आरटीओ चेक पोस्ट पर कर्मचारियों से मारपीट:अवैध वसूली के आरोप, अधिकारी ने कहा- विवाद सुलझा

सिंगरौली जिले के झुराही स्थित आरटीओ चेक पोस्ट पर कर्मचारियों के साथ मारपीट का एक वीडियो सामने आया है। यह घटना सोमवार दोपहर करीब 3:00 बजे की बताई जा रही है। वीडियो में कुछ लोग आरटीओ विभाग के कर्मचारियों को घेरकर उनके साथ मारपीट और गाली-गलौज करते दिख रहे हैं। वायरल वीडियो में हमलावर लाठी-डंडों से लैस नजर आ रहे हैं। वे कर्मचारियों को धमकी देते हुए कहते सुने जा रहे हैं कि “अब चालान काट कर दिखाना, गाड़ी चढ़ा देंगे।” इस घटना से चेक पोस्ट पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया था। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह पूरा विवाद आरटीओ कर्मचारियों द्वारा कथित अवैध वसूली को लेकर हुआ। आरोप है कि वाहन चालकों से जबरन पैसे वसूले जा रहे थे, जिससे आक्रोशित होकर कुछ लोग विरोध करने पहुंचे और मामला हिंसक हो गया। घटना का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। इस मामले पर जिला परिवहन अधिकारी विक्रम सिंह राठौर ने दैनिक भास्कर से बात की। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों और कुछ लोगों के बीच आपसी विवाद हुआ था। राठौर ने यह भी कहा कि फिलहाल दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया है और स्थिति सामान्य है। फिलहाल इस घटना को लेकर किसी भी पक्ष की ओर से आधिकारिक शिकायत दर्ज होने की जानकारी नहीं मिली है। हालांकि, वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच की मांग उठ रही है।
बंगाल SIR: बंगाल में 34 लाख करोड़ नहीं डालेंगे वोट, SC को राहत से इनकार, ममता को लग सकता है झटका

बंगाल पर सुप्रीम कोर्ट SIR: पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट से नाम हटाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कर दिया कि जिन लोगों के नाम जारी किए गए हैं और अभी भी आवेदन पत्र जारी किए गए हैं, उन्हें बारह पाउंड का अधिकार नहीं दिया जाएगा। इस फैसले से लाखों की उम्मीदों को झटका लगा है। अदालत ने बिना अनुमति के अंतरिम राहत दे दीसुप्रीम कोर्ट ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान ओलावृष्टि वाले लेक को अंतरिम रूप से वोट देने की अनुमति से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ऐसा करने से पूरी चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है. लाखों अपीलें, फिर भी वोट की मात्रा नहींश्रवण के दौरान अविश्वासी नेताओं ने कहा कि करीब 16 लाख अपीलें की गई हैं और इन लोगों को चुनाव में वोट दिया जाना चाहिए। वहीं, जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि कुल अपीलों की संख्या 34 लाख तक पहुंची है। यह भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल के सीएम अमित शाह के बयान पर ‘ये ममता बनर्जी का चेला हुमायूं कबीर बाबरी मस्जिद…’ मुख्य न्यायाधीश का साफ़ जवाबभारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इस मांग को खारिज करते हुए कहा, ‘यह पूरी तरह से संभव नहीं है।’ अगर ऐसा किया गया तो वोट अधिकार को निलंबित करना होगा।” चुनाव आयोग ने सबसे पहले बंगाल की वोटर लिस्ट को रेफ्रिजरेटर कर भुगतान किया है। अब सुप्रीम कोर्ट के विशेष आदेश के बिना कोई नया नाम नहीं जोड़ा जा सकेगा। राज्य में 27 लाख मामलों के लिए 19 अपीलीय न्यायाधिकरण बनाए गए हैं। फाइल को कोर्ट ने बताया ‘समय से पहले’कोर्ट ने 13 लोगों की याचिका को ‘समय से पहले’ पेश किया था। वकील ने कहा कि उन्होंने पहले अपीलीय ट्रिब्यूनल में याचिका दायर की थी। कंपनी ने क्या लगाया आरोप?कंपनी का आरोप है कि चुनाव आयोग सही प्रक्रिया के बिना अपना नाम हटा रहा है और समय पर सुनवाई नहीं हो रही है। वहीं, चुनाव आयोग के वकील ने बताया कि 30-34 लाख अपीलें हैं। यह भी पढ़ें: बंगाल चुनाव 2026: ‘बर्दाश्त नहीं होंगे अगर मुसलमान…’, बंगाल चुनाव को लेकर ये क्या बोले बोल्ट, पढ़ें पूरा बयान कोर्ट ने वोट के अधिकार को अहम बतायाजस्टिस बागची ने कहा कि वोट देना विशेष संवैधानिक अधिकार नहीं है, बल्कि संविधान भी है, जिसमें लोकतंत्र में भागीदारी शामिल है। हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि ट्रिब्यूनल पर अधिक दबाव नहीं डाला जा सकता और सही प्रक्रिया का पालन जरूरी है।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर भाजपा का जोर:मंदसौर में प्रदेश मंत्री बोलीं- 2029 तक दिखेगा असर, 33% आरक्षण से बदलेगा समीकरण

