मंत्री के भाई ने लेडी CEO को धमकाया, मारने दौड़े:इंदर सिंह ने कहा-जिंदा गाड़ दूंगा; मिनिस्टर नागर सिंह चौहान बोले-मैं उससे बात नहीं करता

पिछोर से बीजेपी विधायक प्रीतम लोधी के बेटे का थार कांड और उसके बाद लोधी की आईपीएस अफसर को धमकी का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि एक और मंत्री के परिजन का विवाद सामने आ गया है। ताजा मामला कैबिनेट मंत्री नागर सिंह चौहान के भाई इंदर सिंह चौहान से जुड़ा है। चौहान के खिलाफ महिला सीईओ को धमकाने, अभद्रता और जान से मारने की धमकी देने का केस दर्ज किया गया है। घटना 22 अप्रैल की है। जब इंदर सिंह चौहान, आलीराजपुर जनपद पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रिया काग पर भड़क गए थे। वे कन्या विवाह योजना में पहले से विवाहित आवेदकों के आवेदन निरस्त किए जाने को लेकर नाराज थे। आरोप है कि इंदर सिंह, महिला सीईओ को मारने दौड़े। धमकाया, ‘तेरे दांत तोड़ दूंगा। तुझे यहीं जिंदा गाड़ दूंगा, यहां सब मेरी मर्जी से होगा।’ लेखाधिकारी सावन भिंडे ने उन्हें रोका। इस पूरे मामले में मंत्री नागर सिंह चौहान ने कहा- मैं अपने भाई से बात नहीं करता। वह अपना काम करता है। अलग रहता है। वह किसे, क्या बोल रहा है, वह जाने। कानून अपना काम करेगा। एसपी बोले- कोर्ट से मिली जमानत पुलिस ने इंदर सिंह चौहान के खिलाफ बीएनएस की धारा 132, 224, 221, 351(2) और 126(2) के तहत FIR की है। आलीराजपुर एसपी रघुवंश सिंह भदौरिया ने बताया कि केस दर्ज करने के बाद चौहान को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था। जहां से उन्हें जमानत मिल गई। सीईओ बोलीं- असुरक्षित महसूस कर रही हूं सीईओ काग ने कहा- मैं 22 अप्रैल को दोपहर 3 बजे ऑफिस पहुंची तो इंदर सिंह चौहान ने कन्या विवाह योजना के आवेदन निरस्त करने पर मुझे धमकाया। मुझे मारने दौड़े। उन्होंने मेरा रास्ता भी रोका। मैं अपने कार्यस्थल पर असुरक्षित महसूस कर रही हूं। ये खबर भी पढे़ं… करैरा तेरे डैडी का नहीं SDOP… भाजपा विधायक की चेतावनी पिछोर से विधायक प्रीतम लोधी ने करैरा एसडीओपी आयुष जाखड़ को चेतावनी देते वीडियो जारी किया। बेटे दिनेश लोधी के थार एक्सीडेंट मामले में पूछताछ और करैरा में न दिखने की बात पर प्रीतम ने कहा, ‘करैरा तेरे डैडी का नहीं है एसडीओपी।’ रविवार देर शाम जारी वीडियो में प्रीतम लोधी एसडीओपी पर भड़के नजर आए। पढे़ं पूरी खबर…
MP में मंत्री के भाई का हंगामा:महिला CEO को मारने दौड़ा-धमकाया; कहा- तेरे दांत तोड़ दूंगा, यहीं जिंदा गाड़ दूंगा

मध्य प्रदेश के पिछोर के भाजपा विधायक प्रीतम लोधी के बेटे का थार कांड और उसके बाद लोधी की आईपीएस को धमकी का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि एक और मंत्री के परिजन का विवाद सामने आ गया है। कैबिनेट मंत्री नागरसिंह चौहान के भाई और जनपद पंचायत अध्यक्ष के पति इंदरसिंह चौहान पर महिला सीईओ को धमकाने, अभद्रता और जान से मारने की धमकी देने का मामला दर्ज किया गया है। घटना 22 अप्रैल की है, जब जनपद पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रिया काग कार्यालय पहुंचीं। बताया जा रहा है कि कन्या विवाह योजना में पहले से विवाहित आवेदकों के आवेदन निरस्त किए जाने को लेकर इंदरसिंह चौहान नाराज हो गए। आरोप है कि इंदर सिंह सीईओ को मारने दौड़े और धमकाया, ‘तेरे दांत तोड़ दूंगा, तुझे यहीं जिंदा गाड़ दूंगा, यहां सब मेरी मर्जी से होगा।’ लेखाधिकारी सावन भिंडे ने उन्हें रोका। पुलिस ने इंदरसिंह चौहान के खिलाफ बीएनएस की धारा 132, 224, 221, 351(2) और 126(2) के तहत केस दर्ज किया है। अलीराजपुर एसपी रघुवंश सिंह भदौरिया ने बताया कि इंदरसिंह चौहान के विरुद्ध केस दर्ज करने के बाद गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था। जहां से उसे जमानत मिल गई। विवादों से पुराना नाता इंदरसिंह पहले भी विवादों में रहे हैं। खाद वितरण को लेकर विपणन सहकारी संस्था के सेल्समैन से मारपीट का मामला सामने आ चुका है। कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरे हटवाने को लेकर भी सवाल उठे हैं। इस मामले ने सत्ता पक्ष से जुड़े लोगों के परिजनों की दबंगई को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। सीईओ बोलीं- मैं कार्यस्थल पर असुरक्षित महसूस कर रही हूं इस मामले में सीईओ काग का कहना है कि मैं 22 अप्रैल को दोपहर 3 बजे ऑफिस पहुंची तो इंदरसिंह चौहान ने कन्या विवाह योजना के आवेदन निरस्त करने पर मुझे धमकाया। उन्होंने कहा, ‘तेरे दांत तोड़ दूंगा, जिंदा गाड़ दूंगा’ और मुझे मारने दौड़े। उन्होंने मेरा रास्ता भी रोका। मैं अपने कार्यस्थल पर असुरक्षित महसूस कर रही हूं। मंत्री बोले- मैं अपने भाई से बात नहीं करता इस पूरे मामले में मंत्री नागर सिंह चौहान का कहना है कि मैं अपने भाई से बात नहीं करता। वह अपना काम करता है। अलग रहता है। वह किसे, क्या बोल रहा है, वह जाने। कानून अपना काम करेगा। जहां तक धमकाने की बात है तो उनकी पत्नी जनपद अध्यक्ष है। वो जानें।
