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असम पुलिस की कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के घर छापेमारी:हिमंता बोले- पाताल से निकालेंगे; खेड़ा ने कहा था- CM की पत्नी के पास 3 पासपोर्ट

असम पुलिस की कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के घर छापेमारी:हिमंता बोले- पाताल से निकालेंगे; खेड़ा ने कहा था- CM की पत्नी के पास 3 पासपोर्ट

सीएम हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी पर फर्जी पासपोर्ट का आरोप लगाने के दो दिन बाद मंगलवार को असम पुलिस ने दिल्ली में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के घर छापा मारा। हिमंता की पत्नी की FIR के बाद यह कार्रवाई की गई है। हालांकि छापेमारी के वक्त पवन घर पर मौजूद नहीं थे। पुलिस ने घर से कुछ डॉक्यूमेंट्स और इलेक्ट्रिक डिवाइस सीज कीं। पवन के घर पर मौजूद नहीं होने पर हिमंता ने कहा कि गिरफ्तारी की चुनौती देने वाले खेड़ा अब हैदराबाद भाग गए हैं। कानून अपना काम करेगा। हम खेड़ा को पाताल से ढूंढकर ले आएंगे और पता करेंगे कि उन्हें फर्जी दस्तावेज किसने दिए। मुझे लगता है कि ये डॉक्यूमेंट्स शायद राहुल गांधी ने पवन खेड़ा को दिए होंगे। 5 अप्रैल को पवन ने असम सीएम हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा पर आरोप लगाया था कि उनके पास मिस्र, एंटीगा-बरबूडा और UAE के पासपोर्ट हैं। हिमंता और उनकी पत्नी ने आरोपों से इनकार किया। कांग्रेस बोली- इस रेड का मतलब क्या है पवन खेड़ा के घर पर छापेमारी पर कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने कहा कि ये किस चीज की रेड है? यही तो हम जानना चाहते हैं। अगर उन्होंने कुछ गंभीर बातें कही हैं, तो पुलिस को जांच करनी चाहिए। उन्होनें आगे कहा कि आपको याद होगा, कुछ समय पहले गौरव गोगोई पर उन्होंने बहुत आरोप लगाए थे। उनकी पत्नी पर कि वह पाकिस्तानी हैं, एजेंट हैं और जासूसी करती हैं। ये बहुत गंभीर आरोप थे। तो उस पर क्या हुआ? क्या हिमंता जी के घर पर रेड पड़ी थी? वहीं, कांग्रेस नेता रागिनी नायक ने कहा कि- पवन जी के घर को पुलिस छावनी बना दिया गया, क्योंकि उन्होंने हिमंता ‘बेशर्मा’ की काली करतूतों का पर्दाफाश किया। कांग्रेस हिमंता ‘बेशर्मा’ जैसे लोगों की गीदड़ भभकियों से डरने वाली नहीं है। 5 अप्रैल- खेड़ा के 2 आरोप, पूछा- ₹52 हजार करोड़, तीन पासपोर्ट कहां से आए 6 अप्रैल: हिमंता बोले- हमने प्रापर्टी के असली मालिक का पता लगाया हिमंता ने सोमवार को दुबई में फ्लैट होने के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने एक वीडियो पोस्ट किया और लिखा कि हमने उन दो दुबई अपार्टमेंट के असली मालिकों का पता लगा लिया है, जिनका जिक्र कांग्रेस ने किया है। ये फ्लैट मोहम्मद अहमद और फातिमा सुलेमान के हैं। कांग्रेस ने ये दस्तावेज एक वेबसाइट Scribd से चुराए थे। हमने इस तरह इनका पता लगाया है। आप भी फोन पर देख सकते हैं। इससे पहले पांच अप्रैल को हिमंता ने पवन खेड़ा की कॉन्फ्रेंस के कुछ देर बाद ही X पर पर पोस्ट किया था कि उनके दिखाए गए दस्तावेजों में नाम की स्पेलिंग, फोटो और पासपोर्ट विवरण जैसी कई गंभीर गलतियां हैं, जो साफ तौर पर इनके फर्जी और डिजिटल छेड़छाड़ होने का सबूत हैं। इन मनगढ़ंत दस्तावेजों के आधार पर झूठ फैलाने के लिए पवन खेड़ा को जेल जाना होगा और सच्चाई की जीत होगी। ————————————– ये खबर भी पढ़ें… राजनाथ बोले- पाकिस्तान कितने टुकड़ों में बंटेगा, भगवान ही जाने:बंगाल में नजर डाली तो बुरा नतीजा होगा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के कोलकाता पर हमला करने की धमकी पर जवाब दिया। राजनाथ ने कहा कि आसिफ को इस तरह का भड़काऊ बयान नहीं देना चाहिए था। पूरी खबर पढ़ें…

मोबाइल-लैपटॉप की ब्लू लाइट बिगाड़ रही आंखों की सेहत, रात में ज्यादा इस्तेमाल कर रहें, तो जान लें खतरा

