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अनिल अंबानी ग्रुप की ₹3,034 करोड़ की संपत्ति जब्त:मुंबई का फ्लैट और खंडाला का फार्महाउस कुर्क, अब तक ₹19,344 करोड़ की प्रॉपर्टी पर एक्शन

अनिल अंबानी ग्रुप की ₹3,034 करोड़ की संपत्ति जब्त:मुंबई का फ्लैट और खंडाला का फार्महाउस कुर्क, अब तक ₹19,344 करोड़ की प्रॉपर्टी पर एक्शन

ED ने अनिल अंबानी ग्रुप (RAAG) की 3,034 करोड़ रुपए की नई संपत्तियां जब्त की हैं। एजेंसी ने मंगलवार को मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत ये कार्रवाई की है। यह कार्रवाई रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM) और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड से जुड़ी संपत्तियों पर की गई है। जब्त की गई संपत्तियों में मुंबई स्थित एक फ्लैट और महाराष्ट्र के हिल स्टेशन खंडाला में एक फार्महाउस शामिल है। इसके अलावा, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के 7.71 करोड़ शेयर और अहमदाबाद के साणंद में स्थित कुछ जमीन को भी कुर्क किया गया है। ED ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत यह प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया है। अब तक कुल 19,344 करोड़ की संपत्ति जब्त अनिल अंबानी ग्रुप के खिलाफ चल रहे इस मामले में यह कोई पहली कार्रवाई नहीं है। ताजा जब्ती के बाद, ग्रुप के खिलाफ मामलों में कुल अटैचमेंट अब 19,344 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। ED लंबे समय से ग्रुप की कंपनियों द्वारा किए गए कथित बैंक धोखाधड़ी और फंड के डायवर्जन (पैसों की हेराफेरी) के आरोपों की जांच कर रही है। बैंक धोखाधड़ी और फंड डायवर्जन का है आरोप ED की जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि कैसे ग्रुप की कंपनियों ने बैंकों से लिए गए कर्ज का गलत इस्तेमाल किया। जांच एजेंसी का आरोप है कि फंड को उन कामों के बजाय कहीं और डायवर्ट किया गया, जिनके लिए कर्ज लिया गया था। इसी मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क को ट्रैक करते हुए एजेंसी लगातार ग्रुप की संपत्तियों को कुर्क कर रही है। अनिल अंबानी ग्रुप की मुश्किलें बढ़ीं रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM) पहले से ही दिवालिया प्रक्रिया (इनसॉल्वेंसी) से गुजर रही है। अब रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की संपत्तियों और शेयरों पर हुई इस कार्रवाई से अनिल अंबानी ग्रुप की वित्तीय मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। ग्रुप की कई कंपनियां भारी कर्ज और कानूनी जांच के घेरे में हैं। क्या होता है PMLA और प्रोविजनल अटैचमेंट? PMLA (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट): यह 2002 में बना एक कानून है, जिसका मकसद काले धन को सफेद करने (मनी लॉन्ड्रिंग) पर रोक लगाना और ऐसी गतिविधियों में शामिल संपत्ति को जब्त करना है। प्रोविजनल अटैचमेंट: जब ईडी को लगता है कि कोई संपत्ति अपराध की कमाई से बनाई गई है, तो वह उसे अस्थायी रूप से (180 दिनों के लिए) जब्त कर लेती है। इसे बाद में एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी से मंजूरी मिलने पर स्थायी जब्त किया जा सकता है।

अनिल अंबानी ग्रुप की ₹3,034 करोड़ की संपत्ति जब्त:मुंबई का फ्लैट और खंडाला का फार्महाउस कुर्क, अब तक ₹19,344 करोड़ की प्रॉपर्टी पर एक्शन

अनिल अंबानी ग्रुप की ₹3,034 करोड़ की संपत्ति जब्त:मुंबई का फ्लैट और खंडाला का फार्महाउस कुर्क, अब तक ₹19,344 करोड़ की प्रॉपर्टी पर एक्शन

