Wednesday, 27 May 2026 | 08:19 PM

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Asha Bhosle Childhood Indore Memories

Asha Bhosle Childhood Indore Memories

इंदौर10 मिनट पहले कॉपी लिंक भारतीय संगीत जगत की दिग्गज गायिका आशा भोसले का 92 साल की उम्र में निधन हो गया। रविवार दोपहर मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। शनिवार शाम उन्हें यहां भर्ती कराया गया था। मध्य प्रदेश से उनका गहरा और भावनात्मक रिश्ता रहा। उनका बचपन इंदौर की छावनी इलाके के मुराई मोहल्ले में बीता, जिसकी यादें वे अक्सर साझा करती थीं। इंदौर की संस्कृति और माहौल का उनके व्यक्तित्व पर गहरा असर रहा। इंदौर निवासी रिश्तेदार मनोज बिनवाले के मुताबिक, आशा ताई को सीहोर के शरबती गेहूं की रोटियां बेहद पसंद थीं और वे कई बार इंदौर से गेहूं मंगवाती थीं। इंदौर के खान-पान से उनका खास लगाव था। सराफा की खाऊ गली के गुलाब जामुन, रबड़ी और दही बड़े उन्हें बेहद पसंद थे। बचपन में वे सराफा चौपाटी जाया करती थीं। आशाजी और लताजी की बचपन की तस्वीर। 17 साल पहले आईं थी इंदौर करीब 17 साल पहले एक कार्यक्रम में इंदौर आईं तो सयाजी होटल में ठहरीं। उन्होंने रिश्तेदारों से घर का खाना मंगवाया था। वे खुद भी नए-नए व्यंजन बनाने की शौकीन थीं। इंदौर में रहने वाले रिश्तेदार मनोज बिनवाले बताते हैं कि बचपन में आशा भोसले, उनकी बहनें लता मंगेशकर और मीना व मां के साथ छावनी से तोपखाना तक करीब 2.5 किमी पैदल चलकर एक समय का भोजन करने जाती थीं। उनके मुताबिक, आशा ताई का इंदौर से लगाव लता मंगेशकर से भी ज्यादा था। वे इंदौर ज्यादा बार आती थीं। कम उम्र में शादी होने के कारण यहां ज्यादा समय नहीं बिता सकीं, लेकिन इंदौर का नमकीन, सराफा के मिष्ठान और सीहोर का शरबती गेहूं उन्हें हमेशा पसंद रहा। बचपन में आशाजी उनकी बहन मीना के साथ। विजयवर्गीय बोले-इंदौर से आत्मीय रिश्ता मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने उनके निधन पर शोक जताते हुए कहा कि आशा भोसले की आवाज ने भारतीय संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और इंदौर से उनका जुड़ाव शहर के लिए गर्व का विषय रहा। उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर की नाटक कंपनी के साथ परिवार कुछ समय इंदौर में रहा था। इसी दौरान उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर का जन्म इंदौर में हुआ। 12 हजार से ज्यादा गानों की विरासत आशा भोसले ने 20 से अधिक भाषाओं में 12,000 से ज्यादा गाने गाए। उनके ‘पिया तू अब तो आजा’, ‘दम मारो दम’, ‘चुरा लिया है तुमने’, ‘इन आंखों की मस्ती’ जैसे गीत आज भी लोकप्रिय हैं। उन्होंने गजल, भजन, पॉप और क्लासिकल हर शैली में अपनी पहचान बनाई और ओपी नैयर, आरडी बर्मन, एआर रहमान जैसे संगीतकारों के साथ काम किया। संघर्षों से भरा निजी जीवन 8 सितंबर 1933 को जन्मीं आशा भोसले, पंडित दीनानाथ मंगेशकर की बेटी और लता मंगेशकर की छोटी बहन थीं। 9 साल की उम्र में पिता के निधन के बाद उन्होंने परिवार संभालने के लिए गायन शुरू किया। उन्होंने पहला गीत 1943 में मराठी फिल्म ‘माझा बाल’ में और हिंदी सिनेमा में 1948 की फिल्म ‘चुनरिया’ में गाया। कम उम्र में की गई पहली शादी 11 साल बाद टूट गई। इसके बाद उन्होंने लंबा समय अकेले बिताया और फिर संगीतकार आर.डी. बर्मन से शादी की। गिनीज बुक में नाम है दर्ज आशा भोसले को दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड, पद्म विभूषण, राष्ट्रीय पुरस्कार और कई फिल्मफेयर अवॉर्ड्स से सम्मानित किया गया। उनका नाम गिनीज बुक में भी दर्ज है। वे ग्रैमी अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट होने वाली पहली भारतीय सिंगर भी थीं। यह खबर भी पढ़ें… सिंगर आशा भोसले का 92 साल की उम्र में निधन सिंगर आशा भोसले का 92 साल की उम्र में निधन हो गया है। रविवार दोपहर मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। उन्हें शनिवार शाम को यहां भर्ती किया गया था। ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल के डॉ. प्रतीत समदानी ने न्यूज एजेंसी PTI को बताया कि आशा भोसले को कई मेडिकल समस्याएं थीं और मल्टी-ऑर्गन फेल्योर यानी उनके कई अंग फेल होने के कारण उनका निधन हुआ। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

किचन से लौंग-लहसुन आउट, सौंफ-इलायची इन! बुजुर्गों को लू से बचाएंगे आयुर्वेद के ये नुस्खे, जानिए – News18 हिंदी

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X किचन से लौंग-लहसुन आउट, सौंफ-इलायची इन! बुजुर्गों को लू से बचाएंगे ये नुस्खे   Ayurvedic Summer Health Tips For Elderly: भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच बुजुर्गों की सेहत को लेकर आयुर्वेद विशेषज्ञों ने विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है. आयुर्वेद के जानकार शिव कुमार पांडे के अनुसार बढ़ती उम्र में पाचन और सहनशक्ति कमजोर होने के कारण बुजुर्गों में डिहाइड्रेशन, चक्कर और बीपी की समस्या तेजी से बढ़ती है. गर्मी से बचाव के लिए खान-पान में बड़े बदलाव की आवश्यकता है. विशेषज्ञों ने रसोई से गर्म तासीर वाले मसालों (लौंग, लहसुन, जायफल) को हटाकर जीरा, सौंफ और छोटी इलायची के प्रयोग पर जोर दिया है. साथ ही, बिना तेल या कम तेल में बनी सुपाच्य सब्जियों को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है. बुजुर्गों को हाइड्रेटेड रखने के लिए तरबूज, खीरा और ककड़ी जैसे फलों के साथ सुबह चने और जौ का सत्तू देना संजीवनी समान है. दोपहर 12 से 3 बजे के बीच बाहर निकलने से परहेज, सूती कपड़ों का चयन और नियमित अंतराल पर नींबू पानी या छाछ का सेवन उन्हें लू के गंभीर दुष्प्रभावों से बचा सकता है.