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Last Updated:April 07, 2026, 19:12 IST Ghaziabad News: आज के युवा मोबाइल और लेपटॉप के दीवाने हो गए हैं. इसके साथ ही अब ज्यादातर काम डिजिटल हो चुका है. ऑफिस का काम हो, पढ़ाई हो या फिर मनोरंजन, हर चीज स्क्रीन के जरिए ही हो रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते सावधानी नहीं बरती गई, तो यह समस्या आगे चलकर गंभीर रूप ले सकती है. गाजियाबाद: आज के डिजिटल दौर में मोबाइल और लैपटॉप हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं. ऑफिस का काम हो, पढ़ाई हो या फिर मनोरंजन, हर चीज स्क्रीन के जरिए ही पूरी हो रही है. लेकिन यही सुविधा अब धीरे-धीरे हमारी सेहत खासकर आंखों के लिए खतरा बनती जा रही है. रात के समय लंबे समय तक स्क्रीन देखने की आदत लोगों में तेजी से बढ़ रही है, जिसका सीधा असर आंखों और नींद दोनों पर पड़ रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते सावधानी नहीं बरती गई, तो यह समस्या आगे चलकर गंभीर रूप ले सकती है. डिजिटल स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट आंखों पर दबाव डालती है, जिससे जलन, सूखापन और धुंधला दिखने जैसी दिक्कतें होने लगती हैं. इस स्थिति को डिजिटल आई स्ट्रेन कहा जाता है. खासकर रात में जब रोशनी कम होती है, तब स्क्रीन का असर और ज्यादा बढ़ जाता है. यही वजह है कि कई लोग देर रात तक फोन इस्तेमाल करने के बाद भी ठीक से सो नहीं पाते और सुबह उठने पर आंखों में भारीपन महसूस करते हैं. आंखों की मांसपेशियों पर प्रभावनेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुज ने बताया कि लगातार मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल आंखों की मांसपेशियों को जल्दी थका देता है. कई लोग रात में स्क्रीन देखने के तुरंत बाद सोने की कोशिश करते हैं, लेकिन ब्लू लाइट के प्रभाव के कारण नींद आने में परेशानी होती है. इससे नींद पूरी नहीं हो पाती और शरीर पर भी इसका असर पड़ता है. ब्लू लाइट फिल्टर जरूर ऑन रखेंउन्होंने बताया कि ब्लू लाइट के कारण आंखों में ड्राइनेस, जलन और इरिटेशन की समस्या आम हो गई है. अगर रात में स्क्रीन का इस्तेमाल जरूरी हो, तो ब्लू लाइट फिल्टर जरूर ऑन रखें. इसके अलावा ब्लू कट लेंस वाले चश्मे का इस्तेमाल भी आंखों को काफी हद तक सुरक्षित रख सकता है. हर 20 मिनट में स्क्रीन से ब्रेक लेना ब्राइटनेस को कम रखना और आंखों को आराम देना बेहद जरूरी है. कोशिश करें कि रात 8 बजे के बाद स्क्रीन टाइम कम कर दें और सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल बिल्कुल बंद कर दें. सावधानी बरतना जरूरीडॉक्टर का यह भी कहना है कि जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम कम उम्र में ही चश्मा लगने की वजह बन सकता है. जो समस्या आमतौर पर 40 साल की उम्र में होती थी, वह अब युवाओं में भी देखने को मिल रही है. इसलिए समय रहते सावधानी जरूरी है. साथ ही आंखों की सेहत के लिए सही खानपान भी बेहद जरूरी है. गाजर का जूस, अंडे, ताजे फल और हरी सब्जियां आंखों को मजबूत बनाने में मदद करती हैं. अगर आंखों में लगातार जलन, पानी आना या धुंधलापन महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और लापरवाही से बचना चाहिए. About the Author आर्यन सेठ आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए. Location : Ghaziabad,Uttar Pradesh First Published : April 07, 2026, 19:12 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

मुर्शिदाबाद, मालदा, नादिया में सबसे ज्यादा कटे वोटर्स के नाम, जानें जिलेवार वोटर्स का पूरा हिसाब

मुर्शिदाबाद, मालदा, नादिया में सबसे ज्यादा कटे वोटर्स के नाम, जानें जिलेवार वोटर्स का पूरा हिसाब

