कहीं आप भी तो नहीं खा रहे ये सब्जियां कच्ची? सेहत को हो सकता है बड़ा नुकसान

Last Updated:April 13, 2026, 20:13 IST आजकल हेल्दी रहने के लिए लोग कच्ची सब्जियों का सेवन तेजी से बढ़ा रहे हैं, लेकिन हर सब्जी को कच्चा खाना सही नहीं होता. कुछ सब्जियां ऐसी होती हैं, जिन्हें बिना पकाए खाने से शरीर को नुकसान हो सकता है. इसलिए यह जानना जरूरी है कि कौन-सी सब्जियां कच्ची खानी चाहिए और किन्हें पकाकर खाना ज्यादा सुरक्षित और फायदेमंद होता है. आजकल हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने के चलते लोग अपनी डाइट में कच्ची सब्जियों को तेजी से शामिल कर रहे हैं. यह सही भी है, क्योंकि कच्ची सब्जियों में विटामिन, मिनरल्स और फाइबर भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. लेकिन यह समझना बेहद जरूरी है कि हर सब्जी को कच्चा खाना शरीर के लिए फायदेमंद नहीं होता. कुछ सब्जियां ऐसी होती हैं जिन्हें बिना पकाए खाने से फायदा कम और नुकसान ज्यादा हो सकता है. इसलिए सही जानकारी के साथ ही इन्हें डाइट में शामिल करना जरूरी है. कई लोग यह मान लेते हैं कि कच्ची सब्जियां हमेशा ज्यादा पौष्टिक होती हैं, लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है. कुछ सब्जियों में ऐसे प्राकृतिक तत्व होते हैं जो कच्चे रूप में शरीर पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं. उदाहरण के लिए, ब्रोकली, फूलगोभी और पत्तागोभी जैसी सब्जियों में मौजूद तत्व थायरॉइड की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकते हैं, खासकर उन लोगों में जिनमें आयोडीन की कमी होती है. इन सब्जियों को हल्का पकाने से इनके हानिकारक तत्व कम हो जाते हैं और ये आसानी से पच भी जाती हैं. कुछ सब्जियों को पकाकर ही खाएंकुछ सब्जियां ऐसी होती हैं जिन्हें कच्चा खाने से पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. जैसे बैंगन में सोलानिन नामक तत्व पाया जाता है, जो कच्चे रूप में पेट के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है. इसलिए इसे हमेशा पकाकर ही खाना बेहतर माना जाता है. इसी तरह मशरूम में भी कुछ ऐसे कंपाउंड होते हैं जिन्हें शरीर कच्चे रूप में सही से पचा नहीं पाता. पकाने के बाद ये सुरक्षित और सुपाच्य बन जाते हैं. हरी पत्तेदार सब्जियों में भी बरतें सावधानीपालक और चुकंदर के पत्तों जैसी हरी सब्जियां पोषण से भरपूर होती हैं, लेकिन इनमें ऑक्सालेट की मात्रा ज्यादा होती है. अगर इन्हें ज्यादा मात्रा में कच्चा खाया जाए, तो यह शरीर में कैल्शियम के अवशोषण को प्रभावित कर सकता है. लंबे समय तक ऐसा करने से किडनी से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं. इसलिए इनका सेवन संतुलित मात्रा में और हल्का पकाकर करना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है. पाचन तंत्र पर भी पड़ता है असरकच्ची सब्जियों का सीधा असर हमारे पाचन तंत्र पर पड़ता है. इनमें फाइबर ज्यादा होता है, जो हर किसी के लिए आसानी से पचाना संभव नहीं होता. जिन लोगों का पाचन तंत्र कमजोर होता है या जिन्हें गैस, पेट फूलने या इरिटेबल बाउल सिंड्रोम जैसी समस्या होती है, उन्हें कच्ची सब्जियां कम ही खानी चाहिए. उनके लिए हल्की पकी हुई सब्जियां ज्यादा फायदेमंद साबित होती हैं. About the Author Vividha Singh विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi First Published : April 13, 2026, 20:13 IST
IMD Monsoon Forecast 2026 | India Weather Update

नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक भारत मौसम विभाग के मुताबिक, इस साल बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान है। वहीं दक्षिण-पश्चिम मानसून 1 जून के आसपास केरल तट पर पहुंच सकता है। इसके बाद यह आगे बढ़ते हुए भोपाल सहित मध्य भारत में 15 से 20 जून के बीच दस्तक देगा। पिछले साल मानसून तय समय से 8 दिन पहले यानी 24 मई को ही केरल पहुंच गया था। मानसून केरल से आगे बढ़ते हुए महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में आमतौर पर मध्य जून तक पहुंचता है। 