जीएमसी में सीधी भर्ती पर बवाल, डॉक्टरों का सामूहिक बहिष्कार:‘डीन होश में आओ’ के नारे, आदेश वापस नहीं हुआ तो 3 हजार डॉक्टर नहीं करेंगे इलाज

राजधानी भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में ‘आंतरिक सीधी भर्ती’ को लेकर विवाद अब खुलकर सड़क पर आ गया है। मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन के आह्वान पर डॉक्टरों ने न सिर्फ इस भर्ती प्रक्रिया का सामूहिक बहिष्कार किया, बल्कि लगातार दूसरे दिन एक घंटे का ‘पेन डाउन’ आंदोलन कर डीन कार्यालय के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। “डीन होश में आओ” जैसे नारों के बीच डॉक्टरों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि विवादित आदेश तत्काल वापस नहीं लिया गया तो आने वाले दिनों में ओपीडी सहित सभी सेवाएं ठप कर दी जाएंगी। डॉक्टरों का कहना है कि जब कोई उम्मीदवार ही इस प्रक्रिया में शामिल नहीं हो रहा, तो यह विज्ञप्ति अपने आप ही निरस्त मानी जानी चाहिए। सीधी भर्ती के खिलाफ एकजुट हुए डॉक्टर गांधी मेडिकल कॉलेज में 25 मार्च को डीन कार्यालय द्वारा पदोन्नति के पदों पर ‘आंतरिक सीधी भर्ती’ का विज्ञापन जारी किया गया था। इसी के विरोध में मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन ने मोर्चा खोल दिया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. राकेश मालवीया का कहना है कि यह भर्ती प्रक्रिया सीनियर डॉक्टरों के अधिकारों के खिलाफ है। इससे उनकी वर्षों की वरिष्ठता और उससे जुड़े वित्तीय लाभ खत्म हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई मेडिकल कॉलेजों में इस तरह की भर्ती का विरोध हो रहा है। हाल ही में ग्वालियर हाईकोर्ट ने भी इसी तरह की भर्ती प्रक्रिया को निरस्त किया है, जिससे डॉक्टरों के पक्ष को मजबूती मिली है। दूसरे दिन भी पेन डाउन आंदोलन गुरुवार को लगातार दूसरे दिन दोपहर 12 से 1 बजे तक ‘पेन डाउन’ आंदोलन किया गया। इस दौरान हमीदिया अस्पताल के ब्लॉक 2 में बड़ी संख्या में डॉक्टर एकत्र हुए और भर्ती प्रक्रिया के खिलाफ आवाज उठाई। आंदोलन में विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक, सह-प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक और मेडिकल ऑफिसर तक शामिल रहे, जिससे विरोध की व्यापकता साफ नजर आई। सीधी भर्ती से खत्म हो जाएगी सेवा निरंतरता नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. हिमांशु शर्मा ने कहा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह अवैधानिक है। उन्होंने बताया कि सीधी भर्ती से सीनियर डॉक्टरों की सेवा निरंतरता (Continuation of Service) टूट जाती है। “जिस संस्थान में डॉक्टर 15-20 साल से काम कर रहे हैं, वहां उन्हें नए उम्मीदवार की तरह ट्रीट किया जाएगा। इससे ग्रेच्युटी, वेतन वृद्धि, एनपीएस और पेंशन जैसे लाभ प्रभावित होंगे,” उन्होंने कहा। 15 साल का अनुभव भी नहीं होगा मान्य हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. राहुल वर्मा ने बताया कि वे 15 साल से एसोसिएट प्रोफेसर हैं, लेकिन अब प्रोफेसर पद के लिए उन्हें अपने जूनियर्स के साथ प्रतियोगिता करनी होगी। उन्होंने कहा, “यदि चयन हो भी जाता है, तो नई नियुक्ति मानी जाएगी। इससे मेरा पूरा अनुभव और सेवा रिकॉर्ड बेकार हो जाएगा। साथ ही एक साल का प्रोबेशन पीरियड भी लागू होगा।” डीन का जवाब: उच्च स्तर से मार्गदर्शन का इंतजार स्त्री रोग विभाग की एचओडी डॉ. शबाना सुलताना ने बताया कि इस मामले में डीन से चर्चा की गई है। डीन ने कहा है कि वे उच्च अधिकारियों से मार्गदर्शन लेने के बाद ही आगे कोई निर्णय लेंगी। डॉक्टरों ने अपने विरोध को मजबूत करने के लिए न्यायालय के फैसलों का भी हवाला दिया है। ग्वालियर, जबलपुर और इंदौर हाईकोर्ट बेंच ने पूर्व में इस तरह की भर्ती प्रक्रिया को खारिज किया है। हाल ही में डॉ. आशीष कौशल बनाम मध्यप्रदेश शासन मामले में भी ग्वालियर हाईकोर्ट ने सीधी भर्ती को निरस्त किया, जिससे डॉक्टरों का पक्ष और मजबूत हुआ है। सरकार तक पहुंचा मामला, उच्चस्तरीय बैठक इस विवाद को लेकर प्रोग्रेसिव मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन (PMTA) के प्रतिनिधिमंडल ने उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला, एसीएस स्वास्थ्य अशोक वर्णवाल और आयुक्त स्वास्थ्य से मुलाकात कर चुके हैं। बैठक में डॉक्टरों ने स्पष्ट कहा कि पदोन्नति के पद केवल डीपीसी (DPC) के माध्यम से ही भरे जाने चाहिए। PMTA ने इस दौरान चिकित्सा शिक्षकों से जुड़े 10 अन्य लंबित मुद्दों का भी जिक्र किया। इन मुद्दों का समाधान पिछले दो वर्षों से नहीं हो पाया है, जिससे डॉक्टरों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। संघ ने संचालनालय और शासन स्तर के अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कार्रवाई की मांग की है। 21 अप्रैल से प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी PMTA की कार्यकारिणी बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो 21 अप्रैल से प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। डॉ. अविनाश ठाकुर ने चेतावनी दी कि यदि सीधी भर्ती का आदेश वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को क्रमिक रूप से तेज किया जाएगा। डॉ. राकेश मालवीया ने कहा कि हम अपने अनुभव और वरिष्ठता के साथ खिलवाड़ नहीं होने देंगे। अगर विज्ञप्ति वापस नहीं ली गई, तो ओपीडी से लेकर सभी सेवाओं का बहिष्कार करेंगे। जीएमसी में शुरू हुआ यह विवाद अब सिर्फ एक भर्ती प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है। यह “नीति बनाम अधिकार” की लड़ाई बनता जा रहा है, जहां एक तरफ प्रशासनिक फैसले हैं, तो दूसरी ओर वर्षों से सेवा दे रहे डॉक्टरों के अधिकार और भविष्य दांव पर हैं।