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की सरगर्मियों के बीच चुनाव आयोग ने एक इंटरव्यू वाला डेटा जारी किया है। राज्य में चलाए गए ‘स्पेशल इंटेंसिव रिजन’ (SIR) अभियान के बाद करीब 91 लाख लाख के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। आयोग ने अभी तक आधिकारिक तौर पर नए वोटरों का वोट नहीं दिया है, उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार, राज्य के कुल वोटरों में से लगभग 11.85 प्रतिशत की कटौती की गई है। इस बड़े बदलाव ने राज्य की मोटरसाइकिल को और तेज कर दिया है। 91 लाख नाम अर्थशास्त्र का पूरा गणितचुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल अक्टूबर तक बंगाल में 7.66 करोड़ वोट थे. जांच प्रक्रिया के बाद अब तक कुल 90.83 लाख लाख का बकाया चुकाया गया है। इनमें से करीब 27.16 लाख नाम अकेले तो प्रमुख अधिकारियों की उस जांच (न्यायनिर्णय) के दौरान कटे, जिसमें 60.06 लाख मतदाताओं की पात्रता पर सवाल उठाए गए थे। यानी जांच के दस्तावेजों में करीब 45 प्रतिशत वोट वोट के लिए अलग-अलग वोट मिले हैं। मुस्लिम बाहुल्य और शैतान में भारी कटारआंकड़ों में सबसे बड़े हिस्से मुस्लिम बाहुल्य जिले मुर्शिदाबाद में बताए गए हैं, जहां जांच के आंकड़ों में 11 लाख लोगों में से 4.55 लाख से ज्यादा नाम हटाए गए हैं। इसी तरह बांग्लादेश की सीमा से उत्तर 24 परगना में 3.25 लाख और मालदा में 2.39 लाख नाम बताए गए हैं। दक्षिण 24 परगना में भी करीब 2.23 लाख वोटर्स की छुट्टी कर दी गई है। नादिया और मतुआ बाहुल्य एशिया का हालप्रतिशत के हिसाब से देखें तो नदिया और उत्तर 24 परगना में कितनी स्थिति है और भी स्कूटर वाली है। नादिया जिले में जांच के अनुभाग में आये ओस्टल में से रिकॉर्ड 77.86 प्रतिशत और उत्तर 24 परगना में 55.08 प्रतिशत नाम जारी किये गये हैं। बता दें कि ये इलाका हिंदू ‘नमोशूद्र मतुआ’ समुदाय के प्रभाव वाले माने जाते हैं। ममता बनर्जी के गढ़ कोलकाता में क्या हुआ?मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विधानसभा क्षेत्र भवानीपुर वाले ‘कोलकाता दक्षिण’ क्षेत्र में भी करीब 28,000 मतदाताओं के नाम दर्ज हैं। वहीं ‘कोलकाता उत्तर’ में स्थिति सबसे गंभीर है, जहां आंकड़ों के मुताबिक 64 फीसदी यानी करीब 39,000 लोगों को वोट के लिए वोट मिले हैं। मतदाता सूची ‘फ़्रीज़’ के लिए प्रथम चरणचुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह पूरी प्रक्रिया के तरीके और सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के तहत दिया गया है। सोमवार आधी रात के बाद पहले चरण (23 अप्रैल) की 152वीं पोस्ट के लिए वोटर लिस्ट को ‘फ्रीज’ कर दिया गया है, यानी अब इसमें कोई नया नाम नहीं जोड़ा जाएगा। दूसरे चरण की 142 की सूची 9 अप्रैल को लॉक कर देगी। (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)पश्चिम बंगाल मतदाता सूची संशोधन(टी)बंगाल चुनाव 2026 मतदाता कटौती(टी)91 लाख मतदाता हटाए गए(टी)चुनाव आयोग सर ड्राइव(टी)बंगाल राजनीतिक समाचार(टी)मतदाता सूची विवाद भारत(टी)मुर्शिदाबाद मतदाता विलोपन(टी)उत्तर 24 परगना मतदाता सूची(टी)मालदा मतदाता कटौती समाचार(टी)कोलकाता मतदाता सूची अपडेट(टी)ममता बनर्जी निर्वाचन क्षेत्र समाचार(टी)भारत चुनाव आयोग अपडेट(टी)मतदाता पात्रता जांच भारत(टी)बंगाल चुनाव विवाद(टी)ब्रेकिंग न्यूज पश्चिम बंगाल(टी)पश्चिम बंगाल वोटर लिस्ट(टी)बंगाल चुनाव 2026 खबर(टी)91 लाख वोटर लिस्ट विवाद(टी)चुनाव आयोग एसआईआर अभियान(टी)मतदाता सूची विवाद(टी)मुर्शिदाबाद सुपरस्टार(टी)उत्तर 24 परगना सुपरस्टार(टी)मालदा वोटर निकाले गए(टी)कोलकाता वोटर लिस्ट अपडेट(टी)ममता बनर्जी सीट खबर(टी)भारत चुनाव आयोग अपडेट(टी)मतदाता सूची जांच(टी)बंगा चुनावी विवाद

GK: शरीर में सबसे मजबूत और कमजोर हड्डी कौन सी होती है? टूट गई तो पूरी जिंदगी तहस-नहस

