Wednesday, 27 May 2026 | 09:24 PM

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खाड़ी संकट: रईस ग्राहक टाल रहे महंगी कारों की खरीदारी:देश में बिकीं रिकॉर्ड 47 लाख कारें, पर लग्जरी सेगमेंट की हिस्सेदारी महज 1%

खाड़ी संकट: रईस ग्राहक टाल रहे महंगी कारों की खरीदारी:देश में बिकीं रिकॉर्ड 47 लाख कारें, पर लग्जरी सेगमेंट की हिस्सेदारी महज 1%

देश में वित्त वर्ष 2025-26 में कारों की बिक्री 13% बढ़कर रिकॉर्ड 47 लाख रही, लेकिन लग्जरी कारों की हिस्सेदारी 1% ही है। बीएमडब्ल्यू इंडिया के प्रेसिडेंट हरदीप सिंह बरार के मुताबिक पश्चिम एशिया तनाव ने खरीदारों के सेंटिमेंट को प्रभावित किया है, जिससे वे बड़ी खरीदारी टाल रहे हैं। मर्सिडीज-बेंज इंडिया के एमडी व सीईओ संतोष अय्यर ने भी माना कि वैश्विक हालात के कारण इस साल लग्जरी मार्केट फ्लैट रह सकता है। हालांकि मर्सिडीज-बेंज इंडिया ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 19,363 यूनिट्स की बिक्री की, जो किसी एक वित्त वर्ष का सबसे शानदार प्रदर्शन है। इससे पिछले साल 18,928 यूनिट्स बेची थी। मर्सिडीज की इस कामयाबी के पीछे सबसे बड़ा हाथ ‘टॉप-एंड लग्जरी’ सेगमेंट का रहा। अमीर ग्राहकों की बढ़ती पसंद के चलते इस सेगमेंट में वित्त वर्ष 2025-26 में 16% की वृद्धि देखी गई, जबकि साल मार्च तिमाही में यह उछाल 25% तक जा पहुंचा। लग्जरी कारों में ईवी की मांग 83% बढ़ी ईंधन की कीमतें बढ़ने के डर से ग्राहक तेजी से इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (ईवी) की ओर बढ़ रहे हैं। जनवरी-मार्च में बीएमडब्ल्यू की इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री 83% उछाल के साथ 1,185 तक पहुंच गई। अब कंपनी की कुल बिक्री में ईवी की हिस्सेदारी 26% है। मर्सिडीज की 1.4 करोड़ रुपए से महंगी इलेक्ट्रिक कारों की मांग भी 85% बढ़ी है। मर्सिडीज की इस कामयाबी के पीछे सबसे बड़ा हाथ ‘टॉप-एंड लग्जरी’ सेगमेंट का रहा। अमीर ग्राहकों की बढ़ती पसंद के चलते इस सेगमेंट में वित्त वर्ष 2025-26 में 16% की वृद्धि देखी गई, जबकि साल मार्च तिमाही में यह उछाल 25% तक जा पहुंचा।

सुबह खाली पेट खाएं ये 3 चीजें, दिनभर रहेंगे फिट और एनर्जेटिक – News18 हिंदी

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X Health Tips: सुबह खाली पेट खाएं ये 3 चीजें, दिनभर रहेंगे फिट और एनर्जेटिक   Benefits of Eating Moong, Peanuts, and Raisins: “आरोग्यं परमं भाग्यं” की परंपरा को ध्यान में रखते हुए आज भी कुछ प्राकृतिक चीजें सेहत के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती हैं. सुल्तानपुर के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एसबी सिंह के अनुसार सुबह खाली पेट मूंग, मूंगफली और किशमिश का सेवन शरीर के लिए बहुत लाभकारी है. अंकुरित मूंग पाचन तंत्र मजबूत करती है, ऊर्जा देती है और ब्लड शुगर नियंत्रित रखने में मदद करती है. वहीं किशमिश आयरन से भरपूर होती है, जो खून की कमी दूर कर हीमोग्लोबिन बढ़ाती है और कब्ज से राहत देती है. मूंगफली प्रोटीन और हेल्दी फैट का अच्छा स्रोत है. जो मांसपेशियों को मजबूत बनाकर लंबे समय तक ऊर्जा देता है. इन तीनों का नियमित सेवन शरीर को एक्टिव, स्वस्थ और फिट रखने का आसान व सस्ता उपाय है.

