीवन के सबसे खूबसूरत दौर से गुजर रहे हैं। इसके हरेक क्षण को एंजॉय करें और खूब खुश रहें। ऑफिस में जमकर काम करें और ऑफिस के बाहर जमकर जिंदगी जिएं। आपको पता है कि ऑफिस में प्यार होना कोई अपराध नहीं है। आपने कुछ भी ऐसा नहीं किया, जिसके लिए आपको शर्मिंदा होना पड़े।

बस प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ के बीच एक मजबूत ‘बाउंड्री’ बनाए रखिए। ये सिर्फ एक फेज है। ये गुजर जाएगा। कुछ दिन बाद ऑफिस के लोगों को नया गॉसिप मिल जाएगा और वो उसमें बिजी हो जाएंगे। आप सिर्फ अपने रिलेशनशिप पर काम करिए।

……………… ये खबर भी पढ़िए रिलेशनशिप एडवाइज- हसबैंड प्रमोशन लेकर दूसरे शहर चले गए: जॉब, घर, बच्चा अकेले संभाल रही हूं, अकेली और फ्रस्ट्रेट हूं, क्या करूं?

आप एक मजबूत महिला हैं, जो घर, जॉब और बच्ची की जिम्मेदारी एक साथ संभाल रही हैं। अगर पति दूसरे शहर चले गए हैं और आपको उनका साथ नहीं मिल पा रहा है तो फ्रस्ट्रेशन होना नॉर्मल है। आइए आपकी सिचुएशन को समझते हैं और साथ मिलकर कोई रास्ता निकालते हैं। आगे पढ़िए…

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सवाल: मैं एक 31 साल की वर्किंग प्रोफेशनल हूं और मुंबई में रहती हूं। मुझे अपने एक कुलीग से प्यार हो गया है। रिश्ते की शुरुआत से ही हमने तय किया कि ऑफिस में रिश्ते को रिवील नहीं करेंगे, लेकिन लोगों को पता चल गया।

अब ऑफिस में कुछ लोग हमें अलग नजर से देखते हैं, जिससे हम दोनों ही कॉन्शियस रहने लगे हैं। हमें ऑफिस में मामूली सी बात के लिए भी सोचना पड़ता है। इसका असर हमारे रिश्ते पर भी पड़ रहा है। कभी ऑफिस की बात घर तक आ जाए तो तनाव भी हो जाता है। हमें इस सिचुएशन को कैसे हैंडल करना चाहिए?

एक्सपर्ट: डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा

जवाब: आपको बहुत मुबारक कि आप प्यार में हैं। प्यार एक बेहद खूबसूरत एहसास है और जैसाकि गालिब फरमा गए हैं–

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इश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश ‘ग़ालिब’कि लगाए न लगे और बुझाए न बने।।

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प्यार तो ऐसा ही होता है। कभी भी और कहीं भी हो सकता है। जैसाकि आपने बताया कि आप दोनों ने शुरू से ही काम और निजी जीवन को अलग रखने की कोशिश की, लेकिन फिर भी लोग गॉसिप कर रहे हैं। यूं तो गॉसिप सिर्फ गप्प ही होती है, लेकिन जब होने लगे तो अच्छे-भले समझदार लोग भी दबाव में आ जाते हैं। आप जो महसूस कर रही हैं, वह बहुत स्वाभाविक है। चलिए आपकी सिचुएशन को समझने और उसके लिए कुछ प्रैक्टिकल सॉल्यूशन निकालने पर बात करते हैं।

ऑफिस के लोग गॉसिप क्यों करते हैं?

दरअसल, हमारा समाज प्रेम और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर अमूमन असहज ही रहता है। जब भी दो लोग अपनी मर्जी और पसंद से करीब आते हैं, तो आसपास के लोग उसे ‘मसालेदार खबर’ की तरह देखने लगते हैं। गॉसिप सिर्फ ऑफिस में नहीं होती। वो हर जगह होती है। मोहल्ले की आंटियां भी गॉसिप करती हैं, चौराहे पर बैठे अंकल भी करते हैं, रिश्तेदार भी करते हैं और सच मानिए, कई बार घरवाले भी गॉसिप करते हैं।

जब भी कुछ ऐसा होता है, जो समाज के नियम–कायदों को तोड़ता है तो लोग गॉसिप करते ही हैं। इसलिए इसे ज्यादा दिल पर नहीं लेना चाहिए।

आपकी भावनाएं सही हैं

आप अपनी जगह पर सही हैं। ये समस्या समाज की है। समाज की असहजता के कारण ही आपका मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। आपको यह समझना होगा कि ये रिश्ता असामान्य नहीं है। हम अक्सर वहीं अपना जीवनसाथी तलाशते हैं, जहां हम सबसे ज्यादा समय बिताते हैं, फिर चाहे वह कॉलेज हो या ऑफिस। समस्या आपके रिश्ते में नहीं, बल्कि उन लोगों के परसेप्शन और ‘थिंकिंग पैटर्न’ में है, जो अपना काम छोड़कर दूसरों की निजी जिंदगी पर कमेंट करते हैं। लेकिन न चाहते हुए भी ये स्थितियां हमारी मेंटल हेल्थ को प्रभावित करती हैं। इसके कारण मन पर इस तरह के मनोवैज्ञानिक असर पड़ सकते हैं-

