बिना वजह उदासी और चिंता? थायरॉइड हो सकता है कारण, जानें डिप्रेशन-एंग्जायटी का कनेक्शन

Last Updated:April 01, 2026, 21:21 IST Thyroid Problem and Mental Health: अगर लंबे समय तक थकान, उदासी या चिंता बनी रहे, तो इसे नजरअंदाज न करें. ये लक्षण थायरॉइड में गड़बड़ी से संबंधित हो सकते हैं. थायरॉइड हार्मोन दिमाग में मौजूद केमिकल्स जैसे सेरोटोनिन और डोपामाइन को प्रभावित करते हैं, ऐसे में इसमें गड़बड़ी सेडनेस और डिप्रेशन के रूप में समाने आ सकती हैं ख़बरें फटाफट Thyroid Problem and Mental Health: थायरॉइड की समस्या सिर्फ शरीर ही नहीं, बल्कि दिमाग और भावनाओं पर भी असर डालती है. आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग थकान, मूड स्विंग या चिंता को आम बात समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन कई बार इसके पीछे हार्मोन से जुड़ी गड़बड़ी होती है. थायरॉइड एक छोटी सी ग्रंथि होती है, जो गर्दन के सामने होती है. यह शरीर में ऐसे हार्मोन बनाती है, जो मेटाबॉलिज्म, दिल की धड़कन, शरीर का तापमान और ऊर्जा को कंट्रोल करते हैं. ये हार्मोन दिमाग के काम करने और हमारे मूड को भी प्रभावित करते हैं. थायरॉइड की समस्या पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में ज्यादा आम हैं. इसलिए महिलाओं में चिड़चिड़ापन आमतौर पर ज्यादा देखा जाता है. हालांकि ये बीमारी गंभीर परिणाम दे सकती है, लेकिन अच्छी बात ये है कि इसे लाइफस्टाइल में बदलाव के साथ कंट्रोल किया जा सकता है. ऐसे में यदि आप मेंटल डिस्ट्रेस से गुजर रहे हैं, तो इसे इग्नोर न करें, और थायराइड चेक करवाएं. थायरॉइड का दिमाग पर असर (Thyroid Mental Health Connection)जब थायरॉइड सही तरीके से काम नहीं करता, तो इसका असर मानसिक स्वास्थ्य पर दिखने लगता है. अगर थायरॉइड हार्मोन कम बनने लगते हैं, जिसे हाइपोथायरॉइडिज्म कहते हैं, तो व्यक्ति को लगातार थकान, उदासी और डिप्रेशन महसूस हो सकता है. ऐसे में काम करने का मन नहीं करता, सोचने की क्षमता धीमी हो जाती है और याददाश्त भी कमजोर पड़ सकती है. डॉक्टरों के अनुसार, थायरॉइड हार्मोन दिमाग में मौजूद केमिकल्स जैसे सेरोटोनिन और डोपामाइन को प्रभावित करते हैं. ये केमिकल्स हमारे मूड को नियंत्रित करते हैं. जब इनका संतुलन बिगड़ता है, तो बिना किसी स्पष्ट कारण के चिंता और घबराहट जैसी समस्याएं होने लगती हैं. थायरॉइड होने के कारणथायरॉइड की समस्या के कई कारण हो सकते हैं. इसमें ऑटोइम्यून बीमारियां जैसे हाशिमोटो और ग्रेव्स डिजीज प्रमुख हैं. इसके अलावा आयोडीन की कमी या अधिकता, ज्यादा तनाव, हार्मोनल बदलाव, प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के बाद शरीर में होने वाले बदलाव भी इस समस्या को बढ़ा सकते हैं. जिन लोगों के परिवार में पहले से थायरॉइड की समस्या रही हो, उनमें इसका खतरा ज्यादा होता है. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें Location : New Delhi,Delhi First Published : April 01, 2026, 21:21 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
रणबीर कपूर ने पहले ठुकरा दिया था रामायण का ऑफर:बेटी राहा के जन्म के बाद बदला फैसला; रामानंद सागर की रामायण देखकर की तैयारी

नीतीश तिवारी के निर्देशन में बनी फिल्म ‘रामायण’ का पहला टीजर कल यानी गुरुवार को भारत में रिलीज किया जाएगा। हाल ही में लॉस एंजेलिस में हुए फिल्म के स्पेशल प्रिव्यू सेशन रणबीर ने बताया की उन्होंने पहले रामायण फिल्म का ऑफर ठुकरा दिया था। लेकिन बेटी राहा के जन्म के बाद रणबीर की सोच बदल गई और उन्होंने अपना फैसला बदलकर फिल्म करने का फैसला किया। इस फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम और साई पल्लवी माता सीता के किरदार में नजर आएंगे। राहा के पिता बने तो बदला फैसला रणबीर कपूर ने इवेंट के दौरान बताया कि उन्हें यह रोल करीब 4 साल पहले ऑफर हुआ था। रणबीर ने कहा, “जब नमित ने मुझे यह रोल दिया, तो मेरा पहला रिएक्शन था कि मैं इसके लायक नहीं हूं और मैं इस किरदार के साथ न्याय नहीं कर पाऊंगा।” हालांकि, साल 2022 में बेटी राहा के जन्म के बाद रणबीर की सोच बदल गई। उन्होंने कहा कि पिता बनने के बाद उनके लाइफस्टाइल में काफी बदलाव आया और उन्हें लगा कि भगवान राम का किरदार निभाने का मौका उनके जीवन का एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित होगा। रामानंद सागर की रामायण देखकर की तैयारी अपनी तैयारी पर बात करते हुए रणबीर ने कहा कि उनके लिए तैयारी उसी दिन शुरू हो गई थी, जिस दिन उन्होंने रामानंद सागर की ‘रामायण’ देखी थी। रणबीर के मुताबिक, “यह किरदार हमारे मन में गहराई से बसा हुआ है। इसकी तैयारी सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक भी थी। हमें इस किरदार के प्रति ईमानदार रहना होगा क्योंकि सदियों से करोड़ों लोग भगवान राम से प्यार करते आए हैं।” उन्होंने कहा कि वे इस जिम्मेदारी को बहुत गंभीरता से ले रहे हैं। 4 हजार करोड़ का बजट; दो पार्ट्स में आएगी फिल्म फिल्म के प्रोड्यूसर नमित मल्होत्रा ने बजट को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि फिल्म के दोनों पार्ट्स को मिलाकर करीब 4,000 करोड़ रुपए (500 मिलियन डॉलर) का बजट रखा गया है। नमित ने कहा, “6-7 साल पहले जब मैंने इस बारे में सोचा था, तो लोगों को लगा कि मैं पागल हूं। हम भारत से दुनिया की सबसे बड़ी फिल्म बना रहे हैं। यह एक महागाथा है जिसे ग्लोबल स्केल पर देखा जाना चाहिए।” हंस जिमर और एआर रहमान का म्यूजिक इस फिल्म के लिए पहली बार ऑस्कर विजेता हंस जिमर और एआर रहमान एक साथ आए हैं। रहमान ने एक इंटरव्यू में बताया कि इतने बड़े और प्रतिष्ठित प्रोजेक्ट के लिए म्यूजिक तैयार करना एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा, “हमें लोगों को कुछ ऐसा देना है जो नया हो, लेकिन साथ ही उनकी जड़ों से भी जुड़ा हो।” फिल्म में रणबीर और साई पल्लवी के अलावा यश (रावण), सनी देओल (हनुमान) और रवि दुबे भी अहम किरदारों में नजर आएंगे।
