CBSE 10th Students Can Improve Marks in 3 Subjects; May Exam Proposed

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) इस साल (सत्र 2025-26) 10वीं और 12वीं के परिणाम 20 से 25 अप्रैल के बीच घोषित कर सकता है। सीबीएसई ने अब तक अपना रिजल्ट मई या इसके बाद के महीने में जारी किए हैं। ऐसा पहली बार होगा कि अप्रैल में रिजल्ट आएगा। . बोर्ड ने कॉपियों के मूल्यांकन का काम पूरा कर लिया है। फिलहाल ‘मार्क्स फीडिंग’ की प्रक्रिया चल रही है। उधर, इस शैक्षणिक सत्र से सीबीएसई ने 10वीं के छात्रों के लिए ‘टू-एग्जाम’ पॉलिसी लागू की है। इसका सीधा फायदा उन छात्रों को मिलेगा जो पहली परीक्षा में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाए। रिजल्ट जारी होने के बाद 10वीं के स्टूडेंट्स को दोबारा परीक्षा देने का मौका मिलेगा। 10वीं की दो परीक्षाएं : 3 बड़े सवालों में समझें पूरा गणित सवाल-1: क्या दोनों बार एग्जाम देना अनिवार्य है? जवाब: नहीं। यह पूरी तरह छात्र की इच्छा पर निर्भर है। अगर आप पहली परीक्षा के स्कोर से संतुष्ट हैं, तो दूसरी परीक्षा देने की जरूरत नहीं है। दूसरी परीक्षा (ऑप्शनल एग्जाम) 15 मई से 1 जून के बीच प्रस्तावित है। सवाल-2: अगर दूसरी परीक्षा में नंबर कम हो गए तो क्या होगा? जवाब: छात्रों को नुकसान नहीं होगा। बोर्ड ‘बेस्ट ऑफ टू’ पॉलिसी अपनाएगा। यानी दोनों परीक्षाओं में से जिस भी एग्जाम में आपके नंबर ज्यादा होंगे, वही फाइनल रिजल्ट माना जाएगा। सवाल-3: क्या प्रैक्टिकल भी दो बार देने होंगे? जवाब: नहीं। प्रैक्टिकल और इंटरनल असेसमेंट साल में एक ही बार (दिसंबर-जनवरी) आयोजित किए जाएंगे। दूसरी परीक्षा केवल थ्योरी पेपर्स के लिए होगी। (सीबीएसई से मान्यता प्राप्त स्कूल के संचालक एम.ए. राजू के अनुसार) इस बार सीबीएसई के एग्जाम में करीब 44 लाख स्टूडेंट्स शामिल हुए। अजमेर रीजन में 10वीं और 12वीं के मिलाकर करीब तीन लाख स्टूडेंट्स हैं। दूसरी परीक्षा के लिए ये हैं 3 मुख्य शर्तें…. सब्जेक्ट की सीमा : छात्र केवल साइंस, मैथ्स, सोशल साइंस और लैंग्वेजेस में से किन्हीं 3 विषयों में ही अपनी परफॉर्मेंस सुधार सकते हैं। उपस्थिति अनिवार्य: यदि कोई छात्र पहली मुख्य परीक्षा में 3 या उससे अधिक विषयों में शामिल नहीं हुआ है, तो उसे दूसरी परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं मिलेगी। विंटर बाउंड स्कूल : पहाड़ी इलाकों के विंटर बाउंड स्कूलों के छात्रों को दोनों में से किसी भी परीक्षा में बैठने की छूट रहेगी। कमेटी करेगी समीक्षा, 10 से 12 दिन लगेंगे मार्क्स फीडिंग के बाद बोर्ड की कमेटी परिणाम की समीक्षा करेगी। इस प्रक्रिया में करीब 10-12 दिन लगेंगे। सीबीएसई का लक्ष्य है कि जल्द रिजल्ट देकर उच्च शिक्षाके लिए एडमिशन की प्रक्रिया समय पर शुरू की जा सके। पिछले सालों में कितने दिनों में घोषित हुए CBSE के रिजल्ट ………. ये खबरें भी पढ़िए… 5 साल बाद 12वीं के रिजल्ट में क्यों गिरावट आई? स्टूडेंट्स को तैयारी का समय कम मिला, जल्द हुए एग्जाम; क्या