सीनियर सिटीजन के लिए अब FD हुई और भी फायदेमंद:स्मॉल फाइनेंस बैंक दे रहे सबसे ज्यादा रिटर्न; निवेश करने से पहले जानें इससे जुड़ी खास बातें

शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच सुरक्षित निवेश चाहने वाले सीनियर सिटीजन के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) एक बार फिर सबसे पसंदीदा विकल्प बनकर उभरा है। साल 2026 में रिटायरमेंट के बाद अपनी पूंजी की सुरक्षा और रेगुलर इनकम को प्राथमिकता देने वाले बुजुर्गों के लिए एफडी पर शानदार रिटर्न मिल रहा है। सीनियर सिटीजन को आमतौर पर आम ग्राहकों के मुकाबले 0.50% (50 बेसिस पॉइंट्स) ज्यादा ब्याज मिलता है। ब्याज की ये दरें आरबीआई की पॉलिसी, निवेश की अवधि और बैंकों की नकदी स्थिति पर निर्भर करती हैं। सरकारी और प्राइवेट बैंकों में ब्याज दरें सरकारी बैंकों में FD पर ब्याज दरें प्राइवेट बैंकों में FD पर ब्याज दरें स्मॉल फाइनेंस बैंक दे रहे हैं सबसे ज्यादा रिटर्न रिटर्न के मामले में स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFBs) सबसे आगे हैं, जहां 8.5% तक ब्याज मिल रहा है। ईएसएएफ (ESAF) स्मॉल फाइनेंस बैंक 501 दिनों की एफडी पर 8.50% ब्याज दे रहा है। इसके अलावा सूर्योदय, शिवालिक, इक्विटास और जना स्मॉल फाइनेंस बैंक भी अलग-अलग अवधि के लिए 8.00% से 8.30% तक ब्याज ऑफर कर रहे हैं। हालांकि, बड़े कमर्शियल बैंकों के मुकाबले इनमें जोखिम थोड़ा ज्यादा माना जाता है। स्मॉल फाइनेंस बैंकों में FD पर ब्याज दरें बुजुर्गों को एफडी से होते हैं ये 4 फायदे रिटायरमेंट के बाद बुजुर्ग एफडी को कई वजहों से चुनते हैं: निवेश की स्ट्रैटेजी और टैक्स के नियम एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सारा पैसा एक साथ एक ही एफडी में लगाने के बजाय उसे छोटी, मध्यम और लंबी अवधि में बांटकर निवेश करना चाहिए। बेहतर मुनाफे के लिए एफडी के साथ सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) या पीपीएफ (PPF) को भी शामिल किया जा सकता है। टैक्स की बात करें तो एफडी से होने वाली कमाई निवेशक के टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्सेबल होती है। बैंक इस पर टीडीएस (TDS) काटते हैं, लेकिन अगर सालाना आय टैक्स की सीमा से कम है, तो बुजुर्ग फॉर्म 15H जमा कर टीडीएस बचा सकते हैं। क्या होता है फॉर्म 15H और लैडरिंग? फॉर्म 15H: यह एक सेल्फ-डिक्लेरेशन फॉर्म है जिसे 60 साल से अधिक उम्र के लोग बैंक में जमा करते हैं, ताकि उनकी ब्याज आय पर टीडीएस न काटा जाए। यह तभी भरा जा सकता है जब आपकी कुल अनुमानित आय पर टैक्स जीरो हो। FD लैडरिंग: अपनी कुल राशि को एक बड़ी एफडी बनाने के बजाय अलग-अलग समय (जैसे 1 साल, 2 साल, 3 साल) के लिए छोटी-छोटी एफडी में बांटना लैडरिंग कहलाता है। इससे ब्याज दरों में बदलाव का फायदा मिलता है और इमरजेंसी में पैसों की कमी नहीं होती।
सीनियर सिटीजन के लिए अब FD हुई और भी फायदेमंद:स्मॉल फाइनेंस बैंक दे रहे सबसे ज्यादा रिटर्न; निवेश करने से पहले जानें इससे जुड़ी खास बातें

शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच सुरक्षित निवेश चाहने वाले सीनियर सिटीजन के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) एक बार फिर सबसे पसंदीदा विकल्प बनकर उभरा है। साल 2026 में रिटायरमेंट के बाद अपनी पूंजी की सुरक्षा और रेगुलर इनकम को प्राथमिकता देने वाले बुजुर्गों के लिए एफडी पर शानदार रिटर्न मिल रहा है। सीनियर सिटीजन को आमतौर पर आम ग्राहकों के मुकाबले 0.50% (50 बेसिस पॉइंट्स) ज्यादा ब्याज मिलता है। ब्याज की ये दरें आरबीआई की पॉलिसी, निवेश की अवधि और बैंकों की नकदी स्थिति पर निर्भर करती हैं। सरकारी और प्राइवेट बैंकों में ब्याज दरें सरकारी बैंकों में FD पर ब्याज दरें प्राइवेट बैंकों में FD पर ब्याज दरें स्मॉल फाइनेंस बैंक दे रहे हैं सबसे ज्यादा रिटर्न रिटर्न के मामले में स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFBs) सबसे आगे हैं, जहां 8.5% तक ब्याज मिल रहा है। ईएसएएफ (ESAF) स्मॉल फाइनेंस बैंक 501 दिनों की एफडी पर 8.50% ब्याज दे रहा है। इसके अलावा सूर्योदय, शिवालिक, इक्विटास और जना स्मॉल फाइनेंस बैंक भी अलग-अलग अवधि के लिए 8.00% से 8.30% तक ब्याज ऑफर कर रहे हैं। हालांकि, बड़े कमर्शियल बैंकों के मुकाबले इनमें जोखिम थोड़ा ज्यादा माना जाता है। स्मॉल फाइनेंस बैंकों में FD पर ब्याज दरें बुजुर्गों को एफडी से होते हैं ये 4 फायदे रिटायरमेंट के बाद बुजुर्ग एफडी को कई वजहों से चुनते हैं: निवेश की स्ट्रैटेजी और टैक्स के नियम एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सारा पैसा एक साथ एक ही एफडी में लगाने के बजाय उसे छोटी, मध्यम और लंबी अवधि में बांटकर निवेश करना चाहिए। बेहतर मुनाफे के लिए एफडी के साथ सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) या पीपीएफ (PPF) को भी शामिल किया जा सकता है। टैक्स की