ये हैं भारत के टॉप-4 किडनी कांड, कैसे होता है कारोबार? कहां से आते हैं डोनर-मरीज, समझें पूरा खेल

How Kidney transplant Nexus works: कानपुर के किडनी कांड ने भले ही एक बार फिर देश में सनसनी मचा दी हो लेकिन भारत में यह कोई पहला मामला नहीं है. इससे पहले भी यहां किडनी के बड़े-बड़े कांडों का पर्दाफाश हुआ है, जिनके तार सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि विदेशों से और भी ज्यादा गहराई से जुड़े रहे हैं. किडनी का ये खेल नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर चलता है जिसमें मजबूर और गरीब लोग फंसते हैं और उनकी मजबूरी और पैसे से मौज शातिर,पढ़े-लिखे डॉक्टर उड़ाते हैं. आज हम आपको देश के सबसे बड़े किडनी कांडों के बारे में बताने के साथ ही ये भी बताएंगे कि कैसे ये काले कारोबार चुपचाप सालों-साल तक बिना किसी को भनक लगे फलते-फूलते रहते हैं और इन्हें किडनी के मरीजों से लेकर किडनी डोनर तक कहां से मिल जाते हैं? और इस खबर में अपनी एक्सपर्ट एडवाइज दे रहे हैं नेफ्रोलॉजी में 40 साल का अनुभव रखने वाले, यूके के मेनचेस्टर में कॉमनवेल्थ फेलोशिप ले चुके, 16 साल तक एम्स नई दिल्ली में नेफ्रोलॉजी विभाग के पूर्व प्रमुख रह चुके और सेव द किडनी क्लिनिक के फाउंडर डॉ. संजय कुमार अग्रवाल. डॉ. अग्रवाल यहां मरीजों से मिली जानकारियां भी शेयर कर रहे हैं. किडनी ट्रांसप्लांट सर्जन और एम्स के पूर्व एचओडी नेफ्रोलॉजी डॉक्टर एसके अग्रवाल. भारत के बड़े किडनी कांड . कानपुर किडनी कांड फिलहाल सबसे बड़े किडनी रैकेटों में से एक बनता जा रहा है. अभी तक मिली जानकारी में कानपुर में बिना रिकॉर्ड के 60 से ज्यादा किडनी ट्रांसप्लांट किए गए हैं. इसमें कई राज्यों के एक दर्जन से ज्यादा अस्पतालों और डॉक्टरों के शामिल होने के सुराग मिले हैं, फिलहाल इसमें डॉक्टर, अस्पताल संचालक और एंबुलेंस चालक की गिरफ्तारी होने के साथ ही जांच चल रही है. . गुरुग्राम 750 किडनी रैकेट- गुरुग्राम में साल 2008 में हुआ किडनी कांड अभी तक का सबसे वीभत्स कांड है और उसके आका देवेंद्र शर्मा और डॉ. अमित कुमार को डॉ. डेथ के नाम से जाना जाता है. करीब सात साल में इन्होंने 750 से ज्यादा लोगों की किडनी निकालकर ट्रांसप्लांट किए और एक मरीज से 30 से 35 लाख रुपये शुद्ध रूप से कमाए थे. इन दोनों को सजा हो गई थी. . महाराष्ट्र चंद्रपुर इंटरनेशनल किडनी सिंडिकेट- महाराष्ट्र के चंद्रपुर में एक किसान के वायरल वीडियो से दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 में इंटरनेशनल किडनी सिंडिकेट का पता चला था. यहां डोनरों को किडनी निकलवाने के लिए विदेश तक भेजा जाता था और 6 से 8 लाख रुपये मिलते थे, जबकि इस किडनी को 70-80 लाख में बेचा जाता था. इस सिंडिकेट के गुर्गे भारत से विदेशों तक फैले थे. . अपोलो दिल्ली-नोएडा किडनी कांड- जुलाई 2024 में अपोलो अस्पताल की किडनी ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. डी विजया राजकुमारी का नाम सुर्खियों में आया जब उस पर अवैध रूप से बांग्लादेश से बुलाए गए किडनी डोनर्स की किडनी नोएडा के यथार्थ अस्पताल में ट्रांसप्लांट करने के मामले में 7 लोग गिरफ्तार हुए. इस दौरान कई बांग्लादेशी डोनर और रिसीवर सामने आए थे. कैसे काम करता है ये नेक्सस?किडनी के मरीजों के मामले में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बन गया है यहां 2023 तक 13 करोड़ से ज्यादा लोगों को किडनी की बीमारी थी. ऐसे में सरकारी अस्पतालों में महीनों तक अपॉइंटमेंट और जांचों की वेटिंग में धक्के खाता या खुद का डोनर न होने पर अस्पताल से मिले डोनर के इंतजार में सालों-साल समय गंवाता मरीज डायलिसिसि के भरोसे आखिर कब तक चले? वहीं दूसरी ओर पेट में दो-दो कीमती किडनी लेकर भूखा मरने वाला या जुए-सट्टे की लत में पड़ा युवक भी सोचता है कि एक बेचकर पैसे मिल जाएं तो क्या बुरा है? और जब दोनों ओर से ही दरवाजे खुले हों तो मरीजों के भगवानों को हैवान बनते कहां देर लगती है? और यहीं से असली खेल शुरू होता है. कहां से आते हैं डोनर? कानपुर किडनी रैकेट ने सभी की नींदें उड़ा दी हैं. आमतौर पर अवैध रूप से किडनी ट्रांसप्लांट करने वाले सेंटर्स दो तरह से किडनी डोनर जुटाते हैं, सबसे पहले भारत में मौजूद गरीबी और तंगहाली, कर्ज या जुए-सट्टे की लत में फंसे लोग इनके निशाने पर होते हैं. जिन्हें पैसे का लालच देकर ये किडनी डोनेट करने के लिए तैयार करते हैं. कुछ लाख रुपये के एवज में ये लोग इसलिए भी तैयार हो जाते हैं क्योंकि इन्हें समझाया जाता है कि एक किडनी से भी वे जिंदा रह सकते हैं. वहीं दूसरा तरीका ये गरीब पड़ौसी देशों, जिनमें खासतौर पर बांग्लादेश है, यहां से लोगों को किडनी बेचने और उसके बदले में मोटा पैसा मिलने की बात पर रजामंद करके यहां तक लाते हैं. बांग्लादेश से कैसे लाए जाते हैं डोनर? अपोलो दिल्ली-नोएडा किडनी रैकेट कांड, कानपुर कांड और डॉक्टर डेथ गुरुग्राम के मामलों की जांच में सामने आया कि बांग्लादेश में भुखमरी से जूझ रहे बहुत सारे लोग किडनी बेचने के लिए भारत लाए जाते हैं, इसके लिए उनके साथ किडनी रिसीपेंट भी लाए जाते हैं. इन्हें अस्पताल के नजदीकी गैस्ट हाउसों में ठहराया जाता है. अगर जांच होती भी है तो इन्हें पहले ही समझा दिया जाता है ये लोग किडनी रिसीपेंट के दूर के रिश्तेदार हैं और मरीज को किडनी दान करना चाहते हैं. एक से ज्यादा डोनर होने पर ये बताते हैं कि जिसकी भी किडनी मैच कर गई वह दे देगा. इस तरह एक रिसीपेंट के साथ कई डोनर साथ आ जाते हैं. जबकि न ये आपस में रिश्तेदार होते हैं और न ही इसको साबित करना या जांच करना स्वास्थ्य विभाग के बस में होता है. ट्रांसप्लांट के लिए कहां से और कैसे लाए जाते हैं लोग?