Asha Bhosle Passes Away at 92

Asha Bhosle Passes Away at 92

16 मिनट पहले कॉपी लिंक भारतीय संगीत जगत की सबसे वर्सेटाइल सिंगर आशा भोसले का 92 साल की उम्र में निधन हो गया है। उन्होंने अपनी आवाज से सात दशकों तक फिल्म इंडस्ट्री पर राज किया। 10 साल की उम्र से करियर शुरू करने वाली आशा ताई को शुरुआती दौर में ‘खराब आवाज’ कहकर स्टूडियो से रिजेक्ट कर दिया गया था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अपनी बड़ी बहन लता मंगेशकर के साये से बाहर निकलकर उन्होंने संगीत की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई और 12,000 से ज्यादा गानों के साथ अपना नाम ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में दर्ज कराया। आशा भोसले ने शास्त्रीय संगीत से लेकर कैबरे, पॉप और गजल तक हर शैली में अपनी महारत साबित की। दिवंगत गायिका आशा भोसले। महाराष्ट्र के सांगली में जन्म, पिता शास्त्रीय गायक रहे आशा भोसले का जन्म 8 सितंबर 1933 को महाराष्ट्र के सांगली में हुआ था। वह प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक और थिएटर कलाकार पंडित दीनानाथ मंगेशकर की बेटी थीं। घर में संगीत का माहौल शुरू से ही था। उनके भाई-बहन लता मंगेशकर, मीना खडीकर, उषा मंगेशकर और हृदयनाथ मंगेशकर भी संगीत की दुनिया से ही जुड़े रहे। जब आशा सिर्फ 9 साल की थीं, तब 1942 में उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर का निधन हो गया। पिता के जाने के बाद परिवार पर आर्थिक संकट आ गया। परिवार को सहारा देने के लिए लता और आशा ने बहुत कम उम्र में गाना और फिल्मों में छोटी भूमिकाएं निभाना शुरू कर दिया था। मराठी फिल्म से बॉलीवुड तक का सफर आशा भोसले ने अपने सिंगिंग करियर की शुरुआत 1943 में एक मराठी फिल्म ‘माझा बाळ’ के गाने ‘चला चला नव बाड़ा’ से की थी। हिंदी सिनेमा में उन्हें पहला मौका 1948 में फिल्म ‘चुनरिया’ के गाने ‘सावन आया’ से मिला। शुरुआती दौर में आशा को वे गाने मिलते थे जिन्हें प्रमुख गायिकाएं जैसे लता मंगेशकर, शमशाद बेगम या गीता दत्त छोड़ देती थीं। उस समय उन्हें अक्सर फिल्मों में विलेन, डांसर या साइड किरदारों के लिए गाने के लिए बुलाया जाता था। आवाज को खराब बताया, स्टूडियो से रिजेक्शन मिला आज जो आवाज दुनिया भर में पहचानी जाती है, एक समय उसे भी नकारा गया था। 1947 में, जब आशा अपने करियर के शुरुआती दौर में थीं, तब फिल्म ‘जान पहचान’ (संगीतकार: खेमचंद प्रकाश) के एक गाने की रिकॉर्डिंग के लिए वे किशोर कुमार के साथ फेमस स्टूडियो गई थीं। वहां के रिकॉर्डिस्ट रॉबिन चटर्जी ने उनकी आवाज सुनने के बाद कहा था, “यह आवाज नहीं चलेगी, इनका गला खराब है, किसी और को बुलाओ।” उस समय आशा को यह कहकर स्टूडियो से बाहर कर दिया गया था कि उनकी आवाज अच्छी नहीं है। इस घटना से किशोर कुमार काफी दुखी हुए थे। रात के 2 बज चुके थे और दोनों महालक्ष्मी रेलवे स्टेशन पर उदास बैठे थे। तब आशा ने ही किशोर दा को ढांढस बंधाते हुए कहा था कि उनकी आवाज को कोई नहीं रोक सकता। इस रिजेक्शन ने आशा को तोड़ा नहीं, बल्कि और बेहतर बनने की प्रेरणा दी। आरडी बर्मन रहे करियर के बड़े टर्निंग पॉइंट्स 50 और 60 के दशक में बॉलीवुड में लता मंगेशकर, शमशाद बेगम और गीता दत्त का दबदबा था। शमशाद बेगम अपनी खनकदार आवाज और गीता दत्त अपने दर्द भरे और वेस्टर्न अंदाज वाले गानों के लिए मशहूर थीं। जब गीता दत्त अपनी निजी जिंदगी की परेशानियों के चलते रिकॉर्डिंग से दूर होने लगीं, तब ओ.पी. नैयर और एस.डी. बर्मन जैसे संगीतकारों ने आशा भोसले की तरफ रुख किया। 1950 के दशक में नैयर ने आशा की आवाज की खनक को पहचाना। 1954 में फिल्म ‘मंगू’ से शुरू हुआ उनका साथ ‘सीआईडी’ (1956) और ‘नया दौर’ (1957) तक आते-आते ब्लॉकबस्टर साबित हुआ। नया दौर का गाना ‘मांग के साथ तुम्हारा’ और ‘उड़े जब जब जुल्फें तुम्हारी’ ने उन्हें मुख्यधारा की टॉप सिंगर्स में शामिल कर दिया। इसके बाद 1960 और 70 के दशक में संगीतकार आरडी बर्मन (पंचम दा) के साथ उनकी जोड़ी ने संगीत की परिभाषा बदल दी। पंचम दा ने आशा से ‘दम मारो दम’ (हरे रामा हरे कृष्णा) और ‘पिया तू अब तो आजा’ (कारवां) जैसे वेस्टर्न और जैज स्टाइल के गाने गवाए, जिन्होंने आशा को ‘क्वीन ऑफ इंडिपॉप’ बना दिया। जब लता के साये से बाहर आईं आशा आशा भोसले के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपनी ही बहन लता मंगेशकर के साथ कॉम्पिटिशन करना था। उस दौर में लता जी की आवाज को ‘आदर्श’ माना जाता था। आशा ने चतुराई से अपनी आवाज के साथ प्रयोग किए। उन्होंने महसूस किया कि अगर वह लता जैसी ही शैली अपनाएंगी, तो वह कभी अपनी पहचान नहीं बना पाएंगी। उन्होंने वेस्टर्न टच, मॉड्यूलेशन को अपनी आवाज में पिरोया, जो उस समय किसी अन्य सिंगर के पास नहीं था। उन्होंने गीता दत्त और शमशाद बेगम जैसे सिंगर्स को उनके ही दौर में कड़ी टक्कर दी और बाद में अलका याग्निक, कविता कृष्णमूर्ति और सुनिधि चौहान जैसी पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा बनीं। जब लोगों को लगा कि वे सिर्फ कैबरे गा सकती हैं, तब 1981 में फिल्म ‘उमराव जान’ आई। संगीतकार खय्याम के निर्देशन में आशा ने ‘दिल चीज क्या है’ और ‘इन आंखों की मस्ती के’ जैसी बेहतरीन गजलें गाकर क्लासिकल गायिकी में भी लता मंगेशकर के बराबर अपनी जगह पक्की कर ली। आशा भोसले का पहला बड़ा सम्मान और वर्ल्ड रिकॉर्ड पहला फिल्मफेयर अवॉर्ड: उन्हें अपना पहला फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका का पुरस्कार 1968 में फिल्म ‘दस लाख’ के गाने ‘गरीबों की सुनो’ के लिए मिला था। कुल फिल्मफेयर अवॉर्ड: उन्होंने कुल 7 बार यह अवॉर्ड जीता। इसके बाद उन्होंने खुद को नॉमिनेशन से अलग कर लिया ताकि नई प्रतिभाओं को मौका मिल सके। 2001 में उन्हें ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड’ से नवाजा गया। नेशनल अवार्ड्स: उन्हें फिल्म ‘उमराव जान’ (1981) और ‘इजाजत’ (1987) के लिए दो बार नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला। पद्म विभूषण: साल 2000 में भारत सरकार ने उन्हें सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान ‘दादा साहब फाल्के अवॉर्ड’ और 2008 में ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स: साल 2011 में गिनीज बुक ने आधिकारिक तौर पर उन्हें संगीत इतिहास में सबसे अधिक स्टूडियो रिकॉर्डिंग (सर्वाधिक गाने) करने वाली कलाकार के रूप में मान्यता दी।

