बीजेपी बंगाल मेनिफेस्टो 2026: बंगाल के लिए बीजेपी का संकल्प पत्र- बेरोजगार युवाओं को हर महीने 3 हजार रुपये, 6 महीने में UCC, जानिए क्या-क्या बड़ा ऐलान

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने शुक्रवार (10 अप्रैल 2026) को बंगाल के लिए संकल्प पत्र जारी किया है, जिसे पार्टी ने प्रतिज्ञा का शपथ पत्र नाम दिया है। संकल्प पत्र जारी करते हुए अमित शाह ने कहा कि यह पश्चिम बंगाल की जनता के लिए विश्वास का दस्तावेज है और इसमें जनता से जुड़े अहम वादे शामिल हैं। अमित शाह ने कहा कि संकल्प पत्र लोगों को नया रास्ता बताएं। महिलाओं को डराने-धमकाने का प्रयास। इन लोगों को नई आशा और भरोसेमंद उम्मीदें। इस पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा विकसित भारत का रोड मैप और लोगों को आगमन से आगमन का रास्ता भी बताया गया है। बीजेपी ने संकल्प पत्र जारी करने के दौरान बंगाल की मुख्यमंत्री पर आरोप लगाते हुए कहा कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार डर के शहर में काम कर रही है. बीजेपी के संकल्प पत्र की बड़ी बातें गृह मंत्री अमित शाह ने संकल्प पत्र जारी करते हुए कहा कि बंगाल में बीजेपी की सरकार बनने पर केंद्र की सख्त रुख अपनाएगी और जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम होगा। इसके तहत घुसपैठियों की पहचान करना, उनका नाम दर्ज करना और उन्हें वापस भेजने की कार्रवाई की जाएगी। यानी एडिट, डिलीट और डिपोर्ट। अमित शाह ने कहा कि राज्य के सभी सरकारी पेंशनभोगियों के लिए स्कीम यानी डीए सुनिश्चित किया जाएगा। सरकार बनने के 45 दिन बाद सातवां आयोग वेतन लागू करेगा। अमित शाह ने कहा कि हमारी सरकार महिलाओं के बैंक खाते में हर महीने 3 हजार रुपये देगी, ताकि उन्हें आर्थिक सहारा मिल सके। पश्चिम बंगाल में आयुष्मान योजना लागू की जाएगी, जिससे लोगों को इलाज में राहत मिलेगी। सरकार समान बनने के छह महीने के भीतर राज्य में नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में काम करेगी। युवाओं को हर महीने 3 हजार रुपये का बजट दिया जाएगा, ताकि उन्हें रोजगार मिलने तक आर्थिक मदद मिल सके। बंगाल की सीमाओं को सील कर दिया गया है। 75 लाख महिलाओं को बनाया गया लक्ष्य। गर्भवती महिलाओं को 21 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी। राज्य के दस्तावेज़ में महिलाओं का सफर मुफ़्त में किया गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का बड़ा बयान पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पार्टी की ओर से बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता अब मन से बदलाव चाहती है और राज्य में बदलाव की भावना साफ दिखाई दे रही है। अमित शाह ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में बीजेपी ने एक मजबूत और जिम्मेदार कार्यकर्ता की भूमिका निभाई है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्वतंत्रता संग्राम का उदाहरण पेश किया गया है, जिससे लोगों का भरोसा मजबूत हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि भारत, जिसे पहले कई मामलों में पीछे माना जाता था, आज मोदी सरकार के नेतृत्व में दुनिया के सामने एक मजबूत और आगे बढ़ने वाला देश उभर रहा है। बंगाल की जनता के सामने-अमित शाह अमित शाह ने यह भी बताया कि बीजेपी ने सबसे पहले बंगाल की जनता के सामने एक राक्षस राकी थी, जिसमें पिछली 15 साल की सरकार को लेकर असंतोष की बात कही गई थी. अब पार्टी का संकल्प पत्र लोगों की आस्था का प्रतीक है और इस राज्य से बाहर निकलने का पूरा रोडमैप दिया गया है। कोलकाता के विकास के लिए बीजेपी का काम बीजेपी ने कोलकाता के विकास को लेकर एक बड़ी योजना पेश की है। पार्टी का लक्ष्य है कि कोलकाता को विश्व स्तर का शहर बनाया जाये। इसके लिए मेट्रो नेटवर्क का पूरा विस्तार किया जाएगा, पुलों को मजबूत करने का समयबद्धता कार्यक्रम और बंदरगाह, विशेष रूप से हल्दिया पोर्ट का बड़े स्तर पर विकास किया जाएगा। व्यापार को आसान बनाने के लिए नई फैक्ट्री लाई मेटल और सिंडिकेट सिस्टम को खत्म करने का वादा किया गया है। किसानों के लिए किसानों के लिए भी योजना बनाई गई है, ताकि आलू, धान और आम की खेती करने वाले किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो। चाय उद्योग को मजबूत