मिडिल-ईस्ट जंग: कांग्रेस के 4 बड़े नेता सरकार के साथ:राहुल गांधी से अलग राय रखी; LPG संकट पर कहा- सिर्फ माहौल बनाया जा रहा है

कांग्रेस के चार बड़े नेता मिडिल ईस्ट जंग और एलपीजी संकट पर पार्टी लाइन से हटकर बात कर रहे हैं। इनमें कमलनाथ, आनंद शर्मा, शशि थरूर और मनीष तिवारी शामिल हैं। एक तरफ जहां राहुल गांधी इन मुद्दों पर सीधे पीएम का नाम लेकर निशाना साध रहे हैं। वहीं कांग्रेस के सीनियर लीडर मौजूदा परिस्थिति में भारत की विदेश नीति की तारीफ कर रहे। कांग्रेस MP मनीष तिवारी ने एक टीवी न्यूज चैनल पर वेस्ट एशिया युद्ध पर बोलते हुए कहा कि सरकार शायद सही काम कर रही है। गुरुवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा ने भारत के डिप्लोमैटिक तरीके की तारीफ करते हुए इसे मैच्योर और स्किलफुल बताया। वहीं मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने गैस संकट पर कहा था कि ऐसी कोई कमी नहीं है। यह बस एक माहौल बनाया जा रहा है। सरकार के समर्थन में कांग्रेस नेताओं के बयान… आनंद शर्मा बोले- सरकार ने संभावित खतरों से बचाया आनंद शर्मा ने X पर पोस्ट में लिखा कि संकट से निपटने में भारत का डिप्लोमैटिक तरीका समझदारी भरा रहा है। जिससे संभावित मुश्किलों से बचा गया है। उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने ‘एक अप्रत्याशित और अस्थिर स्थिति’ में राजनीतिक नेताओं को पॉलिसी फैसलों के बारे में बताने के लिए एक ऑल-पार्टी मीटिंग भी की। उन्होंने आगे लिखा कि यह नेशनल डायलॉग जारी रहना चाहिए। नेशनल एकता और नेशनल इंटरेस्ट को ध्यान में रखकर एक मैच्योर रिस्पॉन्स आज की जरूरत है। इस पोस्ट को भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने भी शेयर किया था। कमलनाथ बोले- गैस की कहीं पर कोई कमी नहीं LPG की कमी की कई रिपोर्टों के सामने आने पर कमलनाथ ने कहा, ऐसी कोई कमी नहीं है। यह बस एक माहौल बनाया जा रहा है कि कमी है। कमलनाथ ने कुछ लोगों पर राजनीतिक फायदे के लिए जानबूझकर पैनिक पैदा करने का आरोप लगाया। हालांकि इस बयान पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी रिएक्शन दिया। उन्होंने X पर पोस्ट में लिखा कि कांग्रेस के नेता खुद मान रहे हैं कि देश में पेट्रोल, डीजल और गैस की कमी नहीं है। थरूर बोले थे- भारत की चुप्पी जंग का समर्थन करना नहीं कांग्रेस MP शशि थरूर ने इंडियन एक्सप्रेस में एक आर्टिकल में लिखा था कि मिडिल ईस्ट जंग मामले में भारत का संयम स्ट्रेटेजिक समझदारी दिखाता है। उन्होंने लिखा, इस मामले में चुप्पी कायरता नहीं है। बल्कि हमें समझना होगा कि हमारे राष्ट्रीय हित इस इलाके से जुड़े हुए हैं। अब सरकार के खिलाफ राहुल के 2 बयान… 12 मार्च: राहुल बोले- देश में ईंधन की बड़ी समस्या आने वाली है राहुल गांधी ने कहा- आने वाले समय में ईंधन एक बड़ी समस्या बनने वाला है, क्योंकि हमारी ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हो चुकी है। गलत विदेश नीति के कारण यह स्थिति पैदा हुई है। अब हमें तैयारी करनी होगी। हमारे पास अभी थोड़ा समय है, इसलिए सरकार और प्रधानमंत्री को तुरंत तैयारी शुरू करनी चाहिए, वरना करोड़ों लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। मुझे साफ दिख रहा है कि एक बड़ी समस्या आने वाली है। समस्या यह है कि प्रधानमंत्री देश के प्रधानमंत्री की तरह काम नहीं कर पा रहे हैं। इसके पीछे भी कारण हैं, वे फंसे हुए हैं। 21 मार्च: राहुल बोले- तेल की कीमतें बढ़ना महंगाई का संकेत कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने डॉलर के मुकाबले रुपए के गिरने और इंडस्ट्रियल फ्यूल की कीमत बढ़ने पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। राहुल ने X पोस्ट में लिखा, ‘रुपए का डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 100 की तरफ बढ़ना और इंडस्ट्रियल फ्यूल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी, ये सिर्फ आंकड़े नहीं, आने वाली महंगाई के साफ संकेत हैं।’ ———————– ये खबर भी पढ़ें… घरों तक जंग की आंच, दूध-किराना-इलाज महंगे होंगे: रोजमर्रा के सामान के दाम बढ़ाने की तैयारी पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने कंपनियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। कच्चे तेल और अन्य कच्चे माल की कीमतें बढ़ने से लागत बढ़ रही है और कंपनियां दाम बढ़ाने पर विचार कर रही हैं। इससे बोतलबंद पानी, नमक, तेल जैसी रोजमर्रा की चीजें, एसी, फ्रिज जैसे कंज्यूमर ड्यूरेबल से लेकर नॉन-सर्जिकल मेडिकल आइटम के दाम बढ़ सकते हैं। पूरी खबर पढ़ें…
मिडिल-ईस्ट जंग: कांग्रेस के 4 बड़े नेता सरकार के साथ:राहुल गांधी से अलग राय रखी; LPG संकट पर कहा- सिर्फ माहौल बनाया जा रहा है