11 जून तक मुंबई और 8 जुलाई तक पूरे देश में फैल जाता है। इसकी वापसी उत्तर-पश्चिम भारत से 17 सितंबर को शुरू होती है और यह पूरी तरह 15 अक्टूबर तक लौट जाता है। एल नीनो इफेक्ट की वजह से मानसून में देरी हो सकती है। हालांकि सीजन के आखिर में थोड़ी राहत मिल सकती है। इस साल कम बारिश का अनुमान मौसम विभाग के मुताबिक, इस बार देश में मानसून सीजन के दौरान करीब 80 सेंटीमीटर बारिश होने का अनुमान है, जबकि 1971-2020 के आंकड़ों के आधार पर लॉन्ग पीरियड एवरेज 87 सेंटीमीटर है। IMD के डिप्टी डायरेक्टर जनरल डॉ. एम. मोहापात्रा प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इस साल देश में कुल बारिश लॉन्ग पीरियड एवरे का करीब 92% रहने का अनुमान है, जिसे सामान्य से कम कैटेगरी में रखा गया है। क्या होता है लॉन्ग पीरियड एवरेज मौसम विभाग ने 1971-2020 की अवधि के आधार पर दक्षिण-पश्चिम मानसून के लिए लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) को 87 सेमी (870 मिमी) निर्धारित किया है। इसका मतलब है कि अगर किसी साल की बारिश 87 सेमी से ज्यादा होती है, तो उसे सामान्य से अधिक माना जाता है। अगर कम हो तो कमजोर मानसून माना जाता है। एल नीनो से मानसून में हल्की देरी संभव मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, जून के आसपास एल नीनो की स्थिति विकसित हो सकती है। यह आमतौर पर भारत में मानसून को कमजोर करता है, जिससे बारिश में कमी और ब्रेक की स्थिति बन सकती है। हालांकि, सीजन के आखिर (सितंबर) में इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) के पॉजिटिव फेज में आने की संभावना है। यह स्थिति आमतौर पर बारिश को बढ़ाती है, जिससे एल नीनो के असर की कुछ भरपाई हो सकती है। अल नीनो और ला नीना क्लाइमेट (जलवायु) के दो पैटर्न होते हैं- अल नीनो: इसमें समुद्र का तापमान 3 से 4 डिग्री बढ़ जाता है। इसका प्रभाव 10 साल में दो बार होता है। इसके प्रभाव से ज्यादा बारिश वाले क्षेत्र में कम और कम बारिश वाले क्षेत्र में ज्यादा बारिश होती है। ला नीना: इसमें समुद्र का पानी तेजी से ठंडा होता है। इसका दुनियाभर के मौसम पर असर पड़ता है। आसमान में बादल छाते हैं और अच्छी बारिश होती है। 1972 में सबसे देरी से केरल पहुंचा था मानसून IMD के आंकड़ों के मुताबिक, बीते 150 साल में मानसून के केरल पहुंचने की तारीखें अलग-अलग रही हैं। 1918 में मानसून सबसे पहले 11 मई को केरल पहुंच गया था, जबकि 1972 में सबसे देरी से 18 जून को केरल पहुंचा था। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
IMD Monsoon Forecast 2026 | India Weather Update

नई दिल्ली21 मिनट पहले कॉपी लिंक भारत मौसम विभाग के मुताबिक, इस साल बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान है। वहीं दक्षिण-पश्चिम मानसून 1 जून के आसपास केरल तट पर पहुंच सकता है। इसके बाद यह आगे बढ़ते हुए भोपाल सहित मध्य भारत में 15 से 20 जून के बीच दस्तक देगा। पिछले साल मानसून तय समय से 8 दिन पहले यानी 24 मई को ही केरल पहुंच गया था। मानसून केरल से आगे बढ़ते हुए महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में आमतौर पर मध्य जून तक पहुंचता है। 11 जून तक मुंबई और 8 जुलाई तक पूरे देश में फैल जाता है। इसकी वापसी उत्तर-पश्चिम भारत से 17 सितंबर को शुरू होती है और यह पूरी तरह 15 अक्टूबर तक लौट जाता है। अल नीनो इफेक्ट की वजह से मानसून में देरी हो सकती है। हालांकि सीजन के आखिर में थोड़ी राहत मिल सकती है। इस साल कम बारिश का अनुमान मौसम विभाग के मुताबिक, इस बार देश में मानसून सीजन के दौरान करीब 80 सेंटीमीटर बारिश होने का अनुमान है, जबकि 1971-2020 के आंकड़ों के आधार पर लॉन्ग पीरियड एवरेज 87 सेंटीमीटर है। IMD के डिप्टी डायरेक्टर जनरल डॉ. एम. मोहापात्रा प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इस साल देश में कुल बारिश लॉन्ग पीरियड एवरे का करीब 92% रहने का अनुमान है, जिसे सामान्य से कम कैटेगरी में रखा गया है। क्या होता है लॉन्ग पीरियड एवरेज मौसम विभाग ने 1971-2020 की अवधि के आधार पर दक्षिण-पश्चिम मानसून के लिए लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) को 87 सेमी (870 मिमी) निर्धारित किया है। इसका मतलब है कि अगर किसी साल की बारिश 87 सेमी से ज्यादा होती है, तो उसे सामान्य से अधिक माना जाता है। अगर कम हो तो कमजोर मानसून माना जाता है। अल नीनो से मानसून में हल्की देरी संभव मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, जून के आसपास अल नीनो की स्थिति विकसित हो सकती है। यह आमतौर पर भारत में मानसून को कमजोर करता है, जिससे बारिश में कमी और ब्रेक की स्थिति बन सकती है। हालांकि, सीजन के आखिर (सितंबर) में इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) के पॉजिटिव फेज में आने की संभावना है। यह स्थिति आमतौर पर बारिश को बढ़ाती है, जिससे अल नीनो के असर की कुछ भरपाई हो सकती है। अल नीनो और ला नीना क्लाइमेट (जलवायु) के दो पैटर्न होते हैं- अल नीनो: इसमें समुद्र का तापमान 3 से 4 डिग्री बढ़ जाता है। इसका प्रभाव 10 साल में दो बार होता है। इसके प्रभाव से ज्यादा बारिश वाले क्षेत्र में कम और कम बारिश वाले क्षेत्र में ज्यादा बारिश होती है। ला नीना: इसमें समुद्र का पानी तेजी से ठंडा होता है। इसका दुनियाभर के मौसम पर असर पड़ता है। आसमान में बादल छाते हैं और अच्छी बारिश होती है। 