बोले-एक्सपर्ट राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के पिछले 5 सालों में ऐसा पहली बार हुआ है, जब 12वीं के तीनों सब्जेक्ट का रिजल्ट गिरा है। इस साल आट्र्स का रिजल्ट 97.54%, कॉमर्स का 93.64% और साइंस का 97.52% रहा। साल 2025 के मुकाबले आट्र्स का रिजल्ट 0.24%, साइंस का 0.91% कम रहा। पूरी खबर पढ़ें सरकारी स्कूल की छात्रा टॉपर, दोस्त फॉर्च्युनर सॉन्ग पर नाचे, साइंस में 499 नंबर लाने वालीं 3 लड़कियां सीकर की; जोधपुर की स्टूडेंट को कार मिलेगी राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) की 12वीं आट्र्स, कॉमर्स, साइंस का रिजल्ट मंगलवार सुबह 10 बजे जारी किया गया। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने परिणाम की घोषणा की। साइंस में 5 संयुक्त टॉपर ने 99.80 प्रतिशत मार्क्स हासिल किए हैं। आट्र्स में भी 3 टॉपर स्टूडेंट को 99.60 प्रतिशत अंक मिले। कॉमर्स में 99.20 प्रतिशत नंबर लेकर एक गर्ल्स स्टूडेंट ने टॉप किया है। टॉप-5 में जयपुर, कोटा और उदयपुर जैसे प्रदेश के बड़े जिलों को जगह नहीं मिली है। पूरी खबर पढ़ें
15 किसानों को 40 लाख की चपत लगाकर व्यापारी फरार:MSP से ज्यादा दाम का लालच; 1 महीने की उधारी पर गेहूं-चना खरीदकर परिवार समेत भागा

पिपलोद थाना क्षेत्र के ग्राम जलकुआं (सिंगोट) में 15 किसानों को सरकारी खरीदी से ज्यादा भाव का लालच देकर 40 लाख रुपए की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। गांव का ही व्यापारी एक महीने की उधारी में किसानों से गेहूं और चना खरीदकर अपने परिवार समेत फरार हो गया है। वर्तमान में किसान दौलतसिंह राजपूत सहित अन्य किसानों की शिकायत पर पिपलोद पुलिस ने आरोपी व्यापारी शंकर बलाही के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है और पिछले 21 दिनों से गायब आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। 40 लाख की उपज खरीदी, पिकअप-गाड़ियां लेकर फरार जलकुआं निवासी किसान दौलतसिंह ने बताया कि उन्होंने 80 क्विंटल चना और 90 क्विंटल गेहूं मंडी में बेचने की बजाय व्यापारी शंकर को बेचा था। शंकर ने सरकारी खरीदी से भी ज्यादा भाव लगाते हुए गेहूं 2700 रुपए और चना 6500 रुपए प्रति क्विंटल में खरीदा था। उपज का पैसा एक महीने के भीतर देने की बात तय हुई थी। दौलतसिंह के अलावा गांव के 15 अन्य किसानों ने भी शंकर को ही अपनी उपज बेची थी। सभी किसानों का कुल हिसाब-किताब करीब 40 लाख रुपए का है। उपज खरीदने के बाद आरोपी अपनी पिकअप गाड़ियां और परिवार लेकर गांव से गायब हो गया है। 3 साल से कर रहा था खरीदी, भरोसा जीतकर दिया धोखा किसानों ने बताया कि शंकर गांव का ही रहने वाला है, इसलिए उन्होंने उस पर भरोसा किया। गांव में शंकर की किराना व साड़ी की दुकान है और उसके पास पिकअप गाड़ियां हैं। वह पिछले 3 सालों से अनाज खरीदी का काम करता आ रहा था। पहले वह किसानों से एक महीने का वक्त लेता था और तय समय पर पूरा पैसा चुकता कर देता था, जिससे उस पर किसानों का भरोसा बढ़ गया था। इसी भरोसे का फायदा उठाते हुए उसने इस बार धोखा दिया। पिछले 21 दिनों से किसान शंकर की तलाश में जुटे थे, लेकिन कोई सुराग न मिलने पर अब उन्होंने पुलिस की शरण ली है।