कांग्रेस के चार बड़े नेता मिडिल ईस्ट जंग और एलपीजी संकट पर पार्टी लाइन से हटकर बात कर रहे हैं। इनमें कमलनाथ, आनंद शर्मा, शशि थरूर और मनीष तिवारी शामिल हैं। एक तरफ जहां राहुल गांधी इन मुद्दों पर सीधे पीएम का नाम लेकर निशाना साध रहे हैं। वहीं कांग्रेस के सीनियर लीडर मौजूदा परिस्थिति में भारत की विदेश नीति की तारीफ कर रहे। कांग्रेस MP मनीष तिवारी ने एक टीवी न्यूज चैनल पर वेस्ट एशिया युद्ध पर बोलते हुए कहा कि सरकार शायद सही काम कर रही है। गुरुवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा ने भारत के डिप्लोमैटिक तरीके की तारीफ करते हुए इसे मैच्योर और स्किलफुल बताया। वहीं मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने गैस संकट पर कहा था कि ऐसी कोई कमी नहीं है। यह बस एक माहौल बनाया जा रहा है। सरकार के समर्थन में कांग्रेस नेताओं के बयान… आनंद शर्मा बोले- सरकार ने संभावित खतरों से बचाया आनंद शर्मा ने X पर पोस्ट में लिखा कि संकट से निपटने में भारत का डिप्लोमैटिक तरीका समझदारी भरा रहा है। जिससे संभावित मुश्किलों से बचा गया है। उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने ‘एक अप्रत्याशित और अस्थिर स्थिति’ में राजनीतिक नेताओं को पॉलिसी फैसलों के बारे में बताने के लिए एक ऑल-पार्टी मीटिंग भी की। उन्होंने आगे लिखा कि यह नेशनल डायलॉग जारी रहना चाहिए। नेशनल एकता और नेशनल इंटरेस्ट को ध्यान में रखकर एक मैच्योर रिस्पॉन्स आज की जरूरत है। इस पोस्ट को भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने भी शेयर किया था। कमलनाथ बोले- गैस की कहीं पर कोई कमी नहीं LPG की कमी की कई रिपोर्टों के सामने आने पर कमलनाथ ने कहा, ऐसी कोई कमी नहीं है। यह बस एक माहौल बनाया जा रहा है कि कमी है। कमलनाथ ने कुछ लोगों पर राजनीतिक फायदे के लिए जानबूझकर पैनिक पैदा करने का आरोप लगाया। हालांकि इस बयान पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी रिएक्शन दिया। उन्होंने X पर पोस्ट में लिखा कि कांग्रेस के नेता खुद मान रहे हैं कि देश में पेट्रोल, डीजल और गैस की कमी नहीं है। थरूर बोले थे- भारत की चुप्पी जंग का समर्थन करना नहीं कांग्रेस MP शशि थरूर ने इंडियन एक्सप्रेस में एक आर्टिकल में लिखा था कि मिडिल ईस्ट जंग मामले में भारत का संयम स्ट्रेटेजिक समझदारी दिखाता है। उन्होंने लिखा, इस मामले में चुप्पी कायरता नहीं है। बल्कि हमें समझना होगा कि हमारे राष्ट्रीय हित इस इलाके से जुड़े हुए हैं। अब सरकार के खिलाफ राहुल के 2 बयान… 12 मार्च: राहुल बोले- देश में ईंधन की बड़ी समस्या आने वाली है राहुल गांधी ने कहा- आने वाले समय में ईंधन एक बड़ी समस्या बनने वाला है, क्योंकि हमारी ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हो चुकी है। गलत विदेश नीति के कारण यह स्थिति पैदा हुई है। अब हमें तैयारी करनी होगी। हमारे पास अभी थोड़ा समय है, इसलिए सरकार और प्रधानमंत्री को तुरंत तैयारी शुरू करनी चाहिए, वरना करोड़ों लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। मुझे साफ दिख रहा है कि एक बड़ी समस्या आने वाली है। समस्या यह है कि प्रधानमंत्री देश के प्रधानमंत्री की तरह काम नहीं कर पा रहे हैं। इसके पीछे भी कारण हैं, वे फंसे हुए हैं। 21 मार्च: राहुल बोले- तेल की कीमतें बढ़ना महंगाई का संकेत कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने डॉलर के मुकाबले रुपए के गिरने और इंडस्ट्रियल फ्यूल की कीमत बढ़ने पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। राहुल ने X पोस्ट में लिखा, ‘रुपए का डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 100 की तरफ बढ़ना और इंडस्ट्रियल फ्यूल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी, ये सिर्फ आंकड़े नहीं, आने वाली महंगाई के साफ संकेत हैं।’ ———————– ये खबर भी पढ़ें… घरों तक जंग की आंच, दूध-किराना-इलाज महंगे होंगे: रोजमर्रा के सामान के दाम बढ़ाने की तैयारी पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने कंपनियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। कच्चे तेल और अन्य कच्चे माल की कीमतें बढ़ने से लागत बढ़ रही है और कंपनियां दाम बढ़ाने पर विचार कर रही हैं। इससे बोतलबंद पानी, नमक, तेल जैसी रोजमर्रा की चीजें, एसी, फ्रिज जैसे कंज्यूमर ड्यूरेबल से लेकर नॉन-सर्जिकल मेडिकल आइटम के दाम बढ़ सकते हैं। पूरी खबर पढ़ें…
हरियाणवी-मलयालम जैसी भाषाओं के रैप भी वायरल:धुरंधर में मेघालय की सिंगर रेबल के तीन गाने हिट; अब नॉर्थईस्ट-केरल के सिंगर भी वायरल

धुरंधर की सफलता के पीछे उसका साउंडट्रैक भी है। मेघालय की 22 वर्षीय सिंगर रेबल (डायाफी लामारे) धुरंधर में अपने गानों से वायरल हुई हैं। रेबल ने नाल नचना, रन डाउन द सिटी और आरी आरी जैसे हिट ट्रैक्स फिल्म को दिए। ये एक नया ट्रेंड है, तमिल हो या मराठी, अब हर राज्य के अपने रैप वायरल हो रहे हैं। श्रेयस सागवेकर आज मराठी रैप का बड़ा चेहरा हैं। उनके मराठी ट्रैक ‘तांबडी चामडी’ को 5 करोड़ से अधिक यूट्यूब व्यूज मिले। इसी तरह मलयालम रैप भी केरल में पॉपुलर है। रैपर डैब्जी (मोहम्मद फासिल) का ‘इलूमिनाटी’ इसका उदाहरण है। यूट्यूब पर इसके 41 करोड़ व्यूज हैं। कश्मीर में ‘कोशूर रैप’ है, जिसमें वहां की जिंदगी को रैप के जरिए सुनाते हैं। रेबल: 24 वर्षीय रैपर; धुरंधर में इनके गाने वायरल 24 वर्षीय