Friday, 12 Jun 2026 | 03:10 PM

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भोपाल में हिंदू संगठनों ने ट्रकों को रोककर लगाया जाम:स्लॉटर वेस्ट से बना मुर्गी-मछली दाना ले जाने के आरोप; डीएनए जांच की मांग

भोपाल में हिंदू संगठनों ने ट्रकों को रोककर लगाया जाम:स्लॉटर वेस्ट से बना मुर्गी-मछली दाना ले जाने के आरोप; डीएनए जांच की मांग

भोपाल के रायसेन रोड पर मंगलवार रात 9 बजे उस समय तनाव की स्थिति बन गई, जब हिंदू संगठनों ने कथित तौर पर असलम चमड़े से जुड़े ट्रकों को रोककर जाम लगा दिया। मामला बिलखिरया थाना क्षेत्र का है। संगठनों के कार्यकर्ताओं ने मुर्गी-मछली के दाने से भरे एक ट्रक को पकड़ लिया, जबकि दो अन्य ट्रकों के पहले ही रवाना होने का दावा किया गया है। संगठन के पदाधिकारियों के मुताबिक, यह पूरा विवाद असलम चमड़े की जमानत के बाद शुरू हुआ है। आरोप है कि स्लॉटर हाउस से निकले वेस्ट मटेरियल से तैयार दाना ट्रकों के जरिए बाहर भेजा जा रहा था। कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस वेस्ट में गाय से जुड़ा मटेरियल होने की आशंका है, जिसकी जांच नहीं कराई गई। रात 9 बजे के बाद हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी भी मौके पर पहुंचे। जांच की मांग पहले भी की थी सर्वदलीय गोरक्षा अभियान समिति के प्रदेश अध्यक्ष गौरव मिश्रा ने बताया कि इस संबंध में पहले डीसीपी जोन को ज्ञापन देकर जांच और सैंपलिंग की मांग की गई थी। उनका आरोप है कि प्रशासन ने इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा, स्लॉटर से निकले वेस्ट से दाना बनाया गया और अब उसे ट्रकों से बाहर भेजा जा रहा था। हमने मौके पर पहुंचकर लोडिंग रुकवाई। संबंधित लोग मौके से भाग गए। एक ट्रक पकड़ा, हाईवे पर लगाया जाम संगठन के कार्यकर्ताओं ने मौके पर एक ट्रक को पकड़ लिया, जिसमें कथित तौर पर दाना और वेस्ट मटेरियल भरा हुआ था। इसके बाद आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने रायसेन हाईवे पर जाम लगा दिया, जिससे यातायात कुछ समय के लिए बाधित रहा। डीएनए जांच की मांग संगठन की मांग है कि जब्त किए गए मटेरियल के सैंपल लेकर डीएनए जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उसमें गोवंश से जुड़ा कोई अंश है या नहीं। उनका कहना है कि अगर जांच में पुष्टि होती है, तो पहले दर्ज मामलों को और मजबूती मिलेगी।

वोटिंग से पहले हावड़ा क्यों बन गया ‘लौह किला’? धारा 163 के पीछे का असली कारण | कोलकाता-समाचार समाचार

Yashasvi Jaiswal. (Picture credit: AP)