आर्मी का सपना टूटा, एस्पिरेंट्स में एसके बनकर छाए:अभिलाष थपलियाल बोले- आउटसाइडर होने का सबसे बड़ा स्ट्रगल, इंडस्ट्री में अपना काम खुद बताना पड़ता है

अभिलाष थपलियाल इन दिनों वेब सीरीज ‘एस्पिरेंट्स’ के सीजन 3 को लेकर चर्चा में हैं, जहां उनका ‘एसके’ का किरदार दर्शकों के दिलों में खास जगह बना चुका है। दैनिक भास्कर से बातचीत में अभिलाष ने बताया कि इस बार भी शो को जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है, खासकर दोस्ती से जुड़े इमोशनल सीन लोगों को गहराई से छू रहे हैं। उन्होंने कहा कि ‘एसके’ का किरदार उन लोगों की कहानी है जो जिंदगी में फेल होते हैं, इसलिए दर्शक उससे खुद को जोड़ पाते हैं। अभिलाष ने अपने करियर की शुरुआत, रेडियो जॉकी से लेकर फिल्मों और वेब सीरीज तक के सफर को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि एक्टिंग उनका पहला सपना नहीं था, बल्कि वह आर्मी जॉइन करना चाहते थे। इंडस्ट्री में आउटसाइडर होने के कारण आई चुनौतियों और लगातार खुद को साबित करने की जरूरत पर भी उन्होंने खुलकर बात की। पेश है कुछ प्रमुख अंश.. ‘एस्पिरेंट्स’ सीजन 3 को लेकर कैसा रिस्पॉन्स मिल रहा है? बहुत शानदार। एस्पिरेंट्स से लोग पहले ही जुड़ चुके हैं, इसलिए इस बार भी प्यार मिल रहा है। खासकर दोस्ती वाले सीन काफी वायरल हुए हैं। लोग कहते हैं कि देखकर भावुक हो गए। आपके किरदार ‘एसके’ से लोग इतना कनेक्ट क्यों करते हैं? क्योंकि ये सिर्फ टॉपर की कहानी नहीं है, बल्कि उन लोगों की कहानी है जो फेल हो जाते हैं। हम सब कहीं न कहीं वैसा ही महसूस करते हैं, इसलिए कनेक्शन बनता है। क्या बचपन से ही एक्टर बनना चाहते थे? बिल्कुल नहीं। मैं तो आर्मी जॉइन करना चाहता था। मैं फौजी परिवार से हूं, NDA क्लियर करना सपना था, लेकिन वो पूरा नहीं हुआ। एक्टिंग में एंट्री कैसे हुई? मैं दिल्ली में रेडियो जॉकी था। वहीं फिल्म ‘तेवर’ के डायरेक्टर अमित शर्मा से मुलाकात हुई। उन्होंने मुझे फिल्मों में ट्राई करने को कहा। फिर मुंबई आया और पहली फिल्म पहली फिल्म ‘दिल जंगली’ मिली। ‘एस्पिरेंट्स’ से पहले करियर कैसा था? शुरुआत में फिल्में ज्यादा नहीं चलीं, फिर टीवी और कॉमेडी शोज किए। सोशल मीडिया पर पॉलिटिकल सटायर भी करता था। लेकिन असली पहचान ‘एस्पिरेंट्स’ से मिली। इस सीरीज में ‘एसके’ का रोल कैसे मिला? मैंने ऑडिशन दिया था। पहले मुझे लगा मैं ‘अभिलाष’ का किरदार करूंगा, लेकिन बाद में पता चला कि मुझे ‘एसके’ का रोल मिल रहा है। ‘एस्पिरेंट्स’ सीजन 1 के बाद क्या जिम्मेदारी बढ़ गई थी? हां, लेकिन मैं स्क्रिप्ट में ज्यादा बदलाव नहीं करता। जो लिखा होता है, उसे ईमानदारी से निभाता हूं। मेरा मानना है “कम में बम”, कम सीन हों, लेकिन असरदार हों। रेडियो से एक्टिंग तक का सफर कैसा रहा? रेडियो ने मुझे बहुत कुछ सिखाया। वहां सिर्फ आवाज से पहचान बनती है। वही कॉन्फिडेंस एक्टिंग में काम आया। क्या आपने एक्टिंग की ट्रेनिंग ली है? नहीं, मैंने कोई फॉर्मल ट्रेनिंग नहीं ली। जो सीखा, लाइफ से सीखा। अलग-अलग जगह रहने से अलग-अलग भाषा और एक्सेंट पकड़ना आसान हो गया। ‘एस्पिरेंट्स’ के बाद करियर में क्या बदलाव आया? इसके बाद मुझे कॉन्फिडेंस आया कि मैं खुद को एक्टर कह सकता हूं। फिर मैंने अनुराग कश्यप जैसे डायरेक्टर्स के साथ काम किया और अलग-अलग रोल मिले। आपने किन-किन फिल्मों और प्रोजेक्ट्स में काम किया है? ‘एस्पिरेंट्स’ के बाद मुझे कई अच्छे प्रोजेक्ट्स मिले। मैंने फिल्म ‘ब्लर’ में काम किया, अनुराग कश्यप के साथ फिल्म ‘केनेडी’ में काम किया। और अश्विनी अय्यर तिवारी के साथ वेब सीरीज ‘फाड़ू’ में काम किया। इन प्रोजेक्ट्स ने मुझे एक एक्टर के तौर पर काफी कॉन्फिडेंस दिया। इंडस्ट्री में सबसे बड़ा स्ट्रगल क्या रहा? आउटसाइडर होने का। आपको खुद जाकर लोगों को बताना पड़ता है कि आप क्या कर सकते हैं। यहां कोई गॉडफादर नहीं होता। आज भी स्ट्रगल जारी है? बिल्कुल। मैं आज भी डायरेक्टर्स और प्रोड्यूसर्स से मिलता हूं, खुद को पिच करता हूं। यह प्रोसेस कभी खत्म नहीं होती। खुद को बेहतर बनाने के लिए क्या कर रहे हैं? मैं FTII और NSD के स्टूडेंट्स के साथ शॉर्ट फिल्म्स कर रहा हूं। वहां से बहुत कुछ सीखने को मिलता है। मैं अपनी एक्टिंग को लगातार बेहतर करना चाहता हूं।
उत्तराखंड की बेटी ने जापान में जीता ब्रॉन्ज मेडल:फटे जूतों की कहानी सुन क्रिकेटर स्नेह राणा ने दिए नए स्पाइक्स, बोलीं- हमेशा साथ निभाऊंगी