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Last Updated:April 07, 2026, 18:38 IST हमारे शरीर में कई तरह की हड्डियां होती हैं, जिनमें कुछ बेहद मजबूत होती हैं तो कुछ काफी नाजुक और जल्दी टूटने वाली. इन्हीं में कॉलरबोन यानी हंसली की हड्डी भी शामिल है, जो शरीर के महत्वपूर्ण हिस्सों में से एक होते हुए भी काफी कमजोर मानी जाती है और हल्की चोट या गिरने से भी आसानी से फ्रैक्चर हो सकती है. ख़बरें फटाफट शरीर में 206 हड्डियां होती हैं. हमारे शरीर की संरचना हड्डियों पर टिकी होती है, जो न सिर्फ शरीर को आकार देती हैं बल्कि हमें चलने-फिरने, बैठने और रोजमर्रा के काम करने में मदद करती हैं. मानव शरीर में कुल 206 हड्डियां होती हैं और हर हड्डी का अपना अलग काम और महत्व होता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इनमें से कुछ हड्डियां बेहद मजबूत होती हैं, जबकि कुछ बहुत नाजुक होती हैं? इन हड्डियों की मजबूती और कमजोरी का सीधा असर हमारे शरीर के संतुलन और स्वास्थ्य पर पड़ता है. दरअसल, शरीर की सबसे मजबूत हड्डी जांघ में पाई जाने वाली फीमर (जांघ की हड्डी) होती है. यह न सिर्फ सबसे लंबी होती है, बल्कि इतनी मजबूत होती है कि यह शरीर के पूरे वजन को संभाल सकती है. फीमर पर काफी दबाव पड़ता है, क्योंकि यह चलने, दौड़ने और कूदने जैसे हर काम में अहम भूमिका निभाती है. इसके बावजूद यह आसानी से नहीं टूटती, लेकिन अगर किसी बड़े हादसे में यह टूट जाए तो व्यक्ति के लिए चलना-फिरना बेहद मुश्किल हो जाता है और लंबे समय तक इलाज की जरूरत पड़ती है. वहीं, अगर सबसे कमजोर हड्डी की बात करें तो कान के अंदर मौजूद स्टेप्स (Stapes) हड्डी को सबसे छोटी और नाजुक हड्डी माना जाता है. यह हड्डी इतनी छोटी होती है कि इसका आकार एक चावल के दाने जितना होता है. यह सुनने की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाती है और ध्वनि को अंदर तक पहुंचाने में मदद करती है. हालांकि यह शरीर के अंदर सुरक्षित रहती है, इसलिए आमतौर पर इसे नुकसान कम ही होता है, लेकिन इसकी संवेदनशीलता इसे बेहद खास बनाती है. कॉलरबोन, जिसे हंसली की हड्डी भी कहा जाता है, शरीर की कमजोर हड्डियों में गिनी जाती है. यह कंधे और छाती के बीच स्थित होती है और हाथों की मूवमेंट में अहम भूमिका निभाती है. इसकी स्थिति शरीर के बाहरी हिस्से के करीब होने के कारण यह चोट लगने के लिए ज्यादा संवेदनशील रहती है. गिरने, खेलते समय टक्कर लगने या सड़क दुर्घटना में सबसे पहले यही हड्डी प्रभावित होती है. खासकर बच्चों और खिलाड़ियों में कॉलरबोन फ्रैक्चर के मामले ज्यादा देखने को मिलते हैं. अगर यह हड्डी टूट जाए तो कंधे और हाथ की सामान्य गतिविधियां प्रभावित हो जाती हैं और ठीक होने में कई हफ्तों का समय लग सकता है. इसके अलावा, रीढ़ की हड्डी भी शरीर के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है. यह हमारे पूरे शरीर को सहारा देती है और नसों के जरिए दिमाग से शरीर के बाकी हिस्सों तक संदेश पहुंचाने का काम करती है. अगर रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट लग जाए, तो व्यक्ति को चलने-फिरने में दिक्कत हो सकती है या लकवा तक हो सकता है. यही वजह है कि इसे शरीर का सबसे संवेदनशील हिस्सा माना जाता है, जहां चोट लगने का असर पूरी जिंदगी पर पड़ सकता है. About the Author Vividha Singh विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें Location : Delhi,Delhi,Delhi First Published : April 07, 2026, 18:25 IST

‘बीजेपी पर भरोसा, विपक्षियों पर भरोसा करने जैसा..’

'बीजेपी पर भरोसा, विपक्षियों पर भरोसा करने जैसा..'

पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए इंटरव्यू बयानबाजी का दौर जारी है। राज्य में होने वाले चुनाव को लेकर भाजपा और किसान एक दूसरे पर दावेदार हैं। ऐसे में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीजेपी की तुलना सांप से की है। उन्होंने कहा कि भाजपा पर विश्वास करना सांपों पर विश्वास करना जैसा है। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने यह बयान दिया है कि हाबड़ा ने एक शौचालय का आयोजन किया है। एस दरभंगा में लाखों असली मतदाताओं का नाम नीचे दिया गया है: मुद्रा बनर्जी ने कहा कि वो तो बस बंगाल पर हमला करने के सही मौके का इंतजार कर रहे हैं. अपने इस सशक्त एस.एस. सशक्त अभियान में उन्होंने बिना किसी भेदभाव के लाखों मूल मतदाताओं के नाम दिये हैं। यहां तक ​​कि धर्मार्थ आध्यात्म से जुड़े साधु संतों के नाम भी वोटर लिस्ट से बेहरमी से हटा दिए गए हैं। इन लोगों ने बंगाल के असली वोटरों को ऐसे दिखाया बेशर्मी से नजर. इस चुनाव में जनता को भाई से पूरी तरह से समझौता कराना चाहिए। किसी भी तरह की कोई रहम नहीं करनी चाहिए. कोई दूसरा अवसर नहीं मिलना चाहिए. इसके अलावा उन्होंने संदेश में कहा कि यह चुनावी बंगाल में भाषा, अधिकार और लोकतंत्र की मूल भावना की रक्षा करने के बारे में है। इस दौरान उन्होंने कहा कि मां-माटी-मानुष सरकार लोगों की निष्ठा और आकांक्षाओं को पूरा करना जारी रखेगी। साथ में ही कहा गया है कि सभी उन ताकतों के खिलाफ एकजुट होना चाहते हैं, जो समाज को कमजोर और ध्वस्त करने की कोशिश कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल में आम चुनाव के दो चरण होने हैंवर्ष 2026 में पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में आयोजित किये जायेंगे। इसमें पश्चिम बंगाल विधानसभा के 294 पर वोट डालेंगे। चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित किये जायेंगे. नागालैंड में आचार संहिता लागू है, यहां की सरकार है। यह भी पढ़ें: ‘हम सभी के साथ हैं अलग नाम…’, सीएम ममता बनर्जी के सर ने चुनाव आयोग पर लेकर कहा- ’91 लाख नाम निकाले गए’ (टैग्सटूट्रांसलेट)इलेक्शन(टी)ममता बनर्जी(टी)पश्चिम बंगाल(टी)टीएमसी(टी)टीएमसी:(टी)बीजेपी(टी)टीएमसी नवीनतम समाचार(टी)अपडेट समाचार(टी)चुनाव समाचार(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026(टी)विधानसभा चुनाव समाचार(टी)बीजेपी पर ममता बनर्जी(टी)अमित शाह(टी)नरेंद्र modi