मंदिर के कुएं के पास मिला तीन माह का नवजात:चिलचिलाती धूप में रोने के आवाज सुन पहुंचे लोग, डॉक्टर बोले- तेज बुखार है

मंदिर के कुएं के पास मिला तीन माह का नवजात:चिलचिलाती धूप में रोने के आवाज सुन पहुंचे लोग, डॉक्टर बोले- तेज बुखार है

मैहर के देवीजी चौकी इलाके स्थित शिव मंदिर परिसर में बने कुएं के पास तीन माह का नवजात पड़ा मिला है। रविवार की सुबह करीब साढ़े 11 बजे कोतवाली थाना क्षेत्र के देवीजी इलाके में मंदिर जा रहे लोगों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस का कहना है कि दोपहर में कुछ लोग मंदिर के पास से गुजर रहे थे। उन्हें बच्चे की रोने की आवाज सुनाई दी। वे जब कुएं के पास पहुंचे तो कपड़े में नवजात मिला। वे लोग बच्चे को लेकर सीथे चौकी पहुंचे। यहां से हम लोग उसे अस्पताल लेकर गए। उसे समय पर उपचार मिल सका और उसकी जान बच गई। बच्चे को अस्पताल की एनबीएसयू (न्यूबॉर्न स्टेबलाइजेशन यूनिट) में भर्ती किया गया है। ड्यूटी पर मौजूद डॉ. पृथ्वीराज सिंह ने बताया कि बच्चे की उम्र लगभग 2 से 3 महीने है और उसे बुखार भी है। फिलहाल उसकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है और उसके पोषण व स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। देवीजी क्षेत्र और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि यह पता चल सके कि मासूम को वहां कौन और किन परिस्थितियों में छोड़कर गया।

Work begins on Sunny’s ‘Border 3’, Sunny Deol, Border 3

Work begins on Sunny's 'Border 3', Sunny Deol, Border 3

अमित कर्ण. मुंबई4 मिनट पहले कॉपी लिंक सनी की ‘बॉर्डर 3’ को 2027 का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट माना जा रहा है। यह सनी की देशभक्ति वाली इमेज को एक बार फिर बड़े स्तर पर स्थापित करेगा। – फाइल फोटो सनी देओल और वरुण धवन स्टारर ‘बॉर्डर 2’ की सफलता के बाद अब जेपी फिल्म्स ने आने वाले वर्षों के लिए बड़ा रोडमैप तैयार कर लिया है। 362 करोड़ के घरेलू कलेक्शन के साथ फिल्म ने यह साबित कर दिया कि देशभक्ति और रियल-लाइफ हीरोइज्म का क्रेज आज भी दर्शकों के बीच बरकरार है। इसी सफलता को आगे बढ़ाते हुए निर्माता निधि दत्ता ने एक मेगा प्लान तैयार किया है, जिसके केंद्र में सनी को रखा गया है। ‘बॉर्डर 3’ पर काम शुरू हो चुका है। सनी ही मुख्य चेहरा बने रहेंगे। ‘बॉर्डर 3’ से सनी की देशभक्ति की इमेज फिर मजबूत होगी सनी की ‘बॉर्डर 3’ को 2027 का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट माना जा रहा है। यह सनी की देशभक्ति वाली इमेज को एक बार फिर बड़े स्तर पर स्थापित करेगा। वहीं नितेश तिवारी की ‘रामायणम्’ में सनी का ‘हनुमान’ के रूप में नजर आना उनके करियर का एक नया और दिलचस्प अध्याय होगा। वह फिल्म के दोनों पार्ट्स में नजर आएंगे। वायुसेना पर एक नई फिल्म भी शुरू करेगा जेपी फिल्म्स जेपी फिल्म्स अब अपने पारंपरिक वॉर जोन से बाहर निकलते हुए एक बड़े बजट की फैंटेसी एडवेंचर फ्रेंचाइज पर भी काम कर रहा है। यह प्रोजेक्ट स्टूडियो के लिए एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इसकी कहानी और राइटिंग प्रोसेस में खुद निधि शामिल हैं और यह देश की कई लोकेशंस में शूट होगी। चर्चा है कि इस प्रोजेक्ट में भी सनी का कैमियो हो सकता है। जेपी फिल्म्स भारतीय वायुसेना पर भी एक नई फिल्म भी शुरू करने जा रहा है। करियर को काफी रणनीतिक तरीके से आगे बढ़ा रहे हैं सनी ‘गदर 2’ की जबरदस्त सफलता के बाद सनी ने अपने करियर की दिशा को काफी रणनीतिक तरीके से आगे बढ़ाया है। अब उनका फोकस ऐसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर है, जो उन्हें सिर्फ स्टार ही नहीं, बल्कि बॉक्स ऑफिस का मजबूत पिलर भी बनाए रखें। 2027 तक सनी के पास कई फिल्में हैं जो 1000 करोड़ क्लब तक पहुंचने की क्षमता रखती हैं। इस लाइनअप में ‘सफर’ नाम की एक इमोशनल ड्रामा है, जिसकी शूटिंग पूरी हो चुकी है। ​निधि दत्ता पर भी है विरासत को आगे ले जाने की चुनौती ​निधि ने ‘पलटन’ और ‘घुड़चढ़ी’ जैसी फिल्मों के जरिए अपनी पहचान बनाई है। अब उनके कंधों पर ‘बॉर्डर’ जैसी विरासत को आगे ले जाने का मौका है। ‘बॉर्डर 2′ ने यह साबित किया कि बड़े परदे पर सनी का गुस्सा आज भी दर्शक जुटा सकता है। बता दें कि एक तरफ सनी जहां ‘बॉर्डर 3′ और एयर फोर्स ड्रामा में देशभक्ति का जज्बा जगाएंगे, वहीं ‘फैंटेसी एडवेंचर’ के जरिए अलग अवतार में दिखेंगे। जेपी फिल्म्स की ओर से अगले कुछ महीनों में ‘बॉर्डर 3′ की आधिकारिक कास्टिंग अनाउंस होगी। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