रुड़की के एक छोटे से गांव की रहने वाली एथलीट सोनिया ने जापान के फुकुओका में हुई 18वीं एशियन क्रॉस कंट्री चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया है। बेहद साधारण परिवार से आने वाली सोनिया का यह सफर संघर्षों से भरा रहा, जहां संसाधनों की कमी हर कदम पर चुनौती बनकर सामने आई। बीते दिन इस संघर्ष और उपलब्धि की कहानी जब भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार ऑलराउंडर स्नेह राणा तक पहुंची, तो उन्होंने सोनिया को देहरादून स्थित अपने स्पोर्ट्स स्ट्राइव टर्फ पर बुलाया। यहां उन्होंने सोनिया को प्रोफेशनल स्पोर्ट्स शूज और बेहतर न्यूट्रिशन सपोर्ट देकर न सिर्फ मदद की, बल्कि ताउम्र साथ निभाने का भरोसा भी दिया। सोनिया के लिए यह पल भावुक कर देने वाला था। फटे जूतों में दौड़कर मेडल जीतने वाली यह एथलीट जब नए स्पाइक्स हाथ में लिए खड़ी थी, तो उसकी आंखों में सिर्फ आंसू ही नहीं, बल्कि आगे बढ़ने का नया आत्मविश्वास भी साफ दिखाई दे रहा था। टर्फ पर मिला साथ, भावुक हो गई सोनिया देहरादून के सिनोला स्थित टर्फ पर जब सोनिया पहुंचीं, तो उन्हें शायद अंदाजा भी नहीं था कि उनके लिए क्या इंतजार कर रहा है। स्नेह राणा ने उन्हें गले लगाया, हालचाल पूछा और फिर उन्हें प्रोफेशनल स्पोर्ट्स शूज और न्यूट्रिशन सपोर्ट सौंपा। यह वही चीजें थीं, जिनकी कमी सोनिया को सालों से महसूस होती रही थी। जैसे ही उन्होंने नए जूते हाथ में लिए, उनकी आंखें भर आईं। बातचीत के दौरान वह खुद को संभाल नहीं पाईं। परिवार की हालत कमजोर, बहनों ने निभाया मां का रोल सोनिया का संघर्ष सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं था। उनका पूरा बचपन आर्थिक तंगी में बीता। परिवार में चार बहनें और एक भाई हैं। पिता मजदूरी करके घर चलाते हैं और मां का निधन हो चुका है। ऐसे हालात में खेल को करियर बनाना आसान नहीं था। सोनिया बताती हैं कि कई बार ऐसा वक्त आया जब ट्रेनिंग छोड़ने का मन हुआ, लेकिन उनकी बहनों ने उन्हें कभी टूटने नहीं दिया। उन्होंने मां की कमी पूरी की, हिम्मत दी और हर मुश्किल में साथ खड़ी रहीं। यही वजह रही कि सोनिया ने हालातों के आगे घुटने नहीं टेके और अपने सपनों को जिंदा रखा। गांव के ताने, लेकिन इरादे रहे मजबूत सोनिया के सफर में सिर्फ आर्थिक परेशानियां ही नहीं, बल्कि सामाजिक दबाव भी बड़ी चुनौती रहा। गांव के लोग अक्सर ताने मारते थे और परिवार से कहते थे कि लड़की को वापस बुला लो। लेकिन सोनिया ने इन बातों को कभी अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। वह कहती हैं कि उन्होंने हमेशा खुद को अंदर से मजबूत रखा और लोगों को जवाब देने के बजाय अपनी मेहनत से साबित करने का रास्ता चुना।। फटे जूतों में जीता नेशनल मेडल सोनिया की असली पहचान 2025 में हुए राष्ट्रीय खेल 2025 के दौरान बनी। 10,000 मीटर की दौड़ में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीता, लेकिन इस जीत की सबसे बड़ी बात यह थी कि उनके पास दौड़ने के लिए सही स्पाइक्स तक नहीं थे। वह फटे जूतों में ट्रैक पर उतरीं और 35 मिनट 45.19 सेकंड का समय निकालकर पदक अपने नाम किया। यह सिर्फ एक जीत नहीं थी, बल्कि उनके संघर्ष और जज्बे की सबसे बड़ी मिसाल थी। इसी दौरान उन्होंने बताया था कि एक एथलीट के लिए सही डाइट लेना कितना मुश्किल होता है। महंगे सप्लीमेंट्स तो दूर, वह सस्ते मल्टी-विटामिन के सहारे ही अपनी तैयारी कर रही थीं। न्यूट्रिशन की कमी, लेकिन हिम्मत नहीं टूटी सोनिया ने कभी भी प्रोफेशनल लेवल का न्यूट्रिशन नहीं लिया। वह बताती हैं कि उन्होंने आज तक कोई महंगा सप्लीमेंट नहीं खरीदा। ऑनलाइन सस्ते मल्टी-विटामिन खरीदकर ही उन्होंने अपनी ट्रेनिंग जारी रखी। कई बार शरीर साथ नहीं देता था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अब स्नेह राणा के सपोर्ट के बाद उन्हें उम्मीद है कि वह अपनी ट्रेनिंग को और बेहतर बना पाएंगी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अच्छे प्रदर्शन कर सकेंगी। स्नेह राणा बोलीं- मैं भी इसी रास्ते से आई हूं स्नेह राणा ने सोनिया से मुलाकात के दौरान अपने संघर्ष भी साझा किए। उन्होंने बताया कि वह भी एक छोटे गांव से आई हैं, जहां महिला क्रिकेट को लेकर जागरूकता नहीं थी। लोगों के ताने, संसाधनों की कमी और सामाजिक सोच- इन सभी का सामना उन्होंने भी किया है। उन्होंने कहा कि जब लोग कहते थे कि तुम यह नहीं कर सकती, तो वह और ज्यादा जिद्दी हो जाती थीं। यही जिद उन्हें यहां तक लेकर आई। अब एशियन गेम्स पर नजर जापान में ब्रॉन्ज जीतने के बाद सोनिया का आत्मविश्वास काफी बढ़ गया है। अब उनका अगला लक्ष्य एशियन गेम्स के लिए क्वालीफाई करना है। स्नेह राणा के सपोर्ट से उन्हें नई ऊर्जा मिली है। बेहतर जूते, सही न्यूट्रिशन और मानसिक सहयोग- ये तीनों चीजें अब उनके पास हैं, जो किसी भी एथलीट के लिए बेहद जरूरी होती हैं। सोनिया की कहानी आज उन हजारों लड़कियों के लिए प्रेरणा है, जो संसाधनों की कमी के कारण अपने सपनों को अधूरा छोड़ देती हैं।
आर्मी का सपना टूटा, एस्पिरेंट्स में एसके बनकर छाए:अभिलाष थपलियाल बोले- आउटसाइडर होने का सबसे बड़ा स्ट्रगल, इंडस्ट्री में अपना काम खुद बताना पड़ता है

अभिलाष थपलियाल इन दिनों वेब सीरीज ‘एस्पिरेंट्स’ के सीजन 3 को लेकर चर्चा में हैं, जहां उनका ‘एसके’ का किरदार दर्शकों के दिलों में खास जगह बना चुका है। दैनिक भास्कर से बातचीत में अभिलाष ने बताया कि इस बार भी शो को जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है, खासकर दोस्ती से जुड़े इमोशनल सीन लोगों को गहराई से छू रहे हैं। उन्होंने कहा कि ‘एसके’ का किरदार उन लोगों की कहानी है जो जिंदगी में फेल होते हैं, इसलिए दर्शक उससे खुद को जोड़ पाते हैं। अभिलाष ने अपने करियर की शुरुआत, रेडियो जॉकी से लेकर फिल्मों और वेब सीरीज तक के सफर को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि एक्टिंग उनका पहला सपना नहीं था, बल्कि वह आर्मी जॉइन करना चाहते थे। इंडस्ट्री में आउटसाइडर होने के कारण आई चुनौतियों और लगातार खुद को साबित करने की जरूरत पर भी उन्होंने खुलकर बात की। पेश है कुछ प्रमुख अंश.. ‘एस्पिरेंट्स’ सीजन 3 को लेकर कैसा रिस्पॉन्स मिल रहा है? बहुत शानदार। एस्पिरेंट्स से लोग पहले ही जुड़ चुके हैं, इसलिए इस बार भी प्यार मिल रहा है। खासकर दोस्ती