जन्म से नीली पैदा हुई बच्ची, 6 साल तक सांस लेने को जूझी, 7 घंटे खुला रहा दिल और जीत गई जंग

Last Updated:April 15, 2026, 09:18 IST गरीब परिवार की छह साल की कनिष्का बचपन से ही ब्लू बेबी थी क्योंकि उसके शरीर में अक्सर ऑक्सीजन की कमी हो जाती थी और उसका शरीर नीला पड़ जाता था. उसका एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में ओपन हार्ट सर्जरी से इलाज किया गया और अब वह पूरी तरह ठीक है. 6 साल की ब्लू बेबी को ओपन हार्ट सर्जरी कर डॉक्टरों ने बचाया. सांकेतिक तस्वीर छह साल की कनिष्का का जन्म एक ‘ब्लू बेबी’ के रूप में हुआ था. अक्सर उसकी त्वचा नीली पड़ जाती थी क्योंकि उसके शरीर में ऑक्सीजन की कमी रहती थी. गरीब मां-बाप बच्ची को लेकर जाने कहां-कहां तक भटके लेकिन समस्या एक हो तो सुलझे, उसके दिल में ऐसी कई जन्मजात बीमारियां थीं, जिनका इलाज जटिल था. हालांकि इस बार उसने जंग जीत ली है. दरअसल जन्मजात जटिल हृदय रोग ने कनिष्का के छोटे से जीवन को कठिन बना दिया था. डॉक्टरों ने बताया कि उसके दिल में सिर्फ एक प्रभावी पंपिंग चैंबर काम कर रहा था, जिसे ‘सिंगल वेंट्रीकल फिजियोलॉजी’ कहा जाता है. इसके अलावा उसकी मुख्य धमनियां गलत तरीके से जुड़ी हुई थीं (कॉन्जेनिटली करेक्टेड ट्रांसपोजिशन ऑफ द ग्रेट आर्टरीज), नॉन-रूटेबल VSD (वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट) और पल्मोनरी एट्रेशिया जैसी गंभीर समस्याएं भी थीं. पहली बार 2020 में उसकी पहली बड़ी सर्जरी हुई लेकिन पांच साल बाद फिर समस्या लौट आई. कनिष्का फिर से नीली पड़ने लगी, सांस लेने में तकलीफ होने लगी और उसका ऑक्सीजन लेवल गिरकर मात्र 70 फीसदी रह गया. परिवार गरीब था, इसलिए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकता रहा. कोई ठोस समाधान नहीं मिल रहा था. यहां से मिली उम्मीद आखिरकार एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, विद्याजगत कैंसर फाउंडेशन और स्टड्स एक्सेसरीज लिमिटेड की मदद से कनिष्का को नई उम्मीद मिली. एशियन हॉस्पिटल के सीटीवीएस विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. यतिन अरोड़ा ने सात घंटे की जटिल ओपन-हार्ट सर्जरी की. यह फोंटान प्रोसीजर था, जिसमें हृदय की रक्त संचार व्यवस्था को पूरी तरह से नया रूप दिया गया. सर्जरी के बाद चमत्कार हुआ. अगले ही दिन कनिष्का को वेंटिलेटर से हटा दिया गया. एक हफ्ते के अंदर उसे अस्पताल से छुट्टी मिल गई. उसके ऑक्सीजन लेवल बढ़कर 95% हो गए. अब वह सामान्य सांस ले पा रही है और पहली बार अपने जीवन में ठीक से ऑक्सीजनयुक्त खून पूरे शरीर में पहुंच रहा है. कनिष्का की कहानी गरीब परिवारों के लिए उम्मीद की किरण है. आर्थिक तंगी के बावजूद सही समय पर सही मदद और डॉक्टरों की मेहनत ने एक बच्ची की जान बचा ली. कनिष्का अब स्कूल जाने और बचपन का मजा लेने के लिए तैयार है. उसके चेहरे पर अब नीला रंग नहीं, बल्कि गुलाबी स्वास्थ्य और मुस्कान है. About the Author प्रिया गौतमSenior Correspondent Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें First Published : April 15, 2026, 09:16 IST
जिम में ऐसे कपड़े पहनकर बिल्कुल न जाएं ! बिगड़ जाएगा हार्मोनल बैलेंस, एक्सपर्ट बोले- अधिकतर लोग कर रहे गलती

Last Updated:April 15, 2026, 09:15 IST Gym Clothing Affect Your Health: जिम में पहनने के लिए बनाए जाने वाले स्पोर्ट्स वियर आपकी सेहत के लिए नुकसानदेह साबित हो सकते हैं. इन कपड़ों को बनाने में कई केमिकल्स मिलाए जाते हैं, ताकि ये पसीना सोख सकें और बदबू न आए. मगर ये केमिकल्स शरीर के संपर्क में आने से एंडोक्राइन सिस्टम को प्रभावित कर सकते हैं. इससे कई हार्मोनल दिक्कतें पैदा हो सकती हैं. अमेरिकी राज्य टेक्सास में इन स्पोर्ट्स वियर में पाए जाने वाले केमिकल्स की जांच की जा रही है. स्पोर्ट्स वियर कपड़ों में एंडोक्राइन सिस्टम को प्रभावित करने वाले केमिकल्स हो सकते हैं. How Your Workout Clothes Harm You: आजकल जिम जाने का ट्रेंड बढ़ गया है और अधिकतर लोग फिट रहना पसंद कर रहे हैं. जिम में जाकर वर्कआउट करना सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है. कई लोग जिम के लिए स्पोर्ट्स वियर खरीदते हैं और वर्कआउट