Swiggy Co-founder Resigns | Lakshmi Nandan Reddy Steps Down

नई दिल्ली3 घंटे पहले कॉपी लिंक फूड और ग्रोसरी डिलीवरी प्लेटफॉर्म स्विगी के को-फाउंडर लक्ष्मी नंदन रेड्डी ओबुल ने कंपनी के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया है। स्विगी ने शुक्रवार को रेगुलेटरी फाइलिंग में इसकी जानकारी दी। ओबुल कंपनी में होल-टाइम डायरेक्टर और हेड ऑफ इनोवेशन की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनका इस्तीफा आज (10 अप्रैल) से प्रभावी होगा। कंपनी ने बताया कि ओबुल अब अपने दूसरे प्रोफेशनल हितों पर ध्यान देना चाहते हैं, इसलिए उन्होंने यह फैसला लिया है। ओबुल के जाने के साथ ही स्विगी के बोर्ड में कई महत्वपूर्ण नियुक्तियों और नियमों में बदलाव को भी मंजूरी दी गई है। अल्वेस पिंटो को नॉमिनी डायरेक्टर नियुक्त किया स्विगी के बोर्ड ने रेनन डी कास्त्रो अल्वेस पिंटो को नॉमिनी डायरेक्टर के रूप में नियुक्त करने की मंजूरी दी है। वे प्रोसस वेंचर्स को लीड करेंगे। वे रोजर राबलाइस की जगह लेंगे, जो प्रोसस वेंचर्स में अपनी भूमिका बदलने के कारण स्विगी बोर्ड से हट रहे हैं। इसके अलावा स्विगी के को-फाउंडर और चीफ ग्रोथ ऑफिसर फणी किशन अडेपल्ली और ग्रुप CFO राहुल बोथरा को एडिशनल डायरेक्टर के रूप में नियुक्त किया गया है। इनकी नियुक्ति 1 जून 2026 से प्रभावी होगी। लक्ष्मी नंदन रेड्डी ओबुल। CEO बोले- नंदन का विजन कंपनी के लिए अहम रहा बोर्ड में हुए इन बदलावों पर स्विगी ग्रुप के CEO श्रीहर्ष मजेटी ने कहा, ‘नंदन स्विगी के सफर में एक विजनरी ताकत रहे हैं। बेंगलुरु के एक मोहल्ले से शुरू हुए स्विगी को देशव्यापी प्लेटफॉर्म बनाने में उनका योगदान अहम रहा है।’ फणी और राहुल की नियुक्ति पर मजेटी ने कहा, ‘ये दोनों स्विगी के शुरुआती दिनों से हमारे साथ हैं। कंपनी के सबसे कठिन और महत्वपूर्ण समय में इन्होंने बिजनेस को संभाला है। जैसे-जैसे हम ग्रोथ के अगले फेज में जा रहे हैं, उनकी समझ और अनुभव हमारे लॉन्ग-टर्म टारगेट को हासिल करने में मददगार साबित होंगे।’ आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन में बदलाव, CEO को मिले नए अधिकार स्विगी ने फाइलिंग में बताया कि बोर्ड ने आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन (AoA) में बदलाव को मंजूरी दी है। इसके तहत एक्सेल और सॉफ्टबैंक के नॉमिनेशन राइट्स (निदेशक नामित करने के अधिकार) से संबंधित नियमों को हटा दिया गया है। वहीं नियमों में एक बदलाव ऐसा भी किया गया है, जिससे CEO श्रीहर्ष मजेटी को खुद को और सीनियर मैनेजमेंट के किसी भी एक सदस्य को बोर्ड में नामित करने का अधिकार मिल गया है। हालांकि, यह अधिकार कुछ तय शर्तों के अधीन होगा। ये खबर भी पढ़ें… टाटा संस की लिस्टिंग के पक्ष में आए शापूरजी मिस्त्री: बोले- यह केवल रेगुलेटरी जरूरत नहीं, बल्कि ट्रांसपेरेंसी के लिए जरूरी कदम शापूरजी पलोनजी (SP) ग्रुप के चेयरमैन शापूरजी पलोनजी मिस्त्री ने एक बार फिर टाटा संस की लिस्टिंग की वकालत की है। शुक्रवार को जारी एक बयान में मिस्त्री ने कहा कि टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट करना जरूरी है। इससे न केवल ग्रुप में पारदर्शिता यानी ट्रांसपेरेंसी बढ़ेगी, बल्कि गवर्नेंस और जवाबदेही भी मजबूत होगी। बता दें कि टाटा संस में शापूरजी पलोनजी ग्रुप की करीब 18% हिस्सेदारी है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
अचानक बढ़ा दी हैं फल, सब्जियां और दालें? वजन घटाने के लिए आप भी तो नहीं कर ये गलतियां, खराब हो जाएगी किडनी

Last Updated:April 10, 2026, 21:46 IST Weight Loss Ayurvedic Tips : फाइबर मैक्सिंग (डाइट में फाइबर बढ़ाना) का ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. इसमें लोग अपनी डाइट में अचानक फाइबर की मात्रा बढ़ा देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये एक खतरनाक प्रवृत्ति है. लोग फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज को डाइट में शामिल करके वजन नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन बिना सही जानकारी और संतुलन के यह प्रयास नुकसान पहुंचा सकता है. अंबाला आयुर्वेदिक चिकित्सक जितेंद्र वर्मा बताते हैं कि हर महीने 15 से 20 ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें लोगों को अचानक डाइट बदलने के कारण गैस, पेट दर्द, सूजन और अपच जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. अंबाला. तेजी से बदलती जीवनशैली और फिट रहने की बढ़ती चाहत के बीच आजकल लोग वजन घटाने या बढ़ाने के लिए शॉर्टकट तरीकों की ओर आकर्षित हो रहे हैं. पहले जहां लोग केवल प्रोटीन पर फोकस कर रहे थे. अब “फाइबर मैक्सिंग” यानी डाइट में फाइबर बढ़ाने का ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. इसमें लोग अपनी डाइट में अचानक फाइबर की मात्रा बढ़ा देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि विशेषज्ञ इसे एक खतरनाक प्रवृत्ति मान रहे हैं, जो सेहत पर गंभीर असर डाल सकती है. लोग फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज को डाइट में शामिल करके वजन नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन बिना सही जानकारी और संतुलन के यह प्रयास नुकसान पहुंचा सकता है. लोकल 18 से अंबाला सरकारी अस्पताल में कार्यरत आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. जितेंद्र वर्मा कहते हैं कि वजन बढ़ाने या घटाने के लिए अगर कोई फाइबर डायट नहीं भी ले रहा है तो उसकी इतनी ज्यादा जरूरत नहीं है, लेकिन शरीर की अग्नि को नियंत्रित (बैलेंस) रखना बहुत ज्यादा जरूरी है. अगर किसी को वजन घटाना है तो उसे गर्म पानी का सेवन करना होगा, क्योंकि वह व्यक्ति के शरीर में अग्नि को बढ़ाएगा और उसकी ऊर्जा बढ़ने से वजन घटेगा. आयुर्वेद में दूसरा फार्मूला है कि अगर किसी व्यक्ति को वजन बढ़ाना है तो उसे खाना खाने से पहले पानी का सेवन करना होगा. शरीर को मेंटेन रखने के लिए खाना खाने के कुछ देर बाद पानी का सेवन कर लेना चाहिए. डॉ. जितेंद्र कहते हैं कि वजन को घटाने के लिए खाना खाने के बाद ही पानी पी लेना चाहिए. यह तरीका शरीर को मेंटेन रखने के लिए कारगर है. वजन घटाने के लिए अजवाइन, सौंफ, सौंठ और धनिया का उपयोग भी सकते हैं. सौंठ 10 ग्राम लेनी है बाकी तीनों चीज 50-50 ग्राम मिलाकर चूर्ण बना लें. खाना खाने के बाद दिन में तीन बार इस चूर्ण का सेवन आधा-आधा चम्मच पानी के साथ करना है. लोग वजन बढ़ाने के लिए चीनी का उपयोग ज्यादा करने लगते हैं, लेकिन वह बिल्कुल भी सही नहीं है. गुड़ का उपयोग कर सकते हैं. हर महीने 15 से 20 ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें लोगों को अचानक डाइट बदलने के कारण गैस, पेट दर्द, सूजन और अपच जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. कई लोग सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से प्रभावित होकर बिना किसी विशेषज्ञ की सलाह के अपनी डाइट में बड़े बदलाव कर लेते हैं, जो उनके लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है, इसलिए किसी विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही अपने खान-पान में बदलाव करें. फाइबर शरीर के लिए आवश्यक जरूर है, लेकिन इसकी मात्रा और सेवन का तरीका सही होना चाहिए. अचानक अधिक फाइबर लेने से पेट में ऐंठन, भारीपन और ब्लोटिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं. गलत डाइट किडनी और ब्लड प्रेशर से जुड़ी समस्याओं को भी बढ़ा सकती है, जो लंबे समय में गंभीर रूप ले सकती हैं. About the Author Priyanshu Gupta Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें First Published : April 10, 2026, 21:46 IST
हेल्दी ब्रेकफास्ट: बस 20 मिनट में खाने के लिए तैयार करें आलू की चटपटी स्टफिंग; बच्चे-बच्चे सब चैट कर जायेंगे

आटे का फरा रेसिपी: उत्तर प्रदेश और बिहार के पारंपरिक नामांकन में आज भी घर-घर में काफी लोकप्रिय हैं। अगर घर में सिर्फ मसाले का आटा और आलू है तो आप भी बेहद स्वादिष्ट और स्वादिष्ट नाश्ता तैयार कर सकते हैं. ये रेसिपी ना भी है आसान, साथ ही पूरे परिवार को पसंद आती है। आटा के बारे में यूपी-बिहार की ग्रामीण रसोई का हिस्सा हैं। कई जगह दाल की स्टफिंग बनाई जाती है, तो कहीं खोए की भराई की जाती है। लेकिन आलू की चटपटी स्टफिंग वाला वर्जन सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। इसे आम भाषा में कई बार ‘आलू का गोझा’ या ‘गोझा’ भी कहा जाता है। यह कम तेल में