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‘काला मां काली का रंग है’: डीएमके की कनिमोझी ने पीएम मोदी के ‘काला टीका’ पर पलटवार किया | राजनीति समाचार

GT vs KKR Live Score, IPL 2026, Playing 11 Today Match Updates: Follow live action here.(Creimas Photo)

आखरी अपडेट:17 अप्रैल, 2026, 18:51 IST पीएम मोदी ने विरोध में काले कपड़े पहनने के लिए डीएमके सदस्यों पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि यह विधेयक पर बहस के दौरान बुरी नजर से बचने के लिए “काला टीका” के रूप में काम करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डीएमके सांसद कनिमोझी करुणानिधि। (संसद टीवी पीटीआई के माध्यम से) द्रमुक नेता कनिमोझी ने महिला आरक्षण कानून में संशोधन के खिलाफ पार्टी के विरोध पर निर्देशित “काला टीका” टिप्पणी को लेकर शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पलटवार किया। लोकसभा में बोलते हुए कनिमोझी ने कहा कि वह इस टिप्पणी से आश्चर्यचकित हैं और उन्होंने कहा कि काला देवी काली का रंग है। उन्होंने यह भी कहा कि द्रमुक इस मुद्दे पर अंत तक अपना विरोध जारी रखेगी। गुरुवार को लोकसभा में महिला आरक्षण कानून में संशोधन पर बहस में हस्तक्षेप करते हुए, पीएम मोदी ने विरोध में काले कपड़े पहनने के लिए डीएमके सदस्यों पर कटाक्ष किया था और कहा था कि यह विधेयक पर बहस के दौरान बुरी नजर से बचने के लिए “काला टीका” के रूप में काम करता है। काले कपड़ों और झंडों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अच्छे काम शुरू करने से पहले काला टीका लगाने की परंपरा है जिसके लिए वह उन्हें धन्यवाद देते हैं. शुक्रवार को बहस में भाग लेते हुए, कनिमोझी, जो काली साड़ी पहने हुए थीं, ने कहा कि वह “आश्चर्यचकित हैं कि जो लोग हिंदुत्व की रक्षा के लिए वहां हैं, उन्हें देवी काली की याद नहीं दिलाई गई, जो काली देवी हैं जो काला पहनती हैं”। उन्होंने यह भी कहा कि काला द्रमुक के बौद्धिक नेता पेरियार का भी रंग है, जिन्होंने उन्हें अंत तक लड़ना सिखाया है। कनिमोझी के अलावा डीएमके के अन्य सांसद भी सदन में काले कपड़े पहने हुए थे। द्रमुक सांसद ने यह भी मांग की कि महिला आरक्षण अधिनियम, जो लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत कोटा प्रदान करता है, को समान 543 सीटों के साथ 2029 से लागू किया जाए। उन्होंने मांग की कि परिसीमन प्रक्रिया को महिलाओं के कोटे से अलग किया जाना चाहिए। गुरुवार को, जबकि DMK सदस्यों ने सदन में काले कपड़े पहने थे, पार्टी नेता और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने राज्य में काला झंडा फहराया और परिसीमन विधेयक की एक प्रति जलाई, इसे “काला कानून” करार दिया, जो तमिल लोगों को अपनी ही भूमि में “शरणार्थी” बनाने का प्रयास करता है। (पीटीआई से इनपुट्स के साथ) चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 17 अप्रैल, 2026, 18:50 IST समाचार राजनीति ‘काला मां काली का रंग है’: डीएमके की कनिमोझी ने पीएम मोदी के ‘काला टीका’ पर पलटवार किया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)मोदी काला टीका टिप्पणी पर कनिमोझी की प्रतिक्रिया(टी)कनिमोझी लोकसभा भाषण(टी)मोदी काला टीका टिप्पणी(टी)डीएमके काला विरोध(टी)महिला आरक्षण विधेयक(टी)परिसीमन और महिला कोटा(टी)डीएमके हिंदुत्व आलोचना(टी)पेरियार काला प्रतीकवाद

रतलाम में विहिप-बजरंग दल का प्रदर्शन:राष्ट्रविरोधी मानसिकता के विरोध में दिया धरना; लव जिहाद के खिलाफ नारेबाजी

रतलाम में विहिप-बजरंग दल का प्रदर्शन:राष्ट्रविरोधी मानसिकता के विरोध में दिया धरना; लव जिहाद के खिलाफ नारेबाजी

रतलाम शहर के डालूमोदी बाजार चौराहे पर शुक्रवार दोपहर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। इस दौरान धरना देकर देश विरोधी गतिविधियों के खिलाफ नारेबाजी की गई। देशभर में बढ़ रही आपराधिक घटनाओं, लव जिहाद, अवैध गतिविधियों और सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने वाली घटनाओं के विरोध में यह प्रदर्शन राष्ट्रीय आह्वान पर किया गया। कार्यकर्ताओं ने इन मुद्दों को लेकर नाराजगी जताई। प्रदर्शन के बाद कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन तहसीलदार ऋषभ ठाकुर को सौंपा। ज्ञापन का वाचन भी तहसीलदार के समक्ष किया गया। विकृत मानसिकता के खिलाफ आवाज कार्यकर्ताओं ने कहा कि देश में बढ़ रही राष्ट्रविरोधी और विकृत मानसिकता के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है और ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई। इस दौरान प्रांत सह मंत्री महेश आंजना, प्रांत गौ रक्षा प्रमुख भेरुलाल माली, विभाग सह मंत्री पवन बंजारा, विभाग सहसंयोजक राधेश्याम आंजना, जिला अध्यक्ष राधेश्याम रावल, बजरंग दल जिला संयोजक मुकेश व्यास, जावरा जिला संयोजक आशीष पोरवाल सहित प्रांत, विभाग, जिला और प्रखंड स्तर के कई पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।