के दौरान इन कपड़ों से पर्सनैलिटी में चार चांद लग जाते हैं. जिम में खास कपड़े पहनना लोगों को अच्छा लगता है, क्योंकि इन कपड़ों में पसीना जल्दी सूख जाता है और बदबू नहीं आती है. हालांकि अमेरिकी राज्य टेक्सास में इस तरह के कपड़ों की जांच शुरू हो गई है, क्योंकि हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है इन कपड़ों में कई केमिकल्स मिलाए जाते हैं, जो शरीर का हार्मोनल बैलेंस बिगाड़ सकते हैं. भारत में भी इस तरह के कपड़ों का ट्रेंड बढ़ गया है, जो चिंताजनक है. इन कपड़ों में ऐसे केमिकल्स पाए जाने की आशंका जताई गई है, जो शरीर के एंडोक्राइन सिस्टम को प्रभावित कर सकते हैं. ज्यादातर एक्टिववियर प्लास्टिक-बेस्ड पॉलिमर जैसे- पॉलिएस्टर और नायलॉन से बने होते हैं. इन कपड़ों को स्ट्रेचेबल, पसीना सोखने वाला और दुर्गंध-रोधी बनाने के लिए खास केमिकल्स मिलाए जाते हैं. यही केमिकल्स शरीर के संपर्क में आने पर स्किन और हार्मोन सिस्टम पर बुरा असर डाल सकते हैं. भारत में जिम में सिंथेटिक और टाइट कपड़े पहनने का चलन तेजी से बढ़ा है, लेकिन इन कपड़ों में इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स की जांच और रेगुलेशन अभी भी सीमित है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. दिल्ली के RML हॉस्पिटल के स्किन स्पेशलिस्ट डॉ. कबीर सरदाना ने TOI को बताया कि भारत की गर्म और आर्द्र जलवायु में ऐसे कपड़े पहनने से फंगल इन्फेक्शन, स्किन इरिटेशन और रैशेज का खतरा बढ़ जाता है. खासकर शरीर के जिन हिस्सों में पसीना ज्यादा आता है, वहां ये समस्याएं ज्यादा हो सकती हैं. जांघों और कूल्हों के आसपास समस्या गंभीर हो सकती है. इन कपड़ों में इस्तेमाल होने वाले कुछ केमिकल्स जैसे PFAS और फ्थेलेट्स को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हार्मोनल गड़बड़ी से जोड़ा गया है. ये केमिकल्स कपड़ों को पानी और दाग से बचाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं, लेकिन लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है. भारत में बिकने वाले कई ब्रांड्स इन्हीं तकनीकों का उपयोग करते हैं. इसका मतलब यह नहीं है कि जिम में पहनकर जाने वाले सभी कपड़े खतरनाक हैं, लेकिन जागरूक रहना जरूरी है. एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि लोगों को जिम में कॉटन या नैचुरल फैब्रिक वाले कपड़े पहनकर जाने चाहिए. वर्कआउट के दौरान बहुत टाइट कपड़े पहनने से बचें और वर्कआउट के बाद तुरंत कपड़े बदल लें. अगर त्वचा पर किसी तरह की जलन या खुजली महसूस हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. अमेरिका में शुरू हुई यह जांच अब भारत के लिए भी एक चेतावनी बन गई है. यह केवल फैशन या आराम का मुद्दा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य से जुड़ा मामला है. ऐसे में इसे लेकर लापरवाही नहीं करनी चाहिए. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें First Published : April 15, 2026, 09:15 IST
बुरहानपुर में बिजली तार टूटने से फसल जली:किसान को हुआ लाखों का नुकसान, मुआवजे की रखी मांग

बुरहानपुर जिले के ग्राम बख्खारी में मंगलवार शाम करीब 5:30 बजे बिजली का तार टूटने से एक किसान की पांच एकड़ में लगी मक्के की फसल जल गई। इस घटना से किसान को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। आग इतनी भीषण थी कि मक्के की फसल के साथ-साथ सिंचाई के लिए इस्तेमाल होने वाला महंगा ड्रिप सिस्टम और पाइप भी पूरी तरह नष्ट हो गए। मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने आग बुझाने का प्रयास किया और दमकल विभाग को सूचना दी, लेकिन दमकल के पहुंचने से पहले ही फसल पूरी तरह जल चुकी थी। किसान प्रदीप ने इस आगजनी के लिए बिजली विभाग को जिम्मेदार ठहराया है। किसान के मुताबिक, उन्होंने बिजली विभाग को जर्जर तारों की शिकायत पहले ही दी थी। शिकायत के बावजूद तारों को नहीं बदला गया, जिसके कारण यह बड़ा नुकसान हुआ। किसान ने बताया कि उसने कर्ज लेकर और अपनी जमा पूंजी लगाकर यह फसल उगाई थी। इस भारी नुकसान के बाद अब किसान ने सरकार से उचित मुआवजे की मांग की है।
नो कुक ब्रेकफास्ट: अंतिम होने पर भी नहीं रहेगी दोस्ती की फिक्र, इन 5 झटपट डिशेज से दिन की शानदार शुरुआत