मंदसौर भाजपा जिला कार्यालय में सोमवार को नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर आयोजित प्रेसवार्ता में भाजपा प्रदेश मंत्री बबीता परमार ने कहा कि यह अधिनियम देश का भाग्य बदलने वाला साबित होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण का एक नया स्वर्णिम अध्याय लिखा जा रहा है। प्रेसवार्ता में जिला संगठन से जुड़े कई पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। इस दौरान अधिनियम के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। बबिता परमार ने कहा कि आजादी के बाद से संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को आरक्षण देने की मांग लंबे समय से की जाती रही, लेकिन इसे लागू नहीं किया गया। अब 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान महिलाओं को नीति-निर्धारण में भागीदारी का अवसर देगा और उन्हें नेतृत्वकारी भूमिका में स्थापित करेगा। यह कानून महिलाओं को “वोट बैंक” की मानसिकता से बाहर निकालकर उन्हें निर्णय लेने वाली भूमिका में स्थापित करेगा। अटल सरकार के प्रयासों का भी किया उल्लेख परमार ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय भी महिला आरक्षण विधेयक लाने का प्रयास किया गया था, लेकिन विपक्ष के विरोध के कारण यह पारित नहीं हो सका। बबिता ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा गया कि पार्टी ने वर्षों तक महिला आरक्षण को लेकर केवल राजनीतिक बयानबाजी की, लेकिन इसे लागू करने की ठोस कोशिश नहीं की। शाहबानो प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटकर महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय किया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने महिलाओं के मुद्दों को हमेशा राजनीतिक स्वार्थ के नजरिये से देखा। भाजपा प्रदेश मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की मजबूत भागीदारी सुनिश्चित हो। 2029 के आम चुनाव तक इसका व्यापक असर देखने को मिलेगा और बड़ी संख्या में महिला प्रतिनिधि सदनों में पहुंचेंगी। महिला सशक्तिकरण की योजनाओं का जिक्र प्रेसवार्ता में केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा गया कि पिछले वर्षों में महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। उज्ज्वला योजना, जनधन खाते, मुद्रा योजना, स्वयं सहायता समूह और “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” जैसे अभियानों के जरिए महिलाओं को मुख्यधारा में लाया गया है। “नया भारत” में महिलाओं की निर्णायक भूमिका प्रदेश मंत्री ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम केवल एक कानून नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की दिशा में बड़ा कदम है। इससे महिलाओं को समान अवसर मिलेगा और वे देश के विकास में निर्णायक भूमिका निभा सकेंगी। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाना ही राष्ट्र को सशक्त बनाने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम है।
48 साल बाद टूटा शिवनाथ सिंह का रिकॉर्ड:सेना के हवलदार सावन बरवाल ने नीदरलैंड में रचा इतिहास, मैराथन में बनाया नया नेशनल रिकॉर्ड

भारतीय सेना के हवलदार सावन बरवाल ने एथलेटिक्स की दुनिया में एक नया इतिहास रच दिया है। उन्होंने 12 अप्रैल को नीदरलैंड के रॉटरडैम में आयोजित प्रतिष्ठित ‘एनएन मैराथन’ में फुल मैराथन (42.195 किमी) दौड़कर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड (नेशनल रिकॉर्ड) अपने नाम कर लिया है। एडीजी मिलिट्री सर्वे के अंतर्गत देहरादून स्थित 501 एफएसईजी यूनिट में कार्यरत सावन ने यह दूरी महज 2 घंटे 11 मिनट 58 सेकंड में पूरी की। भारतीय एथलेटिक्स का सबसे पुराना रिकॉर्ड टूटा सावन के इस शानदार प्रदर्शन के साथ ही भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास का सबसे लंबे समय तक कायम रहने वाला रिकॉर्ड टूट गया है। इससे पहले फुल मैराथन का नेशनल रिकॉर्ड महान धावक शिवनाथ सिंह के नाम था। उन्होंने 1978 में 2 घंटे 12 मिनट (2:12:00) के समय के साथ यह कीर्तिमान स्थापित किया था। पिछले 48 सालों से यह रिकॉर्ड अजेय था, जिसे अब सावन बरवाल ने पीछे छोड़ दिया है। तेज हवाओं को चीरते हुए पहली ही मैराथन में छा गए सावन सावन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर की इस बेहद प्रतिस्पर्धी दौड़ में एलीट वर्ग में 20वां स्थान हासिल किया है। सबसे खास बात यह है कि यह उनके करियर की पहली फुल मैराथन थी। अंतिम चरण में नीदरलैंड का मौसम बेहद चुनौतीपूर्ण था और तेज हवाएं चल रही थीं, लेकिन सावन ने गजब का धैर्य और दृढ़ता दिखाते हुए अपनी लय नहीं टूटने दी और फिनिश लाइन पार की। मंडी के छोटे से गांव से आर्मी तक का सफर हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के जोगिंदर नगर स्थित एक छोटे से गांव से ताल्लुक रखने वाले सावन की यह कामयाबी उनकी कड़ी मेहनत और निरंतर अभ्यास का नतीजा है। 2019 में भारतीय सेना में भर्ती होने के बाद से ही उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनानी शुरू कर दी थी। सेना की खेल प्रोत्साहन नीति और सावन की लगन ने आज देश का मान पूरी दुनिया में बढ़ाया है। उनकी यह उपलब्धि लंबी दूरी की दौड़ में भारत की स्थिति को मजबूत करेगी और युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