बनाने और चाय बागानों को फिर से बेहतर बनाने के लिए और भी मजबूत कदम उठाएं। उत्तर बंगाल के विकास पर खास जोर दिया गया वहां आईआईटी, एम्स, आईआईएम और फैशन डिजाइन जैसे बड़े इंस्टीट्यूट की बात कही गई है। इसके अलावा वंदे मातरम सिद्धांत और वंदे मातरम मिशन के माध्यम से बंगाल की संस्कृति को बनाए रखने और बढ़ावा देने की योजना है। कानूनी व्यवस्था को लेकर बीजेपी का लक्ष्य कानूनी व्यवस्था को लेकर बीजेपी ने कहा है कि विश्वव्यापी सरकार के संपूर्ण पद पर श्वेत पत्र लाया जाएगा। इसमें तर्क, राजनीतिक संघर्ष और कानून व्यवस्था की स्थिति सामने रखी गई है। राजनीतिक हिंसा की जांच के लिए एक बैराज जज की प्रगति आयोग बनाया जाएगा। बीजेपी ने ममता बनर्जी सरकार पर आरोप लगाया कि उनके शासन में भय, भेदभाव और गरीबी को बढ़ावा मिला है. पार्टी ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश को मजबूती मिली है और उसी मॉडल को बंगाल को भी आगे बढ़ाया जाएगा. कुल मिलाकर, बीजेपी ने अपने संकल्प पत्र के माध्यम से विकास, सुरक्षा, रोजगार और बेहतर शासन का वादा किया है और एकजुट होकर काम किया है। ये भी पढ़ें: बारामती उपचुनाव के बीच पार्थ सुपरस्टार ने दिव्यांग पिता, प्रतियोगी माता और पीएम मोदी के साथ तस्वीर साझा की
DIY डिओडोरेंट: अंडरआर्म्स के दाग और कालेपन को दूर करती है ये सस्ती घरेलू दवा, सिर्फ 12 रुपए में खरीदें डिओडोरेंट, जानें आसान तरीका

10 अप्रैल 2026 को 13:35 IST पर अद्यतन किया गया DIY डिओडोरेंट: गर्मियों में बार-बार अंडरआर्म्स में प्लास्टिक से बने पदार्थ आते हैं। ऐसे में बाहर मिलने वाले डियोडोरेंट में केमिकल्स मिलते हैं, जो त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं साथ ही काफी महंगे भी होते हैं। लेकिन अब घर पर भी सिर्फ 12 रुपये में डियोडोरेंट बनवा सकते हैं। (टैग अनुवाद करने के लिए) DIY प्राकृतिक डिओडोरेंट (टी) घर का बना डिओडोरेंट (टी) अंडरआर्म गंध उपाय (टी) पसीने की गंध समाधान (टी) प्राकृतिक त्वचा देखभाल युक्तियाँ (टी) रसायन मुक्त डिओडोरेंट (टी) अंडरआर्म देखभाल (टी) सौंदर्य घरेलू उपचार (टी) एलोवेरा डिओडोरेंट (टी) फिटकरी डिओडोरेंट
Randeep Hooda Shares Daughter Nyomica First Photo With Wife Lin Lashram

सोनीपत8 मिनट पहले कॉपी लिंक एक्टर रणदीप ने पहली बार अपनी पत्नी लिन लैशराम और नवजात बेटी की एक साथ वाली तस्वीर साझा कर फैंस को इस खुशी में शामिल किया है। हरियाणा के रोहतक के रहने वाले बॉलीवुड एक्टर रणदीप हुड्डा एक बार फिर चर्चा में हैं। रणदीप एक महीने पहले ही पिता बने हैं। उनकी एक्ट्रेस पत्नी लिन लैशराम ने एक बेटी को जन्म दिया है। दोनों अपनी इस खुशी को अब बड़े ही भावुक और खास अंदाज में सोशल मीडिया पर साझा किया है। हुड्डा ने पहली बार पत्नी लिन लैशराम और नवजात बेटी की तस्वीर साझा कर फैंस को इस खुशी में शामिल किया है। रणदीप हुड्डा ने बेटी के नाम जिक्र करते हुए अपनी पोस्ट में लिखा- A new center to our world – NYOMICA HOODA – Divine Grace, Freedom and limitless like the sky” यानि “हमारी दुनिया का एक नया केंद्र- न्योमिका हुड्डा- ईश्वरीय कृपा, आजादी और आसमान की तरह असीम। इस पोस्ट को उनकी मां आशा हुड्डा ने लाइक के साथ हार्ट इमोजी लगाया है। 50 हजार से ज्यादा लोग इस पोस्ट को लाइक भी कर चुके है। सभी ने हुड्डा दंपती को ढेर सारी शुभकामनाएं दी हैं। बता दें कि रणदीप हुड्डा और लिन लैशराम ने 29 नवंबर 2023 को मणिपुर के इंफाल में पारंपरिक मैतेई रीति-रिवाज से शादी की थी। यह शादी रिवाजों के कारण भी काफी सुर्खियों में रही थी। 10 मार्च 2026 को बेटी जन्म हुआ। रणदीप हुड्डा ने अपनी पत्नी लिन लैशराम के साथ बेटी की पहली तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की। जिस पर उनकी मां आशा हुड्डा ने हार्ट इमोजी दी। पिता बनने की खुशी की पहले दी थी जानकारी रणदीप हुड्डा ने 10 मार्च को सोशल मीडिया के जरिए अपने पिता बनने की खुशखबरी साझा की थी। इस खबर के सामने आते ही उनके फैंस और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने उन्हें जमकर बधाइयां दी थीं। यह उनके जीवन का बेहद खास और भावुक पल था, जिसे उन्होंने अपने चाहने वालों के साथ साझा किया था। महीने बाद बेटी की पहली झलक साझा बेटी के जन्म के ठीक एक महीने बाद, 10 अप्रैल को रणदीप हुड्डा ने अपनी पत्नी लिन लैशराम के साथ बेटी की पहली तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की। इस तस्वीर में मां और बेटी के बीच का प्यार साफ झलक रहा है, जिसने फैंस का दिल जीत लिया। 