पहली बार असंगठित निर्माण क्षेत्र का विश्लेषण:करीब एक करोड़ परिवारों ने अपने घर खुद बनाए, 75% मकान गांवों में बने

पहली बार असंगठित निर्माण क्षेत्र का विश्लेषण:करीब एक करोड़ परिवारों ने अपने घर खुद बनाए, 75% मकान गांवों में बने

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एनएसओ) ने एक तकनीकी रिपोर्ट जारी की है जिसमें गैर-पंजीकृत (अन-इनकॉरपोरेटेड) निर्माण एजेंसियों और परिवारों द्वारा बीते साल भर में किए गए कंस्ट्रक्शन पर एक पायलट अध्ययन के प्रमुख नतीजे बताए गए हैं। एनएसओ के अनुसार देश में अन-इनकॉरपोरेटेड कंस्ट्रक्शन में मुख्य गतिविधि करीब 1 करोड़ (सही संख्या 98.5 लाख) परिवारों द्वारा खुद के रहने के लिए खुद बनवाए जा रहे मकानों की वजह से है। कंस्ट्रक्शन में लगीं अन-इनकॉरपोरेटेड एजेंसियों की संख्या करीब 11 लाख थी। महाराष्ट्र (1.3 लाख), केरल (94,000) और कर्नाटक (90,000) में गैर-पंजीकृत निर्माण एजेंसियों की संख्या सबसे अधिक दर्ज की गई। उत्तर प्रदेश (13.8 लाख), ओडिशा (7.6 लाख) और महाराष्ट्र (7.5 लाख) घरेलू स्तर पर निर्माण में आगे थे। 97% परिवारों को खुद की आय पर ज्यादा भरोसा रिपोर्ट के मुताबिक 97% परिवारों ने निर्माण के लिए अपनी आय पर भरोसा किया। उन्होंने कुल खर्च का करीब 77% अपने पास से लगाया। 21% परिवारों ने लागत का करीब 17% संस्थागत कर्ज लिया। इसमें ग्रामीण क्षेत्रों (23%) की भागीदारी शहरी (13%) की तुलना में अधिक थी। ये औपचारिक ऋण तक पहुंच में सुधार का संकेत है। निर्माण लागत में 75% हिस्सा मटेरियल का था। लेबर कॉस्ट करीब 22% थी। ईंट, सीमेंट, स्टील जैसी सामग्रियों का कुल मटेरियल कॉस्ट में 60% हिस्सा था। घरेलू निर्माण खर्च का तीन-चौथाई मटेरियल पर मद – घरेलू – संस्थान ईंट – 20.7% – 13.3% लोहा और स्टील – 20.6% – 16.4% सीमेंट/उत्पाद – 19.4% – 19.6% लकड़ी – 6.7% – 7.3% प्लास्टिक उत्पाद – 4.1% – 4.7% पेंट, वार्निश आदि – 5.6% – 10.7% सेनिटरी वेयर – 3.1% – 2.0% अन्य खर्च – 19.8% – 26.0% शहरों के बजाय ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण अधिक जुलाई से दिसंबर 2025 तक हुए इस अध्ययन में पाया गया है कि निर्माण गतिविधियों में ग्रामीण क्षेत्रों का दबदबा है। ग्रामीण क्षेत्रों में 6.5 लाख गैर-पंजीकृत एजेंसी निर्माण कार्यों में संलग्न थीं। शहरी इलाकों में ये संख्या करीब 3.7 लाख थी। घरेलू निर्माण में 75.1 लाख ग्रामीण इलाकों में हुए, शहरों में करीब 23.4 लाख निर्माण हुए।