बात करें तो एफडी से होने वाली कमाई निवेशक के टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्सेबल होती है। बैंक इस पर टीडीएस (TDS) काटते हैं, लेकिन अगर सालाना आय टैक्स की सीमा से कम है, तो बुजुर्ग फॉर्म 15H जमा कर टीडीएस बचा सकते हैं। क्या होता है फॉर्म 15H और लैडरिंग? फॉर्म 15H: यह एक सेल्फ-डिक्लेरेशन फॉर्म है जिसे 60 साल से अधिक उम्र के लोग बैंक में जमा करते हैं, ताकि उनकी ब्याज आय पर टीडीएस न काटा जाए। यह तभी भरा जा सकता है जब आपकी कुल अनुमानित आय पर टैक्स जीरो हो। FD लैडरिंग: अपनी कुल राशि को एक बड़ी एफडी बनाने के बजाय अलग-अलग समय (जैसे 1 साल, 2 साल, 3 साल) के लिए छोटी-छोटी एफडी में बांटना लैडरिंग कहलाता है। इससे ब्याज दरों में बदलाव का फायदा मिलता है और इमरजेंसी में पैसों की कमी नहीं होती।
Pachpadra Refinery Cyber Attack Probe: 3 Doms Sealed

देश की सबसे आधुनिक और हाईटेक बालोतरा की पचपदरा रिफाइनरी में 20 अप्रैल को लगी आग के बाद सुरक्षा एजेंसियां एक्टिव हैं। इस हादसे को ‘साइबर अटैक’ से भी जोड़कर देखा जा रहा है। जांच एजेंसियां इस एंगल पर भी जांच को आगे बढ़ा रही हैं। . आशंका जताई जा रही है कि हादसे के वक्त रिफाइनरी के ऑटोमेटिक कंट्रोल यूनिट्स को बाहर से ‘हाईजैक’ कर लिया गया होगा। सुरक्षा एजेंसियां अब रिफाइनरी के डिजिटल लॉग्स और डेटा को खंगाल रही हैं। एक्सपट्र्स यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या किसी बाहरी आईपी एड्रेस (IP Address) ने सिस्टम में सेंध लगाने की कोशिश तो नहीं की थी? उधर, आसपास के इलाके में रहने वाले लोगों का पुलिस वेरिफिकेशन भी किया जा रहा है। 20 अप्रैल को बालोतरा के पचपदरा स्थित हिंदुस्तान पेट्रोलियम लिमिटेड (HPCL) की रिफाइनरी में आग लग गई थी। 1 किमी के दायरे में आने वाली दुकानें हट सकती हैं, सुरक्षा घेरा बढ़ा हादसे के बाद सुरक्षा एजेंसियां और बालोतरा पुलिस पूरी तरह एक्टिव मोड में है। सूत्रों के मुताबिक, रिफाइनरी के 1 किलोमीटर के दायरे में आने वाली दुकानों और कमर्शियल संस्थानों को सुरक्षा कारणों से हटाया जा सकता है। दावा है कि यहां दिनभर भीड़ रहती है, जो सुरक्षा के लिहाज से बड़ा खतरा है। सीएम भजनलाल शर्मा ने 21 अप्रैल को सीएस बी श्रीनिवास के साथ रिफाइनरी का दौरा किया था। उन्होंने यहां HPCL के अधिकारियों से हादसे की जानकारी ली थी। बिना अनुमति प्रवेश पर रोक इलाके में रहने वाले सभी किराएदारों और मजदूरों का पुलिस वेरिफिकेशन शुरू कर दिया गया है। बिना अनुमति किसी भी बाहरी व्यक्ति का रिफाइनरी परिसर में प्रवेश पूरी रोक दिया गया है। 21 अप्रैल को डोम हटाने का काम शुरू हुआ था। सुरक्षा एजेंसियों ने इसे हटाने का काम रोक दिया है। PM की सभा के लिए बने डोम को एजेंसियों ने घेरे में लिया रिफाइनरी में आग पीएम नरेंद्र मोदी के दौरे से ठीक 20 घंटे पहले लगी थी। पीएम 21 अप्रैल को इसका उद्घाटन करने वाले थे। सभा के लिए बनाए गए 3 विशाल डोम को हटाने का काम सुरक्षा एजेंसियों ने रुकवा दिया है। माना जा रहा है कि एजेंसियां इन डोम के आसपास से फॉरेंसिक सबूत जुटाना चाहती हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आग तकनीकी खामी थी या कोई सोची-समझी साजिश। टाटा प्रोजेक्ट्स के पास है निर्माण का जिम्मा जिस क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट (CDU) में आग लगी, उसका निर्माण कार्य टाटा प्रोजेक्ट्स के पास है। फिलहाल शुरुआती अनुमान तकनीकी खराबी या लीकेज का है, लेकिन एजेंसियां अब कॉन्ट्रैक्टर कंपनियों, साइट इंजीनियरों और प्रबंधन से पूछताछ कर रही हैं। सीएम ने किया था दौरा मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 21 अप्रैल को मुख्य सचिव बी. श्रीनिवास के साथ रिफाइनरी का दौरा कर HPCL के अधिकारियों से हादसे की पूरी जानकारी ली थी। प्रधानमंत्री का दौरा स्थगित हुआ था बाड़मेर के नजदीक बालोतरा में हिंदुस्तान पेट्रोलियम लिमिटेड (HPCL) की रिफाइनरी में 20 अप्रैल की दोपहर 2 बजे भीषण आग लग गई थी। आग रिफाइनरी में कच्चे तेल को साफ करने वाली दो यूनिट में लगी थी। यूनिट से धुआं उठने पर कर्मचारियों ने फायर सेफ्टी सिस्टम चालू किया था। फायर ब्रिगेड की गाड़ियों ने 2 से 3 घंटे में आग पर काबू पाया था। इस दौरान यूनिट से लपटें उठती रहीं। करीब 79 हजार 459 करोड़ रुपए की लागत से बनी इस रिफाइनरी का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 अप्रैल को उद्घाटन करने वाले थे। इस घटना के बाद उनका दौरा स्थगित हो गया था। —— यह खबर भी पढ़िए… राजस्थान में हिंदुस्तान पेट्रोलियम की रिफाइनरी में आग, कई घंटे बाद काबू पाया गया राजस्थान में बाड़मेर के नजदीक बालोतरा में हिंदुस्तान पेट्रोलियम लिमिटेड (HPCL) की रिफाइनरी में सोमवार दोपहर 2 बजे भीषण आग लग गई। जानकारी के मुताबिक आग रिफाइनरी में कच्चे तेल को साफ करने वाली दो यूनिट में लगी। पढ़ें पूरी खबर…
संदीप पाठक का जाना AAP के लिए राघव चड्ढा से भी बड़ा झटका क्यों है? भारत समाचार

