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Eco-Friendly Packing Mandatory for Gutkha, Tobacco; FSSAI Draft 2026

Eco-Friendly Packing Mandatory for Gutkha, Tobacco; FSSAI Draft 2026

नई दिल्ली12 मिनट पहले

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अब जल्द ही आपको गुटखा, तंबाकू और पान मसाला के प्लास्टिक पाउच नजर नहीं आएंगे। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने कहा कि पान मसाला की पैकिंग में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक मटेरियल को अब कागज, पेपरबोर्ड, सेल्युलोज और अन्य इको-फ्रेंडली मटेरियल से बदला जाएगा।

इसके लिए FSSAI ने मंगलवार को खाद्य सुरक्षा और मानक (पैकेजिंग) विनियमन 2018′ में संशोधन के लिए एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। इस ड्राफ्ट ‘प्लास्टिक कचरा प्रबंधन नियम 2026’ पर अगले 30 दिन तक स्टेकहोल्डर्स से राय और आपत्तियां मांगी गई हैं। इसके बाद इस नियम को अंतिम रूप दिया जाएगा।

प्लास्टिक या विनाइल का किसी भी रूप में उपयोग नहीं होगा

नए प्रस्ताव के अनुसार, गुटखा, पान मसाला और तंबाकू के किसी भी पैकेज में किसी भी रूप में प्लास्टिक मटेरियल का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।

इसमें ‘विनाइल एसीटेट-मेलिक एसिड-विनाइल क्लोराइड कोपोलिमर’ जैसे केमिकल युक्त मटेरियल पर भी पाबंदी होगी।

कागज और सेल्युलोज से बने पाउच का ऑप्शन

FSSAI ने सलाह दी है कि अब प्लास्टिक पाउच की जगह कागज, गत्ते (पेपरबोर्ड) और सेल्युलोज जैसे नेचुरल सामान का इस्तेमाल किया जाए।

रेगुलेटर का कहना है कि ये चीजें खाने-पीने का सामान पैक करने के लिए पूरी तरह सुरक्षित हैं। साथ ही, कंपनियों के लिए भी इन नए मटेरियल को अपनाना और इस्तेमाल करना आसान होगा।

टीन और कांच के कंटेनर्स का विकल्प रहेगा बरकरार

स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार, जो निर्माता पाउच के बजाय टीन या कांच के कंटेनर्स का उपयोग कर रहे हैं, वे उसे जारी रख पाएंगे।

इससे मैन्युफैक्चरर्स को अपनी कमर्शियल जरूरतों के हिसाब से फ्लेक्सिबिलिटी मिलेगी, बशर्ते वे रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के भीतर हों।

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अब जल्द ही आपको गुटखा, तंबाकू और पान मसाला के प्लास्टिक पाउच नजर नहीं आएंगे। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने कहा कि पान मसाला की पैकिंग में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक मटेरियल को अब कागज, पेपरबोर्ड, सेल्युलोज और अन्य इको-फ्रेंडली मटेरियल से बदला जाएगा।

इसके लिए FSSAI ने मंगलवार को खाद्य सुरक्षा और मानक (पैकेजिंग) विनियमन 2018′ में संशोधन के लिए एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। इस ड्राफ्ट ‘प्लास्टिक कचरा प्रबंधन नियम 2026’ पर अगले 30 दिन तक स्टेकहोल्डर्स से राय और आपत्तियां मांगी गई हैं। इसके बाद इस नियम को अंतिम रूप दिया जाएगा।

प्लास्टिक या विनाइल का किसी भी रूप में उपयोग नहीं होगा

नए प्रस्ताव के अनुसार, गुटखा, पान मसाला और तंबाकू के किसी भी पैकेज में किसी भी रूप में प्लास्टिक मटेरियल का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।

इसमें ‘विनाइल एसीटेट-मेलिक एसिड-विनाइल क्लोराइड कोपोलिमर’ जैसे केमिकल युक्त मटेरियल पर भी पाबंदी होगी।

कागज और सेल्युलोज से बने पाउच का ऑप्शन

FSSAI ने सलाह दी है कि अब प्लास्टिक पाउच की जगह कागज, गत्ते (पेपरबोर्ड) और सेल्युलोज जैसे नेचुरल सामान का इस्तेमाल किया जाए।

रेगुलेटर का कहना है कि ये चीजें खाने-पीने का सामान पैक करने के लिए पूरी तरह सुरक्षित हैं। साथ ही, कंपनियों के लिए भी इन नए मटेरियल को अपनाना और इस्तेमाल करना आसान होगा।

टीन और कांच के कंटेनर्स का विकल्प रहेगा बरकरार

स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार, जो निर्माता पाउच के बजाय टीन या कांच के कंटेनर्स का उपयोग कर रहे हैं, वे उसे जारी रख पाएंगे।

इससे मैन्युफैक्चरर्स को अपनी कमर्शियल जरूरतों के हिसाब से फ्लेक्सिबिलिटी मिलेगी, बशर्ते वे रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के भीतर हों।

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