रेबल मेघालय में जन्मी हैं। उन्हें 10 की उम्र से म्यूजिक का शौक है। बेंगलुरु से इंजीनियरिंग करने के बाद उन्होंने पारंपरिक करियर की बजाय म्यूजिक को ही चुना। हाल ही में रेबल ने मलयालम फिल्म लोकह चैप्टर 1 चंद्रा में भी काम किया है। धुरंधर में 3 गाने गाए हैं। ढांडा न्योलीवाला – पहले जैवलिन थ्रोअर थे ढांडा न्योलीवाला 1998 में हरियाणा के हिसार जिले के न्योली कलां गांव में जन्मे। एक सरकारी स्कूल टीचर के बेटे हैं। म्यूजिक से पहले वह राष्ट्रीय स्तर के जैवलिन थ्रोअर रह चुके हैं। सितंबर 2022 में ‘अप टु यू’से उन्हें सक्सेस मिली। अब हरियाणवी रैप को पॉपुलर बना रहे। पाल डब्बा – पहले डांसर थे, अब तमिल के बड़े रैपर इनका असली नाम अनीश है। उनका स्टेज नाम पाल डब्बा है, तमिल में जिसका मतलब ‘दूध पाउडर का डिब्बा’ होता है। उन्होंने अपनी जड़ों और नॉर्थ चेन्नई की संस्कृति को सम्मान देने के लिए चुना। रैपर बनने से पहले वे एक डांसर थे। स्पॉटिफाई पर 54 लाख मंथली लिसनर्स हैं। हनुमानकाइंड – कॉर्पोरेट जॉब छोड़ रैपर बने 2024 में ‘बिग डॉग्स’ जैसे वायरल हिट से ग्लोबल पहचान हासिल की, जो बिलबोर्ड हॉट 100 में 23वें स्थान तक पहुंचा। म्यूजिक इंडस्ट्री में आने से पहले वह 2014 में गोल्डमैन सैक में काम कर चुके हैं। कोरियन वेब सीरीज स्किव्ड गेम में भी इनका ट्रैक लिया गया था। असर – रीजनल रैप में 118% तक की उछाल- केन रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक 2023 में भारत में कुल म्यूजिक कंजम्पशन का 34% हिस्सा रीजनल म्यूजिक का रहा। वहीं स्पॉटिफाई के डेटा के अनुसार हरियाणवी और मलयालम जैसी भाषाओं में रीजनल हिप-हॉप में 500 से 600% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
Post Office RD: Invest From ₹100, Get 6.7% Interest

Hindi News Business Post Office RD: Invest From ₹100, Get 6.7% Interest | Small Savings Schemes नई दिल्ली24 मिनट पहले कॉपी लिंक सरकार ने अक्टूबर-दिसंबर (Q1FY27) के लिए स्मॉल सेविंग स्कीम्स की ब्याज दरों में बदलाव नहीं किया है। यानी आपको पहले जितना ही ब्याज मिलता रहेगा। ऐसे में अगर आप रिकरिंग डिपॉजिट (RD) कराने का प्लान बना रहे हैं तो पोस्ट ऑफिस RD आपके लिए सही रह सकती है। इस पर 6.70% सालाना ब्याज मिल रहा है। इसमें 5 साल तक हर महीने 2 हजार रुपए जमा करने पर 1 लाख 43 हजार रुपए का एकमुश्त फंड तैयार कर सकते हैं। यहां हम आपको पोस्ट ऑफिस RD के बारे में बता रहे हैं… सबसे पहले समझें RD क्या है? पोस्ट ऑफिस की रिकरिंग डिपॉजिट या RD बड़ी बचत में आपकी मदद कर सकती है। आप इसमें हर महीने सैलरी आने पर एक निश्चित रकम डालते रहें और 5 साल बाद मैच्योर होने पर आपके हाथ में बड़ी रकम होगी। घर के गुल्लक में पैसे जमा करने पर भले ही आपको ब्याज नहीं मिले, पर यहां पैसे जमा करने पर आपको ब्याज भी मोटी मिलती है। 5 साल तक हर महीने 1 हजार निवेश पर बनेगा 71 हजार का फंड पोस्ट ऑफिस RD में अगर आप 1 हजार रुपए प्रति महीने की रकम इन्वेस्ट करते हैं, तो 6.7% सालाना ब्याज दर के हिसाब से 5 साल बाद मैच्योर होने पर यह लगभग 71 हजार रुपए हो जाएंगे। RD में जमा पैसे पर ले सकते हैं लोन RD पर लोन सुविधा भी मिलती है। यानी बीच में पैसों की जरूरत पड़ने पर आप बिना RD तुड़वाए इस पर लोन भी ले सकते है। इसमें पर्सनल लोन की तुलना में कम ब्याज पर लोन मिलता है। पोस्ट ऑफिस की पांच साल वाली RD में अगर आप लगातार 12 किस्त जमा कर लेते हैं तो आप लोन की सुविधा का लाभ ले सकते हैं। यानी ये सुविधा लेने के लिए आपको कम से कम एक साल लगातार रकम डिपॉजिट करनी होगी। एक साल बाद आप अपने अकाउंट में जमा राशि का 50% तक लोन ले सकते हैं। अगर आप RD पर लोन लेते हैं तो आपको लोन की रकम पर ब्याज 2% + RD खाते पर लागू ब्याज दर के रूप में लागू होगा। जैसे अभी RD पर 6.7% ब्याज मिल रहा है, ऐसे में अगर आप अभी RD पर ब्याज लेते है तो आपको 8.7% सालाना की ब्याज दर पर लोन मिलेगा। RD के 5 फायदे सुरक्षित निवेश: पोस्ट ऑफिस RD भारत सरकार द्वारा समर्थित है, तो पैसा डूबने का कोई डर नहीं। ये उन लोगों के लिए बढ़िया है, जो जोखिम नहीं लेना चाहते। नियमित बचत की आदत: हर महीने थोड़ा-थोड़ा (मिनिमम 100 रुपए से शुरू) जमा करना होता है, जिससे बचत की आदत पड़ती है। अच्छा ब्याज: अभी 6.7% सालाना ब्याज मिलता है, जो कंपाउंडिंग के साथ बढ़ता है। बैंक के सेविंग अकाउंट से कहीं बेहतर रिटर्न है। लचीला निवेश: आप 100 रुपए से शुरू कर सकते हैं, और ऊपर की कोई लिमिट नहीं। अपनी जेब के हिसाब से राशि चुन सकते हैं। लोन की सुविधा: अगर इमरजेंसी में पैसों की जरूरत पड़े, तो RD के खिलाफ लोन ले सकते हैं। ये तब काम आता है, जब आप स्कीम तोड़ना नहीं चाहते। कोई भी व्यक्ति खोल सकता है अकाउंट कोई भी व्यक्ति RD अकाउंट खोल सकता है। छोटे बच्चों के नाम पर भी यह अकाउंट खोला जा सकता है। 10 साल या उससे अधिक उम्र होने पर आप इसे खुद ऑपरेट कर सकते हैं। 3 लोग मिलकर जॉइंट अकाउंट भी खोल सकते हैं। आप किसी भी पोस्ट ऑफिस के जरिए इसमें अकाउंट खोल सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Iran Missile Downs US Jet

