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साकिब सलीम बोले- रिजेक्शन एक्टर के डीएनए में है:डेब्यू फिल्म के लिए 7-8 महीने ऑडिशन दिए, पहला एड नहीं मिलता तो फैमिली बिजनेस संभालता

साकिब सलीम बोले- रिजेक्शन एक्टर के डीएनए में है:डेब्यू फिल्म के लिए 7-8 महीने ऑडिशन दिए, पहला एड नहीं मिलता तो फैमिली बिजनेस संभालता

वेब सीरीज ‘कप्तान’ को लेकर साकिब सलीम चर्चा में हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने किरदार, तैयारी और एक्टिंग प्रोसेस साझा किया। वे प्रोजेक्ट चुनने से पहले स्क्रिप्ट और डायरेक्टर का विजन समझते हैं। ‘कप्तान’ में किरदार को रियल बनाने के लिए फिजिकल ट्रांसफॉर्मेशन के साथ ह्यूमर और इंसानी कमजोरियां जोड़ीं। उन्होंने फिल्म ‘83’ के 6 महीने के क्रिकेट ट्रेनिंग एक्सपीरियंस को करियर का खास फेज बताया। साथ ही शुरुआती दिनों, यश राज फिल्म्स के साथ डेब्यू और ऑडिशन स्ट्रगल पर बात की। उन्होंने कहा कि आज भी वे सीखने और खुद को बेहतर बनाने में विश्वास रखते हैं। पेश हैं साकिब सलीम से बातचीत के प्रमुख अंश: सवाल: ‘कप्तान’ को लेकर रोल चुनने का प्रोसेस क्या है? जवाब: मैं पहले स्क्रिप्ट पढ़ता हूं। कहानी समझ आए और मजा आए, तभी करता हूं। फिर डायरेक्टर के विजन के अनुसार खुद को ढालता हूं। मेरा मानना है कि हर फिल्म और शो का प्रोसेस अलग होता है, क्योंकि हर डायरेक्टर की सोच अलग होती है। सवाल: ‘कप्तान’ में आपके किरदार ‘समर’ को लेकर आपने क्या इनपुट दिए? जवाब: मेरा एक ही फीडबैक था कि किरदार सिर्फ सीरियस या हीरोइक ना लगे। उसमें ह्यूमर और इंसानी कमजोरियां भी होनी चाहिए। हमने कोशिश की कि वह एक रियल इंसान लगे, जो गलतियां भी करता है और उनसे सीखता भी है। सवाल: इस रोल के लिए कितनी तैयारी की? जवाब: काफी मेहनत की। करीब 7-8 किलो वजन कम किया। किरदार एनकाउंटर स्पेशलिस्ट का है, जो हमेशा फील्ड पर रहता है, इसलिए फिटनेस और एजिलिटी जरूरी थी। सवाल: आपने कहा कि हर प्रोजेक्ट का प्रोसेस अलग होता है, क्या आप कोई उदाहरण देना चाहेंगे? जवाब: कबीर खान की फिल्म ‘83’ का प्रोसेस अलग था। उन्होंने 6 महीने तक सिर्फ क्रिकेट खेलने को कहा। एक्टिंग बाद में, पहले टीम बनानी थी। यह मेरे करियर का यूनिक अनुभव था। सवाल: ‘83’ में क्या चुनौती रही? जवाब: सबसे बड़ी चुनौती थी कि पुरानी स्टाइल भूलनी पड़ी। मोहिंदर अमरनाथ की तरह खेलना, उनका चलना और बैटिंग स्टाइल सीखना था। जो चीज पहले से आती है, उसे भूलकर नई चीज सीखना मुश्किल होता है। सवाल: आपका एक्टिंग करियर कैसे शुरू हुआ? जवाब: मेरी शुरुआत दिलचस्प रही। मैं एक दोस्त के साथ ऑडिशन देने गया था, उसका नहीं हुआ और मेरा हो गया। पहला काम एक ऐड में मिला, जिसके लिए 25 हजार रुपए मिले। मैं टाइमपास के लिए गया था। शाम को फोन आया कि आप सिलेक्ट हो गए हैं, 25 हजार का बजट है। मैं घबरा गया और बोला कि मेरे पास 25 हजार नहीं हैं देने के लिए, लगा मुझे पैसे देने पड़ेंगे। फिर उन्होंने हंसकर कहा कि आपको पैसे मिलेंगे। अगर