Noida Protest Violence; Journalist Vs Police

Hindi News National Noida Protest Violence; Journalist Vs Police | Gautambudh Nagar Factory Workers नोएडा13 मिनट पहले कॉपी लिंक नोएडा में सोमवार सुबह सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर फैक्ट्री कर्मचारियों का हिंसक प्रदर्शन कवरेज कर रहे पत्रकारों पर पुलिस ने लाठियां चला दीं। भास्कर रिपोर्टर साकेत आनंद से भी पुलिस ने मारपीट की है। पत्रकारों ने DCP नोएडा सेंट्रल सव्या गोयल से घटना पर नाराजगी जताई और आरोपी पुलिसकर्मी जितेंद्र सिंह के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की। DCP गोयल पत्रकारों ने पत्रकारों की बात तो पूरी सुनी, लेकिन कुछ भी एक्शन नहीं लिया। वह पुलिसवालों का बचाव करती नजर आईं। इस पर नाराज पत्रकारों ने कहा- आप एक्शन नहीं लेती हैं तो हम पुलिस वाले के खिलाफ FIR दर्ज कराएंगे। पुलिसकर्मी जितेंद्र सिंह ने भास्कर रिपोर्टर साकेत आनंद से मारपीट की। घटना के वक्त DCP नोएडा सेंट्रल सव्या गोयल वहां मौजूद थीं। पत्रकारों ने उनसे एक्शन लेने के लिए कहा, लेकिन वह पुलिसकर्मी का बचाव करती नजर आईं। घटनाक्रम का पूरा वीडिया देखिए… भास्कर रिपोर्टर उदय भटनागर ने बताया आंखों देखा हाल मैं और मेरे साथ साकेत आनंद दैनिक भास्कर के लिए नोएडा में मजदूरों का जो प्रोटेस्ट चल रहा है उसे कवर करने आए थे। कई सेक्टर में ये प्रोटेस्ट चल रहा है। मैं सेक्टर 85 में पहुंचा। यहां निनजिन कंपनी है। उसके बाहर हम प्रोटेस्ट कवर कर रहे थे। यहां पुलिस आई और कंपनी के अंदर जो अधिकारी थे उन्हें बाहर निकालने आई। उसी समय पुलिस ने लाठी चार्ज कर दिया। हम उसकी रिकार्डिंग कर रहे थे। उन्होंने मजदूरों को गाड़ी में भरा। साकेत आनंद के ऊपर भी लाठी चलाई गई। साकेत आनंद ने बताया कि इस पूरे इलाके में सुबह से प्रोटेस्ट चल रहा है। लगातार 3-4 दिन से प्रोटेस्ट चल रहा है। आज ILGIN कंपनी के बाहर प्रोटेस्ट चल रहा है। इसके सामने प्रोटेस्ट हुआ। बाहर आगजनी और तोड़फोड़ हुआ। जब हम वहां खड़े थे तब पुलिस आई। पपुलिस के लिए गेट खोला गया। अधिकारी अंदर फंसे थे। पुलिस के बनाए सेफ पैसेज से उन्हें बाहर लाया गया। पुलिस ने वर्कर्स से बात करने की कोशिश की और हम जब उसे रिकार्ड कर रहे थे तो मीडिया को रिकार्ड करने से रोकागया। यानी जो मजदूरों से बात वो कर रहे थे उसे रिकार्ड करने से रोका जा रहा था। वर्कर्स बोल रहे थे कि हम नहीं थे फिर भी उनके साथ धक्का-मुक्की हुई। लाठीचार्ज शुरू कर दिया गया। मैं भी वहीं था मेरे ऊपर भी जितेंद्र कुमार नाम के पुलिस कर्मी ने लाठी चला दी। मैंने उनके बोला कि मेरे पास आई कार्ड है मैं मीडिया से हूं। उसके बावजूद वो खींचातानी करते रहे। हमारी साथी जिस्ट की पत्रकार थी उनके साथ भी खींचतान की गई। उसके बाद पुलिस ने लगातार जवाब मांगा गया कि आप माफी मांगिये ये जिस पुलिसकर्मी ने लाठी चलाई उसके खिलाफ एक्शन लीजिए, लेकिन उन्होंने ऐसा कुछ किया नहीं और लगातार वर्कर्स को वैन में ले जाया गया। पता नहीं कहां ले जाया गया । हम सुबह से उसे कवर कर रहे थे जिस पुलिसकर्मी ने लाठी चलाई उसने भी हमें सुबह से देखा था कि हम मीडिया से हैं। हम कवर कर रहे हैं। पुलिसवाले भी हमसे बात कर रहे थे। लाठी चार्ज में भी हम दूर थे लेकिन फिर भी पुलिसकर्मी भागते हुए आया और सबसे पहले मीडियाकर्मी पर लाठी चलाई। लाठी चलाकर सबसे पहले गाड़ी की तरफ भागा। लाठी चलाने के बाद बाकी पुलिसवाले इधर उधर मारपीट करते रहे,लेकिन जिस पुलिसवाले ने लाठी मारी वो गाड़ी में गया और वहां जो लोग थे मजदूरों से भी मारपीट करने लगा। हम मीडिया से हैं ये बताने के बावजूद वो कोशिश करते रहे कि हम कवरेज न करें। जो एक मैडम थी वो भी लगातार बोल रही थी कि आपलोग वीडियो बंद करें और यहां से जाइये। प्रदर्शन कर रहे वर्कर्स को घसीटकर बस में डालकर हिरासत में लिया गया है। फैक्ट्री के लोगों को निकालने के लिए वर्कर्स से मारपीट भी की गई है। हिंसक प्रदर्शन की तस्वीरें देखिए… नोएडा में प्रदर्शनकारियों ने एक कार शोरूम में आग लगा दी। नोएडा में पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों ने फ्लैग मार्च किया। नोएडा के फेज-2 में मदरसन कंपनी के बाहर प्रदर्शन