वरिष्ठ वकील और बेटे पर धोखाधड़ी का केस दर्ज:शाजापुर में हाईकोर्ट के निर्देश पर पुलिस ने की कार्रवाई

वरिष्ठ वकील और बेटे पर धोखाधड़ी का केस दर्ज:शाजापुर में हाईकोर्ट के निर्देश पर पुलिस ने की कार्रवाई

शाजापुर कोतवाली पुलिस ने हाईकोर्ट के निर्देश पर वरिष्ठ अभिभाषक नारायण प्रसाद पांडे और उनके बेटे अखिलेश पांडे के खिलाफ कूट रचना,अमानत में खनायत और धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। शिकायत कर्ता महेश पांडे अभिभाषक नारायण प्रसाद पांडे के छोटे भाई है। शिकायत कर्ता के नाम पर दो बैंकों से चार करोड़ का लोन ले लिया। माता-पिता की वसीयत के अनुसार संपत्ति में दोनों भाईयों का बराबरी का हिस्सा था लेकिन अभिभाषक पांडे और उनके बेटे अखिलेश ने कूटरचित दस्तावेजों के आधार महेश पांडे के फर्जी हस्ताक्षरों और शपथ पत्र के माध्यम से बंधन और आईसीआईसीआई बैंक में संपत्ति बंधक रखकर चार करोड़ का लोन ले लिया। महेश पांडे नौकरी में थे और उनकी संपत्ति की देखभाल बड़े भाई करते थे।रिटायर्ड होने के बाद जब शाजापुर आएं और सिविल चेक की तो पता चला बैंकों से लोन है। उन्होंने कोई लोन नहीं लिया और बैंक से जानकारी निकाली तो पता चला बड़े भाई और भतीजे ने मिलकर उनके साथ धोखाधड़ी कर ली। धोखाधड़ी की जानकारी लगने के बाद शिकायत कर्ता ने दस्तावेज इकट्ठा करने शुरू किए। बैंकों में दस्तावेज के लिए गए तो उन्हें देने से इंकार कर दिया। राजस्व विभाग और पंजीयन विभाग से मिले दस्तावेजों के आधार पर कोतवाली पुलिस में शिकायत की। पुलिस ने अभिभाषक पांडे के दबाव में कोई कार्रवाई नहीं की। शिकायत कर्ता ने न्यायालय की शरण ली। न्यायालय ने पुलिस को मामला दर्ज करने के निर्देश दिए। अभिभाषक पांडे ने निचली अदालत के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को सही ठहराते हुए पुलिस को तत्काल प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए। हाईकोर्ट के आदेश के बाद शनिवार कों कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज किया। कोतवाली थाना प्रभारी संतोष सिंह वाघेला ने रविवार दोपहर 1 बजे करीब बताया की पुलिस ने उच्च न्यायालय के आदेश के पालन में आवेदक महेश कुमार पाण्डे निवासी नई सड़क शाजापुर की शिकायत पर वरिष्ठ अभिभाषक नारायण प्रसाद पाण्डे और अखिलेश पाण्डे के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आवेदक ने आरोप लगाया कि आरोपियों द्वारा उनके नाम से फर्जी दस्तावेज तैयार कर विभिन्न स्थानों पर उपयोग किए गए। साथ ही बिना अनुमति उनके नाम पर बैंकों से करोड़ों रुपये का ऋण भी लिया गया। आवेदक के अनुसार, उन्हें अप्रैल 2023 में इस मामले की जानकारी मिली, जब उन्होंने अपने नाम पर बंधन बैंक और आईसीआईसीआई बैंक में लिए गए ऋण की जानकारी प्राप्त की, जबकि उन्होंने स्वयं कोई ऋण नहीं लिया था। आवेदक ने बताया कि आरोपियों ने संयुक्त पारिवारिक संपत्ति से जुड़े मामलों में भी कूटरचित दस्तावेज प्रस्तुत किए और फर्जी हस्ताक्षर कर बंटवारे के आवेदन लगाएं। बाद में आपत्ति के बाद ये आवेदन वापस ले लिए गए। हस्तलिपि विशेषज्ञ की जांच में भी दस्तावेजों पर किए गए हस्ताक्षर फर्जी पाए गए हैं। इस मामले में आवेदक ने पहले पुलिस और प्रशासन को शिकायत की लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा धारा 156(3) के तहत जांच के आदेश दिए गए, जिसे बाद में सत्र न्यायालय और उच्च न्यायालय ने भी यथावत रखा। पुलिस के अनुसार, प्रथम दृष्टया मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 और 120-बी के तहत पाया गया है। फिलहाल मामले की विवेचना जारी है और आरोपियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