ED ने अनिल अंबानी ग्रुप (RAAG) की 3,034 करोड़ रुपए की नई संपत्तियां जब्त की हैं। एजेंसी ने मंगलवार को मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत ये कार्रवाई की है। यह कार्रवाई रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM) और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड से जुड़ी संपत्तियों पर की गई है। जब्त की गई संपत्तियों में मुंबई स्थित एक फ्लैट और महाराष्ट्र के हिल स्टेशन खंडाला में एक फार्महाउस शामिल है। इसके अलावा, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के 7.71 करोड़ शेयर और अहमदाबाद के साणंद में स्थित कुछ जमीन को भी कुर्क किया गया है। ED ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत यह प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया है। अब तक कुल 19,344 करोड़ की संपत्ति जब्त अनिल अंबानी ग्रुप के खिलाफ चल रहे इस मामले में यह कोई पहली कार्रवाई नहीं है। ताजा जब्ती के बाद, ग्रुप के खिलाफ मामलों में कुल अटैचमेंट अब 19,344 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। ED लंबे समय से ग्रुप की कंपनियों द्वारा किए गए कथित बैंक धोखाधड़ी और फंड के डायवर्जन (पैसों की हेराफेरी) के आरोपों की जांच कर रही है। बैंक धोखाधड़ी और फंड डायवर्जन का है आरोप ED की जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि कैसे ग्रुप की कंपनियों ने बैंकों से लिए गए कर्ज का गलत इस्तेमाल किया। जांच एजेंसी का आरोप है कि फंड को उन कामों के बजाय कहीं और डायवर्ट किया गया, जिनके लिए कर्ज लिया गया था। इसी मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क को ट्रैक करते हुए एजेंसी लगातार ग्रुप की संपत्तियों को कुर्क कर रही है। अनिल अंबानी ग्रुप की मुश्किलें बढ़ीं रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM) पहले से ही दिवालिया प्रक्रिया (इनसॉल्वेंसी) से गुजर रही है। अब रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की संपत्तियों और शेयरों पर हुई इस कार्रवाई से अनिल अंबानी ग्रुप की वित्तीय मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। ग्रुप की कई कंपनियां भारी कर्ज और कानूनी जांच के घेरे में हैं। क्या होता है PMLA और प्रोविजनल अटैचमेंट? PMLA (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट): यह 2002 में बना एक कानून है, जिसका मकसद काले धन को सफेद करने (मनी लॉन्ड्रिंग) पर रोक लगाना और ऐसी गतिविधियों में शामिल संपत्ति को जब्त करना है। प्रोविजनल अटैचमेंट: जब ईडी को लगता है कि कोई संपत्ति अपराध की कमाई से बनाई गई है, तो वह उसे अस्थायी रूप से (180 दिनों के लिए) जब्त कर लेती है। इसे बाद में एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी से मंजूरी मिलने पर स्थायी जब्त किया जा सकता है।

पिता को सिर-पेट में मारा चाकू, हालत गंभीर:तीन दिन पहले हिस्ट्रीशीटर बेटे को एसीपी ने मुचलके पर छोड़ा था, बेटी ने दर्ज कराई एफआईआर

पिता को सिर-पेट में मारा चाकू, हालत गंभीर:तीन दिन पहले हिस्ट्रीशीटर बेटे को एसीपी ने मुचलके पर छोड़ा था, बेटी ने दर्ज कराई एफआईआर

इंदौर के हीरानगर इलाके में एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है, जहां बेटे ने ही अपने पिता पर चाकू से हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल पिता का अस्पताल में इलाज जारी है, जबकि आरोपी फरार है। खास बात यह है कि आरोपी को तीन दिन पहले ही पुलिस ने पकड़कर छोड़ा था। परिजनों के मुताबिक, रात करीब 12 बजे सागर घर पहुंचा और घर का सामान फेंकने लगा। पिता अनिल ने उसे रोकने की कोशिश की, तो सागर ने पहले चाकू के हत्थे से सिर पर वार किया और फिर पेट में चाकू घोंप दिया। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। घटना के बाद आसपास के लोगों की मदद से अनिल ठाकुर को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। मामले में बेटी भक्ति ने पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक 23 अप्रैल को इलाके में विवाद के दौरान पुलिस ने सागर ठाकुर को पकड़ा था। उसे रूबिना मिजवानी की कोर्ट में पेश किया गया, जहां से सामान्य मुचलके पर छोड़ दिया गया। अब इस मामले में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। सागर ठाकुर के खिलाफ पहले से करीब 5 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें मारपीट, अवैध हथियार और नशे से जुड़े केस शामिल हैं। पुलिस अब उसकी तलाश में जुटी है। एमडी ड्रग्स के साथ एक और आरोपी गिरफ्तार इसी बीच हीरानगर पुलिस ने एक अन्य कार्रवाई में लक्की उर्फ लखन श्रीवंश को एमडी ड्रग के साथ पकड़ा है। सुशील पटेल की टीम ने उसके पास से करीब 8 ग्राम एमडी जब्त की है। आरोपी पर पहले से 11 मामले दर्ज बताए जा रहे हैं।

ममता की गायब सहयोगी: अखिलेश यादव बंगाल चुनाव प्रचार से दूर क्यों रहे? | चुनाव समाचार