छोड़िए चाय-कॉफी! घर पर बनाएं सफेद फूलों की हर्बल टी, सेहत सुधरेगी और तेजी से घटेगा वजन

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Last Updated:April 12, 2026, 13:35 IST Health News: पारिजात की चाय बनाना बहुत आसान है. इसके लिए 5-6 ताजे गिरे हुए फूल लें और उन्हें धोकर हल्के गर्म पानी में 9 से 10 मिनट तक उबाल लें. जब पानी का रंग बदल जाए, तो इसे छानकर कप में निकाल लें. सीधी. मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र की वादियों में पाया जाने वाला पारिजात, जिसे हरसिंगार, सेहरुआ या रातरानी के नाम से भी जाना जाता है, इन दिनों अपनी औषधीय खूबियों के चलते चर्चा में है. अपनी खूबसूरती के लिए मशहूर यह फूल अब सेहत के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं माना जा रहा. खासकर इसकी चाय को प्राकृतिक इलाज के रूप में अपनाया जा रहा है. आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में पारिजात को औषधीय गुणों का खजाना बताया गया है. आज जब लोग छोटी-छोटी बीमारियों के लिए दवाइयों पर निर्भर हो गए हैं, ऐसे में पारिजात की चाय एक सस्ता, सरल और असरदार विकल्प बनकर सामने आई है. यह फूल सफेद रंग का होता है, जिसकी डंडी नारंगी होती है. इसकी खासियत यह है कि यह रात में खिलता है और सुबह जमीन पर गिर जाता है, जिसे ग्रामीण लोग एकत्र कर उपयोग में लाते हैं. सीधी के आयुष अधिकारी डॉ नरेंद्र पटेल ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि पारिजात के फूलों से बनी चाय में प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व मौजूद होते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं. रोज सुबह खाली पेट इस चाय का सेवन करने से शरीर डिटॉक्स होता है और दिनभर ऊर्जा बनी रहती है. खास बात यह है कि इसमें दूध की जरूरत नहीं होती, जिससे यह लैक्टोज इन्टॉलरेंट लोगों के लिए भी बेहतर विकल्प बन जाती है. माइग्रेन से मिलेगी राहतपारिजात के फूलों की चाय कई सामान्य बीमारियों में भी कारगर मानी जा रही है. एसिडिटी, सर्दी-जुकाम, जोड़ों का दर्द, सिरदर्द और माइग्रेन जैसी समस्याओं में इससे राहत मिलती है. साथ ही यह मानसिक तनाव को कम करने और नींद की गुणवत्ता बेहतर करने में भी सहायक है. यही वजह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में इसे प्राकृतिक टॉनिक के रूप में देखा जा रहा है और लोग इसे अपनी दिनचर्या में शामिल कर रहे हैं. पारिजात की चाय बनाना आसानपारिजात की चाय बनाना भी बेहद आसान है. इसके लिए 5-6 ताजे गिरे हुए फूल लें और उन्हें हल्के गर्म पानी में 9 से 10 मिनट तक उबालें. जब पानी का रंग बदल जाए, तो इसे छानकर कप में निकाल लें. स्वाद के लिए इसमें शहद या नींबू की कुछ बूंदें मिलाई जा सकती हैं लेकिन दूध और चीनी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए ताकि इसके औषधीय गुण बरकरार रहें. डॉक्टर या आयुर्वेदाचार्य से सलाहडॉ नरेंद्र पटेल ने कहा कि इस चाय का सेवन सुबह खाली पेट करना सबसे अधिक फायदेमंद होता है. हालांकि किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीज या गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन करने से पहले डॉक्टर या आयुर्वेदाचार्य से सलाह जरूर लेनी चाहिए. बदलती जीवनशैली के बीच पारिजात की चाय एक प्राकृतिक, सुरक्षित और प्रभावी विकल्प के रूप में उभर रही है, जो शरीर और मन दोनों को स्वस्थ रखने में मददगार साबित हो सकती है. About the Author Rahul Singh राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Sidhi,Madhya Pradesh First Published : April 12, 2026, 13:35 IST