बनता है, इसलिए स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा माना जाता है। आटे का किराया क्या-क्या होना चाहिए? आटे का आटा- 2 कपआलू- 5-6 बड़े आकार केहरा धनिया- छोटा साहरी मिर्च- 2अदरक- 1 इंचलहसुन- 1 बड़ा चम्मच (कुचला हुआ)हल्दी पाउडर- 1 छोटा चम्मचलाल मिर्च पाउडर- 1 छोटा चम्मचजीरा- 1 छोटा चम्मचअमचूर पाउडर- 1/2 छोटा चम्मचधनिया पाउडर- 1 छोटा चम्मचहल्दी का तेल- आवश्यकतानुसारनमक सबसे पहले आलू को आलू लें। सुलगने के बाद ठंडा कर चिपकाकर रख दें। इस बीच आटे में थोड़ा सा नमक और 1 नमक का तेल साबुत मुलायम दो गूंथ लें। दो को 15 मिनट के लिए ढककर रख दें ताकि ग्रेट से फूल जाए। अब कड़ाही में 2 मसाले का तेल गर्म करें। जीरा, कटी हरी मिर्च और कसा अदरक। हल्दी, लाल मिर्च, धनिया पाउडर, अमचूर और नमक नमक भून लें। आलू को मैश करके डालें। अच्छे से पूरी चटपटी स्टफिंग तैयार कर लें। हरा धनिया पूरा ठंडा होने दें। समतुल्य लोइयों को बाँट लें। हर लोई को पूरी तरह बेलें। बीच में आलू की स्टफिंग सुपरमार्केट से बंद कर दें। फ़्रे को मोमो या गुग्गी जैसे दर्शन दे सकते हैं। सभी को स्टीमर या स्टीमर में 12-15 मिनट तक स्टीम करना है। स्टीम हो जाने के बाद कड़ाही में थोड़ा सा तेल गर्म करें। इसमें प्याज और लहसुन चित्रारेखाचित्र। स्टीमे फ़ेयरेनोमैथली दोनों तरफ से सौर मंडल होने तक प्रभाव फ़्राई कर लें। बस तैयार है आपके आटे के किराए, गर्म-गर्मी के किराए को हरी चटनी, दही या चाय के साथ सर्व करें। यह नाश्ता न सिर्फ पेट भरता है बल्कि ऊर्जा भी देता है। बच्चों को स्टूडियो बॉक्स में भी दे सकते हैं। अगली बार जब नामांकन का मन न करे तो यूपी-बिहार का ये क्लासिक टिकट जरूर खरीदें। अगर एक बार परिवार को बनाया जाए तो, घरवाले को बार-बार बनाने का तरीका बताया गया है। (टैग्सटूट्रांसलेट)आटे का फरा रेसिपी(टी)यूपी बिहार का प्रसिद्ध खाना(टी)गेहूं का आटा आलू भरवां खाना(टी)आटे के फरा कैसे बनाएं(टी)स्वस्थ भारतीय नाश्ता पकौड़ी
heavy periods home remedy: घर के गार्डन में लगा ये देसी फूल असल में औषधि, हैवी पीरियड्स में फायदेमंद, जानें सेवन का तरीका

Last Updated:April 10, 2026, 21:22 IST Sadabahar Phool Ke Fayde: सदाबाहर का फूल आयुर्वेद इस्तेमाल की जाने वाली औषधि है. इसका इस्तेमाल हैवी पीरियड्स से लेकर घाव को भरने के लिए किया जाता है. सदाबाहर फूल को उपयोग करने का तरीका यहां आप जान सकते हैं. ख़बरें फटाफट सदाबाहर का फूल भारतीय में बहुत ही कॉमन है. इसे पूजा-पाठ से लेकर घर की साज-सज्जा में इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि इसमें औषधि गुण भी मौजूद होते हैं. आयुर्वेद में कई शक्तिशाली और गुणकारी पौधों और फूलों के बारे में बताया गया है, जिनके उपयोग से कई बीमारियों का इलाज होता आया है. ऐसा ही दिखने में सुंदर और गुणकारी पौधा है सदाबहार का पौधा. अपने नाम की तरह इस खूबसूरत पौधे की पत्तियों से लेकर फूल भी औषधीय गुणों से भरपूर हैं, हालांकि इसके इस्तेमाल के तरीकों के बारे में कम ही लोग जानते हैं. सदाबहार एक साधारण सा दिखने वाला पुष्प है पर आयुर्वेद में इसे खून, त्वचा और चयापचय से जुड़ा एक महत्वपूर्ण द्रव्य माना गया है. आयुर्वेद यह स्पष्ट करता है कि हर वनौषधि तभी औषधि बनती है, जब उसे सही द्रव्य, सही मात्रा और सही विधि के साथ अपनाया जाए. इसका स्वाद कड़वा होता है और इसे रक्त शुद्धि का सबसे आसान तरीका माना गया है. इसके पुष्प का सेवन रक्त की अशुद्धियों को कम करता है, जिससे आधी से ज्यादा शारीरिक रोग पहले ही खत्म हो जाते हैं. घाव के लिए नेचुरल औषधि के समानआयुर्वेद में सदाबहार को कफ और पित्त नाशक माना गया है. अगर सही मात्रा में इसका सेवन किया जाए तो आसानी से त्रिदोषों को संतुलित किया जा सकता है. इसके पत्ते का चूर्ण और हल्दी की सहायता से घाव को जल्दी भरा जा सकता है. घाव को जल्दी ठीक करने, सूजन को कम करने और घाव की लालिमा को कम करने के लिए सहाबहार के पत्तों को पीसकर और हल्दी मिलाकर सीधा घाव पर लगाया जा सकता है, लेकिन यह सिर्फ छोटे घाव पर लगाएं. बड़े और पस पड़े घाव के लिए चिकित्सक की सलाह लें. हैवी पीरियड्स का घरेलू उपायमहिलाओं में अक्सर अनियमित मासिक धर्म की परेशानी देखी जाती है और नियमित