1972 में सबसे देरी से केरल पहुंचा था मानसून IMD के आंकड़ों के मुताबिक, बीते 150 साल में मानसून के केरल पहुंचने की तारीखें अलग-अलग रही हैं। 1918 में मानसून सबसे पहले 11 मई को केरल पहुंच गया था, जबकि 1972 में सबसे देरी से 18 जून को केरल पहुंचा था। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Punjab Anganwadi Recruitment 94 Posts & UPSC Officer Jobs; Govt Naukri Today

Hindi News Career Punjab Anganwadi Recruitment 94 Posts & UPSC Officer Jobs; Govt Naukri Today 3 मिनट पहले कॉपी लिंक आज की सरकारी नौकरी में जानकारी गुजरात में 11000 भर्ती निकली है जिसके लिए कल से आवेदन प्रक्रिया की शुरुआत होगी। हिमाचल प्रदेश में टीचर की 808 वैकेंसी और पंजाब आंगनवाड़ी में 94 पदों पर भर्ती की। साथ ही UPSC में 16 ओपनिंग्स की। इन जॉब्स के बारे में पूरी जानकारी के साथ आवेदन की प्रक्रिया यहां देखिए… 4. गुजरात में 11000 भर्ती, कल से शुरू आवेदन गुजरात राज्य प्राथमिक शिक्षा चयन समिति (GSPESC) ने कक्षा 1 से 5वीं तक के छात्रों को पढ़ाने के लिए 11000 वैकेंसी निकाली है। इस भर्ती के तहत गुजरात के सरकारी प्राथमिक स्कूलों में भर्ती होगी जो जिला और नगर प्राथमिक शिक्षा समितियों के अंतर्गत आते हैं। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट dpegujarat.in पर जाकर 15 अप्रैल यानी कल से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। कुल पदों में से 4% पद दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए आरक्षित हैं। जो पद पहले भर्ती अभियान में नहीं भर पाए थे, उन्हें इस भर्ती के माध्यम से भरा जाएगा। फीस जमा करने और हार्डकॉपी जमा करने की आखिरी तारीख भी 24 अप्रैल तय की गई है। एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : टीईटी – 1 एग्जाम पास, D.El.Ed. या इसके समकक्ष या D.El.Ed. फाइनल ईयर के स्टूडेंट भी आवेदन कर सकते हैं। एज लिमिट : न्यूनतम : 18 साल अधिकतम : 33 साल रिजर्व कैटेगरी के उम्मीदवारों को गुजरात सरकार के नियमों के अनुसार अधिकतम उम्र में छूट दी जाएगी। फीस : जनरल, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस : 200 रुपए एससी, एसटी, पीडब्ल्यूबीडी : 100 सैलरी : पे लेवल – 7 के अनुसार शुरुआती 5 साल के लिए : 26 हजार रुपए प्रतिमाह 5 साल के बाद : 25,500 – 81,100 रुपए प्रतिमाह अन्य अलाउंस का लाभ भी मिलेगा। सिलेक्शन प्रोसेस : मेरिट लिस्ट डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन डिस्ट्रिक्ट एंड स्कूल एलोकेशन सिलेबस : चाइल्ड डेवलपमेंट एंड पेडागॉजी : लर्निंग थ्योरीज, चाइल्ड साइकोलॉजी, टीचिंग मैथड्स लैंग्वेज 1 (गुजराती) : ग्रामर, कॉम्प्रिहेंशन, टीचिंग स्किल्स, लैंग्वेज डेवलपमेंट लैंग्वेज 2 (इंग्लिश) : बेसिक इंग्लिश, वोकेब्यूलरी, ग्रामर, कम्युनिकेशन स्किल्स मैथमेटिक्स : एरिदमेटिक, जियोमेट्री, मेजरमेंट, टीचिंग मैथोडोलॉजी एनवायरोमेंटल स्टडीज : साइंस एंड सोशल स्टडीज बेसिक्स, एनवायरोमेंट, डेली लाइफ कॉन्सेप्ट्स ऐसे करें आवेदन : ऑफिशियल वेबसाइट dpegujarat.in पर जाएं। होमपेज पर “Vidyasahayak Recruitment/Apply Online” लिंक पर क्लिक करें। अगर नए यूजर हैं तो पहले रजिस्ट्रेशन करें। लॉग इन करके अन्य डिटेल्स दर्ज करें। मांगे गए डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें। फीस जमा करके फॉर्म सब्मिट करें। इसका प्रिंटआउट निकाल कर रखें। ऑनलाइन आवेदन लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक 2. हिमाचल प्रदेश में टीचर की 808 वैकेंसी, एज लिमिट 45 साल हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग (HPRCA) ने टीचर (JBT) के 808 पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है। इस भर्ती के लिए आवेदन की शुरुआत 17 अप्रैल से की जाएगी।उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट hprca.hp.gov.in पर जाकर अप्लाई कर सकेंगे। वैकेंसी डिटेल्स : सब्जेक्ट पदों की संख्या म्युजिक टीचर 118 ड्रॉइंग टीचर 118 संस्कृत टीचर 118 फिजिकल एजुकेशनल टीचर (प्राइमरी) 118 हिस्ट्री टीचर 86 हिंदी टीचर 151 जियोग्राफी टीचर 99 एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : म्युजिक टीचर : म्यजुिक या म्युजिकल इंस्ट्रूमेंट में कम से कम 50% अंकों के साथ पीजी डिग्री। कम से कम 50% अंकों के साथ बी.