10 मार्च,2026 को रणदीप हुड्डा ने बेटी के हाथ की तस्वीर इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर की थी। बेटी का नाम रखा ‘न्योमिका हुड्डा’, अर्थ भी बताया इस खास पोस्ट के जरिए रणदीप हुड्डा ने अपनी बेटी के नाम का भी खुलासा किया। उन्होंने अपनी बेटी का नाम ‘न्योमिका हुड्डा’ रखा है, जो बेहद यूनिक और खूबसूरत नाम माना जा रहा है। पोस्ट के साथ उन्होंने एक ऑडियो भी अटैच किया है, जिससे यह पल और भी खास बन गया। न्योमिका का अर्थ बताते हुए लिखा- ईश्वरीय कृपा, आजादी और आसमान की तरह असीम। सोशल मीडिया पर मिल रही ढेरों शुभकामनाएं जैसे ही यह पोस्ट सामने आई, फैंस और सेलेब्रिटीज ने कमेंट्स के जरिए रणदीप हुड्डा और उनके परिवार को बधाई देना शुरू कर दिया। हर कोई इस नन्ही परी के लिए दुआएं कर रहा है और अभिनेता के इस नए सफर के लिए शुभकामनाएं दे रहा है। एक्टर रणदीप हुड्डा के बारे में जानिए…. पिता सर्जन, मां सामाजिक कार्यकर्ता: रणदीप हुड्डा का जन्म 20 अगस्त 1976 को हरियाणा के रोहतक में एक हरियाणवी जाट परिवार में हुआ। उनके पिता डॉ. रणबीर सिंह हुड्डा एक मेडिकल सर्जन हैं, और माता आशा हुड्डा सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उनका बचपन अपनी दादी के साथ बीता है, क्योंकि उनके माता-पिता काम के सिलसिले में अक्सर बाहर रहते थे। उनकी बड़ी बहन अंजलि हुड्डा सांगवान डॉक्टर हैं। छोटे भाई संदीप हुड्डा सिंगापुर में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। तैराकी, घुड़सवारी में मेडल जीत चुके: रणदीप ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सोनीपत के राई स्थित मोतीलाल नेहरू स्कूल ऑफ स्पोर्ट्स (MNSS) से पूरी की। यहां उन्होंने तैराकी और घुड़सवारी में राष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीते। स्कूल में उन्होंने थिएटर में भी रुचि दिखाई और कई नाटकों में भाग लिया, जिनमें से एक का निर्देशन भी किया। बाद में उनका तबादला दिल्ली पब्लिक स्कूल, आरके पुरम में हो गया। ऑस्ट्रेलिया में टैक्सी ड्राइवर बने: 1995 में हुड्डा ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न चले गए, जहां उन्होंने मार्केटिंग में ग्रेजुएशन और व्यवसाय प्रबंधन एवं मानव संसाधन प्रबंधन में मास्टर डिग्री प्राप्त की। वहां रहते हुए उन्होंने चीनी रेस्टोरेंट, कार वॉश, वेटर और टैक्सी ड्राइवर जैसे काम किए। 2000 में भारत लौटने के बाद उन्होंने एक एयरलाइन के मार्केटिंग विभाग में काम किया, और साथ ही दिल्ली में मॉडलिंग और थिएटर में भी हाथ आजमाया। 2023 में मणिपुर की एक्ट्रेस से शादी की: ‘टू टीच हिज ओन’ नाटक की रिहर्सल के दौरान निर्देशक मीरा नायर की नजर उन पर पड़ी और उन्हें फिल्म में काम का प्रस्ताव मिला। रणदीप हुड्डा ने नवंबर 2023 में मणिपुरी एक्ट्रेस और मॉडल लिन लैशराम से शादी की। मां ने पोस्ट किया-हमारे घर आई नन्हीं राजकुमारीः रणदीप हुड़्डा की माता आशा हुड्डा ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से पोस्ट शेयर किया है। जिसमें लिखा- भगवान की कृपा से हमारे घर एक नन्हीं राजकुमारी का आगमन हुआ है और आज हम दादा-दादी बन गए हैं। भगवान उसे जीवन में सुख, स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद दें। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
रिटायर्ड फौजी ने खुद को मारी गोली मौत:परिजन बोले-बंदूक साफ करते समय हुआ हादसा, स्पॉट से राइफल और शराब मिली