करने के लिए महिलाओं को हॉर्मोन पिल्स का सहारा लेना पड़ता है. ऐसे में सदाबहार के पत्तों को पानी में उबालकर पीने से गर्भाशय को मजबूती मिलती है और हॉर्मोन भी संतुलित रहते हैं. यह अधिक रक्तस्राव को भी नियंत्रित करता है. नाक से खून आना घरेलू उपचारगर्मियों में अक्सर नाक से खून आने की समस्या देखी जाती है. गर्मी में अधिक ताप की वजह से नाक से खून बहना शुरू हो जाता है. ऐसे में सदाबहार के फूल और अनार के फूलों का रस नाक में डालने से आराम मिलेगा. इन दोनों फूलों के रस की तासीर ठंडी होती है और रक्त को बहने से रोकती है. इसके अलावा अगर ततैया या कीट काट लेता है तो सूजन और दर्द से आराम पाने के लिए सहाबहार के पत्तों का लेप प्रभावित जगह पर लगाने से आराम मिलता है. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi First Published : April 10, 2026, 21:22 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
India Household Gold Value ₹830 Lakh Crore

Hindi News Business India Household Gold Value ₹830 Lakh Crore | Bigger Than Most Nations GDP नई दिल्ली1 घंटे पहले कॉपी लिंक भारत में 75-80% सोना ज्वेलरी के रूप में है। लोग इसे लॉन्ग टर्म सेविंग और परंपरा की तरह देखते हैं। भारतीय घरों और मंदिरों में 50,000 टन सोना रखा है, जिसकी वैल्यू करीब 10 ट्रिलियन डॉलर यानी लगभग ₹830 लाख करोड़ है। भारतीय व्यापारियों के संगठन एसोचैम (द एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया) की रिपोर्ट के अनुसार, यह दुनिया के सबसे बड़े 10 सेंट्रल बैंकों के कुल भंडार से भी ज्यादा है। भारतीयों के पास इतना सोना है कि अमेरिका और चीन को छोड़कर दुनिया के लगभग हर देश की सालाना GDP से भी ज्यादा है। एसोचैम का कहना है कि अगर इस सोने को देश के बैंकिंग सिस्टम या बिजनेस में लगाया जाए, तो भारतीय इकोनॉमी की रफ्तार कई गुना बढ़ सकती है। RBI के पास 880.3 टन सोने का रिजर्व वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) के डेटा के अनुसार, भारत के आधिकारिक सरकारी खजाने (RBI) में 880.3 टन सोना है, जो दुनिया में 8वें नंबर पर है। यह अमेरिका के 8,133 टन के मुकाबले काफी कम है, लेकिन प्राइवेट स्टॉक में भारत सबसे आगे है। घरों में रखा सोना भारत की जीडीपी का 125% तक कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के अनुमान के मुताबिक, 2024 से 2026 के बीच सोने की कीमतों में आई तेजी ने भारतीय घरों की वेल्थ को जबरदस्त बूस्ट दिया है। वेल्थ का गणित: जनवरी 2026 तक भारतीय घरों में रखे सोने की वैल्यू 5 ट्रिलियन डॉलर से ऊपर निकल गई है, जो भारत की कुल जीडीपी का लगभग 125% है। बैंक डिपॉजिट से ज्यादा: परिवारों के पास बैंक डिपॉजिट और शेयर बाजार में लगे कुल पैसे की तुलना में सोने की वैल्यू 175% अधिक है। यानी भारतीयों का सबसे ज्यादा भरोसा आज भी सोने पर ही है। संपत्ति का हिस्सा: भारतीयों की कुल ‘नॉन-प्रॉपर्टी वेल्थ’ (जमीन-मकान छोड़कर) में सोने की हिस्सेदारी 65% तक पहुंच गई है। 2047 तक जीडीपी में 7.5 ट्रिलियन डॉलर और जुड़ सकते हैं एसोचैम ने एक रोडमैप तैयार किया है कि कैसे इस ‘डेड इन्वेस्टमेंट’ को काम पर लगाया जा सकता है। मल्टीप्लायर इफेक्ट: अगर हर साल घरों में रखे सोने का सिर्फ 2% हिस्सा गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम या वित्तीय एसेट्स में बदल दिया जाए, तो 2047 तक भारत की जीडीपी में अतिरिक्त 7.5 ट्रिलियन डॉलर जुड़ जाएंगे। लक्ष्य 2047: रिपोर्ट कहती है कि 2047 तक भारत की अनुमानित 34 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी, सोने के सही इस्तेमाल से 41.5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है। गोल्ड लोन का चलन बढ़ा: ₹24 लाख करोड़ के पार पहुंचा कर्ज सोने को अब सिर्फ तिजोरी में रखने के बजाय लोग उत्पादक कार्यों के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। रिटेल क्रेडिट: नवंबर 2025 तक भारत में सोने और गहनों के बदले दिया गया गोल्ड लोन ₹24.34 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। बदलता नजरिया: अब गोल्ड लोन सिर्फ मजबूरी का सौदा नहीं रहा, बल्कि छोटे बिजनेस, खेती और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक मुख्यधारा का लोन प्रोडक्ट बन गया है। भारतीय एजेंसियों के अनुसार सोने की वर्तमान कीमत… क्या सोने की बढ़ती कीमतों से परचेजिंग पावर बढ़ती है? आमतौर पर माना जाता है कि जब किसी संपत्ति की कीमत बढ़ती है, तो लोग खुद को अमीर महसूस करते हैं और ज्यादा खर्च करते हैं। इसे वेल्थ इफेक्ट यानी धन का प्रभाव कहते हैं। हालांकि एमके ग्लोबल की एक रिपोर्ट इसके उलट दावा करती है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 75-80% सोना ज्वेलरी के रूप में है। लोग इसे लॉन्ग टर्म सेविंग और परंपरा की तरह देखते हैं। चूंकि लोग इसे बेचते नहीं हैं, इसलिए कीमतों के बढ़ने का उनकी रोजमर्रा की खपत या खरीदारी पर कोई खास असर नहीं पड़ता। ———— ये खबर भी पढ़ें… चांदी आज ₹3776 बढ़कर ₹2.40 लाख पर पहुंची: सोना ₹390 महंगा होकर ₹1.50 लाख पार, इस साल ₹17 हजार दाम बढ़े सोना-चांदी के दाम में शुक्रवार को तेजी रही। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, एक किलो चांदी 3,776 रुपए बढ़कर 2,39,934 लाख रुपए पर पहुंच गई है। इससे पहले 9 अप्रैल को कीमत 2,36,158 रुपए प्रति किलो थी। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 390 रुपए बढ़कर 1,50,327 रुपए पर पहुंच गया। इससे पहले गुरुवार को कीमत 1,49,937 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम थी। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
ड्रैगन फ्रूट Vs बनाना शेक: ड्रैगन फ्रूट और बनाना शेक में कौन सबसे ज्यादा जादुई? जानिए क्या हैं फायदे

ड्रैगन फ्रूट बनाम केला शेक: गर्मी के मौसम में शरीर को वर्गीकृत और ऊर्जावान बनाए रखने के लिए शेक और लॉजी दोनों ही कमाल किए जाते हैं। दोनों ही अपने-अपने अलग-अलग बन्धुओं के लिए जाते हैं। लेकिन सवाल यह है कि आपके स्वास्थ्य के लिए इन दोनों में से कौन सबसे बेहतर है?आओ कमलम और खाना शेक दोनों के फायदों के बारे में जानें और अगर दोनों को कंपनी बनाना है तो स्वास्थ्य के लिए सबसे अच्छा पद कौन सा है? ड्रैगन ड्रैगन या कमलम खाने के फायदे ड्रैगन ड्रैगन जिसे कमलम कहा जाता है। इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट की प्रचुर मात्रा पाई जाती है। ड्रैगन में असली की मात्रा काफी कम होती है और भूखापन होता है। यह वज़न की कोशिश कर रहे लोगों के लिए सर्वोत्तम है। विटामिन-सी की प्रचुरता होती है, जो प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और प्रतिरोध से लड़ने में मदद करती है।इसमें मौजूद प्रीबायोथिक्स पेट के अच्छे चर्चों को सूचीबद्ध करता है, जिसमें पाचन तंत्र कायम रहता है। ड्रैगन ड्रॉइंग से एंटी एजिंग का काम किया जा सकता है। इससे चेहरे पर चमक आती है। केला एक ऐसा फल है जो हर मौसम में आसानी से उपलब्ध होता है। दूध के साथ इसका मिश्रण एक ‘कम्प्लिट माइल्स’ बनाता है। केले में कार्बोहाइड्रेट्स और इलेक्ट्रॉनिक्स शुगर मौजूद है, जो तुरंत ऊर्जा प्रदान करता है। प्रतिक्रिया करने वालों के लिए यह सबसे अच्छा प्री या पोस्ट-वर्क आउट ड्रिंक है। इसमें साझीदार समानताएं होती हैं, जो मसालों में डूबी रहती हैं और उन्हें मजबूत बनाती हैं। शेक पीने से वजन बढ़ता है और दिल की सेहत में भी सुधार होता है। हार्डवेयर की आपूर्ति को नियंत्रित करने और दिल की सेहत को बनाए रखने में मदद मिलती है। ड्रैगन ड्रॉइंग और बनाना शेक में कौन सा बड़ा जादूगर? ड्रैगन ड्रैगन कम कैलोरी वाला है, जबकि बनाना शेक हाई कैलोरी वाला है। तीन के मामले में ड्रैगन दिखता है आगे। दूध में शेक बनाने के कारण इसमें प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है। अगर आप वजन कम करना चाहते हैं, डिटॉक्स करना चाहते हैं या ग्लोइंग त्वचा की तलाश में हैं, तो ड्रैगन ड्रॉइंग आपके लिए सबसे अच्छा है। (टैग अनुवाद करने के लिए)ड्रैगन फ्रूट बनाम केला शेक कैलोरी(टी)ड्रैगन फ्रूट बनाम केला शेक(टी)ड्रैगन फ्रूट केला स्मूदी लाभ(टी)ड्रैगन फ्रूट बनाम केला शेक पोषण(टी)वजन घटाने के लिए ड्रैगन फ्रूट बनाम केला शेक(टी)वजन घटाने के लिए ड्रैगन फ्रूट और केला स्मूदी
पन्ना में बाघ ने महिला पर हमला किया:2 किमी कंधे पर लादकर घायल को गांव पहुंचाया, अस्पताल में भर्ती