एड. टीईटी पास। हिंदी व अंग्रेजी में एक्सपर्ट होना चाहिए। संस्कृत टीचर : संस्कृत में 50% अंकों के साथ पीजी डिग्री। बी.एड., टीईटी पास और हिंदी व अंग्रेजी में एक्सपर्ट। हिस्ट्री टीचर : हिस्ट्री में 50% अंकों के साथ पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री। बी.एड., टीईटी पास, हिंदी व अंग्रेजी में एक्सपर्ट होना चाहिए। हिंदी टीचर : हिंदी में कम से कम 50% अंकों के साथ पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री। बी.एड., टीईटी पास और हिंदी व अंग्रेजी में एक्सपर्ट होना चाहिए। जियोग्राफी टीचर : जियोग्राफी में कम से कम 50% अंकों के साथ पीजी डिग्री। बी.एड., टीईटी पास और हिंदी व अंग्रेजी में एक्सपर्ट होना चाहिए। ड्राइंग टीचर : 12वीं पास होने के साथ आर्ट एंड क्राफ्ट में 2 वर्षीय डिप्लोमा, या 50% अंकों के साथ फाईन आर्ट्स में ग्रेजुएशन या फाइन आर्ट्स में 55% मार्क्स के साथ पीजी। हिंदी और अंग्रेजी में एक्सपर्ट होना चाहिए। फिजिकल एजुकेशन टीचर : 50% अंकों के साथ 12वीं पास। डीपीईडी (2 साल) या बीपीईडी (50% अंकों के साथ) या शारीरिक शिक्षा को ऑप्शनल सब्जेक्ट के रूप में लेकर 50% अंकों के साथ ग्रेजुएशन या पीटीआई कोर्स के साथ पूर्व सैनिक होना चाहिए। हिंदी और अंग्रेजी में एक्सपर्ट होना चाहिए। एज लिमिट : न्यूनतम : 18 साल सभी श्रेणियों के लिए अधिकतम : 45 साल सैलरी : सैलरी 30 हजार रुपए प्रतिमाह (शुरुआती 10 महीने तक) सिलेक्शन प्रोसेस : रिटन एग्जाम डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन फीस : सभी कैटेगरी के लिए : 800 रुपए प्रोसेसिंग फीस के साथ करेक्शन फीस : 100 ऐसे करें आवेदन : ऑफिशियल वेबसाइट hprca.hp.gov.in पर जाएं। होम पेज पर अप्लाई ऑनलाइन लिंक पर क्लिक करें। लॉगिन करने के बाद पर्सनल डिटेल्स दर्ज करें। मांगे गए डॉक्यूमेंट़्स की स्कैन कॉपी अपलोड करें। ऑनलाइन फीस जमा करें। फॉर्म सब्मिट करें। इसका प्रिंटआउट निकाल कर रखें। ऑनलाइन आवेदन लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक 3. पंजाब आंगनवाड़ी में 94 पदों पर भर्ती, सैलरी 60 हजार तक पंजाब आंगनवाड़ी में 94 पदों पर भर्ती निकली है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट sswcd.punjab.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। वैकेंसी डिटेल्स : पद का नाम पदों की संख्या कंसल्टेंट (प्लानिंग, मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन) 01 प्रोजेक्ट एसोसिएट 01 डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर 07 ब्लॉक कोऑर्डिनेटर 85 कुल पदों की संख्या 94 एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : कंसल्टेंट (प्लानिंग, मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन):पीजी डिग्री, बी टेक/आईटी, एक्सपीरियंस प्रोजेक्ट एसोसिएट : ग्रेजुएट (सीएस/आईटी), एक्सपीरियंस डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर : ग्रेजुएट, डिप्लोमा, एक्सपीरियंस ब्लॉक कोऑर्डिनेटर : ग्रेजुएशन की डिग्री एज लिमिट : न्यूनतम : 21 साल अधिकतम : 37 साल रिजर्व कैटेगरी के उम्मीदवारों को अधिकतम उम्र में छूट दी जाएगी। फीस : जनरल : 800 एससी, बीसी, ईडब्ल्यूएस, पीडब्ल्यूडी,ईएसएस : 400 रुपए सैलरी : कंसल्टेंट (प्लानिंग, मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन): 60,000 रुपए प्रतिमाह प्रोजेक्ट एसोसिएट : 25,000 रुपए प्रतिमाह डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर : 30,000 रुपए प्रतिमाह ब्लॉक कोऑर्डिनेटर : 20,000 रुपए प्रतिमाह सिलेक्शन प्रोसेस : मेरिट बेसिस पर स्क्रीनिंग इंटरव्यू डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन पंजाब आंगनवाड़ी एग्जाम सिलेबस : पंजाब जनरल नॉलेज : पंजाब का इतिहास, भूगोल, और वर्तमान योजनाएं महिला एवं बाल विकास : पोषण
कचरा और गंदगी मिलने पर दरोगा की सेवा समाप्त:कर्मचारी अनुपस्थित मिले, दरोगा का कटा वेतन; सफाई में लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त