पहला ऐड नहीं मिलता, तो मैं दिल्ली जाकर फैमिली बिजनेस संभालता। मैं पापा से कहकर आया था कि एक साल खुद को एक्सप्लोर करना चाहता हूं। थोड़ा झूठ बोला, क्योंकि सीधे बोलता तो शायद मानते नहीं। उसी साल फिल्म मिल गई, फिर उन्हें मनाने की जरूरत नहीं पड़ी। सवाल: डेब्यू फिल्म कैसे मिली? जवाब: लंबा ऑडिशन प्रोसेस चला। यश राज फिल्म्स की कास्टिंग डायरेक्टर शानू शर्मा ने 7-8 महीने तक अलग-अलग सीन करवाए। कभी गाना, कभी एक्टिंग। ऐसा लगा जैसे वर्कशॉप चल रही हो। फिर यश राज फिल्म्स की ‘मुझसे फ्रेंडशिप करोगे’ मिली। मैं खुद को लकी मानता हूं कि शुरुआत इतनी बड़ी कंपनी के साथ हुई। सवाल: करियर का सबसे बड़ा चैलेंज क्या रहा? जवाब: मैं हंसते-बोलते रहता हूं, इसलिए कई बार लोग सीरियसली नहीं लेते। उन्हें मेरी मेहनत नहीं दिखती। अब सीख लिया है कि लोगों का परसेप्शन बदलने की कोशिश नहीं करनी, बस काम ईमानदारी से करना है। सवाल: इतने सालों के करियर में इंस्पिरेशन कहां से मिलती है? जवाब: मैं हर किसी से सीखता हूं। मैंने सलमान खान, रणवीर सिंह, वरुण धवन, तापसी पन्नू और रानी मुखर्जी जैसे कलाकारों के साथ काम किया है। सभी से कुछ न कुछ सीखने को मिलता है। सवाल: क्या अब भी आप ऑडिशन देने के लिए तैयार रहते हैं? जवाब: बिल्कुल। अगर मुझे किसी फिल्ममेकर के साथ काम करना है, तो मैं खुद जाकर ऑडिशन देने को तैयार हूं। रिजेक्शन से डरना नहीं चाहिए, यह एक्टर के काम का हिस्सा है। सवाल: लेकिन कई एक्टर्स रिजेक्शन से डरते हैं, आप इसे कैसे देखते हैं? जवाब: देखिए, रिजेक्शन एक्टर के डीएनए में होता है। हमें इसे पर्सनली नहीं लेना चाहिए। कई बार रोल आपके लिए नहीं होता, इसका मतलब ये नहीं कि आप अच्छे एक्टर नहीं हैं। मैं तो आज भी ऑडिशन देने में शर्माता नहीं हूं, क्योंकि यही हमारे काम का हिस्सा है। सवाल: बढ़ती एक्सपेक्टेशंस और प्रेशर को कैसे हैंडल करते हैं? जवाब: मैं अपना बेस्ट देने पर ध्यान देता हूं। लोगों की सोच कंट्रोल नहीं कर सकता, लेकिन अपनी मेहनत और ईमानदारी को कंट्रोल कर सकता हूं। आजकल कई बार गलत जानकारी भी फैलती है, इसलिए उससे बचना जरूरी है। सवाल: आज के समय में सोशल मीडिया और इंफॉर्मेशन ओवरलोड को कैसे देखते हैं? जवाब: आज बहुत ज्यादा इंफॉर्मेशन है, लेकिन सही से ज्यादा गलत फैल रही है। सबको सबसे पहले खबर देनी है, इसलिए कई बार सही जानकारी नहीं आती। मैं कोशिश करता हूं कि इस शोर से थोड़ा दूर रहूं। सवाल: अगर मौका मिले तो किसकी बायोपिक करना चाहेंगे? जवाब: मैं विराट कोहली की बायोपिक करना चाहूंगा। मुझे क्रिकेट बहुत पसंद है और लोग भी कहते हैं कि मैं यह रोल कर सकता हूं। सवाल: आपको किस तरह की किताबें पढ़ना पसंद है? जवाब: मुझे स्पोर्ट्स पर्सनैलिटी की किताबें पढ़ना पसंद है। जैसे युवराज सिंह, शेन वॉर्न, क्रिस गेल और आंद्रे अगासी की किताबें पढ़ी हैं। मुझे लोगों के अनुभव जानना अच्छा लगता है। सवाल: आपके लिए सबसे बड़ी सफलता क्या है? जवाब: मेरे लिए सबसे बड़ी सफलता है कि मैं 15 साल से इंडस्ट्री में हूं। मेरे माता-पिता और बहन मेरे साथ हैं, यही सबसे बड़ी बात है। बाकी जो मिल रहा है, वह बोनस है।

