ओडिशा में बहन का कंकाल लेकर बैंक पहुंचा शख्स:कंधे पर लेकर 3km पैदल चला; बैंक कर्मचारियों ने कहा था- जिसका खाता उसे लेकर आओ

ओडिशा के क्योंझर में सोमवार को हैरान करने वाला मामला सामने आया। आदिवासी शख्स जीतू मुंडा अपनी मरी हुई बहन का कंकाल लेकर बैंक पहुंच गया। कंकाल देख बैंक में अफरा-तफरी मच गई। दरअसल, जीतू अपनी बहन कलारा मुंडा के खाते से 20 हजार रुपए निकालना चाहता था, इसके लिए वह कई बार बैंक भी गया। लेकिन कर्मचारियों ने खाता धारक को लाने को कहा। जीतू बैंक में पहले ही कलारा की मौत की जानकारी दे चुका था। फिर भी उसे कोई मदद नहीं मिली, इससे परेशान होकर उसने कब्र से कंकाल निकालकर बैंक में पेश किया। बहन का कंकाल कंधे पर लेकर जीतू करीब 3 किमी पैदल चला। फिर मल्लिपसी में बने ओडिशा ग्रामीण बैंक ब्रांच के बरामदे में कंकाल को रख दिया। इसे देख वहां मौजूद लोग हैरान रह गए। पुलिस के अनुसार, जीतू अनपढ़ है और कानूनी प्रक्रिया से अनजान था। प्रशासन ने उसे नियम समझाए और जल्द पैसे दिलाने का भरोसा दिया। इसके बाद शव को दोबारा कब्रिस्तान में दफना दिया गया। बैंक के बरामदे में रखे कंकाल की तस्वीर… कंकाल देखकर बैंक कर्मचारियों ने पुलिस बुलाई पटना पुलिस के अनुसार, जीतू पढ़ा-लिखा नहीं है। आदिवासी जनजाति का है और कानूनी प्रक्रिया से पूरी तरह अनजान है। स्टेशन के प्रभारी निरीक्षक (आईआईसी) किरण प्रसाद साहू ने कहा, “जीतू को नहीं पता कि कानूनी वारिस या नॉमिनी क्या होता है। बैंक अधिकारी भी उसे मृतक के खाते से पैसे निकालने की प्रक्रिया नहीं समझा पाए। पुलिस ने जीतू मुंडा को आश्वासन दिया कि वे उसकी मृत बहन के बैंक खाते से पैसे निकलवाने में मदद करेंगे। बाद में, पुलिस की मौजूदगी में शव को दोबारा कब्रिस्तान में दफना दिया गया। आखिर क्यों चाहिए थे जीतू को बहन के खाते में जमा रुपए डियानाली गांव का रहने वाला जीतू मुंडा जिस महिला का कंकाल लेकर बैंक पहुंचा, वह उसकी बड़ी बहन कालरा मुंडा थी। कालरा की मौत 26 जनवरी 2026 को हो गई थी। कालरा मुंडा के बैंक खाते में नॉमिनेट पति और बेटे की भी मौत हो चुकी है। इसलिए, उनके नाम पर जमा पैसे का जीतू मुंडा ही एकमात्र दावेदार है। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण उनके लिए यह राशि बेहद अहम थी और जीवनयापन का सहारा मानी जा रही थी।
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Hindi News National Breaking News Headlines Today, Pictures, Videos And More From Dainik Bhaskar 8 मिनट पहले कॉपी लिंक नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि आर्टिकल 370 की बहाली पार्टी का मेन एजेंडा बनी रहेगी। इस संघर्ष से पीछे हटने का कोई सवाल ही नहीं है। पार्टी हर हाल में जम्मू और कश्मीर के लोगों के अधिकारों के लिए लड़ती रहेगी। अब्दुल्ला सोमवार को मध्य कश्मीर के बडगाम में एक सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू और कश्मीर में डुअल गवर्नमेंट सिस्टम केंद्र शासित प्रदेश के विकास के लिए नुकसानदायक नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य का दर्जा जल्द से जल्द बहाल करना जरूरी है ताकि एक चुनी हुई सरकार बिना किसी बेवजह की रुकावट के असरदार ढंग से काम कर सके और अहम फैसले ले सके। आज की बाकी बड़ी खबरें… लद्दाख में 5 नए जिलों को मंजूरी, अब 7 जिले हुए लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने 27 अप्रैल को 5 नए जिलों (नुब्रा, शम, चांगथांग, जांस्कर और द्रास) के गठन को मंजूरी दी। इसके साथ ही केंद्रशासित प्रदेश में जिलों की संख्या 7 हो गई है। यह मांग लंबे समय से उठ रही थी। यह फैसला गृह मंत्रालय की पूर्व स्वीकृति के बाद लागू किया गया। नए जिले बनने से सरकारी सेवाएं लोगों तक जल्दी पहुंचेंगी और प्रशासनिक कामकाज आसान होगा। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