आखरी अपडेट:25 अप्रैल, 2026, 12:44 IST संदीप पाठक एक सांसद से भी बढ़कर थे. वह आप के आंतरिक दायरे और निर्णय लेने वाली प्रणाली का हिस्सा थे। सांसद संदीप पाठक 24 अप्रैल को बीजेपी में शामिल हुए थे. (फोटो: पीटीआई) सात राज्यसभा सांसदों के जाने से आम आदमी पार्टी (आप) को झटका लगा है, लेकिन पार्टी के भीतर एक के बाहर जाने को बाकियों के मुकाबले ज्यादा नुकसानदेह माना जा रहा है। जहां राघव चड्ढा के बीजेपी में जाने से पार्टी की सार्वजनिक छवि पर असर पड़ रहा है, वहीं संदीप पाठक के जाने को एक गहरे संगठनात्मक झटके के रूप में देखा जा रहा है। संदीप पाठक: पंजाब में AAP की सफलता के पीछे ‘मास्टरमाइंड’ संदीप पाठक कोई हाईप्रोफाइल राजनीतिक चेहरा नहीं थे. इसके बजाय, उन्होंने बड़े पैमाने पर पर्दे के पीछे से काम किया। पार्टी के अंदरूनी सूत्र उन्हें एक “खामोश मास्टरमाइंड” बताते हैं, जिन्होंने पंजाब में आप की रणनीति बनाने में केंद्रीय भूमिका निभाई। उन्हें पार्टी के डेटा-संचालित जमीनी अभियान को आकार देने का व्यापक रूप से श्रेय दिया जाता है जिसके कारण 2022 के पंजाब विधानसभा चुनावों में जीत हासिल हुई। सर्वेक्षण, योजना और बूथ-स्तरीय कार्यान्वयन पर उनके ध्यान ने आप को राज्य में एक मजबूत आधार स्थापित करने में मदद की, जो इसके सबसे महत्वपूर्ण गढ़ों में से एक बना हुआ है। इस वजह से, उनके जाने से न केवल नेतृत्व संख्या बल्कि पार्टी का रणनीतिक आधार भी कमजोर हो गया है। सिर्फ एक सांसद नहीं पाठक एक सांसद से भी बढ़कर थे। वह आप के आंतरिक दायरे और निर्णय लेने वाली प्रणाली का हिस्सा थे। 2022 में राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किए गए, वह पार्टी की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था, राजनीतिक मामलों की समिति के सदस्य भी थे। पार्टी में उनकी यात्रा 2016 में शुरू हुई। उन्होंने आशीष खेतान के साथ दिल्ली डायलॉग कमीशन के साथ काम किया और बाद में पंजाब और गुजरात में चुनावी सर्वेक्षणों पर अपने काम के माध्यम से अरविंद केजरीवाल का विश्वास हासिल किया। नेतृत्व से उनकी निकटता स्पष्ट थी. पार्टी सूत्रों के मुताबिक, वह उन कुछ लोगों में शामिल थे, जिन्हें सुनीता केजरीवाल और विभव कुमार के साथ जेल में केजरीवाल से मिलने की अनुमति दी गई थी। अप्रत्याशित निकास कुछ अन्य नेताओं के विपरीत, पाठक के बाहर निकलने की व्यापक रूप से उम्मीद नहीं थी। पार्टी नेताओं ने कहा कि राघव चड्ढा और नेतृत्व के बीच पिछले कुछ समय से मनमुटाव दिख रहा था. इसी तरह स्वाति मालीवाल की भी नेतृत्व से अनबन हो गई थी. इसके विपरीत, पाठक पार्टी के मूल कामकाज में निकटता से शामिल रहे। उनका अचानक उठाया गया कदम एक आश्चर्य के रूप में आया और आंतरिक रूप से गहरी चिंता पैदा कर गया। पार्टी के एक पदाधिकारी ने उन्हें “बाहरी” बताया, यह देखते हुए कि वह कम से कम 2018 से AAP के कोर ग्रुप का हिस्सा थे और सिर्फ एक अन्य सांसद नहीं थे। अन्य सांसदों के बाहर जाने को पार्टी के भीतर अलग-अलग तरीके से समझाया गया है। अशोक मित्तल की रवानगी उनके घर और व्यावसायिक परिसरों पर प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी के बाद हुई। हरभजन सिंह, विक्रम साहनी और राजिंदर गुप्ता जैसे अन्य लोगों को पार्टी के काम में बहुत सक्रिय नहीं देखा गया। इनमें से कुछ नेताओं का इंडिया अगेंस्ट करप्शन आंदोलन में आप की शुरुआती जड़ों से भी सीमित संबंध थे। राज्यसभा के लिए उनके नामांकन की पहले भी आलोचना हुई थी, इस चिंता के साथ कि वे प्रतिद्वंद्वी दलों के दबाव के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं। इस लिहाज से पाठक का जाना अलग दिखता है. वह पार्टी की संगठनात्मक संरचना और दीर्घकालिक योजना में गहराई से रचे-बसे थे। AAP के भीतर, विभिन्न निकासों के प्रभाव के बीच स्पष्ट अंतर किया जा रहा है। राघव चड्ढा, एक प्रमुख सार्वजनिक व्यक्ति और कभी अरविंद केजरीवाल के करीबी सहयोगी के रूप में देखे जाने वाले, पार्टी की छवि और दृश्यता को प्रभावित करते हैं। हालाँकि, पाठक की भूमिका कम दिखाई देने वाली लेकिन संरचनात्मक अधिक थी। उनके काम ने प्रभावित किया कि पार्टी जमीन पर कैसे काम करती है, खासकर पंजाब में। इससे पार्टी हलकों में एक आम आकलन सामने आया है: चड्ढा के जाने से आप की छवि को नुकसान होगा, जबकि पाठक के जाने से उसकी मशीनरी कमजोर होगी। दलबदल और राजनीतिक नतीजा बाहर निकलने की औपचारिक घोषणा एक संवाददाता सम्मेलन में की गई, जहां राघव चड्ढा ने कहा कि आप के दो-तिहाई राज्यसभा सदस्यों ने संवैधानिक प्रावधानों के तहत भाजपा में विलय का फैसला किया है। चड्ढा और पाठक के साथ, समूह में अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, विक्रम साहनी और स्वाति मालीवाल शामिल थे। इस घटनाक्रम ने राजनीतिक तनाव बढ़ा दिया है और पार्टी के भीतर वफादारी और वैचारिक स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आप सूत्रों