HDFC Bank Top Gainer | Sensex Surges 4230 Pts

HDFC Bank Top Gainer | Sensex Surges 4230 Pts

11 मिनट पहले कॉपी लिंक पिछले हफ्ते शेयर बाजार में रही तेजी के कारण देश की टॉप-10 मोस्ट वैल्यूड कंपनियों में से 8 के मार्केट कैपिटलाइजेशन (मार्केट कैप) में कुल 4,13,003.23 करोड़ रुपए का इजाफा हुआ है। इस बढ़त में सबसे आगे बैंकिंग सेक्टर की कंपनियां HDFC बैंक और ICICI बैंक रहीं। बाजार में यह उछाल कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और ग्लोबल संकेतों के कारण देखने को मिला है। पिछले कारोबारी हफ्ते में BSE सेंसेक्स 4,230.7 अंक यानी 5.77% की बढ़त के साथ बंद हुआ, वहीं निफ्टी में भी 1,337.5 अंक (5.88%) की तेजी रही। HDFC बैंक की वैल्यू ₹91,282 करोड़ बढ़ी मुनाफा कमाने वाली कंपनियों में HDFC बैंक टॉप पर रहा। बैंक की मार्केट वैल्यू 91,282.67 करोड़ रुपए बढ़कर अब 12,47,478.57 करोड़ रुपए हो गई है। इसके बाद ICICI बैंक का नंबर आता है, जिसकी वैल्यू में 76,036.36 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई और यह 9,46,741.85 करोड़ रुपए पर पहुंच गई है। बजाज फाइनेंस ने भी निवेशकों को खुश किया और इसकी वैल्यू 60,980.35 करोड़ रुपए बढ़कर 5,75,206.47 करोड़ रुपए हो गई। देश की टॉप-10 कंपनियों में से 8 की वैल्यू ₹4.13 लाख करोड़ बढ़ी कंपनी हफ्ते भर में चेंज (₹ करोड़ में) मौजूदा मार्केट कैप (₹ लाख करोड़ में) HDFC बैंक +91,282 12.47 ICICI बैंक +76,036 9.46 बजाज फाइनेंस +60,980 5.75 L&T +47,624 5.45 एयरटेल +45,873 11.39 SBI +43,614 9.84 TCS +26,303 9.13 हिंदुस्तान यूनिलीवर +21,287 5.06 इन्फोसिस -3,285 5.24 रिलायंस -947 18.27 सोर्स: BSE (6 अप्रैल – 10 अप्रैल, 2026) भारती एयरटेल और SBI के इन्वेस्टर्स को भी फायदा इंफ्रास्ट्रक्चर दिग्गज लार्सन एंड टुब्रो (L&T) की मार्केट वैल्यू में 47,624.97 करोड़ रुपए का इजाफा हुआ। वहीं टेलीकॉम सेक्टर की दिग्गज कंपनी भारती एयरटेल की वैल्यू 45,873.43 करोड़ रुपए बढ़ी। देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक SBI का मार्केट कैप भी 43,614.67 करोड़ रुपए बढ़कर 9.84 लाख करोड़ रुपए के पार निकल गया है। आईटी सेक्टर की बड़ी कंपनी TCS की वैल्यू में 26,303.49 करोड़ रुपए और हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) की वैल्यू में 21,287.29 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी दर्ज की गई। रिलायंस और इन्फोसिस को हुआ मामूली नुकसान एक तरफ जहां 8 कंपनियों ने मोटा मुनाफा कमाया, वहीं रिलायंस इंडस्ट्रीज और इन्फोसिस की वैल्यू में गिरावट आई है। इन्फोसिस का मार्केट कैप 3,285.03 करोड़ रुपए घटकर 5.24 लाख करोड़ रुपए रह गया। वहीं, देश की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज की वैल्यू भी 947.28 करोड़ रुपए कम हुई है। हालांकि, गिरावट के बावजूद रिलायंस 18.27 लाख करोड़ रुपए की वैल्यू के साथ देश की नंबर-1 कंपनी बनी हुई है। बाजार में तेजी की 2 बड़ी वजहें मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक पिछले हफ्ते तेजी के पीछे मुख्य रूप से दो कारण रहे: कच्चे तेल के दाम गिरे: इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर के नीचे आने से घरेलू बाजार को राहत मिली। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल सस्ता होने का सीधा असर बाजार के सेंटिमेंट पर पड़ा। जियोपॉलिटिकल सुधार: अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी युद्धविराम की खबरों से निवेशकों का भरोसा बढ़ा। हालांकि जानकारों का कहना है कि अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे आगे की बढ़त की रफ्तार सीमित रह सकती है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