Gujarat Local Body Election Results 2026 Live Updates

आखरी अपडेट:28 अप्रैल, 2026, 14:58 IST यहां बताया गया है कि एक संभावित स्पष्टीकरण जटिल विपक्षी गतिशीलता में निहित है, खासकर 2027 के यूपी चुनावों से पहले अखिलेश यादव के साथ ममता बनर्जी. (पीटीआई) जैसे ही पश्चिम बंगाल में तीव्र राजनीतिक गतिविधि और भारी सुरक्षा तैनाती के बीच चुनाव प्रचार समाप्त हो रहा है, एक महत्वपूर्ण सवाल पर्यवेक्षकों के लिए पहेली बना हुआ है – टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी का खुले तौर पर समर्थन करने के बावजूद समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव जमीनी अभियान से दूर क्यों रहे? यह व्यापक रूप से उम्मीद थी कि यादव सक्रिय रूप से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के समर्थन में प्रचार करेंगे। इस साल जनवरी में, यादव ने कोलकाता का दौरा भी किया था और एक निजी कार्यक्रम के बाद बनर्जी से मुलाकात की थी, जो बढ़ती राजनीतिक निकटता का संकेत था। हालाँकि, जब महत्वपूर्ण अभियान चरण आया, तो उन्होंने बंगाल की चुनावी लड़ाई में शारीरिक रूप से भाग नहीं लेने का फैसला किया। दिलचस्प बात यह है कि तेजस्वी यादव, हेमंत सोरेन और अरविंद केजरीवाल जैसे अन्य विपक्षी नेताओं ने राज्य में सक्रिय रूप से प्रचार किया, जिससे यादव की अनुपस्थिति को लेकर उत्सुकता बढ़ गई। एक संभावित व्याख्या जटिल विपक्षी गतिशीलता में निहित है। बंगाल में टीएमसी और कांग्रेस सीधे प्रतिद्वंद्वी हैं। वहीं, कांग्रेस नेता राहुल गांधी अपने प्रचार अभियान के दौरान टीएमसी सरकार की खुलकर आलोचना कर रहे हैं। इस संदर्भ को देखते हुए, बनर्जी के लिए यादव का सक्रिय प्रचार अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले मिश्रित राजनीतिक संकेत भेज सकता है, जहां समाजवादी पार्टी को कांग्रेस के साथ समन्वय बनाए रखने की आवश्यकता हो सकती है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना ​​है कि जमीनी स्तर पर प्रचार से दूर रहने के उनके फैसले के पीछे यह संतुलनकारी कदम एक प्रमुख कारण हो सकता है। हालाँकि, समाजवादी पार्टी ने ऐसी अटकलों को खारिज कर दिया है। पार्टी प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने न्यूज18 इंडिया को बताया कि यादव ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक बयानों के जरिए लगातार बनर्जी का समर्थन किया है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि “भौतिक उपस्थिति से अधिक समर्थन मायने रखता है”, यह दोहराते हुए कि यादव मजबूती से बनर्जी के साथ खड़े हैं। पार्टी ने उनकी अनुपस्थिति और आगामी यूपी चुनाव या कांग्रेस फैक्टर के बीच किसी भी संबंध से इनकार किया। यहां तक ​​कि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) जैसे सहयोगियों का भी कहना है कि यादव का ममता के लिए समर्थन स्पष्ट है। राजद सांसद और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता मनोज झा ने कहा कि यादव का बनर्जी के प्रति समर्थन स्पष्ट है, उन्होंने कहा कि बंगाल चुनाव प्रचार से उनकी अनुपस्थिति राजनीतिक हिचकिचाहट के बजाय पूर्व प्रतिबद्धताओं के कारण हो सकती है। हालांकि कई सिद्धांतों पर चर्चा की जा रही है, लेकिन यादव की अनुपस्थिति के पीछे का सटीक कारण स्पष्ट नहीं है। हालाँकि, यह स्पष्ट है कि उनका निर्णय सोच-समझकर लिया गया निर्णय था, जो महत्वपूर्ण चुनावों से पहले विपक्षी खेमे के भीतर नाजुक राजनीतिक संतुलन को दर्शाता है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 28 अप्रैल, 2026, 14:58 IST समाचार चुनाव ममता की गायब सहयोगी: अखिलेश यादव बंगाल चुनाव प्रचार से दूर क्यों रहे? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)अखिलेश यादव बंगाल अभियान(टी)अखिलेश यादव की अनुपस्थिति(टी)ममता बनर्जी का समर्थन(टी)समाजवादी पार्टी की रणनीति(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)विपक्षी गठबंधन की गतिशीलता(टी)कांग्रेस टीएमसी प्रतिद्वंद्विता(टी)उत्तर प्रदेश चुनाव