ने सुझाव दिया है कि पाठक का कदम उनकी व्यक्तिगत पृष्ठभूमि से जुड़ा हो सकता है, यह देखते हुए कि उनके पिता छत्तीसगढ़ में भाजपा से जुड़े हुए हैं। अंततः, अंतर भूमिकाओं में है। चड्ढा एक सार्वजनिक चेहरा थे जिन्होंने पार्टी की कहानी को आकार देने में मदद की। दूसरी ओर, पाठक ने उस कथा के पीछे की प्रणाली बनाने में मदद की। उनके बाहर निकलने से एक प्रमुख रणनीतिकार को ऐसे समय में हटा दिया गया है जब आप विशेष रूप से पंजाब में अपनी संगठनात्मक ताकत पर बहुत अधिक भरोसा कर रही है। इसीलिए, पार्टी के भीतर उनके जाने को सिर्फ एक और दलबदल के तौर पर नहीं, बल्कि पार्टी के मूल पर चोट करने वाली क्षति के तौर पर देखा जा रहा है. चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : दिल्ली, भारत, भारत पहले प्रकाशित: 25 अप्रैल, 2026, 12:44 IST न्यूज़ इंडिया क्यों संदीप पाठक का जाना AAP के लिए राघव चड्ढा से भी बड़ा झटका है? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)संदीप पाठक(टी)राघव
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पं. धीरेंद्र शास्त्री नागपुर में विश्व के पहले भारतदुर्गा मंदिर के शिलान्यास समारोह में पहुंचे थे। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा- आप चार बच्चे पैदा करो। उनमें से एक राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को दे दो ताकि वह दूसरों को बचाने के काम आए। उन्होंने ये बात नागपुर में विश्व के पहले ‘भारतदुर्गा मंदिर’ के शिलान्यास समारोह में कही। शुक् . शास्त्री ने कहा- जब कहीं आपदा आती है, तो लोग अपनी जान बचाकर भागते हैं। लेकिन संघ के कार्यकर्ता वहां जाकर लोगों की जान बचाते हैं। उन्होंने कहा- नागपुर के कैंसर इंस्टीट्यूट परिसर में बन रहा ‘भारतदुर्गा मंदिर’ लोगों को याद दिलाएगा कि भारत ‘शास्त्र’ और ‘शस्त्र’ दोनों से चलता है। यह ‘माला और भाला’ का संगम है। हमारे देवी-देवताओं के हाथों में भी शस्त्र हैं। अगर केवल बंसी बजाने से काम चलता, तो महाभारत का युद्ध कभी नहीं होता। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर ने कहा- आपदा में संघ के कार्यकर्ता लोगों की जान बचाते हैं। भारत में नारी को पूज्या माना जाता है धीरेंद्र शास्त्री ने कहा- दुनिया के किसी अन्य देश में मातृशक्ति को वह सम्मान नहीं मिलता, जो भारत में मिलता है। क्या कभी किसी ने ‘पाकिस्तान माता’ या ‘चीन माता’ की जय सुनी है। केवल भारत ही ऐसा देश है, जहां नारी को भोग्या नहीं बल्कि पूज्या माना जाता है। पं. धीरेंद्र शास्त्री ‘भारतदुर्गा मंदिर’ के शिलान्यास समारोह में नागपुर पहुंचे थे। हम जल्द ही अखंड भारत की ओर बढ़ें बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर ने कहा कि भूमि पूजन के समय उनकी आंखें नम थीं, क्योंकि अब भारत नया इतिहास लिखने जा रहा है। उन्होंने हनुमान जी से प्रार्थना की कि भारत संतमय और भगवामय रहे और हम जल्द ही ‘अखंड भारत’ की ओर बढ़ें। कार्यक्रम में स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज, कार्ष्णीपीठाधीश्वर पूज्य गोविंद गिरी जी, दीदी मां ऋतम्भरा और चिन्मया मिशन के संतों के साथ-साथ केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में संतों के साथ-साथ केंद्रीय मंत्री गडकरी और महाराष्ट्र के सीएम फडणवीस भी मौजूद रहे। प्रदीप मिश्रा ने कहा था- सनातनियों को 4 बच्चे पैदा करना चाहिए प्रदीप मिश्रा ने कहा था- जब तक कानून नहीं आता, तब तक ज्यादा बच्चे पैदा करें। पं. धीरेंद्र शास्त्री से पहले कथावाचक प्रदीप मिश्रा भी इसी तरह का बयान दे चुके हैं। मिश्रा ने कहा था- सनातनियों को चार बच्चे पैदा करना चाहिए। दो अपने लिए और दो राष्ट्र के लिए। जब तक कानून नहीं आता, तब तक ज्यादा बच्चे पैदा करें। प्रदीप मिश्रा ने ये बात मई 2024 में छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में शिव महापुराण कथा के दौरान कही थी। उन्होंने कहा था- बेटियां लव मैरिज के चक्कर में न पड़ें। आप स्कूल जाएंगी, कॉलेज जाएंगी, ट्यूशन जाएंगी। वहां आपको 100 तरह के लड़के मिलेंगे। मगर इन 100 लड़कों के साथ आप 100 साल की जिंदगी नहीं जी सकते। आपके पापा ढूंढ़कर लाएंगे, उसके साथ जिंदगी 100 साल तक सही जी सकते हैं। पढ़ें पूरी खबर… संघ प्रमुख भागवत ने कहा था- 3 बच्चे पैदा करें, जनसंख्या में कमी चिंता का विषय भागवत ने कहा था- कुटुंब समाज का हिस्सा है और हर परिवार एक इकाई है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत भी ज्यादा बच्चे पैदा करने पर बयान दे चुके हैं। उन्होंने कहा था- जनसंख्या वृद्धि दर 2.1% से नीचे नहीं होनी चाहिए। इसके लिए 2 की बजाय 3 बच्चे पैदा करें। यह संख्या इसलिए जरूरी है, ताकि समाज जिंदा रहे। भागवत ने दिसंबर 2024 में नागपुर में कठाले कुल सम्मेलन में कहा था- देश की जनसंख्या नीति 1998-2002 में तय की गई थी। इसके अनुसार अगर किसी समाज की जनसंख्या वृद्धि दर 2.1 से नीचे चली जाती है, तो वह समाज अपने आप नष्ट हो जाएगा। पढ़ें पूरी खबर… ये खबर भी पढ़ें… धीरेंद्र शास्त्री बोले- सेवादार ‘लौंडियाबाजी’ के चक्कर में जुड़े बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने सेवादारों और चेलों को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि कई सेवादारों का व्यवहार भक्तों के प्रति ठीक नहीं है। वे भक्तों को धक्का देते हैं। कुछ सेवादारों की भाषा और व्यवहार बहुत ‘घटिया’ है। कुछ लौंडे यहां लौंडियाबाजी के चक्कर में चेले बन गए। पढ़ें पूरी खबर…