वॉशिंगटन डीसी/तेहरान15 मिनट पहले कॉपी लिंक रिप्रेजेंटेटिव वीडियो ईरान जंग के एक महीने पूरे होने के बाद ट्रम्प ने 2 अप्रैल को अमेरिकी जनता को संबोधित किया। अपने 19 मिनट के भाषण में उन्होंने यह दावा किया कि अमेरिका ने ईरान की हवाई सेना को तबाह कर दिया है और उनके पास जवाब देने की क्षमता नहीं बची है। ट्रम्प ने यह भी कहा कि अमेरिका का ईरान के आसमान पर कब्जा हो चुका है। उनके विमान तेहरान के ऊपर उड़ रहे हैं और ईरान अब कुछ नहीं कर पा रहा है। ट्रम्प ही नहीं, विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी कुछ ऐसे ही दावे किए। लेकिन अब हालात कुछ और कहानी बयां कर रहे हैं। पिछले 24 घंटों में अमेरिका के दो सैन्य विमान और सर्च ऑपरेशन में लगे दो ब्लैकहॉक हेलीकॉप्टर ईरान के हमले का शिकार हुए। न्यूज एजेंसी AP की रिपोर्ट के मुताबिक, 23 साल से ज्यादा समय में पहली बार ऐसा हुआ है कि अमेरिकी लड़ाकू विमान दुश्मन की गोलीबारी में गिराए गए हैं। इससे पहले 2003 में इराक युद्ध के दौरान ऐसा हुआ था। ईरान ने शुक्रवार को अमेरिकी एयरक्राफ्ट A-10 पर हमला किया। यह फुटेज IRGC ने जारी की है। ईरान युद्ध में अमेरिका के 7 विमान तबाह 2 मार्च: कुवैत में ‘फ्रेंडली फायर’ में 3 F-15 गिरे, सभी 6 क्रू मेंबर सुरक्षित निकले। 12 मार्च: इराक में KC-135 टैंकर क्रैश, 6 अमेरिकी एयरक्रू की मौत। 27 मार्च: सऊदी के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर E-3 सेंट्री नष्ट हुआ, एक टैंकर विमान को भी नुकसान हुआ। 3 अप्रैल: F-15 और A-10 नष्ट हुए, पहली बार दुश्मन की फायरिंग में अमेरिकी विमान गिरे। 24 घंटे में 2 अमेरिकी जेट्स गिराए, 2 रेस्क्यू हेलिकॉप्टर पर अटैक ईरानी मीडिया के मुताबिक सबसे पहले अमेरिकी F-15E फाइटर जेट को मार गिराया गया। यह ईरान के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में उड़ान भर रहा था। F-15E फाइटर जेट के क्रू को ढूंढने के लिए अमेरिकी विमान A-10 अटैक एयरक्राफ्ट पहुंचा तो उस पर भी हमला हुआ। A-10 हमले के बाद कुवैत के हवाई क्षेत्र तक पहुंच गया, जहां पायलट ने सुरक्षित तरीके से इजेक्ट किया। पायलट सुरक्षित है, हालांकि विमान कुवैत में क्रैश हो गया। CBS के अनुसार, F-15E में दो क्रू मेंबर थे। इनमें से एक को सुरक्षित निकाल लिया गया है, जबकि दूसरा लापता है। ईरानी सरकारी मीडिया का कहना है कि पैराशूट के जरिए बाहर निकला यह क्रू सदस्य देश के दक्षिणी हिस्से में उतरने का अनुमान है। वहीं, F-15E फाइटर जेट के रेस्क्यू के लिए 2 ब्लैकहॉक हेलीकॉप्टर भेजे गए थे। उन पर भी हमला हुआ। हालांकि, इन पर मौजूद सभी अमेरिकी सैनिक सुरक्षित बताए जा रहे हैं। ईरान ने जो तस्वीरें जारी की हैं कि उनके आधार पर एक्सपर्ट्स इस प्लेन को F-15E बता रहे हैं। ईरान की रणनीति नहीं समझ पा रहा अमेरिका एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका को ईरान के आसमान में बढ़त जरूर है, लेकिन पूरी तरह कंट्रोल नहीं है। ईरान का एयर डिफेंस सिस्टम कमजोर जरूर हुआ है, लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। अब सवाल यह है कि कमजोर एयर डिफेंस होने के बावजूद ईरान ने इतने एडवांस अमेरिकी विमानों को कैसे निशाना बनाया? इसका जवाब है ईरान की ‘असिमेट्रिक वॉरफेयर’ यानी अलग तरीके से युद्ध लड़ने की रणनीति। ईरान जानता है कि सीधे युद्ध में अमेरिका से मुकाबला करना मुश्किल है, इसलिए कम संसाधनों में ज्यादा नुकसान पहुंचाने की रणनीति अपना रहा है। वह अक्सर अमेरिका पर चौंकाने वाले हमले कर रहा है। यही वजह है कि जंग शुरू होने के 35 दिन बाद भी अमेरिका अभी भी ईरान की रणनीति को पूरी तरह समझ नहीं पाया है। एक्सपर्ट का मानना है कि अमेरिकी विमानों और हेलिकॉप्टर पर हमले के पीछे मजीद एयर डिफेंस सिस्टम या कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल (शोल्डर-फायर मिसाइल) हो सकती हैं। माना जा रहा है कि अमेरिकी विमान कम ऊंचाई पर उड़ रहे थे, इसलिए वे इन मिसाइलों की रेंज में आ गए। मजीद एयर डिफेंस 6km दूरी तक निशाना लगा सकता है मजिद सिस्टम ईरान ने 2021 के आसपास इस्तेमाल करना शुरू किया था। इसे कम ऊंचाई पर उड़ने वाले टारगेट को निशाना बनाने के लिए बनाया गया है। इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह रडार पर निर्भर नहीं रहता, बल्कि इंफ्रारेड तकनीक का इस्तेमाल करता है। मजीद रडार सिग्नल नहीं देता, इसलिए विमान इसे पहले से पकड़ नहीं पाते। इसकी मार करने की दूरी करीब 8 किलोमीटर और ऊंचाई 6 किलोमीटर तक है। इस वजह से यह उन हालात में ज्यादा कारगर होता है, जहां दुश्मन के विमान या ड्रोन को किसी खास इलाके के ऊपर आना पड़ता है। यह एकसाथ कई टारगेट पर नजर रख सकता है और इसमें एकसाथ 8 मिसाइल तैयार रहती हैं। यह सिस्टम आमतौर पर मोबाइल प्लेटफॉर्म पर लगाया जाता है, यानी इसे जरूरत के हिसाब से एक जगह से दूसरी जगह जल्दी शिफ्ट किया जा सकता है। इससे दुश्मन के लिए इसकी सही लोकेशन पता लगाना मुश्किल हो जाता है। मोबाइल डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल एक्सपर्ट्स का कहना है अमेरिकी हमले में नुकसान पहुंचने के बाद ईरान ने अपनी रणनीति बदली है। पहले वह स्थिर एयर डिफेंस सिस्टम इस्तेमाल करता था, लेकिन अब उसने मोबाइल सिस्टम अपनाए हैं। अब उसके कई मिसाइल लॉन्चर भूमिगत ठिकानों, सुरंगों और कठिन इलाकों में छिपे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, लगातार हमलों के बावजूद उसके करीब आधे मिसाइल लॉन्चर अभी भी सुरक्षित हैं। इसके अलावा, मोबाइल लॉन्चर तेजी से जगह बदल सकते हैं। इसे ‘फायर करो और तुरंत हट जाओ’ रणनीति कहा जाता है, जिससे उन्हें निशाना बनाना मुश्किल हो जाता है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान चीन के HQ-9B जैसे उन्नत मिसाइल सिस्टम का भी इस्तेमाल कर सकता है, जिसमें रडार और इंफ्रारेड दोनों तकनीक होती हैं। ———————————- ईरान जंग से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… दावा-ईरान ने हीट ट्रैकिंग मिसाइल से अमेरिकी F-35 को गिराया:यह दुनिया का सबसे एडवांस फाइटर जेट, लेकिन ईरानी खतरे का अंदाजा नहीं लगा पाया ईरान ने 19 मार्च को दुनिया के सबसे एडवांस अमेरिकी फाइटर जेट F-35 को गिराने का दावा किया। ईरानी मीडिया प्रेस टीवी के मुताबिक ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने
कच्चा आम बेहतर है या पका हुआ? जानें आपकी सेहत के लिए क्या है बेस्ट, किन लोगों के लिए नुकसानदेह

Last Updated:April 04, 2026, 12:56 IST Raw vs Ripe Mango : गर्मियों की दस्तक के साथ ही फलों के राजा ‘आम’ का बेसब्री से इंतजार शुरू हो जाता है. हम में से कई लोग कच्चे आम की चटनी और आम पन्ना के शौकीन होते हैं, तो कई लोग पके आम के रसीले स्वाद के दीवाने हैं. लेकिन स्वाद की इस जंग के बीच अक्सर यह सवाल उठता है कि सेहत के लिहाज से इन दोनों में से कौन सा विकल्प ज्यादा फायदेमंद है? Raw Vs Ripe Mango Health Benefits : वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो कच्चा और पका आम, दोनों ही पोषक तत्वों का खजाना हैं, लेकिन दोनों की खूबियां अलग-अलग हैं. कच्चा आम विटामिन-सी (Vitamin C) का एक बेहतरीन स्रोत माना जाता है. एक छोटे से कच्चे आम में उतनी ही मात्रा में विटामिन-सी होता है, जितना कि तीन सेब या एक बड़े नारंगी में. यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी को बढ़ाने में जादुई तरीके से काम करता है. (All Image Credit: Canva) वहीं दूसरी ओर, जब आम पक जाता है, तो इसमें मौजूद स्टार्च शुगर में बदल जाता है, जिससे इसका स्वाद मीठा हो जाता है. पके हुए आम में विटामिन-ए (Vitamin A) और बीटा-कैरोटीन की प्रचुर मात्रा पाई जाती है. यह न केवल हमारी आंखों की रोशनी के लिए वरदान है, बल्कि त्वचा में प्राकृतिक निखार लाने में भी मददगार होता है. पके आम में एंटीऑक्सीडेंट्स भी भरपूर होते हैं, जो शरीर की कोशिकाओं को नुकसान से बचाते हैं. गर्मियों के दौरान ‘लू’ (Heatstroke) से बचने के लिए कच्चा आम सबसे भरोसेमंद साथी है. कच्चे आम का पना शरीर में नमक और पानी के संतुलन को बनाए रखता है, जिससे डिहाइड्रेशन का खतरा कम हो जाता है. अगर आप पाचन की समस्या जैसे एसिडिटी, कब्ज या सुबह के समय होने वाली जी मिचलाने की समस्या से परेशान हैं, तो काला नमक लगाकर कच्चा आम खाना आपके लिए किसी औषधि से कम नहीं है. Add News18 as Preferred Source on Google पका हुआ आम एनर्जी का एक बड़ा स्रोत है. इसमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट्स शरीर को तुरंत एनर्जी प्रदान करते हैं. इसके अलावा, पके आम में फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो पाचन तंत्र को सुचारू रूप से चलाने में मदद करती है. हालांकि, पके आम में कैलोरी और शुगर की मात्रा अधिक होती है, इसलिए जो लोग वजन बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, उनके लिए यह एक बेहतरीन आहार हो सकता है. आयुर्वेद के अनुसार, कच्चा आम जहाँ पित्त और वायु को संतुलित कर लू से बचाता है, वहीं पका हुआ आम वात को शांत कर शरीर को बल और ओज प्रदान करता है. प्रकृति ने हर रूप में इसे औषधि बनाया है. लेकिन, आम खाने के कुछ नुकसान भी हो सकते हैं, जिनके बारे में सावधानी बरतना जरूरी है. डायबिटीज (शुगर) के मरीजों के लिए पका हुआ आम जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि यह ब्लड शुगर लेवल को तेजी से बढ़ा सकता है. ऐसे मरीजों को आम का सेवन डॉक्टर की सलाह पर और बहुत ही सीमित मात्रा में करना चाहिए. इसके अलावा, आम की तासीर गर्म होती है, इसलिए अधिक मात्रा में खाने से चेहरे पर मुहांसे या फोड़े-फुंसी निकल सकते हैं. गठिया या जोड़ों के दर्द से परेशान लोगों को कच्चे आम के अधिक सेवन से बचना चाहिए, क्योंकि इसकी खटास दर्द को बढ़ा सकती है. साथ ही, कच्चे आम के ऊपरी हिस्से पर निकलने वाले सफेद चिपचिपे पदार्थ (चोप) को अच्छी तरह साफ किए बिना नहीं खाना चाहिए, वरना यह गले में संक्रमण, खुजली और खराश का कारण बन सकता है. कई बार इसे खाने से पेट में मरोड़ भी उठ सकती है. कच्चा और पका आम दोनों ही अपनी-अपनी जगह सेहतमंद हैं. अगर आप वजन कम करना चाहते हैं और गर्मी से राहत पाना चाहते हैं, तो कच्चा आम चुनें. लेकिन अगर आप आंखों की रोशनी और एनर्जी बढ़ाना चाहते हैं, तो पका हुआ आम बेहतर है. बस ध्यान रखें कि ‘अति’ किसी भी चीज की बुरी होती है, इसलिए आम का आनंद सीमित और संतुलित मात्रा में ही लें. First Published : April 04, 2026, 12:54 IST