ग्वालिय में एक रिटायर्ड फौजी की संदिग्ध हालत में गोली लगने से मौत हो गई है। परिजन का कहना है की बंदूक साफ करते में गोली लगी है जबकि पुलिस का कहना है कि यह खुदकुशी है। घटनास्थल से बंदूक और एक शराब का क्वार्टर मिला है। आसपास बंदूक साफ करने का कोई भी सामान नहीं मिला है। घटना गुरुवार रात 11:00 की है। पड़ोसी घायल फौजी को लेकर पहले बिरला हॉस्पिटल पहुंचे फिर ज्यारोग्य अस्पताल। यहां डॉक्टर ने फौजी को मृत घोषित कर दिया। रात 1 बजे पुलिस को सूचना दी गई है। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। शहर के महाराजपुरा थाना क्षेत्र के आदित्यपुरम निवासी 58 वर्षीय रामस्वरूप भदौरिया आर्मी से रिटायर्ड जवान हैं। वह भिंड के अटेर स्थित मोरा गांव के रहने वाले हैं। कुछ दिन पहले उनका बेटा और अन्य परिजन गांव में खेती का काम देखने के लिए गए थे और घर पर वह अकेले थे। रात 11 बजे के लगभग उनके घर से गोली चलने की आवाज आई। गोली की आवाज सुनते ही पड़ोसी उनके घर में पहुंचे तो रामस्वरूप घायल हालत में कमरे में पड़े हुए थे। पास ही उनकी लाइसेंसी राइफल पड़ी हुई थी। साथ ही एक शराब का क्वाटर भी पड़ा था। मामले की सूचना पड़ोसियों ने उनके बेटे विजय को दी। मामले का पता चलते ही विजय ने पड़ोसियों से पिता को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाने को बोला और पास ही रहने वाले अपने बहनोई रायसिंह को बताया। मामले का पता चलते ही वह उन्हें लेकर अस्पताल पहुंचे। जहां पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सीने में लगी है गोली मामले का पता चलते ही महाराजपुरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और रिटायर्ड फौजी का शव निगरानी में लेकर पीएम हाउस पहुंचाकर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस जांच में पता चला है कि गोली उनके सीने में लगी है। राइफल साफ करते चली गोली या सुसाइड पुलिस को प्रारंभिक पूछताछ में पता चला है कि गोली रामस्वरूप के सीने में लगी है और उनके बगल में ही उनकी राइफल पड़ी हुई थी। अब पुलिस पता लगा रही है कि गोली राइफल साफ करते समय असावधानी से चली या फिर उन्होंने सुसाइड किया है। पुलिस का कहना इस मामले में टीआई महारजपुरा यशवंत गोयल ने बताया कि एक रिटायर्ड फौजी की गोली लगने से मौत हुई है। अभी मामला सुसाइड का लग रहा है। परिजन बन्दूक साफ करते समय गोली चलने से हादसे कि बात कह रहे हैं।
साकिब सलीम बोले- रिजेक्शन एक्टर के डीएनए में है:डेब्यू फिल्म के लिए 7-8 महीने ऑडिशन दिए, पहला एड नहीं मिलता तो फैमिली बिजनेस संभालता

वेब सीरीज ‘कप्तान’ को लेकर साकिब सलीम चर्चा में हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने किरदार, तैयारी और एक्टिंग प्रोसेस साझा किया। वे प्रोजेक्ट चुनने से पहले स्क्रिप्ट और डायरेक्टर का विजन समझते हैं। ‘कप्तान’ में किरदार को रियल बनाने के लिए फिजिकल ट्रांसफॉर्मेशन के साथ ह्यूमर और इंसानी कमजोरियां जोड़ीं। उन्होंने फिल्म 83 के 6 महीने के क्रिकेट ट्रेनिंग एक्सपीरियंस को करियर का खास फेज बताया। साथ ही शुरुआती दिनों, यश राज फिल्म्स के साथ डेब्यू और ऑडिशन स्ट्रगल पर बात की। उन्होंने कहा कि आज भी वे सीखने और खुद को बेहतर बनाने में विश्वास रखते हैं। पेश हैं साकिब सलीम से बातचीत के प्रमुख अंश: सवाल: ‘कप्तान’ को लेकर रोल चुनने का प्रोसेस क्या है? जवाब: मैं पहले स्क्रिप्ट पढ़ता हूं। कहानी समझ आए और मज़ा आए, तभी करता हूं। फिर डायरेक्टर के विज़न के अनुसार खुद को ढालता हूं। मेरा मानना है कि हर फिल्म और शो का प्रोसेस अलग होता है, क्योंकि हर डायरेक्टर की सोच अलग होती है। सवाल: ‘कप्तान’ में आपके किरदार ‘समर’ को लेकर आपने क्या इनपुट दिए? जवाब: मेरा एक ही फीडबैक था कि किरदार सिर्फ सीरियस या हीरोइक ना लगे। उसमें ह्यूमर और इंसानी कमजोरियां भी होनी चाहिए। हमने कोशिश की कि वह एक रियल इंसान लगे, जो गलतियां भी करता है और उनसे सीखता भी है। सवाल: इस रोल के लिए कितनी तैयारी की? जवाब: काफी मेहनत की। करीब 7-8 किलो वजन कम किया। किरदार एनकाउंटर स्पेशलिस्ट का है, जो हमेशा फील्ड पर रहता है, इसलिए फिटनेस और एजिलिटी जरूरी थी। सवाल: आपने कहा कि हर प्रोजेक्ट का प्रोसेस अलग होता है, क्या आप कोई उदाहरण देना चाहेंगे? जवाब: कबीर खान की फिल्म ‘83’ का प्रोसेस अलग था। उन्होंने 6 महीने तक सिर्फ क्रिकेट खेलने को कहा। एक्टिंग बाद में, पहले टीम बनानी थी। यह मेरे करियर का यूनिक अनुभव था। सवाल: ‘83’ में क्या चुनौती रही? जवाब: सबसे बड़ी चुनौती थी कि पुरानी स्टाइल भूलनी पड़ी। मोहिंदर अमरनाथ की तरह खेलना, उनका चलना और बैटिंग स्टाइल सीखना था। जो चीज पहले से आती है, उसे भूलकर नई चीज सीखना मुश्किल होता है। सवाल: आपका एक्टिंग करियर कैसे शुरू हुआ? जवाब: मेरी शुरुआत दिलचस्प रही। मैं एक दोस्त के साथ ऑडिशन देने गया था, उसका नहीं हुआ और मेरा हो गया। पहला काम एक ऐड