जियो का IPO मई में आने की उम्मीद:ड्राफ्ट पेपर्स जल्द फाइल करेगी कंपनी, ये देश का अब तक का सबसे बड़ा IPO होगा

जियो का IPO मई में आने की उम्मीद:ड्राफ्ट पेपर्स जल्द फाइल करेगी कंपनी, ये देश का अब तक का सबसे बड़ा IPO होगा

रिलायंस जियो IPO के लिए ड्राफ्ट पेपर्स मई में फाइल कर सकती है। पहले रिलायंस का लक्ष्य मार्च के अंत तक पेपर्स फाइल करने का था। हालांकि, ईरान युद्ध के कारण बाजार में आई गिरावट की वजह से इस टाइमलाइन को आगे बढ़ा दिया गया। यह देश का सबसे बड़ा IPO हो सकता है। वैल्यूएशन में हुंडई को पीछे छोड़ेगी जियो इन्वेस्टमेंट बैंक जेफरीज ने पिछले साल नवंबर में जियो की वैल्यूएशन करीब 180 बिलियन डॉलर यानी करीब 16 लाख करोड़ रुपए आंकी थी। हालांकि, अब कुछ बैंकर्स इसकी वैल्यूएशन 240 बिलियन डॉलर यानी करीब 22 लाख करोड़ रुपए तक बता रहे हैं। इस वैल्यूएशन के हिसाब से 2.5% हिस्सा बेचने पर भी जियो हुंडई मोटर इंडिया के ₹27,000 करोड़ के आईपीओ को पीछे छोड़ देगी। विदेशी निवेशकों को मिल सकता है निकलने का मौका पिछले 6 सालों में रिलायंस जियो ने केकेआर (KKR), सिल्वर लेक और गूगल जैसे बड़े ग्लोबल इन्वेस्टर्स से फंड जुटाया है। माना जा रहा है कि इस आईपीओ के जरिए कई विदेशी निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेचकर मुनाफा कमा सकते हैं और बाहर निकल सकते हैं। 19 बैंकों को सौंपी गई IPO मैनेज करने की जिम्मेदारी रिलायंस ने पिछले महीने ही IPO की तैयारियां औपचारिक रूप से शुरू कर दी थीं। इसके लिए कोटक महिंद्रा कैपिटल, मॉर्गन स्टेनली, गोल्डमैन सैक्स, जेएम फाइनेंशियल, HSBC, बैंक ऑफ अमेरिका और सिटीग्रुप जैसे 19 बड़े बैंकों को एडवाइजर के तौर पर नियुक्त किया गया है। हालांकि, IPO के स्ट्रक्चर और सटीक समय को लेकर अभी चर्चा जारी है और इसमें बदलाव संभव है। मस्क की स्टारलिंक से मुकाबला और AI पर फोकस जियो सिर्फ एक टेलीकॉम कंपनी नहीं रह गई है, बल्कि यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल सर्विसेज में भी तेजी से विस्तार कर रही है। कंपनी ने AI इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए एनवीडिया के साथ पार्टनरशिप की है। बाजार में जियो की सीधी टक्कर इलॉन मस्क की स्टारलिंक से होने वाली है, जो जल्द ही भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस शुरू करने वाली है। क्या होता है DRHP? यह एक कच्चा डॉक्यूमेंट होता है जो कंपनी सेबी को जमा करती है। इसमें कंपनी के बिजनेस, प्रमोटर्स और वित्तीय सेहत की पूरी जानकारी होती है। सेबी की मंजूरी के बाद ही IPO आता है। ये खबर भी पढ़ें… सेंसेक्स 505 अंक चढ़कर 78,494 पर बंद: निफ्टी में भी 157 अंकों की तेजी, 24,354 पर पहुंचा; FMCG शेयरों में खरीदारी हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन आज यानी शुक्रवार 17 अप्रैल को सेंसेक्स 505 अंक (0.65%) की तेजी के साथ 78,494 पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 157 अंकों (0.65%) की तेजी रही, ये 24,354 पर पहुंच गया। आज के कारोबार में FMCG,मीडिया और मेटल शेयरों में खरीदारी रही, जबकि आईटी शेयरों में बिकवाली रही। पूरी खबर पढ़ें…

जियो का IPO मई में आने की उम्मीद:ड्राफ्ट पेपर्स जल्द फाइल करेगी कंपनी, ये देश का अब तक का सबसे बड़ा IPO होगा

जियो का IPO मई में आने की उम्मीद:ड्राफ्ट पेपर्स जल्द फाइल करेगी कंपनी, ये देश का अब तक का सबसे बड़ा IPO होगा