15 अप्रैल 2026 को 09:04 IST पर अपडेट किया गया नो कुक ब्रेकफास्ट: अगर आपको भी गैस के खत्म होने का डर सता रहा है, तो कारण से भोजन के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। तो प्रशिक्षण लेने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि 5 ऐसे झटपट व्यंजन हैं जिन्हें केवल 10 मिनट के अंदर तैयार किया जा सकता है।
नीतीश ने पुराने नेताओं को बिहार के डिप्टी सीएम का पद सौंपा: बिजेंद्र यादव और विजय चौधरी कौन हैं? | भारत समाचार

आखरी अपडेट:15 अप्रैल, 2026, 08:55 IST जेडीयू ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के डिप्टी के रूप में काम करने के लिए परिचित, अनुभवी हाथों, बिजेंद्र प्रसाद यादव और विजय कुमार चौधरी की ओर रुख किया है। बिजेंद्र प्रसाद यादव (बाएं) और विजय कुमार चौधरी (दाएं) बिहार के डिप्टी सीएम होंगे। (छवि: पीटीआई) वर्षों तक नीतीश कुमार के सत्ता में रहने के बाद बिहार एक बड़े परिवर्तन के लिए तैयार है। जैसे ही नीतीश कुमार राज्यसभा में जाने के लिए मुख्यमंत्री पद से हटते हैं, एक लंबे और निर्णायक प्रशासनिक कार्यकाल पर पर्दा डालते हैं, वरिष्ठ भाजपा नेता सम्राट चौधरी उनसे बिहार का शासन संभालने के लिए तैयार हैं। चौधरी आज नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे, जो न केवल सत्ता परिवर्तन का प्रतीक है, बल्कि एक ऐसा क्षण है जो बिहार में एनडीए के भीतर समीकरणों को फिर से व्यवस्थित कर सकता है। यह फेरबदल जद (यू) के भीतर एक शांत लेकिन प्रभावशाली निर्णय के साथ आया है। पीढ़ीगत बदलाव की अटकलों के बीच, नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने उपमुख्यमंत्री पद को अस्वीकार करते हुए औपचारिक राजनीति से दूर रहने का फैसला किया है। इसके बजाय, पार्टी परिचित, अनुभवी हाथों, बिजेंद्र प्रसाद यादव और विजय कुमार चौधरी की ओर मुड़ गई है, ऐसे नेता जो भले ही सुर्खियों में न हों, लेकिन लंबे समय से इस बात में केंद्रीय रहे हैं कि सरकार वास्तव में कैसे काम करती है। बिहार के सीएम और डिप्टी सीएम के शपथ ग्रहण समारोह के लाइव अपडेट यहां देखें। कौन हैं बिजेंद्र प्रसाद यादव? 10 अक्टूबर 1946 को जन्मे बिजेंद्र प्रसाद यादव की राजनीतिक यात्रा निरंतरता पर आधारित रही है। 1990 से सुपौल का प्रतिनिधित्व करते हुए, वह नौ बार बिहार विधानसभा के लिए चुने गए हैं, जो न केवल चुनावी ताकत का संकेत है, बल्कि बदलते राजनीतिक माहौल में अपने निर्वाचन क्षेत्र से निरंतर विश्वास का भी संकेत है। जो बात यादव को अलग करती है वह है उनकी कार्यशैली। वह ऐसे नेता नहीं हैं जो रैलियों या मीडिया उपस्थिति पर पलते हैं। इसके बजाय, उनका प्रभाव शांत स्थानों, विभाग की बैठकों, नीति समीक्षाओं और शासन के रोजमर्रा के कामकाज में महसूस किया जाता है। इन वर्षों में, उन्होंने ऊर्जा, वित्त, वाणिज्यिक कर और योजना एवं विकास जैसे विभागों को संभाला है, ऐसे विभाग जिनमें धैर्य और राज्य की मशीनरी कैसे काम करती है इसकी गहरी समझ की आवश्यकता होती है। जिन लोगों ने बिहार के शासन को देखा है, वे अक्सर उनका वर्णन ऐसे व्यक्ति के रूप में करते हैं जिस पर नीतीश कुमार बिना सोचे-समझे भरोसा कर सकते हैं। चाहे वह बिजली आपूर्ति में सुधार करना हो या वित्तीय योजना का प्रबंधन करना हो, यादव जमीन पर नीति क्रियान्वित करने वाली कोर टीम का हिस्सा रहे हैं। 79 साल की उम्र में, उप मुख्यमंत्री के रूप में उनकी पदोन्नति राजनीतिक प्रकाशिकी के बारे में कम है और यह सुनिश्चित करने के बारे में अधिक है कि परिवर्तन के समय के दौरान अनुभव प्रणाली को मजबूत बनाए रखना जारी रखता है। कौन हैं विजय कुमार चौधरी? 8 जनवरी, 1957 को जन्मे विजय कुमार चौधरी नेतृत्व मिश्रण में एक अलग, लेकिन पूरक आयाम लाते हैं। यदि यादव प्रशासक हैं, तो चौधरी को अक्सर वार्ताकार के रूप में देखा जाता है, वह व्यक्ति जो राजनीति जटिल होने पर भी बातचीत जारी रख सकता है। 