किडनी ट्रांसप्लांट के लिए भी देश और विदेश दोनों जगहों से मरीज आते हैं. डॉ. संजय अग्रवाल बताते हैं कि भारत में करीब 70 से 80 देशों के किडनी मरीज आकर ट्रांसप्लांट कराते हैं. इसकी वजह है यहां बाहर के मुकाबले सस्ता और अच्छा इलाज. किडनी ट्रांसप्लांट की कीमत भारत में कई देशों के मुकाबले कम है वहीं यहां इलाज के साथ पोस्ट ट्रांसप्लांट केयर और रहने-खाने का खर्च भी कम है. जबकि देश के अंदर के मरीजों की बात करें तो कानपुर कांड में
रतलाम रेल मंडल में संदीप शर्मा बने PRI:DRM ऑफिस में संभाला कार्यभार; पूर्व में इंदौर में थे पदस्थ

पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल स्थित मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय (DRM Office) के जनसंपर्क विभाग में बुधवार को संदीप शर्मा ने मुख्य जनसंपर्क निरीक्षक (PRI) के रूप में कार्यभार ग्रहण किया। संदीप शर्मा इससे पूर्व जनसंपर्क कार्यालय इंदौर में मुख्य जनसंपर्क निरीक्षक के पद पर कार्यरत रह चुके हैं। इसके अलावा वे चर्चगेट स्थित पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क कार्यालय में भी वरिष्ठ जनसंपर्क निरीक्षक के रूप में सेवाएं दे चुके हैं। गौरतलब है कि पूर्व मुख्य जनसंपर्क निरीक्षक मुकेश कुमार पांडेय के प्रमोशन के बाद उनका स्थान खाली हो गया था। पदोन्नति के बाद वे पश्चिम रेलवे में जनसंपर्क अधिकारी के रूप में इंदौर में पदस्थ हो गए हैं, जिसके चलते रतलाम DRM कार्यालय में PRI का पद रिक्त था।
Papaya Health Benefits | Papaya Seeds for Kidney | पपीते के फायदे | पपीते के खाने के फायदे |

Last Updated:April 01, 2026, 20:24 IST Papaya Health Benefits: आयुर्वेद में पपीते को केवल एक फल नहीं, बल्कि एक संपूर्ण औषधि माना गया है. अक्सर लोग पपीता खाकर उसके बीज फेंक देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके पत्ते, बीज और यहां तक कि इसकी जड़ भी गंभीर बीमारियों को जड़ से खत्म करने की ताकत रखती है? जिला अस्पताल बाराबंकी के विशेषज्ञ डॉक्टर अमित वर्मा के अनुसार, डेंगू, मलेरिया और किडनी जैसी समस्याओं में पपीता किसी वरदान से कम नहीं है. आइए जानते हैं पपीते के उन औषधीय गुणों के बारे में जो आपके शरीर के लिए प्राकृतिक टॉनिक का काम करते हैं. Papaya Health Benefits: वैसे तो फलों का सेवन सेहत के लिए हमेशा फायदेमंद माना जाता है, और पपीता उनमें एक बेहद गुणकारी फल है. पपीते का फल ही नहीं, बल्कि इसके पत्ते, बीज और दूध भी औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं. आयुर्वेद में पपीते को विशेष महत्व दिया गया है, क्योंकि इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर को कई रोगों से बचाने में मदद करते हैं. प्राचीन समय से ही इसका उपयोग घरेलू और आयुर्वेदिक उपचारों में किया जाता रहा है. पपीता पाचन को बेहतर बनाने, शरीर को ऊर्जा देने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक माना जाता है. इसका नियमित सेवन शरीर के लिए प्राकृतिक टॉनिक की तरह काम करता है और स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है. इन गंभीर बीमारियों में है कारगरआयुर्वेद के अनुसार पपीते का हर हिस्सा हमारी सेहत के लिए काफी फायदेमंद है. यह हमें कब्ज, अपच, डेंगू, मलेरिया, पाचन संबंधी विकार, बुखार और किडनी जैसी कई बीमारियों में काफी राहत पहुंचाता है. इसके प्राकृतिक गुण शरीर की आंतरिक सफाई करने में मदद करते हैं. एक्सपर्ट डॉक्टर की सलाह: कैसे करें इस्तेमाल?जिला अस्पताल बाराबंकी के चिकित्सक डॉक्टर अमित वर्मा (MD मेडिसिन) ने बताया कि पपीता एक ऐसा फल है जो साल भर पाया जाता है. इसके फल, बीज, पत्ते और जड़ में बहुत सारे औषधीय गुण मौजूद होते हैं. डेंगू और टाइफाइड: जिन लोगों को डेंगू, मलेरिया, बुखार या टाइफाइड की वजह से प्लेटलेट्स कम हो जाती हैं, वहां पर इसकी पत्तियों के रस का इस्तेमाल करने से काफी फायदा होता है. किडनी की समस्या: अगर किसी को किडनी में प्रॉब्लम है, तो वहां पर इसके बीजों को पीसकर चूर्ण बना लें. इसे जल के साथ लेने से काफी लाभ मिलता है. पाचन और मोटापा: इसके अलावा कब्ज, अपच, गैस व वजन बढ़ने की समस्या में पपीते के फल का इस्तेमाल करना चाहिए. इससे पाचन शक्ति मजबूत होती है और पेट की समस्याओं से छुटकारा मिलता है. सावधानी: किन लोगों को नहीं करना चाहिए सेवन?डॉक्टर वर्मा ने सावधानी बरतने की सलाह देते हुए कहा कि कुछ विशेष स्थितियों में पपीते का सेवन हानिकारक हो सकता है. गर्भवती महिलाओं को पपीते से परहेज करना चाहिए. साथ ही, जिन महिलाओं को पीरियड्स अधिक आ रहे हैं, उन्हें भी इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. About the Author Rahul Goel राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें Location : Bara Banki,Uttar Pradesh First Published : April 01, 2026, 20:24 IST