दृष्टिहीनों के साथ भारत घूमने वाले जर्नलिस्ट के अनुभव:नजारे नहीं, एहसास… देखने वालों के लिए सफर ‘फिल्म’ है, पर अंधेरों के लिए ‘खुलती किताब’

‘हम में से ज्यादातर लोगों के लिए यात्रा का मतलब ‘नजारे देखना’ होता है। हम दर्शनीय स्थलों पर जाते हैं, तस्वीरें खींचते हैं और ऐसे होटल ढूंढ़ते हैं जहां से बाहर की खूबसूरती दिखे। लेकिन आपने कभी सोचा है कि दृष्टिहीन यात्री के लिए दुनिया कैसी होगी? इसी का जवाब खोजने के लिए मैं उत्तर भारत के ‘गोल्डन ट्रायंगल’ की 10 दिनों की यात्रा पर निकला। यह मौका ब्रिटिश कंपनी ट्रैवलआइज ने दिया था, जो सामान्य लोगों को दृष्टिहीनों के साथ सफर की पहल करती है। सूर्योदय के समय मैं ल्यूक के साथ ताजमहल में था। उसका हाथ मेरी बांह पर था और सफेद छड़ी से वह जमीन को टटोल रहा था। जैसे ही आगे बढ़े, पैरों के नीचे का अहसास बदल गया- खुरदरे बलुआ पत्थर से ठंडे, चिकने संगमरमर तक। मैंने उसका हाथ दीवारों पर रखा, जहां उसकी अंगुलियां नक्काशी व कीमती पत्थरों को महसूस कर रही थीं। ल्यूक ने 18 साल की उम्र में बीमारी के कारण दृष्टि खो दी थी। उसने मुस्कुराते हुए कहा,‘मुझे कुछ बहुत भव्य और शानदार होने का अहसास हो रहा है।’ गुंबद के नीचे पर्यटकों की आवाजें मधुर गूंज में बदल गईं। ल्यूक ने सिर ऊपर उठाकर कहा,‘जैसे हम किसी बड़े स्पीकर के अंदर खड़े हों।’ उस पल मैंने भी आंखें बंद कीं और पहली बार उस शांति व गूंज को सुना, जिसे मैं अक्सर अनदेखा कर देता था। इस यात्रा का उद्देश्य दृश्य देखना नहीं, बल्कि ‘अनुभूति’ था। पुरानी दिल्ली की तंग गलियों में मेरा साथ डेनियल ने दिया। मसालों, डीजल की तेज गंध के बीच डेनियल ने बताया कि दृष्टिहीन आवाजों व हवा के बहाव से दुनिया का नक्शा बुनते हैं। जब एक इंद्रिय कम होती है, तो बाकी इंद्रियां उसकी भरपाई और तीव्रता से करने लगती हैं। यह अनुभव अद्भुत था, जहां अभाव ही दृष्टि बन गया। छोटी-छोटी चीजें शब्दों के जरिए स्मृति में बसने लगीं… सफर में मेरी अगली साथी सिएटल की कैंडी थीं। उन्हें नजारों से ज्यादा भारत को समझना पसंद था। मैंने उन्हें बताया कि सड़क किनारे नाई कैसे काम करते हैं, लोग फुटपाथ पर कैसे सोते हैं और दुकानों पर स्नैक्स कैसे सजे रहते हैं। इस दौरान मेरी अवलोकन क्षमता भी बढ़ी। मैंने घड़ी की दिशा से उन्हें थाली में रखे खाने की स्थिति समझाई। छोटी-छोटी चीजें अब शब्दों के जरिए स्मृति में बसने लगीं। रणथंभौर में बाघ नहीं दिखा, लेकिन कैंडी के लिए जंगल का अनुभव ही काफी था। बूंदी में आंखें बंद कर ऑटो की सवारी ने एहसास बदल दिया। इस पहल की शुरुआत अमर लतीफ ने की, जिन्होंने बताया- दृष्टिहीनों के लिए सफर किताब, और देखने वालों के लिए फिल्म जैसा होता है।
LAC से इतर चीनी कंपनियां खास भारतीयों को कर रहीं टारगेट, बेहद गंदा है यह खेल, जान से हाथ बैठेंगे आप !

