झाबुआ में पारा 43.8°C पहुंचा, लू का प्रकोप:सड़कों पर सन्नाटा; डॉक्टरों ने धूप से बचने, हाइड्रेटेड रहने की दी सलाह

झाबुआ में पिछले सात दिनों में तापमान में तेजी से वृद्धि दर्ज की गई है। अप्रैल के अंतिम हफ्ते में भीषण गर्मी और लू का असर देखा जा रहा है। इस दौरान अधिकतम तापमान में लगभग 3.6°C की बढ़ोतरी हुई है। हफ्ते की शुरुआत में तापमान 40.2°C (22 अप्रैल) था, जो धीरे-धीरे बढ़ता गया। 25 अप्रैल को पारा 41.8°C तक पहुंच गया। 26 और 27 अप्रैल को अधिकतम तापमान 43.8°C दर्ज किया गया, जो सप्ताह का सर्वाधिक था। इन दिनों में न्यूनतम तापमान भी 25.5°C से 26.0°C के बीच रहा, जिससे रातें भी गर्म रहीं। 24 अप्रैल को 40.4°C दर्ज किए गए तापमान में 48 घंटों के भीतर 3.4°C की वृद्धि हुई, और 26 अप्रैल को यह 43.8°C पर पहुंच गया। इस तीव्र वृद्धि ने आम जनजीवन को प्रभावित किया। हफ्ते की शुरुआत में न्यूनतम तापमान 20.6°C (24 अप्रैल) था, लेकिन हफ्ते के अंत तक इसमें 5 डिग्री से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। इससे रात के समय भी गर्मी से राहत मिलना मुश्किल हो गया। पिछले दो दिनों की तुलना में आज तापमान में कमी आज मंगलवार को अधिकतम तापमान 42.2°C दर्ज किया गया। यह पिछले दो दिनों की तुलना में थोड़ा कम है, लेकिन फिर भी सामान्य से काफी अधिक बना हुआ है। मौसम में इस अचानक बदलाव के कारण दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा देखा गया। डॉक्टरों ने बढ़ते तापमान और लू के मद्देनजर लोगों को हाइड्रेटेड रहने और दोपहर 12 से 4 बजे के बीच सीधे धूप में निकलने से बचने की सलाह दी है।
गुजरात निकाय चुनाव- 10,050 सीटों में 732 निर्विरोध चुने गए:भाजपा 712 पर आगे; कांग्रेस ने गांधीनगर जिला पंचायत सीट जीती

गुजरात में स्थानीय निकाय चुनावों के मंगलवार को वोटों की गिनती जारी है। 15 नगर निगम, 84 नगरपालिकाओं, 34 जिला पंचायतों और 260 तालुका पंचायतों के नतीजे आज घोषित किए जाएंगे। 10,050 सीटों में से 732 सीटों पर निर्विरोध चुनाव हुआ है, जिनमें भाजपा 712 सीटों पर आगे है। वहीं, गांधीनगर जिला पंचायत की भोयान सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार मंजुलाबेन ने 1374 वोटों से जीत दर्ज की है। गुजरात में 26 अप्रैल को रविवार को स्थानीय और नगर निकाय चुनाव के लिए मतदान हुआ था। निर्वाचन आयोग के अनुसार, 15 नगर निगमों में 55.1% मतदान हुआ। नगरपालिकाओं में 65.53%, जिला पंचायतों में 66.64% और तालुका पंचायतों में 67.26% वोटिंग दर्ज की गई। पिछले चुनाव में बीजेपी ने 8,470 में से 6,236 सीटें जीती थीं 2021 के स्थानीय चुनाव में BJP ने शानदार जीत हासिल की थी। पार्टी नगरपालिकाओं की 8,470 सीट में से 6,236 सीट जीती थीं। BJP ने तब सभी छह नगर निगमों के अलावा 81 नगरपालिकाओं, 32 जिला पंचायतों और 231 तालुका पंचायतों पर अपना दबदबा बनाए रखा था। वहीं, अहमदाबाद में ओवैसी की पार्टी AIMIM के 7 पार्षद चुने गए थे। आम आदमी पार्टी (AAP) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गुजरात की राजनीति में एक मजबूत तीसरी ताकत के रूप में एंट्री की थी। सूरत नगर निगम में आप ने 120 में से 27 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया था। AAP इस बार 5,000 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। अन्य उम्मीदवारों में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, एआईएमआईएम और निर्दलीय उम्मीदवार शामिल हैं। 2015 के चुनावों में भाजपा को पंचायतों में सबसे बड़ा झटका लगा था। कुल 31 में से भाजपा केवल 8 जिला पंचायतों में ही जीत हासिल कर सकी थी। वहीं कांग्रेस ने 23 जिला पंचायतों में अपना दबदबा कायम रखते हुए भाजपा के कमल को हरा दिया था। ——— ये खबर भी पढ़ें… गुजरात निकाय चुनाव में 57.8% वोटिंग:मतदान के दौरान हार्ट अटैक से जामनगर नगर निगम में AAP कैंडिडेट समेत 3 की मौत गुजरात में स्थानीय और नगर निकाय चुनाव के लिए मतदान हुआ। इसमें 57.08% मतदान दर्ज किया गया है। 15 नगर निगमों में 49%, 84 नगर निगमों में 58.12%, 34 जिला पंचायतों में 60.21% और 260 तालुका पंचायतों में 61% मतदान दर्ज किया गया। पूरी खबर पढ़ें…