आखरी अपडेट:28 अप्रैल, 2026, 22:13 IST धारा 163, ड्रोन निगरानी और सीएपीएफ की तैनाती ने मतदान से पहले हावड़ा को ‘लौह किले’ में बदल दिया है। यही कारण है कि सुरक्षा पहले से कहीं अधिक कड़ी कर दी गई है पिछले तीन दिनों से, हावड़ा के हर ब्लॉक में केंद्रीय बलों द्वारा कथित तौर पर रूट मार्च किया गया है। 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चरण से पहले, हावड़ा को एक असाधारण सुरक्षा घेरे में रखा गया है, अधिकारियों ने जिले को उस रूप में बदल दिया है जिसे अधिकारी और पर्यवेक्षक ‘लौह किला’ कह रहे हैं। लेकिन संघर्ष से भरे युद्धक्षेत्र के विपरीत, इस बार सड़कों पर जो आवाज़ हावी है वह सुरक्षाकर्मियों के मार्च करने की है। भारी सुरक्षा बंदोबस्त जिले के चुनाव संबंधी हिंसा के इतिहास और मतदान को बाधित करने के संभावित प्रयासों की चेतावनी देने वाली खुफिया सूचनाओं पर गहरी प्रशासनिक चिंता को दर्शाता है। उत्तरी हावड़ा की संकरी गलियों से लेकर हुगली नदी के किनारे के घाटों तक, अशांति को रोकने और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक बहुस्तरीय सुरक्षा नेटवर्क लगाया गया है। अधिकारियों ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 भी लगाई है, इस कदम को न केवल कानूनी प्रतिबंध के रूप में देखा जा रहा है बल्कि लोकतांत्रिक अभ्यास को हिंसक बनाने के किसी भी प्रयास के खिलाफ एक मजबूत संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हावड़ा को ‘लोहे का किला’ क्यों बना दिया गया है? व्यापक तैयारियां मुख्यतः हावड़ा के लंबे और परेशानी भरे चुनावी इतिहास से उपजी हैं। जिले में पिछले चुनावों में झड़पों, बूथ कैप्चरिंग और बम-संबंधी हिंसा के बार-बार आरोप लगे हैं, उत्तरी हावड़ा और शिबपुर जैसे क्षेत्रों को अक्सर राजनीतिक रूप से संवेदनशील माना जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि असामाजिक तत्व मतदान के दौरान गड़बड़ी फैलाने की कोशिश कर सकते हैं, जिसके चलते प्रशासन ने मतदान से 48 घंटे पहले जिले को प्रभावी ढंग से सील कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य संगठित व्यवधान और स्थानीय फ्लैशप्वाइंट दोनों को रोकना है। सभाओं को प्रतिबंधित करने और डराने-धमकाने पर अंकुश लगाने के लिए धारा 163 लगाई गई सुरक्षा रणनीति का एक प्रमुख तत्व धारा 163 का प्रवर्तन है, जो सार्वजनिक समारोहों को प्रतिबंधित करता है और इसका उपयोग मतदान केंद्रों के आसपास भीड़ जमा होने से रोकने के लिए किया जा रहा है। लागू प्रतिबंधों के साथ, एक स्थान पर पांच से अधिक लोग इकट्ठा नहीं हो सकते हैं, अधिकारियों का मानना ​​है कि यह उपाय राजनीतिक समूहों द्वारा बूथों के पास भीड़ के दबाव या ‘मांसपेशियों की शक्ति’ का उपयोग करने के प्रयासों को कमजोर कर सकता है। अधिकारी इस प्रावधान को सुचारु मतदान के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं और अक्सर बड़े राजनीतिक समारोहों से जुड़े फर्जी मतदान या डराने-धमकाने की रणनीति के खिलाफ एक निवारक के रूप में देखते हैं। जिले की सीमाओं पर सख्ती के चलते बाहरी लोगों को वहां से चले जाने को कहा गया अधिकारियों ने चुनाव के दिन परेशानी पैदा करने के लिए बाहरी लोगों के कथित इस्तेमाल को रोकने पर भी ध्यान केंद्रित किया