Healthy Kidney Tips: किडनी को डिटॉक्स और हेल्दी रखने वाले 5 फूड्स, आसपास भी नहीं फटकेंगी बीमारियां

Last Updated:April 10, 2026, 23:51 IST Healthy Foods For Kidney: गर्मी के मौसम में किडनी से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. लेकिन राहत की बात ये है कि कुछ कॉमन फूड्स इनसे बचने में बहुत मददगार साबित होते हैं. ऐसे में हेल्दी किडनी के लिए डाइट में यहां बताए गए इन 5 सब्जी और फलों को शामिल करना न भूलें. ख़बरें फटाफट किडनी आकार में छोटी होती है, लेकिन शरीर में बहुत अहम भूमिका निभाती है. यह खून को फिल्टर करती है, शरीर से गंदगी और टॉक्सिन्स बाहर निकालती है और ऐसे हार्मोन बनाती है जो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद करते हैं. लेकिन शराब, गलत लाइफस्टाइल और खराब खान-पान से किडनी की कार्यक्षमता धीरे-धीरे कमजोर हो सकती है. इसके अलावा गर्मी का मौसम भी इसके लिए बीमारियों का रिस्क बढ़ा देता हैय किडनी को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है कि आप हानिकारक चीजों से दूर रहें, पर्याप्त पानी पिएं और ऐसे फूड्स खाएं जो किडनी की रक्षा करें. अगर आप अपनी किडनी को नुकसान से बचाना चाहते हैं, तो सही खान-पान बहुत जरूरी है. कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जो आसानी से घर में मिल जाते हैं और किडनी को साफ व स्वस्थ रखने में मदद करते हैं. किडनी को डिटॉक्स और हेल्दी रखने वाले 5 फूड्स बेरीजब्लूबेरी, स्ट्रॉबेरी और रास्पबेरी में एंटीऑक्सीडेंट भरपूर होते हैं, जो सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने में मदद करते हैं. ये किडनी को नुकसान से बचाते हैं. इनमें विटामिन और मिनरल्स भी होते हैं और पोटैशियम कम होता है, इसलिए ये किडनी के लिए अच्छे हैं. आप इन्हें सीधे, स्मूदी या दही के साथ खा सकते हैं. लहसुनलहसुन में एलिसिन नाम का तत्व होता है, जो सूजन कम करने और इंफेक्शन से लड़ने में मदद करता है. यह खाने का स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ इम्युनिटी भी मजबूत करता है, जिससे किडनी को सुरक्षा मिलती है. नींबूनींबू में मौजूद सिट्रिक एसिड किडनी स्टोन बनने से रोकता है. यह यूरिन की मात्रा बढ़ाता है और शरीर की एसिडिटी कम करता है. सुबह नींबू पानी पीना फायदेमंद हो सकता है. इसमें एंटीऑक्सीडेंट भी होते हैं जो किडनी के लिए अच्छे हैं. खीराखीरे में पानी की मात्रा ज्यादा होती है, जिससे शरीर हाइड्रेट रहता है. यह यूरिन बढ़ाने में मदद करता है, जिससे शरीर के टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं. इसका डाययूरेटिक प्रभाव किडनी के लिए फायदेमंद है. आप इसे सलाद या स्नैक के रूप में खा सकते हैं. फूलगोभीफूलगोभी पोषण से भरपूर होती है. इसमें फाइबर, विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं. इसमें पोटैशियम कम होता है, इसलिए यह किडनी के लिए अच्छा विकल्प है. इसे आप सब्जी, उबालकर या मैश करके खा सकते हैं. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi First Published : April 10, 2026, 23:51 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
‘बंगला में घुसपैठ के लिए टीएमसी जिम्मेदार’, अमित शाह ने भड़के अभिषेक बनर्जी पर तंज कसते हुए शेख हसीना को लेकर क्या कहा?