1980 के दशक की शुरुआत से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय और वर्तमान में समस्तीपुर में सरायरंजन का प्रतिनिधित्व करने वाले चौधरी ने पिछले कुछ वर्षों में लगातार अपनी प्रतिष्ठा बनाई है। उनके करियर का सबसे निर्णायक अध्याय 2015 और 2020 के बीच आया, जब उन्होंने बिहार विधान सभा के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। उस भूमिका में, उन्हें तटस्थता बनाए रखते हुए राजनीतिक रूप से व्यस्त सदन में व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए, रस्सी पर चलने की अक्सर आवश्यकता होती थी। इसके अलावा, उनका अनुभव वित्त, शिक्षा, संसदीय कार्य और जल संसाधन जैसे प्रमुख मंत्रालयों तक फैला हुआ है। लेकिन उनके द्वारा संभाले गए पदों से अधिक, यह उनका दृष्टिकोण है जो सबसे अलग, नपा-तुला, सुलभ और शायद ही कभी टकराव वाला होता है। जेडी (यू) और एनडीए के भीतर, उन्हें अक्सर ऐसे व्यक्ति के रूप में देखा जाता है जो खुद पर ध्यान आकर्षित किए बिना, चुपचाप आम सहमति बना सकता है। अब 60 के दशक के अंत में, चौधरी की उपमुख्यमंत्री के रूप में नियुक्ति उस स्थिर, संतुलित उपस्थिति की आवश्यकता का संकेत देती है, खासकर ऐसी सरकार में जहां समीकरण विकसित हो रहे हैं। सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री के रूप में कदम रखने के साथ, जद (यू) ने अपने दो सबसे अनुभवी नेताओं को उनके साथ रखकर यह सुनिश्चित किया है कि प्रशासनिक कोर बरकरार रहे। एक नौ बार का विधायक है जो नौकरशाही को अंदर से समझता है। दूसरा एक अनुभवी राजनीतिक हाथ है जो जानता है कि विधानसभा और गठबंधन दोनों को कैसे ट्रैक पर रखा जाए। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 15 अप्रैल, 2026, 08:55 IST न्यूज़ इंडिया नीतीश ने पुराने नेताओं को बिहार के डिप्टी सीएम का पद सौंपा: बिजेंद्र यादव और विजय चौधरी कौन हैं? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)बिहार के नए मुख्यमंत्री(टी)सम्राट चौधरी बिहार(टी)नीतीश कुमार का इस्तीफा(टी)बिहार राजनीतिक परिवर्तन(टी)जेडी(यू) नेतृत्व परिवर्तन(टी)बिजेंद्र प्रसाद यादव प्रोफाइल(टी)विजय कुमार चौधरी डिप्टी सीएम(टी)बिहार एनडीए सरकार
Badshahs Titteri Phirse Song Released

सोनीपत3 मिनट पहले कॉपी लिंक टटीरी फिर से सॉन्ग में लड़कियों को एक अंडरपास में नाचते हुए दिखाया गया है। बादशाह की एंट्री हेलिकॉप्टर में होती है। बॉलीवुड सिंगर-रैपर बादशाह ने विवाद के बाद हरियाणवी सॉन्ग ‘टटीरी फिर से’ रिलीज कर दिया है। बादशाह ने गाने में विवादित सीन और लाइनों को हटा दिया है। जिस लाइन पर सबसे ज्यादा विवाद हुआ, उसकी जगह बादशाह ने रैप में बोला है- ‘आया बादशाह रंग दिखाने, फिर जलवा दिखाने’। रोडवेज बस के सीन को हटाकर लड़कियों को हरियाणवी पहनावे दामन-कुर्ती में एक अंडरपास में नाचते हुए दिखाया गया है। कुछ बुजुर्गों को भी हुक्के के साथ दिखाया गया है। यूट्यूब पर इस सॉन्ग पर अभी तक एक मिलियन व्यूज आ चुके हैं। पिछले महीने एक मार्च को रिलीज हुए ‘टटीरी’ सॉन्ग में बोले गए शब्दों और सीन को लेकर हुए विवाद पर बादशाह पर पंचकूला और जींद में तीन मामले दर्ज किए गए। इसके बाद यूट्यूब से ये गाना हटा दिया गया था। हरियाणा महिला आयोग ने भी बादशाह को पेश होने के लिए कहा था। 7 मार्च को बादशाह ने राष्ट्रीय महिला आयोग में पेश होकर माफी मांग ली थी। बादशाह ने रैप की विवादित लाइन को भी बदल दिया है। जानिए पहले टटीरी गाने को क्या विवाद हुआ… एक मार्च को रिलीज हुआ, 3 एफआईआर दर्ज हुई : बादशाह का टटीरी सॉन्ग 1 मार्च को रिलीज हुआ था। सॉन्ग के रिलीज होने के साथ ही इसमें बादशाह के लिरिक्स और लड़कियों के सीन को लेकर कई सामाजिक संगठनों ने आपत्ति जताई। पानीपत की नारी तू नारायणी उत्थान समिति अध्यक्ष सविता आर्या ने बादशाह के खिलाफ राज्य महिला आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। इसी शिकायत के आधार पर जींद और पंचकूला में बादशाह के खिलाफ 3 FIR दर्ज हुई। इसके बाद पंचकूला पुलिस ने सॉन्ग को यूट्यूब से हटवा दिया। आयोग के सामने पेश न होने पर गिरफ्तारी के आदेश: इसके बाद हरियाणा महिला आयोग ने मामले का संज्ञान लिया था। 