‘वाम मोर्चे के बारे में अब कुछ भी नहीं बचा’: राहुल गांधी ने केरल रैली में विजयन-बीजेपी संबंधों का आरोप लगाया | भारत समाचार

आखरी अपडेट:04 अप्रैल, 2026, 12:55 IST राहुल गांधी ने कहा कि एलडीएफ की नीतियां अब वामपंथी मूल्यों को प्रतिबिंबित नहीं करती हैं और उन्होंने सत्तारूढ़ गठबंधन पर भाजपा और आरएसएस के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए रखने का आरोप लगाया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी केरल के अलाप्पुझा में एक चुनावी रैली को संबोधित कर रहे हैं। (कांग्रेस/एक्स) कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केरल में पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार पर तीखा हमला किया और सत्तारूढ़ गठबंधन पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए रखने का आरोप लगाया। अलप्पुझा में एक रैली में बोलते हुए, राहुल गांधी ने कहा, “आज एक वरिष्ठ नेता जो कभी वामपंथ से थे, इस मंच पर हैं। एक कारण है कि वह यहां बैठे हैं। ऐसा नहीं है कि उन्होंने अचानक अपने सोचने का तरीका बदल दिया है। जिन लोगों ने एक राजनीतिक संगठन में कई साल बिताए हैं, वे उस यात्रा से चीजों को आत्मसात करते हैं।” उन्होंने कहा, “वह यहां इसलिए बैठे हैं क्योंकि एलडीएफ के साथ कुछ बुनियादी घटित हुआ है। कई सालों तक एलडीएफ हमारे प्रतिद्वंद्वी थे। हम उनसे लड़ना जारी रखेंगे, लेकिन कई सालों तक वे कुछ विचारों के लिए खड़े रहे। सच कहूं तो, वाम मोर्चे के बारे में अब कुछ भी ‘वाम’ नहीं है और इस चुनाव के बाद वाम मोर्चे के पास कुछ भी नहीं बचेगा।” आज इस मंच पर एक वरिष्ठ नेता हैं जो कभी वामपंथ से जुड़े थे. कारण स्पष्ट है: एलडीएफ के भीतर कुछ बुनियादी बदलाव आया है। सच कहूँ तो, वाम मोर्चे के बारे में अब कुछ भी “बचा हुआ” नहीं है, और इस चुनाव के बाद, वाम मोर्चे के पास कुछ भी नहीं बचेगा।… pic.twitter.com/m2Ni0CBGB5 – कांग्रेस (@INCIndia) 4 अप्रैल 2026 गांधी ने कहा कि कई एलडीएफ नेता और कार्यकर्ता इस तथ्य से परेशान थे कि गठबंधन की नीतियां अब वामपंथी मूल्यों को प्रतिबिंबित नहीं करती हैं, और आरोप लगाया कि एक “छिपा हुआ हाथ” एलडीएफ को प्रभावित कर रहा है। “ उन्होंने टिप्पणी की, “यह छिपी हुई ताकत सांप्रदायिक है, भारत के संविधान को स्वीकार नहीं करती है और लोगों को विभाजित करना, हमला करना और अपमानित करना चाहती है। केरल में हर कोई भाजपा-आरएसएस और वाम मोर्चा, सीपीएम के बीच संबंध को स्पष्ट रूप से देख सकता है।” यह भी पढ़ें: केरल चुनाव 2026: क्या सत्ता विरोधी लहर वास्तविक है या अतिरंजित? गांधी ने पीएम मोदी, विजयन पर हमला बोला लोकसभा में विपक्ष के नेता ने आगे सवाल किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी चुनावी रैलियों के दौरान मुख्यमंत्री विजयन पर कभी हमला क्यों नहीं करते, जबकि वह लगातार कांग्रेस पर हमला करते हैं। उन्होंने कहा, “मैं बीजेपी से लड़ता हूं, मैं आरएसएस से लड़ता हूं। मेरे खिलाफ 36-38 मामले हैं। उन्होंने मेरा सरकारी घर और लोकसभा में मेरी सदस्यता छीन ली। मैं जमानत पर हूं और 55 घंटे तक पूछताछ की गई है, लेकिन मैं पीछे नहीं हटता। पीएम मोदी हर दिन मुझ पर और कांग्रेस पार्टी पर हमला करते हैं। नरेंद्र मोदी आपके सीएम पर हमला क्यों नहीं करते?” उन्होंने कहा कि पीएम मोदी हर चुनावी भाषण में भगवान, मंदिर और धर्म का जिक्र करते हैं, लेकिन जब वह केरल आते हैं तो इस बारे में एक शब्द भी नहीं बोलते हैं. उन्होंने कहा, “वह जानते हैं कि एलडीएफ भारत में नरेंद्र मोदी को कभी चुनौती नहीं दे सकता। यही कारण है कि यूडीएफ उनके निशाने पर है।” गांधी ने आगे पीएम मोदी और विजयन दोनों पर 10 साल से अधिक समय तक सत्ता में रहने के बाद “अहंकारी” और “सत्ता के नशे में चूर” होने का आरोप लगाया, उन्होंने कहा कि लोगों के साथ उनके रिश्ते खराब हो गए हैं। उन्होंने कहा, “जब वे यह मानने लगते हैं कि सत्ता उनसे आती है, तो अहंकार आ जाता है। उनके आस-पास के लोग इस भ्रम को मजबूत करते हैं और धीरे-धीरे नेता और लोगों के बीच संबंध टूट जाता है। नेता सुनना बंद कर देते हैं और लोग खुद को उपेक्षित और कटा हुआ महसूस करने लगते हैं। केरल के मुख्यमंत्री और प्रधान मंत्री के साथ यही हुआ है।” गांधी की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब केरल 9 अप्रैल को विधानसभा चुनाव के लिए तैयार है, जिसमें एलडीएफ और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ के बीच जोरदार टकराव होने की संभावना है। जगह : अलाप्पुझा, भारत, भारत पहले प्रकाशित: 04 अप्रैल, 2026, 12:55 IST न्यूज़ इंडिया ‘वाम मोर्चे के बारे में अब कुछ भी नहीं बचा’: राहुल गांधी ने केरल रैली में विजयन-भाजपा संबंधों का आरोप लगाया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