वाले सीन काफी वायरल हुए हैं। लोग कहते हैं कि देखकर भावुक हो गए। आपके किरदार ‘एसके’ से लोग इतना कनेक्ट क्यों करते हैं? क्योंकि ये सिर्फ टॉपर की कहानी नहीं है, बल्कि उन लोगों की कहानी है जो फेल हो जाते हैं। हम सब कहीं न कहीं वैसा ही महसूस करते हैं, इसलिए कनेक्शन बनता है। क्या बचपन से ही एक्टर बनना चाहते थे? बिल्कुल नहीं। मैं तो आर्मी जॉइन करना चाहता था। मैं फौजी परिवार से हूं, NDA क्लियर करना सपना था, लेकिन वो पूरा नहीं हुआ। एक्टिंग में एंट्री कैसे हुई? मैं दिल्ली में रेडियो जॉकी था। वहीं फिल्म ‘तेवर’ के डायरेक्टर अमित शर्मा से मुलाकात हुई। उन्होंने मुझे फिल्मों में ट्राई करने को कहा। फिर मुंबई आया और पहली फिल्म पहली फिल्म ‘दिल जंगली’ मिली। ‘एस्पिरेंट्स’ से पहले करियर कैसा था? शुरुआत में फिल्में ज्यादा नहीं चलीं, फिर टीवी और कॉमेडी शोज किए। सोशल मीडिया पर पॉलिटिकल सटायर भी करता था। लेकिन असली पहचान ‘एस्पिरेंट्स’ से मिली। इस सीरीज में ‘एसके’ का रोल कैसे मिला? मैंने ऑडिशन दिया था। पहले मुझे लगा मैं ‘अभिलाष’ का किरदार करूंगा, लेकिन बाद में पता चला कि मुझे ‘एसके’ का रोल मिल रहा है। ‘एस्पिरेंट्स’ सीजन 1 के बाद क्या जिम्मेदारी बढ़ गई थी? हां, लेकिन मैं स्क्रिप्ट में ज्यादा बदलाव नहीं करता। जो लिखा होता है, उसे ईमानदारी से निभाता हूं। मेरा मानना है “कम में बम”, कम सीन हों, लेकिन असरदार हों। रेडियो से एक्टिंग तक का सफर कैसा रहा? रेडियो ने मुझे बहुत कुछ सिखाया। वहां सिर्फ आवाज से पहचान बनती है। वही कॉन्फिडेंस एक्टिंग में काम आया। क्या आपने एक्टिंग की ट्रेनिंग ली है? नहीं, मैंने कोई फॉर्मल ट्रेनिंग नहीं ली। जो सीखा, लाइफ से सीखा। अलग-अलग जगह रहने से अलग-अलग भाषा और एक्सेंट पकड़ना आसान हो गया। ‘एस्पिरेंट्स’ के बाद करियर में क्या बदलाव आया? इसके बाद मुझे कॉन्फिडेंस आया कि मैं खुद को एक्टर कह सकता हूं। फिर मैंने अनुराग कश्यप जैसे डायरेक्टर्स के साथ काम किया और अलग-अलग रोल मिले। आपने किन-किन फिल्मों और प्रोजेक्ट्स में काम किया है? ‘एस्पिरेंट्स’ के बाद मुझे कई अच्छे प्रोजेक्ट्स मिले। मैंने फिल्म ‘ब्लर’ में काम किया, अनुराग कश्यप के साथ फिल्म ‘केनेडी’ में काम किया। और अश्विनी अय्यर तिवारी के साथ वेब सीरीज ‘फाड़ू’ में काम किया। इन प्रोजेक्ट्स ने मुझे एक एक्टर के तौर पर काफी कॉन्फिडेंस दिया। इंडस्ट्री में सबसे बड़ा स्ट्रगल क्या रहा? आउटसाइडर होने का। आपको खुद जाकर लोगों को बताना पड़ता है कि आप क्या कर सकते हैं। यहां कोई गॉडफादर नहीं होता। आज भी स्ट्रगल जारी है? बिल्कुल। मैं आज भी डायरेक्टर्स और प्रोड्यूसर्स से मिलता हूं, खुद को पिच करता हूं। यह प्रोसेस कभी खत्म नहीं होती। खुद को बेहतर बनाने के लिए क्या कर रहे हैं? मैं FTII और NSD के स्टूडेंट्स के साथ शॉर्ट फिल्म्स कर रहा हूं। वहां से बहुत कुछ सीखने को मिलता है। मैं अपनी एक्टिंग को लगातार बेहतर करना चाहता हूं।
वादे ‘लखपति दीदी’ के, हालात ‘मजदूर’ से बदतर:यूनिफॉर्म सिलाई का मेहनताना अटका, 46 जिलों की हजारों महिलाएं प्रभावित

मैंने चार स्कूलों के करीब 800-900 ड्रेस सिले थे। दो साल हो गए, लेकिन अब तक पूरा पैसा नहीं मिला। इससे हमारी हालत बहुत खराब हो गई है। सरकार कहती है कि हमें ‘लखपति दीदी’ बनाएंगे, लेकिन जब मेहनत का पैसा ही नहीं मिल रहा, तो हम लखपति कैसे बनेंगे? यह दर्द हरदा जिले के हंडिया की रहने वाली संगीता नागवंशी का है। संगीता ‘जय मां काली’ स्व-सहायता समूह से जुड़ी हैं। उनके समूह को साल 2023-24 में स्कूल यूनिफॉर्म सिलाई का काम मिला था। उन्होंने चार स्कूलों के लिए बच्चों की ड्रेस तय समय पर सिलकर पहुंचा दीं, लेकिन दो साल बाद भी उन्हें पूरा पैसा नहीं मिला। करीब 50 हजार रुपए अब भी बकाया हैं। महिलाओं की ये तकलीफ सिर्फ हरदा तक सीमित नहीं है। प्रदेश के 46 जिलों में हजारों स्व-सहायता समूहों की महिलाओं का लगभग 36 करोड़ 56 लाख रुपए भुगतान बकाया है। ये आलम तब है जब सरकार स्व-सहायता समूहों के जरिए महिलाओं को स्वावलंबी और ‘लखपति दीदी’ बनाने के वादे कर रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में 22 लाख से अधिक महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाया जा चुका है और इस मामले में देश में एमपी पांचवें नंबर पर है। सबसे पहले जानिए…कैसे मिला काम, कैसे अटका भुगतान राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत वर्ष 2022-23 और 2023-24 में महिलाओं को सरकारी स्कूलों के लिए यूनिफॉर्म सिलाई का काम दिया गया। स्व-सहायता समूहों को बाजार से कपड़ा खरीदकर यूनिफॉर्म सिलनी थी और तय समय में स्कूलों तक पहुंचाना था। इसमें लड़कों के लिए शर्ट-पैंट और लड़कियों के लिए सलवार-कुर्ती शामिल थीं। एक समूह को औसतन 3-4 स्कूलों के बच्चों के यूनिफॉर्म सिलने का जिम्मा दिया गया।महिलाओं को ड्रेस की संख्या के आधार पर भुगतान होना था। शुरुआत में दो किस्तों में भुगतान किया गया, लेकिन तीसरी किस्त रोक दी गई। कुल भुगतान का लगभग 25 फीसदी हिस्सा आज भी अटका हुआ है। तीन साल बीत जाने के बाद भी यह स्पष्ट नहीं है कि यह राशि कब तक मिलेगी। 46 जिलों में 36.56 करोड़ रुपए बकाया जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे ज्यादा भुगतान छतरपुर जिले में बकाया है, जहां 3.42 करोड़ रुपए से अधिक राशि अटकी हुई है। इसके बाद शिवपुरी में करीब 2.70 करोड़, सागर में 2.67 करोड़ और खंडवा में 2.45 करोड़ बकाया है। हालांकि, अनुपपुर, भिंड, इंदौर, खरगोन, नीमच और श्योपुर जैसे छह जिलों में पूरा भुगतान हो चुका है। 