PM मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा मामलों पर बैठक जारी:पश्चिम एशिया के हालात पर चर्चा; शाह-जयशंकर सहित कई केंद्रीय मंत्री मौजूद

दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास पर PM मोदी की अध्यक्षता में बुधवार शाम 7 बजे से कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक जारी है। इसमें पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण भारत में मौजूदा हालात की समीक्षा हो रही है। मीटिंग में अमित शाह, एस जयशंकर, निर्मला सीतारमण, पीयूष गोयल, शिवराज सिंह चौहान, जेपी नड्डा, अश्विनी वैष्णव, मनोहर लाल खट्टर, प्रल्हाद जोशी, किंजरापु राममोहन नायडू और हरदीप सिंह पुरी समेत कई केंद्रीय मंत्री शामिल हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, PM के प्रमुख सचिव पी.के. मिश्रा और शक्तिकांत दास और कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन भी मौजूद हैं। मीटिंग में आम लोगों की जरूरी जरूरतों जैसे खाद्य, LPG और पेट्रोल-डीजल उपलब्धता पर चर्चा हो रही है। 10 दिन में दूसरे बार CCS मीटिंग कर रहे PM मोदी पिछले 10 दिनों के भीतर CCS की यह दूसरी मीटिंग है। इससे पहले 23 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने CCS मीटिंग की अध्यक्षता की थी। इसमें भारत पर पश्चिम एशिया में संघर्ष के प्रभाव को कम करने के उपायों का आकलन किया गया था। PM ने कहा था कि यह समस्या लगातार बढ़ रही है और पूरी दुनिया इससे प्रभावित हो रही है। उन्होंने निर्देश दिया था कि सरकार के सभी विभाग मिलकर काम करें ताकि आम लोगों को कम से कम परेशानी हो। मीटिंग में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और अन्य अधिकारी मौजूद थे। कैबिनेट सचिव ने अब तक उठाए गए और प्रस्तावित कदमों की जानकारी दी थी। इसके अलावा कृषि, उर्वरक, खाद्य सुरक्षा, पेट्रोलियम, बिजली, MSMEs, निर्यात, शिपिंग, व्यापार, वित्त और सप्लाई चेन जैसे विभिन्न क्षेत्रों पर संभावित प्रभाव और उससे निपटने के उपायों पर चर्चा हुई। 27 मार्च : PM मोदी ने ईरान जंग पर मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ईरान जंग को लेकर राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की थी। उन्होंने कहा कि सभी राज्य टीम इंडिया की तरह मिलकर काम करें और अपनी तैयारियां मजबूत रखें। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई बैठक में PM ने राज्यों की तैयारियों और योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता अर्थव्यवस्था, ऊर्जा और नागरिकों की सुरक्षा है। PM ने सप्लाई चेन सही रखने, जमाखोरी-कालाबाजारी करने वालों पर सख्ती करने को कहा। साथ ही खाद के स्टॉक व वितरण पर नजर रखने को कहा। पश्चिम एशिया में 28 फरवरी से जंग, तेल-गैस पर संकट पश्चिम एशिया में 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल की तरफ से ईरान पर हमले के बाद युद्ध शुरू हुआ था। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में जवाबी हमले किए। अब युद्ध एक महीने से ज्यादा समय से जारी है और इसके जल्द खत्म होने के आसार नहीं दिख रहे हैं। ईरान के नियंत्रण में स्थित होर्मुज (Strait of Hormuz) इस संघर्ष के कारण प्रभावित हुआ है। इसके चलते भारत सहित कई देशों को तेल और गैस सप्लाई में बाधा का सामना करना पड़ रहा है। होर्मुज से दुनिया की करीब 20 प्रतिशत ऊर्जा सप्लाई होती है। संघर्ष शुरू होने के बाद से प्रधानमंत्री ने सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, फ्रांस, नीदरलैंड, मलेशिया, इजराइल और ईरान सहित कई देशों के नेताओं से बातचीत की है। उन्होंने 24 मार्च को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से भी बातचीत की थी। ——————————————- ये खबर भी पढ़ें… केंद्र ने कॉमर्शियल LPG कोटा 50% से बढ़ाकर 70% किया, स्टील-ऑटो और टेक्सटाइल सेक्टर को प्राथमिकता केंद्र सरकार ने देश में जारी गैस संकट के बीच राज्यों को एक बार फिर LPG सप्लाई बढ़ाने का निर्देश दिया है। सरकार ने शुक्रवार (27 मार्च) को कॉमर्शियल LPG सिलेंडर के एलोकेशन यानी कोटा को 50% से बढ़ाकर 70% कर दिया है। इस फैसले का सबसे ज्यादा फायदा उन उद्योगों को मिलेगा जो पूरी तरह LPG पर निर्भर हैं। पूरी खबर पढ़ें… सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10-10 रुपए घटाई, तेल कंपनियां दाम बढ़ा सकती थीं सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10-10 रुपए की कटौती कर दी है। पेट्रोल पर ड्यूटी ₹13 रुपए प्रति लीटर से घटाकर ₹3 रुपए, जबकि डीजल पर ₹10 से शून्य कर दी गई है। न्यूज एजेंसी PTI ने यह जानकारी दी। पूरी खबर पढ़ें…
Indigo Flights Fare Hike | Jet Fuel Surge Impacts Travel