शकीरा के शो से पहले क्रू मेंबर की मौत:ब्राजील में स्टेज तैयार करते समय हुआ हादसा, सिंगर ने दुख जताया

ब्राजील में सिंगर शकीरा के अपकमिंग कॉन्सर्ट की तैयारियों के दौरान एक हादसा हो गया। रविवार को शो के लिए स्टेज तैयार करते समय गैब्रियल डी जीसस फिरमिनो नाम का एक क्रू मेम्बर गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। कॉन्सर्ट के ऑर्गनाइजर्स ने इसकी पुष्टि की है। ब्राजील के रियो डी जनेरियो में शकीरा का यह कॉन्सर्ट 2 मई 2026 को होने वाला है। पीपल मैगजीन के अनुसार, यह हादसा रविवार दोपहर को हुआ, जब कर्मचारी शो के लिए स्ट्रक्चर तैयार करने वाली टीम का हिस्सा था। ऑर्गनाइजर्स ने इंस्टाग्राम पर एक बयान जारी किया, जिसमें बताया गया कि मृतक स्टेज बनाने का काम करता था और हादसे के बाद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। शकीरा ने दुख जताया वहीं, एंटरटेनमेंट वीकली के अनुसार, एक बयान में शकीरा ने कहा, ‘मैं गैब्रियल डी जीसस फिरमिनो के परिवार, दोस्तों और साथ काम करने वालों के लिए बहुत दुखी हूं।’ ऑर्गनाइजर्स ने बताया कि हादसे के तुरंत बाद घटनास्थल पर मौजूद फर्स्ट रिस्पॉन्डर्स ने शुरुआती मदद दी। इसके बाद फायर डिपार्टमेंट को बुलाया गया और घायल कर्मचारी को अस्पताल पहुंचाया गया। हालांकि, इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। स्टेट फायर डिपार्टमेंट के मुताबिक, हादसा लिफ्टिंग सिस्टम का इस्तेमाल करते समय हुआ। इस दौरान कर्मचारी के पैर बुरी तरह कुचल गए, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं। आयोजकों ने कहा कि पीड़ित के परिवार, संबंधित कंपनी और इस घटना से प्रभावित टीम के सदस्यों को हर संभव सहायता दी जा रही है।
4 माह का मासूम 3 फीट ऊंचे बेड से गिरा:चचेरी बहन की गोद से छूटा, इलाज के दौरान मौत, परिजनों ने पोस्टमार्टम से किया इनकार

इंदौर के आजाद नगर इलाके में एक दर्दनाक हादसे में 4 माह के मासूम की मौत हो गई। बच्चा अपनी 6 साल की चचेरी बहन की गोद से फिसलकर जमीन पर गिर गया था। गंभीर हालत में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। आजाद नगर थाना क्षेत्र के भील कॉलोनी में मंगलवार सुबह करीब साढ़े 9 बजे यह हादसा हुआ। 4 माह का रियाश अपनी 6 साल की चचेरी बहन की गोद में था। बच्ची उसे लेकर करीब 3 फीट ऊंचे बेड पर बैठी थी। इसी दौरान खेलते समय रियाश अचानक हाथ से छूटकर नीचे मुंह के बल गिर गया। गिरते ही बच्चे की सांसें थमने लगीं। घबराई बच्ची ने तुरंत इसकी जानकारी परिजनों को दी। उस समय मां बाथरूम में थी। बाहर आकर उसने सास और अन्य परिजनों को बताया, जिसके बाद सभी उसे तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे। परिजन बच्चे को एमवाय अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। परिवार ने बच्चे का पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया है। परिजनों के मुताबिक हादसे के वक्त मां और दादी घर के काम में व्यस्त थीं। बच्ची रियाश को खिलाने के लिए गोद में लेकर आई थी। रियाश का एक 4 साल का बड़ा भाई भी है। पिता राजकुमार निजी कंपनी में काम करते हैं।
फोटो-ऑप के बाद वापस लौटे वाहन: कर्नाटक की स्वावलंबी सारथी योजना पर विवाद | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:28 अप्रैल, 2026, 10:26 IST जबकि सरकार ने इसे ‘प्रतीकात्मक कार्यक्रम’ कहा, भाजपा ने कल्याण का झांसा देने का आरोप लगाया, क्योंकि कार्यक्रम में प्रदर्शित वाहनों को कथित तौर पर शोरूम में वापस भेज दिया गया था। यह योजना कैब और माल वाहन खरीदने के लिए उच्च सब्सिडी की पेशकश करके सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित समुदायों के बीच स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन की गई थी। (एक्स) कर्नाटक की स्वावलंबी सारथी