है। हावड़ा की रणनीतिक स्थिति और कोलकाता और आसपास के हुगली क्षेत्रों से आसान पहुंच को देखते हुए, सुरक्षा एजेंसियों ने सीमा पर निगरानी बढ़ा दी है। कथित तौर पर होटलों और गेस्टहाउसों में तलाशी अभियान चलाया गया है, जबकि रिपोर्टों के अनुसार, हावड़ा में मतदाता के रूप में पंजीकृत नहीं होने वाले लोगों को जिला छोड़ने का निर्देश दिया गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि स्थानीय मतदाता बिना किसी डर के भाग ले सकें। इन उपायों का उद्देश्य अक्सर मतदान के दिन की हिंसा से जुड़ी बाहरी लामबंदी की संभावना को कम करना है। सीएपीएफ और डिजिटल निगरानी के तहत संवेदनशील बूथ संवेदनशील माने गए मतदान केंद्रों पर सुरक्षा तैनाती विशेष रूप से कड़ी कर दी गई है। हावड़ा में 40% से अधिक बूथों को कथित तौर पर ‘संवेदनशील’ के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जिसके कारण सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। इन स्थानों पर, राज्य पुलिस को सशस्त्र कमांडो सहित केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के कर्मियों द्वारा समर्थित किया जा रहा है। भौतिक तैनाती के साथ-साथ, अधिकारियों ने व्यापक डिजिटल निगरानी भी शुरू की है। प्रत्येक मतदान केंद्र से वेबकास्टिंग से सीधे चुनाव अधिकारियों को जानकारी मिलने की उम्मीद है, जिससे वास्तविक समय पर निगरानी संभव हो सकेगी। इस प्रणाली का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि कहीं भी हिंसा या अनियमितताएं सामने आती हैं, तो दिल्ली और कोलकाता दोनों जगह के अधिकारी तुरंत प्रतिक्रिया दे सकें। अधिकारियों का मानना ​​है कि निगरानी का यह स्तर संभावित उपद्रवियों के लिए एक मजबूत निवारक के रूप में कार्य करता है। संकरी गलियों और छतों पर ड्रोन तैनात किए गए एक महत्वपूर्ण तकनीकी वृद्धि में, प्रशासन ड्रोन निगरानी का भी उपयोग कर रहा है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां घने इलाकों और संकरी गलियों ने ऐतिहासिक रूप से पुलिसिंग चुनौतियां पेश की हैं। रिपोर्टों के अनुसार, पत्थरों या कच्चे विस्फोटकों के भंडारण को रोकने के लिए संदिग्ध छतों और संवेदनशील गलियों की मैपिंग की गई है। अधिकारियों का कहना है कि ‘आयरन फोर्ट’ का दृष्टिकोण जमीनी स्तर की सुरक्षा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अब इसका विस्तार हवाई निगरानी तक भी हो गया है। ड्रोन के उपयोग का उद्देश्य पारंपरिक रूप से सुरक्षित करने में कठिन क्षेत्रों में ब्लाइंड स्पॉट को खत्म करना और तेजी से प्रतिक्रिया क्षमता में सुधार करना है। रूट मार्च का उद्देश्य मतदाताओं को आश्वस्त करना है पिछले तीन दिनों से, हावड़ा के हर ब्लॉक में केंद्रीय बलों द्वारा कथित तौर पर रूट मार्च किया गया है। आस-पड़ोस में घूमने वाले भारी हथियारों से लैस कर्मियों का उद्देश्य न केवल संभावित व्यवधानों को रोकना है बल्कि निवासियों को आश्वस्त करना भी है। अधिकारियों का कहना है कि यह रणनीति व्यावहारिक होने के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक भी है, जो स्पष्ट सुरक्षा उपस्थिति का संकेत देते हुए मतदाताओं के बीच भय को कम करती है। अधिकारियों का मानना ​​है कि हिंसा को रोकने के लिए मतदाताओं का विश्वास महत्वपूर्ण