में मिला, जिसके लिए 25 हजार रुपए मिले। मैं टाइमपास के लिए गया था। शाम को फोन आया कि आप सिलेक्ट हो गए हैं, 25 हजार का बजट है। मैं घबरा गया और बोला कि मेरे पास 25 हजार नहीं हैं देने के लिए, लगा मुझे पैसे देने पड़ेंगे। फिर उन्होंने हंसकर कहा कि आपको पैसे मिलेंगे। अगर पहला ऐड नहीं मिलता, तो मैं दिल्ली जाकर फैमिली बिजनेस संभालता। मैं पापा से कहकर आया था कि एक साल खुद को एक्सप्लोर करना चाहता हूं। थोड़ा झूठ बोला, क्योंकि सीधे बोलता तो शायद मानते नहीं। उसी साल फिल्म मिल गई, फिर उन्हें मनाने की जरूरत नहीं पड़ी। सवाल: डेब्यू फिल्म कैसे मिली? जवाब: लंबा ऑडिशन प्रोसेस चला। यश राज फिल्म्स की कास्टिंग डायरेक्टर शानू शर्मा ने 7-8 महीने तक अलग-अलग सीन करवाए। कभी गाना, कभी एक्टिंग। ऐसा लगा जैसे वर्कशॉप चल रही हो। फिर यश राज फिल्म्स की ‘मुझसे फ्रेंडशिप करोगे’ मिली। मैं खुद को लकी मानता हूं कि शुरुआत इतनी बड़ी कंपनी के साथ हुई। सवाल: करियर का सबसे बड़ा चैलेंज क्या रहा? जवाब: मैं हंसते-बोलते रहता हूं, इसलिए कई बार लोग सीरियसली नहीं लेते। उन्हें मेरी मेहनत नहीं दिखती। अब सीख लिया है कि लोगों का परसेप्शन बदलने की कोशिश नहीं करनी, बस काम ईमानदारी से करना है। सवाल: इतने सालों के करियर में इंस्पिरेशन कहां से मिलती है? जवाब: मैं हर किसी से सीखता हूं। मैंने सलमान खान, रणवीर सिंह, वरुण धवन, तापसी पन्नू और रानी मुखर्जी जैसे कलाकारों के साथ काम किया है। सभी से कुछ न कुछ सीखने को मिलता है। सवाल: क्या अब भी आप ऑडिशन देने के लिए तैयार रहते हैं? जवाब: बिल्कुल। अगर मुझे किसी फिल्ममेकर के साथ काम करना है, तो मैं खुद जाकर ऑडिशन देने को तैयार हूं। रिजेक्शन से डरना नहीं चाहिए, यह एक्टर के काम का हिस्सा है। सवाल: लेकिन कई एक्टर्स रिजेक्शन से डरते हैं, आप इसे कैसे देखते हैं? जवाब: देखिए, रिजेक्शन एक्टर के डीएनए में होता है। हमें इसे पर्सनली नहीं लेना चाहिए। कई बार रोल आपके लिए नहीं होता, इसका मतलब ये नहीं कि आप अच्छे एक्टर नहीं हैं। मैं तो आज भी ऑडिशन देने में शर्माता नहीं हूं, क्योंकि यही हमारे काम का हिस्सा है। सवाल: बढ़ती एक्सपेक्टेशंस और प्रेशर को कैसे हैंडल करते हैं? जवाब: मैं अपना बेस्ट देने पर ध्यान देता हूं। लोगों की सोच कंट्रोल नहीं कर सकता, लेकिन अपनी मेहनत और ईमानदारी को कंट्रोल कर सकता हूं। आजकल कई बार गलत जानकारी भी फैलती है, इसलिए उससे बचना जरूरी है। सवाल: आज के समय में सोशल मीडिया और इंफॉर्मेशन ओवरलोड को कैसे देखते हैं? जवाब: आज बहुत ज्यादा इंफॉर्मेशन है, लेकिन सही से ज्यादा गलत फैल रही है। सबको सबसे पहले खबर देनी है, इसलिए कई बार सही जानकारी नहीं आती। मैं कोशिश करता हूं कि इस शोर से थोड़ा दूर रहूं। सवाल: अगर मौका मिले तो किसकी बायोपिक करना चाहेंगे? जवाब: मैं विराट कोहली की बायोपिक करना चाहूंगा। मुझे क्रिकेट बहुत पसंद है और लोग भी कहते हैं कि मैं यह रोल कर सकता हूं। सवाल: आपको किस तरह की किताबें पढ़ना पसंद है? जवाब: मुझे स्पोर्ट्स पर्सनैलिटी की किताबें पढ़ना पसंद है। जैसे युवराज सिंह, शेन वॉर्न, क्रिस गेल और आंद्रे अगासी की किताबें पढ़ी हैं। मुझे लोगों के अनुभव जानना अच्छा लगता है। सवाल: आपके लिए सबसे बड़ी सफलता क्या है? जवाब: मेरे लिए सबसे बड़ी सफलता है कि मैं 15 साल से इंडस्ट्री में हूं। मेरे माता-पिता और बहन मेरे साथ हैं, यही सबसे बड़ी बात है। बाकी जो मिल रहा है, वह बोनस है।
साकिब सलीम बोले- रिजेक्शन एक्टर के डीएनए में है:डेब्यू फिल्म के लिए 7-8 महीने ऑडिशन दिए, पहला एड नहीं मिलता तो फैमिली बिजनेस संभालता

वेब सीरीज ‘कप्तान’ को लेकर साकिब सलीम चर्चा में हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने किरदार, तैयारी और एक्टिंग प्रोसेस साझा किया। वे प्रोजेक्ट चुनने से पहले स्क्रिप्ट और डायरेक्टर का विजन समझते हैं। ‘कप्तान’ में किरदार को रियल बनाने के लिए फिजिकल ट्रांसफॉर्मेशन के साथ ह्यूमर और इंसानी कमजोरियां जोड़ीं। उन्होंने फिल्म ‘83’ के 6 महीने के क्रिकेट ट्रेनिंग एक्सपीरियंस को करियर का खास फेज बताया। साथ ही शुरुआती दिनों, यश राज फिल्म्स के साथ डेब्यू और ऑडिशन स्ट्रगल पर बात की। उन्होंने कहा कि आज भी वे सीखने और खुद को बेहतर बनाने में विश्वास रखते हैं। पेश हैं साकिब