त्वरित पढ़ें दिखाएँ एआई द्वारा उत्पन्न मुख्य बिंदु, न्यूज़ रूम द्वारा सत्यापित अभिषेक ने कश्मीर, दिल्ली में गृह मंत्रालय की भूमिका पर सवाल उठाया। गृह मंत्री अमित शाह पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले अपनी सभी पार्टियों में राज्य में घुसपैठियों के मुद्दे को जोर-शोर से उठा रहे हैं और इसके लिए वह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी लोकतांत्रिक कांग्रेस (टीएमसी) को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। शाह के आरोप-प्रस्ताव पर टीएमसी के वरिष्ठ नेता और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और समाजवादी पार्टी के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार (10 अप्रैल, 2026) को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इसके साथ ही उन्होंने बांग्लादेश से घुसपैठ के मामले में शाह की रिहाई पर पलटवार करते हुए बांग्लादेश के अपदस्थ पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का भी ज़िक्र किया। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से यह स्पष्ट करने को कहा कि बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख़ हसीना को बंधक बनाया जाना चाहिए। इसके साथ ही, अभिषेक अंबानी ने पहलगाम और नई दिल्ली में पिछले साल हुए हमले में गृह मंत्रालय की भूमिका पर भी रोक नहीं लगाने का सवाल उठाया। शेख़ ख़ुशना को लेकर क्या बोले अभियोग…? न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर जारी बयान में कहा गया है कि टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने कोलकाता में शुक्रवार (10 अप्रैल, 2026) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने शाह से यह स्पष्ट करने की मांग की कि शेख हसीना को क्या कहा जाए, जिसमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने शरण दी है। हमलावरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है और उन्हें दूर-दराज़ के निवासियों से खोजा गया है, जो कि फ्लॉवर के शाह के संकल्प का ज़िक्र करते हुए अभियोग ने केंद्रीय गृह मंत्री पर बार-बार आरोप लगाया है- एक ही बात दोहराई जा रही है और इस मुद्दे पर ग़लत जानकारी फैलाई जा रही है। उन्होंने कहा, ‘अगर हम घुसपैठियों की बात करें तो बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की क्या स्थिति है, जो पिछले साल से भारत में रह रही हैं? क्या हैं वे बांग्लादेशी घुसपैठिए?’ लोगों को सुरक्षा की दृष्टि से अमित शाह असफलः अभिवचन अभिषेक ने कहा, ‘अमित शाह पहले गाम में हुए आतंकवादी हमलों में कैसे नाकाम रहे, जिसमें 26 भारतीय मारे गए? दिल्ली में हमलावरों ने कैसे घुसे और 10 लोगों को मार डाला? ‘शाह इन लोगों की सुरक्षा क्यों विफल हो रही है?’ यह भी पढ़ें: ओडिशा के गंजाम में ‘दंड नाच’ के दौरान दो संप्रदायों में मामूली बहस के बाद हिंसक हुई घटना (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल(टी)अभिषेक बनर्जी(टी)अमित शाह(टी)बांग्लादेश(टी)शेख हसीना(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026(टी)ममता बनर्जी(टी)टीएमसी(टी)पश्चिम बंगाल(टी)अभिषेक बनर्जी(टी)अमित शाह(टी)बांग्लादेश(टी)शेख हसीना(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)ममता बनर्जी(टी)टीएमसी
Secret Trick: शबाना सैफी की इस ट्रिक से सिर्फ 1 सिटी में ही पकाए एकदम सीधे-खिले चावल, समय भी बचाए और स्वाद भी बढ़ाया