Last Updated:April 12, 2026, 11:12 IST Chinese Weight-Loss Drugs: सोशल मीडिया के जरिए चाइनीज कंपनियां भारत में मोटापे से जूझ रहे लोगों को अनअप्रूव्ड वेट लॉस ड्रग्स सप्लाई कर रही हैं. यह पूरा खेल इंस्टा और यूट्यूब से शुरू होता है, फिर रेडिट और ऑनलाइन ग्रुप्स के जरिए लोग ये खतरनाक दवाएं मंगा लेते हैं, ताकि उनका वजन तेजी से कम हो सके. डॉक्टर्स की मानें तो वेट लॉस के लिए ऐसी दवाएं लेना जानलेवा हो सकता है. भारत में वेट लॉस की कई अप्रूव्ड दवाएं उपलब्ध हैं, जो डॉक्टर की सलाह पर ली जा सकती हैं. सोशल मीडिया के जरिए तमाम भारतीय अनअप्रूव्ड वेट लॉस ड्रग्स खरीद रहे हैं. Viral Weight-Loss Trends: मोटापे से परेशान लोग हर वक्त इससे छुटकारा पाने की जुगाड़ खोजते रहते हैं. आजकल हर किसी के पास स्मार्टफोन है और घर बैठे लोग वजन कम करने की दवाएं सर्च करते रहते हैं. भारत में ओजेम्पिक और मौनजारो जैसी वेट लॉस की दवाएं उपलब्ध हैं, लेकिन इनका महीने का खर्च 10-15 हजार रुपये होता है. ऐसे में सस्ती दवाओं के चक्कर में लोग चीनी कंपनियों का टारगेट बन रहे हैं. सबसे पहले लोग इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब के जरिए सस्ती वेट लॉस दवाओं के बारे में सुनते हैं, फिर Reddit पर बने चाइनीज ग्रुप्स से कनेक्ट हो जाते हैं. इन ग्रुप्स के जरिए भारत में सस्ती वेट लॉस की दवाएं भेजी जाती हैं, जिनके क्लीनिकल ट्रायल्स भी पूरे नहीं होते हैं. डॉक्टर्स का साफ कहना है कि इस तरह की अनअप्रूव्ड दवाएं लेना जानलेवा हो सकता है. लोगों को कभी भी इस तरह के ट्रैप में नहीं फंसना चाहिए. TOI में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक Reddit कई भारतीयों के लिए एक्सपेरिमेंटल चाइनीज वेट लॉस ड्रग्स मंगाने का जरिया बन रहा है. इंस्टाग्राम, यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रोज ऐसे वीडियो और रील्स दिखाई देते हैं, जिनमें इन्फ्लुएंसर तेजी से वजन घटाने वाले पेप्टाइड्स या दवाओं का प्रचार करते हैं. ये कंटेंट इतने आकर्षक और सरल तरीके से पेश किए जाते हैं कि लोग बिना ज्यादा सोचे-समझे इन्हें देखने और फॉलो करने लगते हैं. यहीं से एक ऐसा सफर शुरू होता है, जो अक्सर उन्हें एक खतरनाक और अनजान दुनिया में ले जाता है. जैसे ही कोई व्यक्ति इस तरह की रील या वीडियो पर क्लिक करता है, उसका सोशल मीडिया एल्गोरिदम उसी तरह के कंटेंट से भर जाता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. धीरे-धीरे यूट्यूब पर उसे वेट लॉस एक्सप्लेन्ड, GLP-1 पेप्टाइड्स या फास्ट फैट लॉस हैक्स जैसे वीडियो दिखने लगते हैं. इसके बाद कई लोग रेडिट थ्रेड्स, ब्लॉग्स और AI-एक्सप्लेन्ड आर्टिकल्स पढ़ना शुरू कर देते हैं. इस प्रक्रिया में व्यक्ति एक ऐसी जगह फंस जाता है, जहां उसे लगातार लगता है कि उसे एक नया और आसान समाधान मिल गया है, जबकि असल में वह अधूरी और कई बार गलत जानकारी के जाल में फंस रहा होता है. इस ट्रेंड का एक बड़ा कारण है महंगी मेडिकल ट्रीटमेंट्स और दवाइयां हैं. भारत सहित कई देशों में डॉक्टर द्वारा दी जाने वाली वजन घटाने वाली दवाएं जैसे मौनजारो काफी महंगी हैं और एक महीने का खर्च हजारों रुपये तक पहुंच जाता है. हालांकि ओजेम्पिक जैसी दवाएं अब कुछ सस्ती हो गई हैं, लेकिन फिर भी हर किसी की पहुंच में नहीं हैं. इसी वजह से लोग सस्ते विकल्पों की तलाश में इंटरनेट पर चाइनीज पेप्टाइड्स या बिना मंजूरी वाले पाउडर प्रोडक्ट की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जो ऑनलाइन आसानी से मिल जाते हैं. ये अनधिकृत प्रोडक्ट अक्सर दावा करते हैं कि ये तेजी से वजन घटाने में मदद करते हैं, लेकिन इनमें से कई न तो पूरी तरह से परीक्षण किए गए होते हैं और न ही किसी