नई दिल्ली5 मिनट पहले कॉपी लिंक एयरलाइंस के लिए जेट-फ्यूल सबसे बड़ा खर्च होता है। कुल ऑपरेटिंग खर्च में इसकी हिस्सेदारी 30% से 40% होती है। इंडिगो की फ्लाइट्स कल से महंगी हो जाएंगी। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी ने 18 दिन में दूसरी बार सभी घरेलू और इंटरनेशनल फ्लाइट्स पर ‘फ्यूल सरचार्ज’ लगाने की घोषणा की है। कंपनी ने इससे पहले 14 मार्च को फ्यूल सरचार्ज बढ़ाया था। एयरलाइन ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी जेट फ्यूल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी की वजह से यह फैसला लिया है। इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) के डेटा के अनुसार, पिछले एक महीने में फ्यूल की कीमतें 130% से ज्यादा बढ़ चुकी हैं। एक्सट्रा फ्यूल चार्ज के साथ टिकटों की नई कीमतें 2 अप्रैल रात 12:01 बजे से लागू हो जाएंगी। यानी घरेलू उड़ानों के लिए आपको अधिकतम 950 रुपए तक और इंटरनेशनल फ्लाइट्स के लिए अधिकतम 10 हजार रुपए तक ज्यादा चार्ज देना होगा। दूरी के हिसाब से लगेगा चार्ज जेट फ्यूल की कीमतें 130% बढ़ने के बाद भी राहत की बात यह है कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयरलाइंस को पूरा बोझ ग्राहकों पर डालने से रोक दिया है। सरकार ने अभी डोमेस्टिक फ्लाइट्स के लिए सिर्फ 25% आंशिक बढ़ोत्तरी की ही अनुमति दी है। इंडिगो के अनुसार, उन्होंने दूरी के अनुसार फ्यूल चार्ज को ‘री-कैलिब्रेट’ किया है, यानी आपका सफर जितना लंबा होगा, टिकट के लिए फ्यूल चार्ज भी उतना ही ज्यादा देना होगा। इंटरनेशनल रूट पर खर्च बढ़ा एयरलाइन के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर लागत का दबाव बहुत ज्यादा है। पिछले एक महीने में ही ग्लोबल मार्केट में जेट फ्यूल के दाम दोगुने से ज्यादा हो गए हैं, जिससे विमान उड़ाने का खर्च काफी बढ़ गया है। फ्यूल महंगा होने की सबसे बड़ी वजह ईरान जंग और कच्चे तेल के बाजार में अस्थिरता है। हॉर्मुज रूट से सप्लाई रुकने के डर ने कीमतें बढ़ा दी हैं। भारत तेल के लिए दूसरे देशों पर निर्भर है, इसलिए वैश्विक हलचल का सीधा असर यहां की एयरलाइंस पर हो रहा है। फ्यूल पर ₹50 प्रति लीटर अतिरिक्त ड्यूटी को मंजूरी लागत बढ़ने की एक और बड़ी वजह टैक्स में बढ़ोतरी है। बुधवार को राज्यसभा में विमान ईंधन पर अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी लगाने का प्रस्ताव पास हो गया। पंकज चौधरी द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव में 26 मार्च 2026 के एक नोटिफिकेशन को मंजूरी दी गई। इसके तहत फाइनेंस एक्ट 2002 में बदलाव कर एटीएफ पर ₹50 प्रति लीटर की ‘स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी’ लगाने का फैसला किया गया है। एयरलाइंस के लिए सबसे बड़ा खर्च होता है जेट-फ्यूल जेट फ्यूल की कीमतें बढ़ने के चलते दुनियाभर की एयरलाइंस ने न सिर्फ टिकट के दाम बढ़ा दिए हैं, बल्कि अपने भविष्य के वित्तीय अनुमानों यानी फाइनेंशियल आउटलुक को भी वापस लिया है। एयरलाइंस के लिए जेट-फ्यूल सबसे बड़ा खर्च होता है। कुल ऑपरेटिंग खर्च में इसकी हिस्सेदारी 30% से 40% होती है। तेल की कीमतों में आए इस अचानक बदलाव ने एयरलाइंस के बजट को बिगाड़ दिया है। एयर न्यूजीलैंड और क्वांटास जैसी बड़ी कंपनियों ने भी साफ कर दिया है कि वे बढ़े हुए खर्च का बोझ यात्रियों पर डालेंगे। दुनियाभर में इन एयरलाइंस ने भी किराया बढ़ाया एयर न्यूजीलैंड: एयर न्यूजीलैंड ने मंगलवार को अपने टिकटों के दाम में बड़ी बढ़ोतरी की घोषणा की है। कंपनी ने घरेलू उड़ानों के लिए एक तरफ का किराया 10 न्यूजीलैंड डॉलर बढ़ा दिया है। वहीं शॉर्ट-हॉल इंटरनेशनल फ्लाइट्स के लिए 20 डॉलर और लंबी दूरी की उड़ानों के लिए 90 डॉलर की बढ़ोतरी की गई है। कंपनी ने 2026 के लिए अपना कमाई का अनुमान भी वापस ले लिया है, क्योंकि मार्केट में भारी अस्थिरता है। हांगकांग एयरलाइंस: हांगकांग एयरलाइंस गुरुवार से फ्यूल सरचार्ज में 35.2% तक की बढ़ोतरी करने जा रही है। मालदीव, बांग्लादेश और नेपाल जैसे देशों के लिए यह सरचार्ज 284 हांगकांग डॉलर से बढ़ाकर 384 हांगकांग डॉलर कर दिया गया है। वहीं कैथे पैसिफिक ने मार्च में लंदन और ज्यूरिख के लिए एक्स्ट्रा फ्लाइट्स शुरू की हैं ताकि प्रभावित रूट्स के यात्रियों को ऑप्शन मिल सके। कंपनी फिलहाल हर महीने फ्यूल सरचार्ज का रिव्यू कर रही है। क्वांटास और SAS: ऑस्ट्रेलिया की फ्लैग कैरियर क्वांटास एयरवेज ने अपने इंटरनेशनल रूट्स पर किराया बढ़ा दिया है। हालांकि, कंपनी का कहना है कि यूरोप जाने वाली फ्लाइट्स 90% से ज्यादा फुल चल रही हैं, इसलिए वे आने वाले महीनों में कैपेसिटी बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं। नॉर्डिक देशों यानी उत्तरी यूरोप की प्रमुख एयरलाइन SAS (स्कैंडिनेवियन एयरलाइंस) ने भी बढ़ती लागत को देखते हुए अस्थायी प्राइस एडजस्टमेंट लागू किया है। ————————— ये खबर भी पढ़ें… एअर इंडिया की घरेलू फ्लाइट ₹399 महंगी: भारतीय एयरलाइंस ने इंटरनेशनल फ्लाइट्स का किराया 15% बढ़ाया; ईरान जंग से जेट फ्यूल के दाम दोगुने मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब आम लोगों की जेब पर भी पड़ने लगा है। एअर इंडिया 12 मार्च से घरेलू फ्लाइट टिकटों पर 399 रुपये का फ्यूल सरचार्ज लगाएगी। यानी टिकट खरीदते समय अब आपको 399 रुपये अतिरिक्त देने होंगे। वहीं, एअर इंडिया इंटरनेशनल फ्लाइट्स पर भी सरचार्ज लगेगा। ब्लूमबर्ग ने भी अपनी रिपोर्ट में जानकारी दी कि भारतीय एयरलांइस ने इंटरनेशनल फ्लाइट्स के किराए में करीब 15% की बढ़ोतरी की है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ती जंग और होर्मुज रूट प्रभावित होने के कारण कच्चे तेल की कीमतों और जेट फ्यूल के दाम में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। जिसका असर ग्लोबल एविएशन इंडस्ट्री पर भी दिखने लगा है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Fish tips: ये मछली 35% तक कम कर सकती है हार्ट अटैक का रिस्क! दिल से लेकर जोड़ों तक, जानें फायदे