गुप्त युक्ति: अक्सर लोगों की परेशानी यह होती है कि चावल में थोड़ा-थोड़ा कुकर या तो अलग-अलग तरह से चिपक जाते हैं या फिर नीचे से जल जाते हैं। कुकर में परफेक्ट चावल बनाना एक कला है, और कुकिंग एक्सपर्ट शबाना सैफी ने इस कला को बेहद आसान बना दिया है। उनके बताए गए खास टिप्स और पानी के सही अनुपात को अपनाकर आप घर पर ही रॉयल पुलाव जैसे खिले-खिले चावल तैयार कर सकते हैं। आइए हम आपको इस लेख में स्टेप-बाय-स्टेप चावल बनाने की विधि के बारे में बताते हैं। जिससे चावल एकदम खिला-खिला रहेगा और हर दाना एक अलग सा दिखेगा। चावल की गुणवत्ता अच्छी होनी चाहिए चावल की गुणवत्ता और उसे तैयार करने का तरीका सबसे पहला कदम है।खिले-खिले चावल हमेशा अच्छी गुणवत्ता के लिए लंबे ग्रेन बासमती चावल का चयन करें।चावल बनाने से पहले कम से कम 30 मिनट तक सोखना जरूरी है। सब्सने से दाने पानी सोख लेते हैं, जिससे वे पकते समय टूटते नहीं और अपनी पूरी लंबाई तक खिलते हैं।चावल धोते समय हाथों का दबाव अलग, ताकि दानों के बीच से न टूटे। चावल बनाने का पहला स्टेप साधारण चावल को ‘स्पेशल’ बनाने के लिए उन्हें सलाद के बजाय मसाले का तड़का लगाएं। कुकर में थोड़ी सी घी या तेल गरम कर लीजिये. इसमें लौंग, छोटी और बड़ी इलायची, काली मिर्च और जीरा डाला जाता है। जैसे ही मसालों की ध्वनि आने लगे, बड़े-बड़े चावलों को कुकर में डालें। चावलों को घी में 1-2 मिनट का चित्रांकन। ऐसा करने से दानों पर घी की एक परत चढ़ जाती है, जो उन्हें बिजली से रोकती है। चावल पकाने के लिए पानी की मात्रा का ध्यान रखें कुकर में चावल खराब होने का सबसे बड़ा कारण यह है कि हम पानी कम या फिर ज्यादा ले रहे हैं। साधारण शबाना सैफी के अनुसार 2 चम्मच चावल के लिए सिर्फ 2.5 चम्मच पानी का ही उपयोग करें। ज्यादातर लोग ज्यादा पानी दाल देते हैं। चावल स्वादिष्ट हो जाते हैं। यह पोटली का फॉर्मूलेशन चावल को एकदम सटीक टेक्सास देता है। चावल पकाने का सही तरीका यही स्टेप सबसे जरूरी है। जो आपके चावलों को रेस्टोरेंट की तरह बनाएगा। पानी डाउनलोड करने के बाद तुरंत बंद न करें।कुकर को एक साधारण प्लेट से पुराने डेक और उच्च फ्लेम पर व्यंजन बनाया गया।जब ऊपर का पानी सूख जाए और चावलों की सतह दिखे, तब कुकर का असली समुद्र तट।अब केवल एक सीट पर क्लिक करें और तत्काल बंद कर दें। चावल सर्व करने से पहले ये जरूर करें शहर के बाद कुकुर को घण्टा बंद न छोड़ें। स्टीम को तुरंत हटा दिया गया और डेथ एंकर। अब एक केंट या कढ़ी की मदद से चावलों को हाथों से फुलाएं। इसके अंदर की गर्म हवा निकल जाएगी और चावल के साथ में शामिल नहीं होगा। शबाना सैफी का तरीका ये भी पढ़ें – ड्रैगन फ्रूट Vs बनाना शेक: ड्रैगन फ्रूट और बनाना शेक में कौन सबसे ज्यादा जादुई? जानिए क्या हैं फायदे
ऐसे कोर्स डिजाइन करें, जो ट्रेनिंग के बाद रोजगार दिलाएं:सीएम बोले- सीखो कमाओ योजना में 20 हजार लोगों की ट्रेनिंग को दोगुना कराएं

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में ऐसे नए उपयोगी कोर्स डिजाइन किए जाएं, जो प्रशिक्षण के बाद युवाओं को तत्काल रोजगार दिलाने में सहायक हों। मुख्यमंत्री सीखो कमाओ योजना में लगभग 20 हजार से व्यक्तियों के प्रशिक्षण की उपलब्धि को दोगुना किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्देश समत्व भवन में तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार विभाग के कार्यों की समीक्षा बैठक में दिए। तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार और राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल की मौजूदगी में समत्व भवन में हुई मीटिंग में जानकारी दी गई कि भारत सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर आईटीआई की ग्रेडिंग जारी की है, इसमें मध्यप्रदेश 5वें स्थान पर है। प्रदेश की 47 शासकीय आईटीआई को 10 में से 9 प्लस ग्रेडिंग स्कोर मिला है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत को स्किल कैपिटल बनाने की दिशा में अनेक प्रयास किए हैं। मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के प्रयासों और डेयरी विकास कार्यक्रमों से भी युवाओं को जोड़ने के निर्देश दिए। इसके लिए कौशल विकास और रोजगार विभाग से