13 मार्च हरियाणा महिला आयोग की अध्यक्ष रेणू भाटिया ने सिंगर को पानीपत में अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया। बादशाह की जगह पेश हुए उनके वकीलों ने दलील दी थी कि बादशाह सिक्योरिटी रीजन और प्रोफेशनल कमिटमेंट की वजह से पेश नहीं हो सके। इसके बाद चेयरपर्सन ने पंचकूला और पानीपत SP को बादशाह की गिरफ्तारी और पासपोर्ट जब्ती के निर्देश दिए। सिंगर ने पंचकूला थाने में रखा पक्ष: इसके बाद सिंगर बादशाह ने पंचकूला पुलिस की जांच में शामिल होकर अपना पक्ष रखा था। पूछताछ के बाद सिंगर को बेल पर छोड़ दिया गया था। पंचकूला साइबर थाना SHO युद्धवीर ने बताया था कि सभी धाराएं जमानती हैं। उनसे करीब एक घंटे तक पूछताछ की गई थी। बादशाह ने वीडियो शेयर कर मांगी थी माफी: विवाद के बाद बादशाह ने वीडियो बनाकर माफी मांगी थी। उन्होंने वीडियो में कहा था- ‘मेरा टरीरी गाना जब से रिलीज हुआ है तब से इसके एक हिस्से में मेरे लिरिक्स को और विजुअल रिप्रेजेंटेशन की वजह से जो मैसज गया, उससे लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंची। मेरा इरादा नहीं था कि मैं किसी बच्चे या महिला के बारे में बेहुदी बात करूं। मैं उम्मीद करता हूं कि मुझे हरियाणा का बेटा समझकर माफ करेंगे।’ महिला आयोग के सामने पेश होकर मांगी माफी: विवाद बढ़ने के बाद राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने कहा कि यह महिलाओं के सम्मान के खिलाफ है। इस मामले में बादशाह और निर्देशक जोबन संधू, महावीर सिंह और निर्माता हितेन 7 अप्रैल को आयोग के सामने आए। बादशाह ने माफी मांगी और वादा किया कि वे 4 महीने में एक अच्छा गाना बनाएंगे और गरीब परिवारों की 50 लड़कियों की पढ़ाई का खर्चा भी उठाएंगे। 7 अप्रैल को बादशाह और उनकी टीम नई दिल्ली में राष्ट्रीय महिला आयोग के सामने पेश हुई थी। गाने में कैथल की सिमरन की भी आवाज टटीरी सॉन्ग में फीमेल वोकल कैथल की सिमरन जागलान के हैं। सिमरन, हरियाणवी सिंगर कर्मबीर फौजी की बेटी हैं, जिन्होंने फेमस हरियाणवी सॉन्ग ‘पानी आली पानी प्यादे’ गाया है। सिमरन एक बॉक्सर भी हैं और स्टेट चैंपियन रह चुकी हैं। अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए वह सिंगिंग भी कर रही हैं। तीन साल पहले बनाए गए ‘टटीरी’ गाने पर बादशाह की नजर पड़ी, जिसके बाद उन्होंने इसका रीमिक्स वर्जन बनाया। —————————- ये खबर भी पढ़ें :- बादशाह संग ‘टटीरी’ सॉन्ग गाने वाली सिमरन की कहानी:पिता हरियाणवी सॉन्ग ‘पानी आली पानी प्यादे’ गाकर फेमस हुए, बेटी बॉक्सिंग में स्टेट चैंपियन रही बॉलीवुड रैपर-सिंगर बादशाह ने हरियाणवी फोक सॉन्ग ‘टटीरी’ लॉन्च किया है। इस गाने में कैथल की रहने वाली सिमरन जागलान ने अपनी आवाज दी है। सिमरन, हरियाणवी सिंगर कर्मबीर फौजी की बेटी हैं, जिन्होंने फेमस हरियाणवी सॉन्ग ‘पानी आली पानी प्यादे’ गाया है। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
aiims new delhi 24 hour opd: एम्स के मरीजों के लिए खुशखबरी, खत्म हो जाएंगी लाइनें, दिन हो या रात हर वक्त मिलेगा इलाज

होमताजा खबरदेश एम्स के मरीजों के लिए खुशखबरी, खत्म हो जाएंगी लाइनें, दिन रात मिलेगा इलाज Last Updated:April 15, 2026, 08:45 IST AIIMS New Delhi Good News: एम्स नई दिल्ली को लेकर बहुत अच्छी खबर सामने आई है. एम्स में दिन रात ओपीडी सेवाएं शुरू हो सकती हैं. स्थाई संसदीय समिति ने देश के सबसे बड़े अस्पताल AIIMS में 24 घंटे ओपीडी सर्विस, स्टाफ रोटेशन, ड्यूटी आवर्स रेगुलेशन और इंटर एम्स ट्रांसफर पॉलिसी की सिफारिश करते हुए रिपोर्ट पेश की है. ऐसा होने से मरीजों को बड़ा फायदा होगा. एम्स नई दिल्ली को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है. यहां 24 घंटे ओपीडी शुरू हो सकती है. AIIMS New Delhi Big News: देश के सबसे बड़े और व्यस्त अस्पताल एम्स नई दिल्ली को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है. एम्स अस्पताल में जल्द ही पूरे दिन-रात ओपीडी सेवा शुरू की जा सकती है. इमरजेंसी की तरह 24 घंटे ओपीडी सेवा मिलने से यहां इलाज कराने आने वाले मरीजों को इलाज के लिए लंबी कतारों में नहीं लगना होगा और उन्हें बहुत बड़ी राहत मिल जाएगी. रोजाना हजारों मरीजों की भीड़ को इलाज मुहैया कराने वाले एम्स अस्पताल में सुबह से शाम तक लंबी कतारें लगती हैं और मरीज घंटों के लंबे इंतजार के बाद डॉक्टरों को दिखा पाते हैं. लेकिन अब इस पुरानी समस्या का समाधान मिलने जा रहा है. संसद की स्थायी समिति ने अपनी हालिया रिपोर्ट में एम्स नई दिल्ली में राउंड-द-क्लॉक यानी 24 घंटे ओपीडी सेवाएं शुरू करने की सिफारिश की है. समिति की रिपोर्ट ‘ वर्किंग ऑफ ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) नई दिल्ली और मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में आने वाली समस्याएं’ में कहा गया है कि अस्पताल प्रबंधन के अंदर से ही रात में ओपीडी खोलने का प्रस्ताव आया है. समिति ने इसे गंभीरता से विचार करने लायक बताया है. रिपोर्ट में साफ लिखा है, ‘अगर हवाई जहाज दिन-रात उड़ सकते हैं और ट्रेनें 24 घंटे चल सकती हैं, तो ओपीडी क्यों नहीं चल सकती?’ समिति ने स्टाफ के लिए रोटेशन सिस्टम का सुझाव दिया है. डॉक्टरों और सहायक स्वास्थ्यकर्मियों को दिन और रात की शिफ्ट में तैनात किया जाए और उन्हें पर्याप्त कंपेनसेटरी रेस्ट दिया जाए. इससे भीड़ कम होगी और मरीजों को बिना किसी परेशानी के किसी भी समय इलाज मिल सकेगा. एम्स में ये समस्याएं आ रहीं सामने रिपोर्ट में एम्स की एक बड़ी समस्या के बारे में भी लिखा गया है कि यहां डॉक्टरों के इस्तीफे की दर काफी ज्यादा है. कई डॉक्टर अपने गृहनगर लौटना चाहते हैं या प्राइवेट सेक्टर में बेहतर अवसर तलाशते हैं. समिति ने इंटर एम्स ट्रांसफर पॉलिसी बनाने की सिफारिश की है ताकि डॉक्टर अपने परिवार के करीब रह सकें. वर्तमान में एम्स नई दिल्ली में 1,306 स्वीकृत फैकल्टी पदों में से 446 (34%) खाली पड़े हैं. नॉन-फैकल्टी पदों में भी 18% से ज्यादा वैकेंसी हैं, जिसमें नर्सें और तकनीकी स्टाफ शामिल हैं. समिति ने जूनियर और सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की लंबी ड्यूटी घंटों पर भी चिंता जताई है. 36 घंटे तक लगातार ड्यूटी करने से क्लिनिकल एरर और बर्नआउट का खतरा बढ़ता है, जो मरीजों की सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा करता है. इसलिए समिति ने “क्लिनिकल ड्यूटी आवर्स रेगुलेशन” पॉलिसी बनाने और उसे सख्ती से लागू करने की सिफारिश की है. एम्स है उम्मीद का आखिरी केंद्र एम्स दिल्ली न सिर्फ दिल्ली बल्कि पूरे उत्तर भारत के मरीजों के लिए आखिरी उम्मीद का केंद्र है. यहां गरीब से अमीर तक हर वर्ग के लोग आते हैं. अगर 24 घंटे ओपीडी शुरू हो जाती है तो सुबह की भीड़ कम होगी, इमरजेंसी केस आसानी से हैंडल हो सकेंगे और मरीजों को रात में भी तुरंत परामर्श मिल सकेगा. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक यह प्रस्ताव लागू होने पर एम्स न सिर्फ मरीजों के लिए बल्कि डॉक्टरों और स्टाफ के लिए भी बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस दे सकेगा. संसदीय समिति की ये सिफारिशें अगर जल्द अमल में आईं तो देश के सबसे बड़े मेडिकल संस्थान में एक नया अध्याय शुरू हो सकता है, जहां इलाज की सुविधा कभी बंद नहीं होगी. About the Author प्रिया गौतमSenior Correspondent Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें First Published : April 15, 2026, 08:45 IST
world updates| russia, china, USA, putin, trump| India to Host BRICS & QUAD Foreign Ministers Meet in May 2026

Hindi News International World Updates| Russia, China, USA, Putin, Trump| India To Host BRICS & QUAD Foreign Ministers Meet In May 2026 22 मिनट पहले कॉपी लिंक भारत मई में ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी करेगा। इस मंच पर ईरान और UAE के प्रतिनिधि आमने-सामने होंगे। 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद दोनों देशों के बीच यह पहला सीधा संपर्क होगा। सूत्रों के मुताबिक, भारत इस बैठक के जरिए क्षेत्रीय तनाव कम करने और बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगा। ब्रिक्स मंच पर सुरक्षा और ऊर्जा से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है। इधर, भारत मई के आखिरी हफ्ते में क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी की तैयारी में भी है। इसमें अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के प्रतिनिधि शामिल होंगे। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी संकेत दिए हैं कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो मई में भारत आ सकते हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में इस दौरे का जिक्र किया है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… साउथ अफ्रीका ने अमेरिका में 1 साल बाद राजदूत की नियुक्ति की साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने अमेरिका में नए राजदूत की नियुक्ति कर दी है। उन्होंने वरिष्ठ नेता रूएल्फ मेयर को यह जिम्मेदारी सौंपी है। इसकी जानकारी राष्ट्रपति के प्रवक्ता ने दी। रूएल्फ मेयर 1990 के दशक में रंगभेद खत्म करने के लिए हुई ऐतिहासिक बातचीत में सरकार के मुख्य वार्ताकार रह चुके हैं। बाद में वे नेल्सन मंडेला की एकता सरकार का भी हिस्सा बने थे। अमेरिका में यह पद लंबे समय से खाली था। मार्च 2025 में पूर्व राजदूत इब्राहिम रसूल को डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन से विवाद के बाद निष्कासित कर दिया गया था। इसके बाद से दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बना हुआ है। डोनाल्ड ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल के दौरान अमेरिका और साउथ अफ्रीका के संबंध और बिगड़े हैं। ट्रम्प ने साउथ अफ्रीका के श्वेत अफ्रीकानेर समुदाय पर उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। साथ ही उनके लिए एक विशेष शरणार्थी योजना भी शुरू की थी, जिसका साउथ अफ्रीका ने विरोध किया था। 78 साल के मेयर खुद अफ्रीकानेर समुदाय से आते हैं। उन्होंने 1979 में राजनीति में कदम रखा था और बाद में रक्षा व संवैधानिक मामलों के मंत्री भी रहे। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
आईपीएल 2026: ‘मैं हर तरह से टीम के लिए…’, आरसीबी के प्रवक्ता रसिख सलाम ने दिया ये बयान

रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) के युवा तेज गेंदबाज रसिख सलाम दार टीम की जीत में योगदान काफी खुश हैं। रसिख का कहना है कि वह आगे भी इसी तरह का प्रदर्शन करना चाहते हैं। रविवार को एम. चिन्नास्वामी क्रिकेट स्टेडियम में आरसीबी की प्लेंट नेशनल सुपर जायंट्स (एलएसजी) के साथ आपका स्वागत है। मुंबई इंडियंस ने आखिरी बार कोलकाता में खेले गए मैच में रसिक सलाम का शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने हाई स्कोरिंग में 2.5 ओवर के स्पेल में बेहतरीन गेंदबाजी करते हुए सिर्फ 23 रन देकर नॉमिनेट धीर का विकेट अपने नाम किया था। आरसीबी ने मुंबई इंडियंस के खिलाफ 18 विकेट से जीत दर्ज की थी और इस बार टीम प्वाइंट टेबल पर 6 प्वाइंट के साथ तीसरे नंबर पर पहुंची है। एलएसजी के खिलाफ जीत वाले चर्च से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में बात करते हुए रासिख ने कहा, “मुंबई के भारतीयों ने हमारे लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और एक टीम के तौर पर हम काफी आश्वस्त महसूस कर रहे हैं। हमारी भूमिकाएं और हमें क्या करना है, इस बारे में हमारे विचार बिल्कुल स्पष्ट हैं, और हम रविवार को अपने घर के मैदान पर बहुत विरोध करते हैं।” आईपीएल में लंबे समय बाद वापसी करने के बारे में रसिक ने कहा, “मैं काफी समय बाद आईपीएल का कोई मैच नहीं खेल रहा था, लेकिन मेरी तैयारी का तरीका बताया जा रहा है। पिछले एक साल में हमने जो कड़ी मेहनत की है, वह सभी मैच की अलग-अलग जगह के लिए खुद को तैयार करने के बारे में था और पिछले मैच में मैंने अपनी तय की गई मंजूरी को मैदान पर अपना ही पूरा ध्यान केंद्रित किया था।” रसिख एक अनुभवी खिलाड़ी का हिस्सा हैं, जिसमें बायवर कुमार, जोश हेजलवुड और क्रुणाल ऑर्केस्ट्रा जैसे दिग्गज खिलाड़ी शामिल हैं। टीम में अपनी भूमिका और हेजलवुड के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, “मैं हमेशा टीम की मदद करना चाहता हूं। हेजलवुड एक बहुत बड़े दिग्गज खिलाड़ी हैं और टीम का एक अहम हिस्सा हैं। मैं जहां भी हो, टीम के लिए अपना योगदान देने की पूरी कोशिश करता हूं।” रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के खिलाफ इस समय अंक तालिका में तीसरे स्थान पर है और एलएसजी की जीत दर्ज करके टीम तालिका में पहले स्थान पर पहुंच के इरादे से मैदान पर प्रवेश करेगी। वहीं, एलएसजी दो जीत और दो हार के साथ प्वाइंट टेबल में तीर्थ स्थान पर है। नेशनल सुपर जायंट्स का मुकाबला आरसीबी से पलड़ा पर भारी पड़ रहा है। दोनों टीमों के बीच कुल 6 कलेक्ट खेले गए। आरसीबी ने 4 खिताब जीते हैं, जबकि एलएसजी ने 2 मुकाबलों में जीत हासिल की है। पिछले सीजन आईपीएल 2025 में दोनों टीमों ने जीत के बीच जोरदार मुकाबले में आरसीबी ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 6 विकेट से एंट्री की थी। यह भी पढ़ें- क्या हैं विराट कोहली? नए वीडियो में शामिल हैं आरसीबी की खासियतें, जानिए पूरा मामला (टैग्सटूट्रांसलेट)रासिख सलाम दार(टी)आईपीएल 2026(टी)आईपीएल 2026(टी)रासिख सलाम दार