ट्रेन से टुकड़ों में कटा किसान…मौत से पहले का VIDEO:बोला- पूर्व विधायक भार्गव हत्या कराना चाहते थे, शिवराज मामा को गोली मारने रिवॉल्वर दी

मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में सोमवार शाम 4 बजे किसान ने ट्रेन के सामने कूदकर आत्महत्या कर ली। रेलवे ट्रैक पर किसान का सिर और धड़ अलग-अलग हालत में मिले। मृतक की पहचान बेहलोट गांव निवासी गोविंद गुर्जर के रूप में हुई है। किसान ने मरने से पहले वीडियो बनाया था, जिसे अलग-अलग लोगों को भेजा। वीडियो में वह कह रहा है कि पूर्व विधायक शशांक भार्गव उससे हत्या कराना चाह रहे हैं। भार्गव कहते हैं कि शिवराज मामा और मुकेश टंडन की हत्या करेगा, तभी पैसे मिलेंगे। वह उनकी प्रताड़ना से तंग आ गया था। जानकारी के मुताबिक, किसान ने पांच वीडियो बनाए थे। अलग-अलग व्हाट्सएप ग्रुपों में भेजे। कुछ वीडियो ग्राम पंचायत बेहलोट के सरपंच पुत्र लकी गुर्जर को भी भेजे गए। वीडियो सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है, जिसमें उसने अपनी आपबीती बयान की है। फसल बोने के लिए कर्ज लिया था गोविंद सिंह गुर्जर ने वीडियो में बताया कि वे पिछले तीन साल (2023, 2024 और 2025) से पूर्व विधायक शशांक भार्गव की जमीन पर बटाईदारी के आधार पर खेती कर रहे थे। उन्होंने धान और गेहूं की फसल बोने के लिए कर्ज लिया था। समझौते के अनुसार, फसल की आमदनी दोनों के बीच बराबर बांटी जानी थी। भार्गव ने धान की फसल से हुई पूरी आमदनी रोक ली गोविंद के मुताबिक, फैक्ट्री में आग लगने के बाद भार्गव ने धान की फसल की पूरी आमदनी रोक ली। इसके बाद गेहूं की फसल के पैसे भी अपने पास रख लिए। जब वे पैसे मांगने गए, तो उन्हें स्टांप पेपर लाने के लिए कहा गया। गोविंद का दावा है कि वे पढ़े-लिखे नहीं हैं, इसलिए उनसे ऐसे दस्तावेज पर दस्तखत करवा लिए गए, जिसे किसी और ने लिखा था। उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि अगले दिन भुगतान कर दिया जाएगा। तीन साल से कर्ज लेकर कर रहा था खेती गोविंद गुर्जर ने वीडियो में बताया कि वह पिछले तीन साल से शशांक भार्गव की जमीन बटाई पर लेकर कर्ज के सहारे खेती कर रहा था। उसने आरोप लगाया कि फैक्ट्री में आग लगने के बाद दो साल तक फसल की रकम रोक ली गई। जब वह पैसा लेने पहुंचा, तो उससे स्टांप पेपर पर लिखापढ़ी कर हस्ताक्षर कराए गए। अगले दिन भुगतान का आश्वासन दिया गया। हत्या के लिए दबाव और धमकाने के आरोप गोविंद के अनुसार, जब वह दोबारा पैसे लेने पहुंचा, तो आरोप है कि शशांक भार्गव ने उसे रिवॉल्वर थमा दिया। कहा कि शिवराज सिंह चौहान और विधायक मुकेश टंडन को मार दे। मना करने पर अपने गुंडों के जरिए दबाव बनाया और मारपीट भी करवाई। उसने पांच-छह लोगों पर हमले के आरोप भी लगाए। बेटे ने लगाए गंभीर आरोप मृतक के बेटे दीपक गुर्जर ने बताया कि उनके पिता पूर्व विधायक शशांक भार्गव के यहां जमीन संभालते थे, लेकिन उन्हें काम का पैसा नहीं दिया गया। पैसे मांगने पर उन्हें धमकाया गया। बेटे का दावा है कि भार्गव ने कहा था कि पैसे तभी मिलेंगे, जब वह केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और विधायक मुकेश टंडन को गोली मार देगा। साथ ही धोखे से हस्ताक्षर कराकर जमीन भी हड़प ली गई। बेटे ने पिता की मौत के लिए सीधे तौर पर शशांक भार्गव को जिम्मेदार ठहराया है। समाज और नेताओं से लगाई मदद की गुहार अन्य वीडियो में गोविंद गुर्जर ने गुर्जर समाज से सहयोग न मिलने पर नाराजगी जताई। कहा कि अगर न्याय नहीं मिला तो वह चूड़ी पहन लेगा। साथ ही उसने राजस्थान के कांग्रेस नेता सचिन पायलट और उत्तर प्रदेश के सपा नेता अखिलेश यादव से मदद की गुहार लगाई। पुलिस जांच और आगे की कार्रवाई पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है