समन्वय कर समुचित कदम उठाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि वर्ष-2026 में विभिन्न गतिविधियों से युवाओं को जोड़ने और रोजगार उपलब्ध करवाने के लिए समुचित प्रयास करने को कहा। कौशल विकास योजना में लाभ पाने वालों की दी जानकारी बैठक में बताया गया कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में देश में सर्वाधिक 11 हजार 400 प्रशिक्षणार्थियों का नामांकन मध्यप्रदेश में हुआ। साथ ही युवा संगम के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में प्रदेश में 2 लाख 68 हजार से अधिक आवेदकों को लाभान्वित किया गया। मध्यप्रदेश के एक लाख 32 हजार युवाओं को स्व-रोजगार का लाभ मिला है। संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल पार्क भोपाल द्वारा इस वर्ष 3 हजार से अधिक प्रशिक्षणार्थियों को लाभान्वित करने का लक्ष्य है। इनमें 1500 प्रशिक्षणार्थी लॉन्ग टर्म और इतने ही शॉर्ट टर्म ट्रेनिंग का लाभ प्राप्त करेंगे। युवाओं को पूर्व में जिन उद्योगों में प्रशिक्षण दिलवाया गया है, उनमें रिलायंस, ट्राइडेंट, जिंदल समूह के जेबीएम आदि शामिल हैं। प्रदेश में 290 शासकीय और 644 प्राइवेट आईटीआई संचालित हैं। शासकीय आईटीआई में 3484 सीटों की वृद्धि की गई, जिसके फलस्वरूप कुल सीट 52 हजार 248 हो गई हैं। प्राइवेट आईटीआई में कुल 61 हजार 32 सीट हैं। बैठक में जानकारी दी गई कि परम फाउंडेशन द्वारा धार जिले में सरदारपुर आईटीआई में मैन्युफैक्चरिंग टेक्नीशियन कोर्स में प्रशिक्षण संचालित किया जा रहा है। पीएम सेतु के अंतर्गत मध्यप्रदेश में 20 हब और 81 स्पोक आईटीआई उन्नयन का कार्य हुआ है। इंडिया स्किल्स प्रतियोगिता 2025-26 में मध्यप्रदेश का उत्कृष्ट प्रदर्शन रहा। सीएम ने कृषि लोकरंग की तैयारियों की समीक्षा की इसके पहले कृषि लोकरंग की तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि लोकरंग में किसानों और आमजन की सहभागिता बढ़ाने के लिए कृषि क्विज प्रतियोगिता जैसे नवाचार किए जाएं। प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार भी दिए जाएं। हर जिले के प्रथम विजेता (टॉपर) को पुरस्कार के रूप में किसानों के लिए हर मौसम में उपयोगी कृषि संसाधन (जैसे ट्रैक्टर आदि) एवं अन्य तरह के पुरस्कार भी दिए जा सकते हैं। सीएम ने संभाग, जिला स्तर पर भी इसके लिए कार्यक्रम करने को कहा है। इसके अलावा एक अन्य बैठक में बालाघाट में होने वाले जनजातीय कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा की गई।
अनूपपुर में हाथियों ने खड़ी फसलें रौंदी:सिंचाई के पाइप और दीवारें भी तोड़ी, 103 दिनों से मचा रहे तबाही

छत्तीसगढ़ से आए चार हाथियों ने अनूपपुर जिले में पिछले 103 दिनों से डेरा डाल रखा है। हाथियों के लगातार उत्पात और वन विभाग की सुस्ती की वजह से ग्रामीणों में भारी गुस्सा और डर का माहौल है। ये हाथी फिलहाल दो हिस्सों में बंटकर आतंक मचा रहे हैं। तीन हाथियों का दल करनपठार के जंगलों में छिपा है, जबकि एक अकेला हाथी (लोन टस्कर) जिला मुख्यालय से सिर्फ 8 किलोमीटर दूर पोंड़ी और खांड़ा के इलाकों में फसलों और मकानों को नुकसान पहुंचा रहा है। इस अकेले हाथी ने बरबसपुर के सरपंच समेत कई किसानों के खेत रौंद दिए और सिंचाई के पाइप और दीवारें भी तोड़ डालीं। वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग उन्हें समय पर हाथियों के आने की सूचना (मुनादी) नहीं दे रहा है। लोगों का कहना है कि अधिकारी सिर्फ दूर खड़े होकर तमाशा देखते हैं। न तो विभाग पटाखे दे रहा है और न ही सुरक्षा के कोई इंतजाम कर रहा है। मजबूर होकर ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर मशालों के सहारे हाथियों को खदेड़ रहे हैं। मौत के दो महीने बाद भी नहीं मिला मुआवजा प्रशासन की लापरवाही का एक बड़ा मामला भी सामने आया है। बरबसपुर में 12 फरवरी को हाथी के हमले (दीवार गिरने) से घायल 70 साल के रामविशाल भैना की मौत हो गई थी। इस घटना को दो महीने बीत चुके हैं, लेकिन मृतक के परिवार को अब तक सरकारी सहायता राशि नहीं मिली है। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग न तो जान की परवाह कर रहा है और न ही नुकसान की भरपाई।