Last Updated:April 01, 2026, 20:09 IST Healthiest Fish To Eat: मछली में ओमेगा- 3 के साथ कई सारे माइक्रो न्यूट्रिएंट्स होते हैं. हालांकि हर मछली में मात्रा कम या ज्यादा हो सकती है. ऐसे में दक्षिण भारत में मिलने वाली मछली की जिलिपी प्रजाती सेहत के लिए बहुत साबित होती है. एक्सपर्ट बताते हैं कि इसके सेवन से हार्ट अटैक और स्ट्रोक का रिस्क कम होता है, साथ ही ये मछली दिल, दिमाग और आंखों के साथ जोड़ों के लिए भी असरदार दवा का काम करती है. बिना साइड इफेक्ट्स वाले प्रोटीन युक्त खाने की सूची में मछली सबसे ऊपर है. क्योंकि रेड मीट खाने को लेकर डॉक्टर चाहे जितनी भी चेतावनी दें, मछली को लेकर कोई खास आपत्ति नहीं होती. इसकी वजह यह है कि लाल मांस की तरह मछली खाने से कोई नुकसान नहीं होता. उल्टा, मछली खाने के कई फायदे हैं. मछली में प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होती है, साथ ही यह अन्य माइक्रोन्यूट्रिएंट्स से भी भरपूर होती है. मछली में अच्छी मात्रा में हेल्दी फैट भी पाया जाता है. इसमें मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड हमारे लिए बहुत जरूरी है. हालांकि इसकी जरूरत बहुत कम मात्रा में होती है, लेकिन यह दिल और दिमाग के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. आज इस रिपोर्ट में हम जानेंगे कि किन-किन मछलियों में ओमेगा-3 फैटी एसिड सबसे ज्यादा पाया जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google आजकल हमारे देश में रोहू, कतला, पाबदा, पार्शे, हिल्सा के अलावा शंकर, खंगा मछली, टूना, कार्प, येलो रॉक, टंग फिश, कोटुआ, वीरल से लेकर झींगा तक सैकड़ों तरह की मछलियां खाई जाती हैं. लेकिन अगर पूछा जाए कि सेहत के लिए सबसे पौष्टिक मछली कौन सी है, तो बहुत कम लोग इसका जवाब जानते हैं. आज इस रिपोर्ट में हम आपको एक ऐसी मछली के बारे में बताएंगे, जो न सिर्फ स्वाद में बेहतरीन है, बल्कि सेहत के लिए भी खजाना है. भारत के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग तरह की मछलियां मिलती हैं, जो अपने-अपने क्षेत्र की खास और लोकप्रिय मछली मानी जाती हैं. लेकिन आजकल बड़े आयात-निर्यात बाजार की वजह से, दूसरे राज्यों में मिलने वाली कई मछलियां भी बाजारों में बिकती हैं. और हम बिना जाने ही ऐसी मछलियों को नजरअंदाज कर देते हैं. ऐसी ही एक मछली दक्षिण भारत में बहुत लोकप्रिय है और यह बहुत पौष्टिक भी है. एक तरह से यह मछली पोषण का खजाना है. इसका जिलिपी मछली है. नाम सुनकर भले ही आपको हैरानी हो, लेकिन इसे देखकर आप भी पहचान जाएंगे. इस प्रजाति की सबसे बड़ी मछली का वजन लगभग 1 किलोग्राम तक होता है. यह मछली खासतौर पर अपने बेहद नरम मांस के लिए जानी जाती है. इसे कभी-कभी मालाबार किंगफिश भी कहा जाता है. एक्सपर्ट बताते हैं कि जिलिपी मछली प्रोटीन का बहुत अच्छा स्रोत है और इसमें फैट की मात्रा बहुत कम होती है. यह एक हेल्दी मछली है, क्योंकि इसमें मांस की तुलना में ज्यादा पोषक तत्व होते हैं. जिलिपी मछली में सोडियम, कैलोरी और कुल फैट की मात्रा भी बहुत कम होती है. इसके अलावा, इस मछली की सबसे खास बात यह है कि इसमें ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटी एसिड भरपूर मात्रा में होते हैं. ये दिल, आंखों और जोड़ों की सेहत के लिए बहुत फायदेमंद हैं. सैल्मन मछली को ओमेगा-3 फैटी एसिड का सबसे बड़ा स्रोत माना जाता है, लेकिन जिलिपी मछली में भी यह भरपूर मात्रा में पाया जाता है. डॉक्टरों का कहना है कि इस मछली को खाने से शरीर में सूजन कम होती है. यह ट्राइग्लिसराइड के स्तर को कम करने में मदद करती है. इसके अलावा, यह मछली धमनियों में प्लाक जमने की प्रक्रिया को भी धीमा करती है. रिसर्च में पाया गया है कि अगर रोजाना कम से कम 250 मिलीग्राम ओमेगा-3 फैटी एसिड लिया जाए, तो हार्ट अटैक से मौत का खतरा 35 फीसदी तक कम हो जाता है. इसलिए, अगर आप नियमित रूप से जिलिपी मछली खाते हैं, तो आपका दिल स्वस्थ रहता है. इसके अलावा, डॉक्टरों का कहना है कि इस मछली के फैटी एसिड आर्थराइटिस के लक्षणों को कम करते हैं और डिप्रेशन व याददाश्त कमजोर होने जैसी समस्याओं से भी बचाते हैं. यह मछली सैचुरेटेड फैटी एसिड से भरपूर है, जो कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने और दिल की सेहत सुधारने में मदद करता है. नियमित रूप से इस मछली को खाने से स्ट्रोक और हार्ट अटैक का खतरा भी कम होता है. सावधानी: यह रिपोर्ट सिर्फ आपकी जानकारी के लिए है. इसमें हमने केवल सामान्य ज्ञान और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी जानकारी दी है. अगर आप अपने स्वास्थ्य, जीवन या विज्ञान से जुड़ी कोई जानकारी पढ़ते हैं, तो उसे अपनाने से पहले किसी विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें. First Published : April 01, 2026, 20:09 IST
Agniveer MR Musician Notification Out

Hindi News Career Agniveer MR Musician Notification Out | Punjab & Ordnance Factory Jobs 32 मिनट पहले कॉपी लिंक आज की सरकारी नौकरी में जानकारी अग्निवीर एमआर म्यूजिशियन का नोटिफिकेशन जारी होने की, ICAI ने 108 पदों पर निकाली भर्ती की। साथ ही गुजरात में स्टाफ नर्स की 90 वैकेंसी की। इन जॉब्स के बारे में पूरी जानकारी के साथ आवेदन की प्रक्रिया यहां देखिए.… 1. अग्निवीर MR म्यूजिशियन का नोटिफिकेशन जारी, 10वीं पास को मौका इंडियन नेवी की ओर से अग्निवीर एमआर म्यूजिशियन के पदों पर भर्ती का ऑफिशियल नोटिफिकेशन जारी किया गया है। इस भर्ती के लिए फीस जमा करने की आखिरी तारीख 26 अप्रैल तय की गई है। एडमिट कार्ड 10 मई को जारी किए जाएंगे। केवल अविवाहित पुरुष और महिला उम्मीदवार ही आवेदन कर सकते हैं। चार साल के दौरान विवाह करने पर बर्खास्त कर दिया जाएगा। एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : मान्यता प्राप्त संस्थान से न्यूनतम 50% अंकों के साथ 10वीं पास। उम्मीदवारों को हिंदुस्तानी संगीत का अनुभव होना चाहिए। शारीरिक योग्यता : पुरुष उम्मीदवारों को 1.6 किलोमीटर की दौड़ 6 मिनट 30 सेकेंड में पूरी करनी होगी। पुरुष उम्मीदवारों को 20 उठक-बैठक (squats), पुश-अप और सिट-अप्स भी लगाने होंगे। महिला उम्मीदवारों को 1.6 किमी की दौड़ 8 मिनट में, साथ ही 15 उठक-बैठक, 10 पुश-अप और सिट-अप्स लगाने होंगे। सैलरी : पहले साल : 30 हजार रुपए प्रतिमाह दूसरे साल : 33 हजार रुपए प्रतिमाह तीसरे साल: 36,500 रुपए प्रतिमाह चौथे साल : 40 हजार रुपए प्रतिमाह अन्य अलाउंस का लाभ भी मिलेगा। एज लिमिट : उम्मीदवारों का जन्म 01 जुलाई, 2024 से लेकर 31 दिसंबर 2028 के बीच होना चाहिए। सिलेक्शन प्रोसेस : फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट रिटन एग्जाम म्युजिकल एप्टीट्यूड टेस्ट मेडिकल एग्जाम एग्जाम पैटर्न : एग्जाम मोड : ऑब्जेक्टिव टाइप प्रश्नों की संख्या : 50 ड्यूरेशन : आधा घंटा लैंग्वेज : हिंदी, इंग्लिश सब्जेक्ट : साइंस, मैथ्स और जनरल नॉलेज सिलेबस : 10वीं बेस्ड ऐसे करें आवेदन : ऑफिशियल वेबसाइट www.joinindiannavy.gov.in पर जाएं। ऑनलाइन अप्लाई लिंक पर क्लिक करें मांगी गई सभी डिटेल्स दर्ज करें। जरूरी डॉक्यूमेंट्स की स्कैन कॉपी अपलोड करें। फॉर्म भरने के बाद इसका प्रिंटआउट निकाल कर रखें। ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक ऑनलाइन आवेदन लिंक 2. ICAI ने 108 पदों पर निकाली भर्ती, एज लिमिट 55 साल द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट ऑफ इंडिया ने डायरेक्टर और एग्जीक्यूटिव ऑफिसर के 108 पदों पर भर्ती निकाली है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट www.icai.org पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। इस भर्ती के लिए शुरुआती पोस्टिंग दिल्ली या नोएडा में होगी। उसके बाद भारत के किसी भी हिस्से में पोस्टिंग हो सकती है। वैकेंसी डिटेल्स : पद का नाम पदों की संख्या एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (सीए) 75 एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (लीगल) 15 एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (सीएस) 2 एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (सस्टेनेबिलिटी) 3 एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (इकोनॉमिक्स) 1 एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (इंफ्रास्ट्रक्चर) 2 एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (आईटी) 10 कुल पदों की संख्या 108 एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (सीए) : चार्टर्ड अकाउंटेंट की डिग्री। एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (लीगल) : लॉ की डिग्री। एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (सीएस) : कंपनी सेक्रेटरी की डिग्री। एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (सस्टेनेबिलिटी): सस्टेनेबिलिटी में पीएचडी एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (इकोनॉमिक्स): पीएचडी के साथ दो साल का अनुभव एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (इंफ्रास्ट्रक्चर): सिविल, आर्किटेक्चर (बीटेक) के साथ एक्सपीरियंस एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (आईटी) : बीटेक (सीएस, आईटी) के साथ अनुभव एज लिमिट : अधिकतम 55 साल रिजर्व कैटेगरी के उम्मीदवारों को अधिकतम उम्र में छूट दी जाएगी। फीस: सभी उम्मीदवारों के लिए : 500 रुपए सैलरी : 56,100 – 1,77,500 रुपए प्रतिमाह सिलेक्शन प्रोसेस : कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट इंटरव्यू डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन एग्जाम पैटर्न : एग्जाम मोड कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट लैंग्वेज इंग्लिश क्वेश्चन पेपर टाइप एमसीक्यू + डिस्क्रिप्टिव प्रश्नों की संख्या और अंक जनरल सेक्शन: पार्ट ए : एमसीक्यू (30 प्रश्न – 30 अंक) पार्ट बीए : डिस्क्रिप्टिव (2 प्रश्न – 30 अंक) टेक्निकल सेक्शन : एमसीक्यू (90 प्रश्न – 90 अंक) कुल अंक 150 एग्जाम ड्यूरेशन 150 मिनट मार्किंग स्कीम एमसीक्यू (120 प्रश्न): 1 अंक डिस्क्रिप्टिव (2 प्रश्न): हर प्रश्न पर 15 अंक निगेटिव मार्किंग एमसीक्यू : 0.25 अंक हर गलत उत्तर के लिए डिस्क्रिप्टिव : कोई निगेटिव मार्किंग नहीं ऐसे करें आवेदन : ऑफिशियल वेबसाइट www.icai.org पर जाएं। अपनी बेसिक डिटेल्स डालकर रजिस्ट्रेशन करें। मांगे गए डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें। फीस जमा करके फॉर्म सब्मिट करें। इसका प्रिंटआउट निकाल कर रखें। ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक ऑनलाइन आवेदन लिंक 3. गुजरात में स्टाफ नर्स की 90 वैकेंसी, 92 हजार से ज्यादा सैलरी गुजरात अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड में 90 पदों पर भर्ती निकली है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट ojas.gujarat.gov.in या gsssb.gujarat.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। कैटेगरी वाइज वैकेंसी डिटेल्स : कैटेगरी का नाम पदों की संख्या सामान्य 47 ईडब्ल्यूएस 9 एसईबीसी 15 एसटी 19 एक्स सर्विसमैन (होरिजोंटल) 9 एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : गुजरात सरकार द्वारा स्थापित गुजरात आयुर्वेदिक नर्सिंग फैकल्टी से आयुर्वेदिक नर्सिंग में डिप्लोमा बेसिक कंप्यूटर नॉलेज गुजराती या हिंदी या दोनों भाषाओं का नॉलेज गुजराती बोर्ड ऑफ आयुर्वेदिक और यूनानी सिस्टम ऑफ मेडिसिन में रजिस्ट्रेशन एज लिमिट : न्यूनतम : 18 साल अधिकतम : 35 साल रिजर्व कैटेगरी के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार छूट दी जाएगी। फीस : जनरल : 500 रुपए एससी, एसटी, महिला, पीडब्ल्यूडी, ईएसएम : 400 रुपए सैलरी : 29,200 – 92,300 रुपए प्रतिमाह सिलेक्शन प्रोसेस : रिटन एग्जाम मेरिट लिस्ट डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन जरूरी डॉक्यूमेंट्स : 10वीं सर्टिफिकेट (DOB प्रूफ) आयुर्वेदिक नर्सिंग डिप्लोमा मार्कशीट्स और सर्टिफिकेट आधार कार्ड जाति प्रमाण पत्र (SC/ST/SEBC/EWS) PwD सर्टिफिकेट (अगर लागू) कंप्यूटर नॉलेज सर्टिफिकेट गुजराती/हिंदी ज्ञान का प्रमाण (अगर जरूरी) पासपोर्ट साइज फोटो और सिग्नेचर एग्जाम पैटर्न : पैरामीटर डिटेल्स एग्जाम टाइप MCQ बेस्ड रिटन एग्जाम एग्जाम मोड सीबीटी या OMR बेस्ड एग्जाम सेक्शन पार्ट – ए और पार्ट – बी कुल प्रश्न 210 प्रश्न (पार्ट – ए : 90, पार्ट बी : 120) टोटल टाइम 3 घंटे (180 मिनट) निगेटिव मार्किंग हर गलत उत्तर पर 1/4 अंक काटा जाएगा। ऐसे करें आवेदन : ऑफिशियल वेबसाइट ojas.gujarat.gov.in या gsssb.gujarat.gov.in पर जाएं। होमपेज पर दिए गए भर्ती विज्ञापन पर क्लिक करें। अप्लाई ऑनलाइन पर क्लिक करके फॉर्म भरें। जरूरी डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें। फॉर्म भरकर फीस जमा करें। फॉर्म सब्मिट करें। इसका प्रिंटआउट लेकर रखें। ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक ऑनलाइन आवेदन लिंक 4. MPLRS में 770 पदों पर भर्ती, लास्ट डेट 3 अप्रैल मध्य प्रदेश लैंड रिकॉर्ड्स मैनेजमेंट सोसाइटी (MPLRS) की ओर
एमपी में आरटीई लॉटरी खुलेगी कल:1.78 लाख में से 1 लाख 22 हजार बच्चों को निजी स्कूलों में मिलेगा प्रवेश

शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत प्रदेश में निजी स्कूलों में बिना शुल्क प्रवेश के लिए 2 अप्रैल को दोपहर 2 बजे ऑनलाइन लॉटरी निकाली जाएगी। इस प्रक्रिया में इस बार करीब 1 लाख 78 हजार 714 पात्र बच्चों को शामिल किया है। जिन्हें प्रदेश के लगभग 22 हजार निजी स्कूलों की 1 लाख 22 हजार 551 सीटों पर प्रवेश मिलेगा। लॉटरी का सीधा प्रसारण राज्य शिक्षा केंद्र के यूट्यूब चैनल पर किया जाएगा। लॉटरी के बाद अभिभावक आरटीई पोर्टल पर अपने बच्चे को आवंटित स्कूल की जानकारी देख सकेंगे और प्रवेश प्रक्रिया आगे बढ़ा सकेंगे। ऑनलाइन लॉटरी का होगा सीधा प्रसारण राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा गुरुवार को दोपहर 2 बजे आरटीई के तहत ऑनलाइन लॉटरी प्रक्रिया आयोजित की जाएगी। इसका लाइव प्रसारण यूट्यूब चैनल पर किया जाएगा, जिससे अभिभावक पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से देख सकेंगे। लॉटरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोपहर 2:15 बजे के बाद अभिभावक आरटीई पोर्टल पर लॉगिन कर अपने बच्चे को आवंटित स्कूल की जानकारी ले सकेंगे। साथ ही आवंटन पत्र डाउनलोड करने की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। एसएमएस से भी मिलेगी जानकारी राज्य शिक्षा केंद्र की ओर से अभिभावकों को सुविधा देने के लिए आवंटित स्कूल की जानकारी उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एसएमएस के माध्यम से भी भेजी जाएगी। इससे अभिभावकों को तुरंत जानकारी मिल सकेगी और उन्हें बार-बार पोर्टल चेक करने की आवश्यकता नहीं होगी। आरटीई अधिनियम के तहत गैर-अनुदान प्राप्त निजी स्कूलों में कमजोर वर्ग और वंचित समूह के बच्चों के लिए कम से कम 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित रहती हैं। इन सीटों पर बच्चों को पूरी तरह नि:शुल्क शिक्षा दी जाती है। प्रदेश में यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और पारदर्शी तरीके से संचालित की जाती है, जिसमें आवेदन से लेकर स्कूल आवंटन तक सभी चरण डिजिटल माध्यम से पूरे किए जाते हैं। 3 से 15 अप्रैल तक चलेगी एडमिशन प्रक्रिया लॉटरी में चयनित बच्चों के अभिभावकों को 3 अप्रैल से 15 अप्रैल 2026 के बीच संबंधित स्कूल में जाकर प्रवेश प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इस दौरान अभिभावकों को आवश्यक दस्तावेज लेकर स्कूल में उपस्थित होना होगा, ताकि समय सीमा के भीतर बच्चे का प्रवेश सुनिश्चित किया जा सके। राज्य शिक्षा केंद्र के अधिकारियों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और सरल बनाने के लिए तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इससे किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना कम होती है और पात्र बच्चों को निष्पक्ष तरीके से स्कूल आवंटन सुनिश्चित किया जाता है।