स्व-रोज़गार योजना पर एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है, जब आरोप सामने आए कि ओबीसी, एससी/एसटी और अल्पसंख्यक युवाओं के लिए कल्याण कार्यक्रम के हिस्से के रूप में प्रदर्शित किए गए वाहनों को आधिकारिक लॉन्च कार्यक्रम के कुछ ही घंटों बाद शोरूम में वापस कर दिया गया था। मार्च 2025 के राज्य बजट में घोषित इस योजना को कैब और माल वाहन खरीदने के लिए उच्च सब्सिडी की पेशकश करके सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित समुदायों के बीच स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किया गया था। पहल के तहत, लाभार्थियों को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से वित्तीय सहायता प्राप्त होने की उम्मीद है ताकि वे वाहन खरीद सकें और परिवहन और रसद क्षेत्रों में आजीविका के अवसर पैदा कर सकें। हालाँकि, उन रिपोर्टों के बाद विवाद छिड़ गया, जिनमें दावा किया गया था कि 26 मार्च को कार्यक्रम स्थल पर लाई गई कई कारों और वाणिज्यिक वाहनों को कार्यक्रम के बाद कथित तौर पर शोरूम में वापस ले जाया गया था, जिससे यह सवाल उठने लगा कि क्या वितरण वास्तव में हुआ था या एक औपचारिक प्रदर्शन के रूप में किया गया था। कल्याण लॉन्च या फोटो-ऑप अभ्यास?स्वावलंबी सारथी योजना के तहत ओबीसी, एससी/एसटी और अल्पसंख्यक युवाओं के लिए प्रदर्शित वाहनों को कथित तौर पर आधिकारिक कार्यक्रम के कुछ घंटों के भीतर शोरूम में वापस भेज दिया गया था। मंत्री कहते हैं कि यह केवल प्रतीकात्मक था, बाद में लाभ देने का वादा किया। #कर्नाटक pic.twitter.com/In3h8uW5DQ – हरीश उपाध्या (@हरिशुपाध्या) 27 अप्रैल 2026 घटना के एक महीने बाद जैसे ही मामले ने तूल पकड़ा, आरोपों का जवाब देते हुए, पिछड़ा वर्ग विकास मंत्री शिवराज तंगदागी ने स्वीकार किया कि वाहन केवल प्रदर्शन के उद्देश्य से लाए गए थे और इस घटना को प्रतीकात्मक बताया। उन्होंने कहा, “हम उन वाहनों को कार्यक्रम के लिए लाए हैं। हमने लाभार्थियों की सूची तैयार कर ली है, और डीबीटी होगी, और हम उन्हें वाहन देंगे। हमारे पास लाभार्थियों की सूची है। हमने कार्यक्रम थोड़ा पहले आयोजित किया क्योंकि हमें मुख्यमंत्री के साथ तारीखें नहीं मिल सकीं। अगले कुछ दिनों में, हमें शोरूम से वाहनों की सूची प्राप्त होगी।” तंगादगी ने कहा कि योजना का कार्यान्वयन अभी भी चल रहा है और जोर देकर कहा कि लाभार्थियों को अनुमोदित प्रक्रिया के अनुसार जल्द ही वाहन प्राप्त होंगे। विभाग के अधिकारियों ने कहा कि कार्यक्रम औपचारिक रूप से पहल शुरू करने और योजना के तहत वितरित किए जाने वाले वाहनों के प्रकार को प्रदर्शित करने के लिए आयोजित किया गया था। हालाँकि, विपक्षी भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला किया और उस पर वास्तविक लाभ पहुंचाने के बजाय प्रचार करने का आरोप लगाया। भाजपा नेता अशोक गौड़ा ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के पास कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने के लिए धन की कमी है और वह प्रतीकात्मक घोषणाओं का सहारा ले रही है। उन्होंने कहा, “कांग्रेस सरकार का खजाना खाली हो गया है। उनके पास कल्याणकारी योजनाओं का समर्थन करने के लिए धन नहीं है। यहां जो हुआ उससे पता चलता है कि यह केवल एक फोटो-ऑप था।” स्वावलंबी सारथी योजना को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अल्पसंख्यक समुदायों के बेरोजगार युवाओं को लक्षित करने वाली एक प्रमुख कल्याणकारी पहल के रूप में देखा जाता है, जिसका लक्ष्य सब्सिडी वाले वाहन स्वामित्व के माध्यम से आजीविका में सुधार और बेरोजगारी को कम करना है। सरकार ने अपनी व्यापक कल्याण प्रतिबद्धताओं के हिस्से के रूप में कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण बजटीय आवंटन का संकेत दिया था। मंत्री द्वारा इस वादे के साथ कि लाभार्थियों की सूची तैयार है और शोरूमों से वाहन विवरण जल्द ही सत्यापित किया जाएगा, इस प्रकरण ने राजनीतिक टकराव पैदा कर दिया