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वेब सीरीज ‘कप्तान’ को लेकर साकिब सलीम चर्चा में हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने किरदार, तैयारी और एक्टिंग प्रोसेस साझा किया। वे प्रोजेक्ट चुनने से पहले स्क्रिप्ट और डायरेक्टर का विजन समझते हैं। ‘कप्तान’ में किरदार को रियल बनाने के लिए फिजिकल ट्रांसफॉर्मेशन के साथ ह्यूमर और इंसानी कमजोरियां जोड़ीं। उन्होंने फिल्म ‘83’ के 6 महीने के क्रिकेट ट्रेनिंग एक्सपीरियंस को करियर का खास फेज बताया। साथ ही शुरुआती दिनों, यश राज फिल्म्स के साथ डेब्यू और ऑडिशन स्ट्रगल पर बात की। उन्होंने कहा कि आज भी वे सीखने और खुद को बेहतर बनाने में विश्वास रखते हैं। पेश हैं साकिब सलीम से बातचीत के प्रमुख अंश: सवाल: ‘कप्तान’ को लेकर रोल चुनने का प्रोसेस क्या है? जवाब: मैं पहले स्क्रिप्ट पढ़ता हूं। कहानी समझ आए और मजा आए, तभी करता हूं। फिर डायरेक्टर के विजन के अनुसार खुद को ढालता हूं। मेरा मानना है कि हर फिल्म और शो का प्रोसेस अलग होता है, क्योंकि हर डायरेक्टर की सोच अलग होती है। सवाल: ‘कप्तान’ में आपके किरदार ‘समर’ को लेकर आपने क्या इनपुट दिए? जवाब: मेरा एक ही फीडबैक था कि किरदार सिर्फ सीरियस या हीरोइक ना लगे। उसमें ह्यूमर और इंसानी कमजोरियां भी होनी चाहिए। हमने कोशिश की कि वह एक रियल इंसान लगे, जो गलतियां भी करता है और उनसे सीखता भी है। सवाल: इस रोल के लिए कितनी तैयारी की? जवाब: काफी मेहनत की। करीब 7-8 किलो वजन कम किया। किरदार एनकाउंटर स्पेशलिस्ट का है, जो हमेशा फील्ड पर रहता है, इसलिए फिटनेस और एजिलिटी जरूरी थी। सवाल: आपने कहा कि हर प्रोजेक्ट का प्रोसेस अलग होता है, क्या आप कोई उदाहरण देना चाहेंगे? जवाब: कबीर खान की फिल्म ‘83’ का प्रोसेस अलग था। उन्होंने 6 महीने तक सिर्फ क्रिकेट खेलने को कहा। एक्टिंग बाद में, पहले टीम बनानी थी। यह मेरे करियर का यूनिक अनुभव था। सवाल: ‘83’ में क्या चुनौती रही? जवाब: सबसे बड़ी चुनौती थी कि पुरानी स्टाइल भूलनी पड़ी। मोहिंदर अमरनाथ की तरह खेलना, उनका चलना और बैटिंग स्टाइल सीखना था। जो चीज पहले से आती है, उसे भूलकर नई चीज सीखना मुश्किल होता है। सवाल: आपका एक्टिंग करियर कैसे शुरू हुआ? जवाब: मेरी शुरुआत दिलचस्प रही। मैं एक दोस्त के साथ ऑडिशन देने गया था, उसका नहीं हुआ और मेरा हो गया। पहला काम एक ऐड में मिला, जिसके लिए 25 हजार रुपए मिले। मैं टाइमपास के लिए गया था। शाम को फोन आया कि आप सिलेक्ट हो गए हैं, 25 हजार का बजट है। मैं घबरा गया और बोला कि मेरे पास 25 हजार नहीं हैं देने के लिए, लगा मुझे पैसे देने पड़ेंगे। फिर उन्होंने हंसकर कहा कि आपको पैसे मिलेंगे। अगर पहला ऐड नहीं मिलता, तो मैं दिल्ली जाकर फैमिली बिजनेस संभालता। मैं पापा से कहकर आया था कि एक साल खुद को एक्सप्लोर करना चाहता हूं। थोड़ा झूठ बोला, क्योंकि सीधे