मिर्गी आने से पहले कर लेगी पता! IIT कानपुर ने बना डाली ऐसी डिवाइस, जेब में रखकर कहीं भी घूमिए

Last Updated:April 10, 2026, 22:36 IST IIT Kanpur News : ये डिवाइस दिमाग की हर गतिविधि पर नजर रखेगी और किसी भी गड़बड़ी के संकेत पहले ही दे देगी. इसकी मदद से ब्रेन स्ट्रोक और मिर्गी के मरीजों की जान बचाना आसान हो जाएगा. इसे खासतौर पर ग्रामीण इलाकों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है, जहां बड़े अस्पतालों की सुविधा आसानी से नहीं मिलती. इस डिवाइस का लैब टेस्ट सफल रहा है और अब इसे क्लिनिकल ट्रायल के लिए भेजा गया है. कानपुर. अब ब्रेन से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा पहले ही पहचाना जा सकेगा. इसकी मदद से ब्रेन स्ट्रोक और मिर्गी के मरीजों की जान बचाना आसान हो जाएगा. आईआईटी कानपुर में तैयार की गई एक नई “प्वाइंट ऑफ केयर” डिवाइस दिमाग की हर गतिविधि पर नजर रखेगी और किसी भी गड़बड़ी के संकेत पहले ही दे देगी. यह डिवाइस आईआईटी कानपुर के इंक्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर में काम कर रहे स्टार्टअप मेंटीव हेल्थ प्राइवेट लिमिटेड ने तैयार की है. स्टार्टअप के सीईओ हर्ष अरोड़ा के अनुसार, इस तकनीक का मकसद इलाज को अस्पतालों तक सीमित न रखकर सीधे मरीज तक पहुंचाना है, खासकर गांवों में. कैसे करेगी काम यह डिवाइस दिमाग की गतिविधियों को लगातार मॉनिटर करती है. इसमें आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) का इस्तेमाल किया गया है, जिससे यह डेटा को समझकर संभावित खतरे का अंदाजा लगा सकती है. अगर मस्तिष्क में किसी तरह की असामान्य गतिविधि शुरू होती है, तो यह डिवाइस पहले ही अलर्ट दे देगी. इससे डॉक्टर समय रहते इलाज शुरू कर सकेंगे. यह डिवाइस मिर्गी के दौरे आने से पहले भी संकेत दे सकती है, जो मरीजों के लिए राहत भरी बात है. हर्ष अरोड़ा बताते हैं कि डिवाइस का लैब टेस्ट सफल रहा है और अब इसे क्लिनिकल ट्रायल के लिए भेजा गया है. आईआईटी कानपुर की लैब में इसकी टेस्टिंग अभी भी जारी है. पॉकेट में फिट इस डिवाइस की सबसे बड़ी खासियत इसका छोटा और पोर्टेबल होना है. यह पॉकेट साइज की है और पूरी तरह से चार्जेबल है, यानी मरीज इसे कहीं भी आसानी से साथ रख सकता है. हर्ष के मुताबिक, उनकी कंपनी ऐसी डिवाइसेस पर काम कर रही है जिन्हें पहनना और इस्तेमाल करना आसान हो. यही वजह है कि इसे खासतौर पर ग्रामीण इलाकों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है, जहां बड़े अस्पतालों की सुविधा आसानी से नहीं मिलती. पूरी तरह स्वदेशी इस डिवाइस को पूरी तरह भारत में तैयार किया गया है और इसकी कीमत भी विदेशी डिवाइसेस के मुकाबले काफी कम रखी जाएगी. हर्ष अरोड़ा का कहना है कि यह डिवाइस आधे से भी कम कीमत में उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसका फायदा उठा सकें. इस प्रोजेक्ट को आईआईटी कानपुर और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय से फंडिंग भी मिली है, जिससे इसे आगे और बेहतर बनाने का काम चल रहा है. उम्मीद की नई किरण ब्रेन से जुड़ी बीमारियां अक्सर अचानक और खतरनाक होती हैं, लेकिन यह डिवाइस समय से पहले चेतावनी देकर मरीजों की जिंदगी बचाने में बड़ी भूमिका निभा सकती है.खा सकर गांवों में रहने वाले मरीजों के लिए यह तकनीक किसी वरदान से कम नहीं. About the Author Priyanshu Gupta Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Kanpur Nagar,Uttar Pradesh First Published : April 10, 2026, 22:36 IST