कर रहे कर्मचारी हिंसक हो गए। गुस्साए कर्मचारियों ने पुलिस की गाड़ी में भी तोड़फोड़ की। उसे पलट दिया। कर्मचारियों ने पुलिस बल पर पत्थरबाजी की। काफी मशक्कत के बाद भीड़ को काबू किया जा सका। गुस्साए लोगों को काबू करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। कर्मचारियों ने नोएडा सेक्टर 15 और 62 में सड़क जाम की। बीच सड़क पर बैठकर कंपनियों के खिलाफ नारेबाजी की। नोएडा सेक्टर-57 में कर्मचारियों ने कंपनियों के दफ्तर में तोड़फोड़ की। नोएडा में हिंसक प्रदर्शन, 50 फैक्ट्रियों में तोड़फोड़: कर्मचारियों ने 10 गाड़ियां फूंकी, पथराव नोएडा में सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे फैक्ट्री कर्मचारियों का प्रदर्शन सोमवार सुबह हिंसक हो गया। अलग-अलग इलाकों में गुस्साए कर्मचारियों ने 50 से ज्यादा फैक्ट्रियों में पथराव किया। तोड़फोड़ की। हाथ में डंडे लेकर सैकड़ों पर कर्मचारी जुलूस निकाल रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक मांगें नहीं मानी जातीं, वो रुकेंगे नहीं। सबसे पहले हालात फेज-2 इलाके में खराब हुए। सुनवाई न होने से कर्मचारी उग्र हो गए। पथराव कर दिया। कई गाड़ियों और बसों को आग लगा दी। पुलिस ने रोकने की कोशिश की तो उनकी गाड़ी पलट दी। हालात बिगड़े तो कई थानों की फोर्स मौके पर पहुंची। कर्मचारियों ने उन पर पथराव कर दिया। फिर पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। सभी रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
ट्रम्प-पुतिन के समर्थन के बावजूद हंगरी में चुनाव हारे ऑर्बन:16 साल बाद सत्ता से बाहर, पुराने साथी पीटर मग्यार भारी बहुमत से जीते

विक्टर ऑर्बन हंगरी का प्रधानमंत्री चुनाव हार गए हैं। वे 16 साल से सत्ता में थे। विपक्षी तिस्जा पार्टी के पीटर मग्यार अगले प्रधानमंत्री बनेंगे। मग्यार पहले ऑर्बन की पार्टी फिदेस से जुड़े थे, लेकिन पार्टी में भ्रष्टाचार के खिलाफ उनसे अलग हो गए थे। ऑर्बन दुनिया के गिने-चुने नेताओं में हैं, जिनकी करीबी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और इजराइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू से है। न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक, इस बार के चुनाव में करीब 80% रिकॉर्ड वोटिंग हुई थी। नतीजों को बड़े राजनीतिक उलटफेर के रूप में देखा जा रहा है। इसका असर यूरोप और ग्लोबल राजनीति पर पड़ेगा। तिस्जा पार्टी की 138 सीटों के साथ बड़ी जीत BBC के मुताबिक, शुरुआती नतीजों में तिस्जा पार्टी ने 199 में 138 सीटों पर जीत दर्ज की है। वहीं, ऑर्बन की फिदेस पार्टी को सिर्फ 55 सीटें ही मिली हैं। तिस्जा को करीब 53% और फिदेस को करीब 37% वोट मिले। इन चुनाव नतीजों के बाद हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में देर रात तक जश्न चलता रहा। डेन्यूब नदी किनारे हजारों लोग जुटे। कारों के हॉर्न, झंडे और नारेबाजी के बीच जश्न चलता रहा। कई जगह लोगों ने रूसियों घर जाओ जैसे नारे लगाए। हंगरी में जश्न की 4 तस्वीरें… ट्रम्प और पुतिन के करीबी माने जाते हैं ऑर्बन ऑर्बन ने अपनी हार स्वीकार कर ली है और अपने समर्थकों को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि अब वे विपक्ष से देश की सेवा करेंगे। ऑर्बन को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का करीबी सहयोगी माना जाता रहा है। हाल ही में उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने चुनाव से पहले हंगरी का दौरा किया था और उनका समर्थन किया था। ऑर्बन यूरोप में ट्रम्प के सबसे भरोसेमंद सहयोगी रहे हैं। 2016 में ट्रम्प के पहली बार चुनाव लड़ने की घोषणा पर ऑर्बन पहले यूरोपीय नेता थे जिन्होंने उन्हें समर्थन दिया था। ऑर्बन को पुतिन का भी समर्थक माना जाता है ऑर्बन रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के करीबी माने जाते रहे हैं। उनकी राजनीति रूस से करीबी और यूरोपीय यूनियन से दूरी पर आधारित रही है। उन्होंने रूस पर लगे प्रतिबंधों का कई बार विरोध किया और यूक्रेन युद्ध जल्दी खत्म करने की बात कही। उनके आलोचकों का कहना है कि यह रुख रूस को खुश करने के लिए है। ऑर्बन ने रूस के बड़े हमले के खिलाफ यूक्रेन को समर्थन देने की यूरोपीयन यूनियन की कोशिशों में बार-बार बाधा डाली। साथ ही उन्होंने पुतिन से करीबी रिश्ते बनाए रखे और रूस से ऊर्जा आयात पर हंगरी की निर्भरता खत्म करने से इनकार किया पीटर मग्यार का राजनीतिक एजेंडा और वादे जीत के बाद पीटर मग्यार ने कहा कि जनता ने झूठ पर सच्चाई को चुना है। उन्होंने यूरोपीयन यूनियन (EU) और NATO के साथ रिश्ते मजबूत करने का वादा किया। EU यह देखेगा कि मग्यार यूक्रेन को लेकर हंगरी की नीति में क्या बदलाव करते हैं। माना जा रहा है कि विदेश नीति में बड़ा बदलाव आ सकता है। मग्यार ने भ्रष्टाचार खत्म करने, न्यायपालिका की स्वतंत्रता बहाल करने और शिक्षा-स्वास्थ्य में सुधार की बात कही। साथ ही उन्होंने ऑर्बन काल की ‘पैट्रोनेज सिस्टम’ (NER) खत्म करने का वादा किया। ऑर्बन के न जीतने की क्या वजह? विक्टर ऑर्बन 2010 में पहली बार हंगरी की सत्ता में आए और तब से उन पर कई आरोप लगते रहे हैं। आरोप है कि सत्ता में आते ही उन्होंने सिस्टम अपने हिसाब से बदलना शुरू किया। उन्होंने चुनाव के ऐसे नियम तय किए कि फायदा उनकी फिदेस पार्टी को मिले। उन पर यह भी आरोप है कि उन्होंने देश की करीब 80% मीडिया और सरकारी संस्थाओं को कंट्रोल में रखा था। उन्होंने EU में अपने करीबियों के लिए कई मुश्किलें पैदा की, जिससे हंगरी के कई फैसले विवादों में आ गए। ————————- ये खबर भी पढ़ें… युगांडा आर्मी चीफ ने तुर्किये से सबसे खूबसूरत महिला मांगी:कहा- शादी करूंगा, नहीं मिली तो डिप्लोमेटिक रिश्ते तोड़ेंगे, तुर्किश एयरलाइंस पर भी रोक लगा देंगे युगांडा के आर्मी चीफ और राष्ट्रपति के बेटे मुहूजी कैनेरुगाबा ने तुर्किये से 1 अरब डॉलर (₹9000 करोड़) और देश की ‘सबसे खूबसूरत महिला’ को अपनी पत्नी बनाने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि मांग पूरी नहीं हुई तो तुर्किये से कूटनीतिक संबंध खत्म कर दिए जाएंगे और तुर्किश एयरलाइन पर रोक लगाई जा सकती है। कैनेरुगाबा ने X पर लिखा कि अगर तुर्किये ने हमारी समस्याओं का समाधान नहीं किया, तो 30 दिन में संबंध तोड़ दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि या तो वे भुगतान करें या हम उनका दूतावास बंद कर देंगे। पूरी खबर पढ़ें…
ट्रम्प-पुतिन के समर्थन के बावजूद हंगरी में चुनाव हारे ऑर्बन:16 साल बाद सत्ता से बाहर, पुराने साथी पीटर मग्यार भारी बहुमत से जीते

विक्टर ऑर्बन हंगरी का प्रधानमंत्री चुनाव हार गए हैं। वे 16 साल से सत्ता में थे। विपक्षी तिस्जा पार्टी के पीटर मग्यार अगले प्रधानमंत्री बनेंगे। मग्यार पहले ऑर्बन की पार्टी फिदेस से जुड़े थे, लेकिन पार्टी में भ्रष्टाचार के खिलाफ उनसे अलग हो गए थे। ऑर्बन दुनिया के गिने-चुने नेताओं में हैं, जिनकी करीबी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और इजराइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू से है। न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक, इस बार के चुनाव में करीब 80% रिकॉर्ड वोटिंग हुई थी। नतीजों को बड़े राजनीतिक उलटफेर के रूप में देखा जा रहा है। इसका असर यूरोप और ग्लोबल राजनीति पर पड़ेगा। तिस्जा पार्टी की 138 सीटों के साथ बड़ी जीत BBC के मुताबिक, शुरुआती नतीजों में तिस्जा पार्टी ने 199 में 138 सीटों पर जीत दर्ज की है। वहीं, ऑर्बन की फिदेस पार्टी को सिर्फ 55 सीटें ही मिली हैं। तिस्जा को करीब 53% और फिदेस को करीब 37% वोट मिले। इन चुनाव नतीजों के बाद हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में देर रात तक जश्न चलता रहा। डेन्यूब नदी किनारे हजारों लोग जुटे। कारों के हॉर्न, झंडे और नारेबाजी के बीच जश्न चलता रहा। कई जगह लोगों ने रूसियों घर जाओ जैसे नारे लगाए। हंगरी में जश्न की 4 तस्वीरें… ट्रम्प के करीबी माने जाते हैं ऑर्बन ऑर्बन ने अपनी हार स्वीकार कर ली है और अपने समर्थकों को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि अब वे विपक्ष से देश की सेवा करेंगे। ऑर्बन को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का करीबी सहयोगी माना जाता रहा है। हाल ही में उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने चुनाव से पहले हंगरी का दौरा किया था और उनका समर्थन किया था। ऑर्बन यूरोप में ट्रम्प के सबसे भरोसेमंद सहयोगी रहे हैं। 2016 में ट्रम्प के पहली बार चुनाव लड़ने की घोषणा पर ऑर्बन पहले यूरोपीय नेता थे जिन्होंने उन्हें समर्थन दिया था। ऑर्बन को पुतिन का भी समर्थक माना जाता है ऑर्बन रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के करीबी माने जाते रहे हैं। उनकी राजनीति रूस से करीबी और यूरोपीय यूनियन से दूरी पर आधारित रही है। उन्होंने रूस पर लगे प्रतिबंधों का कई बार विरोध किया और यूक्रेन युद्ध जल्दी खत्म करने की बात कही। उनके आलोचकों का कहना है कि यह रुख रूस को खुश करने के लिए है। ऑर्बन ने रूस के बड़े हमले के खिलाफ यूक्रेन को समर्थन देने की यूरोपीयन यूनियन की कोशिशों में बार-बार बाधा डाली। साथ ही उन्होंने पुतिन से करीबी रिश्ते बनाए रखे और रूस से ऊर्जा आयात पर हंगरी की निर्भरता खत्म करने से इनकार किया पीटर मग्यार का राजनीतिक एजेंडा