पन्ना जिले के उत्तर वन मंडल के विश्रामगंज रेंज में एक बाघ ने महुआ बीनकर लौट रही महिला पर हमला कर दिया। ग्रामीणों के साहस से महिला की जान बच गई। उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यह घटना विश्रामगंज रेंज के टगरा बीट के कक्ष क्रमांक 299 (महुआ टोला) में हुई। शाम करीब 6:00 बजे, हीरापुर टपरियन निवासी 35 वर्षीय रामकली कोंदर पति किशन कोंदर अपने साथियों के साथ घर लौट रही थीं। तभी घात लगाए बैठे बाघ ने उन पर अचानक हमला कर दिया। बाघ ने महिला की टांग पकड़ ली और उसे घसीटकर घने जंगल की ओर ले जाने लगा। महिला की चीख-पुकार सुनकर मौके पर मौजूद 6-7 ग्रामीणों ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। उन्होंने शोर मचाते हुए लकड़ियों से बाघ पर हमला किया। ग्रामीणों के इस सामूहिक प्रयास से बाघ महिला को छोड़कर जंगल में भाग गया। प्रत्यक्षदर्शी नंद लाल ने बताया कि इस दुर्गम जंगली इलाके में मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं था, जिससे तत्काल मदद नहीं मिल सकी। ग्रामीणों ने महिला के पैर में कपड़ा बांधकर खून रोका। इसके बाद, ग्रामीणों ने घायल महिला को कंधे पर लादकर लगभग 2 किलोमीटर पैदल चलकर गांव तक पहुंचाया। वहां से उसे जिला चिकित्सालय पन्ना ले जाया गया। विश्रामगंज रेंजर अजय बाजपेई ने बताया कि महिला को तत्काल इलाज के लिए भर्ती कराया गया है और उसे आर्थिक सहायता राशि भी प्रदान की गई है। उन्होंने ग्रामीणों को महुआ के सीजन में अकेले जंगल में न जाने की सलाह दी है। घायल महिला का उपचार जिला चिकित्सालय पन्ना में जारी है। उसके पैर और कंधे में गंभीर चोटें आई हैं।
राजमा और छोले भिगोना भूल गए, कुकर में उबालते समय ट्राई करें ये सिंपल ट्रिक, 3-4 सीटी में ही होगा सॉफ्ट

काफी लोगों को छोले-भटूरे, राजमा-चावल खाना बहुत अच्छा लगता है. जगह-जगह आपको राजमा-चावल, छोले भटूरे वाले ठेले मिल जाएंगे. लोग इन्हें बहुत चाव से खाते हैं. राजमा और छोले बेहद ही पौष्टिक दाल बेस्ड फलियां (Beans) हैं. राजमा (kidney beans) और सफेद छोले या काबुली चने दोनों ही प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होते हैं. कई बार राजमा और सफेद छोले को पकाने में काफी समय लग जाते हैं. खासकर तब, जब आप इन्हें रात में पानी में भिगोकर रखना भूल जाएं. जब आप इसे कुकर में पकाने की कोशिश करते हैं तो ये जल्दी पकते नहीं हैं. खाने में ये सख्त, कच्चे और हार्ड लगते हैं. कोई बात नहीं, जब भी आप इन्हें रात में भिगोना भूल जाएं तो राजमा या छोले को पकाते समय इस एक ट्रिक को जरूर फॉलो करें. कुकर में जब आप इसे उबालें तो उसमें ये एक चीज डाल दें. राजमा में पाए जाने वाले पोषक तत्वराजमा में प्रोटीन, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट, आयरन, पोटैशियम, फोलेट, मैग्नीशियम आदि होते हैं. राजमा खाने से हार्ट हेल्दी रहता है. ब्लड प्रेशर कंट्रोल रहता है. वजन नहीं बढ़ता है, क्योंकि इसमें फाइबर होता है. प्रोटीन से मांसपेशियों को मजबूती मिलती है. शरीर को रिपेयर करने के लिए प्रोटीन जरूरी है. वेज खाने वालों के लिए प्रोटीन का बेहतर सोर्स है. पाचन बेहतर रहता है. कब्ज नहीं होता है. शरीर को एनर्जी मिलती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. छोले में मौजूद पोषक तत्वछोले यानी सफेद चना भी कई तरह के पोषक तत्वों से भरपूर होता है. इसमें प्रोटीन, फाइबर, आयरन, कार्बोहाइड्रेट, फोलेट, पोटैशियम, मैग्नीशियम आदि भरपूर होते हैं. काबुली चने खाने से हड्डियां मजबूत होती हैं. हार्ट स्वस्थ रहता है. फाइबर भूख कंट्रोल करके वजन को बढ़ने से रोकता है. पोटैशियम ब्लड प्रेशर को काबू में रखता है. छोले को पानी में रातभर भिगोकर और अच्छी तरह से पकाकर ही खाना चाहिए. एक बार में ही अधिक खाने से बचें वरना पेट फूल सकता है, गैस की समस्या हो सकती है. राजमा और छोले को जल्दी पकाने का तरीका-जब आप रात में राजमा और छोले पानी में डुबाकर रखना भूल जाएं तो इसे आसानी से गलाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है. इसे पकाने में 1 से 2 घंटे लग जाते हैं और कुकर में 7-8 सीटियां लगाने के बाद भी ये कच्चे और सख्त ही खाने में लगते हैं, तो आप यहां बताए गए इस एक ट्रिक को ट्राई करके देखिए. -राजमा और छोले को जल्दी पकाने के लिए आपको लेनी