है, विपक्ष ने योजना के तहत आवंटन, लाभार्थी चयन और वास्तविक वाहन वितरण पर पारदर्शिता की मांग की है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 28 अप्रैल, 2026, 10:26 IST समाचार राजनीति फोटो-ऑप के बाद वापस लौटे वाहन: कर्नाटक की स्वावलंबी सारथी योजना पर विवाद अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)स्वावलंबी सारथी योजना(टी)कर्नाटक स्वरोजगार योजना(टी)ओबीसी एससी एसटी अल्पसंख्यक कल्याण(टी)वाहन सब्सिडी कार्यक्रम(टी)डीबीटी लाभार्थी विवाद(टी)कांग्रेस सरकार कल्याण(टी)भाजपा विपक्ष की आलोचना(टी)कर्नाटक राजनीतिक विवाद
Jabalpur Heat Relief Soon | Al-Nino Worsens Mercury Near 44°C

जबलपुर में अप्रैल के अंतिम दिनों में भीषण गर्मी पड़ रही है। अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच गया है, जिससे दिन में लू जैसे हालात बने हुए हैं। मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों में हल्के उतार-चढ़ाव के साथ आंशिक राहत के संकेत दिए हैं। . सोमवार को शहर में गर्मी चरम पर रही, जहां तापमान लगभग 43°C तक पहुंच गया। यह सामान्य से अधिक दर्ज किया गया, जिससे लोगों को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ा। मंगलवार को जबलपुर में अधिकतम तापमान 42-43°C और न्यूनतम तापमान 26-28°C रहने का अनुमान है। आसमान साफ रहेगा और दोपहर में तेज धूप के कारण हीटवेव की स्थिति बनी रह सकती है। गुरुवार तक बादल छाने की संभावना, गिरेगा पारा बुधवार को तापमान 40 से 41°C और आंशिक बादल छाए रहने की संभावना है। गुरुवार को तापमान 42°C के साथ हल्के बादल दिख सकते हैं, जबकि शुक्रवार को तापमान 43°C तक पहुंचने के साथ गर्मी में फिर बढ़ोतरी होगी। मौसम में हल्का उतार-चढ़ाव रहेगा, लेकिन फिलहाल तेज गर्मी से बड़ी राहत की उम्मीद कम है। अप्रैल के शुरुआती दिनों में अधिकतम तापमान 37°C था, जो महीने के अंतिम सप्ताह में बढ़कर 44°C तक पहुंच गया है। इस तरह लगभग 5-6 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अलनीनो के असर से बढ़ा तापमान इस साल अलनीनो प्रभाव के कारण तापमान सामान्य से अधिक बना हुआ है। दिन और रात दोनों का तापमान सामान्य से ऊपर दर्ज किया जा रहा है, जिससे लू के दिनों में वृद्धि हुई है और बारिश की गतिविधियां कमजोर पड़ रही हैं। देश के कई हिस्सों की तरह मध्य प्रदेश में भी हीटवेव की स्थिति इसी कारण मजबूत बनी हुई है। जबलपुर में फिलहाल गर्मी से बड़ी राहत के कोई संकेत नहीं हैं। अलनीनो के प्रभाव के कारण इस साल अप्रैल के अंत में ही मई जैसी भीषण गर्मी महसूस हो रही है।
तेजप्रताप बोले- बाबा मेरा राजनीतिक भविष्य देख लीजिएगा:बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री के साथ सामने आई VIDEO चैट, मांगा आशीर्वाद

‘जनशक्ति जनता दल’ (JJD) के नेता तेज प्रताप यादव और बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बीच वीडियो कॉल पर हुई बातचीत का एक वीडियो सामने आया है। बातचीत में तेज प्रताप यादव ने धीरेंद्र शास्त्री से अपने राजनीतिक भविष्य के बारे में पूछा। वीडियो इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि तेज प्रताप यादव पहले धीरेंद्र शास्त्री के मुखर आलोचक रहे हैं। उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री को ‘डरपोक’ और ‘देशद्रोही’ जैसे शब्दों से संबोधित किया था। अब उनकी यह बातचीत बिहार के राजनीतिक और धार्मिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। तेज प्रताप बोले- बाबा मेरा राजनीतिक देख लीजिएगा वीडियो में तेज प्रताप यादव धीरेंद्र शास्त्री से कहते हैं, “बाबा मेरा राजनीतिक देख लीजिएगा, राजनीतिक…” इसके जवाब में धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, “बिलकुल पक्का! हम और आप बैठेंगे, जब आप यहां आएंगे”। तेज प्रताप यादव ने इस पर सहमति जताई और धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि वे एक-दो घंटे साथ बैठेंगे। 