बोलता तो शायद मानते नहीं। उसी साल फिल्म मिल गई, फिर उन्हें मनाने की जरूरत नहीं पड़ी। सवाल: डेब्यू फिल्म कैसे मिली? जवाब: लंबा ऑडिशन प्रोसेस चला। यश राज फिल्म्स की कास्टिंग डायरेक्टर शानू शर्मा ने 7-8 महीने तक अलग-अलग सीन करवाए। कभी गाना, कभी एक्टिंग। ऐसा लगा जैसे वर्कशॉप चल रही हो। फिर यश राज फिल्म्स की ‘मुझसे फ्रेंडशिप करोगे’ मिली। मैं खुद को लकी मानता हूं कि शुरुआत इतनी बड़ी कंपनी के साथ हुई। सवाल: करियर का सबसे बड़ा चैलेंज क्या रहा? जवाब: मैं हंसते-बोलते रहता हूं, इसलिए कई बार लोग सीरियसली नहीं लेते। उन्हें मेरी मेहनत नहीं दिखती। अब सीख लिया है कि लोगों का परसेप्शन बदलने की कोशिश नहीं करनी, बस काम ईमानदारी से करना है। सवाल: इतने सालों के करियर में इंस्पिरेशन कहां से मिलती है? जवाब: मैं हर किसी से सीखता हूं। मैंने सलमान खान, रणवीर सिंह, वरुण धवन, तापसी पन्नू और रानी मुखर्जी जैसे कलाकारों के साथ काम किया है। सभी से कुछ न कुछ सीखने को मिलता है। सवाल: क्या अब भी आप ऑडिशन देने के लिए तैयार रहते हैं? जवाब: बिल्कुल। अगर मुझे किसी फिल्ममेकर के साथ काम करना है, तो मैं खुद जाकर ऑडिशन देने को तैयार हूं। रिजेक्शन से डरना नहीं चाहिए, यह एक्टर के काम का हिस्सा है। सवाल: लेकिन कई एक्टर्स रिजेक्शन से डरते हैं, आप इसे कैसे देखते हैं? जवाब: देखिए, रिजेक्शन एक्टर के डीएनए में होता है। हमें इसे पर्सनली नहीं लेना चाहिए। कई बार रोल आपके लिए नहीं होता, इसका मतलब ये नहीं कि आप अच्छे एक्टर नहीं हैं। मैं तो आज भी ऑडिशन देने में शर्माता नहीं हूं, क्योंकि यही हमारे काम का हिस्सा है। सवाल: बढ़ती एक्सपेक्टेशंस और प्रेशर को कैसे हैंडल करते हैं? जवाब: मैं अपना बेस्ट देने पर ध्यान देता हूं। लोगों की सोच कंट्रोल नहीं कर सकता, लेकिन अपनी मेहनत और ईमानदारी को कंट्रोल कर सकता हूं। आजकल कई बार गलत जानकारी भी फैलती है, इसलिए उससे बचना जरूरी है। सवाल: आज के समय में सोशल मीडिया और इंफॉर्मेशन ओवरलोड को कैसे देखते हैं? जवाब: आज बहुत ज्यादा इंफॉर्मेशन है, लेकिन सही से ज्यादा गलत फैल रही है। सबको सबसे पहले खबर देनी है, इसलिए कई बार सही जानकारी नहीं आती। मैं कोशिश करता हूं कि इस शोर से थोड़ा दूर रहूं। सवाल: अगर मौका मिले तो किसकी बायोपिक करना चाहेंगे? जवाब: मैं विराट कोहली की बायोपिक करना चाहूंगा। मुझे क्रिकेट बहुत पसंद है और लोग भी कहते हैं कि मैं यह रोल कर सकता हूं। सवाल: आपको किस तरह की किताबें पढ़ना पसंद है? जवाब: मुझे स्पोर्ट्स पर्सनैलिटी की किताबें पढ़ना पसंद है। जैसे युवराज सिंह, शेन वॉर्न, क्रिस गेल और आंद्रे अगासी की किताबें पढ़ी हैं। मुझे लोगों के अनुभव जानना अच्छा लगता है। सवाल: आपके लिए सबसे बड़ी सफलता क्या है? जवाब: मेरे लिए सबसे बड़ी सफलता है कि मैं 15 साल से इंडस्ट्री में हूं। मेरे माता-पिता और बहन मेरे साथ हैं, यही सबसे बड़ी बात है। बाकी जो मिल रहा है, वह बोनस है।

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