और वादे जीत के बाद पीटर मग्यार ने कहा कि जनता ने झूठ पर सच्चाई को चुना है। उन्होंने यूरोपीयन यूनियन (EU) और NATO के साथ रिश्ते मजबूत करने का वादा किया। EU यह देखेगा कि मग्यार यूक्रेन को लेकर हंगरी की नीति में क्या बदलाव करते हैं। माना जा रहा है कि विदेश नीति में बड़ा बदलाव आ सकता है। मग्यार ने भ्रष्टाचार खत्म करने, न्यायपालिका की स्वतंत्रता बहाल करने और शिक्षा-स्वास्थ्य में सुधार की बात कही। साथ ही उन्होंने ऑर्बन काल की ‘पैट्रोनेज सिस्टम’ (NER) खत्म करने का वादा किया। ऑर्बन के न जीतने की क्या वजह? विक्टर ऑर्बन 2010 में पहली बार हंगरी की सत्ता में आए और तब से उन पर कई आरोप लगते रहे हैं। आरोप है कि सत्ता में आते ही उन्होंने सिस्टम अपने हिसाब से बदलना शुरू किया। उन्होंने चुनाव के ऐसे नियम तय किए कि फायदा उनकी फिदेस पार्टी को मिले। उन पर यह भी आरोप है कि उन्होंने देश की करीब 80% मीडिया और सरकारी संस्थाओं को कंट्रोल में रखा था। उन्होंने EU में अपने करीबियों के लिए कई मुश्किलें पैदा की, जिससे हंगरी के कई फैसले विवादों में आ गए। ————————- ये खबर भी पढ़ें… युगांडा आर्मी चीफ ने तुर्किये से सबसे खूबसूरत महिला मांगी:कहा- शादी करूंगा, नहीं मिली तो डिप्लोमेटिक रिश्ते तोड़ेंगे, तुर्किश एयरलाइंस पर भी रोक लगा देंगे युगांडा के आर्मी चीफ और राष्ट्रपति के बेटे मुहूजी कैनेरुगाबा ने तुर्किये से 1 अरब डॉलर (₹9000 करोड़) और देश की ‘सबसे खूबसूरत महिला’ को अपनी पत्नी बनाने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि मांग पूरी नहीं हुई तो तुर्किये से कूटनीतिक संबंध खत्म कर दिए जाएंगे और तुर्किश एयरलाइन पर रोक लगाई जा सकती है। कैनेरुगाबा ने X पर लिखा कि अगर तुर्किये ने हमारी समस्याओं का समाधान नहीं किया, तो 30 दिन में संबंध तोड़ दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि या तो वे भुगतान करें या हम उनका दूतावास बंद कर देंगे। पूरी खबर पढ़ें…
आशा भोसले को याद कर संगीत जगत के सितारे भावुक:उदित, अनु, हरिहरन समेत दिग्गजों ने यादें साझा कीं, कहा- उनकी विरासत हमेशा अमर रहेगी

आशा भोसले के निधन के बाद संगीत जगत में शोक की लहर है। कई दिग्गजों ने उनसे जुड़ी यादें साझा कीं। उदित नारायण ने उन्हें भारतीय संगीत का एक युग बताया और उनके साथ गाना जीवन की बड़ी उपलब्धि कहा। अनु मलिक ने बताया कि चोटिल होने के बावजूद उन्होंने उनके पहले गाने की रिकॉर्डिंग में सहयोग दिया। हरिहरन और कैलाश खेर ने उनके विनम्र स्वभाव और ऊर्जा को प्रेरणादायक बताया। अनुप जलोटा, ललित पंडित, डब्बू मलिक, उत्तम सिंह और रमेश सिप्पी ने भी अनुभव साझा किए। सभी ने कहा कि उनकी आवाज, सादगी और विरासत हमेशा अमर रहेगी। उनकी सरलता, मेहनत और नए कलाकारों को आगे बढ़ाने की प्रवृत्ति सामने आई। उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। उदित नारायण बोले- संगीत जगत के लिए एक युग का अंत है गायक उदित नारायण ने कहा कि आशा जी के निधन की खबर सुनकर उन्हें विश्वास नहीं हुआ। उनके अनुसार वह सिर्फ गायिका नहीं, बल्कि संगीत इतिहास का अहम हिस्सा थीं। उदित नारायण ने बताया कि उनका बचपन नेपाल में बीता, जहां वे रेडियो पर आशा जी को सुनते थे। उन्होंने नहीं सोचा था कि एक दिन वे मुंबई आकर उनके साथ गाएंगे और माइक साझा करेंगे। उन्होंने फिल्म ‘लगान’ का किस्सा याद करते हुए कहा कि ए.आर. रहमान ने उन्हें “राधा कैसे ना जले” के लिए बुलाया था। पहले उन्होंने अपना हिस्सा रिकॉर्ड किया, फिर आशा जी ने उसे यादगार बना दिया। उदित नारायण ने कहा कि आशा जी की सबसे बड़ी खासियत उनकी वर्सेटिलिटी थी। वे हर तरह का गाना, क्लासिकल, रोमांटिक और पॉप आसानी से गा लेती थीं। उन्होंने कहा कि स्टूडियो में आशा जी खुशमिजाज और मजाकिया थीं, लेकिन माइक के सामने आते ही उनकी आवाज में जबरदस्त ताकत और जादू आ जाता था। उदित नारायण ने कहा कि बढ़ती उम्र के बावजूद उनकी आवाज में थकान नहीं आई और वे युवा कलाकारों के लिए प्रेरणा बनी रहीं। अंत में उन्होंने कहा कि आशा जी का जाना संगीत जगत के लिए एक युग का अंत है, लेकिन उनकी आवाज और विरासत हमेशा दिलों में जिंदा रहेगी। अनु मलिक ने कहा- हाथ में चोट लगी थी, फिर भी मेरे लिए रिकॉर्डिंग पर आईं “मेरी मां चली गई थी 2021 में, और मुझे लगता है फिर से मेरी माँ चली गई… यह बहुत दुखद खबर है,” यह कहते हुए अनु मलिक भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने पहला गाना रिकॉर्ड किया, तब उनकी उम्र 14 साल थी। उस समय उन्हें गाने के लिए आशा भोसले को स्टूडियो बुलाना था। आशा भोसले उस वक्त व्यस्त थीं और उनके हाथ में चोट थी, प्लास्टर चढ़ा था। इसके बावजूद वे एक बच्चे के पहले गाने के लिए स्टूडियो आईं। अनु मलिक ने कहा कि वह पल कभी नहीं भूल सकते। उस दौर में आर.