होगी एक अदरक. जब आप राजमा या छोला कुकर में बंद कर उबालें तो उसमें ये अदरक का टुकड़ा डाल दें. ये ट्रिक सोशल मीडिया पर शेयर किया गया है, जिसे लोग आजमाकर देख रहे हैं. -छोले या राजमा जो भी बनाना हो, उसे पानी से धोकर कुकर में डालें. इसमें एक गिलास पानी, एक छोटा टुकड़ा अदरक का डाल, थोड़ा सा नमक, हल्दी पाउडर डाल दें. कुकर का ढक्कन लगा दें. कुकर में 3 से 4 सीटी लगने दें. जब आप कुकर का ढक्कन हटाएंगे तो ये अच्छी तरह से पके हुए मिलेंगे. अब आप इसे अपने तरीके से तेल, मसाले, टमाटर, प्याज में पका लें. इसके लिए ढक्कन लगाकर पकाने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी. अगर आपने सुबह ही पानी में राजमा या छोले भिगोया है, तो भी इसे जल्दी पकाने के लिए अदरक वाला ये ट्रिक ट्राई कर सकते हैं. – दरअसल, राजमा और छोले में एक खास तरह का कॉम्प्लेक्स शुगर होता है, जिसे ओलिगोसैचेराइड्स (Oligosaccharides) कहते हैं. पाचन तंत्र इसे आसानी से पचा नहीं पाता है. एब्जॉर्ब नहीं कर पाता है. ये शुगर आंतों में फर्मेंटेशन का कारण बनते हैं. इस वजह से काफी लोगों को राजमा और छोले खाने से गैस की समस्या शुरू हो जाती है. – वहीं, अदरक में मौजूद तत्व जिंजरोल इस शुगर को बहुत तेजी से तोड़ता है. इस वजह से राजमा और छोले या फिर कोई अन्य अनाज, फलियां भी जल्दी पक जाती हैं. इससे गैस की समस्या भी नहीं होगी. अदरक डालने से ये दोनों ही चीजें जल्दी पच भी जाएंगी. ये आसानी से नहीं पचते हैं. ये वात-वर्धक होते हैं. अदरक से इनमें मौजूद वात दोष कम हो सकता है. इस तरह से इन्हें पचाना आसान हो जाता है.
दीपिका चिखलिया ने रामायण फिल्म पर कसा तंज:कहा- रामायण ऐसी बनाओ कि 4000 करोड़ लगाकर भी वैसी न बन पाए

रणबीर कपूर की फिल्म ‘रामायण’ पर रामानंद सागर की ‘रामायण’ में सीता का किरदार निभाने वाली एक्ट्रेस दीपिका चिखलिया ने तंज कसा है। दीपिका चिखलिया ने हाल ही में इंस्टाग्राम पर एक स्टोरी शेयर की। इसमें उन्होंने लिखा, “रामायण ऐसी बनाओ कि लोग 4000 करोड़ लगाकर भी वैसी न बन पाएं।” हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर किसी पर निशाना नहीं साधा, लेकिन उनके इस पोस्ट को फिल्म के भारी-भरकम बजट और पुराने शो की सादगी से जोड़कर देखा जा रहा है। उनका मानना है कि रामायण की आत्मा उसकी भावनाओं में होती है, न कि सिर्फ पैसे खर्च करने में। टीजर की तारीफ भी कर चुकी हैं एक्ट्रेस दिलचस्प बात यह है कि इससे पहले दीपिका ने ‘रामायण ‘ के टीजर की काफी तारीफ की थी। उन्होंने कहा था, मैंने टीजर देखा और यह बहुत भव्य है। यह वाकई बहुत ही शानदार लग रहा है। मेकर्स ने इसे बहुत अच्छे से बनाया है। मैं खुद इस फिल्म का बेसब्री से इंतजार कर रही हूं। दो हिस्सों में आएगी फिल्म रिपोर्ट्स के मुताबिक, नितेश तिवारी की ‘रामायण’ एक बड़े स्तर पर बनाई जा रही फ्रैंचाइजी होगी। इसे दो भागों में रिलीज किया जाएगा। फिल्म का पहला हिस्सा दिवाली 2026 में सिनेमाघरों में दस्तक देगा। वहीं, कहानी का दूसरा और अंतिम भाग अगले साल दिवाली 2027 में रिलीज करने की योजना है। फिल्म ‘रामायण’ से जुड़ी अहम बातें-
Justice Yashwant Verma Resigns Allahabad HC

Hindi News Career Justice Yashwant Verma Resigns Allahabad HC | Delhi BCom, MP LLB 48 मिनट पहले कॉपी लिंक कैश कांड मामले में दिल्ली हाईकोर्ट से इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर हुए जज जस्टिस यशवंत वर्मा ने 9 अप्रैल को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को इस्तीफा सौंप दिया। 14 मार्च 2025 को जस्टिस यशवंत के दिल्ली वाले घर में आग लगने पर 500-500 के जले हुए नोटों के बंडल मिले थे। विवाद बढ़ने के बाद उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट से इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज के घर में जन्मे जस्टिस यशवंत वर्मा का बचपन इलाहाबाद में बीता। कानूनी पेशेवरों का हब माने जाने वाले इलाहाबाद में वे लीगल प्रोफेशनल्स के बीच पले-बढ़े। यशवंत वर्मा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से कॉमर्स ऑनर्स में बैचलर्स किया। अपने पिता की लिगेसी को आगे बढ़ाते उन्होंने 1992 में एमपी की रीवा यूनिवर्सिटी से LL.B. कर अपनी प्रैक्टिस शुरू कर दी।