स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा मंजूर होते हैं. कई मामलों में ये चीन या अन्य देशों से बिना किसी गुणवत्ता जांच के भेजे जाते हैं. लोग इन्हें सोशल मीडिया की कहानियों और फोरम्स पर पढ़कर ऑर्डर कर लेते हैं, बिना यह समझे कि ये उनके शरीर पर क्या असर डाल सकते हैं. डॉक्टर्स के अनुसार GLP-1 जैसी शक्तिशाली दवाएं भी हमेशा स्थायी परिणाम नहीं देतीं. शरीर धीरे-धीरे इनके असर के अनुसार खुद को ढाल लेता है, जिससे वजन घटने की गति रुक सकती है, जिसे प्लूटो इफेक्ट जाता है. अगर इन दवाओं का सेवन बंद कर दिया जाए, तो वजन फिर से धीरे-धीरे बढ़ने लगता है. ऐसे में लोग और भी तेज या मजबूत विकल्पों की तलाश में लग जाते हैं, जिससे यह चक्र और खतरनाक हो जाता है. डॉक्टर्स का साफ कहना है कि लोगों को अपनी मर्जी से ऑनलाइन बिकने वाले वेट लॉस प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. अगर कोई व्यक्ति ओवरवेट या मोटापे से जूझ रहा है, तो उसे डॉक्टर से मिलकर कंसल्ट करना चाहिए. भारत में कई वेट लॉस ड्रग्स उपलब्ध हैं, जो डॉक्टर्स की निगरानी में लेने चाहिए और इनसे बेहतर रिजल्ट मिल सकता है. सोशल मीडिया पर दिखने वाले आसान और तेज वजन घटाने के उपाय अक्सर वास्तविकता से दूर होते हैं. जल्दी परिणाम पाने की चाह, महंगी दवाओं से बचने की कोशिश और ऑनलाइन कंटेंट का प्रभाव मिलकर लोगों को जोखिम भरे विकल्पों की ओर धकेल रहे हैं. किसी भी दवा या सप्लीमेंट का उपयोग बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं करना चाहिए, क्योंकि शरीर के साथ किया गया कोई भी गलत एक्सपेरिमेंट जानलेवा हो सकता है या इससे भविष्य में गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें First Published : April 12, 2026, 11:12 IST
एक किलोमीटर दूर से ला रहे पीने का पानी:पन्ना के रहुनियां गांव में नल-जल योजना फेल, पाइप बिछाए, लेकिन सप्लाई नहीं

पन्ना के ग्राम पंचायत रहुनियां में ग्रामीण जल संकट का सामना कर रहे हैं। यहां के हैंडपंपों से सफेद पानी की जगह लाल रंग का पानी निकल रहा है, जो पीने या कपड़े धोने लायक नहीं है। ग्रामवासी कमल सिंह ने बताया कि पीएचई विभाग द्वारा गांव में पांच हैंडपंप लगाए गए हैं, लेकिन वे ग्रामीणों की प्यास बुझाने में असमर्थ हैं। इन हैंडपंपों से निकलने वाला पानी कुछ ही देर में लाल हो जाता है। सपना बाई नामक ग्रामीण ने बताया कि यह पानी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है और कपड़ों को भी खराब कर रहा है। सरकारी हैंडपंपों के अनुपयोगी होने के कारण ग्रामीणों को निजी खेतों में बने कुओं का सहारा लेना पड़ रहा है। भीषण गर्मी में महिलाएं सिर पर बर्तन रखकर लगभग एक किलोमीटर दूर से पीने का पानी लाने को विवश हैं। ग्रामवासी पप्पू सिंह के अनुसार माध्यमिक शाला में भी पानी की गंभीर समस्या है। यहां लगा हैंडपंप कई साल से खराब है। जल जीवन मिशन के तहत बिछाई गई पाइपलाइन की मोटर भी खराब हो चुकी है, जिससे स्कूल में पानी की आपूर्ति बाधित है। गांव में एक जल टंकी का निर्माण किया गया है, लेकिन यह केवल ढांचा बनकर रह गई है। इसमें न तो पाइपलाइन बिछाई गई है, न नल कनेक्शन दिए गए हैं और न ही पानी के मुख्य स्रोत से इसे जोड़ा गया है। ग्रामीणों का कहना है कि जल जीवन मिशन की योजनाएं रहुनियां में प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो पाई हैं। मामले में जगदीश आदिवासी, पंचायत सहायक सचिव, रहुनियां से बात की गई तो उन्होंने बताया कि पंचायत का एक सार्वजनिक कुआं है पर पानी कम है। हैंडपंपों के लाल पानी की जांच पीएचई से कराई जाएगी। टंकी बन चुकी है, जल्द ही योजना पूरी होगी और समस्या खत्म हो जाएगी।