2023 में दी थी कड़ी चेतावनी साल 2023 में जब धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पटना के नौबतपुर में कथा करने वाले थे, तब तेज प्रताप यादव ने कड़ा विरोध जताया था। उन्होंने कहा था कि बिहार गांधी और बुद्ध की धरती है। यहां अगर कोई हिंदू-मुस्लिम को लड़ाने आएगा तो उसे वापस लौटना होगा। तेज प्रताप ने यहां तक कह दिया था कि जरूरत पड़ी तो वे पटना एयरपोर्ट का घेराव करेंगे। उस वक्त उनका यह बयान काफी सुर्खियों में था और इसे धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ खुली चेतावनी माना गया था। हम बहुत बड़े बाबा हैं…वाला बयान भी हुआ था वायरल इसी दौरान वन एवं पर्यावरण मंत्री रहते हुए तेज प्रताप यादव ने एक कार्यक्रम में बिना नाम लिए धीरेंद्र शास्त्री पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था,‘बहुत बाबा आए, लेकिन हम बहुत बड़े बाबा हैं। हम जमीन से लेकर पाताल तक नाप देंगे।’ राम रहीम और आसाराम से की थी तुलना तेज प्रताप यादव ने एक एजेंसी में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की तुलना राम रहीम और आसाराम बापू से भी की थी। उन्होंने कहा था कि धीरेंद्र शास्त्री भी वैसे ही बाबा हैं, जैसे राम रहीम और आसाराम।
सन फार्मा 1 लाख करोड़ में अमेरिकी कंपनी 'ऑर्गेनॉन' खरीदेगी:इसकी कई महंगी पेटेंट दवाएं भी बेचेगी, पूरा सौदा नगद में होगा

भारत की सबसे बड़ी दवा कंपनी सन फार्मा अमेरिका (न्यू जर्सी) की दिग्गज कंपनी ऑर्गेनॉन को 1.10 लाख करोड़ रुपए में खरीदेगी। यह किसी भी भारतीय दवा कंपनी द्वारा किया जाने वाला अब तक का सबसे बड़ा विदेशी सौदा है। डील को लेकर दोनों कंपनियों ने सोमवार को संयुक्त बयान जारी किया। इसके तहत सन फार्मा ऑर्गेनॉन के सभी बकाया शेयर 14 डॉलर प्रति शेयर की कीमत पर खरीदेगी। पूरा सौदा नकद में होगा। इससे सन फार्मा दुनिया की टॉप-25 दवा कंपनियों में शामिल हो जाएगी। उसकी पहुंच 150 देशों में होगी। दुनिया की 7वीं बड़ी कंपनी बन जाएगी सनफार्मा बायोसिमिलर्स जैविक दवाओं वाली यह दुनिया की 7वीं बड़ी कंपनी बन जाएगी। 900-900 करोड़ रुपए राजस्व वाले 18 बड़े बाजार उसके पास होंगे। डील में ऑर्गेनॉन का 81 हजार करोड़ रु. का कर्ज भी शामिल है। हालांककि सन फार्मा का कहना है कि डील के बाद दोनों कंपनियों का संयुक्त राजस्व 1.16 लाख करोड़ रुपए होगा। सौदा 2027 में पूरा होने की उम्मीद है। जानें इस डील से जुड़ी सवालों के जवाब सवाल 1: दुनिया में सन फार्मा की स्थिति क्या है? जवाब: यह दुनिया की सबसे बड़ी जेनेरिक दवा बनाने की कंपनियों में से एक है। इसकी मार्केट वैल्यू 4 लाख करोड़ रु. है। वैश्विक स्तर पर 2 हजार से ज्यादा प्रोडक्ट हैं। 5 महाद्वीपों में 41 अत्याधुनिक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं। 100 से अधिक देशों में कारोबार फैला है। सवाल 2: ऑर्गेनॉन कितनी बड़ी फार्मा कंपनी है? जवाब: 28 हजार करोड़ रुपए की मार्केट वैल्यू वाली ऑर्गेनॉन 2021 में दवा जगत की दिग्गज मर्क एंड कंपनी से अलग होकर बनी थी। आज चीन, अमेरिका, कनाडा, यूरोप, ब्राजील समेत 140 देशों में इसका बाजार है। 10 हजार कर्मचारी हैं। इनके पास महिला स्वास्थ्य एवं सामान्य दवाओं के क्षेत्र में 70 से अधिक प्रोडक्ट का पोर्टफोलियो है। इनमें सबसे प्रमुख है नेक्सप्लानन, जो गर्भनिरोधक इम्प्लांट है। ये 60 देशों में ऑर्गेनॉन बेचती है। सवाल 3: भारत दुनिया की फार्मेसी क्यों है? जवाब: अमेरिकी जेनेरिक बाजार में भारतीय दवाओं हिस्सेदारी 40% तो यूरोप में 25% है। अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली हर 3 में से एक दवा भारतीय कंपनी की है। यहां पिछले साल भारत से 99 हजार करोड़ रु. की दवाएं भेजी गईं। दोनों बाजारों में सन फार्मा, ऑरोबिंदो, डॉ. रेड्डीज, ल्यूपिन बड़ी हिस्सेदार हैं। सवाल 4: सन फार्मा देश की नंबर वन कंपनी कैसे बनी? जवाब: सन फार्मा 16 साल में छह अधिग्रहण कर चुकी है। 2013 में रेनबैक्सी देश में नंबर वन थी, लेकिन 2014 में सन फार्मा ने अधिग्रहण कर लिया। 