और वायरल वीडियो की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि सभी तथ्यों और बयानों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मामला संवेदनशील होने के कारण हर पहलू को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है। पूर्व विधायक ने आरोपों को बताया साजिश वहीं, पूर्व विधायक शशांक भार्गव ने आरोपों को नकारते हुए इसे राजनीतिक षड्यंत्र बताया है। उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे, ताकि सच्चाई सामने आ सके। पुलिस जांच और पोस्टमॉर्टम घटना के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए मेडिकल कॉलेज भेजा है। थाना प्रभारी आशुतोष सिंह के अनुसार, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही वायरल वीडियो की सत्यता और उसमें लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है।
ट्रेन से टुकड़ों में कटा किसान…मौत से पहले का VIDEO:बोला- पूर्व विधायक मुझसे हत्या कराना चाहते थे; शिवराज मामा को गोली मारने रिवॉल्वर दी

मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में सोमवार शाम 4 बजे किसान ने ट्रेन के सामने कूदकर आत्महत्या कर ली। रेलवे ट्रैक पर किसान का सिर और धड़ अलग-अलग हालत में मिले। मृतक की पहचान बेहलोट गांव निवासी गोविंद गुर्जर के रूप में हुई है। किसान ने मरने से पहले वीडियो बनाया था, जिसे अलग-अलग लोगों को भेजा। वीडियो में वह कह रहा है कि पूर्व विधायक शशांक भार्गव उससे हत्या कराना चाह रहे हैं। भार्गव कहते हैं कि शिवराज मामा और मुकेश टंडन की हत्या करेगा, तभी पैसे मिलेंगे। वह उनकी प्रताड़ना से तंग आ गया था। जानकारी के मुताबिक, किसान ने पांच वीडियो बनाए थे। अलग-अलग व्हाट्सएप ग्रुपों में भेजे। कुछ वीडियो ग्राम पंचायत बेहलोट के सरपंच पुत्र लकी गुर्जर को भी भेजे गए। वीडियो सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है, जिसमें उसने अपनी आपबीती बयान की है। फसल बोने के लिए कर्ज लिया था गोविंद सिंह गुर्जर ने वीडियो में बताया कि वे पिछले तीन साल (2023, 2024 और 2025) से पूर्व विधायक शशांक भार्गव की जमीन पर बटाईदारी के आधार पर खेती कर रहे थे। उन्होंने धान और गेहूं की फसल बोने के लिए कर्ज लिया था। समझौते के अनुसार, फसल की आमदनी दोनों के बीच बराबर बांटी जानी थी। भार्गव ने धान की फसल से हुई पूरी आमदनी रोक ली गोविंद के मुताबिक, फैक्ट्री में आग लगने के बाद भार्गव ने धान की फसल की पूरी आमदनी रोक ली। इसके बाद गेहूं की फसल के पैसे भी अपने पास रख लिए। जब वे पैसे मांगने गए, तो उन्हें स्टांप पेपर लाने के लिए कहा गया। गोविंद का दावा है कि वे पढ़े-लिखे नहीं हैं, इसलिए उनसे ऐसे दस्तावेज पर दस्तखत करवा लिए गए, जिसे किसी और ने लिखा था। उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि अगले दिन भुगतान कर दिया जाएगा। तीन साल से कर्ज लेकर कर रहा था खेती गोविंद गुर्जर ने वीडियो में बताया कि वह पिछले तीन साल से शशांक भार्गव की जमीन बटाई पर लेकर कर्ज के सहारे खेती कर रहा था। उसने आरोप लगाया कि फैक्ट्री में आग लगने के बाद दो साल तक फसल की रकम रोक ली गई। जब वह पैसा लेने पहुंचा, तो उससे स्टांप पेपर पर लिखापढ़ी कर हस्ताक्षर कराए गए। अगले दिन भुगतान का आश्वासन दिया गया। हत्या के लिए दबाव और धमकाने के आरोप गोविंद के अनुसार, जब वह दोबारा पैसे लेने पहुंचा, तो आरोप है कि शशांक भार्गव ने उसे रिवॉल्वर थमा दिया। कहा कि शिवराज सिंह चौहान और विधायक मुकेश टंडन को मार दे। मना करने पर अपने गुंडों के जरिए दबाव बनाया और मारपीट भी करवाई। उसने पांच-छह लोगों पर हमले के आरोप भी लगाए। बेटे ने लगाए गंभीर आरोप मृतक के बेटे दीपक गुर्जर ने बताया कि उनके पिता पूर्व विधायक शशांक भार्गव के यहां जमीन संभालते थे, लेकिन उन्हें