Anti rabies vaccine| ARV dose| dog bite| कुत्ता काटने के कितने घंटे के अंदर वैक्सीन लगवानी चाहिए? कितनी डोज हैं जरूरी, ये 5 सवाल में जानें गाइडलाइंस

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Anti Rabies Vaccine: कुत्ते के काटने पर एंटी रेबीज की वैक्सीन लगवाई जाती है लेकिन कई बार लोग या तो वैक्सीन की सभी खुराक लेना भूल जाते हैं या डोज सही समय पर नहीं ले पाते और गैप हो जाता है. जिससे कई मामलों में इसके भयंकर परिणाम देखने को मिलते हैं. मरीज को रेबीज हो जाता है और 100 फीसदी जानलेवा इस रोग के चलते मरीज की मौत बेहद कष्टदायक होती है. हालांकि अगर लोगों को सही जानकारी हो तो यह भूल होने की संभावना कम होती है और इस बेहद खतरनाक बीमारी से भी बचा जा सकता है. नेशनल रेबीज कंट्रोल प्रोग्राम (NRCP) की गाइडलाइंस कहती हैं कि कुत्ते के काटने के बाद एंटी रेबीज वैक्सीन (ARV) जितनी जल्दी लगवा सकते हैं उतना बेहतर होता है. इसमें देरी करने से रेबीज का खतरा बढ़ता जाता है. वैक्सीन की शुरुआत कुत्ते के काटने के दिन से ही शुरू करनी चाहिए. रेबीज 100% घातक है लेकिन पूरी तरह रोकी जा सकने वाली बीमारी है. गाइडलाइंस कहती हैं कि कुत्ता काटने के बाद पहले घाव की साबुन और बहते पानी से तुरंत सफाई (Wound Washing) करें. 15 मिनट तक साबुन और बहते पानी से धोने के बाद कोई एंटीसेप्टिक क्रीम लगा सकते हैं और फिर उसके बाद अगला काम वैक्सीनेशन सेंटर तक जाने का करें, ताकि जल्दी से जल्दी वैक्सीन मिल सके. सबसे खास बाता है कि चाहे गर्भवती महिलाएं हों, बच्चे हों या किसी बीमारी से जूझ रहे कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग हों, सभी को पूरी डोज लेना जरूरी है. आइए यहां जानते हैं वैक्सीन से जुड़े प्रमुख सवालों के जवाब.. कुत्ता काटने के कितने घंटे के अंदर वैक्सीन लगवानी चाहिए? कुत्ता काट जाए तो तुरंत वैक्सीन लगवाना जरूरी है. जितनी जल्दी एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाई जाती है, बचाव का रास्ता उतना ही मजबूत होता है. अगर किसी वजह से लेट होता भी है तो रेबीज से बचने के लिए जरूरी है कि 24 घंटे के अंदर वैक्सीन लगवा ली जाए. वैक्सीन की कितनी डोज जरूरी हैं?अगर कुत्ते ने काटा है तो एंटी रेबीज की 4-5 डोज लगाते हैं. वहीं अगर हल्की खरोंच है या कुत्ते के नाखून के निशान हैं तो डॉक्टर इस डोज को 3 भी कर सकते हैं. हालांकि वैक्सीन की कितनी डोज लेनी हैं इसका फैसला खुद नहीं करना है. कुत्ते के काटने पर वैक्सीन लगवाने जरूर जाना है. ये वैक्सीन कहां लगाई जाती है?नेशनल रेबीज कंट्रोल प्रोग्राम के अनुसार एंटी रेबीज वैक्सीन बाजू में लगाई जाती है. यह वैक्सीन दो तरह से लगती है इंट्राडर्मल (ID) और इंट्रामस्कुलर (IM). हालांकि भारत में पसंदीदा और ज्यादा इस्तेमाल होने वाला सस्ता और प्रभावी तरीका इंट्राडर्मल है. यह वैक्सीन कब-कब लगती है? इंट्राडर्मल वैक्सीन की आमतौर पर 4 डोज दी जाती हैं और 8 इंजेक्शन दिए जाते हैं. ये वैक्सीन 0 दिन, तीसरे दिन, 7वें दिन और 28वें दिन पर लगती है. जबकि इंट्रामस्कुलर (IM) इन दिनों के अलावा एक डोज 14वें दिन भी दी जाती है और इसकी कुल 5 डोज दी जाती हैं. क्या वैक्सीन लेने के बाद रेबीज नहीं होता?केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार डॉक्टर भी कहते हैं कि अगर कुत्ते ने कितना भी भयंकर रूप से काटा हो, लेकिन मरीज से तय समय पर और पूरे शेड्यूल के अनुसार रेबीज की वैक्सीन ली हैं तो उसे रेबीज नहीं होता है और उसका 100 फीसदी बचाव होता है. क्या वैक्सीन की खुराक छोड़ देने या गैप कर देने का नुकसान होता है?वैक्सीन का पूरा कोर्स करना जरूरी है. बिना गैप किए वैक्सीन लेनी जरूरी है ताकि रेबीज के खतरे को दूर किया जा सके. सभी टीके नहीं लिए जाते तो रेबीज का खतरा हो सकता है. कुत्ता काट ले तो यहां लें सलाहयह रेबीज हेल्पलाइन 0120-6025400 नंबर है. अगर कुत्ते ने काटा है तो इस नंबर पर कॉल करके भी जानकारी ली जा सकती है. याद रखें कि छोटी सी लापरवाही भी जानलेवा हो सकती है. घाव धोने और वैक्सीन शुरू करने में बिल्कुल देरी न करें.