HDFC Bank Top Gainer | Sensex Surges 4230 Pts

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1 घंटे पहले कॉपी लिंक पिछले हफ्ते शेयर बाजार में रही तेजी के कारण देश की टॉप-10 मोस्ट वैल्यूड कंपनियों में से 8 के मार्केट कैपिटलाइजेशन (मार्केट कैप) में कुल 4,13,003.23 करोड़ रुपए का इजाफा हुआ है। इस बढ़त में सबसे आगे बैंकिंग सेक्टर की कंपनियां HDFC बैंक और ICICI बैंक रहीं। बाजार में यह उछाल कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और ग्लोबल संकेतों के कारण देखने को मिला है। पिछले कारोबारी हफ्ते में BSE सेंसेक्स 4,230.7 अंक यानी 5.77% की बढ़त के साथ बंद हुआ, वहीं निफ्टी में भी 1,337.5 अंक (5.88%) की तेजी रही। HDFC बैंक की वैल्यू ₹91,282 करोड़ बढ़ी मुनाफा कमाने वाली कंपनियों में HDFC बैंक टॉप पर रहा। बैंक की मार्केट वैल्यू 91,282.67 करोड़ रुपए बढ़कर अब 12,47,478.57 करोड़ रुपए हो गई है। इसके बाद ICICI बैंक का नंबर आता है, जिसकी वैल्यू में 76,036.36 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई और यह 9,46,741.85 करोड़ रुपए पर पहुंच गई है। बजाज फाइनेंस ने भी निवेशकों को खुश किया और इसकी वैल्यू 60,980.35 करोड़ रुपए बढ़कर 5,75,206.47 करोड़ रुपए हो गई। देश की टॉप-10 कंपनियों में से 8 की वैल्यू ₹4.13 लाख करोड़ बढ़ी कंपनी हफ्ते भर में चेंज (₹ करोड़ में) मौजूदा मार्केट कैप (₹ लाख करोड़ में) HDFC बैंक +91,282 12.47 ICICI बैंक +76,036 9.46 बजाज फाइनेंस +60,980 5.75 L&T +47,624 5.45 एयरटेल +45,873 11.39 SBI +43,614 9.84 TCS +26,303 9.13 हिंदुस्तान यूनिलीवर +21,287 5.06 इन्फोसिस -3,285 5.24 रिलायंस -947 18.27 सोर्स: BSE (6 अप्रैल – 10 अप्रैल, 2026) भारती एयरटेल और SBI के इन्वेस्टर्स को भी फायदा इंफ्रास्ट्रक्चर दिग्गज लार्सन एंड टुब्रो (L&T) की मार्केट वैल्यू में 47,624.97 करोड़ रुपए का इजाफा हुआ। वहीं टेलीकॉम सेक्टर की दिग्गज कंपनी भारती एयरटेल की वैल्यू 45,873.43 करोड़ रुपए बढ़ी। देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक SBI का मार्केट कैप भी 43,614.67 करोड़ रुपए बढ़कर 9.84 लाख करोड़ रुपए के पार निकल गया है। आईटी सेक्टर की बड़ी कंपनी TCS की वैल्यू में 26,303.49 करोड़ रुपए और हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) की वैल्यू में 21,287.29 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी दर्ज की गई। रिलायंस और इन्फोसिस को हुआ मामूली नुकसान एक तरफ जहां 8 कंपनियों ने मोटा मुनाफा कमाया, वहीं रिलायंस इंडस्ट्रीज और इन्फोसिस की वैल्यू में गिरावट आई है। इन्फोसिस का मार्केट कैप 3,285.03 करोड़ रुपए घटकर 5.24 लाख करोड़ रुपए रह गया। वहीं, देश की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज की वैल्यू भी 947.28 करोड़ रुपए कम हुई है। हालांकि, गिरावट के बावजूद रिलायंस 18.27 लाख करोड़ रुपए की वैल्यू के साथ देश की नंबर-1 कंपनी बनी हुई है। बाजार में तेजी की 2 बड़ी वजहें मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक पिछले हफ्ते तेजी के पीछे मुख्य रूप से दो कारण रहे: कच्चे तेल के दाम गिरे: इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर के नीचे आने से घरेलू बाजार को राहत मिली। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल सस्ता होने का सीधा असर बाजार के सेंटिमेंट पर पड़ा। जियोपॉलिटिकल सुधार: अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी युद्धविराम की खबरों से निवेशकों का भरोसा बढ़ा। हालांकि जानकारों का कहना है कि अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे आगे की बढ़त की रफ्तार सीमित रह सकती है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

सेल्स टैक्स दफ्तर में आग, सबकुछ जला:खंडवा में झाड़ियों को साफ करने आग लगाई, दफ्तर तक फैल गई

सेल्स टैक्स दफ्तर में आग, सबकुछ जला:खंडवा में झाड़ियों को साफ करने आग लगाई, दफ्तर तक फैल गई