46 जिलों में 36.56 करोड़ रुपए बकाया जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे ज्यादा भुगतान छतरपुर जिले में बकाया है, जहां 3.42 करोड़ रुपए का भुगतान नहीं हुआ है। इसके बाद शिवपुरी में करीब 2.70 करोड़, सागर में 2.67 करोड़ और खंडवा में 2.45 करोड़ बकाया है। हालांकि, अनुपपुर, भिंड, इंदौर, खरगोन, नीमच और श्योपुर जैसे छह जिलों में पूरा भुगतान हो चुका है। तीन मामलों से समझिए महिलाएं कैसी दिक्कतें झेल रहीं 1. कपड़ा व्यापारी पैसे मांगता है, कैसे दें हंडिया की खतीजा बेगम की कहानी भी ऐसी ही है। उन्होंने यूनिफॉर्म सिलाई के लिए उधार में कपड़ा खरीदा था, लेकिन अब तक भुगतान नहीं मिला। खतीजा कहती हैं कि कपड़ा व्यापारी बार-बार फोन कर पैसे मांगता है। जब हमें ही पैसा नहीं मिला, तो हम उसे कैसे दें? हमारी हालत ऐसी नहीं कि अपनी जेब से भुगतान कर सकें। उनके समूह का करीब 55 हजार रुपए अब भी बकाया है। 2. गाली-गलौज की नौबत, लोन लेना पड़ रहा हंडिया की राधे-राधे समूह की संचालिका रजिया बी को करीब 1000 ड्रेस सिलने का काम मिला था। उनका कहना है कि समूह की महिलाओं ने दिन-रात मेहनत कर समय पर काम पूरा किया, लेकिन करीब 90 हजार रुपए अब भी नहीं मिले। रजिया ने बताया कि हमारे समूह की महिलाएं बहुत गरीब हैं और 100-200 रुपए की मजदूरी कर घर चलाती हैं। जब जरूरत पड़ती है तो वे अपने पैसे मांगने आती हैं। पैसे न होने पर कुछ महिलाएं आरोप लगाती हैं कि मैंने ही उनके पैसे हजम कर लिए। 3. पापड़ और चिरौंजी बेचकर गुजारा कर रहीं संगीता नागवंशी बताती हैं कि इस साल उनके समूह को यूनिफॉर्म सिलाई का काम भी नहीं मिला। इससे कई महिलाएं बेरोजगार हो गई हैं। उन्होंने कहा कि गुजारा करने के लिए छोटे-मोटे काम करने पड़ रहे हैं। मैं कभी नर्मदा किनारे नारियल और चिरौंजी बेचती हूं, तो कभी पापड़ और बत्ती बनाकर बेचती हूं। इसी से घर चलाने की कोशिश कर रही हूं। जिम्मेदारों का रवैया क्या है… विधानसभा में भी उठा मुद्दा, सत्यापन करा रहे अफसर इस साल विधानसभा के बजट सत्र में हजारों महिलाओं की इस समस्या को देखते हुए सीधी से भाजपा विधायक रीति पाठक ने यह मुद्दा विधानसभा में उठाया। उन्होंने पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल से बकाया भुगतान को लेकर सवाल किया, लेकिन मंत्री यह स्पष्ट नहीं कर पाए कि महिलाओं को उनका पैसा कब तक मिलेगा। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जिम्मेदार अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक भुगतान में कुछ अनियमितताएं सामने आने के चलते प्रदेशभर में जिला स्तर पर समूहों का सत्यापन कराया जा रहा है। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही भुगतान की अगली कार्रवाई शुरू की जाएगी, जिसमें अभी 3 से 4 महीने का अतिरिक्त समय लग सकता है।
Sanju Samson; CSK vs PBKS IPL 2026 LIVE Score Update

स्पोर्ट्स डेस्क15 मिनट पहले कॉपी लिंक IPL के इस सीजन का 7वां मैच चेन्नई सुपर किंग्स और पंजाब किंग्स के बीच खेला जाएगा। चेपॉक स्टेडियम में मैच शाम 7:30 बजे से शुरू होगा। जिसका टॉस 7 बजे होगा। पंजाब ने अपना पहला मैच गुजरात के खिलाफ जीता। वहीं चेन्नई को राजस्थान के खिलाफ हार मिली। CSK आज भी पूर्व कप्तान एमएस धोनी और डेवाल्ड ब्रेविस के बिना उतरेगी। दोनों इंजरी के कारण बाहर हैं। पिछले सीजन दोनों मैच पंजाब ने जीते चेन्नई और पंजाब के बीच मुकाबले हमेशा से ही रोमांचक रहे हैं। दोनों टीमें 33 बार एक-दूसरे के आमने-सामने आई हैं। इसमें CSK ने 17 और PBKS ने 15 मैच जीते। जबकि एक मैच टाई रहा, जिसे सुपर ओवर में पंजाब ने जीता था। पिछले सीजन दोनों मैचों में पंजाब ने चेन्नई को हराया था। चेपॉक में दोनों टीमें 9 बार आमने-सामने हुईं, चेन्नई को 4 और पंजाब को 5 में जीत मिली। यहां पिछले तीनों मैच PBKS ने ही जीते। धोनी-ब्रेविस नहीं खेलेंगे CSK के पूर्व कप्तान एमएस धोनी और डेवाल्ड ब्रेविस IPL के शुरुआती मैचों से बाहर रहेंगे। ब्रेविस साइड स्ट्रेन से जूझ रहे हैं, जबकि धोनी मांसपेशियों में खिंचाव के कारण रिहैब कर रहे हैं। दोनों खिलाड़ी पहला मैच भी नहीं खेल पाए थे। कोनोली ने पिछले मैच में अर्धशतक लगाया पंजाब किंग्स को ऑस्ट्रेलिया के कूपर कोनोली के रूप में तीसरे नंबर का भरोसेमंद बल्लेबाज मिल गया है। उन्होंने पिछले मैच में टीम को खराब शुरुआत से उबारकर जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। पंजाब की गेंदबाजी भी मजबूत नजर आ रही है। अनुभवी स्पिनर युजवेंद्र चहल ने टाइटंस के खिलाफ अपनी लाइन और गति से प्रभावित किया। उन्होंने मिडिल ओवर्स में रनों पर रोक लगाई और 2 महत्वपूर्ण विकेट लिए थे। उन्हें तेज गेंदबाज विजयकुमार वैशाख का अच्छा साथ मिला था। पहले मैच में CSK की बैटिंग-बॉलिंग दोनों फीकी रही CSK के लिए सीजन की शुरुआत अच्छी नहीं रही। राजस्थान के खिलाफ संजू सैमसन CSK के लिए अपने पहले मैच में खास प्रभाव नहीं छोड़ पाए। टॉप ऑर्डर के बल्लेबाजों के नहीं चल पाने के कारण सरफराज खान को इम्पैक्ट प्लेयर के रूप में मैदान पर उतारा गया, लेकिन वे इसका फायदा नहीं उठा पाए। बॉलिंग में राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ मैच में वैभव सूर्यवंशी की आक्रामक बल्लेबाजी के आगे मैट हेनरी और नूर अहमद जैसे गेंदबाज फीके पड़ गए। चेन्नई की पिच स्पिनर्स के लिए मददगार चेन्नई के MA चिदंबरम स्टेडियम की पिच स्पिनर्स के लिए मददगार साबित होती आई है। यहां बैटिंग करना