कॉकरोच हटाने के उपाय: कॉकरोच ने किचन-बाथरूम की नाल पर कब्ज़ा कर लिया है? इन 2 उपायों से एक मिनट में हो जाएंगे रफूचक्कर

4 अप्रैल 2026 को 12:52 IST पर अपडेट किया गया कॉकरोच भगाने के उपाय: किचन और किचन की नालियों में कॉकरोच का होना बहुत आम समस्या है। ये न सिर्फ गाय-बैल फैले हुए हैं, बल्कि स्थैतिक का कारण भी बन सकते हैं। अगर आप भी परेशान हैं तो घबराने की जरूरत नहीं है। घर में मौजूद हल्दी से ही आप आसानी से भाग सकते हैं। तो जानें जानें यहां भागने के आसान उपाय- अनुसरण करना : उपाय 1: हल्दी और फर्म सोडा का मिश्रण: 1 माइनॉर्ज़ लें हल्दी और 1 मेरिक्स सोडा स्टॉक्स। इसमें थोड़ा सा पानी स्टेरॉयड पेस्ट बना लें। इससे कॉकरोच जल्दी भाग जाते हैं। छवि: फ्रीपिक इस पेस्ट को किचन और किश्ती की नाल के आसपास लगाया गया। रात भर ऐसे ही निकल जाना। हल्दी में एंटी-एसिड गुण होते हैं और सोडा कॉकरोच को खत्म करने में मदद मिलती है। छवि: फ्रीपिक उपाय 2: हल्दी और नीम पाउडर: 1 माइक्रो हल्दी और 1 माइक्रो नीम का पाउडर इस मिश्रण को सूखा ही नालो और देशी में छिड़कें। जहां कॉकरोच प्रमुख दिग्दर्शन हैं, वहां विशेष ध्यान हैं। छवि: फ्रीपिक नीम और हल्दी दोनों ही प्राकृतिक कीट-नाशक हैं। यूक्रेनी गंध कॉकरोच को दूर भगाएं। छवि: एआई किचन और किचन को हमेशा साफ रखें। नालो में जमी गंदगी को समय-समय पर साफ करें। खाने की चीज़ें खुली न छोड़ें। रात में एक साथ रहने की कोशिश करें। छवि: फ्रीपिक कॉकरोच से निःशुल्क प्राप्त करने के लिए महिंद्रा केमिकल्स की आवश्यकता नहीं है। हल्दी जैसे घरेलू उपाय से भी आप आसानी से आराम पा सकते हैं। छवि: एआई बस थोड़ी सी नियमितता और सफाई साफ-सुथरा ताकि आपका घर रहे साफ और किट-मुक्त रहे। छवि: फ्रीपिक द्वारा प्रकाशित : समृद्धि ब्रेजा प्रकाशित 4 अप्रैल 2026 12:52 IST
रामायण में भगवान परशुराम के रोल में भी दिखेंगे रणबीर:एक्टर ने खुद किया कन्फर्म, बोले- यह किरदार निभाना भी मेरे लिए खास अनुभव रहा

एक्टर रणबीर कपूर ने कन्फर्म किया है कि वह फिल्म रामायण में भगवान राम के साथ भगवान परशुराम के किरदार में भी दिखेंगे। लॉस एंजेलिस में ‘कोलाइडर’ को दिए इंटरव्यू में जब रणबीर से सवाल पूछा गया कि वह भगवान राम और परशुराम जैसे दो अलग-अलग स्वभाव वाले किरदारों को बॉडी लैंग्वेज और आवाज से कैसे अलग दिखा रहे हैं तो उन्होंने कहा कि भगवान विष्णु के कई अवतार रहे हैं, जिनमें भगवान राम एक अवतार हैं, जबकि उनसे पहले भगवान परशुराम भी अवतार थे। रणबीर ने कहा कि भगवान राम का किरदार निभाने का मौका मिलना ही बड़ी बात थी, लेकिन साथ ही भगवान परशुराम का रोल निभाना उनके लिए और भी खास अनुभव रहा। उन्होंने आगे कहा कि एक एक्टर के रूप में केवल बॉडी लैंग्वेज ही नहीं, बल्कि रोल की आध्यात्मिकता और उसकी भावनाओं को गहराई से समझना जरूरी होता है। उनका मानना है कि एक्टिंग की शुरुआत यहीं से होती है। रणबीर ने यह भी कहा कि फिल्म रामायण की शूटिंग से पहले उन्होंने पूरे एक साल तक इन किरदारों को समझने पर काम किया। उन्होंने यह जानने की कोशिश की कि ये पात्र कौन हैं, उनकी सोच क्या है और उनके उद्देश्य क्या हैं। बेटी को रामायण की कहानियां सुनाते थे रणबीर लॉस एंजेलिस में रणबीर ने मीडिया इंटरेक्शन में यह भी बताया कि वह खुद को खुशकिस्मत मानते हैं कि उन्हें फिल्म रामायण का हिस्सा बनने का मौका मिला। यह मौका उन्हें उसी समय मिला, जब वह पिता बने थे। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी साढ़े तीन साल की है। जब वह भगवान राम का किरदार निभा रहे थे, तब घर लौटकर वह अपनी बेटी को रामायण की कहानियां सुनाते थे। रणबीर ने कहा कि उनकी बेटी इस विषय को लेकर काफी उत्सुक रहती है। वह उनसे पूछती थी कि क्या उन्होंने आज हनुमान जी या सीता जी के साथ शूट किया। उन्होंने बताया कि यह उसकी रामायण के प्रति दिलचस्पी को दर्शाता है।
सिन्दूर के विरोध में ईरान युद्ध: कांग्रेस नेता जिन्होंने पार्टी लाइन का पालन नहीं किया, केंद्र के रुख का समर्थन किया | भारत समाचार

आखरी अपडेट:04 अप्रैल, 2026, 12:24 IST राहुल गांधी ने पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत की विदेश नीति को समझौतावादी बताया। इसके विपरीत, शशि थरूर ने इसे “जिम्मेदार शासनकला” कहा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने विदेश नीति, एलपीजी पर राहुल गांधी का विरोध किया ईरान युद्ध और एलपीजी आपूर्ति पर चिंताओं ने कांग्रेस पार्टी के भीतर दरारें उजागर कर दी हैं। कमलनाथ, आनंद शर्मा, शशि थरूर और मनीष तिवारी सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने पीएम नरेंद्र मोदी सरकार के पश्चिम एशिया संघर्ष और भारत में ईंधन की स्थिति से निपटने के तरीके पर राहुल गांधी से अलग रुख अपनाया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध पर सरकार के कूटनीतिक दृष्टिकोण की बार-बार आलोचना की है। हालाँकि, उनकी अपनी