Sidhi Churhat Shop Fire | Lakhon Ka Nuksan Due to 11KV Line Spark

Sidhi Churhat Shop Fire | Lakhon Ka Nuksan Due to 11KV Line Spark

सीधी में किराना,कोल्डड्रिंक और सब्जी दुकान में आग लग गई। सीधी के चुरहट थाना क्षेत्र अंतर्गत चिलरी कला गांव में रविवार सुबह करीब 11 बजे एक दुकान में आग लग गई। बिजली कंपनी की 11 हजार वोल्ट की लाइन से गिरी चिंगारी के कारण यह हादसा हुआ। हादसे में मोतीलाल पटेल की किराना, सब्जी और कोल्डड्रिंक की दुकान पूरी तरह ज . ऊपर से गुजर रही बिजली लाइन में हुआ शॉर्ट सर्किट पीड़ित मोतीलाल पटेल ने बताया कि उनकी दुकान रेलवे निर्माण कार्य के पास मोड़ पर स्थित थी। ऊपर से गुजर रही 11 हजार वोल्ट की बिजली लाइन में शॉर्ट सर्किट हुआ, जिससे एक चिंगारी नीचे गिरी और दुकान में आग लग गई। दुकान में रखा सारा सामान जला आग इतनी तेजी से फैली कि दुकान में रखा किराना सामान, सब्जियां, कोल्डड्रिंक और हाल ही में खरीदा गया नया फ्रिज समेत सभी वस्तुएं जलकर नष्ट हो गईं। पटेल के अनुसार, इस अग्निकांड में उन्हें करीब 5 से 6 लाख रुपए का अनुमानित नुकसान हुआ है। किराना, सब्जी और कोल्डड्रिंक की दुकान पूरी तरह जलकर खाक हो गई। खेतों में खड़ी किसानों की फसलें भी चपेट में आईं आग की लपटें दुकान तक ही सीमित नहीं रहीं, बल्कि आसपास के एक-दो खेतों में खड़ी किसानों की फसल को भी अपनी चपेट में ले लिया। इससे किसानों को भी क्षति पहुंची है। चुरहट थाना प्रभारी दीपक सिंह बघेल ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस की आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है और आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