महेश्वर में नाबालिग के हत्यारे को फांसी देने रैली:दो हजार से अधिक लोग सड़कों पर उतरे, आरोपी के घर बुलडोजर चलाने की मांग

महेश्वर में नाबालिग के हत्यारे को फांसी देने रैली:दो हजार से अधिक लोग सड़कों पर उतरे, आरोपी के घर बुलडोजर चलाने की मांग

महेश्वर में 6 दिन पहले हुई नाबालिग सोहन जाधव की हत्या को लेकर लोगों में गुस्सा है। मंगलवार शाम को सकल हिंदू समाज के बुलावे पर दो हजार से अधिक लोग सड़कों पर उतरे और रैली निकाली। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने आरोपी शानू खान के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की। श्रद्धांजलि सभा के बाद मुख्यमंत्री के नाम आठ सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा गया। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि हत्यारे को फांसी नहीं दी गई और अपराधी के घर के अवैध हिस्से पर बुलडोजर नहीं चला, तो आंदोलन और उग्र होगा। 150 रुपए के विवाद में गई जान देर शाम हुई सभा में बंजारा समाज, हिंदू संगठनों और नेताओं ने सोहन को श्रद्धांजलि दी। क्षेत्रीय विधायक राजकुमार मेव ने कहा कि मात्र 150 रुपए के विवाद में परिवार के इकलौते बेटे की हत्या करना दिल दहला देने वाली घटना है। उन्होंने परिवार को मदद दिलाने और आरोपी को कड़ी सजा दिलाने का भरोसा दिया। आरोपी शानू खान ने विवाद के दौरान किशोर को जमीन पर गिराकर कोहनी से हमला किया और गर्दन पर पैर रखकर दबाया था। ज्ञापन में रखी गईं ये मुख्य मांगें आरोपी का सरकारी जमीन पर बना मकान तुरंत तोड़ा जाए। सोमाखेड़ी मार्ग पर कब्रिस्तान के बाहर बनी अवैध दुकानों को हटाया जाए। शहर के धार्मिक स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं। बाहर से आकर बसे संदिग्ध लोगों की जांच की जाए। कट्टरपंथी शिक्षा देने वालों पर नकेल कसी जाए। मृतक के परिवार को मुआवजा और व्यापार के लिए दुकान दी जाए। रैली के दौरान सुरक्षा के लिए भारी पुलिस बल तैनात रहा। देर शाम तक करही इलाके में इस घटना को लेकर तनाव और गुस्से का माहौल बना रहा।

ग्वालियर में चोरी करने पहुंचे युवक का VIDEO:जाली में फंसा हाथ, पूरी रात खड़ा रहा; सुबह मकान मालिक पहुंचा तक चला पता

ग्वालियर में चोरी करने पहुंचे युवक का VIDEO:जाली में फंसा हाथ, पूरी रात खड़ा रहा; सुबह मकान मालिक पहुंचा तक चला पता

ग्वालियर में चोरी करने घुसा एक शातिर चोर रातभर जाली में फंसा रहा। दीनदयाल नगर इलाके के एक निर्माणाधीन मकान में सरिया चुराने पहुंचे चोर का हाथ जाली में ऐसा फंसा कि उसे पूरी रात उसी हालत में खड़ा रहना पड़ा। सुबह मकान मालिक ने उसे देखा और पुलिस को सूचना दी। आरोपी पर पहले से ही सरिया चोरी के 6 मामले दर्ज हैं। घटना महाराजपुरा थाना क्षेत्र के दीनदयाल नगर की है। सोमवार रात शातिर चोर मनोज कुशवाह एक निर्माणाधीन मकान में सरिया चुराने की नीयत से घुसा था। अंदर जाने के बाद उसने कमरे का दरवाजा खोलने का प्रयास किया। दरवाजे के बगल में लगी जाली से उसने अपना हाथ अंदर डाला और कुंडी खोलने लगा। काफी मशक्कत के बाद भी कुंडी नहीं खुली और मनोज का हाथ जाली में बुरी तरह फंस गया। पूरी रात न भाग सका, न ही बैठ सका मनोज ने अपना हाथ निकालने की बहुत कोशिश की, लेकिन वह सफल नहीं हो पाया। इस प्रयास में उसके हाथ में सूजन आ गई और दर्द बढ़ गया। हाथ न निकलने के कारण मनोज पूरी रात जाली के पास ही खड़ा रहा। वह न तो भाग सका और न ही बैठ सका। चोर को देख मकान मालिक रह गए हैरान सुबह जब मकान मालिक निर्माणाधीन मकान पर पहुंचे, तो जाली में फंसे मनोज को देखकर हैरान रह गए। मकान मालिक ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद मनोज का हाथ जाली से निकाला गया। निर्माणाधीन मकानों को बनाता था निशाना पुलिस के अनुसार, मनोज इलाके में सरिया चोरी की कई वारदातों को अंजाम दे चुका है। वह विशेष रूप से निर्माणाधीन मकानों को निशाना बनाता था। पूछताछ में उसने कई चोरियों को कबूल किया है। पुलिस उससे चोरी का माल बरामद करने का प्रयास कर रही है। पुलिस ने चोर के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है।