केरल में शांत उलटी गिनती: जैसे ही चुनाव प्रचार समाप्त हुआ, ‘व्हाट्सएप वोट’ और ‘डिजिटल प्रॉक्सी’ पर ध्यान केंद्रित करें | चुनाव समाचार

Baraspara Stadium in Guwahati, Assam. (X)

आखरी अपडेट:07 अप्रैल, 2026, 18:18 IST चुनाव प्रचार के अंतिम 72 घंटों में, पश्चिम एशिया में संघर्ष की छाया केरल के 9 अप्रैल के चुनाव के लिए एक माध्यमिक चर्चा के बिंदु से प्राथमिक कथा की ओर बढ़ गई। चुनाव प्रचार ख़त्म होते ही ‘प्रवासी’ वोट पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं. प्रतीकात्मक तस्वीर/पीटीआई केरल भर में उच्च-डेसिबल रैलियों, “कलासकोट्टू” जुलूसों और गहन रोड शो का शोर आधिकारिक तौर पर मंगलवार शाम को समाप्त हो गया। यह राज्य में गुरुवार को उच्च जोखिम वाले एकल-चरण विधानसभा चुनाव के लिए मतदान से पहले अनिवार्य 48 घंटे की “मौन अवधि” की शुरुआत का प्रतीक है। एक ऐसे राज्य के लिए जो अपनी उच्च मतदाता साक्षरता और गहरी जड़ें जमा चुकी राजनीतिक निष्ठाओं के लिए जाना जाता है, 2026 का अभियान हाल के इतिहास में सबसे अप्रत्याशित में से एक रहा है, जिसे पारंपरिक स्थानीय शिकायतों की तुलना में वैश्विक आर्थिक चिंताओं और नए राजनीतिक व्यवधानों के प्रवेश द्वारा अधिक परिभाषित किया गया है। जैसे-जैसे लाउडस्पीकरों की स्थिरता कम होती जाती है, ध्यान “मूक प्रभाव” चरण पर केंद्रित हो जाता है, जहां पार्टी कार्यकर्ता यह सुनिश्चित करने के लिए घर-घर जाकर प्रचार करते हैं कि प्रत्येक पंजीकृत मतदाता बूथ तक पहुंचे। 140 निर्वाचन क्षेत्रों पर कब्ज़ा होने के साथ, परिणाम यह निर्धारित करेंगे कि क्या वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) लगातार तीसरी बार ऐतिहासिक कार्यकाल हासिल कर सकता है या क्या यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) अपने पारंपरिक वैकल्पिक शक्ति चक्र को पुनः प्राप्त कर सकता है। पश्चिम एशिया संघर्ष ने अंतिम अभियान को कैसे बदल दिया है? चुनाव प्रचार के अंतिम 72 घंटों में, पश्चिम एशिया में संघर्ष की छाया एक माध्यमिक चर्चा बिंदु से प्राथमिक कथा की ओर बढ़ गई। केरल, एक राज्य जो वार्षिक प्रेषण में 2.1 लाख करोड़ रुपये से अधिक प्राप्त करता है, खाड़ी में समुद्री अवरोधों के कारण आय में अनुमानित 20% की गिरावट का सामना कर रहा है। इस आर्थिक “सदमे” ने सभी प्रमुख गठबंधनों को अपने घोषणापत्रों को “आजीविका सुरक्षा” की ओर मोड़ने के लिए मजबूर किया। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने अभियान के अंतिम दिन एलडीएफ को “स्थिरता ढाल” के रूप में बिताए, जिसमें लौटने वाले प्रवासियों का समर्थन करने के लिए राज्य के कल्याण सुरक्षा जाल का विस्तार करने का वादा किया गया। इसके विपरीत, वीडी सतीसन के नेतृत्व में यूडीएफ नेतृत्व ने राज्य का औद्योगीकरण करने में विफल रहने के लिए सरकार पर हमला किया और तर्क दिया कि युद्ध ने अस्थिर पश्चिम एशिया पर केरल की खतरनाक अति-निर्भरता को उजागर कर दिया है। इस बीच, भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए ने अंतिम घंटों का उपयोग केंद्र सरकार के सफल निकासी प्रोटोकॉल और “वंदे भारत” की तैयारी को उजागर करने के लिए किया, जिसका लक्ष्य ईरान और संयुक्त अरब अमीरात जैसे संघर्ष क्षेत्रों में अपने रिश्तेदारों के लिए चिंतित मध्यमवर्गीय परिवारों पर जीत हासिल करना है। इस वर्ष ‘तीसरे मोर्चे’ के विघ्नकर्ताओं का क्या महत्व है? 2026 के अभियान में सबसे उल्लेखनीय बदलावों में से एक अभिनेता से नेता बने विजय के नेतृत्व में तमिलगा वेट्री कज़गम (टीवीके) का दृश्यमान प्रभाव रहा है। जबकि पार्टी मुख्य रूप से तमिलनाडु में स्थित है, इसका “थलपति” प्रभाव सीमावर्ती जिलों पलक्कड़, इडुक्की और तिरुवनंतपुरम में काफी कम हो गया है। “कॉर्पोरेट-स्वच्छ” प्रशासन और हाई-टेक रोजगार सृजन पर टीवीके का ध्यान युवा जनसांख्यिकीय के साथ प्रतिध्वनित हुआ है जो बारहमासी एलडीएफ-यूडीएफ प्रतिद्वंद्विता से मोहभंग महसूस करता है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भले ही टीवीके महत्वपूर्ण संख्या में सीटें नहीं जीत सके, लेकिन कड़े त्रिकोणीय मुकाबलों में 5% से 8% वोट खींचने की इसकी क्षमता प्रमुख मोर्चों के लिए “बिगाड़ने” का काम कर सकती है। इस वर्ष, “युवा वोट” केवल विचारधारा के बारे में नहीं है; यह अर्धचालकों, डेटा केंद्रों और बेंगलुरु में “प्रतिभा पलायन” को रोकने के बारे में है। अंतिम रैलियों में टीवीके और एनडीए कार्यक्रमों में भाग लेने वाले युवा मतदाताओं में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई, जिससे पता चलता है कि केरल की राजनीति की पारंपरिक द्विध्रुवीय प्रकृति दशकों में सबसे बड़े तनाव में है। क्या एनआरआई मतदान में गिरावट ‘बहुत पतली’ सीटों का फैसला करेगी? जैसे-जैसे चुनाव प्रचार ख़त्म हो रहा है, “प्रवासी” वोटों पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। ऐतिहासिक रूप से, वडकारा और पोन्नानी जैसे “स्विंग” निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान करने के लिए 50,000 मलयाली खाड़ी से घर आते हैं। हालाँकि, युद्धकालीन आसमान छूते हवाई किराए और क्षेत्रीय यात्रा प्रतिबंधों के कारण, इस वर्ष यह संख्या 5,000 से कम होने की उम्मीद है। यह अनुपस्थिति यूडीएफ और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के लिए विशेष रूप से चिंताजनक है, जो परंपरागत रूप से केएमसीसी द्वारा आयोजित “वोट उड़ानों” पर भरोसा करते हैं। इसकी भरपाई के लिए, अभियान के अंतिम घंटों में “डिजिटल प्रॉक्सी” वोटिंग की ओर बड़े पैमाने पर बदलाव देखा गया। पार्टियों ने खाड़ी स्थित मलयाली लोगों को लक्षित करते हुए उच्च-उत्पादन वाली व्हाट्सएप सामग्री तैनात की है, जिसमें उनसे वीडियो कॉल के माध्यम से अपने परिवार के सदस्यों को प्रभावित करने का आग्रह किया गया है। ऐसे राज्य में जहां जीत अक्सर 1,000 से कम वोटों से तय होती है, दुबई में एक बेटे का “व्हाट्सएप वोट” केरल की धरती पर आयोजित किसी भी रैली से अधिक निर्णायक साबित हो सकता है। पहले प्रकाशित: 07 अप्रैल, 2026, 18:18 IST समाचार चुनाव केरल में शांत उलटी गिनती: चुनाव प्रचार समाप्त होते ही, ‘व्हाट्सएप वोट’ और ‘डिजिटल प्रॉक्सी’ पर ध्यान केंद्रित करें अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)केरल चुनाव(टी)व्हाट्सएप(टी)केरल चुनाव(टी)पश्चिम एशिया(टी)वोटिंग(टी)एलडीएफ(टी)यूडीएफ