काम का पैसा नहीं दिया गया। पैसे मांगने पर उन्हें धमकाया गया। बेटे का दावा है कि भार्गव ने कहा था कि पैसे तभी मिलेंगे, जब वह केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और विधायक मुकेश टंडन को गोली मार देगा। साथ ही धोखे से हस्ताक्षर कराकर जमीन भी हड़प ली गई। बेटे ने पिता की मौत के लिए सीधे तौर पर शशांक भार्गव को जिम्मेदार ठहराया है। समाज और नेताओं से लगाई मदद की गुहार अन्य वीडियो में गोविंद गुर्जर ने गुर्जर समाज से सहयोग न मिलने पर नाराजगी जताई। कहा कि अगर न्याय नहीं मिला तो वह चूड़ी पहन लेगा। साथ ही उसने राजस्थान के कांग्रेस नेता सचिन पायलट और उत्तर प्रदेश के सपा नेता अखिलेश यादव से मदद की गुहार लगाई। पुलिस जांच और आगे की कार्रवाई पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है और वायरल वीडियो की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि सभी तथ्यों और बयानों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मामला संवेदनशील होने के कारण हर पहलू को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है। पूर्व विधायक ने आरोपों को बताया साजिश वहीं, पूर्व विधायक शशांक भार्गव ने आरोपों को नकारते हुए इसे राजनीतिक षड्यंत्र बताया है। उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे, ताकि सच्चाई सामने आ सके। पुलिस जांच और पोस्टमॉर्टम घटना के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए मेडिकल कॉलेज भेजा है। थाना प्रभारी आशुतोष सिंह के अनुसार, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही वायरल वीडियो की सत्यता और उसमें लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है।
IAS Officer Accused by Woman Employee via Affidavit in Jabalpur

जबलपुर स्मार्ट सिटी के सीईओ अरविंद शाह (IAS) और कैबिनेट मंत्री राकेश सिंह के बीच चल रहा विवाद वैसे तो मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद कहने को शांत हो गया है। लेकिन अब अधिकारी और कर्मचारी के बीच की जंग खुलकर सामने आ गई है। . पहले आईएएस अफसर और जबलपुर स्मार्ट सिटी के सीईओ ने मंत्री राकेश सिंह द्वारा अपमानित किए जाने की शिकायत आईएएस एसोसिएशन से की थी, वहीं अब स्मार्ट सिटी की ही एक महिला प्रशासनिक कार्यकारी, दिलप्रीत भल्ला ने शपथ पत्र प्रस्तुत कर आईएएस अरविंद शाह पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि आईएएस अरविंद शाह ने उन्हें अपमानित किया और कहा कि तू दो कौड़ी की कर्मचारी है। मैं किसी मंत्री की नहीं सुनता हूं। ऐसे हुई विवाद की शुरुआत शिकायतकर्ता दिलप्रीत भल्ला के अनुसार, स्मार्ट सिटी जबलपुर में सभी कर्मचारियों का वेतन महीने के पहले सप्ताह में आ जाता है। हालांकि, उनका मार्च 2026 का वेतन 10 अप्रैल 2026 तक बैंक खाते में जमा नहीं हुआ। जब उन्होंने इस संबंध में प्रशासनिक अधिकारी रवि राव से पूछताछ की, तो उन्हें मौखिक रूप से बताया कि मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) अरविंद शाह के आदेश पर उनका वेतन रोका है। इसके बाद जब उन्होंने स्वयं CEO से वेतन भुगतान का निवेदन किया, तो शाह ने कथित तौर पर यह कहते हुए उन्हें अपमानित किया कि उन्होंने उन्हें कभी कार्यालय में काम करते नहीं देखा और उन्हें अभद्रतापूर्वक चैंबर से बाहर जाने का आदेश दिया। जबलपुर स्मार्ट सिटी सीईओ अरविंद शाह। 22 अप्रैल की घटना, चैंबर में अपमान और मंत्री को चुनौती दी शपथ पत्र में 22 अप्रैल 2026 की घटना का सबसे गंभीर पहलू ये बताया गया है कि मंत्री राकेश सिंह के हस्तक्षेप के बाद जब CEO ने कर्मचारी को अपने चैंबर में बुलाया, तो वहां का माहौल और भी विवादित हो गया। आरोप है कि CEO ने महिला कर्मचारी से कहा कि ‘तू दो कौड़ी की कर्मचारी है और मैं एक IAS अधिकारी हूं।; उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे किसी मंत्री की बात नहीं सुनते और न ही किसी के दबाव में काम करते हैं।’ कर्मचारी का दावा है कि जब वह रोते हुए चैंबर से बाहर निकल रही थी, तब शाह ने मंत्री जी के लिए भी अपशब्दों (गाली) का प्रयोग किया और कहा कि मैं ‘मंत्री को भी देख लूंगा।’ लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह। मंत्री के आवास पर बैठक और बिना माफी के खत्म हुआ संवाद घटना के बाद जब सिख समाज के वरिष्ठों ने मंत्री राकेश सिंह को अवगत कराया, तो उन्होंने अपने सरकारी आवास पर एक बैठक बुलाई। इस बैठक में जबलपुर कलेक्टर (चेयरमैन, स्मार्ट सिटी) राघवेंद्र सिंह और नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार भी उपस्थित थे। मंत्री ने CEO अरविंद शाह को समझाइश दी कि एक IAS अधिकारी के नाते उन्हें महिला सहकर्मी के साथ इस तरह का दुर्व्यवहार और गाली-गलौज नहीं करनी चाहिए थी। इस पर CEO ने स्वीकार किया कि उनकी भाषा गलत रही होगी, लेकिन उनका भाव गलत नहीं था। हालांकि, शपथ पत्र के अनुसार शाह ने न तो अपनी गलती के लिए माफी मांगी और न ही अपने व्यवहार पर कोई खेद प्रकट किया, जिससे पीड़ित कर्मचारी बेहद आहत और डरी हुई हैं। महिला कर्मचारी ने की कार्रवाई की मांग यह पूरा मामला 26 अप्रैल 2026 को नोटरी के समक्ष प्रस्तुत किए गए एक कानूनी शपथ पत्र के माध्यम से सामने आया है। 37 वर्षीय दिलप्रीत भल्ला ने शपथपूर्वक पुष्टि की है कि उनके द्वारा अरविंद शाह के विरुद्ध की गई यह शिकायत पूरी तरह सही है और यह किसी भी बाहरी प्रलोभन या दबाव में नहीं की गई है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस मामले में निष्पक्ष और उचित कार्यवाही की जाए ताकि भविष्य में किसी भी कनिष्ठ महिला कर्मचारी या अन्य स्टाफ के साथ इस प्रकार का दुर्व्यवहार दोबारा न हो । इस शिकायत की आधिकारिक कॉपी जबलपुर कलेक्टर को भी भेजी गई है। यह खबर भी पढ़ें… PWD मंत्री राकेश सिंह पर IAS को धमकाने के आरोप मध्यप्रदेश में मंत्री और आईएएस अधिकारी के बीच विवाद ने प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री राकेश सिंह पर जबलपुर स्मार्ट सिटी के CEO और आईएएस अधिकारी अरविंद शाह को बंगले पर बुलाकर अपमानित कर धमकी दी। मामले को लेकर आईएएस एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री से कड़ी आपत्ति जताई है। मंत्री और जबलपुर स्मार्ट सिटी के सीईओ अरविंद शाह के बीच विवाद सुलझ गया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
भोपाल में 1 से 30 मई तक छुट्टी पर रोक:जनगणना में लगे अधिकारी-कर्मचारी नहीं ले सकेंगे अवकाश

भोपाल में 1 से 30 मई तक अधिकारी-कर्मचारियों की छुट्टी पर रोक लगा दी गई है। कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने यह आदेश जारी किए हैं। आदेश उन्हीं अधिकारी-कर्मचारियों पर लागू होगा, जो जनगणना कार्य में लगे हैं। दरअसल, 1 मई से जनगणना के तहत मकान सूचीकरण और उनकी गिनती होना है, जो 30 मई तक चलेगा। इस कार्य में भोपाल के 6 हजार से ज्यादा अधिकारी-कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। उन्हीं के लिए अवकाश वाला आदेश लागू होगा। सभी प्रकार के अवकाश प्रतिबंधित रहेंगे मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना संबंधी कार्य को दृष्टिगत रखते हुए सभी प्रकार के अवकाश प्रतिबंधित किए गए हैं। हालांकि, इस दौरान किसी के यहां जरूरी पारवारिक कार्य है या कोई मेडिकल इमरजेंसी हो गई तो उन्हें संबंधित कार्यालय प्रमुख की अनुमति लेना जरूरी होगा।
एमपी में 1 मई से यूजी-पीजी एडमिशन शुरू:दो महीने चलेगी काउंसलिंग, उच्च शिक्षा विभाग ने जारी किया पूरा शेड्यूल