Priyanka Chopras Humble Seva at Golden Temple, Amritsar

Priyanka Chopras Humble Seva at Golden Temple, Amritsar

12 दिन के भीतर दूसरी बार गोल्डन टेंपल पहुंचीं प्रियंका चोपड़ा। बॉलीवुड अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा अमृतसर स्थित गोल्डन टेंपल पहुंचीं। यहां उन्होंने दरबार साहिब में माथा टेका। इसके बाद वह लंगर हॉल में गईं, जहां उन्होंने करीब डेढ़ घंटे तक बर्तन धोने की सेवा की। साथ ही लंगर के अन्य कामों में भी सहयोग किया। . प्रियंका चोपड़ा पिछले कुछ दिनों से अमृतसर में अपनी आने वाली फिल्म ‘अमरी’ की शूटिंग कर रही थीं। बीती रात उनकी शूटिंग पूरी हुई और काम खत्म होते ही वह सीधे गोल्डन टेंपल पहुंच गईं। इस दौरान प्रिंयका चोपड़ा ने गोल्डन टेंपल की मर्यादा का खास ख्याल रखा। वह व्हाइट कलर का शूट पहने नजर आईं। उनका सिर दुपट्‌टे से ढंका हुआ रहा। प्रिंयका चोपड़ा आम श्रद्धालु की तरह यहां रही। यह 12 दिन के भीतर उनकी दूसरी यात्रा है। इससे पहले वह 31 मार्च को भी यहां आई थीं और उस समय भी उन्होंने लंगर हॉल में सेवा की थी। फिल्म की शूटिंग खत्म होने के बाद गोल्डन टेंपल पहुंची प्रियंका चोपड़ा। 18 साल की उम्र में 90 देशों की कंटेस्टेंट्स को पछाड़ मिस वर्ल्ड बनीं उत्तर प्रदेश के बरेली में जन्मीं प्रियंका चोपड़ा ने बचपन में कभी रंगभेद का सामना किया, तो कभी तानों से बचने के लिए बाथरूम में छिपकर खाना खाया। इन सबके बावजूद उन्होंने महज 18 साल की उम्र में 90 देशों की खूबसूरत कंटेस्टेंट्स को पीछे कर 2000 में मिस वर्ल्ड का खिताब अपने नाम किया। मिस वर्ल्ड जीतने के बाद प्रियंका ने पहले तमिल सिनेमा में एंट्री ली और फिर बॉलीवुड में। प्रियंका ने लगातार ऐतराज, कृष, फैशन, डॉन 2, अग्निपथ जैसी बेहतरीन फिल्मों में काम करते हुए खुद को बॉलीवुड की टॉप एक्ट्रेसेस के बीच ला खड़ा किया, लेकिन फिर 2015 के बाद उन्होंने अचानक इंडस्ट्री छोड़ दी। सालों बाद प्रियंका ने एक पॉडकास्ट में बताया कि उन्होंने अपनी मर्जी से बॉलीवुड इंडस्ट्री से दूरी नहीं बनाई थी, बल्कि उन्हें कॉर्नर किया गया था। उन्हें मनमुताबिक काम नहीं दिया जा रहा था और वो लगातार होती पॉलिटिक्स से थक चुकी थीं। फिल्में मिलनी बंद हुईं तो प्रियंका की मां ने उनसे कहा था- तुम्हें कमाई का कोई दूसरा जरिया ढूंढना चाहिए। फिर क्या था, प्रियंका ने बतौर सिंगर करियर की दूसरी पारी शुरू की। इंग्लिश गानों से हॉलीवुड में जगह बनाने वालीं प्रियंका के लिए ये बदलाव अहम साबित हुआ। जहां भारत में जेंडर पे गेप एक अहम बहस का मुद्दा है, वहीं प्रियंका ने हॉलीवुड एक्टर्स के बराबर फीस लेकर इतिहास रचा। वो हॉलीवुड में सबसे ज्यादा काम करने वाली इंडियन एक्ट्रेस हैं। ***************** ये खबर भी पढ़ें: प्रियंका चोपड़ा ने गोल्डन टेंपल में माथा टेका: दुपट्‌टे से सिर ढंककर आईं; लंगर हॉल में जूठे बर्तन मांजने की सेवा की, गुरबाणी सुनी बॉलीवुड अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा मंगलवार को अमृतसर में गोल्डन टेंपल पहुंची। इस दौरान उन्होंने दरबार साहिब में माथा टेका। इसके बाद उन्होंने लंगर हॉल में जाकर जूठे बर्तन धोने की सेवा की। इसके अलावा लंगर हॉल के बाकी कामों में भी सहयोग किया। इस दौरान उन्होंने कुछ देर बैठकर गुरबाणी भी सुनी। (पढ़ें पूरी खबर)