इसे सिर्फ हरी पत्ती मत समझिए, यह मसाला कई गंभीर बीमारियों में इम्यूनिटी बूस्टर! औषधीय गुणों से भरपूर

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Last Updated:April 07, 2026, 18:05 IST Health News: आज भी हमारे देश के लोग आयुर्वेद पर विश्वास करते हैं, क्योंकि आयुर्वेद में हर मर्ज का इलाज है. ऐसी ही एक औषधि है लेमनग्रास, जो हमारी सेहत के साथ स्वास्थ्य के लिए बेहद ही फायदेमंद है. आइए पोषक तत्वों से भरपूर इसकी खासियत के बारे में जानते हैं. वैसे हरी धनिया एक ऐसी चीज है, जो बाजार में सालभर पाई जाती है. इसकी पत्तियों का उपयोग हर घर में होता है, चाहे सब्जी हो या दाल रायता हो या चटनी, धनिया की पत्तियां हर खाने का स्वाद और खुशबू बढ़ा देती है. ये पत्तियां सिर्फ स्वाद ही नहीं बढ़ातीं, बल्कि हमारे शरीर के लिए बहुत फायदेमंद भी होती हैं. यह एक ऐसी चीज है, जो दिखने में भले ही मामूली लगे, लेकिन इसके अंदर छिपे पोषक तत्व हमारी सेहत और स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं. आयुर्वेद में भी धनिया को औषध‍ि के रूप में माना गया है, जिस कारण धनिया का नियमित रूप से इस्तेमाल कर कई बीमारियों से बचा जा सकता है. जिला अस्पताल बाराबंकी के चिकित्सक डॉक्टर अमित वर्मा (एमडी मेडिसिन ) ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि हरी धनिया एक औषधीय पौधा है. इसकी पत्तियां और बीज हमारी सेहत व स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद हैं. इसमें बहुत सारे औषधीय गुण मौजूद होते हैं, जैसे विटामिन ए और सी, पोटैशियम, कैल्शियम, विटामिन-सी और मैग्‍नीशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो हमें कई गंभीर बीमारियों से बचाते हैं. बस इसका सही से इस्तेमाल करने की जरूरत है. आंखों के दर्द में फायदेमंद: धनिया क़े पत्तों के रस को बकरी के दूध में मिला लें. इसे आंख में एक-एक बूंद डालने से आंखों का दर्द ठीक हो जाता है. धनिया बीज और जौ को बराबर-बराबर लेकर पीस लें. इसका गाढ़ा लेप बना लें. इसे आंखों पर बांधने से आंख के दर्द ठीक हो जाते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google कब्ज क़ी समस्या में फायदेमंद: जिन लोगों को कब्ज रहती है, वो 20 ग्राम धनिया और 120 मिली पानी को मिट्टी के बर्तन में डालकर, रात भर रहने दें. सुबह इसे छानकर, 13 ग्राम खांड डाल लें. इसे थोड़ा-थोड़ा पीने से कब्ज में लाभ मिलता है. पेट दर्द की समस्या में 2 ग्राम धनिया चूर्ण को, 5 ग्राम मिश्री के साथ मिला लें. इसे दिन में दो-तीन बार देने से गर्मी से होने वाले पेट दर्द में लाभ होता है. इसके अलावा 5 ग्राम धनिया को 100 मिली पानी में रात में भिगो लें. इसे सुबह मसलकर और छानकर रखें. इस पानी को बच्चों को पिलाने से पेट दर्द में लाभ होता है. वहीं 10-20 मिली धनिया के पत्ते के रस को 10 मिली सिरके में मिलाकर लगाने से पेट दर्द ठीक हो जाता है. अगर किसी को हाई कॉलेस्ट्रॉल की शिकायत है, तो उसे धनिया के बीज उबालकर उस पानी को पीना चाहिए. डायबिटीज के मरीजों के लिए भी धनिया काफी फायदेमंद होता है. यह खून में इंसुलिन की मात्रा को नियमित करता है. पाचन की समस्या में फायदेमंद: पाचन को दुरुस्त करने के लिए हरी धनिया खाएं. यह पेट की समस्याओं को दूर कर पाचनशक्ति बढ़ाता है. धनिया के ताजे पत्तों को छाछ में मिलाकर पीने से बदहजमी, मतली, पेचिश और कोलाइटिस में आराम मिलता है. इसके सेवन से गैस की समस्या से भी छुटकारा मिलता है. First Published : April 07, 2026, 18:05 IST