सलीम से बातचीत के प्रमुख अंश: सवाल: ‘कप्तान’ को लेकर रोल चुनने का प्रोसेस क्या है? जवाब: मैं पहले स्क्रिप्ट पढ़ता हूं। कहानी समझ आए और मजा आए, तभी करता हूं। फिर डायरेक्टर के विजन के अनुसार खुद को ढालता हूं। मेरा मानना है कि हर फिल्म और शो का प्रोसेस अलग होता है, क्योंकि हर डायरेक्टर की सोच अलग होती है। सवाल: ‘कप्तान’ में आपके किरदार ‘समर’ को लेकर आपने क्या इनपुट दिए? जवाब: मेरा एक ही फीडबैक था कि किरदार सिर्फ सीरियस या हीरोइक ना लगे। उसमें ह्यूमर और इंसानी कमजोरियां भी होनी चाहिए। हमने कोशिश की कि वह एक रियल इंसान लगे, जो गलतियां भी करता है और उनसे सीखता भी है। सवाल: इस रोल के लिए कितनी तैयारी की? जवाब: काफी मेहनत की। करीब 7-8 किलो वजन कम किया। किरदार एनकाउंटर स्पेशलिस्ट का है, जो हमेशा फील्ड पर रहता है, इसलिए फिटनेस और एजिलिटी जरूरी थी। सवाल: आपने कहा कि हर प्रोजेक्ट का प्रोसेस अलग होता है, क्या आप कोई उदाहरण देना चाहेंगे? जवाब: कबीर खान की फिल्म ‘83’ का प्रोसेस अलग था। उन्होंने 6 महीने तक सिर्फ क्रिकेट खेलने को कहा। एक्टिंग बाद में, पहले टीम बनानी थी। यह मेरे करियर का यूनिक अनुभव था। सवाल: ‘83’ में क्या चुनौती रही? जवाब: सबसे बड़ी चुनौती थी कि पुरानी स्टाइल भूलनी पड़ी। मोहिंदर अमरनाथ की तरह खेलना, उनका चलना और बैटिंग स्टाइल सीखना था। जो चीज पहले से आती है, उसे भूलकर नई चीज सीखना मुश्किल होता है। सवाल: आपका एक्टिंग करियर कैसे शुरू हुआ? जवाब: मेरी शुरुआत दिलचस्प रही। मैं एक दोस्त के साथ ऑडिशन देने गया था, उसका नहीं हुआ और मेरा हो गया। पहला काम एक ऐड में मिला, जिसके लिए 25 हजार रुपए मिले। मैं टाइमपास के लिए गया था। शाम को फोन आया कि आप सिलेक्ट हो गए हैं, 25 हजार का बजट है। मैं घबरा गया और बोला कि मेरे पास 25 हजार नहीं हैं देने के लिए, लगा मुझे पैसे देने पड़ेंगे। फिर उन्होंने हंसकर कहा कि आपको पैसे मिलेंगे। अगर पहला ऐड नहीं मिलता, तो मैं दिल्ली जाकर फैमिली बिजनेस संभालता। मैं पापा से कहकर आया था कि एक साल खुद को एक्सप्लोर करना चाहता हूं। थोड़ा झूठ बोला, क्योंकि सीधे बोलता तो शायद मानते नहीं। उसी साल फिल्म मिल गई, फिर उन्हें मनाने की जरूरत नहीं पड़ी। सवाल: डेब्यू फिल्म कैसे मिली? जवाब: लंबा ऑडिशन प्रोसेस चला। यश राज फिल्म्स की कास्टिंग डायरेक्टर शानू शर्मा ने 7-8 महीने तक अलग-अलग सीन करवाए। कभी गाना, कभी एक्टिंग। ऐसा लगा जैसे वर्कशॉप चल रही हो। फिर यश राज फिल्म्स की ‘मुझसे फ्रेंडशिप करोगे’ मिली। मैं खुद को लकी मानता हूं कि शुरुआत इतनी बड़ी कंपनी के साथ हुई। सवाल: करियर का सबसे बड़ा चैलेंज क्या रहा? जवाब: मैं हंसते-बोलते रहता हूं, इसलिए कई बार लोग सीरियसली नहीं लेते। उन्हें मेरी मेहनत नहीं दिखती। अब सीख लिया है कि लोगों का परसेप्शन बदलने की कोशिश नहीं करनी, बस काम ईमानदारी से करना है। सवाल: इतने सालों के करियर में इंस्पिरेशन कहां से मिलती है? जवाब: मैं हर किसी से सीखता हूं। मैंने सलमान खान, रणवीर सिंह, वरुण धवन, तापसी पन्नू और रानी मुखर्जी जैसे कलाकारों के साथ काम किया है। सभी से कुछ न कुछ सीखने को मिलता है। सवाल: क्या अब भी आप ऑडिशन देने के लिए तैयार रहते हैं? जवाब: बिल्कुल। अगर मुझे किसी फिल्ममेकर के साथ काम करना है, तो मैं खुद जाकर ऑडिशन देने को तैयार हूं। रिजेक्शन से डरना नहीं चाहिए, यह एक्टर के काम का हिस्सा है। सवाल: लेकिन कई एक्टर्स रिजेक्शन से डरते हैं, आप इसे कैसे देखते हैं? जवाब: देखिए, रिजेक्शन एक्टर के डीएनए में होता है। हमें इसे पर्सनली नहीं लेना चाहिए। कई बार रोल आपके लिए नहीं होता, इसका मतलब ये नहीं कि आप अच्छे एक्टर नहीं हैं। मैं तो आज भी ऑडिशन देने में शर्माता नहीं हूं, क्योंकि यही हमारे काम का हिस्सा है। सवाल: बढ़ती एक्सपेक्टेशंस और प्रेशर को कैसे हैंडल करते हैं? जवाब: मैं अपना बेस्ट देने पर ध्यान देता हूं। लोगों की सोच कंट्रोल नहीं कर सकता, लेकिन अपनी मेहनत और ईमानदारी को कंट्रोल कर सकता हूं। आजकल कई बार गलत जानकारी भी फैलती है, इसलिए उससे बचना जरूरी है। सवाल: आज के समय में सोशल मीडिया और इंफॉर्मेशन ओवरलोड को कैसे देखते हैं? जवाब: आज बहुत ज्यादा इंफॉर्मेशन है, लेकिन सही से ज्यादा गलत फैल रही है। सबको सबसे पहले खबर देनी है, इसलिए कई बार सही जानकारी