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: 15 साल का राज, अब अग्नि परीक्षा…बंगाल में फिर से क्या दिखा ‘ब्रांड ममता’?

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: 15 साल का राज, अब अग्नि परीक्षा...बंगाल में फिर से क्या दिखा 'ब्रांड ममता'?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की सत्ता में लगातार 15 साल तक बनी रहीं और एक बार फिर इतिहास रचने की दहलीज पर खड़ी हो गईं। समाजवादी कांग्रेस की सुप्रीमो के तौर पर उन्होंने लंबे समय तक राज्य की राजनीति पर अपना प्रभाव बनाए रखा है। ऐसे समय में जब भारतीय जनता पार्टी केंद्रीय नेतृत्व के दम पर पूरे जोर-शोर से चुनाव लड़ रही है, तब एक मजबूत क्षेत्रीय नेता के रूप में ममता बनर्जी अब भी नजर आ रही हैं। उनके शासनकाल में जहां ऑर्केस्ट्रा ऑर्केस्ट्रा का प्रभाव लगभग समाप्त हो गया, वहीं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस भी काफी कमजोर हो गई। हालाँकि, बीजेपी ने हाल के वर्षों में राज्य में अपनी पकड़ मजबूत बनाते हुए खुद को मुख्य चुनौती के रूप में स्थापित किया है। ब्रांड ‘दीदी’ की अग्नि परीक्षा इस चुनाव में ममता बनर्जी के सामने सबसे बड़ी चुनौती बीजेपी है। समर्थकों के आरोप और सत्य-विरोधी इतिहासकारों की चर्चाओं के बीच यह अहम सवाल है कि क्या सिद्धांत अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वियों को फिर से माता दे मापदंड। ममता की प्राथमिकता सिर्फ उनके शासन तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनकी सादगी और “मां, माटी, मानुष” की राजनीति ने उन्हें जनता से गहराई से जोड़ दिया है। राजनीतिक यात्रा और मनोरंजन 1970-80 के दशक में छात्र राजनीति से शुरुआत करने वाली ममता बनर्जी ने कांग्रेस (आई) से अपने इतिहास की शुरुआत की। वे 1984 में पहली बार पश्चिम बंगाल में वामपंथ के विरुद्ध सबसे मुखर चेहरा बने। 1997 में वे क्लासिक कांग्रेस की स्थापना के खिलाफ और सीपीएम के मजबूत विकल्प के रूप में उभरे। 2006 में सिंगुर आंदोलन के खिलाफ उनकी राजनीति टर्निंग पॉइंट साबित हुई, जहां उन्होंने किसानों के पक्ष में आंदोलन चलाया। 2011: सत्ता परिवर्तन का वर्ष 2011 विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने 34 साल से सत्ता में रही वाम सरकार को 294 में 184 से 184 में प्रवेश करके ऐतिहासिक जीत दर्ज की। इसके साथ ही वे राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं। इसके बाद 2016 और 2021 में भी उन्होंने दो बार जीत हासिल की। 2021 में नंदीग्राम से हार के बाद वे भवानीपुर सोलन में मुख्यमंत्री पद पर आसीन हुए। कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस वक्त एक अहम बदलाव है, जहां एक तरफ बीजेपी सत्ता में आने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी तरफ ममता बनर्जी अपनी पकड़ और “ब्रांड दोस्तों” की छवि के साथ फिर से जीत का दावा कर रही हैं। ये भी पढ़ें: ‘जनता पर किसान की मार’, आखिरी चरण की वोटिंग से पहले राहुल गांधी का पेट्रोल-डीजल की कीमत पर बड़ा बयान