रिलायंस जियो IPO के लिए ड्राफ्ट पेपर्स मई में फाइल कर सकती है। पहले रिलायंस का लक्ष्य मार्च के अंत तक पेपर्स फाइल करने का था। हालांकि, ईरान युद्ध के कारण बाजार में आई गिरावट की वजह से इस टाइमलाइन को आगे बढ़ा दिया गया। यह देश का सबसे बड़ा IPO हो सकता है। वैल्यूएशन में हुंडई को पीछे छोड़ेगी जियो इन्वेस्टमेंट बैंक जेफरीज ने पिछले साल नवंबर में जियो की वैल्यूएशन करीब 180 बिलियन डॉलर यानी करीब 16 लाख करोड़ रुपए आंकी थी। हालांकि, अब कुछ बैंकर्स इसकी वैल्यूएशन 240 बिलियन डॉलर यानी करीब 22 लाख करोड़ रुपए तक बता रहे हैं। इस वैल्यूएशन के हिसाब से 2.5% हिस्सा बेचने पर भी जियो हुंडई मोटर इंडिया के ₹27,000 करोड़ के आईपीओ को पीछे छोड़ देगी। विदेशी निवेशकों को मिल सकता है निकलने का मौका पिछले 6 सालों में रिलायंस जियो ने केकेआर (KKR), सिल्वर लेक और गूगल जैसे बड़े ग्लोबल इन्वेस्टर्स से फंड जुटाया है। माना जा रहा है कि इस आईपीओ के जरिए कई विदेशी निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेचकर मुनाफा कमा सकते हैं और बाहर निकल सकते हैं। 19 बैंकों को सौंपी गई IPO मैनेज करने की जिम्मेदारी रिलायंस ने पिछले महीने ही IPO की तैयारियां औपचारिक रूप से शुरू कर दी थीं। इसके लिए कोटक महिंद्रा कैपिटल, मॉर्गन स्टेनली, गोल्डमैन सैक्स, जेएम फाइनेंशियल, HSBC, बैंक ऑफ अमेरिका और सिटीग्रुप जैसे 19 बड़े बैंकों को एडवाइजर के तौर पर नियुक्त किया गया है। हालांकि, IPO के स्ट्रक्चर और सटीक समय को लेकर अभी चर्चा जारी है और इसमें बदलाव संभव है। मस्क की स्टारलिंक से मुकाबला और AI पर फोकस जियो सिर्फ एक टेलीकॉम कंपनी नहीं रह गई है, बल्कि यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल सर्विसेज में भी तेजी से विस्तार कर रही है। कंपनी ने AI इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए एनवीडिया के साथ पार्टनरशिप की है। बाजार में जियो की सीधी टक्कर इलॉन मस्क की स्टारलिंक से होने वाली है, जो जल्द ही भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस शुरू करने वाली है। क्या होता है DRHP? यह एक कच्चा डॉक्यूमेंट होता है जो कंपनी सेबी को जमा करती है। इसमें कंपनी के बिजनेस, प्रमोटर्स और वित्तीय सेहत की पूरी जानकारी होती है। सेबी की मंजूरी के बाद ही IPO आता है। ये खबर भी पढ़ें… सेंसेक्स 505 अंक चढ़कर 78,494 पर बंद: निफ्टी में भी 157 अंकों की तेजी, 24,354 पर पहुंचा; FMCG शेयरों में खरीदारी हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन आज यानी शुक्रवार 17 अप्रैल को सेंसेक्स 505 अंक (0.65%) की तेजी के साथ 78,494 पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 157 अंकों (0.65%) की तेजी रही, ये 24,354 पर पहुंच गया। आज के कारोबार में FMCG,मीडिया और मेटल शेयरों में खरीदारी रही, जबकि आईटी शेयरों में बिकवाली रही। पूरी खबर पढ़ें…

फूड एप से 12 ऑर्डर पर ₹900 एक्स्ट्रा खर्च हो:जोमैटो, स्विगी की प्लेटफॉर्म फीस 3 साल में 9 गुना बढ़ी, यहां दाम भी 15% तक ज्यादा

फूड एप से 12 ऑर्डर पर ₹900 एक्स्ट्रा खर्च हो:जोमैटो, स्विगी की प्लेटफॉर्म फीस 3 साल में 9 गुना बढ़ी, यहां दाम भी 15% तक ज्यादा