नहीं आती। मैं कोशिश करता हूं कि इस शोर से थोड़ा दूर रहूं। सवाल: अगर मौका मिले तो किसकी बायोपिक करना चाहेंगे? जवाब: मैं विराट कोहली की बायोपिक करना चाहूंगा। मुझे क्रिकेट बहुत पसंद है और लोग भी कहते हैं कि मैं यह रोल कर सकता हूं। सवाल: आपको किस तरह की किताबें पढ़ना पसंद है? जवाब: मुझे स्पोर्ट्स पर्सनैलिटी की किताबें पढ़ना पसंद है। जैसे युवराज सिंह, शेन वॉर्न, क्रिस गेल और आंद्रे अगासी की किताबें पढ़ी हैं। मुझे लोगों के अनुभव जानना अच्छा लगता है। सवाल: आपके लिए सबसे बड़ी सफलता क्या है? जवाब: मेरे लिए सबसे बड़ी सफलता है कि मैं 15 साल से इंडस्ट्री में हूं। मेरे माता-पिता और बहन मेरे साथ हैं, यही सबसे बड़ी बात है। बाकी जो मिल रहा है, वह बोनस है।
शिवपुरी में बिना ड्राइवर दौड़ा ट्रैक्टर:पेड़ से टकराकर रुका; जगतपुर तिराहा पर बड़ा हादसा टला

शिवपुरी जिले के कोलारस कस्बे के जगतपुर तिराहा पर गुरुवार देर शाम एक बड़ा हादसा टल गया। सड़क किनारे खड़े एक ट्रैक्टर-ट्रॉली में पीछे से दूसरी ट्रॉली ने टक्कर मार दी, जिससे आगे खड़ा ट्रैक्टर बिना ड्राइवर के ही स्टार्ट होकर अनियंत्रित दौड़ पड़ा। गनीमत रही कि इस दौरान कोई राहगीर या वाहन उसकी चपेट में नहीं आया, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। जानकारी के अनुसार, कुमरौआ गांव निवासी किसान राजेंद्र धाकड़ अपनी फसल बेचकर कोलारस अनाज मंडी से वापस गांव लौट रहे थे। उन्होंने जगतपुर तिराहा पर अपना ट्रैक्टर-ट्रॉली सड़क किनारे खड़ा कर दिया और पास की दुकान पर सामान लेने चले गए। इसी दौरान, खोंकर गांव निवासी उत्तम चंदेल अपने ट्रैक्टर-ट्रॉली से वहां पहुंचे और पीछे से खड़े ट्रैक्टर में टक्कर मार दी। बताया गया है कि राजेंद्र का ट्रैक्टर गियर में खड़ा था, जिसके कारण टक्कर लगते ही वह स्टार्ट होकर आगे बढ़ गया। बिना ड्राइवर के ही ट्रैक्टर कुछ दूरी तक सड़क पर चलता रहा और फिर सड़क से उतरकर एक पेड़ से टकराकर रुक गया। घटना के वक्त आसपास कोई राहगीर या वाहन मौजूद नहीं था, जिससे एक बड़ी दुर्घटना टल गई।
Symptoms of Cataracts Do Not Ignore Blurred Vision Cataract Symptoms Can Be Dangerous | धुंधली नजर को ना करें नजरअंदाज, खतरनाक हो सकते हैं ये लक्षण, क

Last Updated:April 10, 2026, 12:46 IST Symptoms of Cataracts: धुंधली नजर को अक्सर लोग हल्के में ले लेते हैं और इसे थकान, मोबाइल या कंप्यूटर पर ज्यादा समय बिताने की सामान्य परेशानी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन आंखों के विशेषज्ञों के मुताबिक लगातार धुंधला दिखना या बार-बार नजर का धुंधला होना शरीर में किसी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है. Symptoms of Cataracts: अगर आपको या आपके घर के बुजुर्ग को धुंधला दिखाई देने लगा है या बार-बार चश्मे का नंबर बदलना पड़ रहा है तो इसे नजरअंदाज करने की भूल ना करें. धुंधला-धुंधला दिखना यह मोतियाबिंद का शुरुआती संकेत हो सकता है. ऐसे में एक्सपर्ट बचाव का तरीका बताते हैं, जिसे फॉलो करने से राहत मिल सकती है. नेशनल हेल्थ मिशन के अनुसार, मोतियाबिंद आजकल आम समस्या बन गई है, खासकर उम्र बढ़ने के साथ. समय पर इसका पता लगाकर इलाज करवाने से दृष्टि पूरी तरह बचाई जा सकती है. मोतियाबिंद का ऑपरेशन बहुत सुरक्षितमोतियाबिंद में आंख की लेंस धुंधली हो जाती है, जिससे साफ दिखना मुश्किल हो जाता है. यह समस्या धीरे-धीरे बढ़ती है और अगर अनदेखी की गई तो दृष्टि और कमजोर हो सकती है. राहत भरी बात यह है कि मोतियाबिंद का ऑपरेशन आजकल बहुत सुरक्षित, आसान और प्रभावी हो गया है. ज्यादातर मामलों में ऑपरेशन के बाद मरीज को अच्छी रोशनी और साफ नजर वापस मिल जाती है. मोतियाबिंद के मुख्य लक्षणमोतियाबिंद के मुख्य लक्षणों पर नजर डालें तो धुंधला या धुएं जैसा दिखना, रोशनी के चारों ओर अलग से चमक नजर आना, रात में ड्राइविंग या देखने में परेशानी, पढ़ने या छोटे अक्षर देखने में कठिनाई, रंग फीके या पीले पड़कर दिखना, और बार-बार चश्मे का नंबर बदलना पड़ना शामिल है. ये लक्षण खासकर 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में आम हैं, लेकिन कभी-कभी युवाओं में भी मोतियाबिंद हो सकता है. अगर बुजुर्गों की नजर धीरे-धीरे कमजोर हो रही है तो तुरंत आंखों के डॉक्टर से जांच