थोड़ा मुश्किल होता है, लेकिन एक बार टिकने के बाद बड़ी पारी खेली जा सकती है। यहां का सरफेस सूखा (लाल मिट्टी) होता है, जो मैच आगे बढ़ने के साथ और धीमा होता जाता है और गेंद टर्न लेने लगती है। शुरुआती ओवरों में बल्लेबाजी थोड़ी आसान रहती है क्योंकि नई गेंद अच्छे से बैट पर आती है, लेकिन 7-8 ओवर के बाद पिच धीमी पड़ने लगती है और स्पिनर्स का दबदबा बढ़ जाता है। मिडिल और डेथ ओवर्स में रन बनाना काफी मुश्किल हो जाता है। इस मैदान पर अब तक 91 मैच खेले गए। पहले बैटिंग करने वाली टीम ने 51 मैच जीते, जबकि 40 मैचों में चेज करने वाली टीम को जीत मिली। उमस भरा रहेगा मौसम मैच वाले दिन चेन्नई का मौसम गर्म और उमस भरा रहने की उम्मीद है। यहां का तापमान 26 से 36 डिग्री सेल्सियस तक रहेगा। मैच में बारिश की संभावना नहीं है। दोनों टीमों की पॉसिबल प्लेइंग-12 चेन्नई सुपर किंग्स: संजू सैमसन, ऋतुराज गायकवाड, आयुष म्हात्रे, मैट शॉर्ट, शिवम दुबे, कार्तिक शर्मा, जैमी ओवरटन, नूर अहमद, मैट हेनरी, अंशुल कंबोज, खलील अहमद, सरफराज खान। पंजाब किंग्स: प्रभसिमरन सिंह (विकेटकीपर), कूपर कॉनोली, श्रेयस अय्यर (कप्तान), नेहल वाधेरा, शशांक सिंह, मार्कस स्टोयनिस, मार्को यानसन, जैवियर बार्टलेट, विजयकुमार वैशाख, अर्शदीप सिंह, युजवेंद्र चहल, प्रियांश आर्या। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Sanju Samson; CSK vs PBKS IPL 2026 LIVE Score Update

स्पोर्ट्स डेस्क2 घंटे पहले कॉपी लिंक IPL के इस सीजन का 7वां मैच चेन्नई सुपर किंग्स और पंजाब किंग्स के बीच खेला जाएगा। चेपॉक स्टेडियम में मैच शाम 7:30 बजे से शुरू होगा। जिसका टॉस 7 बजे होगा। पंजाब ने अपना पहला मैच गुजरात के खिलाफ जीता। वहीं चेन्नई को राजस्थान के खिलाफ हार मिली। CSK आज भी पूर्व कप्तान एमएस धोनी और डेवाल्ड ब्रेविस के बिना उतरेगी। दोनों इंजरी के कारण बाहर हैं। पिछले सीजन दोनों मैच पंजाब ने जीते चेन्नई और पंजाब के बीच मुकाबले हमेशा से ही रोमांचक रहे हैं। दोनों टीमें 33 बार एक-दूसरे के आमने-सामने आई हैं। इसमें CSK ने 17 और PBKS ने 15 मैच जीते। जबकि एक मैच टाई रहा, जिसे सुपर ओवर में पंजाब ने जीता था। पिछले सीजन दोनों मैचों में पंजाब ने चेन्नई को हराया था। चेपॉक में दोनों टीमें 9 बार आमने-सामने हुईं, चेन्नई को 4 और पंजाब को 5 में जीत मिली। यहां पिछले तीनों मैच PBKS ने ही जीते। धोनी-ब्रेविस नहीं खेलेंगे CSK के पूर्व कप्तान एमएस धोनी और डेवाल्ड ब्रेविस IPL के शुरुआती मैचों से बाहर रहेंगे। ब्रेविस साइड स्ट्रेन से जूझ रहे हैं, जबकि धोनी मांसपेशियों में खिंचाव के कारण रिहैब कर रहे हैं। दोनों खिलाड़ी पहला मैच भी नहीं खेल पाए थे। कोनोली ने पिछले मैच में अर्धशतक लगाया पंजाब किंग्स को ऑस्ट्रेलिया के कूपर कोनोली के रूप में तीसरे नंबर का भरोसेमंद बल्लेबाज मिल गया है। उन्होंने पिछले मैच में टीम को खराब शुरुआत से उबारकर जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। पंजाब की गेंदबाजी भी मजबूत नजर आ रही है। अनुभवी स्पिनर युजवेंद्र चहल ने टाइटंस के खिलाफ अपनी लाइन और गति से प्रभावित किया। उन्होंने मिडिल ओवर्स में रनों पर रोक लगाई और 2 महत्वपूर्ण विकेट लिए थे। उन्हें तेज गेंदबाज विजयकुमार वैशाख का अच्छा साथ मिला था। पहले मैच में CSK की बैटिंग-बॉलिंग दोनों फीकी रही CSK के लिए सीजन की शुरुआत अच्छी नहीं रही। राजस्थान के खिलाफ संजू सैमसन CSK के लिए अपने पहले मैच में खास प्रभाव नहीं छोड़ पाए। टॉप ऑर्डर के बल्लेबाजों के नहीं चल पाने के कारण सरफराज खान को इम्पैक्ट प्लेयर के रूप में मैदान पर उतारा गया, लेकिन वे इसका फायदा नहीं उठा पाए। बॉलिंग में राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ मैच में वैभव सूर्यवंशी की आक्रामक बल्लेबाजी के आगे मैट हेनरी और नूर अहमद जैसे गेंदबाज फीके पड़ गए। चेन्नई की पिच स्पिनर्स के लिए मददगार चेन्नई के MA चिदंबरम स्टेडियम की पिच स्पिनर्स के लिए मददगार साबित होती आई है। यहां बैटिंग करना थोड़ा मुश्किल होता है, लेकिन एक बार टिकने के बाद बड़ी पारी खेली जा सकती है। यहां का सरफेस सूखा (लाल मिट्टी) होता है, जो मैच आगे बढ़ने के साथ और धीमा होता जाता है और गेंद टर्न लेने लगती है। शुरुआती ओवरों में बल्लेबाजी थोड़ी आसान रहती है क्योंकि नई गेंद अच्छे से बैट पर आती है, लेकिन 7-8 ओवर के बाद पिच धीमी पड़ने लगती है और स्पिनर्स का दबदबा बढ़ जाता है। मिडिल और डेथ ओवर्स में रन बनाना काफी मुश्किल हो जाता है। इस मैदान पर अब तक 91 मैच खेले गए। पहले बैटिंग करने वाली टीम ने 51 मैच जीते, जबकि 40 मैचों में चेज करने वाली टीम को जीत मिली। उमस भरा रहेगा मौसम मैच वाले दिन चेन्नई का मौसम गर्म और उमस भरा रहने की उम्मीद है। यहां का तापमान 26 से 36 डिग्री सेल्सियस तक रहेगा। मैच में बारिश की संभावना नहीं है। दोनों टीमों की पॉसिबल प्लेइंग-12 चेन्नई सुपर किंग्स: संजू सैमसन, ऋतुराज गायकवाड, आयुष म्हात्रे, मैट शॉर्ट, शिवम दुबे, कार्तिक शर्मा, जैमी ओवरटन, नूर अहमद, मैट हेनरी, अंशुल कंबोज, खलील अहमद, सरफराज खान। पंजाब किंग्स: प्रभसिमरन सिंह (विकेटकीपर), कूपर कॉनोली, श्रेयस अय्यर (कप्तान), नेहल वाधेरा, शशांक सिंह, मार्कस स्टोयनिस, मार्को यानसन, जैवियर बार्टलेट, विजयकुमार वैशाख, अर्शदीप सिंह, युजवेंद्र चहल, प्रियांश आर्या। ————————————— स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… ग्रीन-रघुवंशी के रनआउट से कोलकाता हारा:अभिषेक के हैदराबाद के लिए 100 सिक्स पूरे, रहाणे का 200वां IPL मैच; KKR-SRH मैच के मोमेंट्स-रिकार्ड्स IPL में गुरुवार को सनराइजर्स हैदराबाद ने कोलकाता नाइट राइडर्स को 65 रन से हरा दिया। ईडन गार्डन्स में कोलकाता की हार की बड़ी वजह दो अहम रनआउट रहे। पहले कैमरन ग्रीन और फिर अंगकृष रघुवंशी रनआउट हुए। हैदराबाद के लिए अभिषेक शर्मा ने 100 IPL सिक्स पूरे किए। पूरी खबर दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