मध्य प्रदेश के सरकारी और निजी कॉलेजों में स्नातक (यूजी) और स्नातकोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने काउंसलिंग का विस्तृत शेड्यूल जारी कर दिया है। यूजी कोर्स के लिए 1 मई से और पीजी कोर्स के लिए 2 मई से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू होगा, जो 30 जून तक चलेगा। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन मोड में होगी, जिसमें रजिस्ट्रेशन के साथ दस्तावेज सत्यापन अनिवार्य रहेगा। इस बार विभाग ने दो मुख्य काउंसलिंग राउंड के साथ कॉलेज लेवल काउंसलिंग (CLC) का एक अतिरिक्त राउंड भी जोड़ा है, ताकि खाली सीटों को भरने में आसानी हो सके। ऑनलाइन प्रक्रिया से होगा पूरा एडमिशन उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी शेड्यूल के अनुसार इस साल पूरी प्रवेश प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से ही पूरी की जाएगी। छात्रों को निर्धारित तिथियों के भीतर रजिस्ट्रेशन करना होगा और अपने दस्तावेजों का सत्यापन भी कराना होगा। बिना सत्यापन के छात्रों की काउंसलिंग प्रक्रिया अधूरी मानी जाएगी और वे सीट आवंटन से वंचित रह सकते हैं। चॉइस फिलिंग से तय होगा कॉलेज एडमिशन प्रक्रिया के दौरान छात्रों को अपनी पसंद के कॉलेज और कोर्स का चयन करना होगा। इसी चॉइस फिलिंग के आधार पर मेरिट सूची तैयार की जाएगी और सीटों का आवंटन किया जाएगा। सीट मिलने के बाद छात्रों को तय समय सीमा में फीस जमा करनी होगी, अन्यथा उनकी सीट स्वतः निरस्त हो जाएगी और वह अगली सूची में अन्य छात्रों को आवंटित कर दी जाएगी। दो मुख्य राउंड के साथ CLC का नया मौका इस बार प्रवेश प्रक्रिया में दो मुख्य काउंसलिंग राउंड के अलावा कॉलेज लेवल काउंसलिंग (CLC) का एक अतिरिक्त राउंड भी रखा है। यह राउंड उन सीटों को भरने के लिए होगा, जो मुख्य काउंसलिंग के बाद खाली रह जाती हैं। इससे अधिक से अधिक छात्रों को प्रवेश का अवसर मिल सकेगा और कॉलेजों में सीटें खाली नहीं रहेंगी। नए कोर्स ITEP से मिलेगा शिक्षक बनने का मौका इस वर्ष एनसीटीई के अंतर्गत बीएड, बीपीएड और एमपीएड कोर्स के साथ एक नया चार वर्षीय कोर्स आईटीईपी (ITEP) भी शुरू किया है। इस कोर्स की खास बात यह है कि इसे 12वीं के बाद सीधे किया जा सकता है। इसे शिक्षक बनने की इच्छा रखने वाले छात्रों के लिए बेहतर विकल्प माना जा रहा है, क्योंकि इसमें शुरुआती स्तर से ही प्रशिक्षण दिया जाएगा। यूजी प्रवेश का पहला चरण (महत्वपूर्ण तिथियां) एनसीटीई कोर्स का शेड्यूल दो माह तक चलेगी काउंसलिंग करीब दो महीने तक चलने वाली इस काउंसलिंग प्रक्रिया के जरिए प्रदेश के लाखों छात्रों को उच्च शिक्षा में प्रवेश का अवसर मिलेगा। विभाग ने छात्रों से अपील की है कि वे तय समय सीमा के भीतर सभी प्रक्रियाएं पूरी करें, ताकि उन्हें एडमिशन में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
डेली कॉलेज चुनाव: नए संविधान पर लगी मुहर:अब सिर्फ दो श्रेणियों में होगा मुकाबला; ओडीए में विरोध के स्वर तेज

डेली कॉलेज के आगामी चुनाव को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ हो गई है। फर्म एंड सोसायटी ने कॉलेज के नए संविधान संशोधन को अपनी अंतिम मंजूरी दे दी है, जिसकी आधिकारिक प्रति मुख्य चुनाव अधिकारी और हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जस्टिस सुशील गुप्ता के पास पहुंच गई है। शासन की इस हरी झंडी के साथ ही अब यह तय हो गया है कि इस बार चुनाव प्रक्रिया नए नियमों के तहत ही संपन्न कराई जाएगी। नए बदलावों के बाद अब निर्वाचन का दायरा सीमित हो गया है और केवल दो श्रेणियों के लिए ही वोट डाले जाएंगे। संशोधित संविधान के प्रावधानों के अनुसार, अब चुनाव मुख्य रूप से ‘न्यू डोनर कैटेगरी (2B2)’ और ‘पुराने डोनर कैटेगरी (2B1)’ के लिए आयोजित किए जाएंगे। जहां पुराने डोनर्स की श्रेणी से दो सदस्यों का चयन मतदान के जरिए होगा, वहीं न्यू