World Updates| Haiti Fortress Stampede Kills 30 | Sudden Rain Worsens Chaos

Hindi News International World Updates| Haiti Fortress Stampede Kills 30 | Sudden Rain Worsens Chaos| Trump, Russia, China, America, Putin 13 मिनट पहले कॉपी लिंक अस्पताल में रखे मृतकों के शव। हैती के सिटाडेल लाफेरियेर किले में एक वार्षिक समारोह के दौरान भगदड़ मचने से कम से कम 30 लोगों की मौत हो गई। कई लोग घायल बताए जा रहे हैं। यह घटना किले के एंट्री गेट के पास हुई। अधिकारियों के मुताबिक, ज्यादा भीड़ और अचानक हुई बारिश के कारण हालात बिगड़ गए। लोग एक साथ बाहर निकलने की कोशिश करने लगे, जिससे भगदड़ मच गई। यह किला 19वीं सदी की शुरुआत में बनाया गया था और UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। हर साल यहां बड़ी संख्या में छात्र और पर्यटक आते हैं। हैती के कार्यवाहक प्रधानमंत्री एलिक्स डिडियर फिल्स-एमे ने घटना पर दुख जताया है। उन्होंने कहा कि सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है। उन्होंने बताया कि मौके पर कई युवा मौजूद थे। राहत और बचाव टीम मौके पर तैनात है। अधिकारियों का कहना है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। फिलहाल सभी घायलों का इलाज किया जा रहा है और घटना की जांच शुरू कर दी गई है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Kharge Alleges Govt Bill for Election Gain; Special Session From Aug 16

नई दिल्ली46 मिनट पहले कॉपी लिंक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को लोकसभा और राज्यसभा के सभी दलों के फ्लोर लीडर्स को पत्र लिखकर ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर समर्थन मांगा। पीएम ने लिखा कि अब समय आ गया है कि इस कानून को पूरे देश में सही मायनों में लागू किया जाए। उन्होंने लिखा कि 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव महिलाओं के लिए आरक्षण के साथ कराए जाने चाहिए। महिलाओं को राजनीति में ज्यादा प्रतिनिधित्व देने की इच्छा सभी पार्टियों ने लंबे समय से जताई है, अब इसे हकीकत में बदलने का समय है। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पत्र के जवाब में पत्र लिखकर कहा कि राज्य चुनावों के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाना यह दिखाता है कि सरकार इस कानून को राजनीतिक लाभ के लिए जल्दबाजी में लागू करना चाहती है। प्रधानमंत्री के पत्र की तस्वीर। खड़गे बोले- सर्वदलीय बैठक हो खड़गे ने यह भी मांग की कि इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए और परिसीम से जुड़े मुद्दों पर भई विस्तार से चर्चा की जाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट मीटिंग में नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन के ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दे दी गई। इस प्रस्ताव के तहत लोकसभा की सीटें मौजूदा 543 से बढ़ाकर 816 की जाएंगी, जिनमें 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इसलिए सरकार ने बजट सत्र को बढ़ाते हुए 16 से 18 अप्रैल तक संसद का विशेष सत्र बुलाया है । संसद से मंजूरी मिलने के बाद यह कानून 31 मार्च 2029 से लागू होगा, और उसी साल होने वाले लोकसभा चुनाव में पहली बार प्रभावी होगा। परिसीमन कानून में संशोधन के लिए अलग बिल लाएगी सरकार राज्यों की विधानसभाओं में भी इसी अनुपात में सीटों का आरक्षण होगा। सरकार एक संशोधन बिल के एक संविधान साथ-साथ परिसीमन कानून में संशोधन के लिए अलग साधारण बिल भी लाएगी। ताकि नए सिरे से सीटों का निर्धारण हो सके। नई सीटों का निर्धारण 2027 की जनगणना के बजाय 2011 की जनगणना के आधार पर किया जा सकता है। यह कानून राज्यों की विधानसभाओं और दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, पुडुचेरी जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में भी लागू किया जाएगा। —————————————– ये खबर भी पढ़ें… थरूर बोले- महिला आरक्षण कानून को राजनीतिक हथियार न बनाएं:बिल के साथ परिसीमन प्रक्रिया में जल्दबाजी करने से राज्यों का लोकतांत्रिक संतुलन बिगडे़गा कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि महिला आरक्षण कानून में होने वाले संशोधन को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। ताकि संघवाद कमजोर न हो और संसद की गरिमा को ठेस न पहुंचे। पूरी खबर पढ़ें.. दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Kharge Alleges Govt Bill for Election Gain; Special Session From Aug 16

नई दिल्ली3 मिनट पहले कॉपी लिंक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को लोकसभा और राज्यसभा के सभी दलों के फ्लोर लीडर्स को पत्र लिखकर ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर समर्थन मांगा। पीएम ने लिखा कि अब समय आ गया है कि इस कानून को पूरे देश में सही मायनों में लागू किया जाए। उन्होंने लिखा कि 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव महिलाओं के लिए आरक्षण के साथ कराए जाने चाहिए। महिलाओं को राजनीति में ज्यादा प्रतिनिधित्व देने की इच्छा सभी पार्टियों ने लंबे समय से जताई है, अब इसे हकीकत में बदलने का समय है। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पत्र के जवाब में पत्र लिखकर कहा कि राज्य चुनावों के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाना यह दिखाता है कि सरकार इस कानून को राजनीतिक लाभ के लिए जल्दबाजी में लागू करना चाहती है। प्रधानमंत्री के पत्र की तस्वीर। खड़गे बोले- सर्वदलीय बैठक हो खड़गे ने यह भी मांग की कि इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए और परिसीम से जुड़े मुद्दों पर भई विस्तार से चर्चा की जाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट मीटिंग में नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन के ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दे दी गई। इस प्रस्ताव के तहत लोकसभा की सीटें मौजूदा 543 से बढ़ाकर 816 की जाएंगी, जिनमें 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इसलिए सरकार ने बजट सत्र को बढ़ाते हुए 16 से 18 अप्रैल तक संसद का विशेष सत्र बुलाया है । संसद से मंजूरी मिलने के बाद यह कानून 31 मार्च 2029 से लागू होगा, और उसी साल होने वाले लोकसभा चुनाव में पहली बार प्रभावी होगा। परिसीमन कानून में संशोधन के लिए अलग बिल लाएगी सरकार राज्यों की विधानसभाओं में भी इसी अनुपात में सीटों का आरक्षण होगा। सरकार एक संशोधन बिल के एक संविधान साथ-साथ परिसीमन कानून में संशोधन के लिए अलग साधारण बिल भी लाएगी। ताकि नए सिरे से सीटों का निर्धारण हो सके। नई सीटों का निर्धारण 2027 की जनगणना के बजाय 2011 की जनगणना के आधार पर किया जा सकता है। यह कानून राज्यों की विधानसभाओं और दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, पुडुचेरी जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में भी लागू किया जाएगा। —————————————– ये खबर भी पढ़ें… थरूर बोले- महिला आरक्षण कानून को राजनीतिक हथियार न बनाएं:बिल के साथ परिसीमन प्रक्रिया में जल्दबाजी करने से राज्यों का लोकतांत्रिक संतुलन बिगडे़गा कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि महिला आरक्षण कानून में होने वाले संशोधन को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। ताकि संघवाद कमजोर न हो और संसद की गरिमा को ठेस न पहुंचे। पूरी खबर पढ़ें.. दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