ईंधन की कीमतें और चुनाव: मतदान के बाद दरें कब बढ़ीं और कब नहीं | भारत समाचार

Gujarat Local Body Election Results 2026 Live Updates

आखरी अपडेट:28 अप्रैल, 2026, 14:51 IST हालांकि सरकार ने ईंधन बढ़ोतरी की रिपोर्ट को खारिज कर दिया है, लेकिन एक स्पष्ट पैटर्न है जब मतदाताओं को लुभाने के लिए चुनावों से पहले कीमतें स्थिर रखी गईं या यहां तक ​​कि उन्हें कम भी किया गया। पेट्रोल की कीमतें आज पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजों की घोषणा में एक सप्ताह से भी कम समय बचा है, ऐसी अटकलें हैं कि पश्चिम एशिया युद्ध के कारण ब्रेंट क्रूड में बड़ी बढ़ोतरी के मद्देनजर ईंधन की कीमतें बढ़ेंगी। पिछले हफ्ते कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज द्वारा जारी एक रिपोर्ट में पेट्रोल और डीजल पर 25-28 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की चेतावनी दी गई थी क्योंकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने तेल विपणन कंपनियों पर दबाव डाला था। हालांकि सरकार ने रिपोर्ट को “शरारतपूर्ण और भ्रामक” कहकर खारिज कर दिया है, लेकिन एक स्पष्ट पैटर्न है जब सरकारें अक्सर मतदाताओं को लुभाने के लिए चुनावों से पहले कीमतें स्थिर रखती हैं या यहां तक ​​कि उन्हें कम भी करती हैं, लेकिन बाद में बढ़ोतरी कर देती हैं। हालाँकि, यह पैटर्न एक समान नहीं रहा है, हाल के वर्षों में उल्लेखनीय अपवादों के साथ जब चुनाव के बाद भी कीमतें स्थिर रहीं। अखिलेश यादव, जिनकी समाजवादी पार्टी लोकसभा में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है, ने दावा किया है कि भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार पांच राज्यों में चुनाव के बाद पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और उर्वरक की कीमतें बढ़ा सकती है। चुनाव के बाद की क्लासिक बढ़ोतरी का पैटर्न 2018 कर्नाटक विधानसभा चुनाव: 2018 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव के बाद, भारत में ईंधन की कीमतें 14 मई, 2018 को – मतदान समाप्त होने के ठीक दो दिन बाद – फिर से बढ़ने लगीं, जिससे लगभग 19 दिनों का अंतराल समाप्त हो गया, जिसके दौरान वैश्विक कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद कीमतें अपरिवर्तित रहीं। 2019 लोकसभा चुनाव: चुनाव के तुरंत बाद ईंधन की कीमत बढ़ने की प्रवृत्ति पहले भी कई बार देखी गई है। 2019 के आम चुनाव अभियान के चरम के दौरान ईंधन की कीमतें लगभग 30 दिनों तक स्थिर रहीं। लेकिन जैसे ही मतदान संपन्न हुआ, अगले ही दिन से पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने लगीं. 2022 विधानसभा चुनाव: उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर समेत पांच राज्यों में 2022 की पहली छमाही में चुनाव होंगे। रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद कीमतें स्थिर रखी गईं। लेकिन नतीजों के बाद कीमतों में कई बार बढ़ोतरी देखी गई। 2021 विधानसभा चुनाव: पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, पुडुचेरी और केरल सहित पांच राज्यों में मतदान के बाद दैनिक बढ़ोतरी तत्काल फिर से शुरू हो गई। मतदान के दौरान 18 दिनों तक कीमतें अपरिवर्तित रहीं, लेकिन 4 मई से लगातार कई बार बढ़ोतरी के साथ कीमतें बढ़ीं। 2024 लोकसभा चुनाव: सरकार ने 2024 के चुनावों के लिए आदर्श आचार संहिता लागू होने से ठीक पहले मार्च 2024 में पूरे भारत में 2 रुपये प्रति लीटर की कटौती की घोषणा की। जब चुनाव के बाद ईंधन की कीमतें नहीं बढ़ीं 2024 के भारतीय आम चुनाव के बाद भी, व्यापक अटकलें थीं कि मतदान समाप्त होने के बाद ईंधन की कीमतें बढ़ाई जाएंगी। हालाँकि, वे उम्मीदें पूरी नहीं हुईं, जिसके तत्काल बाद कीमतें काफी हद तक अपरिवर्तित रहीं। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 28 अप्रैल, 2026, 14:51 IST न्यूज़ इंडिया ईंधन की कीमतें और चुनाव: मतदान के बाद दरें कब बढ़ीं और कब नहीं बढ़ीं अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)चुनाव के बाद ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी(टी)भारत में ईंधन की कीमतें(टी)पेट्रोल डीजल में बढ़ोतरी(टी)ब्रेंट क्रूड प्रभाव(टी)चुनाव और ईंधन की कीमतें(टी)तेल विपणन कंपनियां(टी)लोकसभा चुनाव ईंधन(टी)विधानसभा चुनाव ईंधन