2025 में अमेरिकी बायोफार्मा कंपनी चेकपॉइंट थेराप्यूटिक्स के अधिग्रहण से कंपनी की वैश्विक धाक जमीं। 10 हजार रुपए उधार लेकर शुरू की थी कंपनी सन फार्मा के संस्थापक दिलीप सांघवी (71) मूल रूप से गुजरात के अमरेली जिले के हैं। अभी पूरा परिवार मुंबई में रहता है। इनके शुरुआती दिनों का एक किस्सा है। दरअसल, 1983 में दिलीप ने दवा कारोबारी पिता शांतिलाल से 10 हजार रुपए उधार लेकर 5 दोस्तों के साथ एक कमरे में सन फार्मा की नींव रखी। तब वे खुद सेल्समैन थे। एमआर की तरह डॉक्टरों के पास जाकर दवाएं समझाते थे। 1993 में दिलीप ने सिजोफ्रेनिया की दवा क्लोजापाइन लॉन्च करने की योजना बनाई। तभी पता चला कि प्रतिद्वंद्वी कंपनी सैंडोज भी इसे 22 शहरों में लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। सांघवी ने रणनीति बदली और डेडलाइन से तीन हफ्ते ही दवा लॉन्च कर दी। देश के लिए गौरव; फाइजर जैसी कंपनी की लीग में होगी सन फार्मा चॉइस इंस्टीट्यूशनल इक्विटी के जमैत्री सेठ कहते हैं कि ऑर्गेनॉन अपने साथ 58 हजार करोड़ रुपए का राजस्व लेकर आएगी। डील दिखाती है कि भारतीय कंपनियां अब अमेरिकी और यूरोपीय कंपनियों को खरीदने की वित्तीय ताकत रखती हैं। इससे सन फार्मा फाइजर और नोवार्टिस जैसी कंपनियों की लीग में खड़ी होगी। भारत इनोवेटिव और स्पेशलिटी दवाओं के क्षेत्र में भी एक वैश्विक शक्ति बन सकता है। हालांकि अभी इस सौदे को कई देशों के नियामक प्राधिकरणों से मंजूरी लेनी होगी। अमेरिका में फेडरल ट्रेड कमीशन इस सौदे की बारीकी से जांच करेगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा कम न हो।
सन फार्मा 1 लाख करोड़ में अमेरिकी कंपनी 'ऑर्गेनॉन' खरीदेगी:इसकी कई महंगी पेटेंट दवाएं भी बेचेगी, पूरा सौदा नगद में होगा

भारत की सबसे बड़ी दवा कंपनी सन फार्मा अमेरिका (न्यू जर्सी) की दिग्गज कंपनी ऑर्गेनॉन को 1.10 लाख करोड़ रुपए में खरीदेगी। यह किसी भी भारतीय दवा कंपनी द्वारा किया जाने वाला अब तक का सबसे बड़ा विदेशी सौदा है। डील को लेकर दोनों कंपनियों ने सोमवार को संयुक्त बयान जारी किया। इसके तहत सन फार्मा ऑर्गेनॉन के सभी बकाया शेयर 14 डॉलर प्रति शेयर की कीमत पर खरीदेगी। पूरा सौदा नकद में होगा। इससे सन फार्मा दुनिया की टॉप-25 दवा कंपनियों में शामिल हो जाएगी। उसकी पहुंच 150 देशों में होगी। दुनिया की 7वीं बड़ी कंपनी बन जाएगी सनफार्मा बायोसिमिलर्स जैविक दवाओं वाली यह दुनिया की 7वीं बड़ी कंपनी बन जाएगी। 900-900 करोड़ रुपए राजस्व वाले 18 बड़े बाजार उसके पास होंगे। डील में ऑर्गेनॉन का 81 हजार करोड़ रु. का कर्ज भी शामिल है। हालांककि सन फार्मा का कहना है कि डील के बाद दोनों कंपनियों का संयुक्त राजस्व 1.16 लाख करोड़ रुपए होगा। सौदा 2027 में पूरा होने की उम्मीद है। जानें इस डील से जुड़ी सवालों के जवाब सवाल 1: दुनिया में सन फार्मा की स्थिति क्या है? जवाब: यह दुनिया की सबसे बड़ी जेनेरिक दवा बनाने की कंपनियों में से एक है। इसकी मार्केट वैल्यू 4 लाख करोड़ रु. है। वैश्विक स्तर पर 2 हजार से ज्यादा प्रोडक्ट हैं। 5 महाद्वीपों में 41 अत्याधुनिक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं। 100 से अधिक देशों में कारोबार फैला है। सवाल 2: ऑर्गेनॉन कितनी बड़ी फार्मा कंपनी है? जवाब: 28 हजार करोड़ रुपए की मार्केट वैल्यू वाली ऑर्गेनॉन 2021 में दवा जगत की दिग्गज मर्क एंड कंपनी से अलग होकर बनी थी। आज चीन, अमेरिका, कनाडा, यूरोप, ब्राजील समेत 140 देशों में इसका बाजार है। 10 हजार कर्मचारी हैं। इनके पास महिला स्वास्थ्य एवं सामान्य दवाओं के क्षेत्र में 70 से अधिक प्रोडक्ट का पोर्टफोलियो है। इनमें सबसे प्रमुख है नेक्सप्लानन, जो गर्भनिरोधक इम्प्लांट है। ये 60 देशों में ऑर्गेनॉन बेचती है। सवाल 3: भारत दुनिया की फार्मेसी क्यों है? जवाब: अमेरिकी जेनेरिक बाजार में भारतीय दवाओं हिस्सेदारी 40% तो यूरोप में 25% है। अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली हर 3 में से एक दवा भारतीय कंपनी की है। यहां पिछले साल भारत से 99 हजार करोड़ रु. की दवाएं भेजी गईं। दोनों बाजारों में सन फार्मा, ऑरोबिंदो, डॉ. रेड्डीज, ल्यूपिन बड़ी हिस्सेदार हैं। सवाल 4: सन फार्मा देश की नंबर वन कंपनी कैसे बनी? जवाब: सन फार्मा 16 साल में छह अधिग्रहण कर चुकी है। 