पार्टी के कई नेताओं ने सरकार के कार्यों के प्रति समर्थन व्यक्त किया है। राहुल गांधी ने पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत की विदेश नीति को समझौतावादी बताया। इसके विपरीत, शशि थरूर ने इसे “जिम्मेदार शासनकला” कहा। राहुल गांधी ने सरकार से ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या की निंदा करने का भी आग्रह किया. खामेनेई की मृत्यु के कुछ दिनों बाद, भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने नई दिल्ली में ईरानी दूतावास में शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए, जो देश की पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया थी। मनीष तिवारी ने एक टेलीविजन साक्षात्कार में कहा कि सरकार पश्चिम एशिया की स्थिति को संभालने में “संभवतः सही काम” कर रही है। वरिष्ठ नेता सरकार के समर्थन में आनंद शर्मा ने सरकार के कूटनीतिक दृष्टिकोण की सराहना करते हुए इसे “परिपक्व और कुशल” बताया। पोस्ट की एक श्रृंखला में, उन्होंने राष्ट्रीय एकता की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि भारत की प्रतिक्रिया सर्वसम्मति से निर्देशित होनी चाहिए। एलपीजी मुद्दे पर भी कमल नाथ पार्टी की लाइन से अलग हो गए। जबकि कांग्रेस कथित कमी को लेकर सरकार पर हमला कर रही है, उन्होंने कहा कि ऐसा कोई संकट नहीं है और कमी की धारणा बनाई जा रही है। बीजेपी का कांग्रेस पर पलटवार बीजेपी ने इन बयानों का इस्तेमाल कांग्रेस पर निशाना साधने के लिए किया. केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि कमल नाथ की टिप्पणी से पता चलता है कि पेट्रोल, डीजल या गैस की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कांग्रेस पर राजनीतिक कारणों से डर फैलाने का आरोप लगाया. अब तो कांग्रेस नेता निकोलस जी ने भी खुद कहा है कि देश में पेट्रोल-डीज़ल और गैस की कोई कमी नहीं है। झूठ और भ्रम के बलबूते जनता को इतने दिनों तक अनाड़ी कर रही है अब शर्म आनी चाहिए। अब समय आ गया है कि कांग्रेस पार्टी में डर और शैतान पैदा होकर अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेंकना… https://t.co/z0VXHSvKj0 -ज्योतिरादित्य एम.सिंधिया (@JM_Scindia) 2 अप्रैल 2026 पार्टी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने भी राहुल गांधी की आलोचना करते हुए उन्हें अवसरवादी बताया. ऑपरेशन सिन्दूर के बाद से पैटर्न में बदलाव ऐसे मतभेद नये नहीं हैं. जम्मू-कश्मीर में पहलगाम आतंकी हमले में 26 पर्यटकों की मौत के बाद 7 मई, 2025 को शुरू किए गए ऑपरेशन सिन्दूर के बाद भी ऐसी ही स्थिति सामने आई थी। उस समय, शशि थरूर ने सरकार के कार्यों का समर्थन किया, जबकि राहुल गांधी ने इसकी “राजनीतिक इच्छाशक्ति” की आलोचना की। मनीष तिवारी ने भी ऑपरेशन और सशस्त्र बलों की भूमिका की सराहना की. बाद में सरकार ने विदेश में भारत का पक्ष रखने के लिए 59 सांसदों का एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल बनाया। कांग्रेस ने थरूर और तिवारी को शामिल करने पर आपत्ति जताई और कहा कि उसके नेतृत्व से सलाह नहीं ली गई। थरूर को अमेरिका और लैटिन अमेरिका का दौरा करने वाले प्रतिनिधिमंडलों में से एक का नेतृत्व करने के लिए भी चुना गया था। ऑपरेशन सिन्दूर पर संसदीय बहस के दौरान थरूर और तिवारी दोनों को बोलने का मौका नहीं दिया गया। ईरान युद्ध पर ताजा मतभेद चल रहे यूएस-इजरायल-ईरान संघर्ष ने पार्टी के भीतर विभाजन को फिर से उजागर कर दिया है। आनंद शर्मा ने सरकार के दृष्टिकोण का समर्थन किया है, जबकि कमल नाथ ने एलपीजी की कमी के दावों को खारिज कर दिया है, जबकि कांग्रेस इस मुद्दे को उठा रही है। आनंद शर्मा ने कहा कि भारत ने संकट से निपटने के लिए “संभावित बारूदी सुरंगों” को टाल दिया है और निरंतर राष्ट्रीय संवाद की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने फारस के साथ भारत के ऐतिहासिक संबंधों और ऊर्जा संकट से उत्पन्न चुनौतियों की ओर भी इशारा किया। दूसरी ओर, कमल नाथ ने कुछ समूहों पर राजनीतिक लाभ के लिए रसोई गैस को लेकर दहशत पैदा करने का आरोप लगाया और कहा कि मध्य प्रदेश में कोई कमी नहीं है। ये घटनाक्रम कांग्रेस नेतृत्व और उसके कुछ वरिष्ठ नेताओं के बीच बढ़ती खाई को रेखांकित करते हैं। विदेश नीति और घरेलू ईंधन आपूर्ति से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर मतभेद सामने आए हैं, कई नेता ऐसे रुख अपना रहे हैं जो राहुल गांधी के रुख से मेल नहीं खाते। जगह : दिल्ली, भारत, भारत पहले प्रकाशित: 04 अप्रैल, 2026, 12:11 IST न्यूज़ इंडिया सिन्दूर के विरोध में ईरान युद्ध: कांग्रेस नेता जिन्होंने पार्टी लाइन का पालन नहीं किया, उन्होंने केंद्र के रुख का समर्थन किया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कांग्रेस के आंतरिक मतभेद(टी)राहुल गांधी बनाम वरिष्ठ नेता(टी)ईरान युद्ध भारत प्रतिक्रिया(टी)एलपीजी कमी विवाद(टी)कमलनाथ एलपीजी टिप्पणी(टी)आनंद शर्मा विदेश नीति(टी)शशि थरूर सरकार का समर्थन करते हैं(टी)मनीष तिवारी ऑपरेशन सिन्दूर