इंदौर नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल ने सोमवार को शहर की सफाई व्यवस्था का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान दीपमाला ढाबा, सुपर कॉरिडोर लवकुश चौराहा, अरविंदो हॉस्पिटल क्षेत्र, रेलवे स्टेशन, बाणगंगा मेन रोड, इंडस्ट्रियल एरिया, बीमा हॉस्पिटल, नंदा नगर सहित विभिन्न स्थानों का जायजा लिया गया। 5 संस्थाओं से 13 हजार की वसूली दीपमाला ढाबा क्षेत्र में वाइन शॉप, गन्ने की चरखी एवं अन्य दुकानों के बाहर कचरा और गंदगी पाए जाने पर उन्होंने तत्काल चालानी कार्रवाई के निर्देश दिए। निर्देशों के पालन में क्षेत्रीय सीएसआई द्वारा 5 संस्थाओं के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए 13 हजार रुपए की वसूली की गई। अरविंदो हॉस्पिटल के पास सड़क किनारे मिट्टी के ढेर से यातायात प्रभावित होने पर उसे तुरंत हटाने के निर्देश दिए गए। जोनल अधिकारीनरेंद्र कुरील ने मौके पर कार्रवाई करते हुए मिट्टी हटाकर यातायात सुचारू कराया। बाणगंगा मेन रोड और इंडस्ट्री एरिया में कर्मचारी अनुपस्थित जोन 9 के वार्ड 47 के तहत रेलवे स्टेशन क्षेत्र के निरीक्षण में स्टेशन और संपर्क मार्गों पर गंदगी पाए जाने पर संबंधित क्षेत्रीय दरोगा का एक दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए गए। इसी तरह बाणगंगा मेन रोड और इंडस्ट्री एरिया में कर्मचारी अनुपस्थित मिलने तथा गंदगी पाए जाने पर संबंधित दरोगाओं का एक-एक दिन का वेतन काटने के आदेश दिए गए। दरोगा विकेंद्र करोसिया की सेवा समाप्त अरविंदो हॉस्पिटल एवं लवकुश चौराहा क्षेत्र में निरीक्षण के दौरान सफाई व्यवस्था अत्यंत खराब मिलने पर क्षेत्रीय दरोगा विकेंद्र करोसिया की सेवा समाप्त करने के निर्देश जारी किए गए। बीमा अस्पताल रोड, नंदा नगर क्षेत्र में रोड डिवाइडर के बीच सी एंड डी वेस्ट पड़े होने और समुचित सफाई नहीं मिलने पर संबंधित दरोगा का एक दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए गए। निगम कमिश्नर ने स्पष्ट कहा कि शहर की स्वच्छता में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
भिंड में कांग्रेस कमेटी करेगी संगठन का विस्तार:हर वार्ड में 25 सदस्यीय कमेटी बनाएगी, कार्यकर्ता हर वार्ड में घर-घर पहुंचकर लोगों से संवाद करेंगे

भिंड शहर में कांग्रेस संगठन को जमीनी स्तर तक मजबूत करने के लिए जिला कांग्रेस कमेटी ने संगठन विस्तार का अभियान तेज कर दिया है। इसी क्रम में शहर के प्रत्येक वार्ड में 25 सदस्यीय कमेटियों के गठन की तैयारी शुरू कर दी गई है, जिससे पार्टी की सक्रियता बूथ स्तर तक बढ़ाई जा सके। जिला कांग्रेस नेतृत्व के निर्देश पर आयोजित बैठक में संगठन विस्तार को लेकर रणनीति बनाई गई। इसमें तय किया गया कि वार्ड स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ताओं को जोड़कर मजबूत टीम तैयार की जाएगी। इसके साथ ही मंडल स्तर पर भी कमेटियों का गठन किया जाएगा, जिससे संगठनात्मक ढांचा और प्रभावी बन सके। पार्टी नेताओं का कहना है कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य आम जनता की समस्याओं को सीधे तौर पर जानना और उनके समाधान के लिए आवाज उठाना है। कार्यकर्ता हर वार्ड में घर-घर पहुंचकर लोगों से संवाद करेंगे और स्थानीय मुद्दों को प्राथमिकता देंगे। नेताओं ने विश्वास जताया कि इस अभियान से कांग्रेस संगठन को नई मजबूती मिलेगी और कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ेगा।
मुंह से बदबू आ रही है? बिना एक पैसा खर्च किए इस पत्ते को चबाइए, मिनटों में आने लगेगी खुशबू

Last Updated:April 13, 2026, 19:32 IST Guava Leaves Benefits: कुछ इधर-उधर की चीजें खा लें तो सही हेल्दी मुंह से भी बदबू आने लगती है. मुंह की बदबू से न केवल आत्मविश्वास में कमी आती है बल्कि किसी से मुलाकातों में शर्मिंदगी का कारण भी बन जाता है. इसका तत्काल उपाय दवाइयों में नहीं है. बाजार में मिलने वाले महंगे माउथवॉश और स्प्रे कुछ देर के लिए तो असर दिखाते हैं, लेकिन समस्या को जड़ से खत्म नहीं करते. ऐसे में यदि आप इसका परमानेंट इलाज चाहते हैं तो आपके लिए अमरूद का पत्ता सबसे बेस्ट आयुर्वेदिक ऑप्शन है. मुंह की सफाई हमारी पूरी सेहत के लिए जरूरी है. मसूड़ों में सूजन, दांत दर्द या मुंह की बदबू जैसी समस्याएं न सिर्फ परेशानी देती हैं, बल्कि आत्मविश्वास भी कम कर देती हैं. सुबह खाली पेट ताजे अमरूद के पत्ते चबाना इन परेशानियों का आसान और सस्ता तरीका है. इन पत्तों में सूजन कम करने और बैक्टीरिया से लड़ने की खूबियां होती हैं, जो मुंह में बढ़ने वाले बैक्टीरिया को खत्म करने में किसी महंगे दवा जैसी असरदार होती हैं. मुंह की बदबू के लिए एक प्राकृतिक उपाय – मुंह की बदबू बहुत लोगों के लिए परेशानी होती है. दुकानों में मिलने वाले माउथवॉश सिर्फ थोड़ी देर के लिए असर करते हैं, लेकिन अमरूद के पत्ते असली वजह पर काम करते हैं. इनमें मौजूद फ्लावोनॉयड और टैनिन्स मुंह की बदबू पैदा करने वाले बैक्टीरिया को खत्म करते हैं. सुबह एक या दो ताजे पत्ते धोकर अच्छे से चबाएं. पूरे दिन आप फ्रेश महसूस करेंगे और आपको माउथ स्प्रे की जरूरत नहीं पड़ेगी. सूजन और मजबूत मसूड़ों के लिए राहत देती है – अमरूद के पत्ते मसूड़ों से होने वाले खून के लिए एक अच्छा इलाज है. जब इन पत्तों को चबाते हैं, तो इनसे निकलने वाला रस मसूड़ों को गहराई से साफ करता है और सूजन कम करता है. इन पत्तों का काढ़ा या सीधे चबाना मुंह की बदबू और दांत दर्द के लिए एक बेहतरीन प्राकृतिक उपाय है. Add News18 as Preferred Source on Google पाचन तंत्र को डिटॉक्स करना – हैरानी की बात है कि इसके फायदे सिर्फ आपके मुंह तक सीमित नहीं हैं. इन पत्तों को चबाना और उनका रस निगलना आपके पाचन तंत्र को डिटॉक्स करने में मदद करता है. अमरूद के पत्तों में ऐसे तत्व होते हैं जो पेट में नुकसान पहुंचाने वाले बैक्टीरिया को मारते हैं. इससे गैस, कब्ज और एसिडिटी जैसी समस्याओं से तुरंत राहत मिलती है. ये आपके मेटाबॉलिज्म को भी बढ़ाने में मदद करते हैं. शुगर कंट्रोल करने में मदद करता है – अमरूद के पत्ते डायबिटीज के मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं. “न्यूट्रिशन एंड मेटाबॉलिज्म मैगजीन में छपी रिसर्च के मुताबिक, अमरूद के पत्तों का रस शरीर में अल्फा-ग्लूकोसिडेज एंजाइम की एक्टिविटी को कम करता है. आसान भाषा में कहें तो, खाने के बाद ब्लड शुगर अचानक बढ़ने से ये रोकता है. सुबह एक अमरूद का पत्ता चबाने से आपकी शुगर लेवल को नेचुरली कंट्रोल करने में मदद मिलती है. वजन कम करने और ग्लोइंग स्किन के लिए खास तरीका – जो लोग अपना वजन कम करना चाहते हैं उनके लिए यह एक सीक्रेट तरीका है. अमरूद की पत्तियां शरीर में कार्ब्स को शुगर में बदलने से रोकती हैं और फैट जमा होने से बचाती हैं. इनमें विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स भी भरपूर होते हैं. ये आपकी त्वचा को नेचुरल ग्लो देते हैं और झुर्रियां आने से रोकते हैं. मतलब, एक छोटी सी पत्ती आपकी खूबसूरती और सेहत दोनों का ध्यान रखती है. सावधानी और सही तरीका जरूरी है – लेकिन किसी भी चीज का ज्यादा इस्तेमाल नुकसान कर सकता है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, दिन में 2 से 3 ताजे पत्ते चबाना काफी है. अगर आप प्रेग्नेंट हैं या कोई गंभीर बीमारी के लिए दवा ले रहे हैं तो इसे न लें, और अपनी रोजमर्रा की आदत में शामिल करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें. (डिस्क्लेमर : यह खबर सामान्य जानकारी पर आधारित है. न्यूज 18 इसकी पुष्टि नहीं करता.) First Published : April 13, 2026, 19:32 IST
Noida Factory Workers Protest Salary Hike; Violence Erupts

यूपी में नोएडा और ग्रेटर नोएडा का इंडस्ट्रियल इलाका सोमवार को अचानक उबल उठा। 9 अप्रैल से जारी फैक्ट्री कर्मचारियों का प्रदर्शन हिंसक हो गया। हजारों कर्मचारी सड़कों पर उतर आए। . गुस्साए कर्मचारियों ने 13 इलाकों में जमकर तोड़फोड़ और आगजनी की। पुलिस के कई वाहनों में आग लगा दी और पत्थरबाजी की। बवाल की वजह से नेशनल हाईवे-9 पर कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया, जिससे दफ्तर जाने वाले लोग घंटों फंसे रहे। सीएम योगी तक को शांति की अपील करनी पड़ी। अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर हिंसा क्यों भड़की, हरियाणा कनेक्शन क्या है और कहां चूक हुई? पढ़िए रिपोर्ट… सबसे पहले नोएडा में हिंसा भड़कने की वजह समझिए… नोएडा के फैक्ट्री कर्मचारियों में गुस्से की मुख्य वजह पड़ोसी राज्य हरियाणा का एक फैसला है। 9 अप्रैल को हरियाणा सरकार ने कैबिनेट मीटिंग में फैक्ट्री कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी में 35% बढ़ोतरी करने का फैसला लिया। 10 अप्रैल को नोटिफिकेशन जारी किया। जैसे ही ये खबर नोएडा के इंडस्ट्रियल एरिया में फैली, यहां के कर्मचारी भी सैलरी बढ़ाने की मांग करने लगे। हरियाणा के मंत्री अनिल विज ने कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाए जाने की सूचना दी थी। हरियाणा और यूपी में कर्मचारियों की सैलरी में कितना अंतर? हरियाणा- अकुशल श्रमिकों का वेतन 11,275 से बढ़ाकर 15,220 रुपए, अर्द्धकुशल श्रमिकों का वेतन 12,430 से बढ़ कर 16,780 रुपए और कुशल श्रमिकों का वेतन 13,704 से बढ़ कर 18,500 रुपए किया गया। उच्च कुशल का वेतन 14,389 से 19,425 रुपए किया । यह बढ़ोतरी लगभग 35 प्रतिशत है। उत्तर प्रदेश (नोएडा)- यहां अनस्किल्ड वर्करों को लगभग 11,313 रुपए की सैलरी ही मिल रही है। दैनिक मजदूरी- हरियाणा में रोजाना मजदूरी 580 से 750 रुपए तक पहुंच गई है, जबकि नोएडा में केवल 435 से 535 रुपए के बीच है। वर्करों की 5 मांगें जिससे कंपनियां बच रहीं फैक्ट्री कर्मचारियों का कहना है कि बढ़ती महंगाई और एलपीजी सिलेंडर के बढ़ते दामों के बीच मौजूदा सैलरी में गुजारा करना नामुमकिन है। ऐसे में वर्करों ने 5 मांगें उठाई हैं। 