चुप्पी, अनुपस्थिति या अधिक: AAP ने राघव चड्ढा को राज्यसभा के उपनेता पद से क्यों हटाया | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:03 अप्रैल, 2026, 05:09 IST AAP ने राघव चड्ढा को राज्यसभा के उपनेता पद से हटा दिया, उनकी जगह अशोक मित्तल को नियुक्त किया, इस कदम से अटकलों को हवा मिली क्योंकि नेताओं ने पार्टी के प्रमुख मुद्दों पर चड्ढा की चुप्पी का हवाला दिया। आम आदमी पार्टी सांसद राघव चड्ढा एक महत्वपूर्ण कदम में, आम आदमी पार्टी (आप) ने बुधवार को राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को उच्च सदन में उपनेता के पद से हटा दिया, जो पार्टी के भीतर आंतरिक दरार के संकेत देता है। अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को एक आधिकारिक पत्र सौंपकर चड्ढा को पार्टी के उपनेता पद से हटाने के फैसले की जानकारी दी। पार्टी ने यह भी अनुरोध किया है कि राघव चड्ढा को संसद में बोलने के लिए समय आवंटित न किया जाए। आप के पंजाब सांसद अशोक मित्तल को चड्ढा का उत्तराधिकारी नियुक्त किया गया है। पत्रकारों से बात करते हुए, मित्तल ने कहा कि केजरीवाल ने उन्हें नई भूमिका सौंपी है और वह अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करेंगे और पार्टी के रुख और राष्ट्रीय हितों दोनों को सदन में मजबूती से रखेंगे। राघव चड्ढा की प्रतिक्रिया इस कदम के कुछ घंटों बाद, राज्यसभा सांसद ने राज्यसभा में अपने तर्कों और हस्तक्षेपों का संकलन साझा करके परोक्ष प्रतिक्रिया जारी की। तीन मिनट के वीडियो में 37 वर्षीय नेता को वायु प्रदूषण और बढ़ते हवाई किराए से लेकर गिग श्रमिकों के अधिकारों और मोबाइल प्रीपेड योजनाओं की 28-दिन की वैधता सहित कई मुद्दों पर चिंता व्यक्त करते हुए दिखाया गया है। स्वाति मालीवाल के बाद वह आप के दूसरे राज्यसभा सांसद बन गए हैं, जिनका पार्टी नेतृत्व से मतभेद हो गया है। उसे क्यों हटाया गया? हालाँकि कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है, लेकिन कई मीडिया रिपोर्टों में सुझाव दिया गया है कि अनुशासन और पार्टी के रुख के साथ तालमेल की चिंताओं ने उन्हें पद से हटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई होगी। हालांकि चड्ढा ने अभी तक इस निष्कासन पर चर्चा नहीं की है, लेकिन मामले से परिचित लोगों का कहना है कि पार्टी का निर्णय “आप से संबंधित मामलों पर उनकी चुप्पी और अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाले कार्यक्रमों से अनुपस्थिति” के कारण है। आप के मुख्य मुद्दों पर उनकी चुप्पी ने बाहर निकलने की अफवाहों को हवा दे दी थी, खासकर तब जब उन्हें असम के लिए पार्टी के स्टार प्रचारकों की सूची से बाहर कर दिया गया था। पीटीआई के मुताबिक, पार्टी नेताओं ने दावा किया है कि केजरीवाल और मनीष सिसौदिया की गिरफ्तारी के दौरान चड्ढा की चुप्पी एक प्रमुख मुद्दा रही है. ऐसा प्रतीत होता है कि चड्ढा ने खुद को पार्टी के प्रमुख मुद्दों से दूर कर लिया है। 2025 के दिल्ली चुनावों में AAP की हार के बाद, उनका सार्वजनिक ध्यान व्यापक नीतिगत चिंताओं की ओर स्थानांतरित हो गया। मार्च 2024 में जब दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री केजरीवाल को उत्पाद शुल्क नीति मामले में गिरफ्तार किया गया था, तब चड्ढा चिकित्सा कारणों से विदेश में थे। वह केजरीवाल की लगभग छह महीने की कैद के दौरान दूर रहे और 13 सितंबर, 2024 को उनकी रिहाई के कुछ दिनों बाद ही उनसे मिले। अभी हाल ही में, चड्ढा ने तब चुप्पी साध ली जब पिछले महीने दिल्ली की एक अदालत ने केजरीवाल, सिसौदिया और अन्य आप नेताओं को उत्पाद शुल्क मामले में बरी कर दिया था। अदालत से राहत के बाद वह केजरीवाल की प्रेस कॉन्फ्रेंस और जंतर-मंतर पर हुई हालिया रैली में भी शामिल नहीं हुए। पार्टी नेताओं ने दावा किया कि चड्ढा को अन्य राज्यों में पार्टी के राजनीतिक अभियानों और संगठनात्मक मामलों से लगातार दरकिनार किया जा रहा है, हालांकि वह संसद के अंदर और बाहर मुखर रहे हैं। AAP ने आंतरिक दरार का खंडन किया चड्ढा की जगह लेने वाले मित्तल ने मीडिया से कहा कि विकास ढूंढना पार्टी की “सामान्य प्रक्रिया” का हिस्सा है। बदलाव को ज्यादा तवज्जो नहीं देते हुए उन्होंने इसे एक नियमित प्रक्रिया बताया और कहा कि पहले एनडी गुप्ता उच्च सदन में पार्टी के उपनेता थे और फिर चड्ढा को यह जिम्मेदारी दी गई। उन्होंने कहा, “अब, मुझे यह भूमिका दी गई है। हमारी पार्टी चाहती है कि सभी सांसद सीखें और शायद उसी संदर्भ में, मुझे यह भूमिका दी गई है ताकि मैं राजनीति में प्रक्रियाओं और प्रशासनिक कौशल सीख सकूं।” उन्होंने कहा कि पार्टी मजबूत बनी हुई है। आप सांसद संजय सिंह ने पार्टी के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ”हमने पार्टी के फैसले के बारे में राज्यसभा सचिवालय को सूचित कर दिया है.” AAP के वर्तमान में राज्यसभा में 10 सदस्य हैं, जिनमें पंजाब से सात और दिल्ली से तीन शामिल हैं। (एजेंसियों से इनपुट के साथ) पहले प्रकाशित: 03 अप्रैल, 2026, 05:09 IST समाचार राजनीति चुप्पी, अनुपस्थिति या अधिक: AAP ने राघव चड्ढा को राज्यसभा के उपनेता पद से क्यों हटाया? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)राघव चड्ढा को हटाना(टी)आम आदमी पार्टी(टी)आप की आंतरिक दरार(टी)राज्यसभा उपनेता(टी)अरविंद केजरीवाल नेतृत्व(टी)अशोक मित्तल की नियुक्ति(टी)स्वाति मालीवाल नतीजा(टी)आप राज्यसभा सांसद