इंदौर में नगर निगम के खोदे गड्‌ढे में गिरा युवक:पैर कटकर आधा लटका; पुलिस कर्मी मौके पर पहुंचे तो बैरिकेड्स लगाकर लौट गए

इंदौर में नगर निगम के खोदे गड्‌ढे में गिरा युवक:पैर कटकर आधा लटका; पुलिस कर्मी मौके पर पहुंचे तो बैरिकेड्स लगाकर लौट गए

इंदौर के द्वारकापुरी इलाके में मंगलवार रात एक युवक बाइक सहित एक गड्ढे में जा गिरा। हादसे में युवक के पैर का पंजा आधे से ज्यादा कटकर लटक गया। उसका दूसरा पैर भी फ्रैक्चर है। आसपास मौजूद लोगों ने उसे बाहर निकाला और उपचार के लिए निजी अस्पताल भेजा। घटना वीआईपी परस्पर रोड की है। यहां नगर निगम ने नर्मदा लाइन डालने के लिए गड्ढे खोदे हुए हैं। रात करीब 9 बजे राकेश पिता हरीश यादव, उम्र 33 साल, निवासी श्रद्धा सबूरी कॉलोनी, बाइक सहित एक गड्ढे में जा गिरा। लोगों ने उसे देखा तो तुरंत बाहर निकालकर यूनिक अस्पताल भेजा, जहां उसका इलाज जारी है। वह कार पेंटर है और सिलिकॉन सिटी में काम पर जा रहा था। उसके 3 बच्चे हैं। पाइपलाइन डालने का चल रहा है काम रहवासियों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों से यहां पाइपलाइन डालने का काम चल रहा है। इसके लिए सड़क पर कई गड्ढे खोदे गए हैं, लेकिन किसी तरह की चेतावनी या सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए थे। बैरिकेड्स लगाकर लौट गए पुलिसकर्मी सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। दो पुलिसकर्मी बाइक से आए और आसपास बैरिकेड्स लगाकर लौट गए।

इंदौर में नगर निगम के खोदे गड्‌ढे में गिरा युवक:आसपास के लोगों ने अस्पताल पहुंचाया; पुलिस बैरिकेड्स लगाकर लौट गई

इंदौर में नगर निगम के खोदे गड्‌ढे में गिरा युवक:आसपास के लोगों ने अस्पताल पहुंचाया; पुलिस बैरिकेड्स लगाकर लौट गई

इंदौर के द्वारकापुरी इलाके में मंगलवार रात एक युवक बाइक सहित एक गड्ढे में जा गिरा। आसपास मौजूद लोगों ने उसे बाहर निकाला और उपचार के लिए निजी अस्पताल भेजा। युवक के परिवार वालों की जानकारी जुटाई जा रही है। घटना वीआईपी परस्पर रोड की है। यहां नगर निगम ने नर्मदा लाइन डालने के लिए गड्ढे खोदे हुए हैं। बताया जाता है कि रात करीब 9 बजे राजेश पिता हरीश यादव, निवासी श्रद्धा सबूरी कॉलोनी, बाइक सहित एक गड्ढे में जा गिरा। लोगों ने उसे देखा तो तुरंत बाहर निकालकर यूनिक अस्पताल भेजा, जहां उसका इलाज जारी है। रहवासियों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों से यहां पाइपलाइन डालने का काम चल रहा है। इसके लिए सड़क पर कई गड्ढे खोदे गए हैं, लेकिन किसी तरह की चेतावनी या सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए थे। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। दो पुलिसकर्मी बाइक से आए और आसपास बैरिकेड्स लगाकर लौट गए।

अंजड़ सराफा बाजार में आधे घंटे एंबुलेंस जाम में फंसी:गंभीर मरीज को इंदौर ले जा रही थी, बायपास नहीं बनने से अक्सर ऐसी परेशानी