डोनर कैटेगरी के लिए भी चुनावी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। सबसे बड़ा बदलाव ‘ओल्ड डेलियंस एसोसिएशन’ (ओडीए) यानी कैटेगरी 2C में देखने को मिला है। पहले इस श्रेणी से दो सदस्यों का चुनाव होकर बोर्ड में जाने का प्रावधान था, जिसे अब पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। नए नियमों के तहत अब ओडीए के अध्यक्ष और सचिव सीधे बोर्ड का हिस्सा बनेंगे। इसके अलावा, एक प्रतिष्ठित छात्र को भी बोर्ड में शामिल किया जाएगा, लेकिन यह पूरी प्रक्रिया चयन (Selection) पर आधारित होगी, न कि निर्वाचन पर। प्रबंधन और बोर्ड इस बदलाव को कॉलेज के हित में बता रहे हैं। उनका तर्क है कि इससे बार-बार चुनाव कराने की जटिलता खत्म होगी। साथ ही, ओडीए के निर्वाचित पदाधिकारी जब सीधे बोर्ड में बैठेंगे, तो वे पूर्व छात्रों की समस्याओं और सुझावों को अधिक प्रभावी ढंग से शासन के सामने रख सकेंगे। हालांकि, इस फैसले ने ओडीए के भीतर एक बड़े विवाद को जन्म दे दिया है। एसोसिएशन का एक गुट इस संशोधन का पुरजोर विरोध कर रहा है। विरोधियों का कहना है कि मतदान का अधिकार छीनने से ओडीए के लोकतांत्रिक अस्तित्व पर संकट खड़ा हो जाएगा। विरोधी गुट का मुख्य तकनीकी ऐतराज चुनाव के शेड्यूल और संविधान लागू होने की तारीख को लेकर है। उनका तर्क है कि जब 21 अप्रैल को चुनाव कार्यक्रम की घोषणा हुई थी, तब पुराना संविधान ही प्रभावी था। फर्म एंड सोसायटी से नए संविधान की सत्यापित प्रति 23 अप्रैल को प्राप्त हुई है, ऐसे में प्रक्रिया के बीच में नए नियमों को थोपना नियम विरुद्ध है। माना जा रहा है कि यह मामला जल्द ही कानूनी मोड़ ले सकता है और विरोधी गुट इस निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी में है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, चुनाव की नामांकन प्रक्रिया 28 और 29 अप्रैल को संपन्न होगी। इसके बाद 4 मई से 19 मई के बीच डाक मतपत्र (पोस्टल बैलेट) जारी किए जाएंगे, जिन्हें 20 मई तक वापस जमा करना होगा। चुनाव का मुख्य चरण 21 मई को होगा, जिसमें स्थानीय मतदाता वोट डालेंगे। मतदान संपन्न होने के तुरंत बाद उसी दिन मतगणना की जाएगी और देर शाम तक चुनाव परिणामों की घोषणा कर दी जाएगी। फिलहाल, नए संविधान की मंजूरी ने कॉलेज की राजनीति में हलचल तेज कर दी है और सबकी नजरें अब हाईकोर्ट के संभावित रुख पर टिकी हैं।
जीजा ने साले को 24 बार मारे चाकू, VIDEO:बहन को परेशान करते थे, समझाने आया था; जीजा के भाई और पिता ने भी किया हमला

ग्वालियर में एक साले को उसके ही जीजा ने चाकू से 24 वार किए हैं। घटना का एक VIDEO भी सामने आया है जिसमें जीजा सब्जी काटने वाला चाकू मारता हुआ दिख रहा है। चाकू पेट, गर्दन, पीठ व सीने पर लगा है। हमले में बहनोई, उसका भाई व पिता भी शामिल हैं। गंभीर हालत में घायल युवक को हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। घटना दो दिन पहले की है, लेकिन पुलिस ने हमलावरों को सोमवार को गिरफ्तार किया है। घटना का एक वीडियो भी सोमवार को सामने आया है, जिसमें साले पर उसका जीजा चाकू मारता नजर आ रहा है। आखिर में वह उसे सड़क पर पड़ा छोड़कर बाइक लेकर भाग जाता है। घटना मेहरा कॉलोनी थाटीपुर की है। पुलिस ने जीजा-उसके भाई को गिरफ्तार कर लिया है। देखिए युवक पर हमले की तस्वीरें… ऐसे समझिए पूरा मामला मुरैना निवासी देवेन्द्र रजक की बहन की शादी 4 साल पहले ग्वालियर के थाटीपुर मेहरा कॉलोनी में रहने वाले कृष्णा रजक के साथ हुई थी। शादी के बाद से ही देवेन्द्र की बहन को उसका पति कृष्णा, देवर सोनू व ससुर रामअवतार परेशान करते थे। 