खंडवा के सेल्स टैक्स कार्यालय में रविवार दोपहर को भीषण आग लग गई। आग ने पूरी बिल्डिंग को चपेट में लिया है, सबकुछ स्वाहा हो गया हैं। आग लगने की मुख्य वजह प्रारंभिक तौर पर आग लगाकर झाड़ियों को साफ किया जाना सामने आया हैं। फिलहाल पुलिस और फायर ब्रिगेड मौके पर हैं। आधे घंटे के भीतर तीन फायर ब्रिगेड अब तक पहुंच चुकी है। दो तस्वीरें देखिए…

कहीं आपकी किचन का नॉन स्टिक तवा जहर तो नहीं उगल रहा? इन 3 संकेतों से करें पहचान, तुरंत निकालकर फेंक दें

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Last Updated:April 12, 2026, 14:42 IST Non-Stick Cookware Risks: नॉन-स्टिक तवा किचन में सुविधाजनक जरूर होता है, लेकिन खराब होने पर यह सेहत के लिए खतरनाक बन सकता है. तवा की कोटिंग निकलना, खाना चिपकना और बदबू आना इसके खराब होने के संकेत हैं. ऐसे में समय पर तवे को बदलना जरूरी है, ताकि जहरीले केमिकल्स से होने वाले नुकसान से बचा जा सके. नॉन-स्टिक तवा खराब हो जाए, तो उसे तुरंत बदल देना चाहिए. Non-Stick Pan Health Risks: एक जमाने में मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाया जाता था, लेकिन धीरे-धीरे स्टील और एलुमिनियम के बर्तनों का ट्रेंड बढ़ने लगा. अब तमाम लोग नॉन स्टिक बर्तन इस्तेमाल कर रहे हैं. आजकल लगभग हर घर की रसोई में नॉन-स्टिक तवा, कड़ाही और पैन का इस्तेमाल किया जा रहा है. कम तेल में खाना बनाना, जल्दी साफ हो जाना और समय की बचत, ये सभी वजहें इसे बेहद लोकप्रिय बनाती हैं. खासकर हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने वाले लोग नॉन-स्टिक बर्तनों को ज्यादा पसंद करते हैं. लेकिन सुविधा के साथ-साथ इसकी सुरक्षा को लेकर जागरूक रहना भी उतना ही जरूरी है. अगर इन बर्तनों का सही तरीके से उपयोग न किया जाए या ये खराब हो जाएं, तो यही नॉन-स्टिक तवा धीरे-धीरे आपकी सेहत के लिए खतरा बन सकता है. यूपी के गाजियाबाद की डाइटिशियन रंजना सिंह ने News18 को बताया कि नॉन-स्टिक बर्तनों की सतह पर एक खास कोटिंग होती है, जो खाना चिपकने से रोकती है और कम तेल में कुकिंग को आसान बनाती है. समय के साथ या गलत उपयोग के कारण यह कोटिंग घिसने लगती है या टूट जाती है. जब ऐसा होता है, तो इसके छोटे-छोटे कण खाने में मिल सकते हैं, जो शरीर के अंदर जाकर नुकसान पहुंचा सकते हैं. बहुत ज्यादा तापमान पर यह कोटिंग जहरीले धुएं भी छोड़ सकती है, जो सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर फेफड़ों और अन्य अंगों को प्रभावित कर सकते हैं. इसलिए खराब नॉन-स्टिक बर्तनों का उपयोग नहीं करना चाहिए. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. ये 3 संकेत दिखें, तो नॉन स्टिक तवा न करें यूज कोटिंग का छिलना या खुरचना : अगर आपके तवे की सतह पर खरोंचें दिखाई देने लगी हैं या उसकी कोटिंग जगह-जगह से उतर रही है, तो यह स्पष्ट संकेत है कि वह अब सुरक्षित नहीं है. यह स्थिति अक्सर मेटल के चम्मच, ज्यादा रगड़ने या लंबे समय तक इस्तेमाल के कारण होती है. ऐसी हालत में कोटिंग के कण खाने में मिल सकते हैं, जो धीरे-धीरे शरीर में जमा होकर स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकते हैं. इसलिए जैसे ही ऐसी खरोंचें दिखें, तुरंत उस तवे को बदल देना चाहिए. खाना बार-बार चिपकना : नॉन-स्टिक तवे की सबसे बड़ी खासियत यह होती है कि उसमें खाना आसानी से बनता है और चिपकता नहीं. अगर आप नोटिस करें कि अब रोटी, डोसा या सब्जी तवे पर चिपकने लगी है, तो यह इस बात का संकेत है कि उसकी नॉन-स्टिक कोटिंग खराब हो चुकी है. इस स्थिति में न केवल खाना खराब बनता है, बल्कि उसे निकालने के लिए ज्यादा तेल और जोर लगाना पड़ता है, जिससे बर्तन और जल्दी खराब हो सकता है. तवे का रंग बदलना या बदबू आना : अगर आपके नॉन-स्टिक तवे का रंग फीका पड़ गया है, उस पर दाग-धब्बे दिखने लगे हैं या गर्म करने पर अजीब सी गंध आने लगती है, तो यह भी एक चेतावनी संकेत है. यह दर्शाता है कि तवे की सतह में केमिकल बदलाव हो रहे हैं. ऐसे बर्तन से निकलने वाले धुएं और गंध स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं, खासकर अगर लंबे समय तक इसका इस्तेमाल किया जाए. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें First Published : April 12, 2026, 14:42 IST