करवाएं. मोतियाबिंद का इलाजडॉक्टर्स का कहना है कि मोतियाबिंद का ऑपरेशन अब छोटी सी प्रक्रिया है. इसमें आंख की धुंधली लेंस निकालकर उसके जगह कृत्रिम लेंस लगाया जाता है. ऑपरेशन आमतौर पर 15-20 मिनट में पूरा हो जाता है और मरीज उसी दिन घर भी जा सकता है. इसमें दर्द बहुत कम होता है और रिकवरी भी तेज होती है. समय पर इलाज न करवाने से मोतियाबिंद बढ़ सकता है और आंख की रोशनी पूरी तरह जा सकती है, इसलिए धुंधली नजर को कभी भी हल्के में नहीं लेनी चाहिए. 50 वर्ष के बाद जरूर करवाएं चेकअपएक्सपर्ट के अनुसार, नियमित आंखों की जांच करवाना सबसे अच्छा उपाय है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का सुझाव है कि 50 वर्ष की उम्र के बाद हर साल एक बार आंखों की जांच जरूर कराएं. स्वस्थ आहार, हरी सब्जियां, फल और धूप से बचाव भी मोतियाबिंद से बचाव में मदद कर सकता है. About the Author Parag Sharma पराग शर्मा एक अनुभवी धर्म एवं ज्योतिष पत्रकार हैं, जिन्हें भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेदनी ज्योतिष, वैदिक शास्त्रों और ज्योतिषीय विज्ञान पर गहन अध्ययन और लेखन का 12+ वर्षों का व्यावहारिक अनुभव ह…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें First Published : April 10, 2026, 12:46 IST
बसी रोटी चीला रेसिपी: रात की बिकती है बासी रोटी से खास टेस्टी चीला, मिनटों में तैयार होगा क्रिस्पी ब्रेकफास्ट, नोट करें रेसिपी

10 अप्रैल 2026 को 12:42 IST पर अपडेट किया गया बस्सी रोटी चीला रेसिपी: आपके घर में रात के खाने से क्या बनती है रोटी? तो अब अंतिम टेस्टी चीला छोड़ कर जा सकते हैं। बसी रोटी से बना क्रिस्पी चीला ब्रेकफ़ास्ट को बिल्कुल मज़ेदार बनाइये।
Anant Ambani birthday celebration in jamnagar

जामनगर9 मिनट पहले कॉपी लिंक जामनगर में आसपास के सभी गांवों में भोज दिया गया। कारोबारी मुकेश अंबानी के छोटे बेटे अनंत अबानी आज अपना 31वां जन्मदिन मना रहे हैं। इस मौके पर गुजरात के जामनगर में भव्य सेलिब्रेशन हो रहा है, जिसमें शामिल होने के लिए बॉलीवुड समेत उद्योग जगत की कई हस्तियां जामनगर पहुंच चुकी हैं। अनंत के बर्थडे को सिर्फ जामनगर में ही नहीं बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों में भी अलग-अलग तरीके से सेलिब्रेट किया जा रहा है। अनंत को सोशल मीडिया के जरिए लोग बधाइयां दे रहे हैं। बुधवार रात अनंत का बर्थडे बैश सूफी कॉन्सर्ट के साथ शुरू किया गया था। अनंत ने अपने 31वें जन्मदिन पर जामनगर में गो सेवा की। एक लाख से ज्यादा गायों को छप्पन भोग दिया गया। अनंत अंबानी ने देश के कई बड़े मंदिरों को करोड़ों का दान दिया है। वहीं, जामनगर में आसपास के सभी ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए एक भोज का आयोजन किया गया था। हजारों लोगों इसमें शामिल हुए। भोज में आईं सभी महिलाओं को साड़ियां गिफ्ट में दी गईं। तस्वीरों में अनंत अंबानी का बर्थडे सेलीब्रेशन… भोज में शामिल हुईं सभी महिलाओं को साड़ियां गिफ्ट की गईं। गुजरात के गिरनार की पारसधाम में गायों को छप्पन भोग दिया गया। जामनगर के आसपास के गांवों में बच्चों को किताबें और स्कूल बैग बांटे गए। मुंबई के कई इलाकों में राशन बांटा गया। मुंबई के बांद्रा-वर्ली सी लिंक पर लेजर लाइट से अनंत को शुभकामनाएं दी गईं। पत्नी राधिका मर्चेंट ने किस कर अनंत अंबानी को बर्थडे विश किया। रणवीर सिंह गुरुवार को ही जामनगर पहुंच गए थे। शाहरुख खान फैमिली के साथ जामगर पहुंचे। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ‘ओरी’ जामनगर पहुंचे। साउथ के सुपर स्टार राम चरण गुरुवार देर शाम जामनगर पहुंचे। बॉलीवुड स्टार रितेश देशमुख फैमिली के साथ जामनगर पहुंचे। ——————– अनंत अंबानी के बर्थडे सेलिब्रेशन से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… अनंत अंबानी को सेलेब्स ने दी जन्मदिन की शुभकामनाएं:सलमान ने बताया प्रेरणादायक इंसान, शाहरुख बोले- अच्छे काम करते रहो बिजनेसमैन मुकेश अंबानी के छोटे बेटे अनंत अंबानी का आज जन्मदिन है। इसका सेलिब्रेशन गुजरात के जामनगर में हो रहा है। इसमें शामिल होने कई बॉलीवुड सितारे पहुंचे। सलमान खान ने अनंत अंबानी के साथ तस्वीरें इंस्टाग्राम पर शेयर कीं। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…