Foreign Investor Activity & Global Market This Week

Foreign Investor Activity & Global Market This Week

Hindi News Business Foreign Investor Activity & Global Market This Week | Iran US Talks Pressure मुंबई1 घंटे पहले कॉपी लिंक ईरान-अमेरिका वार्ता में कोई ठोस समझौता न होने से 13 अप्रैल से शुरू होने वाले हफ्ते में बाजार में तेज उतार-चढ़ाव दिख सकता है। कच्चे तेल की अस्थिर कीमतें, विदेशी निवेशकों की एक्टिविटी और ग्लोबल मार्केट की चाल भी बाजार की दिशा तय करने वाले मुख्य कारण होंगे। शेयर बाजार के लिए पिछला हफ्ता फरवरी 2021 के बाद सबसे बेहतरीन रहा। ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत से तनाव कम होने की उम्मीद में निफ्टी 6% की मजबूती के साथ 24,050 के स्तर पर बंद हुआ। अब क्या बाजार इस बढ़त को बरकरार रख पाएगा। चलिए समझते हैं… सपोर्ट और रेजिस्टेंस सपोर्ट जोन: 23,940 | 23,850 | 23,462 | 23,330 | 22,857 सपोर्ट यानी, वह स्तर जहां शेयर या इंडेक्स को नीचे गिरने से सहारा मिलता है। यहां खरीदारी बढ़ने से कीमत आसानी से नीचे नहीं जाती। यहां खरीदारी का मौका हो सकता है। रेजिस्टेंस जोन: 24,143 | 24,387 | 24,450 | 24,538 | 24,650 | 25,002 रेजिस्टेंस यानी, वह स्तर जहां शेयर या इंडेक्स को ऊपर जाने में रुकावट आती है। ऐसा बिकवाली बढ़ने से होता है। रजिस्टेंस जोन पार करने पर तेजी की उम्मीद रहती है। नोट: सपोर्ट और रेजिस्टेंस के लेवल्स वेल्थ व्यू एनालिटिक्स की रिपोर्ट के अनुसार है। अब 3 फैक्टर्स जो बाजार की दिशा तय कर सकते हैं… 1. ईरान-अमेरिका वार्ता बेनतीजा, क्रूड ऑयल पर दिखेगा असर मिड-ईस्ट में तनाव कम करने के लिए ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान में चल रही 21 घंटे की लंबी बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म हो गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि वे बिना किसी डील के वापस लौट रहे हैं। इसका सीधा असर सोमवार को बाजार और कच्चे तेल की कीमतों पर दिख सकता है। अगर क्रूड की कीमतें बढ़ती हैं, तो इससे भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ेगा। फिलहाल ब्रेंट क्रूड 95.20 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है। 2. दिग्गज कंपनियों के नतीजे तय करेंगे दिशा बाजार की नजर इस हफ्ते आने वाले चौथी तिमाही (Q4) के नतीजों पर भी रहेगी। BSE में लिस्टेड करीब 50 कंपनियां अपने नतीजे पेश करेंगी। निफ्टी की दिग्गज कंपनियों में विप्रो, HDFC बैंक और ICICI बैंक के परिणाम सबसे महत्वपूर्ण होंगे। इसके अलावा बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर की कई अन्य कंपनियां जैसे यस बैंक, एंजल वन और HDFC लाइफ के नतीजे भी इसी हफ्ते आने हैं। 3. FII की बिकवाली और रुपए की चाल विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) अप्रैल में अब तक 48,213 करोड़ रुपए की शेयर बेच चुके हैं, जो बाजार के लिए चिंता का विषय है। हालांकि शुक्रवार को उन्होंने 672 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीदारी की थी। दूसरी ओर, रुपए की स्थिति भी नाजुक बनी हुई है। जानकारों का कहना है कि डॉलर के मुकाबले रुपया आने वाले दिनों में 93.50 से 94 के स्तर तक गिर सकता है। एक्सपर्ट व्यू: 24,700 तक जा सकता है निफ्टी सेंट्रम ब्रोकिंग के टेक्निकल रिसर्च हेड नीलेश जैन के मुताबिक, बाजार का स्ट्रक्चर पॉजिटिव है और निफ्टी ने 24,000 का मनोवैज्ञानिक स्तर पार कर लिया है। अब इंडेक्स 24,300 से 24,500 की ओर बढ़ सकता है। वहीं रेलिगेयर ब्रोकिंग के अजीत मिश्रा का मानना है कि अगर बाजार 23,500 के स्तर को होल्ड करता है, तो यह 24,700 तक जा सकता है। IPO मार्केट: इस हफ्ते 2 नए इश्यू खुलेंगे प्राइमरी मार्केट में भी इस हफ्ते एक्शन दिखेगा। 17 अप्रैल को ‘सिटियस ट्रांसनेट इनविट’ का 1,340 करोड़ रुपए का IPO खुलेगा। साथ ही मेहुल टेलीकॉम का SME IPO भी इसी दिन सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा। लिस्टिंग के मोर्चे पर ओम पावर ट्रांसमिशन समेत तीन कंपनियां बाजार में डेब्यू करेंगी। सेंसेक्स 919 अंक चढ़कर 77,550 पर बंद हुआ था हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार 10 अप्रैल को सेंसेक्स 919 अंक (1.20%) की तेजी के साथ 77,550 पर बंद हुआ था। निफ्टी में भी 275 अंकों (1.16%) की तेजी रही, ये 24,050 पर पहुंच गया। कारोबार में बैंकिंग और ऑटो शेयरों में खरीदारी रही। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

अमेरिका के 60 मेडिकल संस्थानों में ‘पाक-कला’ कोर्स में:सिर्फ डाइट नहीं बदलेंगे डॉक्टर, खाना बनाने का तरीका बताकर भी बीमारी दूर करेंगे

अमेरिका के 60 मेडिकल संस्थानों में ‘पाक-कला’ कोर्स में:सिर्फ डाइट नहीं बदलेंगे डॉक्टर, खाना बनाने का तरीका बताकर भी बीमारी दूर करेंगे