1. सैलरी बढ़ोतरी- हरियाणा की तरह पर यूपी में भी न्यूनतम सैलरी में कम से कम 35% बढ़ाई जाए। 2. ओवरटाइम का डबल पैसा- नए श्रम नियमों के हिसाब से अगर कर्मचारी एक्स्ट्रा काम करता है, तो उसे दोगुनी दर से पेमेंट हो। 3. सैलरी स्लिप और टाइम पर भुगतान- हर महीने की 10 तारीख तक सैलरी बैंक खाते में आए। सैलरी स्लिप अनिवार्य रूप से दी जाए। 4. साप्ताहिक छुट्टी- सप्ताह में एक दिन का छुट्टी मिले। अगर छुट्टी के दिन काम लिया जाए, तो उसका भी डबल पैसा मिले। 5. बोनस का सीधा पेमेंट- बोनस सीधे बैंक खाते में जमा हो, न कि बिचौलियों या ठेकेदारों के जरिए वर्कर को मिले। गुस्साए फैक्ट्री वर्करों ने इलाके में आम लोगों की गाड़ियो को भी निशाना बनाया है। अब जानिए क्या कहते हैं लेबर लॉ… वर्कस्पेस पर सिक्योरिटी- वर्कर को काम करने के लिए सुरक्षित और साफ माहौल मिले। काम के तय घंटे- एक निश्चित समय से ज्यादा काम कराने पर ‘ओवरटाइम’ देना जरूरी है। PF और ESI- सैलरी से कटने वाले प्रॉविडेंट फंड (PF) और बीमा (ESI) का लाभ सही समय पर मिले। मनमानी कटौती पर रोक- बिना किसी ठोस वजह से सैलरी काटना गैर-कानूनी है। हिंसा काबू करने के लिए नोएडा के कई इलाकों में रैफिड एक्शन फोर्स की तैनाती की गई है। प्रशासन ने सहमति दी, इंडस्ट्री मालिक तैयार नहीं थे हरियाणा में 7 अप्रैल को फैक्ट्री कर्मचारियों ने सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। नोएडा में भी फैक्ट्री कर्मचारी 9 अप्रैल से प्रदर्शन करने लगे। प्रशासन की ओर से समझौता और मांगों सहमति बनने की बात कही गई थी, लेकिन इसमें इंडस्ट्री के मालिकों की सहमति नहीं थी। जब तक इडस्ट्री के मालिक न्यूनतम मजदूरी देने, आठ घंटे तक काम कराने, ओवरटाइम देने, नाइट ड्यूटी अलाउंस नियमानुसार देने जैसी मांगों पर सहमत नहीं होंगे, तब तक प्रशासन, श्रम और इंडस्ट्री डिपार्टमेंट से समझौते का कोई औचित्य नहीं था। स्थानीय श्रमिकों ने करीब तीन चार महीने पहले स्थानीय श्रम उपायुक्त से भी इस मुद्दे पर बात की थी, श्रम उपायुक्त ने भी मांगों को पूरी कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन बात नहीं बनी। श्रम उपायुक्त की ओर से इस संबंध में जिलाधिकारी को भी अवगत कराया गया था। प्रदर्शन में अभी तक कोई बड़ा संगठन सामने नहीं आया। लेकिन शासन को सूचना है कि सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस के कुछ पदाधिकारी इसे आंदोलन को पर्दे के पीछे से समर्थन कर रहे हैं। आंदोलन का अभी तक कोई राजनीतिक कनेक्शन सामने नहीं आया है। अब पिछले 3 दिन का पूरा घटनाक्रम समझिए… 10 और 11 अप्रैल- होजरी कॉम्प्लेक्स और सूरजपुर-दादरी रोड पर करीब एक हजार फैक्ट्री वर्करों ने प्रदर्शन शुरू किया। पुलिस के लाठीचार्ज से तनाव बढ़ गया। मामला लखनऊ तक पहुंचा। सीएम योगी आदित्यनाथ ने 24 घंटे में मामला सुलझाने के निर्देश दिए। 12 अप्रैल- नोएडा की DM मेधा रूपम और श्रम विभाग के अधिकारियों ने इंडस्ट्री मालिकों के साथ बैठक की। प्रशासन ने कंपनियों को सख्त निर्देश दिए कि वे श्रम कानूनों का पालन करें और समय पर सैलरी दें। कंट्रोल रूम भी बनाया गया। 13 अप्रैल- आश्वासनों से फैक्ट्री वर्कर संतुष्ट नहीं हुए क्योंकि मुख्य मांग यानी सैलरी बढ़ाने को लेकर कोई ठोस फैसला नहीं हुआ। सोमवार सुबह हजारों वर्कर सड़क पर उतर आए और प्रदर्शन हिंसक हो गया। ————————————- घटना से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… नोएडा पुलिस ने भास्कर रिपोर्टर से मारपीट की:कर्मचारियों का प्रदर्शन कवर कर रहे थे, वर्कर्स को घसीटकर बस में बैठाया नोएडा में सोमवार सुबह सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर फैक्ट्री कर्मचारियों का हिंसक प्रदर्शन कवरेज कर रहे पत्रकारों पर पुलिस ने लाठियां चला दीं। भास्कर रिपोर्टर साकेत आनंद से भी पुलिस ने मारपीट की है। पूरी खबर पढ़ें…
GT CSK IPL 2026 Match Venue Change Ahmedabad Chennai