25 अप्रैल को मुरैना से देवेन्द्र बहन की ससुराल बातचीत करने पहुंचा था, लेकिन उसके आते ही उसके बहनोई कृष्णा ने अभद्रता कर दी और पत्नी को भेजने से मना कर दिया। जिस पर वहां मुंहवाद शुरू हो गया। चाकू से ताबड़तोड़ किए वार देवेन्द्र ने गाली गलौज की तो उसका बहनोई कृष्णा, उसका भाई सोनू व पिता रामअवतार नाराज हो गए। सबसे पहले बहनोई अंदर गया और सब्जी काटने वाला चाकू उठा लाया। इसके बाद वह देवेन्द्र पर टूट पड़ा। घायल पड़ा छोड़कर भाग गए साले पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला करने के बाद जीजा कृष्णा रजक बाइक उठाकर भाग गया। उसका भाई सोनू व पिता वहां कुछ देर खड़े रहे, लेकिन उसके बाद वह भी वहां से भाग गए। कुछ स्थानीय लोगों की मदद से बहन ने घायल भाई को अस्पताल पहुंचाया है, जहां उसकी हालत गंभीर है। सीएसपी मुरार अतुल सोनी ने बताया कि युवक का गला रेत कर हत्या का प्रयास करने वाले उसके बहनोई कृष्णा और देवर सोनू को पकड़ लिया है। ससुर अभी फरार है। उसकी तलाश में पुलिस लगी हुई है और जल्द ही उसे पकड़ लिया जाएगा।
मध्यप्रदेश में भी लागू होगा समान नागरिक संहिता कानून:सरकार ने बनाई हाईपावर कमेटी, 60 दिन में सौंपेगी रिपोर्ट

उत्तराखंड और गुजरात की राह पर चलते हुए अब मध्य प्रदेश सरकार ने भी प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। राज्य के विधि एवं विधायी कार्य विभाग ने सोमवार को इसके लिए एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति के गठन का आदेश जारी कर दिया है। यह कमेटी प्रदेश में विवाह, तलाक, गोद लेने और विरासत जैसे निजी कानूनों का अध्ययन कर एक समान कानूनी ढांचा तैयार करने का ब्लूप्रिंट तैयार करेगी। सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज को बनाया अध्यक्ष सरकार की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रसाद देसाई को इस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है। जस्टिस रंजना देसाई ने ही उत्तराखंड में यूसीसी का ड्राफ्ट तैयार करने वाली समिति का नेतृत्व किया था। कमेटी को अपनी विस्तृत रिपोर्ट और ड्राफ्ट बिल तैयार करने के लिए 60 दिन का समय दिया गया है। समाज के विभिन्न वर्गों से लेगी सुझाव यह समिति प्रदेश के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक ताने-बाने को ध्यान में रखते हुए एक संतुलित ड्राफ्ट तैयार करेगी। इसमें आम जनता, धार्मिक संगठनों और विशेषज्ञों से भी सुझाव और आपत्तियां ली जाएंगी। कमेटी के एजेंडे में विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के अधिकारों का संरक्षण, समानता और ‘लिव-इन’ संबंधों के रजिस्ट्रेशन जैसे संवेदनशील मुद्दे भी शामिल किए गए हैं। ये होंगे कमेटी के सदस्य: क्यों पड़ी कमेटी बनाने की जरूरत? सरकार के मुताबिक, वर्तमान में विवाह, उत्तराधिकार और भरण-पोषण जैसे मामलों में अलग-अलग व्यक्तिगत और पारिवारिक कानून प्रभावी हैं। इन नियमों में एकरूपता न होने से कई बार विसंगतियां पैदा होती हैं। शासन का मानना है कि आधुनिक दौर में एक ऐसे संतुलित और व्यावहारिक कानूनी ढांचे की जरूरत है, जो सभी नागरिकों के लिए समान हो। इससे न केवल न्याय की प्रक्रिया सरल होगी, बल्कि कानूनी स्पष्टता भी बढ़ेगी। कमेटी के पास 3 बड़े ‘टास्क’ यह हाईपावर कमेटी केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे तीन मुख्य काम सौंपे गए हैं। ‘ लिव-इन’ रिलेशनशिप और बच्चों के हक पर खास फोकस आदेश में स्पष्ट किया गया है कि प्रस्तावित कानून में ‘लिव-इन’ संबंधों के नियमन और उनके रजिस्ट्रेशन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे पैदा होने वाले अधिकारों और दायित्वों को लेकर समिति ठोस सुझाव देगी। इसके अलावा, समिति का मुख्य उद्देश्य महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को सुरक्षित करना है। समिति इस बात का भी ख्याल रखेगी कि प्रस्तावित विधेयक का क्रियान्वयन (Implementation) सरल हो और भविष्य में कोई कानूनी जटिलता पैदा न हो।