‘दिल्ली का रहमान डकैत’: बीजेपी ने किया केजरीवाल के ‘शीश महल 2’ का खुलासा, AAP की प्रतिक्रिया | भारत समाचार

आखरी अपडेट:25 अप्रैल, 2026, 12:32 IST एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रवेश वर्मा ने पूर्व मुख्यमंत्री पर अपने बंगले में विलासिता का विकल्प चुनकर दिल्ली के लोगों को धोखा देने का आरोप लगाया। प्रवेश शर्मा ने कहा कि पंजाब में भगवंत मान परेशान हैं…उन्होंने वहां एक और शीश महल बना लिया. दिल्ली के उपमुख्यमंत्री और भाजपा नेता परवेश साहिब सिंह वर्मा ने शनिवार को दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर तीखा हमला करते हुए उन्हें “दिल्ली का रहमान डाकू” कहा, और दावा किया कि उन्होंने “शीश महल भाग दो” का निर्माण किया था। एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, भाजपा नेता ने पूर्व मुख्यमंत्री पर अपने बंगले में विलासिता का विकल्प चुनकर दिल्ली के लोगों को धोखा देने का आरोप लगाया। “…जिस तरह दिल्ली के रहमान डकैत की फिल्म ‘धुरंधर’ का सीक्वल आया, उसी तरह हम आज ‘शीश महल 2’ का खुलासा करने जा रहे हैं… केजरीवाल ने दिल्ली में शीश महल तब बनवाया था जब दिल्ली कोरोना की लहर से जूझ रही थी… दिल्ली के लोग कोविड की दवा मांग रहे थे और मर रहे थे। उस दौरान केजरीवाल के आदेश पर दिल्ली के शीश महल का काम एक दिन भी नहीं रुका… जब हमारे ‘धुरंधर’ दिल्ली के वोटरों ने दिल्ली के रहमान को हरा दिया था डकैत, वह पंजाब चला गया, जिससे भगवंत मान की मुश्किलें बढ़ गईं,” उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई के हवाले से कहा। #घड़ी | दिल्ली के मंत्री परवेश वर्मा कहते हैं, “… दिल्ली के रहमान डकैत, जिस तरह फिल्म ‘धुरंधर’ का सीक्वल आया था, उसी तरह, हम आज ‘शीश महल 2’ का खुलासा करने जा रहे हैं… केजरीवाल ने दिल्ली में शीश महल तब बनाया था जब दिल्ली COVID लहर से पीड़ित थी… pic.twitter.com/LhsbPMFHFb– एएनआई (@ANI) 25 अप्रैल 2026 उन्होंने सरकारी सुविधाओं का उपयोग किए बिना आम आदमी की जिंदगी जीने के केजरीवाल के वादे को भी याद किया। उन्होंने कहा, “जिसने दिल्ली के लोगों को धोखा दिया, जो बाबा साहेब अंबेडकर और भगत सिंह की तस्वीरें दिखाकर अन्ना हजारे के नाम पर सत्ता में आया। चुनाव हारने के बाद वह पंजाब चला गया। अरविंद केजरीवाल, सत्येन्द्र जैन, संजय सिंह और मनीष सिसौदिया ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के आवास के पास सरकारी आवासों पर कब्जा कर लिया। भगवंत मान इन लोगों से तनाव में हैं।” वर्मा ने आरोप लगाया कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के आवास के आसपास कई सरकारी आवासों पर केजरीवाल, दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येन्द्र जैन, राज्यसभा सांसद संजय सिंह और पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सहित आप नेताओं ने कब्जा कर लिया है। दिल्ली की ओर रुख करते हुए, वर्मा ने केजरीवाल के हाल ही में 95 लोधी एस्टेट स्थित सरकारी बंगले में जाने का जिक्र किया। “अब, जब उन्हें 95 लोधी एस्टेट में एक नया बंगला मिला। जब इसकी तस्वीरें सामने आईं, तो हम हैरान रह गए। जिस आदमी ने कहा था कि वह सादगी से रहेगा, वह आज आलीशान तरीके से रहता है। यह सरकार द्वारा आवंटित घर है, लेकिन इस घर में निवेश किया गया पैसा सरकारी फंड नहीं है। पिछली बार उन्होंने कहा था कि PWD ने पैसा लगाया था, लेकिन इस घर में निवेश किया गया हर पैसा निजी पैसा है। उनका अपना बेडरूम गोवा के 7-सितारा होटल के कमरे जैसा दिखता है। कुल पांच बेडरूम हैं।” वर्मा के आरोप AAP के लिए एक बड़े राजनीतिक झटके के एक दिन बाद आए, जब उसके सात राज्यसभा सांसद – राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, विक्रम साहनी और राजेंद्र गुप्ता – AAP छोड़कर भगवा खेमे में शामिल हो गए। AAP की प्रतिक्रिया इस बीच, आप ने पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी के साथ वर्मा द्वारा लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ये दावे भ्रामक और झूठे हैं। उन्होंने कहा कि प्रवेश वर्मा द्वारा जारी की गई सभी तस्वीरें फर्जी हैं. उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “ये केजरीवाल जी के घर की तस्वीरें नहीं हैं। यह पता लगाने के लिए कि किसका घर कितना आलीशान है, रेखा गुप्ता जी और एलजी साहब को अपना घर खोलना चाहिए और केजरीवाल जी अपना घर खोलेंगे। जनता खुद फैसला करेगी।” प्रवेश वर्मा द्वारा जारी की गई साड़ी तस्वीरें नकली हैं। ये नहीं हैं कृष्णा जी के घर की तस्वीरें। किसका घर कितना अच्छा है, इसका पता लगाने के लिए रेखा गुप्ता जी और एलजी साहब अपना अपना घर खोलेंगे और प्लास्टिक मालिक अपना घर खोलेंगे। जनता ने अंतिम निर्णय लिया।