ऑनलाइन ऑर्डर के जरिये खाना मंगवाना, OTT देखना, 10 मिनट में किराना- ये सुविधाएं अब पहले से महंगी हो चुकी हैं। प्लेटफॉर्म फीस, डिलीवरी चार्ज और छुपे हुए खर्च मिलकर हर महीने हजारों रुपए यूं ही खर्च हो रहे हैं। यदि आप महीने में 12 बार भी फूड डिलीवरी एप से ऑर्डर करते हैं तो अनजाने में करीब 900 रुपए अतिरक्ति खर्च कर रहे हैं। इसमें 180 रुपए प्लेटफॉर्म फीस और 720 रुपए डिलीवरी चार्ज शामिल है। यह रकम हर साल बढ़ रही है। 2023-2026 के बीच जोमैटो, स्विगी पर प्लेटफॉर्म फीस 9 गुना हो गई। ऑनलाइन मेन्यू के दाम भी ऑफलाइन से 10-15% ज्यादा होते हैं। मंथली खर्च पर बढ़ रहा 2 से 5 हजार का बोझ असली समस्या यह है कि हर खर्च छोटा लगता है। 249 रुपए का लंच, 199 रुपए का सब्सक्रिप्शन, लेकिन ये सब मिलकर परिवार के बजट पर हर महीने 2000-5000 रुपए का बोझ बढ़ा देते हैं। चुनौतीपूर्ण हालात में यह बिजनेस बढ़ता है। कोविड महामारी की सबसे कमजोर तिमाही (जनवरी-मार्च 2020) में जहां SP 500 कंपनियों की बिक्री 1.9% घटी, वहीं सब्सक्रिप्शन बिजनेस 9.5% बढ़े थे। नेटफ्लिक्स की आय 16%, एपल सर्विसेज की 36% और स्पॉटिफाई की 26% बढ़ी थी। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सब्सक्रिप्शन मॉडल दो दशकों का सबसे लचीला और मजबूत बिजनेस आर्किटेक्चर है। यहां सीधे ग्राहकों की जेब से पैसा आता है। आलस और मुश्किल प्रोसेस से बढ़ रहे पेड ग्राहक मैकिंजी की रिपोर्ट कहती है कि लोग सब्सक्रिप्शन तभी बंद करते हैं जब उसके दाम बहुत ज्यादा बढ़ जाएं। लेकिन ज्यादातर लोग इसे कैंसिल क्यों नहीं करते? इसकी सबसे बड़ी वजह है ‘जड़ता’ (Inertia) यानी कुछ न करने की आदत। फ्रीमियम मॉडल (जहाँ शुरुआत में सर्विस फ्री मिलती है) वाली कंपनियां 5 साल में करीब 95-100% ग्राहकों को अपने साथ जोड़े रखने में सफल रहती हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि 95% ग्राहक उनकी सर्विस से बहुत खुश हैं। असल में, सब्सक्रिप्शन बंद करने के लिए ग्राहक को खुद से मेहनत और प्रोसेस करना पड़ता है, जबकि उसे चालू रखने के लिए उसे कुछ भी नहीं करना पड़ता। इसी आलस या प्रोसेस की जटिलता की वजह से लोग पैसे देते रहते हैं। फूड डिलीवरी, OTT की रफ्तार तेज 1. फूड डिलीवरी: तीन साल में तीन गुना हुआ बाजार 2023 में भारत का ऑनलाइन फूड डिलीवरी बाजार 69,000 करोड़ रुपए का था। ईएमआर एंड मार्क का अनुमान है कि इस साल के आखिर तक यह 2.25 लाख करोड़ रुपए हो जाएगा। 2. OTT: 60 करोड़ से ऊपर निकले स्ट्रीमिंग ऑडियंस आईबीईएफ के मुताबिक 2023 में OTT का पेड सब्सक्रिप्शन 8,200 करोड़ रुपए का था। इस साल यह 11,191 करोड़ तक पहुंच सकता है। बीते साल स्ट्रीमिंग ऑडियंस 60.1 करोड़ थे। ईरान जंग का असर: 10% तक और महंगाई के लिए तैयार रहें मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर अभी सीमित है। लेकिन कच्चे तेल की कीमत 60 डॉलर से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। यह अब भी 96 डॉलर पर है। अगर जंग लंबा खिंचा तो कई सेक्टरों में 10% से ज्यादा महंगाई देखने को मिल सकती है। वेल्थ मैनेजमेंट फर्म मेवनार्क के मुताबिक, घर के बजट में कम से कम 10% बढ़ने के लिए अभी से तैयार रहें।

पेट की बेलगाम चर्बी पर ICMR का महाप्लान, लाखों लोगों पर हो रही रिसर्च, मोटापा दूर करने का निकालेगा फॉर्मूला