अंजड़ सराफा बाजार में आधे घंटे एंबुलेंस जाम में फंसी:गंभीर मरीज को इंदौर ले जा रही थी, बायपास नहीं बनने से अक्सर ऐसी परेशानी

बड़वानी जिले के अंजड़ नगर में मंगलवार शाम करीब 8 बजे मुख्य सराफा बाजार में एक एंबुलेंस आधे घंटे तक जाम में फंसी रही। इस एंबुलेंस में एक गंभीर मरीज को बड़वानी से इंदौर ले जाया जा रहा था। नगर की खराब ट्रैफिक व्यवस्था के कारण मरीज को अस्पताल पहुंचने में देरी हुई। जब एंबुलेंस वाहनों की लंबी कतार में फंसी, तो ड्राइवर लगातार सायरन बजाता रहा, लेकिन रास्ता नहीं मिला। मौके पर मौजूद स्थानीय दुकानदारों और युवाओं (सतीश, विकास और सुनील) ने करीब 10 मिनट की मेहनत के बाद एंबुलेंस को जाम से बाहर निकाला। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां रोज ऐसे ही हालात बनते हैं और किसी दिन बड़ी अनहोनी हो सकती है। 20 साल से बायपास का इंतजार अंजड़ में बायपास नहीं होने की वजह से बड़वानी से इंदौर जाने वाले सभी छोटे-बड़े वाहन शहर के बीच से होकर गुजरते हैं। नगरवासी पिछले 20 सालों से बायपास बनाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं। नियमों की अनदेखी बन रही जाम की वजह पुलिस ने शहर में वन-वे व्यवस्था लागू की है, लेकिन ठीकरी की ओर से आने वाली कारें और छोटे वाहन अक्सर नियमों को तोड़कर सराफा बाजार में घुस जाते हैं। इससे दोनों तरफ से गाड़ियां आमने-सामने आ जाती हैं और लंबा जाम लग जाता है। हैरानी की बात यह है कि इसी रास्ते से रोज बड़े अधिकारी भी गुजरते हैं और जाम में फंसते हैं, फिर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। नगरवासियों की मुख्य मांगें बायपास बनाने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाए। जब तक बायपास नहीं बनता, सराफा बाजार में पुलिस बल तैनात रहे और वन-वे का सख्ती से पालन हो। गलत दिशा से आने वाले वाहनों पर भारी जुर्माना लगाया जाए। थाना प्रभारी का बयान अंजड़ थाना प्रभारी रेवाराम चौहान ने बताया कि बायपास न होने के कारण दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। खासकर ठीकरी रोड पर ज्यादा समस्या आती है। यातायात सुचारू रखने के लिए दो ट्रैफिक जवान तैनात रहते हैं। उन्होंने पुष्टि की कि आज भी एक एंबुलेंस जाम में फंस गई थी, जिसे पुलिस की मदद से निकाला गया।

शादी के 23 दिनों में पत्नी को ले गए परिजन:वापस दिलाने देवास कलेक्ट्रेट पहुंचा 4 फीट का दूल्हा; सोशल मीडिया से हुई थी दोस्ती

शादी के 23 दिनों में पत्नी को ले गए परिजन:वापस दिलाने देवास कलेक्ट्रेट पहुंचा 4 फीट का दूल्हा; सोशल मीडिया से हुई थी दोस्ती