2013 में रेनबैक्सी देश में नंबर वन थी, लेकिन 2014 में सन फार्मा ने अधिग्रहण कर लिया। 2025 में अमेरिकी बायोफार्मा कंपनी चेकपॉइंट थेराप्यूटिक्स के अधिग्रहण से कंपनी की वैश्विक धाक जमीं। 10 हजार रुपए उधार लेकर शुरू की थी कंपनी सन फार्मा के संस्थापक दिलीप सांघवी (71) मूल रूप से गुजरात के अमरेली जिले के हैं। अभी पूरा परिवार मुंबई में रहता है। इनके शुरुआती दिनों का एक किस्सा है। दरअसल, 1983 में दिलीप ने दवा कारोबारी पिता शांतिलाल से 10 हजार रुपए उधार लेकर 5 दोस्तों के साथ एक कमरे में सन फार्मा की नींव रखी। तब वे खुद सेल्समैन थे। एमआर की तरह डॉक्टरों के पास जाकर दवाएं समझाते थे। 1993 में दिलीप ने सिजोफ्रेनिया की दवा क्लोजापाइन लॉन्च करने की योजना बनाई। तभी पता चला कि प्रतिद्वंद्वी कंपनी सैंडोज भी इसे 22 शहरों में लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। सांघवी ने रणनीति बदली और डेडलाइन से तीन हफ्ते ही दवा लॉन्च कर दी। देश के लिए गौरव; फाइजर जैसी कंपनी की लीग में होगी सन फार्मा चॉइस इंस्टीट्यूशनल इक्विटी के जमैत्री सेठ कहते हैं कि ऑर्गेनॉन अपने साथ 58 हजार करोड़ रुपए का राजस्व लेकर आएगी। डील दिखाती है कि भारतीय कंपनियां अब अमेरिकी और यूरोपीय कंपनियों को खरीदने की वित्तीय ताकत रखती हैं। इससे सन फार्मा फाइजर और नोवार्टिस जैसी कंपनियों की लीग में खड़ी होगी। भारत इनोवेटिव और स्पेशलिटी दवाओं के क्षेत्र में भी एक वैश्विक शक्ति बन सकता है। हालांकि अभी इस सौदे को कई देशों के नियामक प्राधिकरणों से मंजूरी लेनी होगी। अमेरिका में फेडरल ट्रेड कमीशन इस सौदे की बारीकी से जांच करेगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा कम न हो।
Jaskeerat Singh Humboldt Crash Driver Deportation Stayed

जसकीरत सिंह सिद्धू को ले जाते हुए पुलिस। फाइल फोटो कनाडा के मशहूर हंबोल्ट ब्रोंकोस बस हादसे के गुनहगार पंजाब मूल के ट्रक ड्राइवर जसकीरत सिंह सिद्धू को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सोमवार सुबह उन्हें भारत डिपोर्ट किया जाना था, लेकिन रवानगी से 2 दिन पहले फेडरल कोर्ट ने इस पर इमरजेंसी रोक लगा दी है। . कनाडा की मीडिया रिपोट्स के अनुसार जस्टिस जोसलिन गाग्ने ने यह आदेश तब दिया जब जसकीरत सिंह सिद्धू के वकील ने कनाडा बॉर्डर सर्विस एजेंसी के फैसले को कोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने अगले आदेशों तक जसकीरत सिंह की डिपोर्टेशन पर रोक लगा दी। दरअसल मूल रूप से संगरूर के रहने वाले ट्रक ड्राइवर के कारण कनाडा के हंबोल्ट ब्रोंकेस में एक रोड एक्सीडेंट हुआ, जिसमें 16 लोगों की मौत हो गई थी और 13 गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस मामले में जसकीरत सिंह को 8 साल की सजा हुई, जिसके बाद कनाडा बॉर्डर सर्विस एजेंसी ने उसे डिपोर्ट करने का आदेश जारी किया था। आरोपी को कोर्ट से लाते हुए कनाडा पुलिस। फेडरल कोर्ट में जसकीरत सिंह सिद्धू की याचिका पर दी गई दलीलें… जसकीरत के वकील (माइकल ग्रीन) की दलीलें 25 अप्रैल को फेडरल कोर्ट में हुई सुनवाई में दोनों पक्षों के बीच बहस हुई। कोर्ट इस बात की समीक्षा कर रहा है कि क्या जसकीरत को ‘मानवीय आधार’ पर रुकने का मौका दिया जाना चाहिए। दरअसल सिद्धू के वकील माइकल ग्रीन ने कोर्ट में सबसे बड़ी दलील उनके एक साल के बेटे की सेहत को लेकर दी। बच्चे को दिल और फेफड़ों की गंभीर बीमारी है। वकील ने कहा कि भारत की खराब हवा बच्चे के स्वास्थ्य के लिए जानलेवा हो सकती है। वकील ने तर्क दिया कि हादसे से पहले जसकीरत का रिकॉर्ड एकदम बेदाग था और उन्होंने जेल में अपने किए का गहरा पश्चाताप किया है। सरकारी पक्ष और कानून की दलील: सरकारी वकील ने