नहीं रहीं सुरों की मल्लिका आशा भोसले:गरीबी में बहन लता के साथ चोरी-छिपे स्कूल जाती थीं, कभी बीच रिकॉर्डिंग स्टूडियो से निकाला गया

नहीं रहीं सुरों की मल्लिका आशा भोसले:गरीबी में बहन लता के साथ चोरी-छिपे स्कूल जाती थीं, कभी बीच रिकॉर्डिंग स्टूडियो से निकाला गया

नहीं रहीं आशा भोसले सुरों की मल्लिका आशा भोसले का आज 92 साल की उम्र में निधन हो गया। सिंगर को शनिवार रात चेस्ट इन्फेक्शन के चलते मुंबई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया था। आशा भोसले बीते 70 सालों से हिंदी सिनेमा का हिस्सा थीं। उन्होंने कई भाषाओं में रिकॉर्ड 12 हजार गाने गाए। उनके बिना हिंदी सिनेमा की कल्पना करना भी मुश्किल है, हालांकि एक समय ऐसा था जब ये कहकर आशा भोसले को रिकॉर्डिंग स्टूडियो से निकाल दिया गया कि उनकी आवाज खराब है। आज दुनियाभर के कई होटलों की मालकिन आशा भोसले का बचपन गरीबी में बीता। तंगहाली का वो आलम था कि वो बड़ी बहन लता मंगेशकर के साथ चोरी-छिपे स्कूल जाती थीं, जिससे पिता को फीस न देना पड़े। हालांकि पकड़े जाने पर उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया था। पढ़िए आशा भोसले की जिंदगी से जुड़े ऐसे ही अनसुने किस्से- बहन के साथ चोरी-छिपे स्कूल जाती थीं आशा भोसले 8 सितंबर 1933 में आशा भोसले का जन्म ब्रिटिश इंडिया के सांगली में हुआ। उनके पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर, रंगमंच कलाकार थे। घर में तंगहाली का वो आलम था कि बड़ी बहन लता मंगेशकर का जब स्कूल में दाखिला करवाया गया, तो वो आशा को चोरी-छिपे स्कूल ले जाने लगीं। मास्टर से छिपकर वो आशा को साथ बैठा लेती थीं। स्कूल जाते हुए महज दो दिन ही हुए थे कि एक रोज मास्टरजी ने चोरी पकड़ ली। उन्होंने दोनों को क्लासरूम से बाहर कर दिया और कहा कि एक फीस में एक ही बच्चा स्कूल आ सकता है। दोनों घर लौट गए। अगले दिन लता ने फैसला किया कि वो छोटी बहन को पढ़ाएंगी। उन्होंने पिता से बात कर स्कूल से अपना नाम कटवा दिया और अपनी जगह बहन आशा का एडमिशन करवाया। आशा महज 9 साल की थीं, जब उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर का निधन हो गया। ऐसे में लता ने ही संघर्ष कर हिंदी सिनेमा में कदम रखा और बहन की परवरिश की। परिवार पहले पुणे और फिर मुंबई आकर बसा। यहां महज 10 साल की उम्र में आशा भोसले ने गाना शुरू कर दिया। उन्हें पहला ब्रेक मराठी फिल्म माझा बल (1943) के गाने चला चला नाव बला से मिला। आशा महज 15 साल की थीं, जब उन्हें हिंदी फिल्म चुनरिया का सावन आया गाने का मौका मिला। उस दौर में नूर जहां, शमशाद बेगम जैसी सिंगर्स की इंडस्ट्री में पकड़ थी। लता मंगेशकर भी धीरे-धीरे पहचान बना रही थीं, लेकिन आशा इस लिस्ट में कहीं नहीं थीं। उन्हें सिर्फ तब ही मौके मिलते थे, जब फिल्ममेकर्स या तो बड़ी सिंगर्स की फीस चुका नहीं पाते थे या दूसरी सिंगर्स इनकार कर देती थीं। गाना रिकॉर्ड करने पहुंचीं, तो आवाज पर ताना देकर स्टूडियो से निकाला गया आशा भोसले को एक बार खराब आवाज बताकर किशोर कुमार के साथ रिकॉर्डिंग स्टूडियों से बाहर निकाल दिया गया था। 1947 की बात है। आशा, किशोर कुमार के साथ फेमस स्टूडियों में राज कपूर और नरगिस स्टारर फिल्म ‘जान पहचान’ के लिए एक गाना रिकॉर्ड करने गई थी। इस फिल्म के म्यूजिक डायरेक्टर खेमचंद प्रकाश थे। तब स्टूडियो में कोई खास सुविधा नहीं होती थी, माइक भी सिर्फ एक ही रहता था और गायकों को उसके सामने खड़े होकर गाना पड़ता था। आशा और किशोर दा ने जैसे ही गाना शुरू किया, वहां रिकॉर्डिस्ट रॉबिन चटर्जी ने धीरे से म्यूजिक डायरेक्टर खेमचंद्र से बंगाली में कहा- इन दोनों की आवाज माइक में अच्छी नहीं लग रही, दूसरे सिंगर लाओ। पास खड़े किशोर दा ये बात समझ गए और उन्होंने आशा से कहा कि यहां कुछ गड़बड़ है। उनका गाना भी रोक दिया गया और थोड़ी देर में ही उन्हें वहां से निकल जाने को कहा गया। रात के 2 बज चुके थे। दोनों इस अपमान से टूट गए और वहां से निकलकर महालक्ष्मी स्टेशन के पास बैठे और ये चर्चा करने लगे कि आखिर उनसे कहां चूक हुई। सालों बाद किशोर कुमार ने लिया था, अपने और आशा के अपमान का बदला 1957 तक आशा भोसले हिंदी सिनेमा में पहचान बना चुकी थीं। उनके गाने उड़ें जब-जब जुल्फें तेरी काफी हिट रहा था। किशोर कुमार भी अपनी पहचान बना चुके थे। कामयाबी मिलने के बाद एक रोज उन्हें फिर उसी स्टूडियो में रिकॉर्ड करने का मौका मिला। वहां रॉबिन चटर्जी भी मौजूद थे, जिन्होंने सालों पहले उन्हें और आशा को स्टूडियो से निकलवाया था। आशा ताई तो झिझक में कुछ कह नहीं सकीं, लेकिन किशोर कुमार ने मौके का फायदा उठाया और रिकॉर्डिस्ट से कहा- क्यों, आपने तो कहा था कि हम गा नहीं सकते। आप देख लीजिए कि अब हम कहां हैं। 16 की उम्र में की भागकर शादी, बहन से बिगड़े रिश्ते 10 साल की उम्र में गाना शुरू करने वालीं आशा भोसले को महज 16 साल की उम्र में अपने सेक्रेटरी गणपत राव भोसले से प्यार हो गया। गणपत राव उम्र में 15 साल बड़े थे। वो जानती थीं कि परिवार इस रिश्ते को कभी नहीं अपनाएगा, तो उन्होंने 16 की उम्र में घर से भागकर गणपत राव से शादी की। यह फैसला उनके लिए खुशियों से ज्यादा तकलीफें लेकर आया। शादी के बाद उन्हें अपने पति और ससुराल वालों से अच्छा व्यवहार नहीं मिला। वक्त बीतता गया, लेकिन रिश्ते में कड़वाहट बढ़ती ही रही। कुछ साल बाद, शक और तनाव से भरे इस रिश्ते ने आखिरकार दम तोड़ दिया। गणपतराव ने उन्हें घर से निकाल दिया। उस वक्त आशा दो बच्चों के साथ थीं और तीसरे बच्चे की मां बनने वाली थीं। मजबूरी में उन्हें अपने मायके लौटना पड़ा। साल 1960 में दोनों अलग हो गए। बेटे की हुई एक्सीडेंट में मौत, बेटी ने गोली मारकर की आत्महत्या आशा भोसले और गणपत राव के तीन बच्चे थे। उनके बड़े बेटे हेमंत भोसले ने शुरुआत में पायलट के तौर पर काम किया, लेकिन बाद में संगीत की दुनिया में कदम रखा। उन्होंने कुछ यादगार गाने भी दिए, हालांकि उनका सिंगिंग करियर ज्यादा लंबा नहीं चला। 2015 में कैंसर के कारण उनका निधन हो गया। आशा की बेटी वर्षा भोसले, एक जानी-मानी कॉलमनिस्ट थीं। उन्होंने पति से तलाक के बाद 55 साल की उम्र में गोली मारकर आत्महत्या कर