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Last Updated:April 17, 2026, 18:25 IST ICMR Plan for Belly Fat Control: भारत पेट की चर्बी से परेशान है. यहां चौथा वयस्कों के पेट पर बेलगाम चर्बी होती है. पेट की चर्बी घटाने के लिए तरह-तरह की बात की जाती है लेकिन कोई एक मानक फॉर्मूला अब तक तैयार नहीं हो पाया है. इसी समस्या को देखते हुए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद यानी ICMR ने एक महाप्लान तैयार किया है. इसके तहत देश भर में लाखों लोगों पर अध्ययन किया जाएगा और ऐसा फॉर्मूला निकाला जाएगा जिससे पेट के मोटापे से मुक्ति मिले. मोटापा कम करने का निकलेगा समाधान. मोटापा कम करने के लिए हजारों तरह के फंडे आजमाए जाते हैं. कोई कहता है कि भोजन कम कर दो. कोई कहता है एक्सरसाइज करो. कोई कहता है वॉक करो. कोई कहता है फास्ट करो तो कोई कहता है योग करो लेकिन क्या कोई ऐसा फॉर्मूला है जिसमें दावे के साथ कहा जाए कि इससे मोटाप कम हो जाएगा. शायद कोई नहीं. किसी को भोजन कम करने से मोटापा कम हो जाता है तो किसी को भोजन कम करने से मोटापा बढ़ ही जाता है. मतलब अब तक कोई भी ऐसी चीज नहीं जिससे मोटापे का फुलप्रूव इलाज किया जा सके. इसी बात को मद्देनजर रखते हुए आईसीएमआर ने एक महाप्लान बनाया है. इस महाप्लान के तहत देश भर में लाखों लोगों पर अध्ययन किया जाएगा और पेट की चर्बी को खत्म करने के लिए कोई वैज्ञानिक तरीका निकाला जाएगा. भारत के लिए प्रभावी तरीका रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हर चार में से एक वयस्क पेट की चर्बी से परेशान है. यहां मोटापाग्रस्त व्यक्तियों में अधिकांश के पेट पर चर्बी ही सबसे बड़ी समस्या है. मोटापा भारत में इतनी तेजी से बढ़ रहा है कि भारतीय चिकित्सा जगत इससे परेशान है. मोटापा डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, लिवर डिजीज जैसी मेटाबोलिक बीमारियों की प्रमुख वजह है. यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कई बार इस मोटापे को कम करने के लिए आवश्यक कदम उठाने की सलाह दे चुके है. अब इस चुनौती से निपटने के लिए देश की सर्वोच्च चिकित्सा संस्था ICMR ने एक ऐतिहासिक पहल शुरू की है. संस्था अब लाखों लोगों के डेटा का विश्लेषण कर यह पता लगाएगी कि वास्तव में वजन घटाने का कौन सा तरीका भारतीय शरीर और भौगोलिक स्थितियों के हिसाब से सबसे प्रभावी है. शुगर, कोलेस्ट्रॉल का भी विश्लेषण टीओआई के मुताबिक कई वर्षों से चल रही रिसर्च, अलग-अलग डाइट प्लान, फिटनेस रूटीन और जागरुकता अभियानों के बावजूद अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कौन-सा तरीका सबसे ज्यादा प्रभावी है और किस व्यक्ति पर कौन-सा उपाय बेहतर काम करता है. इस कमी को दूर करने के लिए आईसीएमआर ने विभिन्न अध्ययनों के शोधकर्ताओं से डेटा साझा करने का आह्वान किया है, ताकि एक बड़ा संयुक्त विश्लेषण किया जा सके. इस पहल का मकसद वजन कम करने के लिए विभिन्न उपायों जैसे कि डाइट, एक्सरसाइज, व्यवहार और मल्टी कंपोनेंट इंटवेंशन की प्रभावशालिता पर अध्ययन किया जएगा. यह देखा जाएगा विभिन्न समूहों पर इन सबका क्या असर होता है. यह विश्लेषण केवल वजन घटाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल जैसे मानकों पर भी नजर रखेगा, क्योंकि मोटापा कई लाइफस्टाइल बीमारियों से गहराई से जुड़ा हुआ है. हर उम्र के लोगों के लिए निकलेगा फॉर्मूलाइसका एक अहम फोकस यह भी होगा कि एक ही तरीका कुछ लोगों पर काम करता है जबकि दूसरों पर नहीं. इसके लिए उम्र, लिंग, आय स्तर और भौगोलिक स्थितियों जैसे ग्रामीण इलाकों के आधार पर अंतर का अध्ययन किया जाएगा. ग्रामीण इलाकों में कुपोषण होते हुए भी मोटापा बढ़ रहा है. एक्सपर्ट का कहना है कि यह समस्या अब और जटिल होती जा रही है, क्योंकि केवल वजन अब स्वास्थ्य जोखिम का भरोसेमंद पैमाना नहीं रह गया है. अब कई ऐसे लोग भी सामने आ रहे हैं जिनका वजन सामान्य है लेकिन वे मेटाबॉलिक समस्याओं से जूझ रहे हैं. बेशक अधिक वजन वाले लोगों में तुरंत कोई गंभीर जटिलता नहीं दिखती लेकिन बाद कई परेशानियां सामने आ जाती है. इस विश्लेषण से अखिल भारतीय प्रमाण मिलने की उम्मीद है. इस समग्र विश्लेषण के बाद पेट की चर्बी और मोटापे को कम करने के लिए एक सर्वमान्य फॉर्मूला तय किया जाएगा जो पूरे देश के सभी उम्र के लोगों के लिए प्रभावी होगा. About the Author Lakshmi Narayan 18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें First Published : April 17, 2026, 18:25 IST

नरसिंहपुर में 11 पेटी देशी शराब के साथ कार जब्त:अवैध परिवहन करते एक आरोपी गिरफ्तार, पुलिस ने घेराबंदी कर पकड़ा

नरसिंहपुर में 11 पेटी देशी शराब के साथ कार जब्त:अवैध परिवहन करते एक आरोपी गिरफ्तार, पुलिस ने घेराबंदी कर पकड़ा

नरसिंहपुर जिले के ठेमी थाना क्षेत्र में पुलिस ने अवैध शराब तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एक इंडिगो कार से 11 पेटी देशी शराब जब्त की है। यह कार्रवाई शुक्रवार को कंधरापुर तिराहे पर की गई। सीट और डिक्की से मिली शराब पुलिस को सूचना मिली थी कि एक सफेद इंडिगो कार में अवैध शराब ले जाई जा रही है। इसके बाद टीम ने घेराबंदी कर वाहन को रोका। तलाशी लेने पर कार की पिछली सीट से 3 पेटी और डिक्की से 8 पेटी शराब बरामद हुई। वाहन चालक शराब के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दे सका। इसके बाद पुलिस ने उसे मौके पर ही हिरासत में ले लिया। आबकारी एक्ट में केस दर्ज, कार भी जब्त गिरफ्तार आरोपी की पहचान धर्मेन्द्र साहू (30), निवासी ग्राम रीछा के रूप में हुई है। पुलिस ने उसके पास से करीब 80 हजार रुपये की शराब और 3.20 लाख रुपए की इंडिगो कार भी जब्त की है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

राहुल गांधी ‘दोहरी नागरिकता विवाद’ में इलाहाबाद HC ने FIR का आदेश दिया: क्या कोई भारतीय सांसद विदेशी पासपोर्ट रख सकता है? | राजनीति समाचार