कोर्कट में दलील दी है कि कि कनाडा के कानून के मुताबिक, अगर किसी पीआर (PR) होल्डर को 6 महीने से ज्यादा की जेल होती है, तो वह देश में रहने का हक खो देता है। जसकीरत को 8 साल की सजा हुई है, इसलिए उन्हें डिपोर्ट करना अनिवार्य है। सरकारी वकील ने दलील दी है कि जिसकी लापरवाही से 16 लोगों की जान चली गई और 13 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। उसे कनाडा में रहने का कोई हक नहीं है। यहीं नहीं सरकारी वकील ने ये भी दलील दी है कि अगर जसकीरत सिंह सिद्धू को अपने बच्चों से अलग नहीं होना तो वो उन्हें लेकर भी जा सकता है। अगर भारत में उन्हें परेशानी है तो वो यहां रह सकते हैं। कनाडा में 2018 में हुए सड़क हादसे की तस्वीर। फाइल फोटो मृतकों के परिजनों की कोर्ट से गुहार… टोबी बाउलेट (मृतक खिलाड़ी लोगन बाउलेट के पिता): टोबी बाउलेट ने कोर्ट में स्पष्ट कहा— “जसकीरत सिंह सिद्धू को डिपोर्ट करना कोई अतिरिक्त सजा नहीं है, बल्कि यह कनाडा के कानून का हिस्सा है। कानून स्पष्ट है कि यदि आप अपराधी हैं, तो आप इस देश में रहने का हक खो देते हैं। हर बार नई अपील और नई तारीख हमारे जख्मों को फिर से कुरेद देती है।” क्रिस जोसेफ (मृतक खिलाड़ी जेसन जोसेफ के पिता): क्रिस जोसेफ ने भावुक होते हुए कोर्ट से पूछा— “अदालत में बार-बार सिद्धू के परिवार और उनके बच्चों की दुहाई दी जा रही है। लेकिन उन 16 पिताओं के बारे में किसने सोचा जिन्होंने अपने जवान बेटों के जनाजे उठाए? मेरे बेटे का भविष्य छीन लिया गया। सिद्धू का परिवार उनके साथ है, लेकिन हमारे बच्चे कभी वापस नहीं आएंगे। हम सिर्फ यह चाहते हैं कि कानून अपना काम करे।” लापरवाही ने ले ली थी रोड एक्सीडेंट में 16 लोगों की जान ट्रक ड्राइवर जसकीरत सिंह की लापरवाही के कारण 6 अप्रैल 2018 को रोड एक्सीडेंट हुआ। जसकीरत सिंह ने ‘स्टॉप साइन’ को नजरअंदाज किया और ट्रक की रफ्तार कम नहीं की। ट्रक सीधे ‘हंबोल्ट ब्रोंकोस’ जूनियर हॉकी टीम की बस से टकरा गया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस के तीन टुकड़े हो गए। इस हादसे में 16 लोगों की मौत हो गई और 13 लोग घायल हुए। पूरे कनाडा में शोक की लहर दौड़ गई थी। जसकीरत ने अपना गुनाह कबूल किया और उसे 8 साल जेल की सजा सुनाई गई। 2023 में उन्हें जेल से पैरोल मिली। जसकीरत का पंजाब से कनाडा तक का सफर जसकीरत मूल रूप से पंजाब के संगरूर जिले के रहने वाला है। उसके पिता पंजाब में किसान हैं और परिवार के पास करीब 50 एकड़ खेती की जमीन है। जसकीरत ने पंजाब से बी.कॉम की डिग्री ली और साल 2014 में अपनी पत्नी के साथ स्थायी निवासी (PR) के तौर पर कनाडा शिफ्ट हुए थे। जसकीरत सिंह ट्रक चलाता था। केस की टाइम लाइन 6 अप्रैल 2018: भीषण बस हादसा हुआ। 16 घरों के चिराग बुझ गए। 22 मार्च 2019: कोर्ट ने जसकीरत को 8 साल जेल की सजा सुनाई। जनवरी 2023: अच्छे बर्ताव के कारण उन्हें जेल से पैरोल पर रिहा किया गया। 24 मई 2024: इमिग्रेशन बोर्ड ने उनका पीआर स्टेटस रद्द कर डिपोर्ट करने का आदेश दिया। 4 फरवरी 2026: सरकार ने उनकी अंतिम अपील ठुकरा दी और 27 अप्रैल का दिन रवानगी के लिए तय किया। 25 अप्रैल 2026: रवानगी से दो दिन पहले फेडरल कोर्ट ने डिपोर्टेशन पर ‘स्टे’ (रोक) लगा दिया। अब आगे क्या? जसकीरत के वकील के मुताबिक, यह रोक 1 से 8 महीने तक रह सकती है। अब फेडरल कोर्ट विस्तार से इस बात की जांच करेगा कि क्या मानवीय आधार पर उनके निर्वासन को टाला जा सकता है। फिलहाल, जसकीरत की भारत रवानगी पर ब्रेक लग गया है। एक संघीय न्यायाधीश ने हंबोल्ट ब्रोंकोस (Humboldt Broncos) बस दुर्घटना के लिए जिम्मेदार ट्रक ड्राइवर को आखिरी क्षणों में बड़ी राहत दी है, जिससे उनकी भारत वापसी पर फिलहाल रोक लग गई है। जसकीरत सिंह सिद्धू के वकीलों ने शुक्रवार को फेडरल कोर्ट में अपील की थी ताकि सोमवार सुबह होने वाले उनके निर्वासन (deportation) को रोका जा सके। मामले का विवरण दुर्घटना: अप्रैल 2018 में, कैलगरी के नौसिखिया ट्रक ड्राइवर सिद्धू ने