देवास में एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां 4 फीट के दूल्हे प्रकाश रावत ने अपनी पत्नी को वापस दिलाने के लिए कलेक्टर कार्यालय से गुहार लगाई है। प्रकाश की शादी 21 मार्च को हुई थी, लेकिन महज 23 दिन बाद ही 13 अप्रैल को युवती के परिजन उसे अपने साथ ले गए। इमलीपुरा कमलापुर निवासी प्रकाश रावत ने बताया कि उनकी मुलाकात युवती से सोशल मीडिया के जरिए हुई थी। दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और फिर आपसी सहमति से उन्होंने मंदिर में और बाद में कोर्ट में शादी कर ली। शादी के बाद सब कुछ सामान्य चल रहा था। लेकिन 13 अप्रैल को युवती के परिजन अचानक आए और उन्हें कमलापुर थाना बुलाया। प्रकाश का आरोप है कि थाने से युवती के परिजन उसे जबरदस्ती अपने साथ ले गए। बोला- पत्नी को नहीं भेज रहे मायके वाले प्रकाश का कहना है कि उसकी पत्नी को मायके पक्ष के लोग अपने साथ ले गए हैं और अब उसे वापस नहीं भेज रहे हैं। वह लगातार अपनी पत्नी को वापस लाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने इसे वन स्टॉप सेंटर भेज दिया है। प्रकाश अपने परिवार के साथ वन स्टॉप सेंटर पहुंचा और प्रशासक गीता ठाकुर को अपनी आपबीती और पूरा घटनाक्रम बताया। उसने विवाह के दस्तावेज और अन्य संबंधित जानकारी भी दी। प्रशासक गीता ठाकुर ने बताया कि उन्होंने लड़की पक्ष वालों से फोन पर बात की है और उन्हें बुधवार को वन स्टॉप सेंटर पर बुलाया है। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि प्रकाश ने शादी के सारे दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं और दोनों बालिग हैं। काउंसलिंग के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

टीकमगढ़ में नल-जल योजना के लिए भूख हड़ताल खत्म:अधिकारियों ने कल दोपहर 12 बजे तक पानी सप्लाई का लिखित आश्वासन दिया

टीकमगढ़ में नल-जल योजना के लिए भूख हड़ताल खत्म:अधिकारियों ने कल दोपहर 12 बजे तक पानी सप्लाई का लिखित आश्वासन दिया

टीकमगढ़ के दिगौड़ा ग्राम पंचायत में डेढ़ महीने से बंद नल-जल योजना को शुरू कराने की मांग को लेकर समाजसेवी रमाशंकर पस्तोर की भूख हड़ताल मंगलवार रात को खत्म हो गई। अधिकारियों ने बुधवार दोपहर 12 बजे तक पानी की सप्लाई शुरू करने का लिखित भरोसा दिया, जिसके बाद पस्तोर ने जूस पीकर अपना अनशन तोड़ा। दिगौड़ा कस्बे में पिछले डेढ़ महीने से नल-जल योजना ठप पड़ी है। भीषण गर्मी में पानी न मिलने से ग्रामीण बेहद परेशान थे। इसी समस्या को लेकर रमाशंकर पस्तोर मंगलवार दोपहर से बस स्टैंड पर भूख हड़ताल और धरने पर बैठ गए थे। अधिकारियों ने दिया लिखित आश्वासन रात करीब 8 बजे तहसीलदार प्राची जैन, थाना प्रभारी मनीष मिश्रा और पीएचई विभाग के एसडीओ हर्ष राय मौके पर पहुंचे। उन्होंने समाजसेवी से चर्चा की और बुधवार दोपहर तक योजना चालू करने का लिखित आश्वासन दिया। प्रशासन की अनदेखी पर उठाया कदम रमाशंकर पस्तोर ने बताया कि ग्रामीणों ने 1 अप्रैल और 22 अप्रैल को एसडीएम को ज्ञापन दिया था, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद 24 अप्रैल को कलेक्टर को सूचना देकर चेतावनी दी गई थी कि अगर 27 अप्रैल तक पानी शुरू नहीं हुआ, तो वे 28 अप्रैल से भूख हड़ताल करेंगे। ये लोग भी रहे शामिल इस अनशन में समाजसेवी के साथ जिला पंचायत सदस्य मनोहर लाल अहिरवार, डॉ. विष्णु राय, प्रेमनारायण लुहारिया, रवि सोनकिया, मनोज सेन, त्रिलोक त्रिपाठी, ताजुद्दीन खान और कई अन्य ग्रामीण भी साथ बैठे थे।