डी. बर्मन और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल जैसे बड़े संगीतकारों के गाने चल रहे थे, फिर भी आशा भोसले ने उन्हें सहयोग दिया और हिम्मत बढ़ाई। उन्होंने कहा कि अगर आज वह अनु मलिक बन पाए हैं, तो उसमें आशा भोसले का बड़ा योगदान और आशीर्वाद है। हरिहरन बोले- आशा जी ने कभी छोटा महसूस नहीं होने दिया गायक हरिहरन ने कहा कि आशा भोसले ने अपने सुरों और गीतों से कई दशकों तक लोगों को खुशी दी है। उनके अनुसार, इतने लंबे समय तक शानदार प्रदर्शन करना आम इंसान के बस की बात नहीं, बल्कि “आशीर्वाद से भरी हुई प्रतिभा” है। हरिहरन ने कहा कि उन्हें आशा जी के साथ काम करने का सौभाग्य मिला और वह उन्हें परिवार का हिस्सा मानते हैं। उनके लिए उनका जाना किसी परिवार के सदस्य जैसा दुख है। उन्होंने कहा कि आशा जी ने हर तरह के संगीत, क्लासिकल, रोमांटिक और अन्य जॉनर्स में अपनी अलग पहचान बनाई। 90 की उम्र के बाद भी उनमें वही ऊर्जा और जोश था, जो युवा कलाकार में होता है। हरिहरन ने बताया कि 1984–85 में उन्होंने आशा जी के लिए एक गजल एल्बम कंपोज किया था। उसमें आठ गजलें थीं, जिनमें छह सोलो उन्होंने गाईं और दो डुएट उन्होंने खुद गाए थे। उन्होंने बताया कि उस समय वे नए कलाकार थे, लेकिन आशा जी ने उन्हें छोटा महसूस नहीं होने दिया। उनका व्यवहार सरल और प्यार से भरा था। उन्होंने हर गाने को ध्यान और मेहनत से सीखा और गाया। हरिहरन ने कहा कि उस अनुभव से उन्हें बड़ा सबक मिला, अगर बड़ा बनना है तो सरल रहना और काम पर ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यही सीख उन्होंने आज तक संभाल कर रखी है। अंत में उन्होंने आशा जी को सरल, विनम्र और हंसमुख कलाकार बताया, जिनकी मुस्कान हर माहौल को रोशन करती थी। कैलाश खेर बोले- आशा जी हमेशा विनम्र और मिलनसार रहीं “हमारी मुलाकातें कई बार मंच पर हुई हैं- कभी रियलिटी शो में, कभी इवेंट्स में,” यह कहते हुए कैलाश खेर ने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि 2007 में, करियर के शुरुआती दौर में पहली एल्बम 2006 में आई थी। उन्हें आशा भोसले के साथ यूएस और कनाडा का करीब एक महीने का टूर मिला। इस दौरान उन्होंने करीब 10 शहरों में परफॉर्म किया। कैलाश खेर ने कहा कि उस टूर में उन्होंने उन्हें करीब से जाना। इतनी बड़ी सीनियर कलाकार होने के बावजूद उनका व्यवहार सरल और अपनापन भरा था। गाड़ी या फ्लाइट—हर जगह वह कॉर्डियल और सहज रहती थीं। उन्होंने कहा, “इससे मुझे उनके स्वभाव का असली पता चला, बहुत मिलनसार और विनम्र। ऐसा नहीं था कि सीनियर होने का घमंड हो। वह सबके साथ बराबरी और प्यार से बात करती थीं।” कैलाश खेर ने कहा कि लंबे टूर से इंसान की असली प्रकृति सामने आती है, कैसा व्यवहार और कितनी विनम्रता है। आशा भोसले में उन्होंने यही खूबी देखी, सीनियर होकर भी सरल, जमीन से जुड़ी और संवेदनशील व्यक्तित्व। अनूप जलोटा बोले- आशा जी अमर हैं और उन्हें हमेशा याद किया जाएगा भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की प्लेबैक सिंगिंग की दूसरी मजबूत स्तंभ चली गई हैं। दो बड़े स्तंभ थे, लता मंगेशकर और आशा भोसले। नई सिंगर्स इन्हीं को आदर्श मानती हैं। उन्होंने अपनी गायकी से एक यूनिवर्सिटी बनाई, जिससे पीढ़ियां सीखती रहेंगी। भजन सम्राट अनूप जलोटा ने कहा कि आशा जी का
गर्मियों में गलत तरीके से तो नहीं खा रहे खीरा, बढ़ सकती हैं ये समस्याएं, जानें खीरा खाने का सही तरीका

Last Updated:April 13, 2026, 18:14 IST Right ways to eat kheera: खीरे में लगभग 90 से 95 प्रतिशत तक पानी होता है, जो शरीर को हाइड्रेट रखने में अहम भूमिका निभाता है. खीरे के तापमान का भी ध्यान रखना जरूरी है. कई लोग इसे फ्रिज से निकालकर तुरंत बहुत ठंडा खा लेते हैं, जो पेट के लिए सही नहीं माना जाता. बहुत ठंडी चीजें खाने से पाचन तंत्र पर असर पड़ सकता है. जानिए, खीरा खाने का सही तरीका और फायदे. खीरा कब और किसी नहीं खाना चाहिए? गर्मी का मौसम शुरू होते ही लोग अपने खानपान में ऐसी चीजें शामिल करने लगते हैं, जो शरीर को ठंडक पहुंचाने के साथ-साथ हाइड्रेटेड भी रखें. खीरा भी उन्हीं में से एक है, जो अक्सर सलाद के रूप में हर घर की थाली में शामिल होता है, हालांकि बहुत से लोग यह नहीं जानते कि खीरे को सही तरीके से कैसे खाया जाए, ताकि इसके पूरे फायदे मिल सकें. गलत तरीके से या जरूरत से ज्यादा सेवन करने पर खीरा पेट से जुड़ी समस्याएं भी पैदा कर सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि सही तरीके से खाया गया खीरा न सिर्फ शरीर को ठंडक देता है, बल्कि त्वचा को भी अंदर से स्वस्थ और चमकदार बनाता है. खीरे में लगभग 90 से 95 प्रतिशत तक पानी होता है, जो शरीर को हाइड्रेट रखने में अहम भूमिका निभाता है. जब शरीर में पानी की कमी नहीं होती, तो खून का प्रवाह बेहतर रहता है और पोषक तत्व आसानी से त्वचा तक पहुंचते हैं. यही प्रक्रिया चेहरे पर ताजगी और निखार लाने में मदद करती है. इसके साथ ही खीरे में विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स भी पाए जाते हैं, जो त्वचा की कोशिकाओं को नुकसान से बचाते हैं और उन्हें रिपेयर करने में मदद करते हैं. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. खीरे को खाने से पहले अच्छी तरह धोना बहुत जरूरी है, क्योंकि इसकी सतह पर धूल, बैक्टीरिया या केमिकल्स हो सकते हैं. अगर खीरा ऑर्गेनिक है, तो इसे छिलके सहित खाना ज्यादा फायदेमंद होता है. इसके छिलके में फाइबर भरपूर मात्रा में होता है, जो पाचन तंत्र को मजबूत करता है और पेट को साफ रखने में मदद करता है. खीरे का जूस शरीर में जमा टॉक्सिन्स को निकालने में भी मदद करता है, जिससे शरीर फिट रहता है. खीरे का सेवन सीमित मात्रा में करना ही बेहतर होता है. जरूरत से ज्यादा खीरा खाने से पेट में गैस, अपच या भारीपन महसूस हो सकता है. इसका कारण यह है कि खीरे में मौजूद कुछ तत्व पाचन प्रक्रिया को धीमा कर सकते हैं, खासकर तब जब इसे ज्यादा मात्रा में खाया जाए. इसलिए संतुलित मात्रा में ही इसका सेवन करना चाहिए. खीरे के तापमान का भी ध्यान रखना जरूरी है. कई लोग इसे फ्रिज से निकालकर तुरंत बहुत ठंडा खा लेते हैं, जो पेट के लिए सही नहीं माना जाता. बहुत ठंडी चीजें खाने से पाचन तंत्र पर असर पड़ सकता है. गैस या दर्द की समस्या हो सकती है, इसलिए बेहतर होगा कि खीरे को हल्का सामान्य तापमान पर लाकर खाया जाए, ताकि शरीर उसे आसानी से पचा सके. About the Author Anshumala अंशुमाला हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा होल्डर हैं. इन्होंने YMCA दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 15 वर्षों से काम कर रही हैं. न्यूज 18 हिंदी में फरवरी 2022 से लाइफस्टाइ…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें First Published : April 13, 2026, 18:14 IST
थलापति विजय की 'जन नायकन' लीक करने पर 6 गिरफ्तार:300 से ज्यादा पाइरेटेड लिंक हटाए गए, क्लाउड स्टोरेज के जरिए बांटी गई थी फिल्म

थलापति विजय की फिल्म ‘जन नायकन’ के इंटरनेट पर लीक होने के मामले में तमिलनाडु साइबर क्राइम विंग ने 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। इन लोगों पर फिल्म के क्लिप्स और मूवी को ऑनलाइन लीक करने का आरोप है। मीडिया रिपोर्टस के अनुसार इन लोगों ने क्लाउड स्टोरेज और शेयर्ड ड्राइव लिंक के जरिए फिल्म को सोशल मीडिया पर फैलाया था। 300 से ज्यादा पाइरेटेड लिंक हटाए गए साइबर क्राइम विंग ने फिल्म की पायरेसी को रोकने के लिए स्पेशल टीमें बनाई थीं। इन टीमों ने अब तक इंटरनेट से 300 से ज्यादा अवैध लिंक ट्रैक करके उन्हें हटा दिया है। पुलिस गिरफ्तार किए गए लोगों के फोन और अन्य डिजिटल सबूतों की जांच कर रही है। अथॉरिटीज अभी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, वेबसाइट्स और फाइल-शेयरिंग ऐप्स पर नजर रखे हुए हैं ताकि फिल्म को और ज्यादा लीक होने से बचाया जा सके। आरोपियों ने क्लाउड स्टोरेज का किया इस्तेमाल इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने इन आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), आईटी एक्ट, कॉपीराइट एक्ट और सिनेमैटोग्राफ एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों ने फिल्म को शेयर करने के लिए क्लाउड स्टोरेज डिजिटल तकनीक का सहारा लिया था ताकि वे पकड़ में न आ सकें। फिलहाल सभी 6 आरोपी न्यायिक हिरासत में भेज दिए गए हैं। प्रोडक्शन हाउस ने दी चेतावनी फिल्म के मेकर्स ‘KVN प्रोडक्शंस’ ने एक आधिकारिक बयान जारी कर लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अवैध लिंक को शेयर न करें। उन्होंने कहा, “हम ‘जन नायकन’ के एक्सक्लूसिव कॉपीराइट मालिक हैं। हमारे संज्ञान में आया है कि कुछ लोगों ने गैरकानूनी तरीके से फिल्म के सीन और क्लिप्स को कॉपी करके सर्कुलेट किया है, जो डिजिटल पायरेसी का गंभीर मामला है।” क्या है फिल्म का बैकग्राउंड एच. विनोद के निर्देशन में बनी फिल्म ‘जन नायकन’ एक बड़े बजट की एक्शन फिल्म है। इसमें थलापति विजय के साथ पूजा हेगड़े, बॉबी देओल, प्रकाश राज और गौतम वासुदेव मेनन जैसे बड़े स्टार्स नजर आएंगे। थलापति विजय की यह फिल्म उनकी आखिरी फिल्मों में से एक मानी जा रही है, क्योंकि इसके बाद वे राजनीति में सक्रिय होने वाले हैं।