Mumbai Security Guard Attack: Accused Arrested

Mumbai Security Guard Attack: Accused Arrested

Hindi News National Mumbai Security Guard Attack: Accused Arrested | Religious Identity Questioned मुंबई2 मिनट पहले कॉपी लिंक मुंबई के नया नगर इलाके में एक युवक ने दो सिक्योरिटी गार्ड्स से उनकी धार्मिक पहचान पूछने के बाद चाकू से हमला कर दिया। पुलिस के मुताबिक, आरोपी जैब जुबेर अंसारी (31) ने सोमवार सुबह करीब 4 बजे एक निर्माणाधीन इमारत के पास तैनात गार्ड्स को ‘कलमा’ पढ़ने को कहा और फिर उन पर चाकू से हमला कर दिया। घायल गार्ड्स राजकुमार मिश्रा और सुब्रतो सेन को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद एक स्थानीय व्यक्ति नायब शेख ने घायल को पुलिस स्टेशन और फिर अस्पताल पहुंचाने में मदद की। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच जारी है। घटना को लेकर महाराष्ट्र के CM देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि आरोपी जिहाद के नाम पर हिंदुओं को निशाना बनाना चाहता था। यह खबर लगातार अपडेट की जा रही है… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Mumbai Security Guard Attack: Accused Arrested

Mumbai Security Guard Attack: Accused Arrested

Hindi News National Mumbai Security Guard Attack: Accused Arrested | Religious Identity Questioned मुंबई7 मिनट पहले कॉपी लिंक CCTV फुटेज में आरोपी एक गार्ड से बातचीत करता दिखा। उसके हाथ में चाकू भी दिख रहा है। मुंबई के मीरा रोड में एक युवक ने दो सिक्योरिटी गार्ड्स से उनका धर्म पूछने के बाद चाकू से हमला कर दिया। पुलिस के मुताबिक, आरोपी जैब जुबेर अंसारी (31) ने सोमवार सुबह करीब 4 बजे एक निर्माणाधीन इमारत के पास तैनात गार्ड्स को कलमा पढ़ने को कहा। उन्होंने मना किया तो आरोपी ने दोनों पर चाकू से हमला कर दिया। घायल गार्ड्स राजकुमार मिश्रा और सुब्रतो सेन को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। यह हमला पिछले साल पहलगाम में हुए आतंकी हमले जैसा है। वहां भी आतंकियों ने पर्यटकों का धर्म पूछा था। कलमा न पढ़ने वालों को गोलियां मारी थीं। मामले की जांच कर रही महाराष्ट्र ATS इस घटना को आतंकी हमला मान रही है। ATS ने बताया कि आरोपी साइंस ग्रेजुएट है और कई साल तक अमेरिका में रहा था। अमेरिका में नौकरी नहीं मिलने के कारण वह 2020 में भारत लौट आया। मीरा रोड में अकेले रहकर वह ऑनलाइन केमिस्ट्री की कोचिंग देता था। आरोपी को गिरफ्तारी के बाद मीरा रोड के नयानगर थाने लाया गया। आरोपी ने नोट्स में ISIS में शामिल होने की इच्छा जताई माना जा रहा है कि अकेलेपन के दौरान आरोपी इंटरनेट के जरिए कट्टरपंथी बन गया। एजेंसियां अब उसके मोबाइल फोन और लैपटॉप के डिजिटल फुटप्रिंट की जांच कर रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या उसका सीमा पार किसी हैंडलर से सीधा संपर्क था। जांच एजेंसियों ने आरोपी के घर की तलाशी ली। इस दौरान हाथ से लिखे कुछ नोटिस् मिले हैं। सूत्रों के अनुसार, इन नोट्स में आरोपी ने ISIS में शामिल होने की इच्छा जताई थी। उसने सिक्योरिटी गार्ड्स पर हमले को किसी आतंकी संगठन में शामिल होने की दिशा में अपना पहला कदम बताया था। आरोपी के घर से कुछ किताबें और आपत्तिजनक सामान भी बरामद हुए हैं। CM बोले- आरोपी हिंदुओं पर हमला करना चाहता था घटना को लेकर महाराष्ट्र के CM देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि आरोपी जिहाद के नाम पर हिंदुओं को निशाना बनाना चाहता था। CM ने बताया कि यह मामला आत्म-उग्रवादीकरण (सेल्फ-रैडिकलाइजेशन) का लगता है। CM के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वह कट्टरपंथी बन गया था और जिहाद के नाम पर हिंदुओं पर हमला करना चाहता था। इस मामले की जांच फिलहाल महाराष्ट्र एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (ATS) और NIA कर रही है। ATS ने सुरक्षा गार्डों पर हुए हमले की जांच शुरू कर दी है। सुरक्षा एजेंसियां इसे संभावित ‘लोन वुल्फ’ आतंकी हमला मान रही हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आरोपी ने पहले गार्डों से रास्ता पूछा और फिर वापस आकर उनका धर्म पूछा। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