एक बार स्ट्रेच मार्क्स बन जाएं, तो क्या उन्हें हमेशा के लिए हटाया जा सकता है? डॉक्टर ने बताया सच

Last Updated:April 15, 2026, 08:16 IST Stretch Marks Removal: हमारी स्किन पर खिंचाव के कारण धारियां बन जाती हैं, जिन्हें स्ट्रेच मार्क्स कहा जाता है. प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं के पेट पर स्ट्रेच मार्क्स बन जाते हैं. कानपुर के डर्मेटोलॉजिस्ट डॉक्टर युगल राजपूत के अनुसार स्ट्रेस मार्क्स को पूरी तरह हटाना बेहद मुश्किल है. कुछ क्रीम्स से इन्हें हल्का किया जा सकता है. लेजर थेरेपी और अन्य मेडिकल ट्रीटमेंट से इनका लुक बेहतर हो सकता है. लोगों को इन्हें पूरी तरह हटाने का दावा करने वाले प्रोडक्ट्स पर भरोसा नहीं करना चाहिए. डॉक्टर के अनुसार स्ट्रेच मार्क्स को पूरी तरह नहीं हटाया जा सकता है. Truth About Stretch Marks: अधिकतर लोगों के शरीर पर स्ट्रेच मार्क्स देखने को मिलते हैं. जब किसी व्यक्ति की स्किन में खिंचाव होता है, तब अक्सर स्ट्रेच मार्क्स बन जाते हैं. महिलाएं जब प्रेग्नेंट होती हैं, तब उनके पेट के आसपास काफी स्ट्रेच मार्क्स आ जाते हैं. स्ट्रेच मार्क्स को हटाना काफी मुश्किल होता है, लेकिन कई प्रोडक्ट इसे पूरी तरह हटाने का दावा करते हैं. ऐसे में लोग कई महंगे प्रोडक्ट्स यूज करते रहते हैं, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकलता है. अब सवाल है कि क्या वाकई स्ट्रेच मार्क्स को हमेशा के लिए हटाया जा सकता है? इस बारे में स्किन स्पेशलिस्ट से हकीकत जान लेते हैं. यूपी के कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. युगल राजपूत ने News18 को बताया कि स्ट्रेस मार्क्स अक्सर वजन बढ़ने-घटने, प्रेग्नेंसी या तेजी से शरीर के आकार में बदलाव के कारण बनते हैं. ये आमतौर पर पेट, जांघों, कंधों और बाजुओं पर नजर आते हैं. स्ट्रेच मार्क्स तब बनते हैं, जब त्वचा की अंदरूनी परत डर्मिस तेजी से खिंचती है और वहां मौजूद कोलेजन और इलास्टिन फाइबर टूटने लगते हैं. शुरुआत में ये लाल या बैंगनी रंग के होते हैं, लेकिन समय के साथ हल्के रंग के हो जाते हैं. स्ट्रेच मार्क्स एक बार बन जाएं, तो इन्हें पूरी तरह खत्म करना मुश्किल होता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. डॉक्टर युगल ने बताया कि कुछ क्रीम्स और लोशन स्ट्रेच मार्क्स को हल्का जरूर कर सकते हैं. लंबे समय तक इन प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करने से अच्छा रिजल्ट मिल सकता है. इसके अलावा लेजर थेरेपी, माइक्रोनीडलिंग और केमिकल पील्स से इनके लुक में काफी हद तक सुधार किया जा सकता है. ये ट्रीटमेंट त्वचा में नए कोलेजन के निर्माण को बढ़ाते हैं, जिससे स्ट्रेच मार्क्स कम दिखाई देने लगते हैं. हालांकि ये ट्रीटमेंट व्यक्ति की स्किन, उम्र और स्ट्रेच मार्क्स की कंडीशन के अनुसार सजेस्ट किए जाते हैं. ये ट्रीटमेंट महंगे भी हो सकते हैं और कई सिटिंग्स की जरूरत पड़ती है. एक्सपर्ट के मुताबिक सभी लोगों को यह समझने की जरूरत है कि स्ट्रेच मार्क्स कोई बीमारी नहीं हैं, बल्कि शरीर में होने वाले प्राकृतिक बदलाव का हिस्सा हैं. इसलिए इन्हें लेकर ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है. अगर आप इन्हें कम करना चाहते हैं, तो शुरुआत से ही त्वचा को मॉइश्चराइज रखें, अच्छी डाइट लें और वजन को अचानक बढ़ने या घटने से बचाएं. सभी लोगों को सोशल मीडिया पर बड़े-बड़े दावों के साथ बेचे जा रहे प्रोडक्ट्स से बचना चाहिए और इस बारे में डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें First Published : April 15, 2026, 08:16 IST