नरसिंहपुर मंडी शेडों में व्यापारियों का अनाज भरा:किसानों ने गैलरी में रखा गेहूं, बोली लगाने से इनकार पर हंगामा

नरसिंहपुर मंडी शेडों में व्यापारियों का अनाज भरा:किसानों ने गैलरी में रखा गेहूं, बोली लगाने से इनकार पर हंगामा

नरसिंहपुर की कृषि उपज मंडी में मंगलवार को अव्यवस्थाओं से परेशान होकर किसानों ने जमकर हंगामा किया। उपज रखने की जगह न मिलने और व्यापारियों के रवैये को लेकर किसानों और मंडी प्रबंधन के बीच काफी देर तक खींचतान चलती रही। किसानों का आरोप है कि मंडी के शेडों में पहले से ही व्यापारियों का पुराना अनाज भरा हुआ है। इसकी वजह से जब किसान अपना गेहूं लेकर पहुंचे, तो उन्हें अनाज रखने के लिए कोई खाली जगह नहीं मिली। मजबूरी में किसानों ने अपना गेहूं मंडी की गैलरी में रख दिया, लेकिन व्यापारियों ने यह कहकर बोली लगाने से मना कर दिया कि वहां बोली नहीं लगेगी। किसान बोले- न तौल हुई, न लगी बोली खैरी गांव से आए किसान रमेश कुमार चौधरी ने बताया कि वे करीब 100 क्विंटल गेहूं लेकर मंडी आए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि घंटों इंतजार के बाद भी न तो उनके गेहूं की तौल हुई और न ही व्यापारियों ने बोली लगाई। किसानों ने मांग की है कि मंडी में जगह तय की जाए और सूचना बोर्ड लगाए जाएं ताकि उन्हें पता रहे कि अनाज कहां रखना है। मंडी प्रबंधन की सफाई हंगामे के बाद मंडी सचिव देवेंद्र ठाकुर ने दखल दिया और स्थिति को संभाला। उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि कुछ किसानों ने गैलरी में अनाज रख दिया था, जिससे दिक्कत हुई थी। हालांकि, बाद में व्यापारियों को समझाकर गैलरी में रखे माल की भी बोली लगवा दी गई और विवाद शांत कराया गया। किसानों ने भविष्य में ऐसी अव्यवस्था न होने देने की अपील की है।

रामायण फिल्म में विद्वान और योद्धा दिखेगा रावण:यश निभा रहे रावण का किरदार; दिवाली 2026 को रिलीज होगा पहला पार्ट

रामायण फिल्म में विद्वान और योद्धा दिखेगा रावण:यश निभा रहे रावण का किरदार; दिवाली 2026 को रिलीज होगा पहला पार्ट