बालाघाट: शराब दुकान पर विवाद, पूर्व सांसद ने किया बीच-बचाव:ठेकेदार के आदमी और युवक में हाथापाई, एक के सिर में आए टांके

बालाघाट: शराब दुकान पर विवाद, पूर्व सांसद ने किया बीच-बचाव:ठेकेदार के आदमी और युवक में हाथापाई, एक के सिर में आए टांके

बालाघाट के नगरीय क्षेत्र बुढ़ी में एक शराब दुकान पर विवाद का वीडियो सामने आया है। इस घटना में पूर्व सांसद कंकर मुंजारे को एक युवक के साथ हो रही हाथापाई को सुलझाते हुए देखा गया। विवाद में एक युवक घायल भी हो गया है। जानकारी के अनुसार, बुढ़ी में शराब भट्टी के विरोध में दिए जा रहे बयानों के बाद यह विवाद शुरू हुआ। पूर्व सांसद कंकर मुंजारे, जो महिलाओं के शराब दुकान विरोधी आंदोलन में शामिल होने पहुंचे थे, उनकी मौजूदगी में ठेकेदार के आदमी और एक युवक के बीच झड़प हो गई। पूर्व सांसद ने बीच-बचाव कर ठेकेदार के आदमी को दुकान के अंदर ले जाकर समझाया। इस दौरान युवक गौरव मेश्राम के सिर में चोटें आईं। उनके भाई कपिल मेश्राम ने बताया कि गौरव को लगभग 6 से 7 टांके लगे हैं। इस घटना की शिकायत कोतवाली थाने में दर्ज कराई गई है। यह उल्लेखनीय है कि बुढ़ी में महिलाएं एक पखवाड़े से अधिक समय से शराब दुकान को हटाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रही हैं। लगभग 50 सालों से चल रही इस दुकान को अन्यत्र स्थानांतरित करने के लिए स्थानीय निवासी प्रयासरत हैं। बीते दिनों आबकारी विभाग और ठेकेदार द्वारा महिलाओं के शांतिपूर्ण आंदोलन को दुकान के सामने से हटाए जाने के बाद से यह विरोध हिंसक रूप ले रहा है। महिलाएं दुकान से शराब खरीदने आने वाले लोगों को डंडों और अपनी ताकत से रोक रही थीं, लेकिन सोमवार रात यह स्थिति हाथापाई तक पहुंच गई, जिसमें गौरव मेश्राम घायल हुए। फिलहाल, इस मामले में पुलिस ने बताया है कि जांच की जा रही है। विरोध प्रदर्शन आगे किस दिशा में बढ़ेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। तस्वीरें देखिए…

इंपैक्ट फीचर:क्लासरूम से करियर तक, सेज यूनिवर्सिटी का AI रिसर्च बेस्ड मॉडल बना रहा स्टूडेंट्स को फ्यूचर रेडी