सिविल अफेयर्स में प्रैक्टिस कर करियर की शुरुआत की और 2006 से 2012 तक इलाहाबाद हाईकोर्ट के लिए बतौर स्पेशल काउंसल काम किया। साल 2012 से अगस्त 2013 तक जस्टिस यशवंत वर्मा उत्तर प्रदेश सरकार के लिए चीफ स्टैंडिंग काउंसल रहे। इसके बाद सीनियर एडवोकेट बने। 13 अक्टूबर 2014 को कॉलेजियम सिस्टम के तहत नॉमिनेट हुए और इलाहाबाद हाईकोर्ट के एडिशनल जज के रूप में प्रमोट हुए। फिर 1 फरवरी 2016 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के परमानेंट जज बन गए। 500 के नोट मिलने पर जस्टिस वर्मा ने कहा था, ‘घर से नोट मिलना साबित नहीं करता कि ये मेरे हैं।’ 11 अक्टूबर 2021 को दिल्ली हाईकोर्ट के जज अपॉइंट हुए। उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट के जज के लिए जस्टिस चंद्र धरी सिंह के साथ शपथ ली थी। घर से जली हुई नकदी मिलने के केस में ट्रांसफर हुए थे मार्च 2024 में दिल्ली के उनके क्रेसेंट बंगले में आग लग गई थी। फायर ब्रिगेड की टीम जब मौके पर पहुंची तो उसे 500 के बंडलों के जले हुए ढेर मिले थे। मामला पब्लिक में आया तो जस्टिस यशवंत को दिल्ली हाईकोर्ट से ट्रांसफर कर इलाहाबाद हाईकोर्ट भेज दिया गया। वहां उन्होंने 5 अप्रैल 2025 को शपथ तो ली, लेकिन उन्हें कोई जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई थी। वे 5 जनवरी 2031 को रिटायर होने वाले थे। 9 अप्रैल को उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। उनका इस्तीफा ऐसे समय आया है जब घर में जली हुई नकदी के आरोपों की संसदीय जांच शुरू होने वाली थी। अब अगर राष्ट्रपति इस इस्तीफे को स्वीकार करती हैं तो जस्टिस वर्मा पर क्रिमिनल इनक्वायरी हो सकती है। बंगले में आग बुझाने गई फायर ब्रिगेड की टीम को जली हुई नकदी मिली थी। उनके कार्यकाल में लिए अहम फैसले 1. 2018 में ऑक्सीजन की कमी से मारे गए बच्चों के आरोपी डॉक्टर को जमानत दी 2018 में जस्टिस वर्मा ने एक अहम फैसले में डॉ. कफील खान को जमानत दे दी। कफील खान मेडिकल नेग्लिजेंस का आरोप में करीब 7 महीने से जेल में था। मामला गोरखपुर हॉस्पिटल का था, जहां एक साल पहले ऑक्सीजन न मिलने से 63 बच्चे और 18 लोग मारे गए थे। 2. 2022 में बंदूक लाइसेंस का नियम 2022 में जस्टिस वर्मा ने कहा कि लाइसेंस वाले व्यक्ति के पास आर्म्स एक्ट 1959 के तहत सिर्फ दो हथियार ही हो सकते हैं। राइफल क्लब या एसोसिएशन के मेंबर होने से ज्यादा की इजाजत नहीं। 3. 2023 में गोल्ड इंपोर्ट वाला फैसला 2023 में जस्टिस वर्मा की अगुवाई वाली बेंच ने फैसला दिया कि कस्टम्स एक्ट 1962 के तहत गोल्ड इंपोर्ट ‘प्रतिबंधित’ है। उन्होंने कहा कि ‘प्रतिबंध’ शब्द में रेगुलेटेड या रिस्ट्रिक्टेड सामान भी आता है। 4. सत्यजीत राय की फिल्म ‘नायक’ का कॉपीराइट केस साल 2023 में जस्टिस वर्मा की बेंच ने एक सिंगल जज के फैसले को बरकरार रखते हुए, 1966 की बंगाली फिल्म ‘नायक’ का मालिकाना हक डायरेक्टर सत्यजीत राय दिया। RDB कंपनी के मालिक आर. डी. बंसल ने हार्पर कॉलिन्स को फिल्म की कहानी को नॉवेल बनाने से रोकने की कोशिश की थी। 5. दिल्ली हाईकोर्ट में टैक्स केस दिल्ली हाईकोर्ट में उनके करीब साढ़े तीन साल के समय में जस्टिस वर्मा ने कई बड़े टैक्स मामले निपटाए। मार्च 2024 में उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट में कांग्रेस पार्टी की इनकम टैक्स की दोबारा जांच के खिलाफ वाली याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि टैक्स अफसरों के पास ठोस सबूत हैं और करीब 520 करोड़ का टैक्स बच गया था। स्टोरी- सोनाली राय ———————— ये खबर भी पढ़ें… 8 की उम्र में हाथ-पैर खोए, रिश्तेदारों ने कहा-‘मार दो’:मुंह से पेंटिंग बनाकर वायरल हुईं, अब आर्चरी में चैंपियन; जानें पायल नाग की प्रोफाइल 18 साल की पैरा आर्चर पायल नाग ने पहले ही इंटरनेशनल टूर्नामेंट में गोल्ड जीतकर इतिहास रच दिया। वे दुनिया की पहली क्वाड्रपल एम्प्युटी आर्चर हैं यानी बिना हाथ और पैर की आर्चर पायल मुंह से पकड़कर धनुष चलाती हैं। मुंह से पेंटिंग के लिए वायरल हुईं पायल अब आर्चरी में नए रिकॉर्ड बना रही हैं। जानते हैं उनके जुनून और जज्बे की पूरी कहानी… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…