24 मिनट पहले कॉपी लिंक भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने इंडियन प्रीमियर लीग 2026 के शेड्यूल में बदलाव किया है। अब गुजरात टाइटंस और चेन्नई सुपर किंग्स के बीच होने वाले दो मैचों की तारीखें आपस में बदल दी गई हैं। दरअसल, गुजरात में नगर निगम चुनाव होने वाले हैं, जिसे ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है ताकि मैचों के आयोजन में किसी तरह की दिक्कत न आए। अहमदाबाद की जगह अब चेन्नई में होगा 26 अप्रैल का मैच गुजरात टाइटंस और चेन्नई सुपर किंग्स के बीच 26 अप्रैल को होने वाला मुकाबला अब अहमदाबाद की बजाय चेन्नई में खेला जाएगा। पहले यह मैच नरेंद्र मोदी स्टेडियम में होना तय था, लेकिन अब इसे चेन्नई के एम.ए. चिदंबरम स्टेडियम (चेपॉक) में शिफ्ट कर दिया गया है। हालांकि, मैच के समय में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह मुकाबला पहले की तरह दोपहर 3:30 बजे ही खेला जाएगा। 21 मई को अहमदाबाद में होगा दूसरा मुकाबला वहीं, 21 को चेन्नई और गुजरात के बीच खेले जाना वाला दूसरा मुकाबला चेन्नई की बजाय अहमदाबाद में खेला जाएगा। यह मुकाबला शाम 7:30 बजे से होगी। BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इस बदलाव की पुष्टि की है। गुजरात में 26 अप्रैल को नगर निगम चुनाव BCCI ने बताया कि यह बदलाव इसलिए जरूरी था क्योंकि 26 अप्रैल 2026 को अहमदाबाद सहित गुजरात के कई हिस्सों में नगर निगम चुनाव होने हैं। चुनाव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस बल की तैनाती एक बड़ी चुनौती होती है। मैच के लिए हजारों की संख्या में फैंस जुटते हैं, ऐसे में चुनावी ड्यूटी और मैच की सुरक्षा एक साथ संभालना प्रशासन के लिए मुश्किल होता। इसी को देखते हुए BCCI ने गुजरात सरकार और स्थानीय प्रशासन से चर्चा के बाद यह फैसला लिया। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
आयुर्वेद में ‘रानी औषधि’ कही जाने वाली शतावरी नुकसान भी पहुंचाती है, खाने से पहले जान लें ये साइड एफेक्ट्स

Last Updated:April 13, 2026, 19:03 IST shatavari ke side effects: शतावरी को आयुर्वेद में “रानी औषधि” कहा जाता है. गर्भवती महिलाओं को शतावरी के सेवन से नुकसान हो सकता है. कुछ महिलाओं में गर्भपात का जोखिम बढ़ सकता है. शतावरी के सेवन से पहले उसके दुष्परिणामों को जान लेना बहुत जरूरी है. यह गर्भ में पल रहे बच्चे को नुकसान पहुंचा सकता है. जानिए, शतावरी और किन -किन शारीरिक समस्याओं में सेवन से बचना चाहिए. शतावरी के नुकसान. shatavari ke side effects: महिलाओं में गर्भाशय और हार्मोनल असंतुलन से जुड़ी परेशानियां आज के समय में बहुत आम हैं. ये परेशानियां इस हद तक बढ़ चुकी हैं कि इससे प्रजनन क्षमता भी प्रभावित होने लगी है. आयुर्वेद की दुनिया में इन सभी परेशानियों का हल छिपा है और शतावरी को महिलाओं के गर्भाशय से जुड़ी समस्या से छुटकारा पाने का तरीका बताया गया है. शतावरी को आयुर्वेद में “रानी औषधि” कहा गया है. शतावरी पीसीओडी, अनियमित पीरियड, फर्टिलिटी बूस्टर, डिलीवरी के दूध उत्पादन में मददगार, तनाव और एजिंग से मुक्ति से मुक्ति पाने का साधन माना गया है. इन सभी समस्यों से निपटने के लिए आयुर्वेद शतावरी के सेवन की सलाह देता है. शतावरी के फायदों के बारे में तो सभी जानते हैं कि लेकिन इसके नुकसान के बारे में कम ही बात होती है. शतावरी के सेवन के साइड-इफेक्ट्स सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. गर्भवती महिलाओं को शतावरी के सेवन से नुकसान हो सकता है. कुछ महिलाओं में गर्भपात का इतिहास रहा होता है. ऐसे में शतावरी का सेवन शरीर को कमजोर कर सकता है, इसलिए शतावरी के सेवन से पहले उसके दुष्परिणामों को जान लेना बहुत जरूरी है. यह गर्भ में पल रहे बच्चे को नुकसान पहुंचा सकता है. थायरॉइड के मरीज को भी शतावरी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. शतावरी के सेवन से हार्मोन ओवरस्टिम्युलेट हो सकते हैं और यह परेशानी को कम करने की बजाय बढ़ा सकता है. इसके साथ ही, जिन लोगों का पाचन कमजोर होता है और खाना ठीक से पचता नहीं है, उन्हें भी शतावरी का सेवन नहीं करना चाहिए. शतावरी के सेवन से पेट फूलना, गैस, पेट में मरोड़ और दस्त जैसी परेशानी हो सकती है. शतावरी हर किसी को सूट नहीं करती है, कुछ लोगों को इसके सेवन से एलर्जी भी हो जाती है. इसके सेवन से कुछ महिलाओं में त्वचा पर चकत्ते, पित्ती, आंखों से पानी और सांस लेने में परेशानी होने की समस्या भी देखी गई है. ऐसे में सेवन के साथ एलर्जी का भी ध्यान रखें और अगर किसी भी खाद्य पदार्थ से पहले ही एलर्जी है, तो शतावरी के सेवन से बचे. About the Author Anshumala अंशुमाला हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा होल्डर हैं. इन्होंने YMCA दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 15 वर्षों से काम कर रही हैं. न्यूज 18 हिंदी में फरवरी 2022 से लाइफस्टाइ…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें First Published : April 13, 2026, 19:03 IST









