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जन्म से नीली पैदा हुई बच्ची, 6 साल तक सांस लेने को जूझी, 7 घंटे खुला रहा दिल और जीत गई जंग

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गरीब परिवार की छह साल की कनिष्का बचपन से ही ब्‍लू बेबी थी क्‍योंक‍ि उसके शरीर में अक्‍सर ऑक्‍सीजन की कमी हो जाती थी और उसका शरीर नीला पड़ जाता था. उसका एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में ओपन हार्ट सर्जरी से इलाज क‍िया गया और अब वह पूरी तरह ठीक है.

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6 साल की ब्‍लू बेबी को ओपन हार्ट सर्जरी कर डॉक्‍टरों ने बचाया. सांकेत‍िक तस्‍वीर

छह साल की कनिष्का का जन्म एक ‘ब्लू बेबी’ के रूप में हुआ था. अक्सर उसकी त्वचा नीली पड़ जाती थी क्योंकि उसके शरीर में ऑक्सीजन की कमी रहती थी. गरीब मां-बाप बच्ची को लेकर जाने कहां-कहां तक भटके लेकिन समस्या एक हो तो सुलझे, उसके दिल में ऐसी कई जन्मजात बीमारियां थीं, जिनका इलाज जटिल था. हालांकि इस बार उसने जंग जीत ली है.

दरअसल जन्मजात जटिल हृदय रोग ने कनिष्का के छोटे से जीवन को कठिन बना दिया था. डॉक्टरों ने बताया कि उसके दिल में सिर्फ एक प्रभावी पंपिंग चैंबर काम कर रहा था, जिसे ‘सिंगल वेंट्रीकल फिजियोलॉजी’ कहा जाता है. इसके अलावा उसकी मुख्य धमनियां गलत तरीके से जुड़ी हुई थीं (कॉन्जेनिटली करेक्टेड ट्रांसपोजिशन ऑफ द ग्रेट आर्टरीज), नॉन-रूटेबल VSD (वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट) और पल्मोनरी एट्रेशिया जैसी गंभीर समस्याएं भी थीं.

पहली बार 2020 में उसकी पहली बड़ी सर्जरी हुई लेकिन पांच साल बाद फिर समस्या लौट आई. कनिष्का फिर से नीली पड़ने लगी, सांस लेने में तकलीफ होने लगी और उसका ऑक्सीजन लेवल गिरकर मात्र 70 फीसदी रह गया. परिवार गरीब था, इसलिए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकता रहा. कोई ठोस समाधान नहीं मिल रहा था.

यहां से मिली उम्मीद
आखिरकार एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, विद्याजगत कैंसर फाउंडेशन और स्टड्स एक्सेसरीज लिमिटेड की मदद से कनिष्का को नई उम्मीद मिली. एशियन हॉस्पिटल के सीटीवीएस विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. यतिन अरोड़ा ने सात घंटे की जटिल ओपन-हार्ट सर्जरी की. यह फोंटान प्रोसीजर था, जिसमें हृदय की रक्त संचार व्यवस्था को पूरी तरह से नया रूप दिया गया.

सर्जरी के बाद चमत्कार हुआ. अगले ही दिन कनिष्का को वेंटिलेटर से हटा दिया गया. एक हफ्ते के अंदर उसे अस्पताल से छुट्टी मिल गई. उसके ऑक्सीजन लेवल बढ़कर 95% हो गए. अब वह सामान्य सांस ले पा रही है और पहली बार अपने जीवन में ठीक से ऑक्सीजनयुक्त खून पूरे शरीर में पहुंच रहा है.

कनिष्का की कहानी गरीब परिवारों के लिए उम्मीद की किरण है. आर्थिक तंगी के बावजूद सही समय पर सही मदद और डॉक्टरों की मेहनत ने एक बच्ची की जान बचा ली. कनिष्का अब स्कूल जाने और बचपन का मजा लेने के लिए तैयार है. उसके चेहरे पर अब नीला रंग नहीं, बल्कि गुलाबी स्वास्थ्य और मुस्कान है.

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प्रिया गौतमSenior Correspondent

Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें

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दरअसल जन्मजात जटिल हृदय रोग ने कनिष्का के छोटे से जीवन को कठिन बना दिया था. डॉक्टरों ने बताया कि उसके दिल में सिर्फ एक प्रभावी पंपिंग चैंबर काम कर रहा था, जिसे ‘सिंगल वेंट्रीकल फिजियोलॉजी’ कहा जाता है. इसके अलावा उसकी मुख्य धमनियां गलत तरीके से जुड़ी हुई थीं (कॉन्जेनिटली करेक्टेड ट्रांसपोजिशन ऑफ द ग्रेट आर्टरीज), नॉन-रूटेबल VSD (वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट) और पल्मोनरी एट्रेशिया जैसी गंभीर समस्याएं भी थीं.

पहली बार 2020 में उसकी पहली बड़ी सर्जरी हुई लेकिन पांच साल बाद फिर समस्या लौट आई. कनिष्का फिर से नीली पड़ने लगी, सांस लेने में तकलीफ होने लगी और उसका ऑक्सीजन लेवल गिरकर मात्र 70 फीसदी रह गया. परिवार गरीब था, इसलिए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकता रहा. कोई ठोस समाधान नहीं मिल रहा था.

यहां से मिली उम्मीद
आखिरकार एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, विद्याजगत कैंसर फाउंडेशन और स्टड्स एक्सेसरीज लिमिटेड की मदद से कनिष्का को नई उम्मीद मिली. एशियन हॉस्पिटल के सीटीवीएस विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. यतिन अरोड़ा ने सात घंटे की जटिल ओपन-हार्ट सर्जरी की. यह फोंटान प्रोसीजर था, जिसमें हृदय की रक्त संचार व्यवस्था को पूरी तरह से नया रूप दिया गया.

सर्जरी के बाद चमत्कार हुआ. अगले ही दिन कनिष्का को वेंटिलेटर से हटा दिया गया. एक हफ्ते के अंदर उसे अस्पताल से छुट्टी मिल गई. उसके ऑक्सीजन लेवल बढ़कर 95% हो गए. अब वह सामान्य सांस ले पा रही है और पहली बार अपने जीवन में ठीक से ऑक्सीजनयुक्त खून पूरे शरीर में पहुंच रहा है.

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