— आतिशी (@AtishiAAP) 25 अप्रैल 2026 संजय सिंह ने भी इसी तरह की भावना व्यक्त की और कहा, “प्रवेश वर्मा और उनके द्वारा जारी की गई तस्वीरें दिखाने वाले टीवी चैनलों को मानहानि का मुकदमा करने के लिए तैयार रहना चाहिए। मैं @गुप्ता_रेखा जी, @LtGovdelhi सर और @p_sahibसिंह को चुनौती देता हूं कि वे अपने-अपने घर जनता के लिए खोलें। @ArvindKejriwal जी अपना घर खोलेंगे, और जनता को पता चल जाएगा कि किसका घर कितना आलीशान है?” चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 25 अप्रैल, 2026, 12:17 IST न्यूज़ इंडिया ‘दिल्ली का रहमान डकैत’: बीजेपी ने किया केजरीवाल के ‘शीश महल 2’ का खुलासा, AAP ने दी प्रतिक्रिया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)अरविंद केजरीवाल बंगला विवाद(टी)परवेश वर्मा के आरोप(टी)शीश महल 2(टी)दिल्ली की राजनीति(टी)आप बनाम बीजेपी(टी)भगवंत मान निवास(टी)राज्यसभा सांसदों ने छोड़ा आप(टी)आतिशी की प्रतिक्रिया
Argentina May Back Falklands Claim Amid UK-US Tensions

3 मिनट पहले कॉपी लिंक ब्रिटेन और स्पेन ने NATO से जुड़ी एक अमेरिकी रिपोर्ट पर आपत्ति जताई है। इसमें कहा गया था कि ट्रम्प सरकार इन दोनों देशों को सजा देने पर विचार कर रही हैं। इसकी वजह ईरान के खिलाफ जंग में अमेरिका का खुलकर साथ नहीं देना है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी रक्षा मंत्री यानी पेंटागन के भीतर अधिकारियों के बीच एक ईमेल के जरिए बातचीत हुई, जिसमें अलग-अलग संभावित कदमों (ऑप्शन्स) पर विचार किया जा रहा था। जैसे कि विरोधी माने जा रहे देशों को NATO के अहम पदों से हटाना, स्पेन जैसे देश को गठबंधन में उसकी भूमिका को सीमित करना और ब्रिटेन के फॉकलैंड द्वीप पर दावे को लेकर अमेरिका की नीति की समीक्षा करना। हालांकि पेंटागन ने इस ईमेल पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी और यह ईमेल सार्वजनिक रूप से भी सामने नहीं आया है। ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प 2025 में गाजा सम्मेलन के दौरान। शुरूआत में ब्रिटेन ने एयरबेस देने से इनकार किया था ईरान पर हमलों के दौरान ट्रम्प और स्टार्मर के बीच तनाव देखने को मिला था। शुरुआत में ब्रिटेन ने अमेरिका को अपने एयरबेस इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी थी। बाद में ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद ब्रिटेन ने कुछ एयरबेस इस्तेमाल करने की इजाजत दी, ताकि होर्मुज या ब्रिटिश ठिकानों को खतरा पैदा करने वाले ईरानी ठिकानों पर हमला किया जा सके। हालांकि फिर ट्रम्प इससे खुश नहीं हुए। दूसरी तरफ अर्जेंटीना में इस खबर को लेकर खुशी का माहौल है। सरकार के प्रवक्ता जेवियर लानारी ने कहा कि उनका देश ‘माल्विनास’ को वापस पाने के लिए हर संभव कोशिश कर रहा है। अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई ट्रम्प के करीबी माने जाते हैं। मिलेई ने भी कहा कि इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं होगा। फॉकलैंड को लेकर अर्जेंटीना और ब्रिटेन में विवाद फॉकलैंड द्वीप का मामला ब्रिटेन और अर्जेंटीना दोनों के लिए बहुत बड़ा मुद्दा है। दोनों देश इस पर दावा करते हैं। अर्जेंटीना इस द्वीप को माल्विनास कहता है। फॉकलैंड दक्षिण अटलांटिक महासागर में स्थित हैं और अर्जेंटीना से सिर्फ 500 किमी दूर है। वहीं ब्रिटेन से यह 13,000 किमी दूर स्थित है। अर्जेंटीना ऐतिहासिक रूप से इस द्वीप को अपना बताता आया है। अर्जेंटीना का कहना है कि ये द्वीप उसके पास होने चाहिए, क्योंकि ये उसके इलाके के करीब हैं। वहीं ब्रिटेन कहता है कि वहां रहने वाले लोग खुद को ब्रिटिश मानते हैं और उन्होंने वोट करके भी ब्रिटेन के साथ रहने की इच्छा जताई है, इसलिए यह उसका क्षेत्र है। 1982 में अर्जेंटीना ने इन द्वीपों पर कब्जा कर लिया था, जिसके बाद ब्रिटेन की तत्कालीन प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर ने सेना भेजकर सिर्फ 10 हफ्ते में इन्हें वापस हासिल किया था। अर्जेंटीना के आत्मसमर्पण करने से पहले लगभग 650 अर्जेंटीनाई सैनिक और 255 ब्रिटिश सैनिक मारे गए थे। फॉकलैंड नीति की समीक्षा कर सकता है अमेरिका अब लीक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका, फॉकलैंड द्वीप को लेकर अमेरिका की नीति की समीक्षा कर सकता है। दरअसल, जब 1982 में फॉकलैंड युद्ध शुरू हुआ तब अमेरिका ने खुद को बीच में रखने की कोशिश की। अमेरिका चाहता था कि ब्रिटेन और अर्जेंटीना आपस में बात करके मामला सुलझाएं, क्योंकि दोनों ही उसके सहयोगी थे। लेकिन जब बातचीत से हल नहीं निकला, तो अमेरिका ब्रिटेन के पक्ष में आ गया। अमेरिका ने ब्रिटेन को खुफिया जानकारी, सैन्य सपोर्ट और लॉजिस्टिक मदद दी। उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन थे और उन्होंने ब्रिटेन की प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर का साथ दिया। अमेरिका आधिकारिक तौर पर साफ-साफ नहीं कहता कि फॉकलैंड किसका है, लेकिन व्यवहार में वह ब्रिटेन के बहुत करीब है और उसे अपना अहम सहयोगी मानता है। हाल के समय में ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिका, ब्रिटेन पर दबाव डालने के लिए इस मुद्दे का इस्तेमाल कर सकता है। स्पेन बोला- ईमेल के आधार पर फैसले नहीं लेते वहीं, स्पेन ने भी अमेरिका के रुख का विरोध किया है। प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज ने कहा कि वे किसी ईमेल के आधार पर काम नहीं करते, बल्कि आधिकारिक दस्तावेजों और नीतियों के आधार पर फैसले लेते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि स्पेन अपने सहयोगियों के साथ रहेगा, लेकिन हमेशा अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में। NATO के एक अधिकारी ने भी कहा कि संगठन के नियमों में किसी सदस्य देश को सस्पेंड या बाहर करने का प्रावधान ही नहीं है, इसलिए स्पेन को हटाना व्यवहारिक रूप से संभव नहीं लगता। —————————— यह खबर भी पढ़ें… ब्रिटेन ने अमेरिका को एयरबेस देने से इनकार किया:फैसले से डोनाल्ड ट्रम्प नाराज, रिपोर्ट- US एयरबेस से ईरान पर हमला करना चाहता है ब्रिटेन ने अमेरिका को ईरान पर हमला करने के लिए अपने एयरबेस देने से मना कर दिया है। अमेरिका इन सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करना चाहता था, लेकिन ब्रिटेन ने इनकार कर दिया। डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन के इस फैसले से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प नाराज हैं। कहा जा रहा है कि उन्होंने ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के उस समझौते से समर्थन वापस ले लिया है, जिसमें चागोस द्वीप समूह को मॉरीशस को सौंपने की बात थी। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
राज्यस्तरीय पॉवर लिफ्टिंग: जबलपुर, इंदौर, कटनी बने चैंपियन:पुरुष वर्ग के विजेताओं को किया पुरस्कृत; नेशनल टूर्नामेंट में लेंगे हिस्सा

बालाघाट के नूतन कला निकेतन में आयोजित राज्यस्तरीय पॉवर लिफ्टिंग टूर्नामेंट में पुरुष प्रतियोगिता का शुक्रवार रात पुरस्कार वितरण के साथ समापन हो गया। पुरुष पॉवर लिफ्टिंग के ओपन टूर्नामेंट में जबलपुर 50 रैंक के साथ प्रथम रहा। जूनियर वर्ग में इंदौर कार्पोरेशन ने 54 रैंक के साथ पहला स्थान हासिल किया, जबकि सब जूनियर वर्ग में कटनी विजेता बना। ओपन वर्ग में इंदौर कार्पोरेशन दूसरे और छिंदवाड़ा तीसरे स्थान पर रहा। जूनियर वर्ग में रीवा ने दूसरा और छिंदवाड़ा ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। सब जूनियर वर्ग में भोपाल कार्पोरेशन और रीवा क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। सब जूनियर डिवीजन में भोपाल प्रथम बॉडी वेट प्रतियोगिता में सब जूनियर डिवीजन में भोपाल के मोहित चतुर्वेदी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि कटनी के देव ताम्रकर द्वितीय और अमृतांश मिश्रा तृतीय रहे। जूनियर वर्ग में भोपाल के जावेद आलम पहले, रीवा के मोहित वर्मा दूसरे और अमित मुजालडे तीसरे स्थान पर रहे। ओपन वर्ग में छिंदवाड़ा के शैलेंद्र सेवतिया ने प्रथम, भोपाल के ध्रुवराज कुरे ने द्वितीय और रीवा के अमन सिंह ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। यह दो दिवसीय राज्यस्तरीय प्रतियोगिता 23 अप्रैल को बालाघाट में शुरू हुई थी। समापन समारोह में विहिप अध्यक्ष यज्ञेश लालु चावड़ा, पॉवर लिफ्टिंग एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष मधु हरपाल, वेट लिफ्टिंग एसोसिएशन के उमेश जायसवाल और सचिव सुरेंद्र जायसवाल ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जिलों और प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया। इस प्रतियोगिता में अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और प्रदेश के विभिन्न जिलों से लगभग 200 महिला और पुरुष प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इसका आयोजन जिला पॉवर लिफ्टिंग और वेट लिफ्टिंग एसोसिएशन के तत्वावधान में किया गया था। एसोसिएशन के सचिव सुरेंद्र जायसवाल ने बताया कि दो दिवसीय पॉवर लिफ्टिंग प्रतियोगिता में महिला और पुरुष दोनों वर्गों के सब जूनियर, जूनियर और सीनियर श्रेणियों में मुकाबले हुए। इसका उद्देश्य जिले के युवाओं को शरीर सौष्ठव के लिए एक मंच प्रदान करना और उन्हें स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना था। उन्होंने बताया कि प्रतिभागियों ने पॉवर लिफ्टिंग की तीन विधाओं – बेंच, स्कॉट और डेड-लिफ्ट में अपना कौशल दिखाया। इस प्रतियोगिता में चयनित खिलाड़ी अब नेशनल टूर्नामेंट में हिस्सा लेंगे।