EXCLUSIVE: बंगाल चुनाव से पहले ED का बड़ा एक्शन! कोयले से लेकर कई बड़े नाम तक

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले ईडी ने एक के बाद एक बड़ी कार्रवाई करते हुए बिल्डर्स, मनी लॉन्ड्रिंग, अवैध वैल, ग्राउंड कजा, भर्ती घोटाले और अंतरराष्ट्रीय इक्विटी नेटवर्क पर कार्रवाई की है। कुछ दिनों में राज्य के अलग-अलग मामलों में प्रॉपर्टी, प्रॉपर्टी अटैचमेंट, समन जारी करने और एन्जिल अटैचमेंट जैसी कई बड़ी कार्रवाई सामने आई हैं। इनमें राजनीतिक नेताओं, अधिकारियों, पत्रकारों और कथित अपराध सिंडिकेट से जुड़े लोगों के नाम सामने आये हैं. सबसे पहली बात करते हैं IPAC केस की. 2 अप्रैल 2026 को ईडी ने देश के कई शहरों हैदराबाद, दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, विजय वेंडर और रांची में एक साथ 11 शेयरों पर आधारित बातें बताईं। ये आयातित आईपीएसी के प्रतिष्ठान, उनके संचालकों के घर और उनसे जुड़े एसोसिएट्स के कार्यालय नष्ट हो गए। जांच के दौरान ईडी को ऐसे दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य मिले हैं जो मनी लॉन्ड्रिंग और घरेलू ही नहीं बल्कि इंटरनेशनल एक्सचेंज नेटवर्क की ओर इशारा कर रहे हैं। जांच एजेंसी ने अब यह खुलासा किया है कि लिस्टिंग के नाम पर अवैध अवैध फंडिंग तो नहीं हो रही थी। पार्थ चैट केस में ईडी की सबसे तेज पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी एक बार फिर ईडी के प्रबल दावेदार हैं। 11 अप्रैल 2026 को कोलकाता में उनके आवास और सहयोगी कुमार रॉय के ऑफिस की शुरुआत की गई। ईडी के अनुसार, एसएससी भर्ती निदेशालय में उन्हें तीन बार समन भेजा गया था, लेकिन उन्होंने एक बार भी पूछताछ के लिए पेश नहीं किया। गौरतलब है कि 2022 में प्राथमिक शिक्षक भर्ती निदेशालय में उन्हें गिरफ्तार किया गया था और 2025 में सर्वोच्च न्यायालय से उन्हें जमानत मिल गई थी। अब ईडी उनके प्राइमरी टीचर्स के खिलाफ, एसएससी के टीचर्स और ग्रुप सीडी भर्ती से जुड़े कई मामलों की जांच कर रही है। सोना ‘केस कैश, सोना और हथियार बरामद कोलकाता में कुख्यात सिंडिकेट से जुड़े बिश्वजीत पोद्दार नाइक सोना मॅलास्ट के खिलाफ ईडी ने 1 अप्रैल को 8 जगह पर डकैती की। इस दौरान करीब 1.47 करोड़ रुपये की नकदी, 67 लाख रुपये के सोने-आधे के प्लॉट, एक फॉर्च्यूनर गाड़ी और कई अहम दस्तावेज बरामद हुए। जांच में सामने आया कि यह पूरा नेटवर्क ओबाही, ग्राउंड कजा और अवैध निर्माण के जरिए भारी मात्रा में काला पैसा बना रहा था। एकांत सोना बिजनेसमैन है और ईडी के समन के बावजूद जांच में शामिल नहीं हो रहा है। इस मामले में मैसूर जय कमांडर को भी समन जारी किया गया है, जिसमें वायर तार पुलिस अधिकारी संतनु सिन्हा बिस्वास से जुड़े हुए हैं। एडी के अनुसार इस मामले में दिग्गज नेताओं से भी पूछताछ होगी अमित बंधक केस: फ़र्ज़ी कागज़ों से ज़मीन पर उतरने का बड़ा बाज़ार 28 मार्च 2026 को ईडी ने कोलकाता में 7 स्टॉक्स पर स्टॉक्स को शामिल किया था, जिसमें जमीन पर कब्ज़ा और फर्जीवाड़े के अमीर अमित शामिल थे और उनके सहयोगियों के शेयर थे। जांच में सामने आया कि इंफ्रास्ट्रक्चर एग्रीमेंट, पावर ऑफ अटॉर्नी और नकली दस्तावेज सामान जमीनों पर कब्ज़ा करते थे। इसके बाद यूक्रेनी जमीनों पर रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में आम लोगों को बेच दिया गया था। इस पूरे खेल में मनी लॉन्ड्रिंग का भी इस्तेमाल किया गया। ईडी ने कई बैंक खाते खोले हैं और 20 से ज्यादा एफआईआर दर्ज की हैं। पीडीएस राशन घोटाला: गरीबों का अनाज बाजार में शामिल हो गया 10 अप्रैल 2026 को ईडी ने 17 रिकॉर्ड्स पर छापे मारे, जिसमें निरंजन चंद्र साहा और उनके नेटवर्क से जुड़े लोग शामिल हैं। आरोप है कि सरकारी राशन यानी पीडीएस का हिस्सा गरीबों तक पहुंचने के बजाय अवैध तरीके से बाजार और निर्यात में बेचा जा रहा था। जांच में सामने आया कि बुनियादी एफसीआई के बोरे के कागजात की पहचान बताई गई थी और उसे निजी माल की तरह बेचा गया था। इस दौरान करीब 31.9 लाख रुपये की नकदी और कई डिजिटल साक्ष्य जब्त किये गये। मर्लिन ग्रुप केएस: रियल एस्टेट में बड़ा घोटाला, राजनीतिक कनेक्शन की जांच 8 अप्रैल 2026 को ईडी ने मर्लिन प्रोजेक्ट्स लिमिटेड से 7 स्टॉक्स पर स्टॉक जोड़ा। कंपनी के प्रमोटर सुशील मोहता और साकेत मोहता पर आरोप है कि उन्होंने जमीन मालिक के जरिए बड़े प्रोजेक्ट रखे। ईडी को जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि इस ग्रुप के राज्य के बड़े नेताओं और सरकारी अधिकारियों से संबंध हो सकते हैं। ब्लॉकचेन इन फाइनेंसियल लेन-देन की जांच जारी है। एनआरआई कोटा मेडिकल रिटेलर गोदाम: ईडी के गोदाम पर पुलिस का सामान कोलकाता पुलिस के अधिकारी शांतनु सिन्हा बिस्वास का ईडी ने समन जारी किया है। एनआरआई कोटे के केस मेडिकल पैकेज में अंडर फॉर्च्यूनर पैकेजे से यात्रा की गई है। ईडी के मुताबिक, करीब 85 करोड़ रुपये का लेन-देन सामने आया है. जांच में पाया गया कि फर्जी आवेदकों के लिए एनआरआई कोटे में दाखिला लिया गया था। संतनु सिन्हा बिस्वास ने ईडी के समन को कोर्ट में चुनौती दी है, लेकिन अभी तक ईडी की कार्रवाई पर कोई रोक नहीं लगी है. कोयला घोटाला: 650 करोड़ की उगाही, ईडी ने लगाया कोयला घोटाला 9 अप्रैल 2026 को ईडी ने अवैध कोयला खनन और गरीबों के मामले में विशेष अदालत में बड़ी कार्रवाई की। इस केस में चिन्मय मंडल और किरण खान समेत कई नवजात शामिल हैं. जांच में खुलासा हुआ कि कोयला माफियाओं और उत्पादों पर गुंडा टैक्स वसूला जाता था, जो कोयले की कीमत 20-25% तक होती थी। पिछले पांच साल में सिर्फ उगाही से 650 करोड़ रुपये का काला धन इकट्ठा हुआ। साउथ पॉइंट स्कूल की संपत्ति अटैचमेंट: 18.5 करोड़ ईडी ने कृष्ण दमानी और उनके परिवार से जुड़ी 18.5 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है। आरोप है कि साउथ पॉइंट एजुकेशन सोसाइटी के फंड से फर्जी बिल, फर्जी कर्मचारी और गलत भुगतान वसूला गया। इस पैसे को बाद में फंड फंड, शेयर और सोसाइटी में निवेश कर सफेद कर दिया गया। कस्टम अधिकारी भर्ती: 194 करोड़ की स्मगलिंग का खुलासा ईडी ने 48 लाख रुपए की संपत्ति खरीदी है। जांच में सामने आया कि 2017 में 194 करोड़ रुपये की संपत्ति गलत तरीके से साफ की गई थी। आरोप है कि अमूर्त जांच के आदेश के तहत एनएमओ ने अमूर्त दस्तावेजों का इस्तेमाल किया और दस्तावेजों