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आखरी अपडेट:17 अप्रैल, 2026, 18:13 IST कांग्रेस ने ऐतिहासिक रूप से इन दावों को पुनर्चक्रित ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ के रूप में खारिज कर दिया है राहुल गांधी के मामले में, दांव असाधारण रूप से ऊंचे हैं; एक महत्वपूर्ण विशेष संसद सत्र के दौरान विपक्ष के नेता के रूप में, दोहरी नागरिकता का पता चलने से न केवल उनका वर्तमान कार्यकाल समाप्त हो जाएगा, बल्कि उन्हें भविष्य की चुनावी प्रतियोगिताओं से भी रोका जा सकता है। फ़ाइल चित्र/पीटीआई भारत में राजनीतिक परिदृश्य को शुक्रवार को झटका लगा जब इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने लोकसभा के विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज करने का निर्देश दिया। अदालत का आदेश उनकी कथित दोहरी नागरिकता को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद से संबंधित है – एक ऐसा आरोप, जो यदि प्रमाणित होता है, तो संसद में सेवा करने की उनकी योग्यता पर गहरा प्रभाव डालता है। निर्देश प्रभावी रूप से लखनऊ में एक विशेष एमपी/एमएलए अदालत के पिछले जनवरी के फैसले को रद्द कर देता है, जिसने याचिका को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर बताते हुए खारिज कर दिया था। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश में प्राथमिक आरोप क्या हैं? यह आदेश कर्नाटक के एक भाजपा कार्यकर्ता एस विग्नेश शिशिर द्वारा दायर एक याचिका पर आधारित है, जो यूनाइटेड किंगडम से “गोपनीय ईमेल” और कॉर्पोरेट दस्तावेज़ रखने का दावा करता है। याचिकाकर्ता के अनुसार, गांधी ने 2003 और 2009 के बीच अब भंग हो चुकी ब्रिटेन स्थित फर्म, मेसर्स बैकॉप्स लिमिटेड के वार्षिक रिटर्न में स्वेच्छा से अपनी राष्ट्रीयता “ब्रिटिश” घोषित की थी। न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की अध्यक्षता में उच्च न्यायालय ने कहा कि इन आरोपों की प्रकृति के कारण आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, पासपोर्ट अधिनियम और विदेशी अधिनियम के तहत गहन जांच की आवश्यकता है। अदालत ने गांधी के वर्तमान निर्वाचन क्षेत्र रायबरेली के कोतवाली पुलिस स्टेशन को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश सरकार को या तो अपनी राज्य एजेंसियों के माध्यम से जांच कराने या मामले को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने की छूट दी गई है। याचिकाकर्ता ने फैसले को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए “मील का पत्थर” बताया है, जबकि कांग्रेस ने अभी तक औपचारिक खंडन जारी नहीं किया है, हालांकि उसने ऐतिहासिक रूप से इन दावों को पुनर्चक्रित “राजनीतिक प्रतिशोध” के रूप में खारिज कर दिया है। क्या कोई भारतीय सांसद कानूनी रूप से ब्रिटिश नागरिकता धारण कर सकता है? भारत के संविधान के वर्तमान कानूनी ढांचे के तहत, उत्तर निश्चित रूप से नहीं है। संविधान का अनुच्छेद 9 स्पष्ट रूप से दोहरी नागरिकता पर रोक लगाता है। इसमें कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति जो “स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता प्राप्त करता है” स्वचालित रूप से भारत का नागरिक बनना बंद कर देता है। चूँकि अनुच्छेद 84 के तहत लोकसभा या राज्यसभा का चुनाव लड़ने के लिए भारतीय नागरिकता एक अनिवार्य शर्त है, इसलिए किसी भी व्यक्ति के पास विदेशी पासपोर्ट होने की पुष्टि होने पर उसे तुरंत उसकी सीट से अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा। इस संवैधानिक कठोरता को 1955 के नागरिकता अधिनियम और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 द्वारा और अधिक मजबूत किया गया है। यदि एक जांच से पुष्टि होती है कि एक सांसद के पास विदेशी राष्ट्रीयता है, तो भारत के राष्ट्रपति, चुनाव आयोग की सलाह पर कार्य करते हुए, उनकी सीट को रिक्त घोषित करने की शक्ति रखते हैं। राहुल गांधी के मामले में, दांव असाधारण रूप से ऊंचे हैं; एक महत्वपूर्ण विशेष संसद सत्र के दौरान विपक्ष के नेता के रूप में, दोहरी नागरिकता का पता चलने से न केवल उनका वर्तमान कार्यकाल समाप्त हो जाएगा, बल्कि उन्हें भविष्य की चुनावी प्रतियोगिताओं से भी रोका जा सकता है। यह कानूनी घटनाक्रम वर्तमान संसद सत्र को कैसे प्रभावित करता है? उच्च न्यायालय के आदेश का समय राजनीतिक रूप से विस्फोटक है, जो संविधान (131वें संशोधन) विधेयक पर अंतिम बहस के साथ बिल्कुल मेल खाता है। जैसा कि सदन बड़े पैमाने पर 850 सीटों के विस्तार और महिला आरक्षण कोटा पर मतदान करने की तैयारी कर रहा है, एफआईआर सरकार की गांधी की आक्रामक “जहर की गोली” आलोचना के लिए एक शक्तिशाली प्रति-कथा के रूप में कार्य करती है। यह कदम संभावित रूप से कांग्रेस नेतृत्व को अपने नेता की पहचान पर रक्षात्मक कानूनी लड़ाई के लिए “गणितीय गैरमांडरिंग” पर आक्रामक होने के लिए मजबूर करता है। गृह मंत्रालय (एमएचए) ने पहले ही इस मामले पर 2019 के नोटिस से संबंधित गोपनीय रिकॉर्ड का अध्ययन कर लिया है, जांच तेजी से आगे बढ़ने की उम्मीद है। क्या जांच को सीबीआई के अधिग्रहण के लिए आगे बढ़ना चाहिए, इसमें संभवतः अंतरराष्ट्रीय सहयोग और दो दशक पहले की राष्ट्रीयता घोषणाओं को सत्यापित करने के लिए यूके कंपनी हाउस के रिकॉर्ड का अवलोकन शामिल होगा। अभी के लिए, “नागरिकता बम” ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि जब सरकार भारत के चुनावी मानचित्र को फिर से बनाती है, तो उसके मुख्य आलोचक की व्यक्तिगत स्थिति कानूनी माइक्रोस्कोप के तहत बनी रहती है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 17 अप्रैल, 2026, 18:12 IST समाचार राजनीति राहुल गांधी ‘दोहरी नागरिकता विवाद’ में इलाहाबाद HC ने FIR का आदेश दिया: क्या कोई भारतीय सांसद विदेशी पासपोर्ट रख सकता है? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें

दिखने में साधारण…. लेकिन असर चौंकाने वाला, क्या है बनमारा पौधे का सच? वैज्ञानिक भी कर रहे हैं रिसर्च

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Last Updated:April 17, 2026, 18:06 IST हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाने वाला बनमारा, जिसे स्थानीय भाषा में काला बांसा कहा जाता है, एक ऐसा जंगली पौधा है जो तेजी से फैलता है. यह जहां एक ओर पारंपरिक चिकित्सा में उपयोगी माना जाता है, वहीं दूसरी ओर इसके आक्रामक स्वभाव के कारण यह पर्यावरण के लिए चुनौती भी बन जाता है. बागेश्वर: बनमारा जिसे स्थानीय भाषा में काला बांसा भी कहा जाता है, पहाड़ी क्षेत्रों में तेजी से फैलने वाला एक जंगली पौधा है. यह मुख्य रूप से उत्तराखंड, दार्जिलिंग और हिमालयी इलाकों में पाया जाता है. इसका वैज्ञानिक नाम एगेराटिना एडेनोफोरा है. यह पौधा देखने में साधारण झाड़ी जैसा होता है, जिसमें छोटे सफेद फूल खिलते हैं. यह तेजी से फैलता है, कई बार खेती योग्य जमीन और जंगलों पर कब्जा कर लेता है. हालांकि, इसके औषधीय गुणों के कारण ग्रामीण इलाकों में इसका उपयोग लंबे समय से किया जाता रहा है. पारंपरिक ज्ञान में इसे एक उपयोगी जड़ी-बूटी माना जाता है, लेकिन इसकी सही पहचान और उपयोग की जानकारी होना बेहद जरूरी है. बनमारा के पत्तों और तने का रस पारंपरिक रूप से घाव भरने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. ग्रामीण लोग इसे छोटे कट, खरोंच या जख्म पर लगाते हैं, जिससे खून बहना कम होता है, घाव जल्दी भरने में मदद मिलती है. इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व त्वचा को सुरक्षित रखने और संक्रमण से बचाने में सहायक माने जाते हैं. कई लोग इसे एंटीसेप्टिक की तरह इस्तेमाल करते हैं, खासकर तब जब आसपास कोई दवा उपलब्ध नहीं होती है. हालांकि, इसका उपयोग केवल बाहरी रूप से ही करना सुरक्षित माना जाता है. डॉ. ऐजल पटेल ने लोकल 18 को बताया कि इस पौधे में सूजन कम करने वाले गुण पाए जाते हैं, जिसके कारण इसे दर्द और सूजन में राहत के लिए भी उपयोग किया जाता है. बनमारा के पत्तों को पीसकर प्रभावित जगह पर लगाने से सूजन में कमी आ सकती है. इसके प्राकृतिक तत्व शरीर की सूजन प्रतिक्रिया को कम करने में मदद करते हैं. हालांकि, हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है, इसलिए इसे लगाने से पहले थोड़ी मात्रा में परीक्षण करना जरूरी है, ताकि किसी प्रकार की एलर्जी या जलन की समस्या न हो. Add News18 as Preferred Source on Google बनमारा का उपयोग कुछ त्वचा संबंधी समस्याओं जैसे खुजली, दाद या हल्के संक्रमण में भी किया जाता है. इसमें मौजूद एंटी-माइक्रोबियल गुण त्वचा पर बैक्टीरिया और फंगस के प्रभाव को कम करने में सहायक हो सकते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इसके पत्तों का लेप बनाकर त्वचा पर लगाते हैं. इससे त्वचा को ठंडक मिलती है, जलन में राहत मिल सकती है. हालांकि, यह कोई प्रमाणित चिकित्सा उपचार नहीं है, इसलिए गंभीर त्वचा रोगों में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है. गलत उपयोग से समस्या बढ़ भी सकती है. कुछ शोधों में पाया गया है कि बनमारा पौधे में एंटी-ऑक्सीडेंट तत्व मौजूद होते हैं. ये तत्व शरीर को फ्री-रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद करते हैं. एंटी-ऑक्सीडेंट शरीर की कोशिकाओं को स्वस्थ रखने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होते हैं. इस पौधे के इन गुणों पर अभी और वैज्ञानिक शोध की जरूरत है. पारंपरिक उपयोग के आधार पर इसे लाभकारी माना जाता है, लेकिन इसे औषधि के रूप में अपनाने से पहले विशेषज्ञ सलाह लेना जरूरी है. दार्जिलिंग और अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में बनमारा का उपयोग पारंपरिक चिकित्सा में सांप के काटने और मानसिक समस्याओं के इलाज में भी किया जाता रहा है. इन दावों के पीछे ठोस वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं. यह अधिकतर लोक मान्यताओं और पुराने अनुभवों पर आधारित है. कई ग्रामीण आज भी इन परंपराओं का पालन करते हैं, लेकिन आधुनिक चिकित्सा के अनुसार ऐसे मामलों में डॉक्टर की सहायता लेना बेहद जरूरी है. केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहना खतरनाक हो सकता है, खासकर जब मामला गंभीर हो. बनमारा पौधा जहां इंसानों के लिए सीमित उपयोग में लाभकारी माना जाता है, वहीं यह पशुओं के लिए हानिकारक हो सकता है. खासकर घोड़े और अन्य पालतू जानवर अगर इसे खा लें तो उनके लिए यह विषैला साबित हो सकता है. इससे उनके स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है. इसलिए जिन क्षेत्रों में यह पौधा अधिक मात्रा में उगता है, वहां पशुपालकों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. जानवरों को इससे दूर रखना जरूरी है, ताकि किसी प्रकार की बीमारी या नुकसान से बचा जा सके. बनमारा एक आक्रामक खरपतवार है, जो बहुत तेजी से फैलता है, स्थानीय पौधों को नुकसान पहुंचाता है. यह जमीन की उर्वरता को प्रभावित करता है और जैव विविधता के लिए खतरा बन सकता है. जंगलों और खेती की जमीन में फैलकर यह अन्य उपयोगी पौधों की वृद्धि को रोक देता है. इसलिए कई क्षेत्रों में इसे नियंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि इसके नियंत्रण के लिए सामूहिक प्रयास और जागरूकता जरूरी है. First Published : April 17, 2026, 18:06 IST