डायरेक्टर नितेश तिवारी की फिल्म ‘रामायण’ टीजर रिलीज के बाद से चर्चा में है। फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम और यश रावण के किरदार में नजर आएंगे। हाल ही में लॉस एंजिल्स में फिल्म के प्रमोशन के दौरान नितेश तिवारी ने यश के किरदार यानी रावण के कैरेक्टर को लेकर कई अहम जानकारियां साझा की हैं। उन्होंने बताया कि इस फिल्म में रावण को केवल एक ‘वन-डायमेंशनल’ विलेन के रूप में नहीं, बल्कि एक विद्वान और योद्धा के तौर पर भी पेश किया जाएगा। सिर्फ विलेन नहीं, विद्वान और योद्धा भी होंगे यश नितेश तिवारी ने बताया कि रावण के जीवन के कई पहलू थे जिन्हें पर्दे पर उतारना जरूरी है। उन्होंने कहा, रावण एक महान योद्धा, कुशल संगीतकार और प्रकांड विद्वान था। वह एक उदार राजा और भगवान शिव का बहुत बड़ा भक्त भी था। इसलिए उसके किरदार में सिर्फ बुराई (ब्लैक कैरेक्टर) दिखाने के बजाय उसके व्यक्तित्व के इन अलग-अलग पहलुओं को दिखाना हमारे लिए जरूरी है। नितेश तिवारी ने रावण के मानवीय और विद्वान पक्ष को दिखाने के पीछे का असल कारण भी बताया। उनके मुताबिक, “रावण के जीवन के इन हिस्सों को दिखाने का एक गहरा मकसद है। इसमें एक बहुत जरूरी सबक छिपा है। आप चाहे कितने भी गुणवान क्यों न हों, लेकिन अगर आप अहंकार, बदले की भावना और ईगो से संचालित होते हैं, तो अंजाम क्या होता है, यह रावण की कहानी सिखाती है। यही इस फिल्म का एक बड़ा मैसेज भी होगा। दो हिस्सों में आएगी फिल्म रिपोर्ट्स के मुताबिक, नितेश तिवारी की ‘रामायण’ एक बड़े स्तर पर बनाई जा रही फ्रैंचाइजी होगी। इसे दो भागों में रिलीज किया जाएगा। फिल्म का पहला हिस्सा दिवाली 2026 में सिनेमाघरों में दस्तक देगा। वहीं, कहानी का दूसरा और अंतिम भाग अगले साल दिवाली 2027 में रिलीज करने की योजना है। फिल्म ‘रामायण’ से जुड़ी अहम बातें-

91 लाख वोट पर भड़कीं ममता बनर्जी, बोलीं- सबसे ज्यादा मुस्लिम वोट और…

91 लाख वोट पर भड़कीं ममता बनर्जी, बोलीं- सबसे ज्यादा मुस्लिम वोट और...

त्वरित पढ़ें दिखाएँ एआई द्वारा उत्पन्न मुख्य बिंदु, न्यूज़ रूम द्वारा सत्यापित पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीति काफी गर्म है। राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बंगाल में जारी एस तेजस्वी प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए कैथेड्रल टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि हम उन सभी लोगों के साथ एकजुटता से जुड़े हुए हैं, जिनका नाम चुनाव आयोग ने नीचे दिए गए वोटरों की सूची से हटा दिया है। चुनाव आयोग पर भड़कीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार (7 अप्रैल, 2026) को पश्चिम बंगाल के नादिया जिले के चकदाहा में एक नियुक्ति नियुक्तियों को बयान देते हुए आरोप लगाया कि राज्य में एस मजबूत के बाद मतदाता सूची से मतुआ और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के नाम हटा दिए गए हैं। उन्होंने कहा, ‘तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) उन सभी लोगों के साथ खड़ी रहेगी, जहां का नाम विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है। ‘हम ट्रिब्यूनल्स में इसके लिए कानूनी लड़ाई ‘शैवेजरियन’ है।’ मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाते हुए कहा, ‘पश्चिम बंगाल में मतुआ, राजबंशी और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद वोटर लिस्ट से उनका नाम निकाला जा रहा था।’ टीएमसी उन लोगों के साथ खड़ी रहेगी जिनके नाम एसआईआर के बाद मतदाता सूची से हटा दिए गए थे; ट्रिब्यूनल में कानूनी लड़ाई जारी रहेगी: बंगाल की सीएम ममता बनर्जी। बंगाल में एसआईआर के बाद मतदाता सूची से विशिष्ट समुदायों के लोगों के नाम हटा दिए गए: चकदाहा चुनाव रैली में ममता बनर्जी। pic.twitter.com/vmpNOtgjD3 – प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (@PTI_News) 7 अप्रैल 2026 सुप्रीम कोर्ट में यात्रियों के बाद 32 लाख की बहाली का नाम दिया गया चुनाव आयोग के नए आंकड़ों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल की सूची में से एस मजबूत प्रक्रिया के बाद करीब 91 लाख रजिस्ट्री के नाम हटा दिए गए हैं। वहीं, ममता बनर्जी ने दावा किया है कि सुप्रीम कोर्ट में उनके हस्तक्षेप के बाद विचाराधीन करीब 60 लाख मामलों में से करीब 32 लाख नाम बहाल कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा वोट और मुस्लिम मतुआ समुदाय के लोगों को काटा गया है. 23 अप्रैल को बंगाल में पहले चरण का चुनाव होगा 294 विधानसभा वाले पश्चिम बंगाल में दो चरणों में चुनावी मोटरबाइक तैयार की गई है। पश्चिम बंगाल में पहले चरण का चुनाव 23 अप्रैल, 2026 को आयोजित किया जाएगा। इसके बाद दूसरे चरण का चुनाव 29 अप्रैल, 2026 को होगा। इसके बाद वोटों की गिनती और चुनावी नतीजों की घोषणा 4 मई, 2026 को की जाएगी। यह भी पढ़ें: ’55 साल पहले दो-टूक थे, लेकिन इस बार…’, ख्वाजा स्टूडियो के कोलकाता वाले खतरनाक पर भड़के राजनाथ, 1971 की मजबूत याद