Health Tips: औषधिय गुणों का खजाना है ये पेड़, जड़ से पत्ती तक सभी उपयोगी, जानें फायदे

Last Updated:April 10, 2026, 22:31 IST Neem ke Fayde: बिहार में छपरा जिले के एक अनोखा गांव है. यहां गांव में कई प्रकार के औषधीय पेड़ पौधे आसानी से मिल जाता है. जो आयुर्वेदिक नजरिया से कई मायने में लाभदायक माना जाता है. जिसका उपयोग करने से कई बीमारी से राहत मिलती है. ऐसे में आज हम आपको एक ऐसे पेड़ के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे औषधीय गुणों का भंडार माना जाता है. इसके जड़ से लेकर पत्ता तक को औषधि के रूप में उपयोग किया जाता है. इसे ग्रामीण क्षेत्र के लोग जो जानते हैं, उसका उपयोग बीमारी के शिकार होने पर करते हैं. जिस बीमारी के लिए लोग हजारों रुपए फूंक देते हैं. उस बीमारी को गांव में मिलने वाले इस मामूली पेड़ पौधे के जड़ी बूटी से खत्म किया जा सकता है. इसी तरह अमरूद के दतुवन से मुंह धोने से दांत का हिलना ठीक हो जाता है. जबकि जामुन के दतुवन से मुंह धोने पर शुगर लेवल सामान्य रहता है. यह पेड़ पौधा आपके घर के आसपास आसानी से मिल जाएगा. आज हम बात कर रहे हैं प्रत्येक गांव में मिलने वाले औषधिय गुणों के खजाने नाम से मशहूर नीम के पेड़ के बारे में. इसके जड़ से लेकर पत्ती तक को औषधी के रूप में उपयोग किया जाता है. नीम के जड़ के छिलका का काढ़ा बनाकर पीने से घाव फुंसी नहीं होता है. इसके साथ ही इसका दातुन करने से मुंह का बदबू खत्म हो जाता है. यही नहीं, दांत का हिलना और ब्लड आना भी खत्म हो जाता है. दांत में कीड़ा नहीं लगता है. इसके दातुन करने से दांत भी साफ रहता है. चांदी की तरह चमक दांत से आता है. दांत का लाइफ बढ़ जाता है. यही वजह है कि ग्रामीण क्षेत्र के लोग जो नीम का दातुवन करते हैं. वैसे लोगों का दांत बुढ़ापे के समय तक पूरी तरह से सुरक्षित रहता है. Add News18 as Preferred Source on Google छपरा के एक्सपर्ट वीरू कुमार ने बताया कि वह बचपन से ही नीम का दतुवन करते आ रहे हैं. आज तक उनके मुंह से कभी बदबू नहीं आया है. उनका दांत चांदी की तरह हमेशा चमकता रहता है. उनके दांत से कभी ब्लड नहीं आता है. नीम के दातुवन करने से पूरे दिन मुंह अच्छा रहता है. किसी प्रकार के घाव फुंसी नहीं होती है. किसी कारणवश अगर घाव हो भी जाता है तो बहुत जल्द ठीक हो जाता है. उन्होंने बताया कि गांव में नीम के पेड़ को औषधिय गुणों का खजाना कहा जाता है. जो लोग जानते हैं. वैसे व्यक्ति कई रोग में नीम के जड़ से लेकर पत्ती तक उपयोग करते हैं, जिससे जटिल से जटिल बीमारी ठीक हो जाती है. उनके ग्रामीण क्षेत्र में आसानी से नीम का पेड़ पौधा मिल जाता है. जिसकी वजह से गांव के लोग भरपूर इसका उपयोग करते हैं. यही वजह है कि कई बीमारी से सुरक्षित रहते हैं. First Published : April 10, 2026, 22:31 IST
क्या आप जानते हैं पीएम मोदी कुकिंग में भी हैं माहिर? बना लेते हैं ये हेल्दी चीजें, उनकी फिटनेस का है ये सीक्रेट

What can PM Modi cook: देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आप अक्सर टीवी पर भाषण देते सुने होंगे. उनके बोलने का अंदाज, शानदार व्यक्तित्व, हाव-भाव के दीवाने काफी लोग हैं. वे जब भी अपने मन की बात करते हैं, तो अपने बारे में, अपने पसंद-नापसंद के बारे में काफी चीजें देश की जनता के साथ साझा भी करते हैं. उन्हें आपने अक्सर ये भी कहते सुना होगा कि वो खाने के भी बेहद शौकीन हैं, लेकिन शायद आपको इस बात के बारे में पता नहीं होगा कि पीएम मोदी (PM Modi) को खाना पकाना भी पसंद है. वे एक अच्छे कुक भी हैं. यहां जानिए, आखिर प्रधानमंत्री मोदी कौन-कौन सी चीजें बना लेते हैं. कैसा खाना है पसंद?मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वे खानपान के मामले में काफी अनुशासित रूटीन फॉलो करते हैं. घर का खाना उन्हें पसंद है. वे सादा भोजन को प्रेफर करते हैं. उनकी डाइट में हेल्दी और पौष्टिक चीजें अधिक शामिल होती हैं. वे हर तरह की चीजें खाना पसंद करते हैं, जो सेहत के लिए पौष्टिक होती हैं. वे पहाड़ी मशरूम भी खाना पसंद करते हैं. हल्दी, दही उनके भोजन में जरूर शामिल होते हैं. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. फेवरेट है मोरिंगा पराठाजब भी उन्हें मौका मिलता है, वे कुछ ना कुछ कुक करते हैं. क्या आप जानते हैं कि नरेंद्र मोदी की फेवरेट चीज क्या है? दरअसल, उन्हें मोरिंगा का पराठा खाना बहुत पसंद है. एक इंटरव्यू में इसके बारे में बताते हुए उन्होंने कहा था कि जब भी उन्हें समय मिलता है तो वो थोड़ी बहुत कुकिंग में हाथ आजमाते हैं. कई बार मोरिंगा का पराठा भी बना चुके हैं. सप्ताह में 2 बार जरूर ड्रमस्टिक पराठा खाते हैं. इसके साथ ही उन्हें कई और चीजें खाना पसंद हैं जैसे मखाना, स्प्राउट्स, ढोकला, खांडवी, दालें, सब्जी, रोटी, सूप, खिचड़ी, इडली, डोसा, खाखरा, साबुदाना खिचड़ी भी खाना पसंद हैं. कुकिंग का भी रखते हैं शौक पीएम मोदी?उन्हें खाने के साथ ही कुक करना भी भाता है. कई बार वे खुद इस बात को कह चुके हैं कि जब वे आरएसएस प्रचाकर थे और पॉलिटिक्स में शामिल होने तक वे खुद से ही खाना पकाया करते थे. कई बार इंटरव्यू में उन्हें ये भी कहते सुना गया है कि अपने करियर के शुरुआती दिनों में सुबह की चाय वे खुद ही बना लिया करते थे. पोहा, खिचड़ी भी उनका फेवरेट व्यंजन है, जिसे वे काफी बनाया करते थे. आज भी उन्हें काम से फुर्सत मिलता है तो इन चीजों को वो बनाना पसंद करते हैं. उन्हें खिचड़ी बनाना इसलिए भी पसंद है, क्योंकि इसमें अधिक मेहनत नहीं लगती है और जल्दी बन जाती है. ये सुपाच्य भोजन है. आरएसएस के टाइम के समय वे ऑफिस में अपने सहकर्मियों, साथियों के लिए खिचड़ी, सिंपल भोजन बनाया करते थे. वे साबुदाना खिचड़ी की भी रेसिपी जानते हैं. एक प्रोग्राम में उन्होंने एक महिला को साबुदाना खिचड़ी की पूरी विधि बताई थी, जिसे देखकर हर कोई हैरान रह गया था.
भोला सिकरवार हत्याकांड का फरार आरोपी गिरफ्तार:घर आते वक्त पुलिस ने घेरकर किया अरेस्ट; अब तक 10 पकड़े गए, 3 अब भी फरार

ग्वालियर में भोला सिकरवार हत्याकांड के फरार एक आरोपी को हजीरा थाना पुलिस ने उस समय गिरफ्तार कर लिया, जब वह चोरी-छिपे अपने घर आ रहा था। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। इस मामले में पुलिस पहले ही 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि तीन आरोपी अब भी फरार हैं। हजीरा क्षेत्र में अवैध शराब कारोबार को लेकर इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया था। पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है। हजीरा थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह तोमर के अनुसार, 10 माह पहले हुई इस वारदात में फरार दिव्यांशु पुत्र सत्येंद्र सिंह भदौरिया के घर आने की सूचना मिली थी। इसके बाद पुलिस टीम ने घेराबंदी की और जैसे ही वह चौहान क्रेन के पास पहुंचा, उसे दबोच लिया। आरोपी कुछ समय तक समझ ही नहीं पाया कि क्या हुआ। उसे थाने लाकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश में थी, लेकिन वह हर बार बच निकलता था। इस बार सटीक सूचना के आधार पर गिरफ्तारी संभव हो सकी। गैंगवार में हिस्ट्रीशीटर भोला सिकरवार की हुई थी हत्या 2 जून 2025 को हजीरा के बिरला नगर इलाके में हिस्ट्रीशीटर भोला सिकरवार की उसके घर के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हमले में उसका एक साथी घायल हुआ था। जांच में सामने आया कि गैंगस्टर बंटी भदौरिया और भोला पहले दोस्त थे और साथ मिलकर अवैध शराब का कारोबार करते थे, लेकिन बाद में दोनों के बीच दुश्मनी हो गई। पिछले छह वर्षों में दोनों गुटों के बीच कई बार फायरिंग और हमले हो चुके हैं। अब तक 10 आरोपी गिरफ्तार सीएसपी नागेंद्र सिंह सिकरवार के मुताबिक, इस मामले में बंटी भदौरिया समेत 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। अब भी तीन आरोपी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है। पुलिस को उम्मीद है कि पकड़े गए आरोपी से पूछताछ में अन्य फरार आरोपियों का सुराग मिल जाएगा।