ऑफिस के डूज और डोंट्स

जब आप इन मनोवैज्ञानिक दबावों को पहचान लेते हैं, तो अगला कदम ‘एक्शन’ का है। गॉसिप को रोकना आपके हाथ में नहीं है, लेकिन आप अपने व्यवहार से उसे ईंधन (फ्यूल) देना बंद कर सकते हैं। इसके लिए जरूरी है कि आप पार्टनर के साथ बैठकर ऑफिस ऑवर्स के लिए कुछ बुनियादी नियम यानी ‘डूज और डोंट्स’ तय करें।

प्रोफेशनल एथिक्स को बनाएं अपनी ढाल

आपस में नियम तय करके उन्हें ऑफिस में सख्ती से लागू करें। वर्कप्लेस पर प्रोफेशनल इमेज बनाए रखना ही आपके करियर को सुरक्षित रखने का एकमात्र तरीका है। कोशिश करें कि वर्किंग ऑवर्स में आप दोनों के बीच सिर्फ प्रोफेशनल बातचीत ही हो। जब लोग यह देखेंगे कि आपके रिश्ते से काम के आउटपुट पर कोई असर नहीं पड़ रहा है, तो धीरे-धीरे उनकी दिलचस्पी खत्म होने लगेगी। याद रखें, अनावश्यक आई-कॉन्टैक्ट या साथ में लंबे ब्रेक गॉसिप को बढ़ावा देते हैं।

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आपको यह समझना होगा कि ऑफिस में ‘को-वर्कर’ की तरह व्यवहार करना आपकी मजबूरी हो सकती है, लेकिन ऑफिस के बाहर आप दो इंडिपेंडेंट एडल्ट्स हैं। घर लौटते ही काम और गॉसिप की चर्चा बंद करें और एक-दूसरे को वह क्वालिटी समय और प्यार दें, जो किसी भी अच्छे और हेल्दी रिश्ते के लिए जरूरी है।

मैच्योर रिश्तों पर गॉसिप का असर नहीं होता

मैच्योर और समझदार रिश्तों की बुनियाद इतनी मजबूत होती है कि वे गॉसिप से नहीं डिगते। अगर लोगों की बातें आपको तनाव दे रही हैं, तो कुछ बातें ध्यान रखें–

  • ये एक चुनौती है। रिश्ते में आगे ऐसी चुनौतियां और भी आएंगी। अगर रिश्ता इससे प्रभावित हो रहा है तो इसका मतलब कि वो फ्रेजाइल है। उसे मजबूत बनाने पर काम करें।
  • इस चुनौती को एक-दूसरे के करीब आने के अवसर के रूप में देखें।
  • जो भी बात परेशान करे, उसे दिल में न रखें। उसे लॉजिकली एड्रेस करें, उस पर बात करें।
  • एक-दूसरे का पक्ष ध्यान से सुनें, दूसरे के नजरिए को इग्नोर न करें।
  • आपकी कोशिश दुनिया को जवाब देने की नहीं, बल्कि अपने रिश्ते को मजबूत बनाने की होनी चाहिए।
  • जरूरी लगे तो काउंसिलर की मदद भी ले सकते हैं।

आखिरी बात

आप दोनों को शायद पता नहीं कि आप अभी अपने जीवन के सबसे खूबसूरत दौर से गुजर रहे हैं। इसके हरेक क्षण को एंजॉय करें और खूब खुश रहें। ऑफिस में जमकर काम करें और ऑफिस के बाहर जमकर जिंदगी जिएं। आपको पता है कि ऑफिस में प्यार होना कोई अपराध नहीं है। आपने कुछ भी ऐसा नहीं किया, जिसके लिए आपको शर्मिंदा होना पड़े।

बस प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ के बीच एक मजबूत ‘बाउंड्री’ बनाए रखिए। ये सिर्फ एक फेज है। ये गुजर जाएगा। कुछ दिन बाद ऑफिस के लोगों को नया गॉसिप मिल जाएगा और वो उसमें बिजी हो जाएंगे। आप सिर्फ अपने रिलेशनशिप पर काम करिए।

……………… ये खबर भी पढ़िए रिलेशनशिप एडवाइज- हसबैंड प्रमोशन लेकर दूसरे शहर चले गए: जॉब, घर, बच्चा अकेले संभाल रही हूं, अकेली और फ्रस्ट्रेट हूं, क्या करूं?

आप एक मजबूत महिला हैं, जो घर, जॉब और बच्ची की जिम्मेदारी एक साथ संभाल रही हैं। अगर पति दूसरे शहर चले गए हैं और आपको उनका साथ नहीं मिल पा रहा है तो फ्रस्ट्रेशन होना नॉर्मल है। आइए आपकी सिचुएशन को समझते हैं और साथ मिलकर कोई रास्ता निकालते हैं। आगे पढ़िए…

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