रोहित शेट्टी के घर फायरिंग का आरोपी UP से गिरफ्तार:शुभम लोणकर गैंग से जुड़ा है प्रदीप; सोशल मीडिया के जरिए बना था अपराधी

रोहित शेट्टी के घर फायरिंग का आरोपी UP से गिरफ्तार:शुभम लोणकर गैंग से जुड़ा है प्रदीप; सोशल मीडिया के जरिए बना था अपराधी

यूपी एसटीएफ और मुंबई क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने फिल्म मेकर रोहित शेट्टी के जुहू स्थित घर पर हुई फायरिंग मामले में 9वीं गिरफ्तारी की है। पुलिस ने आगरा से आरोपी प्रदीप कुमार उर्फ गांठ को गिरफ्तार किया है। यह आरोपी कुख्यात शुभम लोणकर गैंग का सदस्य बताया जा रहा है। गुरुवार दोपहर आगरा-एटा रोड के पास से उसे दबोचा गया। पूछताछ में प्रदीप ने बताया कि वह फेसबुक और इंस्टाग्राम के जरिए शुभम लोणकर गैंग के संपर्क में आया था। सोशल मीडिया पर ही उसे गैंग की गतिविधियों के लिए ‘रेडिकलाइज’ किया गया। प्रदीप ने कबूल किया कि उसने अपने साथियों सनी, दीपू और सोनू के साथ मिलकर इस अपराध को अंजाम दिया। उसका मकसद अंडरवर्ल्ड में अपना ‘दबदबा’ कायम करना था। अब तक 9 गिरफ्तार, मकोका के तहत केस दर्ज रोहित शेट्टी केस में यह 9वीं गिरफ्तारी है। इससे पहले पुलिस प्रदीप शर्मा उर्फ गोलू, दीपक और विष्णु कुशवाहा समेत 8 लोगों को अलग-अलग राज्यों से पकड़ चुकी है। मुंबई पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS), आर्म्स एक्ट और महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (MCOCA) जैसी सख्त धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। आरोपी को अब ट्रांजिट रिमांड पर मुंबई ले जाया जाएगा। 1 फरवरी को हुई थी फायरिंग पूरा मामला 1 फरवरी 2026 की रात का है। मुंबई के जुहू इलाके में स्थित ‘शेट्टी टावर’ पर अज्ञात हमलावरों ने फायरिंग की थी। पुलिस जांच में सामने आया कि यह हमला शुभम लोणकर गैंग ने करवाया था। हमलावरों का मकसद फिल्म इंडस्ट्री में डर फैलाना और वसूली करना था। इस घटना के बाद से ही मुंबई पुलिस और क्राइम ब्रांच इस गैंग के गुर्गों की तलाश में जुटी हुई थी। फियर साइकोसिस पैदा करना था मकसद पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, शुभम लोणकर गैंग फिल्म जगत के बड़े नामों को निशाना बनाकर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है। रोहित शेट्टी के घर पर फायरिंग के पीछे भी यही मंशा थी कि इंडस्ट्री और आम जनता के बीच खौफ पैदा किया जा सके। फिलहाल, गिरफ्तार प्रदीप को बाह पुलिस स्टेशन में मुंबई पुलिस के हवाले कर दिया गया है, जहां से कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।