शिमला-मनाली में बारिश, लाहौल स्पीति में बर्फबारी शुरू:एवलांच गिरने और ओलावृष्टि-तूफान का अलर्ट, अगले 6 दिन बरसेंगे बादल

हिमाचल प्रदेश के निचले व मध्यम ऊंचाई वाले भागों में बारिश और लाहौल स्पीति के ऊंचे पहाड़ों पर बर्फबारी शुरू हो गई है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार- राज्य में बारिश-बर्फबारी नौ अप्रैल तक जारी रहेगी। IMD ने आज और कल 10 जिलों में तेज बारिश, तूफान और ओलावृष्टि की चेतावनी दी है। चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और शिमला जिला में ऑरेंज अलर्ट दिया गया है, जबकि किन्नौर और लाहौल स्पीति को छोड़कर अन्य सभी जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया। इस दौरान निचले व मध्यम ऊंचाई वाले भागों में तेज बारिश और ओलावृष्टि का पूर्वानुमान है। लाहौल स्पीति, किन्नौर और कुल्लू जिला के अधिक ऊंचे पहाड़ों पर हिमपात होने के आसार है। कई क्षेत्रों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तूफान चल सकता है। 8 अप्रैल तक बरसेंगे बादल मौसम विभाग के अनुसार- पहाड़ों पर नौ अप्रैल तक निरंतर मौसम खराब रहेगा। पांच से सात अप्रैल तक कोई चेतावनी तो नहीं दी गई, लेकिन मौसम पूरे प्रदेश में खराब रहेगा और बारिश-बर्फबारी का पूर्वानुमान है। आठ अप्रैल को वेस्टर्न डिस्टरबेंस और स्ट्रांग होगा। इसे देखते हुए फिर से तेज बारिश-ओलावृष्टि का ऑरेंज अलर्ट दिया गया है। नौ अप्रैल को भी पूरे प्रदेश में बारिश का दौर जारी रहेगा। प्रदेशवासियों को सतर्क रहने की एडवाइजरी मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क और अधिक ऊंचे क्षेत्रों की यात्रा टालने की सलाह दी है। विशेषकर अटल टनल रोहतांग के नॉर्थ पोर्टल क्षेत्र में हिमस्खलन के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने पर्यटन गतिविधियों पर रोक लगा दी है। डीसी लाहौल स्पीति किरण भडाना ने बताया कि सुरंग के आसपास की पहाड़ियां, चंद्रा नदी पुल क्षेत्र और ढलानें हिमस्खलन व मलबा गिरने के लिए अत्यधिक संवेदनशील हैं। इसे देखते हुए इन क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियां रोकी गई है। तापमान 4 से 5 डिग्री और गिरेगा बारिश-बर्फबारी के बाद अगले एक सप्ताह के दौरान तापमान में 4 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की कमी आएगी। आमतौर पर अप्रैल में लोग गर्मी से जूझते है, लेकिन इस बार अधिक ऊंचे क्षेत्रों में अप्रैल के पहले सप्ताह में भी ठंड कम नहीं हुई। चिंता में किसान-बागवान बदले मौसम से राज्य के किसान बागवान परेशान है। प्रदेश में इन दिनों सेब की फ्लावरिंग चल रही है। ऐसे में मौसम का साफ रहने जरूरी है, लेकिन बीते डेढ़ सप्ताह से मौसम खराब बना हुआ है। कई क्षेत्रों में ओलावृष्टि किसानों-बागवानों की फसलों को कहर बनकर टूट रही है। इस वजह से किसानों-बागवानों की चिंताएं बढ़ती जा रही है।
IMD Weather Update Today MP rajasthan haryana rain himachal jammu kashmir snowfall alert

Hindi News National IMD Weather Update Today MP Rajasthan Haryana Rain Himachal Jammu Kashmir Snowfall Alert भोपाल/जयपुर/लखनऊ/शिमला26 मिनट पहले कॉपी लिंक देश के कई राज्यों में अगले तीन दिन मौसम बदला रहेगा। मौसम विभाग ने जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में तेज बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं कर्नाटक और तमिलनाडु में आंधी-तूफान की संभावना जताई गई है। मध्य प्रदेश के सागर और सीहोर में गुरुवार को बारिश हुई। सीहोर में पंचायत वेब सीरीज की शूटिंग रोकनी पड़ी। वहीं धार के कुक्षी में ओले गिरे। मऊगंज में आकाशीय बिजली की चपेट में आकर महिला की मौत हो गई। राजस्थान के श्रीगंगानगर में गुरुवार दोपहर अचानक मौसम बदल गया और तेज बारिश के साथ ओले गिरे। जैसलमेर में आंधी चली। हरियाणा में गुरुवार को हिसार, सिरसा और फतेहाबाद में बारिश हुई। मौसम विभाग ने जम्मू-कश्मीर के गांदरबल जिले में अगले 24 घंटों में 2400 मीटर से ज्यादा ऊंचाई वाले इलाकों में हिमस्खलन (एवलांच) की चेतावनी जारी की है। प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और पहाड़ी व बर्फीले क्षेत्रों में जाने से बचने की सलाह दी गई है। मौसम विभाग ने हिमाचल के पांच जिलों चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और शिमला में अगले दो दिनों तक तेज बारिश के साथ ओलावृष्टि और तूफान का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। उत्तर प्रदेश में शुक्रवार से तेज बारिश की संभावना है। इस दौरान बिजली और ओले गिर सकते हैं। राजस्थान के जैसलमेर में तेज आंधी चली। अगले दो दिन मौसम का हाल 4-5 अप्रैल- उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, महाराष्ट्र, पंजाब, दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, बिहार, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा में बारिश की संभावना है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में ओलावृष्टि की आशंका है। तमिलनाडु में बिजली गिर सकती है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…