इंपैक्ट फीचर:क्लासरूम से करियर तक, सेज यूनिवर्सिटी का AI  रिसर्च बेस्ड मॉडल बना रहा स्टूडेंट्स को फ्यूचर रेडी

आज के समय में जब पढ़ाई का तरीका तेजी से बदल रहा है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हर क्षेत्र में अपनी जगह बना रहा है, ऐसे में सेज यूनिवर्सिटी इंदौर और भोपाल छात्रों के लिए नई सोच और नई दिशा के साथ आगे बढ़ रही हैं। सेज ग्रुप के उत्कृष्ट 25 वर्षो के ऐकडेमिक एक्सीलेंस के साथ ये दोनों यूनिवर्सिटीज अब आधुनिक और भविष्य के अनुरूप शिक्षा दे रही हैं। NAAC A+ मान्यता और Times Global Ranking में स्थान प्राप्त कर चुकी यह यूनिवर्सिटी देश की तेजी से उभरती प्राइवेट यूनिवर्सिटीज में शामिल है। सेज यूनिवर्सिटी में AI इनेबल्ड और AI आधारित करिकुलम के जरिए छात्रों को नई तकनीकों से जोड़ा जा रहा है। प्रोजेक्ट और रिसर्च आधारित पढ़ाई पर जोर साथ ही प्रोजेक्ट और रिसर्च आधारित पढ़ाई पर जोर दिया जाता है, ताकि छात्र असली दुनिया की समस्याओं को समझ सकें और उनका समाधान निकाल सकें। आज सेज में 35 हजार से ज्यादा छात्र पढ़ रहे हैं और 60 हजार से ज्यादा एलुमनाई आज Google, Walmart, Deloitte, Microsoft, Salesforce जैसी ग्लोबल कंपनियों में कार्यरत हैं। सेज में अब तक 45 हजार से ज्यादा प्लेसमेंट हो चुके हैं, जिनमें कुछ छात्रों को 30 लाख रुपए तक का पैकेज मिला है। अब तक 45 हजार से ज्यादा प्लेसमेंट यह साफ दिखाता है कि यहां पढ़ाई के साथ-साथ करियर पर भी पूरा ध्यान दिया जाता है। छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव देने के लिए 150 से ज्यादा राष्ट्रीय और विदेशी संस्थानों के साथ साझेदारी की गई है। साथ ही 1700 से अधिक रिसर्च पब्लिकेशन्स और 250 से ज्यादा पेटेंट्स यूनिवर्सिटी की मजबूत रिसर्च संस्कृति को दर्शाते हैं। चांसलर इंजी संजीव अग्रवाल ने बताया की सेज यूनिवर्सिटी रिसर्च और इनोवेशन में बेहतरीन काम कर रही है । यहां छात्रों को नए आइडिया पर काम करने और इंडस्ट्री से जुड़े प्रोजेक्ट्स में हिस्सा लेने के अवसर मिलते हैं। इसी वजह से यूनिवर्सिटी को कई बार अलग-अलग क्षेत्रों में सम्मान भी मिल चुका है।खेलों में भी सेज यूनिवर्सिटी पीछे नहीं है। यहां वर्ल्ड क्लास स्पोर्ट्स सुविधाएं हैं और छात्रों ने राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई मेडल जीते हैं, जो उनके सर्वांगीण विकास को दिखाता है। यूनिवर्सिटी कैंपस में स्टूडेंट्स को बेहतरीन कैंपस लाइफ के साथ साथ स्वर्णिम , यूफोरिया, हैकथॉन, स्टार्टअप एक्सपो जैसे विभ्भिन इवेंट्स के माध्यम से अपना टैलेंट दिखाने का मौका भी मिलता है। देशभर में 50 से ज्यादा इन्फॉर्मेशन सेंटर्स सुविधाओं की बात करें तो स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लाइब्रेरी, आधुनिक लैब्स और बेहतरीन स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर छात्रों को बेहतर माहौल देते हैं, जिससे वे आसानी से सीख सकें। छात्रों की सुविधा के लिए देशभर में 50 से ज्यादा इन्फॉर्मेशन सेंटर्स भी खोले गए हैं, जहां उन्हें अपने ही शहर में करियर से जुड़ी सही जानकारी और मार्गदर्शन मिल जाता है। सेज यूनिवर्सिटी इंदौर – भोपाल , एसआईआरटी कॉलेज भोपाल में सत्र 2026-27 के लिए प्रवेश प्रारम्भ हो चुके है , एडमिशन के लिए सेज एंट्रेंस एग्जाम पास करना अनिवार्य है। स्टूडेंट्स को विस्तृत जानकारी यूनिवर्सिटी , कॉलेज वेबसाइट पर मिल सकती है। ————————-