लॉरेन एस्टेस के हाथ बहुत सधे हुए हैं। टफ्ट्स मेडिकल स्कूल की यह छात्रा जब सुआ की पत्तियों को काटती है, तो एकाग्रता वैसी ही होती है जैसी सर्जन की ऑपरेशन थिएटर में। लॉरेन का सपना एक दिन बच्चों की सुरक्षित डिलीवरी कराना है, पर अभी प्राथमिकता कुछ और है… बेहतरीन ‘छोले’ बनाना। लॉरेन अकेली नहीं है। साथ में 14 और छात्र-जो भविष्य के डॉक्टर, डेंटिस्ट व डाइटिशियन हैं, इन दिनों रसोई में पसीना बहा रहे हैं। यह आम कुकिंग क्लास नहीं है, बल्कि टफ्ट्स यूनिवर्सिटी का ‘कलिनरी मेडिसिन’ कोर्स है। अमेरिका के 60 से ज्यादा मेडिकल संस्थानों में यह पाठ्यक्रम अपनाया जा रहा है, जहां डॉक्टरों को किताबी पोषण ही नहीं, बल्कि रसोई साक्षरता भी सिखाई जा रही है। इसका मुख्य विचार ‘फूड इज मेडिसिन’ (भोजन ही औषधि है) अभियान को बढ़ावा देना है, ताकि डॉक्टर सिर्फ डाइट बदलने की सलाह ही न दें, बल्कि उन्हें यह भी समझा सकें कि स्वस्थ भोजन कैसे बनाएं। यानी सिर्फ ये बताना काफी नहीं है कि खाना सेहत के लिए अच्छा है। उन्हें सीखना होगा कि डायबिटीज, किडनी व दिल के रोगों में कौन सी सब्जी दवा की तरह काम कर सकती है। रिटायर्ड पुलिस अफसर चक सेल्फ इस बदलाव के बड़े गवाह हैं। 4 साल पहले उन्हें डायबिटीज व दिल की बीमारी ने इस कदर जकड़ा था कि पैर काटने तक की नौबत आ गई थी। इंसुलिन इंजेक्शन जिंदगी का हिस्सा बन चुके थे। डॉक्टर ने दवाइयों के साथ-साथ ‘मेडिकली टेलर्ड भोजन’ का पर्चा लिखा। चक बताते हैं,‘डॉक्टर्स ने मुझे वह खिलाया जो हमारे पूर्वज खाते थे- बीन्स, दालें, मोटा अनाज।’ नतीजे चमत्कारिक थे। चक का वजन घटा, शुगर लेवल सुधरा और दवाइयां कम हो गई। वे कहते हैं, भोजन ने मुझे फिर से जीना सिखाया।’ यह बदलाव डॉक्टरों को भी बदल रहा है। शेफ मिशेल निशन कहते हैं,‘कई डॉक्टर ‘टॉप शेफ’ जैसे कुकिंग शो के दीवाने हो गए हैं।’ जब एक डॉक्टर करछुल थामता है, तो वह इलाज की नई परिभाषा लिखता है, जहां स्वास्थ्य की नींव अस्पताल के बेड पर नहीं, बल्कि रसोई में रखी जाती है। यह पहल ऐसी मेडिकल व्यवस्था की शुरुआत है, जहां डॉक्टर ​सिर्फ,‘बीमारी का इलाज’ नहीं, बल्कि ‘पूर्ण स्वास्थ्य का निर्माण’ करेंगे। जैसे इन दिनों लॉरेन प्रोजेक्ट के लिए हैती की गर्भवती महिला के लिए भिंडी और मसूर की दाल मिलाकर कुछ नया रच रही हैं जो उसकी सांस्कृतिक पसंद के करीब हो और साथ ही भ्रूण के विकास के लिए जरूरी तत्वों से भरपूर भी हो। शोध भी यही बताते हैं कि यदि डॉक्टर खुद खाना पकाने के बारे में जानते हैं, तो वे इलाज में भोजन को प्रभावी उपकरण के रूप में इस्तेमाल करने को लेकर आश्वस्त होते हैं। सलाह काफी नहीं, पूरी जानकारी होना जरूरी कलिनरी मेडिसिन कोर्स की डायरेक्टर नादिन तासाबेजी कहती हैं,‘मरीज को प्रोटीन खाने की सलाह देना काफी नहीं है। डॉक्टर को उस वस्तु के दाम, पकाने में लगने वाला समय और वह मरीज के स्वाद व परंपरा की अनुसार हैं भी या नहीं… पता होना चाहिए।’