Swiggy Co-founder Resigns | Lakshmi Nandan Reddy Steps Down

नई दिल्ली28 मिनट पहले कॉपी लिंक फूड और ग्रोसरी डिलीवरी प्लेटफॉर्म स्विगी के को-फाउंडर लक्ष्मी नंदन रेड्डी ओबुल ने कंपनी के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया है। स्विगी ने शुक्रवार को रेगुलेटरी फाइलिंग में इसकी जानकारी दी। ओबुल कंपनी में होल-टाइम डायरेक्टर और हेड ऑफ इनोवेशन की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनका इस्तीफा आज (10 अप्रैल) से प्रभावी होगा। कंपनी ने बताया कि ओबुल अब अपने दूसरे प्रोफेशनल हितों पर ध्यान देना चाहते हैं, इसलिए उन्होंने यह फैसला लिया है। ओबुल के जाने के साथ ही स्विगी के बोर्ड में कई महत्वपूर्ण नियुक्तियों और नियमों में बदलाव को भी मंजूरी दी गई है। अल्वेस पिंटो को नॉमिनी डायरेक्टर नियुक्त किया स्विगी के बोर्ड ने रेनन डी कास्त्रो अल्वेस पिंटो को नॉमिनी डायरेक्टर के रूप में नियुक्त करने की मंजूरी दी है। वे प्रोसस वेंचर्स को लीड करेंगे। वे रोजर राबलाइस की जगह लेंगे, जो प्रोसस वेंचर्स में अपनी भूमिका बदलने के कारण स्विगी बोर्ड से हट रहे हैं। इसके अलावा स्विगी के को-फाउंडर और चीफ ग्रोथ ऑफिसर फणी किशन अडेपल्ली और ग्रुप CFO राहुल बोथरा को एडिशनल डायरेक्टर के रूप में नियुक्त किया गया है। इनकी नियुक्ति 1 जून 2026 से प्रभावी होगी। लक्ष्मी नंदन रेड्डी ओबुल। CEO बोले- नंदन का विजन कंपनी के लिए अहम रहा बोर्ड में हुए इन बदलावों पर स्विगी ग्रुप के CEO श्रीहर्ष मजेटी ने कहा, ‘नंदन स्विगी के सफर में एक विजनरी ताकत रहे हैं। बेंगलुरु के एक मोहल्ले से शुरू हुए स्विगी को देशव्यापी प्लेटफॉर्म बनाने में उनका योगदान अहम रहा है।’ फणी और राहुल की नियुक्ति पर मजेटी ने कहा, ‘ये दोनों स्विगी के शुरुआती दिनों से हमारे साथ हैं। कंपनी के सबसे कठिन और महत्वपूर्ण समय में इन्होंने बिजनेस को संभाला है। जैसे-जैसे हम ग्रोथ के अगले फेज में जा रहे हैं, उनकी समझ और अनुभव हमारे लॉन्ग-टर्म टारगेट को हासिल करने में मददगार साबित होंगे।’ आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन में बदलाव, CEO को मिले नए अधिकार स्विगी ने फाइलिंग में बताया कि बोर्ड ने आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन (AoA) में बदलाव को मंजूरी दी है। इसके तहत एक्सेल और सॉफ्टबैंक के नॉमिनेशन राइट्स (निदेशक नामित करने के अधिकार) से संबंधित नियमों को हटा दिया गया है। वहीं नियमों में एक बदलाव ऐसा भी किया गया है, जिससे CEO श्रीहर्ष मजेटी को खुद को और सीनियर मैनेजमेंट के किसी भी एक सदस्य को बोर्ड में नामित करने का अधिकार मिल गया है। हालांकि, यह अधिकार कुछ तय शर्तों के अधीन होगा। ये खबर भी पढ़ें… टाटा संस की लिस्टिंग के पक्ष में आए शापूरजी मिस्त्री: बोले- यह केवल रेगुलेटरी जरूरत नहीं, बल्कि ट्रांसपेरेंसी के लिए जरूरी कदम शापूरजी पलोनजी (SP) ग्रुप के चेयरमैन शापूरजी पलोनजी मिस्त्री ने एक बार फिर टाटा संस की लिस्टिंग की वकालत की है। शुक्रवार को जारी एक बयान में मिस्त्री ने कहा कि टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट करना जरूरी है। इससे न केवल ग्रुप में पारदर्शिता यानी ट्रांसपेरेंसी बढ़ेगी, बल्कि गवर्नेंस और जवाबदेही भी मजबूत होगी। बता दें कि टाटा संस में शापूरजी पलोनजी ग्रुप की करीब 18% हिस्सेदारी है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…