दावा- सलमान की 'मातृभूमि' में चीन का नाम नहीं होगा:रक्षा मंत्रालय की आपत्ति के बाद कंटेंट में बदलाव, 40% फिल्म रीशूट

सलमान खान की अपकमिंग फिल्म मातृभूमि को लेकर नई खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म में कई बदलाव किए गए हैं ताकि भारत-चीन के बेहतर होते कूटनीतिक संबंधों पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े। गौरतलब है कि फिल्म का नाम पहले बैटल ऑफ गलवान रखा गया था, जिसे इस साल बदलकर मातृभूमि कर दिया गया। यह फिल्म 2020 में भारत और चीन के बीच हुए संघर्ष पर आधारित थी। हाल ही में दोनों देशों के रिश्ते बेहतर हुए हैं, इसलिए रक्षा मंत्रालय को फिल्म के कंटेंट को लेकर कुछ आपत्ति थी। बॉलीवुड हंगामा की रिपोर्ट में बताया गया है कि मंत्रालय के निर्देश के अनुसार फिल्म में चीन का नाम नहीं लिया जाएगा। करीब 40% फिल्म दोबारा शूट की गई रिपोर्ट में एक सूत्र के हवाले से कहा गया, “पहले यह फिल्म एक सच्ची घटना से प्रेरित थी, लेकिन रक्षा मंत्रालय के कहने पर सलमान खान और डायरेक्टर अपूर्व लाखिया ने फिल्म को दोबारा शूट किया और कहानी में थोड़ा फिक्शन एंगल जोड़ दिया। लगभग 40% फिल्म दोबारा शूट की गई, जिसमें रोमांटिक सीन और बैकस्टोरी भी जोड़ी गई। मेकर्स ने नई फिल्म मंत्रालय को भेजी ताकि उन्हें NOC मिल सके, लेकिन मंत्रालय को अभी भी कुछ चिंताएं हैं।” सूत्र ने आगे बताया, “सलमान खान से यह भी कहा गया कि फिल्म में चीन का नाम बिल्कुल नहीं होना चाहिए। यह बात पहले ही मेकर्स को बता दी गई थी। इस महीने जो नया वर्जन जमा किया गया है, उसमें चीन का कहीं जिक्र नहीं है।” फिल्म 17 अप्रैल 2026 को रिलीज होने वाली थी, लेकिन शूटिंग और कंटेंट में बदलाव के कारण इसे टाल दिया गया। वहीं दूसरी तरफ, सलमान खान जल्द ही दिल राजू के साथ अपनी अगली फिल्म की शूटिंग शुरू कर सकते हैं। इस फिल्म में नयनतारा भी नजर आएंगी और इसका डायरेक्शन वामशी पेडिपल्ली करेंगे।
बिजली कटौती से पानी सप्लाई ठप:सीहोर में लोगों की मुश्किल बढ़ी, दो दिन बाद भी नहीं मिला पेयजल

सीहोर में रविवार को अवकाश के दिन सुबह से ही बिजली कटौती कर दी गई, जिसका सीधा असर पेयजल सप्लाई पर पड़ा। दो दिन के अंतराल के बाद आज ही पानी सप्लाई का दिन था, लेकिन बिजली नहीं होने के कारण कई क्षेत्रों में पानी नहीं पहुंच पाया। कई इलाकों में पानी की किल्लत रविवार को 11 केवीए लूनिया, सुभाष और तहसील फीडर बंद किए गए। इससे लूनिया मोहल्ला, पुराना बस स्टैंड, वाल्मीकि मोहल्ला, भोपाली फाटक, पीडब्ल्यूडी, तहसील चौराहा, श्रीराम कॉलोनी, नेहरू कॉलोनी और मछली पूल क्षेत्र में सुबह से बिजली आपूर्ति ठप रही। इन इलाकों में पेयजल सप्लाई होनी थी, लेकिन बिजली कटौती के कारण पानी नहीं पहुंच सका। नगर पालिका की मांग भी नहीं मानी पेयजल सप्लाई का दिन होने के कारण नगर पालिका ने बिजली कंपनी से कटौती का समय बदलने की मांग की थी, लेकिन कंपनी ने उल्टा नगर पालिका को ही पानी सप्लाई का समय बदलने की सलाह दे दी। लोगों में बढ़ रहा आक्रोश सीहोर नगर सहित पूरे जिले में लोग विद्युत वितरण कंपनी की कार्यप्रणाली से नाराज हैं। घोषित और अघोषित बिजली कटौती लगातार बढ़ रही है, खासकर छुट्टी के दिनों में। भीषण गर्मी में पानी और बिजली दोनों की किल्लत से लोग परेशान हैं। पहले भी हो चुका है विरोध पिछले दिनों अघोषित बिजली कटौती से नाराज लोगों ने मंडी क्षेत्र में चक्का जाम भी किया था, लेकिन इसके बावजूद कंपनी के रवैये में कोई सुधार नहीं हुआ है। बिजली कंपनी के सहायक अभियंता (एई) अतुलेश सिंह के अनुसार, कई स्थानों पर पेड़ों की डालियां बिजली लाइनों से टकरा रही थीं। इन्हें हटाने के लिए बिजली कटौती की गई।







